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कालीचरण महाराज की जमानत को छत्तीसगढ़ कोर्ट ने किया खारिज, 13 जनवरी तक रहेंगे जेल में: ‘धर्म संसद’ विवाद में अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित ‘धर्म संसद’ में महात्मा गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए कालीचरण महाराज (Kalicharan Maharaj) को राहत नहीं मिली। रायपुर की जिला अदालत ने सोमवार (3 जनवरी 2022) को करीब डेढ़ घंटे तक वकीलों की दलील सुनने के बाद आवेदन को खारिज कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराज को रायपुर की जेल में 13 जनवरी तक की न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

रायपुर कोर्ट में 12th ADJ विक्रम चंद्रा की अदालत में उनकी जमानत याचिका की सुनवाई हुई। इस दौरान कालीचरण महाराज के वकील पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराते रहे, लेकिन अदालत ने उनकी एक नहीं सुनी। जानकारी के मुताबिक, महाराज की जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। लीगल टीम इसकी तैयारी में जुट चुकी है।

बता दें कि कालीचरण महाराज के खिलाफ छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र के पुणे में भी मामला दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र पुलिस ने उनके ट्रांजिट रिमांड के लिए आवेदन दिया है, जिसकी सुनवाई मंगलवार (4 दिसंबर 2022) को होगी। अदालत से अनुमति मिलने के बाद महाराष्ट्र पुलिस पूछताछ के लिए उन्हें अपने साथ लेकर जाएगी।

बीते दिनों रायपुर पुलिस ने उन्हें मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया था। कालीचरण महाराज पर आरोप है कि उन्होंने 26 दिसंबर 2021 को रायपुर के रावण भाटा मैदान में आयोजित ‘धर्म संसद’ में महात्मा गाँधी को लेकर अपमानजनक बात ही थी।

कालीचरण महाराज ने महात्मा गाँधी की हत्या को जायज ठहराते हुए उनकी हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को नमन किया था। कथित तौर पर उन्होंने मंच से कॉन्ग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए हिंदू नेता चुनने की बात भी श्रोताओं से कही थी। इसके अलावा, उन्होंने इस्लाम को लेकर कहा था कि मुस्लिम देश पर कब्जा करना चाहते हैं।

‘चुप क्यों हैं PM मोदी? क्या यही है सबका साथ?’: गीतकार से ट्रोल बने जावेद अख्तर ने ‘बुल्ली बाई’ को धर्म संसद से जोड़ा

बॉलीवुड में कहानीकार से गीतकार और फिर ट्विटर ट्रोल तक का सफर करने वाले जावेद अख्तर ने एक बार फिर से हिन्दू धर्म और भाजपा को लेकर अपनी खुन्नस निकाली है। अपनी ताज़ा ट्वीट में जावेद अख्तर ने कहा, “जहाँ एक तरफ सैकड़ों महिलाओं की ऑनलाइन बोली लगाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ धर्म संसद जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। इनमें भारतीय सेना, पुलिस और जनता को लगभग 20 करोड़ लोगों के नरसंहार के लिए उकसाया जा रहा है।”

जावेद अख्तर ने कहा कि वो खुद सहित अन्य लोगों की इस पर चुप्पी से काफी चकित हैं, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। साथ ही जावेद अख्तर ने पूछा कि क्या यही ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ है? इससे पहले भी उन्होंने धर्म संसद और ऑनलाइन मुस्लिम महिलाओं की नीलामी के आरोप को जोड़ते हुए कहा था कि धर्म संसदों ने इसकी पुष्टि की है कि एक एक कायर से ज्यादा कोई दूसरों की पीड़ा में ख़ुशी लेने वाला और विकृत नहीं हो सकता है।

जावेद अख्तर ने दावा किया कि ऐसे लोगों के पास इतनी हिम्मत इसीलिए आती है, क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। इससे पहले उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के उस बयान को रीट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने हरिद्वार धर्म संसद के आरोपितों को UAPA के तहत गिरफ्तार करने की माँग की थी। सिब्बल ने पूछा था कि इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुप क्यों हैं? इससे पहले उन्होंने उर्दू भाषा की आलोचना पर भी आपत्ति जताई थी।

बता दें कि उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित किए गए धर्म संसद में 2 FIR दर्ज की जा चुकी है, जिसमें डासना मंदिर के महंत नरसिंहानंद सरस्वती और वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी बने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष का नाम शामिल है। दूसरे FIR में 10 नामजद हैं। इस आयोजन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, महात्मा गाँधी और मुस्लिमों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप हैं। 5 सदस्यीय SIT इसकी जाँच कर रही है। हिन्दू महासभा की सचिव अन्नपूर्णा माँ और सिंधु सागर महाराज पर भी भड़काऊ बयान देने के आरोप लगे हैं।

CM हिमंता ने दी कर्मचारियों को विशेष छुट्टियों का तोहफा: कहा- बुजुर्ग माता-पिता संग समय बिताएँ, वृद्धाश्रम न भेजने का किया था आग्रह

असम सरकार ने अपने कर्मचारियों को नववर्ष का तोहफा विशेष छुट्टियों के तौर पर दिया है। सरकार ने 2022 के जनवरी के पहले सप्ताह में चार दिन की विशेष छुट्टियाँ दी हैं, ताकि वे इन छुट्टियाँ में कर्मचारी अपने परिजनों के साथ समय बिता सकें। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर कर्मचारियों से इस छुट्टी का उपयोग अपने परिजनों और संबंधियों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय व्यतीत करने में बिताएँ।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर लिखा, “प्राचीन भारतीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए मैं असम सरकार के कर्मचारियों से 6 और 7 जनवरी 2022 को विशेष अवकाश के रूप में नामित अपने माता-पिता/ससुराल वालों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का आग्रह करता हूँ। मैं उनसे अपने माता-पिता के आशीर्वाद से एक नए असम और नए भारत के निर्माण के लिए खुद को फिर से समर्पित करने का अनुरोध करता हूँ।”

सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में कहा गया है, “असम सरकार राज्य सरकार के कर्मचारियों को 6 और 7 जनवरी 2022 को आकस्मिक अवकाश का लाभ की अनुमति देकर प्रसन्न है। इसके अलावा दो अवकाश 8 और 9 जनवरी 2022 (दूसरा शनिवार और रविवार) को है, ताकि वे उन दिनों को अपने माता-पिता और सास-ससुर के साथ बिता सकें।”

रविवार (2 जनवरी 2022) को मीडिया से बात करते हुए सीएम ने अधिकारियों को याद दिलाया कि सबूत के तौर पर छुट्टियों के दौरान माता-पिता के साथ रहने की तस्वीरों को दिखाना अनिवार्य होगा। छुट्टी चाहने वालों को पहले छुट्टी के लिए आवेदन करना होगा। ऑनफील्ड ड्यूटी पुलिस, स्वास्थ्य सेवा अधिकारियों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े अन्य अधिकारियों के लिए इस अनूठी पहल का विस्तार करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वे अगले चार महीनों में चरणबद्ध तरीके से छुट्टियों का लाभ उठा सकेंगे। सीएम ने यह भी कहा कि उनकी सरकार अगले साल धार्मिक और पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के इच्छुक कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश स्वीकृत करने की भी योजना बना रही है।

सरमा ने बुजुर्ग माता-पिता संग समय बिताने के लिए 7 दिनों के अतिरिक्त अवकाश की घोषणा की थी

अगस्त 2021 में असम सरकार ने अपने कर्मचारियों को साल में एक बार सात दिनों की अतिरिक्त छुट्टी देने का फैसला किया था, लेकिन इस सख्त शर्त के साथ कि वे अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ समय बिताएँगे। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में यह घोषणा की थी। इस दौरान उन्होंने लोगों से अपने बुजुर्ग माता-पिता को वृद्धाश्रम न भेजने का संकल्प लेने को कहा था।

ISIS की दुल्हन आयशा को भारत वापस लाने पर करें विचार: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया 8 सप्ताह का समय

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 जनवरी 2022) को ISIS दुल्हन सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा को भारत वापस लाने का फैसला केंद्र सरकार पर छोड़ दिया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार 8 हफ्ते में विचार कर इस पर फैसला ले। आयशा आतंकवादी समूह ISIS में भर्ती होने के लिए भारत छोड़कर अफगानिस्तान चली गई थी। इस समय वह अफगानिस्तान की एक जेल में बंद है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से आयशा के पिता वी जे सेबेस्टियन फ्रांसिस की याचिका पर विचार करने को कहा है, जिन्होंने अपनी बेटी और 7 साल की नातिन सारा को भारत वापस लाने के लिए पिछले साल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने कहा, “अगर वीजे सेबेस्टियन केंद्र सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं हुए तो उन्हें अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट जाने का अधिकार है।” याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नागेश्वर राव ने कहा, “हम सरकार को आपके अनुरोध पर निर्णय लेने का निर्देश नहीं दे सकते हैं, क्योंकि यह ऐसे मामले नहीं हैं, जिसमें हम निर्णय दे सकते हैं। इन मामलों में सरकार का फैसला सर्वोपरि होगा।” याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील रंजीत मरार ने कहा कि तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने से पहले जुलाई 2021 में सेबेस्टियन याचिका दायर की गई थी।

4 महिलाएँ अपने शौहर के साथ अफगानिस्तान गई थीं

आयशा 2019 से अफगानिस्तान की जेल में बंद है। इस्लाम कबूल कर चुकीं आयशा समेत केरल की 4 महिलाएँ अपने शौहर के साथ अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने के लिए गई थीं। शौहर की मौत के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। सोनिया उर्फ आयशा के पिता वी जे सेबेस्टियन फ्रांसिस की याचिका में कहा गया था कि उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा है।

केरल की ये महिलाएँ 2016-18 में अफगानिस्तान के नंगरहार पहुँची थीं। इस दौरान उनके शौहर अफगानिस्तान में अलग-अलग हमलों में मारे गए थे। ये महिलाएँ इस्लामिक स्टेट के उन हजारों लड़ाकों में शामिल थीं, जिन्होंने नवंबर और दिसंबर 2019 में अफगानिस्तान के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। चारों महिलाओं की पहचान सोनिया सेबस्टियन उर्फ आयशा, मेरिन जैकब उर्फ मरियम, निमिशा उर्फ फातिमा ईसा और रफाएला के रूप में हुई है। भारत में भी आयशा के खिलाफ UAPA के तहत मुकदमा दर्ज है।

इससे पहले वर्ष 2021 में केरल के वीजे सेबेस्टियन फ्रांसिस ने अपनी बेटी आयशा और उसकी 7 वर्षीय बेटी को भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मोदी सरकार को आतंकी गतिविधियों में शामिल इन महिलाओं को वापस ना लाने का आरोप लगाते हुए उनके रुख को ‘अवैध और असंवैधानिक’ बताया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

बता दें कि केरल के कासरगोड की सेबस्टियन 31 मई, 2016 को अपने पति अब्दुल राशिद अब्दुल्ला के साथ मुंबई हवाई अड्डे से भारत से रवाना हुई थी। बताया गया था, “शौहर-बीवी ने जुलाई, 2015 में रमजान के दौरान पडन्ना और कासरगोड में आईएस और जिहाद का समर्थन करने के लिए सिक्रेट क्लासेस आयोजित की थीं। सेबस्टियन इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट है।”

‘जिन्हें मंदिर में बैठना नहीं आता, वो हिन्दू और हिंदुत्व पर ज्ञान देते हैं’: अमेठी में गरजे CM योगी – बुलडोजर चलता है तो सपा के बबुआ को बुरा लगता है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (3 दिसंबर, 2021) को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के लोकसभा क्षेत्र अमेठी में राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास व जिला स्तरीय रेफरल चिकित्सालय का लोकार्पण किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने ‘जन विश्वास यात्रा’ का भी नेतृत्व किया। सीएम योगी ने कहा कि जिन लोगों ने विभाजनकारी राजनीति को सदैव अपनाया, विघटन और विभाजन जिनके जींस का हिस्सा है, जिनके पूर्वज कहते थे हम तो एक्सीडेन्टली हिंदू हैं तो वो लोग अपने को हिंदू नहीं बोल सकते।

उन्होंने कहा कि हम लोगों में कोई छुपाव भी नहीं है कोई घबराहट भी नहीं है। सीएम योगी ने आगे कहा कि जब वो मुख्यमंत्री नहीं थे तब भी कहते थे, आज भी कहते हैं, आगे भी कहेंगे कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं। सीएम योगी ने कहा कि देश में सांप्रदायिकता विरोधी कानून लाकर इस देश के हिन्दुओं को कैद कर देना चाहते थे, उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करना चाहते थे और जब कोई चुनाव आता था तब ये निकल पड़ते थे हिंदू बनने। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम भारतीय हैं और हिंदू हमारी सांस्कृतिक पहचान है – इसपर हमको गौरव की अनुभूति होनी चाहिए।

यूपी के मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में सपा, कॉन्ग्रेस, बसपा का कोई भी कार्यकर्ता, कोई नेता, कोई जन प्रतिनिधि, इनके राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर सामान्य कार्यकर्ता तक जनता के बीच नहीं था। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही ये लोग जहाँ-तहाँ अपने दर्शन देने के लिए आ रहे होंगे और चुनाव बाद साढ़े चार साल तक गायब हो जाएँगे, फिर नहीं दिखाई देंगे। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार का बुलडोजर जब चलता है तो उस समय समाजवादी पार्टी के बबुआ को बुरा लगता है, भाई और बहन को बुरा लगता है।

सीएम योगी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेठी के पूर्व सांसद को मंदिर में बैठने का तरीका नहीं मालूम है, अब अगर इतने संस्कार भी नहीं मालूम और वे हिंदू और हिंदुत्व का फर्क करें तो फिर ये उनकी बुद्धि का फेर है। यूपी में हालिया आईटी छापेमारियों को लेकर उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में गरीबों के हक का पैसा सपा के बबुआ के इत्र वाले मित्रों के घर की दीवारों में दबाया जा रहा था। राहुल गाँधी पर उन्होंने कहा कि आपके पूर्व सांसद जब विदेश में रहते हैं तो भारत के खिलाफ बोलते ही हैं और जब केरल में जाते हैं तो अमेठी के खिलाफ भी जरूर बोलते हैं, अमेठी की जनता को कोसते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हम भारतीय हैं और हिंदू हमारी सांस्कृतिक पहचान है। इस पर हमें गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। कश्मीर में धारा 370 लगाने में उनको गुरेज नहीं था क्योंकि धारा 370 आतंकवाद की जड़ थी, लेकिन सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार का विरोध जरूर कर रहे थे। काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण करने वाले श्रमिकों पर पुष्प वर्षा राष्ट्र निर्माण की सोच है। एक तरफ निर्माण और एक तरफ विध्वंस करने वालों की लड़ाई वर्तमान में चल रही है।”

उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में गुजरात चुनाव जब चल रहा था तब चुनाव के दौरान यहाँ के पूर्व सांसद एक मंदिर में गए और पूजा करने के लिए पालथी की जगह घुटने टेक कर बैठ गए। उन्होंने बताया कि कैसे पुजारी ने उनको सही से बैठने को कहा और बताया कि यह मंदिर है मस्जिद नहीं है। सीएम योगी ने गरजते हुए कहा कि जिनको बैठने का नहीं पता मंदिर में वो हिंदू और हिंदुत्व पर ज्ञान देते हैं। उन्होंने राज्य की 3.06 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय को बढ़ाने का भी फैसला लिया।

सीएम योगी ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर क्या ये भाई बहन बना लेते? याद करिए सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार कार्यक्रम में जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद जा रहे थे तो इनके परनाना ने विरोध किया था, उन्होंने कहा कि ये नहीं करना चाहिए। ये लोग अयोध्या में राम मंदिर का भी विरोध कर रहे थे। प्रदेश सरकार का बुलडोजर जब चलता है तो सपा के बबुआ को बुरा लगता है। जब माफियाओं की संपत्ति जब्त होती है तब उन्हें बुरा लगता है। भाई और बहन को जब माफियाओं पर बुलडोजर चलता है तो बुरा लगता है, ये क्यों हो रहा है। ये लोग आंतकवादियों के खिलाफ मुकदमों को वापस लेते हैं।”

‘मैं वर्जिन थी, मेरे पति ने ‘डेट रेप’ किया’: हिरोइन ने बताई आपबीती, अमीर बूढ़ों के साथ सोने पर ₹10 लाख/रात देने की बात

अपने जमाने की मशहूर ब्रिटिश अभिनेत्री जोन कॉलिन्स (Joan Collins) ने अपने साथ हुई यौन शोषण की घटना को दुनिया के सामने रखा है। कॉलिन्स के साथ रेप करने वाला कोई दूसरा नहीं, बल्कि उनका पहला पति और फिल्म स्टार मैक्सवेल रीड (Maxwell Reed) था। कॉलिन्स ने बताया कि रीड ने डेट के दौरान उन्हें नशीला पेय पिलाकर रेप किया था। कॉलिन्स ने इस डेट रेप कहा है।

88 वर्षीय कॉलिन्स ने बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में बताया कि रीड उस समय एक बड़े स्टार थे और वह 17 साल की एक वर्जिन थीं। एक दिन वह डेट पर रीड के घर गई थीं। वहाँ रीड ने उन्हें रम औऱ कोक मिलाकर ड्रिंक बनाया और उसे पीने के लिए दिया। इसके बाद रीड ने उनके साथ रेप किया। उस समय रीड की उम्र 31 साल थी।

रीड को लेकर कॉलिन्स ने आरोप लगाया कि रेप के बाद मजबूरी में रीड को उनसे शादी करनी पड़ी थी, क्योंकि वह एक बड़े स्टार थे और विवाद में नहीं फँसना चाहते थे। कॉलिन्स ने बताया कि शादी के बाद रीड उन्हें ‘अमीर बूढ़ों’ के साथ सोने के लिए कहा था। इसके लिए रीड ने उन्हें प्रति रात 10,000 पाउंड (लगभग 10 लाख रुपए) देने की पेशकश की थी। कॉलिन्स का यह भी आरोप है कि रीड ने उन्हें बेचने की कोशिश भी की थी।

रीड के इस व्यवहार को देखकर कॉलिन्स ने अलग होने का फैसला ले लिया था। कॉलिन्स ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री में कॉलिन्स ने बताया है कि एक समय हॉलीवुड स्टार (Hollywood Star) मर्लिन मुनरो (Marilyn Monroe) ने उन्हें फिल्म निर्माता डेरिल ज़ोनूक (Daryl Zanuck) सहित ‘इंडस्ट्री के भेड़ियों’ से सावधान करते हुए यौन हमलों से बचने की सलाह दी थी। कॉलिन्स ने बताया कि जोनूक ने एक पर उन्हें दीवार से सटा दिया था और उन पर यौन हमला किया था।

कॉलिन्स ने अपने जीवन में पाँच शादियाँ की हैं। रीड से अलग होने के बाद उन्होंने दूसरी शादी ब्रिटेन के अभिनेता एंथनी न्यूले (Anthony Newley) से शादी की थी, लेकिन शादी भी लंबी नहीं चली। उन्होंने तीसरी शादी 1972 में रॉन कास से और चौथी शादी 1983 में चौथी शादी स्कैंडिनेवियाई गायक पीटर होल्म से की। 57 वर्षीय पर्सी गिब्सन (Percy Gibson) उनके पाँचवें पति हैं। गिब्सन Hollywood फिल्मों के प्रोड्यूसर हैं और वह उन्हीं के साथ रहती हैं।

’83’ में Pak फ़ौज ‘अच्छी’, ‘बजरंगी भाईजान’ में वहाँ के मौलवी ‘बहुत अच्छे’: कट्टर इस्लामी टीम के पुराने बल्लेबाज हैं कबीर खान, नोटिस किया?

दिसंबर 2021 में रिलीज हुई फिल्म ’83’ का निर्देशन कबीर खान ने किया है। इस फिल्म में जिस तरह से पाकिस्तान और उसकी फ़ौज का महिमामंडन किया गया है और ‘अच्छा मुस्लिम’ वाले कॉन्सेप्ट को आगे बढ़ाया गया है। वैसे ये सब नया नहीं है, क्योंकि बॉलीवुड सलीम-जावेद के जमाने से ही इस तरह के हिन्दूफोबिया भरे प्रोपेगंडा में लगा हुआ है। अब कबीर खान जैसे फिल्म निर्देशक इसी धारा की अगली उपज हैं, जो हिन्दू विरोधी दृश्यों के माध्यम से हिन्दू धर्म को बदनाम करने में लगे हुए हैं।

असल में पीला उसकी बात करते हैं, जो कबीर खान की सबसे बड़ी फिल्म है। 2015 में आई ‘बजरंगी भाईजान’ उस समय तक की सबसे ज्यादा चलने वाली फिल्मों में से एक थी और बाद में चीन में भी रिलीज होकर इसने अच्छा कारोबार किया। इसके बाद फिल्म को चीन में रिलीज किया गया, जहाँ ये बड़ी हिट रही। आमिर खान ने चीन में जो बाजार बनाया है, उसका खान तिकड़ी की फायदा बाकी भारतीय फिल्मों को भी मिलता रहा है। लेकिन, हनुमान जी के नाम पर बनाई गई इस फिल्म में हिन्दुओं के विरोध में काफी कुछ दिखाया गया।

उदाहरण के लिए कुछ दृश्यों को लेते हैं। ‘बजरंगी भाईजान’ में सलमान खान ने पवन कुमार चतुर्वेदी नाम के एक ब्राह्मण का किरदार निभाया है, जो शुद्ध शाकाहारी है और साथ ही हनुमान जी का एक बड़ा भक्त भी। हिन्दू, और उसमें भी खासकर ब्राह्मण मिल जाए तो बॉलीवुड के लिए काम आसान हो जाता है। उन्हें जितना भी बदनाम किया जाए, कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें न विरोध का भय होता है, न उनकी भावनाओं का। इसीलिए, इस फिल्म में भी एक छोटी सी मुस्लिम लड़की का किरदार है, जो पीड़ित है।

सलमान खान जब उस लड़की से मिलते हैं तो उन्हें उसे मांस-मछली खिलाना होता है, जबकि वो खुद शुद्ध शाकाहारी होते हैं। साथ ही उन्हें मस्जिद में जाना होता है, क्योंकि वो लड़की नमाज पढ़ती है। उस लड़की को देह व्यापार में धकेलने वाली एक हिन्दू वेशभूषा वाली महिला होती है। जबकि सीमा पर पाकिस्तानी फ़ौज काफी दयावान होती है, जो ‘बजरंगी भाईजान’ को नेक कार्य के लिए पाकिस्तान में जाने देती है। वहाँ एक मौलवी मिलता है, जो अपनी जान पर खेल कर इन दोनों की जान बचाता है।

इसके अलावा एक पत्रकार मिलता है। वो भी अपनी जान जोखिम में डाल कर भारतीयों की मदद करता है। क्या आपने कभी वास्तविकता में पाकिस्तानी मौलवियों को ऐसा करते देखा है? असल में वहाँ के मस्जिदों में लड़कियों को सिर कलम करने की ट्रेनिंग दी जाती है। मौलवी ईशनिंदा का केस करा देते हैं। वहाँ के क्रिकेटर तक ‘गजवा-ए-हिन्द’ का समर्थन करते हुए जिहाद फैलाते हैं। किसी महिला को ‘हूर’ बना कर प्रदर्शनी लगाई जाती है। जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनता है तो मुल्ला-मौलवी इसके विरोध में सड़क पर उतर आते हैं। मदरसे में रेप होता है। कहीं अब्बा मौलवी ही अपनी बेटियों का रेप करता है।

लेकिन, कबीर खान की फिल्म में सारे पाकिस्तानी अच्छे होते हैं। वहाँ का मौलवी पुलिसकर्मियों से पंगा लेकर भारतीय नागरिकों को बचाता है। वहाँ का पत्रकार कॉमेडी करता है और सीधा-सादा होता है। जबकि वास्तविकता में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी पत्रकार भारत के खिलाफ ज़हर उगलते नहीं थकते। इसका सीधा अर्थ है कि कबीर खान पाकिस्तान का प्रोपेगंडा आगे बढ़ा रहे हैं। इस्लामी कट्टरवादी सोच को हवा दे रहे हैं। साथ ही वो हिन्दुओं को तो नीचा दिखा ही रहे हैं।

जिन पाकिस्तानी फौजियों के कारण कई भारतीय नागरिकों और सैनिकों की जान गई है, लेकिन कबीर खान की फिल्म में वो मानवता के प्रतीक होता हैं – एकदम उलटा। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ’83’ में दिखाया गया है कि भारतीय सेना के निवेदन पर पाकस्तानी फौजी सीमा पर गोलीबारी रोक देते हैं, ताकि भारतीय सैनिक शांति से स्कोर सुन सकें। जबकि सच्चाई ये है कि जून 2019 में जब पाकिस्तान ने विश्व कप मैच में पाकिस्तान को हराया था, तो उस दिन भी पाकिस्तानी फ़ौज ने सीजफायर का उल्लंघन किया था।

इसके अलावा ’83’ में एक ‘अच्छा मुस्लिम’ भी है, जो बुजुर्ग है और इस्लामी टोपी पहनता है। वो भारत का मैच देखने के लिए इतना बेचैन होता है कि कर्फ्यू के दौरान भी पुलिसकर्मियों से छिप कर अपना एंटीना ठीक करता है। जीत के जश्न में आगे बढ़ कर शामिल होता है। जबकि वास्तविकता ये है कि कई मुस्लिम बहुल इलाकों में हालिया T20 विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की हार के बाद पटाखे छोड़े गए। लिबरल जमात ने इसे ‘करवा चौथ के पटाखे’ बता कर ख़ारिज किया। कबीर खान ने ऐसी घटनाओं को छिपाने के लिए ’83’ के सहारे कहानी रची।

इसी तरह 2009 में कबीर खान की एक फिल्म आई थी ‘न्यूयॉर्क’, जिसमें आतंकवादियों को ही पीड़ित दिखा दिया गया था। इसी तरह उनकी फिल्म ‘काबुल एक्सप्रेस’ में ‘देखा खुदा कैसे तुझे बनाया काफिर से इंसान’ जैसे गानों के सहारे सलामी कट्टरपंथी सोच को आगे बढ़ाया गया है। कबीर खान की अगली फिल्म का नाम ‘पवन पुत्र भाईजान’ हो सकता है, जिसमें सलमान खान ही अभिनेता होंगे। हनुमान जी के नाम से एक बार फिर से हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा चलेगा।

फिल्मों में ही नहीं, वास्तविकता में भी कबीर खान ऐसे ही बयान देते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने मुगलों को भारत का निर्माता करार दिया। उन मुगलों को, जो हिन्दुओं के नरसंहार और मंदिरों को ध्वस्त करने के लिए कुख्यात रहे हैं। फिल्म के माध्यम से आतंकवादियों के साथ सहानुभूति पैदा करना और मीडिया के माध्यम से इस्लामी आक्रांताओं का गुणगान – यही कबीर खान का काम है। भारतीयों की हत्या में मजे लेने वाली पाकिस्तानी फ़ौज का महिमामंडन भी वो करते रहे हैं।

अपनी फिल्म ‘काबुल एक्सप्रेस’ में तो उन्होंने पाकिस्तानी अभिनेता सलमान शाहिद को बतौर अभिनेता लिया था। उन्होंने अपनी फिल्म ‘फैंटम’ में भले ही प्लॉट आतंकवादियों के सफाए का रखा हो, लेकिन उसमें भी मुख्य किरदार एक भारतीय पुलिस अधिकारी मुस्लिम ही होता है और उसके नाम में ‘खान’ होता है। इसी तरह ‘ट्यूबलाइट’ के जरिए चीन के प्रति सहानुभूति बनाने की कोशिश की गई है। एक चीन की युवती को पीड़ित बता कर फिल्म की कहानी रची गई है।

दिल्ली की नई शराब नीति पर केजरीवाल सरकार को कुमार विश्वास ने घेरा, कहा- ‘…500 करोड़ की डील में मामला सेट’, विरोध में BJP भी सड़क पर

दिल्ली में नई आबकारी नीति लागू हो चुकी है। इस नई नीति के तहत दिल्ली में शराब पीने वालों की उम्र 25 से 21 कर दी गई है। दिल्ली सरकार अपनी इस नीति के लिए विपक्ष के साथ ही अपने कई पुराने साथियों का भी विरोध झेल रही है। 

एक ओर जहाँ आज (3 जनवरी 2022) नई आबकारी नीति के खिलाफ पूरी दिल्ली में भाजपा ने चक्का जाम किया, वहीं पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता व कवि कुमार विश्वास ने भी दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया। 

कुमार विश्वास ने ट्वीट करते हुए लिखा, “पीनेवालों की उम्र 21 से 18 करने और 1000 नए ठेके खुलवाने की नीति लागू करने की सिफारिश लेकर 2016 में दिल्ली शराब माफिया, दारू जमाखोर विधायक के साथ मेरे पास आया था। मैंने दुत्कार कर भगाया था और दोनों नेताओं को चेताया था। अब छोटेवाले के साले ने 500 करोड़ की डील में मामला सेट कर लिया है।”

कुमार विश्वास और नरेश बाल्यान का ट्विटर वार

विश्वास के ट्वीट पर आप विधायक नरेश बाल्यान ने भी उन्हें जवाब दिया जिसमें उन्होंने लिखा, “लगता है आज सुबह गलत पदार्थ का सेवन कर लिया है आपने, 2021 तक दिल्ली में शराब पीने की आयु 25 वर्ष थी, नई नीति के बाद 21 वर्ष की गई है, दूसरा तथ्य यह है कि शराब का एक भी ठेका नहीं बढ़ा है, 4 कम हुए है, बाकी हमें पता है कि राज्यसभा का दर्द जीवन भर रहेगा, ऐसे ही झूठ फैलाते रहे!”

इस पर कुमार विश्वास ने भी जवाब में ट्वीट करते हुए ये खुलासा कर दिया कि वो जिस दारू जमाखोर विधायक की बात कर रहे थे वह बाल्यान ही हैं। कुमार विश्वास ने लिखा, “चोर जो चुप ही लगा जाता तो वो कम पिटता, बाप का नाम बताने की जरूरत क्या थी। मैंने तो बस “दारू जमाखोर विधायक” लिखा था, तुम ही आए थे यह जताने की जरूरत क्या थी बालक?

बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता और भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी नई एक्साइज पॉलिसी को लेकर केजरीवाल सरकार को घेरा।

आदेश गुप्ता ने ट्वीट करते हुए लिखा कि केजरीवाल सरकार की नई शराब नीति के विरोध में भाजपा की लड़ाई जारी रहेगी! हम दिल्ली को शराब की नगरी नहीं बनने देंगे!

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “उप मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि दिल्ली के मुख्यमंत्री क्या बोलते हैं! अरविंद केजरीवाल ने अपनी पुस्तक ‘स्वराज’ में लिखा था कि शराब का एक ठेका खोलने पर नेताओं और अफसरों की जेब भरी जाती है। दिल्ली में हजारों की संख्या में ठेके खोले गए हैं, तो आप की सरकार ने कितनी घूस खाई है?”

बता दें कि दिल्ली में बुधवार (5 जनवरी 2022) से शराब की बिक्री पूरी तरह निजी हाथों में चली जाएगी। नई आबकारी नीति के तहत राजधानी को 32 जोन में बाँट कर 849 लाइसेंस आवंटित किए गए। इसके तहत प्रत्येक जोन में 26-27 दुकानें बुधवार से संचालित होंगी। हर इलाके में आसानी से शराब उपलब्ध हो, इसके लिए दिल्ली के 272 वार्ड को जोन में विभाजित किया गया है।

एक जोन में आठ से नौ वार्ड शामिल हैं और हर वार्ड में अनिवार्य तौर पर तीन से चार दुकानें खुलेंगी। आबकारी विभाग की तरफ से कहा गया है कि सभी दुकानों को खोलने की तैयारी है। लाइसेंस हासिल करने वाली फर्मों ने पूरी तैयारी कर ली है। वहीं दूसरी ओर नई नीति लागू होने के साथ ही शराब आठ से नौ फीसदी महँगी होने का अनुमान है।

पहले BRI के नाम पर दोस्ती, फिर देशों को पाई-पाई का मोहताज बना देता है चीन: कर्ज का जाल बिछा शिकार कर रहा ड्रैगन

अन्य देशों पर कब्जा जमाने के लिए चीन की विस्तारवादी नीति पूरे विश्व में जानी जाती है। हालाँकि कर्ज में दबाकर दूसरे देशों पर दबदबा बनाने वाली नीयत उनकी पिछले कुछ समय में ही सामने आई है। हाल की ही खबर है कि चीन के कर्ज तले श्रीलंका इतना दब गया है कि उस कर्ज को चुकाने में देश का खजाना खाली होने वाला है और हो सकता है कि पूरा देश जल्द ही दिवालिया घोषित हो जाए।

यहाँ मालूम हो कि केवल श्रीलंका अकेला देश नहीं है जो चीन से लिए कर्ज को चुकाने के चक्कर में बर्बाद हो रहा है। ऐसे तमाम देश हैं जिन्हें चीन ने उधारी के जाल में फांसा और अब वो देश इससे निकलने की जुगत में जुटे हैं। हालत ये है कि चीन तो पिछले कुछ समय में विश्व के सबसे बड़े कर्जदाता के तौर पर उभरा है और वहीं युगांडा जैसे छोटे देश उसका कर्ज न चुकाने पर उनका एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा खो चुके हैं।

बता दें कि ये चीन अपने ऋण जाल में देशों को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के जरिए शिकार बना रहा है। इसी स्कीम के चलते उसने निम्न और मध्यम आय वाले (कमजोर) देशों को 385 बिलियन डॉलर से अधिक का कर्जा दे देकर उन्हें कर्जदार बना दिया है। 2020 में जारी एक रिपोर्ट बताती है कि चाइना 5.6 ट्रिलियन डॉलर का लोन विभिन्न देशों को विकास के नाम पर बाँट चुका है। इसके साथ ही विश्व में जितने भी द्विपक्षीय संबंधों के तहत लोन बांटे दिए हैं, उसका 65 फीसदी हिस्सा अकेले सिर्फ चीन ने बांटे हैं। चीन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रैकर को देखें तो पता चलता है कि साल 2013 से 2019  में चीन कंपनियों ने 34 देशों के साथ 61.6 बिलियन डॉलर के रेल निर्माण कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे और अब तक सबसे ज्यादा जहाँ चीन ने पैसा लगाया है वो पाकिस्तान और अफ्रीकी देश हैं।

चाइना ने 2015 से 2021 के बीच में पाकिस्तान में 64.97 अरब डॉलर का निवेश किया है। पाकिस्तान के बाद दूसरे नंबर पर जहाँ चीन ने अपना पैसा लगाया है वो इंडोनेशिया है। यहाँ चीन के 55.07 अरब डॉलर लगाए हुए हैं। इसी तरह वियतनाम में चीन ने 28.91 अरब डॉलर, लाओस में 28.81 अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है। इतना ही नहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि अपनी इस कर्ज नीति के चलते उसने 58 देशों को अपने जाँच में फाँस लिया है। साल 2020 में मालदीव सरकार ने इस संबंध में बयान दिया था कि वो चीन के कर्ज में इतनी बुरी तरह फँसे हैं कि उन्हें आय का 53 फीसद कर्ज देने में खर्च करना पड़ रहा है। पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव पर चीन 3.1 अरब डॉलर का खर्चा था जबकि वहाँ की अर्थव्यस्था ही कुल 5 अरब डॉलर की है। इसी तरह चीन के निशाने पर अधितकर अफ्रीकी देश भी हैं जिसकी वजह वहाँ पसरी गरीबी है।

कुछ रिपोर्ट्स में चीन की इस कर्ज नीति पर पर बताया गया है कि चीन जो कर्ज देता है उसे वो वैश्विक कल्याण के नाम पर दिया गया कर्ज कहता है और जताता है कि उसके लोन बाँटने का मकसद विश्व में सार्वजनिक कल्याण है। उसके मुताबिक वो वैश्विक समुदाय का जिम्मेदार देश होने के नाते ऐसा करता है। रिपोर्टस में साफ तौर पर कहा गया था कि चीन की इस कर्ज नीति में जो देश फंसता है वो बर्बाद होना शुरू हो जाता है। चीन अप्रत्यक्ष रूप से उस देश की राजनीति में घुसता है और फिर वहाँ की संप्रभुता पर उसका दबदबा होता है।

मौजूदा जानकारी बताती है चीन द्वारा दिया गया लोन 60 फीसद कमर्शियल होता है और इसमें किसी तरह से कोई छूट नहीं होती। इसके अलावा ये कर्जा देने के पीछे उसकी काफी कठोर शर्तें होती हैं, जिन्हें गोपनीय रखना भी शर्त में ही आता है। कोई नहीं बता सकता है कि चीन किस ब्याज दर पर उधार देने का काम करता है। धीरे-धीरे कमजोर देशों पर कर्जा बढ़ता जाता है और हालात मालदीव, श्रीलंका या पाकिस्तान जैसे हो जाता है। कर्जा देने से पहले चीन ये बात पक्की करता है कि जो लोन वो दे रहा है उससे उस देश पर उसका नियंत्रण स्थापित हो और विकास भी उसका अपना हो। यहाँ ये जानना भी हैरान करने वाला है कि एडडाटा रिसर्च लैब की रिपोर्ट बताती है कि, चीन ने पिछले 18 साल में 165 देशों में 843 अरब डालर की 13,427 परियोजनाओं में इन्वेस्ट किया है। जिसमें अधिकांश पैसा चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट BRI से जुड़ा है

थू-थू होने के बाद पंजाब के डिप्टी CM ने मूक-बधिर चैंपियन की मदद का दिलाया भरोसा, मलिका हांडा की माँ ने भी कॉन्ग्रेस सरकार को कोसा

25 वर्षीय मूक-बधिर शतरंज खिलाड़ी मलिका हांडा (Malika Handa) को नकद इनाम का वाद कर मुकरने पर पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार की देश भर में किरकिरी हो रही है। इसके बाद राज्य के डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को मलिका हांडा की मदद करनी चाहिए। यदि वह उनके पास आतीं हैं तो वे मदद करेंगे। साथ ही इस संबंध में राज्य के खेल मंत्री परगट सिंह से बात करने का उन्होंने भरोसा दिलाया है।

दरअसल, परगट सिंह ने हांडा से कहा था कि सरकार उनकी कोई मदद नहीं कर सकती, क्योंकि मूक-बधिर खिलाड़ियों के लिए कोई नीति नहीं है। कॉन्ग्रेस सरकार के इस रवैए को लेकर मलिका हांडा की माँ रेणु हांडा ने भी चन्नी सरकार पर निशाना साधा है। रेणु हांडा ने कहा है कि 5 साल बाद भी खिलाड़ियों के लिए कोई नीति क्यों नहीं बनाई गई है?

7 नेशनल गोल्ड, 4 इंटरनेशनल सिल्वर और 2 इंटरनेशनल गोल्ड पदक जीतने वाली शतरंज खिलाड़ी मलिका ने सोमवार (3 जनवरी 2022) को जालंधर में क​हा था, “खेल मंत्री परगट सिंह ने किसी भी तरह का पुरस्कार देने से इनकार करते हुए कहा है कि वह अपनी जेब में चेक बुक नहीं रखते हैं। उन्होंने हमें पहले की सरकार के पास जाने के लिए कहा है।”

मलिका ने यह भी कहा था, “ये सारे मेडल और सर्टिफिकेट उनके लिए बेकार हैं। हरियाणा के खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों का पुरस्कार मिलता है। मैं खेल छोड़ दूँगी। मेरी 10 साल की मेहनत बेकार गई।” हाल ही में मलिका ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट करके पंजाब सरकार की नाकामी को उजागर किया था। अपने मेडल्स और ट्रॉफी को दिखाकर पंजाब सरकार से सवाल पूछने वाली मलिका का दावा है कि वो 31 दिसंबर 2021 को पंजाब के खेल मंत्री से मिली थीं। जिन्होंने उनको कहा कि वो उन्हें जॉब नहीं दे सकते, क्योंकि उनके पास मूक बधिर खिलाड़ियों के लिए ऐसी कोई नीति नहीं है।

मलिका के पिता सुरेश हांडा को ट्रिब्यून ने कोट करते हुए लिखा, “मलिका आज बहुत परेशान है। मैं और मेरा बेटा अतुल हांडा उनके साथ खेल विभाग के निदेशक के कार्यालय गए थे, लेकिन उन्होंने भी साफ़ मना कर दिया। मेरी बेटी पिछले 8-10 वर्षों से खेल खेल रही है। देश और राज्य के लिए पदक ला रही है। बस इस उम्मीद के साथ कि उसे भी अन्य ओलंपियन और पैरा-एथलीटों की तरह नौकरी दी जाएगी।”

बता दें नेशनल चैम्पियन मलिका अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद इसी साल सितंबर में चंडीगढ़ में पंजाब के खेल विभाग के निदेशक से संपर्क कर नौकरी और आर्थिक सहायता के लिए मदद माँगी थी। लेकिन राज्य सरकार की ओर से उदासीनता भरी प्रतिक्रिया मिली तो डायरेक्टर के केबिन से बाहर निकलने के बाद हांडा के सब्र का बाँध टूट गया। इसके बाद ट्विटर पर सांकेतिक भाषा में उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया और लोगों ने उन्हें भावनात्मक रुप से सपोर्ट भी किया।