Home Blog Page 3143

‘आतंकवादी हैं विहिप-RSS वाले, हमें मिले खुले में नमाज की अनुमति’: भड़के मुस्लिम पर्नसल लॉ बोर्ड ने कहा – फैसला कबूल नहीं

गुरुग्राम में सड़कों पर नमाज़ का विरोध करने वाले हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने आतंकवादी कहा है। बोर्ड के महासचिव मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रह़मानी ने सड़कों पर नमाज़ रोकने का आदेश देने वाली हरियाणा सरकार के निर्णय को बीच नाजायज करार दे डाला है। मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रह़मानी के मुताबिक यह फैसला कबूल नहीं है। यह बयान बोर्ड ने 12 दिसंबर (रविवार) को जारी प्रेसनोट में दिया है।

अपने बयान में मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रह़मानी ने गुरुग्राम को गुड़गांव कह कर सम्बोधित किया है। आगे कहा है कि गुरुग्राम में मुस्लिम समाज के लोग बड़ी तादाद में नौकरी करते हैं। इसी के साथ जगह की कमी का दोष भी सरकार पर डालते हुए लिखा गया है कि सरकार ने अपनी तरफ से नमाज़ियों के लिए मस्जिद नहीं बनवाई। ऐसे में मुसलमान खुले स्थानों में नमाज़ अदा करने पर मजबूर हैं।

प्रेसनोट में नमाज़ी मुस्लिमों को तकलीफ सहने वाला लिखा गया है। बताया गया है कि खुले में नमाज़ पढ़ने वाला नमाज़ी धूप और बारिश सहता है। ऐसे में सरकार का खुले में नमाज़ न पढ़ने देने का फैसला मुस्लिमों पर जुल्म है। पत्र में वक़्फ़ की अनेक जमीनों को कब्ज़े वालों द्वारा न लौटाने की बात कही गई है। इसी के साथ जुमे की नमाज़ की अदायगी का समय 1 घंटे बता कर इसे बहुत कम आँका गया है।

पत्र में आगे खट्टर सरकार के फैसले की निंदा करते हुए मुस्लिमों की नमाज़ पढ़ने की समस्या को सरकार द्वारा दूर करने को कहा गया है। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद् (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को आतंकवादी शब्द से सम्बोधित किया गया है। उनके लिए कानूनी रूप से सज़ा की माँग की गई है।

प्रेसनोट

इस प्रेसनोट के जारीकर्ता डॉ. मुहम्मद वक़ारुद्दीन लतीफ़ी हैं जिन्होंने अपना पद कार्यालय सचिव के रूप में लिखा है।

बच्चों को जबरन पढ़ाई जा रही थी बाइबिल, अनाथ लड़कियों का धर्मांतरण, जबरन करवाते थे प्रेयर: बाल गृह के खिलाफ FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित करुणा नवजीवन बाल सुधार गृह से अनाथ बालिकाओं के धर्मांतरण का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामला प्रकाश में आने के बाद बाल गृह के खिलाफ मंगलवार (14 दिसंबर 2021) को FIR दर्ज कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को करुणा नवजीवन बाल गृह में जबरन बाइबिल (Bible) पढ़ाई जा रही थी और ईसाई धर्म की प्रार्थना (Christian Prayers) कराई जा रही थीं।

बताया जा रहा है कि गुप्त शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights) की टीम ने 18 नवंबर को यहाँ का निरीक्षण किया। आयोग (NCPCR) ने इस संस्थान में निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएँ पाई थीं, जिसके बाद बरेला थाना पुलिस ने करुणा नवजीवन बाल गृह पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट समेत मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है। एमपी में ये ऐसा पहला मामला है, जब किसी बाल गृह पर मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है।

जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने अपने औचक निरीक्षण के बाद कुल 9 पेजों की एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस दौरान 7-11 वर्ष और 12-18 वर्ष की लड़कियों को यहाँ रखा जाना भी पाया गया था। वहीं, तमाम गड़बड़ियों के अलावा सबसे बड़ा मामला धर्मांतरण से जुड़ा हुआ पाया गया था। बाल गृह में रहने वाले छात्रों को बाइबिल पढ़ाए जाने का जिक्र रिपोर्ट में किया गया था। इसमें बताया गया था कि यहाँ बच्चों को बाइबिल पढ़ाने के लिए रोजाना एक पोस्टर भेजा जाता है। बच्चों को यहाँ ईसाई प्रार्थना भी करवाई जाती है। इससे टीम को अंदेशा हुआ कि यहाँ बड़े स्तर पर धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है।

बता दें कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और प्रशासन इस बाल गृह पर जल्द ही कार्रवाई कर सकता है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया है कि तत्काल बाल गृह में रहने वाले छात्र-छात्राओं को कहीं और शिफ्ट किया जाए, क्योंकि यहाँ उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।

6 साल की मासूम बच्ची से रेप की कोशिश कर रहा था अशफाक अहमद, अजमेर की दरगाह थाना पुलिस ने दबोचा

राजस्थान में 6 साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश कर रहे अशफ़ाक़ अहमद को अजमेर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी दरगाह थाना पुलिस की है। यह घटना 10 दिसम्बर (शुक्रवार) की है। पीड़िता बच्ची की माँ ने अगले दिन 11 दिसंबर (शनिवार) को पुलिस में शिकायत की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का रहने वाला है। फ़िलहाल वो अजमेर के लाखन कोटड़ी में रहता है। पीड़िता की माँ ने बताया कि वो जब रात 11 बजे घर काम से लौट कर आई तब आरोपित अशफाक अहमद उसकी बेटी के साथ अश्लील हरकतें का रहा था। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक वह बच्ची से रेप करने का प्रयास कर रहा था।

पुलिस के बयान के मुताबिक आरोपित पर धारा 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में पीड़िता की माँ के महिला अधिकारी के आगे बयान करवाए गए। जाँच में अशफाक के खिलाफ आरोप सही पाए गए। आरोपित पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजता था कॉलेज का शिक्षक अरशद, देता था शादी का प्रस्ताव: Whatsapp स्क्रीनशॉट्स वायरल, हुआ सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के बिजनौर के वीरा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के एक शिक्षक की शर्मनाक हरकत सामने आई है। शिक्षक अरशद ने ना केवल छात्राओं को व्हाट्सएप्प पर अश्लील मैसेज भेजकर चैटिंग की, बल्कि उनके सामने शादी का प्रस्ताव भी रखा। मामला प्रकाश में आने के बाद छात्राओं ने अपने परिजनों, हिंदू संगठनों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक घंटे तक कॉलेज के बाहर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। वहीं, कालेज प्रबंधन ने शिक्षक को सस्पेंड कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कॉलेज सपा की पूर्व विधायक रुचि वीरा का है। कॉलेज के शिक्षक अरशद ने एक छात्रा के व्हाट्सएप्प पर आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे। छात्रा ने जब अन्य छात्राओं से शिक्षक के मैसेज पर चर्चा की, तो पता चला कि वह इससे पहले भी कई छात्राओं को इस तरह के मैसेज भेज चुका है।

छात्रा ने इसकी जानकारी अपने परिजनों और एबीवीपी के पदाधिकारियों को दी। सोमवार (13 दिसंबर 2021) की दोपहर छात्राओं के परिजनों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कॉलेज पहुँचकर वहाँ जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपित शिक्षक अरशद के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। मामला बिगड़ता देखकर बाकी शिक्षकों ने भी आरोपित शिक्षक को निकालने की बात कहकर मामला शांत किया।

फोटो साभार: न्यूजरूम पोस्ट

बता दें कि शिक्षक द्वारा छात्राओं को भेजे गए अश्लील मैसेज सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। इनमें शिक्षक छात्राओं को शादी तक का प्रस्ताव भेज रहा है। इसको लेकर अभिभावकों में काफी आक्रोश है।

ASI मोहम्मद इकबाल की आत्महत्या के बाद ‘लड़ना होगा’ जैसे राजनीतिक बयान, भ्रष्टाचार के मामले में होनी थी पेशी: फंदे से लटका मिला शव

हरियाणा के पलवल जिले में पुलिस विभाग के ASI मोहम्मद इकबाल की मौत चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस पक्ष ने प्रथम दृष्टया इसको आत्महत्या माना है। पुलिस ने पूरे मामले की जाँच भी शुरू कर दी है। लेकिन कुछ राजनीतिक लोगों ने इस पूरे मामले को जाँच से पहले ही हत्या कहना शुरू कर दिया है। ये मामला थाना बहीन का है। घटना सोमवार (13 दिसंबर) सुबह की है।

थोड़ी ही देर में इस मामले में CBI जाँच आदि की माँग उठाई जाने लगी।

ककुछ अन्य तत्वों ने इस मामले में “लड़ना होगा” जैसे शब्द प्रयोग करने शुरू कर दिए।

साजिद अहमद

इस मामले में SP पलवल ने ASI इकबाल की मौत के वजह की जाँच DSP को सौंपी। जाँच किसी भी निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले ही सियासी बयानबाजी शुरू हो गई। कुछ ही समय में इस बयानबाजी में इकबाल के गाँव वाले भी शामिल हो गए। एक वीडियो में उस गाँव के सरपंच और इकबाल के कुछ रिश्तेदार एक अन्य पुलिस अधिकारी को गंदी-गंदी गालियों के साथ इकबाल की मौत का दोषी ठहराने लगे। इसी के साथ इस पूरे प्रकरण को जाँच पूर्व ही नया मोड़ दिया जाने लगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर इकबाल खान ने कथित तौर पर थाने के पास एक जर्जर इमारत में आत्महत्या की है। रविवार की शाम थाने में बने पुलिस आवास में उनके साथ एक अन्य सब इंस्पेक्टर भी सोया था। सोमवार सुबह वो साथी पुलिसकर्मी बाहर घूमने जाने के लिए कह कर गए। जब बहुत देर तक उनका पता नहीं चला तब उनकी तलाश शुरू हुई। इसी दौरान थाने के पास बनी कॉपरेटिव सोसाइटी की एक पुरानी बिल्डिंग में उनका शव लटकता पाया गया। एक बयान में इस बात की पुष्टि डीएसपी रत्नदीप बाली ने भी की है।

फाँसी के लिए बिजली का तार प्रयोग होना बताया जा रहा है। मृत ASI इकबाल एएसआई जिला नूंह के रीगड़ गाँव के निवासी थे। मोहम्मद इकबाल साल 1995 में हरियाणा पुलिस में भर्ती हुए थे। बहीन थाने में वो बस 2 दिन पहले आए थे। उस से पहले वो किठवाड़ी पुलिस चौकी व किठवाड़ी से पहले उटावड़ थाने में पोस्टेड थे। उनका शव पोस्टमार्टम व अन्य प्रक्रियाओं के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। उनका अंतिम संस्कार भी पुलिस द्वारा पूरे विभागीय सम्मान के साथ किया गया। इस अवसर पर पलवल जिले के पुलिस अधीक्षक दुग्गल ने इकबाल के परिजनों के प्रति सहानुभूति दिखाई। साथ ही सभी सहयोग देने की बात कही।

मृत ASI मोहम्मद इकबाल

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ASI इकबाल पर भ्रष्टाचार का केस चल रहा है। यह केस उन पर सितंबर में दर्ज हुआ था। इसमें उनके ऊपर पैसे के लेन देन का आरोप लगा था। कुछ समय बाद उनकी आवाज का सैम्पल भी लिया जाना था। इसी मुकदमे में उन्हें घटना के दिन (सोमवार) को विजिलेंस टीम के आगे पेश होना था। बताया जा रहा है कि इसी के चलते वो काफी तनाव में थे और ठीक से सो भी नहीं पा रहे थे।

बयानबाजी के बीच में स्थानीय DSP का भी बयान सामने आया है। उन्होंने प्रथम दृष्टया इस मामले को आत्महत्या का बताया। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर उन्होंने कहा कि हम जाँच करेंगे। अगर कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसे देख लेंगे। लेकिन फिलहाल मामला सुसाइड का है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में SP पलवल को सम्पर्क किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। SHO बहीन से बात हुई तो उन्होंने DSP की ही कही बातों को दोहराया। ASI मोहम्मद इकबाल पर चल रहे करप्शन के केस की उन्होंने पुष्टि की और कहा कि इसी केस में उन्हें पेशी पर जाना था। उनका वॉइस सैम्पल भी विजिलेंस विभाग को लेना था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि मृत्यु का कारण हैंगिंग (फंदे पर लटकना) ही आया है। SHO बहीन ने भी इस मामले को प्रथम दृष्टया आत्महत्या ही बताया।

‘जश्न-ए-कंगाल’: 20 सालों में पहली बार Fabindia को घाटा, दिवाली का उर्दूकरण करने वाली कंपनी को ₹116 करोड़ का नुकसान

20 सालों के इतिहास में पहली बार फैब इंडिया को घाटा हुआ है। फैब इंडिया की बिक्री में करीब एक तिहाई की कमी आई है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण लॉकडाउन को ही माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान कई ब्रांड रिटेलरों को कई हफ्तों तक शोरूम बंद रखने पर गए थे। हालाँकि ज्यादातर लोगों का कुछ और ही कहना है। लोगों का मानना है कि दिवाली के ठीक पहले फैब इंडिया के विज्ञापन के कारण ऐसा हुआ है।

सोशल मीडिया में लोग इसके मजे भी ले रहे हैं और तरह तरह के मीम्स बनाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक टैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं। इनमें #जश्नएक़िल्लत, #MahauleMaatam, #जश्नऐदिवालिया#Fabindia, #KalejaeThandai, #JashneKutai और #Jashn_e_Kangaal आदि शामिल हैं।

20 साल में पहली बार घाटा

जानकारी के मुताबिक, 2020-21 में फैब इंडिया का रिवेन्यू 30% तक कम हो गया और यह 1059 करोड़ रुपए रह गया है। 2021 के मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में इस कंपनी को 116 करोड़ रुपए का नुकसान सहना पड़ा है। ग्रामीण इलाकों से गारमेंट्स और फैब्रिक्स जैसे प्रोडक्ट्स शहरों तक पहुँचाने वाली इस कंपनी की बिक्री पिछले दो दशक में पहली बार कम हुई है।

क्यों हुआ था विवाद

दिवाली के मौके पर फैब इंडिया के एक विज्ञापन कर जमकर विवाद हुआ था। दरअसल उस दौरान अपने कपड़ों के लिए कंपनी ने एक विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में दिवाली के मौके पर जश्न-ए-रिवाज का नाम दिया गया था। इसी शब्द पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं और सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई थी। जिसके बाद सोशल मीडिया में बवाल हो गया और लोगों ने इसके बहिष्कार करने की माँग शुरू कर दी थी। फैब इंडिया ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए यह विज्ञापन हटा लिया था। फैब इंडिया ने लिखा था, “जैसा कि हम प्यार और प्रकाश के त्योहार का स्वागत कर रहे हैं। जश्न-ए-रिवाज फैबइंडिया का कलेक्शन है जो बेहद खूबसूरती से अपना सम्मान भारतीय परंपरा को देता है।”

इस ट्वीट में जश्न-ए-रिवाज शब्द को देख यूजर्स भड़क गए। भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने मामले को उठाते हुए लिखा था  कि दीपावली कोई जश्न-ए-रिवाज नहीं है। हिंदू त्योहार का इब्राहिमीकरण, ऐसी मॉडलों का प्रदर्शन जिन्होंने हिंदू परिधान न पहने हों, सबका बहिष्कार होना चाहिए और फैब इंडिया न्यूज जैसे ब्रांड को ऐसी हरकत के लिए आर्थिक हर्जाना चुकाना चाहिए। मालूम हो कि फैब इंडिया की शुरुआत 1960 में जॉन बिस्सेल ने की थी। वह फोर्ड फाउंडेशन ग्रांट पर कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम के सलाहकार के रूप में भारत आए थे।

मुस्लिम लड़कों से बात करो हिंदू लड़कियाँ… टीचर शब्बर खान ऐसे बनाता था कोचिंग की लड़कियों पर दबाव, खुद नाबालिग संग धराया

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ नाबालिग हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बनाने वाले आरोपित शब्बर मोहम्मद खान को रविवार (12 दिसंबर 2021) को हिंदू जागरण मंच के युवाओं ने रंगे हाथों पकड़ लिया।

पीड़िता के बयान के आधार पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) व अन्य धाराओं के तहत आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शब्बर मोहम्मद खान पिछोर में एक कोचिंग में पढ़ाता है। इस दौरान वह हिंदू छात्राओं पर मुस्लिम लड़कों से बात करने के लिए दबाव बनाता था।

पिछले महीने एक छात्रा ने टीचर शब्बर खान पर हिन्दू लड़कियों की मुस्लिम लड़कों से बातचीत कराने के लिए दबाव बनाने की बात अपने परिजनों को बताई थी। हालाँकि उन्होंने इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया था। जबकि हिन्दू जागरण मंच के कुछ युवाओं ने इस मामले पर आपत्ति जताते हुए शब्बर खान का विरोध किया था। इस बात को लेकर शब्बर खान और उसके साथियों ने विरोध करने वाले युवाओं के साथ मारपीट की थी।

इस घटना के बाद हिन्दू जागरण मंच जिला पिछोर ने संबंधित थाने का घेराव कर शब्बर खान और उसके दोस्तों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद से हिन्दू जागरण मंच के युवाओं ने टीचर शब्बर मोहम्मद खान की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना शुरू कर दिया था।

इसी दौरान 2 दिनों पहले उन्हें सूचना मिली थी कि शब्बर खान कार से एक नाबालिग बच्ची को चंदेरी घुमाने ले जा रहा है। युवाओं ने तत्काल इसकी सूचना बच्ची के परिजनों को दी। साथ ही हिन्दू जागरण मंच ने अपनी बामौर कला थाना इकाई टीम को इसके बारे में बताया और चंदेरी से आने वाली गाड़ियों की चेकिंग शुरू कराई। चेकिंग के दौरान पहली ही गाड़ी में आरोपित शब्बर खान नाबालिग बच्ची के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया।

बता दें कि हिंदू संगठन के युवाओं ने टीचर शब्बर मोहम्मद खान को बामौरकलां थाने को सुपुर्द कर दिया और बच्ची के परिजनों को इसके बारे में सूचित किया। बाद में बच्ची ने सारी घटना परिजनों को बताई, जिसके बाद परिजनों ने पिछोर थाना पहुँच कर आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

‘जामा मस्जिद -फतेहपुरी में बैठ सकते थे 25-30 हजार मुस्लिम, हिन्दुओं के पास जगह नहीं’: काशी में साकार हुआ स्वामी श्रद्धानंद का सपना

हिन्दू मंदिरों के सम्बन्ध में स्वामी श्रद्धानंद ने आज से लगभग 100 वर्षों पहले जो विचार रखे थे, ‘काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर’ उसका जीवंत दृष्टान्त है। 1920 के दशक में भारत की जनसंख्या 25 करोड़ के आसपास थी, जिसमें मुस्लिमों की संख्या 3-4 करोड़, यानी 15% के आसपास थी। बावजूद उनके पास जामा और फतहपुरी जैसी बहुत सी ऐसी मस्जिदें थी जहाँ एक साथ 25 से 30 हजार मुस्लिम श्रोता एक साथ बैठ सकते थे। किन्तु हिन्दुओं के पास केवल एक मात्र लक्ष्मीनारायण धर्मशाला थी, जहाँ पर कठिनाई से 800 व्यक्ति ही बैठकर सभा कर सकते थे।

स्वामीजी ने अपनी पुस्तक ‘हिन्दू संगठन क्यों और कैसे?’ में लिखा था, “आज के हिन्दू एक दूसरे मिलने को नितांत उदासीन रहते हैं। उसका प्रमुख कारण है कि उनके पास मिलने के लिए तथा सभा आदि करने के आयोजन के लिए कोई सार्वजनिक स्थान नहीं है। जातिगत मंदिरों में इतना भी स्थान नहीं है कि वहाँ 100 या 200 व्यक्ति इकट्ठे बैठ जाएँ।” ऐसे में उन्होंने सुझाव दिया था, “प्रत्येक नगर और शहर में एक हिन्दू-राष्ट्र मंदिर की स्थापना अवश्य की जानी चाहिए जिसमें एक साथ 25 हजार लोग समा सकें।”

आज जब हिन्दुओं की संख्या 100 करोड़ से अधिक है, ऐसे में यह बहुत आवश्यक हो जाता है कि ऐसे मंदिरों में कम से कम 1 से 2 लाख हिन्दुओं के इकट्ठे होने की सुविधा हो। और मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ‘काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर’ में इस बात का बहुत सावधानी से ध्यान रखा गया है। स्वामीजी ने मंदिर परिसर में भारत माता के एक सजीव नक़्शे की बात कही थी, ताकि प्रत्येक भारतीय इसके सामने खड़े होकर यह प्रतिज्ञा दोहराए कि वह अपनी मातृभूमि को उसी प्राचीन गौरव के स्थान पर पहुँचाने के लिए प्राणों तक की बाजी लगा देगा, जिस स्थान से उसका पतन हुआ था।

मैंने कल्पना नहीं की थी कि स्वामीजी के इस विचार को कभी उतनी महत्ता मिलेगी, किन्तु काशी कॉरिडोर के चित्रों देखते हुए मेरी दृष्टि भारत माता की उस प्रतिमा पर ठहर गई जो स्वामीजी के विचारो के साक्षी होने का प्रमाण देती है। यहाँ आदि शंकराचार्य एवं अहिल्याबाई होल्कर के साथ-साथ भारत माता की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इन्हीं स्वामीजी ने कॉन्ग्रेस एवं गाँधी को दलितोद्धार, अस्पृश्यता, महिला सशक्तिकरण, हिन्दू पुनरुत्थान, बाल-विवाह, धर्मांतरण और शिक्षा जैसे विषयों पर एक से बढ़कर एक उपचारात्मक उपाय सुझाए थे, किन्तु किसी ने उसपर तनिक भी ध्यान देना आवश्यक नहीं समझा।

उस समय दिल्ली एवं आगरा के चर्मकार समाज की एक मात्र यह माँग थी कि उन्हें उन कुओं से पानी भरने दिया जाए, जहाँ से हिन्दू एवं मुसलमान दोनों भरते हैं। स्वामीजी ने इस सम्बन्ध में कॉन्ग्रेस के एक मुस्लिम नेता से सहायता माँगी तो उसने उत्तर दिया, “यदि हिन्दुओं ने आज्ञा दे भी दी तो जब चर्मकार समाज के लोग कुआँ तक आएँगे तो मुस्लिम उन्हें बल-प्रयोग कर के भगा देंगे।” स्वामीजी उस कॉन्ग्रेसी नेता के इस उत्तर से बहुत आहत हुए और उन्होंने 1921 में एक पत्र के माध्यम से महात्मा गाँधी को इस बात से अवगत करवाया ।

लेकिन, गाँधी ने भी इसकी कोई सुध नहीं ली। आज इतने वर्षों बाद जब हम तुलना करते हैं कि गाँधी और नेहरू के नामों की माला जपते हुए कैसे असंख्य स्वामीजी जैसे महापुरुषों की उपेक्षा की गई, वहीं भाजपा सरकार जिस प्रकार से इन महापुरुषों का अनुसरण कर रही है यह वास्तव में हिन्दुओं के लिए हर्ष का विषय होना चाहिए। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (14 दिसंबर, 2021) को काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन किया। साथ ही उन्होंने कई विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

‘सुनियोजित योजना’ के तहत हुई लखीमपुर हिंसा: UP पुलिस की SIT ने कोर्ट को दी जानकारी

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में यूपी पुलिस की SIT ने सीजेएम (चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट) कोर्ट को बताया है कि किसानों पर गाड़ी चढ़ने की पूरी घटना किसी लापरवाही का अंजाम नहीं थी बल्कि उसके लिए पहले से साजिश रची गई थी। एसआईटी ने मामले को ‘सुनियोजित योजना’ करार दिया। साथ ही सभी आरोपितों की रिमांड के लिए उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया।

सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि उन्हें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत सभी 13 आरोपितों के ऊपर जानलेवा हमला और हत्या की धारा बढ़ानी है। अब सुनवाई के बाद अदालत ने इस केस पर फैसले को सुरक्षित रख लिया है। वरिष्ठ पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एसपी यादव ने अदालत के सामने अनुरोध किया कि 13 आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 307, 326, 34 के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम की धारा 3, 25 और 30 को भी लागू किया जाए। इसके अलावा मामले में लगी धारा 279 (रैश ड्राइविंग), 338 और 304ए को केस से हटाया जाए।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में 3 अक्टूबर को हिंसा के दौरान चार किसान, एक पत्रकार, 3 भाजपा कार्यकर्ता समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे आशीष मिश्र समेत 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में 13 आरोपित अब भी जेल में हैं। दूसरे पक्ष से सभासद सुमित जायसवाल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

इसी केस में पिछले माह सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी आई थी। कोर्ट का कहना था कि लखीमपुर हत्याकांड की जाँच कर रहे अधिकारियों को अपग्रेड किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से वरिष्ठ अधिकारियों की सूची भी माँगी थी, जिसके बाद यूपी सरकार ने जाँच का नेतृत्व करने के लिए हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज का चुनाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कहा था।

मालूम हो कि आरोपितों के विरुद्ध जाँच में तेजी के लिए यूपी पुलिस की एसआईटी ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पुलिस ने घटना के चश्मदीदों से सामने आकर बयान देने की अपील की थी। टीम ने कहा था कि जो कोई भी घटना संबंधी जानकारी देगा उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसके अलावा संदिग्धों की शिनाख्त के लिए यूपी पुलिस ने इनाम की घोषणा की थी। बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या मामले में भी किसानों को नोटिस देने के बाद उनके पूछताछ की गई थी।

‘जनता से जुड़े रहिए, आम आदमी तक पहुँचे योजनाएँ’: काशी में 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों का जमावड़ा, PM मोदी ने तलब किए रिपोर्ट कार्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय काशी दौरे पर हैं। पीएम ने भाजपा शासित राज्यों के 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इसमें सरकार की नीतियों, योजनाओं के प्रचार-प्रसार, आगामी विधानसभा चुनाव, जनता से जुड़ाव जैसे तमाम बिंदुओं पर गहन मंथन हुआ। पीएम नरेंद्र मोदी ने इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से उनके कामकाज की रिपोर्ट कार्ड ली। इसके अलावा काशी मॉडल को प्रचारित-प्रसारित करने को भी कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों से आगे के प्लान के बारे में जाना।

बैठक में पीएम ने आगामी विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारी के लिए सख्ती से भाई-भतीजावाद और पैरोकारी को दरकिनार करने की बात कही। पीएम ने बैठक में मुख्यमंत्रियों से कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर सतर्क रहने के लिए कहा है। इसके साथ ही उन्होंने सबका साथ-सबका विकास के सपने को धरातल पर लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि संगठन में सभी के बीच संवाद जारी रहना चाहिए, नीतियों और योजनाओं के प्रचार-प्रसार में कमी नहीं रहना चाहिए। पीएम ने कहा कि इसका पूरा ध्यान रखें कि हर हाल में योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुँचे।

पीएम मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों से कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं और किए गए कार्यों का संदेश जनता तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सब कुछ होती है। विकास युक्त एवं भ्रष्टाचार मुक्त नीति पर काम करें। जानकारी के मुताबिक, पीएम ने योगी सरकार की तारीफ की तो वहीं सभी मुख्यमंत्रियों को नसीहत भी दी। योगी सरकार की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सच्चे मन से अगर कोई काम किया जाए तो उसे पूरा होने से कोई रोक नहीं सकता।

इसके अलावा पीएम मोदी ने यूपी चुनाव को लेकर भी बड़ी बैठक की, जिसमें यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव मौर्य और दिनेश शर्मा समेत उत्तर प्रदेश संगठन के पदाधिकारी, प्रभारी, सह प्रभारी मौजूद थे। यह बैठक वाराणसी के ऑफिसर गेस्ट हाउस में हुई। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीएल संतोष, सुनील बंसल, धर्मेंद्र प्रधान, सभी सह प्रभारी, संगठन के नेता, वाराणसी भाजपा के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इस मीटिंग में यूपी चुनाव को लेकर रणनीति बनी और संगठन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। यूपी में आने वाले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं।

ऐसे में अन्य पार्टियों समेत सत्ताधारी बीजेपी भी रणनीतियाँ बनाने में जुट गई है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्वेद मंदिर का दौरा किया और सदाफलदेव की प्रतिमा पर पुष्प भी अर्पित किए। इस दौरान उनके साथ यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।