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‘बिहार की सड़कों पर नमाज बंद होगी या नहीं’ – सवाल पर बोले CM नीतीश कुमार – ये सब कोई मुद्दा है?

गुरुग्राम और नोएडा में सार्वजानिक स्थलों पर भारी जनविरोध के चलते नमाज़ बैन होने के बाद अब इस से मिलती जुलती सुगबुगाहट बिहार में भी सुनाई देने लगी है। भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचैल ने बिहार में इसकी पहल करने का ऐलान कर दिया है। बिहार सरकार में पंचायती राजमंत्री सम्राट चौधरी ने भी भाजपा विधायक का समर्थन किया था। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुताबिक इन बातों की चर्चा से दूर रहना ही उचित है। उन्होंने इसे मुद्दा न बनाने की अपील की है।

मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में नीतीश कुमार ने कहा, “इन सबसे कोई मतबल नहीं। कहीं कोई पूजा करता है, कहीं कोई गाता है। ये सब कोई मुद्दा है? अपना-अपना विचार है, हम लोगों का ऐसा विचार है। हम तो सबको मान कर चलते हैं। हमारे लिए सभी लोग एक समान हैं। सबको अपने ढंग से खुद ही ध्यान रखना चाहिए। ये कोई एक कम्युनिटी की बात नहीं है। सब धर्म के लोगों को इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए। जब हमने कोरोना की गाइडलाइन बनाई थी, तब सबने उसे माना था। पता नहीं कौन किस बात को ले कर क्या बोलता है। हमारे लिए इन सब चीजों का कोई मतलब नहीं। पता नहीं ये मुद्दा कैसे बन जाता है।”

इस से पहले भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचैल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “जिस तरह हरियाणा में खुले में नमाज़ पर रोक लगाई है, वैसे ही बिहार में भी लगाना चाहिए। हम इसकी पहल करेंगे। शुक्रवार को बेवजह सड़क को जाम कर देना, खुले में सड़क पर नमाज़ पढ़ना… आस्था है तो घर में पढ़ें, मस्जिद फिर क्यों हैं? हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर बहुत ही धन्यवाद के पात्र हैं। अगर ये सब नहीं रोका गया तब माहौल तनावपूर्ण होगा। 75 साल पहले ही धर्म के आधार पर भारत-पाकिस्तान का बँटवारा हो चुका है। लेकिन आज भी मुद्दा वहीं का वहीं है। अगर हम नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ियाँ माफ़ नहीं करेंगीं।”

भाजपा विधायक हरिभूषण ने आगे कहा, “CM नीतीश मानें या नहीं, ये उनके ऊपर है लेकिन इसे दुनिया मान रही है। आपने देखा होगा कि बलिदानी CDS पर भी कमेंट किए गए हैं। इन सबसे आने वाले खतरे को भाँपना चाहिए। भारत में कुछ नहीं बल्कि बहुत ऐसे हैं। बिहार में ही देखिए, यहाँ पर वन्देमातरम का विरोध किया गया।”

ऑटो ड्राइवर अंसार ने बंधक बना कर 5 महीने तक किया महिला का रेप, बेटी को मार डालने की धमकी भी: अब पुलिस ने दबोचा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोहेफिजा थाना पुलिस ने बलात्कार के मामले में फरार चल रहे आरोपित ऑटो चालक अंसार को गिरफ्तार कर लिया है। एक महिला ने ऑटो चालक के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। शिकायत के अनुसार, वह महिला की बेटी की हत्या करने की धमकी देकर उसे बंधक बनाकर उसके साथ लगातार पाँच माह से दुष्कर्म कर रहा था। इस बीच महिला के पति की मौत हो गई, तब भी ऑटो चालक ने उसे घर नहीं जाने दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोहेफिजा थाना पुलिस ने बीते दो माह से बलात्कार के मामले में फरार चल रहे आरोपित अंसार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित के ऊपर 5000 रुपए का इनाम घोषित था। पीड़िता ने 19 अक्टूबर 2021 को उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था।

कोहेफिजा थाना पुलिस के मुताबिक, 30 वर्षीय पीड़ित महिला गौतम नगर में रहती है। उसकी एक बेटी है। शहर में आने-जाने के दौरान महिला का परिचय गाँधी नगर में रहने वाले ऑटो चालक अंसार से हो गया था। महिला ने पुलिस को बताया कि अंसार ने खानू गाँव में एक घर किराए पर ले रखा था। 15 मई 2021 को अंसार ने महिला को मिलने के लिए उसी मकान में बुलाया था। वह बेटी को लेकर अंसार के घर पहुँची, तभी वहाँ अंसार ने बेटी की हत्या करने की धमकी देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद अंसार ने महिला को धमकाते हुए उसे अपने साथ रहने को मजबूर किया।

पुलिस ने बताया कि वह आए दिन महिला के साथ बलात्कार करता। आरोपित महिला को घर में बंद करके काम पर जाता था। इस बीच बीमार चल रहे महिला के पति की मौत हो गई। महिला ने जब पति के जनाजे में शामिल होने के लिए उससे इजाजत माँगी, तो अंसार ने उसके साथ मारपीट की। पिछले दिनों किसी तरह से महिला आरोपित के चुंगल से छूटकर अपने ससुराल पहुँची, जहाँ उसने सास को अपनी आपबीती बताई और थाने पहुँचकर मामला दर्ज कराया। पुलिस इसके बाद से ही आरोपित की तलाश में जुट गई थी।

‘5 साल में दोगुनी हो गई बनारस आने वाले पर्यटकों की संख्या’: ‘विहंगम योग संस्थान’ के 98वें स्थापना दिवस पर बोले PM मोदी – रात 12 बजे…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (14 दिसंबर, 2021) को वाराणसी में ‘सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान’ के 98वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कल काशी ने भव्य विश्वनाथ धाम महादेव के चरणों में अर्पित किया, और आज विहंगम योग संस्थान का ये अद्भुत आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस दैवीय भूमि पर ईश्वर अपनी अनेक इच्छाओं की पूर्ति के लिए संतों को ही निमित्त बनाता है। उन्होंने कहा कि काशी की ऊर्जा अक्षुण्ण तो है ही, ये नित नया विस्तार भी लेती रहती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि आज गीता जयंती का पुण्य अवसर है, आज के ही दिन कुरुक्षेत्र की युद्ध की भूमि में जब सेनाएँ आमने-सामने थीं, मानवता को योग, अध्यात्म और परमार्थ का परम ज्ञान मिला था। पीएम मोदी ने सद्गुरु सदाफलदेव को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने समाज के जागरण के लिए विहंगम योग को जन-जन तक पहुँचाने के लिए यज्ञ किया था और आज वो संकल्प बीज हमारे सामने इतने विशाल वट वृक्ष के रूप में खड़ा है।

प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि हमारा देश इतना अद्भुत है कि, यहाँ जब भी समय विपरीत होता है, कोई न कोई संत-विभूति, समय की धारा को मोड़ने के लिए अवतरित हो जाती है। उन्होंने कहा कि ये भारत ही है जिसकी आज़ादी के सबसे बड़े नायक को दुनिया महात्मा बुलाती है। बकौल पीएम मोदी, आज देश आजादी की लड़ाई में अपने गुरुओं, संत और तपस्वियों के योगदान को स्मरण कर रहा है, नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित करा रहा है। उन्होंने ख़ुशी जताई कि विहंगम योग संस्थान भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “बनारस जैसे शहरों ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी भारत की पहचान के, कला के, उद्यमिता के बीजों को सहेजकर रखा है। आज जब हम बनारस के विकास की बात करते हैं, तो इससे पूरे भारत के विकास का रोडमैप भी बनता है। रिंग रोड का काम भी काशी ने रिकॉर्ड समय पर पूरा किया है। बनारस आने वाली कई सड़कें भी अब चौड़ी है गई हैं। जो लोग सड़क के रास्ते बनारस आते हैं, वो सुविधा से कितना फर्क पड़ा है, इसे अच्छे से समझते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी के ‘सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान’ में कहा, “मैं जब काशी आता हूँ या दिल्ली में भी रहता हूँ तो प्रयास रहता है कि बनारस में हो रहे विकास कार्यों को गति देता रहूँ। कल रात 12 बजे के बाद जैसे ही मुझे अवसर मिला, मैं फिर निकल पड़ा था अपनी काशी में जो काम चल रहे हैं, जो काम किया गया है, उनको देखने के लिए। गौदोलिया में जो सौंदयीकरण का काम हुआ है, देखने योग्य बना है। मैंने मडुवाडीह में बनारस रेलवे स्टेशन भी देखा। इस स्टेशन का भी अब कायाकल्प हो चुका है। पुरातन को समेटे हुए नवीनता को धारण करना, बनारस देश को नई दिशा दे रहा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान दिलाया कि कैसे बनारस के विकास का सकारात्मक असर यहाँ आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि 2014-15 के मुकाबले में 2019-20 में यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है। 2019-20 कोरोना कालखंड में अकेले बाबतपुर एयरपोर्ट से ही 30 लाख से ज्यादा लोगों का आना-जाना हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वाधीनता संग्राम के समय सद्गुरु ने हमें मंत्र दिया था- स्वदेशी का।

बकौल पीएम मोदी, आज उसी भाव में देश ने अब ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ शुरू किया है। आज देश के स्थानीय व्यापार-रोजगार को, उत्पादों को ताकत दी जा रही है, लोकल को ग्लोबल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा गौ-धन हमारे किसानों के लिए केवल दूध का ही स्रोत न रहे, बल्कि हमारी कोशिश है कि गौवंश प्रगति के अन्य आयामों में भी मदद करे। आज देश गोबरधन योजना के जरिए बायो-फ्यूल को बढ़ावा दे रहा है, ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने लोगों से एपीएल की, “मैं आज आप सभी से कुछ संकल्प लेने का आग्रह करना चाहता हूँ। ये संकल्प ऐसे होने चाहिए जिसमें सद्गुरु के संकल्पों की सिद्धि हो और जिसमें देश के मनोरथ भी शामिल हों। ये ऐसे संकल्प हो सकते हैं जिन्हें अगले दो साल में गति दी जाए, मिलकर पूरा किया जाए। एक संकल्प ये हो सकता है- हमें बेटी को पढ़ाना है, उसका स्किल डेवलपमेंट भी करना है। अपने परिवार के साथ साथ जो लोग समाज में जिम्मेदारी उठा सकते हैं, वो एक दो गरीब बेटियों के स्किल डेवलपमेंट की भी ज़िम्मेदारी उठाएँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी में कहा कि एक और संकल्प हो सकता है पानी बचाने को लेकर। उन्होंने सलाह दी कि हमें अपनी नदियों को, गंगा जी को, सभी जल स्रोतों को स्वच्छ रखना है।

बता दें कि स्वरवेद की व्युत्पत्ति दो शब्दों से ली गई है- ‘स्वाह’ का अर्थ है ब्रह्म, सार्वभौमिक ऊर्जा और ‘वेद’ जिसका अर्थ है ज्ञान। इसलिए, स्वर्वेद एक अद्वितीय आध्यात्मिक ग्रन्थ है जो सार्वभौमिक होने के ज्ञान से संबंधित है। आध्यात्मिक पथ के साधक जिन्हें विहंगम योग की असाधारण तकनीक में दीक्षित किया गया है, वे वास्तव में अपने जीवन के हर पहलू को विकसित करना शुरू कर देते हैं। युद्धस्तर पर जिस तरह से पिछले 18 सालों से निर्माण कार्य जारी है आप उसकी विशालता और व्यापकता का स्वतः अंदाजा लगा सकते हैं।

जब इंदिरा गाँधी पहुँची थीं देवबंद, दूरदर्शन पर बाँधे गए थे दारुल उलूम की तारीफों के पुल: काशी-अयोध्या के विरोधी क्या कहेंगे इस पर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन किया, जिसका दूरदर्शन समेत लगभग सभी खबरिया चैनलों पर सीधा प्रसारण हुआ। ये न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए एक बड़ा मौका था क्योंकि भगवान शिव की नगरी हजारों वर्षों से भारत के सबसे बड़े आध्यात्मिक स्थलों में से एक रही है और आक्रांताओं ने यहाँ बार-बार तबाही मचाई। लेकिन, कुछ लोगों ने इसका भी विरोध किया। ये वही लोग हैं, जो 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के देवबंद दौरे पर चुप रहते हैं।

‘प्रसार भारती आर्काइव्स’ पर 21 मार्च, 1980 का वो वीडियो भी उपलब्ध है। इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह देवबंद दौरे पर पहुँचीं इंदिरा गाँधी के दौरे को कवर किया गया था। दूरदर्शन ने इस वीडियो में बताया था कि कैसे उत्तर भारत का ये छोटा सा शहर ‘मजहब, इतिहास और विद्वता’ के विकास में बड़ा योगदान रखता है। इसमें बताया गया था कि इस्लामी विद्वता का एक दुनिया में सबसे बड़े केंद्रों में से एक है, लेकिन इसकी शुरुआत मौलाना मोहम्मद कासमी ने एक छोटे से मदरसे के रूप में की थी।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे बैकग्राउंड में नमाज की आवाज़ आती रहती है और प्रस्तोता बताता है कि कैसे इस्लाम पहली बार दुनिया में तब अवतरित हुआ तब एक पहाड़ पर एक फ़रिश्ते ने मुहम्मद को अल्लाह के बारे में लोगों को बताने के लिए कहा। साथ ही कई मौलानाओं का नाम बता कर बताया गया कि दारुल उलूम देवबंद में कितने विद्वान हुए हैं। बताया गया था कि कैसे कला से लेकर नैतिकता तक, यहाँ इस्लाम के तहत सब पढ़ाया गया।

उस समय तक दारुल उलूम देवबंद से 20,000 लोग स्नातक हुए थे, जिनमें से एक चौथाई बाहर से आए थे। सभी विद्यार्थियों को यहाँ मुफ्त में रहने की सुविधा है। बता दें कि उस समय दारुल उलूम देवबंद के 100 वर्ष पूरे हुए थे। साथ ही जुमे की नमाज और उसके बाद होने वाले ‘पवित्र कुरान’ के पाठ को भी दिखाया गया था। तब प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गाँधी ने देश-दुनिया से आए लोगों का स्वागत करते हुए इस पर ख़ुशी जताई थी कि कई धर्मों के विद्वान और कई देशों के प्रतिनिधि इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।

‘एक छोटे से शहर में इतनी बड़ी भीड़ के लिए उत्तम व्यवस्था’ करने के लिए इंदिरा गाँधी ने कार्यक्रम के आयोजकों को बधाई भी दी थी। इस्लामिक विद्वता की दुनिया में दारुल उलूम की जगह को बताने के लिए उसमें दुनिया भर के विद्वानों की उपस्थिति को भारत के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा गया था कि स्वतंत्रता संग्राम में भी इसका योगदान था। इंदिरा गाँधी ने कहा था कि भारतीय संस्कृति में योगदान के लिए दारुल उलूम देवबंद की प्रशंसा कि वो इस संस्था के 100 वर्ष के मौके पर दुआ करती हैं कि ये आगे भी भारत और इस्लाम को आगे बढ़ाता रहे, क्योंकि ये इंसानियत की खिदमत करता है।

जब 2020 में अयोध्या में राम मंदिर का भूमि-पूजन हुआ था और उसका सीधा प्रसारण हुआ था, तब भी लिबरल जमात ने इसे ‘सरकारी पैसों से धार्मिक कार्य’ बताते हुए सेकुलरिज्म के खिलाफ करार दिया था। जबकि सच्चाई ये है कि राम और शिव इस देश के आराध्य हैं और उनका कार्य किसी खास धर्म नहीं, देश का कार्य है। विकास पूरे अयोध्या और काशी का हुआ है, किसी खास धर्म का नहीं। वहाँ हर धर्म-मजहब के लोग हैं, सभी को बराबर इसका लाभ मिलेगा।

हिंदू लड़कियों को भोजन में मांस, जबरन क्रॉस बाँध बाइबल पढ़ने को मजबूर: ‘कोलकाता की पिशाच’ वाली संस्था पर FIR

गुजरात में मदर टरेसा द्वारा स्थापित की गई एक ईसाई संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के बाल गृह पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगा है। गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2003 की धारा 295 (ए) के तहत वडोदरा शहर स्थित इस बाल गृह पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और लड़कियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन देने का मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, संस्था ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी मयंक त्रिवेदी की शिकायत पर रविवार (12 दिसंबर 2021) को मकरपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पिछले दिनों (9 दिसंबर) मयंक त्रिवेदी ने जिले की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के साथ मकरपुरा क्षेत्र में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ द्वारा संचालित लड़कियों के बाल गृह का दौरा किया था।

शिकायत में कहा गया है कि अपने दौरे के दौरान त्रिवेदी ने पाया कि बाल गृह में लड़कियों को ईसाई धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने और ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा था। शिकायत में बताया गया:

“10 फरवरी 2021 से 9 दिसंबर 2021 के बीच संस्था हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों में शामिल रही है। गले में क्रॉस बाँधकर लड़कियों को ईसाई धर्म अपनाने का लालच दिया जा रहा है। लड़कियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्टोररूम की टेबल पर जबरन बाइबल रखकर उन्हें पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

वहीं ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी‘ के मैनेजमेंट ने जबरन धर्मांतरण के आरोपों को गलत बताया है। ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम किसी भी प्रकार से धर्म परिवर्तन गतिविधि में शामिल नहीं हैं। हमारे बाल गृह में 24 लड़कियाँ हैं। ये लड़कियाँ हमारे साथ रहती हैं और वे हमारी ही तरह हर नियम का पालन करती हैं। हमने किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया है और न ही किसी को ईसाई धर्म में शादी करने के लिए मजबूर किया है।”

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि बाल कल्याण समिति की शिकायत के अनुसार, संगठन ने एक हिंदू लड़की को ईसाई परिवार में शादी करने के लिए मजबूर किया था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाल गृह में रहने वाली लड़कियों को हिंदू होने के बावजूद मांसाहारी भोजन परोसा जाता था।

सहायक पुलिस आयुक्त एसबी कुमावत ने कहा कि त्रिवेदी द्वारा लगाए गए आरोपों की एक समिति द्वारा जाँच करने के बाद जिला कलेक्टर ने संगठन के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश जारी किया था।

बता दें कि जिला कलेक्टर ने बाल कल्याण समिति की शिकायत के बाद एक समिति का गठन किया था। कुमावत के अनुसार, कई विभागों के सदस्यों की एक टीम ने इन आरोपों की जाँच की थी, जिसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज की गई थी। पुलिस आरोपों की जाँच करेगी और इससे जुड़े सबूत जुटाएगी, ताकि वह मामले की तह तक पहुँच सके।

कौन थी मदर टेरेसा

मदर टेरेसा वो थीं जिन्होंने नॉबेल पुरस्कार लेते वक्त 1979 में कहा था कि शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा गर्भपात है। मदर टेरेसा वो थीं जिन्होंने 984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड का समर्थन किया था। मदर टेरेसा वो थीं, जिसके लिए लेखक क्रिस्टोफर हित्चेंस ने ‘मिशनरी पोजीशन’ नाम की किताब में उन्हें ‘घोउल ऑफ़ कोलकाता (कलकत्ता की पिशाच)’ लिखा है।

‘हमारी जिंदगी भर की मजदूरी सफल हो गई’ : PM मोदी के साथ भोजन कर गदगद हुए मजदूर; अब्दुल्ला, सैफुल्लाह सबने जाहिर की खुशी

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन मजदूरों के साथ भोजन करके एक बार फिर से पूरे देश का दिल जीत लिया। उन्होंने कल लोकार्पण के बाद राजस्थान के सालासर बालाजी निवासी महावीर और किशन को अपने दाएँ-बाएँ बिठाकर भोजन ग्रहण किया। वहीं अब्दुल्ला, राशिद और सैफुल्लाह भी इस क्षण के साक्षी बने।

आज इन सभी मजदूरों के अनुभव पर प्रकाशित एक रिपोर्ट को पीएम नरेंद्र मोदी की आधिकारिक साइट वाले ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल के मालदा के रहने वाले अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन देश के पीएम उन पर फूल बरसाएँगे और उनके साथ फोटो खिंचवाएँगे। ऐसा लग रहा है जैसे अभी किसी खूबसूरत सपने से जागे हों लेकिन अभी उस सपने से बाहर न आ सके हों।

राशिद और सैफुल्लाह ने भी पीएम के साथ भोजन करने के बाद कहा कि उनकी जिंदगी भर की गई मजदूरी सफल हो गई। पीएम मोदी कुर्सी छोड़ उनके साथ जमीन पर बराबर बैठे और सबके साथ हर-हर महादेव का उद्घोष भी किया। पीएम के दाएँ-बाएँ बैठने वाले श्रमिकों ने खुद को सौभाग्यशाली बताया। साथ ही कहा कि उन्होंने पूरे परिवार सहित गाँव के लोगों को भी बता दिया था कि क्या होने वाला है और सभी लोग कॉरिडोर से संबंधी खबरें 1 हफ्ते पहले से देख रहे थे।

इसी तरह पीएम मोदी के आसपास बैठकर भोजन लेने वाले श्रमिकों ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्हें लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया। वहीं पीएम ने भी कहा कि कॉरिडोर का काम उन्हीं लोगों के कारण संभव हो पाया है। वह सब अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाएँ।

बता दें कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण के अवसर पर मटर-पनीर, आलू-मटर, आलू बंदगोभी और चने की सब्जी बनाई गई थी। श्रमिकों के साथ भोजन करने के दौरान पीएम ने रोटी-सब्जी साग, प्रसाद , पापड़, लड्डू लिया था और रोटी खत्म करने के बाद वह बोले- “अरे भाई मुझे भी चावल-दाल मिलेगा।” इसके बाद उन्होंने चावल दाल खाया और आखिर में खीर चखी। 

‘CDS जनरल बिपिन रावत मार्ग’: दिल्ली के ‘अकबर रोड’ का नाम बदलने की माँग, हिन्दू संगठनों ने चिपकाया स्टीकर, BJP दिल्ली की भी यही माँग

दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर पर दिल्ली में सड़क रखने के लिए हिन्दू संगठनों ने मंगलवार (14 दिसंबर) को नई दिल्ली स्थित अकबर रोड के बोर्ड के ऊपर ‘CDS जनरल बिपिन रावत मार्ग’ का स्टीकर चिपका दिया। यह घटना दोपहर 2 से 2.30 के बीच की बताई जा रही है।

आज़ाद महेंद्र कुमार

स्टीकर चिपकाने वाले व्यक्ति में प्रमुख नाम आज़ाद महेंद्र कुमार का आ रहा है। महेंद्र कुमार अपनी सोशल मीडिया पर अपने नाम के साथ आज़ाद शब्द लगाता है। अकबर मार्ग के नाम पर चिपकाए गए स्टीकर में लिखा गया है कि, ‘जनरल बिपिन रावत अमर रहें। भारतीय सेना के सम्मान में। ‘ इसी के साथ बीच में CDS जनरल बिपिन रावत की तस्वीर लगा कर आस पास मोमबत्ती के साथ उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। अकबर के नाम के ऊपर चिपकाए गए इस स्टीकर को तिरंगे के रंग में रंगा गया है।

चिपकाया गया स्टीकर

आज़ाद महेंद्र कुमार ने वीडियो जारी करते हुए कहा है कि हम चाहते हैं कि मुगलों के नाम बदले जाएँ। हमने सेना के सम्मान की खातिर इस काम को किया है। हम पुलिस के छोटे से हवलदार का भी सम्मान करते हैं। CDS जनरल रावत के नाम पर सड़क हमारी माँग है। इसी के साथ वहाँ भारतीय सेना जिंदाबाद और जनरल बिपिन रावत अमर रहें के नारे भी लगाए गए।

उधर दिल्ली भाजपा पहले ही अकबर रोड को CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर रखने की माँग कर चुकी है। दिल्ली नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को 10 दिसंबर को भेजे गए पत्र में बीजेपी (BJP) दिल्ली के मीडिया प्रभारी नवीन कुमार जिंदल ने ये आवाज उठाई थी। पत्र में लिखा गया था कि ऐसा करना जनरल रावत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस माँग पर नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा था कि हम इस पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं। हम ऐसा हमारे अधिकार क्षेत्र में जरूर करेंगे। सड़क का नाम बदलने में कुछ प्रावधानों को पूरा करना होता है। हम उस मार्ग की भी तलाश में हैं जिसको CDS जनरल रावत के नाम पर रखा जा सके।

दबोचा गया दलित बच्ची के अपहरण और रेप का आरोपित मोहम्मद मेजर, नेपाल भागने की फिराक में था: भाई रह चुका है मुखिया

बिहार के अररिया में नाबालिग दलित बच्ची के अपहरण और रेप के आरोपित मोहम्मद मेजर गिरफ्तार कर लिया गया है। मोहम्मद मेजर नेपाल भागने की फिराक में था। यह गिरफ्तारी वारदात के लगभग 12 दिन बाद हुई है। इस बीच आरोपित दिल्ली NCR में जगह बदलता रहा। पुलिस को मोहम्मद मेजर दिल्ली के चाँदनी चौक में मिला। अररिया पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। यह गिरफ्तारी 13 दिसंबर (सोमवार) को की गई है।

मीडिया से बात करत्ते हुए अररिया के पुलिस अधीक्षक हृदयकांत ने बताया कि, “बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद मोहम्मद मेजर फरार चल रहा था। हमें उसके दिल्ली की तरफ होने की सूचना मिली। हमने उसी क्षेत्र में एक पुलिस टीम भेज दी। आरोपित की जानकारी हमें जहाँ भी मिलती रही हमने वहाँ छापेमारी की। आरोपित पहले नोएडा गया, फिर दिल्ली में छिपने का प्रयास किया, फिर गुरुग्राम, फिर मेरठ गया। इसने अपने जान-पहचान में छिपने की तमाम कोशिश की। लेकिन कोई भी इसको अपने यहाँ शरण देने के लिए राज़ी नहीं हुआ। सभी राज्यों की पुलिस ने हमें काफी सहयोग किया। इसके चलते ये वापस आने की फिराक में था। जानकारी ये भी मिली कि ये नेपाल भागने की भागना चाहता था था। पुलिस ने उस से पहले ही आरोपित को चाँदनी चौक से गिरफ्तार कर लिया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की विशेष टीम में केस की विवेचक महिला थानाध्यक्ष रीता कुमारी केस और भरगामा थाना प्रभारी उमेश कुमार प्रमुख थे। पीड़ित दलित परिवार के समर्थन में बजरंग दल ने आक्रोश जुलूस निकाला था। बजरंग दल ने मोहम्मद मेजर की गिरफ्तारी में देरी पर नाराजगी जताते हुए पूरे जिले का चक्का जाम करने का एलान किया था। इसी के साथ आरोपित को फाँसी भी देने की माँग की गई थी।

गौरतलब है कि बुधवार (1 नवम्बर) को अररिया के दलित टोले में मोहम्मद मेजर नशे में धुत हो कर पीड़ित दलित परिवार के घर की 6 साल की नाबालिग बच्ची से को जबरन उठा लिया और उसे खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी के साथ पीड़िता के परिजनों को आरोपित लगातार धमकाता भी रहा। आरोपित मोहम्मद मेजर आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और उसका एक भाई मुखिया भी रह चुका है। पीड़िता की माँ ने पैक्स अध्यक्ष मोहम्मद सत्तार से भी गुहार लगाई थी और उस पर भी मामले को दबाने का आरोप लगा था।

‘विकास जरूरी’: सुप्रीम कोर्ट में फेल हुई चारधाम प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिश, चीन सीमा तक सेना ले जा सकेगी भारी मशीनरी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (दिसंबर 14, 2021) को केंद्र सरकार को उत्तराखंड की चार धाम परियोजना के लिए तीन डबल लेन रणनीतिक राजमार्ग बनाने की मंजूरी दी। फैसले को बताते हुए न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सतत विकास का सिद्धांत भारतीय पर्यावरण कानून में गहराई से अंतर्निहित है और न केवल भविष्य और वर्तमान पीढ़ी के विकास में बल्कि आने वाले समय के विकास से संबंधित है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “हमने पाया कि रक्षा मंत्रालय द्वारा दायर MA में कोई दुर्भावना नहीं है। MoD सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकताओं को डिजाइन करने के लिए अधिकृत है। सुरक्षा समिति की बैठक में उठाई गई सुरक्षा चिंताओं से रक्षा मंत्रालय की सच्चाई स्पष्ट है।” उन्होंने आगे कहा कि 2019 में पत्थर में लिखे गए बयान के रूप में मीडिया को दिए गए बयानों के लिए सशस्त्र बल को नहीं रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, “न्यायिक समीक्षा की कवायद में अदालत सेना की आवश्यकताओं का अनुमान नहीं लगा सकती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के आवेदन पर तीन रणनीतिक राजमार्गों के निर्माण की अनुमति देते हुए कहा कि पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर HPC (उच्चाधिकार प्राप्त समिति) की सिफारिशों का पालन किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता में एक निरीक्षण समिति भी गठित की जाएगी और परियोजना पर सीधे SC को रिपोर्ट करेगी। निगरानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि HPC की सिफारिशों को लागू किया जाए और नए सिरे से विश्लेषण न किया जाए।

शीर्ष अदालत 8 सितंबर, 2020 के आदेश में संशोधन की माँग करने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को 2018 के सर्कुलर का पालन करने के लिए कहा गया था, जिसमें महत्वाकांक्षी चारधाम राजमार्ग परियोजना पर 5.5 मीटर की कैरिजवे चौड़ाई निर्धारित की गई थी।

रणनीतिक 900 किलोमीटर लंबी चार धाम परियोजना 12,000 करोड़ रुपए की है और यह उत्तराखंड के चार पवित्र शहरों गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। पीएम मोदी ने दिसंबर 2016 में परियोजना की नींव रखी थी। उन्होंने कहा था कि यह उन लोगों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने राज्य में अचानक आई बाढ़ के दौरान अपनी जान गँवाई।

हालाँकि, 2018 में, एक एनजीओ ने पर्यावरणीय चिंताओं और हिमालयी पारिस्थितिकी पर प्रभाव का हवाला देते हुए सड़क विस्तार परियोजना को चुनौती दी थी। विभिन्न मुद्दों की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘पर्यावरणविद्’ रवि चोपड़ा के तहत एक HPC का गठन किया गया था। एचपीसी ने जुलाई 2020 में दो रिपोर्ट प्रस्तुत की। सदस्य पहाड़ी सड़कों की चौड़ाई पर सहमत नहीं थे।

सितंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने चोपड़ा सहित चार HPC सदस्यों की सिफारिशों को बरकरार रखा, जिसमें कैरिजवे की चौड़ाई 5.5 मीटर तक सीमित थी। HPC के 21 सदस्यों, जिनमें से 14 सरकारी अधिकारी थे, की अधिकांश रिपोर्ट में डबल लेन हाईवे के लिए सड़क की चौड़ाई 12 मीटर करने का समर्थन किया गया था। हालाँकि, मंगलवार को न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने भारत सरकार को 5.5 मीटर के बजाय 10 मीटर की तार वाली सतह के साथ सड़क बनाने की अनुमति देने का आदेश सुनाया।

आरक्षण का लाभ नहीं ले पाएँगे धर्मांतरण करने वाले, कर्नाटक एंटी-कन्वर्जन बिल पर बोले CM बोम्मई – धर्म-परिवर्तन के आगे न झुकें दलित

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात की तर्ज पर अब कर्नाटक (Karnataka) सरकार भी धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के लागू होते ही धर्मांतरण करने वाले पिछड़े समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (CM Basavaraj Bommai) ने रविवार (12 दिसंबर 2021) को संकेत दिया कि जल्द ही धर्मांतरण रोधी विधेयक (Anti Conversion Bill) के मसौदे को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी जाएगी और इसे बेलगावी में विधानसभा (Belagavi Assembly) के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है।

सीएम ने कहा,”धर्म परिवर्तन समाज के लिए अच्छा नहीं है, दलितों को इसके आगे नहीं झुकना चाहिए। कर्नाटक सरकार धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए एक कानून लाने की कोशिश कर रही है।” इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी धार्मिक समुदायों के लोगों को धर्मांतरण विरोधी कानून से घबराने की जरूरत नहीं है।

बोम्मई ने आगे यह भी कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त धर्म हैं। लोगों को प्रार्थना करने या अपने धर्म का पालन करने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी धर्म के लोगों की धार्मिक प्रथाओं में कोई बाधा नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद से ही धर्म परिवर्तन हमेशा बहस का विषय रहा है और कई राज्यों ने धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए हैं। वहीं, बेंगलुरु के ‘महाधर्मप्रांत’ सहित कई ईसाई संगठनों ने प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी विधेयक का विरोध किया है।

ईसाई धर्म अपनाने से ​पहले मिलता था आरक्षण

संविधान के पैरा तीन (अनुसूचित जाति) में इसका उल्लेख किया गया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म यानी ईसाई और मुस्लिम धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। ईसाई और मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद अनुसूचित जाति और पिछड़े समुदाय को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता है। कर्नाटक में ईसाई धर्म में कन्वर्ट होने से पहले इन लोगों को आरक्षण सहित सभी लाभ मिलते थे।

इस साल फरवरी में पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने भी राज्य सभा में आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ईसाई और मुस्लिम धर्म अपनाने वाले आरक्षण का लाभ नहीं ले पाएँगे। पूर्व कानून मंत्री ने कहा था कि अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले जो लोग हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाते हैं उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा, लेकिन ईसाई और मुस्लिम धर्म अपनाने वाले इससे वंचित रहेंगे। इसके साथ ही ऐसे लोग लोकसभा और विधानसभा सभा चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर लड़ने का अधिकार भी खो देंगे।