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‘इंशाअल्लाह… आपके पेशाब में चिराग जलवाने का काम करूँगा’: UP में सपा के लिए वोट माँग रहे सलमान कुरैशी का वायरल

उत्तर प्रदेश में 2022 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले मुस्लिमों का वोट हासिल करने के लिए सपा (SP) नेता अजीबोगरीब बातें कर रहे हैं। अब सपा के युवा सलमान कुरैशी का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वह सपा सरकार बनने पर ‘पेशाब में चिराग’ जलाने की बात कर रहे हैं। इससे पहले सपा सांसद एसटी हसन का एक वीडियो सामने आया था। इसमें वे मुस्लिमों से एकजुट होकर बीजेपी को हराने की अपील करते दिखे थे। साथ ही कहा था कि समान नागरिक संहिता लागू होने पर मुस्लिम दो शादी नहीं कर सकेंगे।

बिजनौर जिले में समाजवादी पार्टी के यूथ बिग्रेड जिलाध्यक्ष सलमान कुरैशी एक मौलाना को संबोधित करते हुए कह रहे हैं, “कोई भी छोटा-बड़ा काम हो, इंशाअल्लाह अगर सपा की सरकार आई तो आपके पेशाब में चिराग जलवाने का काम करूँगा।” यह वीडियो पत्रकार सचिन गुप्ता ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो को भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कुरैशी का पेशाब से चिराग (दिया) जलाने का मतलब क्या था। आपको बता दें कि हिंदू किसी भी धार्मिक और शुभ कार्य को शुरू करने से पहले दीपक को जलाना पवित्र मानते हैं। दीपक को जलाने के लिए वह इसमें तेल या फिर घी का इस्तेमाल करते हैं।

‘परफ्यूम’ भी लॉन्च कर चुकी है सपा

बता दें कि इस साल नवंबर में अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की मार्केटिंग के लिए ‘समाजवादी पार्टी’ का परफ्यूम लॉन्च किया था। परफ्यूम खजांचीनाथ नाम के बच्चे के जन्मदिन पर लॉन्च हुआ, जिसका जन्म नोटबंदी के दौरान बैंक में हुआ था। इस परफ्यूम को बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लॉन्च किया गया था। हरे और लाल रंग के कॉम्बिनेशन से बनी परफ्यूम की डिब्बी में अखिलेश यादव का चेहरा और पार्टी चिह्न साइकिल छपा हुआ था। इसके पीछे कन्नौज एमएलसी पम्मी जैन का नंबर भी दिया गया था।

मुनव्वर फारुकी गुरुग्राम कॉमेडी शो के कलाकारों की लिस्ट से भी हुआ बाहर, विवादित कॉमेडियन को बीजेपी नेता ने बताया ‘गद्दार’

विवादित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी का नाम अब गुरुग्राम कॉमेडी फेस्टिवल की कलाकारों की लिस्ट से भी हटा दिया गया है। इस निर्णय के पीछे सार्वजनिक सुरक्षा को आधार बताया गया है। आयोजकों के मुताबिक 2 दिनों से आ रहीं लगातार फोन कॉल में मुनव्वर की शो में भागीदारी का विरोध किया जा रहा था। यह कार्यक्रम 17 से 19 दिसंबर के बीच आर्या मॉल में होना है।

बीजेपी IT सेल हरियाणा प्रमुख अरुण यादव ने सोमवार (6 दिसंबर) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में उन्होंने मुनव्वर पर भगवान् राम के अपमान का आरोप लगाया था। साथ ही मुनव्वर पर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की भी बात लिखी गई थी। इसी के साथ अमित शाह और RSS के खिलाफ भी मुनव्वर द्वारा स्टेज से सुनाए गए चुटकुलों का जिक्र किया गया था। अंत में गुरुग्राम में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए फारुकी को गुरग्राम न आने देने का निवेदन किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कार्यक्रम के आयोजक द एंटरटेनमेंट फैक्ट्री के सह-संस्थापक मुबीन तिसेक ने जनता और कलाकारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि वो किसी की भी भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते। यही वजह है कि हमने मुनव्वर को कलाकारों के पैनल से हटा दिया है। हालाँकि मुबीन ने फोन करने वालों के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया।

मुनव्वर फारुकी का नाम पैनल लिस्ट से निकलने के बाद भाजपा नेता अरुण यादव ने उन्हें गद्दार कहा है। इसी के साथ उन्होने ऐलान किया है कि वो पूरे भारत में मुनव्वर फारुकी का शो नहीं होने देंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुनव्वर फारुकी के बेंगलुरु, गोवा, पंजाब आदि स्थानों पर शो रद्द हो चुके हैं। गुजरात के रहने वाला मुनव्वर फारूकी एक कथित कॉमेडियन और विवादास्पद शख्सियत हैं। उस पर भगवान राम और माता सीता के लिए अपमानजनक शब्दों के प्रयोग का आरोप है। इसके अलावा, उसने उन 59 निर्दोष श्रद्धालुओं का भी मजाक उड़ाया, जिन्हें अयोध्या में कार सेवा से लौटने के दौरान 2002 में गोधरा में जिंदा जला दिया गया था। फेस्टिवल से हटाए गए एक अन्य कॉमेडियन वरुण ग्रोवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लग चुका है।

600 एकड़ में खाद कारखाना, 750 बेड्स वाला AIIMS: गोरखपुर को PM मोदी की ₹10,000 Cr की सौगात, हर साल 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर को AIIMS और खाद कारखाना समेत 10,000 करोड़ रुपयों के परियोजनाओं की सौगात दी। ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)’ के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने ‘रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर’ की भी सौगात पूर्वांचल को दी। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ की बात करते हुए कहा कि अब पूर्वांचल का सपना साकार हो रहा है और देश आनंद का उत्सव मना रहा है। उन्होंने बाबा गोरखनाथ की भूमि पर पीएम मोदी का स्वागत किया।

बता दें कि गोरखपुर का उर्वरक संयंत्र प्रतिवर्ष 12.7 लाख मेट्रिक टन नीम-लेपित यूरिया का उत्पादन करेगा। इससे न सिर्फ किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20,000 रोजगार भी पैदा होंगे। इसके निर्माण में 8603 करोड़ रुपए की लागत आई है। वहीं 1011 करोड़ रुपए में बना AIIMS बिहार, झारखंड और नेपाल के मरीजों को भी लाभान्वित करेगा। हाईटेक लैब्स के कारण पूर्वांचल के लोगों को मेडिकल परीक्षण के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

बता दें कि 2016 में इस खाद कारखाने का शिलान्यास भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही किया था। इसका नाम ‘हिंदुस्तान फर्टिलाइजर’ है, जो 600 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। वहीं 112 एकड़ में बने एम्स का भी शिलान्यास 2016 में ही हुआ था। वहीं बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पुणे के ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ की तर्ज पर बना ICMR का जाँच केंद्र इंसेफ्लाइटिस, कालाजार, चिकनगुनिया, और डेंगू के अलावा कोविड-19 वायरस की भी पहचान कर सकता है

एम्स और खाद कारखाने का किस तरह पूर्वांचल को अरसे से इंतजार था, इसका जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब डबल इंजन की सरकार होती है तो डबल तेजी के साथ काम भी होता है। उन्होंने कहा कि जब नेक नीयत के साथ काम होता है तो आपदाएँ भी अवरोध नहीं बन पाती हैं। कोरोना प्रबंधन को लेकर भी उन्होंने सीएम योगी की तारीफ़ की। सीएम योगी ने याद दिलाया कि कैसे पहले इंसेफ्लाइटिस के मरीजों के सैम्पल जाँच के लिए पुणे भेजना पड़ता था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर देश की खाद्य सुरक्षा की गारंटी देनेवाला आत्मनिर्भर भारत एक तस्वीर पेश कर रहा है। गोरखपुर एम्स की सुविधाओं की बात करें तो यहाँ 750 बेड का अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, आयुष भवन, सभी कर्मचारियों के रहने के लिए आवास, यूजी और पीजी छात्रों के लिए छात्रावास भी मौजूद हैं। यहाँ अत्याधुनिक संयंत्रों के साथ-साथ अन्य चिकित्सा संस्थानों की मदद भी करेगा।

‘…फिर बनाओ बाबरी’: JNU में वामपंथी छात्रों ने मस्जिद के समर्थन में निकाला जुलूस, ‘न्याय की लड़ाई’ के नाम पर जमकर आपत्तिजनक नारेबाजी

एक बार फिर से जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) चर्चा में है। इस बार वहाँ पर बाबरी मस्जिद के समर्थन में प्रदर्शन किया गया है। सोमवार (6 दिसंबर) को यह आयोजन JNU छात्रसंघ की तरफ से हुआ था। वायरल हो रहे वीडियो में इसे इन्साफ की लड़ाई बताया जा रहा है।

इस वीडियो में JNUSU उपाध्‍यक्ष साकेत मून को कथित रूप से कहते सुना जा सकता है, “उन्हें सज़ा के साथ-साथ मुआवजा भी देना पड़ेगा। आपको ये कहना पड़ेगा कि जो बाबरी मस्जिद गिराया गया, वह गलत गिराया गया। इसीलिए इंसाफ होगा कि बाबरी फिर से बनाई जाए। इस इंसाफ के लिए लड़ाई है।” इस दौरान पीछे से जोर-जोर से तालियाँ बजती हैं। वीडियो में कुछ लोगों को हाथों में पोस्टर भी ले कर देखा जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाबरी के समर्थन में यह जमावड़ा गंगा ढाबा पर लगा था। समय रात के लगभग 8 बजकर 30 मिनट का था। यह सभी वामपंथी विचारधारा के छात्र बताए जा रहे हैं जिन्होंने बाद में जुलूस की शक्ल में चंद्रभागा हॉस्टल पर एक सभा के रूप में सम्बोधन दिया। इस दौरान ”नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं सहेंगे दादरी, फिर बनाओ, फिर बनाओ बाबरी” जैसे नारे लगने की खबर है।

JNU की इस नारेबाजी का विरोध शुरू हो गया है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने वीडियो जारी करते हुए कहा, “इससे पहले भी JNU में आतंकियों के समर्थन में नारेबाजी होती रही है। ये विषैली सोच है कि ये सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे हैं। दोबारा बाबरी को बनाने का सपना देखने की कोई गलती न करे। इस देश में 47 हजार हिन्दू मंदिरों को तोड़ा गया है। इन 47 हजार पापों में से अभी तक सिर्फ एक पाप उतर पाया है। मथुरा, काशी और तमाम अभी अधूरे हैं।”

गौरतलब है कि जेएनयूएसयू उपाध्यक्ष साकेत मून ने ही 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर ‘राम के नाम’ डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग आयोजित करने का फैसला किया था। जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे रद्द करने के लिए कहा था। JNU प्रशासन ने इसे सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने वाली हरकत बताया था। हालाँकि इस रोक के बाद भी वामपंथी छात्र संघ ने शनिवार (4 दिसंबर 2021) को विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी।

हत्या, डकैती, लूटपाट… 1984 सिख नरसंहार में कॉन्ग्रेस के पूर्व MP सज्जन कुमार पर आरोप तय, 1994 में बंद कर दिया गया था मामला

दिल्ली की एक अदालत ने 1984 सिख नरसंहार मामले में पूर्व कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ आरोप तय करने की घोषणा कर दी है। ये मामला दिल्ली के राज नगर में सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह नामक दो सिखों की हत्या से जुड़ा हुआ है। अधिवक्ता हरप्रीत सिंह होरा ने बताया है कि अदालत ने कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ दंगेबाजी, हत्या और डकैती के आरोप तय किए हैं। बता दें कि उन्हें 1984 सिख नरसंहार से जुड़े मामले में पहले ही आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जा चुकी है।

सज्जन कुमार के विरुद्ध ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धाराओं 147 (दंगा और हिंसा के लिए बल प्रयोग), 149 (जनसमूह में अपराध करना), 148 (घातक हथियार का इस्तेमाल), 302 (हत्या), 308 (गैर-इरादतन हत्या), 323 (चोट पहुँचाना), 395 (डकैती), 397 (लूटपाट और आघात पहुँचाना), 427 (संपत्ति का नुकसान कारित करना), 436 (संपत्ति को नष्ट करने के लिए विस्फोट या आगजनी) और 440 (मृत्यु उपहति कारित करना) के तहत आरोप तय किए गए।

इस मामले में सरस्वती विहार पुलिस थाने में FIR 458/91 दर्ज की गई थी। प्रत्यक्ष गवाह ने तस्वीर देख कर सज्जन कुमार को पहचाना था। 1994 में इस मामले को ये कह कर बंद कर दिया गया था कि इसके कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन SIT ने इसे फिर से खोला। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अब सुनवाई की अगली तारीख़ 16 दिसंबर, 2021 तय की है। ये सारे आरोप प्रत्यक्ष रूप से सीधे सज्जन कुमार के खिलाफ तय किए गए हैं। अदालत ने माना कि मौखिक और दस्तावेजी सबूत आरोपित के खिलाफ हैं।

अदालत ने कहा, “सारे सबूत ये बताने के लिए काफी हैं कि हजारों लोगों की गैर-कानूनी भीड़ वहाँ जमा हुई थी, जिनके पास डंडे और लोहे के रॉड जैसे खतरनाक हथियार थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की उनके बॉडीगार्ड्स द्वारा हत्या के बाद निकली इस भीड़ का उद्देश्य सिखों की संपत्ति को नाश करना, आगजनी और हत्या था। इस दौरान उन घरों पर हमले किए गए और लूटपाट भी हुई। शिकायतकर्ता और कई अन्य लोग इस हमले में घायल हुए। ये भी साफ़ है कि आरोपित (सज्जन कुमार) उस भीड़ का सिर्फ एक हिस्सा भर नहीं था।”

वहीं ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC)’ ने सज्जन कुमार के खिलाफ आरोप तय किए जाने का स्वागत किया है। कमिटी के सदस्य हरमीत सिंह कालका ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल और DSGMC इसके लिए पिछले 37 वर्षों से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले कई बार आयोग का गठन हुआ, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अब जाकर हमें 37 वर्षों के संघर्ष का नतीजा मिला है। अकाली दल ने भी इस पर ख़ुशी जताई है।

इससे पहले सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनकी मेडिकल कंडीशन स्थिर है। सज्जन कुमार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और ऋषिकेश रॉय की बेंच ने कहा था कि उनका इलाज ‘सुपर वीआईपी’ की तरह नहीं हो सकता। सज्जन कुमार ने मेडिकल कारणों से अंतरिम जमानत की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सज्जन कुमार ने दिसंबर 2018 में कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

‘अल्लाह हमें इस प्रकोप से बचाए’ : सुपरमार्केट में हिंदू मूर्तियाँ देख भड़का इस्लामी समूह, पत्र लिख कर रखी हटाने की माँग

त्रिनिदाद और टोबैगो नामक कैरिबियाई देश में शुक्रवार (3 दिसंबर 2021) को अंजुमन सुन्नतुल जमात एसोसिएशन (Anjuman Sunnatul Jamaat Association) की एक ब्रांच ‘रियल स्ट्रीट जमात’ ने सुपरमार्केट में हिंदू मूर्ति दिखने पर आपत्ति जाहिर की है। इस्लामी समूह ने प्राइस क्लब सुपरमार्केट को पत्र लिख कर अपनी आपत्ति जताई कि आखिर वो लोग हिंदुओं से संबंधी चीजों को क्यों बेच रहे हैं।

इंटरनेट पर शेयर हो रहे पत्र में 3 दिसंबर की तारीख है, जिसमें हाजी इम्तियाज अली ने ये लिखा है कि हाजी रुकनुद्दीन इंस्टिट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज (Haji Ruknudeen Institute of Islamic Studies ) की एक छात्रा सुपरमार्केट गई थी, जहाँ उसने हिंदू मूर्तियाँ और हिंदुओं से जुड़ी सामग्री सेल पर लगी देखी। हाजी ने आगे इन मूर्तियों को बाजार से हटाने की बात अपने पत्र में कही और ये भी लिखा कि अल्लाह हमें इस प्रकोप से बचाए।

जानकारी के अनुसार, इस पत्र के बाद सुपरमार्केट प्रशासन की ओर से हिंदू मूर्तियाँ और हिंदू सामग्री हटाने से मना कर दिया गया है। सुपरमार्केट ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि पिछले 27 वर्षों से उन्होंने सभी पंथों और नस्लों के लोगों के लिए एक परिवार उन्मुख वातावरण प्रदान किया है। पोस्ट में हाजी पर आरोप लगाया गया कि उनकी सुपरमार्केट के एक निदेशक के साथ दुश्मनी है। इसमें लिखा गया, “प्राइस क्लब किसी भी ऐसे व्यक्ति के बयानों पर संज्ञान नहीं लेगा जो इंद्रधनुष जैसे राष्ट्र में असमानता और अशांति पैदा करने के लिए तैयार है, जिसे हम सभी घर कहते हैं।”

सुपरमार्केट प्रशासन ने हाजी को फटकार लगाते हुए बताया कि वो लोग अपनी सेल में जो भी सामान रखते हैं उसे उपभोक्ता की जरूरत और माँग देखकर रखते हैं। सुपरमार्केट ने इस बात को भी साफ किया कि वो लोग किसी एक मजहब से नहीं जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाजी को बाजार की अन्य दुकानों पर उपलब्ध ऐसी वस्तुओं से आपत्ति नहीं है जैसे कि वो उन्हें निशाना बना रहे हैं। 

सुपरमार्केट ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने अपनी जाँच में पाया है कि पत्र लिखने वाला अंतर धार्मिक संगठन के बोर्ड में कार्य करता है, त्रिनिदाद और टोबैगो की विभिन्न जेलों में मुस्लिम जेल चैपलिन के रूप में कार्य करता है और इसे SEA और कॉनकॉर्ड में मार्गदर्शन के लिए विशेष समिति में भी नियुक्त किया गया था।

सुपरमार्केट ने अपने पोस्ट से दुख जताया और कहा कि ये विचलित करने वाली बात है कि ऐसा विभाजनकारी व्यक्ति उस पद पर काम करता है जिस पर सौहार्द, सहिष्णुता बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। अपने पोस्ट में हिंदू मूर्तियों को हटाने से मना करने के बाद मार्केट प्रशासन ने हाजी इम्तियाज अली से माफी माँगने की माँग की है।

RSS ऑफिस में गाय का सिर फेंकने के आरोपित 4 मुस्लिम, मानवाधिकार आयोग ने कहा- सबको ₹1-1 लाख दें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय में गाय का सिर फेंकने के आरोपित 4 मुस्लिम युवकों को तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग के मुताबिक मदुरै पुलिस ने इन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा और प्रताड़ित किया गया। इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है। यह आदेश आयोग के सदस्य डी जयचंद्रन ने दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रत्येक मुस्लिम युवक को 1-1 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों पर मुस्लिम युवकों को प्रताड़ित करने का आरोप था। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि उन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया। इस दौरान खाना-पीना नहीं दिया गया। वे घटना में शामिल होने से इनकार करते रहे फिर भी उन्हें प्रताड़ना दी गई। इस मामले की जाँच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी की रिपोर्ट में आरोपितों को टॉर्चर करने की बात कही गई थी। आयोग के सामने भी इस रिपोर्ट का हवाला दिया गया।

दूसरे पक्ष ने शिकायतकर्ताओं के सभी आरोपों को नकारा था। पूरी शिकायत को मनगढ़ंत बताते हुए इन आरोपों को पुलिस को बदनाम करने की साजिश बताया था। साथ ही बताया था कि किसी को भी गैरकानूनी रूप से हिरासत में नहीं रखा गया था। इस शिकायत के पीछे कुछ असामजिक तत्वों द्वारा आरोपितों को उकसाने की भी बात कही गई। लेकिन अपने अंतिम निष्कर्ष में आयोग ने पुलिस को दोषी पाया। इस मामले में पकड़े गए आरोपितों को कानूनी मदद PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) ने मुहैया कराई थी।

यह पूरा मामला साल 2011 का था। उस समय यह केस क्राइम ब्रान्च को सौंप दिया गया था। इसका मुकदमा अभी भी जुडिशियल मजिस्ट्रेट के यहाँ चल रहा है। एक आरोपित शहंशाह को रीढ़ में चोट लगाना बताया जा रहा है। PFI के प्रदेश उपाध्यक्ष ए खालिद मोहम्मद का कहना है कि मदुरै में 17 मुकदमों में लगभग 100 मुस्लिमों को ऐसे ही केसों में बेवजह फँसाया गया है। उन्होंने सरकार से इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है।

कभी भी गिरफ्तार हो सकती हैं जैकलीन फर्नांडीस, सलमान खान ने भी बनाई दूरी: रिपोर्ट, DA-BANGG टूर से बाहर किए जाने की अटकलें

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुरी तरह फँसी बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस के ऊपर एक ओर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है और दूसरी ओर अभिनेत्री के करीबियों ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी है। इस सूची में सबसे मशहूर नाम सलमान खान का है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जैकलीन जल्द गिरफ्तार हो सकती हैं। वहीं इन खबरों के बीच ये बात भी सामने आई है कि सलमान ने कॉन्ट्रोवर्सी से बचने के लिए उन्हें एक कॉन्सर्ट टूर से दूर रखने का मन बनाया है।

पिछले लॉकडाउन में जब सलमान खान के फार्महाउस पर जैकलीन दिखीं, तो ऐसा माना गया कि दोनों में काफी करीबियाँ है। हालाँकि, इस मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे मामले के सामने आने के बाद सलमान ने मदद करना तो दूर, जैकलीन से दूरी बनानी शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने ‘द-बंग (DA-BANGG)’ के कॉन्सर्ट से जैकलीन को हटाने का मन बनाया है। संभव है कि जैकलीन की जगह डेजी शाह को मिले।

बॉलीवुड हंगामा द्वारा दी गई इस जानकारी पर फिलहाल डेजी ने कहा है कि उन्हें इसके बारे में मालूम नहीं हैं। वहीं जो लोग द-बंग कॉन्सर्ट के लिए रियाद जा रहे हैं। उसमें सलमान के जीजा आयुष शर्मा, प्रभुदेवा, सुनील ग्रोवर, शिल्पा शेट्टी सहित कई लोग शामिल हैं। इसी लिस्ट में कुछ समय तक जैकलीन भी थीं। मगर, अब उनका नाम लिस्ट से हटाने पर विचार हो रहा है।

वहीं जाँच एजेंसियाँ भी जैकलीन पर नजर बनाए हुए हैं। रविवार को भी जैकलीन एक शो के लिए विदेश जा रही थीं। सारी तैयारी करने के बाद जब वह एयरपोर्ट पहुँचीं तो अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। एय़रपोर्ट अथॉरिटी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ निकाले गए लुकआउट सर्कुलर के बारे में उन्हें बताया। इसके साथ ही इसकी जानकारी ईडी के अधिकारियों को भी दी। 

बता दें कि इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने जैकलीन को सुकेश चंद्रशेखर मामले में पूछताछ के लिए कई बार बुलाया था। जैकलीन समन के बावजूद ईडी के समक्ष कई बार पेश नहीं हुई थीं। इसके बाद ईडी ने जैकलीन के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करते हुए कहा था कि जब तक इस मामले की जाँच जारी है, तब तक जैकलीन देश से बाहर नहीं जा सकती हैं। इस केस में ईडी जैकलीन से लगभग 7 घंटे तक पूछताछ कर चुकी है।

इसी मामले में ईडी ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में 7,000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसमें सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी मारिया पॉल समेत 6 लोगों को आरोपित बनाया है। जाँच एजेंसी ने चार्जशीट में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन और नोरा फतेही का नाम भी शामिल किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रशेखर ने अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज को 10 करोड़ रुपए के तोहफे दिए थे। इनमें 52 लाख रुपए का घोड़ा और 9 लाख रुपए कीमत वाली एक पर्शियन बिल्‍ली शामिल है।

‘8 हिंदू बच्चों को पानी छिड़क बना दिया ईसाई, स्कूल की आड़ में चल रहा धर्मांतरण का रैकेट’: सेंट जोसेफ स्कूल में बवाल

मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित एक स्कूल में कथित धर्मांतरण को लेकर हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन की खबर है। आरोप है कि सेंट जोसेफ स्कूल में नारेबाजी, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की गई। घटना 6 दिसंबर 2021 (सोमवार) की है जब स्कूल में 12वीं की परीक्षा हो रही थी। आक्रोशित लोगों ने स्कूल मैनेजमेंट पर कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि विश्व हिन्दू परिषद ने किसी भी हिंसक घटना से इनकार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिन्दू संगठनों ने स्कूल के अंदर 8 छात्रों के धर्मान्तरण का आरोप लगाया है। इस संबंध में प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है। साथ ही तोड़फोड़ करने वालों पर IPC के तहत केस भी दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी (SDOP) भारत भूषण शर्मा ने यह जानकारी मीडिया को दी।

स्कूल प्रशासन ने खुद पर लगे सभी आरोपों को नकारा है। स्कूल के प्रिंसिपल ने इसको 2 समुदायों के बीच दूरी पैदा करने की साजिश बताया। इस घटना के लिए उन्होंने कुछ यूट्यूब चैनलों की खबरों को जिम्मेदार ठहराया। कर्मचारियों की सुरक्षा की माँग करते हुए झूठी खबर चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। स्कूल के मैनेजर ब्रदर एंथोनी ने पुलिस पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, “सिर्फ 2 पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। जिन 8 बच्चों के धर्मान्तरण के आरोप पर हंगामा हुआ वे हमारे स्कूल के छात्र नहीं थे।”

विश्व हिन्दू परिषद ने हिंसा को नकारते हुए बताया कि स्कूल के अंदर कलावा तक पहनने से रोका जाता है। VHP कार्यकर्ता नीलेश अग्रवाल के मुताबिक स्कूल में बच्चों को तिलक लगाने से रोका जाता है। दूसरे धर्म के बच्चों से अन्य धर्मों की प्रार्थना करवाई जाती है। धर्मान्तरण के निशाने पर ख़ासतौर से गरीब बच्चों को रखा जाता है। उन्होंने कहा हम सप्ताह भर से इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

अहिरवार समाज संघ ने इस संबंध में 4 दिसंबर को विदिश के डीएम से शिकायत की थी। इसमें कहा गया है कि 8 हिंदू बच्चों का पानी छिड़क कर ईसाई धर्मांतरण कराया गया। स्कूल की आड़ में धर्मांतरण रैकेट चलाने का आरोप लगाया गया है। गौरतलब है कि इस स्कूल के खिलाफ 2018 में फीस नहीं देने पर एक हिंदू छात्र को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए ABVP ने प्रशासन से शिकायत की थी।

नाम Better और एक जूम मीटिंग में निकाल बाहर किए 900 कर्मचारी: जानिए कौन हैं विशाल गर्ग

अपनी कंपनी से एक साथ 900 कर्मचारियों को निकालना कोई सामान्य काम नहीं है, लेकिन Better.com के सीईओ विशाल गर्ग ने ये कर दिया है। उन्होंने एक वर्चुअल मीटिंग के दौरान ये ऐलान किया कि उनका जो कर्मचारी इस मीटिंग में जुड़ा है उसे तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट किया जाता है। 

अब गर्ग की यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रही है। कंपनी के किसी कर्मचारी ने ही इसे रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर वायरल किया है। इस वीडियो में गर्ग के शब्द हैं, “अगर आप इस कॉल से जुड़े हैं, तो आप उस बदकिस्तम ग्रुप के सदस्य हैं, जिनकी छँटनी की जा रही है। आपकी सेवा को यहाँ तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। एचआर की ओर से आपको मेल आ जाएगा।”

इस वीडियो के वायरल होने के बाद आम जन, 43 वर्षीय विशाल गर्ग के बारे में जानने के लिए लगातार सर्च कर रहे हैं। उनका नाम भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहा है। ऐसे में बता दें कि ये विशाल गर्ग Better.com के संस्थापक और सीईओ हैं। इनकी यह कंपनी एक डिजिटल फर्स्ट होम ओनरशिप कंपनी है। इसके अलावा गर्ग के लिंक्डइन बायो के अनुसार वो निवेश करने वाली कंपनी वन जीरो कैपिटल के फाउंडिंग पार्टनर भी हैं। उन्होंने 7 साल की उम्र में भारत छोड़ा था। इसके बाद वह न्यूयॉर्क गए और हाई स्कूल से ही बिजनेस का सपना देखते थे।

द इंडिपेंडेंट की खबर के अनुसार, गर्ग के ऊपर उनकी पिछली कंपनियों में कई बार धोखाधड़ी और वित्तीय हेराफेरी का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा इस वीडियो के आने से पहले और अपने कर्मचारियों को टर्मिनेट करने से पूर्व भी कई बार गर्ग चर्चा का कारण बने हैं। साल 2020 में भी उनके ऊपर उंगली उठी थी जब उन्होंने अपने कुछ कर्मचारियों को बेहद रूखे अंदाज में लिखा था, “तुम लोग बहुत ज्यादा धीमे हो। तुम एक बेवकूफ डॉलफिनों का पूरा झुंड हो जो जाल में फँसती हैं और शार्क उन्हें खा लेती है। तो रुक जाओ, रुक जाओ, रुक जाओ…तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो।”

एक साल पहले अपने कर्मचारियों से इस लहजे में बात करने वाले विशाल गर्ग ने इस बार 900 कर्मचारियों को निकालने से पहले कहा कि वो कंपनी के 15% कर्मचारियों को कुछ कारणों से निकाल रहे हैं। ये कारण बाजार, प्रदर्शन, प्रोडक्टिविटी और क्षमता हैं।

इस घोषणा के साथ ही गर्ग ने अपने इन कर्मचारियों को टर्मिनेट करने के बाद कई सारी सुविधा देने का भी ऐलान किया है। हालाँकि सोशल मीडिया यूजर्स इस तरीके को नापसंद कर रहे हैं। नेटिजन्स को कंपनी से निकाले गए कर्मचारियों के लिए बुरा लग रहा है। वहीं कुछ का पूछना है कि अगर ये आदमी ऐसा है तो इसकी कंपनी में कौन निवेश करना चाहेगा।