Home Blog Page 3183

माना लोकतंत्र में विपक्ष हो, पर जब उसकी नकारात्मक राजनीति लोकतंत्र के लिए ही नासूर बन जाए तो क्या करें?

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब भाजपा ने ‘कॉन्ग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया था। देश की स्वतंत्रता के वक्त महात्मा गाँधी भी यही चाहते थे। आजकल ममता बनर्जी ‘कॉन्ग्रेस मुक्त विपक्ष’ की कोशिशों में लगी हैं। वैसे पिछले कुछ सालों से विपक्षी कुनबे में यह प्रयास समय-समय पर चलता रहता है। कभी केजरीवाल तो कभी पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ कुलांचे भरने लगती है।

गाँधी को आशंका रही होगी कि भारतीय लोकतंत्र के लिए कॉन्ग्रेसियों की निजी अकांक्षाएँ, एजेंडा वाली राजनीति सही नहीं रहेगी। संभवत: यही कारण रहा होगा कि वे स्वतंत्र भारत को कॉन्ग्रेस मुक्त देखना चाहते थे। स्वतंत्र भारत ने 70 सालों में जो भोगा उसके अनुभवों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कॉन्ग्रेस से मुक्ति की बात आगे बढ़ाई, उस समय कई लोग लोकतंत्र में विपक्ष की जरूरत की दुहाई देते दिखे थे।

यकीनन एक एक लोकतंत्र में विपक्ष भी होना चाहिए। लेकिन जब विपक्ष जीर्ण-शीर्ण हो जाए, उसका राजनीतिक दर्शन लोकतंत्र के लिए के लिए नासूर बन जाए, तो उसका क्या करें? हम यह सवाल इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि 29 नवंबर 2021 को संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत होते ही सदन में विपक्ष के आचरण से देश परिचित है। राज्यसभा में तो हालत इतनी अराजक हो गई कि विपक्ष के 12 सांसदों को निलंबित करना पड़ा। इतने पर भी विपक्ष का रवैया नहीं सुधरा तो मंगलवार (30 नवंबर 2021) को उच्च सदन के सभापति वेंकैया नायडू को यहाँ तक कहना पड़ गया कि निलंबित सांसद अपने किए पर पश्चाताप जताने की बजाए, उसे न्यायोचित ठहराने पर तुले हैं। ऐसे में उनका निलंबन वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता है।

नायडू का यह कहना भारत के मौजूदा विपक्ष की उस संस्कृति की ओर इशारा करता है, जिसका राजनीतिक दर्शन ही संसदीय गरिमा को ठेस पहुँचाने, लोकतांत्रिक परंपराओं को अँगूठा दिखाने के इर्द-गिर्द सिमट गया है। इसको समझने के लिए ज्यादा पीछे जाने की आवश्यकता नहीं है।

संसद सत्र की शुरुआत से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की परंपरा रही है। क्या कारण है कि उस परंपरा का निर्वाह होने के बावजूद, वह अपना प्रभाव सत्र शुरू होने पर नहीं छोड़ पा रही है? इसका कारण विपक्ष का वही राजनीतिक दर्शन है जो ऐसे बैठकों के संदेश की अनदेखी कर उसे सदन में मनमानी करने को प्रेरित करता है। यह उसका नकारात्मक व्यवहार ही है जिसने अधिकांश विपक्षी दलों को संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का बहिष्कार करने को प्रेरित किया। जिस कृषि कानूनों की वापसी को लेकर कथित किसान आंदोलन को विपक्ष भड़काता रहा, कई मौकों पर ऐसी ताकतों के साथ खड़ा नजर आया जिनके हित भारत विरोध में हैं, जब सदन में उन कानूनों की वापसी को लेकर बिल पेश करने का वक्त आया तो वह हंगामे पर उतारू था।

इससे मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों में गंभीरता की कमी का पता चलता है। पता ​चलता है कि वे देश और जन सरोकारों को लेकर कितने संवेदनहीन हैं। दरअसल, हमारे विपक्ष के पास अपनी नकारात्मक राजनीति को शोरगुल से दबाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। वे जानते हैं कि तमाम अड़चनों के बावजूद मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का भी आधा हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा करने के करीब है। इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं है। इस सरकार के मुखिया का जनता से सीधा संपर्क है। तमाम दुष्प्रचारों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पहले की तरह बनी हुई है। वैश्विक कोरोना महामारी जैसे संकट से यह सरकार बखूबी निपटने में कामयाब रही है और अब दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सफल वैक्सीनेशन अभियान चला रही है।

दूसरी तरफ विपक्ष तमाम मैनेजर और मैनेजमेंट के बावजूद आज तक मोदी के सामने एक नेता तक खड़ा नहीं कर पाया है। उनके कद का नेता तो खैर दूर की कौड़ी लगती हो। कॉन्ग्रेस के युवराज ​का ग्राफ चढ़ाने की जितनी जोर से कोशिश होती है, वह उतनी ही रफ्तार से ढलान पर लोट जाते हैं। पालतू मीडिया, लिबरल और वामपंथी गैंग के वैश्विक प्रोपेगेंडा के बावजूद भारत का विपक्ष न तो अपनी जमीन बना पाया है और न अपनी साख। उसके खाते में ऐसा कुछ नहीं है जिसे लेकर वह जनता के बीच जा सके।

जिन पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव सिर पर है वहाँ विपक्ष मुकाबले में नहीं दिखती। जिस एक पंजाब से उम्मीदें थी, वहाँ अमरिंदर सिंह के अलग राह पकड़ने ने विपक्ष के सपनों को अभी ही धूमिल कर दिया है। लिहाजा उसके पास अपनी नकारात्मक राजनीतिक को शोरगुल की आड़ में छिपाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वह कभी नहीं चाहेगा कि संसद का सत्र सामान्य तरीके से चले। लोकतांत्रिक संस्थाएँ और विमर्श की राजनीति मजबूत हो। क्योंकि इससे उसका एजेंडा बेनकाब होगा। प्रोपेगेंडा तार-तार होगा। लिहाजा 2024 जितना करीब आते जाएगा, यह शोरगुल उतना बढ़ते जाएगा। वह कभी शाहीनबाग तो कभी किसानों का रूप धर देश विरोधी नए-नए उपक्रम करने के प्रयास करेगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे विपक्ष का क्या इलाज है? क्या लोकतंत्र के नाम पर ऐसे विपक्ष को ढोते रहना चाहिए? लोकतंत्र में माई-बाप जनता होती है। यकीनन इस नासूर का इलाज भी जनता को ही करना होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले साल राज्यों के चुनाव इसका ट्रेलर होंगे और 2024 में जनता विपक्ष के इस नकारात्मक राजनीतिक दर्शन की नसबंदी कर ही दम लेगी।

लेह के 12 गाँवों में हर घर पहुँचा नल का स्वच्छ पानी, एयरपोर्ट होगा कार्बन न्यूट्रल: इंजीनियर सोनम वांगचुक ने PM मोदी को दिया धन्यवाद

जल जीवन मिशन के तहत उमला लेह का 12वाँ ऐसा गाँव बन गया है जहाँ अब शून्य से भी नीचे के तापमान में भी अपने 25 घरों में से हरेक में नल के पानी की आपूर्ति है। वहीं लद्दाख के इनोवेटर और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने लेह एयरपोर्ट को कार्बन न्यूट्रल बनाने के लिए समाधान खोजने के लिए एक टीम भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया

शून्य से 15 डिग्री तक नीचे तापमान में जहाँ जनजीवन पूरी तरह जम जाया करता था, वहाँ आज लोगों के घरों में नल से पानी पहुँच रहा है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर में नल से जल पहुँचाने का काम लद्दाख के दुर्गम इलाके में तेजी से चल रहा है। 

अब लद्दाख के लेह जिले का उमाला 12वाँ ऐसा गाँव बन गया, जहाँ नल से पानी की सप्लाई होने लगी। नल से पानी की सप्लाई मिलने पर गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। जश्न का माहौल बन गया। उमला गाँव के एक बाशिंदे ने बताया कि पहले सर्दियों के दिनों में हमारे पास बर्फ की परत तोड़कर पानी लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। प्रदेश प्रशासन ने अगले साल 15 अगस्त तक लद्दाख के हर घर में नल से पानी पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है।

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख के उज्ज्वल भविष्य पर जमी बर्फ पिघलने लगी है। यहाँ विकास कार्य तेजी से चल रहा है। बर्फीले रेगिस्तान में सर्दी के मौसम में पानी के अभाव में जनजीवन बिल्कुल थम सा जाता रहा है। इसलिए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन से लद्दाख में सबसे पहले पानी की समस्या का समाधान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 

इधर वांगचुक ने पीएम को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया, “धन्यवाद, नरेंद्र मोदी जी। इससे अधिक संवेदनशील सरकार की कल्पना नहीं की जा सकती! #LehAirport को बचाने की अपील करने वाले मेरे ट्वीट के बाद, उप सचिव एम घिल्डियाल के नेतृत्व में PMO की टीम लेह में उतरी, नए हवाई अड्डे का निरीक्षण किया और #CarbonNeutral लद्दाख का समाधान खोजने के लिए हमारी #HIAL टीम के साथ 4 घंटे बिताए।”

बता दें कि वांगचुक ने 13 नवंबर के एक ट्वीट में पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने और ‘लेह हवाई अड्डे को बचाने’ का आग्रह किया था। 2 मिनट के लंबे वीडियो में उन्होंने लेह एयरपोर्ट पर चल रहे निर्माण के बारे में बात की थी। उन्होंने न केवल इमारत में वास्तु दोषों की ओर इशारा किया बल्कि यह भी कहा कि इसमें कोई ‘पारंपरिक तत्व’ नहीं है। उन्होंने पीएम को उनके उस बयान की याद दिलाई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत सरकार लद्दाख को कार्बन-न्यूट्रल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करेगी।

उन्होंने कहा, “हम अभी काम कर सकते हैं वरना बाद में पछताना पड़ सकता है।” गौरतलब है कि सोनम ने पिछले दिनों गलवान घाटी में भारतीय सेना की सहायता के लिए ‘सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट’ तैयार किया था।

‘ईसाई संगठन ने ₹3 लाख/महीना के किराए पर लिया गोदाम, बना दिया चर्च’: दिल्ली में धर्मांतरण का ताज़ा ‘खेल’, VHP ने किया विरोध

दिल्ली के मटियाला में किराए के गोदाम में ईसाई मिशनरी द्वारा धर्मांतरण कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने पश्चिम दिल्ली के मटियाला, द्वारका में एक गोदाम में रविवार (28 नवंबर 2021) को सामूहिक सभा को यह आरोप लगाते हुए रोक दिया कि गोदाम के मालिक को जानकारी दिए बिना ही इसे चर्च में बदल दिया गया था। वहीं, चर्च के सदस्यों ने आरोप लगाया कि बजरंग दल ने स्थानीय लोगों को उनके खिलाफ भड़काया है।

विहिप के प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने ट्​वीट किया, ”दिल्ली के मटियाला में तीन लाख रुपए महीने के किराए पर हाल लेकर ईसाई धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा था। जब स्थानीय लोगों को इसका पता चला तो हॉल मालिक ने इसे कैंसिल कर दिया। किराए का करार और स्थानीय लोगों ने उन्हें भगा दिया।” इस मामले से जुड़ी अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑपइंडिया ने विजय शंकर तिवारी से संपर्क किया। तिवारी ने बताया गोदाम के मालिक को जानकारी दिए बिना इसे चर्च में बदल दिया गया था।

ऑपइंडिया से बात करते हुए तिवारी ने कहा कि ईसाई संगठन ने कुछ महीने पहले गोदाम किराए पर लिया था। उन्होंने कथित तौर पर गोदाम के मालिक को इसे चर्च में बदलने की अपनी योजना के बारे में सूचित नहीं किया था। करीब 15 दिन पहले स्थानीय लोगों ने मालिक को बताया कि गोदाम को चर्च में तब्दील कर दिया गया है। विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने अपने एक ट्वीट में परिसर में बाउंसरों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “मटियाला में माल गोदाम को धोखे से रातों-रात चर्च का नाम देकर धर्मांतरण का खेल खेलने की अनुमति किसने दी? वहाँ पर मुस्टंडे बाउंसर क्या कर रहे थे?”

द हिंदू ने एक स्थानीय व्यक्ति के हवाले से कहा कि स्थानीय लोग इलाके में चर्च के निर्माण के पक्ष में नहीं थे। बता दें कि स्थानीय लोग इससे खुश नहीं थे, क्योंकि कई लोग उस चर्च में आने लगे थे। इसकी वजह से यह स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया था। जब मालिक को पता चला कि उसके गोदाम को चर्च में तब्दील कर दिया गया है, तो उसने किराया समझौता रद्द कर दिया। इसके बाद गोदाम से फर्नीचर आदि को हटाने के लिए उन्होंने उन लोगों ने 15 दिनों का समय दिया।

हालाँकि, इसके बाद भी ईसाई संगठन द्वारा परिसर में फिर से सामूहिक सभा का आयोजन किया गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। इनमें विहिप के कुछ सदस्य भी थे।

’83’ के ट्रेलर में भारत की जीत पर जश्न मनाते ‘सच्चा मुस्लिम’ देखा क्या? लोगों ने ‘सचिन’ को भी पहचाना: इनकी भूमिका में हैं दीपिका

रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म ’83’ का ट्रेलर लॉन्च हो गया है। इसमें 1983 क्रिकेट विश्व कप की कहानी दिखाई गई है। अधिकतर लोग इसमें कपिल देव की भूमिका निभाने के लिए रणवीर सिंह की तारीफ़ कर रहे हैं। इसमें उस समय भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों सुनील गावस्कर, कीर्ति आज़ाद, कृष्णमाचारी श्रीकांत, मदन लाल और रवि शास्त्री जैसे खिलाड़ियों को भी दिखाया गया है। फिल्म के निर्देशक कबीर खान हैं, जिन्होंने ‘बजरंगी भाईजान (2015)’, ‘एक था टाइगर (2012)’ और ‘न्यूयॉर्क (2009)’ जैसी बॉक्स ऑफिस पर सफल फ़िल्में बनाई हैं।

क्या आपको पता है कि इस फिल्म के एक दृश्य में सचिन तेंदुलकर को भी दिखाया गया है, जो तब काफी छोटे थे। असल में ट्रेलर के एक दृश्य में घुँघराले बालों वाले छोटे सचिन तेंदुलकर को अपने भाई के कंधे पर बैठ कर मैच में जीत का जश्न मनाते हुए देखा गया है। कुछ फैंस ने इसे स्पॉट करने के बाद शेयर भी किया। असल में 1983 के विश्व कप में भारतीय टीम की जीत का सचिन तेंदुलकर के दिलोंदिमाग पर गहरा असर था और क्रिकेटर बनने की इच्छा भी इसी से प्रबल हुई।

वहीं इसके एक दृश्य में इस्लामी टोपी पहने एक मुस्लिम बुजुर्ग को भी भारत की जीत का जश्न मनाते हुए दिखाया गया है। कबीर खान की इस फिल्म में उक्त मुस्लिम बुजुर्ग भारतीय क्रिकेट टीम को किस देता हुआ नजर आता है। वैसे भारतीय फिल्मों में ‘अच्छा मुस्लिम’ या ‘सच्चा मुस्लिम’ वाला कॉन्सेप्ट नया नहीं है। लेकिन, हाल के दिनों में जिस तरह मुस्लिम भीड़ ने कई जगह T20 विश्व कप में पाकिस्तान की जीत और भारत की हार का जश्न मनाया, उस माहौल में ये दृश्य चर्चा करने लायक है।

इस फिल्म में उस मैच को खास कर के पेश किया जाएगा, जिसमें कपिल देव ने मात्र 138 गेंदों में 175 रनों की शानदार पारी खेली थी। 1983 क्रिकेट विश्व कप का ये 20वाँ मैच था, जिसमें भारत और जिम्बाब्वे भिड़े थे। इस मैच में भारतीय टीम को जीतना ज़रूरी है, लेकिन पहले बल्लेबाजी करते हुए मात्र 9 रनों पर इसके 4 विकेट गिर गए थे। सुनील गावस्कर और के श्रीकांत जैसे दिग्गज ओपनर्स खाता तक नहीं खोल पाए थे। ऐसे में कपिल देव ने न सिर्फ 16 चौकों और 6 छक्कों से भरी एक आतिशी पारी खेली, बल्कि दूसरी पारी में गेंदबाजी करते हुए एक विकेट भी झटका।

कई लोगों ने कहा कि ’83’ का ट्रेलर देख कर उनके रोंगटे खड़े हो गए, तो कइयों ने कहा कि आज जब पूरे देश में क्रिकेट को लेकर इतनी दीवानगी है तो ऐसे समय में आज की पीढ़ी को 1983 विश्व कप की कहानी बताई जानी चाहिए। फिल्म समीक्षकों ने इस फिल्म की कमाई को लेकर भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि ये बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाएगी। प्रशंसकों ने तस्वीरें शेयर कर बताया कि कैसे वास्तविक घटनाओं का इस फिल्म में सही चित्रण किया गया है और रणवीर सिंह ने अपनी अभिनय क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

पंकज त्रिपाठी ने इस फिल्म में पीआर मान सिंह का किरदार अदा किया है, जो उस समय टीम के मैनेजर थे। सुनील गावस्कर की भूमिका में ताहिर राज भसीन, कृष्णमाचारी श्रीकांत की भूमिका में जीवा, मोहिंदर अमरनाथ की भूमिका में साकिब सलीम, यशपाल शर्मा की भूमिका में जतिन सरना, संदीप पाटिल की भूमिका में चिराग पाटिल, मदन लाल की भूमिका में हार्डी संधू, सैयद किरमानी की भूमिका में साहिल खट्टर और फारुख इंजीनियर की भूमिका में बोमन ईरानी 24 दिसंबर, 2021 को रिलीज हो रही इस फिल्म में दिखाई देंगे।

दिल्ली पुलिस ने अरविंद उर्फ केजरीवाल को पकड़ा: 2 साथी भी धराए, चोरी की मोबाइल-बाइक सहित कई सामान बरामद

दिल्ली पुलिस ने तीन शातिर और कुख्यात स्नैचर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार बदमाशों की पहचान अरविंद उर्फ केजरीवाल, सौरभ उर्फ राजा और सुरेश राय उर्फ बउआ के रूप में हुई है। इनके पास से एक चाकू, एक चोरी की गई मोटरसाइकिल, एक चोरी की मोबाइल फोन और अन्य चीजें बरामद की गई हैं।

जानकारी के मुताबिक कॉन्सटेबल रामावतार और सुनील 28 नवंबर को पुलिस स्टेशन एरिया में मोटरसाइकल पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। दोपहर के करीब 2:30 पर जब वे दिल्ली के माँ आनंदमयी मार्ग के इंदिरा कल्याण विहार के रेड लाइट एरिया के पास पहुँचे तो उन्होंने एक महिला को ‘चोर चोर’ चिल्लाते हुए देखा। वह महिला तीन लोगों की तरफ इशारा कर रही थी, जो मोटरसाइकल पर सवार थे और ESI हॉस्पिटल की तरफ भाग रहे थे।

इसके बाद पुलिस ने उस मोटरसाइकल का पीछा करना शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद उसे धर दबोचा। तब तक वह महिला भी वहाँ पर पहुँच गई थी। उसने बताया कि उन तीन लोगों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया था। तलाशी लेने पर पुलिस को वह मोबाइल फोन और छीनने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चाकू मिली। इतना ही नहीं, जब पुलिस ने उन तीनों से मोटरसाइकल के मालिक के बारे में पूछा तो वह कुछ जवाब नहीं दे पाए।

पूछताछ करने पर उनकी पहचान अरविंद उर्फ केजरीवाल, सौरभ उर्फ राजा और सुरेश राय उर्फ बउआ के रूप में हुई। ये तीनों दिल्ली के फेज-1 के रहने वाले हैं। तहकीकात करने पर पता चला कि तीनों ने यह मोटरसाउकल कालकाजी पुलिस स्टेशन के पास से चोरी की थी। मामले में FIR दर्ज कर ली है। जाँच की जा रही है।

जैकलीन फर्नांडीज ने मिरर सेल्फी में सुकेश चंद्रशेखर को किया किस, फोटो सामने आने से 200 करोड़ वसूली मामले में नया मोड़

बॉलीवुड गलियारों में इन दिनों एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज और सुकेश चंद्रशेखर की नजदीकियाँ चर्चा में हैं। बॉलीवुड न्यूज वेबसाइट ‘बॉलीवुड हंगामा‘ ने अपने पोर्टल पर दोनों की एक लेटेस्ट फोटो शेयर की है, जिसमें जैकलीन मिरर सेल्फी में सुकेश को किस करती हुई दिखाई दे रही हैं। खबरें हैं कि सुकेश और बॉलीवुड एक्ट्रेस कुछ समय के लिए रिलेशनशिप में थे। पिछले हफ्ते भी दोनों की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसने इस खबर की पुष्टि की थी।

बीते महीने, जैकलीन फर्नांडीज से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 200 करोड़ रुपए के जबरन वसूली मामले में कॉनमैन सुकेश चंद्रशेखर और उनकी पत्नी, अभिनेता लीना मारिया पॉल से जुड़े मामले में सात घंटे तक दिल्ली में पूछताछ की थी। चंद्रशेखर के वकील अनंत मलिक पहले भी दावा कर चुके हैं कि जैकलीन सुकेश के साथ रिश्ते में थीं। हालाँकि, जैकलीन की ओर से इसे नकार दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते जाँच एजेंसियों के हाथ जो तस्वीर लगी थी, उसमें सुकेश और जैकलीन एक दूसरे के बेहद करीब दिखाई दे रहे थे। यह तस्वीर उस समय की बताई गई थी, जब सुकेश चंद्रशेखर तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आया था। तिहाड़ से निकलने के बाद वह फ्लाइट से चेन्नई गया और वहाँ फाइव स्टार होटल में जैकलीन से मिला था।

बता दें कि सुकेश चंद्रशेखर को पुलिस ने इसी साल गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने जेल के अंदर बंद रहते हुए 200 करोड़ रुपए वसूली का रैकेट चलाया था। दिल्ली पुलिस ने अपने चार्जशीट में सुकेश चंद्रशेखर और 13 अन्य पर रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर की पत्नी से 200 करोड़ रुपए ठगने का आरोप लगाया है। इस मामले में जैकलीन को मुख्य गवाह माना जा रहा है।

असम: महादेव टीला पर जुटे हिंदू, फिर से शिवलिंग किया स्थापित; ईसाइयों ने पूजा स्थल को अपवित्र कर काट दिया था पवित्र बरगद

हाल ही में असम के कछार की कटिगोरा में एक हिंदू धार्मिक स्थल को खासी ईसाई समुदाय द्वारा अपवित्र करने का मामला सामने आया था। ऑपइंडिया ने 24 नवंबर को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कैसे ईसाई समुदाय ने हिंदुओं की भावनाओं को आहत करते हुए एक शिवलिंग और त्रिशूल को उखाड़ दिया और सदियों पुराने (250 साल) पवित्र बरगद के पेड़ को काट दिया था।

इस मामले की तह तक जाने के लिए ऑपइंडिया ने हिंदू रक्षा दल के एक सदस्य से संपर्क किया। शुभाशीष चौधरी ने हमें बताया कि मणिपुर के हिंदुओं ने हिंदू रक्षा दल और हिंदू छात्र संघ जैसे हिंदू संगठनों के सदस्यों की मदद से असम के महादेवटीला में फिर से पूजा करना शुरू कर दिया है। इसे 17 नवंबर को खासी ईसाई समुदाय ने कथित तौर पर अपवित्र कर दिया था। चौधरी के मुताबिक, (29 नवंबर, 2021) को 100 से ज्यादा हिंदू महादेव टीला पर गए और वहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना की। प्रार्थना और मंत्रोच्चार के बीच वहाँ फिर से शिवलिंग को स्थापित किया गया और एक नया बरगद का पेड़ भी लगाया गया। इस पूजा में स्थानीय हिन्दुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

चौधरी ने यह भी बताया कि इस दौरान हिंदू छात्र संघ, हिंदू रक्षा दल और आरएसएस के सदस्यों के साथ मणिपुरी हिंदू और महादेव टीला सेवा समिति लोग मौजूद थे।

बता दें कि हिंदू रक्षा दल और हिंदू छात्र संघ के सदस्यों ने सोमवार (22 नवंबर, 2021) को कछार में उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर असम के कटिगोरा के महादेव टीला में एक हिंदू धार्मिक स्थल को अपवित्र करने वाले खासी ईसाई समुदाय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। सौंपे गए ज्ञापन में हिन्दू संगठनों ने भविष्य में इस तरह के कामों को दोबारा दोहराने से बचने के लिए शिवलिंग और त्रिशूल को पहले की तरह स्थापित करते हुए लोहे की रेलिंग से घेरने की माँग भी की थी। जिस जगह पर यह घटना हुई, वहाँ खासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, जिनमें से 85 फीसदी ने ईसाई धर्म अपना लिया है। हिंदू समूह ने अपने ज्ञापन में हमले के पीछे कुछ खासी ईसाइयों का हाथ होने का आरोप लगाया था। मणिपुर के हिंदुओं ने भी इसका विरोध किया था। उन्होंने वन विभाग और कछार पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने उन्हें कुछ दिन इंतजार करने को कहा था, लेकिन स्थानीय लोगों का ​कहना है कि पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर रही है।

ऑपइंडिया ने हिंदू छात्र संघ के अनिंदा देव से भी संपर्क किया था, जिन्होंने इस मामले में पुलिस की उदासीनता का आरोप लगाया था। देव ने कहा था कि स्थानीय पुलिस खासी ईसाई समुदाय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इसकी बजाए उन्होंने स्थानीय हिंदुओं को ईसाइयों से दूर रहने की धमकी दी थी। ऑपइंडिया ने स्थानीय उपायुक्त से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इस बीच कछार के एसपी रमनदीप कौर ने कहा, “आपको जो सूचना मिली है वह गलत है। यहाँ एक बरगद का पेड़ था, जिसकी स्थानीय लोग पूजा करते थे। वन अधिनियम (Forest Act) के तहत मामला दर्ज कर स्थानीय एसआई मामले की जाँच कर रहे हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि यह किसी शरारती तत्व का काम है या फिर अनजाने में पेड़ को काटा गया।”

ओमिक्रॉन से निपटने में अफ्रीकी देशों का सहारा बनेगा भारत, केविन पीटरसन ने की तारीफ़: पूर्व टेनिस खिलाड़ी ने दिखाई मोदी घृणा

इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर केविन पीटरसन ने अफ़्रीकी देशों की मदद करने के लिए भारत की तारीफ़ की है। दरअसल, भारत सरकार ने साफ़ कर दिया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के 32 म्यूटेशन वाले खतरनाक वैरिएंट ओमिक्रॉन से निपटने के मद्देनजर वो अफ़्रीकी देशों के साथ खड़ा है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में ये वैरिएंट तेज़ी से फ़ैल रहा है और तबाही मचा रहा है। इसीलिए, भारत ने उन देशों को ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन की सप्लाई का वादा किया है।

इससे पहले भी कई अफ़्रीकी देशों को भारत ने वैक्सीन देकर उनकी मदद की है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘COVAX’ के जरिए या द्विपक्षीय स्तर पर टीकों की सप्लाई की जाएगी। मलावी, इथियोपिया, ज़ाम्बिया, मोजाबमिक, गुइना और लेसोथो जैसे जैसे देशों द्वारा कोविशील्ड वैक्सीन की सप्लाई के लिए जो भी ऑर्डर प्लेस किए गए थे, उसे भारत सरकार ने पहले ही क्लियर कर दिया है। ‘COVAX’ से आने वाले ऑर्डर्स के लिए इन देशों को सरकार प्राथमिकता दे रही है।

इन सबके अलावा मेडिकल ज़रूरत के अन्य सामान, जैसे कि जीवन बचाने वाले ड्रग्स, टेस्ट किट्स। ग्लव्स, PPE किट्स, वेंटिलेटर्स जैसे मेडिकल उपकरण और अन्य चीजें भी इन देशों को दी जाएँगी। भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि यहाँ की संस्थाएँ अफ़्रीकी संस्थाओं के साथ मिलजुल कर काम करेगी और रिसर्च के कार्य में भी अफ़्रीकी देशों की मदद की जाएगी। जीनोमिक सर्विलांस और वायरस के कैरेक्टर को पहचानने के लिए लगातार रिसर्च चल रहा है।

केविन पीटरसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “भारत ने एक बार फिर से सेवा भाव दिखाया है। ये एक विलक्षण राष्ट्र है, जहाँ नरम दिल वाले बहुत सारे लोग हैं। धन्यवाद।” साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग भी किया। इस पर एक व्यक्ति ने उन्हें टेनिस की खिलाड़ी रहीं मार्टिना नवरातिलोवा को टैग कर के ये बात बताने को कहा। इस पर मार्टिना ने कहा कि नरेंद्र मोदी के बावजूद भारत महान है और वो हमेशा से महान रहा है।

बता दें कि मार्टिना नवरातिलोवा भारत और भाजपा के प्रति अपनी घृणा के लिए जानी जाती है। उन्होंने भारत में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वाले लोगों का समर्थन किया था। फरवरी 2016 में उन्होंने भारत के ‘अति राष्ट्रवाद’ को हिंसक करार दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवैधानिक पद पर रहते हुए 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्हें लोकतांत्रिक नेता बताया था, तब भी इसे मार्टिना नवरातिलोवा ने मजाक करार दिया था।

‘ना डरी हूँ ना कभी डरूँगी, गद्दारों के खिलाफ खुलकर बोलती रहूँगी’: धमकी मिलने के बाद कंगना ने दर्ज करवाई FIR

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया है कि उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। इसको लेकर उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाई है। कंगना ने इंस्टाग्राम पर एफआईआर की कॉपी भी शेयर की है। 

कंगना ने गोल्डन टैंपल की तस्वीर साझा करते हुए लिखा है, “मुंबई में हुए आतंकी हमले के शहीदों को याद करते हुए मैने लिखा था कि गद्दारों को कभी माफ नहीं करना, ना ही भूलना। इस तरह की घटना में देश के अंदरूनी देशद्रोही गद्दारों का हाथ होता है। देशद्रोही गद्दारों ने कभी पैसे के लालच में तो कभी पद व सत्ता के लालच में भारत माँ को कलंकित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा। देश के अंदरूनी जयचंद और गद्दार षड्यंत्र रचकर देश विरोधी ताकतों को मदद करते रहे, तभी इस तरह की घटनाएँ होती हैं।”

कंगना ने आगे लिखा, “मेरे इसी पोस्ट पर मुझे विघटनकारी ताकतों की तरफ से निरंतर धमकियाँ मिल रही हैं। बठिंडा के एक भाई साहब ने तो मुझे खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है। मैं इस तरह की गीदड़ भभकी या धमकियों से नहीं डरती। देश के खिलाफ षड्यंत्र करने वालों और आतंकी ताकतों के खिलाफ बोलती हूँ और हमेशा बोलती रहूँगी। वह चाहे बेगुनाह जवानों के हत्यारे नक्सलवादी हो, टुकड़े-टुकड़े गैंग हो या आठवें दशक में पंजाब में गुरुओं की पावन भूमि को देश से काटकर खालिस्तान बनाने का सपना देखने वाले विदेशों में बैठे हुए आतंकवादी।”

Kangana Ranaut Files FIR: कंगना रनौत को मिली जान से मारने की धमकी, एक्ट्रेस  ने दर्ज कराई एफआईआर
साभार: कंगना रनौत इंस्टाग्राम

कंगना ने लिखा, “लोकतंत्र हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है, सरकार किसी भी पार्टी की हो, लेकिन देश की अखंडता, एकता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और विचारों की अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार हमें बाबासाहेब अम्बेडकर के सविंधान ने दिया है। मैंने किसी भी जाति, मजहब, या समूह के बारे में कभी कोई अपमानजनक या नफरत फैलाने वाली बात नहीं की है।”

Kangana Ranaut Files FIR: कंगना रनौत को मिली जान से मारने की धमकी, एक्ट्रेस  ने दर्ज कराई एफआईआर
साभार: कंगना रनौत इंस्टाग्राम

कंगना आगे लिखती है, “मैं कॉन्ग्रेस की अध्यक्षा सोनिया जी को भी याद दिलाना चाहूँगी कि आप भी एक महिला हैं, आपकी सास इंदिरा गाँधी जी इसी आतंकवाद के खिलाफ अंतिम समय तक मजबूती से लड़ीं। कृपया पंजाब के अपने मुख्यमंत्री को निर्देश दें कि वह इस तरह के आतंकवादी, विघटनकारी और देशविरोधी ताकतों की धमकी पर तुरंत कार्रवाई करें।”

Kangana Ranaut Files FIR: कंगना रनौत को मिली जान से मारने की धमकी, एक्ट्रेस  ने दर्ज कराई एफआईआर
साभार: कंगना रनौत इंस्टाग्राम

FIR की जानकारी देते हुए कंगना ने लिखा, “मैंने धमकी देने वालो के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की है। मुझे उम्मीद है कि पंजाब सरकार भी जल्द कार्रवाई करेगी। देश मेरे लिए सर्वोपरि है, इसके लिए मुझे बलिदान भी देना पडे़ तो मुझे स्वीकार्य है, पर मैं ना डरी हूँ ना कभी डरूँगी, देश के हित में, गद्दारों के खिलाफ खुलकर बोलती रहूँगी।”

उन्होने आगे लिखा, “पंजाब में चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए कुछ लोग मेरी बात को संदर्भ के बिना प्रयोग कर रहे हैं। अगर मुझे भविष्य में कुछ भी होता है तो उसके लिए नफरत की राजनीति व बयानबाज़ी करने वाले ही पूरी तरह उत्तरदायी होगें। इनसे करबद्ध निवेदन है कि चुनाव जीतने की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए किसी के प्रति नफरत ना फैलाए।” कंगना ने जय हिंद, जय भारत के साथ अपने पोस्ट का अंत किया है।

बता दें कि कंगना के किसान आंदोलन की तुलना खालिस्तानी आंदोलन से करने को लेकर हाल ही में केजरीवाल सरकार के विधायक राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने अभिनेत्री कंगना रनौत को समन भेजकर 6 दिसंबर 2021 को पेश होने के लिए कहा है। 

हिंदू विवाह में ‘अल्लाह की शान’ में गाने, विरोध करने पर म्यूजिशियन ने आयोजकों को ही बता डाला ‘असहिष्णु’: अब पूरी स्टोरी गायब

न्यूज़ पोर्टल द क्विंट ने 29 नवंबर, 2021 को चुपचाप एक स्टोरी को साइट से डिलीट कर दिया जो उन्होंने उसी दिन एक संगीतकार अभिषेक शंकर के बारे में प्रकाशित की थी, जिसने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर एक ऐसे क्लाइंट के बारे में बताया था, जिसने उन्हें हिन्दू की शादी में में ‘अल्लाह’ गाना नहीं बजाने से रोका था। अभिषेक शंकर ने अपने इस कथित अनुभव को स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के शो को रद्द करने के साथ जोड़ा था, जिसने गोधरा नरसंहार के साथ-साथ पीड़ितों का भी मजाक उड़ाया था। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि द क्विंट ने स्टोरी क्यों हटाई। लेकिन, एक वेबसाइट apdirect.in ने क्विंट से स्टोरी को उठाकर अपने यहाँ इसे प्रकाशित किया है।

टीका वाले एक शख्स ने हमें अल्लाह गाने से रोका: अभिषेक शंकर

अभिषेक का एक बैंड है जो शादियों सहित दूसरे कार्यक्रमों में शो करता है। उन्होंने एक घटना साझा की जहाँ उन्हें कथित तौर पर किसी हिंदू शादी में ‘अल्लाह’ की शान में एक गाना बजाने से रोक दिया गया था। अपनी अब-डिलीट की गई स्टोरी में, अभिषेक ने कहा, “नफरत सिर्फ कॉमेडियन के लिए नहीं है। संगीतकारों को भी इसे झेलना होता है। मैं न्यूज़ नहीं फॉलो कर रहा था क्योंकि मैं लगातार अपने काम में व्यस्त था जब तक कि सिर्फ 16 घंटे पहले यह घटना मेरे और बैंड के साथ हमारे पिछले शो में नहीं घटी।”

फारूकी के शो रद्द होने से अपने अनुभव को जोड़ने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “मेरे बैंड के पास भारतीय व्यवसायिक संगीत में विभिन्न शैलियों के गीतों की एक सूची है। सूफी संगीत उनमें से एक है। हम सभी को नुसरत (फतेह अली खान) साहब के क्लासिक गाने और साथ ही कोक स्टूडियो इंडिया और पाकिस्तान के गाने बहुत पसंद हैं। हमारे पास एक मेडली है जिसमें अल्लाह-हू (नूरन सिस्टर्स), अखियाँ उड़ीक दिया, नित खेर माँगा (नुसरत फतेह अली खान) आदि जैसे गाने हैं और हम अपनी इसी लिस्ट से नियमित शो कर रहे थे। ”

उन्होंने आगे कहा कि जब तक उनकी महिला गायिका ने सूफी गीत ‘अल्लाह-हू’ गाना शुरू नहीं किया, तब तक सब कुछ ठीक चल रहा था। उनके अनुसार, भीड़ गीत को पसंद कर रही थी, लेकिन इसके बीच में, अपने माथे पर तिलक लगाए एक अचानक से आए एक चाचा ने मुझे मंच के किनारे पर बुलाया। ऐसा आमतौर पर लोग अपने पसंदीदा गानों का अनुरोध करते हैं। लेकिन उनकी आवाज पीए सिस्टम के माध्यम से मेरे कानों में कंकड़ की तरह धँस गई क्योंकि उन्होंने कहा, “यह अल्लाह हू अल्लाह क्या है? क्या हम आपको मुस्लिम दिखते हैं? यह एक हिंदू शादी है। हम यहाँ अल्लाह हू… बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैं इसे बंद करा दूँगा। बंद कीजिए इसे।”

संगीतकार अभिषेक, जिसे एक निजी कार्यक्रम में गाने के लिए बुलाया गया था, ने कहा कि उसने उन्हें ‘समझाने’ की कोशिश की, लेकिन उस आदमी ने उनकी बात नहीं मानी और कथित तौर पर उसे धमकी दी कि अगर उसने गाना बंद नहीं किया, तो उन्हें बाहर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह पूरी घटना मेरे दिमाग में दस्तक देने लगी जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ता रहा, मैं अब और परफॉर्म करना नहीं चाहता था। मैं उससे बहस कर सकता था, लेकिन इससे बात और बिगड़ सकती थी।”

अभिषेक ने दावा किया कि इस घटना के बाद उन्हें अपने हाथ में ‘रक्षा’ या जनेऊ जैसा कोई पवित्र धागा बाँधने में भी घृणा महसूस हुई। उन्होंने कहा, “इस घटना के बाद मुझे अपने शरीर पर पवित्र धागा (जनेऊ या रक्षा) बाँधने से घृणा महसूस हुई। मेरा सभी से बस एक ही निवेदन है। अपनी धार्मिक नफरत को अपने राजनीतिक और सामाजिक दायरे में ही रखें। इसे कला क्षेत्र में न लाएँ और इसे खराब न करें। कलाकार किसी धर्म के नहीं होते।”

अंत में, शंकर ने दावा किया कि एक बार जब वह मध्य प्रदेश के जबलपुर जाने वाली ट्रेन में थे, तो किसी व्यक्ति ने उनसे उनकी दाढ़ी के बारे में पूछा, “आपके पास दाढ़ी है क्योंकि आप इसे पसंद करते हैं या आप मुस्लिम हैं?” उसने दावा किया कि एक अजनबी ने उससे ट्रेन में पूछा था। फिर उन्होंने आगे दावा किया कि खाकी जैकेट के नीचे ‘यूपी पुलिस’ का लोगो था।

यहाँ सवाल यह है कि अब पूरी स्टोरी ही गायब हो गई है और अभिषेक शंकर ने भी शादी के बारे में कोई अपडेट पोस्ट नहीं किया है, जिसमें उन्होंने बताया हो कि हिंदुओं की शादी थी, जिससे उन्हें अपने जनेऊ पर शर्म आ रही थी। हालाँकि, यह बहुत संभावना है कि शंकर, हिन्दुओं के पवित्र प्रतीक और क्लाइंट को बदनाम करने के बाद, यह महसूस किया कि इसका उलटा असर हो सकता है और उनका ‘वोक’ स्टैंड वास्तव में उन पर ही भारी पड़ सकता है। क्योंकि इस तरह से सोशल मीडिया पर लोगों को बदनाम करने के लिए कितने लोग ऐसे हैं जो उन्हें पैसे दे सकते हैं, इसका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।

वैसे इस बात की संभावना ज़्यादा है कि या तो ऐसी घटना कभी हुई ही नहीं या बढ़ा-चढ़ाकर कही गई थी। इसलिए जब द क्विंट द्वारा स्टोरी पब्लिश किया गया, और सोशल मीडिया पर लोगों ने संगीतकार से सवाल करना शुरू कर दिया और कुछ ने सार्वजनिक मंच पर इस तरह से अपने क्लाइंट को बदनाम करने के लिए उनकी पेशेवर ईमानदारी पर भी सवाल उठाया, तो संगीतकार ने पीछे हटने का फैसला किया और शायद खुद को ही विक्टिम दिखाने कि कोशिश हुई कि उन्हें धमकी दी गई थी। ऐसा सुविधासम्पन्न वोक द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला पुराना तरीका है जिसमें बिना सबूतों के सनसनीखेज दावे किए जाते हैं और फिर जब कोई उनसे सवाल करता है तो रोना-धोना शुरू हो जाता है। विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर देते हैं।

इस तरह की बातें लगभग सभी जानते हैं। आपको बरुन कश्यप का मामला याद है? अगस्त 2016 में, मुंबई स्थित एक एग्जीक्यूटिव ने दावा किया था कि उसे गौरक्षकों द्वारा ‘पीटा’ गया था (ऐसे समय में जब राष्ट्रीय मीडिया ‘गौरक्षकों’ की कथित तौर पर मवेशियों की तस्करी पर लोगों को पीटने की कहानियों से भरा हुआ था) क्योंकि उसके ‘चमड़े के बैग’ की वजह से। बरुन ने आरोप लगाया था कि वह मुंबई में एक ऑटोरिक्शा में घर जा रहा था, तभी ड्राइवर ने उसे बीच रास्ते में उतार दिया और दूसरे लोगों को उसकी पिटाई करने के लिए बुला लाया क्योंकि उसका बैग ‘गाय की खाल’ से बना था।

बरुन ने सभी को विश्वास दिलाया कि ऑटोरिक्शा ड्राइवर बैग को देखकर ही उसके चमड़े का पता लगा सकता था और उसे गाय की खाल से बने होना अपराध लगता है। तब बरुन ने दावा किया था कि उसने उनसे अनुरोध किया था कि बैग ऊँट की खाल से बना है। हालाँकि, उसने बाद में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि यह सब क्यों किया। जाहिर तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए इसके मनगढंत होने की बात स्वीकार की थी और खुद को ‘गौरक्षकों’ का विक्टिम बताना चाह रहा था।

अब कौन कह सकता है कि अभिषेक शंकर ने विक्टिम कार्ड खेलने के लिए इसे नहीं के लिए इसे नहीं गढ़ा, क्योंकि, मुनव्वर फारूकी को खूब अटेंशन मिल रहा था?