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वो 13 राज्य, सभी गैर-BJP शासन वाले… जिन्होंने पेट्रोल-डीजल पर अभी तक नहीं किया टैक्स कम

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल के दामों पर राहत देने के बाद तमाम राज्यों ने राज्य कर में भी कटौती की है। प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार 14 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ऐसे भी हैं, जिन्होंने पेट्रोल और डीजल पर वैट में कोई कमी नहीं की है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर राजनीति करने वाले और केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोलने वाले महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, मेघालय, अंडमान और निकोबार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान कर में कटौती करने से कतरा रहे हैं।

ओडिशा मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार 5 नवंबर की रात से डीजल और पेट्रोल पर 3 रुपए की VAT छूट की घोषणा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के द्वारा की गई है। हालाँकि PIB ने जिन 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सूची जिस समय (5 नवंबर की 9 बजे रात) जारी की, उस समय तक ओडिशा में पेट्रोल-डीजल में कर-कटौती वाली घोषणा क्रियांवित नहीं हुई थी।

5 नवंबर की 12 बजे रात (जब से ओडिशा में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कटौती शुरू हुई) के बाद को भी देखें तो इसका मतलब यह हुआ कि ओडिशा को हटा दें तो भी 13 राज्यों ने पेट्रोल और डीजल पर वैट नहीं घटा कर अपने यहाँ के नागरिकों को वंचित रखा है। इसका मतलब यह भी हुआ कि केंद्र पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर हमलावर होने का उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ सियासी होता था।

वहीं, केरल सरकार ने ईंधन के दामों पर कर में कटौती करने से साफ इंकार कर दिया है। भाजपा और कॉन्ग्रेस की आलोचना के बावजूद केरल सरकार ने शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को कहा कि वह राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति के कारण ईंधन पर कर को खत्म नहीं कर सकती है। केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने तिरुवनंतपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा:

”जब कई अन्य राज्यों ने कोविड-19 के दौरान ईंधन कर में वृद्धि की और सेस (Cess) की शुरुआत की, तब केरल ने आम लोगों की परेशानी को देखते हुए ऐसा नहीं किया। कई राज्यों में उपचुनावों में भाजपा को तकड़ा झटका लगा है। इसके कारण केंद्र ने मजबूरी में पेट्रोल और डीजल कर में कटौती करने का फैसला किया।”

ईंधन पर अतिरिक्त कर में कटौती नहीं करने के राज्य के फैसले को सही ठहराते हुए, केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने पिछले 6 वर्षों में ईंधन कर में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसलिए सरकार को केंद्र या अन्य राज्यों की तरह कटौती करने की जरूरत नहीं है। इससे उलट राज्य सरकार ने प्रदेश की जनता को राहत और मदद करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए और नई परियोजनाएँ शुरू की। साथ ही महँगाई भत्ते में 6% की वृद्धि की है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य द्वारा पेट्रोल और डीजल के लिए लागू कर ढाँचे अलग-अलग हैं। मंत्री ने कहा कि जब केंद्र सरकार अपने कर या ईंधन की मूल कीमत को कम करती है तो यह स्वाभाविक रूप से राज्य कर में दिखाई देगी, क्योंकि वहाँ भी आनुपातिक कमी होगी।

बता दें कि केंद्र सरकार ने दीपावली के मौके पर पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर कम कर दी है। यह फैसला गुरुवार से प्रभावी हो गया है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गोवा, कर्नाटक, पुडुचेरी, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, असम, सिक्किम, बिहार, मध्य प्रदेश, गोवा, गुजरात, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, लद्दाख और ओडिशा। समेत कई राज्‍य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल पर वैट में कटौती करने का ऐलान किया है।

‘मोहम्मद फैजल की हत्या में RSS का कोई हाथ नहीं’ – CBI, मस्जिद के पास काट डालने के आरोपी वामपंथी नेताओं का जोरदार स्वागत

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2006 के पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कार्यकर्ता मोहम्मद फैजल की हत्या मामले की जाँच पर शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को केरल हाई कोर्ट में एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। अदालत ने इस साल जुलाई में मामले की जाँच आगे बढ़ाने का आदेश दिया था और सीबीआई को जाँच के लिए एक विशेष टीम गठित करने को कहा था। बताया गया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पूर्व कार्यकर्ता सुभीश ने हत्या में आरएसएस कार्यकर्ताओं का हाथ होने का खुलासा किया था, जिसके बाद अदालत ने यह आदेश दिया था।

अदालत में शुक्रवार को सौंपी गई रिपोर्ट में सीबीआई ने दावा किया है कि आरएसएस के खिलाफ आरोप सही नहीं है और अपनी प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट का समर्थन किया, जिसमें माकपा नेताओं की संलिप्तता का संकेत दिया गया था।

सीबीआई ने अदालत में कहा कि सुभीश द्वारा पुलिस हिरासत में किया गया खुलासा, दबाव में आकर दिया गया बयान था। सुभीश ने कथित तौर पर पुलिस को बताया था कि उसने आरएसएस के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर फैजल की हत्या कर दी थी। ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुभीश ने उस बयान को वापस ले लिया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने उसे यह सब कबूल करने के लिए प्रताड़ित किया था।

बता दें कि 30 वर्षीय मोहम्मद फैजल की 22 अक्टूबर, 2006 को केरल के थालास्सेरी में हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में इस मामले की जाँच केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही थी, लेकिन मृतक की पत्नी मरियू की याचिका पर बाद में हाई कोर्ट ने जाँच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी थी।

सीबीआई ने इस मामले में दो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेताओं करायी राजन और करायी चंद्रशेखरन सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। हत्या के मामले में गिरफ्तार होने के डेढ़ साल बाद एर्नाकुलम नहीं छोड़ने की शर्त पर दोनों भाइयों को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। लेकिन उन्हें हाल ही में फिर से गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी के नेता टीपी चंद्रशेखरन की हत्या करने वाले कोडी सुनी को फैजल हत्याकांड का पहला आरोपित बनाया गया था। वहीं, सीबीआई के अनुसार, हत्या की साजिश राजन और चंद्रशेखरन ने रची थी और इसे अन्य लोगों ने अंजाम दिया था।

CPM के वरिष्ठ नेता करायी राजन और करायी चंद्रशेखरन का शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को जोरदार स्वागत किया गया। ये दोनों 8 साल बाद अपने पैतृक जिले में लौटे। NDF (बाद में यही PFI बना) कार्यकर्ता मुहम्मद फजल की हत्या के मामले में सातवें और आठवें आरोपी यही राजन और चंद्रशेखरन हैं।

22 अक्टूबर 2006 को सैदर मस्जिद के पास एक अज्ञात गिरोह ने फजल की हत्या कर दी थी। यह आरोप लगाया गया था कि हत्या के पीछे CPM का हाथ था क्योंकि फजल ने पार्टी छोड़ दी थी और एनडीएफ में शामिल हो गए थे।

दिवाली पर ₹1.25 लाख करोड़ का कारोबार, टूटा पिछले 10 साल का रिकॉर्ड, चीनी कंपनियों को ₹50 हजार करोड़ की चपत

हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक दीपावली पर इस बार जबरदस्त खरीदारी हुई है। इस मौके पर 1.25 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जिसने खरीदारी के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने यह जानकारी दी। CAIT ने उम्मीद जताई है कि आगे भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसी तरह का सकारात्मक माहौल बना रहेगा।

कोरोना संकट के बाद दिवाली पर बाजार में छाई रौनक अर्थव्यवस्था की गति का संकेत है। पिछले साल कोरोना के कारण दिवाली पर बाजार में खामोशी छाई रही थी। हालाँकि, देश में कोरोना का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। CAIT द्वारा दी जानकारी के मुताबिक, पिछले एक दशक में दिवाली के दौरान की गई खरीदारी का का यह उच्चतम स्तर है। CAIT ने कहा है कि इस दिवाली पर देशवासियों ने जमकर खरीदारी की है। 

दरअसल, CAIT चीन में बने सामानों को लेकर देशवासियों को समय-समय पर जागरूक करने का काम करते रहा है। इस साल भी संस्था ने यह अभियान चलाया था। CAIT ने कहा कि बीते साल की तरह इस साल भी संगठन ने चीन में निर्मित उत्पादों के बहिष्कार के लिए लोगों से अपील की थी। इसके साथ ही इसने कारोबारियों से भी चीन के सामानों को आयात नहीं करने के लिए कहा था। CAIT का अनुमान है कि इससे चीनी व्यापारियों को तकरीबन 50,000 करोड़ रुपये का कारोबारी नुकसान हुआ है।

इससे पहले CAIT ने अनुमान लगाया था कि दिवाली पर इस साल लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होगा, जबकि साल के अंत तक उपभोक्ताओं द्वारा खर्च के रूप में करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। CAIT ने अपने बयान में कहा कि इस साल दिवाली पर लोगों में नया उत्साह देखने को मिला। बाजारों में उपभोक्ताओं की भीड़ से ऐसा लगा कि लोग इस बार दो साल की खरीदारी एक साथ कर रहे हैं।

वहीं, CAIT के सचिव जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि की संस्था की रिसर्च विंग ने हाल ही में 20 बड़ों शहरों में इस मुहिम को लेकर सर्वे किया था। इस सर्वे में सामने आया कि भारतीय आयातकों ने चीनी निर्यातकों के साथ दिवाली के सामान, पटाखों या दूसरी किसी चीज का भारी-भरकम ऑर्डर नहीं किया। संस्था ने नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता,  चेन्नै, लखनऊ, चंडीगढ़, रायपुर, नागपुर, जयपुर, भुवनेश्वर, अहमदाबाद, राँची, गुवाहाटी, पटना, भोपाल, जम्मू बेंगलुरु, हैदराबाद, मदुरै और पुडुचेरी में यह सर्वे कराया था।

जेल में मौत के करीब पहुँच गई है चीन की महिला पत्रकार, वुहान में कोरोना वायरस कवरेज की ‘ड्रैगन कोर्ट’ ने दी सजा

चीन के वुहान शहर में शुरूआती दिनों में कोरोना महामारी को रिपोर्ट करने को लेकर चीनी पत्रकार झांग झान को 4 साल जेल की सजा दी गई। जेल में बंद झांग झान भूख हड़ताल पर हैं। जिसकी वजह से उनकी हालत काफी ख़राब हो चुकी है और वह मरने की कगार पर पहुँच चुकी है।

वुहान में कोविड ऑउटब्रेक होने के बाद झांग झानो उन शुरूआती पत्रकारों में से थीं, जो मौके पर पहुँचीं थी और कोविड-19 के खिलाफ चीन की प्रारंभिक प्रतिक्रिया का कवरेज किया था, लेकिन चीन में फ्री प्रेस जैसी कोई चीज नहीं है और नागरिकों के लिए आवाज उठाना प्रतिबंधित है, लिहाजा झांग झानो को जेल में बंद कर दिया और पिछले डेढ़ साल से ज्यादा वक्त से झांग झानो चीन की जेल में बंद हैं।

पिछले साल फ़रवरी के महीने में झांग झान चीन के वुहान शहर पहुँची थी और उन्होंने उस दौरान फैली महामारी को वहाँ से रिपोर्ट किया था और साथ ही उन्होंने महामारी की तैयारी को लेकर सरकारी अधिकारियों से सवाल भी किए थे। इस दौरान झांग जान ने अपने मोबाइल फोन से कुछ वीडियो भी बनाए थे। जिसके बाद पिछले साल मई महीने में झांग को गिरफ्तार कर लिया गया था।

झांग को चीन के शंघाई से गिरफ्तार किया गया था। साथ ही उनके ऊपर वीडियो और टेक्स्ट के जरिए झूठी सूचनाएँ फैलाने का आरोप लगाया गया था। जिसके बाद दिसंबर महीने में चीन की सिटिजन जर्नलिस्ट झांग झान को वहाँ समस्या पैदा करने का दोषी ठहराया गया था। इस मामले में झांग को चार साल की सजा सुनाई थी।

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इस साल की शुरुआत में झांग के वकीलों की टीम ने उन्हें बताया था कि वे जेल में बंद होने के बाद से ही भूख हड़ताल पर हैं और उन्हें पाइप के जरिए नाक में तरल पदार्थ डालकर खाना खिलाने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि उनकी लीगल टीम को भी उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी नहीं हैं।

पिछले दिनों झांग झान के भाई जू झांग ने ट्विटर पर अपने बहन की तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की थी। तस्वीर पोस्ट करते हुए जू झांग ने लिखा कि झान 177 सेंटीमीटर लंबी है लेकिन अब उसका वजन 40 किलो से भी कम हो गया है। हो सकता है कि वह आने वाली कड़ाके की सर्दी को भी ना झेल सके। उन्हें उम्मीद है कि दुनिया याद करेगी कि वह कैसी थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार झांग की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि वह ना तो अब चल सकती है और ना ही किसी के मदद के बिना अपने सिर को भी उठा सकती है। झांग के परिवार के इस खुलासे के बाद मानवाधिकार समूहों ने चीन से तत्काल इस महिला पत्रकार को रिहा करने की माँग की है।

झांग झान के भाई जू झांग के ट्वीट के बाद मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चीनी पत्रकार की रिहाई की माँग की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि झांग को जेल नहीं दिया जाना चाहिए था। उसको तुरंत रिहा करने की जरूरत है। अगर झांग को स्वास्थ्य उपचार के लिए तत्काल रिहा नहीं किया गया तो उसके मरने का खतरा है। अगर वह जेल में मर जाती है तो चीनी सरकार के हाथ उसके खून से रंगे होंगे।

सिख फॉर जस्टिस जैसे खालिस्तानी आतंकी संगठनों की फंडिंग की जाँच करेगी NIA, तीन सदस्यीय टीम कनाडा रवाना: रिपोर्ट

अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले ‘सिख फॉर जस्टिस’ जैसे संगठनों की भारत में संचालित गतिविधियों की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर है। इस सिलसिले में एनआईए की एक टीम शुक्रवार को कनाडा के लिए रवाना हो गई है। यह टीम भारत में अलगाववाद को हवा देने के लिए कनाडा स्थित अलगाववादी संगठनों की फंडिंग की जाँच करेगी। आईजी लेवल के एक अधिकारी के नेतृत्व में यह टीम पता लगाएगी कि भारत में खालिस्तान के समर्थन को बढ़ाने के लिए किन-किन भारतीय एनजीओ की फंडिंग की जा रही है।

सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया गया है कि 4 दिनों के दौरे पर कनाडा पहुँची एनआईए की तीन सदस्यीय टीम के रडार पर सिख फॉर जस्टिस प्रमुख रूप से है। इसके अलावा, बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, खालिस्तान टाइगर फोर्स जैसे संगठन भी हैं। इन संगठनों को कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जर्मनी के रास्ते फंडिंग मिलने का संदेह है।

सिख फॉर जस्टिस ने इस साल की शुरुआत में दिल्ली सीमा पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को उकसाने का काम किया था। इसके लिए उसने इनाम का ऐलान किया था। इस ऐलान में कहा गय़ा था कि जो शख्स 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली स्थित लाल किले पर खालिस्तान का झंडा फहराएगा, उसे ढाई लाख डॉलर का इनाम दिया जाएगा।

यही नहीं, इस संगठन का प्रमुख आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कई मौकों पर किसानों को भड़काने का काम किया था। पन्नू ने एक वीडियो में किसान आंदोलन को 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से जोड़ने का भी प्रयास किया था। भारत में होने वाले किसान आंदोलन के पक्ष में कई विदेशी हस्तियों द्वारा ट्वीट करने के बाद इस आंदोलन की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठने लगे थे। इस दौरान ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्वीट किए गए ट्वीट में एक टूलकिट की बात करने पर देश में विवाद हो गया था। टूलकिट के मामले में दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

पन्नू ने 4 अक्टूबर को एक वीडियो और एक पत्र जारी किया था। इसमें उसने सिखों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ 9 अक्टूबर को ड्रोन और ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया था। अपने बयान में पन्नू ने कहा था, “आज यूपी के लखीमपुर में चार किसानों की हत्या कर दी गई। किसानों के विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। अब खालिस्तान ही एकमात्र रास्ता है। किसान हल खालिस्तान।”

वैध नागरिकों का होगा पुनर्वास, धौलपुर के घुसपैठियों को नहीं देंगे कोई मुआवजा: असम की हिमंता सरकार ने HC में दाखिल किया जवाब

असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट को सूचित किया है कि उन्होंने उन परिवारों के पुनर्वास के लिए 130 एकड़ भूमि निर्धारित कर दी है जो दारांग जिले के धौलपुर में गोरुखुटी से विस्थापित हुए थे। बस सरकार की शर्त है कि इस सुविधा का फायदा वही उठा पाएँगे जो वैध नागरिक हैं। अतिक्रमणकारियों को कोई मुआवजा देने को सरमा सरकार तैयार नहीं है।

विपक्षी नेता देवव्रत सैकिया द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने इससे पहले सरकार को नोटिस जारी किया था, इसी के जवाब में उन्होंने हलफनामा दायर किया और ये जानकारी दी। सुनवाई 3 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति काखेतो सेमा की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सरकार ने इस दौरान कहा कि वो धौलपुर में विस्थापित किए गए लोगों को वैध नागरिकता के आधार पर निर्धारित जमीन पर पुनर्वास करवाएँगे। इस प्रक्रिया में कुछ अन्य जरूरी चीजें भी ध्यान में रखी जाएँगी। देखा जाएगा कि ये लोग मृदा अपरदन से प्रभावित और भूमिहीन थे या नहीं।

हलफनामे में कहा गया है कि करीबन 1000 बीघा (134 हेक्टेयर) जमीन धौलपुर गाँव के नंबर 1 और नंबर 3 दक्षिणी क्षेत्र में ली गई है, जहाँ जरूरी वेरिफिकेशन के बाद लोगों का पुनर्वास करवाया जाएगा। सरकार का यह पक्ष भी साफ है कि बीजेपी सरकार धौलपुर से निकाले गए अतिक्रमणकारियों को कोई मुआवजा नहीं देगी।

असम सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सिपाझर राजस्व मंडल अधिकारी कमलजीत सरमा ने कहा है कि क्षेत्रों में कब्जा करने वाले अतिक्रमणकर्ता थे और असम भूमि और राजस्व विनियमन 1886 के तहत, उन्हें किसी भी समय बेदखल किया जा सकता था। उन्होंने अदालत को बताया कि पूरा मामला अतिक्रमित जमीन पर बेदखली से जुड़ा है और इसमें जमीन का अधिग्रहण शामिल नहीं है। इसलिए, भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार पुनर्वास, और मुआवजे आदि का प्रश्न ही नहीं है।

सरकार की ओर से अदालत को आगे बताया गया कि धौलपुर में अतिक्रमित भूमि से बेदखल किए गए परिवार प्रभावित प्रवासी नहीं हैं, जैसा कि जनहित याचिका में दावा किया गया है। इसलिए वे असम पुनर्वास नीति 2020 के तहत किसी भी लाभ के लिए पात्र नहीं हैं। सरकार ने यह भी बताया कि अभी बाकी बची अतिक्रमित भूमि को खाली कराने के लिए कोई कठोर उपाय नहीं किया गया है। उन्हें उनकी इच्छा से उन इलाकों को छोड़ने के लिए मनाने का प्रयास हो रहा है।

अधिकारी ने जानकारी दी कि यदि नियम के तहत कोई परिवार विस्थापित हुआ है या भारी बाढ़ और मृदा अपरदन के कारण पलायन को मजबूर हुआ है तो ऐसे विस्थापित परिवारों को संबंधित राजस्व मंडल द्वारा एक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, लेकिन इन अतिक्रमणकारियों और उनके पूर्वजों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब हाईकोर्ट ने असम सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है कि वो इस विषय पर विस्तार के साथ हलफनामा जमा करें और अगली सुनवाई की तारीख भी 14 दिसंबर निर्धारित की गई है।

याद दिला दें कि इसी साल सितंबर में असम के धौलपुर में अतिक्रमण हटाने को लेकर बड़ा बवाल हुआ था। पूरी घटना में 9 पुलिसवाले घायल हुए थे जबकि जवाबी कार्रवाई में 2 हमलावर मारे गए थे। खबरें आई थीं कि कई सालों से बांग्लादेश के घुसपैठियों ने वहाँ अपनी जगह बना ली थी। करीब 30,000 एकड़ जमीन पर बांग्लादेशी मुस्लिमों का कब्जा बताया जा रहा था। ऐसे में हेमंत बिस्वा सरमा सरकार ने चेताया भी था कि इस तरह भूमि और बस्तियों को हड़पने के माध्यम से असम की जनसांख्यिकी संरचना बदलने को प्रयास किया गया है ताकि विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणाम बदल सकें।

आर्यन खान ड्रग्स केस की जाँच करेगी NCB दिल्ली: मुंबई के 6 मामले सौंपने की तैयारी, समीर वानखेड़े हटे

मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में आज नया मोड़ सामने आया है। एनसीबी ने मामले की जाँच का नेतृत्व कर रहे जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े को जाँच से हटा दिया है। बताया जा रहा है कि समीर वानखेड़े पर वसूली के आरोप लगने के बाद से ऐसा किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वानखेड़े को हटाए जाने के बाद मामले की जाँच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी को सौंपी गई है।

दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र के उप महानिदेशक मुथा अशोक जैन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, “हमारे जोन के कुल 6 मामलों की अब दिल्ली की टीमें (एनसीबी की) जाँच करेंगी, जिसमें आर्यन खान का मामला और 5 अन्य मामले शामिल हैं। यह एक प्रशासनिक निर्णय था।”

वहीं समीर वानखेड़ें ने मामले पर बयान देते हुए कहा, “मुझे जाँच से नहीं हटाया गया है। अदालत में मेरी रिट याचिका थी कि मामले की जाँच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। इसलिए आर्यन मामले और समीर खान मामले की जाँच दिल्ली एनसीबी की एसआईटी कर रही है। यह दिल्ली और मुंबई की एनसीबी टीमों के बीच कोऑर्डिनेशन है।”

संजय सिंह एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जेनरल हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली एनसीबी की एक टीम इस कल (6 नवंबर 2021) मुंबई पहुँचेगी और आर्यन खान एवं 5 अन्य मामलों सहित मुंबई क्षेत्र के 6 मामलों को टेकओवर करेगी। एक अधिकारी ने इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा, “इन संवेदनशील मामलों को शिफ्ट करने के पीछे की वजह केस में तथ्यों और सबूतों को पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट होकर देखना है। सेंट्रल यूनिट आर्यन खान जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों को लेकर अनावश्यक विवाद से बचेगी।”

उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक कम से कम 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। क्रूज ड्रग्स मामले में एक स्वतंत्र गवाह प्रभाकर सेल ने दावा किया था और एक हलफनामा दायर किया था कि आर्यन खान को मामले से मुक्त करने के लिए एजेंसी के कुछ अधिकारियों और अन्य द्वारा 25 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की बोली लगाई गई थी। आर्यन खान मामले के अलावा, बॉलीवुड अभिनेता अरमान कोहली से जुड़े एक व्यक्ति को भी एसआईटी में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसे 28 अगस्त को एनसीबी ने कथित तौर पर 1.3 ग्राम कोकीन रखने के बाद गिरफ्तार किया था।

हरियाणा में उपद्रवी ‘किसानों’ ने भाजपा नेताओं को 8 घंटे तक बनाया बंधक, गाड़ियों के शीशे तोड़े; बहिष्कार की बात कह जबरन मँगवाई माफी

कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर हरियाणा में एक बार फिर कथित किसानों ने अराजकता का परिचय दिया है। रोहतक के किलोई गाँव में कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के कई नेताओं को बंधक बना लिया और लगभग 8:30 घंटे के बाद उन्हें छोड़ा। वहीं, नारनौंद में भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा पर हमला कर उनकी कार के शीशे को तोड़ दिया गया।

रोहतक के किलोई गाँव के प्राचीन शिव मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखने कई सुबह 9:30 बजे भाजपा नेता पहुँचे थे। इस दौरान कथित किसानों ने उन्हें बंधक बना लिया। इस दौरान टीवी को भी फोड़ दिया गया। इतना ही नहीं किसानों ने मंदिर के बाहर खड़ी गाड़ियों के टायरों की हवा भी निकाल दी। हालाँकि, माफी माँगने के बाद शाम 5:41 बजे कुछ नेता बाहर आ गए। किसानों की ‘कैद’ से जिला अध्यक्ष अजय बंसल, सतीश नांदल और मनीष ग्रोवर निकल आए हैं।

किसानों का कहना था कि संयुक्त किसान मोर्चा ने भाजपा और जेजेपी नेताओं के कार्यक्रम का विरोध करने का निर्देश दिया है और किसान आंदोलन के मद्देनजर वे विरोध कर रहे हैं। कथित किसानों का कहना है कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक भाजपा के हर कार्यक्रम का विरोध किया जाएगा। गौरतलब है कि कथित किसान केंद्र सरकार की तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं और उन्हें वापस लेने की माँग कर रहे हैं।  

अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष प्रीत सिंह ने कहा, “संयुक्त किसान मोर्चा ने इन 3 कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी पर कानून बनने तक भाजपा-जेजेपी पार्टी नेताओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया है। यह जानते हुए भी कि गाँवों में उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाता है, ये नेता ग्रामीणों की अनुमति लिए बिना यहाँ आए। हमारी माँग है कि वे ग्रामीणों से माफी माँगें और दोबारा ऐसा न करें।”

दरअसल, भाजपा नेताओं के आने की खबर के बाद ग्रामीणों के अलावा आसपास के कई गाँवों के लोग भी घटनास्थल पर पहुँच गए। मौके पर मौजूद किसान भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उन्होंने पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर से माफी माँगने के लिए कहा। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी। किसानों ने मंदिर को चारों तरफ से घेर लिया। यही नहीं, 100 से अधिक लोग मंदिर की छत पर पहुँच गए। मंदिर परिसर को घेरने के साथ ही उन्होंने चारों तरफ टैक्टर ट्रॉली भी खड़ी कर दिये।

घटना की जानकारी मिलते ही रोहतक के जिलाधिकारी कैप्टन मनोज कुमार सहित चार जिलों के एसपी घटनास्थल पर पहुँच गए। इसके साथ रोहतक के 7 थानों के एसएचओ लगभग 800 पुलिसकर्मियों के साथ पहुँचकर हालात को सँभालने का प्रयास किया। इसके साथ ही घटनास्थल पर रैपिड ऐक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया है।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष ग्रोवर ने मंदिर के बालकनी में आकर लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन किसानों की हूटिंग में उनकी बात दब गई। इस दौरान सतीश नांदल सहित अन्य नेताओं ने हाथ जोड़कर माफी माँगी, लेकिन मनीष ग्रोवर ने हाथ जोड़कर माफी नहीं माँगी। इसके बाद किसान भड़क गए। इसके बाद ग्रोवर बाहर आए और हाथ जोड़ने के बाद अंदर चले गए।

बाहर आने के बाद मनीष ग्रोवर ने कहा कि हुड्डा खाप के कुछ लोग उनके पास आए और बालकनी से सबको राम-राम करने के लिए कहा। ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने राम-राम कर दी और मामला खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि किसी से कोई माफी नहीं माँगी गई है।

किलोई के शिव मंदिर में पहुँचने वालों में भाजपा के कई बड़े नेता हैं। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, भाजपा संगठन मंत्री रविंद्र राजू, किलोई से चुनाव लड़ चुके सतीश नांदल, रोहतक नगर निगम मेयर मनमोहन गोयल, भाजपा जिला अध्यक्ष अजय बंसल, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष उषा शर्मा, पूर्व विधायक कलानौर से सरिता नारायण, पूर्व महिला जिला अध्यक्ष आशा शर्मा, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष नवीन ढुल, युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष मनीष दांगी सहित कई नेता हैं।

दूसरी तरफ, हरियाणा के ही नारनौंद में अराजक तत्वों ने भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा की कार का लाठी मारकर शीशा तोड़ दिया। इस दौरान जांगड़ा को काले झंडे भी दिखाए गए। हालाँकि, इस घटना में किसी को चोट नहीं आई। जांगड़ा कार की पिछली सीट पर बैठे थे। उन्होंने इस घटना को ‘हत्या का स्पष्ट प्रयास’ बताया है।

जांगड़ा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि घटना के इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, “अपने एक कार्यक्रम के बाद मैं एक अन्य समारोह में शामिल होने के लिए जा रहा था, तभी कुछ शरारती तत्वों ने मेरी कार पर लाठियों से प्रहार किया, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो गई।” हालांकि, इस घटना में किसी को चोट नहीं आई। वह (जांगड़ा) कार की पिछली सीट पर बैठे थे।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के CM मुराद अली ने दिवाली के मौके पर दे दी होली की शुभकामनाएँ, हुए बुरी तरह ट्रोल

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने दिवाली के मौके पर होली की शुभकामनाएँ दे दी, जिसके बाद वह सोशल मीडिया पर बुरी तरह से ट्रोल हो गए। गलती का अहसास होने पर उन्होंने ट्वीट को डिलीट कर दिया, लेकिन इस बीच ट्विटर यूजर्स ने स्क्रीनशॉट ले लिया था और तब से ही उन्हें ट्रोल किया जा रहा है।

मुराद अली के ट्विटर हैंडल से हिंदू समुदाय को शुभकामना देने के लिए जो संदेश दिया गया वह रोशनी के त्योहार नहीं बल्कि रंगों के त्योहार होली के लिए था। इतना ही नहीं संदेश के साथ उनकी एक तस्वीर भी थी, जिसमें बैकग्राउंड होली का लगाते हुए ‘हैप्पी होली’ लिखा गया है। इस ट्वीट को अब डिलीट कर दिया गया है, लेकिन यूजर्स स्क्रीनशॉट के साथ मुराद अली की मौज ले रहे हैं। 

पाकिस्तानी पत्रकार मुर्तजा सोलंगी ने मुराद अली के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “पाकिस्तान में हिंदुओं की सबसे बड़ी आबादी सिंध में ही है, जहाँ हिंदुओं की अच्छी तादात है। यह बहुत दुखद है कि सिंध के सीएम हाउस के स्‍टाफ को दीपावली और होली के बीच अंतर नही पता है। यह बहुत ही दुखद है।”

हालाँकि, बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय ने अल्पसंख्यकों के लिए उनके समर्थन और हैप्पी दिवाली की शुभकामनाएँ देते हुए कुछ ट्वीट किए, लेकिन पहले ही काफी बेइज्जती हो चुकी थी। बाद में सीएम हाउस सिंध ने शाह के हवाले से एक अन्य ट्वीट में लिखा, “पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने हमेशा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात की है।” 

बता दें कि पाकिस्तान में अनुसूचित जाति सहित अल्पसंख्यक हिंदुओं की आबादी संदेहपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान सरकार 2017 में हुई पिछली जनगणना के आँकड़ों को जारी करने को लेकर काफी संशय में रही है। लेकिन सिंध स्पष्ट रूप से पाकिस्तान का एकमात्र प्रांत है जहाँ एक महत्वपूर्ण हिंदू आबादी है। हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमेशा इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा मुकदमा चलाया जाता रहा है जहाँ जबरन धर्म परिवर्तन, हिंदू लड़कियों का अपहरण और मंदिरों को तोड़ा जाता है।

भले ही मंत्री हिंदू त्योहार की बधाई दे रहे हों, लेकिन देश में हिंदू मंदिरों पर हमले जारी हैं। कुछ ही समय पहले, इस्लामी कट्टरपंथियों ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कोटरी इलाके में एक ऐतिहासिक पंचमुखी हनुमान मंदिर को अपवित्र किया और फिर तोड़ दिया। बुधवार (28 अक्टूबर 2021) देर रात प्राचीन शिव मंदिर का ताला तोड़कर अज्ञात हमलावरों ने सोने के जेवर, चाँदी के तीन हार, मंदिर की दान पेटी से लगभग 25,000 रुपए और अन्य कीमती सामान चुरा लिए।

‘आ जाओ हमारे पास लड़की है’: टैक्सी ड्राइवर ने अगवा किया, फिर 17 साल की लड़की से 17 दरिदों ने 4 दिन तक किया रेप

कजाकिस्तान में एक 17 साल की लड़की का 17 लोगों ने गैंगरेप किया। लड़की का कहना है कि वो मई महीने में बाजार से कपड़े लेकर घर लौट रही थी तभी टैक्सी ड्राइवर ने अचानक रास्ता बदला और जब वो रोने लगी तो उसे ड्राइवर ने पानी की बोतल देकर पानी पीने को कहा। दो-चार घूँट पीते ही वह बेहोश हो गई और जब होश आया तो वो नग्न अवस्था में कहीं नदी के पास थी। उसके मुताबिक उसे कई लोगों ने घेरा हुआ था। इन सबने उसके साथ एक के बाद करके रेप किया। बाद में उसे एक अंजान घर ले जाया गया।

पूरी घटना कजाकिस्तान के सरयागाश की है। पीड़िता हाईस्कूल की छात्रा है। उसने आपबीती सुनाते हुए कहा कि जब उसने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की तो उसे नदी में फेंकने की बात हुई। पीड़िता कहती है, “मुझे होश आया तो मैं नदी के पास थी। जमीन पर पूरी नंगी पड़ी थी और कई लोग मेरे इर्द-गिर्द थे। उन्होंने नदी किनारे मेरा रेप किया और मुझे घर ले गए। वहाँ उन्होंने फिर मेरा रेप किया। फिर दोस्तों को कॉल किया और कहा ‘आ जाओ हमारे पास लड़की है।”

पीड़िता कहती है, “एक-एक करके सब आए और मेरा बलात्कार किया। उन्होंने मुझे मारा, नदी में फेंकने की धमकी दी।” लड़की की माँ ने बताया कि उनकी बेटी के साथ ये सब 4 दिन तक हुआ। इसके बाद दरिंदों ने लड़की को उसके कपड़े लौटाए और मेन दरवाजे से बाहर कर दिया।

अब पीड़िता और उसकी माँ ने इंसाफ पाने के लिए लोकल मीडिया का सहारा लिया है। उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिल रहा। मुकदमा 5 माह पहले दर्ज हुआ था, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़िता को उन बलात्कारियों का चेहरा याद है और उसने पुलिस को इनके बारे में बताया भी है। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। 17 लोगों को शहर से बाहर न जाने को कहा गया है। जाँचकर्ताओं का कहना है कि लड़की की माँ ने सबसे प्रमुख सबूत यानी की लड़की के कपड़ों को जला दिया है जो उसने घटना के समय पहने हुए थे। वहीं लड़की की माँ का कहना है कि उन्होंने ऐसा बुरी यादों को खत्म करने के लिए किया।