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केरल: अमेजन पर ऑर्डर किया पासपोर्ट कवर, दूसरे आदमी का असली पासपोर्ट भी भेज दिया

ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। केरल में पासपोर्ट कवर का ऑर्डर करने वाले शख्स को कंपनी ने किसी और व्यक्ति का असली पासपोर्ट डिलिवर कर दिया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्राहक द्वारा इसके बारे में सूचना दिए जाने पर भी कंपनी से उसे समुचित उत्तर नहीं मिला।

रिपोर्टों के अनुसार, वायनाड जिले के कनियाम्बेटा निवासी मिथुन बाबू ने अमेजन पर पासपोर्ट कवर के लिए ऑर्डर किया था। बदले में उन्हें किसी और का असली पासपोर्ट कवर के साथ मिला। मिथुन बाबू ने 30 अक्टूबर को अमेजन पर ऑर्डर दिया था और पार्सल की डिलीवरी 1 नवंबर को की गई थी। डिलिवरी पैकेट खोलने पर उन्हें पता चला कि इसमें न केवल पासपोर्ट कवर था, बल्कि किसी और व्यक्ति का असली पासपोर्ट भी मौजूद था।

मिथुन बाबू ने जब अमेजन कस्टमर केयर को पैकेज में असली पासपोर्ट होने के बारे में सूचित किया तो उनसे कहा गया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। कस्टमर केयर ने एग्जीक्यूटिव ने बताया कि वे अपने विक्रेता से आगे से इसका ध्यान रखने को कहेंगे। लेकिन उन्हें यह नहीं बताया कि कवर के साथ आए असली पासपोर्ट का वे क्या करें।

रिपोर्टों के अनुसार, जो पासपोर्ट मिथुन बाबू को मिला वह केरल के ही त्रिशूर जिले के कुन्नमकुलम गाँव के रहने वाले मोहम्मद सलीह नाम के व्यक्ति का था। बताया जा रहा है कि मिथुन को जो पासपोर्ट कवर मिला था शायद उसे पहले मुहम्मद सलीह ने ऑर्डर किया था। इसमें उन्होंने अपना पासपोर्ट डालकर चेक किया होगा। पसंद नहीं आने पर कवर वापस कर दिया होगा, लेकिन वे अपना पासपोर्ट निकालना भूल गए होंगे। माना जा रहा है कि अगली डिलिवरी के वक्त विक्रेता ने भी कवर चेक नहीं किया होगा जिसकी वजह से वह मिथुन बाबू के पास पहुँच गया। हालाँकि ये कोई पहली बार नहीं है जब Amazon द्वारा गलत डिलीवरी की गई है। इसी तरह की ऐसी ही एक अन्य घटना में दिल्ली से विक्रम बुरागोहेन ने रिमोट कंट्रोल कार का ऑर्डर दिया था और ई-कॉमर्स कंपनी ने बदले में उसे पारले-जी बिस्कुट भेज दिया।

‘मैं चीखना चाहती हूँ, दुनिया को बताना चाहती हूँ कि तुम कितने अद्भुत हो’: अनुष्का शर्मा ने विराट को ऐसे किया बर्थडे विश

एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने पति विराट कोहली को बर्थडे विश करते हुए दिवाली की एक तस्वीर साझा की है। इस पोस्ट में अनुष्का ने कहा कि वह दुनिया को बताना चाहती हैं कि विराट कितने अद्भुत शख्स हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली का आज 5 नंवबर को जन्मदिन है। वह अपना 33वाँ जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं।

अनुष्का शर्मा ने विराट कोहली के साथ अपनी एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए एक इमोशनल लेटर लिखा है, ”इस फोटो और जिस तरह से आप अपना जीवन जीते हैं, उसके लिए किसी फिल्टर की जरूरत नहीं है। तुम्हारा जीवन ईमानदारी और फौलाद की हिम्मत की मिसाल है। तुम्हारे अंदर जो साहस है वो जीवन में किसी भी संदेह को छू मंतर कर देता है। मैं ऐसे किसी को नहीं जानती, जो तुम्हारी तरह अँधेरी-स्याह जगहों से भी उठकर खुद को इतनी ऊँचाई पर ला सकता है।”

उन्होंने आगे लिखा, “विराट तुम हर तरह से बेहतर हो, क्योंकि तुम अपने अंदर किसी भी चीज को स्थाई नहीं मानते, तुम बहुत निडर हो। मुझे पता है कि हम दोनों ही सोशल मीडिया के जरिए इस तरह से एक-दूसरे से बात करने वाले नहीं हैं, लेकिन कभी-कभी मैं सिर्फ चीखना चाहती हूँ और दुनिया को बताना चाहती हूँ कि तुम कितने अद्भुत व्यक्ति हो। भाग्यशाली हैं वे, जो वास्तव में आपको जानते हैं। सब कुछ उज्जवल और अधिक सुंदर बनाने के लिए धन्यवाद !ओह, और हैप्पी बर्थडे क्यूटनेस!”

बता दें कि विराट कोहली ने एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा के साथ दिसंबर 2017 में इटली में करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में विवाह किया था। जनवरी 2021 में विराट-अनुष्का एक बेटी के माता-पिता बने है। बेटी नाम दोनों ने वामिका रखा है। जिसको लेकर हाल ही कुछ ट्रोलों द्वारा धमकियों के कारण सोशल मीडिया में विवाद छिड़ा था।

गौरतलब है कि विराट कोहली ने 18 अगस्त 2008 को इंटरनेशनल क्रिकेट में पदार्पण किया था। इससे पहले वो अपनी कप्तानी में 2008 में ही टीम को अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब दिला चुके थे। फिर 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का भी वो हिस्सा थे। विराट कोहली फिलहाल तीनों फॉर्मेंट में भारत की कप्तानी कर रहे हैं। हालाँकि, UAE में चल रहे आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप 2021 के बाद वह टी20 इंटरनेशनल फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ देंगे जिसकी घोषणा विराट ने हाल ही में की है। वहीं उन्होंने वर्कलोड के कारण IPL में भी बैंगलोर की कप्तानी छोड़ दी है।

गुरुग्राम में उसी जगह हुई गोवर्धन पूजा जहाँ हर जुमे खुले में पढ़ी जा रही थी नमाज, कपिल मिश्रा भी हुए शामिल

गुरुग्राम सेक्टर-12ए में जिस जगह पर खुले में हर जुमे नमाज पढ़ी जाती थी, शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को उसी जगह पर गोवर्धन पूजा आयोजित की गई। पूजा में दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा भी शामिल हुए। खुले में नमाज के विरोध में इसका आयोजन संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति की ओर से किया गया था।

इस दौरान मिश्रा ने पटाखे पर बैन की तरफ इशारा करते हुए कहा, “कल दिवाली पर, पूरे देश में हिंदुओं पर बहुत सारे आदेश और फरमान लगाए गए थे। परिणाम क्या हुआ? जितना दबाओगे, जितना अत्याचार करोगे… हम शांतिप्रिय लोग हैं। लेकिन अगर दबाओगे तो वही होगा जो पूरे देश में हुआ है। अगर हमें दीवार पर धकेला जाता है, तो फिर जवाब में एक धक्का तो मारना ही पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “अपनी राजनीति के लिए सड़कों का इस्तेमाल न करें। हमने इसे शाहीनबाग में देखा था। उन्होंने सारे रास्ते जाम कर तमाशा किया था। क्या सीएए निरस्त कर दिया गया है? यदि धमनियाँ और तंत्रिकाएँ ब्लॉक हो जाती हैं, तो शरीर की गतिविधियाँ रूक जाती हैं। इसी तरह, अगर सड़कें बंद हो जाती हैं, तो शहर और देश रुक जाता है।”

कपिल मिश्रा ने कहा, “संविधान में सभी को समान अधिकार हैं। सड़कों को अवरुद्ध करना किसी के धर्म का हिस्सा नहीं हो सकता। यह नहीं होना चाहिए। गुड़गाँव एक महानगरीय शहर है जो दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ आप सड़क जाम कर देंगे। आप दिल्ली में ब्लॉक कर देंगे? यह धर्म का अंग नहीं हो सकता… यह देश की अर्थव्यवस्था को रोकने और बाधित करने का एक तरीका है। सड़कों का पहला अधिकार उन लोगों का है जो उन पर चलते हैं या अपना व्यवसाय चलाते हैं या उनका उपयोग कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों तक पहुँचने के लिए करते हैं। अगर स्थानीय निवासी आपत्ति जताते हैं तो किसी को भी बैठने और सड़क जाम करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।”

उन्होंने कहा, “मैं कहना चाहता हूँ कि लोगों को अपने धार्मिक स्थलों पर प्रार्थना करनी चाहिए। इस देश में वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा जमीन है वहाँ नमाज अदा करने की व्यवस्था करें। यह मामला सिर्फ गुड़गाँव का नहीं है। इससे सभी परेशान हैं। इसे (पूजा) करने से दूसरों को प्रेरणा मिलेगी कि हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी। हर हफ्ते सड़कों को अवरुद्ध करना दुनिया में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है। इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों को स्कूलों, अस्पतालों, कार्यस्थलों पर जाने से रोकना कोई विकल्प नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं उन लोगों को बधाई देना चाहता हूँ जिन्होंने इन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। यही है आजादी की असली लड़ाई। वह नहीं जिसके लिए आजादी के नारे लगाए जाते हैं। हमें सड़कों पर आज़ादी से चलने की आज़ादी चाहिए।”

इससे पहले संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष महावीर भारद्वाज ने कहा था, “हम पूजा का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें 5000 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। प्रार्थना के बाद स्थल पर ढोल और नगाड़े बजाए जाएँगे और प्रसाद का वितरण किया जाएगा। यह शहर के अन्य स्थलों पर भी किया जाएगा या नहीं, इस पर निर्णय बाद में लिया जाएगा। हम सभी सार्वजनिक स्थानों पर नमाज का विरोध करने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे।”

बता दें कि हाल ही गुरुग्राम प्रशासन ने 8 स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति को रद्द कर दिया था। गुरुग्राम पुलिस के एक बयान में कहा था कि निर्णय स्थानीय निवासियों और निवासी कल्याण संघों की आपत्ति के बाद लिया गया। कथित तौर पर 2018 में प्रशासन की तरफ से नमाज पढ़ने के लिए 37 स्थानों को चिन्हित किया था। जिसको लेकर संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति ने विरोध जताया था।

जब राहुल द्रविड़ को ‘क्रिकेट’ समझाने लगे ‘इतिहासकार’ रामचंद्र गुहा, गजब की हुई थी बेइज्जती: खुद बताया कैसे हुई बोलती बंद

इतिहासकार रामचंद्र गुहा इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुलेआम पूजा न करने की सलाह देकर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। यूजर्स, गुहा की हिपोक्रेसी उजागर करते हुए बता रहे हैं कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री भी हमेशा से धार्मिक स्थलों पर या मजहबी कार्यक्रम की तस्वीरें शेयर करते रहे थे, लेकिन उनके लिए कभी भी गुहा ने कुछ नहीं कहा।

ये पहली बार नहीं हुआ कि गुहा की हिपोक्रेसी ने उन्हें जलील करवाया हो। हर मुद्दे पर विशेषज्ञ बनने वाली उनकी आदत ने उन्हें एक बार भारत के पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ से ‘डाँट’ पड़वा दी थी। ये किस्सा 2007 का है जिसका जिक्र गुहा ने अपनी किताब ‘द कॉमनवेल्थ ऑफ क्रिकेट’ में किया है। इसमें उन्होंने बताया कि एक बार वो क्रिकेट पर बिन माँगी सलाह दे रहे थे। तब राहुल ने उन्हें विनम्रता से कहा था कि वो चुप रहें और क्रिकेट के बारे में सोचने की बजाय इतिहास से चिपके रहें।

साल 2007 में, राहुल द्रविड़ इंग्लैंड के खिलाफ खेली जाने वाली श्रृंखला में भारतीय कप्तान थे। उनकी पहचान एक शानदार ख़िलाड़ी के तौर पर थी। उसी दौरान रामचंद्र गुहा ने उन्हें लिखा था, “आप भारतीय क्रिकेट के इतिहास में संभवत: सबसे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं और निस्संदेह ही इतने अच्छे स्लिप फील्डर हैं जो खेल की किसी भी विधा में अब तक भारत द्वारा दिया गया है। आपको ‘वहाँ’ फील्ड करना चाहिए। मैं मानता हूँ कि निरंतरता बनाए रखने के लिए गेंदबाजों को सलाह देने की जरूरत की वजह से आपको करीब में क्षेत्ररक्षण करने की आवश्यकता महसूस होती होगी।। खैर, सभी बातों पर विचार किया जाता है। मुझे लगता है कि स्लिप आपकी जगह है। भारत में आपके जैसा और कोई नहीं है इसलिए  यही वजह है कि शुरुआती ओवरों में सभी कैच गिर जाती हैं।”

इस मेल के बाद द्रविड़ ने रामचंद्र गुहा के लिए लिखा, “आप सही कह रहे हैं…ऐसा लगता है कि हमारा सारा इतिहास गाँधी पर रुक गया है जबकि ऐसा बहुत कुछ है जो हुआ, कि आज हम 60 साल बाद यहाँ हैं। मैंने 180 पेज खत्म किए हैं…। मैं इस पर और अन्य चीजों पर बात करना चाहूँगा।”

अब दिलचस्प बात यह है कि रामचंद्र गुहा का इस रिप्लाई को लेकर यह मानना है कि राहुल ने उन्हें विनम्र तरीके से कहा था कि उन्हें उनकी सलाह की जरूरत नहीं है और न वो इसे लेना चाहते हैं। अपनी किताब में गुहा ने माना कि द्रविड़ को उनका मेल अवांछित था।

वह लिखते हैं, “मुझे सबसे विनम्र ढंग से क्रिकेट रणनीति पर राय देने के बदले चुप होने को कहा गया और सलाह दी गई कि मैं इतिहास की किताबें ही लिखूँ।”  इस घटना के कई वर्ष बाद गुहा को बीसीसआई में प्रशासक के तौर पर भी नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया।

कभी बैंकॉक-कभी इटली, अब लंदन: देश मना रहा था दिवाली विदेश चले गए राहुल गाँधी, रिपोर्ट में दावा

प्राथमिकताएँ और जिम्मेदारियाँ क्या होती हैं, इस बात को कुछ इस तरह समझा जा सकता है कि गुरुवार 4 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ दीवाली मनाई, वहीं कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी लंदन के दौरे पर रवाना हो गए। इस बात की जानकारी रिपब्लिक टीवी ने सूत्रों के हवाले से दी है। खास बात ये है कि पीएम मोदी 2014 के बाद से सशस्त्र बलों के साथ दिवाली मना रहे हैं। इसी साल वह पहली बार प्रधानमंत्री बने थे।

इस दौरान अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली ब्रिगेड की सराहना भी की। उन्होंने कहा, “मैं परिवार के सदस्यों के साथ दिवाली मनाना चाहता हूँ, इसलिए मैं इस त्योहार में आपके साथ शामिल होता हूँ।” बता दें कि 29 सितंबर 2016 को उरी सेक्टर में सेना के बेस पर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हमला कर दिया था, जिसके बाद सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

जम्मू-कश्मीर में दीवाली त्योहार के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सशस्त्र बलों के साथ ऐसे वक्त पर हैं, जब सेना इस्लामिक आतंकियों द्वारा घाटी में किए जा रहे टार्गेटेड अटैक के खिलाफ लगातार ऑपरेशंस चला रही है।

दूसरी ओर मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि राहुल गाँधी लंदन टूर पर रवाना हो गए हैं। ऐसे मौके पर उनके इस विदेश दौरे पर बीजेपी हमलावर हो गई है। भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, “पीएम मोदी G20, COP26 की सफल यात्रा से लौटे और सीधे काम पर लग गए। महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता की और बड़े फैसले लिए। आज वह जवानों के साथ दीपावली मनाने नौशेरा में थे। लेकिन राहुल गाँधी कहां हैं? वह छुट्टियाँ मनाने लंदन जा रहे हैं!”

हालाँकि, अभी तक राहुल गाँधी की यात्रा को लेकर कोई और अपडेट नहीं मिल सका है। कॉन्ग्रेस ने भी उनकी इस कथित यात्रा को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं दी है।

राहुल गाँधी पार्टटाइम राजनीतिज्ञ हैं

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी विदेश के दौरे पर गए हों। दिसंबर 2020 में कॉन्ग्रेस के 136वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर ही राहुल गाँधी अचानक इटली के मिलान की यात्रा पर रवाना हो गए थे। इस खास मौके पर उनके गायब होने पर सवाल उठना लाजिमी था। जब सवाल उठाए गए तो घबराए कॉन्ग्रेसी नेताओं ने अटपटी बयानबाजी शुरू कर दी। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर अपनी नानी से मिलने के लिए थे। दूसरी ओर कांतिलाल भूरिया ने दावा किया कि राहुल गाँधी पार्टी के किसी काम से गए थे।

इसी तरह से 6 अक्टूबर 2019 को महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव से करीब एक पखवाड़े पहले, राहुल गाँधी बैंकॉक चले गए थे। ये सब उस दौरान हुआ था जब बीजेपी चुनौतियाँ पेश कर रही थी और कॉन्ग्रेस पार्टी सोनिया गाँधी के नेतृत्व में आपसी फूट में उलझी हुई थी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि हरियाणा में उनकी यात्रा से पहले राज्य इकाई के पूर्व प्रमुख अशोक तंवर ने राहुल गाँधी द्वारा तैयार किए गए लोगों को दरकिनार करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। दूसरी ओर राहुल गाँधी बैंकॉक से लौटने के बाद इंडोनेशिया की यात्रा की।

उनकी यह यात्रा कुछ और नहीं बल्कि एक और जिम्मेदारी से दूर भागना था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने उनकी इस यात्रा का भी बीच-बचाव किया। खास बात ये है कि मोदी सरकार की नीतियों और निर्णयों के खिलाफ राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस ने देशभर में 1 नवंबर से 8 नवंबर (2019) के बीच 35 प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का खाका तैयार किया था, लेकिन राहुल गाँधी ने उसे भी बीच में ही छोड़ दिया।

इसी क्रम में मई 2019 में लोकसभा चुनाव की मतगणना से पहले कॉन्ग्रेस को लगा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए हारने वाला है, यह सोचकर सोनिया गाँधी ने पीएम पद किसे देना है इस पर फैसला लेने के विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई। हालाँकि, एनडीए को भारी बहुमत मिलने के बाद उन्होंने इस मीटिंग को स्थगित कर दिया था, लेकिन राहुल गाँधी उससे पहले ही लंदन जाने की तैयारी कर रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राहुल गाँधी ने यात्रा स्थगित कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामान्यतया देखा जाता है कि राहुल गाँधी अक्सर महत्वपूर्ण संसदीय सत्रों और डिबेट में शामिल ही नहीं होते हैं। उन्होंने जनवरी 2018 में केवल एक ब्रेक के लिए बजट सत्र को छोड़ दिया था। 2015 में राहुल गाँधी विपश्यना या ध्यान के नाम पर 60 दिनों के लिए गायब हो गए। उन्होंने 16 फरवरी से 16 अप्रैल 2015 तक चार दक्षिण एशियाई देशों थाईलैंड, कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम का दौरा किया। वो सर्वाधिक 21 दिन तक म्यांमार में रुके, जिसे विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित स्थान मानता है।

राहुल गाँधी के विदेश दौरों ने हमेशा हैरान किया

राहुल गाँधी की अचानक और सीक्रेट विदेश यात्राओं का कॉन्ग्रेस पार्टी भले ही बचाव करती हो, लेकिन सच यही है कि वो हमेशा उनकी सुरक्षा में लगी एसपीजी को परेशान करते हैं। नवंबर 2019 में उनकी एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई थी। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (संशोधन) विधेयक 2019 पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2015 से राहुल गाँधी ने एसपीजी को बताए बिना ही 247 बार विदेश दौरे पर गए थे। शाह ने स्पष्ट किया था कि राहुल की ही तरह गाँधी परिवार के अन्य सदस्यों, जैसे सोनिया गाँधी और बेटी प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी एसपीजी नियमों का उल्लंघन किया था। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सोनिया गाँधी ने बिना एसपीजी को बताए 24 विदेश दौरे किए, जबकि प्रियंका गाँधी ने 1991 से अब तक 99 विदेश यात्राएँ की थीं, जिनमें से 78 दौरों में उन्होंने एसपीजी कवर नहीं माँगा।

दिवाली, पटाखे, पर्यावरण की रक्षा का प्रश्न और एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म का मारा हिंदू

एक समय लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम दिवाली में ‘अली’ और रमजान में ‘राम’ को खोजकर आम हिंदू के पास पहुँचा देता था और उसके हाथ में ये अविष्कार देकर अपनी प्रासंगिकता की रक्षा का नैरेटिव गढ़ लेता था। इस आविष्कार के हाथ में आते ही आम हिंदू इस नैरेटिव की निगरानी में लग जाता था और इस प्रक्रिया में जरा सी आँख लग जाने पर वह निज को ही धिक्कारता था। इस तरह सहिष्णु हिंदू सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर न केवल इकोसिस्टम को प्रासंगिक बनाए रखता था, बल्कि जाने-अनजाने उसके बाय प्रोडक्ट अमन की आशा को ऑक्सीजन भी प्रदान करता था।

यह तब की बात है जब जमाना अच्छा था और लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम एक आम हिंदू से जिस बात की अपेक्षा रखता था, आम हिंदू वही करता था। अब जमाना खराब है क्योंकि कई दशकों तक चलने वाला भारतीय छद्म धर्मनिरपेक्षता का यह रोलिंग प्लान अब बंद हो गया है। इंटरनेट के शुरुआती दिनों में नॉलेज के ओपन सोर्स और बाद के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आने के बाद जैसे-जैसे छद्म धर्मनिरपेक्षता का घड़ा फूटता गया, इकोसिस्टम ने नैरेटिव की रक्षा का भार धीरे-धीरे असहिष्णु आम हिंदू के कँधे से उतार कर न्यायपालिका और प्रशासन के कँधों पर रख दिया है।

पिछले कई वर्षों से दिवाली का त्योहार वर्ष में कम से कम एक बार इकोसिस्टम, सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन, पर्यावरणविद, पर्यावरण एक्टिविस्ट और आम हिंदू, लगभग सबको अपनी-अपनी असलियत दिखाने का मौका देता रहा है। दिवाली कैसे मनाई जाए, इस प्रश्न को लेकर इकोसिस्टम पिछले कई वर्षों से न्यायपालिका की शरण में जाता है। न्यायपालिका को भी लगता है कि दिवाली कैसे मनाई जाए, यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाने का सबसे बड़ा अधिकार उसके पास है जो खुद यह त्योहार नहीं मनाता। अपने पास आए इस इकोसिस्टमी योद्धा की इज़्ज़त करते हुए न्यायपालिका बंगाल की खाड़ी में आए तूफ़ान की गति से दिवाली मनाने का तरीका लिख डालता है। उसके बाद प्रशासन उस तरीके को पढ़कर उसे लागू करने निकल पड़ता है।

पहले जुडिशियल एक्टिविज्म से परेशान आम हिंदू अब एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म से भी परेशान है। पिछले कई वर्षों से प्रशासन दिवाली के मौके पर जो कुछ भी करता रहा है, वह उसे प्रशासनिक सतर्कता का नाम दे सकता है पर प्रशासन के आचरण को एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म कहना भी एक तरह का अंडरस्टेटमेंट होगा। किसी ने पटाखा फोड़ दिया तो उसे गिरफ्तार कर लिया। कोई पटाखे लिए जा रहा है तो उसे गिरफ्तार कर लिया।

न तो न्यायपालिका और न ही प्रशासन इस बात पर विचार करते कि यदि पर्यावरण को सबसे अधिक क्षति पटाखे से ही होती है तो पटाखे का उत्पादन ही बंद कर दें। उत्पादन और बिक्री न रोककर उसका इस्तेमाल रोकना कितना तार्किक है, यह प्रश्न सबके सामने खड़ा है।

पहले राष्ट्रीय महत्व के त्योहार जैसे पंद्रह अगस्त या छब्बीस जनवरी के आस-पास आतंकवादी पकड़े जाते और उनके पास से हथियार बरामद किए जाते थे। इन घटनाओं के बारे में प्रशासन प्रेस कॉन्फ्रेंस करता था तब जाकर लोगों को पता चलता था कि कितने लोग कहाँ गिरफ्तार किए गए, उनके पास कौन-कौन से हथियार बरामद हुए और उनक प्लान क्या था। इससे मिलती-जुलती घटनाएँ अब दिवाली के आस-पास या दिवाली की रात होने लगी है। अब पुलिस सोशल मीडिया पर रीयल टाइम प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसा करती नज़र आती है जिसमें बताया जाता है कि फलाने थाने के फलाने अफसर ने फलाने जगह फलाने पुत्र फलाने को एक पॉलिथीन के साथ गिरफ्तार किया है जिसमें पटाखे थे।

दिल्ली पुलिस के उस ट्वीट का स्क्रीनशॉट जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया

यह एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म नहीं तो और क्या है? इस देश में न्यायपालिका के न जाने कितने ऑर्डर अपने ऊपर धूल ओढ़े दशकों से पालन किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। पर उनके पालन की तत्परता दिखाई नहीं देती। जब क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की जीत पर पटाखे फोड़े गए थे तब भी गिरफ्तारियाँ हुई पर इस तरह रीयल टाइम सोशल मीडियाटिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं दिखाई दी। ऐसे में यदि आम हिंदू यह सोचे कि प्रशासन पटाखे फोड़ने के विरुद्ध नहीं है, बल्कि पटाखे फोड़कर दिवाली मनाने के विरुद्ध है तो इस सोच के लिए क्या उसकी आलोचना की जा सकती है?

पिछले कई वर्षों से केवल दिवाली के मौके पर पर्यावरण की रक्षा का प्रश्न उठता है, पर हर वर्ष उसके बाद बैठ जाता है। पटाखे फोड़े जाएँ या नहीं, यह उतना महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं है जितना महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि हर वर्ष दिवाली बीत जाने के पश्चात पर्यावरण की रक्षा की चिंता मर क्यों जाती है? इसे सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन और लोकतंत्र के लगभग हर स्तंभ की विफलता ही कहेंगे कि वर्ष दर वर्ष उठने वाले इस प्रश्न पर ये स्तंभ एक बहस तक नहीं करवा सके।

प्रश्न उठता है और फिर खो जाता है, शायद अगले वर्ष फिर से उठने के लिए। इस प्रक्रिया में समाज और प्रशासन के बीच जो अविश्वास पनप रहा है, न तो उसे महसूस करने की कोशिश की जा रही है और न ही उसके आकलन का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में सामाजिक ताने-बाने को होने वाली दीर्घकालीन क्षति की चिंता इन स्तंभों को कितनी है, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है।

बाबा के दरबार में PM मोदी को देख चिढ़ गए दरबारी इतिहासकार, सनातन संस्कृति का उत्थान ही रामचंद्र गुहा जैसों की दुखती रग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को केदारनाथ धाम में जगतगुरु आदि शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। बाढ़ की तबाही से बर्बाद हुए मंदिर परिसर सहित कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए शिलान्यास और उद्धाटन भी किया। माथे पर त्रिपुण्ड रमाए PM मोदी ने वहाँ लोगों को सम्बोधित करने से पहले मंदिर में करीब 18 मिनट तक पूजा-अर्चना भी की। इन सब से हमेशा की तरह ‘बीफ खाने वाले‘ रामचंद्र गुहा सहित सेक्युलर होने का राग अलापने वाले लिबरलों, कॉन्ग्रेसियों, वामपंथियों और मुस्लिमों को तगड़ी मिर्ची लगी है।

दिवाली पर पटाखों की धूम से भन्नाए ये पूरा गैंग एक साथ ट्विटर के मैदान में उतर आए। इसी कड़ी में सबसे बड़ा ‘ज्ञान’ तथाकथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने दिया। उन्होंने इतिहास और इस देश की संस्कृति और परंपरा की तिलांजलि देते हुए ट्वीट किया, “यदि प्रधानमंत्री किसी मंदिर में प्रार्थना करना चाहते हैं तो उन्हें इसे निजी तौर पर और बिना कैमरे के उपस्थिति में करना चाहिए। राज्य के खर्च पर ये सार्वजनिक प्रदर्शन सही नहीं हैं। उन्होंने अपने पद की गरिमा को ठेस पहुँचाया है।”

इतिहासकार रामचंद्र गुहा अपने सेलेक्टिव एक्टिविज्म और विरोध के कारण ही निशाने पर हैं। लोग नेहरू के कुम्भ स्नान से लेकर इंदिरा गाँधी के सार्वजनिक प्रदर्शनों सहित कॉन्ग्रेस और लिबरल गैंग के चहेतों की कई तस्वीरें सामने रख रहे हैं। जब राज्य के खर्चे पर ही राष्ट्रपति भवन में रोजा इफ्तार और दरगाह पर चादर चढ़ाते वक़्त के कई वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक हैं। इसमें राजीव गाँधी से लेकर सोनिया, राहुल गाँधी की भी तस्वीरें हैं तो वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित कई दूसरे विपक्षी नेताओं की भी।

ऊपर के कुछ ट्वीट में महज चंद उदहारण है इंटरनेट और खुद रामचंद्र गुहा के जवाब में ही लोगों ने ऐसे कई लिंक और प्रमाण दे डाले हैं। इतना ही नहीं चर्चे तो राजीव गाँधी के सरकारी खर्चे पर अंडमान निकोबार पर पूरे परिवार, मित्रों और सोनिया गाँधी के रिश्तेदारों के साथ छुट्टियाँ मनाने, पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू के अपनी फ्रेंड एडविना माउंटबेटन के डेथ पर पूरा युद्धपोत लिली के फूलों से भरकर ले जाने और इंदिरा गाँधी के सरकारी विमान में जन्मदिन मनाने का भी है।

पर सवाल यह है कि नेहरू पर किताब लिखने के साथ ही स्वतंत्रता के बाद का भी इतिहास लिखने वाले रामचंद्र गुहा का ऐसा कोई सीधा विरोध तब सामने नहीं आया और न ही तब उनको राज्य के खर्च की चिंता हुई। इसी राज्य ने ऐसे इतिहासकारों पर भी खर्च किया है जो वर्षों से देश को अधूरा या सेलेक्टिव इतिहास बताते, लिखते और पढ़ाते आए हैं।

यहाँ एक सवाल यह भी है कि यदि हिन्दू धर्म की, संस्कृति या परंपरा की बात भारत में नहीं होगी तो कहाँ होगी। 50 से अधिक मुस्लिम बहुल देश है जो घोषित रूप से इस्लमिक हैं। वहीं बाकी के अपने ईसाई प्रतीकों और परम्पराओं का खुले तौर पर निर्वाह करते हैं जिसका न उनके देश में बल्कि बाहर भी कहीं कोई विरोध नहीं नजर आता। यहाँ तक अमेरिका की करेंसी पर ही लिखा होता है ‘इन गॉड वी बिलीव’ बाकी वेटिकन से लेकर यहुदी देश इजराइल की बात छोड़ ही देते है जिन्हे अपने गौरव और प्रतीकों के साथ व्यवहार करने में कोई समस्या नहीं है।

भारत में भी जब मुस्लिम परम्पराओं का निर्वाह होता है, राज्य मदरसों (जहाँ मजहबी शिक्षा ही दी जाती है।), मौलवियों, इमामों को सैलरी देता है। वक्फ बोर्ड के नाम पर उनकी संपत्ति को अलग रखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर खुले में नमाज का परमिशन देता है तो भी कभी लिबरलों को कोई समस्या नहीं हुई। बल्कि मुस्लिमों की हर अति और राज्यों या देश की मुस्लिम तुष्टिकरण की हर नीतियों का इन्होंने न सिर्फ खुलेआम समर्थन किया बल्कि बढ़ावा भी दिया।

राज्य हिन्दू मंदिरों पर जब खुले तौर पर अधिकार करते हुए मंदिर की संपत्ति और राजस्व का उपयोग मंदिर से हटकर दूसरे कामों में करता है तब भी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई कि राज्य को मंदिरों के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। बल्कि उन्हें मस्जिदों, चर्चों या दूसरे समुदायों की तरह स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए।

वामपंथी लिबरल गैंग ऐसा न करे हैं, न करेंगे क्योंकि यह इनके अजेंडे के अनुकूल नहीं है। एक मात्र भारत को ही अपनी अंतिम शरणस्थली मानने वाले हिन्दुओं-हिन्दू धर्म से जुड़ा जब भी कोई विशेष आयोजन या कल्याण का कार्यक्रम होता है तो इन्हें पीड़ा होने लगती है और ‘सेक्युलर’ जैसे अर्थ खो चुके खोखले शब्द को हथियार बनाकर इस देश की उस बहुसंख्यक हिन्दू आबादी को नीचा दिखाने लगते हैं।

जबकि, सनातन धर्म और हिन्दुओं ने ही हजारों सालों के संघर्ष और बलिदान के बल पर इस देश में तमाम मुग़ल और विदेशी हमलों को झेलते हुए भी अपनी धर्म-संस्कृति को अक्षुण्य रखा है। आज भी जब बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है जिसपर इनके कंठ में शब्द अटक जाते हैं, जुबान खामोश हो जाते हैं तब न सिर्फ हिन्दू बल्कि सिख, बौद्ध, जैन, पारसी भी टकटकी लगाए भारत की तरफ ही आशा की नजरों से देखते हैं। यह इन वामपंथियों का सेक्युलरिज्म ही था जो मुस्लिमों द्वारा सताए इन पीड़ितों को CAA के जरिए नागरिकता देने में आड़े आया। विरोध के नाम पर इन लिबरलों और वामपंथियों ने ही झूठ बोलकर मुस्लिम को भड़काकर दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों सहित कई राज्यों में हिंसा का नंगा नाच किया।

भारत बहुत कुछ मुगलों, अग्रेजों द्वारा लूट लिए जाने और बाद में ऐसे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा ही उन लूटेरों और आक्रमणकारियों का महिमामंडन किए जाने के दंश झेल रहा है। और आज जब सालों बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हिन्दू धर्म पर गौरव करने, उसके प्रतीकों के निर्माण, संरक्षित और उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश हो रही है तो इन्हें फिर से स्थान विशेष में दर्द हो रहा है।

वैसे सरकारें किसी दूसरे गृह से नहीं आतीं, वो यहीं की जनता के आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिफल होती हैं। प्रधानमंत्री मोदी को देश ने दो बार भारी मतों से इसीलिए चुना है क्योंकि उनमें उन्हें हिन्दुओं के प्रति सहृदयता की उम्मीद दिखी। सरकार लगातार उन उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास कर रही। मोदी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मन्त्र पर अडिग देश में भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक परंपरा को भी आगे बढ़ा रही है। इसी का प्रतिफल है कि चारधाम रोड, बुद्धा सर्किट, राम या हनुमान सर्किट के साथ राम मंदिर और अयोध्या दीपोत्सव, काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर, विंध्याचल कॉरिडोर जैसी अनेकों परियोजनाओं पर भी काम हो रहा है। जो इस देश की गौरवशाली परंपरा और सनातन संस्कृति की वाहक हैं।

दिवाली मनाते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी

यह देश के प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व, अपनी जड़ों के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति ही है कि आज पूरा विश्व भारतीय परंपरा और त्योहारों से जुड़ रहा है। आज अमेरिका सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिन्दू त्यौहार मनाते नजर आते हैं, तो कभी उस देश के खर्च पर ऐसे कई सार्वजनिक आयोजनों का हिस्सा होते हैं ताकि खुद को भारत का करीबी दिखा सकें। ऐसे में वामपंथी और लिबरल गैंग की पीड़ा सेक्युलरिज़्म का बचाव नहीं, सिर्फ एक प्रधानमंत्री या पार्टी जो इनको पसंद नहीं है उसका विरोध है। जिसके मूल में उस पार्टी या नेता का हिन्दू धर्म से गहरा जुड़ाव है और राम के अस्तित्व को ही नकारने वाले वामपंथियों और लिबरल गैंग की समस्या हिन्दू धर्म, परंपरा, मान्यताओं और प्रतीकों से है क्योंकि हिन्दू बहुल देश में हिन्दुओं की बात करना ही वामपंथी और लिबरल गैंग के हिसाब से सांप्रदायिक हो जाता है।

आधी रात 20 गुंडे लेकर मौसी के घर में घुस गया सुलतान, बहन को अगवा करने का प्रयास, कहा- निकाह मेरे से ही होगी: रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के मेरठ में निकाह से तकरीबन 12 घंटे पहले युवती का मौसेरा भाई 20 गुंडों की फौज लेकर अपहरण करने उसके घर पहुँच गया। आरोपित युवक युवती से खुद निकाह करना चाहता था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरु कर दी है।

बता दें कि लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के शालीमार गार्डन की निवासी पीड़ित युवती के पिता की मौत हो चुकी है। युवती के भाई व अन्य रिश्तेदारों ने उसकी शादी गाजियाबाद निवासी एक युवक से तय कर दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, युवती की बारात बुधवार (3 नवंबर 2021) को आने वाली थी। उससे एक दिन पहले रात में इस घटना को अंजाम दिया गया।

मंगलवार (2 नवंबर 2021) की रात को जब युवती अपने घर में सो रही थी, तभी उसका मौसेरा भाई आ धमका और युवती के घर में तोड़फोड़ शुरु कर दी। उसने पीड़िता की माँ और भाई से भी मारपीट की। इसके बाद आरोपित पीड़िता को जबरदस्ती अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। इसमें जब वह कामयाब नहीं हुआ तो उसने धमकी दी कि युवती की शादी उससे नहीं की गई तो वह युवती को जान से मार देगा। 

युवती ने पुलिस को बताया की उसकी मौसी उसकी शादी अपने एक पैर से विकलांग बेटे सुलतान से कराना चाहती है। जब उसने व उसके घरवालों ने सुलतान से शादी करने के लिए मना कर दिया तो उसकी मौसी जबरन अपने बेटे से शादी के लिए उस पर दबाव बनाने लगी। युवती की मौसी व बेटे ने उसे धमकी दी कि शादी होगी तो सुलतान के घर में होगी, नहीं तो अंजाम ठीक नहीं होगा। युवती के भाई ने आरोपित पक्ष से जान का खतरा जताया है। वहींं लिसाड़ीगेट थाना प्रभारी उत्तम सिंह राठौर ने बताया कि मामले में जाँच की जा रही है। जाँच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मेरठ से हलाला के नाम पर तीन तलाक पीड़िता के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। पीड़िता के मुताबिक, टीपीनगर स्थित एक होटल में हलाला के नाम पर एक मौलाना ने उसका गैंगरेप कराया। महिला ने बताया, “वह अपने शौहर से दोबारा निकाह करना चाहती थी। इसके लिए मौलाना ने उसे हलाला करने के लिए कहा। इसके बाद उसने दो लोगों को बागपत से बुलाकर उसका गैंगरेप कराया।”

‘पहाड़ का पानी और जवानी उसके ही काम आएगा’: केदारनाथ में बोले PM मोदी- जो कल्याण करे वही शंकर है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को केदारनाथ धाम में दर्शन किया और जगद्गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके साथ ही उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। पीएम मोदी ने 2013 में केदारनाथ में आई बाढ़ की तबाही को याद करते हुए कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा, लेकिन ईश्वर की कृपा से ऐसा दोबारा संभव हो गया। प्रधानमंत्री ने आने वाले दशक को उत्तराखंड का दशक करार दिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन से पहले 130 करोड़ रुपए की पुनर्विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इनमें सरस्वती रिटेनिंग वॉल आस्थापथ और घाट, मंदाकिनी रिटेनिंग वॉल आस्थापथ, मंदाकिनी नदी पर गरुणचट्टी पुल शामिल हैं।

हमने तय किया कि पानी और जवानी दोनों पहाड़ के काम आए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “2013 में जब केदारनाथ में प्राकृतिक तबाही आई थी तो किसी ने भी नहीं सोचा रहा होगा कि एक दिन केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा। उस दौरान मैं गुजरात का सीएम था और मेरे मन में ये था। इसीलिए मैं अपने आपको रोक नहीं सका और यहाँ पहुँच गया। मैंने अपनी आँखों से उस तबाही को देखा और दर्द को सहा है।”

पीएम ने कहा, “कहा जाता है कि पानी और पहाड़ की जवानी उसके काम कभी नहीं आती। मैंने यह तय किया कि यहाँ का पानी और जवानी दोनों पहाड़ के काम आएगी।” प्रधानमंत्री ने राज्य से होने वाले पलायन पर चिंता व्यक्त की और उसे रोकने की बात कही। आगामी दशक को उत्तराखंड का दशक बताते हुए पीएम ने कहा कि यहाँ पर्यटन तेजी से बढ़ने वाला है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि उत्तराखंड में चारधाम को जोड़ने वाली सड़कें और हेमकुंड साहिब के पास रोप-वे समेत कई आधारभूत योजनाएँ हैं।

व्यक्ति की जीवन में एक बार चारधाम यात्रा की होती है इच्छा

पीएम मोदी ने आदिगुरु शंकराचार्य के सिद्धांतों को वर्तमान जीवन में अधिक प्रासंगिक बताया और कहा कि देश में तीर्थाटन को जीवन का एक अंग माना गया है। हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में एक बार चारधाम की यात्रा करना चाहता है। इसके अलावा पीएम ने कहा कि सदियों के बाद अब अयोध्या को भी उसका गौरव वापस मिल रहा है। काशी का भी कायाकल्प हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूजा के दौरान बाबा केदारनाथ को बाँघांबर वस्त्र चढ़ाया।

केदारनाथ के अपने अनुभवों को पीएम मोदी ने रामचरितमानस की चौपाई के जरिए व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में कहा गया है- ‘अबिगत अकथ अपार, नेति-नेति नित निगम कह’। मतलब कुछ अनुभव इतने अलौकिक और अनंत होते हैं, जिन्हें शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा उन्होंने शंकर शब्द का अर्थ भी समझाया। पीएम ने कहा कि “शं करोति सः शंकरः’ अर्थात जो कल्याण करे, वही शंकर है। 

‘तेरे जैसे दिवाली मनाते होंगे, हम अल्लाह पर यकीन करते हैं’: संघियों को उपदेश दे रही थी द प्रिंट की कॉलमनिस्ट जैनब, कट्टरपंथियों ने लताड़ा

सोशल मीडिया पर प्रोपगेंडा फैलाने वाले अक्सर अपने ही प्रोपगेंडा में फँसकर ट्रोल हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही द प्रिंट की स्तंभकार जैनब सिकंदर के साथ हुआ है। जैनब ने 4 नवंबर को दीप जलाते हुए एक फोटो पोस्ट की और ‘संघियों’ पर तंज कसने के लिए दावा किया कि मुस्लिम हमेशा से दिवाली मनाते हैं। लेकिन अब संघियों को साबित करने के लिए फोटो डालनी पड़ती है।

अब जहाँ जैनब अपने ट्वीट से ये साबित करना चाहती थीं कि उनके समुदाय में कैसे हिंदू त्योहार खुशी-खुशी मनाए जाते हैं लेकिन संघी इस बात पर यकीन नहीं करते। वहीं उनकी फोटो के नीचे कट्टरपंथी ही उनकी तस्वीर देख उन्हें ट्रोल करने लगे।

एक कट्टरपंथी ने कहा, “तेरे जैसे लोग मनाते होंगे, हम लोग अल्लाह और पैगंबर पर यकीन करते हैं। ये हराम है कि किसी भी त्योहार और अन्य धर्म के चरित्र को अपनाएँ। उम्मीद है बात समझ आएगी। अल्लाह हिदायत दे। आमीन।”

वकास असलम चीमा कहते हैं, “हम हर धार्मिक भावना की इज्जत करते हैं लेकिन दीवाली मनाना शिर्क है, चाहे हालात कोई भी हो।”

एक महिला यूजर कहती है, “बाजी आपकी मजबूरी है ऐसी बातें करना…भारतीय मुसलमान हो ना, वरना मुस्लिम कभी दिवाली नहीं मनाते।”

सबजार ने कहा, “तुम्हारी राय हमारा मजहब नहीं है। हमें अपने जैसा बताना बंद करो।”

उज्मा सिराज कहती है, “उन्हें तो मुस्लिमों के भारतीय होने पर भी शक है, उसके लिए क्या करेंगी।”

बता दें कि जैनब सिकंदर ही वह स्तंभकार हैं जिन्होंने अपने एक लेख में दावा किया था कि हिंदुओं को जानवरों की हत्या से कोई फर्क़ नहीं पड़ता, जब तक कि कोई हत्या दलित, मुस्लिम और ईसाई न हो। इसके अलावा उन्होंने एक लेख लिखा था जिसमें बताया था कि कैसे हिंदू राष्ट्र का आधार राम मंदिर नहीं बल्कि लव जिहाद के ख़िलाफ़ कानून है। ऐसे ही सिकंदर ने चीन-भारत विवाद पर बबीता फोगाट को राष्ट्रवाद का अर्थ समझाने की कोशिश की थी। लेकिन बबीता ने उन्हें लताड़ लगाते हुए बताया था कि चाइना प्रेम राष्ट्रवाद है तो फिर ये राष्ट्रवाद कॉन्ग्रेस को मुबारक।