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‘आपके योगदान के बिना ब्रिटेन एक महान देश नहीं बनता’: दीवाली पर UK के पीएम बोरिस जॉनसन ने ब्रिटिश भारतीयों को सराहा

यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दिवाली की पूर्व संध्या पर हिंदुओं को बधाई दी। भगवान राम की अयोध्या वापसी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “नमस्कार दोस्तों, मैं बोरिस जॉनसन आप सभी को दिवाली की शुभकामनाएँ दे रहा हूँ। लीसेस्टर के गोल्डन माइल में रोशनी चालू है, समोसे और मीठे व्यंजन दिए जा रहे हैं और लोग अद्भुत दृश्यों, सुगंधों और ध्वनियों का आनंद ले रहे हैं जो इस त्योहार को इतने रौनक व रोमांचक बनाते हैं और सार्थक भी। क्योंकि आज का दिन वह क्षण है जब भगवान राम और सीता राक्षस राजा रावण को पराजित करने के बाद लौटे थे तो उनके स्वागत में रास्तों को हजारों दीयों से जगमगाया गया था।”

उन्होंने आगे कहा, “इस अवसर का मुख्य संदेश बुराई पर अच्छाई, निराशा पर आशा, अज्ञानता पर ज्ञान और उत्थान है। मुझे विश्वास है कि हम सभी इसे अपने अंदर ग्रहण करते हैं। पूरे ब्रिटेन में शरद ऋतु की रातें लगातार लंबी और गहरी होती जा रही हैं, यह शानदार त्योहार एक नए मूड, आशावाद और आनंद की नई भावना की शुरुआत करता है। आप बर्मिंघम में सोहो रोड पर जश्न मना रहे हैं, लीसेस्टर में व्हील ऑफ लाइट की सवारी कर रहे हैं या आप इस आतिशबाजी देख रहे हैं। यह वास्तव में ऐसा त्योहार है जो हम सभी को एक साथ ला सकता है।”

उन्होंने ब्रिटिश भारतीयों को देश के विकास में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि ब्रिटेन उनके बिना एक महान देश नहीं होता। उन्होंने कहा, “ब्रिटिश भारतीयों के लिए यह त्योहार बहुत मायने रखता है, अपने देश के लिए आप जो कुछ भी करते हैं, उसके लिए मैं व्यक्तिगत प्रशंसा और सम्मान व्यक्त करना चाहता हूँ। बहुत ही विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि आपके योगदान के बिना ब्रिटेन केवल एक कमतर देश होता। हमारे अधिकांश सफल व्यवसायों को चलाने से लेकर अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान तक, हमारे एनएचएस, हमारी पुलिस, हमारे सशस्त्र बलों के जरिये जनता की सेवा करना, हर मोड़ पर हमारे देश को अधिक समृद्ध, स्वस्थ, उदार और सुरक्षित बनाने के लिए आपको धन्यवाद। ब्रिटेन और दुनिया भर में दिवाली मनाने वाले सभी लोगों के लिए मैं आप सभी को दीपावली की शुभकामनाएँ और नए साल की शुभकामनाएँ देना चाहता हूँ। शुभ दिवाली!”

बंदी छोड़ दिवस पर पीएम बोरिस का सिखों को संबोधन

एक अन्य संबोधन में उन्होंने सिखों को बंदी छोड़ दिवस और जैनियों को दिवाली की शुभकामनाएँ दीं। ब्रिटिश पीएम ने कहा, “नमस्ते, मैं बोरिस जॉनसन इस साल रोशनी के त्योहार का जश्न मनाने वाले सभी लोगों को मेरी शुभकामनाएँ भेज रहा हूँ। कठिन समय के बाद मुझे उम्मीद है कि दीवाली और बंदी छोड़ दिवस हमारे सिख दोस्तों के लिए सही मायने में विशेष है।”

ब्रिटिश पीएम ने कहा, “जब हम पिछले नवंबर के बारे में सोचते हैं तो हमें लगता है कि हम उससे आगे बढ़ चुके हैं और इस वर्ष का यह समय परिवार और दोस्तों के साथ मिलने का है। इसलिए मैं एक बार फिर ब्रिटेन के हिंदुओं, सिखों, जैनियों को बहुत-बहुत धन्यवाद कहना चाहता हूँ कि आपने पिछले 18 महीनों में कमजोर लोगों का समर्थन करने और लोगों को सुरक्षित रखने में मदद की है।”

इसके साथ ही पीएम जॉनसन ने लोगों को यह भी याद दिलाया कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसीलिए इस त्योहार का आनंद लेते हुए और लोगों से मिलते समय दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा, “हम बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान के शक्तिशाली संदेश को दिलों में प्रतिबिंबित कर सकते हैं। ज़ाहिर है एक वैक्सीन के तौर पर इसका ज्ञान हमें कोरोना के इस दौर में जीवन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। महामारी अभी खत्म नहीं हुई है और मैं सभी से गाइडलाइंस का पालन करने का आग्रह करता हूँ। अपने हाथ धोएँ, ताजी हवा लें, भीड़-भाड़ वाली जगह पर फेसमास्क का उपयोग करें। जब भी आपको कोरोना का बूस्टर डोज लेने के लिए बुलाया जाय तो तुरंत बूस्टर डोज लें।”

कोविड की दूसरी लहर के कारण भारत ने 2021 की शुरुआत में जिस संघर्ष का सामना किया उसे याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैं यूके और दुनिया भर में सभी को और विशेष रूप से भारत में हमारे दोस्तों को शुभकामनाएँ देना चाहता हूँ, जो पहले ही बहुत कुछ झेल चुके थे। इस साल दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ। आपका वर्ष प्रकाश, आनंद और समृद्धि से भरा हो।”

‘पशु-प्रेमी हैं तो मांस मत खाइए, हर दिन 20 करोड़ जानवरों को मारा जा रहा’: दीवाली का विरोध करने वालों को सद्गुरू का जवाब

दीवाली पर जानवरों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का हवाला देकर पटाखों का विरोध करने वाले लेफ्ट-लिबरल्स को आइना दिखाने के बाद सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने एक बार फिर से ‘ज्ञान’ देने वालों को जबाव दिया है। उन्होंने कहा है कि जानवरों की हत्या कसाईखाने में की जाती है, दीवाली मनाने से उन्हें कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आप सच में जानवरों से प्यार करते हैं तो स्लॉटर हाउसों में जाकर उन्हें बचाइए।

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने 4 नवंबर 2021 को ट्विटर पर अपने इंटरव्यू का वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बच्चों के लिए पटाखों पर से प्रतिबंध हटाने की अपील की। सद्गुरु ने ट्वीट किया, “यदि आप एक पशु-प्रेमी, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील इंसान हैं तो आपको दैनिक मांस की खपत में कटौती करनी चाहिए। बच्चों को खुशी के इस दिन को मनाने दें।”

उन्होंने वीडियो में कहा कि यह ‘जानवरों और पक्षियों के लिए अचानक चिंता करने जैसी बात है, क्योंकि भोजन के लिए दुनिया भर में हर दिन 20 करोड़ से अधिक जानवरों का वध हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया, “अगर आप मांस के खपत को आधा कर दें तो हर दिन 10 करोड़ जानवरों को बचा सकते हैं। यदि आप एक पशु प्रेमी हैं तो आपको यही करना चाहिए।”

सद्गुरू के मुताबिक, “आपको बूचड़खानों में जाकर समझना चाहिए कि कुछ समय पहले आपने जो कबाब खाया वह एक जानवर था। बीफ रोस्ट एक बहुत ही प्यारा जानवर था और आप जो चिकन खा रहे हैं वह एक पक्षी था।”

इससे पहले भी सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने दिवाली के मौके पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया। इसको लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने भी अपनी सहमति जताई है। दरअसल, सद्गुरु ने पटाखे फोड़ने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने का सिंपल फॉर्मूला दिया है। धार्मिक गुरु ने ट्विटर पर कहा, “वायु प्रदूषण की चिंता कोई ऐसा कारण नहीं है कि बच्चों को पटाखे फोड़ने की खुशी से वंचित किया जाए। अगर आप उनके लिए कुछ करना चाहते हैं तो तीन दिन पैदल अपने ऑफिस जाएँ और बच्चों को पटाखों का आनंद लेने दें।”

उनके इस सुझाव का अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी समर्थन किया था। उन्होंने कहा था, “सद्गुरु वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने लाखों पेड़ लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। दिवाली के मौके पर हम सभी पर्यावरण को दूषित होने से बचाएँ और तीन दिनों तक अपनी कार का इस्तेमाल न करें। पैदल ही अपने ऑफिस जाएँ।”

कंगना रनौत की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

दिवाली पर दिशा पटानी का ज्ञान- जानवरों के प्रति बनें दयावान, यूजर्स ने बकरे-मुर्गे की याद दिला दी

अभिनेत्री दिशा पटानी ने गुरुवार (4 नवंबर 2021) को लोगों को दीपावली की शुभकामनाएँ दी। साथ ही पशुओं के प्रति दयालु होने की सलाह भी। संदेश के साथ उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो भी साझा किया। इसमें वह किक मारती दिख रहीं हैं। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि दीपावली की शुभकामना संदेश के साथ इस वीडियो का क्या तुक है। 

सोशल मीडिया पर लोगों को ‘पशुओं के प्रति दयालु’ होने वाला दिशा पटानी का उपदेश नहीं भाया। असल में ये वह ‘ज्ञान’ है जिसका इस्तेमाल अमूमन पटाखा पर प्रतिबंध के पैरोकार इस्तेमाल करते हैं। लिहाजा इस संदेश के बाद यूजर्स बॉलीवुड हीरोइन को चिकन और मटन को लेकर उनका प्रेम याद दिलाने लगे, जिसके लिए जानवरों की हत्या की जाती है।  

मीडिया में यह जाहिर है कि दिशा पटानी को चिकन और मटन कितना पसंद है। इसका हवाला देकर लोगों ने ‘उपदेश’ पर उनका मजाक उड़ाने में कोताही नहीं बरती। 

कई लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि आज ईद नहीं है। 

सोशल मीडिया में वह वीडियो भी वायरल हो रहा जिसमें आदित्य कपूर के साथ दिशा पटानी चिकन खाती नजर आ रही हैं।

गौरतलब है कि इस सीजन कई ब्रांडों को भी दिवाली पर अपने ‘उपदेश’ के कारण सोशल मीडिया में विरोध झेलना पड़ा है। फजीहत के बाद कई ब्रांड को अपने विज्ञापन वापस लेने पड़े हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली भी इसी तरह की ‘ज्ञान’ की वजह से यूजर्स के निशाने पर आए थे। अब दिशा पटानी अपने उपदेश की वजह से इसे झेल रहीं हैं।

कर्नाटक के करिंजा मंदिर में जूते पहन घुसे रहमान-इस्माइल सहित चार युवक, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक पुलिस ने दक्षिण कन्नड़ जिले के बंटवाल तालुका के करिंजा मंदिर में बिना जूते उतारे प्रवेश करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मस्तीकते उल्लाल निवासी बुशर रहमान (20 वर्ष), मुक्काचेरी हाउस उल्लाल निवासी इस्माइल अरहमाज (22 वर्ष), हलेकोट हाउस उल्लाल के मोहम्मद तानिश (19 वर्ष) और बब्बूकट्टे पर्मन्नूर के मोहम्मद रशद (19) के रूप में हुई है। 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी गिरफ्तारी एक वीडियो के वायरल होने के बाद हुई। इस वीडियो में आरोपित बिना जूता उतारे मंदिर में प्रवेश करते हुए देखे गए। इसके बाद विनय कुमार ने करिंजा मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष की ओर से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 के तहत दक्षिण कन्नड़ जिले के पुंजालकट्टे पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने यह वीडियो 2 नवंबर को देखा था। उन्होंने पाया कि यह वीडियो 7 अक्टूबर को ही अपलोड किया गया था। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में बिना जूता उतारे प्रवेश करने से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। घटना की निंदा करते हुए हिंदू जागरण वेदिक (HJV) की पुत्तूर जिला इकाई ने अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए तीन दिन का समय दिया था। यह चेतावनी पुत्तूर जिला संपर्क प्रमुख नरसिम्हा मणि ने 3 नवंबर को दी थी। मणि ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी न करने के कारण होने वाली किसी भी घटना और इसके दुष्परिणामों के लिए वह सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।

मणि ने कहा, “इस तरह के कृत्य, जो मंदिरों की पवित्रता को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से होते हैं, वे समय-समय पर होते रहे हैं। हम माँग करते हैं कि मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाई जाए। लोगों को करिंजा और नरहरि पर्वत जैसी जगहों पर मस्ती करने और अशिष्ट व्यवहार करने से रोका जाना चाहिए। करिंजा में पुलिस चौकी को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।”

उल्लेखनीय है कि हाल ही में केरल में धार्मिक स्थल पर जूते पहनकर फोटो खिंचवाने के आरोप में पुलिस ने मलयालम टीवी एक्ट्रेस निमिषा बीजो और उनकी दोस्त उन्नी को गिरफ्तार किया था। सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहने वाली निमिषा पर मंदिर समिति की ओर से लोगों की भावनाएँ आहत करने और ‘पल्लियोडम’ यानी ‘साँप की पवित्र नौका’ पर जूते पहनकर फोटोशूट कराने का आरोप लगाया गया था।

वहीं, केरल में पिछले साल मलप्पुरम जिले के वन्नियामबलम मंदिर में जूते पहन कर प्रवेश करने वाली एक महिला के खिलाफ श्री त्रिपुरसुंदरी देवी मंदिर के सचिव सरथ कुमार ने शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने हिजाब पहन रखा था।

मजहबी कारणों से केरल में 2300 शिक्षकों ने नहीं ली कोरोना वैक्सीन, वामपंथी सरकार ने दी घर पर ही रहने की ‘विशेष छूट’

देश भर में मुफ्त कोरोना वैक्सीनेशन अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि जन-जन को जल्द से जल्द वैक्सिनेट किया जाए ताकि उन्हें कोरोना से एक सुरक्षा कवच मिले। लेकिन, इन सभी प्रयासों के बीच केरल से खबर आई है कि वहाँ 2,300 शिक्षकों और 300 गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने मजहबी कारणों का हवाला देते हुए वैक्सीन लेने से इनकार कर दिया है और अजीब बात यह है कि वहाँ की राज्य सरकार ने भी उन्हें इससे छूट दे दी है।

कुछ समूह ऐसे हैं जो मजहबी कारणों और मेडिकल ग्राउंड पर वैक्सीन नहीं ले रहे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बहाने ज्यादातर अस्थिर होते हैं और साइंस के ख़िलाफ़ हैं। दूसरी ओर, केरल सरकार ने वैक्सीन ना लेने वाले शिक्षकों को छूट दी है। सरकार ने कहा कि जिन शिक्षकों ने वैक्सीन नहीं ली उन्हें पहले दो सप्ताह तक स्कूल नहीं आना चाहिए और कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएँ जारी रखनी चाहिए। जिसके चलते वे घर पर ही रह रहे हैं।

बता दें कि कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में एक नाम केरल का भी रह चुका है। तब भी, केरल में यह घटना ऐसे समय में आई है जब अन्य राज्यों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मजहबी समूहों ने अपने अनुयायियों को वैक्सीन लेने के लिए कहा है। बात चाहे अमेरिका, इजरायल, रूस की हो या इंडोनेशिया सऊदी अरब, मिस्र की हर जगह कोविड वैक्सीन के लिए बड़े मजहबी समूह अपील कर रहे हैं कि लोग कोरोना वैक्सीन लगवाएँ। ऑक्सफोर्ड की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को तो चिकित्सा और धार्मिक निकायों द्वारा शरिया के अनुरूप तक बताया गया है।

साभार: WHO का फेसबुक पेज

कानून और नैतिकता का उपयोग करते हुए छद्म विज्ञान के खिलाफ अभियान के अध्यक्ष डॉ यू नंदकुमार नायर ने कहा, “किसी भी धर्म/मजहब ने आधिकारिक तौर पर टीकाकरण का विरोध नहीं किया है। इसका निरीक्षण किया गया और उन जगहों पर सफाई दी गई जहाँ टीके की सामग्री पर संदेह था। इसलिए हम स्वीकार नहीं कर सकते जब लोग कहते हैं कि उनके मजहबी कारणों से वो वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते। इसका मजहब से कोई लेना-देना नहीं है। हर बच्चे को स्वस्थ रहने का अधिकार है। जो लोग वैक्सीन न लगवाने के बहाने खोज रहे हैं वो बच्चों के अधिकारों की इज्जत नहीं कर रहे हैं।”

बेटा बलात्कारी निकल गया तो श्रीकृष्ण ने घर में घुस किया उसका वध: दिवाली की एक कथा ये भी

हमारी धरती के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब पता चलता है कि कुल कितना भी अच्छा हो अथवा माँ-बाप कितने ही अच्छे हों, ज़रूरी नहीं है कि पुत्र भी उन्हीं सद्गुणों के साथ पैदा हो। ऋषि के कुल में असुर पैदा हो सकता है, उदाहरण के तौर पर रावण को लीजिए। लेकिन, अगर भगवान किसी बेटे को जन्म दें और वो बलात्कारी एवं पतित निकल जाए तो क्या किया जाएगा? जी हाँ, हमारे इतिहास में ऐसा हुआ है। इसे जानने का इससे अच्छा मौक़ा नहीं हो सकता, क्योंकि ये कथा दिवाली से ही जुड़ी है। भगवान विष्णु के एक अवतार ने जिस बेटे को जन्म दिया, उनके दूसरे अवतार को उसी बेटे का वध करना पड़ा, ऐसा हमारे पुराणों में वर्णित है।

सीधा कहानी पर आते हैं। भौमासुर नामक एक राक्षस था। उसका नाम नरकासुर था। नरक चतुर्दशी नरकासुर वध की याद में ही मनाई जाती है। यह दीपावली पर्व का ही एक हिस्सा है। कहानी कुछ यूँ शुरू होती है कि देवराज इंद्र भौमासुर के अत्याचारों से त्रस्त हो चुके थे और उन्होंने श्रीकृष्ण के पास जाकर इसकी शिकायत की। श्रीकृष्ण को उन्होंने बताया कि भौमासुर बलात्कारी हो गया है और अन्य राजाओं की स्त्रियों का हरण करता है। इंद्र ने यह भी बताया कि वह उनके प्रिय हाथी ‘ऐरावत’ को भी छीनना चाहता है।

विष्णुपुराण, भागवतपुराण और ब्रह्मपुराण में इसका उल्लेख है। भागवत पुराण के 59वें अध्याय में श्रीकृष्ण द्वारा भौमासुर के वध को विस्तृत तरीके से बताया गया है। भौमासुर के पास कई लूटी हुई बहुमूल्य चीजें थीं। उसके पास वरुण का छत्र था। उसने माता अदिति के कुण्डल लूट लिए थे। साथ ही उसने मेरु पर्वत पर स्थित वो जगह भी छीन ली थी, जो देवताओं को प्रिय था। चूँकि, जब भगवान विष्णु वराह के रूप में उत्पन्न हुए थे, तब उनके स्पर्श के कारण वह पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न हुआ था।

पृथ्वी देवी ने ख़ुद इस बात को स्वीकार किया है और ये प्रकरण भी पुराणों में वर्णित है। भागवत पुराण में राजा परीक्षित को कहानी सुनाते हुए ऋषि शुकदेव ने बताया कि किस तरह श्रीकृष्ण गरुड़ पर सवार होकर और सुदर्शन चक्र लेकर उसकी राजधानी गए। भौमासुर प्राग्ज्योतिषपुर का राजा था। कहते हैं, जहाँ से पृथ्वी के गर्भ में माँ जानकी अर्थात सीता का जन्म हुआ था, वहीं पर भौमासुर का भी जन्म हुआ था (भागवत 10.2.2; 36.63)। इस तरह से भौमासुर और सीता एक ही गर्भ से पैदा होने के कारण भाई-बहन हुए। हालाँकि, बचपन में उसे भी राजा जनक ने ही पाला था, लेकिन बाद में पृथ्वी उसे ले गई और वह राजा बना।

भौमासुर की संगति भी अच्छी नहीं थी। वह बाणासुर और कंस जैसे दुष्टों का मित्र था। इस कारण उसकी भी बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी थी। दरअसल, उसे ऋषि वशिष्ठ ने विष्णु के हाथों मारे जाने का श्राप दिया था। भागवत पुराण में उसके राज्य की घेराबंदी का जो जिक्र है, वो आजकल के लोगों को भी सोचने को मजबूर कर सकता है। उसके राज्य को सबसे पहले तो पहाड़ों से घेराबंदी की गई थी। अर्थात, पहला रक्षा कवच पहाड़ों से तैयार किया गया था। उसके बाद आग और विद्युत् की चहारदीवारी से घेराबंदी की गई थी। उसके बाद वायु, अर्थात गैस को उसके भीतर रखा गया था। सच में ये घेराबंदी काफ़ी दुर्गम थी। इसका जिक्र संस्कृत में कुछ यूँ किया गया है:

"गिरिदुर्गैः शस्त्रदुर्गैर्जलाग्न्यनिलदुर्गमम् 
मुरपाशायुतैर्घोरैर्दृढैः सर्वत आवृतम्"

इसके अलावा वहाँ बहुत सारे यंत्र भी रखे हुए थे। हालाँकि, उन्हें छिन्न-भिन्न करना श्रीकृष्ण जैसे योद्धा के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी और उन्होंने इसके लिए बाणों और चक्र का प्रयोग किया। फिर उनका सामना मुर नामक दैत्य से हुआ। मुर ने गरुड़ पर वार किया लेकिन श्रीकृष्ण ने पाँच मुख वाले उस राक्षस को मार गिराया। उसके बाद उसके सात पुत्रों से श्रीकृष्ण का युद्ध हुआ। मुर राक्षस को मार गिराने के कारण ही उनका नाम मुरारी भी कहा गया। भौमासुर ख़ुद पागल हाथियों के साथ युद्ध करने बाहर निकला, लेकिन उसे भी भगवान श्रीकृष्ण ने मार गिराया। उसके बाद पृथ्वी वहाँ प्रकट हुई और उन्होंने भौमासुर के बेटे के प्राण की रक्षा कर वंश बचाने का निवेदन दिया।

श्रीकृष्ण ने निवेदन स्वीकार करते हुए भौमासुर के पुत्र भगदत्त को प्राणदान दे दिया। जब वह महल के अंदर पहुँचे तो उन्होंने पाया कि नरकासुर ने 16,000 स्त्रियों को बंधक बना रखा था। श्रीकृष्ण को देखते ही उन सबने एकमत से मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया, ऐसा विवरण भागवत पुराण में मिलता है। इसके लिए ये श्लोक देखें:

"तम्प्रविष्टं स्त्रियो वीक्ष्य नरवर्यं विमोहिताः 
मनसा वव्रिरेऽभीष्टं पतिं दैवोपसादितम्"

बताया गया है कि इसके बाद श्रीकृष्ण ने उन सभी स्त्रियों को द्वारका भेज दिया, जहाँ उनके रहने-सहने की पूरी व्यवस्था की गई और उन्हें उचित सम्मान दिया गया। यह भी वर्णन है कि उन स्त्रियों के साथ समय व्यतीत करने के लिए श्रीकृष्ण ने उतने ही रूप धारण किए थे। श्रीकृष्ण अपनी उन पत्नियों के साथ ठीक वैसा ही आचरण करते थे, जैसा एक गृहस्थ पुरुष अपनी पत्नियों के साथ करते थे। वे सभी भी कृष्ण के प्रति उतना ही प्रेम रखती थीं। इसीलिए, यह मिथक कि श्रीकृष्ण ने उन 16,000 स्त्रियों को पहले विवाह का प्रस्ताव किया, वो ग़लत है। दरअसल, उन्होंने पहले ही उन्हें देखते मात्र ही अपने मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया था।

भगवान श्रीकृष्ण के इस प्रकरण से हमें यह सीख मिलती है कि संतान भले ही भगवान की ही क्यों न हो, पूरी जनसंख्या का भार ढोने वाली पृथ्वी की ही क्यों न हो, ज़रूरी नहीं कि वो दुष्ट न निकले। उसी पृथ्वी की संतान माता सीता जहाँ अनंत काल के लिए एक आदर्श महिला की छवि पेश करती हैं, उसी पृथ्वी का पुत्र नरकासुर अथवा भौमासुर आतंक का साम्राज्य कायम करता है और स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार करता है। इस पूरे प्रकरण को परीक्षित ने शुकदेवजी के मुँह से सुना। बता दें कि परीक्षित पांडवों के वंशज थे और उनके रहते ही कलियुग का आरम्भ हुआ था। उससे पहले द्वापर युग था, जिसमें महाभारत जैसा बड़ा युद्ध हुआ और श्रीकृष्ण के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया था।

रेफरेंस : भागवत पुराण (तीसरा अध्याय, श्लोक 3), भागवत पुराण (59वाँ अध्याय, पूरा)

राहुल पटेल बन मोहम्मद मलिक ने हिंदू युवती को फँसाया, रेप किया, हकीकत सामने आई तो लड़की पर धर्मान्तरण का दबाव डाल नमाज पढ़वाई

गुजरात के सूरत जिले से एक बार फिर लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ मोहम्मद मलिक नाम के मुस्लिम व्यक्ति ने राहुल पटेल बनकर एक हिंदू युवती को झूठे प्रेम के जाल में फँसाया और फिर करजण के एक फॉर्महाउस में ले जाकर उसका रेप किया। इसके बाद जब युवती को आरोपित की असली पहचान का पता चला तो उसने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालते हुए उससे जबरन नमाज पढ़वाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सूरत के पुणागाम इलाके की है। पुणागाम भैयानगर के पास स्थित नारायण नगर के रहने वाले मोहम्मद मलिक (21) ने 17 वर्षीय हिंदू युवती को हिंदू बन पहले अपने जाल में फँसा लिया। इस बीच बीते रविवार को मौका मिलते ही आरोपित युवती को अपने साथ भगा ले गया। उसके बाद करजण स्थित एक फॉर्महाउस पर उसका रेप किया। इधर लड़की के घरवालों ने पुणागाम पुलिस स्टेशन में मामले की शिकायत की।

अंतरधार्मिक मामला देख पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और आरोपित को ढूँढ निकाला और युवती को उसके चंगुल से बचाने के साथ ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईपीसी के साथ ही लव जिहाद कानून के तहत भी कार्रवाई की है। इस बीच पूछताछ में राहुल बने मोहम्मद मलिक ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने ये भी बताया कि उसकी माँ हिंदू है और पिता मुस्लिम। इसलिए वो और उसके सभी भाई-बहन भी इस्लाम को मानते हैं। केस की जाँच का जिम्मा एसीपी सी डिवीजन बीएम बसावा को सौंपी गई है।

वहीं बचाए जाने के बाद पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि मोहम्मद मलिक ने जब उससे दोस्ती की थी तो उसने अपना नाम राहुल बताया था। इसके अलावा उसने अपने हाथ पर राहुल नाम का टैटू भी बनवा रखा है। युवती का कहना है कि इसी कारण वो उसके झाँसे में आ गई। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपित ने उसकी पहचान का खुलासा होने के बाद उस पर धर्मान्तरण का दबाव डाला, साथ ही नमाज भी पढ़वाई।

क्या आप जानते हैं औरंगजेब ने भी पटाखों पर लगाया था प्रतिबंध, पढ़िए मुगल आक्रान्ता का 1667 का आदेश

दिवाली के मौके पर पटाखों पर लगने वाला बैन अक्सर सवाल खड़ा करता है कि क्या सारे प्रदूषण के लिए एक पर्व ही जिम्मेदार है। पिछले कुछ सालों से वायु प्रदूषण का रोना रोकर दिवाली आते ही कई राज्यों में प्रतिबंध लग जाता है। लोग सोशल मीडिया पर सवाल करते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। 

कुछ लोग ये भी कहते हैं कि ये सब सिर्फ पिछले कुछ सालों में बढ़े प्रदूषण के कारण हो रहा है लेकिन बता दें कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर भावनाओं को ठेस पहुँचाना कोई नई बात नहीं है। 350 साल पहले मुगल आक्रांता औरंगजेब ने भी ऐसे ही पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया था।

आज दिवाली के मौके पर और वर्तमान हालातों को देखते हुए ये जानना जरूरी है कि हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करने वाले औरंगजेब ने भी अपने काल में पटाखे फोड़ने पर रोक लगवाई थी। उसका आदेश बीकानेर के स्टेट अर्काइव में सुरक्षित है। आदेश 8 अप्रैल 1667 का है। 

साभार: दैनिक भास्कर

आदेश में लिखा है- “बादशाह के सूबों के अफसरों को लिख दीजिए कि वे आतिशबाजी पर रोक लगा दें। शहर में भी घोषणा कर दें कि कोई आतिशबाजी न करें।” इस आदेश में किसी त्यौहार का जिक्र नहीं है। न ही कोई समय का उल्लेख है। बस इससे इतना पता चलता है कि उसने आतिशबाजी पर रोक लगाई थी इस आदेश के हिसाब से लंबे समय तक आतिशबाजी पर रोक लगाई गई थी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान स्टेट आर्काइव के निदेशक महेंद्र सिंह खड़गावत ने कहा, “औरंगजेब के समय आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया गया था। अप्रैल 1667 का औरंगजेब के समय का लेटर आर्काइव में हमारे पास सुरक्षित है। उस लेटर में दिवाली का जिक्र नहीं है, लेकिन वह लेटर सही है।”

इतिहास की इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सवाल करते रहते हैं। लोग तंज कसते हैं कि औरंगजेब ने भी पटाखों पर प्रतिबंध लगाया था। कितना महान पर्यावरणविद् और दूरदर्शी है।

दिवाली के आते ही पटाखों से उठने वाले धुएँ पर कई वामपंथी-कट्टरपंथी अपनी सांस फुलाते हैं। इस सूची में प्रियंका चोपड़ा जैसे नाम हैं जिन्हें सिगरेट या सिगार पीने से समस्या नहीं है लेकिन उन्हें दिवाली के मौके पर सांस की शिकायत हो जाती है। इसी तरह रोशनी अली से जुड़ा विवाद हाल का है। उन्हीं की याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने दीवाली/काली पूजा के दौरान पूरे पश्चिम बंगाल में सभी प्रकार के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था।

‘फिर से छूआ तो सिर फोड़ दूँगी’: अफसाना खान के इल्जाम पर बोलीं शमिता शेट्टी- टीशर्ट में नारियल छिपा नहीं खेल सकती वुमन कार्ड

‘बिग बॉस 15’ (Bigg Boss 15) के लेटेस्ट एपिसोड में टास्क के दौरान खूब हंगामा देखने को मिला। एक तरफ जहाँ सिंबा नागपाल और उमर रियाज का झगड़ा हो गया, वहीं दूसरी ओर अफसाना ने प्रतीक और सिंबा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अफसाना ने प्रतीक और सिंबा पर गलत तरीके से छूने के आरोप लगाए। अफसाना ने सिंबा से कहा कि अगर उन्होंने फिर से उन्हें छूआ तो वह उनका सिर फोड़ देंगी।

अफसाना की ऐसी बात सुनकर प्रतीक बुरी तरह भड़क गए। वहीं सिंबा ने भी अफसाना को फटकारते हुए कहा, “कोई शौक नहीं है तुम्हें हाथ लगाने का। तेरे मुँह भी नहीं लगना चाहता हूँ। तू जा यहाँ से।” इसके बाद बात और आगे बढ़ गई। तब शमिता और जय ने बचाव किया। शमिता ने प्रतीक और सिंबा का पक्ष लेते हुए अफसाना के लिए कहा कि उन्होंने नारियल अपनी टी-शर्ट के अंदर छिपाए हुए हैं और इस तरह वह खुद को डिफेंड नहीं कर सकतीं। यह उनकी चॉइस है पर वह इस तरह वुमन कार्ड नहीं खेल सकतीं।

करन, अफसाना की साइड लेते हुए शमिता से कहते हैं, “अगर एक लड़की खतरनाक इलाके में जाती है और वहाँ उसका रेप हो जाता है तो लड़की की गलती नहीं है।” यह सुनकर शमिता और प्रतीक भड़क जाते हैं। प्रतीक यह सोचकर आपा खो देते हैं कि जिस इंसान ने उन्हें कभी मेंटॉर किया था, वहीं उनके लिए इस तरह का उदाहरण दे रहा है। वह जाकर करन कुंद्रा पर खूब बरसते हैं और कहते हैं, “आप कभी मेरे मेंटॉर रहे थे। लेकिन आपने इस सिचुएशन को एक बहुत ही बुरे उदाहरण से कंपेयर किया है जो एकदम बकवास है।”

प्रतीक का गुस्सा देख करन उनसे कहते हैं कि अगर एक लड़की कह रही है कि उसे नहीं छू सकते तो आप उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। हालाँकि बाद में वह अफसाना के पास जाते हैं और उनसे कहते हैं कि वह वुमन कार्ड न खेलें। शमिता भी करन पर गुस्सा निकालती हैं। प्रतीक की बातों से टूटे करन रोने लग जाते हैं और तब शमिता उन्हें चुप कराती हैं। वह प्रतीक और करन के बीच में सुलह करवाने की कोशिश करती हैं, लेकिन दुखी प्रतीक वहाँ से चले जाते हैं। इस बीच तेजस्वी प्रकाश ने करण कुंद्रा से नाराज होकर उनसे शिल्पा शेट्टी के बारे में सवाल किया।

दिवाली के ‘पटाखों’ से पहले ही दमघोंटू हो गई दिल्ली, जानिए कैसे अगले 3 दिनों में पराली से और बिगड़ेगी हवा

ठंड का मौसम आते ही देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बनकर उभरता है। दिल्ली में स्मॉग छा जाने से लोगों को साँस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। किसानों द्वारा पराली जलाया जाना इसकी सबसे बड़ी वजह है। इसी क्रम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बुलेटिन जारी किया है। बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक बुधवार को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 314 रहा, जिसमें पीएम 10 और पीएम 2.5 मुख्य प्रदूषक रहे। इससे पहले मंगलवार को यह आँकड़ा 303 से कुछ डिग्री अधिक था। बुधवार को दिल्ली ही नहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बुलंदशहर और नोएडा समेत कई हिस्सों में AQI ‘बहुत खराब’ दर्ज किया गया। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार, गुरुवार से हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है।

माना जा रहा है कि एक्यूआई गुरुवार को ‘बेहद खराब’ श्रेणी के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच सकता है। पराली जलाने के कारण दिल्ली में पीएम 2.5 में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके अलावा, प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान बुधवार के लगभग 8% से बढ़कर गुरुवार को अनुमानित 20% हो सकता है। हवा के उत्तर-पश्चिमी दिशा में हुए बदलाव को इसका कारण माना जा रहा है।

दिल्ली के उत्तर-पश्चिम से आने वाली हवाएँ पराली जलाए जाने वाली हॉटस्पॉट पंजाब और हरियाणा से प्रदूषक हवाएँ लाती हैं। SAFAR के पूर्वानुमान में कहा गया है कि शुक्रवार और शनिवार को प्रदूषण में पराली का शेयर 35 से 45 फीसदी तक पहुँच सकता है। ऐसे में पटाखों के कारण दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 4 से 6 नवंबर के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच सकता है।

हाल ही में पटाखों पर प्रतिबंध पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखे अस्थायी मुद्दा हैं, जबकि पराली जलाना मुख्य मुद्दा है। यह स्वीकार करते हुए कि अदालत को इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, जस्टिस एमआर शाह और एएस बोपन्ना की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि वे दीवाली की छुट्टी के बाद इस मुद्दे को सुनवाई के लिए उठाएँगे।