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धनतेरस की वह शाम जब सीरियल बम ब्लास्ट से दहली दिल्ली: जानिए कैसे छूटा था ‘मास्टरमाइंड’ तारिक अहमद डार

आज से यही कोई 16 साल पहले, वो धनतेरस का दिन था, तारीख थी 29 अक्टूबर 2005, सत्ता में थी कॉन्ग्रेस, दिल्ली के बाजार सजे-धजे थे, लोग घरों से त्योहारों की खरीदारी करने बाहर निकले थे। वहीं तमाम लोग ऑफिस से लौटने की तैयारी कर रहे थे या अभी रास्ते में थे। दो दिन बाद ही दिवाली थी, उसके बाद गोवर्धन पूजा और अगले दिन भैया दूज इसलिए चारों तरफ भीड़-भाड़ और खुशी का माहौल था तभी शाम के ठीक साढ़े 5 बजे से अगले आधे घंटे तक एक के बाद एक दिल्ली के तीन अलग-अलग इलाकों में, तीन धमाके हुए और त्योहारों की खुशी मातम में बदल गई। रौनक बम धमाकों के धुएँ में काली हो गई। चारों तरफ भगदड़-हाहाकार, किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करे- जहाँ हैं वहीं रहे या वहाँ से निकले, क्योंकि जैसे एक के बाद एक लगातार धमाकों की खबरें आ रही थी, लग रहा था मानो पूरी दिल्ली में ही आतंकियों ने बम बिछा दिए हों, जो एक साथ नहीं बल्कि एक के बाद एक फटेगें, ऐसे में पता नहीं अगला नंबर किसका हो।

तब दीपावली के जश्‍न में डूबी दिल्‍ली अचानक हुए इन आतंकी हमलों से दहल गई थी। पहला धमाका पहाड़गंज में हुआ, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई और 60 से अधिक घायल हुए। दूसरा धमाका गोविंदपुरी में हुआ, जिसमें 4 लोग घायल हुए जबकि तीसरा धमाका सरोजनी नगर में हुआ जिसमें सबसे ज्‍यादा 50 लोगों की मौत हुई और 127 से ज्यादा लोग घायल हुए। इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ माना गया। कोर्ट ने तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे।

2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट के तीनों आरोपित (साभार-इंडियन एक्सप्रेस)

बता दें कि सीरियल ब्लास्ट का दिल्ली में ये पहला मामला था, इससे पहले साल 2000 में लाल किले पर और 2001 में संसद हमला तो हुआ था, लेकिन इस बार आम आदमी को आतंकियों ने निशाना बनाया था। दिल्ली के दिल में खौफ पैदा करना चाहते थे आतंकी। इसके बाद दिल्ली में फिर तीन साल बाद यानी 2008 में संसद हमले की बरसी पर 13 दिसम्बर को सीरियल ब्लास्ट किए गए, करोल बाग में 1, कनॉट प्लेस में 2 और ग्रेटर कैलाश में 2 ब्लास्ट किए गए थे।

इतने साल अचानक से आपको पीछे ले जाने और आपके सामने दिल्ली की दिवाली से पहले के उस खौफनाक मंजर की झलक रखने का एक मकसद है और वो मकसद है 2005 के दिल्ली सीरियल धमाकों का ‘मास्टरमाइंड’ तारिक अहमद डार, जिसे NIA ने फिर से गिरफ्तार कर लिया है। आतंकी डार की गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर में सर्चिंग अभियान के दौरान हुई है। NIA जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के ठीकाने पर लगातार छापेमारी कर रही है। इसी क्रम में NIA को ये बड़ी सफलता मिली है। डार दिल्ली के सीरियल धमाकों का वह मास्टरमाइंड था जो सबूतों और गवाहों के खेल में आज से यही कोई साढ़े चार साल पहले 2017 में छूट गया था।

तारिक अहमद डार, दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट, मुख्य आरोपित और उसके साथियों के पकड़े जाने, जेल, बरी, सजा और पुनः पकड़े जाने की पूरी कहानी आपको विस्तार से बताता हूँ।

सबसे पहले अभी कैसे गिरफ्त में आया तारिक अहमद डार, कश्मीर में अभी हिन्दुओं और गैर मुस्लिमों आतंकियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। इसी मामले में आतंकियों और उनके मददगारों की तलाश में 13 अक्टूबर, 2021 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआईए (NIA) ने कश्मीर में 16 जगहों पर छापेमारी कर आंतकवादियो का साथ देने वाले 9 लोगों को गिरफ्तार किया। इन सभी पर आरोप है कि ये सभी कश्मीर घाटी मे आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और अन्य आंतकी संगठनो के आतंकियों को सुविधा मुहैया कराते थे।

एनआईए ने खुलासा किया कि आतंकियों की इस साजिश के निशाने पर दिल्ली भी शामिल थी। वही दिल्ली जो 16 साल पहले 2005 में दिवाली से ठीक पहले सीरियल बम ब्लास्ट से दहल गई थी। उधर दिल्ली पुलिस की कस्टडी में मौजूद पाकिस्तानी आतंकी अशरफ कई अहम खुलासे कर रहा है। उसने अपने हैंडलर का नाम नासिर बताया जो पाकिस्तानी सेना का एक अफसर है और अशरफ के तार साल 2011 मे दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए धमाके से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।

NIA की पूछताछ में अशरफ ने खुद ये कबूल किया है कि हाईकोर्ट समेत उसने कई अहम जगहों की रेकी की थी। इन जगहों में दिल्ली पुलिस का पुराना हेडक्ववार्टर समेत आईएसबीटी कश्मीरी गेट और लाल किला आदि भी शामिल थे। अशरफ ने यह भी खुलासा किया है कि वह जम्मू में साल 2009 में हुए एक धमाके में भी शामिल था। दिल्ली पुलिस की हिरासत मे मौजूद अशरफ ने अपने शुरूआती बयानों में यह भी कहा है कि साल 2011 मे दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर हुए धमाके के लिए उसने ही रेकी की थी। बता दें कि यह धमाका दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नंबर-5 के पास हुआ था।

NIA की पूछताछ में जो बातें अभी तक सामने आईं हैं उनसे यह साफ पता चल रहा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक बार फिर अपने स्लीपर सेल को पूरी तरह से मैदान में उतार दिया है और उन्हें यह साफ निर्दैश दिया है कि वे भारत में खासकर जम्मू-कश्मीर और दिल्ली को अपना निशाना बनाएँ। NIA ने जम्मू-कश्मीर से जिन 9 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग स्थानीय युवाओं को बरगला कर आंतकी संगठन में शामिल कराने की साजिश मे भी शामिल थे। एनआईए के मुताबिक इनके नाम वसीम अहमद, तारिक अहमद डार, बिलाल अहमद मीर, तारिक अहमद बफंडा, मोहम्मद हनीफ, हफीज, ओवैस डार, मतीन भट और आरिफ फारूक भट है।

NIA ने अधिकारिक तौर पर खुलासा किया है कि ये सभी ओवर ग्रांउड वर्कर हैं जो अपने आकाओं और पाकिस्तानी कमांडरों के साथ साजिश कर आतंकियों को सपोर्ट उपलब्ध कराते हैं और इन लोगों की मदद से आतंकवादियों ने कई स्थानीय लोगों समेत सुरक्षाकर्मियो की हत्यायें की हैं और इनकी साजिश के निशाने पर एक बार फिर राजधानी दिल्ली भी थी।

NIA के मुताबिक आतंकी तारिक अहमद डार लश्कर-ए-तैयबा के लिए वित्तीय मदद और साजिश रच रहा था। इसके अलावा वो कश्मीर घाटी में स्थानीय युवाओं को आतंकवादी बनाने और उन्हें हथियार और गोला बारूद से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी कमांडरों के साथ साजिश में शामिल था। एनआईए ने उसकी गिरफ्तारी के बाद मौके से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड जब्त किए हैं। डार आतंकवादियों को सामान के साथ लड़ाके भी उपलब्ध करा रहा था।

अब बात NIA के इस छापे में गिरफ्तार हुआ तारिक अहमद डार साढ़े चार साल पहले कैसे छूटा, दिल्ली सीरियल ब्लास्ट मामले में कैसे उस समय गिरफ्तार हुआ था। कोर्ट ने क्या फैसला दिया अब उसकी बात:

इसके लिए आपको ले चलता हूँ 2005 के अक्टूबर के महीने में, 29 अक्टूबर 2005 को जब सबसे पहला बम धमाका नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक होटलों वाली जगह पहाड़गंज के भीड़भाड़ वाले इलाके में शाम 5 बजकर 38 मिनट पर हुआ था, बम MS मेडिकोज नाम की शॉप के बाहर पार्क किसी दो पहिया वाहन में प्लांट किया गया था। उस समय पड़ोस के एक गोलगप्पे वाले की दुकान पर भी काफी भीड़ थी।

दिल्ली 2005 सीरियल ब्लास्ट (साभार-इंडियन एक्सप्रेस)

दूसरा धमाका गोविंदपुरी में शाम को ठीक 6 बजे हुआ, चलती डीटीसी बस में हुए धमाके ने सबको दहशत से भर दिया था। हालाँकि, कंडक्टर ने जब बस में संदेहास्पद बैग देखा तो शोर मचाया, हालाँकि, बैग खिड़की से बाहर फेंकने की कोशिश में फट गया लेकिन थोड़ी सी सजगता और फुर्ती से कई जानें बच गईं और महज 4-5 लोग ही घायल हुए, तब तक बाकी यात्रियों को उतारा जा चुका था।

तीसरा धमाका दिल्ली में महिलाओं की सबसे पसंदीदा मार्केट सरोजिनी नगर में हुआ, जहाँ 6 बजकर 5 मिनट पर चारों तरफ पसरा खौफ साफ़ देखा गया था। किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। लेकिन जब आँकड़े आए तब पता चला कि त्यौहार मनाने की तैयारी कर रहे 60 लोग इन धमाकों में मारे गए, वहीं 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। सबसे भयावह था सरोजिनी मार्केट का ब्लास्ट, जिसमें करीब 50 लोग मारे गए थे।

यहाँ एक और विशेष बात है जो उस समय मीडिया में आई थी कि कैसे थोड़ी सी चूक ने सरोजनी नगर में इतनी जानें ले ली। डीटीसी बस की तरह सरोजनी नगर में भी इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था, दरअसल, सरोजनी नगर में लाल चंद सलूजा की जूस की दुकान पर नौकर ने एक लावारिस बैग देखा, उसमें उसे एक कुकर नजर आया। टाइमर दिखा तो सारे व्यापारी इकट्ठा हो गए लेकिन किसी की समझ में कुछ नहीं आया कि करना क्या है?

सरोजनी नगर ब्लास्ट (साभार-इंडियन एक्सप्रेस)

तभी व्यापारी नेता अशोक रंधावा भागते हुए पुलिस चौकी पहुँचे, लेकिन जब तक पुलिस आती, बम फट चुका था। और वहाँ आस-पास खड़े सरकारी आँकड़ों के अनुसार 50 लोगों की मौत हो गई थी। जूस की दुकान के मालिक लाल चंद सलूजा की भी इस धमाके में मौत हो गई। हालाँकि, मीडिया में उस समय ये भी आया था कि बम किसी मारुति वैन में रखा गया था। ऐसा माना जाता है कि इन बम धमाकों में आतंकियों ने RDX का इस्तेमाल किया गया था।

दिल्ली के इन सीरियल धमाकों के लिए पुलिस ने तीन गिरफ्तारियाँ की और दावा किया कि ये धमाके भी इस्लामिक आतंकवादियों की साजिश थे, लश्कर-ए-तैयबा का हाथ बताया गया। तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिल और मोहम्मद रफीक शाह को मुख्य आरोपित बनाया गया था। इन धमाकों का मास्टरमाइंड तारिक था जो लश्कर का ऑपरेटिव था। इस मामले में पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। कोर्ट ने 2008 में मामले के आरोपित मास्टरमाइंड डार और दो अन्य आरोपितों के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, साजिश रचने, हथियार जुटाने, हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप तय किए थे। दिल्ली पुलिस ने डार के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट में उसके कॉल डिटेल्‍स का जिक्र भी किया गया, जिससे कथित तौर यह बात सामने आई कि वह लश्कर-ए-तैयबा के अपने आकाओं से कनेक्‍शन में था।

दिल्ली की पटियाला हाउस की स्पेशल कोर्ट में जज थे रीतेश सिंह, 16 फरवरी 2017 को यानी घटना के 12 साल बाद जब इस केस का फैसला सुनाया तो जो पीड़ित परिवार थे, वो ठगे से रह गए। सीरियल बम ब्लास्ट मामले में पुलिस आरोपितों को दोषी साबित करने में नाकामयाब रही। पुलिस चार्जशीट का ज्यादातर हिस्सा कोर्ट के सामने महज एक कहानी साबित हुआ, जिसकी कोई बुनियाद नहीं थी, चार्जशीट का कोई सेक्शन कोर्ट के सामने प्रूव नहीं हो सका। आरोपितों का न ब्लास्ट में कोई रोल आया, न ही आपस में कोई लिंक साबित हुआ। गवाह और सबूत कोर्ट के सवालों के आगे लड़खड़ाते नजर आए।

बचाव पक्ष की मानें तो कोर्ट ने जिस यूएपीए सेक्शन (गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम) की दफा 38 और 39 के तहत अहमद डार को दोषी माना है, वह सेक्शन भी कोर्ट ने स्वयं के विवेक से लगाए थे, वरना पुलिस चार्जशीट में सेक्शन 17 और 18 (आतंकवादी गतिविधि के लिए धन जमा करने से संबंधित), कोर्ट में प्रूव नहीं हुए थे।

परिणाम स्वरुप तीन अभियुक्तों में से 2 यानी मोहम्मद रफीक शाह और हुसैन फाजिली बरी कर दिए गए और तीसरे अभियुक्त तारिक अहमद डार को 10 साल की सजा सुनाई गई लेकिन बम धमाकों में शामिल होने के लिए नहीं बल्कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से रिश्ते साबित हो जाने की वजह से, उसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है इसलिए अदालत ने उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दे दिया।

दिल्ली पुलिस ये तक साबित नहीं कर पाई कि अभियुक्त उस दिन शहर में मौजूद थे। जिनमें से एक कश्मीर यूनीवर्सिटी में इस्लामिक स्टडी का छात्र था और दूसरा शॉल विक्रेता। दोनों को ही छोड़ दिया गया था, हालाँकि पुलिस की स्पेशल सेल इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट भी गई। फिलहाल अभी केस वहाँ लम्बित है। इस तरह इतने लोगों ने अपनों को खो दिया, समय रहते त्वरित न्याय मिल जाता तो कम से कम अपनों को खोने का दुख कुछ हद तक कम हो जाता। लेकिन अब जब तारिक अहमद डार फिर से NIA की गिरफ्त में आया है तो उसकी नई-पुरानी कड़ियों को जोड़ते हुए एक बार फिर से न्याय की आस जगी है।

‘पापा कब आएँगे… बताओ न माँ’: 4 साल का मासूम रोज पूछता है सवाल, बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीट-पीटकर मार डाला था

बांग्लादेश में हुई हिंदू विरोधी हिंसा ने कई घरों के चिरागों को उनसे छीन लिया। मंदिर से लेकर घरों तक में तोड़फोड़-आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। जहाँ हिंदू महिला या लड़की मिलीं उनसे रेप हुआ। जहाँ हिंदू आदमी मिला उसे मौत के घाट उतार दिया गया

इन सबके बीच न जाने कितने बच्चे अनाथ हुए और कितनी औरतें विधवा हुईं…जतन साहा भी उसी सूची में शामिल एक नाम हैं जो इस्लामी कट्टरता का शिकार होने के बाद अपने पीछे अपने चार साल के मासूम बेटे आदित्य और पत्नी को छोड़ गए हैं।

बेटा बार-बार माँ के सामने दोहराता है- “जब तक पापा नहीं आएँगे मैं खाना नहीं खाऊँगा, बताओ न वो कब आएँगे…।” माँ के पास इतनी हिम्मत नहीं है कि बच्चे को बता सकें कि उसके पापा अब नहीं लौटने वाले क्योंकि उन्हें तो उन कट्टरपंथियों ने कुचल दिया जो सैंकड़ों की तादाद में सिर्फ हिंदुओं को ही मारने निकले थे।

डेली स्टार से बात करते हुए नम आँखों से आदित्य की माँ लकी राणा साहा ने कहा,”मैं उसे कैसे बोलूँ कि उसके पापा अब नहीं आएँगे, कभी उसके साथ खाना नहीं खाएँगे, कभी उसके साथ नहीं खेलेंगे या वो कभी उसे गले नहीं लगाएँगे…एक तरफ तो मैं खुद अपने पति की इस तरह हुई मौत से सदमे में हूँ, दूसरा मुझको मेरे बेटे की चिंता खाई जा रही है जो अपने पिता की गैर मौजूदगी में बीमार पड़ रहा है।”

लकी की चिंता औ दुविधा दोनों जायज हैं। आखिर कब उन्होंने सोचा होगा कि घर से बाहर निकले उनके पति मार दिए जाएँगे। 15 अक्टूबर को दुर्गा पूजा थी। सब तैयारी में जुटे थे। लेकिन आतताई भीड़ सैंकड़ों हिंदुओं का काल बन वहाँ आ रही है ये किसने अंदाजा लगाया होगा। जो- जो उस दिन नोआखली के मंदिरों में मिला..सब पर प्रहार हुआ..पार्थ दास जैसे शव भी मिले जिनके शरीर के भीतर से अंगों को नोच लिया गया था।

उस दिन आदित्य के पापा के साथ भी कुछ यही हुआ था। वो अपनी बहन के घर दुर्गा पूजा वाले दिन नरोत्तमपुर गए थे जो बेगमगंज उपजिले में पड़ता था। जतन की बहन मुक्तारानी ने बताया, “जतन बहुत ही सीधा और खुशमिजाज था। वो मेरे घर हर साल दुर्गा पूजा पर आता था और ये पहली दफा था कि अपनी बीवी-बच्चों के साथ वो मेरे पास आया। लेकिन पूजा की खुशी मेरे भाई के साथ मर गई। मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा होगा। मैं यकीन नहीं कर पा रही कि मैं दोबारा अपने भाई को देख नहीं पाऊँगी।‘

जतन के बहनोई उत्पल साहा ने उस खौफनाक दिन क्या हुआ था इस बारे में सारी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को 3 बजे जुमे वाले दिन करीब 2000 लोगों ने हगनीपुर गर्ल्स स्कूल पर हमला बोला था। कुछ देर बाद उन्होंने इस्कॉन को निशाना बनाया और फिर वो बिजॉय सर्बोजोनी दुर्गा मंदिरों पर टूट पड़े।

हमले के समय जतन भी इस्कॉन मंदिर के दरवाजे पर थे। पहले हमलावरों ने उनका पाँव तोड़ा। जिसके बाद जतन फौरन घर आ गए और बर्फ की सिंकाई लेकर दोबारा हालात देखने बाहर निकले। इसी दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनको पकड़ा और जोर-जोर से मारने लगे।

उत्पल कहते हैं, “हमने एंबुलेंस बुलाई लेकिन कोई नहीं आया। हम उसे प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहाँ से उसे बेगमगंज उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स में भर्ती कर दिया गया। मगर उसकी हालत बिगड़ती रही डॉक्टरों ने उसे नोआलखी ले जाने को कहा, जहाँ पहुँचते-पहुँचते वो दम तोड़ चुका था।” उत्पल को समझ नहीं आ रहा था कि वो किस चीज पर हैरान हों। एक तरफ उनके साले का शव था और दूसरी तरफ इस्लामी आतताइयों के आगे लाचार हुई कानून व्यवस्था।

वह कहते हैं कि करीब 3 घंटे कोई पुलिसकर्मी घटनास्थल पर नहीं आया। बार-बार पुलिस इन्चार्ज व कई अधिकारियों को फोन किया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वह पूछते हैं, “हम आज भी डरे हैं कि आखिर कब तक पुलिस हमारी सुरक्षा में तैनात रहेगी। क्या कोई दावा कर सकता है कि ऐसी घटना दोबारा नहीं घटेगी।” वहीं जतन की पत्नी पूछती हैं, “मेरे पति हमारे परिवार में अकेले कमाने वाले थे। हमलावरों ने बेरहमी से उन्हें मारा। अब मेरा और मेरे बच्चे का भविष्य तो काले अंधकार में चला गया है न। मुझको कुछ समझ नहीं आ रहा कि आखिर मैं बच्चे को कैसे पालूँगी। मैं बस चाहती हूँ कि मेरे पति के हत्यारे सबसे कड़ी सजा पाएँ। ”

महिला टीचर की सड़ी-गली लाश से ओडिशा में उबाल: दावा- सेक्स रैकेट का खुलासा करने वाली थीं, रात को स्कूल में रूकते थे BJD मंत्री

ओडिशा के कालाहांडी जिले में ममिता मेहर नाम की एक 24 वर्षीय शिक्षिका 8 अक्टूबर को लापता हो गई थी। 19 अक्टूबर को एक निर्माणाधीन स्टेडियम में शिक्षिका की बुरी तरह सड़ी-गली लाश मिली। शव को पहचानना मुश्किल था, लेकिन परिजनों ने पीड़िता के गहनों और अन्य सामानों के आधार पर उसकी शिनाख्त की। हालाँकि, शव की पहचान की पुष्टि होनी बाकी है और जाँच के लिए डीएनए सैंपल को लैब में भेजा जा चुका है।

जिस निर्माणाधीन स्टेडियम में शव मिला है, वह उसी संस्थान का है, जहाँ मृत शिक्षिका पढ़ाती थी। शव मिलने के बाद राज्य में सियासी बवाल खड़ा हो गया है। इस घटना के आरोप बीजेडी मंत्री और उसी क्षेत्र के विधायक दिब्यशंकर मिश्रा पर लग रहे हैं। भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों ने राज्य में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

इस घटना को बलांगीर की बीजेपी सांसद संगीता सिंह देव ने शर्मनाक करार दिया है। ममिता बलांगीर जिले के एक गाँव की रहने वाली थीं और पड़ोस के कालाहांडी जिले में महालिंग सनशाइन स्कूल में शिक्षिका थीं।

दिब्यशंकर मिश्रा पर क्या हैं आरोप

राज्य के मंत्री और बीजेडी के नेता दिब्यशंकर मिश्रा पर सेक्स रैकेट में शामिल होने से लेकर शिक्षिका को लापता और हत्या करने तक के आरोप लगाए जा रहे हैं। मिश्रा उसी जूनागढ़ के विधायक हैं, जहाँ पर महालिंग स्कूल है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अक्टूबर को महालिंग स्टेडियम में खुदाई करके लाश को बाहर निकाला गया था। वहाँ के स्थानीय नेताओं का कहना था कि मंत्री दिब्यशंकर मिश्रा अक्सर स्कूल में आते थे और रात में भी यहीं रूकते थे।

ओडिया दैनिक सांबाडा से बात करते हुए कालाहांडी जिला परिषद की अध्यक्ष नमितारानी साहू ने आरोप लगाया, “कई मंत्री इस स्कूल का दौरा करते थे। दिब्यशंकर मिश्रा हर हफ्ते इस स्कूल का दौरा करते थे। इस निर्वाचन क्षेत्र में तीन अन्य कॉलेज हैं, उन्हें हर बार एक ही संस्थान का दौरा क्यों करना पड़ा? वह इस संस्था को सरकारी सहायता भी दे रहे थे। वह रात में भी यहीं रुके थे।”

उल्लेखनीय है कि स्कूल की शिक्षिका ममिता मेहर महालिंग संस्था द्वारा संचालित गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन भी थीं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अचानक गायब होने से पहले ममिता स्कूल में चल रहे कथित सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करने के काफी करीब पहुँच गई थीं।

पुलिस कस्टडी से भागा मुख्य आरोपित पकड़ा गया

स्कूल टीचर ममिता मेहर के गायब होने के मामले में टिटिलागढ़ पुलिस की हिरासत से 17 अक्टूबर को भागे मुख्य आरोपित गोबिंदा साहू को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपित के भागने के बाद राजनीतिक दलों और लोगों ने किया विरोध किया था। बाद में साहू को 19 अक्टूबर को बलांगीर जिले के बांगोमुंडा ब्लॉक के बुद्धिपदार से गिरफ्तार किया गया था।

टिटिलागढ़ पुलिस बैरक से साहू के भागने के बाद ओडिशा पुलिस की तीखी आलोचना हुई थी। उसके भागने की घटना ने सत्ताधारी पार्टी पर लग रहे आरोपों को मजबूती दी थी।

गौरतलब है कि गोबिंदा साहू उसी स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी का अध्यक्ष है, जहाँ ममिता काम करती थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस दिन वह लापता हुई थी उस दिन साहू ने ममिता को मिलने के लिए बुलाया था। आरोप है कि साहू और कुछ अन्य व्यक्ति कथित तौर पर महिला कर्मचारियों का यौन शोषण कर रहे थे और ममिता ने इसका पर्दाफाश करने की धमकी दी थी।

इसके अलावा मुख्य आरोपित साहू कथित तौर पर मंत्री दिब्यशंकर मिश्रा के करीबी था। वह सरकारी परियोजनाओं में शामिल था और उसे MPLAD और MLALD फंड से अनुदान भी मिला था।

हत्या के बाद शव को जलाया फिर दफनाया

ममिता के लापता होने के मामले में उसके परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद से मामले की जाँच चल रही थी। 19 अक्टूबर को पुलिस महालिंग संस्थान के स्वामित्व वाले निर्माणाधीन स्टेडियम में एक जगह खुदाई की तो जमीन से बुरी तरह झुलसा शव बरामद किया गया।

शव बुरी तरह से सड़ा-गला हुआ था और उसकी पहचान नहीं हो सकती थी, जिसके बाद उसे फोरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया गया था। हालाँकि, मौके पर मौजूद ममिता के परिवार ने शव पर मिली सोने की चेन, हैंडबैग और कुछ अन्य सामान से उनकी पहचान कन्फर्म की है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य आरोपित गोबिंद साहू ने ममिता की हत्या की बात कबूल कर ली है।

ममिता की हत्या साजिश के तहत की गई थी। हत्या में शामिल एक कार (OD08K 1002) को पुलिस ने जब्त कर लिया है। गोबिंद साहू के साथ बहस के बाद कथित तौर पर ममिता की हत्या कर दी गई थी। शव को जला दिया गया था और बाद में खोदे गए गड्ढे में दफन कर दिया गया था। 14 अक्टूबर को संदिग्ध कार को जब्त कर लिया गया था। कार में से ममिता की पायल और पेट्रोल का एक जार मिला था।

अभी जेल में ही गुजरेंगी आर्यन खान की रातें, SRK के लाडले को नहीं मिली जमानत: पेश हुए थे दो-दो बड़े वकील

ड्रग्स मामले में शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान को बुधवार (20 अक्टूबर, 2021) को भी जमानत नहीं मिली। स्पेशल NDPS (स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम) अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। आर्यन खान के अलावा अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामेचा को भी स्पेशल जज वीवी पाटिल की अदालत ने जमानत नहीं दी। इन सभी को NCB (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने 3 अक्टूबर को जहाज पर पार्टी करते हुए ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था।

आर्यन खान की तरफ से दो-दो बड़े अधिवक्ता सतीश मानशिंदे और अमित देसाई अदालत में अपनी-अपनी टीम के साथ पेश हुए। NCB ने अदालत में कुछ ऐस चैट्स जमा किए हैं, जो ड्रग्स से सम्बंधित थे। एक अपकमिंग बॉलीवुड अभिनेत्री के साथ भी उनके ड्रग्स को लेकर चैट सामने आए हैं। NCB ने कोर्ट में इन व्हाट्सएप्प चैट्स को पेश किया है। 14 अक्टूबर को ही कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इधर जावेद अख्तर ने कहा है, “हाई प्रोफाइल होने की कीमत बॉलीवुड को चुकानी पड़ रही है। जब आप हाई प्रोफाइल होते हैं तो किसी आप पर पत्थर फेंकने में, कीचड़ उछालने में सबको मजा आता है। आप कुछ भी नहीं हैं तो पत्थर फेंकने में किसको मजा आएगा?” आर्यन खान अभी मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एनसीबी को बॉलीवुड की एक उभरती हीरोइन के साथ आर्यन खान की चैट मिली है। इसमें नशे को लेकर बात हो रही है।

गीतकार जावेद अख्तर ने कहा, “यह वह कीमत है जो फिल्म उद्योग को हाई प्रोफाइल होने के लिए चुकानी पड़ती है।” आर्यन खान का सपोर्ट अब तक शुनील शेट्टी, फराह खान, हंसल मेहता, सलमान खान और जॉनी लीवर समेत कई लोग कर चुके हैं। वैसे यह कोई पहली बार नहीं है जब ड्रग्स के मामले में जावेद अख्तर ने बॉलीवुड का बचाव किया है। इससे पहले जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ड्रग्स का एँगल सामने आया था तब भी उन्होंने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी।

‘इस्लाम ही एकमात्र समाधान है’: कानपुर में बिल की पर्ची से भी मजहबी प्रसार, IAS इफ्तिखारुद्दीन की भी यही भाषा

उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के कुछ कारोबारी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से जिहादी विचारधारा फैला रहे हैं। ये लोग इस्लामी धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाले IAS इफ्तिखारुद्दीन से प्रेरित हैं। बता दें कि इफ्तिखारुद्दीन कानपुर मंडल के कमिश्नर और ‘राज्य परिवहन निगम’ के अध्यक्ष रहे हैं। कानपुर के ये दुकानदार ग्राहकों को जो बिल थमा रहे हैं, उस पर लिखा है – ‘Islam Is The Only Solution’, अर्थात इस्लाम ही एकमात्र समाधान है।

जब आप दुकानों पर कुछ खरीदने जाते हैं तो आपको उस खरीददारी का बिल दिया जाता है। कई फुटकर किराना दुकानदार बिल नहीं देते, लेकिन कई बड़े प्रतिष्ठानों में बिल दिया जाता है। जब आप कुछ महँगा या इलेक्ट्रॉनिक समान खरीदते हैं तब तो बिल दिया ही दिया जाता है। कानपुर के ये दुकानदार इसी बिल का इस्तेमाल कर के इस्लाम का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। बिल पर इस्लामी संदेश लिख दिया जाता है।

हाल ही में इस तरह का एक मामला सामने आया है, जिसके बाद इसकी जाँच के आदेश दिए गए हैं। पुलिस आयुक्त ने लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) को ऐसे मामलों का पता करने के लिए लगाया है। बिल की जो पर्ची सोशल मीडिया पर विरल हो रही है, उसमें उस पर व्यापारिक प्रतिष्ठान के नाम के स्थान पर कारोबारी ने अपना मोबाइल नंबर दे रखा है और समान की सूची और कुल दाम के बाद इस्लाम को लेकर संदेश लिखा है।

बता दें कि इसी नारे का इस्तेमाल IAS इफ्तिखारुद्दीन भी करते रहे हैं। पुलिस आयुक्त असीम अरुण ने जानकारी दी कि मामले को संज्ञान में लेकर उक्त व्यक्ति की पहचान कर ली गई है। उन्होंने कड़ी कार्रवाई का आश्वास्य भी दिया। ऐसे अन्य लोगों का पता लगाया जा रहा है। हालाँकि, फिलहाल पर्ची पर दर्ज मोबाइल नंबर स्विच ऑफ है। ये पर्ची मेस्टन रोड स्थित एक रबड़ दुकानदार की है, जिसने इसके विरल होने के बाद अपना मोबाइल नंबर बंद कर रखा है।

पता चला है कि ये कारोबारी ‘हसीन एन्ड कंपनी इंडिया’ का है, जो कानपुर में गाय, भैंस और बकरी की चमड़ी दुकानदारों को सप्लाई करता है। इसका पता मेस्टन रोड का बिसाती बाजार दिया गया है। इस कंपनी में 5-10 कर्मचारी हैं। ये ड्राई रबर कंटेन्ट और गए, भैंस व बकरे की कच्ची चमड़ी व इससे बने लेदर की डिलीवरी करता है। कानपुर में इस तरह का मामला सामने आने के बाद पुलिस के का खड़े हो गए हैं।

‘तलवार रास’ में 200 राजपूत वीरांगनाओं ने दिखाया कौशल, सुलगे लिबरल मुहर्रम से करने लगे तुलना

गुजरात के राजकोट में 200 से अधिक राजपूत महिलाओं ने मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को तलवारबाजी कौशल का प्रदर्शन कर सबके दिलों को जीत लिया। राजकोट में पाँच दिवसीय ‘तलवार रास’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें राजपूत महिलाओं ने न सिर्फ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि अपने तलवार कौशल का प्रदर्शन भी किया। समाचार एजेंसी एएनआई ने इसका एक वीडियो शेयर किया है। इसमें एक महिला अपनी आँखों पर पट्टी बाँधकर कुछ महिलाओं की पीठ पर चढ़कर तलवारबाजी करती दिख रही हैं।

‘तलवार रास’ में राजपूत महिलाएँ पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। तलवार के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक नृत्य करती हैं। राजकोट के शाही परिवार की राजकुमारी कादंबरी देवी ने कहा, “तलवार रास पिछले बारह वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। हर साल एक नया समूह होता है और महिलाएँ पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेती हैं।”

कादंबरी देवी ने आगे कहा, “तलवार एक देवी की तरह है और इसलिए हम शस्त्र पूजा करते हैं।” यह आयोजन राजपूत महिला योद्धाओं के इतिहास को जीवित रखने और यह संदेश देने के लिए है कि आज की महिलाएँ उतनी ही शक्तिशाली हैं जितनी वे सालों पहले थीं।

तलवार रास की लिबरलों ने मुहर्रम से तुलना की

‘तलवार रास’ महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लिबरल को पसंद नहीं आया। उन्होंने इसकी तुलना मुहर्रम से करते हुए इसे ‘संघी आतंकवाद’ तक कह डाला।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने कहा, “यह मुश्किल हो सकता है। क्या इसे उच्च जाति का वर्चस्व कहें, या महिला सशक्तिकरण या केवल संघी आतंकवाद?”

सतीश पाटिल नाम के यूजर ने सवाल किया, “तलवार का युग चला गया, अब शिक्षा का युग है। डिग्री हासिल करने वाली राजपूत महिलाओं का प्रतिशत कितना है?”

वहीं, जितेश नाम के एक यूजर ने कहा, “मेरी किताब में बिना आँखों पर पट्टी बाँधे तलवार बाजी मुहर्रम के जुलूस के समान है।”

मोहम्मद शाहिद ने पूछा, “यदि अन्य मजहब की महिलाओं यही कार्य करतीं तो क्या होता?”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने टिप्पणी की, “उन्हें कलम/किताबें चाहिए तलवार नहीं। वरना ऐसे ही घूँघट में जिंदगी कट जाएगी।”

विडंबना यह है कि इस कार्यक्रम की आलोचना करने वाले लोगों को विदेशी ‘आत्मरक्षा‘ तकनीकों को बढ़ावा देने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पारंपरिक भारतीय कला और संस्कृति को देखकर वे भयभीत हो जाते हैं। बता दें कि गुजरात की लोक परंपराओं के विद्वान डॉ. उत्पल देसाई के अनुसार, तलवार रास राजपूत युद्ध नायकों की याद में बनाया गया था, जो भुचर मोरी (18 जुलाई, 1591) के ऐतिहासिक युद्ध में मारे गए थे।

पुराने वीडियो से काट-छाँट पर सुदर्शन के एडिटर इन चीफ ने चेताया, ट्रोल्स कर रहे थे सुरेश चव्हाणके की पिटाई का दावा

सुदर्शन न्यूज के एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाणके ने एक यूट्यूब चैनल की वीडियो का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए चेतावनी दी है कि वो उनकी पुरानी वीडियो को फर्जी दावों के साथ न शेयर करें, वरना उन पर कानूनी कार्रवाई होगी। इस वीडियो में दावा किया गया था कि उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।

वीडियो को ‘ऑनलाइन न्यूज़ इंडिया’ ने शेयर करते हुए इस पर पूरा प्रोग्राम बनाया था। इसमें तमाम सोशल रिएक्शन दे देकर ये प्रमाणित करने का प्रयास हुआ है कि वाकई सुरेश चव्हाणके की पिटाई हुई है। वीडियो के होस्ट शिवम, सुदर्शन न्यूज़ को गोदी मीडिया बोलते हैं और आरोप लगाते हैं कि सुदर्शन न्यूज सिर्फ हिंदू-मुस्लिम करता है और गोदी मीडिया के एंकर की हैसियत बस इतनी है कि कोई भी उन्हें मार-पीट दे।

अब बता दें कि ये वीडियो और इस वीडियो को लेकर किए गए हालिया दावे पर खुद न्यूज़ चैनल के एडिटर इन चीफ ने बात रखी। उन्होंने कहा कि ये वीडियो फर्जी है और उनके साथ ऐसा कोई प्रसंग घटित नहीं हुआ और अगर इसके बावजूद किसी ने वीडियो शेयर की तो उसकर विरुद्ध कार्रवाई होगी।

उन्होंने लिखा, “यह खबर पूर्णतः फर्जी है। वर्षों पुराने प्रदर्शन के वीडिओ को काट छाँट कर किसानों के बीच का बताकर इसे वायरल किया जा रहा है। मेरे जीवन में ऐसा कोई प्रसंग कभी नहीं घटा हैं। अभिसार शर्मा का इस चैनल पर शो है। मालिक सलमान हैं। जो भी इसे फैलाएगा उस पर क़ानूनी कार्रवाई करूँगा।”

उसी दावे के साथ अन्य वीडियो

उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन न्यूज इंडिया द्वारा बनाया गया वीडियो अकेला नहीं है जिसमें सुरेश चव्हाणके को लेकर ऐसे दावे हैं। सोशल मीडिया पर तमाम वीडियोज ऐसे मिले हैं जिसमें बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने सुरेश चव्हाणके को पीटा। वीडियो को कॉन्ग्रेस नेता कमालुद्दीन अंसारी ने भी झूठे दावे के साथ शेयर किया है।

कब का वीडियो है?

ये वीडियो 1 नवंबर 2020 को आयोजित हुए जनता मार्च का है। इसका आह्वान निकिता तोमर की हत्या के बाद किया गया था। उस दौरान कई लोग, पत्रकार, नेता और आमजन मार्च में आए थे। उस मार्च को सुदर्शन न्यूज चीफ ने ही आयोजित किया था। इसका मकसद सिर्फ जागरुकता फैलाना था कि आखिर कैसे हिंदू लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। उस समय भी यही वीडियो वायरल हुई थी जिसमें पुलिस सुरेश चव्हाणके को मार्च से अपने साथ ले जा रही थी। वहीं सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे थे कि आखिर दिल्ली पुलिस ने इतनी सक्रियता शाहीन बाग के समय क्यों नहीं दिखाई थी।

असम की पत्रिका में माँ दुर्गा की आपत्तिजनक तस्वीर: संपादक और फोटोग्राफर को गुवाहाटी हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत

माँ दुर्गा की आपत्तिजनक तस्वीर प्रकाशित करने के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने ‘नंदिनी’ पत्रिका की संपादक मैनी महंता और फोटोग्राफर यूनिक बोरा को अंतरिम जमानत दे दी है। ये दोनों गिरफ़्तारी से पहले गुवाहाटी उच्च-न्यायालय से अंतरिम राहत पाने में कामयाब रहे। आरोप है कि इन्होंने असम की पत्रिका में माँ दुर्गा की छेड़छाड़ की हुई प्रतीकात्मक तस्वीर प्रकाशित की, जिससे हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

असमी पत्रिका ‘नंदिनी’ में ये तस्वीर प्रकाशित की गई थी। इसके बाद पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज की थी। दोनों आरोपित अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट पहुँचे, जहाँ से उन्हें राहत मिल गई। न्यायाधीश हितेश कुमार शर्मा की पीठ ने कहा कि मामला दर्ज हो गया है और सभी उपलब्ध सबूतों की जाँच होने तक और सुनवाई के लिए अगली तारीख मुकर्रर होने तक इन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की जाती है।

‘प्रागज्योतिषपुर आईका संघ’ और के अध्यक्ष एम कैलाश और महासचिव अपन चौधरी के अलावा ‘होजई डिस्ट्रिक्ट यूथ कमिटी’ ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। कोर्ट ने इस मामले की केस डायरी तलब की थी, लेकिन पुलिस अभी इसे पेश नहीं कर पाई। कोर्ट ने जाँच अधिकारी से पूछा कि क्या FIR के आधार पर कोई केस दर्ज किया गया है या नहीं। दोनों आरोपितों को इस शर्त पर अग्रिम जमानत मिली है कि वो जाँच में सहयोग करेंगे और पुलिस उन्हें जब भी पूछताछ के लिए बुलाएगी, वो हाजिर होंगे।

साथ ही उन्हें जाँच प्रक्रिया में बाधा न पहुँचाने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करने के लिए भी कहा गया है। साथ ही उन्हें इस मामले से जुड़े ऐसी किसी भी व्यक्ति को धमकी देने या मनाने से भी मना किया गया है, जो पुलिस या अदालत के समक्ष इससे जुड़े तथ्य रखने वाले हैं। दोनों से 10,000 रुपए का बॉन्ड भी भरवाया गया। याचिककर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता एम विश्वास गुवाहाटी हाईकोर्ट में पेश हुए। इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर, 2021 को होगी।

स्वर्ण जड़ित होगा तेलंगाना के यदाद्री मंदिर का शिखर, RBI से 125 किलो सोना खरीदेगी सरकार: मार्च 2022 से श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन

तेलंगाना सरकार ने यदाद्री में मंदिर के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से 125 किलोग्राम शुद्ध सोना खरीदने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को संवाददाताओं से कहा कि श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में विमान गोपुरम (मंदिर का शिखर) को स्वर्ण जड़ित करने के लिए लगभग 60 से 65 करोड़ रुपए की जरूरत होगी।

यदाद्री दौरे पर पहुँचे मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा, “आकलन के मुताबिक मंदिर को 125 किलोग्राम सोने की जरूरत है। हमने इसे पूरा करने का फैसला किया है। इसकी कीमत 60 से 65 करोड़ रुपए होगी। सरकार इस काम को करने की क्षमता रखती है। हमने भारतीय रिजर्व बैंक से सोना खरीदने का फैसला किया है। हम धन जुटाने का काम पूरा करने के बाद आरबीआई से सोना खरीदेंगे ताकि हमें शुद्ध सोना मिल सके।”

उन्होंने कहा कि पहले दानदाता के रूप में अपने परिवार की ओर से वह 1.16 किलोग्राम सोने के लिए राशि दान देंगे और इसी तरह कई मंत्री और विधायक भी इसके लिए आगे आए हैं। उन्होंने बताया कि कई दानदाता सोना दान करने का वादा लेकर आगे आए हैं। श्रममंत्री मल्ला रेड्डी खुद 1 किलो सोना और उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग 1 किलो सोना दान करेंगे।

वहीं नागरकुनरूल के विधायक मर्री जनार्दन रेड्डी 2 किलो सोना दान करेंगे, जबकि भास्कर राव कावेरी सीड्स की ओर से 1 किलो सोना देंगे। मंदिर को फिर से खोलने के लिए मुहूर्त को अंतिम रूप देने वाले प्रख्यात द्रष्टा चिन्ना जेयर स्वामी ने अपने पीठम से मंदिर के लिए 1 किलो सोना समर्पित किया है। सांसद रंजीत रेड्डी, एमएलसी के नवीन कुमार, शंभीपुर राजू, विधायक ए गाँधी, एम हनुमंत राव, एम कृष्ण राव और केपी मेडचल और विवेक आनंद 6 किलो सोना दान करने के लिए आगे आए हैं। ये सभी रंगारेड्डी जिले के हैं।

केसीआर ने कहा कि मंदिर के फिर से खुलने से आठ दिन पहले, चिन्ना जीयर स्वामी की देखरेख में 1,000 ऋत्विकों के साथ सुदर्शन यज्ञ किया जाएगा। चिन्ना जीयर स्वामी ने व्यक्तिगत रूप से हाथ से लिखा हुआ मुहूर्त पत्र मंदिर की कार्यकारी अधिकारी गीता को सौंपा और उसे देवता के चरण कमलों में रखने के लिए कहा। यह मंदिर 28 मार्च, 2022 को जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

बता दें कि इस मंदिर के निर्माण पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री का विशेष फोकस है। इस मंदिर को लेकर सीएम की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यदाद्री भुवनगिरि जिले में लॉकडाउन के दौरान भी मंदिर को भव्य रूप दिए जाने का काम होता रहा। इस मंदिर की कुल लागत करीब 1200 करोड़ बताई जा रही है। पुनर्निर्माण कार्य दो चरणों में पूरा किया जा रहा है।

कहा जाता है कि आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद तेलंगाना में तिरुपति जैसा कोई मंदिर नहीं है। यही कारण है कि राज्य सरकार इसे ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में पूरा कर रही है। इस मंदिर से बड़ी संख्या में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीदें जाहिर की गई है।

बाढ़-भूस्खलन से उत्तराखंड में 46 और केरल में 37 लोगों की मौत CM धामी ने कहा- स्थिति गंभीर, मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की सहायता

भारी बारिश की वजह से आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण उत्तराखंड और केरल में स्थिति गंभीर बनी हुई है। बाढ़ और भूस्खलन से उत्तराखंड में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कम-से-कम 11 लोग लापता और सैकड़ों लोग पलायन के लिए मजबूर हुए हैं। वहीं, केरल में मृतकों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। बाढ़ और भूस्खलन से अकेले दक्षिण केरल में 27 लोगों की मौत हुई है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को कुमाऊँ का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। कुमाऊँ राज्य के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि राज्य भर में ‘भारी क्षति’ हुई है और सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा। मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों के लिए प्रत्येक जिलाधिकारी को 10-10 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इसके पहले धामी ने मृतकों को परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की थी।

उत्तराखंड के गोमुख ट्रेक में फँसे करीब 25 से 30 ट्रेकर्स को राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों ने सोमवार को देर रात बचाया था। वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों से 300 से अधिक लोगों को बचाया है। एनडीआरएफ ने राज्य में 15 टीमों को तैनात किया है। उधमसिंह नगर में छह टीमें, उत्तरकाशी, चमोली में दो-दो टीमें और देहरादून, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में एक-एक टीम तैनात हैं।

वहीं, केरल सरकार ने राज्य के पूर्वी पहाड़ियों में भूस्खलन के आशंका के चलते इलाके के लोगों को निकालना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने नदी घाटियों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, 24 घंटों में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा वर्षा की संभावना पर रेड अलर्ट, 6 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश की संभावना पर ऑरेंज अलर्ट और 6 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश की संभावना पर येलो अलर्ट जारी किया जाता है।