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WHO ने कहा- हम देशों के नाम पर नहीं रखते वायरस का नाम, स्वास्थ्य मंत्रालय ने मीडिया समूहों को चेताया

दुनिया भर में इस समय कोरोना की दूसरी लहर सबसे घातक साबित हो रही है। इस दौरान भारत में कोरोना के सबसे अधिक केस सामने आ रहे हैं। इस तबाही के लिए कोरोना वायरस के नए वेरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसे विश्व भर में बड़ी चालाकी से लेफ्ट मीडिया द्वारा इंडियन वेरिएंट के नाम से पुकारा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दस्तावेज का हवाला देते हुए इंडियन वेरिएंट शब्द का उपयोग किया गया था। हालाँकि, इसके बाद डब्ल्यूएचओ ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने ट्वीट में साफ किया है कि वह किसी वायरस का नाम किसी देश के नाम पर नहीं रखता है। उन्होंने लिखा, ”विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी वायरस या उसके वेरिएंट का नाम उन देशों के नाम के आधार पर नहीं रखता जहाँ से वे सबसे पहले आए हैं। इस संदेश के बाद डब्ल्यूएचओ ने भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय समाचार एंजेसी के साथ कुछ समाचार समूहों को भी टैग किया है।”

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस ट्वीट को आधार बनाकर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ”ध्यान दें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नोवल कोरोना वायरस के B.1.617 वेरिएंट को भारतीय (Indian) वेरिएंट नहीं कहा है। उसे विश्व स्वास्थ्य संगंठन ने वेरिएंट ऑफ कंसर्न कहा था।” भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को बिना आधार का बताया है, जिन्होंने B.1.617 म्यूटेंट स्ट्रेन के लिए इंडियन वेरिएंट शब्द का उपयोग किया है।

बता दें कि इन मीडिया रिपोर्ट्स में खबर दी गई थी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वेरिएंट को ‘वेरिएंट ऑफ ग्लोबल कंसर्न’ कहा था। वहीं, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने 32 पेज के दस्तावेज में भारतीय वेरिएंट शब्द का उपयोग नहीं किया है। वहीं, डब्ल्यूएचओ के ट्वीट पर लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ ने वायरस को चीनी वायरस कहने पर डर का इशारा भी किया है।

12 ऐसे उदाहरण, जब वामपंथी मीडिया ने फैलाया कोविड वैक्सीन के खिलाफ प्रोपेगेंडा, लोगों में बनाया डर का माहौल

इस समय देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले की अपेक्षा भारत अब रिकवरी की राह पर है। केंद्र और राज्य सरकारें अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने, ऑक्सीजन की सप्लाई और जरूरी दवाओं को मुहैया कराने का जीतोड़ प्रयास कर रही हैं।

केंद्र सरकार कोरोना की बेकाबू रफ्तार को काबू करने के लिए इस दिशा में सबसे सशक्त टीकाकरण अभियान चला रही है। इसके मद्देनजर मोदी सरकार ने COVID-19 वैक्सीन के निर्यात पर भी अंकुश लगाया है। साथ ही राज्यों को सीधे निर्माताओं से वैक्सीन खरीदने की अनुमति दी है।

सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद कोरोना महामारी के इस दौर में वामपंथी मीडिया झूठ को आधार बनाकर भ्रामक सूचनाएँ दे रहे हैं। हमारे पास 12 ऐसे उदाहरण हैं, जब वामपंथी मीडिया ने कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले अपने ऑनलाइन पोर्टल्स पर वैक्सीन को लेकर फैक न्यूज फैलाई और लोगों के बीच भय का माहौल पैदा किया।

1- ‘द प्रिंट’ ने कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी मिलने पर उठाया था सवाल

जनवरी 2021 में, कोरोना वैक्सीन को लेकर चल रही तमाम कवायद के बीच ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत में निर्मित COVID-19 वैक्सीन कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। इसको लेकर ‘द प्रिंट’ ने भारत की नियामक प्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक लेख प्रकाशित किया था।

द प्रिंट का लेख

2- द प्रिंट ने अपने लेख में कोवैक्सीन की स्वीकृति को ‘राजनीतिक जुमला’ कहा था

द प्रिंट में प्रकाशित एक अन्य लेख में डीसीजीआई द्वारा सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशिल्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सिन टीके को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी देने को ‘राजनीतिक जुमला’ के रूप में पेश किया था। उन्होंने लेख में टीके के दुष्प्रभाव के बारे में लिखा और लोगों में इसके प्रति भय का माहौल पैदा करने का प्रयास किया।

3- द प्रिंट ने वैक्सीन के प्रभाव पर जताया संदेह

जब भारत दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को शुरू करने के लिए तैयार था, तभी प्रिंट ने एक और लेख प्रकाशित किया। भारत की खतरनाक रिकवरी कॉकटेल शीर्षक से प्रकाशित यह लेख वैक्सीन की गुणवत्ता पर संदेह को लेकर था।

द प्रिंट

4- डॉक्टरों को कोवैक्सीन पर संदेह: द प्रिंट

द प्रिंट में प्रकाशित एक अन्य लेख में कहा गया था कि यहाँ तक कि डॉक्टरों को भी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन पर संदेह है।

5- नियामक समिति को वैक्सीन की मंजूरी देने के बारे में आश्वस्त नहीं किया: प्रिंट

प्रिंट ने यह दावा किया कि कोवैक्सीन टीके के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दिए जाने से एक दिन पहले, नियामक समिति को वैक्सीन की मंजूरी देने के बारे में आश्वस्त नहीं किया गया था।

6- द वायर ने लेख प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया कि दो टीकों की मंजूरी भारतीय विज्ञान को कलंकित करती है

वामपंथी प्रचार साइट द वायर ने भी उन लेखों को प्रकाशित किया, जिन्होंने टीके को लेकर भ्रामक सूचनाओं को बढ़ावा देने का काम किया। द वायर ने एक लेख प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था “भारत ने दो टीके प्राप्त किए हैं, लेकिन इसके नियामकों ने भारतीय विज्ञान को कलंकित किया है।”

द वायर

7- द वायर में प्रकाशित लेख कोवैक्सीन के परीक्षण डेटा के बारे में संदेह पैदा करता है

वायर ने अपने एक अन्य लेख में कोवैक्सीन के परीक्षण डेटा के बारे में संदेह पैदा किया। वायर द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित वैक्सीन को लेकर दुष्प्रचार करने वाला यह दूसरा लेख था।

8- द वायर ने की चीन से भारत की तुलना

द वायर ने अपने लेख में भारत की तुलना चीन से की। उसने लिखा, ”क्या भारत चीन के रास्ते पर चलना चाहता है, जहाँ कई टीकों का अस्तित्व है, लेकिन कोई विश्वास नहीं करता है।” इस लेख में भी उसने टीकों को लेकर सवाल उठाए।

9- द वायर ने भारत के COVID टीकों के आँकड़ों पर सवाल उठाया

टीकों को जनवरी 2021 के पहले सप्ताह में मंजूरी दी गई थी, लेकिन फरवरी के मध्य में भी द वायर ने टीकों के खिलाफ अपना दुष्प्रचार जारी ​रखा। 19 फरवरी को प्रकाशित एक लेख में वायर ने कहा कि अभी भी SARS-CoV-2 वेरिएंट के खिलाफ भारत के COVID टीकों के लिए प्रभावकारी डेटा की कमी थी।

10- वायर ने भारत के टीकाकरण अभियान पर संदेह व्यक्त किया

द वायर ने भारत के टीकाकरण अभियान पर भी संदेह जताया। उसने एक लेख में लिखा, ”टीकाकरण अभियान पर कोई सहमति नहीं थी फिर भी सरकार इस पर ​अडिग रही।” संक्षेप में वायर ने कहा कि टीकाकरण अभियान को तब तक नहीं शुरू किया जाना चाहिए, जब तक कि सभी विवादों को समाप्त नहीं कर दिया जाता।

11- कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी देने के बाद स्क्रॉल का डर आया सामने

एक अन्य वामपंथी पोर्टल स्क्रॉल.इन ने वैक्सीन को लेकर अफवाह फैलाने का काम किया। भारत द्वारा दो स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों बाद स्क्रॉल ने भारत के टीकाकरण अभियान को कम करने के लिए एक लेख प्रकाशित किया। इसमें कहा गया कि भारत आत्मनिर्भर वैक्सीन घोषित करने की जल्दबाजी में आग से खेल रहा है।

12- स्क्रॉल भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को लेकर सवाल उठाता है

स्क्रॉल ने अपने एक लेख में यह तर्क दिया कि भारत को एक “अनटेस्टेड टीका” नहीं खरीदना चाहिए, जब बेहतर सुरक्षा डेटा वाला एक सस्ता विकल्प उपलब्ध हो। यह भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के संदर्भ में था।

इजरायल पर हमास के जिहादी हमले के बीच भारतीय ‘लिबरल’ फिलिस्तीन के समर्थन में कूदे, ट्विटर पर छिड़ा ‘युद्ध’

इजरायल और हमास के बीच हफ्तों से जारी तनाव अब हिंसक हो चुका है। रातों-रात दोनों पक्षों के बीच हुए हमलों में मौत का आँकड़ा तेजी से बढ़ा है। ताजा अपडेट के मुताबिक, हमास ने इजरायल पर करीब 1000 रॉकेट दागे हैं।

बुधवार तक हमास (इजराइल इसे आतंकी संगठन मानता है) इजरायल पर लगातार रॉकेट छोड़ता रहा। इजरायल की आर्मी ने सोशल मीडिया पर ये जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “सेंट्रल और दक्षिणी इजरायल में लगातार रॉकेट दागे जा रहे हैं, बहुत हो गया, अब ये रुक जाना चाहिए।”

हमास ने तेल अवीव, एश्केलोन औ होलोन शहर पर सोमवार से लेकर बुधवार को रॉकेट फायर किए। इसमें से ज्यादातर रॉकेट इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम आयरन डोम ने रोक लिए, लेकिन कई रॉकेट आबादी वाले इलाकों में गिरकर फट गए। हमास ने इजरायल पर एक हजार से ज्यादा रॉकेट दागे।

इजरायल दुआ के साथ साथ भारत के लिए दवा भी भेज रहा है। इसी हफ्ते इजरायल ने भारत को बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स भेजा है। भारत स्थित इजरायल के राजदूत रोम मल्का ने अपने ट्वीटर अकाउंट के जरिए कहा था कि संकट के समय में इजरायल पूरी ताकत से भारत के साथ खड़ा है और भारत की मदद करते हुए इजरायल को गर्व महसूस हो रहा है।

अब जब इजरायल राष्ट्रीय संकट का सामना कर रहा है तो जहाँ भारतीयों की तरफ से इजरायल के साथ खड़े होने के मैसेज सामने आ रहे हैं, वहीं कुछ विपक्ष और वामपंथी ने इस्लामवादियों के साथ एक अलग रास्ता चुना है।

भारतीय ‘लिबरल’ फिलिस्तीन का समर्थन करते हैं

दिल्ली कॉन्ग्रेस के वीपी अली मेहदी ने बुधवार (मई 12, 2021) को यहूदी राष्ट्र के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। मेहदी ने इजरायल के विनाश की कामना करते हुए कहा कि अल्लाह इसे नष्ट कर देगा। मेहदी ने ट्वीट किया, “अल्लाह इजरायल को नष्ट कर देगा इंशाल्लाह #अल्लाहुअकबर।”

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एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के सहयोगी इजरायल की निंदा करने के लिए भारत सरकार से आह्वान किया कि भारत हमेशा एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के विचार का समर्थन करता है।

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जारी संघर्ष के एक वीडियो को साझा करते हुए, ओवैसी ने कहा कि फिलिस्तीन को तब कोई रक्षक नहीं चाहिए जब उनके पास अल्लाह हों। ओवैसी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हमको किसी मुमालिक या बादशाह की जरूरत नहीं है फिलीस्तीन के लिए, हमारा अल्लाह हमारे लिए काफी है।”

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कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी भी फिलिस्तीन को बचाने के नारे लगा रहे हैं। एक हवाई हमले का वीडियो साझा करते हुए, निजामी ने ट्वीट किया, “उनका खून इजरायल के हाथों में लगा है। हम नहीं भूलेंगे! #SavePalestine #PalestinianLivesMatter।”

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नफरत फैलाने के लिए कुख्यात शरजील उस्मानी ने अल-अक्सा मस्जिद की घटना के बाद लोगों को प्यूमा और एचपी जैसे ब्रांडों का बहिष्कार करने के लिए कहा है। सूची में सार्वजनिक रूप से कैटरपिलर बुलडोजर पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी कहा गया है क्योंकि इसका उपयोग फिलिस्तीनी घरों और खेतों के विध्वंस के लिए किया जाता है।

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इतना ही नहीं, उस्मानी #DeathToOccupation अभियान में भी शामिल हुए, जो कश्मीर और फिलिस्तीन में विदेशी कब्जे से मुक्ति के लिए कहता है।

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बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अपने ट्वीट में इजरायल को एक रंगभेद और आतंकवादी राज्य के रूप में चिह्नित किया।

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भारत के चुनाव आयोग के साथ पंजीकृत होने का दावा करने वाली टीपू सुल्तान पार्टी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कुछ दशकों पहले तक इज़राइल एक राष्ट्र के रूप में मौजूद नहीं था और ट्विटर पर #BoycottIsrael अभियान चला रहा है।

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इस बीच, लगातार हवाई हमलों और दंगों के तहत तेल अवीव और लोद जैसे घनी आबादी वाले इजरायल में स्थिति गंभीर बनी हुई है।

अफगानिस्तान: रमजान में 15 आत्मघाती हमलों और 200 बम ब्लास्ट में गई 255 नागरिकों की जान, 500 घायल

अफगानिस्तान में रमजान के महीने की शुरुआत के बाद से अब तक तालिबान द्वारा 15 आत्मघाती और दर्जनों अन्य हमले किए गए हैं। यह जानकारी मंगलवार (मई 11, 2021) को अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने दी। मंत्रालय के अनुसार 13 अप्रैल को शुरू हुए रमजान की इस अवधि में 200 विस्फोटों और 15 आत्मघाती बम विस्फोटों में कुल 255 नागरिक मारे गए। इस दौरान 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

टोलोन्यूज के मुताबिक, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मंगलवार को कहा, “मैं सभी सुरक्षा बलों को धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने 800 से अधिक घटनाओं को रोका और 800 से अधिक आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” टोलोन्यूज द्वारा प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, पिछले महीने (13 अप्रैल से 12 मई) के दौरान नागरिक मृत्यु की संख्या में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रविवार रात तालिबान ने घोषणा की कि वे ईद के त्योहार के लिए तीन दिवसीय युद्ध विराम का पालन करेंगे। बाद में सोमवार को, अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी सभी अफगान बलों को ईद के दौरान संघर्ष विराम का पालन करने का निर्देश दिया। अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि ज़ल्माय ख़लीज़ाद ने मंगलवार को तालिबान और अफगान सरकार द्वारा ईद के त्योहार के दौरान देश में युद्ध विराम को बनाए रखने की घोषणाओं का स्वागत किया था।

खलीलजाद ने ट्वीट किया, “मैं तालिबान और अफगान सरकार द्वारा ईद संघर्ष विराम का पालन करने की घोषणाओं का स्वागत करता हूँ। हाल के हफ्तों में हिंसा भयावह रही है और अफगान लोगों ने इसकी कीमत चुकाई है।”

वहीं तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट कर कहा कि नेरख जिले के पुलिस मुख्यालय, इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट और बड़ी संख्या में आर्मी बेस पर कब्जा जमा लिया गया है। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि हमने दुश्मनों के कई सैनिकों को मार दिया है। इसके अलावा कई लोग जख्मी हुए हैं और कई लोगों को हमने जिंदा अगवा कर लिया है।

सैनिकों के तमाम हथियारों, गोला बारुदों और सैन्य वाहनों को भी कब्जे में ले लिया है। अफगानिस्तान में रमजान महीने के दौरान ही तालिबान की ओर से की गई हिंसा में 255 नागरिकों की मौत हुई है। इसके अलावा 500 लोग जख्मी हुए हैं।

शशि थरूर ने फिर फैलाया झूठ, लिखा- ‘अंडमान में कोरोना से हर रोज 4-5 मौतें’: PIB ने खोली पोल

पूरा देश इस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रहा है। महामारी के इस दौर में सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें वायरल हो रही हैं जिन्हें लोग आँख बंद करके शेयर कर रहे हैं। हालाँकि इनमें से कई खबरें फर्जी भी होती हैं। ऐसे में इन्हें शेयर करने से पहले इस बात पर गौर करना बहुत जरूरी है कि कौन सी खबर सही है और कौन सी फर्जी। ऐसी ही एक खबर अंडमान को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी ट्विटर पर इस खबर को शेयर किया है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, ”अंडमान में कोरोना की गंभीर स्थिति को लेकर चिंतित हूँ। जीबी पंत अस्पताल में हर रोज 4-5 मौतें हो रही हैं। 4 लाख लोगों के लिए केवल 50 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। लोगों में लक्षण दिखने के बाद भी टेस्टिंग नहीं हो रही है।” हालाँकि ये खबर कितनी सच है आइए जानते हैं-

क्या है इस खबर की सच्चाई?

पीआईबी के फैक्ट चेक विभाग ने इस खबर की सच्चाई बताई है। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये खबर पूरी तरीके से गलत है। पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट करते हुए बताया है कि शशि थरूर ने जो ट्वीट किया है, उसमें फैक्ट्स गलत हैं।

क्या है सही तथ्य

पीआईबी के मुताबिक अंडमान में हर 10 लाख लोगों में सबसे ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। वहीं दूसरी लहर में कुल 16 लोगों की मौत हुई है। यहाँ रिकवरी रेट भी सबसे ज्यादा है जो कि 96 फीसदी है।

पीआईबी द्वारा सच्चाई बताने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह सुनकर खुशी हुई। द्वीप पर मेरे सोर्स सरकार के कर्मचारी हैं, जिन्होंने मुझे इन समस्याओं की तरफ ध्यान आकर्षित करवाने की भीख माँगी थी। वे अपनी पहचान उजागर होने से डरते हैं, इसलिए मैं उन्हें आगे आने के लिए नहीं कह सकता। मैं आशा करता हूँ कि मेरे सोर्स गलत थे।”

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की मौत की झूठी खबर फैलाई थी। शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा था, “पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के गुजर जाने से मैं बेहद दुःखी हूँ। मैं उनके साथ अपनी कई सकारात्मक बातचीत को याद करता हूँ। एक बार उन्होंने और दिवंगत केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुझे BRICS की बैठक के लिए मॉस्को जाने वाली संसदीय समिति का नेतृत्व करने को कहा था।”

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं सुमित्रा महाजन को NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी ‘भावपूर्ण श्रद्धांजलि’ देते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक क्षति करार दिया था। हालाँकि, अधिकतर ने बाद में अपने ट्वीट्स डिलीट कर लिए।

‘सामना’ में रानी अहिल्या बाई की तुलना ममता बनर्जी से देख भड़के परिजन, CM उद्धव को पत्र लिख जताई नाराजगी

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना ‘महान महिला शासक’ रानी अहिल्या बाई होलकर से किए जाने के बाद रानी के वंशजों में गुस्सा है। लेख को पढ़ने के बाद उनके एक परिजन श्रीमंत भूषण सिंह राजे होलकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा है।

पत्र में राउत की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ये बेहद शर्मनाक है कि एक राष्ट्रीय नेता की तुलना आजकल के राजनेताओं से की जाए, वो भी टुच्चे फायदों के लिए। होलकर ने बताया कि अहिल्याबाई ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और जनता की सेवा में लगाया, उनकी तुलना एक ऐसी नेत्री से नहीं हो सकती जो राजनीति के लिए अपने लोगों पर अत्याचार करे।

पत्र में उन्होंने लिखा की ऐसी तुलना सिर्फ और सिर्फ वैचारिक क्षमता उजागर करती है। किसी को भी पहले अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए और बाद में लोगों को उसका मूल्य तय करने देना चाहिए। 

संजय राउत का विश्लेषण

संजय राउत ने अपने संपादकीय में ममता बनर्जी को अहिल्याबाई होलकर के समतुल्य रखकर कॉन्ग्रेस के विपक्षी पार्टी होने पर कई सवाल उठाए थे। ऐसी तुलना करके राउत ने बताना चाहा था कि ममता बनर्जी एक उभरती हुई विपक्षी नेता है। 

बता दें कि इससे पहले संजय राउत विपक्षी नेता के तौर पर शरद पवार का नाम ले चुके हैं। उनका कहना था कि यूपीए को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अच्छे से दिशा दिखा पाएँगे।

अहिल्या बाई होलकर

उल्लेखनीय है कि शिवसेना के मुखपत्र में जिन अहिल्याबाई होलकर की तुलना तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से की गई, वो एक महिला शासक थीं। उन्हें राजमाता या महारानी अहिल्याबाई होलकर भी कहा जाता था। वह न केवल एक योद्धा थीं, बल्कि पढ़ी लिखी, कई भाषा की जानकार और बोलियों में निपुण थीं। महेश्वर में 30 साल रहते हुए उन्होंने खुद को जनसेवा में समर्पित कर दिया था। इसके अलावा औद्योगीकरण को बढ़ावा और  धर्म शब्द का प्रसार करने का काम भी रानी अहिल्या द्वारा किया गया था।

सौम्या के बेटे ने इजरायल को दिलाई मोशे की याद: इस्लामी आतंक ने दोनों से छीने अपने

इजरायल में रह रही भारतीय महिला सौम्या संतोष की फलस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास के रॉकेट हमले में मौत पर शोक व्यक्त करते हुए इजरायली राजदूत रॉन माल्क ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले में अपने माता-पिता को गँवाने वाले इजरायली बच्चे मोशे को याद किया।

सौम्या पिछले 7 साल से इजरायल में रहकर एक बुजुर्ग महिला की देखरेख करती थीं। केरल के इडुक्की में उनके पति और 9 साल का बेटा रहता है। मंगलवार (11 मई) को जब सौम्या अपने पति से वीडियो कॉल पर बात कर रही थीं, उसी समय हमला हुआ।

बाद में इजराइल के राजदूत रॉन माल्क ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए सौम्या की मौत की पुष्टि की। माल्क ने घटना पर दुख प्रकट करते हुए मुंबई आतंकी हमले में बचे मोशे को याद किया और कहा कि उनका मन सौम्या के बेटे अडोन के लिए व्यथित है।

उन्होंने कहा, “मैंने हमास के आतंकवादी हमले की शिकार हुईं सौम्या संतोष के परिवार से बात की। मैंने उनकी दुर्भाग्यपूर्ण क्षति के लिए दुःख व्यक्त किया और इजराइल की ओर से अपनी संवेदना व्यक्त की। पूरा देश उनके जाने का शोक मना रहा है और हम उनके लिए यहाँ हैं।”

मॉल्क ने कहा, “मेरा दिल उनके 9 साल के बेटे अडोन के लिए दुखी है, जिसने इतनी कम उम्र में अपनी माँ को खो दिया है। अब उसे उनके बिना बड़ा होना पड़ेगा। यह हमला मुझे छोटे मोशे की याद दिलाता है, जिसने 2008 के मुंबई हमलों के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया था। ईश्वर उन्हें शक्ति और साहस दे।”

कौन है मोशे जिसका इजरायली राजदूत ने किया जिक्र

26 नवंबर 2008 को जब मुंबई आतंकी हमला हुआ, उस समय इजरायली बच्चा मोशे होल्त्जबर्ग मात्र 2 साल का था। उसके माता पिता नरीमन हाउस में एक सांस्कृतिक केंद्र चलाते थे। लेकिन 26 नवंबर को रात करीब पौने नौ बजे चार आतंकियों ने नरीमन हाउस पर हमला किया और इजरायली नागरिकों को बंधक बना लिया। 

आतंकियों ने उस दिन जिन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी उनमें मोशे के माता-पिता भी शामिल थे। आतंकियों ने मोशे के पिता गैवरिएल होल्त्जबर्ग और माँ रिवका को उसके सामने ही गोली मार दी थी। लेकिन मोशे अपनी भारतीय आया सैंड्रा सैमुएल के कारण बच गया। सैंड्रा ने ही मोशे को उस कमरे से उठाया था जहाँ उसके माता-पिता की हत्या हुई थी।

सैंड्रा मोशे के रोने की आवाज सुनकर जब स कमरे में पहुँची तो उसे खून से सनी लाशों के बीच रोता पाया। सैंड्रा ने उसे चुपचाप उठाया और वहाँ से भागने में कामयाब रहीं। इसके बाद मोशे को उसके नाना-नानी को सौंप दिया गया।

मुंबई आतंकी हमले में अपने माता-पिता के मारे जाने के 10 साल बाद मोशे जनवरी 2018 में भारत आया था और इस दौरान वह मुंबई के उस नरीमन हाउस भी गया। पीएम मोदी ने दिसंबर 2019 में मोशे के नाम एक खत लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोशे की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है।

DRDO के 1.50 लाख ऑक्सीकेयर सिस्टम की खरीद को PM CARES ने दी मंजूरी, ₹322.5 करोड़ होंगे खर्च

पीएम केयर फंड ने डीआरडीओ की तरफ से तैयार किए गए ऑक्सीकेयर सिस्टम को मंजूरी दे दी है। डीआरडीओ ने बुधवार (12 मई 2021) को इस बात की जानकारी दी। इसके मुताबिक जल्द ही इसकी सप्लाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पीएम केयर्स फंड ने डीआरडीओ के विकसित किए ऑक्सीकेयर सिस्टम के 1 लाख 50 हजार यूनिट्स के खरीद की मंजूरी दे दी है। इसकी कीमत 322.5 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) के मुताबिक, यह एक SpO2 आधारित ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम है, जो आक्सीजन को नियंत्रित करता है, जो महसूस किए SpO2 स्तर के आधार पर मरीज तक ऑक्सीजन पहुँचाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना संकट काल में देश के कई बड़े शहरों को ऑक्सीजन की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ऑक्सीकेयर सिस्टम की खरीद का फैसला राहत भरा है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह सिस्टम खरीदने का यह फैसला लिया गया है। पीएम मोदी ने अधिकारियों को ज्यादा मामलों वाले राज्यों में इन ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स को जल्द से जल्द पहुँचाने का आदेश दिया है।

मालूम हो कि इस डील के तहत NRBM मास्क के साथ 1 लाख मैन्युअल और 50 हजार ऑटोमैटिक ऑक्सीकेयर सिस्टम खरीदे जा रहे हैं। DRDO ने जानकारी दी है कि इस सिस्टम को बेंगलुरु स्थित डिफेंस बायो-इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रो मेडिकल लैबोरेट्री (DEBEL) ने ऊँचाई पर तैनात सैनिकों के लिए तैयार किया था। बताया जा रहा है कि यह सिस्टम फील्ड पर ऑपरेशन्स को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है और मजबूत है।

बता दें कि डीआरडीओ के कोविड ड्रग 2-deoxy-D-glucose (2-DG) को भी हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इस दवा के तीसरे फेज के ट्रायल के बाद यह परिणाम प्राप्त हुआ कि दवा की सहायता से कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों के उपचार में सहायता मिली, साथ ही संक्रमितों में अतिरिक्त ऑक्सीजन की निर्भरता भी कम हुई है।

एंटी कोविड ड्रग 2-डिऑक्सी-D-ग्लूकोज या 2-DG को डीआरडीओ की लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एण्ड एलाइड साइंस (INMAS) ने डॉ. रेड्डी लैब के साथ मिलकर बनाया है। इस दवा के उपयोग से कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों में गंभीर लक्षणों के बाद भी शीघ्रता से सुधार देखने को मिला और कई मरीजों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट भी निगेटिव आई। यह दवा पाउडर के रूप में उपलब्ध होगी, जिसे पानी में घोलकर लिया जा सकेगा।

चढ़ता प्रोपेगेंडा, ढलता राजनीतिक आचरण: दिल्ली के असल सवालों को मुँह चिढ़ाती केजरीवाल की पैंतरेबाजी

अरविन्द केजरीवाल द्वारा केंद्र सरकार से वैक्सीन का फॉर्मूला सार्वजनिक करने की माँग पर आई अधिकतर प्रतिक्रियाएँ बताती हैं कि लोग उन्हें पढ़ा-लिखा जानते हैं, इसलिए यह आशा करते हैं कि वे तर्कपूर्ण बातें करेंगे। ऐसी आशा भारतीय जनमानस के अटूट धैर्य की परिचायक है। मुझे केजरीवाल की माँग से अधिक लोगों की ऐसी प्रतिक्रियाएँ आश्चर्यचकित करती हैं, क्योंकि करीब 7 वर्षों से देखने के बावजूद यदि समाज का एक वर्ग उनसे ऐसी आशा करता है तो वह केजरीवाल के बारे में कम और उस वर्ग के बारे में अधिक बताता है।  

यदि उतना पीछे नहीं जा सकते तो एक वर्ष पीछे ही चले जाएँ और चीनी वायरस से संक्रमण की पहली लहर के समय दिल्ली में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी मजदूरों के साथ केजरीवाल और उनकी सरकार का व्यवहार याद करें। किस तरह की साजिश रचकर उन मजदूरों को उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर पहुँचा दिया गया था। केंद्र विरोधी मुख्यमंत्रियों द्वारा अपने प्रदेश में रहने वालों प्रवासियों के पलायन की शुरुआत इन्हीं केजरीवाल ने करवाई थी।  

पहली लहर में ही जब दिल्ली के हालात बेकाबू हो गए तब भी टेस्ट की संख्या बढ़ाने का काम केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद ही हो पाया था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब दिल्ली की खराब परिस्थिति में हस्तक्षेप करके ITBP द्वारा अस्पताल बनवाया तो यही केजरीवाल उस अस्पताल का क्रेडिट लेने पहुँच गए और उद्घाटन भी कर आए थे। चीनी वायरस के संक्रमण की पहली लहर से शुरू हुआ उनका यह सफर अभी तक चल रहा है। बीच में दिल्ली को होर्डिंग से पाट कर कोरोना पर काबू पाने का दावा भी कर लिया गया। 

दूसरी लहर में तो उन्होंने और उनकी पार्टी के लोगों का प्रोपेगेंडा लगातार ऊपर और राजनीतिक आचरण लगातार नीचे जाता रहा। कभी वे टिकरी बॉर्डर पर कोविड प्रोटोकॉल तोड़ रहे किसानों के साथ खड़े होकर उन्हें मजबूत करते दिखाई दिए तो कभी प्रधानमंत्री के साथ हो रही मुख्यमंत्रियों की मीटिंग में बार-बार जम्हाई लेते हुए। उनकी इन जम्हाई वाली तस्वीरों को उनकी पार्टी के लोगों ने यह कहकर फैलाया कि पढ़ा-लिखा मुख्यमंत्री ऐसा ही करता है। हद तो तब हो गई जब वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की एक मीटिंग का सीधा प्रसारण करते हुए पाए गए। प्रधानमंत्री के टोकने पर उन्होंने माफी माँगी, लेकिन किसी ने उनसे नहीं पूछा कि केंद्र-राज्य संबंधों में ऐसे राजनीतिक आचरण की आवश्यकता क्यों आन पड़ी? 

यह प्रश्न न पूछा जाना ही अरविन्द केजरीवाल जैसे नेताओं को एक झूठा आत्मविश्वास देता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं। चीनी वायरस की दूसरी लहर में उनके आचरण और प्रोपेगेंडा का एक ट्रेंड यह रहा है कि जैसे ही उन्हें लगता है कि उनसे उनकी सरकार की कारगुजारियों पर प्रश्न किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है, वे तुरंत एक माँग उठा देते हैं। दिल्ली में जो ऑक्सीजन संकट उत्पन्न हुआ उसे लेकर दिल्ली के अस्पतालों से उठने वाली ऑक्सीजन की माँगों पर केजरीवाल का तरीका साफ झलक रहा था।  लगभग हर अस्पताल ने न्यूज़ एजेंसी को वक्तव्य देने शुरू किए कि ‘बस अब एक घंटे या आधे घंटे का ऑक्सीजन ही बचा है’। 

ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी, अस्पताल और दिल्ली सरकार के बीच की बातें अब दिल्ली उच्च न्यायलय में हो रही अनवरत सुनवाई का हिस्सा बन चुके हैं। जैसे-जैसे तथ्य सामने आते गए, केजरीवाल और उनकी सरकार के कारनामे उजागर होते गए, उनकी ओर से नई-नई माँगें उठती रहीं। कभी उन्होंने कहा कि 976 टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है तो कभी बताया कि 700 टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। जब ऑक्सीजन ऑडिट की बातें शुरू हुईं तो उन्होंने तुरंत यह मुद्दा छेड़ दिया कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन मैत्री के तहत वैक्सीन और देशों को क्यों दिया? 

उनके एक विधायक के घर ऑक्सीजन की जमाखोरी को लेकर उच्च न्यायालय ने नोटिस भेजा तो उनकी सरकार के वकील ने न्यायालय से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार को आदेश देकर रेमडेसिवीर इंजेक्शन के निर्यात पर रोक लगवाए। बिना यह जाने कि उसका निर्यात पहले से ही बंद है। जब इसी वकील से न्यायालय ने पूछा कि ओडिशा के राउरकेला से जब सभी राज्य अपने-अपने ऑक्सीजन का कोटा उठवा रहे थे, तब दिल्ली सरकार की ओर से कोई इंतज़ाम क्यों न हुआ तो एक नई माँग उठा दी गई कि न्यायालय केंद्र सरकार को आदेश देकर ऑक्सीजन के टैंकर की सुरक्षा बढ़वाए। केंद्र से मिले रेमडेसिविर इंजेक्शन की संख्या और राज्य द्वारा बताई गई संख्या में अंतर को लेकर आज तक दिल्ली सरकार से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है।  

केजरीवाल ऑक्सीजन ऑडिट का विरोध कर चुके थे। जब सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन ऑडिट की बात की तो उन्होंने दिल्ली के लिए मिलने वाली वैक्सीन की संख्या को लेकर विवाद शुरू कर दिया। जब 18 से 44 वर्ष वर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण की शुरआत का समय आया, तब उन्होंने बयान दिया कि हम अपने 12 से 18 साल के बच्चों को लेकर चिंतित हैं क्योंकि तीसरी लहर में वे संक्रमित होनेवाले हैं। ऐसे दर्जनों पैंतरे हैं जिन पर केजरीवाल से प्रश्न नहीं किए गए हैं और यही बात उनसे बार-बार ऐसे पैंतरे करवाती है। इसी का असर है कि ऐसी तमाम माँगों के बाद अब उन्होंने वैक्सीन के फॉर्मूले को सार्वजनिक करने की माँग उठा दी है। इस माँग के पीछे तर्क यह है कि और कम्पनियाँ उत्पादन करेंगी तो वैक्सीन की कमी नहीं होगी।  

जो समस्याएँ मुख्यधारा में किसी को दिखाई न दे रही हों, उन्हें लेकर तूफ़ान खड़ा करना इस समय केजरीवाल का एकमात्र राजनीतिक दर्शन बन चुका है। उद्देश्य चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध हो या उल्टी-सीधी बातें करके यह साबित करना कि वे कुछ कर रहे हैं, अरविन्द केजरीवाल इस समय जिस रास्ते पर चल रहे हैं, आने वाले समय में उनकी पहचान एक पढ़े-लिखे पर छिछले राजनेता की होगी और यह पहचान आज के भारत में किसी भी महत्वाकांक्षी राजनेता के लिए सही नहीं है।

ISIS क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन नहीं, बल्कि एक वैश्विक आतंकी गिरोह: UNSC में भारत ने रखी कार्रवाई की माँग

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि इस्लामिक स्टेट केवल एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन नहीं है बल्कि एक वैश्विक गिरोह है, जिससे संबद्ध संगठन दुनिया भर में सक्रिय हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि-राजनीतिक समन्वयक आर रविंदर ने कहा कि आतंकवादी कृत्यों की जवाबदेही तय करने और आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से ही इस संकट के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सकता है।

Da’esh/ISIL (UNITAD) के अपराधों की जवाबदेही तय करने के लिए बने जाँच दल पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में उन्होंने कहा, ‘‘इराक और लेवंत में इस्लामिक स्टेट (ISIL) ने लोगों पर अमानवीय अत्याचार किए हैं। आईएसआईएल के भयावह अपराधों का 39 भारतीय नागरिक भी शिकार हुए हैं।’’

बता दें कि आईएसआईएल को आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) भी कहा जाता है, यह हिंसक विचारधारा वाला एक जिहादी समूह है जो खुद को खलीफा कहता है और सभी मुसलमानों पर मजहबी अधिकार का दावा करता है।

रविंदर ने कहा कि आईएसआईएल ने इराक और सीरिया में अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में नरसंहार, अत्याचार, बलात्कार, गुलामी कराने और अपहरण जैसे कृत्यों को अंजाम दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, इस्लामिक स्टेट को सिर्फ एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यह एक वैश्विक गिरोह है, जिसके हमारे पड़ोस सहित दुनिया भर में संबद्ध आतंकवादी संगठन हैं।’’

रविंदर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का यह मानना है, ‘‘आतंकवाद के खिलाफ हमारी संयुक्त लड़ाई की विश्वसनीयता केवल आतंकवादियों द्वारा अंजाम दिए भयावह एवं अमानवीय कृत्यों की जवाबदेही तय करके और उन देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके ही मजबूत हो सकती है, जो इन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।’’

वहीं, इराक और लेवंत में इस्लामिक स्टेट द्वारा अंजाम दिए जाने वाले अपराधों की जवाबदेही तय करने वाले संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल के प्रमुख एवं विशेष सलाहकार करीम असद अहमद खान ने परिषद से कहा कि अपनी स्वतंत्र आपराधिक जाँच के आधार पर, यूएनआईटीएडी के पास आईएसआईएल द्वारा यज़ीदी के खिलाफ एक धार्मिक समूह के रूप में नरसंहार करने के ‘स्पष्ट एवं पुख्ता सबूत’ हैं।

रविंदर ने कहा कि आईएसआईएल से संबद्ध आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों ने मानवता के खिलाफ भयावह अपराधों को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि आईएसआईएल द्वारा जिन अपराधों को अंजाम दिया गया है, उसकी जवाबदेही तय करना इराक में दीर्घकालिक शांति हासिल करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।