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ISIS क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन नहीं, बल्कि एक वैश्विक आतंकी गिरोह: UNSC में भारत ने रखी कार्रवाई की माँग

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि इस्लामिक स्टेट केवल एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन नहीं है बल्कि एक वैश्विक गिरोह है, जिससे संबद्ध संगठन दुनिया भर में सक्रिय हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि-राजनीतिक समन्वयक आर रविंदर ने कहा कि आतंकवादी कृत्यों की जवाबदेही तय करने और आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से ही इस संकट के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सकता है।

Da’esh/ISIL (UNITAD) के अपराधों की जवाबदेही तय करने के लिए बने जाँच दल पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में उन्होंने कहा, ‘‘इराक और लेवंत में इस्लामिक स्टेट (ISIL) ने लोगों पर अमानवीय अत्याचार किए हैं। आईएसआईएल के भयावह अपराधों का 39 भारतीय नागरिक भी शिकार हुए हैं।’’

बता दें कि आईएसआईएल को आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) भी कहा जाता है, यह हिंसक विचारधारा वाला एक जिहादी समूह है जो खुद को खलीफा कहता है और सभी मुसलमानों पर मजहबी अधिकार का दावा करता है।

रविंदर ने कहा कि आईएसआईएल ने इराक और सीरिया में अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में नरसंहार, अत्याचार, बलात्कार, गुलामी कराने और अपहरण जैसे कृत्यों को अंजाम दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, इस्लामिक स्टेट को सिर्फ एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यह एक वैश्विक गिरोह है, जिसके हमारे पड़ोस सहित दुनिया भर में संबद्ध आतंकवादी संगठन हैं।’’

रविंदर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का यह मानना है, ‘‘आतंकवाद के खिलाफ हमारी संयुक्त लड़ाई की विश्वसनीयता केवल आतंकवादियों द्वारा अंजाम दिए भयावह एवं अमानवीय कृत्यों की जवाबदेही तय करके और उन देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके ही मजबूत हो सकती है, जो इन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।’’

वहीं, इराक और लेवंत में इस्लामिक स्टेट द्वारा अंजाम दिए जाने वाले अपराधों की जवाबदेही तय करने वाले संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल के प्रमुख एवं विशेष सलाहकार करीम असद अहमद खान ने परिषद से कहा कि अपनी स्वतंत्र आपराधिक जाँच के आधार पर, यूएनआईटीएडी के पास आईएसआईएल द्वारा यज़ीदी के खिलाफ एक धार्मिक समूह के रूप में नरसंहार करने के ‘स्पष्ट एवं पुख्ता सबूत’ हैं।

रविंदर ने कहा कि आईएसआईएल से संबद्ध आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों ने मानवता के खिलाफ भयावह अपराधों को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि आईएसआईएल द्वारा जिन अपराधों को अंजाम दिया गया है, उसकी जवाबदेही तय करना इराक में दीर्घकालिक शांति हासिल करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

66 साल के शख्स की 16 बेगमें, 151 बच्चे, बताया- ‘पत्नियों को संतुष्ट करना ही मेरा काम’

जनसंख्या नियंत्रण वाले दौर में किसी इंसान के अगर 16 बेगमें (पत्नियाँ) और 151 बच्चे हों तो भला इसे क्या कहेंगे। जिम्बाब्वे के रहने वाले एक 66 वर्षीय शख्स मिशेक न्यंदोरो (Misheck Nyandoro) के 16 पत्नियाँ और 151 बच्चे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिम्बाब्वे के 66 वर्षीय मिशेक न्यानदोरो का दावा है कि वह 16 पत्नियाँ और 151 बच्चे होने के बावजूद वह कोई काम नहीं करते और उनकी फुलटाइम जॉब अपनी पत्नियों को संतुष्ट करना है।

मिशेक का कहना है कि उसकी बूढ़ी पत्नियाँ उसकी सेक्स ड्राइव को मैच नहीं कर पाती हैं। इसलिए उसे लगातार युवा महिलाओं से शादी करनी पड़ती है। 151 बच्चों के पिता का कहना है कि वह आगे भी इसी तरह अपना परिवार बढ़ाते रहेंगे। आने वाली सर्दियों में वह 17वीं शादी करने जा रहे हैं।

मिशेक की ख्वाहिश है कि मरने से पहले उनकी 100 पत्नियाँ और 1,000 बच्चे हों

पत्नियों को संतुष्ट करना ही मेरा काम: 151 बच्चों का पिता

मशोनालैंड सेंट्रल प्रांत के बायर जिले में रहने वाले मिशेख का कहना है कि उन्होंने अपने लिए एक शेड्यूल तैयार किया है और हर रात वह अपनी चार पत्नियों को संतुष्ट करते हैं। 

उन्होंने स्थानीय समाचार आउटलेट द हेराल्ड को बताया, “मैं अपने शेड्यूल के हिसाब से अपने बेडरूम में जाता हूँ। फिर अपनी पत्नी को संतुष्ट करता हूँ और अगले कमरे में चला जाता हूँ। यही मेरा काम है। मेरे पास इसके अलावा और कोई काम नहीं है।”

मिशेख 1983 में अनेक पत्नियों वाले व्यक्ति बने थे। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती, तब तक वह शादी करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सभी दुल्हनें अपने जीवन से बेहद खुश हैं और अभी कम से कम दो गर्भवती भी हैं।

द हेराल्ड के मुताबिक, मिशेक ने बताया कि 151 बच्चे होने के बावजूद मुझ पर कभी भी किसी तरह का दबाव नहीं पड़ा है। बल्कि इतने सारे बच्चे पैदा करने का मुझे फायदा ही हुआ है। ये सभी मुझे गिफ्ट और पैसे देते रहते हैं।

बता दें कि ये परिवार खेती के जरिए ही अपना भरण पोषण करता है। मिशेक के छह बच्चे जिम्बाब्वे की नेशनल आर्मी में नियुक्त हैं, 2 बच्चे पुलिस में काम करते हैं और 11 बच्चे अलग-अलग प्रोफेशन्स में हैं। वहीं, इनकी 13 बेटियों की शादी हो चुकी है। उनके 23 बेटों की शादी हो चुकी है, जिसमें से एक बेटे ने भी चार शादियाँ की हैं।

25 साल पहले ULFA ने कर दी थी पति की हत्या, अब असम की पहली महिला वित्त मंत्री

असम में पहली बार एक महिला वित्त मंत्री चुनी गई है। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी सरकार में वित्त विभाग 5 बार गोलाघाट से विधायक रह चुकी अजंता निओग को सौंपा। यह विभाग पिछली बार खुद हिमंता बिस्वा सरमा ने सर्बानंद सोनोवाल की सरकार में सँभाला था।

वित्त विभाग में पदभार सँभालने के बाद, निओग ने कहा कि मुख्यमंत्री सरमा ने सोमवार को शपथ लेने के बाद घोषणा की थी कि नई सरकार का लक्ष्य असम को अगले पाँच वर्षों में भारत के शीर्ष पाँच राज्यों में से एक बनाना है, और वह लक्ष्य के अनुसार काम करेंगी और योजना बनाएँगी। उन्होंने कहा कि सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में सरमा वित्त मंत्री थे और उन्होंने असम की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया।

निओग ने मीडिया से कहा, “सरमा ने वित्त विभाग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और राज्य के राजस्व में वृद्धि की। इसलिए, राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए उनके कार्यों को आगे बढ़ाने की मेरी जिम्मेदारी है।”

वित्त मंत्री के नए प्रभार से काफी उत्साहित है निओग

वित्त मंत्री के प्रभार के लिए चुने जाने के बाद निओग ने बताया कि ये उनके लिए ये बहुत ही हर्ष और गर्व की बात है। माननीय मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए उन्होंने बताया कि वो इसके लिए बहुत शुक्रगुज़ार हैं। पदभार सँभालने के बाद उन्होनें ये भी बताया की अभी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है कोविड-19 की इस महामारी को सँभालना है।

असम की वित्त मंत्री चुने जाने पर आलोचकों ने उठाए प्रश्न

अजंता निओग के निर्वाचन पर कई लोगों ने सवाल उठाते हुए इसे गलत ठहराया है क्योंकि उनके अनुसार उनको वित्त विभाग में ज़्यादा अनुभव नहीं है। अपने आलोचकों के लिए उन्होनें बोला की वो पहले पब्लिक वर्क्स विभाग में काम कर चुकी है और इससे उन्हें वित्त विभाग के लिए बेसिक समझ और ज्ञान प्राप्त हो चुका है। निओग ने कहा कि उन्हें यकीन है कि आगे वो काम करते हुए और भी काफी कुछ सीख जाएँगी।

असम की पहली महिला वित्त मंत्री है लॉ ग्रेजुएट

46 वर्षीय अजंता निओग ने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से लॉ में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की हैं। 1996 में उनके पति नागेन निओग की यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम (ULFA) द्वारा हत्या कर दी गई थी। इसके पश्चात भूतपूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने उन्हें राजनीति में आने का मौका दिया। तरुण गोगोई की सरकार में भी वो पब्लिक वर्क्स विभाग को भी सँभाल चुकी हैं। पिछली तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार में एक प्रभावशाली मंत्री (2001-2016), निओग ने सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होने के लिए मार्च-अप्रैल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी छोड़ दी थी।

5 बार असम से विधायक रह चुकी है अजंता निओग

अजंता निओग गोलाघाट से ही 5 बार विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं। 2001 में पहली बार उन्होंने विधानसभा में चुनाव लड़े थे और अपने विपक्षी उमीदवार को करीब 1000 मतों से परास्त किया था। उसके बाद से अब तक उन्होनें हर बार गोलाघाट से चुनाव जीते हैं और अब सबसे लम्बे समय से असम की महिला विधायक होने का गौरव भी उन्हें प्राप्त है। दिसंबर 2020 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वाइन की और अभी हाल ही में असम में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने कॉन्ग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बिटूपन सैकिया को 9,325 मतों के अंतर से हराया।

UP: न्यूज एंकर समेत 4 पत्रकार ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में गिरफ्तार, ₹55 हजार में कर रहे थे सौदा

उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी के बीच मेडिकल उपकरणों की कालाबाजारी करने वालों के ख़िलाफ़ यूपी पुलिस एक्शन में है। हाल में कानपुर में पुलिस ने ऑक्सीजन सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग करने के आरोप में पत्रकारों को पकड़ा है। एक आरोपित की पहचान अश्विन जैन के तौर पर हुई। वह कानपुर के लोकल न्यूज चैनल भारत ए टू जेड (Bharat A to Z) का एमडी/एंकर है।

यूपी पुलिस ने जैन की गिरफ्तारी की जानकारी ट्विटर पर साझा की है। इसमें बताया गया कि आरोपित एंकर को ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के लिए गिरफ्तार किया गया। उसके पास से पुलिस ने 10 सिलेंडर भी बरामद किए। 

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर के डीसीपी (क्राइम) सलमान ताज पाटिल ने कहा कि पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में क्राइम ब्रांच और पनकी पुलिस ने पत्रकारिता की आड़ में ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी करते 4 लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया, जिसमें एक भारत ए टू ज़ेड न्यूज़ चैनल का एमडी और एंकर अश्विनी जैन भी शामिल है।

न्यूज ट्रैक के मुताबिक बाकी आरोपितों की पहचान ऋषभ जैन, प्रदीप बाजपेयी, अभिषेक तिवारी के तौर पर हुई है। ये भी पत्रकारिता पेशे से जुड़े लोग हैं। इन सबके पास से 4 बड़े और 6 छोटे सिलेंडर बरामद हुए। इसके अलावा एक वैगनआर और पत्रकारों के पास से उनके आईकार्ड बरामद हुए। अब आगे की कार्रवाई हो रही है।

तस्वीर साभार: jantaserishta.com

डीसीपी सलमान ताज ने बताया कि ये लोग मेरठ से 2 माह पहले 80-90 ऑक्सीजन सिलेंडर लाए थे और हाल में उसे 55000 रुपए में बेच रहे थे। इनके पास छोटे सिलेंडर भी थे, जिन्हें 35 से 40 हजार में बेचा जा रहा था। डीसीपी ने कहा कि अब तक ये लोग 70-80 सिलेंडरों की कालाबाजारी कर चुके हैं। सारे सिलेंडर पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में डम्प किए जाते थे। मामले का खुलासा होने के बाद अब आगे की पड़ताल चल रही हैं। पनकी में ही इस संबंध में केस दर्ज हुआ है।

बंगाल: VHP ने ‘TMC प्रायोजित हिंसा’ पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति से लगाई गुहार, पत्र में लिखा, ‘उठाएँ प्रभावी कदम’

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा जारी हिंसा पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाई है। वीएचपी ने प्रभावी कदम उठाने की माँग करते हुए मंगलवार (11 मई) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की।

विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए पत्र में लिखा, ”पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों में ममता बनर्जी की पार्टी विजयी हुई है। लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है। बंगाल की जनता का यह निर्णय सबको स्वीकार है। यह भी सच है कि चुनाव के बाद विजयी होने वाली पार्टी अपने प्रदेश की सम्पूर्ण जनता के प्रति जिम्मेदार होती है और अपने प्रदेश में कानून और व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व उसका हो जाता है।”

ममता ने मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन’ की याद दिलाई

उन्होंने आगे लिखा, ”दुर्भाग्य से पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद वहाँ सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं एवं जिहादियों ने जिस प्रकार हिंसा का तांडव चला रखा है, उससे पूरा देश चिंतित है। चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने धमकियाँ दी थी कि केंद्रीय सुरक्षा बल तो केवल चुनाव तक है और चुनावों के बाद तो उन्हें ही सब देखना है। पश्चिमी बंगाल में अनियंत्रित राज्यव्यापी हिंसा पूर्वनियोजित है और ऐसा लगता है कि पुलिस एवं प्रशासन को कह दिया गया है कि वे इसकी अनदेखी करें। इस प्रकार से पश्चिमी बंगाल के न्यायप्रिय नागरिकों को दंगाइयों के हाथों में सौंप दिया गया है। यह सब मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन’ की याद दिलाता है।”

हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा

आलोक कुमार ने कहा कि इस हिंसा का बड़ा निशाना अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग ही बन रहे हैं। कूचबिहार से सुंदरवन तक घर जलाए जा रहे हैं।, दुकानें लूटी जा रही हैं और महिलाओं के साथ अभद्र व्यव्हार हो रहा है। भय के वातावरण में राज्य में हिंदू आबादी को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। खुलेआम विपक्ष के कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही है। इस हिंसा का एक सुनियोजित जिहादी पक्ष है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।

विहिप नेता ने कहा कि भारत का संविधान राज्य सरकारों को यह दायित्व सौंपता है कि वे अपने राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखें और अपने राज्य के सब लोगों को कानून का संरक्षण दें। पश्चिम बंगाल की सरकार इसमें विफल हो रही है। यह सब भारतीय संस्कृति और संविधान के सह-अस्तित्व के मूल्यों और कानून के शासन का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि ममता के पिछले दो शासनकाल में भी वहाँ का हिंदू समाज त्रस्त रहा है, लेकिन इस बार शासन काल का प्रारंभ जिस ढंग से हुआ है उससे पूरा देश यह समझ रहा है कि अगर इसी समय बंगाल के प्रशासन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो हो सकता है कुछ स्थानों पर हिंदू समाज आत्मरक्षा के लिए स्वयं कुछ उपाय करने पर मजबूर हो जाए। दोनों ही स्थितियाँ पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं।

हिंसा को तत्काल रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएँ राष्ट्रपति: कुमार

कुमार ने राष्ट्रपति कोविंद से हस्तक्षेप की गुहार लगाते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि राज्य में हिंसा को तत्काल रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ। कानून का शासन दोबारा स्थापित हो, दंगाइयों की त्वरित पहचान हो और जल्दी जाँच पूरी करके फास्ट ट्रैक न्यायालयों से उनको दंड मिले। दंगा पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए और उनको हुए नुकसान की शासन भरपाई हो। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे अपने संविधानप्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इस विषय में यथायोग्य कार्रवाई करने के आदेश दें।

बता दें कि इससे पहले भी विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हुए राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की थी। संगठन द्वारा जारी बयान में, विहिप ने कहा था कि राजनीतिक मतभेदों के बहाने राज्य में हिंसा, आगजनी और बर्बरता की घटनाओं ने न केवल देश को शर्मसार किया है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।

राज्य में मतगणना के दौरान प्रारंभ हुए अनेक प्रकार के अनवरत हमलों पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए विहिप के केंद्रीय महा-मंत्री मिलिंद परांडे ने कहा था कि बंगाल में हिंदू समाज भयाक्रांत है और जिनके पास राज्य की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है वे अपनी आँखें मूँदे बैठे हैं।

परांडे ने साथ में यह भी कहा था कि राज्य सरकार के उदासीन रवैए को गंभीरता से लेते हुए अब केंद्र सरकार भी यथोचित कार्रवाई करें। जहाँ सुरक्षा-बल तक सुरक्षित ना हों वहाँ सामान्य नागरिकों का क्या हाल होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है। वर्तमान शासन व राजनैतिक नेतृत्व द्वारा क्षुद्र राजनैतिक विद्वेष से अपने ही नागरिकों पर हो रहे भीषण अत्याचारों पर मूकदर्शक बन मुँह मोड़ लेना हिंसा को बढ़ावा देने से कम नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में हिन्दू समाज को भी अपनी रक्षा का पूर्ण अधिकार है, जिसका वह प्रयोग करेगा।

गौतम नवलखा को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, तलोजा जेल में बंद है भीमा-कोरेगाँव हिंसा का आरोपित

सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित गौतम नवलखा की डिफॉल्ट जमानत याचिका बुधवार (मई 12, 2021) को खारिज कर दी। उसने वैधानिक जमानत की गुहार लगाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने इस मामले में 26 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

नवलखा ने अपनी याचिका में कहा था कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 90 दिन की तय अवधि में चार्जशीट नहीं दाखिल की, इसलिए जमानत का आधार बनता है। उसने 19 फरवरी को हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नवलखा की 34 दिन के हाउस अरेस्ट को जेल में बिताई गई अवधि नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान नवलखा ने कहा था कि हाउस अरेस्ट की अवधि को हिरासत अवधि के रूप में गिनी जानी चाहिए। आदेश में कहा गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट उसकी नजरबंदी को पहले ही वैध बता चुकी है। लिहाजा उसे गिरफ्तारी की अवधि में नहीं जोड़ा जा सकता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आठ फरवरी को नवलखा की जमानत याचिका खारिज की थी। हाई कोर्ट में उसने एनआईए की विशेष अदालत के फैसले को को चुनौती दी थी। लेकिन हाई कोर्ट ने कहा था कि विशेष अदालत के फैसले में दखल देने का कोई उचित कारण दिखाई नहीं दे रहा।

गौतम नवलखा के खिलाफ जनवरी 2020 में दोबारा FIR फाइल की गई थी। उसने पिछले साल 14 अप्रैल को NIA के समक्ष सरेंडर किया था। उसे 25 अप्रैल तक 11 दिनों के लिए NIA की हिरासत में रखा गया। इसके बाद से वह नवी मुंबई के तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया है। 

पुलिस के आरोपों के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं ने 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एल्गार परिषद कार्यक्रम में कथित रूप से उत्तेजक और भड़काऊ भाषण दिए थे, जिनके कारण अगले दिन जिले के भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़की थी। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया था कि इस कार्यक्रम को कुछ माओवादी संगठनों का समर्थन प्राप्त था। इस मामले में कई अन्य कार्यकर्ता और वकील भी जेल में बंद हैं।

गला कटा, गुप्तांग में घाव: मुंबई में बलात्कार के बाद महिला की हत्या, शव नाले के पास मिला

मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मंगलवार (मई 11, 2021) को MTNL जंक्शन में नाले के पास एक महिला का शव बरामद हुआ। स्थानीय लोगों ने शव को देख फौरन पुलिस को सूचना दी। पड़ताल में पता चला की नाले में फेंकने से पहले महिला का रेप कर उसे बेहरमी से मारा गया था।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रारंभिक चिकित्सा रिपोर्ट में महिला का गला कटा पाया गया है। उसके गुप्तांग में काफी घाव मिले हैं। पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात आरोपितों के ख़िलाफ़ हत्या और बलात्कार की धाराओं में केस दर्ज किया है।

बीकेसी पुलिस थाने के हवाले से कहा गया, “अज्ञात लोगों के ख़िलाफ आईपीसी की धारा 376 और 302 के तहत दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जाँच से लगता है कि महिला एक सेक्स वर्कर थी और संभव हैं कि पैसों के चलते उसे मार दिया गया हो।” इस मामले में पुलिस ने टीम बनाकर जाँच शुरू कर दी है। इलाके के सीसीटीवी फुटेज चेक हो रहे हैं।

महिला पुलिस का रेप

बता दें कि मुंबई में इससे पहले एक और रेप की घटना ने तूल पकड़ा था। उस समय आरोपित कोई और नहीं बल्कि पुलिस अधिकारी स्वयं था। इस मामले में शिकायत एक महिला सब इंस्पेक्टर ने करवाई थी। डोंगरी थाने में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर के ख़िलाफ़ केस दर्ज करते हुए महिला ने बताया था कि एपीआई ने शादी का झाँसा देकर उसका कई बार रेप किया।

कुत्तों के साथ रेप के भी मामले

कुछ समय पहले मुंबई में घटिया ट्रेंड देखने को मिला था। इस ट्रेंड में चंद महीनों में 4 मामले सामने आए थे जब जानवरों के साथ रेप किया गया। मार्च 2021 में जहाँ इस मामले में सांताक्रुज के कलीना में 20-25 वर्ष का तौफीक अहमद कुतिया का रेप करते पकड़ा गया। वहीं जुहू में एक अहमद शाह भी गली में कुत्तों का रेप करते देखा गया। शाह ने खुद स्वीकारा कि वह 30 से ज्यादा कुत्तों का रेप कर चुका है। साल 2020 में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में नूरी नाम की कुतिया का रेप हुआ था और नेरुल रेलवे स्टेशन भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी

‘अल्लाह करेगा इजरायल को तबाह’: कॉन्ग्रेस नेता अली मेहदी के भीतर का निकला ‘उम्माह’

इजरायल-फलस्तीन संघर्ष के फिर से भड़कने के साथ ही दिल्ली कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष मेहदी हसन ने यहूदी देश के खिलाफ अपनी नफरत व्यक्त दिखाई है। मेहदी ने इजरायल के तबाह होने की कामना करते हुए कहा कि अल्लाह इसे बर्बाद कर देंगे।

मेहदी ने ट्वीट किया, अल्लाह इजरायल को तबाह कर देंगे इंशाअल्लाह #अल्लाहहूअकबर

स्रोत: ट्विटर

इजरायल के बर्बाद होने की दुआ वाले ट्वीट के साथ मेहदी ने एक रोती हुई अरबी महिला की तस्वीर शेयर की है, जिसके पीछे अल अक्सा मस्जिद है।

हमास के राकेट हमलों के बाद इजरायल-फलस्तीन के बीच तनाव बढ़ा

इजरायल के खिलाफ मेहदी का नफरत भरा ट्वीट उस समय आया है जब यहूदी राष्ट्र और फलीस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। खासतौर पर हमास द्वारा इजरायली शहरों को निशाना बनाकर मंगलवार शाम से बीच शुरू किए गए राकेट हमले के बाद से दोनों देशों के बीच माहौल तनावपूर्ण है।

इसके जवाब में, इजरायल ने गाजा पट्टी के अंदर फलस्तीनी आतंकी समूह हमास पर अपने हमले तेज कर दिए। इजरायली सुरक्षा बलों ने हमास द्वारा इजरायल के खिलाफ लगातार हमलों के जवाब में गाजा में लक्ष्यों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। मंगलवार को जवाबी कार्रवाई के दौरान, एक इजरायली हवाई हमले में हमास द्वारा नियंत्रित एक ऊँची रिहायशी और ऑफिस वाली इमारत को ध्वस्त कर दिया गया।

पिछले कई वर्षों के सबसे भीषण हवाई हमलों में गाजा में कम से कम 35 और इजरायल में पाँच लोगों की मौत हो गई।

इजरायल ने तेल अवीव और मध्य इजरायल को निशाना बनाकर मंगलवाल शाम किए गए रॉकेट हमलों को रोकने के लिए आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने ने इसका एक वीडियो जारी किया जिसमें आयरन डोम को फलस्तीनी रॉकेट को आसमान में ही नष्ट करते देखा जा सकता है।

यह हिंसा यरुशलम में हफ्तों से जारी तनाव का नतीजा है, जिसमें अल-अक्सा मस्जिद परिसर के आसपास इजरायली पुलिस और फलस्तीनी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। मस्जिद का निर्माण 35 एकड़ जमीन पर किया गया है, जिसे मुस्लिमों द्वारा हरम अल-शरीफ या पवित्र इबादतगाह के रूप में जाना जाता। यह यहूदियों द्वारा टेंपल माउंट के रूप में भी पूजनीय है।

‘हमारे साथ खराब काम हुआ’: टिकरी बॉर्डर गैंगरेप में योगेंद्र यादव से पूछताछ, कविता और योगिता भी तलब

टिकरी बॉर्डर के किसान प्रदर्शन स्थल पर पर बंगाल की युवती के साथ हुए दुष्कर्म मामले में झज्जर पुलिस ने कल (11 मई 2021) संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव से 2 घंटे तक पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि उन्होंने योगेंद्र यादव के अलावा योगिता और कविता नाम की लड़कियों को नोटिस भेजा था। इनमें से योगिता पुलिस के सवालों के जवाब देने थाने पहुँची। डीएसपी पवन ने बताया है है कि SIT गठित कर आरोपित अनूप और अनिल की तलाश की जा रही है।

बता दें कि बंगाल की 25 वर्षीय युवती की 30 अप्रैल को कोविड के कारण मृत्यु हुई थी। लगभग एक हफ्ते बाद यानी 8 मई को उसके पिता ने पुलिस में जाकर बताया कि उनकी बेटी का प्रदर्शनस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ। इस मामले मे पुलिस ने 6 लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

मृतका के पिता ने बताई 1 से 30 अप्रैल की कहानी

स्वराज्य मैग्जीन के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकाशित स्वाति गोयल शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक पीड़िता के पिता भी श्रमिक संघ से जुड़े हुए हैं। वे हुगली में Appreciation for Protection of Democratic Rights संस्था के सदस्य हैं। उनकी बेटी एक आर्टिस्ट और डिजाइनर थी।

रिपोर्ट में पीड़ित पिता के हवाले से बताया गया है कि 1 अप्रैल को 6 लोग खुद को किसान सोशल आर्मी का सदस्य बताकर बंगाल आए और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिले। इनमें अनूप सिंह, अनिल मलिक, अंकुर सांगवान, कविता आर्या शामिल थे। इनके अलावा जगदीश बरार भी कुश्ती किसान यूनियन के साथ पहुँचा था। खुद को स्वतंत्र एक्टर कहने वाली योगिता सुहाग भी आई थी। ये सारे लोग संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से कैंपेन कर रहे थे।

4 अप्रैल को पीड़ित पिता-पुत्री की मुलाकात इस समूह से हुगली में हुई। लड़की ने इस दौरान उनके साथ जाकर प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। शुरुआत में पिता ने मना किया, लेकिन बाद में मान गए। कुछ दिन बाद वे हावड़ा स्टेशन से दिल्ली से गए किसान नेताओं के साथ रवाना हुई। पिता ने अनिल से इस दौरान कहा कि उसे उनकी बेटी का ख्याल बहन की तरह रखना है। वहीं लड़की की माँ ने अनिल से कहा कि वह उनकी बेटी का हर समय ध्यान रखे और उसकी रक्षा करे।

दिल्ली में पीड़िता के साथ क्या हुआ?

12 अप्रैल को ये लोग दिल्ली पहुँचे। लड़की दिल्ली में नई थी तो उसे यहाँ का ज्यादा कुछ नहीं पता था। उसे अनिल, अंकुर और अनूप के टेंट में रखा गया। 14 अप्रैल को लड़की ने पिता को बताया कि उसका ट्रेन में उत्पीड़न हुआ। ट्रेन में अनिल उसके नजदीक आया। उसे जबरन चूमा। लेकिन उसने इसका विरोध करते हुए उनसे कहा कि वह दोबारा ये सब न करे।

पिता से बातचीत में लड़की ने घबराते हुए बताया था कि अनिल और अनूप अच्छे लोग नहीं हैं। इसके बाद पिता ने उसे कहा कि वह महिलाओं के टेंट में जाकर रुके। 16 अप्रैल को उसने पिता को कहा कि सारी बातें जगदीश और योगिता को बता दी हैं और योगिता ने उसकी एक वीडियो भी बनाई है।

इसी दिन पीड़िता ने पिता को यह भी जानकारी दी कि उसके यूरिन से खून आया है। पिता ने घबराकर उसे डॉक्टर के  पास जाने की कहा। साथ ही दूसरे टेंट में शिफ्ट होने को कहा। 17 अप्रैल को लड़की के पिता ने योगिता से जब बात की तो उन्हें कहा गया कि चितवन और अमित सांगवान नाम के 2 वकील मामले को देख रहे हैं। किसी हिम्मत सिंह और जगदीश की मदद से ये मामला किसान सोशल आर्मी के नेताओं तक जाएगा- इस बात का आश्वाशन भी योगिता ने लड़की के पिता को दिया।।

इसके बाद लड़की को पिलर नंबर 774 बने टेंट में शिफ्ट किया गया, जहाँ अन्य महिलाएँ थी। कुछ दिन बाद लड़की ने बताया कि उसे माहवारी हुई है और अब वह रिलैक्स है। पिता के मुताबिक, जब उन्होंने बेटी से पूछा कि इसमें खुश होने वाली क्या बात है तो उसने कहा, “आप मर्द लोग नहीं समझोगे।” इस बातचीत के बाद ही युवती के पिता समझ गए थे कि उनकी बेटी के साथ कुछ बुरा हुआ है।

21 अप्रैल से तबीयत बिगड़नी शुरू हुई

21 अप्रैल को लड़की को बुखार आया और फिर लूज मोशन और उल्टियाँ होने लगीं। बाद में उसे टिकरी बॉर्डर पर बने मेडिकल कैंप ले जाया गया, लेकिन हालत नहीं सुधरी। वह बुरी तरह खाँसती रही और धीरे-धीरे साँस लेने में भी दिक्कत होने लगी। परेशान पिता ने बेटी की हालत जानकार कोलकाता में जय किसान आंदोलन से जुड़े डॉक्टर अवीक शाह से बात की, उनसे मेडिकल सहायता माँगी।

24 अप्रैल को योगेंद्र यादव तक पहुँचा मामला

24 अप्रैल योगेंद्र यादव तक मामला पहुँचा। उन्होंने पीड़िता से फोन पर बात की और डॉ. वत्स को उसे मेडिकल सहायता देने को कहा। 25 अप्रैल को जब अनिल और अनूप को इन सबकी जानकारी हुई तो वह टिकरी से लड़की को ले जाने लगे। पिता को बताया गया कि क्या वह उसे बंगाल ले आएँ? हालाँकि पिता ने इस हाल में उसे टिकरी में फौरन इलाज देने को कहा। लेकिन वह लोग कार में बंगाल के लिए निकल गए थे।

पीड़िता के पिता ने डॉ. वत्स से संपर्क किया, जिन्होंने बाद में योगेंद्र यादव से बात की। जब यादव ने अनिल से बात की तो उसने बताया कि वह आगरा पार कर गए हैं। मगर, जब लोकेशन माँगी गई तो वह हरियाणा के हांसी का निकला। यादव ने फौरन उनसे लड़की को वापस लाने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो पुलिस को बताएँगे।

युवती के पिता के मुताबिक, ये स्पष्ट रूप से उनकी लड़की के अपहरण करने का प्रयास था। लेकिन वह 25 अप्रैल को टिकरी ले आई गई। बाद में 26 अप्रैल को एक कमेटी उसे पीजीआई अस्पताल ले गई, वहाँ इलाज नहीं होने पर उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया। वहाँ वह कोविड पॉजिटिव निकली।

29 अप्रैल को दिल्ली पहुँचे युवती के पिता

जैसे ही पिता को अपनी बेटी की बिगड़ती हालात को पता चला वह 29 अप्रैल को दिल्ली पहुँचे। बेटी ने उन्हें सारी बातें बताते हुए कहा, “हमारे साथ खराब काम हुआ है।” रिपोर्ट में पिता के हवाले से कहा गया है, “मुझे समझ आने लगा था कि वह अपनी माहवारी आ जाने से इतनी खुश क्यों थी और क्यों उसे पेशाब के साथ खून निकला था। उसने मुझसे अनिल और अनूप को सजा दिलवाने को कहा। साथ ही कहा कि किसान आंदोलन को नुकसान न हो।”

पुलिस के सामने कुछ न बोलने का बनाया गया पिता पर दबाव

30 अप्रैल को लड़की की मृत्यु के बाद पिता पर दबाव बनाया गया कि पुलिस के सामने यही कहा जाए कि मौत कोविड के कारण हुई। अगर ऐसा नहीं किया गया तो बेटी का शव नहीं ले जा पाएँगे। उन्होंने एक स्टेटमेंट में बता दिया कि मौत कैसे हुई। हालाँकि दाह-संस्कार के बाद उन्हें ये बात कचोटती रही और उन्होंने सबसे बात करके जाना कि आखिर उनकी बेटी के साथ क्या हुआ। आखिर में 8 मई को जाकर इस संबंध में शिकायत हुई और किसान आंदोलन के बीच हुआ ये कुकर्म उजागर हुआ।

अमेरिका: मुस्तफा कादरी ने कोविड रिलीफ फंड से लिया ₹36 करोड़ का लोन, लग्जरी गाड़ियों पर लुटाए पैसे

अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया में मुस्तफा कादरी नाम के एक 38 वर्षीय व्यक्ति को कोविड रिलीफ फंड के दुरुपयोग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। मुस्तफा पर फेडरल कोविड-19 रिलीफ फंड की 5 मिलियन डॉलर (₹36 करोड़ 71 लाख) की राशि के दुरुपयोग का आरोप है। कादरी को पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार के ‘पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ में धोखाधड़ी करने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। उसके ऊपर बैंक धोखाधड़ी, वायर फ्रॉड, पहचान चुराने, और मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई धराएँ लगाई गई हैं।

मुस्तफा कादरी को बाद में $100,000 (₹73,41,805) के बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। उसका ट्रायल 29 जून को निर्धारित किया गया है। वह और उनके वकील टिप्पणी के लिए कथित रूप से अनुपलब्ध थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्तफा ने अमेरिकी सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी की वजह से हुए आर्थिक नुकसान से उबरने के लिए छोटे उद्योगों की मदद के लिए शुरू किए गए ‘पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ में लाखों डॉलर की धोखाधड़ी की थी।

लोन राशि प्राप्त करने के बाद, कादरी ने इसका इस्तेमाल अपने लिए फेरारी, बेंटले और एक लैम्बोर्गिनी जैसी लग्जरी कारों को खरीदने के लिए किया। इसके अलावा, उन्होंने पीपीपी लोन के एक हिस्सा का इस्तेमाल महँगी छुट्टियों और अन्य व्यक्तिगत खर्चों पर भी किया।

अदालत में अभियोजकों ने तर्क दिया कि कादरी ने तीन बैंकों में उन कंपनियों के नाम पर धोखाधड़ी वाले लोन आवेदन किए, जिनका वजूद ही नहीं था। इसके अलावा, उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए कागजात में जाली बैंक रिकॉर्ड, नकली कर रिटर्न आदि शामिल थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कादरी ने एक लोन के लिए आवेदन करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर, सामाजिक सुरक्षा संख्या और हस्ताक्षर का उपयोग भी किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद, अधिकारियों ने फेरारी, बेंटले और लैम्बोर्गिनी कारों के साथ ही उसके बैंक खातों से $2 मिलियन (₹1,46,89,710) जब्त किए।