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भारत को बदनाम करने वाले कमलनाथ के बयान पर सोनिया गाँधी से माँगा गया जवाब, लोगों ने कहा- ‘यही तो है कॉन्ग्रेस टूलकिट’

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार (22 मई 2021) को नए कोविड वेरिएंट को ‘इंडियन वेरिएंट’ कहने के लिए कॉन्ग्रेस और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी देश को बदनाम कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”कमलनाथ इसे इंडियन कोरोना कह रहे हैं। वह कह रहे हैं हमारी पहचान, मेरा भारत कोविड। यह भारत का अपमान है। कॉन्ग्रेस के अन्य नेता भी ऐसे बयान दे रहे हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ (WHO) ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने वैश्विक महामारी के लिए किसी भी देश के नाम का इस्तेमाल नहीं किया है।”

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी अब नकारात्मक राजनीति पर उतर आई है। उन्होंने सोनिया गाँधी से सवाल किया है कि कॉन्ग्रेस इस तरह की नकारात्मक राजनीति क्यों कर रही है। साथ ही उन्होंने कमलनाथ के बयान पर भी सोनिया गाँधी से जवाब माँगा है?

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “शुरुआत में कोवैक्सीन को ‘बीजेपी की वैक्सीन’ कहा गया। अब सबसे ज्यादा अच्छी कोवैक्सीन साबित हुई। तो अब इन्होंने एक नया शब्द ‘ट्रैवल बैन’ जोड़ा है, लेकिन डब्ल्यूएचओ (WHO) ने ऐसा कोई भी निर्णय ही नहीं लिया है।”

जावेड़कर ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी देश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करने का काम कर रही है। लोगों में डर और भ्रम पैदा किया जा रहा है। ये एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है। सोनिया गाँधी को बताना चाहिए कि उनकी पार्टी इस तरह की नकारात्मक राजनीति क्यों कर रही है?

दरअसल, सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ का बयान वायरल होने के बाद वह नेटिजन्स के निशाने पर आ गए हैं। एक यूजर ने ट्विटर पर लिखा, “कमलनाथ जी का दिमाग खराब है। कमलनाथ जी को कोरोना इतना पसंद आ गया है कि कॉन्ग्रेस उसको अपनी प्रयोगशाला में प्रयोग कर रही है।”

ज्योति परमार नाम की यूजर ने लिखा, “सत्ता के लिए इतनी हद तक गिर जाने वाले कॉन्ग्रेसियों को सत्ता के बाहर ही रखा जाएगा, यह जनता को तय करना पड़ेगा।”

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि यही तो कॉन्ग्रेस टूलकिट के पॉइंट्स हैं, जो ये सब कर रहे हैं।

कमलनाथ का शुक्रवार (21 मई 2021) को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को किसान आंदोलन के नाम पर क्षुद्र राजनीति करने और आग लगाने की सलाह देने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इसको लेकर एक यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस का यही चरित्र था और है। पहले सामने नहीं आता था, अब आधुनिक तकनीक के समय में दुनिया के सामने आ जाता है। यह देश को तोड़ने वाली पार्टी है। क्या कमलनाथ के घर वाले शर्मसार नहीं होते कि कैसा पति, पिता है, जो @#### में लगा है।”

बता दें कि कमलनाथ ने क​हा था, ”दुनिया भर में देश की पहचान इंडियन कोरोना से बन गई है। इसकी शुरुआत चीनी कोरोना से हुई थी, लेकिन अब यह इंडियन वेरिएंट कोरोना है। आज भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री COVID-19 के भारतीय वेरिएंट से डरते हैं। यह कौन सा टूलकिट है? हमारे वैज्ञानिक इसे इंडियन वेरिएंट कह रहे हैं। सिर्फ बीजेपी के सलाहकार ही नहीं मान रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता ने वीडियो में कहा, ”हम कहते थे कि चाइनीज कोरोना है। अगर आपको याद हो तो जनवरी 2020 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब हम कहते थे यह कोरोना चीन का है। चाइनीज लेबोरेटरी में बनाया गया था और एक खास शहर से आया था। हम आज कहाँ पहुँच गए हैं? आज दुनिया इसे इंडियन कोरोना कहती है।”

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष कारी उस्मान का कोरोना से निधन: जनाजे में भारी भीड़, किट के बाहर शव, देखें वीडियो

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दारुल उलूम देवबंद के कार्यवाहक मोहतमिम हजरत मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी का शुक्रवार (मई 21, 2021) को कोरोना से निधन हो गया। कोरोना संक्रमित होने के बाद 75 वर्षीय मौलाना को नोएडा के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद उसे किट में लपेटकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। ताकि दूसरे संक्रमित न हों, लेकिन यूट्यूब पर “दीनदारी” नाम के यूजर द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि मौलाना की मौत बाद उनके जनाजे के दौरान किट को हटा दिया गया था और मौलाना का मुँह खुला हुआ था। इससे जितने भी लोग वहाँ थे उनके कोरोना संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है।

वहीं “एमटी मीडिया ओडिशा” नाम के हैंडल से जो वीडियो अपलोड किया है उसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जिस वक्त मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी का जनाजा आता है उस दौराना हजारों की तादात में भीड़ इकट्ठी होती है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह से नदारद थी।

एक अन्य “आल ओडिशा मदरसा” नाम के यूजर ने भी वैसा ही वीडियो अपलोड किया है, जिसमें भारी भीड़ देखी जा सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलाना की मौत के बाद शोक सभा में जमीयत उलमा ए हिंद के शहर अध्यक्ष जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी ने मगफिरत के लिए दुआ कराई। बता दें कि दारुल उलूम देवबंद मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था मानी जाती है और मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी उसके कार्यकारी मुहतमिम थे।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की 24 अप्रैल 2021 की गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी के भी अंतिम संस्कार में केवल 20 लोग ही शामिल हो सकते हैं। बावजूद इसके यूट्यूब पर अपलोड किए गए वीडियो में हजारों की भीड़ देखी जा सकती है, जो कि राज्य सरकार की गाइडलाइंस का उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश में मास्क नहीं पहनने पर पहली बार एक हजार और दूसरी बार ऐसा ही करने पर 10,000 रुपए के जुर्माने का भी प्रावधान है।

अमानतुल्लाह खान ने मुस्लिम समुदाय को क्यों कहा फंगस? लोग ‘रेड-ऑरेंज दाढ़ी’ वालों की फोटो क्यों कर रहे शेयर?

आम आदमी पार्टी का एक विधायक है। नाम है अमानतुल्लाह खान। विधायक अमानतुल्लाह खान ने आज मतलब 22 मई 2021 को मतलब जुमे की नमाज के ठीक 24 घंटे बाद एक ट्वीट किया है। पहले ट्वीट पढ़ा जाए। फिर इस पर चर्चा करते हैं।

नेताओं पर भरोसा नहीं, ट्वीट डिलीट करके भाग जाते हैं… इसलिए स्क्रीनशॉट

विधायक अमानतुल्लाह खान ने जो ट्वीट किया, उसमें साफ नहीं है कि वो किसे फंगस कह रहे हैं। लेकिन नीचे देश की जनता (जिसके एक वोट की कीमत राष्ट्रपति के एक वोट के बराबर होती है, मतलब अमानतुल्लाह जैसे विधायक जनता के सामने नौकर/सेवक के बराबर हैं) ने उन्हें साफ कर दिया कि फंगस है कौन।

अमानतुल्ला विधायक हैं। उनकी पार्टी के नेता केजरीवाल मुख्यमंत्री हैं। मतलब ये मुख्यमंत्री से छोटे कद के नेता हैं। यह उदाहरण देकर भी जनता ने इन्हें समझाया कि फंगस कौन है।

महामारी के समय तरह-तरह के फंगस आ गए हैं। विधायक अमानतुल्लाह खान को यह विज्ञान भी समझाया गया कि ब्लैक फंगस क्या होता है।

ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक होता है वॉइट फंगस। यह तो डायरेक्ट लिंग पर ही अटैक करता है। यह देखते हुए विधायक अमानतुल्लाह खान को वॉइट फंगस के बारे में भी बताया गया।

विधायक अमानतुल्लाह खान चूँकि गर्दन और जुबान काटने की बात करना खुलेआम पसंद करते हैं, इसलिए जिस जुबान के सहारे थूका जाता है, उसके विज्ञान को भी समझाया गया।

उम्मीद है देश की आम जनता से AAP वाले विधायक अमानतुल्लाह खान ने फंगस-फोबिया समझ लिया होगा।

सलीम ने सोनू बनकर हिंदू महिला को फँसाया, शादी के बाद ससुराल पहुँची तो दूसरी बीवी के साथ मिलकर पीटा: गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला सामने आया है। सलीम नाम के युवक पर हिंदू महिला ने आरोप लगाया है कि सलीम ने झूठी पहचान बताकर पहले उसे अपने प्रेम जाल में फँसाया और बाद में धर्म परिवर्तन करवाकर उससे निकाह किया। हाल में जब महिला अपने ससुराल गई तो वहाँ उसके साथ मारपीट हुई।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सहारनपुर एसपी ने इस संबंध में बताया कि एक महिला ने अपने पति पर धर्म परिवर्तन और घरेलू हिंसा के आरोप में शिकायत लिखवाई है। मुकदमा दर्ज हो चुका है और आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

न्यूज नेशन की खबर के अनुसार, शेखपुरा गाँव का रहने वाला सलीम, सोनू बन कर मोदीनगर की हिंदू महिला से मिला और उसे अपने प्रेम जाल में फाँसा। इसके बाद शारीरिक संबंध बनाकर उसे कई बार गर्भवती भी किया। महिला लगातार शादी के लिए कहती रही। लेकिन सलीम ने हर बार उसका गर्भपात करवा दिया।

हाल में जब महिला ने ज्यादा दबाव बनाया तो सलीम ने उसका धर्म परिवर्तन करवाया और फिर उससे 5 मार्च को निकाह किया, मगर कागज पर तारीख 20 दिसंबर 2018 की लिखवा ली।

महिला का आरोप है कि निकाह के बाद जब वह अपने ससुराल गई तो सलीम ने अपने परिजनों के साथ मिलकर उससे मारपीट की। वहीं उसे ये भी पता चला कि सलीम की एक और शादी हो रखी है। इतना ही नहीं महिला ने पत्रकारों से बातचीत में यह भी खुलासा किया कि सोनू उर्फ सलीम बसपा नेता का बेटा है। उन दोनों का एक बेटा भी हुआ था। लेकिन सलीम ने उसे अपने भाई के साथ मिल कर खत्म कर दिया।

पुलिस का इस संबंध में कहना है कि सलीम ने हिंदू युवती से शादी 2018 में (महिला के अनुसार, शादी मार्च में हुई मगर उस पर तारीख 2018 की है) की थी। उससे उसकी एक बेटी है। लेकिन इसी वर्ष सलीम ने हिंदू लड़की को छोड़ मुस्लिम महिला से निकाह कर लिया। जब हिंदू युवती को यह पता चला तो वह सलीम के घर पहुँच गई। महिला का कहना है कि यहाँ उसके साथ मारपीट हुई। इस केस में धर्म परिवर्तन और अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर पुलिस ने आरोपी सलीम को गिरफ्तार कर लिया है।

ये है ऑल टाइम भारतीय टेस्ट टीम, Wisden ने कर दी घोषणा: ऋषभ पंत को बनाया है विकेट-कीपर, सचिन को कप्तानी नहीं

क्रिकेट का बाइबिल कही जाने वाली विजडन मैग्जीन ने आईसीसी की रैंकिंग के हिसाब से अपनी ऑल टाइम भारतीय टेस्ट इलेवेन का चयन कर लिया है। विजडन ने अपनी टीम का कप्तान विराट कोहली को बनाया है।

इस टीम में राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सुनील गवास्कर, रविंद्र जडेजा, कपिल देव, ऋषभ पंत (विकेट कीपर), आर अश्विन, अनिल कुंबले और जसप्रीत बुमराह को शामिल किया है। हालाँकि, हैरानी की बात यह है कि विजडन ने न तो पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और न ही वीरेंद्र सहवाग को शामिल किया है।

गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के दौरे पर जा रही है, जहाँ तीन महीने से भी अधिक समय के इस दौरे के दौरान टीम 6 टेस्ट मैच खेलेगी।

क्या था सेलेक्शन प्रोसेस

विजडन ने अपनी टीम चुनने को लेकर कहा है कि उसके चयन की प्रक्रिया आसान थी। मैग्जीन का कहना है कि उसने आईसीसी के रैंकिंग के आधार पर टॉप फाइव बैट्समैन, टॉप रैंकिंग वाले विकेटकीपर और हाईएस्ट रैंकिंग वाले ऑल राउंडर (आर अश्विन) और टॉप 4 बॉलर्स को चुना था।

मैग्जीन ने ऑल टाइम बैटिंग रैंकिंग में सुनील गवास्कर को 916 प्वॉइंट्स के साथ नंबर पर रखा है। उनके अलावा राहुल द्रविड़ (892 प्वाइंट्स), सचिन तेंदुलकर (898 प्वाइंट्स) और विराट कोहली (कप्तान-937 प्वाइंट्स) को भी नंबर वन रैंकिंग दी है।

वहीं ऑल टाइम बैटिंग रैंकिंग में 888 प्वाइंट्स के साथ चेतेश्वर पुजारा को सेकंड रैंक दी गई है, जबकि ऋषभ पंत (747 प्वाइंट्स) को इस मामले में 9वीं रैंक दी गई है।

रविचंद्रन अश्विन (904 प्वाइंट्स) को ऑल टाइम बॉलिंग में नंबर वन रैंक दिया गया है। इसके अलावा उन्हें ऑल टाइम ऑल राउंडर में भी 492 प्वाइंट्स के साथ पहली रैंक दी गई है। उनके अलावा 899 प्वाइंट्स के साथ रविंद्र जडेजा (899 प्वाइंट्स) को भी ऑल टाइम बॉलिंग रैंक में नंबर वन पर शामिल किया गया है। अनिल कुंबले को 859 प्वाइंट्स के साथ इस मामले में सेकंड रैंक पर रखा गया है। जबकि, ऑल टाइम बॉलिंग रैंकिंग में 835 प्वॉइंट्स के साथ जसप्रीत बुमराह को थर्ड रैंक पर रखा गया है।

यूपी में चलेगा गाँवों-वार्डों को कोरोना मुक्त कराने का अभियान, सबसे अच्छा काम करने वालों को पुरस्कार देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी बीच उन्होंने राज्य में महाअभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (21 मई 2021) को टीम-9 के साथ कोरोना समीक्षा को लेकर हुई मीटिंग में कोरोना से मुक्त होने पर गाँवों और शहरों के वॉर्डों को पुरस्कार देने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री योगी ने सभी डीएम को गाँवों और शहरी वार्डों में “मेरा गाँव, कोरोना मुक्त गाँव” और “मेरा वार्ड, कोरोना मुक्त वार्ड” अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में सबसे अच्छा काम करने वाले तीन-तीन गाँवों और तीन-तीन वार्डों को कोरोना मुक्त का अवॉर्ड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसे गाँवों और वार्डों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि दी भी जाएगी।

सीएम योगी ने समीक्षा बैठक में कहा कि गाँवों में वृहद टेस्टिंग अभियान के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। निगरानी समितियों और आरआरटी टीमों की मेहनत रंग ला रही है। ऐसे में इसे मिशन के रूप में लेने की जरूरत है। सभी गाँवों में जागरूकता बढाएँ और प्रयास करें कि ‘कोरोना मुक्त गाँवों’ के संदेश को हर ग्रामवासी अपना लक्ष्य बनाएँ।

उन्होंने क​हा कि भारत सरकार द्वारा ब्लैक फंगस के उपचार के संबंध में दिए गए सुझावों एवं निर्देशों का जल्द ही क्रियान्वयन किया जाए। साथ ही महामारी अधिनियम-1897 के अन्तर्गत ब्लैक फंगस को अधिसूचित बीमारी घोषित किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 4 करोड़, 61 लाख, 12 हजार 448 कोविड टेस्ट किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विगत 24 घंटों में राज्य में 753 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। विगत कुछ दिनों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आने से ऑक्सीजन की माँग में भी तेजी से कमी आई है।

उन्होंने आयुष विभाग द्वारा संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को एक्टिव करने का निर्देश भी दिया। सीएम ने कहा कि आयुष विभाग द्वारा प्राणायाम के अभ्यास के संबंध में लोगों को व्यापक जानकारी दी जाए व इसका प्रचार-प्रसार भी कराया जाए।

#CleanNCERT: कभी स्थानीय भाषा तो कभी बिना साक्ष्य के इतिहास, गलत शिक्षा को लेकर NCERT हेड मो सिराज निशाने पर

हाल में NCERT के पाठ्यक्रम में कक्षा-1 के छात्रों को पढ़ाए जाने वाली कविता ‘आम की टोकरी’ को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल हुआ। लोगों ने इसे डबल मीनिंग कविता करार देते हुए पाठ्यक्रम से निकालने की बात की। ये पहली बार नहीं है कि NCERT पर गलत शिक्षा देने के आरोप लगे हों। इससे पहले कई बार ऐसा हुआ। जिसके मद्देनजर इस दफा ट्विटर पर #CleanNCERT ट्रेंड करने लगा और NCERT प्रमुख भी लोगों के निशाने आ गए।

सोशल मीडिया पर यूजर्स #CleanNCERT ट्रेंड करवा कर उस सामग्री को उजागर कर रहे हैं, जिनके जरिए गलत शिक्षा छात्रों को दी जा रही है। लोग बता रहे हैं कि आखिर NCERT में क्या पढ़ाया जाना चाहिए और हमें पढ़ाया क्या जा रहा है। सक्रिय यूजर्स इस बात को उठा रहे हैं कि आखिर बाबर, औरंगजेब और खिलजी जैसे क्रूर शासक महान कैसे हो गए और क्यों छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप को विस्तार से हमें इतिहास की किताबों में नहीं पढ़ाया गया।

NCERT पर लगे गलत शिक्षा देने के आरोप

इससे पहले NCERT अपने कंटेंट को लेकर कई बार चर्चा में आया है। ‘आम की टोकरी’ कविता के अलावा NCERT की पाँचवी कक्षा में पढ़ाई जाने वाली मैरीगोल्ड के यूनिट 8 में द लिटिल बुली को लेकर भी ये बात उठी थी कि आखिर उसमें हरि नाम के बच्चे पर ऐसी कहानी क्यों गढ़ी गई कि वह लड़कियों को चिढ़ाता है या चिकोटी काट कर उन पर धौंस जमाता है।

इसी तरह कक्षा 12 में पढ़ाए जाने वाली इतिहास की किताब पर बवाल हुआ था। इसमें सिखाया जा रहा था कि औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भी भारत में रहते हुए मंदिरों की रक्षा की और उनकी देख-रेख का जिम्मा उठाया था। लेकिन जब एनसीईआरटी से इस दावे का स्रोत पूछा गया तो उनके पास अपना दावा साबित करने के लिए कोई प्रमाण या स्रोत नहीं था। ऐसे ही कुतुब मीनार को लेकर भी एनसीआरटी के पास कोई सबूत नहीं थे कि उसे  कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया।

NCERT का बयान

आज निराधार दावों वाली शिक्षा और दोयम दर्जे की भाषा को लेकर NCERT विवादों में हैं। लेकिन अपनी सफाई में उन्होंने गलती मानने की बजाय या कोई आश्वासन देने की जगह अपनी गलती को स्थानीय भाषा का हवाला देकर ढकना चाहा। ऐसे में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने उन्हें लताड़ा और कविता की भाषा को घटिया और स्तरहीन कहा।

दरअसल, NCERT ने लिखा था, “एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में दी गई कविताओं के संदर्भ में: एनसीएफ-2005 के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय भाषाओं की शब्दावली को बच्चों तक पहुँचाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ये कविताएँ शामिल की गई हैं ताकि सीखना रुचिपूर्ण हो सके।”

अगले ट्वीट में NCERT ने बताया, “ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। इसी पाठ्यचर्या की रूपरेखा के आधार पर भविष्य में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया जाएगा।”

NCERT हेड मोहम्मद सिराज पर उठी उंगलियाँ

NCERT पर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्य कुमार सोती समेत कई लोग ऐसी शिक्षा के लिए NCERT हेड को जिम्मेदार मान रहे हैं। दिव्य कुमार सोती ने मोहम्मद सिराज का बायोडेटा शेयर करते हुए लिखा,

“जो मदरसों के सिलेबस में औरंगजेब की महानता पर चैप्टर लिखने लायक थे वो  NCERT की किताबें लिख रहे हैं। 10 साल रूक जाइए, आज इनके लिखे सिलेबस को पढ़ रहे हिंदुओं के बच्चे भी उमर खालिद और शरजील उस्मानी के साथ भारत विरोधी नारे लगाते दिखाई देंगे।”

राजपांडे लिखते हैं, “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मो सिराज अनवर जुलाई 2020 से NCERT की योजना और अनुसंधान के प्रमुख है। इसके पहले वह 2016-19 के दौरान प्रकाशन विभाग के प्रमुख (योजना निगरानी) थे। उन्होंने 1997 में NCERT ज्वाइन किया था और औरंगजेब के निजाम शाही के अनुयायी हैं। ”

इनके अलावा कई यूजर्स हैं जो इन सबके लिए मो सिराज और उससे पहले के NCERT प्रमुखों को जिम्मेदार मान रहे हैं।

गौरतलब है कि आज के समय में भारतीय सनातन संस्कृति से वामपंथी इतिहासकारों और शिक्षाविदों की घृणा का यह चरम है। यही वजह है कि हमें सालों से गलत इतिहास और ऐसी भाषा पढ़ाई जाती रही, जिसकी वजह से हमारा दिमाग एक दिशा में सेकुलरिज्म की परिभाषा गढ़ता रहे।

मसलन बाबर को किताबों में महान शासक बनाया गया। उनका महिमामंडन करने के लिए पाठ के पाठ समर्पित कर दिए गए। वहीं दूसरी ओर शिवाजी महाराज या महाराणा प्रताप को तस्वीरों या फिर एक पैराग्राफ में सीमित कर दिया गया।

तस्वीरों से लेकर भाषा तक में हमारे दिमाग का इस्लामीकरण किया जाता रहा और हम इसे पढ़ते आए। #CleanNCERT के ट्रेंड होने का मतलब यही है कि आज बड़ी तादाद में लोग ऐसे एकतरफा कंटेंट का विरोध कर रहे हैं और भारत के असली हीरोज और उसकी सभ्यता की जानकारी बच्चों को दिलवाना चाहते हैं।

‘इंडियन कोरोना’: कमलनाथ ने वायरस फैलाने वाले चीन की बजाय भारत को किया बदनाम, वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का शुक्रवार (21 मई 2021) को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को किसान आंदोलन के नाम पर क्षुद्र राजनीति करने और आग लगाने की सलाह देने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। वहीं, एक दिन बाद यानी शनिवार को (22 मई 2021) उनका एक और विवादित वीडियो सामने आया है। नए वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलाने वाले चीन की बजाय भारत को कोसते नजर आ रहे हैं।

कमलनाथ ने क​हा, ”दुनिया भर में देश की पहचान इंडियन कोरोना से बन गई है। इसकी शुरुआत चीनी कोरोना से हुई थी, लेकिन अब यह इंडियन वेरिएंट कोरोना है। आज भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री COVID-19 के भारतीय वेरिएंट से डरते हैं। यह कौन सा टूलकिट है? हमारे वैज्ञानिक इसे इंडियन वेरिएंट कह रहे हैं। सिर्फ बीजेपी के सलाहकार ही नहीं मान रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता ने वीडियो में कहा, ”हम कहते थे कि चाइनीज कोरोना है। अगर आपको याद हो तो जनवरी 2020 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब हम कहते थे यह कोरोना चीन का है। चाइनीज लेबोरेटरी में बनाया गया था और एक खास शहर से आया था। हम आज कहाँ पहुँच गए हैं? आज दुनिया इसे इंडियन कोरोना कहती है।”

उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इंडियन कोरोना से सब डर रहे हैं, सारी फ्लाइटें बंद करो। उन्होंने छात्रों और वहाँ काम करने वाले लोगों की एंट्री बंद कर दी है कि वे इंडियन कोरोना ले आएँगे। इसी वजह से आज भारत को दुनिया में पहचाना जाता है। भूल जाओ मेरा देश महान है, अब मेरा भारत COVID बन गया है। इसे दबाकर आप किसी को बेवकूफ नहीं बना सकते। इस दौरान कमलनाथ ने सरकार पर कोरोना से हुई मौतों के आँकड़ों को छिपाने का आरोप भी लगाया।

कमलनाथ का बयान सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “कुछ दिन पहले, हमने अरविंद केजरीवाल के भारतीय वेरिएंट और सिंगापुर पर नकली बयान सुना। वह (कमलनाथ) इसे इंडियन COVID भी कह रहे हैं। यह पक्का है कि कमलनाथ का टूलकिट से कनेक्शन है।”

बीजेपी नेता ने शुक्रवार (21 मई 2021) को ट्वीट कर कहा था कि देश कोरोना महामारी की वैश्विक आपदा से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में कमलनाथ जी जैसे वरिष्ठ नेता को देशवासियों को संकट से बचाने की बात करनी चाहिए ना कि प्रदेश और देश में आग लगाने की? हकीकत में उनकी मूल प्रवृत्ति यही है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर कहा कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली पार्टी के नेताओं को देश को बदनाम करने में ख़ुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ऐसा इसलिए कर रही है, क्योंकि उसने 7 अगस्त, 2008 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे।

बता दें कि हाल ही में कॉन्ग्रेस के कथित टूलकिट मामले के खिलाफ देश के शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है। मामले को सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने और दुनिया में भारत की छवि बिगाड़ने का साजिश बताया गया है। याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा ने अंतरराष्ट्रीय साजिश का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से जाँच और दोष साबित होने पर कॉन्ग्रेस की मान्यता रद्द करने की माँग की है।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश जारी होना चाहिए कि वह गाइडलाइंस बनाए कि कोई भी पार्टी, ग्रुप कोई भी ऐसा पोस्टर और बैनर नहीं लगाएगा जिसमें एंटी नेशनल सामग्री हो। साथ ही कोरोना से मरे लोगों के अंतिम संस्कार और शव न दिखाए जाएँ। इसके अलावा केंद्र सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी के बारे में निर्देश जारी किया जाए।

CM विजयन ने अल्पसंख्यक विभाग रखा अपने पास: केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट का असर? मुस्लिम समुदाय में नाराजगी

केरल में एक बार फिर से सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अल्पसंख्यक विभाग अपने पास रख लिया है। जबकि, सामान्य तौर पर यह विभाग कैबिनेट मंत्रियों को दिया जाता था। इसके अलावा सीएम ने गृह, निगरानी और आईटी समेत कई अन्य विभागों को भी अपने पास ही रखा है।

माना जा रहा है कि उनके इस कदम से मुस्लिम समुदायों में भी कुछ नाराजगी है। पी विजयन ने गुरुवार (20 मई 2021) को 20 कैबिनेट मंत्रियों के साथ दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी। उनके मंत्रियों के विभागों की आधिकारिक लिस्ट शुक्रवार (21 मई 2021) को जारी हुई।

पी विजयन सरकार ने इस बार अपने कैबिनेट में कई फेरबदल किए हैं। इसके तहत उन्होंने अल्पसंख्यक विभाग को भी अपने पास ही रख लिया है। जबकि, उनके पिछले कार्यकाल के दौरान यह विभाग केटी जलील के पास था। केटी जलील उस दौरान राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री भी थे। वहीं सीएम ने अपने दामाद पीए मोहम्मद रियास को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का जिम्मा सौंपा है। 

वहीं कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यक विभाग इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के मुस्लिम मंत्री मंजलमकुझी अली के पास था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा पी विजयन सरकार में अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए वर्तमान मंत्रिमंडल में शामिल वी अब्दुरहीमान के नाम की चर्चा थी। उन्हें ही अल्पसंख्यक मामलों का प्रभारी बताया गया था, लेकिन अंतिम लिस्ट में इसे बदल दिया गया। इस मामले में कुछ मुस्लिम संगठनों ने नाराजगी भी जताई है। उन्हें लगता है कि पिनारई विजयन ने ईसाई समुदाय को खुश करने के लिए ऐसा किया है।

हालाँकि, मुख्यमंत्री पी विजयन का कहना है, “मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक है। उन्हें मुझ पर और एलडीएफ सरकार पर भरोसा है। इसकी आलोचना करने वाले इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग का समुदाय पर कोई एकाधिकार नहीं है।”

केरल में मुसलमान आबादी

गौरतलब है कि केरल की 3.34 करोड़ आबादी में मुसलमानों की संख्या 88.73 लाख है, जबकि ईसाइयों की आबादी 61.41 लाख है। केरल में ईसाई से ज्यादा संख्या होने के बाद भी सीएम विजयन ने मुसलमानों को अल्पसंख्यक बताया है।

कथित तौर पर अल्पसंख्यक मंत्रालय को लेकर केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट ने अपने बिशप को एक पत्र लिखकर सीएम पिनारई विजयन पर दवाब बनाने के लिए कहा था। इसके मुताबिक, या तो अल्पसंख्यक विभाग को किसी क्रिश्चियन मंत्री को दिया जाय या फिर सीएम विजयन इसे खुद अपने पास ही रखें। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने इस विभाग को अपने पास ही रख लिया है। उनके इस कदम का केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने स्वागत किया है।

इस मामले में केरल के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और मिजोरम के मौजूदा राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने कहा है कि सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के मेजर आर्कबिशप कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी ने “बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों” को उठाया है। उन्होंने कहा कि चिंता की बात यह है कि अल्पसंख्यकों के लिए जारी होने वाला 80 फीसदी फंड एक समुदाय विशेष में जा रहा है, जबकि पूरे ईसाई समुदाय को केवल 20 प्रतिशत ही मिल रहा है।

UP में कोरोना से जान गँवाने वाले आँगनबाड़ी अधिकारी और कर्मचारियों के परिवार को ₹50-50 लाख मुआवजा: आदेश जारी

उत्तर प्रदेश में कोरोना से संबंधित ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने के बाद अपनी जान गँवाने वाले बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों, आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए की राशि दी जाएगी।

बाल विकास पुष्टाहार की निदेशक सारिका मोहन ने इस संबंध में जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। विभाग की तरफ से कहा गया है कि अभी तक विभाग के 11 अधिकारी, कर्मचारी और 72 आँगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं का कोविड-19 से निधन हो चुका है। अब भी विभाग के 426 अधिकारी, कर्मचारी और 441 आँगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कोरोना से संक्रमित हैं।

निदेशक ने जिलाधिकारियों से कहा है कि जिन अधिकारियों व कर्मचारियों, आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की कोविड-19 से संबंधित ड्यूटी के दौरान संक्रमण होने से आकस्मिक मृत्यु हुई है, उनके आश्रितों को शासन के राजस्व विभाग के राजस्व विभाग के आदेश के अनुसार 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि प्रदान की जाए।

निदेशक ने कहा है कि विभाग की आँगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिकाएँ कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए गठित निगरानी समिति या सर्वे कार्य के लिए गठित समिति के सक्रिय सदस्य के रूप में जिला प्रशासन के निर्देशन में लगातार फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके अलावा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी कोविड-19 के संक्रमण से बचाव से संबंधित किसी न किसी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे हैं। इस कारण विभाग के इन अधिकारियों व कर्मचारियों का प्राथमिकता पर टीकाकरण भी कराया जाए। 

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी बीच उन्होंने राज्य में महाअभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (मई 21, 2021) को टीम-9 के साथ कोरोना समीक्षा को लेकर हुई मीटिंग में कोरोना से मुक्त होने पर गाँवों और शहरों के वॉर्डों को पुरस्कार देने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री योगी ने सभी डीएम को गाँवों और शहरी वार्डों में ‘मेरा गाँव, कोरोना मुक्त गाँव’ और ‘मेरा वार्ड, कोरोना मुक्त वार्ड’ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में सबसे अच्छा काम करने वाले तीन-तीन गाँवों और तीन-तीन वार्डों को कोरोना मुक्त का अवॉर्ड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसे गाँवों और वार्डों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि दी भी जाएगी।