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ड्रामा क्वीन, चिंदी, गैंग, गिद्ध… कार्तिक आर्यन के समर्थन में कंगना ने करण जौहर को धो डाला

बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन को करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन ने “अनप्रोफेशनल बिहैवियर” का आरोप लगाकर फिल्म दोस्ताना 2 से बाहर कर दिया और उन्हें ब्लैक लिस्ट भी कर दिया, जिससे भविष्य में वो कभी भी धर्मा प्रोडक्शन के साथ काम नहीं कर पाएँगे। अब इस मामले में बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत ने कार्तिक के साथ खड़े होते हुए करण जौहर को कड़ी फटकार लगाई।

कंगना ने बैक टू बैक कई ट्वीट कर लिखा, “कार्तिक आर्यन अपने दम पर यहाँ तक पहुँचे हैं, वह अपने दम पर ऐसा करता रहेगा। पापा जो और उनके नेपो गैंग क्लब से मेरी ये विनती है कि उसे अकेला छोड़ दें। सुशांत की तरह उसके पीछे पड़कर उसे फाँसी पर लटकने के लिए मजबूर ना करो। गिद्धों उसे अकेला छोड़ दो और दफा हो जाओ चिंदी नेपोज (भाई-भतीजावाद)।”

अपने अगले ट्वीट में कंगना ने कार्तिक सलाह दी कि उन्हें इन चिल्लरों से डरने की जरूरत नहीं है। कंगना ने लिखा, “गंदे आर्टिकल्स लिखने और तुम्हारे एटीट्यूड को खराब बताने वाले एनाउंसमेंट करने के बाद ये लोग गरिमामय मौन धारण करना चाहते हैं। इन लोगों ने सुशांत सिंह राजपूत के बारे में भी ड्रग एडिक्शन और गैर जिम्मेदाराना रवैये की बातें फैलाकर ऐसा ही व्यवहार किया था।”

कार्तिक के समर्थन में तीसरा ट्वीट करते हुए कंगना लिखती हैं, “हम आपके साथ हैं, जिसने आपको नहीं बनाया वह आपको नहीं तोड़ सकता, आज आप सभी कोनों से खुद को अकेला और टारगेटेड महसूस कर रहे होंगे। ऐसा महसूस करने की जरूरत नहीं है, हर कोई इस ड्रामा क्वीन ‘जो’ को जानता है, अपनी हुनर पर भरोसा करें और अनुशासित रहें। बहुत प्यार।”

गौरतलब है कि दोस्ताना-2 2008 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म दोस्ताना का सीक्वल है, जिसमें अभिषेक बच्चन, जॉन अब्राहम और प्रियंका चोपड़ा ने एक्टिंग की था। दोस्ताना को तरुण मनसुखानी ने निर्देशित किया था। जबकि, दोस्ताना-2 का निर्देशन कोलिन डी कनुहा द्वारा किया जा रहा है और इसमें कार्तिक आर्यन के साथ जान्हवी कपूर और लक्ष्मण लालवानी प्रमुख भूमिका में थे। लेकिन अब प्रोडक्शन हाउस को आर्यन की जगह लेने के लिए एक अभिनेता की तलाश करनी होगी। यह फिल्म टीवी अभिनेता लक्ष्या के लिए बॉलीवुड डेब्यू होने जा रही है।

रोजा-सहरी के नाम पर ‘पुलिसवाली’ ने ही आतंकियों को नहीं खोजने दिया, सुरक्षाबलों को धमकाया: लगा UAPA, गई नौकरी

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले की एक विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) को ‘आतंकवाद का महिमामंडन करने’ और सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य का निर्वहन करने से ‘रोकने’ के आरोप में गिरफ्तार कर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। महिला पुलिसकर्मी पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस प्रवक्ता ने शुक्रवार (अप्रैल 16, 2021) को बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले में फ्रिसल इलाके की निवासी सायमा अख्तर को अवैध गतिविधि रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों को फ्रिसल गाँव के कारेवा मोहल्ले में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद वहाँ तलाशी अभियान चलाया गया। प्रवक्ता ने बताया कि अभियान के दौरान अख्तर ने आतंकवादियों को खोज रही टीम को अपना काम करने से रोका।

उन्होंने बताया कि जैसे ही सुरक्षाबलों ने तलाशी लेने के लिए कुछ घरो में जाने की कोशिश की तो वहाँ कुछ महिलाओं ने शोर मचाना शुरू कर दिया और पुलिस को अपना काम करने से रोका। इन महिलाओं की अगुवाई साइमा अख्तर नाम की एक महिला कर रही थीं, जो खुद जम्मू कश्मीर पुलिस में SPO के तौर पर काम कर रही थीं।

पुलिस के अनुसार साइमा के उकसावे पर भीड़ उग्र हो गई और पुलिस को अपना ऑपरेशन बीच में ही रोकना पड़ा। इसके चलते इलाके से कुछ संदिग्ध शायद भागने में कामयाब भी हुए। लेकिन घटना यहाँ ख़त्म नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “महिला ने तलाश अभियान चला रहे दल को रोका और वह हिंसक हो गई। महिला ने आतंकवादियों के हिंसक कृत्यों का महिमामंडन करने वाले बयान भी दिए।” प्रवक्ता ने बताया कि सायमा अख्तर ने अपने फोन से एक वीडियो बनाया और ‘तलाशी अभियान बाधित करने के इरादे से’ उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि मामले को संज्ञान में लेते हुए महिला को गिरफ्तार कर लिया गया और सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

वायरल वीडियो में क्या है?

बता दें आरोपित द्वारा बनाए गए वीडियो में दिख रहा है एक महिला सैन्यकर्मी पर चिल्ला रही थी। उसका कहना था कि कम से कम रमजान के दौरान तो सुरक्षाकर्मी छानबीन ना करें। महिला द्वारा सैन्य कर्मियों को वीडियो में ‘बाहरी’ बुलाया जाना सुना जा सकता है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार वीडियो में  महिला ने कहा- “तुम बार-बार क्यों आते हो? उन घरों में जाओ, जहाँ आतंकवादी हैं। आप हमें हमारी सेहरी (रमज़ान के दौरान सुबह का भोजन) भी नहीं करने दे रहे हैं। यदि आपको हमारे घर की तलाशी लेनी है, तो पहले अपने जूते निकालें। मेरी माँ की तबीयत ठीक नहीं है। अगर उसके साथ कुछ होता है, तो आप देखभाल करेंगे।”

वीडियो में देखा जा सकता है महिला के रोकने पर सैन्य कर्मी चिल्लाया। इस पर महिला ने कहा कि वे उसे डरा नहीं सकते। उसने कहा, “अपना मुँह बंद करें। हम डरने वाले नहीं हैं। यह हमारा कश्मीर है। आप बाहर से आए हैं। जो कुछ भी आप करना चाहते हैं, वह करें, अगर वे (आतंकवादी) यहाँ होते तो अब तक आपके सीने में गोलियाँ उतार चुके होते।”

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पुलिस थाना यारीपोरा में भारतीय दंड संहिता की धारा 353 (लोक सेवक को कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए बल प्रयोग या हमला करना) और अवैध गतिविधि रोकथाम कानून की धारा 13 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा मामले की जाँच जारी है। जानकारी के मुताबिक साइमा को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है और मामले में शामिल बाकी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी की तैयारी भी की जा रही है।

‘नए कश्मीर’ में महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा: महबूबा मुफ्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आतंकवाद का महिमामंडन करने के कारण महिला एसपीओ को गिरफ्तार किए जाने के मामले में कहा कि ‘नए कश्मीर में जुल्मों से महिलाओं को भी नहीं बख्शा’ जा रहा है।

मुफ्ती ने बयान में कहा, “सायमा अख्तर को उसके घर में बार-बार अकारण तलाशी लिए जाने के कारण उचित प्रश्न उठाने पर यूएपीए के तहत आरोपित बनाया गया। यह समझा जा सकता है कि सायमा की माँ के बीमार होने के कारण उसकी चिंता और बढ़ गई। नए कश्मीर में क्रूरता से महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा।”

दक्षिण कश्मीर में इस समय सुरक्षा बलों का अभियान चरम पर है और अमरनाथ यात्रा को देखते हुए यहाँ आए दिन आतंकियों को तलाश किया जा रहा है। ऐसे में इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से इन अभियानों पर असर पड़ सकता है। इसलिए पुलिस ने अपनी ही एक कर्मी के खिलाफ इतना सख्त फैसला लिया।

पश्चिम बंगाल में 5वें चरण की वोटिंग शुरू: 2 BJP एजेंट का सिर फोड़ा, बम फेंका गया

पश्चिम बंगाल में पाँचवें चरण के चुनाव के तहत 6 जिलों की 45 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। जिन सीटों पर आज वोट डाले जा रहे हैं, उनमें उत्तर 24 परगना की 15 सीटें भी शामिल हैं। इसके अलावा भाजपा का गढ़ माने जाने वाले जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भी पार्टी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। नादिया के 9 सीटों पर भी वोटिंग चल रही है।

इस बीच नादिया से टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबर सामने आ रही है। घटना की सूचना के बाद मौके पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। वहीं बर्दवान जिला में दो भाजपा एजेंट का सिर फोड़ दिया गया है।

घायलों को बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक बर्दवान उत्तर विधानसभा क्षेत्र के सराइटिकुरी के 72 नंबर बूथ पर भारतीय जनता पार्टी के एजेंट को बूथ में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। जिसके बाद हुई झड़प में ये घटना घटी। पार्टी ने टीएमसी पर आरोप लगाया है। हालाँकि फिलहाल टीएमसी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मीनाखान बूथ पर कथित तौर पर क्रूड बम फेंका गया। टीएमसी ने आईएसएफ कैडर पर बम फेंकने का आरोप लगाया है।

अगर भौगोलिक आधार पर देखा जाए तो इस चरण में उत्तरी बंगाल की 13 सीटों का फैसला होना है, जो बीजेपी के गढ़ के रूप में देखी जा रही है। वहीं दक्षिणी बंगाल की सीटों पर तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रभाव मजबूत है। दक्षिणी बंगाल की कुछ सीटों पर सीपीएम भी ताकत दिखा सकती है।

चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी सत्ताधारी तृणमूल के खिलाफ लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है। वहीं टीएमसी की तरफ से बीजेपी को ‘बाहरी’ ठहराने की कोशिश की गई है। इस चरण में कुल 319 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है, जिसमें 39 महिलाएँ भी शामिल हैं।

ये हैं हाईप्रोफाइल कैंडिडेट

हाईप्रोफाइल प्रत्याशियों की बात करें तो दमदम सीट से टीएमसी के प्रत्याशी और राज्य सरकार में मंत्री ब्रत्य बासू शामिल हैं। उनके सामने सीपीएम ने पलाश दास तो बीजेपी ने बिमल शंकर नंदा को उतारा है। वहीं कमारहाटी सीट से टीएमसी के हैवीवेट प्रत्याशी मदन मित्रा मैदान में हैं। उनके सामने बीजेपी के अनिंद्य राजू बनर्जी हैं तो सीपीएम की तरफ से सायनदीप मित्रा हैं।

बिधान नगर सीट पर टीएमसी के सुजीत बोस और बीजेपी के सब्यसाची दत्त में मुकाबला है। वहीं राजारहाट सीट से टीएमसी ने सिंगर अदिति मुंशी को मैदान में उतारा है। उनके सामने पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता सामिक भट्टाचार्य हैं।

दार्जिलिंग में इस बार चुनावी समीकरण 2019 के मुकाबले 2021 में पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। इसकी वजह है गोरखा जनमुक्ति मोर्चा। विमल गुरुंग के नेतृत्व में मोर्चा ने इस बार टीएमसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। जबकि साल 2019 में मोर्चा ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। दार्जिलिंग जिला के सिलीगुड़ी में वाम मोर्चा के स्टार उम्मीदवार वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य भी ताल ठोक रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में भारी मतदान करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके मतदाताओं से अपील की है। पीएम ने ट्वीट में लिखा है कि वो अपील करते हैं कि मतदाता बड़ी संख्या में चुनावों के लिए मतदान करें। इसके साथ ही उन्होंने पहली बार मतदान करने वालों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अनुरोध किया है।

अकेले गाड़ी में मास्क… हँसी आती है तो डरिए, सिंगल नहीं डबल मास्क पहनिए: पढ़िए बेस्ट मेडिकल जर्नल के 10 सबूत

विश्व के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक शोध पत्र में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस हवा से फैलता है। जर्नल में यह कहा गया है कि कोविड-19 के वायरस SARS-CoV-2 के हवा से फैलने के पर्याप्त सबूत हैं। हालाँकि, जर्नल में यह कहा गया है कि अभी तक वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस वायरस के हवा के माध्यम से न फैलने के पर्याप्त सबूत नहीं दे पाए हैं लेकिन जर्नल में प्रकाशित शोध में दिए गए सबूत काफी हैं यह बताने के लिए कि कोरोना वायरस हवा के माध्यम से फैल रहा है और यही कारण है कि विश्व भर में उसके प्रसार को रोकने के सभी उपाय असफल हो रहे हैं।

जर्नल में कोरोना वायरस के हवा के माध्यम से प्रसारित होने के विषय में कहा गया है कि किसी भी वायरस के हवा के माध्यम से संचरण को प्रत्यक्ष तौर पर सबके सामने तो नहीं दिखाया जा सकता है किन्तु वायरस के संचरण के तरीके, मानवीय व्यवहार, भौतिक परिस्थितियों और अब तक के अनुभव के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि SARS-CoV-2 मुख्यतः और ‘प्रारंभिक’ रूप से हवा के माध्यम से फैलता है।

जर्नल में पहले सबूत के तौर पर सुपर-स्प्रेडर इवेंट्स को आधार बनाया गया है। इसमें कागिट चोयर ईवेंट के बारे में बताया गया है जहाँ एक संक्रमित व्यक्ति के कारण 53 व्यक्ति संक्रमित हुए थे। ईवेंट के बारे में की गई रिसर्च से यह पता चला कि ईवेंट में मौजूद लोग न तो एक दूसरे से मिले और न ही एक दूसरे के संपर्क में आए लेकिन फिर भी 53 लोगों का कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाना यह बताता है कि संक्रमण हवा के माध्यम से फैलता है।

दूसरे सबूत के तौर पर द लैंसेट में कुछ क्वारंटीन केंद्रों का उदाहरण दिया गया, जहाँ अलग-अलग कमरों में क्वारंटीन किए गए लोगों में SARS-CoV-2 का संक्रमण बिना संपर्क में आए पाया गया। यह वायरस के लॉन्ग रेंज ट्रांसमिशन का एक उदाहरण है।

जर्नल में कोरोना वायरस के हवा के माध्यम से प्रसारित होने के विषय में बिना लक्षण वाले मरीजों को प्रमुख आधार बनाया गया है। जर्नल में कहा गया है कि बिना लक्षण वाले मरीज न तो खाँसते हैं और न ही छींकते हैं। ऐसे में मात्र उनके बोलने से जो ड्रॉपलेट उनके मुँह से निकलती है वह संक्रमण के विस्तार का एक बड़ा कारण है और यह भी एक तथ्य है कि बिना लक्षण वाले मरीज ही दुनिया के कुल संक्रमणों के मामलों में से 59% केस में संक्रमण का मुख्य कारण बने।

जर्नल में SARS-CoV-2 के हवा के माध्यम से संचरण को साबित करने के लिए जो चौथा बिन्दु दिया गया है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार आउटडोर के मुकाबले इनडोर वातावरण में अधिक है लेकिन यदि इनडोर परिस्थितियों में वेंटिलेशन का उपयोग किया जाए तो संक्रमण की यह दर कम हो जाती है। 

कोरोना वायरस का संक्रमण अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी तेजी से हुआ। इसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि हालाँकि दुनिया भर में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण को रोकने के कई उपाय हुए जैसे, प्रत्यक्ष संपर्क से बचने के लिए पीपीई किट और अन्य ऐसे ही तकनीकी उपाय। लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण का पाया जाना यह बताता है कि उन केंद्रों में संक्रमण हवा के माध्यम से हुआ।

इसी शृंखला में जो छठवाँ सबूत दिया गया, वह काफी चौंकाने वाला था। कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के कमरे और कार से लिए गए अलग-अलग हवा के सैम्पल में सक्रिय SARS-CoV-2 वायरस मिला, जो तीन घंटे तक संक्रमणशील बना रहा। इसके लिए बाकायदा लैब में प्रयोग किया गया। हालाँकि जर्नल में यह कहा गया है कि हवा के सैंपल को इकट्ठा करके उसमें उपस्थित वायरस के बारे में अध्ययन करना बहुत ज्यादा कठिन है।

जर्नल में हवा में कोरोना वायरस की उपस्थिति को साबित करने के लिए सातवें सबूत के तौर पर अस्पतालों और अन्य इमारतों का उदाहरण दिया। जर्नल में बताया गया है कि ऐसे स्थानों पर जहाँ कोविड-19 के मरीज थे, वहाँ ऊँचे स्थानों पर लगे एयर फिल्टर्स और बिल्डिंग डक्ट्स में SARS-CoV-2 वायरस की उपस्थिति हवा के माध्यम से उसके संचरण की पुष्टि करती है।

आठवें सबूत के रूप में द लैंसेट में जानवरों का उदाहरण दिया गया जहाँ एक संक्रमित जानवर के पिंजरे को दूसरे असंक्रमित जानवर के पिंजरे से एयर डक्ट के माध्यम से जोड़ा गया। इस प्रयोग में SARS-CoV और SARS-CoV-2 वायरस का एयर ट्रांसमिशन साबित हुआ।

जर्नल में प्रकाशित शोध में नौवें और दसवें बिन्दु में कोरोना वायरस के संबंध में हुए अब तक के प्रयोगों पर प्रश्न उठाए गए हैं। नौवें बिन्दु में कहा गया है कि अभी तक कोई भी स्टडी पूरी तरह से यह साबित नहीं कर पाई है कि कोरोना वायरस हवा से नहीं फैलता। कई लोग किसी संक्रमित मरीज के संपर्क में आने के बाद भी संक्रमित नहीं हुए लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं हुआ कि SARS-CoV-2 हवा के माध्यम से नहीं फैलता क्योंकि दोनों को आपस में जोड़ने का कोई तर्क ही नहीं है। किसी के संक्रमित न होने के कई अन्य कारण हो सकते हैं।

दसवें बिन्दु में यह कहा गया है कि चूँकि यह संक्रमण संक्रमित मरीज के द्वारा साँस लेने से उत्पन्न हुई ड्रॉपलेट्स के कारण फैल रहा है, अतः आसानी से इसे सम्पर्कशील संक्रमण घोषित कर दिया गया। श्वसन के द्वारा उत्पन्न हुई ड्रॉपलेट्स और हवा में मौजूद एरोसॉल के मध्य अंतर करने की विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से अभी भी कोरोना वायरस के संक्रमण के माध्यम पर पुख्ता परिणाम नहीं दिए जा सके हैं।

जर्नल में कहा गया है कि हालाँकि वर्तमान में मास्क, सैनिटाइजर, वेंटिलेशन और स्वच्छता जैसे कई उपाय किए जा रहे हैं, जो इनडोर और आउटडोर दोनों परिस्थितियों के लिए सही हैं लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हवा के माध्यम से फैलने वाले कोरोना वायरस के लिए अलग उपाय करने होंगे। इसके लिए जर्नल में मास्क की बेहतर गुणवत्ता, एयर फिल्टरेशन, वेंटिलेशन और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए और भी आधुनिक और बेहतर उपायों की वकालत की गई है। साथ ही अधिक समय तक खुले में न रहने की सलाह भी दी गई है।

जर्नल में विभिन्न देशों की जिम्मेदार संस्थाओं, सरकारों और डबल्यूएचओ आदि से यह माँग की गई हैं कि अब वो SARS-CoV-2 वायरस के विषय में अपनी नीतियों को बदलें और यह स्वीकार करें कि कोरोना वायरस हवा के माध्यम से भी मुख्य रूप से फैलता है।

Note: यह लेख मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित हुए शोध पर आधारित है। सभी दावों की पुष्टि के लिए ‘द लैंसेट’ में लेख को विस्तार से पढ़ा जा सकता है।   

शेखर गुप्ता के द प्रिंट का नया कारनामा: कोरोना संक्रमण के लिए ठहराया केंद्र को जिम्मेदार, जानें क्या है सच

अपने आप को हर विषय का ज्ञाता समझने वाले दि प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता ने इस बार बताने की कोशिश की है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। दि प्रिंट के 50WordEdit वाले शीर्षक के जरिए शेखर गुप्ता ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने कोरोना प्रबंधों में भारत को अखंड मानकर गलती की। 

उनका कहना ये भी है कि मोदी सरकार ने शुरू में सबके लिए एक तरह का रास्ता अपनाते हुए हर राज्य को उनका फरमान मानने के लिए मजबूर किया और उनसे (राज्यों से) वो अधिकार भी छीन लिए कि वह महामारी के समय में अपने राज्य की वास्तविकता और जरूरत के हिसाब से फैसले ले सकें।

अब देखिए, इस 50wordedit का सबसे बड़ा फायदा ये है कि दि प्रिंट अपने फर्जी के दावे, बिना किसी सबूत के पब्लिश कर सकता है जैसा कि उन्होंने इस हालिया पोस्ट में किया। यहाँ उन्होंने बिना कोई बात विस्तार से समझाए बस भारत सरकार की गलती बता दी, जबकि, सच ये है कि कोरोना महामारी की शुरुआत में भले ही भारत सरकार ने पूरे देश में एक साथ हर राज्य में लॉकडाउन लगाया, मगर कुछ ही समय में सरकार ने हर राज्य को अपने हिसाब से फैसले लेने का अधिकार भी दे दिया।

लॉकडाउन खुलते ही गृह मंत्रालय ने हर राज्य को उनकी जरूरतों के हिसाब से एक्शन लेने के अधिकार दिए और राज्य सरकारों ने भी उसी हिसाब से ये फैसला लिया कि वह प्रदेश में क्या करेंगे और क्या नहीं। राज्य सरकार के फैसलों का ही नतीजा था कि हर राज्य में अलग-अलग समय पर स्कूल कॉलेज खुले और अलग-अलग पाबंदियाँ लगीं।

जानकारी के लिए बता दें कि स्वास्थ्य संबंधी हर मामला राज्य सरकार का होता है, केंद्र का नहीं। राज्य सरकारें ही हर प्रकार के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होती है। केंद्र, बस इस मामले में राज्य की बाहरी तौर पर मदद करती है। कोरोना काल में भी यही हुआ। राज्य सरकारें अपना फैसला ले सकती थीं। मरीजों के लिए नई सुविधाओं का इंतजाम कर सकती थीं। मोदी सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था। लेकिन फिर भी दि प्रिंट का ऐसा विश्लेषण! वाकई समझ से बाहर है।

राज्य के पास टेस्टिंग से लेकर लोगों को क्वारंटाइन करवाने के लिए अपनी पॉलिसी शुरू से थी। इसी के चलते जगह जगह नई सुविधाएँ निर्मित की गई और जरूरत पड़ने पर राज्य ने उनका इस्तेमाल किया। कई जगहों पर अस्थायी अस्पताल तक बने और कई स्थानों कोविड-केयर संस्थान बनाया गया… फिर आखिर दि प्रिंट कौन से फरमान की बात कर रहा है जिसे मोदी सरकार ने सब पर मढ़ा।

दि प्रिंट के दावे के उलट हकीकत ये है कि केंद्र सरकार, लगातार सभी राज्यों से संपर्क करती रही। दर्जनों बैठकें तो स्वयं पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ ही की है। हालिया बैठक की बात करें तो ये 8 अप्रैल को हुई थी, जिसमें महाराष्ट्र सीएम उद्धव ठाकरे और दिल्ली सीएम केजरीवाल अपने ही ख्यालों में डूबे नजर आ रहे थे, जबकि ममता बनर्जी ने तो बैठक में भाग लेना ही अनिवार्य नहीं समझा।

इसके बाद यदि याद हो तो केंद्र सरकार ने पिछले एक साल में कोरोना के कारण राज्यों की तमाम माँगे स्वीकारी। सबके पहले केंद्र सरकार ने संक्रमण को रोकने के लिए आवाजाही पर रोक लगाई थी, लेकिन उद्धव सरकार और केजरीवाल सरकार ने इस पर तमाम सवाल उठाए, बाद में केंद्र सरकार ने इस पर सुनवाई करते हुए स्पेशल ट्रेन चलवाई ताकि प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्य चले जाएँ। नतीजा आज हमारे सामने है, स्थिति और बदतर हो रही है। 

कोरोनाकाल के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं है कि मोदी सरकार ने राज्य सरकारों को उनके प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएँ देने से रोका। इसलिए शेखर गुप्ता का ये 50 वर्ड एडिट और कुछ नहीं बल्कि सिर्फ एक प्रयास है ताकि महाराष्ट्र सरकार की नाकामयाबियों पर पर्दा डालें। पूरे देश में एक्टिव केसों में 45 प्रतिशत केस केवल महाराष्ट्र से हैं और ये सब सिर्फ ठाकरे सरकार की लापरवाहियों के कारण। मगर, वामपंथियों को तथ्यों से क्या? वह फिर भी वामपंथी अपने बेस्ट सीएम को सराहने से बाज नहीं आ रहे और सारी स्थिति का ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ना चाहते हैं।

ब्रायन के वो तीन बयान जो बताते हैं TMC बंगाल में हार रही है: प्रशांत के बाद डेरेक ओ’ब्रायन की क्लब हाउस में एंट्री

एक ऑनलाइन कंटेन्ट क्रिएशन ऐप्लीकेशन (जिसे क्लब हाउस या स्पेस भी कहा जाता है) पर चर्चा करते हुए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने इस बात को नजरअंदाज किया कि उनकी चर्चा सार्वजनिक तौर पर सुनी जा रही है। इस लापरवाही में किशोर ने यह स्वीकार कर लिया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) का आंतरिक सर्वे पश्चिम बंगाल चुनावों में भाजपा को एक बड़ा बहुमत दे रहा है। हालाँकि अपने कुछ करीबी ‘पत्रकारों’ से बेपरवाह चर्चा करते हुए प्रशांत किशोर को जब यह पता चला कि चर्चा को सार्वजनिक तौर पर सुना जा रहा है तब उन्होंने अपनी बात को पलट दिया और ममता बनर्जी की बंगाल में वापसी की बात करने लगे। अब टीएमसी के ही डेरेक ओ’ब्रायन भी क्लब हाउस पर कुछ ‘लिबरल विचारकों’ के साथ चर्चा में शामिल हुए। ऐसा अनुमान है कि प्रशांत किशोर द्वारा की गई गलती को सुधारने के लिए ब्रायन क्लब हाउस पर आए थे।

क्लब हाउस की इस बातचीत पर जो उपस्थित थे उन्होंने बताया कि ब्रायन ने पूरी कोशिश की यह बताने के लिए कि टीएमसी बंगाल चुनावों को पूरी तरह से जीतने की स्थिति में है किन्तु उनकी कई बातों से ऐसा भी लग रहा था कि टीएमसी बंगाल के अंदर भाजपा से हारकर सत्ता खोने वाली है।

कॉन्ग्रेसी ट्रोल साकेत गोखले से बात करते हुए डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि टीएमसी के लिए भाजपा कभी प्रमुख चिंता का विषय नहीं थी बल्कि टीएमसी समेत सभी विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपना प्रमुख विरोधी मानते हैं और उन्हें हटाने का प्रयत्न करते हैं।

लंबे समय तक ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी, पीएम मोदी और अमित शाह को बाहरी कहती रहीं और यह दावा करती रहीं कि बंगाल में उनकी लोकप्रियता बिल्कुल भी नहीं है लेकिन ब्रायन के इस एक वक्तव्य ने कि टीएमसी और अन्य विपक्षी पार्टियों का पूरा फोकस पीएम मोदी और शाह हैं, पूरी सच्चाई कह दी। सच तो यह है कि विपक्षी दलों के द्वारा बेफिजूल विवादों, झूठे भ्रष्टाचार के आरोपों, अलगाववादी प्रवृत्तियों, इस्लामिक कट्टरपंथ और खालिस्तानी षड्यंत्रों के उपयोग के बाद भी देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता वैसी ही बनी हुई है।

शायद यही वह पहलू है जिसके कारण टीएमसी और डेरेक ओ’ब्रायन चिंता में है और उनकी चिंता का विषय है एक विशाल जन समुदाय में पीएम मोदी की अथाह लोकप्रियता। अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण करने वाले विपक्षी दलों को भय इस बात का है कि पीएम मोदी को लेकर मतदाताओं में जो गर्व का भाव है वह उनके सभ्यतागत संस्कारों और हिन्दू पहचान के रूप में उभर कर सामने आया है। इसके बाद यही तथ्य सामने आता है कि पश्चिम बंगाल में बढ़ती हिन्दुत्व की लहर, जो कि भाजपा की ही सहायता करने वाली है, के बाद भी डेरेक ओ’ब्रायन यही कहेंगे कि भाजपा से पहले पीएम मोदी और अमित शाह को हटाने की जरूरत है। 

इसके बाद डेरेक ओ’ब्रायन का एक और चौंकाने वाला बयान आता है कि भले ही सीपीआई (एम) ने उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की हत्या की हो लेकिन फिर भी वो भाजपा की तुलना में बेहतर विपक्षी होंगे। इसका यही अर्थ हुआ कि ब्रायन के अनुसार एक पार्टी जिसने नरसंहार किया हो वह उस पार्टी से बेहतर है जो हिंदुओं के अंदर चेतना जागृत करने और उन्हें एक करने का कार्य करती हो। बल और भय की सहायता से शासन करने वाले टीएमसी और सीपीआईएम के लिए यह मायने नहीं रखता कि हिंदुओं पर कितना अत्याचार हुआ अथवा सत्ता में बने रहने के लिए कितने नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उनके लिए आवश्यक है कि राजनैतिक शक्ति उन्हीं के साथ बनी रहे बजाय उस पार्टी के जो जनता के सहयोग और अपार समर्थन के बाद जीत हासिल करती है।

डेरेक ओ’ब्रायन का तीसरा बयान उनके भय को और भी पुख्ता कर देता है। ब्रायन ने कहा कि टीएमसी ने चुनाव आयोग से यह निवेदन किया है कि बंगाल में बाकी बचे हुए चुनाव को एक ही चरण में निपटा दिया जाए। ममता बनर्जी ने कहा कि यह अनुरोध कोरोनावायरस की दूसरी वेव के चलते किया गया है।  

क्लबहाउस में चर्चा के दौरान डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि बाकी बचे चुनाव को एक ही चरण में करवाने की माँग को चुनाव आयोग नकार सकता है किन्तु कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए चुनाव प्रचार और रैलियों को प्रतिबंधित कर सकता है। हालाँकि ब्रायन यह कभी भी नहीं चाहेंगे क्योंकि यदि रैलियाँ और चुनाव प्रचार बंद हुआ तो इसका फायदा भाजपा को ही होगा क्योंकि भाजपा सोशल मीडिया में काफी मजबूत है और डिजिटल माध्यमों से चुनाव प्रचार में भाजपा का कोई सानी भी नहीं है।

डेरेक ओ’ब्रायन का यही मानना है कि चुनाव प्रचार को प्रतिबंधित करके चुनाव आयोग एक तरह से भाजपा की ही सहायता करेगा। भले ही टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी चुनाव को एक ही चरण में करवाने के पक्ष में हो लेकिन वो कभी भी चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं करेंगी क्योंकि उन्हें इस बात का भय है कि ऐसा करने से टीएमसी को नुकसान होगा। भले ही चुनावी रैलियों से कोविड-19 का खतरा बढ़ जाए।

डेरेक ओ’ब्रायन के इन बयानों से यही ज्ञात होता है कि बंगाल में टीएमसी की हार के विषय में प्रशांत किशोर ने जो कहा था वह कभी भी गलत था ही नहीं।  

डेरेक ओ’ब्रायन के पहले क्लब हाउस में प्रशांत किशोर का कबूलनामा :

7 अप्रैल को क्लबहाउस की चर्चा का एक ऑडियो क्लिप ट्विटर पर वायरल हुआ था जिसमें प्रशांत किशोर ने लुटियन्स के पत्रकारों से चर्चा करते हुए बंगाल में भाजपा की जीत की बात स्वीकार की थी। प्रशांत किशोर को अंदाजा भी नहीं था कि उनकी यह बात रिकॉर्ड की जा रही है। इसी लापरवाही में किशोर ने पूरी चुनावी गणित सबके सामने खोल कर रख दी। उन्होंने बताया कि मोदी और हिन्दुत्व फैक्टर के कारण भाजपा बंगाल में बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी।

इसके अलावा 27% अनुसूचित जाति, 75% मतुआ समुदाय और लगभग एक करोड़ हिन्दी भाषी मतदाताओं का सहयोग भी भाजपा को प्राप्त होगा जिसके कारण बंगाल में भाजपा की जीत सुनिश्चित है। किशोर ने यह भी कहा था कि शुभेन्दु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने अथवा उनके खुद के टीएमसी के साथ होने से चुनाव परिणामों पर कोई अंतर नहीं आया है।

प्रशांत किशोर ने कहा था कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनावों में तीन अंकों में सीट प्राप्त करने में सफल हो जाति है तो वह राजनीतिक क्रियाकलापों से सन्यास ले लेंगे और किसी के लिए भी किसी प्रकार का कोई राजनीतिक कार्य नहीं करेंगे।

ऑडियो- ‘लाशों पर राजनीति, CRPF को धमकी, डिटेंशन कैंप का डर’: ममता बनर्जी का एक और ‘खौफनाक’ चेहरा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पाँचवे चरण के मतदान से पहले सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के नेता पार्थो प्रतिम रॉय की बातचीत का कथित ऑडियो क्लिप वायरल हो रहा है।  

शुक्रवार (16, अप्रैल) को पत्रकार पायल मेहता ने यह कथित ऑडियो क्लिप ट्विटर पर शेयर किया। इस क्लिप में ममता बनर्जी को सीआरपीएफ के जवानों को टीएमसी के चार उपद्रवियों को मारने के लिए जेल में डालने की बात कहते हुए सुना जा सकता है। इन उपद्रवियों ने सीआरपीएफ के जवानों के हथियारों को छीनने का प्रयास किया था। इसके अलावा ममता को रॉय से यह भी कहते सुना गया कि वो जनता की संवेदना और वोट हासिल करने के लिए लाशों के साथ एक राजनैतिक रैली का आयोजन करें।  

ममता ने कहा, “पार्थो, तुम अपना वोट डालो, फिर उसके बाद हम बैठेंगे और निर्णय लेंगे। मैं सीआरपीएफ के जवानों समेत सभी को गिरफ्तार करवाऊँगी। सभी लाशों को तैयार रखना। कल इन्हीं लाशों के साथ एक रैली की जाएगी। उनके परिवार वालों को बता दो कि लाशें उन्हें नहीं सौंपी जा सकती हैं। सब कुछ ठीक हो जाएगा। तुम अपना वोट डालो और शांति रखो। वो यह सब इसलिए कर रहे हैं जिससे तुम अपना वोट न डाल सको।“

इसके बाद ममता ने सीआरपीएफ के द्वारा मारे गए उपद्रवियों के राजनैतिक संबंधों के बारे में पूछताछ की। यह जानने के बाद कि मारे गए उपद्रवी उन्हीं की पार्टी के सदस्य थे, ममता ने रॉय को एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी। हालाँकि, ममता ने रॉय से कहा कि वह एफआईआर न करवाएँ बल्कि वह खुद मारे गए उपद्रवियों के परिवार वालों से चुनाव के बाद वकील की सहायता से एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहेंगी। ममता ने यह भी कहा कि फिलहाल पुलिस भी उनके परिवार वालों का कोई बयान नहीं लेगी।

टीएमसी प्रमुख ने कहा, “हमें वकीलों की सहायता से दोषियों के खिलाफ एक मजबूत केस दर्ज कराना होगा। अब बेफिक्र होकर वोट करो। अपने पोलिंग एजेंट्स पर भरोसा रखो। बूथ पर जाओ और लोगों को बताओ कि सुरक्षा बलों ने ऐसा इसलिए किया जिससे लोग वोट डालने से डर जाएँ। बताओ कि वो (भाजपा) एनपीआर लागू करने और डिटेन्शन कैंप बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।“

भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने ऑडियो क्लिप पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनकी कुटिलता और लाशों पर राजनैतिक नैरेटिव बनाने की इच्छा को दिखाता है।  

ममता बनर्जी के घेराव के आह्वान के बाद भीड़ ने किया था सीआईएसएफ के जवानों पर हमला :

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान के दौरान सितलकुची के जोरपाटका में हिंसक भीड़ ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बलों (सीआईएसएफ) की एक टीम पर हमला कर हथियार छीनने का प्रयास किया था। जिसके बाद आत्मरक्षा में सीआईएसएफ की टीम को मजबूरी में ओपन फायर करना पड़ा।

इस फायरिंग में चार उपद्रवियों मोनिरुज्जमान, हमीदुल मियाँ, नूर अल्मा मियाँ और समीउल हक की मौत हो गई थी। हालाँकि, मामले को राजनैतिक रंग देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि केन्द्रीय बलों ने वोटिंग के लिए लाइन में खड़े व्यक्तियों पर गोली चलाई है। ममता बनर्जी द्वारा केन्द्रीय सुरक्षा बलों के घेराव के आह्वान के बाद यह घटना घटी।

कूच बिहार एसपी ने अराजक तत्वों के खिलाफ सीआईएसएफ की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा था कि कार्रवाई ‘आत्मरक्षा’ में की गई। उन्होंने कहा कि 300-350 लोगों की भीड़ ने सीआईएसएफ की टीम पर हमला किया था और उनके हथियार छीनने की कोशिश की। जिसके बाद टीम उपद्रवियों पर गोली चलाने के लिए मजबूर हो गई।

इसके अलावा उसी दिन उपद्रवियों के द्वारा एक युवक आनंद बर्मन की हत्या कर दी गई थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कैमरे के सामने आकर यह कहा था कि आनंद को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह भाजपा के लिए काम करता था।

नोएडा में हिंदू धर्म अपनाकर मुस्लिम महिला ने की प्रेमी से शादी, कहा- नहीं जाऊँगी घर पति के साथ रहना है

उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 9 से 2 महीने पहले गायब होने वाली मुस्लिम महिला मंगलवार को नोएडा सेक्टर 20 पुलिस थाने पहुँची। पूछताछ में महिला ने कहा कि उसने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाकर अपने प्रेमी से शादी कर ली है और अब वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है, उसे वापस अपने घर नहीं जाना। स्थानीय कोर्ट ने भी इसके बाद उसे इजाजत दे दी कि वो जहाँ चाहे रह सकती है।

गौरतलब है कि महिला के गायब होने के बाद उसके परिजनों ने उसके पति पर उसका अपहरण कर शादी करने का आरोप लगाया था। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बीते 22 फरवरी को महिला संदिग्ध परिस्थितियों में अपने घर से गायब हो गई थी।

इसके बाद लड़की के परिवार वालों ने उसकी तलाश की, लेकिन जब उन्हें पता चला कि वो अपने हिंदू प्रेमी के साथ घर से भाग गई है तो उसके परिवार वालों ने लड़के के खिलाफ केस दर्ज कराया। साथ ही ये भी कहा कि महिला की जान खतरे में है।

पुलिस के मुताबिक महिला अपने पति के साथ लंबे समय से प्रयागराज में रह रही थी। अधिकारियों ने दंपति से उनके परिवारों से समझौता करने को भी कहा, लेकिन दोनों ने इससे इंकार कर दिया। महिला ने बताया कि वो युवक को जानती है और वह उससे 12 साल पहले ही शादी कर चुकी है।

इस मामले में नोएडा सेक्टर 20 के एसएचओ मनीष चौहान ने कहा कि महिला ने पुलिस और कोर्ट को बताया है कि उसे अपने पति के साथ ही रहना है। महिला ने स्पष्ट किया है कि वो अपने परिवार के साथ नहीं जाएगी और अपने पति के साथ रहेगी।

टाइम्स पत्रकार शिखा सलारिया ने इस घटना को शेयर करते हुए बताया कि अमित से शादी करने के लिए आफरीन बनी आनंदी। शिखा ने लिखा लापता मुस्लिम महिला शादी के 2 माह बाद नोएडा पुलिस के सामने आई और कहा कि वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती है। वहीं उसके परिवार का कहना था युवक ने उसका अपहरण किया।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार और रैलियों के लिए तय की गाइडलाइंस, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

शुक्रवार (16, अप्रैल) को चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में सर्वदलीय बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि शाम को 7 बजे से सुबह 10 बजे तक कोई चुनाव प्रचार नहीं होगा। इसके साथ ही यह निर्णय लिया गया कि अगले तीन चरण के चुनावों में प्रत्येक चरण में मतदान के 72 घंटे पहले चुनाव प्रचार रोक दिया जाएगा। कोविड-19 के बढ़ते मामलों और पश्चिम बंगाल में हो रहे चुनावों के दौरान आयोजित रैलियों में उमड़ती हुई भीड़ को देखते हुए चुनाव आयोग ने यह निर्णय लिया है।

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले चुनाव में अब चार चरण ही बाकी हैं जिनमें से कल (17, अप्रैल) को चौथे चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा। ऐसे में सभी पार्टियाँ चुनाव प्रचार के लिए अपना पूरा जोर लगा रही हैं। चुनावी रैलियों में उमड़ती हुई भारी भीड़ और देश भर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग से उचित कार्रवाई की माँग की जा रही थी। इसी क्रम में आज (16, अप्रैल) को चुनाव आयोग ने सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। इसमें चुनाव प्रचार और चुनावी रैलियों के दौरान कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार को रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।

चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि शाम को 7 बजे से सुबह 10 बजे तक किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार नहीं होगा। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक चरण के मतदान से 72 घंटे पहले ही चुनाव प्रचार रोक दिया जाएगा।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि प्रत्याशियों और राजनैतिक दलों को कोविड गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन करना होगा अन्यथा गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर कानूनी फ्रेमवर्क के आधार पर अपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

रैलियों में आने वाली भीड़ की संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए चुनाव आयोग ने आदेशित किया है कि पब्लिक मीटिंग अथवा रैलियों में लोगों को मास्क और सैनिटाइजर वितरित करने की जिम्मेदारी आयोजक अथवा प्रत्याशी की होगी। मास्क तथा सैनिटाइजर का खर्च आयोजक को स्वयं वहन करना होगा और इसे चुनावी खर्च की तय सीमा में ही जोड़ा जाएगा।

इसके साथ ही चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि स्टार कैम्पेनर्स, नेता, आयोजक और प्रत्याशियों को स्वयं आगे आकर लोगों के सामने उदाहरण पेश करना चाहिए और रैलियों में शामिल लोगों को मास्क पहनने, सैनिटाइजर का उपयोग करने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

हालाँकि, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनकी पार्टी चुनाव आयोग से यह माँग कर रही हैं कि शेष बचे चुनाव को एक ही चरण में संपन्न कराया जाए लेकिन फिलहाल चुनाव आयोग द्वारा इस पर कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है।

अमेरिका: इंडियानापोलिस एयरपोर्ट के पास अंधाधुंध फायरिंग में 8 लोगों की मौत, 60 से अधिक घायल

अमेरिका के इंडियानापोलिस शहर में एक हथियारबंद हमलावर ने फेड एक्स कंपनी के वेयर हाउस में अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। इस हमले के बाद हमलावर ने आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन बताया जा रहा है कि वह जीवित बच गया।

गुरुवार देर रात 11 बजे इस वारदात के बारे में इंडियानापोलिस मेट्रोपोलिटन पुलिस की प्रवक्ता जेनी कुक ने बताया कि ये घटना एयरपोर्ट के पास मिराबेल रोड 8951 पर स्थित फेड एक्स कंपनी के वेयर हाउस में हुई। इसके बाद नाराज लोगों ने प्रदर्शन भी किया।

पत्रकार मैथ्यू कीस के मुताबिक, इस हमले में 60 लोग घायल हुए, जिनमें 20 को गोली लगने से चोट आई। पुलिस सूत्रों ने कहा कि करीब 10 लोगों की हालत नाजुक है और 20 लोग गंभीर हैं। इसके अलावा करीब 30 लोग अन्य घायल हुए हैं। मैथ्यू कीस के अनुसार हमलावर ने नरसंहार के बाद खुद को भी कई गोलियाँ मार ली थी।

उल्लेखनीय है कि मामले की जानकारी देते हुए इंडियानापोलिस के पुलिस प्रवक्ता जेन कुक ने हताहतों की संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने यह जरूर बताया कि गोली से लोग घायल अवश्य हुए हैं। वहाँ पहुँचे अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमलावर ने खुद को खत्म कर लिया और फिलहाल लोगों के लिए किसी तरह का खतरा नहीं है। हमलावर की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। मामले की छानबीन की जा रही है।

फेड एक्स ने कहा- सुरक्षा ही हमारी प्राथमिकता

घटना के बाद फेड एक्स कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा, “हम इंडियानापोलिस हवाई अड्डे के पास हमारे फेड एक्स वेयर हाउस में हुई गोलीबारी की घटना से अवगत हैं। सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, हताहत लोगों के साथ हमारी संवेदनाएँ हैं। हम अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं और पत्रकारों की सहायता कर रहे हैं। ”

चश्मदीदों ने बयाँ की नरसंहार की कहानी

वारदात के दौरान वहाँ मौजूद टिमोथी बोलेट और उनके दोस्त जेरेमिया मिलर इस घटना के चश्मदीद हैं। ये दोनों फेड एक्स के वेयर हाउस में ही कार्य करते हैं। उस नरसंहार को याद करते हुए जेरेमिया ने बताया, “उस दौरान हम सभी स्मोक लाउंज में बैठकर खा रहे थे। तभी हमने दो गन शॉट्स सुने। हमें लगा यह एक कार है। हमने नजरअंदाज कर दिया। हमने तब तीन शॉट सुने और सोचने लगे कि यह एक इंजन की समस्या थी। फिर, हमने लगभग 6-10 शॉट सुने। ”

उन्होंने कहा, “मैं खड़ा हुआ और खिड़की की तरफ गया तो देखा कि एक आदमी ने सब-मशीन गन / स्वचालित राइफल से खुले में गोलीबारी शुरू कर दी है। मैं तुरंत नीचे झुका और डर गया। मेरे दोस्त की माँ आईं और उन्होंने हमें कार में बैठने को कहा। हम वर्तमान में अपने सहकर्मियों को काम पर नहीं जाने के लिए कह रहे हैं और उन्हें इस घटना के बारे में बता रहे हैं। ”

परमिंदर सिंह नाम के एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उनकी भतीजी उस दौरान कार की ड्राइवर सीट पर थी, जिस वक्त ये फायरिंग हुई। परमिंदर कहते हैं, ” मेरी भतीजी हमलावर को नहीं जानती थी। उसके बाएँ हाथ में गोली लगी थी और उसे अस्पताल ले जाया गया।” सिंह ने कहा कि फिलहाल, उनकी भतीजी अस्पताल में है और स्वस्थ है।

अमेरिका में 17 दिन में फायरिंग की दूसरी घटना

अमेरिका में बीते 17 दिन में फायरिंग की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 31 मार्च को दक्षिणी कैलिफोर्निया में हुई गोलीबारी में 4 की मौत हो गई थी। इसमें एक बच्चा भी शामिल था। उससे पहले 22 मार्च को बाउल्डर में सुपर मार्केट में अंधाधुंध फायरिंग में भी 10 लोगों की मौत हो गई थी।