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‘भारत में अगस्त तक कोरोना से 50 लाख लोग मरेंगे’: NDTV ने Harvard ‘कोविड विशेषज्ञ’ के नाम पर फैलाया डर

देशभर में कोरोना वायरस के कहर के बीच रविवार (25 अप्रैल 2021) को NDTV ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बारे में चर्चा करने के लिए महामारी विशेषज्ञ एरिक फीगल-डिंग को टीवी पर आमंत्रित किया।

पत्रकार विष्णु सोम को दिए इंटरव्यू में एरिक फीगल-डिंग ने दावा किया, “भारत में डेटा बहुत खराब है। मौतों की संख्या ठीक से नहीं बताई जा रही है। भारत में आगामी 1 अगस्त तक लाखों लोगों की मौत हो सकती है।” उन्होंने यह पूर्वानुमान व्यक्त किया कि देश में मरने वालों की संख्या 1 मिलियन नहीं भी हो सकती है, लेकिन अगस्त तक 5 मिलियन भी पार कर सकती है। उन्होंने भारत सरकार से लोगों को मुफ्त सहायता देने और देश में कर्फ्यू लागू करने को कहा। पेशे से एक “महामारी विज्ञानी” एरिक फीगल-डिंग ने भी राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है।

NDTV के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

विशेषज्ञ ने यह भी दावा किया कि मौतों के जो आँकड़े सरकार के द्वारा जारी किए जा रहे हैं, हकीकत में श्मशान में 20 से 50 गुना ज़्यादा मौतें होती हैं। हालाँकि, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि कोविड -19 दुनिया में मौत का एकमात्र कारण नहीं है और लोग अन्य बीमारियों से भी मर सकते हैं।

आगे के संदर्भ के लिए बता दें कि भारत में हर दिन लगभग 27,000 लोग सभी कारणों से मरते हैं। वर्तमान और अगस्त के बीच तीन महीने हैं, जो लगभग 90 दिनों का है। यानी भारत में सभी कारणों से अब और अगस्त के बीच औसतन 2,430,000 लोगों की मृत्यु होगी। जबकि, विशेषज्ञ के अनुसार, अगस्त तक अकेले कोविड -19 की मौत 5 मिलियन को पार कर सकती है।

इससे पहले 16 अप्रैल को इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में महामारी विशेषज्ञ ने दावा किया कि भारत में कुल मामलों की संख्या वास्तव में दर्ज किए जा रहे आँकड़ों की 5-10 गुना अधिक हो सकती है।

एरिक फीगल-डिंग कौन हैं?

हार्वर्ड टीसी चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार, एरिक फीगल-डिंग एक जन स्वास्थ्य महामारी विज्ञानी, आहार विशेषज्ञ और हेल्थ इकोनॉमिस्ट हैं। हालाँकि, सामान्य तौर पर ये जैसे दिखते हैं उससे कहीं अधिक हैं। वह कोरोना वायरस के स्टार एक्सपर्ट के रूप में उभरे हैं। जितनी प्रसिद्धि इनकी हुई है उतनी न तो किसी स्वास्थ्य शोधकर्ता / महामारी विज्ञानी या वैज्ञानिक की भी नहीं हुई। उन्हें कोरोना वायरस पर एक रिसर्च पेपर पढ़ने का मौका मिला था, जिसमें उन्होंने पिछले साल 2020 में जनवरी में एक महामारी के प्रकोप होने की भविष्यवाणी की थी। विशेषज्ञ डिंग एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं, वह एक पुरानी बीमारी महामारी विशेषज्ञ हैं।

एक ट्वीट में (जो अब डिलीट हो गया है) उन्होंने लिखा, “HOLY MOTHER OF GOD- नया कोरोनोवायरस 3.8 है !!! कितना बुरा है कि इसका प्रजनन RO मूल्य? यह थर्मोन्यूक्लियर महामारी का खराब स्तर है – मेरे पूरे करियर में ट्विटर के बाहर कभी भी ऐसा नहीं देखा। मैं अति नहीं कर रहा हूँ। इसके बाद डिंग का ट्वीट वायरल हो गया और फॉलोवर्स की संख्या 2000 से 1,60,000 तक पहुँच गई। इसके बाद एरिक फीगल-डिंग को सीएनएन समेत दूसरे लिबरल टीवी चैनल्स कोरोना महामारी के बारे में बात करने के लिए बुलाने लगे।

उनकी प्रसिद्धि बढ़ने के बाद कई महामारीविदों ने उनकी साख पर सवाल उठाए हैं। नाम न छापने की शर्त पर, एक महामारीविज्ञानी ने उच्च शिक्षा के क्रॉनिकल को बताया कि एरिक फीगल-डिंग की संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च की पृष्ठभूमि शून्य है। उन्होंने डिंग को ‘अर्ध-सत्य अर्थात झूठ का पुलिंदा’ करार दिया। एक अन्य महामारी विज्ञानी ने खेद व्यक्त किया, “हर कोई उनसे बहुत निराश और दुखी है। हमने उसे बदनाम करने के लिए ऐसा नहीं किया है।” हार्वर्ड के महामारी विज्ञान के प्रोफेसर मार्क लिप्स्टिक (Marc Lipstisch) ने भी डिंग को अयोग्य होने के बाद भी चीप पब्लिसिटी का भूखा बताया है।

पिछले साल 19 मार्च को मार्क लिप्स्टिक ने ट्वीट किया था कि उनके जैसे महामारी विज्ञानी खुद की प्रसिद्धि के लिए मजबूत संबंधों का दोहन करने वाले चार्लटन को पसंद नहीं करते हैं। अब हटाए गए ट्वीट में उन्होंने कहा था कि डिंग का कोरोना वायरस का विश्लेषण 80% पारंपरिक ज्ञान पर आधारित था, 20 फीसदी दिखावे का विज्ञान है, जिससे 100 प्रतिशत का जन्म होता है। मार्क लिप्स्टिक ने आगे कहा, “ऊपर दिए गए प्रतिशत में जो वो कहते हैं वो गलत नहीं है। लेकिन अक्सर कुछ गलत हो जाता है कि आपको जानकारी के दूसरे हिस्सों को ढूँढना चाहिए।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एरिक फेगल-डिंग न्यूट्रिशनिस्ट से बने कोरोनो वायरस विशेषज्ञ

मार्क लिप्स्टिक ने आगे जोर दिया, “दर्जनों ऐसे अच्छे कोरोना एक्सपर्ट हैं, जिन्हें सुना जा सकता है। एरिक एक आहार विशेषज्ञ हैं। एरिक के पास महामारी विज्ञान में प्रशिक्षण है, लेकिन यह एक बड़ा क्षेत्र है। ” दिलचस्प बात यह है कि उच्च शिक्षा के क्रॉनिकल ने यह भी पाया कि एरिक फीगल-डिंग के अकादमिक लेखों में से सभी व्यायाम और आहार के स्वास्थ्य के प्रभावों पर केंद्रित है। उनका एक लिस्टेड रिसर्च पेपर पहनने योग्य उपकरणों के बारे में था, जो शारीरिक गतिविधि को ट्रैक करने में मदद कर सकता था। उनके विद्वतापूर्ण लेख बचपन का मोटापा, रेड मीट के सेवन और कैंसर के खतरे आदि के प्रभावों पर भी आधारित थे।

उनकी शैक्षणिक रुचि आहार पर फोकस थी, जिसके लिए उन्हें हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पोषण विभाग में “अवैतनिक विजिटिंग साइंटिस्ट” के रूप में नियुक्त किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि ऐसी नियुक्तियाँ लगभग एक साल तक चलती हैं। ऐसे में उन्हें कई बार विशेष ज्ञान से लैस व्यक्ति के रूप में खुद को बढ़ावा देने के लिए चेतावनी दी गई थी। हालाँकि, महामारी एरिक फीगल डिंग के लिए आपदा में प्रसिद्धि के अवसर के रूप में साबित हुई।

चेतावनी के बाद भी खुद को प्रमोट करना रखा जारी

चीजों को बदतर बनाने के लिए केवल एरिक फीगल-डिंग इकलौते नहीं हैं, जिन्होंने इंटरनेट पर सक्रिय लोगों को चेतावनी दी थी। पिछले दिनों एनपीआर से बात करते हुए, एपिडेमियोलॉजिस्ट डब्ल्यू इयान लिपकिन ने चेतावनी देते हुए कहा था, “इसका प्रकोप बहुत बड़ा होता जा रहा है। अगर हम इस वायरस से निपटना चाहते हैं तो हमें बहुत तेज़ी से आगे बढ़ना होगा।”

लेकिन, डिंग को केवल इसीलिए मान्यता मिली है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में रिसर्च पेपर के कुछ अंश को लिखा था। अपने ट्वीट में डिंग ने झूठा दावा किया था कि SARS-Covid-1 का R0 (जो 2003 में महामारी का कारण बना) 0.49 के आसपास के वास्तविक आँकड़े की तुलना में 0.49 फीसदी था। इस झूठे दावे के लिए उन्हें अपने फॉलोवर्स को ये स्पष्टीकरण देना पड़ा था कि वो संक्रामक रोग विशेषज्ञ या महामारी विशेषज्ञ नहीं थे।

जिस ट्वीट के बाद एरिक फीगल-डिंग लाइम लाइट में आए थे उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद मजबूरन डिलीट करना पड़ा। लोगों ने उन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया था। एचआईवी और कोरोनावायरस के बीच आनुवंशिक समानता का सुझाव देने के मामले में भी उन्हें अपने ट्वीट्स को डिलीट करना पड़ा था। उन्होंने एक बार वायरस के पुनः सक्रिय होने और पुन: संक्रमण की समानता को भी समाप्त कर दिया था। डिंग ने सुझाव दिया था कि एन -95 मास्क स्वास्थ्य कर्मियों को फ्लू से रोक नहीं सकते हैं और वुहान कोरोन वायरस के खिलाफ भी यह असरदार नहीं है। हालाँकि, कुछ हफ्ते बाद वह ट्विटर अभियान #मास्क4all में सबसे आगे थे।

एरिक फीगल-डिंग और ‘डैमेज कंट्रोल’ तंत्र

हार्वर्ड के महामारी विज्ञानी ने अपने दोहरे भाषणों पर कई बार फँसने के बाद उसे वाइटवॉश करने की कोशिश की है। डिंग ने कहा था, “हम सभी ने एक डिटेल या वाई एक्सिस या एक्स एक्सिस को गलत पढ़ा है। मुझे लगता है कि मैं जो कुछ भी पढ़ रहा हूँ उसके वाक्यों को जोड़कर जनता के लिए उसका अच्छा अनुवाद करने में मैं सक्षम हूँ।” एरिक फ़ीगल-डिंग ने मार्क लिप्स्टिक द्वारा की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा था, “यह दावा बहुत ही आश्चर्यजनक है कि 20 प्रतिशत दिखावे का विज्ञान है। मैं एक महामारी के बीच में इस तरह की नीचता को बढ़ावा नहीं देना चाहता।”

संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ नहीं हैं डिंग

स्क्रीन शॉट

एरिक फीगल-डिंग ने भी कहा है कि वह संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ नहीं थे और उन्होंने कभी भी खुद को गलत नहीं बताया। उन्होंने कहा कि उनका ज्ञान ‘सामान्य महामारी विज्ञानी’ के रूप में उनकी डिग्री पर आधारित है। उन्होंने अपने ट्विटर थिएट्रिक्स के बारे में बात करते हुए कहा, “मेरे बहुत से फॉलोवर्स ऐसे हैं कि जब तक आप उन्हें स्पून फीडिंग नहीं कराओ नहीं पढ़ पाते।” संक्रामक रोगों में कोई पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद, एरिक फीगल-डिंग को शीर्ष 100 हेल्थकेयर पेशेवरों की कोविड सूची में दूसरे स्थान पर रखा गया है।

उन्हें फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अध्यक्ष अली नूरी का भी काफी समर्थन मिला। नूरी ने जोर देकर कहा, “मुझे लगता है कि उनकी कुछ आलोचना उनके अपने स्टाइल की वजह से हो रही है न कि जो वो कह रहे हैं उसके कारण। यह आमतौर पर वैज्ञानिक नहीं करते हैं, लेकिन एरिक यह काम कर रहा है।” यहाँ तक ​​कि न्यूजर्सी के डेमोक्रेटिक गवर्नर फिल मर्फी ने न्यू जर्सी में हालात से निपटने के लिए डिंग की मदद लेने की कसम खाई थी।

NDTV, हार्वर्ड, और कोरोनावायरस में एक गैर-विशेषज्ञ

डिंग का अधिक मुँहफट होना, विशेषज्ञता की कमी, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के साथ उनका जुड़ाव और भारत में अगस्त तक 5 मिलियन कोविड-19 की मौत जैसे बड़े-बड़े दावों को करने की क्षमता ने उन्हें NDTV का आदर्श अतिथि बनाया। ऐसे भारतीय जिन्हें अपनी समस्याओं को समझने और उसके हल और देश को बदनाम करने के लिए विदेशियों के दिमाग की जरूरत होती है, एरिक उनके लिए सबसे बेहतर है।

भारत में जब कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में एनडीटीवी को कोरोना में गैर विशेषज्ञता वाले व्यक्ति की जरूरत थी। अपनी राजनीतिक टिप्पणियों से एरिक ने देश में मोदी विरोधी लॉबी को चीनी कोरोना वायरस को लेकर भय और डर फैलाने की खुराक दे दी है।

रो-रो कर मदद माँगती हिंदू लड़की का Video: अगवा कर पाकिस्तान में कबूल करवाया था इस्लाम, अधेड़ से निकाह

इमरान खान के ‘नया पाकिस्तान’ में हिंदू लड़कियों की स्थिति बदतर होती जा रही है। धर्म परिवर्तन के लिए बदनाम सिंध प्रांत हिंदू लड़कियों की कब्रगाह बन चुका है। यहाँ लड़कियों को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कर निकाह करवाया जाता है। हाल ही में रीना मेघवार नाम की लड़की को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का मुद्दा पाक संसद में गूँजा था। अब इस लड़की का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में लड़की मदद की गुहार लगाती हुई दिख रही है।

वीडियो पाकिस्तान के सिंध प्रांत का बताया जा रहा है। वीडियो में रीना मेघवार दीवार से झाँकती हुई नजर आ रही है। वो रो-रोकर लोगों से मदद गुहार की लगा रही है। लड़की का कहना है कि उसे अच्छा नहीं लग रहा है और वह वापस अपने घर लौटना चाहती है। वीडियो में अन्य कई औरतों की आवाज भी सुनाई दे रही है। मगर 36 सेकेंड के इस वीडियो में लड़की की मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आता है।

रीना मेघवार का अपहरण 13 फरवरी को किया गया था और फिर दादू में एक अधेड़ से उसकी शादी करा दी गई थी। रीना मेघवार के चाचा के अनुसार उन्होंने कई अधिकारियों से इस मामले में शिकायत की है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। 13 फरवरी को रीना मेघवार को केरियोगर, बादिन से अपहरण कर इस्लाम कबूल करवाया गया था। फिर अधेड़ उम्र के शख्स से निकाह करा दी गई थी। परिजनों ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस लड़की को खोजने में नाकाम रही।

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के लिए बदनाम सिंध में यह पहली घटना नहीं है। सिंध प्रांत में बड़े स्तर पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें मुस्लिम बनाए जाने का मामला सामने आया है। पिछले दिनों सिंध के घोटकी से दो हिंदू लड़कियों रीना और रवीना का अपहरण कर उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। इनका भी जबरन निकाह उम्र से बड़े मुस्लिमों से करा दी गई। इस मामले में इस्लामाबाद हाई कोर्ट में दोनों बहनों को अपने मुस्लिम पतियों सफ़दर अली और बरक़त अली के साथ रहने का आदेश दिया था।

इस साल जनवरी में भी एक वीभत्स घटना सामने आई थी, जब पाकिस्तान के पंजाब के बहु भाटी गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति ने जबरन रतन लाल की बेटी मिजा कुमारी का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और निक़ाह करने के लिए बलपूर्वक उसका इस्लाम में धर्मांतरण कर दिया गया। माता-पिता ने बताया था, “यदि हमारी बेटी हमें वापस नहीं मिलती है तो हम आत्महत्या कर लेंगे। हम गरीब हैं, हम दोषियों से नहीं लड़ सकते, पाकिस्तान में कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा है।”

‘लोग भूखे मर रहे हैं, उनका मजाक मत बनाइए’: बीफ पार्टी के बाद अब हवा में सेब काट ट्रोल हुईं काजोल

कोरोना महामारी के कारण देश के हालात बिलकुल ठीक नहीं है। ऐसे में बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल की एक वीडियो पर बवाल हुआ है। वीडियो में काजोल सेब को हवा में उछालकर उसे दो हिस्सों में काटती नजर आ रही हैं। वीडियो का कैप्शन है- मूड।

इस छोटी सी क्लिप में हालाँकि काजल ने कुछ कहा नहीं, लेकिन उनके फैन्स फिर भी इस तरह की वीडियो पोस्ट करने पर उनसे नाराज हो गए।

कुछ लोगों ने तो उन्हें फ्रूट निन्जा कहकर चुटकी ली। लेकिन कुछ ने गंभीरता से प्रश्न पूछा कि इस समय में ऐसी वीडियो का क्या मतलब है। एक यूजर ने उन्हें खाने की महत्ता समझाते हुए कहा, “खाने की चीजों को बर्बाद मत करो… कई लोग इसके लिए भूख से मर रहे हैं। इस तरह के पोस्ट को प्रोत्साहित न करें।” दूसरे यूजर ने लिखा, “लोग भूखे मर रहे हैं। उनका मजाक मत बनाइए, खान वेस्ट मत करिए।”

बता दें कि ये पहली दफा नहीं हुआ कि काजोल इस तरह किसी वीडियो या खाद्य पदार्थ के कारण चर्चा में आई हों। साल 2017 में काजोल बीफ पार्टी के कारण विवादों में घिरी थीं। कथित तौर पर काजल ने महाराष्ट्र में बीफ बैन होने के बावजूद अपने दोस्त के घर बीफ पार्टी की थी। साथ ही वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर भी किया था।

विवादित वीडियो

हालाँकि, जब विवाद बढ़ा तो काजोल को अपनी वीडियो डिलीट करनी पड़ी और उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वो बीफ नहीं बल्कि बफैलो मीट था। काजोल ने ट्विटर पर लिखा, “मेरा एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें ये दिखाया जा रहा है कि मैं अपने दोस्त के घर बीफ खा रही हूँ। इसमें कुछ गलतफहमी हुई है। वो बफैलो (भैंस) मीट था जो कानूनी तौर पर उपलब्ध है।” काजोल ने पोस्ट कर बताया था कि उन्होंने अपनी सफाई इसलिए दी क्योंकि ये एक संवेदनशील मुद्दा है। इससे कई लोगों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के बेकाबू होने के बाद हर किसी की बस यही कोशिश है कि किसी न किसी तरह इस महामारी से लड़ाई जीती जा सके। लोग अपने सामर्थ्य के मुताबिक संक्रमितों की मदद भी कर रहे हैं। हालाँकि, इस बीच कई बॉलीवुड कलाकार ऐसे हैं जिन्हें कोई मतलब नहीं कि देश में क्या हो रहा है। रणबीर-आलिया जैसे लोग मालदीव जा रहे हैं और काजल जैसे लोग फ्रूट निंजा बनकर हवा में सेब कट रहे हैं। यही वजह है कि आम जन जो कभी इनकी एक्टिंग की सराहना करते नहीं थकते थे वो अब खुलेआम इनकी आलोचना कर रहे हैं।  

राजस्थान में 4 ऑक्सीजन टैंकरों को जब्त करने का मामला: केंद्र ने कहा- कार्रवाई कर दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण पेश करेंगे

राजस्थान में Inox के ऑक्सीजन टैंकरों को जब्त करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में उसके 4 टैंकरों को पुलिस ने जब्त कर लिया। Inox कंपनी अस्पतालों को मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की सप्लाई करती है। मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने इस घटना के मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी कंपनी ने ये मामला उठाया था।

उच्च न्यायालय ने सलाह दी कि दिल्ली सरकार को एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए, जिनसे ऐसी किसी भी स्थिति में सप्लायर कंपनियाँ संपर्क कर सकें। वहीं केंद्र सरकार ने कहा कि राजस्थान में टैंकरों को जब्त किए जाने के मामले के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

पिछले एकाध सप्ताह से ऐसी कई ख़बरें आई हैं, जहाँ ऑक्सीजन टैंकरों का रूट बदल दिया गया है या फिर उन्हें जब्त कर लिया गया है। ऑक्सीजन के टैंकरों के रास्ते में व्यवधान डालने के मामले में हाई कोर्ट ने केंद्र को सही व्यवस्था करने के लिए कहा। इसके बाद केंद्र सरकार ने कहा है कि इस मामले में कार्रवाई की जाएगी, ताकि दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण पेश किया जा सके। ऐसी घटनाओं को लेकर सख्ती अपनाई जाएगी।

केंद्र सरकार ने कंपनियों को आश्वासन देते हुए कहा, “अगर कोई भी सरकार आपको रोकती है, तो हमें बताइए। ऐसे मामलों में हम आपराधिक मुकदमा दर्ज करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि ऑक्सीजन टैंकरों को कोई छू भी नहीं सकता और इसके सुरक्षित आवागमन के लिए ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाए। इसके लिए हमने GPS ट्रैकिंग सिस्टम भी अपनाया है, जिससे सरकार को टैंकरों का लोकेशन जानने में मदद मिलेगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में 11 ऐसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी, जो कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से सर्वाधिक पीड़ित हैं। इस बैठक में उन्होंने इस बात पर ध्यान रखने को कहा था कि दूसरे राज्यों में जा रहे ऑक्सीजन टैंकरों को किसी भी राज्य में रोका न जाए। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऑक्सीजन की सप्लाई बाधा उत्पन्न करने वालों को फाँसी पर लटकाया जाएगा।

वहीं इस घटना को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा कि वहाँ ऑक्सीजन टैंकरों की भारी कमी थी, इसलिए उसे मजबूरन ये कदम उठाना पड़ा। केंद्रीय गृह सचिव ने राजस्थान के मुख्य सचिव से बात कर इन टैंकरों को छोड़ने को कहा। ऑक्सीजन का न सिर्फ उत्पादन, बल्कि आवागमन भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दिल्ली सरकार को भी टैंकरों की व्यवस्था के लिए एक नोडल ऑफिसर की नियुक्ति करने को कहा गया है।

नतीजों के बाद जश्न नहीं: विजय जुलूस पर चुनाव आयोग का प्रतिबंध, 2 मई को आएगा 5 राज्यों का रिजल्ट

कोरोना संक्रमण के मद्देनजर चुनाव आयोग ने आज (अप्रैल 27, 2021) बड़ा फैसला करते हुए 2 मई को चुनावी नतीजों के बाद किसी भी प्रकार के विजय जुलूस पर बैन लगा दिया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जीतने वाला कैंडिडेट सिर्फ दो लोगों के साथ ही जीत का सर्टिफिकेट लेने जा सकता है। 

बता दें कि केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है। पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण की वोटिंग होनी है। इन 5 राज्यों के नतीजे एक साथ 2 मई को आने हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि आयोग ने यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट की चेतावनी के मद्देनजर लिया है। गौरतलब है कि कोविड संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पहले से ही आयोग जरूरी फैसले ले रहा है। कुछ दिन पहले उसने बंगाल में रोड शो, पदयात्रा पर प्रतिबंध लगाया था। 

सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार बताया था। हाई कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि 2 मई को होने वाले मतगणना के दौरान कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन कराने की योजना का खाका आयोग नहीं पेश कर पाया तो वह इस पर रोक लगा देगा। इससे पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले रोड शो पर रोक लगा दी थी। आयोग ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में जनसभाओं में 500 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकेंगे।

कुछ दिन पहले राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। ममता बनर्जी ने राज्य विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग की भूमिका पर प्रश्न खड़ा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव एजेंसी ने भाजपा की सहायता करने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने का कार्य करता रहा कि टीएमसी के कार्यकर्ता भाजपा के खिलाफ वोटिंग न कर पाएँ।  

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को एक संवैधानिक संस्था के खिलाफ उकसाते हुए कहा, “मैं बीरभूम, मुर्शिदाबाद और मालदा समेत जहाँ भी चुनाव होने हैं वहाँ के लोगों से अपील करती हूँ कि अभी से तैयारी कर लें क्योंकि एक तरफ हमें Covid-19 संक्रमण से लड़ना है वहीं दूसरी ओर हमें चुनाव आयोग से भी लड़ना है जो यह षड्यंत्र कर रहा है कि हमारे लोग वोटिंग न कर पाएँ।“

उन्होंने कहा, “यदि पुलिस किसी को अवैध रूप से गिरफ्तार करती है तो उनके परिवार वालों को पुलिस स्टेशन में जाकर बैठना चाहिए और पुलिस स्टेशन का घेराव करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर न्यायालय भी जाएँ। हम उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएँगे और किसी की भी अवैध गिरफ़्तारी के विरुद्ध शिकायत करेंगे।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने जब से 8 चरणों में चुनाव कराने का फैसला सुनाया था, तभी से तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी उन पर तरह तरह के आरोप लगा रही थीं। अभी हाल में उन्होंने कहा था महामारी के संकट के बाद भी चुनाव आयोग बाकी बचे चुनाव को एक ही चरण में निपटाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा, जबकि इस मुद्दे पर चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि एक बार चुनावों की घोषणा होने के बाद उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता है।  

₹1 करोड़ की फ्लाइट-₹55 लाख का टीकाः देश को कोरोना में छोड़ लंदन-दुबई निकल रहे VVIP, प्राइवेट जेट कंपनियों की बल्ले-बल्ले

कहते हैं, हर देश में दो दुनिया एक साथ चल रही होती है। खासकर विकासशील और गरीब देशों में। एक दुनिया होती है अमीरों की, यानी VVIPs की। दूसरी दुनिया होती है गरीबों की। एक तरफ संसाधनों के अभाव में लोग कोरोना संक्रमण से दम तोड़ रहे हैं, दूसरी ओर एक जमात ऐसी भी है जो करोड़ों खर्च कर विदेश जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक देश के अमीर 1 करोड़ रुपए के आसपास खर्च कर लंदन जा रहे हैं। बॉलीवुड सेलेब्स मालदीव में छुट्टियाँ मना रहे।

दुनिया भर के कई देशों ने संक्रमण के डर से भारत से आने वाले फ्लाइट्स पर पाबंदी लगा दी है। लेकिन देश के VVIPs प्राइवेट जेट्स किराया पर लेकर लंदन की सैर को जा रहे हैं, ताकि स्थिति ठीक होने पर वापस आ सकें। इससे प्राइवेट जेट्स का किराया आसमान छू रहा है।

‘द टाइम्स’ की एक खबर के अनुसार, पिछले हफ्ते यूके में भारत को ‘रेड लिस्ट’ की सूची में शामिल किया गया। यहाँ के नागरिकों को ब्रिटेन जाने पर होटल में क्वारंटाइन की अनिवार्यता लागू कर दी गई। फिर भी कम से कम 9 VVIPs ने प्राइवेट जेट्स बुक कर 9 घंटे का सफर तय किया। ये सभी फ्लाइट्स यूके के लिए थीं। ये प्लेन्स रेड लिस्ट डेडलाइन्स से 45 मिनट पहले तक पहुँचते रहे।

बताया जा रहा है कि इसके लिए अमीरों ने प्रत्येक फ्लाइट पर करीब £100,000 (1.03 करोड़ रुपए) खर्च किए। इस महीने की शुरुआत में ही एयर इंडिया, विस्तारा, ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक जैसी कंपनियों की वेबसाइटों पर यूके जाने के लिए टिकट उपलब्ध नहीं थे। वर्जिन अटलांटिक का कहना है कि उसे सरकार की तरफ से फ्लाइट की संख्या कम रखने का आदेश मिला है, इसलिए न तो फ्लाइट्स और न ही सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

19 अप्रैल 2021 को 4 दिनों के नोटिस के साथ यूके ने भारत को ‘रेड लिस्ट’ में शामिल किया। अप्रैल 23 को सुबह 4 बजे के बाद से सिर्फ यूके के नागरिकों को ही भारत से वहाँ की यात्रा करने की अनुमति है। उन्हें भी होम क्वारंटाइन में रहना पड़ेगा। यूके में भारतीय वैरिएंट के 100 से अधिक कोरोना मामले मिल चुके हैं। फ्रांस, UAE, इंडोनेशिया, अमेरिका, हॉन्गकॉन्ग, कनाडा, मालदीव, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने भी भारतीय पर्यटकों को लेकर ऐसे ही प्रतिबंध लगाए हैं।

एक प्राइवेट चार्टर्ड फ्लाइट सर्विस का तो कहना है कि प्राइवेट जेट्स किराया पर लेने के लिए लोगों में पागलपन सवार है। उक्त कंपनी ने एक दिन में ऐसी 12 फ्लाइट्स दुबई भेजी और सभी फुल थे। इस तरह एन्ट्रल एविएशन ने बताया कि 80 लोगों ने उससे संपर्क साधा। इसके लिए विदेश से और भी एयरक्राफ्ट्स मँगाए जा रहे हैं। मुंबई से दुबई 13 सीटर के £27,337 (28.31 लाख रुपए) और 6 सीटों वाले एयरक्राफ्ट के लिए £22,301 (23.10 लाख रुपए) देने होते हैं।

इससे पहले खबर आई थी कि भारत के कुछ ऐसे रईस भी हैं जो कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए दुबई जा रहे हैं और इसके लिए 55 लाख रुपए तक खर्च कर रहे हैं। इसके लिए वो चार्टर्ड फ्लाइट्स तक बुक करा रहे हैं। UAE में एस्ट्राजेनेका, साइनोफार्म और फाइजर जैसे वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन लोग फाइजर को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। चार्टर ऑपरेटर्स का कहना है कि कुछ लोग वैक्सीन की दो डोज लगाने के लिए दुबई में ही रह रहे हैं, जबकि कुछ लोग वहाँ के दो चक्कर लगा रहे हैं।

दुनिया को कोरोना बाँट चीन ने खुद सेना पर खर्च किए ₹1877992 करोड़, लगातार 26वें साल किया इजाफा

चीन के वुहान से निकलने कोरोना संक्रमण ने पिछले साल पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा था। भारत फिलहाल इसकी दूसरी लहर से जूझ रहा है। वैश्विक महामारी के इस काल में भी सैन्य खर्च पर भारी इजाफा देखने को मिला है। इस दौरान कई देशों ने अपने बजट का अच्छा-खासा हिस्सा हथियार खरीदने में लगाया। यह बात स्टॉकहॉम इंटरनेशनल पीस रिसचर्स इंस्टीट्यूट (सिपरी) की रिपोर्ट से हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार 2020 में वैश्विक सैन्य खर्च बढ़कर 1981 अरब डॉलर (करीब 147 लाख करोड़ रुपए) हो गया। 2019 के मुकाबले यह 2.6% ज्यादा है। विभिन्न देश अपना सैन्य खर्च लगतार बढ़ रहे हैं। लेकिन वैश्विक महामारी के दौर में यह इजाफा चौंकाने वाला है।

रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक सैन्य खर्च का 62 प्रतिशत केवल 5 देश ने किया है। ये हैं: अमेरिका, चीन, भारत, रूस, और ब्रिटेन। चीन ऐसा देश है जिसके सैन्य खर्च में लगातार 26वें साल इजाफा हुआ है।

हैरानी की बात ये हैं कि वैश्विक स्तर पर सैन्य खर्च में ये इजाफा उस समय दर्ज किया गया जब जीडीपी 4.4% नीचे हुई। रिपोर्ट के अनुसार इससे जीडीपी में सैन्य खर्च की हिस्सेदारी का 2020 में वैश्विक औसत 2.4 प्रतिशत तक पहुँच गया, जो 2019 में 2.2 प्रतिशत था।

चिली और साउथ कोरिया ऐसे देश हैं जिन्होंने अपने सैन्य खर्च का हिस्सा महामारी से निपटने में खर्च किया। ब्राजील, रूस ने 2020 के मुकाबले अपने प्रारंभिक सैन्य बजटों की तुलना में इस बार काफी कम खर्च किया है।

सिपरी के शस्त्र और सैन्य खर्च कार्यक्रम के रिसर्चर डिएगो लोपेस द सिल्वा के मुताबिक, “हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि साल 2020 में महामारी का महत्वपूर्ण प्रभाव सैन्य खर्च पर नहीं पड़ा।” वह आगे कहते हैं, “यह देखने लायक होगा कि क्या देश महामारी के दूसरे साल भी इस तरह से सैन्य खर्च को बनाए रखते हैं।”

किस देश ने किया कितना खर्च?

सिपरी के मुताबिक भारत का सैन्य खर्च 2020 में 2019 की तुलना में 2% ज्यादा रहा। इसके पीछे भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद और तनाव हो सकता है। भारत ने 72.9 अरब डॉलर (₹5.39 लाख करोड़), रूस ने 61.7 अरब डॉलर (करीब ₹4.56 लाख करोड़) और ब्रिटेन ने 59.2 अरब डॉलर (₹4.38 लाख करोड़) खर्च किए। सबसे ज्यादा खर्च अमेरिका ने किए हैं।

7 साल तक लगातार इस खर्च में कमी के बाद अमेरिका सैन्य खर्च लगातार तीन सालों से बढ़ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 2020 में अमेरिका ने कुल सैन्य खर्च का 39 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया। इससे अमेरिकी सैन्य खर्च अनुमानित 778 अरब डॉलर (करीब ₹57 लाख करोड़) तक पहुँच गया है। 2019 की तुलना में इसमें 4.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं चीन के सैन्य खर्च में 1.9 फीसदी का इजाफा हुआ है। उसने 2020 में 252 अरब डॉलर (करीब ₹18. 64 लाख करोड़) खर्च किए। दशक भर में उसका सैन्य खर्च 76 फीसदी बढ़ा है।

सिपरी के मुताबिक पिछले साल नॉटोनॉटोनॉटो(नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) के सभी सदस्यों पर सैन्य बोझ बढ़ा। नतीजन, नाटो के 12 सदस्यों ने अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत या उससे अधिक खर्च रक्षा पर किया। 2019 में सिर्फ 9 सदस्यों का खर्च लक्ष्य के भीतर था। उदाहरण के लिए, फ्रांस, वैश्विक स्तर पर 8 वाँ सबसे बड़ा देश है, जिसने 2009 के बाद पहली बार 2 प्रतिशत की सीमा पार की।

क्या है SIPRI?

बता दें कि  SIPRI एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है। इसकी स्थापना 1966 में हुई थी। यह संस्था युद्धों तथा संघर्ष, युद्धक सामग्रियों, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में शोध का कार्य करती है और नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, मीडिया और इच्छुक लोगों को आँकड़ों का विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराती है। 

इसका मुख्यालय स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में है। इसे विश्व के सर्वाधिक सम्मानित थिंक टैंकों की सूची में शामिल किया जाता है। इसका डेटाबेस हर वर्ष अपडेट होता है। हाल में आए आँकड़े इस साइट (https://www.sipri.org) पर क्लिक करके देख सकते हैं।

नोट: इस साइट पर सैन्य खर्च (Military expenditure) का मतलब, वर्तमान सैन्य बलों और गतिविधियों पर सभी सरकारी खर्चों को संदर्भित करता है। इसमें वेतन और लाभ, परिचालन व्यय, हथियार और उपकरण खरीद, सैन्य निर्माण, अनुसंधान और विकास, केंद्रीय प्रशासन, कमान और समर्थन शामिल हैं। SIPRI सैन्य खर्च को केवल हथियारों पर होने वाला खर्च नहीं बताता, बल्कि उनके अनुसार, हथियार खरीद इसका एक हिस्सा है।

ब्रिटेन से आई वेंटिलेटर-ऑक्सीजन की पहली खेप, 40 US कंपनियों ने मदद को बनाई टास्क फोर्स: हालात पर मोदी-बायडेन ने की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) की रात अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन के साथ फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। पीएम मोदी ने अमेरिका द्वारा की जा रही मदद के लिए जो बायडेन को धन्यवाद भी दिया। इस बातचीत के बाद दोनों ही नेताओं ने ट्वीट कर एक-दूसरे को धन्यवाद दिया और साथ मिल कर काम करने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति बायडेन के साथ चर्चा के दौरान वैक्सीन रॉ मैटेरियल्स और दवाओं की सुगम व सटीक सप्लाई चेन के महत्व पर भी बातचीत हुई। भारत-अमेरिका का स्वास्थ्य पार्टनरशिप कोविड-19 की वैश्विक चुनौती से निपटने में सक्षम हो सकता है।” वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा, “पीएम मोदी से बातचीत के दौरान मैंने कोविड-19 से लड़ने हेतु आपात सहायता और संसाधनों की सप्लाई के लिए अमेरिका के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।”

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा कि भारत हमारे साथ खड़ा था, इसीलिए अब हम भी भारत के साथ हैं। भारत में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए USA की 40 कंपनियों ने एक टास्क फोर्स भी बनाया है। ये ग्लोबल टास्क फोर्स वैश्विक संसाधनों को मुहैया कराने में भारत की मदद करेगा। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के ‘यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ ने अगले कुछ हफ़्तों में यहाँ 20,000 ऑक्सीजन कन्सेंट्रेटर्स भेजने का लक्ष्य तय किया।

इस बीच ब्रिटेन से मदद की पहली खेप मंगलवार (27 अप्रैल 2021) को दिल्ली पहुँच गई। इसमें 100 वेंटिलेटर और 95 ऑक्सीजन कंसट्रेटर हैं। उधर फ्रांस ने भी कहा है कि वो भारत को पर्याप्त ऑक्सीजन की सहायता मुहैया कराएगा। साथ ही ऑक्सीजन वेंटिलेटर्स भी दिए जाएँगे। यूरोपियन यूनियन ने कहा है कि भारत की त्वरित सहायता के लिए यूरोप के सभी देश एक योजना तैयार कर रहे हैं। यूके से तो मदद की पहली खेप पहुँच भी चुकी है। सऊदी अरब और अडानी के बीच हुए करार के बाद वहाँ से भी ऑक्सीजन की खेप पहुँची है। कई अन्य देशों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।

दुबई से लौटा, निधि का करने लगा पीछा: निकाह के लिए नहीं मानी तो हैदर ने साथियों संग घर में घुस गला रेता

उत्तराखंड के रुड़की में 19 वर्षीय निधि पासवान की घर में घुसकर बेहरमी से हत्या कर दी गई। घटना को अंजाम देने वाला युवक कई दिनों से उसका पीछा कर रहा था। शनिवार (24 अप्रैल 2021) को मौका देख युवक ने अपने दो साथियों के साथ निधि को मारा। वारदात गंगानगर थानाक्षेत्र कृष्णनगर सड़क नंबर 20 की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदर अली नाम का युवक निधि का पिछले कई दिनों से पीछा कर रहा था। वह उस पर भद्दे कमेंट करता और उसे निकाह के लिए बोलता। एक दिन निधि ने तंग आकर हैदर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसी गुस्से में हैदर ने अपने दो दोस्त- सरीक और रियान के साथ उसे मारने की पूरी साजिश रची।

शनिवार को तीनों, निधि के घर बाइक से पहुँचे और घर में घुसकर दिनदहाड़े निधि की हत्या कर दी। उसका गला रेत दिया गया। शोर मचते ही रियान और सरीक मौके से भाग गए। वहीं हैदर को रंगे हाथों पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

24 घंटे के भीतर सुलझा मामला

जानकारी के अनुसार, निधि पासवान बीबीए की छात्रा थी और एक लोकल ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। उसकी हत्या पर भाजपा सांसद देशराज करणवाल का कहना है, “इन लोगों ने एक मासूम लड़की की दिनदहाड़े हत्या की है। इन्हें जेल में बंद करके इनके खिलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

मृतका के परिजनों ने भी तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की, जिसके बाद एसपी (ग्रामीण) परमिंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि मामले में लड़की के भाई दिनेश ने मुकदमा दर्ज करवाया था। हैदर के बाद उन्होंने बाकी दो फरार आरोपितों को भी रहीमपुर गेट से गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने बताया कि निधि को हैदर तीन साल से जानता था। दुबई से लौटने के बाद वह निधि का पीछा करता था। लेकिन लड़की ने उसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसलिए उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिल उसकी (निधि) हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने पहले निधि की बेरहमी से पिटाई की। बाद में पेपर काटने वाले चाकू से उसकी हत्या कर दी।

एसपी डोबाल ने बताया कि इस मामले को 24 घंटे के भीतर सुलझाने के लिए उन्होंने संबंधित पुलिस टीम को ढाई हजार इनाम भी दिया है। टीम में इंस्पेक्टर मनोज मनवाल, सब इन्सपेक्टर मनोज सिरौला, सुनील रमोला, विनोद गोला, दीप कुमार, नवीन पुरोहित, लोकपाल परमान, प्रीति तोमर, जहाँगीर अली, समेत कई पुलिसकर्मी शामिल थे।

निकिता तोमर हत्याकांड

बता दें कि पिछले साल ऐसा ही मामला हरियाणा के बल्लभगढ़ से आया था। अक्टूबर 2020 में 21 साल की निकिता तोमर की उसके कॉलेज के सामने गोली मारकर हत्या की गई थी। सारी वारदात सीसीटीवी में कैद हुई थी। वीडियो में साफ नजर आया था कि कैसे निकिता ने खुद को बचाने के प्रयास किए लेकिन जब तक वो वहाँ से भागती, आरोपित ने गोली चला दी।

निकिता तोमर की हत्या के बाद भी यही तथ्य सामने आए थे कि तौफीक नाम का लड़का उसका बहुत समय से पीछा करता था और उसपर इस्लाम कबूल करके उससे निकाह करने का दबाव बनाता था। इस मामले में पिछले ही महीने फरीदाबाद की जिला कोर्ट ने तौफीक और रेहान को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

दिल्ली का 5 स्टार होटल, 100 कमरे: हाई कोर्ट जज और कर्मचारियों के लिए केजरीवाल सरकार का कोविड सेंटर, फैमिली के लिए भी

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के जज और अन्य न्यायिक कर्मचारियों के लिए अशोक होटल में 100 कमरों का कोविड हेल्थ फैसिलिटी स्थापित करने का निर्णय लिया है। जज और न्यायिक कर्मचारियों के परिवार भी इसका प्रयोग कर पाएँगे। सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के निवेदन के बाद ये फैसला लिया। बता दें कि चाणक्यपुरी स्थित अशोक होटल 5 स्टार दर्जे का है।

चाणक्यपुरी के SDM द्वारा इस सम्बन्ध में सोमवार (अप्रैल 26, 2021) को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। इस कोविड फैसिलिटी को प्राइमस हॉस्पिटल द्वारा संचालित किया जाएगा। वहाँ जो भी बायोमेडिकल वेस्ट होंगे, उन्हें ठिकाने लगाना होटल की जिम्मेदारी होगी। होटल के कर्मचारियों को सुरक्षा के सभी उपकरण दिए जाएँगे और उनकी विशेष ट्रेनिंग भी होगी। अगर होटल में कर्मचारियों की कमी है तो हॉस्पिटल से स्वास्थ्यकर्मी बुलाए जाएँगे।

कमरों, हाउसकीपिंग, सैनिटाइजेशन, मरीजों के लिए भोजन इत्यादि की व्यवस्था होटल ही करेगा। इसमें जो भी खर्च आएगा, वो हॉस्पिटल को बताया जाएगा और हॉस्पिटल ही होटल को पूरे खर्च का वहन करेगा। हॉस्पिटल अतिरिक्त खर्चे पर अलग से डॉक्टर्स और पैरामेडिकल कर्मचारियों को वहाँ भेज सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक PIL भी दाखिल की गई है, जिसमें जजों और न्यायिककर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने की माँग की गई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भी 60 बेड्स की एक मेडिकल फैसिलिटी की स्थापना की सहमति दी है, जिसमें RT-PCR टेस्ट की भी सुविधा होगी और टीकाकरण की भी व्यवस्था की जाएगी। बता दें कि दिल्ली में फ़िलहाल 3 मई 2021 तक लॉकडाउन है। दिल्ली सरकार ने 18 की उम्र से ऊपर के लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन की सुविधा देने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माँग की है कि 18 से कम उम्र वालों के लिए भी वैक्सीन की व्यवस्था हो, क्योंकि उन पर भी इसका असर पड़ रहा है।

अशोक होटल में कोविड सेंटर को लेकर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मीडिया के बाद अब न्यायपालिका की बारी है। उन्होंने पूछा कि क्या न्यायपालिका इसे स्वीकार करेगी, पूरा भारत देख रहा है। बता दें कि दिल्ली में हॉस्पिटल बेड्स की भारी कमी है और ऑक्सीजन की कमी खुद सरकार भी बार-बार स्वीकार कर रही है।