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वैक्सीन विकसित करके भारत ने दुनिया को मुश्किलों से उबारा, आर्थिक मोर्चे पर भी बेहतर हो रहे हालात: दावोस में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को विश्व आर्थिक मंच के ‘दावोस एजेंडा’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत के विकास संबंधी विभिन्न पहलुओं और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत की इस हजारों वर्ष पुरानी प्रार्थना, ‘सर्वे सन्तु निरामयाः‘ पूरा संसार स्वस्थ रहे, पर चलते हुए संकट के इस समय में भारत ने अपनी वैश्विक जिम्मेदारी को भी शुरू से निभाया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, “आशंकाओं के बीच मैं आपके सामने आत्मविश्वास, सकारात्मकता और दुनिया के लिए उम्मीद के साथ 130 करोड़ से अधिक भारतीयों का संदेश लेकर आया हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना से लड़ाई में भारत के प्रत्येक व्यक्ति ने धैर्य के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया। पीएम ने कहा कि 12 दिन में 23 लाख लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया। और आने वाले कुछ महीनों में हम देश में 30 करोड़ बुजुर्ग और अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों को कोरोना वायरस का टीका लगाने का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।”

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस संवाद में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज भारत उन देशों में है जो कोरोना से अपने ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचाने में सफल रहे और जहाँ कोविड मामलों की संख्या लगातार घट रही है। भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू किया है।”

डिजिटल माध्यम से हुए इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अभी तो 2 मेड इन इंडिया वैक्सीन दुनिया में आई हैं, आने वाले समय में कई और वैक्सीन बनकर आने वाली हैं। ये वैक्सीन दुनिया के देशों को और ज्यादा बड़े स्तर पर, ज्यादा गति से मदद करने में सहायता करेंगी।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “जब दुनिया के अनेक देशों में एयरस्पेस बंद था तब 1 लाख से ज्यादा नागरिकों को उनके देश पहुँचाने के साथ ही भारत ने 150 से ज्यादा देशों को जरूरी दवाइयाँ भी भेजी। अब भारत अपने 1.3 बिलियन नागरिकों को हेल्थ केयर तक आसान पहुँच के लिए यूनिक हेल्थ आईडी देने का काम शुरू कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “भारत के 1.3 बिलियन लोगों के पास यूआईडी – आधार है, जो उनके खातों से जुड़ा हुआ है। दिसंबर 2020 में, UPI से 4 ट्रिलियन रुपए के लेन-देन किया गया है। बैंकिंग क्षेत्र के लोग जानते हैं कि दुनिया भर के देश भारत द्वारा विकसित UPI प्रणाली को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना संकट के दौरान अनेक देश परेशान थे कि अपने नागरिकों तक सीधे आर्थिक मदद कैसे पहुँचाएँ? आप ये जानकर चौंक जाएँगे कि इसी दौरान भारत ने 760 मिलियन से ज्यादा लोगों के बैंक खातों में 1.8 ट्रिलियन रुपए से अधिक सीधे ट्रांसफर किए हैं।”

उन्होंने बताया, “COVID संकट ने हमें मानवीय मूल्यों की मूल बातें सिखाई हैं। उद्योग 4.0 मनुष्यों के लिए है, न कि रोबोटों के लिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी जीवन जीने में आसानी के लिए एक उपकरण बन जाए, न कि एक जाल। सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हमने नई उत्पादन इकाइयों के लिए कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 15 फीसदी कर दिया और जीएसटी दरें घटा कर व्यवस्था आसान की है।

राजदीप सरदेसाई ने सस्पेंड होने के बाद इंडिया टुडे से दिया इस्तीफा: रिपोर्ट्स

इंडिया टुडे प्रबंधन द्वारा 2 हफ्तों के लिए ऑफ एयर किए जाने के बाद राजदीप सरदेसाई ने चैनल को छोड़ने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अप्रमाणित सूचना साझा करने वाले राजदीप ने अपने ऊपर कार्रवाई के बाद संस्थान को इस्तीफा सौंप दिया।

इससे पूर्व में खबर आई थी केवल एक हफ्ते में दो बार झूठी खबर फैलाने के लिए प्रबंधन ने उन्हें ऑफ एयर करने और 1 महीने की सैलरी न देने का निर्णय लिया था। संस्थान ने पाया था कि ट्वीट्स ग्रुप की सोशल मीडिया पॉलिसी से अलग थे। इसीलिए उन्हें सरदेसाई पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी पड़ी।

सूत्रों का कहना है कि इस प्रकार का निलंबन व सैलरी में कटौती सरदेसाई के लिए बहुत बड़ा अपमान है, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया।

बता दें कि इससे पहले राजदीप के बयानों के कारण उनका विरोध सोशल मीडिया पर खूब हुआ था। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव ने उन्हें लेकर लिखा था, “राजदीप भारत के विरोध में उकसाने के लिए जाने जाते हैं।” उन्होंने इंडिया टुडे से सरदेसाई की बातचीच का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “यह वीडियो स्पष्ट रूप से भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने के अपराध को स्थापित करता है जो आईपीसी धारा 121 के तहत दंडनीय है जिसकी सजा मौत या आजीवन कारावास होती है। दिल्ली पुलिस को इसे हिरासत में लेना चाहिए।”

गौरतलब है कि अक्सर अपने ट्विटर अकाउंट से फर्जी खबरें फ़ैलाने वाले राजदीप सरदेसाई को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जाती है। गणतंत्र दिवस की सुबह से ही किसानों के प्रदर्शन के बीच, दिल्ली के DDU मार्ग पर एक व्यक्ति की ट्रैक्टर पलटने के कारण मौत हो गई थी। आईटीओ के पास पूरे चौक पर सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े रहे। जिसे लेकर समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक और फेक न्यूज़ फैला दी और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया।

दरअसल, राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। राजदीप ने ट्विटर पर लिखा, “पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर 45 साल के नवनीत की मौत हो गई है। किसानों ने मुझे बताया कि उसका ‘बलिदान’ व्यर्थ नहीं जाएगा।”

लेकिन हकीकत ये है कि ट्रैक्टर रैली और उपद्रव के दौरान जिस व्यक्ति की मौत हुई, वह पुलिस फायरिंग में नहीं, बल्कि ट्रैक्टर पलटने से मारा गया था। दरअसल, ड्राइवर ने काफी तेज रफ्तार से चल रहे ट्रैक्टर को अचानक से मोड़ दिया, जिसकी वजह से संतुलन बिगड़ गया और ट्रैक्टर पलट गया। इस दौरान किसान की मौत हो गई।

ऐसे ही 23 जनवरी को सरदेसाई ने राष्ट्रपति कोविंद पर नेताजी की गलत तस्वीर का अनावरण करने का आरोप मढ़ा था। मगर, बाद में मौजूदा सबूतों के आधार पर यह साबित हो गया था कि जिस तस्वीर का उस दिन राष्ट्रपति ने अनावरण किया वह ‘नेताजी’ की असली तस्वीर का ही स्केच थी। न कि उनका किरदार निभाने वाले कलाकार प्रसनजीत चटर्जी की।

S02E09: क्या बकैत को पता था लाल किला और दंगों का?

बकैत के पोस्ट और प्राइम टाइम से पता चलता है कि उसे मालूम था कि किसान क्या करने वाले हैं!

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

गाजीपुर बॉर्डर पर टिकैत सहित किसान नेताओं को अल्टीमेटम: भारी सुरक्षा बल की तैनाती में शुरू डेरा-डंडा उखाड़ने की तैयारी

किसान आंदोलन का अराजक चेहरा देखने के बाद यूपी पुलिस एक्शन मोड में है। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम दिया है। कहा गया है कि जल्द ही जगह को खाली कर दिया जाए। मौके पर जिला मजिस्ट्रेट अजय शंकर पांडेय समेत प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी मौजूद हैं। उनके अलावा भारी मात्रा में सुरक्षा बल की तैनाती हो गई है। दोपहर को फ्लैग मार्च भी किया गया है।

जिलों के डीएम-एसपी से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में धरने पर बैठे किसानों से अपील करें कि वे अपने-अपने घरों को लौट जाएँ। प्रशासन की ओर से किसानों के घर लौटने के लिए बस की व्यवस्था किए जाने की भी बात कही जा रही है।

इंडिया टुडे में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रदर्शनस्थल पर टेंट आदि समेट लिए गए हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरह से जारी रहेगा। पुलिस चाहे तो गिरफ्तार कर सकती है। वह सरेंडर नहीं करेंगे। जरूरत पड़ने से ग्रामों से और लोगों को बुलाया जाएगा।

इसके साथ ही किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा है कि वह अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे, चाहे तो प्रशासन उन्हें गिरफ्तार कर ले। इधर, भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत ने धरना खत्म करने को कहा है।

ताजा सूचना के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की मनमानी के चलते गाजीपुर बॉर्डर पर स्थानीयों ने किसान आंदोलन के विरोध में नारेबाजी की है। इससे पहले बता दें उत्तर प्रदेश के एडीजी प्रशांत कुमार ने गुरुवार को दिल्ली की हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण कहा था।

उन्होंने कहा था कि घटना के बाद कुछ किसान संगठनों ने स्वेच्छा से नोएडा के चिल्ला बॉर्डर और दलित प्रेरणा स्थल से आंदोलन वापस ले लिया है। जहाँ तक बागपत का संबंध है, स्थानीय अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उन्होंने किसानों को एनएचएआई की परियोजना के बारे में समझाया और उन्होंने बुधवार रात अपना धरना समाप्त कर दिया। यूपी गेट पर अब भी कुछ लोग डटे हुए हैं, हालाँकि, अब उनकी संख्या पहले से काफी कम हो गई है।

एडीजी प्रशांत कुमार ने साफ कहा कि अगर दिल्ली पुलिस ने हिंसा के संबंध में उनकी कोई मदद माँगी तो वो उनकी (यूपी पुलिस) मदद जरूर करेंगे। वह कहते हैं, “हम ऐसे किसी भी तत्व की अनुमति नहीं देंगे जिसने राष्ट्रीय पर्व के दौरान हमारे राज्य में ऐसा किया हो। लोगों ने हमें आश्वासन दिया है कि वे किसी भी उपद्रवी तत्व को आश्रय नहीं देंगे।”

बता दें कि यूपी गेट पर गाजियाबाद जिले के सभी थानों से फोर्स बुला ली गई है। जिला प्रशासन ने किसानों को यूपी गेट खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। पुलिस यूपी गेट पर ड्रोन कैमरे से निगरानी कर रही है। साथ ही यूपी गेट पर कुछ लोग पहुँचे हैं, जो ‘हमारी बॉर्डर खाली करो’ के नारे लगा रहे हैं। इसी प्रकार चिल्ला बॉर्डर पर भी आंदोलन को वापस ले लिया गया है। वहाँ भारी मात्रा में पुलिस की तैनाती हुई है। टिकरी बॉर्डर पर भी सुरक्षा कड़ी है। यहाँ किसान कानून का विरोध कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत के लिए मोदी सरकार दे रही ₹3800 तक का PM बेरोजगारी भत्ता? 25 जनवरी है आखिरी डेट: फैक्ट चेक

सरकार से संबंधित झूठी खबरें जनता तक पहुँचाने के बाद उन्हीं के आधार पर केंद्र सरकार को घेरने का एक चलन हो गया है। हाल ही में एक दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेरोजगारी भत्ते का ऐलान किया है। इसके तहत अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को अलग-अलग राशि दी जाएगी।

दावे में कहा गया कि नए वर्ष के साथ आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में 18 से 50 वर्ष के लोगों को ₹3800 तक का बेरोजगारी भत्ता दिया जाना तय हुआ है। इसमें 18-25 वर्ष के उम्र वालों को ₹1500 दिए जाएँगे। 26-30 वर्ष वालों को ₹2000। 31 -35 के बीच वालों को ₹3000। 36-45 उम्र के लोगों को ₹3500 और 46 से 50 आयु वालों को ₹3800 रुपए दिए जाएँगे।

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 जनवरी 2021 रखी गई। साथ ही एक लिंक दिया गया जिस पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करना था। इसमें पीएम मोदी की तस्वीर शेयर करके लोगों को आश्वस्त करने का प्रयास हुआ और लिखा गया, “सरकार एक लाभ अनेक।”

अब सोशल मीडिया पर वायरल होते इस संदेश पर पीआईबी ने संज्ञान लिया है। पीआईबी फैक्टचेक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया। उन्होंने बताया “एक मैसेज में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार बेरोजगारों को प्रति माह ₹3800 तक का बेरोजगारी भत्ता प्रदान कर रही है। यह दावा फर्जी है। केंद्र सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।”

यहाँ मालूम हो कि भारत के डिजिटल होने की प्रक्रिया में साइबर क्राइम की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नागरिकों को सुरक्षित रहने की आवश्यकता है। हाल की बात करें तो कोरोना वैक्सीन के नाम पर जालसाजों ने धोखाधड़ी करने की कोशिश शुरू की थी। वह वरिष्ठ नागरिकों को फोन करके खुद को ड्रग अथॉरिटी की ओर से बता रहे थे और उनसे उनका आधार व ओटीपी माँग रहे थे।

इस केस में भी पीआईबी ने संज्ञान लिया था और फैक्टचेक कर बताया था, “ड्रग अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की ओर से होने का दावा करने वाले कुछ जालसाज़ वरिष्ठ नागरिकों को COVID19 वैक्सीन आवंटन के लिए अपने आधार और ओटीपी की पुष्टि करने के लिए कह रहे हैं। यह बदमाशों की करतूत है। ऐसे टेलीकॉलर्स को कभी भी ओटीपी और व्यक्तिगत विवरण न दें।”

ट्रैक्टर रैली ने महिलाओं को रौंदा: 2 की मौत, 5 की हालत नाजुक- बहुत ही खौफनाक है Video

26 जनवरी को किसानों की तरफ से निकाली जा रही ट्रैक्टर रैली के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। पंजाब के अमृतसर में किसानों के समर्थन में निकली जा रही रैली में अचानक से एक ट्रैक्टर ड्राइवर ने अपना नियंत्रण खो दिया और कई महिलाओं को रौंद दिया। इस घटना में 2 महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, वहीं 5 महिलाओं को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना मंगलवार को अमृतसर के अटारी-वेरका बाईपास पर स्थित कस्बा वल्ला में निकाली जा रही ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई। जिसमें भारी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शमिल थे। इस दौरान पानी का टैंकर लेकर आ रहे एक ट्रैक्टर के चालक का इस पर से नियंत्रण खो गया। उसने टैंकर सहित ट्रैक्टर विरोध मार्च कर रही महिलाओं पर चढ़ा दिया और उन्हें रौंदते हुए कई मीटर तक चला गया।

मौके पर पहुँची स्थानीय पुलिस की तरफ से ड्राईवर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसकी पहचान सुख पुत्र गुलजार सिंह निवासी गाँव मक्खण विंडी के रूप में हुई है, जो कि राज मिस्त्री का काम करता है। पुलिस पूछताछ में दोषी चालक ने बताया कि उसे टैंकर चलाना नहीं आता था। न ही उसके पास कोई लाइसेंस है। पुलिस की तरफ से ड्राईवर को गिरफ्तार करके अगली कार्रवाई की जा रही है।

वल्ला के एसएचओ संदीप शर्मा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि, आरोपित ने स्वीकार किया कि उसे ट्रैक्टर चलाना नहीं आता था। न ही उसके पास कोई लाइसेंस था। पुलिस ने दोनों महिलाओं के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बाकी घायल महिलाओं को भर्ती कराया गया है। वहीं इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में मातम का माहौल पसर गया। साथ ही ट्रैक्टर परेड भी स्थगित कर दी गई।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को ही आईटीओ पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते समय प्रदर्शनकारी नवनीत का ट्रैक्टर पलट गया था। जिसके चलते उनकी मौत हो गई थी। नवनीत की मौत के बाद परिवार वालों ने बताया कि पुलिस की गोली लगने से उसकी मौत हुई हैं। मगर अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गया है और इसकी पुष्टि हो गई है कि किसान की मौत गोली लगने से नहीं बल्कि ट्रैक्टर पलटने से हुई थी।

‘कॉन्ग्रेस नेता ने बेटी को बनाया बंधक’ – मंत्री के सामने माँ-बेटी ने थप्पड़-चप्पलों से पीटा: भाग कर खाया जहर

कॉन्ग्रेस नेताओं की चुनौतियाँ ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं, चाहे राजनीतिक हों या सामाजिक। ऐसी ही एक घटना हुई छत्तीसगढ़ स्थित अंबिकापुर के सरगुजा में, जहाँ एक महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ मिल कर युवा कॉन्ग्रेस नेता ओनिमेश सिन्हा को थप्पड़ मारा और चप्पल से पिटाई की। घटना के वक्त सरगुजा जिले के प्रभारी मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहेरिया भी मौजूद थे।

इस घटना के बाद कॉन्ग्रेस नेता ने जहर खा लिया। जहर खाने से पहले ओनिमेश सिन्हा ने फेसबुक पर एक पोस्ट भी किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “मैं जा रहा हूँ साथियों भोलेनाथ के पास, अलविदा! मेरे जाने के बाद सत्य की जीत होगी अलविदा।”

फ़िलहाल युवा कॉन्ग्रेस नेता ओनिमेश सिन्हा को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है और पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। इस घटना की वजह से कॉन्ग्रेस के छत्तीसगढ़ नेतृत्व में खलबली मची हुई है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सरगुजा स्थित शंकरगढ़ क्षेत्र की निवासी महिला ने आरोप लगाया था कि युवा कॉन्ग्रेस नेता ओनिमेश सिन्हा ने उनकी बड़ी बेटी को बंधक बनाया था। महिला ने इस घटना की शिकायत कोतवाली में की थी। इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता की माँ ने आईजी से भी शिकायत की थी।

26 जनवरी के मौके पर ओनिमेश सिन्हा छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री शिव डहेरिया से मिलने सरगुजा सर्किट पहुँचे। पीड़िता की माँ को इस बात की जानकारी मिली तो वह अपनी दो बेटियों के साथ वहाँ पहुँच गईं। पहुँचते ही उन्होंने युवा कॉन्ग्रेस नेता को सभी के सामने थप्पड़ जड़ दिया। उनके तेवर देख कर ओनिमेश को वहाँ से भागना पड़ा।

इस घटना की जानकारी मिलते ही एसपी टीआर कोशिमा मौके पर पहुँचे और उन्होंने हालात सामान्य कराए। इस बात से निराश होकर ओनिमेश ने गुरूवार की सुबह जहर खा लिया। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स का कहना है कि वह फ़िलहाल ख़तरे से बाहर हैं लेकिन उन्हें आईसीयू में रखा गया है। 

कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं का कहना है कि ये वारदात ओनिमेश का राजनीतिक करियर ख़त्म करने की साजिश है। ये कॉन्ग्रेस नेता की छवि धूमिल करने और उन्हें साज़िश में फँसाने के लिए किया गया है।

आरोप लगाने वाली महिला ने ओनिमेश सिन्हा की शिकायत मंत्री शिव डहेरिया से भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि ओनिमेश उनके मोहल्ले में घुस कर गाली-गलौच और मारपीट कर चुका है। उन पर पहले से ही तमाम आपराधिक मामले दर्ज हैं। महिला की सारी बातें सुनने के बाद शिव डहेरिया ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाएगी।  

अब TV पर नहीं दिखेंगे* राजदीप सरदेसाई, इंडिया टुडे ने काट ली एक महीने की सैलरी भी: रिपोर्ट्स

इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई को लेकर खबर है कि प्रबंधन ने उन्हें ऑफ एयर कर दिया है। इसके अलावा उनकी एक माह की सैलरी भी काटे जाने की सूचना है। जानकारी के मुताबिक सरदेसाई पर यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर उनके कुछ पोस्ट्स को लेकर की गई है। 

कथिततौर पर उनके ट्विट्स राष्ट्रपति कोविंद व 26 जनवरी के दिन मारे गए किसान से संबंधित थे। उन पर फर्जी खबर फैलाने का भी आरोप है। प्रबंधन ने राजदीप के ट्वीट्स को ग्रुप की सोशल मीडिया पॉलिसी से अलग माना है। इसीलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें 2 हफ़्ते के लिए ऑफ़ एयर कर दिया। साथ ही 1 महीने सैलरी न देने का निर्णय लिया। 

बता दें कि इससे पहले राजदीप के बयानों के कारण उनका विरोध सोशल मीडिया पर खूब हुआ था। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव ने उन्हें लेकर लिखा था, “राजदीप भारत के विरोध में उकसाने के लिए जाने जाते हैं।” उन्होंने इंडिया टुडे से सरदेसाई की बातचीच का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “यह वीडियो स्पष्ट रूप से भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने के अपराध को स्थापित करता है जो आईपीसी धारा 121 के तहत दंडनीय है जिसकी सजा मौत या आजीवन कारावास होती है। दिल्ली पुलिस को इसे हिरासत में लेना चाहिए।”

गौरतलब है कि अक्सर अपने ट्विटर अकाउंट से फर्जी खबरें फ़ैलाने वाले राजदीप सरदेसाई को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जाती है। गणतंत्र दिवस की सुबह से ही किसानों के प्रदर्शन के बीच, दिल्ली के DDU मार्ग पर एक व्यक्ति की ट्रैक्टर पलटने के कारण मौत हो गई थी। आईटीओ के पास पूरे चौक पर सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े रहे। जिसे लेकर समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक और फेक न्यूज़ फैला दी और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया।

दरअसल, राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। राजदीप ने ट्विटर पर लिखा, “पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर 45 साल के नवनीत की मौत हो गई है। किसानों ने मुझे बताया कि उसका ‘बलिदान’ व्यर्थ नहीं जाएगा।”

लेकिन हकीकत ये है कि ट्रैक्टर रैली और उपद्रव के दौरान जिस व्यक्ति की मौत हुई, वह पुलिस फायरिंग में नहीं, बल्कि ट्रैक्टर पलटने से मारा गया था। दरअसल, ड्राइवर ने काफी तेज रफ्तार से चल रहे ट्रैक्टर को अचानक से मोड़ दिया, जिसकी वजह से संतुलन बिगड़ गया और ट्रैक्टर पलट गया। इस दौरान किसान की मौत हो गई। सोशल मीडिया पर लोग ‘ट्विटर’ से सवाल कर रहे हैं कि क्या फेक न्यूज़ फ़ैलाने और राजधानी में दंगे भड़काने का प्रयास कर रहे राजदीप सरदेसाई का अकाउंट प्रतिबंधित किया जाएगा या नहीं?

गाजीपुर बॉर्डर पर एक्शन में UP पुलिस, किया फ्लैग मार्च: ‘किसानों’ पर कभी भी हो सकती है कार्रवाई!

गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच वहाँ भारी सुरक्षा बल की तैनाती हो गई है। खबर है दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर बॉर्डर में यूपी पुलिस और केंद्रीय बलों ने फ्लैग मार्च किया है। न्यूज 24 पत्रकार प्रभाकर कुमार मिश्रा ने प्रदर्शनस्थल से वीडियो जारी करके इसकी जानकारी दी।

उन्होंने दिखाया कि कैसे बॉर्डर पर फ्लैग मार्च हो रहा है। इसमें वह सारी गतिविधियों को देख कर कहते नजर आ रहे हैं कि संदेश साफ है कि कभी भी किसानों पर कार्रवाई हो सकती है।

बता दें कि गाजीपुर बॉर्डर के पास किसानों के आंदोलन के मद्देनजर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। पैरामिलिट्री फोर्स, पीएसी को करीब दस कंपनियाँ तैनात हैं। गाजियाबाद पुलिस के भी बड़े अफसर यहाँ पर तैनात हैं।

इससे पहले गणतंत्र दिवस पर घटी घटना के बाद यूपी के बागपत में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 40 दिन से चल रहे धरने को रातोंरात हटवा दिया था। वहाँ भी पुलिस फोर्स की तैनाती हुई थी। अब गाजीपुर में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों का दल यहाँ धरने पर बैठा है।

ट्विटर पर सक्रिय अकॉउंट्स से दावा किया जा रहा है कि गाजीपुर बॉर्डर पर किसी भी समय यूपी पुलिस अपनी कार्रवाई शुरू कर सकती है। वहाँ यूपी परिवहन की बसें मँगा ली गई हैं और पुलिस के वाहन भी मौके पर मौजूद हैं।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा है, “शाहीनबाग, घंटाघर, हाथरस में एजेंडे के लिए बेनकाब नक्सली फिर UP में झूठ फैलाने बढे़ हैं। ये वही हैं, जिनकी ज़ुबान से लाल किले पर एक शब्द ना फूटे। UP Police के प्रयास से धरने शांतिपूर्वक खत्म हुए। UP प्रभु राम की झाँकी को पहला स्थान मिलने की खुशी में डूबा है। यहाँ दिलजलों की दाल नहीं गलेगी।”

किसने कहा था कि खालिस्तान का झंडा नहीं लहराया गया: स्वयं देख लीजिए

26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान किसान प्रदर्शनकारियों ने जमकर बवाल किया। कई स्थानों पर पुलिस के साथ टकराव के बाद तथाकथित किसानों ने लाल किले पर धावा बोल दिया और इसकी प्राचीर पर एक पीले रंग का झंडा फहरा दिया। लोगों का कहना था कि आक्रामक प्रदर्शनकारियों ने खालिस्तानी झंडे को लाल किले पर फहरा दिया।

देश के तिरंगें की जगह कोई और झंडा देख देश के नागरिक आग बबूला हो गए। जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर खालिस्तानी झंडे को लेकर बहसें शुरू हो गईं हैं। जहाँ लिबरल गिरोह हिंसक प्रदर्शनकरियों के कारनामों पर पर्दा डालने के लिए यह साबित करने पर तूल गए कि तथाकथित किसान आंदोलनकारियों ने राष्ट्र ध्वज तिरंगें का अपमान नहीं किया। बल्कि उन्होनें लालकिले पर सिखों का धार्मिक झंडा ‘निशान साहिब’ का झंडा फहराया था।

वहीं अब सर्वादन्य नाम के एक ट्विटर यूजर ने लाल किले पर फहराए गए झंडे को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में आप स्पष्टतौर पर फहराए गए खालिस्तानी झंडे को देख सकते हैं। वीडियो में तीन युवक लाल किले की प्राचीर पर चढ़े हुए है। वहीं एक युवक नीचे राष्ट्रीय तिरंगे को भी लेकर खड़ा है। ऊपर चढ़ा एक प्रदर्शकारी पहले निशान साहिब के एक झंडे को तिरंगे के पास लगाते हुए नारे लगाता है। उसके बाद वहाँ खड़ा दूसरा आंदोलनकारी खालिस्तानी तिरंगे को ऊपर उठाता है और सिखों के धार्मिक निशान साहिब के झंडे से ठीक ऊपर खालिस्तानी झंडे को लहराते हुए दिखाई दे रहा है।

गौरतलब है 26 जनवरी के मौके पर हुए इस हिंसक प्रदर्शन को लोग भारत के लिए इसे काला दिवस बता रहे है। वहीं कई मीडिया समूह फैक्टचेक के नाम पर लोगों को इस मुद्दे पर गुमराह करने का भी प्रयास कर रही हैं। दंगाईयों ने सिर्फ लालकिले पर ही हंगामा नहीं किया बल्कि उन्होंने राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया था। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ दिया था। ये दोनों झाँकी गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाई गई थीं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई हिंसा में एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस ने करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इन लोगों पर हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा है। इन ‘किसान दंगों’ में अब तक कुल 22 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने कहा कि वे सत्यापन करने के बाद गिरफ्तारी कर रहे हैं। दंगों में 300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है।