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31 का कामिर खान, 11 साल की बच्ची: 3 महीने में 4000 मैसेज भेजे, यौन शोषण किया; निकाह करना चाहता था

यूनाइटेड किंगडम में एक व्यक्ति को बच्ची के यौन शोषण के आरोप में साढ़े 4 साल कारावास की सज़ा सुनाई गई है। उत्तरी इंग्लैंड के साउथ यॉर्कशायर की पुलिस ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रॉदरम के रहने वाले कामिर खान ने एक 11 साल की बच्ची से स्नैपचैट के माध्यम से दोस्ती थी, फिर उसका यौन शोषण किया। उसने नाबालिग को झाँसा देने की कोशिश की। फ़रवरी और मार्च 2019 में उसने बच्ची को गलत तरीके से छुआ था

31 साल के कामिर खान ने मात्र 3 महीने की अवधि में बच्ची को 4000 से भी अधिक मैसेज भेजे। इन मैसेजों में उसने दावा किया कि वो बच्ची से काफी प्यार करता है और उससे निकाह करना चाहता है। वो न सिर्फ अपनी भद्दी तस्वीरें उसे भेजता था, बल्कि बच्ची से भी कहता था कि वो अपनी नंगी तस्वीरें उसे भेजे। वो व्हाट्सप्प पर भी उसका पीछा करता था। हालाँकि, राहत की बात ये है कि बच्ची ने उसकी बात नहीं मानी और तस्वीरें नहीं भेजी।

पुलिस ने बताया कि कामिर खान के विकृत क्रियाकलापों के बारे में तब खुलासा हुआ, जब बच्ची की माँ ने अपनी बेटी का फोन चेक किया। उसमें उन्होंने देखा कि ‘जायन’ नाम से कई मैसेज आए हुए हैं तो उन्हें शक हुआ। पीड़ित बच्ची उस समय तक अवसाद में दिख रही थी, जिसके बाद उसने अपनी माँ को और परिजनों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। जाँच अधिकारी रेचल स्कॉट ने बताया कि बच्ची की कमजोरी और कम उम्र का फायदा उठाते हुए आरोपित ने उसे अपना शिकार बनाना चाहा।

कामिर खान बच्ची को ये एहसास दिलाने की कोशिश में लगा हुआ था कि वो उसका बॉयफ्रेंड है और इस तरह के रिश्ते में वे चीजें सामान्य हैं, जो वो करने को कह रहा है। पुलिस ने बताया कि वो बच्ची बहादुर है, इसलिए पूरी जाँच प्रक्रिया और पूछताछ के दौरान वो मजबूत बनी रहीं, जिस पर गर्व होना चाहिए। उसने जाँच में काफी मदद भी की। पुलिस ने बताया कि तमाम सबूतों के बाद कामिर खान ने आरोप कबूल कर लिया।

पुलिस ने आरोपित को लेकर दी जानकारी

पुलिस का कहना है कि आरोपित बच्चों के लिए एक खतरा है और उसका जेल में रहना आवश्यक है। साथ ही पुलिस ने नाबालिग बच्चों को सलाह दी है कि वो अपनी अंतरंग तस्वीरें किसी को भी भेजने से बचें। अपनी व्यक्तिगत डिटेल्स भी किसी के साथ शेयर न करें। अभिभावकों से कहा है कि उनके बच्चे अगर सोशल मीडिया पर हैं, तो वो निगरानी रखें कि वो किस से बात कर रहे हैं और किन-किन से सम्पर्क में हैं।

कामिर खान ने स्वीकार किया है कि उसने दो बार 11 वर्षीय बच्ची का यौन शोषण किया। उसने उसे गलत तरीके से छुआ, यौन सम्बन्ध बनाने के लिए उसे उकसाया और अश्लील मैसेज भेजे। उसे बुधवार (नवंबर 25, 2020) को शेफील्ड क्राउन कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। उसका नाम ‘सेक्स ऑफेंडर रजिस्टर’ में भी दर्ज किया जाएगा। लोगों ने आरोपित के लिए लम्बी सज़ा की माँग की है।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे जो भी मामले सामने आते हैं, उसमें आरोपितों के अपराधों को छिपाने के लिए विकिपीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स भरसक कोशिश करते हैं। हाल ही में अमेरिका से एक मामला सामने आया था, जहाँ रोडनी रीड नामक व्यक्ति ने कई महिलाओं को अपना शिकार बनाया, जिनमें एक विकलांग और एक 12 साल की बच्ची भी शामिल थी। बाद में उसे स्टेसी नामक महिला की रेप कर हत्या कर दी। हालाँकि, विकिपीडिया ने उसके इतिहास को छिपा लिया।

‘ब्राह्मण @रामी, संस्कृत घृणा से भरी’: मणिपुर के छात्र संगठन ने स्कूल-कॉलेज में संस्कृत की कक्षा का किया विरोध

सोशल मीडिया पर एक पत्र काफी वायरल हो रहा है। इसमें मणिपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन इन दिल्ली (MSAD) ने ब्राह्मणों को आपत्तिजनक नामों से संबोधित किया है। आरोप लगाया गया है कि मणिपुर के विद्यालयों और महाविद्यालयों (कॉलेज) में कथित तौर पर संस्कृत भाषा थोपी जाने के लिए ब्राह्मण ही जिम्मेदार हैं। सरकार द्वारा संस्कृत को विद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की घोषणा के एक दिन बाद यह विवादास्पद पत्र फेसबुक पर साझा किया गया था।

शुक्रवार (20 नवंबर 2020) को इस छात्र संगठन की तरफ से जारी की गई विवादास्पद प्रेस विज्ञप्ति (रिलीज़) में दावा किया गया था कि मणिपुर की भाजपा सरकार उत्तर-पूर्वी राज्यों में छात्रों पर संस्कृत थोपने का प्रयास कर रही है। संस्कृत भाषा को गैर स्वदेशी और सरकार को मूर्ख बताते हुए संगठन ने कहा, “मणिपुर के छात्रों को संस्कृत पढ़ाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जहाँ इस भाषा का एक भी शब्द यहाँ की मूल आबादी की मातृभाषा को विरासत में नहीं मिला। सरकार संस्कृत भाषा थोप कर अपनी मूर्खता का प्रदर्शन कर रही है। इस भाषा का आधार घृणा, छुआछूत, लिंगभेद, अधिकार ज़माना और अंधराष्ट्रवाद है। जैसा कि हम जानते हैं कि उच्च जाति का ब्राह्मण समाज भी यही है।”

अपनी विकट अज्ञानता का प्रदर्शन करते हुए MSAD ने दावा किया कि भाजपा सरकार औपनिवेशीकरण की तथाकथित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मणिपुर के मूल निवासियों को भाषाई और अकादमिक बदलाव के ज़रिए गुलाम बना कर रखना चाहती है। पत्र में कहा गया है, “एक एलियन भाषा को यहाँ के मूल निवासियों पर लागू करना औपनिवेशीकरण का प्रतीक है। 30 से अधिक ऐसी बोलियाँ हैं जिनका इस्तेमाल यहाँ के स्थानीय लोग करते हैं लेकिन उन्हें बचाने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है।” 

मणिपुर के छात्रों ने ब्राह्मणों को कहा #रामी (b*stards)

इसके बाद MSAD ने ब्राह्मणों को #रामी (b*stards) कह दिया। पत्र में कहा गया है, “इस बात में कोई संदेह नहीं है कि यह सरकार पूरी तरह अंधी है, लेकिन अपने औपनिवेशिक गुरु के लिए पूरी तरह आज्ञाकारी है। जो कि भारतीय समाज के उच्च जाति वाले हिन्दू ब्राह्मण, #रामी हैं। ब्राह्मणों के आगे नतमस्तक कठपुतली जैसे तंत्र के तथाकथित शिक्षा मंत्री द्वारा किया गया ऐलान जिसके मुताबिक़ ‘संस्कृत भाषा पाठ्क्रम का हिस्सा बनेगी’ निंदनीय है।”

विवादित पत्र का स्क्रीनशॉट

MSAD का सरकार पर आरोप 

इMSAD ने भाजपा सरकार पर मणिपुर को ‘हिन्दू बाहुल्य समाज’ में तब्दील करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पत्र में लिखा हैं, “यह सरकार शांतिदोष गोसाई का एक चरण जैसा ही होगा जिसने 18वीं सदी के दौरान मणिपुर में उथल-पुथल मचा दी थी। इसे अनुमति मिली तो यह भी वैसी जहरीली गतिविधि ही साबित होगी। हम सभी समूहों से निवेदन करते हैं कि वह मणिपुर को हिन्दू समाज में तब्दील करने की रणनीति और राज्य के लोगों को अपना गुलाम बनाने के विरुद्ध खड़े हों। एकता अमर रहे।” इस प्रेस विज्ञप्ति पर MSAD के सचिव केनेडी मोइरंगथम (Kenedy Moirangthem) का हस्ताक्षर भी मौजूद है।  

गौरतलब है कि 19 नवंबर को मणिपुर के शिक्षा मंत्री एस राजेन ने सूचना दी थी कि संस्कृत को अनेक विद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्क्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया था कि एक संस्कृत विभाग भी शुरू किया जाएगा। यानी आदेश में इस तरह की कोई भी बात नहीं कही गई थी कि संस्कृत को अनिवार्य किया जाएगा या अन्य स्थानीय भाषाओं/बोलियों को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बावजूद MSAD ने एक ऐसे मुद्दे पर विवाद खड़ा (हिन्दुफोबिया फैलाना) कर दिया, जिसका कोई विवादित पहलू था ही नहीं।

टिप्पणी: लेख लिखे जाने के पूर्व ऑपइंडिया ने इस संगठन से संपर्क करने का प्रयास किया था, फेसबुक पर दिया गया नंबर बंद था और मैसेज का भी कोई जवाब नहीं मिला। अगर MSAD की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आती है तो इस लेख में उनका पक्ष भी शामिल किया जाएगा। 

लव जिहाद पर यूपी में अब बेल नहीं, 10 साल की सजा संभव: योगी सरकार के अध्यादेश पर राज्यपाल की मुहर

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दे दी है। इसके बाद ये प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू हो गया है। राज्यपाल ने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को इसकी मंजूरी दी। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये अपराध गैर-जमानती हो गया है और इसे 6 महीनों के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।

NBT की खबर के अनुसार, अगर कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसे 3 साल से 10 साल तक सजा दी जाएगी। इसके अलावा कम से कम 50,000 रुपए का जुर्माना भी देना होगा। साथ ही धर्म परिवर्तन में शामिल संगठनों का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नाम छिपा कर छद्म नाम से शादी करने वालों को 10 साल तक की सज़ा मिलेगी। इसके साथ ही यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में होगा और गैर जमानती (Non Bailable) होगा। अभियोग का विचारण प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में किया जाएगा।

यूपी में लव जिहाद के नए कानून को लेकर जो बातें अब तक सामने आई है, उसके अनुसार 10 साल तक की सजा का प्रावधान होगा। यदि दो अलग-अलग धर्म के लोग शादी करते हैं तो इस बात की जाँच की जाएगी कि यह धोखे से तो नहीं हुआ है।  मध्य प्रदेश सरकार भी जल्द ही लव जिहाद पर कानून बनाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में धर्मांतरण और लव जिहाद के बढ़ते मामलों को रोकने के मकसद से मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 लाने की तैयारी में है।

योगी आदित्यनाथ ने पहले ही हुए कहा था, “यह अध्यादेशऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं। हमने जो कहा था, वह करके दिखाया है। साथ ही यह भी कहने के लिए आए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया है शादी ब्याह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का प्रयास करेंगे।” 

वहीं उत्तर प्रदेश के बाद अब हरियाणा में भी लव जिहाद को रोकने के लिए कानून बनाया जाएगा। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने प्रदेश में लव जिहाद को रोकने के लिए कानून बनाने पर विचार की बात कही थी। बता दें कि निकिता हत्याकांड के बाद से लव जिहाद का मामला चर्चा में आया था। अनिल विज ने ट्वीट कर कहा था कि हरियाणा में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने पर विचार चल रहा है। फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी के साथ ही ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बना अध्यादेश कानून में तब्दील हो गया है।

दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काने वाला संगठन ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को पहुँचा रहा भोजन: 25 मस्जिद काम में लगे

पंजाब में कथित किसान आंदोलन को लेकर देश भर में बहस चल रही है। खालिस्तानी संगठनों के साथ-साथ ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH)’ संगठन के भी इसमें शामिल होने और इसे समर्थन देने के आरोप हैं। ये वही इस्लामी संगठन है, जिस पर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में शामिल होने के भी आरोप हैं। UAH ने किसान आंदोलनकारियों को भोजन व अन्य चीजें पहुँचाने का जिम्मा उठा रखा है।

UAH की पूरी कोशिश है कि दिल्ली पहुँचे ‘किसान’ आंदोलनकारी ज्यादा से ज्यादा दिनों तक यहाँ रहें और लंबे समय तक हंगामा करें। इसलिए, उसने दिल्ली की 25 मस्जिदों के साथ मिल कर आंदोलनकारियों को न सिर्फ खाने-पीने की चीजें, बल्कि रहने के लिए जगह भी मुहैया कराने का जिम्मा उठा लिया है। UAH के मुखिया नदीम खान ने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों को मदद पहुँचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 4 किचन पूरे 24 घंटे चलाए जा रहे हैं, ताकि आंदोलनकारियों को भोजन मुहैया कराया जा सके। हौज खास, रोहतक, ओखला और ओल्ड दिल्ली में ये किचन स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन 4 जगहों के अलावा आंदोलनकारियों को उनकी माँग के हिसाब से पार्सल भी पहुँचाए जा रहे हैं। गाड़ियों का इस्तेमाल कर भोजन पैकेट्स आंदोलनकारियों तक पहुँचाया जा रहा है।

UAH की स्थापना खालिद सैफी ने की थी। वो एक इस्लामी कट्टरपंथी है, जिस पर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काने के आरोप हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद में इस दंगे पर बोलते हुए इस संगठन का नाम लिया था। उन्होंने कहा था कि कैसे UAH ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से पहले सड़कों को जाम करने की बात की थी। उसे गिरफ्तार कर उस पर UAPA भी लगाया गया था।

सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी वायरल हुई थीं, जिसमें खालिद सैफी दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, रवीश कुमार से लेकर JNU के छात्र नेता कन्हैया कुमार के साथ देखा गया था। इनमें खालिद सैफी को वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की आरफा खानम, धान को गेहूँ बताने वाले यूट्यूबर अभिसार शर्मा, राजदीप सरदेसाई और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ देखा गया था।

UAH ग्रुप का व्हाट्सप्प स्क्रीनशॉट वायरल हुआ था

UAH का एक व्हाट्सप्प ग्रुप भी था, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों और विदेश से फंड्स पाने वाले NGO के साथ संबंधों के बारे में पता चला था। इस ग्रुप के एक स्क्रीनशॉट में निकिता चतुर्वेदी नाम की एक महिला ‘खालिद भाई, उमर और नदीम भाई’ का नाम लेती हैं, जिसके जवाब में लिखा जाता है कि ये तीनों प्रदर्शन में आ रहे हैं। निकिता फिर लिखती हैं कि लोग आपका इंतजार कर रहे हैं। अब दिल्ली दंगों का आरोपित संगठन UAH ‘किसान’ आंदोलन को हवा दे रहा है।

यही नदीम खान अब आंदोलनकारियों के लिए सारी व्यवस्थाएँ कर रहा है। CAA विरोधी उपद्रव के दौरान UAH के एक कार्यक्रम में योगेंद्र यादव और शरजील इमाम जैसे विवादित चेहरों ने लोगों को सम्बोधित किया गया था। अब फिर से वही ‘सिख-मुस्लिम एकता’ की बातें की जा रही है। एक सिख व्यक्ति ने CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों को लंगर खिलाया था, तब भी ये प्रोपेगेंडा चलाया गया था। बाद में पता चला कि वो AIMIM का नेता है।

राजधानी एक्सप्रेस में मिले 14 रोहिंग्या (8 औरत+2 बच्चे), बांग्लादेश से भागकर भारत में घुसे थे; असम में भी 8 धराए

बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर से भागकर भारत में घुसे 14 रोहिंग्या लोगों को राजधानी एक्सप्रेस से पकड़ा गया है। इनमें 8 औरतें और दो बच्चे हैं। इसके अलावा असम से भी आठ रोहिंग्या पकड़े गए हैं।

बिहार के किशनगंज में राजधानी एक्सप्रेस में सफर कर रहे 14 रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया गया। ये सभी लोग बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार रिफ्यूजी कैम्प से भाग आकर भारत में घुसे थे। दूसरी घटना असम के हैलाकांडी जिले स्थित अलगापुर की है जहाँ 8 रोहिंग्याओं को अवैध रूप से भारत में घुसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

बिहार के किशनगंज में हुई 14 रोहिंग्याओं की गिरफ्तारी के संबंध में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शुभानन चंदा ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 24 नवंबर रेलवे सुरक्षा बल के अलीपुरदुआर सुरक्षा नियंत्रण कक्ष में सुरक्षा हेल्पलाइन 182 पर 02501 अगरतला-नई दिल्ली स्पेशल राजधानी एक्सप्रेस के एक यात्री से सूचना मिली। उसने बताया कि कोच नंबर बी10 में कुछ यात्री संदिग्ध लग रहे हैं। इसके बाद अलीपुरदुआर के रेलवे सुरक्षा बल अधिकारी ने कटिहार मंडल अंतर्गत न्यूजलपाईगुड़ी में मौजूद सहकर्मियों को सूचित किया।

इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की। इस दौरान 14 ऐसे यात्री मिले जिनके पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज़ नहीं थे। वे अन्य नाम से यात्रा कर रहे थे। इन सभी को ट्रेन से उतार कर न्यू जलपाईगुड़ी स्थित जीआरपी थाना लाया गया। इन सभी पर जीआरपी/न्यू जलपाईगुड़ी द्वारा विदेशी (संशोधन) अधिनियम की धारा 14ए के तहत मामला दर्ज किया गया। 25 नवंबर को इन 14 रोहिंग्याओं को न्यायाधीश के समक्ष पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।             

सूत्रों से मिली जानकारी बाद पुलिस ने असम, हैलाकांडी स्थित अलगापुर के घर में छापा मारा जहाँ से 8 रोहिंग्याओं और उन्हें शरण देने के आरोपित एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। हैलाकांडी के एसपी पीके नाथ ने मीडिया समूहों से बात करते हुए कहा, “यह समूह 2013 में जम्मू-कश्मीर गया। कुछ साल वहाँ रहने के बाद यह दिल्ली आया और फिर हैदराबाद चला गया। लॉकडाउन के दौरान इनका रोजगार छिन गया और यह काम की तलाश में असम के हैलाकांडी आए।” 

‘बंगाल में हम बहुसंख्यक, क्योंकि आदिवासी और दलित हिन्दू नहीं होते’: मौलाना अब्बास सिद्दीकी और ओवैसी साथ लड़ेंगे चुनाव

पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस के खेमे में बेचैनी है, क्योंकि ममता बनर्जी ने पिछले एक दशक में मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर खासी सक्रियता दिखाई है। अब पश्चिम बंगाल में ओवैसी को बंगाल के सबसे प्रभावशाली मौलानाओं में से एक अब्बास सिद्दीकी का साथ मिल रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि 2011 में मुस्लिम वोट बैंक के सहारे ही ममता बनर्जी ने साढ़े 3 दशक से सत्ता पर काबिज वामपंथियों को हराया था।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि असदुद्दीन ओवैसी ने अब्बास सिद्दीकी को 50 सीटें देने का फैसला लिया है। अब्बास सिद्दीकी हुगली जिले के जंगीपारा में स्थित फुरफुरा दरबार शरीफ के मौलाना हैं। उनका असदुद्दीन ओवैसी को समर्थन देना राज्य में मुस्लिम वोटों की बड़ी गोलबंदी की ओर इशारा करता है, जिसका सीधा प्रभाव ममता बनर्जी पर पड़ने वाला है। उन्होंने कबूला है कि असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के लिए एक राजनीतिक फॉर्मूले पर काम हो रहा है।

वो खुद को ओवैसी का बहुत बड़ा फैन भी बताते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इसीलिए चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला लिया है, क्योंकि कुछ लोग धर्म के आधार पर समाज को बाँटने में लगे हुए हैं। 31% वोट शेयर के साथ पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों का रुझान काफी मायने रखता है। TMC के नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि अब्बास सिद्दीकी एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता हैं, जिन्होंने कई मौकों पर AIMIM का खुल कर समर्थन किया है।

एक नेता ने स्वीकार किया कि ये उनकी पार्टी AIMIM के लिए बड़ा सिरदर्द साबित होने वाला है। राज्य के युवाओं के बीच ओवैसी अपनी पैठ बनाने में लग गए हैं। पार्टी का दावा है कि राज्य के कई मौलाना उसके संपर्क में हैं। बड़ी मुस्लिम जनसंख्या वाले जिलों मुर्शिदाबाद (67%), मालदा (52%) और नॉर्थ दिनाजपुर में करीब दो दर्जन विधानसभा सीटों पर ओवैसी और अब्बास सिद्दीकी की जोड़ी को बड़ा समर्थन मिल रहा है।

पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अब्बास सिद्दीकी बंगाल में मुस्लिमों की जनसंख्या को लेकर दावे कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस वीडियो में वो कह रहा है कि ये बंगाल है और यहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या 35% है। वो कह रहा है, “हम मुस्लिम यहाँ पर बहुसंख्यक हैं। आदिवासी, मथुआ और दलित हिन्दू नहीं हैं, इसीलिए यहाँ हम मेजोरिटी में हैं।” मजूमदार ने कहा कि यहाँ एक ही रणनीति दिखती है – हिन्दुओं को विभाजित करो, मुस्लिमों को एक करो।

अब्बास सिद्दीकी मार्च 2020 में ही दावा कर चुका है कि वो कम से कम 45 सीटों पर तो चुनाव लड़ेगा ही। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि करीब 90 सीटों पर ममता बनर्जी मुस्लिम वोटों के सहारे बैठी हुई थीं। AIMIM कह रही है कि मुस्लिम समाज की भलाई करना है उसका लक्ष्य है। राजधानी कोलकाता में मुस्लिमों की जनसंख्या 22% है और यहाँ भी असदुद्दीन ओवैसी के आने से लड़ाई खासी रोचक हो गई है।

मौलाना अब्बास सिद्दीकी पहले से ही विवादित चेहरा रहे हैं। अप्रैल 2020 में उन्होंने कहा किया था कि अल्लाह कोई ऐसा वायरस भेज दे, जिससे भारत में 20-50 करोड़ लोग मारे जाएँ। जब CAA को लेकर उपद्रव हो रहा था, तो उसने धमकी दी थी कि अगर इस कानून को बंगाल में वापस नहीं लिया गया तो वो कोलकाता एयरपोर्ट को ठप्प कर देगा। TMC कार्यकर्ताओं ने उसकी पिटाई भी की थी। उसके घर की खिड़की-दरवाजे तोड़ डाले गए थे।

उधर AIMIM नेता अनवर पाशा तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के राजनीतिक एजेंडों को भी कठघरे में खड़ा किया है। अनवर पाशा ने कहा कि एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा लेकर भाजपा को जिताने में मदद की है। यह बेहद ख़तरनाक है और पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं होने दिया जा सकता। उनका कहना है कि अगर पश्चिम बंगाल में ‘बिहार मॉडल’ लागू किया जाता है तो सिर्फ खून-खराबा होगा।

‘हमारी माँगटीका में चमक रही हैं स्वरा भास्कर’: यूजर्स बोले- आम्रपाली ज्वेलर्स से अब कभी कुछ नहीं खरीदेंगे

घनघोर वामपंथन और लिबरल ब्रिगेड की अहम सदस्य स्वरा भास्कर को ब्रांड एम्बेसडर बनाने के बाद राजस्थान के ‘आम्रपाली ज्वेलर्स’ को सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध झेलना पड़ा है।  

आम्रपाली ज्वेलर्स के आधिकारिक ट्विटर एकाउंट से 27 नवंबर 2020 को स्वरा भास्कर की एक तस्वीर साझा की गई, जिसमें उन्होंने आभूषण पहने हुए थे। इस ट्वीट में लिखा हुआ था, “प्रेम, प्रकाश और ख़ुशी के साथ त्योहार का उत्सव मनाते हुए स्वरा भास्कर हमारी चाँदबालियों, चूड़ियों और माँगटीका में चमक रही हैं।” 

स्वरा भास्कर को बतौर ब्रांड एम्बेसडर पेश करने के बाद आम्रपाली के अनेक ग्राहकों ने काफी रोष जताया। उन्होंने एक विवादित और एजेंडापरस्त चेहरे को ब्रांड एम्बेसडर बनाने के लिए आम्रपाली ज्वेलर्स का ट्विटर पर जम कर विरोध किया। स्वरा भास्कर को अपने साथ जोड़ने पर ट्विटर यूज़र्स ने ज्वेलरी ब्रांड का बहिष्कार करने की माँग भी उठाई। 

सोशल मीडिया यूज़र्स ने उठाई बहिष्कार की माँग

एक आक्रोशित ट्विटर यूज़र ने कहा कि उसने अपनी पत्नी के लिए लाखों रुपए के कुल 6 उत्पाद आम्रपाली ज्वेलर्स से खरीदे थे, लेकिन अब वह कुछ नहीं खरीदेगा। यूज़र ने यह भी कहा कि वह आम्रपाली ज्वेलर्स को ट्विटर और व्हाट्सएप दोनों जगह से ब्लॉक करेगा। 

एक ट्विटर यूज़र ने कहा कि उसे इस ब्रांड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन स्वरा भास्कर के जुड़ने के बाद वह इस ब्रांड से कोई खरीददारी नहीं करेगी। इसके अलावा वह अपने फॉलोअर्स को भी यही सुझाव देगी। 

एक ट्विटर यूज़र्स ने दिल्ली दंगों का ज़िक्र करते हुए कहा कि स्वरा भास्कर ने दिल्ली दंगे भड़काने में भूमिका निभाई थी, इसलिए आम्रपाली ज्वेलर्स का बहिष्कार करना होगा। 

एक सोशल मीडिया यूज़र स्वरा भास्कर के ब्रांड एम्बेसडर बनने से इतना आक्रोशित हुआ कि उसने कहा, “मैं या सुनिश्चित करूँगा कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य इस ब्रांड का कोई भी उत्पाद नहीं खरीदे।”

एक यूज़र ने लिखा, “सभी धूर्त एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।” इसके साथ उसने एक स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें आम्रपाली ज्वेलर्स पर आयकर विभाग के छापे की जानकारी दी गई थी। 

मज़े की बात है कि आम्रपाली ज्वेलर्स के मालिक कॉन्ग्रेस नेता राजीव अरोड़ा हैं। जुलाई 2020 के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने आम्रपाली ज्वेलर्स के विभिन्न ठिकानों पर कर चोरी को लेकर छापे मारे थे। इस छापेमारी के दौरान लगभग 12 करोड़ नगद और 1.5 करोड़ के आभूषण जब्त किए गए थे। अधिकारियों का आरोप था था कि चाँदी के आभूषणों के बड़े हिस्से का व्यापार रेगुलर एकाउंट बुक से हट कर होता है। 

स्वरा भास्कर की पुरानी हरकतों के चलते आया सोशल मीडिया यूज़र्स को गुस्सा

पिछले कुछ समय में तमाम ऐसे मुद्दे सामने आए हैं जिन पर स्वरा भास्कर का मत बेहद विवादित रहा है। ‘देवी स्थान’ में बलात्कार की घटना का आरोप लगाए जाने के बाद प्लेकार्ड लेकर सलेक्टिव विरोध दर्ज कराने के चलते स्वरा भास्कर को ‘एंटी हिन्दू’ घोषित किया जा चुका है। स्वरा भास्कर की इस हरकत के बाद काफी विवाद भी खड़ा हुआ था कि कुछ लोगों द्वारा किए गए अपराध की वजह से उन्होंने पूरे धर्म को नीचा दिखाना शुरू कर दिया। इस दौरान यह आरोप लगा था कि जब अन्य धार्मिक और पूजा स्थलों पर ऐसी घटनाएँ हुई थीं तब स्वरा भास्कर का मत ऐसा नहीं था। 

इसके अलावा स्वरा भास्कर 2020 के फरवरी महीने के दौरान राजधानी दिल्ली में हुए भयावह दंगों के मुख्य आरोपितों के साथ खड़ी नज़र आई थीं। स्वरा भास्कर ने दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड उमर खालिद की रिहाई के लिए पूरे जोर शोर से अभियान चलाया था जो दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट के मुताबिक़ देशद्रोह का आरोपित है।    

उमेश बन सलमान ने मंदिर में रचाई शादी, अब धर्मांतरण के लिए कर रहा प्रताड़ित: पीड़िता ने बताया- कमलनाथ राज में नहीं हुई कार्रवाई

मध्य प्रदेश में ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का नया मामला सामने आया है। जहाँ राज्य सरकार इसके खिलाफ कड़ा कानून बनाने की तैयारी में लगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार (नवंबर 27, 2020) को राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आवास पर एक महिला अपनी पीड़ा लेकर पहुँची। पीड़िता ने बताया कि उसका पति उमेश नाम से उसके साथ रह रहा था, लेकिन उसकी असलियत कुछ और ही थी, उसका असली नाम सलमान निकला।

पीड़िता ने बताया कि अब उमेश का असली चेहरा सामने आ गया है और वो उससे धर्मपरिवर्तन कर इस्लाम अपनाने के लिए कह रहा है। गृह मंत्री ने भोपाल के डीआईजी को इस मामले की जाँच करने को कहा है, साथ ही पीड़िता को आश्वासन दिया कि उसे न्याय दिलाया जाएगा। पीड़िता ने बताया कि गेहूँखेरा के रहने वाले व्यक्ति से करीब एक वर्ष पहली उसकी मित्रता हुई थी। वो अपना नाम उमेश बताता था।

दोनों ने मंदिर में हिन्दू रीति-रिवाज से शादी की। शादी के बाद उनका एक बच्चा भी हुआ। पीड़िता ने बताया कि शादी के कुछ दिनों बाद खुलासा हुआ कि उसके पति का नाम उमेश नहीं, बल्कि सलमान है। युवती ने आरोप लगाया कि सलमान पिछले कई हफ़्तों से उसे धर्म परिवर्तन करने के लिए न सिर्फ प्रताड़ित कर रहा है, बल्कि उसने बच्चे को भी जान से मार डालने की कोशिश की। इसीलिए, वो न्याय की माँग लिए राज्य सरकार के पास पहुँची है।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जाँच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर उनके आवास पर पहुँची थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके परिजनों ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के शासनकाल में भी सलमान (उमेश) के खिलाफ डरा-धमका कर शादी करने और और धर्मांतरण के लिए प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ये घटना कोलार थाना क्षेत्र की है।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की चर्चा होने पर डरे-सहमे लोग सामने आने का साहस कर रहे हैं। उमरिया में जन-जातीय गौरव सम्मान समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लव-जिहाद के मुद्दे पर आक्रोश दिखाते हुए कड़े शब्दों में कहा था, “मैं मध्यप्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ किसी भी कीमत पर नहीं चलने दूँगा। उसके लिए हम कानून बना रहे हैं। यह देश को तोड़ने का षड्यंत्र है, इसे किसी भी कीमत पर हम कामयाब नहीं होने देंगे।”

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देख दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री केजरीवाल से नाइट कर्फ्यू लगाने पर उनका पूरा प्लान माँगा है। सरकार ने कोर्ट को इससे पहले सूचित किया था कि वह इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है।  

केंद्र सरकार की ओर से इस विचार पर कह दिया गया है कि गृह मंत्रालय की नई एडवाइज़री के अनुसार राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश अपना मूल्यांकन करने के बाद नाइट कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाने के लिए स्वतंत्र हैं।

बता दें कि दिल्ली में नाइट कर्फ्यू को लेकर कोर्ट में कोई निर्णय नहीं लिया गया है, मगर इस मामले की सुनवाई के बीच केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली की बिगड़ी स्थिति के लिए दिल्ली सरकार को दोषी ठहराया गया है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि दिल्ली सरकार ने त्योहारों में सख्ती नहीं बरती, इसलिए कोरोना के केस बढ़े हैं। केंद्र की ओर से कहा गया कि दिल्ली सरकार ने त्योहारों और बढ़ती सर्दी में कोरोना गाइडलाइंस का पालन सख्ती से नहीं करवाया। हलफनामे में यह भी कहा गया है दिल्ली सरकार द्वारा उपायों को लागू करने में असफल होने के कारण संक्रमण फैला।

जस्टिस अशोक भूषण की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा की तमाम चेतावनियों के बावजूद दिल्ली सरकार ने महामारी की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए। राज्य सरकार ने डेंगू की रोकथाम समेत तमाम विज्ञापन दिए, लेकिन कोविड के बारे में उनका एक भी विज्ञापन नहीं आया।

केंद्र ने बताया कि 11 नवंबर 2020 को हुई बैठक में दिल्ली सरकार की खामियाँ सामने आई थीं। इतना ही नहीं केजरीवाल सरकार पर अस्पतालों में आईसीयू बेड और टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के लिए समय पर उपाय नहीं करने का भी आरोप केंद्र की ओर से लगाया गया है। 

केंद्र सरकार की मानें तो हाईपॉवर कमेटी ने दिल्ली सरकार को चेताया था। मगर केजरीवाल सरकार इसे अनसुना करती गई। उन्होंने टेस्टिंग क्षमता खासकर आरटी पीसीआर नहीं बढ़ाई, यह लंबे समय से 20,000 पर ही टिका रहा। इसके अलावा होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों की भी प्रभावी ढंग से ट्रेसिंग नहीं हुई।

केंद्र के हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली की सरकार की नाकामियों के कारण 15 नवंबर को कोविड स्थिति की समीक्षा करने के लिए नई योजना तैयार करने की पहल करनी पड़ी। इस नई योजना में 30 नवंबर तक टेस्टिंग दुगनी होगी और रेपिड एंटीजन 60,000 किया जाएगा।

बता दें कि अब तक दिल्ली में 5,45,787 मामले सामने आ चुके हैं। इनमे से 38,387 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से 4,98,780 ठीक हो चुके हैं और मृतकों की संख्या 8720 हो चुकी है।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक मैसेज में दावा किया जा रहा है कि भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) रोहिंग्या मुस्लिमों को नियुक्त करने जा रही है। इस मैसेज में चिंता जाहिर की गई है कि रोहिंग्या मुस्लिमों को खुफिया एजेंसी में नियुक्त करने से देश को खतरा बढ़ सकता है। 

अब इस दावे को पहली नजर में ही पढ़ने से ये लग रहा है कि ये दावा झूठा होगा, क्योंकि एक खुफिया एजेंसी इतनी परिपक्व होती है कि उन्हें सुरक्षा संबंधी बातें मीडिया से न समझनी पड़ी। लेकिन सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने वाले लोगों के दावों का आधार कथित तौर पर भारत सरकार द्वारा जारी किया गया एक नियुक्ति नोटिस है। 

नोटिस जिसका हवाला दिया जा रहा

इस नोटिस का हवाला देकर लोगों का कहना है कि सरकार रोंहिग्या मुस्लिमों को रॉ में भर्ती कर रही है और इसी को देखकर उनकी चिंता है कि यदि ये सच है तो देश में घुसपैठ बढ़ेगी। सोशल मीडिया यूजर्स का यह भी पूछना है कि क्या गृह मंत्रालय रोहिंग्या मुस्लिमों को वैध नागरिक या फिर शरणार्थी मानने लगा है?

अब इस नोटिस की सच्चाई क्या है, यहाँ इस विषय पर बात करने की जरूरत नहीं है। ये पूरा मामला केवल लोगों की कम समझ के कारण उत्पन्न हुआ और अफवाह उड़ गई कि रोहिंग्या मुस्लिमों को भर्ती किया जा रहा है। कैसे?

क्या कहता है नियुक्ति के लिए जारी किया गया सर्कुलर?

केंद्रीय सचिवालय द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है, “भारत सरकार के संगठन के साथ रिजनल डायरेक्ट भर्ती भाषा के आधार पर फील्ड असिस्टेंट (जीडी) के पद पर रिक्त पदों को भरने के लिए भारत के निम्नलिखित 6 पूर्वी राज्यों में अधिवासित उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करता है। इन राज्यों से जुड़े आवेदक और इन भाषाओं को लिखने व पढ़ने वाले यदि योग्यता को पूरा करते हैं तो वह फील्ड असिस्टेंट की पोस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।”

इस नोटिस में आवेदन के लिए जिन भाषाओं में नियुक्ति होगी उसके वैकेंसी सहित नाम निम्नलिखित हैं;

1. बंगाली-03

2. नेपाली-03

3. रोहिंग्या-02

4. तिब्बती-1

5. कोकबोरोक-01

6. चकमा-1

7. राजबंशी-1

अब इसी सर्कुलर में उल्लेखित भाषा पर सारा विवाद हुआ। लोगों को लगा कि सरकार ने रोहिंग्या लोगों को नौकरी के लिए आमंत्रित किया है, जबकि सच्चाई यह है कि रोहिंग्याओं को नहीं उनकी भाषा को जानने वालों को यह आवेदन भरने के लिए कहा गया है।

साभार:  Rohingya Post
साभार: Rohingyalangauge.com

रोहिंग्या पोस्ट और रोहिंग्यालंगुज.कॉम जैसी कई वेबसाइट्स है जो राक्खिन के मुसलमानों द्वारा बोली जाने वाली रोहिंग्या नामक भाषा की उत्पत्ति की व्याख्या करती हैं। इसलिए भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में भारत सरकार ऐसे व्यक्तियों की भर्ती कर रही थी जो रोहिंग्या की भाषा में कुशल होने का दावा कर सकते थे, न कि खुद रोहिंग्या मुसलमानों होने की। रॉ ऐसे लोगों को शामिल करके केवल उन सुरक्षा खतरों से संबंधित जानकारी जुटाएगी।

रोहिंग्या मुसलमानों पर भारत का कदम

भारत में पिछले कुछ समय में रोहिंग्याओं की घुसपैठ का मामला बहुत गंभीर रहा है। सीएए के आने के बाद गृह मंत्री की ओर से स्पष्ट कहा गया था कि रोहिंग्या देश के लिए खतरा हैं और उन्हें भारत में जगह नहीं दी जा सकती। भारत सरकार के सख्त रवैये केका असर भी देखने को मिला। अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब खबर आई थी म्यांमार जाने के डर से 1300 रोहिंग्या बांग्लादेश भाग गए।

इसके अलावा अब भी कई ऐसे मामले आते हैं जब अधिकतर अपराधों में रोहिंग्या लोगों को दोषी पाया जाता है। पिछले साल कई ऐसे घुसपैठियों को जेल में डाला गया था। इसके अलावा 23 से अधिक रोहिंग्या जो अलग-अलग डिटेंशन कैंप में रहते थे, उन्हें भी सरकार ने असम से वापस भेजा था। इसलिए सरकार ये जानती है कि रोहिंग्या देश के लिए लिए कितना बड़ा खतरा हैं। यही रोहिंग्या म्यांमार के राक्खिन प्रांत में हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार थे। इन्हें थाइलैंड और मलेशिया से दुत्कारा जा चुका है। भारत इन्हें सताए गए अल्पसंख्यकों के नाम तक पर भारत में जगह नहीं दे सकता।