दिल्ली हाई कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज की ‘नौकरशाही में समुदाय विशेष की घुसपैठ’ वाली कथित रिपोर्ट के प्रसारण पर रोक लगा दी है। शुक्रवार 28 अगस्त 2020 को रात आठ बजे इसका प्रसारण होना था। जामिया के छात्रों ने इस पर रोक लगाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट समुदाय विशेष के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देती है।
जस्टिस नवीन चावला ने सुनवाई करते हुए इसके प्रसारण को रोकने लगाने के निर्देश दिए। जामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों की ओर से वकील शादान फरसाट ने याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने 25 अगस्त को सोशल मीडिया पर सुदर्शन न्यूज संपादक सुरेश चव्हाणके के शो का प्रोमो देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि चव्हाणके ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और समुदाय विशेष के छात्रों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है और मानहानि की है।
याचिका में कहा गया कि कथित तौर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता “समुदाय विशेष द्वारा सिविल सेवा में घुसपैठ करने की साजिश” का प्रतिनिधित्व करती है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सुरेश चव्हाणके ने खुले तौर पर दावा किया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जिहादी या आतंकवादी जल्द ही कलेक्टर और सेक्रेटरी जैसे शक्तिशाली पदों पर आसीन होंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोमो प्रस्तावित प्रसारण केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड 1994 का उल्लंघन करता है।
सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित समुदाय विशेष के अभ्यर्थियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है।
#सावधान लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ कार्यपालिका के सबसे बड़े पदों पर मुस्लिम घुसपैठ का पर्दाफ़ाश.
— Suresh Chavhanke “Sudarshan News” (@SureshChavhanke) August 25, 2020
उन्होंने घोषणा की थी कि यह ‘नौकरशाही जिहाद’ और ‘यूपीएससी जिहाद’ के खिलाफ चैनल का बड़ा अभियान होगा। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?”
बता दें इस विवादास्पद वीडियो के पोस्ट को विभिन्न पक्षों द्वारा आलोचना की गई थी। विशेष रूप से वामपंथियों और इस्लामवादियों ने इसे निशाना बनाते हुए यह आरोप लगाया कि सुरेश चव्हाणके समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। पीएस एसोसिएशन और इंडियन पुलिस फाउंडेशन ने भी इसकी निंदा की थी।
वहीं सुरेश चव्हाणके ने आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी सिविल में चुने गए कुछ श्रेणी के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि के बारे में है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कथित साजिश में आतंकी नेता जाकिर नाइक भी शामिल है। इस मामले पर आगे की सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
यूपी की राजधानी लखनऊ में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके परिवार की तमाम अवैध संपत्तियों को जमींदोज करने के बाद अब प्रशासन ने उसके करीबी रईस कुरैशी के ख़िलाफ़ मऊ में कार्रवाई की है।
मऊ में जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कहे जाने वाले रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर बुलडोजर चलाया है। इसकी कीमत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है। शुक्रवार को पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ इसे ध्वस्त कर दिया गया।
एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, मऊ के डीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि मुख्तार अंसारी के खास गैंगस्टर रईस के एक बूचड़खाने को जिला प्रशासन ने बुलडोजर लगवाकर गिरवा दिया है। प्रशासन ने बताया कि यह बूचड़खाना ग्रीन जोन में आने वाली जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।
#WATCH A slaughter house run by Raees Qureshi, a close associate of gangster Mukhtar Ansari, has been demolished in Mau by district authorities as it was an illegal construction on a patch of land under green zone: Gyan Prakash Tripathi, District Magistrate, Mau pic.twitter.com/RZL6dqgOIu
उधर, लखनऊ में अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि इस अवैध बूचड़खाने के तार मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े थे जिसे स्थानीय प्रशासन ने गिरवा दिया है और वहाँ पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले लखनऊ प्रशासन ने गुरुवार (अगस्त 27, 2020) को माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया था।
इसके बाद खबरों में बताया गया था कि अवैध निर्माण को गिराने का खर्च भी यूपी सरकार मुख्तार अंसारी से ही वसूलेगी। अवैध आवासीय परिसर को गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद था।
बता दें, इन सबसे पूर्व यूपी पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसते हुए अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अवैध तरीकों से अर्जित की गई 39.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को मुख्तार के करीबियों से मुक्त कराया था। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के 33 असलहों के लाइसेंस भी निलंबित कर पुलिस थानों में जमा करवाया था।
बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी थाना क्षेत्र के नहरनियाँ गाँव से एक 14 वर्षीय बच्ची को अगवा किए जाने का मामला सामने आया है। लड़की को अगवा करने का आरोप गॉंव के ही साबिर पर है। वह चार बच्चों का बाप बताया जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब वे आरोपित के घर पहुँचे तो उसके परिवार वालों ने कहा कि लड़की को धर्म परिवर्तन करवाने ले गए हैं। उन्होंने आरोपित परिवार पर धमकाने के भी आरोप लगाए हैं।
क्या है मामला?
ऑपइंडिया ने इस मामले में गायब हुई लड़की के भाई से बात की। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त 2020 को उनकी बहन शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। इसके बाद वह लापता हो गई। गाँव भर में उसे ढूँढा गया तो मालूम चला कि गाँव के ही संप्रदाय विशेष के एक व्यक्ति ने उसका अपहरण कर लिया है। लड़की के भाई के अनुसार, इससे पहले उन्हें ऐसे मंसूबों की भनक तक नहीं थी। उस दिन अचानक जब उन्हें पता चला तो काफी धक्का लगा।
स्थानीय पंचायत समिति के सदस्य बिश्वेवर महतो ने हमें बताया कि आरोपित परिवार के डर से शुरुआत में पीड़ित परिवार पुलिस से शिकायत करने को तैयार नहीं था। काफी समझाने के बाद लड़की के पिता ने 23 अगस्त 2020 को थाने में जाकर बेटी का अपहरण किए जाने की शिकायत दी।
शिकायत में लड़की के पिता ने नहरनियाँ गाँव के ही जब्बार के बेटे साबिर उर्फ बबलू पर बेटी को अगवा करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा मो. पप्पू, मो. हदीस के बेटे, मो. आशिक, जब्बार की पत्नी और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के ख़िलाफ़ भी शिकायत की गई है। लड़की के पिता ने बताया कि जब वह अपनी बेटी को ढूँढने आरोपित के घर गए तो उन लोगों ने जवाब दिया कि तुम्हारी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने ले गए हैं।
शिकायत के अनुसार, लड़की के पिता से कहा गया, “तुमको जो ताकत लगाना है लगाओ। हमने तैयारी कर ली है। तुम्हारी लड़की को मुस्लिम बना देंगे। तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हम सबका कुछ कर सको। मेरे घर से चले जाओ नहीं तो मारकर फेंक देंगे।”
महतो की मानें तो शिकायत मिलने के बाद पुलिस फौरन सक्रिय नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जब स्थानीय विधायक सुधांशु शेखर ने हस्तक्षेप किया तब इस मामले में 26 अगस्त को FIR दर्ज की गई। फिलहाल पुलिस सक्रियता दिखा रही है। आरोपित के एक साथी को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया है। लेकिन, इसके बाद से पीड़ित परिवार को लगातार धमकियाँ मिल रही है।
महतो के अलावा लड़की के भाई ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पुलिस कार्रवाई के बाद उनके घर में दूसरे पक्ष के लोगों ने आकर हंगामा किया। उन्हें केस वापस लेने के लिए धमकाया भी गया। हालाँकि, पीड़ित परिवार के घरवालों की तरफ से जब लोगों ने सख्ती दिखाई, तब वह उनके घर से गए।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
संघ से जुड़े अमरकांत झा ने बताया, “शुरुआत में तो थाना मामला दर्ज करने को तैयार नहीं था। पुलिस का कहना था कि लड़की का अपहरण नहीं हुआ है, वह भाग गई है।” उन्होंने बताया कि आरोपित मोहम्मद साबिर चार बच्चों का बाप है। पीड़ित परिवार बस यही चाहता है कि उनकी बच्ची सकुशल लौट जाए।
अमरकांत कहते हैं, “हम बस यही चाहते हैं कि आगे से हमारे समाज में ऐसी कोई घटना न घटे। जो हो रहा है, वह ठीक नहीं है। हमारी लड़की को अगवा कर लिया जाता है। फिर उसे डराया-धमकाया जाता है। थाना प्रशासन भी कुछ नहीं बोलता।” उनकी मानें तो नहरनियाँ में हिंदुओं की संख्या कम है। इस तरह के कई मामले पहले भी हुए हैं। उन्होंने बताया, “हमारा इलाका बॉर्डर से सटा है। सबको शक है कि कहीं लड़की को नेपाल न ले जाया गया हो। एफआईआर की कॉपी भी थाने से नहीं मिल रही है। लड़की के भाई और पिता को डराया-धमकाया जा रहा है।”
एक अन्य ग्रामीण ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, “हमें आशंका है कि कहीं पुलिस कार्रवाई और एफआईआर को देखते हुए आरोपित लड़की की हत्या न कर दे।” उन्होंने बताया कि पुलिस ने शक के आधार पर एक लड़के को हिरासत में लिया है। लेकिन उसके घर के लोग पीड़ित परिवार को धमकी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में पहले भी कुछ ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जब संप्रदाय विशेष के लड़कों ने हिंदू लड़कियों को पकड़ कर अपने घर में रख लिया।
पुलिस कार्रवाई पर अपडेट
ऑपइंडिया ने इस मामले में हरलाखी थाना प्रभारी अशोक कुमार से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में एफआईआर हो चुकी है। पूछताछ और जॉंच चल रही है। पीड़ित परिवार को आरोपित के परिवार से धमकी मिलने को लेकर उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में सूचना नहीं है। यदि ऐसा कुछ होता वे लोग थाने में जरूर आते।
जदयू विधायक सुधांशु शेखर ने बताया दर्दनाक
हरलाखी से जदयू के विधायक सुधांशु शेखर ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इसे बेहद दर्दनाक घटना बताया। उन्होंने कहा कि एक हिंदू परिवार की लड़की को संप्रदाय विशेष का व्यक्ति लेकर चला गया। जब उनके संज्ञान में बात आई तो उन्होंने फौरन थाना से मामला दर्ज करने को कहा और अगले दिन FIR दर्ज हुई। अब प्रयास यही है कि लड़की के घरवालों को न्याय मिले।
सुधांशु शेखर के अनुसार, उन्होंने पुलिस से कहा है कि कार्रवाई करके सच्चाई को सामने आने दिया जाए और आरोपित की गिरफ्तारी हो। उनकी मानें तो हाल में इस संबंध में आरोपित का एक साथी पकड़ा गया है।
आतंकी बुरहान वानी को जब सेना ने मार गिराया था तो मीडिया गिरोह ने उसके गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए उसे ‘हेडमास्टर का बेटा’ बताकर खूब प्रचारित किया था। अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की मुख्य आरोपित रिया चकवर्ती का भी उसी तर्ज पर इमेज बनाने की कोशिश हो रही है।
इंडिया टुडे ने अपने एक्सक्लूसिव खुलासे में उस स्कूल और हेडमास्टर को खोज निकाला है, जिसमें एक समय रिया की स्कूलिंग हुई थी। वैसे यह चौंकाता नहीं है, क्योंकि टाइम्स नाउ की पत्रकार नविका कुमार ने खुलासा किया है कि कैसे रिया के इंटरव्यू के बदलने उनसे जुड़े एक शख्स ने उनके बदले में पॉजीटिव खबरें चलाने की पेशकश की थी।
रिया की इमेज बिल्डिंग की यह कोशिश राजदीप सरदेसाई को उनका ‘सुपर एक्सप्लोसिव इंटरव्यू’ मिलने के बाद की गई है। वैसे राजदीप के इस साक्षात्कार को भी लोग पीआर स्टंट बताते हुए उसे प्रायोजित करार दे रहे हैं।
इस खुलासे में इंडिया टुडे ने रिया पर लगे इल्जामों को पोछने की कोशिश की है। रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2002-2007 के बीच में रिया ने आगरा में टॉप रेटेड स्कूलों में से एक कैथोलिक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की, जिसका जिक्र उन्होंने खुद कभी नहीं किया। लेकिन रिया की छाप ऐसी थी कि उनकी स्कूलमेट्स उन्हें भूले नहीं, इसलिए इंडिया टुडे उनकी वो कहानी ढूँढ लाया।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जब उन्होंने स्कूल से संपर्क किया तो रिया के स्कूलमेट ने उसे उस लड़की के रूप में याद किया जो खेल और अन्य स्कूल गतिविधियों में काफी एक्टिव थी। एक स्कूलमेट ने दावा किया कि वो क्लास रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर स्कूल पार्लियामेंट का हिस्सा थी। बहुत सारे सीनियर उसके दोस्त थे।
वहीं, क्लास 5वीं से 9वीं तक रिया को पढ़ाने वाले स्कूल के टीचर्स में से एक ने दावा किया कि रिया पढ़ाई में काफी अच्छी थीं। वो क्लास में बहुत एक्टिव थी। वो स्कूल में अपने टीचर्स और सीनियर्स की फेवरेट थी।
उन्होंने कहा, “क्लास में पहले दिन रिया ने खुद को ऐसे इंट्रोड्यूस किया जैसे वो पैराशूट हेयर ऑयल के विज्ञापन में फीचर की गई हो। उस उम्र में भी लड़की आत्मविश्वास से भरी थी और क्लास में वो जिस तरह से बातचीत करती थी, उससे उसकी इंटेलिजेंसी साफ दिखती थी। वो टीचर्स के द्वारा पूछे गए हर सवाल का जवाब देने की कोशिश करती थी।”
इसके बाद रिपोर्ट में एक अन्य टीचर का जिक्र किया गया है। उन्होंने बताया कि रिया स्कूल की महिला बास्केटबॉल टीम की सबसे जूनियर सदस्यों में से एक थीं। पाँच लड़कियाँ जो उनके साथ टीम में थीं अब गजेटेड ऑफिसर हैं। उनमें से कुछ भारतीय सेना में हैं। जबकि रिया ने आगे बढ़कर ग्लैमर की दुनिया में अपना नाम बनाया।
साभार: इंडिया टुडे
इस स्कूल के प्रिंसिपल का भी बयान इंडिया टुडे ने लिया और बताया कि प्रिंसिपल ने ही यह पुष्टि की है कि रिया 2002-2007 तक स्कूल में पढ़ी। रिपोर्ट में कहा गया कि स्कूल के प्रिंसिपल फादर भास्कर जेसुराज हैं। जब रिया पढ़ती थीं, तब स्कूल के प्रिंसिपल फादर Joseph Dabre थे। उसके बाद उनका ट्रांसफर हो गया है।
गौरतलब है कि एक ओर जब चारों ओर से रिया चक्रवर्ती पर सुशांत सिंह मामले में शक गहराता जा रहा है, उस समय इंडिया टुडे के बैनर तले राजदीप सरदेसाई को दिया गया ‘मार्मिक साक्षात्कार’ और फिर रिया से जुड़े ऐसे खुलासे इस केस से किस तरह संबंध रखते हैं- ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। इसके अलावा एक प्रश्न यह भी है कि क्या रिया चक्रवर्ती की इमेज बिल्डिंग के लिए इंडिया टुडे एड़ी-चोटी का जोर लगाने पर उतर आया है। फिर चाहे उसकी खुद की निष्पक्षता पर क्यों न सवाल उठने लगे?
बता दें, इससे पहले इंडिया टुडे का यह कारनामा राहुल गाँधी को लेकर भी सामने आया था। उस समय इंडिया टुडे ने गलत आँकड़े दिखाकर राहुल गाँधी की वीडियो पर झूठ फैलाया था। हालाँकि ये बात और थी कि सोशल मीडिया पर पारदर्शिता के कारण उनका यह सच उजागर हो गया।
ब्लूम्सबरी इंडिया ने हाल ही में दिल्ली दंगों पर मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितालकर और प्रेरणा मल्होत्रा की किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ का प्रकाशन रद्द करने का फैसला लिया था। अब उस पर इस किताब की मैनुस्क्रिप्ट (पांडुलिपि) लीक करने के आरोप लग रहे हैं।
इस किताब का प्रकाशन ब्लूम्सबरी ने वामपंथियों और इस्लामी कट्टरपंथियों के दबाव में रद्द किया था। हालॉंकि उसने एक बयान में हवाला दिया था कि लेखकों ने उसे किताब की वर्चुअल प्री पब्लिकेशन लॉन्च के आयोजन के बारे में नहीं बताया था।
लेकिन अब इस किताब की मैनुस्क्रिप्ट व्हाट्सएप पर वायरल हो रही है। कई नेटिज़न्स ने सवाल उठाया कि कैसे पूरी पुस्तक को अवैध रूप से जारी किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह से पुस्तक को सोशल मीडिया पर सर्कुलेट नहीं किया जा सकता।
Received a PDF of ‘Delhi Riots 2020’ on whatsapp y’day. As if pulling out from publishing a book under pressure from Fascists wasn’t enough, Bloomsbury folks touch a new low. They think they can prevent the book from becoming a national bestseller using dirty tricks. Nope ?
Dear @advmonikaarora and @GarudaPrakashan PDF version of the #DelhiRiots2020UntoldStory is being circulated massively by some lobby. Definitely I see a malafide here. Please look into this. And quickly need to identify the source from where it leaked first.
बताया जा रहा है कि यह वही कॉपी है जो ब्लूम्सबरी के पास थी। मैनुस्क्रिप्ट का दूसरे पन्ने पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह एक कॉपी है। इसे ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि लेखकों, प्रकाशन हाउस और संपादक के अलावा इस रूप में मैनुस्क्रिप्ट किसी और के पास उपलब्ध नहीं होगी। यह स्पष्ट है कि लेखकों द्वारा इस मैनुस्क्रिप्ट को वायरल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे पुस्तक की बिक्री को नुकसान पहुँचेगा जो अब गरुड़ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पब्लिशिंग हाउस द्वारा मैनुस्क्रिप्ट की कॉपी को लीक किया गया है? ध्यान देने वाली बात यह भी है कि व्हाट्सएप पर मैनुस्क्रिप्ट के वायरल होने से पहले वामपंथी पोर्टल TheQuint.com द्वारा इसे सबसे पहले एक्सेस किया गया था।
अपनी घटिया मानसिकता के साथ क्विंट ने दिल्ली दंगों ओर आधारित किताब का फैक्ट चेक करने की कोशिश की है। अपनी रिपोर्ट में क्विंट ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि पुस्तक की मैनुस्क्रिप्ट उनके द्वारा एक्सेस की गई है। सवाल उठता है कि जो मैनुस्क्रिप्ट सिर्फ लेखकों और प्रकाशक के पास है, उस तक TheQuint पहुँचने में कैसे कामयाब रहा?
किताब के प्रकाशन का जिम्मा गरुड़ प्रकाशन को दिए जाने के बाद इस पुस्तक को TheQuint द्वारा एक्सेस किया गया था। इसको लेकर लेखकों ने पब्लिशिंग हाउस को कानूनी नोटिस दिया है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दिल्ली दंगा 2020: द अनटोल्ड स्टोरी की बुकिंग प्लेटफॉर्म गरुड़ प्रकाशन की तरफ से खोली जा चुकी है। अबतक 15,000 से अधिक लोगों ने इसे प्री-ऑर्डर भी कर दिया है।
न्यूज़ रूम से समाचार पढ़ना और अपने विचार थोप देना एक समय तक भारतीय मीडियाकारों की सच्चाई रहा है। लेकिन तब बाजार में आज की तरह प्रतिस्पर्धा, संचार के मध्यम और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म भी मौजूद नहीं थे। राजदीप सरदेसाई जैसे तथाकथित पत्रकारों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि उन्हें न्यूज़रूम में बने बनाए माहौल के अलावा कभी दोहरे संचार के लिए भी लोगों के बीच होना होगा और जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन वो लोगों के साथ मुक्केबाजी करते नजर आए।
24×7 समाचार पढ़ने और सोशल मीडिया के कारण हर शब्द के लिए जनता के प्रति जवाबदेही से राजदीप सरदेसाई जैसे लोग बौखलाए हुए हैं। दरअसल, इस हर समय जनता के सामने और जनता के बीच होने की वजह से इन पत्रकारों का वास्तविक चेहरा भी अब सबके सामने है क्योंकि हर समय आप अपने शब्दों के चयन और अपने व्यवहार के लिए न्यूज़रूम के बनाए बनाए माहौल और स्क्रिप्ट के अनुसार नहीं चल सकते।
राजदीप सरदेसाई जैसे लोग, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता का करियर ही 2002 के गुजरात दंगों में नरेन्द्र मोदी को विलेन साबित करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ खुद ही न्यायधीश बनकर बनाया है, आज बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत में उनके परिवार द्वारा मुख्य आरोपित बताई गई रिया चक्रवर्ती का मीडिया मैनेजमेंट कर रहे हैं।
इसके साथ ही राजदीप सरदेसाई अपने निष्पक्ष होने का भी दावा करना चाहते हैं और साथ ही तटस्थ रिपोर्टर होने का भी दावा करते हैं। उससे भी बड़ी विडंबना यह कि रिया चक्रवर्ती जैसी एक विफल अभिनेत्री में राजदीप अपनी पत्रकारिता का भविष्य तलाश रहे हैं।
नरेंद्र मोदी की खरी-खरी
यह 2014 के आम चुनावों से ठीक पहले की ही बात है जब भाजपा ने पार्टी के चेहरे के रूप में नरेंद्र मोदी को चुना और भारत अपने अगले युग के राजनितिक बदलाव की तैयारियाँ कर रहा था। राजदीप सरदेसाई इस समय सीएनएन-IBN के न्यूज़ रिपोर्टर हुआ करते थे।
राजदीप सरदेसाई ने शायद ही सोचा होगा कि उन्हें अपनी वर्षों पुरानी रोजी-रोटी के जुगाड़ की कहानी को ही फिरसे दोहराने के लिए नरेंद्र मोदी की ओर से इतना स्पष्ट जवाब मिलेगा। रैली के दौरान ही राजदीप सरदेसाई ने अपने लिए नरेंद मोदी के पास जगह बनाई और माइक पर उनसे सवाल किया कि क्या 2002 के दंगे उनके भविष्य की राजनीति की राह में बाधक साबित होंगे?
इस पर नरेंद्र मोदी ने जो जवाब दिया था उसके स्वर आज तक राजदीप के कानों में गूँजते होंगे। नरेंद्र मोदी ने कहा – “मैं राजदीप सरदेसाई को शुभकामना देता हूँ कि वो पिछले दस साल से इसी मुद्दे के भरोसे जी रहे हैं।”
इस पर जब राजदीप ने अपने भावों को नियंत्रित करते हुए नरेंद्र मोदी को टोकने का प्रयास किया तो नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा- “नहीं, सुनना पड़ेगा। इसी मुद्दे से आपकी रोजी-रोटी चलती है। और मैंने तो ऐसा भी सुना है कि मोदी को गाली देने वालों को राज्यसभा की सीट मिलती है, पद्म भूषण और अन्य पुरस्कार मिलते हैं। मेरी राजदीप को शुभकामना है कि आप अपना यह अभियान जारी रखिए और ऐसे मित्रों की मदद से राज्यसभा पहुँच जाइए…पद्म भूषण, पद्म विभूषण कुछ प्राप्त करिए।”
राजदीप ने फिर अपना घटिया और घिसा-पिटा सवाल जारी रखा और ‘कहीं ना कहीं’ को कई बार दोहराते हुए फिर कहा कि 2002 मोदी के राजनीतिक जीवन में रुकावट पैदा कर सकता है।
इस पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें फिर उसी भाषा में जवाब देते हुए कहा – “राजदीप सरदेसाई आपके पास आपका न्यूज़ चैनल है। आप घंटों तक इस पर डिबेट चलाइए।” नरेंद्र मोदी तब भी आज जितने ही अपने पूरे नियंत्रण में थे, जबकि राजदीप के चेहरे और आवाज में आज जितना ही छिछोरापन!
राजदीप सरदेसाई और नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के इस दुर्लभ क्षण को इस लिंक पर देखा सकते हैं –
इसके बाद नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन में जो कुछ घटा है, वह सब हम सबके सामने है। और राजदीप के साथ क्या कुछ घटित हो रहा है वह भी हम सब देख रहे हैं। राजदीप को आज एक बॉलीवुड की ऐसी अभिनेत्री का मीडिया मैनेजमेंट करके जीवन यापन करना पड़ रहा है, जिसके खाते में उसके द्वारा की गई फिल्मों से ज्यादा उस पर एक सफल अभिनेता की मौत से जुड़े आरोप लग चुके हैं।
यह भी वास्तविकता है कि राजदीप सरदेसाई को ना ही रिया चक्रवर्ती से और ना ही सुशांत सिंह राजपूत से ही संवेदना है। वह बस TRP की रेस में किसी तरह खुद को खबरों में बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। और उन्होंने रिया चक्रवर्ती का प्रायोजित इंटरव्यू कर साबित कर दिया है कि इसके लिए वो किसी भी हद तक गुजरने के लिए भी तैयार हैं।
राजदीप के लिए यह कोई समझौते वाली बात भी नहीं है, वास्तव में यही उनका वास्तविक नजरिया है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही मानो राजदीप सरदेसाई पर वज्रपात हो गया। इसके रुझान न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर पर उनके द्वारा मोदी समर्थकों के साथ की गई मुक्केबाजी थी। इसी बीच उन्होंने राज ठाकरे से भी इंटरव्यू के दौरान डाँट भी खाई। लेकिन यही राजदीप का स्वभाव है और यही उनकी फितरत है।
उन्हें तो अब यह महसूस होना भी बंद हो गया होगा कि वह अपने इस स्वभाव, जिसे वो पत्रकारिता कहते हैं, के कारण उन्हीं के पूर्व सहयोगी रवीश कुमार द्वारा ‘दुकानदार’ तक कह दिया गया। रिया चक्रवर्ती के इंटरव्यू के बाद वह हमेशा से ही विवादित बरखा दत्त से भी फटकार खा चुके हैं। जनता उन्हें रोज ही भली-बुरी बातें सुना रही है।
यही वो राजदीप सरदेसाई भी है, जो आज भी मौका मिलते ही पीएम मोदी पर गुजरात दंगों का आरोप लगाने का अवसर नहीं गँवाते। सुप्रीम कोर्ट कब की पीएम मोदी पर लगे आरोपों के बाद उन्हें दोषमुक्त भी घोषित कर चुकी है। लेकिन राजदीप की अपनी एक निजी अदालत है ; यह अदालत सस्ती लोकप्रियता और TRP के लिए उन्हें कभी न्यायधीश तो कभी वादी और कभी प्रतिवादी बना रही है। यही वजह है कि वो एक ऐसे व्यक्ति की मौत की जाँच तक को समय की बर्बादी बताने से नहीं चूकते, जो अभी अपने अभिनय के करियर के शुरूआती दिनों में ही था।
जब राजदीप ने सोहराबुद्दीन केस में माँगी थी माफ़ी
इसके अलावा, राजदीप की पत्रकारिता के खोजी संस्करणों में एक बड़ी उपलब्धि तब जुड़ी थी, जब उन्होंने मई 2007 में, सीएनएन-आईबीएन के तत्कालीन प्रधान संपादक रहते सोहराबुद्दीन मामले पर एक कार्यक्रम चलाया था, जिसका शीर्षक था ’30 मिनट – सोहराबुद्दीन, द इनसाइड स्टोरी।’
सोहराबुद्दीन केस में झूठी रिपोर्टिंग के लिए ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई को कोर्ट से बिना शर्त माफी माँगनी पड़ी थी। दरअसल, इस कार्यक्रम में राजदीप सरदेसाई द्वारा पेश की गई न्यूज रिपोर्ट में कहा गया था, “पुलिस सूत्रों का कहना है कि वंजारा और पांडियन ने हैदराबाद स्पेशल इंवेस्टिगेशन यूनिट के एसपी राजीव त्रिवेदी की मदद से बीदर में सोहराबुद्दीन और कौसर बी को पकड़ा। राजीव त्रिवेदी ने फर्जी नंबर प्लेट वाली कारें मुहैया कराईं, जिसमें सोहराबुद्दीन को अहमदाबाद लाया गया और फिर एक फर्जी मुठभेड़ में मारा गया।
इस कार्यक्रम के बाद आंध्र प्रदेश स्टेट द्वारा राजदीप सरदेसाई और सीएनएन-आईबीएन के 10 अन्य पत्रकारों के खिलाफ हैदराबाद की एक अदालत में शिकायत दर्ज की गई। आईपीएस राजीव त्रिवेदी को बिना शर्त माफी जारी करते हुए राजदीप सरदेसाई ने कहा, “मैंने महसूस किया कि इसमें कोई साक्ष्य नहीं है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव यूनिट के एसपी राजीव त्रिवेदी की मदद से वंजारा और पांडियन ने सोहराबुद्दीन और कौसर बी को बीदर में पकड़ा। श्री राजीव त्रिवेदी, आईपीएस के बारे में यह झूठी खबर थी।”
नरेंद्र मोदी की कुत्ते से तुलना
इसके अलावा पीएम मोदी के लिए राजदीप की नफरत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह उनके नाम की तुलना एक कुत्ते तक से कर चुके हैं। आम चुनाव प्रचार के दौरान, जब समर्थकों ने नरेंद्र मोदी के लिए ‘नमो’ और राहुल गाँधी के लिए ‘रागा’ जैसे नामकरण करने शुरू किए थे, तो राजदीप ने फरवरी 08, 2014 को एक ट्वीट में अपने पालतू कुत्ते का नाम ‘निमो’ रखा और भारतीय पीएम उम्मीदवार की कुत्ते से तुलना करते हुए भड़काऊ ट्वीट किए।
पत्रकारिता की आड़ में वर्षों से एक परिवार और उसके कार्यकर्ताओं की ‘स्वामिभक्ति’ करने वाले राजदीप अपने अन्नदाताओं के प्रति कितने निष्ठावान हैं इस बात का उदाहरण इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब पी चिदंबरम सीबीआई से भाग रहे थे, तब राजदीप ने कहा था कि चिदंबरम राजनीतिक साजिश का शिकार बनाए गए हैं। चिदंबरम तिहाड़ में थे और राजदीप न्यूज़रूम में।
2010 में जब सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अमित शाह को जेल भेजा गया था, तब राजदीप सरदेसाई ने इसे क़ानून की जीत बताया था। जबकि इसी राजदीप को चिदंबरम को जेल भेजे जाने पर उन्हें साजिश नज़र आ रही है।
आज यही राजदीप रिया चक्रवर्ती को निर्दोष साबित करने के लिए सुबह शाम सोशल मीडिया पर और बची हुई कसर अपने न्यूज़ चैनल पर पूरी करते देखे जा सकते हैं। वर्ष 1993 के मुंबई बम धमाके में दाउद इब्राहिम का नाम आने पर रिया चक्रवर्ती की ही तरह का ‘कवर-अप’ करते हुए राजदीप ने उसे निर्दोष बताने के लिए टाइम्स ऑफ़ इंडिया में लेख तक लिखा था।
गैर-कॉन्ग्रेसी प्रधानमंत्री से नफरत और दक्षिणपंथियों का विरोध ही राजदीप सरदेसाई की पत्रकारिता का असली चेहरा है। इसके अलावा जो कुछ है, वह सब आडम्बर और प्रासंगिक बने रहने की चाह है।
टाइम्स नाउ की पत्रकार नविका कुमार ने सुशांत सिंह राजपूत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि रिया चकवर्ती के सपंर्क में होने का दावा करने वाले एक शख्स ने उनसे संपर्क किया था। उसने रिया पर सकारात्मक कवरेज करने के लिए नविका कुमार को टटोलने का प्रयास किया। इसके बदले में उसने साक्षात्कार का प्रस्ताव भी दिया।
नविका कुमार ने गुरुवार (27 अगस्त 2020) को ट्वीट करते हुए इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संपर्क करने वाले व्यक्ति ने कहा कि वे रिया चक्रवर्ती से संबंधित अच्छे पहलुओं पर कवरेज करें। इसके बाद रिया टाइम्स नाउ को साक्षात्कार दे देंगी। उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह के मामले में टाइम्स नाउ का रवैया शुरुआत से ही बेहद स्पष्ट और ठोस रहा है।
टाइम्स नाउ की पत्रकार नविका कुमार का ट्वीट
नविका कुमार ने यह खुलासा रिया चक्रवर्ती द्वारा राजदीप सरदेसाई को इंटरव्यू दिए जाने के बाद किया है। इसके पहले तक रिया चक्रवर्ती ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष नहीं रखा था। राजदीप से बात करते हुए रिया ने सुशांत सिंह के मामले में अपने हिस्से की कहानी बताई। लेकिन इस साक्षात्कार को दर्शकों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। विवादित साक्षात्कार के तमाम हिस्सों पर इंटरनेट यूज़र्स ने कई तरह के सवाल खड़े किए। साथ ही यूज़र्स ने राजदीप सरदेसाई पर मामले की मुख्य आरोपित रिया का पक्ष लेने का आरोप लगाया।
नविका ने अपने ट्वीट में यह भी बताया है कि संपर्क करने वाले शख्स ने उस एंकर का भी जिक्र किया था, जिसने अब इंटरव्यू लिया है। राजदीप सरदेसाई को दिए साक्षात्कार के अलावा CNN News18 और एनडीटीवी पर भी रिया का इंटरव्यू आया है।
#Breaking | Rhea Chakraborty tried to ‘influence’ the probe: NCB sources.
टाइम्स नाउ ने एक रिपोर्ट में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो एनसीबी के सूत्रों के हवाले से कहा है कि ये साक्षात्कार जॉंच को प्रभावित करने के मकसद से दिए गए हैं। ये भी जॉंच के दायरे में हैं। एनसीबी इस मामले में ड्रग एंगल की जॉंच कर रही है।
नविका कुमार ने अपने खुलासे में रिया चक्रवर्ती की टीम और समाचार चैनल के बीच समझौते की और इशारा किया है। इसकी मदद से रिया खुद को सभी के सामने निर्दोष साबित करती।
गौरतलब है कि हाल ही में टाइम्स नाउ ने रिया चक्रवर्ती और ड्रग डीलर के बीच हुई व्हाट्सएप चैट का खुलासा किया था। इसके अलावा टाइम्स नाउ ने गुरुवार 27 अगस्त 2020 को एक और बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि सुशांत सिंह की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुई थी। उनमें कई तरह के बदलाव किए गए थे, जिससे लोगों का ध्यान सिर्फ आत्महत्या की बात पर जाए।
सोशल मीडिया पर एक कॉलेज की मेरिट लिस्ट खूब वायरल हो रही है। दक्षिण कोलकाता के प्रतिष्ठित आशुतोष कॉलेज में अंग्रेजी बीए (ऑनर्स) में प्रवेश के लिए जारी पहली सूची में अभिनेत्री सनी लियोनी का नाम सबसे ऊपर था। विवाद में आए मेरिट लिस्ट के अनुसार, सनी लियोन पश्चिम बंगाल राज्य बोर्ड की एक छात्रा हैं और उन्होंने पाँचों विषयों में 100 अंक हासिल किए हैं।
सोशल मीडिया पर मेरिट लिस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। कॉलेज अधिकारियों ने प्रशासन की ओर से हुई इस गलती के लिए माफी माँगी। बीए (अंग्रेजी) प्रोग्राम के लिए मेरिट सूची अब वापस ले ली गई है। इसे सुधार कर पर फिर से प्रकाशित किया जाएगा।
मेरिट लिस्ट जिसमें सनी लियोन नाम टॉप पर (Image Courtesy: Twitter/ @Rupanjandas715)
एबीपी अनंदा से बात करते हुए कॉलेज के उप-प्राचार्य अपूर्वा राय ने कहा, “हम सूची को हटा नहीं सकते ,क्योंकि इससे सभी छात्रों के रैंक को बदल जाएँगे। अब हम दूसरे छात्र के साथ ‘सनी लियोनी’ का नाम बदलकर अपनी गलती सुधार रहे हैं। यह एक फर्जी एप्लिकेशन है और इसे केवल मार्कशीट के वेरिफिकेशन के जरिए साबित किया जा सकता है। यह किसी शरारती व्यक्ति का काम है। वरना कोई क्यों आवेदन में जान-बूझकर सनी लियोनी का नाम लिखता और प्रत्येक विषय में उसे 100 अंक देता? चूंकि इस बार आवेदन का कोई शुल्क नहीं था, इसलिए छात्रों को ऐसी शरारत करने का मौका मिला गया।”
इस मेरिट लिस्ट के बारे में पता चलने पर सनी लियोनी ने चुटकी लेते हुए ट्वीट किया,”आप सभी को कॉलेज में नए सेमेस्टर में मिलूँगी!!! उम्मीद करती हूँ, आप मेरी क्लास में होंगे।”
See you all in college next semester!!! Hope your in my class 😉 ??
हालाँकि इस तरह की छोटी-छोटी गलतियाँ होती रहती है। तथ्य यह है कि शरारती तत्व द्वारा सनी लियोनी का नाम लिखने और रोल नंबर की जगह फ़ोन नंबर लिखने की वजह से लोग सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना कर रहे हैं। साथ ही इस घटना से शिक्षाविदों के बीच ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
“साले तुम कीड़े-मकोड़े हो। मुझको जो मन आएगा करूँगा। मैं गधों को बड़ी जिम्मेदारी दूँगा और उनका प्रमोशन करूँगा व अप्रेजल करूँगा, क्योंकि वो मेरी विचारधारा के लोग हैं। तेरी क्या औकात है। साले तुझको सड़क पर ला दूँगा और तेरे परिवार को बर्बाद कर दूँगा। अगर सुधरा नहीं, तो साले तुझको जूतों से मारूँगा और तेरी हत्या करवा दूँगा। तेरी लाश को कुत्ते खाएँगे। तुझको न मोदी बचाने आएगा और न बीजेपी।”
उक्त कथन एक नामी मीडिया संस्थान के संपादक का है। माफ करिए! सिर्फ़ संपादक का नहीं, एक वामपंथी संपादक का है। इस वामपंथी संपादक का नाम पाणिनि आनंद है। आजतक के एक पत्रकार राम कृष्ण का आरोप है कि एक दिन उन्होंने रात के वक़्त पाणिनि आनंद को कॉल कर कहा कि वे काम करना चाहते हैं, उन्हें क्यों व्हॉट्स एप ग्रुप से निकाला जा रहा है? तब आनंद ने उन्हें धमकाते हुए उपरोक्त बातें कही। राम कृष्ण की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि वह अपनी मेहनत के मुताबिक कुछ समय से अप्रेजल माँग रहे थे और पाणिनि आनंद के कहने पर भी मोदी सरकार के विरोध में सोशल मीडिया पर कुछ नहीं लिखते थे।
राम कृष्ण aajtak.in में साल 2017 से कार्यरत हैं। हाल में उन्होंने पीएमओ को पत्र लिख कर अपना दर्द साझा किया है। रामकृष्ण ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके पहले के संपादक कभी भी इस तरह का बर्ताव नहीं करते थे। काम करने का माहौल भी अच्छा था। सब बेहिचक खबरें लिखते थे।
मगर, पाणिनि आनंद के कमान सॅंभालने के बाद पूरा माहौल बदल गया। पत्रकारों से जबरदस्ती मोदी सरकार के विरोध में लिखने को कहा जाने लगा। जिन्होंने लिखा वह तो आनंद के करीबी बने रहे। लेकिन जिन्होंने ऐसा करने से मना किया, उन्हें कुछ ही समय में दुत्कारा जाने लगा। स्वयं राम कृष्ण को भी कई बार भगवाधारी कहा गया, लेकिन उन्होंने दावा किया कि भले ही उनकी विचारधारा किसी एक पार्टी के करीब दिखती हो, लेकिन उन्होंने अपने काम में, अपनी खबर में इसे कभी झलकने नहीं दिया।
19 अप्रैल को जब भोजन खत्म हो गया और पैसा नहीं रहा, तब पाणिनि आनंद को किए गए मेल का स्क्रीनशॉट (साभार: भड़ास फॉर मीडिया)
पत्रकार राम कृष्ण कहते हैं कि शुरू में तो बाकियों की तरह वह भी अपनी नौकरी बचाने के लिए सबकुछ नजरंदाज करके काम करते रहे। आनंद के बुलाने पर उनके घर की पार्टियों में भी गए। किंतु कुछ समय में उन्हें अपने संपादक के इस बर्ताव से दिक्कत होने लगी और उन्होंने पार्टियों में जाने से व मोदी विरोध में बोलने से साफ मना कर दिया। इसके बाद उन्हें दरकिनार करने का सिलसिला शुरू हुआ और उनकी सैलरी व प्रमोशन भी रोक दी गई।।
पीड़ित पत्रकार की मानें तो वह शराब को हाथ तक नहीं लगाते थे, लेकिन अपनी नौकरी बचाने के लिए उन्होंने शराब का भी दो बार सेवन किया। ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनसे गाली-गलौच की जाने लगी थी।
राम कृष्ण के अनुसार, पाणिनि आनंद अपने चहेते कर्मचारियों को घर पर बुला कर पार्टी देते हैं और कई काम भी करवाते हैं। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि उनके एक साथी को ऐसी ही पार्टी में संपादक के चहेतों ने पीटा था। लेकिन आनंद तब भी चुप रहे।
पत्रकार राम कृष्ण का आरोप हैं कि पाणिनि आनंद और विजय रावत मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपना एजेंडा चलाने के लिए कर्मचारियों को उकसाते हैं। उन्हें वेबसाइट पर नहीं तो, सोशल मीडिया पर लिखने को बोलते हैं। कई बार फर्जी आईडी बना-बना कर ऐसे प्रोपेगेंडा चलाने की सलाह तक दी गई थी। मगर, जब इन सबके विरोध में किसी ने आवाज उठाई तो उसकी नौकरी छीन ली गई और उसका जीना दुश्वार कर दिया गया।
पत्रकार के अनुसार, पाणिनि आनंद और विजय रावत के लिए उनकी विचारधारा से अलग लोगों के साथ गाली-गलौच करना आम बात है। लड़के से लेकर लड़कियों तक के लिए वह अप्रेजल का क्राइटेरिया एक ही रखते हैं। यानी, जो उनकी बात मानेगा, उनकी विचारधारा को स्वीकारेगा, वही प्रमोशन लेकर आगे बढ़ेगा। उनका इस बात से कोई सरोकार नहीं होता कि कोई दूसरी विचारधारा का पत्रकार कैसा काम कर रहा है। कितनी मेहनत कर रहा है।
एक सहयोगी का जिक्र करते हुए आजतक के पत्रकार हमें बताते हैं कि कुछ समय पहले उनकी एक साथी की तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने संस्थान में छुट्टी के लिए कहा। लेकिन तब किसी ने कॉपरेट नहीं किया। बाद में मालूम चला कि उन्हें कोरोना था, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। अपनी साथी की स्थिति साझा करते हुए रामकृष्ण दुख व्यक्त करते हैं। साथ ही बताते हैं उस पत्रकार ने मौत से कुछ दिन पहले तक भी काम किया था।
राम कृष्ण ने बताया कि एक बार उनका अप्रेजल और प्रमोशन जब सब रोक दिया गया तो उन्होंने दूसरे संस्थान में नौकरी ढूँढी। उनका दो बार अन्य संस्थानों में सिलेक्शन भी हुआ। लेकिन तब पाणिनि आनंद ने उन्हें बुलाकर कहा,” संस्थान को धोखा देंगे क्या। अभी चुनाव का मामला है कुछ दिन बाद हम आपका अप्रेजल कर देंगे।” इसके बाद काफी समय बीता, लेकिन सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। जब उन्होंने दोबारा पूछा तो जवाब मिला कि जब तक आप विजय रावत (सीनियर असिस्टेंट एडिटर) को खुश नहीं करोगे तो कैसे होगा?
आजतक डॉट इन में राम कृष्ण सीनियर सब एडिटर के तौर पर जिम्मेदारी सॅंभालते हैं। उनसे 17-18 घंटे तक काम करवाया जा चुका है। वह आरोप लगाते हैं कि संस्थान में जो कोई भी संपादक और सीनियर असिस्टेंट एडिटर की विचारधारा से मेल नहीं खाता, उसे तरह-तरह से परेशान किया जाता है। जैसे उससे शिफ्ट में अधिक काम लेना, उससे 20-20 की खबरें बनवाना, उस पर दबाव डालना, गाली-गलौच करना आदि।
पत्रकार की मानें तो उनको लॉकडाउन के समय में कुछ ज्यादा ही प्रताड़ित किया जाना शुरू हुआ। जब बात वर्क फ्रॉम होम की आई तो उनको लैपटॉप तक मुहैया नहीं कराया गया। उन्होंने नौकरी को बचाने के लिए अपने किसी दोस्त से लैपटॉप माँगा। वहीं, जो संपादक की विचारधारा के लोग थे उन्हें सारी सुविधा दी गई।
राम कृष्ण बताते हैं कि पोर्टल के लिए अपनी विचारधारा वाले लोगों की भर्ती भी इन्होंने शुरू कर दी है। अब टीम में 20-30% लोग उनके जैसे आ चुके हैं। वह लोग ये खुलेआम बोलते हैं कि जिसको दिक्कत है वो जाए ताकि वह वहाँ अपने साथियों को भर्ती करें, जिनके पास अभी नौकरी नहीं है।
राहुल कंवल और गौरव सावंत के साथ राम कृष्ण की तस्वीर
यहाँ बता दें, अपनी इन शिकायतों को लेकर राम कृष्ण ने पीएमओ तक को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने उक्त बातों में से अधिकांश बातों का जिक्र लिखित रूप से किया है। उन्होंने बताया है कि वह अपने संस्थान के वरिष्ठों (राहुल कंवल जैसे लोगों) से कई बार इन सब की शिकायत कर चुके हैं। लेकिन किसी ने कभी कुछ नहीं बोला।
अब उनका मानना है कि पाणिनि आनंद और विजय रावत उन्हें पागल घोषित करवाना चाहते हैं व उनकी हत्या भी करवा सकते हैं। इससे उनका परिवार दहशत में हैं। राम कृष्ण की शादी कुछ समय पहले हुई थी और अप्रैल में उनका बच्चा भी हुआ है। ऐसे में उन्हें नौकरी और पैसों की बहुत जरूरत है। उन पर पैसों की किल्लत के कारण कर्जा भी बढ़ गया है।
आजतक पर राम कृष्ण की कई खबरें मौजूद हैं
मगर, तब भी यह लोग उनके लिए कई परेशानी खड़ी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें व्हॉट्सएप ग्रुप से निकाला गया, जब उन्होंने सवाल पूछे और अपनी मजबूरी बता कर मदद की अपेक्षा की तो उनसे गाली-गलौच हुआ। साथ ही कहा गया, “तुम कीड़े-मकोड़ेहो, मेरे साथ 72 कीड़े-मकोड़े काम करते हैं, जब चाहे जिसे मसल कर फेंक दूँ, कोई मेरा कुछ नहीं कर सकता। यहाँ न मालकिन की चलती है और न एचआर की।” इसके बाद उन्हें एक और ग्रुप से निकाला गया और उनकी आईडी को डिसेबल किया गया, जिससे वह काम करते थे।
उन्होंने इस बाबत कई शिकायतें की, पर जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो अब अंत में उन्होंने बहुत परेशान होकर पीएमओ को पत्र लिखा। उनका कहना है कि आगे वह समय आने पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने को भी तैयार हैं। वह दावा करते हैं कि कोई भी उनकी पत्रकार होने की दक्षता पर सवाल नहीं उठा सकता। वह पाणिनि आनंद समेत उनके सभी के चहेतों के साथ, जिनका अप्रेजल 25-30 % किया गया, टेस्ट देने को तैयार हैं।
अगर उनकी लेखनी या काबिलियत में कमी पाई जाती है तो वह पत्रकारिता से संन्यास लेने को भी तैयार हैं। वह दावा करते हैं कि उनके साथ काम करने वाले 70 प्रतिशत लोग उनकी बातों से सहमत हैं, लेकिन रोजी-रोटी के लिए सामने नहीं आ सकते। आने वाले समय में जब भी नौकरी के अवसर दोबारा शुरू होंगे तो 30-40 प्रतिशत लोग इस्तीफा देंगे। बता दें, इस मामले में खबर है कि पीएमओ ने मामले की जाँच शुरू करा दी है। नोएडा में डीसीपी स्तर के एक अधिकारी द्वारा इस मामले की जाँच की जा रही है।
नीचे हम आजतक के पत्रकार राम कृष्ण के उस पत्र को जस का तस आपसे साझा कर रहे हैं जो उन्होंने त्रस्त होकर पीएम को लिखा:
आजतक (इंडिया टुडे ग्रुप) के पत्रकार का आदरणीय PM जी के नाम खत
हिंदुस्तान के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार देश को आत्मनिर्भर बनाने और आगे बढ़ाने के लिए दिनरात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। दुनिया के शीर्ष नेता पीएम मोदी जी की लगन और मेहनत का ही नतीजा है कि हिंदुस्तान तेजी से आगे बढ़ रहा है और भ्रष्टाचार मुक्त है। हालाँकि तथाकथित बुद्धिजीवी वामपंथियों को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है और ये लोग केंद्र की मोदी सरकार, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और दूसरे राज्यों की बीजेपी सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। इसके लिए ये वामपंथी प्रोपेगैंडा चला रहे हैं और मीडिया संस्थानों पर कब्जा कर रहे हैं। बीजेपी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री श्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, श्री संबित पात्रा, श्री जेपी नड्डा समेत बीजेपी के अन्य नेताओं और आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने और प्रोपेगैंडा नहीं चलाने पर ईमानदार पत्रकारों पर अत्याचार किया जा रहा है और धमकी दी जा रही है। साथ ही इस्तीफा देने का गैरकानूनी तरीके से दबाव बनाया जा रहा है। पिछले कुछ समय से मैं राम कृष्ण भी इसका शिकार हो रहा हूँ। वामपंथी संपादक लॉकडाउन में मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। मैं 9 अगस्त 2017 से aajtak.in में बतौर पत्रकार काम कर रहा हूँ। मैंने साल 2013 में अमर उजाला से पत्रकारिता के कैरियर की शुरुआत की थी। Aajtak.in के संपादक पाणिनि आनंद और विजय रावत अपनी वामपंथी विचारधारा के लोगों के साथ मिलकर बीजेपी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री श्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, श्री संबित पात्रा, श्री जेपी नड्डा समेत बीजेपी के अन्य नेताओं और आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के खिलाफ प्रोपेगैंडा चला रहे हैं। इसके लिए पाणिनि आनंद और विजय रावत Aajtak.in, इंडिया टुडे ग्रुप और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार समेत कई राज्यों की बीजेपी सरकारों को गिराने की साजिश रच रहे हैं। इसके लिए पाणिनि आनंद अपने घर में भी आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों, नक्सलियों और बीजेपी विरोधियों को जुटाते हैं और साजिश रचते हैं। पाणिनि आनंद और विजय रावत अक्सर अपनी विचारधारा के लोगों से कहते हैं कि हम Aajtak.in और इंडिया टुडे ग्रुप को छोड़कर मोदी और बीजेपी के खिलाफ कुछ नहीं कर पाएँगे। इसलिए संस्थान में बने रहना और अपने लोगों की भर्ती करनी जरूरी है। अगर इंडिया टुडे ग्रुप में हमारी विचारधारा और हमारे करीबियों की संख्या बढ़ जाए, तो हम संस्थान को अपने मुताबिक चला लेंगे। चुनाव के दौरान मोदी विरोधी और बीजेपी विरोधी अभियान को तेज कर देंगे। इस काम के लिए Aajtak.in में बने रहना जरूरी है। पाणिनि आनंद और विजय रावत की प्लानिंग एक बार पाणिनि आनंद ने टीम की मीटिंग के दौरान अपनी विचारधारा के लोगों से कहा था, ‘इंडिया टुडे ग्रुप मुझको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ लिखने और बोलने से रोक रहा है। इंडिया टुडे ग्रुप अब मोदी टुडे ग्रुप बन गया है। लिहाजा हम लोगों के लिए यह बेहतर होगा कि हम शहीद होने की बजाय संस्थान में बने रहें और धीरे-धीरे अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाएँ। अपने करीबियों और विचारधारा के लोगों की भर्तियां करें। इस तरह Aajtak.in समेत पूरे इंडिया टुडे ग्रुप में हमारी पकड़ मजबूत होगी और फिर हम जो चाहेंगे, वो कर सकेंगे’। पाणिनि आनंद के ये शब्द आज भी मेरे कान में गूँज रहे हैं। पाणिनि आनंद और विजय रावत का कहना है कि Aajtak.in में सिर्फ उन लोगों को प्रमोट किया जाए और आगे बढ़ाया जाए, जो हमारे करीबी हैं। जो पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ सोशल मीडिया समेत हर जगह प्रोपेगैंडा चलाना चाहते हों। अगर टीम का कोई सदस्य हमारे खिलाफ जाए, तो उसको बाहर का रास्ता दिखाया जाए और काम छीन लिया जाए। साथ ही उसका प्रमोशन व अप्रेजल रोक दिया जाए और एचआर डिपार्टमेंट से मिलकर ऐसे लोगों को जबरन सस्पेंड और टर्मिनेट करा दिया जाए। पाणिनि आनंद और विजय रावत, Aajtak.in टीम के कई सदस्यों के साथ ऐसा बर्ताव कर चुके हैं। अब मुझको भी धमकी दी है। इनके डर से Aajtak.in टीम के एक भी सदस्य मोदी सरकार के अच्छे कामों की भी तारीफ नहीं कर पाते हैं। अगर पाणिनि आनंद, विजय रावत और इनकी विचारधारा के लोगों की साजिश के खिलाफ कोई आवाज उठाता है, तो उसको पाणिनि आनंद और विजय रावत कुचल देते हैं। उसकी नौकरी खा जाते हैं और उसका जीना दुश्वार कर देते हैं। पाणिनि आनंद, विजय रावत और इनके लोग मिलकर टॉर्चर और दुर्व्यवहार भी करते हैं। ईमानदार पत्रकारों के साथ गाली गलौज करना और धमकी देना इनके लिए आम बात है। पाणिनि आनंद और विजय रावत, टीम के पुराने काबिल पत्रकारों को गैरकानूनी तरीके से बाहर निकालकर अपनी विचारधारा के लोगों की टीम में भर्ती भी कर चुके हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है।
क्यों मेरी हत्या कराना चाहते हैं पाणिनि आनंद और विजय रावत? पाणिनि आनंद और विजय रावत मुझ पर बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के अन्य नेताओं के खिलाफ प्रोपेगैंडा चलाने का दबाव बना रहे हैं। मुझको सोशल मीडिया पर इन नेताओं और बीजेपी के खिलाफ पोस्ट करने को कह रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर पत्रकारिता से कैरियर खत्म करने की धमकी दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर पीएम मोदी और बीजेपी की तारीफ करने पर पाणिनि आनंद ने फोन पर मुझको धमकी दी और गाली गलौज किया। पाणिनि आनंद ने फोन पर मुझको धमकी देते हुए कहा, “साले तुम कीड़े-मकोड़े हो। मुझको जो मन आएगा करूँगा। मैं गधों को बड़ी जिम्मेदारी दूंगा और उनका प्रमोशन करूंगा व अप्रेजल करूँगा, क्योंकि वो मेरी विचारधारा के लोग हैं। तेरी क्या औकात है। साले तुझको सड़क पर ला दूँगा और तेरे परिवार को बर्बाद कर दूँगा। अगर सुधरा नहीं, तो साले तुझको जूतों से मारूँगा और तेरी हत्या करवा दूँगा। तेरी लाश को कुत्ते खाएँगे। तुझको न मोदी बचाने आएगा और न बीजेपी।” पाणिनि आनंद की इस धमकी के बाद से मैं और मेरा परिवार दहशत में है। मुझको डर है कि पाणिनि आनंद और विजय रावत और इनके लोग मुझ पर हमला कर सकते हैं और मेरी हत्या करवा सकते हैं। ये लोग मेरे परिवार को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाणिनि आनंद और विजय रावत ने मुझको पागल घोषित कराने की भी धमकी दी है, ताकि मैं अपने अधिकारों की लड़ाई भी न लड़ सकूँ।
आजतक वेबसाइट के संपादक पाणिनि आनंद की बात
इस लेख में रामकृष्ण की ओर से लगाए गए सभी आरोप निराधार, अनर्गल और अप्रत्याशित हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है। रामकृष्ण को अनुशासनहीनता और कामकाज में लापरवाही के चलते संस्थान द्वारा 10 अगस्त, 2020 को बर्खास्त किया जा चुका है। ऐसा किए जाने में संस्थान की ओर से पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। रामकृष्ण द्वारा प्रचारित बातें केवल संस्थान और संपादक के प्रति दुष्प्रचार और दुर्भावना को ही प्रकट करती हैं। संपादक की ओर से रामकृष्ण को प्रोत्साहन और मदद के अलावा कुछ नहीं दिया गया। इस प्रकार के निराधार आरोप दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
कानपुर में इन दिनों कथित लव जिहाद का मामला तूल पकड़ रहा है। वहीं अब गोविंद नगर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार जाजमऊ निवासी आसिफ शाह ने युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाया और ब्रेनवाश कर जबरन उसको इस्लाम धर्म कबूलने पर मजबूर किया। परिजनों को उनकी बेटी चार दिन बाद खराब और मानसिक रूप से अस्थिर हालत में मिली है। पिता ने बताया उसका शारीरिक शोषण भी हुआ है।
वहीं एक और मामला कानपुर के बजरिया थाना क्षेत्र से सामने आया है। जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिक लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार थाना गोविंदनगर पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर आरोपित आसिफ शाह के खिलाफ धारा 366 (शादी के लिए युवती का अपहरण) तहत मुकदमा दर्ज किया। फिलहाल आरोपित फरार है। पुलिस मामले की जाँच पड़ताल और आसिफ की तलाश में जुट गई है।
पीड़िता के परिवार में 2 भाई और 2 बहन है। पिता एक वैन ड्राइवर है। पिता ने अपनी तहरीर में बताया कि डेढ़ महीने पहले लव जिहाद का शिकार हुई उसकी बेटी की दोस्ती आसिफ नाम के युवक से हुई थीं। आसिफ बारादेवी के पास स्थित एक ट्रांसपोर्ट में काम करता था जहाँ युवती कोचिंग पढ़ने जाती थी। धीरे-धीरे आसिफ युवती को अपने झाँसे में ले लिया। पिता ने बताया उन्हें 10 दिन पहले ही उन्हें आसिफ के बारे में पता चला है। जब उनकी बेटी कोचिंग के बाद घर नहीं लौटी और वे उसकी तलाश में जुटे थे। सच्चाई पता चलने के बाद उन्होंने शर्मिंदगी और समाज के डर से पुलिस में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराया था।
पीड़ता के पिता ने आगे बताया कि गुरुवार को उनकी बेटी का अचानक से उनके पास फ़ोन आया और उसने अपनी माँ को रामादेवी में मिलने के लिए कहा। बेटी की आवाज सुनकर ही उन्हें खतरे का आभास हो गया था। उन्होंने उसकी सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए पुलिस से पहले अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रांतीय मंत्री रामजी तिवारी व बजरंग दल को इस मामले के बारे सूचित किया। और उनसे मदद माँगी। जिसके बाद सभी लोग मिल कर पीड़ित लड़की के बुलाए गए स्थान पर पहुँचे।
पिता ने कहा, “रामादेवी पहुँचने पर हमें हमारी बेटी बदहाल स्थिति में मिली। उसके हाथ में मेंहँदी लगी थी। साथ ही गले में एक ताबीज बँधा हुआ था। उसकी मानसिक स्थिति भी सही नहीं थी। बेटी ने उस वक्त अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसपर जबरन इस्लाम धर्म कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं वे लोग तमाम जादू टोना, झाड़-फूँक का इस्तेमाल कर उसका धर्म परिवर्तित करने की कोशिश कर रहे थे।”
उस पर तमाम तरह से अत्याचार किया गया और एक कमरे में कैद कर दिया गया था। उसने यह भी कहा कि आसिफ के साथ उसका निक़ाह हो गया है। पिता ने अपनी शिकायत में आगे कहा कि बेटी ने उस दौरान उन्हें भी पहचानने से इनकार कर दिया था और सौतेला भी बताया था। पीड़िता बार-बार उल-जलूल बातें कर रही थी। उसका दिमाग उसके नियंत्रण में नहीं थी। उसे ये भी नहीं पता था कि वह क्या कह रही हैं। जिसके बाद पिता ने तुरंत उसके गले से ताबीज तोड़ कर फेंक दिया था। उसकी पास से एक पर्ची भी मिली थी। जिसमें उर्दू में कुछ लिखा हुआ था।
पिता ने बताया बेटी को वहाँ से वापस ले जाने के बाद भी आसिफ लगातार उसे फ़ोन करता था। आसिफ उसे धमकी देता था और वापस लौटने के लिए बोलता था। उसने यह भी कहा था कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जिसके बाद परिवारवालों ने गोविंदनगर थाना पहुँच कर आरोपित की शिकायत की। एसपी ने इस मामले में युवती से पूछताछ की और मामला दर्ज किया गया। पिता ने आरोपित पर बहला फुसला कर भगाने और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है।
वहीं एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। लड़की के परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है। युवती को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
वहीं कानपुर के बजरिया लव जिहाद मामले में न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित के परिजनों ने लकी खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया है। जिसके अनुसार युवती एक मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। परिवार के सर पर पिता का साया नहीं है। परिवार की जिम्मेदारी लड़की के जिम्मे ही थी। इसी दौरान युवती की मुलाकात लकी खान नाम के युवक से हुई। उस समय उसने अपना पूरा नाम न बता कर सिर्फ लकी ही बताया था। वह नाबालिक लड़की को अपने झाँसे में लेने के लिए रोजाना 5-6 बार मंदिर जाने लगा। जिससे लड़की को इस बात का पता नहीं चला कि वह एक संप्रदाय विशेष से है।
माँ ने बताया कि लकी खान ने उसकी बेटी को नशीली दवाएँ पिला का अश्लील तस्वीरें ले ली है। जिसे वह निक़ाह नहीं करने पर सोशल मीडिया पर फैलाने की धमकी दे रहा है। वह चाहता है कि पीड़िता धर्म परिवर्तन करके उसके साथ रहे। मामले की सच्चाई सामने आने के बाद लड़की डरी सहमी है। उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हो रहा कि जिस लड़के से उसने हिंदू समझ के दोस्ती की वह असल में संप्रदाय विशेष से है। वहीं माँ का भी रो-रो कर बुरा हाल हो गया है।
लड़की की माँ के हवाले से न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में बताया गया है कि उसने इस मामले में पहले सीसामऊ थाने पर दरोगा को शिकायत की थी। लेकिन उन्होंने उनकी शिकायत लेने से मना कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने सीओ ऑफिस में अपनी बात रखी। सीओ ने तुरंत इस मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपित को पकड़ने का निर्देश दिया। जिसके बाद पुलिस ने लकी खान को गिरफ्तार कर लिया है।
गौरतलब है हाल ही में लव जिहाद का शिकार हुई शालिनी यादव से फिजा बनी युवती का मामला सामने आने के बाद कानपुर में हड़कंप मच गया था। जिसके बाद से ही आए दिन लव जिहाद के मामले सामने आ रहे है। शालिनी के भाई ने भी आरोप लगाया था कि इलाके में लव जिहाद का एक गैंग सक्रिय है। अब तक 5 लड़कियों को शिकार बनाया है इस गैंग ने। ये मासूम लड़कियों को बलि का बकरा बना के उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करवाते है। और फिर निक़ाह करते है।
कानपुर में लव जिहाद के बढ़ते मामलों को देखते हुए आईजी मोहित अग्रवाल के आदेश पर एसआईटी गठित की है। एसपी साउथ दीपक ने इस मामले का कमान संभालते हुए एक टीम का गठन कर दिया है। एसआईटी द्वारा आरोपितों की एक-दूसरे से जुड़े होने की जाँच की जा रही है। पुलिस इस बात का भी पता लगाएगी की लव जिहाद फैलाने के लिए इस केस में बाहर से फंडिंग तो नहीं कि जा रही है।