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जिस कॉन्ग्रेस की सेवा की उसने अपमानित किया, PM मोदी ने सम्मान दिया: नरसिम्हा राव के पोते ने सोनिया-राहुल को फटकारा

सोनिया गाँधी द्वारा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की तारीफ किए जाने के बाद उनके पोते ने कॉन्ग्रेस पार्टी को जम कर खरी-खोटी सुनाई है। पूर्व पीएम के पोते एनवी सुभाष ने कहा कि कॉन्ग्रेस सिर्फ दिखावे के लिए दिवंगत पीएम की जन्म शताब्दी मनाने की बातें कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा उनके दादा नरसिम्हा राव का और उनके योगदानों का अपमान ही किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने राव की विरासत को खो दिया है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के निर्देशों की बात करते हुए तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने पूर्व पीएम की जन्म शताब्दी मनाने का निर्णय लिया है। उनके पोते ने इसे नाममात्र का दिखावा करार दिया। उन्होंने कहा कि नरसिम्हा राव ने कठिन परिस्थितियों में कॉन्ग्रेस व देश का नेतृत्व सम्भाला था, कॉन्ग्रेस पार्टी की इतनी सेवा की, बावजूद इसके पार्टी ने उनका अपमान किया।

साथ ही उन्होंने सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की वीडियो के स्क्रिप्ट पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने राव की तारीफ की है। एनवी सुभाष ने कहा कि इस वीडियो का स्क्रिप्ट किसी और ने लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नरसिम्हा राव दक्षिण भारत से थे और गाँधी परिवार से बाहर के थे, इसीलिए उन्हें लगातार नज़रअंदाज़ किया गया। साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने कार्यक्रमों को तेलंगाना तक ही सीमित कर रखा है। उन्होंने कहा:

“यूपीए काल में किसी भी बड़े कॉन्ग्रेस नेता ने दिवंगत पूर्व पीएम नरसिम्हा राव के जन्मदिवस या पुण्यतिथि के कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अब उनकी मौत के 16 सालों बाद आप कार्यक्रम क्यों आयोजित कर रहे हो? कॉन्ग्रेस आलाकमान ने उनके योगदानों को हाइलाइट नहीं किया। दिल्ली में कोई कार्यक्रम नहीं हो रहा। कॉन्ग्रेस उन्हें तेलंगाना तक ही क्यों सीमित करना चाहती है? वो तो एक राष्ट्रीय नेता थे।”

तेलंगाना में भाजपा के प्रवक्ता एनवी सुभाष ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नरसिम्हा राव के योगदानों को याद करना और उनके कार्यों की सराहना करना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी अपने सार्वजनिक भाषणों में हमेशा नरसिम्हा राव के बारे में अच्छा बोलते हैं। साथ ही उन्होंने उनके मेमोरियल के लिए भी दिल्ली में ज़मीन उपलब्ध कराई है, जिसका वादा कर के यूपीए सरकार मुकर गई थी। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा राव की याद में पोस्टल स्टाम्प जारी किए जाने की याद दिलाई।

बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी ने पूर्व पीएम नरसिम्हा राव की जन्म शताब्दी वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और अपना सन्देश भी प्रेषित किया था। तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने भी आयोजन किए थे। गाँधी भवन में हुए आयोजन में कॉंग्रेसनेताओं पी चिदंबरम और जयराम रमेश ने भी वर्चुअल रूप से शिरकत की थी। इससे राव के पोते एनवी सुभाष नाराज़ हैं।

सोनिया ने पत्र में लिखा, “राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबे कैरियर के बाद वह गंभीर आर्थिक संकट के समय भारत के प्रधानमंत्री बने। उनके साहसिक नेतृत्व के माध्यम से हमारा देश कई चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार करने में सक्षम हुआ। 24 जुलाई 1991 का केंद्रीय बजट और हमारे देश के आर्थिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।” वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राव को देश का ‘महान सपूत’ और भारत में आर्थिक सुधारों का जनक बताया है।

ईद से पहले ‘बकरा मंडी’ में सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियाँ, बच्चे भी बिना मास्क के, देखें वीडियो

मुंबई के एक इलाक़े में कोरोना संक्रमण आपदा के बीच लोगों का बकरीद की शॉपिंग करते वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कई बच्चे भी शामिल हैं। मोहसिन शेख नामक ट्विटर यूजर ने ये वीडियो शेयर किया है, जिसे किलेदार जोगेश्वरी बकरा मंडी का बताया गया है। ये बकरीद की शॉपिंग से गुलजार बाजार MTNL की दफ्तर के अपोजिट साइड में स्थित है। ये उद्धव ठाकरे की सरकार की भी पोल खोलती है, जो अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का मजाक उड़ाने में लगे हैं।

उक्त वीडियो ‘बकरा मंडी’ का है, जिससे पता चलता है कि बकरीद की खरीददारी में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की जम कर धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। बता दें कि गुरुवार (जुलाई 30, 2020) को बकरीद मनाया जाना है, जिसके लिए लोग बकरे खरीदते हैं। महाराष्ट्र में सरकार ने बकरों की ऑनलाइन खरीददारी करने को कहा है, ताकि बाजारों में भीड़ न जुटे, लेकिन तब भी लोग बेख़ौफ़ निकल रहे।

लोगों ने डर जताया है कि अगर इस बाजार में एक व्यक्ति भी कोरोना पॉजिटिव निकला तो फिर एक बड़ी जनसंख्या के संक्रमित होने का ख़तरा पैदा हो जाएगा। इसे उद्धव ठाकरे सरकार की तुष्टिकरण की भी रणनीति के रूप में बताते हुए निशाना साधा जा रहा है, क्योंकि शरद पवार इसी प्रकार की राजनीति करते आए हैं और उद्धव सरकार को वही बतौर गठबंधन साथी प्रभावित करते रहे हैं।

इधर महाराष्ट्र सरकार ने देश में जारी लॉकडाउन के बीच कोरोना महामारी से जूझ रहे डॉक्टरों के वेतन में कटौती कर दी है। बताया जा रहा है कि राज्य की उद्धव सरकार ने लगातार गिरती अर्थव्यवस्था के बाद यह फैसला लिया है। हालाँकि, महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले पर डॉक्टरों ने असंतोष व्यक्त किया है, साथ ही कहा है कि इससे उनके काम पर असर पड़ेगा। इससे उद्धव सरकार की पहले से ही आलोचना हो रही है।

गाँधी परिवार के 3 ट्रस्टों में गड़बड़झाले की जाँच: हरियाणा सरकार ने माँगा जवाब, जमीन की देनी होगी जानकारी

हरियाणा सरकार ने गाँधी परिवार के 3 ट्रस्ट की जाँच के आदेश दिए हैं। इसमें राजीव गाँधी फ़ाउंडेशन, राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्रस्ट शामिल हैं। हरियाणा की राज्य सरकार ने इन तीनों संस्थाओं को आवंटित की गई ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ तलाशने के आदेश दिए हैं। 

हरियाणा की राज्य सरकार ने कहा है कि दस्तावेज़ों की जाँच का काम शुक्रवार से ही शुरू हो चुका है। मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने शहरी स्थानीय निकाय के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा।

पिछले साल गृह मंत्रालय ने एक समिति का गठन किया था। इस समिति का काम इस बात की जाँच करना था कि क्या इनमें से किसी ट्रस्ट को ज़मीन देने के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम या आयकर अधिनियम को नज़रअंदाज़ तो नहीं किया गया है। गृह मंत्रालय ने पूरे देश में इन ट्रस्ट को आवंटित की गई ज़मीन से जुड़े रिकॉर्ड तलाशने के लिए समिति बनाई थी। इस कड़ी में हरियाणा की सरकार से भी जानकारी माँगी गई थी। 

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब गाँधी परिवार से जुड़े ट्रस्ट पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

हाल ही में ख़बर आई थी कि कॉन्ग्रेस को लुटियंस में पार्टी कार्यालय बनाने के लिए बिना एक रुपए खर्च किए 2 एकड़ ज़मीन मिली थी। यानी जो ज़मीन कॉन्ग्रेस को ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी के कार्यालय बनाने के लिए मिली थी, वह फिलहाल गाँधी परिवार के नाम है। 

इसके लिए जितनी बार कॉन्ग्रेस की सरकार सत्ता में आई, हर बार अपनी सुविधानुसार नियमों में ऐसे बदलाव किए, जिनके माध्यम से वो 2 एकड़ ज़मीन पार्टी मुख्यालय के बजाय एक परिवार की होकर रह गई। हैरानी की बात यह है कि इंदिरा गाँधी सरकार के समय से शुरू हुई यह प्रक्रिया यूपीए 2 के दौर तक चली थी।  

इसके पहले एक और ख़बर आई थी जिसमें राजीव गाँधी फाउंडेशन ने एक चीनी कंपनी से भरपूर आर्थिक मदद ली थी। वर्ष 2018-19 की राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारती फाउंडेशन उन संगठनों में से एक था, जिसने इसे दान किया था। उस समय भारती फाउंडेशन Huawei के साथ भी पार्टनरशिप में था, जिसके चीन के साथ व्यापक संबंध हैं। वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 में राजीव गाँधी फाउंडेशन में अनुदान और दान से कुल 95,91,766 रुपए की आय हुई थी।

इससे पहले 2020 में, अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन ने Huawei और उसके आपूर्तिकर्ताओं को अमेरिकी प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर तक पहुँचने से रोक दिया था। अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से व्यापक संबंध होने के कारण Huawei उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। 

इसी तरह के कारणों के लिए, यूनाइटेड किंगडम भी अपने 5G नेटवर्क से Huawei पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा था। Huawei से उत्पन्न होने वाला खतरा काफी समय से स्पष्ट था। मगर फिर भी कॉन्ग्रेस के शीर्ष पदाधिकारी राजीव गाँधी फाउंडेशन के लिए 2018-2019 के अंत कर एक ऐसे NGO से धन लेते रहे, जिसकी Huawei के साथ पार्टनरशिप थी।

मनमोहन सिंह द्वारा बनाए गए 1991-92 के केंद्रीय बजट दस्तावेज में एक और प्रावधान भी था। इसमें कहा गया कि 5 साल की अवधि में राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि दान की जाएगी। यह राशि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास, साक्षरता के प्रचार, पर्यावरण की सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, दलितों के उत्थान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से संबंधित अनुसंधान और कार्रवाई कार्यक्रमों की पहल करने, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों, प्रशासनिक सुधार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका के लिए बताई गई थी।

यदि इसके लिए 100 करोड़ रूपए कम पड़ते, तो केंद्रीय बजट में 250 करोड़ रुपए अलग से भी रखे जाने थे। बजट दस्तावेज़ के खंड-58 में लिखा गया है, “इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्धारण के उद्देश्य से, वित्त मंत्रालय के योजना परिव्यय में लगभग 250 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान शामिल किया गया है।” इसके बाद हुई चर्चा में, मनमोहन सिंह ने राजीव गाँधी फाउंडेशन का एक पत्र को पढ़ा था, जिसमें कहा गया था कि फाउंडेशन योगदान की सराहना करता है, लेकिन यह सोचता है कि सरकार को स्वयं उपयुक्त परियोजनाओं में धन का निवेश करना चाहिए।

इन सब के अलावा टाइम्स नाउ न्यूज़ चैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड के नाम पर किए गए चीन की सरकार और गाँधी परिवार के बीच अन्य गोपनीय समझौतों के साथ ही यह वित्तीय मदद करीब 300000 अमेरिकी डॉलर (उस समय के एक्सचेंज रेट के हिसाब से करीब 1।5 करोड़ रुपए) के आस-पास है।

पीपीई किट मॉंगा तो दिल्ली के हमदर्द अस्पताल ने 84 नर्सों को नौकरी से निकाला, हाई कोर्ट पहुँचा मामला

कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में तैनात एचएएच सेंटेनरी अस्पताल की एक नर्स ने उसे और अस्पताल के अन्य 83 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के फैसले को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

वकील सुभाष चंद्रन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) के COVID-19 समर्पित HAH सेंटेनरी अस्पताल के इन कर्मचारियों को तब हटा दिया गया था जब उन्होंने स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए COVID-19 ड्यूटी के दौरान एन -95 मास्क, निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई), बेहतर काम के घंटे, पीने के पानी, मुफ्त COVID-19 टेस्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं की माँग की थी। 

याचिका के अनुसार, सरकारी आदेश के बावजूद हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) के HAH सेंटेनरी अस्पताल ने COVID-19 के संदर्भ में वैध चिंताओं की तरफ ध्यान दिलाने पर बड़ी तादाद में स्वास्थ्य कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया।

याचिका में कहा गया है कि कोरोना काल में 84 नर्सिंग अधिकारियों को बर्खास्त करने के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा उठाया गया कदम सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि 84 नर्सों को नौकरी से हटाने का निर्णय स्पष्ट रूप से COVID-19 के संदर्भ में वैध चिंताओं को बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ एक जवाबी कदम है।

वकील सुभाष चंद्रन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) के COVID-19 समर्पित HAH सेंटेनरी अस्पताल की एक नर्स 3 जुलाई को कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थीं और उनमें कोरोना के लक्षण दिखाने के बावजूद उनका मुफ्त टेस्ट नहीं किया गया था।

याचिका में अस्पताल प्रशासन के 11 जुलाई के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि नर्सों को इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया है क्योंकि वे छुट्टी के बिना काम से अनुपस्थित थीं, जबकि इनमें से अधिकांश 11 जुलाई तक ड्यूटी पर थीं और कई क्वारंटाइन में थीं।

इसके साथ ही याचिका में कहा गया है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था ख़तरनाक ढंग से दबाव में है, इसमें कर्मचारियों और संसाधनों की कमी है। यह महामारी नागरिकों की ज़िंदगी लील रही है और देश में भारी संख्या में लोग मर रहे हैं। इसे देखते हुए महामारी के बीच नर्सों को नौकरी से निकाल दिया, जबकि अभी स्वास्थ्यकर्मियों की भारी ज़रूरत है। अस्पताल ने दोनों ही आधार पर गलत कदम उठाया है – उसने सरकार के निर्देशों को नहीं माना है और नर्सों और एचआईएमएसआर के बीच करार को तोड़ा है।

याचिकाकर्ता ने राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अधिक जोखिम से संबंधित गंभीर चिंताओं को दूर करने के लिए एक COVID-19 प्रबंधन प्रोटोकॉल तैयार करने और कोरोना आइसोलेशन वार्डों में काम करने वाले प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी के लिए COVID-19 सुरक्षा किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी माँग की है। 

सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड: CBI जाँच को लेकर लिखे स्वामी के पत्र को PMO ने किया एक्नॉलेज, कंगना ने दी प्रतिक्रिया

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को 1 महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है लेकिन अब तक मौत के पीछे की वजह सामने नहीं आ पाई है। वहीं हाल ही में राजनेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अभिनेता के असामयिक निधन की सीबीआई जाँच का अनुरोध किया था। जिसका पीएमओ की तरफ से जवाब भी आ चुका है। जवाब वाले लेटर में लिखा है कि सुब्रमण्यम स्वामी मुझे आपकी चिठ्ठी मिल गई है।

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा नियुक्त अधिवक्ता ईश्वरन सिंह भंडारी ने ट्वीट करते हुए जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी कार्यालय ने सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय मौत की सीबीआई जाँच के लिए डॉ. स्वामी द्वारा लिखे गए पत्र को एक्नॉलेज कर लिया है।”

वकील के पीएम मोदी के पत्र स्वीकार करने की जानकारी के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कंगना रनौत की टीम ने ट्विटर पर लिखा, “हमारी संवेदनशील और जिम्मेदार सरकार सुशांत को न्याय दिलाने की हमारी एकमात्र आशा है और इसमें उन लोगों की उम्मीद भी शामिल है जिन्हें अभी भी निशाना बनाकर फिल्म माफिया की ओर से तंग किया जा रहा है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

वहीं भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आज (25 जुलाई, 2020) ट्विटर पर देश के लोगों से अपने संबंधित सांसदों को मामले में जाँच शुरू करने के लिए पीएम मोदी को लिखने का अनुरोध किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “जो लोग एसएसआर की असमय मृत्यु की परिस्थितियों की सीबीआई जाँच चाहते हैं, उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के सांसदों से पीएम को पत्र लिखने के लिए कहना चाहिए, जैसा मैंने किया है।”

गौरतलब है कि सुशांत के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सीधे पीएम मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई जाँच की माँग की थी। स्वामी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस पर सुशांत के मृत्यु के पीछे मौजूद लोगों को बचाने का आरोप लगाया था।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों सुब्रमण्यम स्वामी अपने एक ट्वीट में बिना नाम लिए बॉलीवुड के तीन खानों (शाहरुख, आमिर और सलमान) पर हमला बोला था। स्वामी ने तीनों खानों की संपत्ति की जाँच की माँग की थी। स्वामी ने सवाल उठाया कि बॉलीवुड के तीन बाहुबली सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

उन्होंने विदेश, खासकर दुबई में उनकी सम्पत्तियों की जाँच के लिए भी आवाज़ उठाई। इसके साथ ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर भी शक जताते हुए अधिवक्ता ईशकरण भंडारी से मामले में तथ्यों की जाँच कर के सीबीआई जाँच की गुंजाइश पर विचार करने को कहा था।

बता दें, पिछले महीने (जून) की 14 तारीख को ही सुशांत सिंह राजपूत ने अपने घर में फाँसी लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। उस दिन से अब तक पुलिस लगभग तीन दर्जन लोगों से पूछताछ कर चुकी है। सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बताती है कि उनकी मौत फाँसी लगने के बाद साँस लेने में तकलीफ से हुई है।

2 दिन में दूसरी धमकी: अब गहलोत ने कहा- PM आवास पर करेंगे प्रदर्शन

सियासी संकट में फॅंसे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अब प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है। इससे पहले उन्होंने गवर्नर के घेराव की धमकी दी थी।

गहलोत ने शनिवार (जुलाई 25, 2020) को कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी राष्ट्रपति से मुलाकात करेगी और अगर जरूरत पड़ी तो राजस्थान में मौजूदा स्थिति के संबंध में प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन भी करेगी। जयपुर के होटल फेयरमोंट में आयोजित कॉन्ग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में उन्होंने यह बात कही।

उन्होंने कहा, “जरूरत पड़ने पर हम राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन जाएँगे। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर हम पीएम के आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन करेंगे।”

गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने का वक्त भी मॉंगा है। इस दौरान वे विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर प्रस्ताव दे सकते हैं। शुक्रवार को राज्यपाल पर दबाव बनाने की कोशिश करते हुए गहलोत ने कहा था, “राज्यपाल बिन दबाव में आए सत्र बुलाएँ। वरना पूरे राज्य की जनता अगर राजभवन को घेरने के लिए आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी।”

राज्यपाल से मुलाकात के बाद काफी देर तक ​कॉन्ग्रेस विधायक राजभवन में ही डटे रहे थे। इसके बाद राज्यपाल का एक पत्र सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा था, “इससे पहले कि मैं विधानसभा सत्र के संबंध में विशेषज्ञों से चर्चा करता, आपने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि राजभवन घेराव होता है तो यह आपकी जिम्मेदारी नहीं है।”

उन्होंने लिखा था, “अगर आप और आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की रक्षा नहीं कर सकता तो राज्य में कानून-व्यवस्था का क्या होगा? राज्यपाल की सुरक्षा के लिए किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? मैंने कभी किसी सीएम का ऐसा बयान नहीं सुना। क्या यह एक गलत प्रवृत्ति की शुरुआत नहीं है, जहाँ विधायक राजभवन में विरोध-प्रदर्शन करते हैं?”

राज्यपाल सचिवालय ने बताया था कि राज्य सरकार के जरिए 23 जुलाई की रात को विधानसभा के सत्र को काफी कम नोटिस के साथ बुलाए जाने की पत्रावली पेश की गई। पत्रावली का एनालिसिस किया गया और कानून विशेषज्ञों से परामर्श लिया गया। इस संबंध में जो दस्तावेज दिए गए हैं उसमें न तो सत्र बुलाने की तारीख का उल्लेख है और न इस संबंध में कैबिनेट की मॅंजूरी मिलने का जिक्र।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और गहलोत के बीच मतभेद सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट मॅंडरा रहा। पायलट को उपमुख्यमंत्री के साथ ही 14 जुलाई को पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख के रूप में भी रूप में हटा दिया गया था। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने पायलट और 18 अन्य विधायकों को अयोग्यता का नोटिस भेजा था। इस पर कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने रोक लगा रखी है।

जुमे की नमाज पर भड़काऊ और देश विरोधी तकरीर: अंजुमन-ए-इस्लामिया के अध्यक्ष परवेज शेख पर FIR

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार (जुलाई 25, 2020) को डोडा में अंजुमन-ए-इस्लामिया, भद्रवाह के अध्यक्ष परवेज अहमद शेख के खिलाफ FIR दर्ज की। परवेज पर शुक्रवार (जुलाई 24, 2020) को जुमे की नमाज के दौरान ‘भड़काऊ और देश विरोधी’ तकरीर का आरोप है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों की अवहेलना करने की वजह से भद्रवाह पुलिस स्टेशन में परवेज अहमद शेख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उसके भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124 ए,153 ए, 505 बी और 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही महामारी रोग अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

डोडा पुलिस के जाँच अधिकारी ने कहा कि परवेज अहमद शेख ने जान-बूझकर भड़काऊ और देश विरोधी भाषण दिया था। इसका मकसद समाज में दरार, अशांति और असंतोष पैदा करना था। फिलहाल मामले की जाँच भद्रवाह पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों दक्षिण कश्मीर के पुलवामा मुठभेड़ स्थल पर सात प्रदर्शनकारियों की मौत के विरोध में अंजुमन-ए-इस्लामिया भद्रवाह ने चिनाब घाटी में हड़ताल का आह्वान किया था। शेख ने इन मौतों को घिनौना कृत्य करार देते हुए निहत्थे नागरिकों के खिलाफ एक खूनी युद्ध की शुरुआत बताया था। उसने अलगाववादी नेतृत्व के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए हड़ताल की अपील की थी।

बता दें कि कि पुलवामा के सरनु गाँव में आतंकवादियों के साथ हो रही मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों को भागने में सहायता करने के लिए लोगों ने मुठभेड़स्थल के पास प्रदर्शन किया और सुरक्षाबलों पर पथराव किया। हिंसक भीड़ पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा की गई कार्रवाई में सात प्रदर्शनकारी मारे गए था। मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए और एक सैनिक भी इस दौरान वीरगति को प्राप्त हो गया।

बतौर CM 20वीं बार अयोध्या पहुँचे योगी: संतों और अधिकारियों के साथ की बैठक, भूमिपूजन की तैयारियों का लिया जायजा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर भूमिपूजन की तैयारियों की समीक्षा करने शनिवार 25 जुलाई 2020 को अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में हनुमान जी के दर्शन किए।

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ 28 जून को अयोध्या पहुँचे थे। वो अपने हर दौरे पर भगवन राम के साथ-साथ हनुमानगढ़ी का दर्शन ज़रूर करते हैं। इस दौरान सीएम योगी ने राम मंदिर के नक़्शे को भी देखा।

राम मंदिर निर्माण-कार्य को पूरा करने के लिए जिन लोगों को लगाया गया है, उनके लिए मंदिर परिसर में ही अस्थायी टेंट लगाए गए हैं। उन्होंने जिले के तमाम आला-अधिकारियों के साथ राम मंदिर की तैयारियों की समीक्षा थी। इस दौरान मंदिर से जुड़े लोग ही मौजूद थे। अपने साथ छत्र व आसन लेकर आए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिन अवनीश अवस्थी के साथ पहुँच कर मंदिर के पुजारियों से बातचीत की।

ट्रस्टी चम्पत राय और मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र की मौजूदगी में उन्होंने रामलला की आरती की। कोरोना संक्रमण आपदा के बीच भूमि-पूजन कार्यक्रम में किन-किन सावधानियों का किस तरह से ख्याल रखा जाना है, इस सम्बन्ध में सीएम योगी ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कारसेवकपुरम में उन्होंने संतों के साथ भी बैठक की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लोगों के साथ बैठक कर मंदिर-निर्माण की तैयारियों का जायजा लिया। कारसेवकपुरम में उन्होंने साधु-संतों और पुजारियों के साथ बैठक की। ‘अमर उजाला’ की ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद ये 20वाँ मौक़ा था जब योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में भी 85 सीढियाँ चढ़ने के बाद आरती व पूजा-अर्चना की।

सीएम योगी ने साधु-संतों के साथ हुई बैठक के दौरान बताया कि 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति वाले भूमिपूजन कार्यक्रम में सिर्फ 200 अतिथि ही शामिल हो सकते हैं, इसीलिए अगर किसी को निमंत्रण न मिले तो इसे प्रतिष्ठा का विषय न बनाया जाए। सीएम योगी ने कारसेवकपुरम में पत्थरों की तराशी का भी जायजा लिया। पूरे अयोध्या के लोग 5 अगस्त को दीप प्रज्ज्वलित कर इस मौके पर ख़ुशी मनाएँगे।

एक पुजारी ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान राम मंदिर निर्माण में कोई अड़चन न आए, इसके लिए सीएम योगी ने प्रार्थना की। उन्होंने संतों और अधिकारियों से फीडबैक लेकर कार्यक्रम को ऐसा बनाने पर चर्चा की, जिससे कुछ अलग हो और लोगों में अच्छे सन्देश जाए। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अयोध्या में हो रहे विकास कार्यों का जायजा लिया था। इसमें सभी अधिकारी उपस्थित रहे थे।

बता दें कि राम मंदिर मे कुल 5 गुम्बद होंगे और मंदिर की ऊँचाई 161 फीट होगी। चंपत राय ने बताया था कि 3 वर्षों मे राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने की उम्मीद है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर रोक लगाने वाली याचिका को भी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार (जुलाई 24, 2020) सुनवाई के बाद खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि याचिका केवल आशंकाओं पर आधारित है, इसमें तथ्य नहीं हैं।

NIA ने केरल गोल्ड तस्करी मामले में स्वप्ना सुरेश के बैंक लॉकर से 1 करोड़ रुपए और 1 किलो सोना किया बरामद, जब्ती के आदेश

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सनसनीखेज सोने की तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्न सुरेश के पास से 1 करोड़ रुपए नकद और लगभग 1 किलो सोना बरामद किया है।

एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश रिमांड रिपोर्ट में जाँच एजेंसी ने बताया कि तस्करी का सोना लॉकरों में रखा गया था और कई बैंकों में डिपोजिट के रूप में निवेश किया गया था।

NIA ने कहा कि तिरुवनंतपुरम में फेडरल बैंक में स्वप्ना सुरेश के बैंक लॉकर में लगभग 36.5 लाख रुपए पाए गए। एजेंसी ने यह भी कहा कि स्वप्ना से संबंधित एसबीआई लॉकर में लगभग 64 लाख रुपए नकद और 982.5 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग से सोना और पैसा जब्त करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही एजेंसी यह भी जाँच कर रही है कि क्या अपराध की आय कहीं और भी छुपाई गई है।

स्वप्ना के बचाव में उसके वकील ने दावा किया कि उसे यह धन और सोना उसकी शादी के दौरान शेख ने उपहार के तौर पर दिए थे।

शुक्रवार (जुलाई 24, 2020) को जाँच एजेंसी ने स्वप्ना और दो अन्य आरोपितों- संदीप नायर और पीएस सरित की न्यायिक हिरासत को आगे बढ़ाने की माँग की। जिसके बाद आऱोपितों को 21 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

एनआईए मलप्पुरम के व्यवसायी केटी रमीज को भी हिरासत में लेने की माँग कर रही है। बता दें कि केरल में सोने की तस्करी के रैकेट के लिंचपिन माने जाने वाले रमीज को रविवार की रात में पेरिन्थलम्ना के पास वेटाठूर में उसके निवास से गिरफ्तार किया गया था।

बताया जा रहा है कि रमीज ने कोरोनवायरस के लॉकडाउन के बीच अधिकतम सोने की तस्करी का सुझाव दिया था। संदीप नायर के अनुसार, रमीज देश विरोधी गतिविधियों में शामिल था, जो देश की सुरक्षा को कमजोर कर सकता था। इसके साथ ही आरोपितों ने अपने कम्युनिकेशन तरीके और मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका का भी खुलासा किया था।

गौरतलब है कि स्वप्ना के फोन कॉल डिटेल से खुलासा हुआ था कि वह केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से भी टच में थी। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री और CPI (M) नेता केटी जलील और आरोपित स्वप्ना सुरेश के बीच 16 कॉल किए गए थे। वह निरंतर सम्पर्क में थे।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के अनुसार, केटी जलील ने स्वप्ना सुरेश को कई कॉल किए थे, जिसकी जाँच एनआईए और कस्टम अधिकारियों द्वारा की जा रही है। विवरण में कहा गया है कि मंत्री और स्वप्ना सुरेश के बीच मई और जून के महीने में कई कॉल हुए थे। जलील के दो निजी कर्मचारी भी स्वप्ना सुरेश के संपर्क में थे।

इससे पहले, पिनाराई विजयन के साथ आरोपित स्वप्ना सुरेश के कथित संबंध भी सामने आए थे, जब यह बताया गया था कि विजयन के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर आरोपित स्वप्ना सुरेश के करीबी थे।

स्वप्ना सुरेश टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में सलाहकार के पद पर रही हैं। वह केरल सरकार के आईटी सचिव एम शिवशंकर की करीबी बताई जा रही हैं। इन दोनों के नाम सामने आने के बाद विपक्ष लगातार केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन पर निशाना साध रहा है।

उल्लेखनीय है कि जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरिथ, स्वप्ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिश्नरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

ट्विटर ने CJI पर प्रशांत भूषण के ट्वीट हटाए, साल 2010 का इंटरव्यू भी पड़ रहा भारी: जानिए क्या है मामला

ट्विटर ने शनिवार (25 जुलाई 2020) को प्रशांत भूषण के दो ट्वीट हटा लिए। इनमें से एक ट्वीट 27 जून को और दूसरा 29 जून को किया गया था। एक में उन्होंने न्यायपालिका पर आरोप लगाए थे, जबकि दूसरा मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबड़े से जुड़ा था।

शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इन ट्वीट पर भूषण के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। महक माहेश्वरी नाम की अधिवक्ता ने भी इस मामले में अवमानना की कार्रवाई को लेकर याचिका दायर की थी। वहीं करीब दशक भर पुराने अवमानना के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के खिलाफ 4 अगस्त को सुनवाई की तारीख तय की है।

इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने प्रशांत भूषण और ट्विटर को पॉंच अगस्त तक इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा था। ट्विटर की नीतियों के मुताबिक़ अगर किसी ट्वीट पर न्यायिक कार्रवाई होती है तो ट्विटर उस पर रोक लगा देता है। 

सु्प्रीम कोर्ट में ट्विटर की पैरवी कर रहे वकील साजन पूवैया के अनुसार इस संबंध में अदालत को सूचित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि ट्वीट हटाने का मतलब उसे ‘डिलीट’ करना नहीं है।

बार एंड बेंच के मुताबिक़ ट्वीट पर रोक लगाते हुए ट्विटर ने दो विकल्प खुले रखे हैं। पहला वह ट्वीट को हटा सकता है और दूसरा वह अंतिम निर्णय आने के बाद ट्वीट को फिर से बहाल कर सकता है।

वहीं शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशांत भूषण के खिलाफ लगभग एक दशक पुराने मामले की सुनवाई की तारीख़ तय की थी। प्रशांत भूषण के विरुद्ध अवमानना के इस मामले की सुनवाई 4 अगस्त को होनी है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान उनके पिता शांति भूषण को पार्टी बनाने से इनकार कर दिया था। साल 2009 के दौरान तहलका में साक्षात्कार देते हुए सोमा चौधरी से बात करते हुए प्रशांत भूषण ने कई बातें कही थीं। 

उन्होंने इस बात के संकेत दिए थे कि जस्टिस सरोश होमी कपाड़िया ने ‘फ़ोरेस्ट बेंच’ का हिस्सा बन कर न्यायिक रूप से अनीति की है। बेंच ने उड़ीसा के नियामगिरी लीज़ मामले में वेदांता सब्सिडरी स्टरलाइट के पक्ष में फैसला सुनाया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया था क्योंकि कंपनी में उनके भी शेयर थे। इस बयान के आधार पर हरीश साल्वे ने प्रशांत भूषण के खिलाफ़ अवमाननना की याचिका दायर की थी। 

साक्षात्कार में बात करते हुए प्रशांत भूषण ने कई विवादित बातें कही थीं। उन्होंने कहा था, “16-17 न्यायाधीशों में लगभग आधे भ्रष्ट हैं। मैं इसे साबित नहीं कर सकता लेकिन हमारे पास पुंछी, आनंद और सभरवाल के खिलाफ सबूत हैं। इसके आधार पर ही हमने इनके महाभियोग की माँग उठाई थी।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि शीर्ष अदालतों के न्यायाधीशों से जुड़ा कुछ भी साबित करना बहुत मुश्किल होता है। 

उन्होंने कहा था कि इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि शीर्ष अदालतों के न्यायाधीशों पर लगाए गए आरोपों की जाँच तक नहीं होती है। ऐसी कोई अनुशासन समिति ही नहीं है जो इन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करे। 

इस मामले पर अपने बेटे का पक्ष लेते हुए पूर्व क़ानून मंत्री शांति भूषण ने 6 ईमानदार और 8 भ्रष्ट न्यायाधीशों की सूची सर्वोच्च न्यायालय को दी थी। उन्होंने यह दावा भी किया था अगर उनका बेटा दोषी पाया गया तो वह खुद जेल जाने के लिए तैयार हैं।