चीन में जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट को ‘द ग्रेट फायरवॉल’ के जरिए ब्लॉक कर दिया गया है वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की वेबसाइट पर कोई रोक नहीं है। लगभग चीन के सभी प्रांतों में ऐसा ही हुआ प्रतीत होता है। बता दें कि चीन में उन सभी वेबसाइटों पर रोक है, जहाँ चीन के विरोध में कंटेंट डाले जाने की सम्भावना रहती है या फिर जिसके कंटेंट्स को वहाँ की सरकार फ़िल्टर नहीं कर सकती।
चीन में किसी भी इंटरनेट यूजर को फ़िल्टर किया हुआ कंटेंट ही मिलता है, ताकि कम्युनिस्ट पार्टी के नैरेटिव के विरुद्ध कुछ भी कहीं भी पोस्ट न किया जा सके। वहाँ इंटरनेट पर जिस तरह की सेंसरशिप लागू है, उस तरह की शायद ही किसी देश में हो। उन सारी तकनीकों और ब्लॉक करने वाली व्यवस्थाओं को ही मिला कर ‘द ग्रेट फायरवॉल’ कहा जाता है। यानी आप वहाँ की सरकार के विरुद्ध कुछ भी नहीं लिख सकते।
कई ऐसे टूल ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं, जो ये बता देते हैं कि कोई वेबसाइट चीन में ब्लॉक्ड है या नहीं। उसे ‘द ग्रेट फायरवॉल’ द्वारा अनुमति प्रदान की गई है या नहीं। हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की वेबसाइटों को लेकर ये टेस्ट किया। हमने पाया कि जहाँ राहुल गाँधी की वेबसाइट पर कोई रोक नहीं है, नरेंद्र मोदी की वेबसाइट को चीन में ब्लॉक कर के रखा गया है।
चीन के विभिन्न प्रांतों में ब्लॉक्ड है पीएम मोदी की वेबसाइट
जहाँ नरेंद्र मोदी की वेबसाइट (NarendraModi.In) हमें ब्लॉक मिला और बताया गया कि सर्वर तक पहुँचने में आप असफल रहे हैं और मेनलैंड चीन में ये वेबसाइट नहीं खुलेगी, वहीं राहुल गाँधी की वेबसाइट (RahulGandhi.In) को लेकर हमने पाया कि इस पर कोई रोक नहीं है। ये जानने वाली बात है कि दोनों ही वेबसाइटों का डोमेन .In ही है। हमने दूसरे टूल्स से भी ये टेस्ट किया तो परिणाम समान ही थे।
राहुल गाँधी की वेबसाइट पर चीन में कोई रोक नहीं
ज्ञात हो कि चीन की सरकार साइटों को ब्लॉक करने के लिए जिस प्रक्रिया को अपनाती है, उसे ‘डीएनएस पोइज़निंग’ भी कहते हैं। हमने ViewDNS.Info पर भी इसी टेस्ट को दोहराया, जहाँ हमें यही परिणाम मिला। हालाँकि, भारत-चीन के बीच जहाँ सीमा पर तनाव चल रहा है, उस वक़्त पीएम मोदी की वेबसाइट और राहुल गाँधी की वेबसाइट के बीच भेदभाव क्यों है, इस विषय में कुछ पता नहीं चल पाया है।
7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। शायद आज वही वजह है कि कॉन्ग्रेस चीन की नापाक हरकतों पर भी चुप्पी साधे हुए है। यूपीए के अपने पहले कार्यकाल के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने उच्च स्तरीय सूचनाओं और उनके बीच सहयोग करने के लिए बीजिंग में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत-चीन सीमा विवाद के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के उस दावों को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें भारतीय सेना पर अनर्गल आरोप लगाए गए थे। चीन ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को बयान जारी कर भारत पर आरोप लगाए थे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि गलवान घाटी को लेकर स्थिति ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है और चीन द्वारा इसके साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत ने कहा है कि न तो चीन का दावा समर्थन के लायक है और न ही ये इतिहास के अनुरूप है, इसीलिए भारत इसका विरोध करता है। विदेश मंत्रालय ने खुलासा किया कि मई के शुरुआत से चीनी सेना लगातार व्यवधान पैदा कर रही है और इलाक़े में तनाव भड़काने में लगी हुई है। साथ ही ये भी स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत ने उस क्षेत्र में जितने भी निर्माण-कार्य किए हैं, वो सभी LAC के भारतीय सीमा के अंतर्गत हुए हैं।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि मई के ही मध्य में चीनी सेना ने वेस्टर्न सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास किया, जिसका उसे जवाब दिया गया। बताया गया है कि 6 जून को दोनों पक्षों के बीच बैठक कर के तनाव कम करने के लिए समझौता भी कर लिया गया था लेकिन चीनी बाज नहीं आए और उन्होंने अवैध रूप से निर्माण कार्य जारी रखा, इस पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई और हिंसा व क्षति का कारण भी वही बना।
Since early May 2020, Chinese have been hindering India’s normal patrolling pattern in the area. This resulted in face-off which was addressed by ground commanders. We don’t accept the contention that India was unilaterally changing status quo, we were maintaining it: MEA pic.twitter.com/MMMUI4xkOo
हालाँकि, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष को फोन कर के 15 जून को ही बता दिया था कि हालिया तनाव के लिए चीन जिम्मेदार है और उसे सीमा पर अपनी गतिविधियों की समीक्षा करनी चाहिए। दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति भी जताई गई थी कि इस मामले को जिम्मेदारी के साथ सुलझाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन को चेताया है और कहा कि भारत अपनी जमीन की रक्षा करने में सक्षम है।
पीएमओ ने भी इस मुद्दे पर कहा था कि जिन्होंने भारतीय सरजमीं में घुसने की कोशिश की, उन्हें भारत माता के वीर सपूतों ने करारा जवाब दिया। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि हमारे जवान हमारी सीमाओं की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पीएमओ ने कहा है कि भारतीय क्षेत्र की क्या परिभाषा है, ये आधिकारिक नक़्शे से तय होता है। पिछले 60 साल में किस तरह से देश की 43,000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन के कब्जे में चली गई, इस बारे में भी सभी दलों को बताया गया।
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना ने एक आतंकी को ढेर कर दिया। इसके बाद से आसपास के क्षेत्र में सुरक्षाबलों का आतंकियों के खिलाफ सर्च अभियान जारी है। वहीं सेना को इलाके में दो से तीन और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है।
One unidentified terrorist killed in the encounter underway at Likhdi Pora area of Kulgam. (Visuals deferred by unspecified time) #JammuAndKashmirpic.twitter.com/eKScoXeFXa
जानकारी के मुताबिक कुलगाम के लखड़ीपोरा में सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसकी जानकारी मिलते ही सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर उनके ऊपर फायरिंग शुरू कर दी।
सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करने से पहले आतंकियों से समर्पण करने की अपील की, लेकिन इसके बाद भी आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग जारी रखी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालकर एक आतंकी को ढेर कर दिया। इलाके में कई और आतंकियों के छिपे होने की आशंका के चलते सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है।
आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (19 जून, 2020) को कश्मीर के अवंतीपोरा और शोपियाँ जिले में सुरक्षा बलों ने मस्जिद में छुपे 2 आतंकियों के साथ-साथ कुल 8 आतंकियों को ढेर कर दिया था, जिसमें सेना के जवानों ने शोपियाँ जिले में पाँच और पांपोर जिले में तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था। ये सभी आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हुए थे।
दरअसल दो आतंकी अपने आप को बचाने के लिए मिज गाँव में स्थित जामा मस्जिद के अंदर छुप गए थे। धर्म स्थल का सम्मान करते हुए सुरक्षाबलों ने आतंकियों से सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद मस्जिद को कोई नुकसान न पहुँचे इस बात का ध्यान रखते हुए सुरक्षाबलों ने फायरिंग या आईईडी का इस्तेमाल नहीं किया।
बल्कि आँसू गैस के गोलों के जरिए शुक्रवार की सुबह स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के कमांडो मस्जिद के अंदर घुस गए और दोनों आतंकियों को मार गिराया और उनकी लाश को कब्जे में ले लिया था।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने 13 जून को दो आंतवादियों को मार गिराया था। मारे गए दोनों आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन के थे। उनके पास से सेना ने गोला-बारूद, 2 पिस्तौल और 3 ग्रेनेड भी बरामद किए थे।
छत्तीसगढ़ की श्रृंखला यादव की निर्मम हत्या को एक साल हो चुका है। शृंखला की उम्र मात्र 17 साल थी, जब कई दिनों से उसका पीछा कर रहे उन्हीं के इलाके में रहने वाले इशांत ठाकुर नामक युवक ने खेती में इस्तेमाल किए जाने वाली कुदाल से शृंखला यादव पर हमला कर दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी थी। जून 15, 2019 को रिसाली निवासी शृंखला यादव का अस्पताल में निधन हो गया था।
मृतक की माँ ममता यादव ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि जब उनकी बेटी के हत्यारे इशांत ठाकुर से दिनदहाड़े की गई इस हत्या का कारण पूछा गया तो उसने सीधा सा जवाब जवाब दिया – “क्योंकि वो पट नहीं रही थी।”
शृंखला यादव की माँ का कहना है कि आरोपित पक्ष ने पूरी सामर्थ्य लगाकर इशांत को जमानत पर रिहा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के हत्यारे को यह अच्छी तरह से पता था कि वह नाबालिग है और वह न्यायिक प्रक्रिया के इस कमजोर पक्ष का फायदा उठाकर आसानी से बाहर भी हो जाएगा, और यही बात ध्यान में रखते हुए उसने इतना जघन्य अपराध करने की योजना भी बनाई थी।
शृंखला के परिजन आज भी न्याय की गुहार लगा रहे हैं जबकि नाबालिग हत्यारा अब बालिग हो चुका है। उनकी बेटी का हत्यारा आज भी खुलेआम घूम रहा है जबकि शृंखला के माँ-बाप अपनी व्यथा के साथ अकेले छोड़ दिए गए हैं।
जिस दिन यह हत्या की गई, उस दिन शृंखला यादव की हत्या का आरोपित इशांत ठाकुर की उम्र तब 17 साल 11 महीने और 19 दिन थी, यानी वह शृंखला यादव को क्रूरता से मारने के कुछ ही दिन बाद वह बालिग़ होने वाला था। इशांत ठाकुर आज जमानत पर बाहर घूम रहा है।
नतीजा यह हुआ कि मृतक शृंखला यादव की माँ आज तक भी न्याय व्यवस्था में विश्वास कर रही है, और उन्हें यकीन है कि उनकी बेटी के हत्यारे को जेल की सलाखों में भेजा जाएगा।
दिनदहाड़े की थी शृंखला यादव की हत्या
सत्रह वर्षीय शृंखला डॉक्टर बनना चाहती थी। जून 13, 2019 की दोपहर 3 बजे जब वो स्कूटी से सिविक सेंटर कोचिंग जा रही थी तभी पहले से उसका पीछा कर रहे आरोपित इशांत ठाकुर ने घर से करीब एक किलोमीटर दूर छत्रपति शिवाजी नगर गाँधीपुरम के पास उसका रास्ता रोका और शृंखला के सिर पर कुदाली (खेत में मिट्टी खोदने वाले हथियार) से हमला कर दिया।
इस हमले से शृंखला का सर फट गया और उसका एक हिस्सा बाहर आ गया। इसके बाद लहूलुहान शृंखला को करीब 85 फीट घसीटते हुए एक मकान के पीछे छोड़कर फरार हो गया। इस हमले से घायल शृंखला यादव 2 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझती रही और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
बेटी की मौत को एक वर्ष पूरा होने पर ऑपइंडिया से बातचीत में शृंखला की माँ ने बताया कि उनकी बेटी की हत्या करने वाला इतना शातिर और परिपक्व था कि उनकी बेटी की हत्या करने के बाद जब शृंखला का शव घर पर आया था और लोग जानना चाह रहे थे कि क्या हुआ, तब उसके बारे में पूछताछ करने वालों में उसका हत्यारा इशांत ठाकुर भी शामिल था।
जून 13, 2019 को जिस दिन आरोपित इशांत ठाकुर को गिरफ्तार किया गया, तब उसकी उम्र 17 साल 11 महीना थी। 19 जून को उसका जन्मदिन था और वह 18 साल का हो गया। इसका फायदा उठाकर ही वह कुछ ही दिनों में जमानत पर रिहा हो गया और आज बाहर घूम रहा है।
अपनी बेटी के लिए न्याय की उम्मीद लगा रही ममता यादव का कहना है कि 5 नवम्बर को हत्यारोपित इशांत को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई थी। उन्होंने बताया कि बाल न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद दिवाली के ठीक एक दिन बाद कोर्ट खुलते ही पहले ही दिन सेशन कोर्ट में आरोपित पक्ष द्वारा एप्लीकेशन लगाईं गई। फौरन तकरीबन 300 पन्नों की फ़ाइल बाल न्यायालय से मँगाई गई और मजिस्ट्रेट ने एक ही दिन में उसे जमानत भी दी, और 6 नवम्बर को इशांत ठाकुर रिहा भी हो गया।
ममता यादव ने कहा कि बाल न्यायलय में जहाँ उनकी बात अच्छी तरह से सुनी गई, वहीं सेशन कोर्ट में उनकी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया और ना ही उनका पक्ष सुना गया। यहाँ तक कि आरोपित को भी वकीलों जैसा लुक देकर, अपने साथ बातचीत करते हुए छुपाकर कोर्ट लाया गया था।
ममता यादव ने कहा कि जब उन्होंने मजिस्ट्रेट से इस बारे में कहा तो उन्होंने परिजनों को फैसला पसंद न आने की सूरत में हाईकोर्ट जाने की सलाह भी दी। ममता यादव का कहना है कि दिल्ली में निर्भया के बलात्कार और हत्याकांड के बाद फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की गई थी लेकिन वो आज तक न्याय के लिए भटक रहे हैं।
न्याय के लिए जंग लड़ रही ममता यादव का कहना है कि न्याय प्रणाली के कारण जिस सत्रह साल की लड़की की हत्या की गई, उसके माँ-बाप का मनोबल टूटना स्वाभाविक है फिर भी वो लोग न्याय की उम्मीद में अपनी लड़ाई जारी रख रहे हैं।
शृंखला यादव का कहना है कि उनकी लड़ाई अब सिर्फ अपनी बेटी को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस माँ को हौंसला देने के लिए है जिनकी बेटियों को इस तरह से सरेआम क्रूरता से मार दिया जाता है।
शृंखला की माँ का कहना है कि जब उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए न्याय की माँग को आगे बढ़ाना चाहा तो आरोपित युवक अपने साथियों के जरिए उन्हें ऐसे संदेश दे रहा है कि ‘न्याय तो हो चुका है, अब आपको कौन सा न्याय चाहिए?’
ऑपइंडिया से बात करते हुए ममता यादव ने कहा कि इन्स्टाग्राम पर भेजे गए उन्हें इस सन्देश के पीछे उसी युवक का हाथ हो सकता है और ‘न्याय हो गया’ के रूप में उसका अर्थ शृंखला की हत्या से है।
वहीं, शृंखला के लिए न्याय माँग रहे उसके परिजनों का कहना है कि उसके हत्यारे इशांत ठाकुर को मिली जमानत के पीछे राजनीतिक कारण भी हैं। यदि छत्तीसगढ़ में कोई चुनाव आने वाला होता तो शायद उन्हें सुनने वाले कई लोग मिल जाते लेकिन क्योंकि ऐसी फिलहाल कोई सम्भावना नहीं है इस कारण किसी को उनकी परवाह भी नहीं है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य की घटनाएँ कभी मुख्यधारा की मीडिया में चर्चा में नहीं होती हैं, इसका फायदा यहाँ पर कुछ लोग मनमाने तरीके से उठा रहे हैं।
शृंखला यादव के जैसे देशभर में न जाने कितने ही ऐसे मामले हैं, जिनमें लोग आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं जबकि उनकी आवाज तक सुनने को कोई राजी नहीं है। मृतक शृंखला की माँ ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को कई ऐसे पत्र भी भेजे हैं, जिनमें उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के कारण ही न्याय ना मिल पाने का जिक्र किया है। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें कहीं से कोई जवाब और आश्वासन नहीं मिल पाया है।
Chhattisgarh’s Bhilai witnessed one of it’s most shocking and shattering crimes one year ago on 15th June 2019.
Note that it’s a long thread begging for justice please make sure it reaches the concerned and the government too.
बेटी की हत्या को एक साल होने पर ममता यादव ने अब सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखने का रास्ता अपनाया है। इन्स्टाग्राम से लेकर फेसबुक और ट्विटर पर वह वीडियो और लेखों के जरिए इसी उम्मीद में वास्तविकता को सबके सामने रखने का प्रयास कर रही हैं कि उनकी इस लड़ाई से और लोग भी जुड़ सकेंगे, और एक दिन उनकी बेटी के गुनहगार को जरूर सजा मिल सकेगी।
@ForShrinkhala ‘Justice’ a big sense of feeling of assurance that every victim or its belongers wants. Shrinkhala is too waiting for her turn. Very disgusting to say that our paralysed judicial system is worsening steeply. 1 yr passed but still no trial in court. We want justice. pic.twitter.com/2230d2jBbR
लद्दाख के गलवान घाटी में चीन और भारत के बीच हुए खूनी हिंसक झड़प हुए झड़प पर एक्टिविस्ट डॉक्टर आनंद राय ने शनिवार (20 जून, 2020) को एक घायल सैनिक की फ़ोटो को पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह फ़ोटो एक घायल भारतीय सैनिक की थी जो की लद्दाख में चीनी सैनिकों की क्रूरता से बच गए थे।
ऊपर दिए गए इस ट्वीट में आप देख सकते हैं, कि डॉ राय ने दावा किया कि यह तस्वीर उन सैनिकों में से एक की है जिन पर चीनी सैनिकों द्वारा गलवान घाटी में हमला किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनके पूरे शरीर पर कीलों (Nail) से की गई चोटें हैं। वहीं प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों को हथियार उठाने से क्यों रोका गया?
हालाँकि, डॉ राय के द्वारा दावा की गई तस्वीर थाई सैनिकों की है, जो 2016 की है। यानी 4 साल पुरानी।
यह तस्वीर 2016 के एक ब्लॉग में देखी गई थी। जिसमें थाई सैनिकों के प्रशिक्षण के बारे में बात की गई थी। जहाँ एक प्रशिक्षण के दौरान थाई सैनिकों को लगी चोट की फोटो को उसमें दिखाया गया था। वहीं इस तस्वीर की एक रिवर्स खोज के दौरान यह पता चला कि ई-कॉमर्स वेबसाइट पर एक ऑनलाइन शॉपर ने भी इस तस्वीर को अपनी प्रोफाइल पिक्चर के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
जैसा कि देखा जा सकता है, एक मलेशियाई शॉपिंग वेबसाइट गूगल सर्च में लगातार इस तस्वीर को दिखाती है। वहीं इस साइट पर एक उपयोगकर्ता ने एक साल पहले 25 जून, 2019 को एक रिव्यु लिखा था।
डॉ. आनंद राय ने इससे पहले भी किए कई फर्जी ट्वीट्स
डॉ.राय ने अगस्त 2019 में बाबा रामदेव के सहयोगी को कांफीडेंशियल मेडिकल रिपोर्ट प्रकाशित कर गलत तरीके से फँसाने की थी। उन्होंने रामदेव के सहयोगी आचार्य बालगोविंद की झूठी रिपोर्ट को प्रकाशित किया था। जिसमें यह दावा था कि बाबा रामदेव के एसोसिएट और पतंजलि आयुर्वेद के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण मारिजुआना धूम्रपान करते हैं। डॉक्टर ने जानबूझकर एक अलग व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट का इस्तेमाल कर उसमें नाम बदल कर आचार्य बालकृष्ण को बदनाम करने की कोशिश की थी।
इससे पहले, उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बारे में एक अश्लील झूठ फैलाया था। जहाँ उन्होंने आरोप लगाया था कि वह किसी वीरेंद्र देव दीक्षित नाम के एक बाबा के आश्रम से ‘प्रसाद’ लेने गई थी। अपने इस झूठ को साबित करने के लिए उन्होंने स्मृति ईरानी के साथ उस बाबा की फ़ोटो भी फोटोशॉप करके लगा दिया था।
आपको बता दें उस बाबा को हाल ही में यूपी और दिल्ली पुलिस द्वारा 47 महिलाओं और छह नाबालिग लड़कियों को बचाने के लिए उनके द्वारा चलाए गए तीन केंद्रों पर छापा मारा था। उन पर इन लड़कियों को अमानवीय रूप से सीमित रखने का आरोप लगाया गया है, जो रिपोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न के भी थे।
गौरतलब है कि डॉ. आनंद राय कॉन्ग्रेस के टिकट पर 2018 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था। हालाँकि, टिकट नहीं मिलने के बाद भी वे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ एक करीबी रिश्ता बनाए रखते हैं, और उनका फेसबुक पेज इस तथ्य का प्रमाण है।
बाजार में कोरोना वायरस संक्रमण की दवा उपलब्ध हो गई है। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals) ने ये कारनामा किया है। हालाँकि, ये दवा उन्हीं लोगों पर काम करेगी, जो इस संक्रमण से मामूली रूप से पीड़ित हैं या फिर जो कोरोना वायरस संक्रमण के शुरुआती स्टेज में हैं। इस एंटीवायरल दवा का नाम फेविपिराविर है, जिसे फैबिफ्लू नामक ब्रांड नेम से बाजार में उतारा गया है।
मुंबई की कम्पनी ने शनिवार (जून 20, 2020) को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) द्वारा इस दवा के उत्पादन और मार्केटिंग के लिए पहले ही अनुमति दी जा चुकी है। फैबिफ्लू को कोविड-19 के संक्रमण के इलाज के लिए फेविपिराविर नामक ड्रग या दवा बताया गया है, जिसका उत्पादन कम्पनी कर रही है। ग्लेमार्क फार्मास्युटिकल्स के सीएमडी (CMD) ग्लेन सल्दान्हा ने इसकी पुष्टि की है।
सल्दान्हा ने ध्यान दिलाया कि ये मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या पहले के मुकाबले काफ़ी ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही है। अब तक के आँकड़ों के अनुसार, भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 3,96,874 हो गई है, जिनमें से 1,69,253 सक्रिय मामले हैं और 2,14,599 संक्रमित ठीक हो चुके हैं। हालाँकि, 12,972 लोगों की मौत चिंता का विषय है, जिसे लेकर केंद्र सरकार लगातार राज्यों से चर्चा कर रही है। सल्दान्हा ने कहा:
“कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के कारण हमारी हेल्थ सर्विस सिस्टम काफी दबाव में है। मैं आशा करता हूँ कि फैबिफ्लू जैसे प्रभावी इलाज की उपलब्धता से इस दबाव को बहुत हद तक कम करने में मदद मिलेगी। क्लिनिकल परीक्षणों में फैबिफ्लू द्वारा कोरोना वायरस के हल्के संक्रमण से पीड़ित मरीजों के इलाज के बाद काफी अच्छे परिणाम मिले हैं। यह इंजेक्शन नहीं बल्कि खाई जाने वाली दवा है जो इलाज का एक सुविधाजनक रास्ता है।”
Glenmark Pharmaceuticals on Saturday said it has launched antiviral drug Favipiravir, under the brand name FabiFlu, for the treatment of patients with mild to moderate COVID-19. pic.twitter.com/mQkazeGimj
उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी कंपनी सरकार और चिकित्सा समुदाय के साथ मिलकर काम करेगी ताकि देशभर में मरीजों को यह दवा आसानी से उपलब्ध कराई जा सके। हालाँकि, बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवा को नहीं ख़रीदा जा सकेगा। इसकी क़ीमत 103 रुपए प्रति टेबलेट रखी गई है। पहले दिन इसकी 1800 मिलीग्राम की दो खुराक लेनी होगी। उसके बाद अगले 14 दिनों तक 800 मिलीग्राम की दो खुराक लेनी पड़ेगी।
कम्पनी ने बताया है कि कोरोना वायरस के मामूली संक्रमण से पीड़ित ऐसे मरीज जो डाइबिटिज या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, वो भी इस दवा को ले सकते हैं। अकेले शनिवार को देश में कोरोना वायरस के एक दिन में रिकॉर्ड 14,516 मामले सामने आए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस दवा के बाजार में सक्रिय रूप से उपलब्ध कराए जाने के बाद से रिकवरी रेट में वृद्धि होगी, जिससे राहत मिलेगी।
इससे पहले पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने बताया था कि उनके द्वारा बनाई गई कोरोना की विशेष दवा का प्रयोग हर आयु वर्ग के और हर एक स्टेज के मरीजों पर किया जा चुका है, जिनमें से लगभग सभी रोगियों में 7-8 दिन में कोरोना नेगेटिव पाया गया और कुछ ही रोगियों को ठीक होने में 12-14 दिन लगे। बता दें कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरिद्वार में ‘पतंजलि अनुसंधान संस्थान’ का उद्घाटन किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुला कर सभी पार्टियों की बातें सुनी और उसके बाद देश को आश्वस्त किया कि भारत की एक इंच ज़मीन पर भी चीन ने घुसपैठ नहीं किया है। इसके बाद से ही कॉन्ग्रेस सहित कई दलों के नेताओं और लिबरल गिरोह के पत्रकारों ने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी अपनी ही सरकार के स्टैंड को काट रहे हैं और सेना व सरकार में सामंजस्य नहीं है।
अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है और दुष्प्रचार फैलाने वालों को मुँहतोड़ जवाब दिया है। स्पष्टीकरण के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ़ कर दिया है कि ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC)’ के साथ छेड़छाड़ करने की किसी भी प्रकार की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बकौल पीएम मोदी, पहले इस तरह की छेड़छाड़ पर सरकारें इसे नज़रअंदाज़ कर देती थीं लेकिन अब सेना के जवाब ऐसा करने वालों को रोकते-टोकते हैं।
सभी पार्टियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सूचित किया गया कि इस बार चीन ने सीमा पर एक बड़े सैन्य बल के साथ अपने इरादों को अंजाम देने आए थे लेकिन भारतीय सेना ने उसके अनुरूप ही उचित जवाब दिया। जहाँ तक 15 जून को गलवान में हुई हिंसा की बात है, वो चीनियों द्वारा LAC के पास कंस्ट्रक्शन करने से पैदा हुआ। रोकने के बावजूद वो अपने मंसूबों को आगे बढ़ाते रहे, जिसके बाद संघर्ष हुआ। पीएमओ के अनुसार:
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सर्वदलीय बैठक को सम्बोधित करते हुए जो बातें कही गईं, वो गलवान में 15 जून को हुई हिंसा के सम्बन्ध में थीं। प्रधानमंत्री ने वीरगति को प्राप्त उन 20 भारतीय सेना के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी वीरता और बलिदान को प्रणाम किया, जिन्होंने चीनियों के मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया। 16 बिहार रेजिमेंट ने न सिर्फ़ चीनियों द्वारा सीमा पर कंस्ट्रक्शन करने के इरादे को नाकाम कर दिया बल्कि घुसपैठ की कोशिशों को भी विफल किया।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय की तरफ से जारी किया गया स्पष्टीकरण
पीएम मोदी ने कहा था कि जिन्होंने भारतीय सरजमीं में घुसने की कोशिश की, उन्हें भारत माता के वीर सपूतों ने करारा जवाब दिया। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि हमारे जवान हमारी सीमाओं की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पीएमओ ने कहा है कि भारतीय क्षेत्र की क्या परिभाषा है, ये आधिकारिक नक़्शे से तय होता है। पिछले 60 साल में किस तरह से देश की 43,000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन के कब्जे में चली गई, इस बारे में भी सभी दलों को बताया गया।
पीएमओ ने कहा कि ऐसे समय में जब हमारे जवान सीमा पर हमारी सुरक्षा करते हुए खड़े हैं, पीएम मोदी के बयान को लेकर इस तरह का दुष्प्रचार फैलाया जाना उनके आत्मविश्वास को डिगाने वाली दुर्भाग्यपूर्ण हरकत है। हालाँकि, कहा गया है कि सर्वदलीय बैठक में सरकार और सेना को सभी दलों का समर्थन मिला। सरकार LAC की स्थिति में किसी प्रकार का अपरिवर्तन नहीं होने देगी, इस सम्बन्ध में आश्वस्त किया गया।
फिल्म डायरेक्टर अभिनव कश्यप ने सलमान खान की चैरिटी करने करने वाली संस्था ‘बीइंग ह्यूमन’ (Being Human) को लेकर बड़े आरोप लगाए हैं। अभिनव ने दावा किया है कि सलमान का बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन एक ‘मनी-लॉन्ड्रिंग‘ हब है। इसे सलमान खान की इमेज सुधारने के लिए बनाया गया था।
सलमान खान की फिल्म दबंग का अभिनव निर्देशन कर चुके हैं। पिछले दिनों सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद भी उन्होंने सलमान खान और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
अभिनव कश्यप ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को सलमान खान के ‘बींइग ह्यूमन’ फाउंडेशन को लेकर फेसबुक पोस्ट में लिखा, “जनाब सलीम खान का सबसे बड़ा आइडिया है बींइग ह्यूमन। बींइग ह्यूमन की चैरिटी महज एक दिखावा है। दबंग की शूटिंग के दौरान मेरी आँखों के सामने पाँच साइकिल बँटती थी, अगले दिन अखबारों में छपता था कि दानवीर सलमान खान ने 500 साइकिलें गरीबों में बाँटीं।”
वे आगे लिखते हैं, “सारी कोशिश सलमान खान की गुंडे, मवाली वाली छवि सुधारने की थी ताकि इनके तमाम क्रिमिनल कोर्ट केस में मीडिया और जज इन पर थोड़ी रियायत बरतें। Being human आज 500 रुपए की जीन्स 5000 में बेचता है और पता नहीं किन-किन तरीकों से चैरिटी के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग चल रही है। सीधी-सादी जनता की आँखों में धूल झोंककर उनसे नोट बटोर रहे हैं ये धूर्त लोग। इनकी मंशा किसी को कुछ देने की नहीं, सिर्फ लेने की है। सरकार को चाहिए कि Being human की भी गहरी जाँच हो। मैं सरकार का पूरा सहयोग करूँगा।”
एक अन्य पोस्ट में अभिनव कश्यप लिखते हैं, “अजीब खानदान है। बाप से सवाल पूछो, तो औलादें तिलमिला जाती हैं और औलादों से पूछो तो बाप उनका बचाव करने लगते हैं। ये तो muslim brotherhood से भी आगे निकल गए, फिर अपने आप को secular बताते हैं। जिससे पूछा जाए वो जवाब क्यों नहीं देता? छिप कर क्यों बैठे हैं सलमान खान? ‘प्यार करो ना’ जैसे बेसुरे, बेहूदा गाने बना सकते हैं। मेरे सीधे सवालों का जवाब नहीं दे सकते। भला होता कि ये खानदान भी कह देता… BoycottSalimKhan#BoycottSalmanKhan बाकी अरबाज़ और सोहेल खान को तो उनकी औलाद भी नहीं पूछती।”
आगे उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा, “मैने सलीम खान का नाम क्या ले लिया पूरा परिवार दर्द से कराहने लगा। अपने चमचों की फौज छोड़ दी है मुझे गाली देने के लिए। इनके फेसबुक लड़ाकों की भाषा से ही आपको ज्ञात हो जाएगा कि ये किन इस्लामी मुल्कों और किस समुदाय के लोग हैं… क्यों भाई? सलीम खान कोई बहुत बड़े रसूल, पैगम्बर या पीर हैं क्या? उनके काले कारनामे भी किसी से छिपे नहीं हैं। पूरा खानदान ही जिहादी मानसिकता से लैस है। क्या उन्होंने श्रीमती सुशीला चरक का धर्म परिवर्तन कर उन्हें सलमा खान नहीं बना दिया…? मैं मानता हूँ ये लव जिहाद है और हर मंच से बोलूँगा। आगे और भी बहुत लिखता रहूँगा… मेरा मुँह बंद करके दिखाए सलमान खान।”
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद अभिनव कश्यप ने यशराज फिल्म्स और सलमान खान के परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने अपने पोस्ट में यह दावा किया कि सलमान खान और उनके परिवार ने अभिनव के फिल्मी करियर को बर्बाद करने की काफी कोशिश की।
उन्होंने सरकार से सुशांत सिंह की आत्महत्या मामले में विस्तृत जाँच की माँग की थी। उन्होंने ‘यशराज फिलम्स’ पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उसकी टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी ने सुशांत को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया होगा, ये जाँच का विषय है। उन्होंने कहा कि ये लोग करियर बनाते नहीं हैं बल्कि करियर और ज़िंदगी, दोनों ही बिगाड़ते हैं। उल्लेखनीय है कि एक्ट्रेस जिया खान की माँ राबिया अमीन ने भी सलमान खान के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा था कि वो पुलिस को फोन कर पैसे की बात कर प्रेशर बनाते थे।
चीन के साथ हालिया तनाव के बीच देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मॉंग जोर पकड़ती जा रही है। लेकिन, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है चीन के सामान का बहिष्कार करने से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा।
So boycotting Chinese goods will not hurt the China’s economy. We should not bring issues like boycott when we are discussing very grave matters like the defence of India: Congress leader P Chidambaram (2/2) https://t.co/S1kVyP269J
शनिवार (20 जून, 2020) को चिदंबरम ने कहा कि हमें जितना संभव हो सके उतना आत्मनिर्भर बनना चाहिए, लेकिन हम बाकी दुनिया से अलग नहीं हो सकते। भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जारी रखनी चाहिए और चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं करना चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि चीनी सामानों का बहिष्कार करने से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा। जब हम भारत की रक्षा जैसे बहुत गंभीर मामलों पर चर्चा कर रहे हैं, तो हमें बहिष्कार जैसे मुद्दों को बीच में नहीं लाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि नोएडा में करीब 20 हजार MSME ने निर्माण प्रक्रिया में चीनी उत्पादों और उपकरणों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसी तरह कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने भी चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों गलवान में चीनी सैनिकों के धोखे से किए गए हमले में 20 सैनिक बलिदान हो गए थे। हालॉंकि भारतीय सैनिकों ने इसका मुॅंहतोड़ जवाब दिया था और चीन के 43 सैनिकों के मरने की खबर भी है। इस घटना को लेकर भी कई कॉन्ग्रेस नेता अनर्गल प्रलाप अलाप चुके हैं।
कारगिल से कॉन्ग्रेस पार्षद जाकिर हुसैन ने तो इस घटना का हवाला देकर सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसका ऑडियो वायरल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
उससे पहले कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद रह चुके हुसैन दलवई ने कहा था कि इस घटना में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा है। भारतीय सेना को अपमानित करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें वहाँ लाठी लेकर क्यों भेजा गया, क्या वहाँ आरएसएस की कोई शाखा थी? महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता दलवई ने कहा कि भारत-चीन के बीच हुई झड़प में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा, सिर्फ हमारे जवान मारे गए हैं।
उन्होंने कहा, “हमने जवानों को लाठियाँ देकर क्यों बॉर्डर पर भेजा, क्या वहाँ RSS की शाखा थी? ऐसा है तो सैनिकों को क्यों आरएसएस के लोगों को ही बॉर्डर पर भेजो। वे सीमा पर पहरा देंगे।”
इतना ही नहीं राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) के आधिकारिक ‘कलैगनार टीवी’ (Kalaignar TV) पर प्रसारित एक शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वरवणई सेंथिल (Varavanai Senthil) नाम के होस्ट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पर गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए चीनी आक्रामण का बचाव करते देखा जा सकता है।
वीडियो में टीवी एंकर सेंथिल को चीन का समर्थन करते हुए करते हुए सुना जा सकता है कि भारतीयों के खिलाफ पीएलए सैनिकों द्वारा किया गया हमला मोदी सरकार की कुछ नीतियों की प्रतिक्रिया थी, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करना।
तिब्बत की निर्वासित सरकार के पीएम लोबसंग सांगेय ने कहा कि गलवान वैली पर चीन का अधिकार नहीं है। अगर चीनी सरकार ऐसा दावा कर रही है तो ये गलत है, क्योंकि गलवान नाम ही लद्दाख का दिया हुआ है, फिर ऐसे दावों का कोई मतलब नहीं रह जाता है।
पीएम लोबसंग सांगेय ने कहा कि अहिंसा भारत की परंपरा है और यहाँ इसका पालन होता है। वहीं, चीन अहिंसा की बातें तो करता है, लेकिन पालन नहीं करता। वो हिंसा का पालन करता है। इसका सबूत तिब्बत है। चीन ने हिंसा के दम पर ही तिब्बत पर कब्जा किया है।
इस विवाद से निपटने को लेकर सांगेय ने कहा कि तिब्बत को जोन ऑफ पीस बनाना होगा। दोनों सीमाएँ आर्मी फ्री होनी चाहिए, तभी शांति होगी। भारत और चीन के बीच तिब्बत है और जब तक तिब्बत का मुद्दा हल नहीं होता, तब तक तनाव की स्थिति बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि चीन एशिया में नंबर-1 बनना चाहता है। एशिया में उसका मुकाबला भारत, इंडोनेशिया और जापान से है, इसलिए वो लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नेपाल और भूटान पर कब्जा करना चाहता है। पहले उसने डोकलाम में नापाक हरकत की, अब लद्दाख में अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं। उधर, नेपाल से भी भारत के रिश्ते थोड़े बिगड़ गए हैं।
पीएम सांगेय ने कहा कि आर्थिक मोर्चो पर चीन को सबक सिखाया जा सकता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक रुचि में से आपको चुनना है। राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे ऊपर है। पीएम मोदी ने कुछ करार रद्द करके चीन को संदेश दे दिया है। सांगेय ने कहा कि भारत-चीन के बीच जो व्यापार चल रहा है, उससे चीन को डबल, ट्रिपल फायदा हो रहा है। ऐसे में व्यापार पर नियंत्रण से असर होना स्वाभाविक है।
गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी के पास हिंसक झड़प में चीन के 43 सैनिकों के हताहत होने की बात मीडिया में सामने आई है। वहीं, भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों को वीरगति प्राप्त हुई।
चीन के साथ हालिया तनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को सर्वदलीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने सबको आश्वस्त किया कि हमारी एक इंच जमीन भी कोई नहीं ले सकता। हमारे किसी पोस्ट पर दूसरे देश का कब्जा नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “चीन ने ना तो हमारी सीमा में घुसपैठ की है, ना ही किसी पोस्ट को कब्जे में लिया है। हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता को आँख दिखाई उन्हें सबक सिखा दिया।”