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‘तुम्हारी बेटी मेरे पास है, ज्यादा हाथ-पाँव मत मारो, जान से मार देंगे’: RJD नेता शकील अख्तर ने नाबालिग को अगवा किया, धमकाया

झारखंड के लोहरदगा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राजद जिलाध्यक्ष शकील अख्तर के खिलाफ एक नाबालिग लड़की को अगवा करने का मामला दर्ज किया गया है। उस पर पीड़ित परिवार को धमकाने का भी आरोप है।

शकील को इसी साल जनवरी में लोहरदगा जिले की कमान मिली थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पीड़िता की माँ की शिकायत पर शकील पर भादवि धारा 366ए, 363 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

घटना सेन्हा थाना क्षेत्र के झखरा गाँव की है। शकील अख्तर 16 जून को गाँव की एक नाबालिग को अगवा कर फरार हो गया। साथ ही उसने पीड़िता की के माँ- बाप को फ़ोन कर धमकी भी दी।

नाबालिग की मॉं के अनुसार 16 जून की सुबह वह और उनकी बेटी सोकर उठी। वह रसोई में काम करने लगी। कुछ देर बाद बेटी नहीं मिली। घर और आसपास खोजबीन करने पर भी उसका पता नहीं चला। उसी दिन शाम के करीब 5:30 बजे शकील अख्तर ने उनके मोबाइल पर फोन कर कहा कि ज्यादा चिंता एवं खोजबीन करने की जरूरत नहीं है। तुम्हारी बेटी मेरे पास है। ज्यादा हाथ-पॉंव मत मारो नहीं तो तुम्हारी बेटी और तुम लोगों को जान से मार देंगे।

इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी और अपहरण का मामला दर्ज कराया। उन्होंने शकील अख्तर पर गलत नीयत से अपनी बेटी के अपहरण का आरोप लगाया है। साथ ही उसके साथ अनहोनी की आशंका जताई है।

इस संबंध में राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह ने प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। एफआईआर की कॉपी देखने के बाद ही वे कुछ कह पाएँगे।

गौरतलब है कि हाल ही में झारखंड के लातेहार से गैंगरेप का मामला सामने आया था। तीन युवतियों को रास्ते से अगवा करने उनके साथ दुष्कर्म किया गया था। पिछले महीने राज्य के साहिबगंज जिले में बगीचे में गई एक नाबालिग के साथ इदगार शेख, शाहनवाज शेख और एकरामुल शेख ने रेप किया था। मामला दो समुदाय से जुड़ा होने के कारण इलाके में तनाव पैदा हो गया था।

क्या 1 दिन पहले बंद हो गई थी सुशांत के बिल्डिंग की CCTV? महेश भट्ट और रेहा की तस्वीरें वायरल, उठे कई सवाल

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद तरह-तरह की कई ख़बरें आ रही हैं, जिससे इसके पीछे का सस्पेंस गहराता जा रहा है और उनके फैंस सच जानने के लिए बेचैन हो उठे हैं। मुंबई पुलिस उनसे जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है, जिससे कई राज़ निकल कर सामने आ रहे हैं। उनकी मनोचिकित्सक केसरी चावड़ा ने पुलिस को बताया कि वो ‘पवित्र रिश्ता’ सीरियल में उनकी अभिनेत्री रहीं अंकिता लोखंडे से ब्रेक-अप के बाद से ही बेचैन रहने लगे थे। वो रेहा से भी नाराज़ थे।

इसके बाद एक-एक कर सुशांत के कई रिश्ते नहीं चल पाए, जिससे उन्हें इस बात का एहसास होता रहा कि उन्हें किसी भी लड़की ने उस तरह से प्यार नहीं किया, जैसे अंकिता किया करती थी। वो रातों को सो नहीं पाते थे और अवसाद से ग्रस्त रहा करते थे। उनकी मनोचिकित्सक ने बताया कि वो रात भर अपनी दिमागी हालत के बारे में सोचा करते थे और अजीब-अजीब से ख्याल उनके दिमाग में आते थे।

सुशांत सिंह राजपूत के बारे में ये भी पता चला है कि वो ‘राब्ता’ में सह-अभिनेत्री रहीं कृति सेनन के साथ रिलेशनशिप में थे और एक फिल्म निर्देशक की बेटी के साथ भी उनका रिश्ता भी कुछ खास नहीं चला और अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगी। मनोचिकित्सक के बयान से तो इतना तक पता चला है कि वो अपनी वर्तमान गर्लफ्रेंड रेहा चक्रवर्ती के व्यवहार से भी ख़ुश नहीं थे। बता दें कि 2016 में अंकिता से ब्रेकअप से पहले सुशांत 6 साल तक साथ थे।

दोनों के बीच ब्रेअकप के बाद चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सुशांत ने सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दिया था कि न तो अंकिता शराबी थी और न ही वो लड़कीबाज थे। उन्होंने कहा था कि लोग अलग होते हैं और इसी तरह वो लोग भी अलग रास्तों पर निकले। इधर उनके फैंस महेश भट्ट से जवाब माँग रहे हैं क्योंकि महेश भट्ट ने बयान दिया था कि उन्होंने ही सुशांत के व्यवहार को देखते हुए रेहा को सुशांत से अलग होने की सलाह दी थी।

महेश भट्ट और रेहा की कई तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें दोनों काफ़ी क़रीब दिख रहे हैं। इसके बाद से ही लोगों ने भट्ट से कई सवाल दागे हैं। कई लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक दिन पहले सुशांत सिंह राजपूत की इमारत के सारे सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए थे। साथ ही रेहा पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने सुशांत के साथ अपनी सारी फोटोज को इंस्टाग्राम से डिलीट कर लिया था।

हालाँकि, इस सम्बन्ध में अभी तक पुलिस की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। लोग सोशल मीडिया पर ऐसी बातें कर रहे हैं। इधर सुशांत सिंह राजपूत के दोस्त और प्रोड्यूसर संदीप सिंह ने भी अंकिता लोखंडे को इंस्टाग्राम के माध्यम से सम्बोधित कर कहा है कि वो सुशांत से सच्चा प्यार करती थी, वो चाहती तो उन्हें रोक सकती थी। उन्होंने कहा कि हमलोग अगर प्रयास करते तो शायद उन्हें ऐसा करने से रोक सकते थे।

उन्होंने कहा कि अंकिता ने अलग होने के बाद भी सुशांत की ख़ुशी और सफलता की ही कामना की, उसका प्यार पवित्र था। उन्होंने खुलासा किया कि अंकिता ने अब तक अपने घर के नेमप्लेट से सुशांत का नाम नहीं हटाया है। उन्होंने अंकिता और सुशांत के साथ बिताए अपने समय को याद करते हुए कहा कि साथ खाना बनाने से लेकर गोवा होली खेलने तक, कई यादें आज उन्हें रुला रही हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता और सुशांत को शादी करनी चाहिए थी।

संदीप ने लिखा कि अंकिता तुम सुशांत की गर्लफ्रेंड, पत्नी, दोस्त और माँ- सभी कुछ थी। उन्होंने कहा कि वो अंकिता की तरह शायद ही ऐसे किसी दोस्त को खो पाएँ क्योंकि उनसे ये नहीं हो पाएगा। संदीप ने लिखा कि सुशांत और अंकिता एक-दूसरे के लिए ही बने हुए थे। उन्होंने कहा कि वो पुराने दिन वापस चाहते थे। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद कई सेलेब्रिटीज ने बॉलीवुड में नेपोटिज्म के खिलाफ आवाज उठाई है।

अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी वीडियो के माध्यम से कई खुलासे किए थे। उन्होंने बताया था कि किस तरह सुशांत को प्रताड़ित किया गया था। निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप ने बताया था कि कई मजबूर कलाकारों को एस्कॉर्ट सर्विस या फिर वेश्यावृत्ति के धंधों की ओर रुख करना पड़ता है। बकौल अभिनव सिंह कश्यप, बॉलीवुड में कई पुरुष एस्कॉर्ट्स भी हैं, जिनका इस्तेमाल अमीर और प्रभावशाली हस्तियों के अभिमान और यौन भूख मिटाने के लिए किया जाता है।

दिसंबर से शुरू हो गई थी प्लानिंग, 4 स्टेज में अंजाम दिए गए दिल्ली के दंगे: SC वकील मोनिका अरोड़ा की ऑपइंडिया से बातचीत

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में इस साल फरवरी में हुए दंगों के सिलसिले में पुलिस पिछले कुछ दिनों से चार्जशीट दाखिल कर रही है। अलग-अलग मामलों में जब से चार्जशीट दाखिल करने का सिलसिला शुरू हुआ है, तभी से पुलिस और प्रशासन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। एक विशेष वर्ग द्वारा आरोपितों को छात्र बताकर, प्रेगनेंसी का हवाला देकर एक अलग नैरेटिव गढ़ी जा रही है कि ‘मासूमों’ को फँसाया जा रहा है, क्योंकि वो ख़ास मजहब से हैं। जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है।

इस मुद्दे पर पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए हमने ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल एंड एकेडेमिक्स (GIA) की कन्वीनर और सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा के साथ बातचीत की।

हमने उनसे दंगों को लेकर किस तरह की प्लानिंग की गई थी और किस तरह से इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया गया, इस पर विस्तार से प्रकाश डालने के लिए कहा। मोनिका अरोड़ा ने बताया कि दंगे तो 24 और 25 फरवरी को हुए थे, लेकिन इसकी योजना दिसंबर से ही बननी शुरू हो गई थी। ये एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2019 में जब CAA आया और कहा गया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांगलादेश से प्रताड़ित होकर भारत आए हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी, तभी से साजिशें शुरू हो गई थी।

उन्होंने कहा कि इस एक्ट में समुदाय विशेष के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया था, मगर फिर भी फर्जी जानकारी फैलाई गई और इसके तहत हेट स्पीच दिए जाने लगे। कॉन्ग्रेस ने दिल्ली की रैली में लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए उकसाया। सोनिया गाँधी ने कहा, “ये आर-पार की लड़ाई है। सड़क पर आ जाओ, जेलें भर दो, ये आखिरी मौका है।” राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने भी यही बातें कहीं।

इसके बाद उमर खालिद ने लोगों से कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने पर वे सड़कों पर आएँ और इंटनेशनल मीडिया को दिखा दें कि वो भारत में प्रताड़ित हैं, सुरक्षित नहीं हैं।

फिर जामिया मिलिया इस्लामिया में AAP नेता अमानतुल्लाह खान की हेट स्पीच सामने आई। उन्होंने कहा, “ट्रिपल तलाक तो मोदी ने समाप्त कर दिए, दाढ़ी, टोपी और अजान भी समाप्त कर देंगे। सड़कों पर आ जाओ।” उसके बाद शरजील इमाम का देश को परमानेंटली काटने का बयान आता है और कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर तो पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को कातिल ही बोल देते हैं।

मोनिका अरोड़ा ने बताया कि बड़े-बड़े नेताओं द्वारा दिसंबर से फरवरी तक परोसे गए नफरत का परिणाम ये दंगा था। साथ ही उन्होंने शाहीनबाग और छोटे छोटे बच्चों द्वारा भड़काऊ नारेबाजी करने की तरफ भी इशारा किया।

ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती के साथ मोनिका अरोड़ा की विस्तृत बातचीत

जब हमने मोनिका अरोड़ा से उनकी रिपोर्ट ‘धरने से दंगे तक का मॉडल’ के बारे में जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि ये मॉडल चार स्टेज में हुए। उन्होंने पहले स्टेज के बारे में बताया कि 11 दिसंबर को CAA पारित होने के बाद हर जगह हेट स्पीच दिए जाने लगे। यूनिवर्सिटी के बच्चे-शिक्षक बाहरी लोगों के साथ मिलकर पेट्रोल बम फेंकने लगे, आगजनी करने लगे। पुलिस के साथ मारपीट करने लगे और फिर सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट में जाकर कहते हैं कि हमें पुलिस मार रही है, बचा लो। तो सुप्रीम कोर्ट कहता है कि पहले हिंसा रोको, फिर कार्रवाई करेंगे।

फिर उन्होंने सेकेंड स्टेज के बारे में बताते हुए कहा कि इनका मॉडल था कि किसी मुख्य सड़क के एरिया को घेर लो। वह जगह ऐसी होनी चाहिए, जहाँ पर दोनों मजहब वाले बराबर संख्या में हों। वहाँ पर टेंट लगा दो। स्टेज पर माइक लगा दो। पीछे एक संविधान रख दो और साथ में एक तिरंगा। लेकिन इनका हाथ में तिरंगा और दिल में दंगा सबके सामने आ गया। उन्होंने बताया कि किस तरह से वहाँ पर मोदी विरोधी, शाह विरोधी, भारत विरोधी, हिंदू विरोधी भाषण दिए गए। माँ काली को बुर्का पहनाया गया, स्वास्तिक को झाड़ू से तोड़ते हुए दिखाया गया। इससे उनका जिहादी विचारधारा साफ दिख रहा था।

उन्होंने कहा कि शाहीनबाग में PFI का पैसा आया। सुबह से शाम तक बिरयानी बाँटा गया। वो कहती हैं, “मेरे एक Law Intern ने मुझे बताया कि वो 8 घंटे तक वहाँ रहा, बिरयानी खाया और 500 रुपए मिले, वो लेकर चला आया।” प्रदर्शनकारियों ने ऐसा माहौल बनाया कि पुलिस उन पर लाठीचार्ज करे, ताकि नेशनल न्यूज बने, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। पुलिस ने संयम बरता।

फिर इनका तीसरा स्टेज शुरू होता है। इन लोगों ने मार्केट में, एरिया में जुलूस में आना शुरू किया। हजारों की संख्या में महिलाएँ बुर्के में शिव मंदिर के सामने ‘आजादी’ के नारे लगाए। पुलिस भी जख्मी हुए। मगर महिला होने की वजह से पुलिस इनका कुछ कर भी नहीं सकते। महिलाओं और बच्चों को आगे करके पुरुष अपनी साजिश को अंजाम दे रहे थे।

उन्होंने बताया कि चौथे चरण के तहत 22 फरवरी 2020 को सफूरा रात के 1:30 बजे समुदाय विशेष की महिलाओं को लेकर आई और जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 को ब्लॉक कर दिया। इसके बाद सुबह 6 बजे जाफराबाद सड़क को जाम कर दिया। इनकी दूसरी टीम ने चाँदबाग में सड़क को जाम किया। सफूरा, नताशा, देवांगना आदि ने महिलाओं को फ्रंटलाइन में ढाल की तरह इस्तेमाल किया। ताकि पुलिस महिलाओं पर हमला नहीं करेगी और पीछे वे अपने मंसूबों को अंजाम देने में कामयाब हो जाएँगे।

24 फरवरी को यही महिलाएँ मौजपुर चौक पर हजारों की संख्या में बैठी हुई थी। तभी महिलाओं ने डीसीपी अमित शर्मा को बुलाया कि आइए बात करते हैं। उन्होंने सोचा कि महिलाएँ हैं और बातचीत से मसला हल हो जाएगा। मगर जैसे ही वो वहाँ पर पहुँचे महिलाओं ने बुर्के में से चाकू, छूरी, रॉड, डंडों आदि से उन पर हमला कर दिया। एक ने उनका हेलमेट निकाल दिया। बाकी ने उनके सिर पर मारा। जिहादी भीड़ उन पर टूट पड़ी। जब अन्य पुलिस वालों ने किसी तरह से उन्हें छुड़ाकर पास वाले नर्सिंग होम में एडमिट करवाया तो जिहादी भीड़ ने उस हॉस्पिटल को ही जला दिया। इसके बाद उन्हें वहाँ से निकाल कर किसी दूसरे हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराया गया।

मोनिका अरोड़ा ने बताया कि AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन ने किस तरह से प्लानिंग की थी और दंगे के एक दिन पहले खजूरी खास थाने से अपना पिस्टल रिलीज करवाया था। घर के सीसीटीवी कैमरा को बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने शिव विहार में फैयाज के राजधानी स्कूल से हिंदू के स्कूल को निशाना बनाया गया। स्कूलों को लूटा गया, फिर उसे जला दिया गया। आईबी के अंकित शर्मा की नृशंस हत्या की गई, दिलबर नेगी को काटकर जला दिया गया। विवेक के सिर में ड्रिल कर दिया गया।

उन्होंने हिंसा की क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा कि 19 दिसंबर को सीलमपुर के 7 मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया जाता है। 40,000 जिहादियों की भीड़ इकट्ठा होती है। 13 जनवरी को 4000 की संख्या में जुलूस मालवीय नगर की तरफ आजादी के नारे लगाती निकलती है। 15 जनवरी को हर जगह धरने शुरू हो जाते हैं। 22 फरवरी को महिलाओं को बुलाकर जाम कर दिया जाता है। फिर 23 फरवरी को 3:30 बजे स्थानीय लोग इकट्ठा होते हैं और प्रदर्शनकारियों के हटने के लिए कहते हैं। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी पुलिस से कहा तो उन्होंने कहा कि अभी ट्रंप हैं, दो दिन में हटा देंगे। जिसके बाद उन्होंने कहा कि हाँ, उसके बाद तो हम आपकी भी नहीं सुनेंगे।

इसके बाद इस बात को हवा दी जाने लगी कि कपिल मिश्रा ने दंगा भड़काया, मगर इससे पहले ही जगह-जगह पर भीड़ इकट्ठी हुई। दिसंबर में NIA को ISIS मॉड्यूल मिले। 23 फरवरी की शाम से ही पत्थरबाजी शुरू हो जाती है। 24 फरवरी की सुबह दुकानें जला दी जाती है। डीसीपी अमित शर्मा को अधमरा कर दिया जाता है। हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या कर दी जाती है।

मोनिका अरोड़ा ने सफूरा के प्रेगनेंट और माँ बनने की बात कहने वालों पर निशाना साधते हुए प्रीति गर्ग की याद दिलाई, जिन्होंने अपने 9 साल और 11 साल के बच्चों को बचाने के लिए छत के ऊपर से नीचे फेंक दिया था। पड़ोसी ने उसे पकड़ लिया, बच्चा बच गया। वो कहती हैं कि क्या वो माँ नहीं है, क्या वो बच्चे नहीं हैं?

इसके बाद उन्होंने व्हाट्सएप मैसेज की भी बात की, जिससे दंगे की साजिश रची गई थी और बताया गया था कि इस दौरान उन्हें क्या करना चाहिए। उन्होंने जय भीम-जय मीम का नारा लगाया। स्क्रिप्ट पहले से ही तैयार थी कि किसका कौन सा रोल होगा। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल किए गए चार्जशीट पर भी बात की।

अंत में मोनिका अरोड़ा कहती हैं, “मुझे आशा नहीं विश्वास है धरने से दंगे तक का ये मॉडल आखिरी एक्सपेरिमेंट होगा। ऐसा कोई भी शाहीनबाग 2, कोई भी खिलाफत 2, कोई भी जिन्ना वाली आज़ादी के नारे नहीं लगा पाएगा और कोई भी यहाँ ऐसी साजिशें नहीं कर पाएगा। फिर किसी प्रीति गर्ग को पहली मंजिल से अपने बच्चों को नहीं फेंकना पड़ेगा। फिर किसी विनोद कश्यप को सिर पर पत्थर मार-मारकर खत्म नहीं किया जाएगा। हम कोशिश करेंगे कि ऐसा हिंदुस्तान हमारे सामने आए। ये हमारी भी कोशिश है और आपकी भी। कम से कम हम सच्चाई को सामने तो रखें। सच्चाई तो 100 पर्दे फाड़कर सामने आ जाती है।”

सारे एयरबेस पर फाइटर जेट्स और हैलिकॉप्टरों की तैनाती: चीन की गुपचुप तैयारी के बाद सक्रिय हुई भारतीय वायुसेना

लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत अब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बढ़ा रहा है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक ख़बर के अनुसार, भारत ने अपने फॉरवर्ड बेसेज पर फाइटर जेट्स और हैलीकॉप्टर्स को आगे बढ़ाया है, तैनाती में तेज़ी लाई है। ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल’ की सीमा 3488 किलोमीटर लम्बी है, जहाँ विभिन्न बिंदुओं पर भारत ने सेना और अस्त्रों की तैनाती की है।

साथ ही बंगाल की खाड़ी वाले इलाक़े में भी नौसेना के वॉरशिप्स की तैनाती की गई है। फॉरवर्ड बेसेज पर चिनूक हैवी-लिफ्ट हैलीकॉप्टर्स और अपाची हैलीकॉप्टर्स की तैनाती की गई है। आगे होने वाले किसी भी हमले और हिंसा की स्थिति को रोकने के लिए जिन हैलिकॉप्टरों को तैनात किया गया है, उसके साथ सेना के कई जवान भी गए हैं। ऊँचे इलाक़ों में होवित्जर को तैनात किया गया है। वायुसेना पूरी तरह तैयार है।

बता दें कि अपाची हैलीकॉप्टर्स एयर टू ग्राउंड वार कर के टैंकों को तबाह करने की क्षमता रखते हैं। वो मिसाइल्स का प्रयोग करके ऐसा करने में सक्षम हैं। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत ने सीमा पर हर वो व्यवस्था की है, जिससे किसी भी प्रकार के छोटे-बड़े हमलों और तनाव भड़काने की साजिशों को नाकाम किया जा सके। चीन के साथ लगने वाली उत्तरी सीमा पर सुखोई-30MKI, मिग-29 और जगुआर फाइटर्स को एयरबेसेज पर तैनात किया गया है।

लेह, श्रीनगर, अवन्तिपुर, बरेली, चबुआ, हासीमारा और तेजपुर के एयरबेसेज को एक्टिवेट किया गया है। सीमा पर ताज़ा परिस्थिति को देखते हुए पेट्रोलिंग भी तेज़ कर दी गई है। लद्दाख और चंडीगढ़ के बीच एक एयर ब्रिज भी बनाया गया है। इसके लिए C-17 ग्लोबमास्टर III और AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स की मदद ली गई। C-130J की मदद से भी सैनिकों और अस्त्र-शस्त्रों को फॉरवर्ड बेसेज तक पहुँचाया गया। हालाँकि, अपनी तरफ चीन ने भी तैनाती में कोई कमी नहीं की है और पैंगोंग झील से लेकर तिब्बत के अन्य सीमावर्ती इलाक़ों तक हथियारों की तैनाती की है।

भारत और चीन के बीच ताज़ा विवाद पैंगोंग झील में भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ के बाद शुरू हुआ था। भारत ने LAC के पास चीन द्वारा भारी हथियारों की तैनाती और सेना की सक्रियता पर आपत्ति जताई थी। बाद में चीनी सैनिकों ने लाठी-डंडे, लोहे के रॉड्स और कीलों द्वारा धोखे से हमला कर के एक कर्नल सहित 20 भारतीय सैनिकों को मार डाला। चीन के भी 43 जवानों के मारे जाने की सूचना है, जिससे उसने सार्वजनिक नहीं किया है।

हाल ही सर्वदलीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सबको आश्वस्त किया कि हमारी एक इंच जमीन भी कोई नहीं ले सकता। हमारे किसी पोस्‍ट पर दूसरे देश का कब्‍जा नहीं है। उन्होंने कहा, “चीन ने ना तो हमारी सीमा में घुसपैठ की है, ना ही किसी पोस्ट को कब्जे में लिया है। हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता को आँख दिखाई उन्हें सबक सिखा दिया।”

भूलों का मसीहा नेहरू: अक्साई चीन, कोको द्वीप, काबू वैली… ‘दूरदर्शिता’ के नायाब नमूने

जब-जब चीन के साथ लद्दाख सीमा क्षेत्र में सीमा विवाद का मुद्दा गरमाएगा, तब-तब इस क्षेत्र को ‘बंजर’ बताकर अपनी वैश्विक छवि के लिए चीन की नीतियों को हल्के में लेने की महान भूल करने के लिए जिम्मेदार भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का ‘योगदान’ भी याद किया जाता रहेगा।

चीन के साथ लद्दाख क्षेत्र में लम्बे समय से चल रहे सीमा विवाद के बाद भारतीय नेतृत्व और चीन के प्रति इसके नजरिए को लेकर कई प्रकार की बातें सामने आई हैं। लेकिन कश्मीर के साथ ही अक्साई चीन क्षेत्र को हमेशा के लिए विवादित विषय बना देने वाले जवाहरलाल नेहरू के नजरिए और उनकी नीतियों के बारे में भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के वो अधिकारी, जो इस युद्ध का हिस्सा थे, अक्सर नेहरू की कमजोरियों को उजागर करते आए हैं।

वर्ष 2012 में चीन के साथ युद्ध के पचास साल पूरे हो चुके थे। इस अवसर पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एवाई टिपणीस ने चीन के हाथों पराजय के लिए जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि नेहरू ने अंतरराष्ट्रीय नेता बनने की अपनी महात्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए राष्ट्र के सुरक्षा हितों को त्याग दिया। टिपणीस 1960 में बतौर फाइटर पायलट नियुक्त हुए थे और वर्ष 1998 में वह वायुसेना प्रमुख बने।

इसके कुछ समय पहले ही भारतीय वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन ने भी कहा था कि चीन के साथ उस समय युद्ध में वायुसेना की आक्रामक भूमिका होती तो शायद नतीजा ही कुछ और होता।

‘भारत और चीन: 1962 के युद्ध के पाँच दशक बाद’ सेमिनार में बोलते हुए पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल टिपणिस ने कहा था कि उस युद्ध में भारत की अपमानजनक पराजय के लिए जवाहरलाल नेहरू की ग्लोबल लीडर बनने की महत्वाकांक्षा जिम्मेदार थी।

इस सम्मेलन में टिपणिस ने कहा था कि युद्ध के दौरान उनके समय में सेना प्रमुखों को नेहरू स्कूल के बच्चों की तरह बुरी तरह डाँट देते थे। उन्होंने खुलासा किया कि चीन के साथ लड़ाई में वायुसेना की भूमिका सिर्फ सेना की ट्रांसपोर्ट हेल्प तक सीमित थी। उसकी कोई आक्रामक भूमिका नहीं थी।

चीन को लेकर नेहरू का अंधसमर्पण

चीन को लेकर जवाहरलाल नेहरू के भीतर विचारधारा के स्तर पर अंधसमर्पण की स्थिति थी। नेहरू को तो वास्तव में अक्साई चीन में कभी दिलचस्पी भी नहीं थी। उन्होंने भरी संसद में इस क्षेत्र का वर्णन कुछ इस तरह किया था – “एक बंजर निर्जन क्षेत्र, जो 17,000 फ़ीट की ऊँचाई पर है और जहाँ घास का नामो-निशाँ तक नहीं है, ऐसा क्षेत्र जहाँ एक तिनका भी नहीं उगता..।”

यही नहीं, जवाहरलाल नेहरू ने यहाँ तक कह दिया था कि हमें तो यह भी पता नहीं कि इस क्षेत्र का कौनसा हिस्सा हमारा है और कौन सा उनका। जवाहरलाल नेहरू के इस कायराना बयानों की छाप संयुक्त राष्ट्र तक भी नजर आई। इसी बीच तिब्बत में चीन की सेना के प्रवेश को लेकर भी नेहरू के विचार उस सैनिक की तरह थे, जो बिना लड़ाई के ही कई युद्ध हार चुका। और उनके इसी कायराना रवैए की झलक चीन के साथ लड़े गए युद्ध में भी थी।

स्वतंत्र भारत की दूसरी लोकसभा में भारतीय जन संघ के सिर्फ़ चार सांसद थे, अटल बिहारी वाजपेयी उन चार सांसदों में से एक थे।

नेहरू का तिब्बत के पक्ष पर मौन और तिब्बत में चीनी आक्रमणकारियों की सेना के प्रवेश को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन के समर्थन की नीति का विरोध तब युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। वाजपेयी ने अगस्त, 1959 में भारतीय संसद में तिब्बत की मदद के बजाए आक्रमणकारियों के साथ खड़े होने वाली तत्कालीन नेहरू सरकार को कोसते हुए कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ में तिब्बतियों को उनके ही देश में अल्पसंख्यक बना देने वाले चीन को मान्यता दिलाने के लिए भारत एक हद से आगे जाकर उनके साथ खड़ा है।

कोको द्वीप – नेहरू की भूल का एक और नतीजा

जवाहरलाल नेहरू की रणनीतिक समझ की कमी और अंग्रेजों के साथ सख्ती से पेश आने की असमर्थता के कारण भारत ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बाद दक्षिण एशिया के सबसे प्रमुख रणनीतिक द्वीपों में से एक – कोको द्वीप समूह को खो दिया।

कोको द्वीप समूह, जो कोलकाता के 1255 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है, दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण द्वीपों में से एक है। कोको द्वीप, जो भूगर्भीय रूप से अराकान पर्वत या राखीन पर्वत का एक विस्तारित विभाजन है, बंगाल की खाड़ी में द्वीपों की एक श्रृंखला के रूप में लंबे भूभाग तक फैला हुआ है।

ये रणनीतिक द्वीप, अंडमान द्वीप के उत्तर में स्थित हैं। हालाँकि, कोको द्वीप अब म्यांमार का हिस्सा हैं, और इसका कारण इन द्वीपों के दावे को लेकर भारतीय नेतृत्व की असमर्थता और उदासीनता है।

1950 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत का यह कोको द्वीप समूह बर्मा (म्यांमार) को गिफ्ट दे दिया। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह द्वीप बाद में बर्मा द्वारा चीन को दे दिया गया, जहाँ से आज चीन भारत पर नजर रखता है।

काबू वैली

नेहरू की दूरदर्शिता का एक और उदाहरण काबू वैली भी है। मणिपुर में स्थित काबूवैली कभी भारत का हुआ करता था। 1954 में नेहरु ने इसे भी ‘मित्रता के तौर पर’ म्यांमार को दे दिया। काबूवैली के बारे में कहा जाता है कि अगर दुनिया में कश्मीर के बाद कोई जगह इतनी खूबसूरत है तो वह काबूवैली है। म्यांमार ने आज काबूवैली का कुछ हिस्सा चीन को दे रखा है जिसे कि चीन अपने सामरिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

संप्रभुता एकता और अखंडता : नेहरू बनाम 56 इंच

आज के समय में देश का वामपंथी मीडिया और सत्ता-विरोधी वर्ग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर 56 इंच जैसे तंज कसने का असफल प्रयास करता है। जबकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में कई ऐसे अपमानजनक पन्ने मौजूद हैं जो नेहरू की हिमालयी भूलों से भरे पड़े हैं फिर भी मीडिया ने उन्हें कभी भी महामानव से कम साबित करने का प्रयास नहीं किया। जिन गोदी इतिहासकारों ने लौह महिला का अर्थ ‘इंदिरा’ बता दिया था, उनकी कलम ‘हिमालयी भूल’ का अर्थ ‘जवाहरलाल नेहरू’ लिखते वक्त लड़खड़ा गई थी।

भारत के जनमानस के मन में हिमालय को लेकर भावनात्मक लगाव का सम्मान रख पाने में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने असमर्थता व्यक्त की थी, ना ही अपनी व्यक्तिगत छवि के सामने कभी उन्होंने इन विषयों को जरुरी माना। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को शान्ति का उपासक तो बताया ही, साथ ही यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि भारत अपनी संप्रभुत्ता के साथ किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप होने पर मुँहतोड़ जवाब दे पाने में सक्षम है। यही नहीं, भारत ने अब अपने सामरिक समाधान के विकल्प बाहरी देशों में तलाशने की नीतियाँ भी त्याग दी हैं।

निःसंदेह चीन के साथ यह सीमा विवाद अभी भी अंतहीन है, लेकिन भारत के पास कम से कम एक ऐसा नेतृत्व तो मौजूद है, जो अपनी भौगोलिक सीमाओं को बंजर नहीं कहता, जो विचारधारा के प्रभुत्व के लिए आक्रमणकारी और वर्चस्ववादियों के सामने घुटने टेक दे और महज विचारधारा के लिए तिब्बत के बजाए चीन के साथ खड़ा हो जाए।

नेहरू ने तो मानो अपने आदर्श पश्चिमी देशों से भी कुछ नहीं सीखा। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जब सोवियत संघ मित्र राष्ट्रों के साथ खड़ा हुआ, तब उसने विचारधारा की परवाह नहीं की थी और वह पूँजीवादियों के साथ नजर आया। बदले में पूँजीवादियों ने भी नरसंहारक कम्युनिस्ट स्टालिन से निःसंकोच मित्रता कर ली थी।

लेकिन नेहरू की मित्रता शायद ही अपनी निजी छवि और गौरव के अलावा किसी अन्य चीज से रह सकी हो। यदि ऐसा न होता तो भारत आज भी अपने पहले प्रधानमंत्री की भूलों के लिए अपने सैनिकों का बलिदान नहीं दे रहा होता और कॉन्ग्रेस इन सैनिकों के बलिदान में अपने सत्ता में लौटने का मार्ग नहीं तलाश रही होती।

चीन ने गलवान घाटी हथियाया, क्या जमीन तोहफे में देने के लिए जम्मू-कश्मीर से 370 हटाया: महबूबा मुफ्ती

भारत-चीन के हालिया तनाव के बहाने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने फिर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का मसला उठाया है। उन्होंने कहा है कि इसके कारण जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था। साथ ही आरोप लगाया है कि चीन को जमीन तोहफे में देने के लिए इसे हटाया गया।

महबूबा ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को हटाना “गैरकानूनी” था और यह स्थानीय लोगों के अधिकारों को छीनने के लिए किया गया था।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अनुच्छेद 370 को अवैध तरीके से खत्म किया गया ताकि यहॉं की जमीन ली जा सके और स्थानीय लोगों को अधिकारविहीन किया जा सके। आज चीन ने गलवान घाटी को हथिया लिया है और भारत की सरकार इसे स्वीकार भी नहीं कर रही है। क्या जम्मू कश्मीर को इसलिए अलग किया गया ताकि यहॉं की जमीन चीन को तोहफे के तौर पर दी जा सके।”

महबूबा मुफ्ती का यह बयान तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी आश्वस्त कर चुके हैं कि गलवान घाटी में हिंसक झड़प के दौरान हमने जमीन नहीं खोई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि हमारे किसी पोस्ट पर किसी का कब्जा नहीं है और सेना को खुली छूट दी गई है। उन्होंने कहा था कि भारत, शांति और मित्रता चाहता है। लेकिन अपनी संप्रभुत्ता की रक्षा उसके लिए सर्वोपरि है।

सर्वदलीय बैठक के दौरान शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “चीन ने ना तो हमारी सीमा में घुसपैठ की है, ना ही किसी पोस्ट को कब्जे में लिया है। हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता को आँख दिखाई उन्हें सबक सिखा दिया।”

पीएम ने बताया था, ”हाल में तैयार किए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर से एलएसी पर पेट्रोलिंग क्षमता बढ़ गई है। पहले जिन इलाकों की निगरानी नहीं होती थी। वहाँ भी अब हमारे जवान निगरानी और जवाब देने में सक्षम हैं। बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, सामानों और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति से दुर्गम इलाके पहले के मुकाबले आसान हो गए हैं।”

गौरतलब है कि पिछले साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था। साथ ही राज्य को दो भागों में विभाजित कर दिया था। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश हैं। महबूबा मुफ्ती राज्य की उन नेताओं में से एक हैं जिन्हें आर्टिकल 370 ह​टाए जाने के बाद सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था।

गलवान घाटी में चीन और भारत के बीच हिंसक झड़प

लद्दाख की गलवान घाटी में हाल ही में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और खूनी झड़प हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बता दें चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाइप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर रखी थी। इनका ही इस्तेमाल उन्होंने हिंसा के दौरान किया। वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया।

अली भाई के लिए हथियार लेकर आया था पाकिस्तानी ड्रोन, राइफल और ग्रेनेड बँधे थे: BSF ने मार गिराया

जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के जरिए आतंकियों तक हथियार पहुॅंचाने की पाकिस्तान की कोशिश को सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। पाकिस्तान ने भारतीय जवानों की रेकी और हथियारों की सप्लाई के लिए शनिवार (जून 20, 2020) सुबह एक ड्रोन भेजा था। बीएसएफ जवानों की मुस्तैदी के चलते इसे मार गिराया गया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शनिवार सुबह 5.10 बजे कठुआ के हीरानगर सेक्टर के ऊरक पाकिस्तानी ड्रोन उड़ता हुआ दिखाई दिया। जिसे सीमा पर मुस्तैदी से तैनात बीएसएफ के जवानों ने मार गिराया। ड्रोन में कुछ हथियार भी बँधे हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन के साथ एक राइफल, दो मैगजीन, 60 राउंड और सात ग्रेनेड बँधे हुए थे, जिन्‍हें जब्‍त कर लिया गया है।

बीएसएफ के महानिरीक्षक एनएस जमवाल ने कहा कि यह एक बड़ी कामयाबी है। पाकिस्तान पंजाब में जो कर रहा है, उसी तरह के तौर-तरीकों को यहाँ भी अपनाया है। छह कोप्टर ड्रोन का वजन लगभग 17.5 किलोग्राम था और खेप का वजन लगभग पाँच से छह किलोग्राम था।

उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से, यह इस तरफ किसी को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने का एक प्रयास था। वह कौन था, जाँच का विषय है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ड्रोन में एक चरखी जैसा यंत्र लगा था, जिसकी मदद से पूरी खेप को गिराकर उसे वापस पाकिस्तान जाना था।

बीएसएफ के महानिरीक्षक एनएस जमवाल के मुताबिक ड्रोन से बरामद हुआ हथियार किसी ‘अली भाई’ नाम के व्यक्ति को दिया जाना था, क्योंकि ड्रोन के अंदर से अली भाई के नाम की एक पर्ची भी हथियारों के साथ चिपकी हुई मिली है।

उन्होंने बताया कि बीएसएफ जवानों ने नौ गोलियाँ चलाई और ड्रोन को भारतीय क्षेत्र में 250 मीटर अंदर की ओर मार गिराया। बीएसएफ और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए हैं और मामले की छानबीन की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि जनवरी 2020 में नगरोटा टोल प्लाजा पर जैश-ए-मोहम्मद के मारे गए आतंकी के पास से भी ऐसे ही हथियार बरामद हुए थे।

₹50000 करोड़, 6 राज्य-116 जिले: PM मोदी ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान का फूँका बिगुल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (20 जून 2020) को 50 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली गरीब कल्याण रोजगार अभियान (Pradhanmantri Garib Kalyan Rojgar Yojana) की शुरुआत की। दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस अभियान को उन्होंने बिहार के खगड़िया जिले के तेलिहार गॉंव से हरी झंडी दिखाई।

इस अभियान का उद्देश्य कोरोना वायरस की महामारी से प्रभावित प्रवासी मजदूरों को उनके गाँव में ही रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें लाभ पहुँचाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों व अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान‘ लॉन्च इवेंट में भाग लिया। इस योजना के तहत प्रवासी मजदूरों के लिए 25 तरह के काम के विकल्प मुहैया कराए जाएँगे।

देशभर में लॉकडाउन के चलते कई प्रवासी श्रमिक अपने घर वापस लौट गए हैं और बेरोजगार हैं। ऐसे ही श्रमिकों को लाभान्वित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की है। यह योजना उन छह राज्यों पर केंद्रित रहेगी, जहाँ सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं।

इस योजना का शुभारम्भ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज जब मैं बिहार के लोगों से बात कर रहा हूँ तो मैं गौरव के साथ इस बात का ज़िक्र करना चाहूँगा कि बिहार रेजिमेंट ने पराक्रम दिखाया है हर बिहारी को इस पर गर्व है। जिन वीरों ने बलिदान दिया है उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।

इस कार्यक्रम के तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के 116 जिलों को कवर किया जाएगा। इन सभी जिले में लॉकडाउन के दौरान 25 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक वापस लौटे हैं। 50 हजार करोड़ रुपए के लागत वाले इस योजना के तहत रोजगार प्रदान करने और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए 25 विभिन्न प्रकार के कार्यों का गहन और केंद्रित कार्यान्वयन शामिल होगा।

इसके साथ ही यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों और विभागों- ग्रामीण विकास पंचायती राज, सड़क परिवहन और हाइवे, खनन, पेयजल व सैनिटेशन के जरिए सफल होगा।

पड़ोसियों से दुष्टता कर रही कम्युनिस्ट पार्टी, सीमा पर भड़का रही तनाव: चीन पर अमेरिकी विदेश मंत्री

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने चीन पर तीखा हमला किया है। उन्होंने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी को दुष्ट करार देते हुए कहा कि वह भारत के साथ सीमा पर तनाव भड़का रही है।

गलवान घाटी में बीते दिनों चीन के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक बलिदान हो गए थे। माइक पोंपियो (Mike Pompeo) ने इस इलाके पर चीन के दावे को भी अवैध बताया।

एक ऑनलाइन सम्मेलन के दौरान उन्होंने यह बात कही। पोंपियो ने कहा, “पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) ने विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले लोकतंत्र भारत के साथ सीमा तनाव बढ़ा दिया है। वह दक्षिण चीन सागर का सैन्यीकरण कर रहा है और अवैध रूप से दावा कर रहा है।”

अमेरिकी विदेश मंत्री पोंपियो ने कहा कि चीन की सीसीपी ‘नाटो’ (NATO) जैसे संस्थानों के जरिए दुनिया में बरकरार आजादी और उससे होने वाली तरक्की को खत्म करना चाहती है। वह सिर्फ चीन को फायदा पहुँचाने वाले नियम-कायदे अपनाना चाहती है। 

उन्‍होंने कहा, “कम्‍युनिस्‍ट पार्टी न केवल अपने पड़ोसियों के साथ दुष्‍टता कर रही है, बल्कि उसने कोरोना वायरस के बारे में दुनिया से झूठ बोला और इसे पूरी दुनिया में फैलने दिया। साथ ही विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन पर दबाव डाला कि वह उसके पापों को छिपाए। लाखों लोग कोरोना वायरस से मारे गए और वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था तबाह हो गई। महामारी के इतने दिनों बाद भी चीन ने ज‍िंदा वायरस के नमूने तक पहुॅंच मुहैया नहीं कराई है।”

उल्लेखनीय है कि हाल ही के दिनों में व्यापार, कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर चीन के गलत रवैए, उइगर मुस्लिमों के शिविर में मानवाधिकारों के हनन, हांगकांग की स्थिति और दक्षिण चीन सागर में चीनी गतिरोध बढ़ाने सहित कई मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच अनबन हुई है। पोंपियो ने यह भी कहा कि चीन अमेरिका और यूरोप के बीच साइबर कैम्पेन के जरिए गलत प्रचार कर रही है, ताकि यहाँ की सरकारों को कमजोर किया जा सके।

गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को लद्दाख क्षेत्र स्थित गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को चीन की तरफ बताया है। चीन के इस दावे से एक दिन पहले ही भारत ने गलवान घाटी पर चीनी सेना के संप्रभुता के दावे को खारिज कर दिया था और बीजिंग को अपनी गतिविधियाँ एलएसी के उस तरफ तक ही सीमित रखने की चेतावनी देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि भारत अपनी सम्प्रभुता में हस्तक्षेप का जवाब देने में सक्षम है।

भारतीय सेना मजबूत, चीन को हरा सकती है, राहुल गाँधी आप नेतागिरी मत करना: गलवान में जख्मी सैनिक के पिता

लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 जवान बलिदान हो गए थे। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी सरकार को घेरने की कोशिश में अनर्गल सवाल उठा रहे हैं।

राहुल ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को गलवान घाटी में घायल हुए जवान के पिता बलवंत सिंह का वीडियो ट्वीट कर सरकार को घेरा था। वहीं, अब जवान के पिता का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने राहुल को इस मुद्दे पर राजनीति न करने की नसीहत दी है।

वीडियो में वो कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को जवाब दे रहे हैं। वीडियो में वे कह रहे हैं, “ये भारतीय सेना मजबूत सेना है। चीन को हरा सकती है। और भी देशों को हरा सकती है। राहुल गाँधी, आप नेतागिरी मत करना। ये राजनीति अच्छी नहीं है। मेरा छोरा पहले भी फौजी में लड़ा। अब फिर लड़ेगा शेर की तरह। भगवान करे ठीक हो जाए तो फिर लड़ेगा देश के लिए।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने गलवान घाटी की हिंसक झड़प में घायल हुए एक जवान के पिता के बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया था, “यह देखकर दुख होता है कि भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रधानमंत्री को बचाने के लिए झूठ बोलने पर उतर आए हैं। अपने झूठ से हमारे शहीदों का अपमान मत करिए।” इसी के जवाब में घायल जवान के पिता का यह वीडियो सामने आया है।

घायल जवान के पिता का बयान आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटिया राजनीति करने के लिए राहुल गाँधी पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “एक बहादुर जवान के पिता के पास राहुल गाँधी के लिए बड़ा ही स्पष्ट जवाब है। ऐसे समय में जब पूरा देश एकजुट है, तब राहुल गाँधी को भी घटिया राजनीति से ऊपर उठना चाहिए और राष्ट्रीय हित के साथ एकजुटता में खड़े होना चाहिए।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता ने एक ट्वीट में कहा था कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि गलवान में चीनी हमला पूर्व नियोजित था। भारत सरकार सो रही थी और उसने समस्या से इनकार कर दिया था। इसकी कीमत हमारे शहीद जवानों को चुकानी पड़ी।

गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी के पास हिंसक झड़प में चीन के 43 सैनिकों के हताहत होने की बात मीडिया में सामने आई। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों को वीरगति प्राप्त हुई।

इससे पहले शुक्रवार (जून 19, 2020) को इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने बताया था कि सेना को खुली छूट दी गई है। उन्होंने सबको आश्वस्त किया कि हमारी एक इंच जमीन भी कोई नहीं ले सकता। हमारे किसी पोस्‍ट पर दूसरे देश का कब्‍जा नहीं है।