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भारत ने भी कई चीनी सैनिकों को बनाया था बंधक, बाद में उन्हें छोड़ा: जनरल वीके सिंह का खुलासा

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने खुलासा किया है कि भारत ने चीन के कई सैनिकों को पकड़ा था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। ‘एबीपी न्यूज़’ को इंटरव्यू देते हुए उन्होंने ऐसा कहा। जनरल सिंह ने कहा कि पिछले सप्ताह गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष के दौरान ऐसा हुआ था। हालाँकि, चीन की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

बता दें कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि चीन ने भारत के 10 जवानों को पकड़ लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ा गया। बाद में ख़ुद चीन ने ही इस दावे को नकार दिया था। बावजूद इसके कई प्रपंची पत्रकारों और नेताओं ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाए थे कि देश को इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया। उन्होंने मोदी सरकार पर जानकारी छिपाने के आरोप लगाए थे।

गाजियाबाद से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए वीके सिंह ने गलवान घाटी संघर्ष को लेकर जानकारी दी कि इस झड़प में चीन के दोगुने सैनिक मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए हैं तो चीन के इससे ज्यादा सैनिक मारे गए हैं लेकिन चीन कभी भी सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि चीन में हर चीज छुपाई जाती है। हमारे सैनिकों ने बदला लेकर बलिदान दिया है।

जनरल वीके सिंह ने चीन विवाद पर रखी अपनी बात (साभार: ABP न्यूज़)

ज्ञात हो कि लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत अब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बढ़ा रहा है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक ख़बर के अनुसार, भारत ने अपने फॉरवर्ड बेसेज पर फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर्स को आगे बढ़ाया है, तैनाती में तेज़ी लाई है। ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल’ की सीमा 3488 किलोमीटर लम्बी है, जहाँ विभिन्न बिंदुओं पर भारत ने सेना और अस्त्रों की तैनाती की है।

बंगाल की खाड़ी वाले इलाक़े में भी नौसेना के वॉरशिप्स की तैनाती की गई है। फॉरवर्ड बेसेज पर चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर्स और अपाची हेलिकॉप्टर्स की तैनाती की गई है। आगे होने वाले किसी भी हमले और हिंसा की स्थिति को रोकने के लिए जिन हेलिकॉप्टरों को तैनात किया गया है, उसके साथ सेना के कई जवान भी गए हैं। ऊँचे इलाक़ों में होवित्जर को तैनात किया गया है। वायुसेना पूरी तरह तैयार है।

भ*#, ये नौटंकी मत कर पाँच टाइम का नमाज पढ़: योगा डे पर मोहम्मद कैफ को कट्टरपंथियों ने गरियाया

मौका कोई भी पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ अपने मजहब के लोगों के निशाने पर आ ही जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2020) पर भी यही हुआ।

मोहम्मद कैफ ने योग करती अपनी तस्वीर सोशल मीडिया में शेयर की और उन पर गालियों के साथ उन्हीं के मजहब के नाम वाले यूजर्स टूट पड़े। किसी ने इसे नौटंकी कहा तो किसी ने उन्हें भ*# बता दिया।

कैफ ने ट्वीट किया, ‘खुद से प्यार कीजिए। तन, मन, आत्मा से प्यार कीजिए।’

लेकिन, इस्लामी यूजर्स को यह पसंद नहीं आया। आजम ने लिखा, “भाई ये नौटंकी मत कर। पॉंच टाइम नमाज पढ़ ले फुल फिट रहेगा।” उसने मजहब की ओर इशारा करते हुए कहा कि कैफ, इरफान, यूसुफ जैसों को इस नौटंकी में नहीं फॅंसना चाहिए।

रुओ अदनान ने मुस्लिम धर्म के खतरे की बात करते हुए, कैफ के इमाम भटकने की बात कही। साथ ही गद्दार बताते हुए कैफ के लिए अश्लील शब्दों का प्रयोग किया।

जिब्रान अहमद ने कैफ मजाक बनाते हुए कहा “अबे क्या कर रहा है।”

फारुख खान नाम के यूजर योगासन पर उन्हें भ*# कहा।

इमदाद अब्दुल्ला ने कैफ के योगा को पॉलिटिकल स्टंट करार देते हुए इसे बीजेपी से टिकट लेने की तैयारी बता डाला।

फेसबुक पर भी इसी तरह की अश्नलील टिप्पणियॉं देखने को मिली।

इंस्टाग्राम पर भी लोगों ने मजहब का हवाला देते हुए नमाज़ पढ़ने की सीख दी।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया एक ऐसी जगह है, जहाँ अक्सर इस्लामी क़ट्टरपंथियों की मन की बात किसी न किसी जरिए सामने आती रहती है। कई मुस्लिम सेलेब्रेटी जब हिंदू त्योहारों को उत्साह के साथ मनाते दिखते हैं या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील मानकर उसका अनुसरण करते दिखते हैं, तब अक्सर ऐसे कमेंट और मजहबी बातें उनके ट्विट्स का हिस्सा होती हैं।

कोरोना योद्धाओं के लिए कैफ द्वारा 9 मिनट मोमबत्ती जलाने पर

उल्लेखनीय है पीएम मोदी के अपील पर कैफ ने अपनी पत्नी के साथ मोमबत्ती जलाया था। साथ ही कैफ ने कोरोना योद्धाओं को धन्यवाद देते हुए अपने ट्विटर पर रात का विडियो को शेयर भी किया था। मगर, प्रधानमंत्री की बात को मानता देख समुदाय विशेष के कुछ लोग बिदक गिए और उन पर भद्दी और अश्लील टिप्पणियों के ढेर लगा दिए।

जनता कर्फ़्यू का पालन और थाली बजाना भी पड़ा था महँगा

कट्टरपंथियों ने कैफ को जनता कर्फ्यू पर नरेंद्र मोदी की अपील का पालन करता देख भी उलटा-सीधा बोला था। किसी ने उन्हें ताली-थाली बजाने पर कोसा था। तो किसी ने उन्हें अल्लाह से दुआ करने की सलाह दी थी। एक ने तो उन्हें यहाँ तक कहा था, “कैफ भाई, भाभी और आप थाली और बर्तन लेकर रेलवे पर जाओ और नौकरी करो। हिजड़ा की तरह पैसा मिलेंगे बहुत आपको। थाली और ताली बजाते रहो।”

कट्टरपंथियों को नहीं भाया खुद को सुदामा कहना

एक बार तो कैफ द्वारा अपने आप को सुदामा और क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भगवान कृष्ण का दर्जा देने पर भी कट्टरपंथियों ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई थी। कुछ ने उनके खिलाफ फ़तवा जारी करने की भी बात कही थी।

चीनी एक भी नहीं मरा, ऑक्सीजन देकर 10 भारतीय सैनिक बचाए: थरूर और पूरा कॉन्ग्रेसी-तंत्र फैला रहा यह झूठ

कॉन्ग्रेस का पूरा इकोसिस्टम अब चीन का पक्ष लेकर भारतीय सेना को कमतर दिखाने और बदनाम करने में लग गया है। शनिवार (जून 20, 2020) को ईवा झेंग नामक ट्विटर यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसके बारे में बताया गया कि ये गलवान घाटी के उस जगह का है, जहाँ भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। झेंग ने दावा किया कि वो चीन से है। मजे की बात तो ये कि चीन में ट्विटर प्रतिबंधित है, इसे ब्लॉक कर के रखा गया है।

उसने दावा किया कि इस संघर्ष में चीन की पीपल लिबरेशन आर्मी के एक भी जवान की मौत नहीं हुई है जबकि मात्र 5 जवान घायल हुए हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इस संघर्ष में घायल 10 भारतीय जवानों को चीनी सेना ने मदद पहुँचाई। ट्वीट के अनुसार, पीएलए पोस्ट के पास चीनी सेना ने घायल भारतीय जवानों को हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी देकर उनकी जान बचाई। हैरत की बात ये है कि इस झूठे ट्वीट को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने लाइक किया।

शशि थरूर ने झेंग के ट्वीट को किया लाइक

इस ट्वीट के साथ एक संदिग्ध वीडियो भी डाला गया था, जिसमें यूनिफार्म में कुछ जवानों को ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही थी। कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम की पत्रकार मानी जाने वाली स्वाति चतुर्वेदी ने भी चीन के समर्थन में इस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने ये तक पता लगाने की कोशिश नहीं की कि ये झेंग है कौन और उसके ही आँकड़ों को चीन का आधिकारिक बयान बताते हुए सोशल मीडिया पर फैलाने का काम किया।

स्वाति चतुर्वेदी ने अपने साथी पत्रकार माइकल सैफी के ट्वीट को भी आगे बढ़ाया, जिसमें दावा किया गया था कि झेंग द्वारा ट्वीट किए गए आँकड़े चीन के आधिकरिक आँकड़े हैं। प्रोफेसर अशोक स्वेन ने भी इस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने झेंग के हैंडल को ‘चायनीज अकाउंट’ बताते हुए दावा किया कि ये पहली बार है, जब किसी चीनी ने इस तरह से घायलों के आँकड़े सार्वजनिक किए हैं।

स्वाति चतुर्वेदी ने इस प्रपंच को आगे बढ़ाया

बता दें कि स्वेन वही आदमी है, जिसने हाल ही में अमेरिका की तर्ज पर भारत में दंगे भड़काने के इरादे से प्रदर्शन किए जाने की बात कही थी। दरअसल, इस पूरे इकोसिस्टम ने जो घायल भारतीय सैनिकों को चीनियों द्वारा ऑक्सीजन थेरेपी दिए जाने का वीडियो शेयर किया, वो फेक है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। न सिर्फ़ चीनियों के घायलों का आँकड़ा गलत है बल्कि वीडियो भी फेक है। ऊपर से ये आधिकारिक तो है ही नहीं।

चीन की सरकार के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भी स्वीकार किया था कि भारत-चीन की सेनाओं के बीच गलवान में हुए संघर्ष में दोनों तरफ से जानें गई हैं। उसने पिछले 40 साल में इसे भारत और चीन के बीच सबसे बड़ा संघर्ष करार दिया था। केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने बताया था कि चीन के 43 जवान मौत के घाट उतारे गए। पीएम मोदी ने भी इसकी पुष्टि की थी कि हमारे जवान मारते-मारते वीरगति को प्राप्त हुए।

शेयर किया जा रहा वीडियो फ़रवरी 2017 का है

जहाँ तक ऑक्सीजन वाले वीडियो की बात है, उसे Bilbilli.Com नामक वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। ये फ़रवरी 14, 2017 का वीडियो है अर्थात 3 साल से भी ज्यादा पुराना है। ये वीडियो तिब्बती आर्मी पुलिस के लिए स्थापित किए गए गोल्डन ऑक्सीजन चैंबर का है। इस वीडियो का भारतीय सैनिकों से कोई लेनादेना नहीं है। बावजूद इसके शशि थरूर और स्वाति चतुर्वेदी जैसों ने इसे लेकर प्रपंच फैलाया।

भारतीय विदेश मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जून के ही मध्य में चीनी सेना ने वेस्टर्न सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास किया था, जिसका उसे जवाब दिया गया। बताया गया है कि 6 जून को दोनों पक्षों के बीच बैठक कर के तनाव कम करने के लिए समझौता भी कर लिया गया था लेकिन चीनी बाज नहीं आए और उन्होंने अवैध रूप से निर्माण कार्य जारी रखा, इस पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई और हिंसा व क्षति का कारण भी वही बना।

‘एक ने अंग्रेजों के सामने सिर झुका दिया, दूसरे ने चाइना के सामने’ – झूठ फैलाने पर AAP नेता पर FIR

प्रधानमंत्री मोदी, सुरक्षाबलों और वीर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पदाधिकारी अमित मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर बीजेपी के प्रवक्ता सुरेश नखुआ की शिकायत पर मुंबई में दर्ज कराई गई।

बता दें कि आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी अमित मिश्रा ने 20 जून, 2020 को अपने ट्विटर एकाउंट से एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चीन के प्रधानमंत्री के सामने सिर झुकाते हुए वाला फोटो (जबकि यह फोटो ही फेक है, फोटोशॉप्ड है) लगाया था। साथ ही उन्होंने वीर सावरकर की फ़ोटो को भी लगाया। यह ट्वीट उन्होंने तब किया जब चीन के साथ हुए हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

बीजेपी के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने अपनी शिकायत में कहा कि अमित मिश्रा ने ऐसा ट्वीट कर न सिर्फ पीएम की गरिमा को बदनाम किया है बल्कि उन्होंने वीर सावरकर को मानने वाले लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुँचाया है। प्रधानमंत्री की फ़ोटो को फोटोशॉप करके चीन के प्रधानमंत्री के सामने झुका कर उन्होंने भारतीय सेना का सम्मान करने वाले लोगों के भावनाओं को भी तकलीफ पहुँचाने का काम किया है।

नखुआ ने कहा कि मिश्रा द्वारा पोस्ट किए गए ऐसे ट्वीट के लिए उनके एकाउंट को सस्पेंड किया जाए। और इस पर संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई हो।

दरअसल इस ट्वीट ने न सिर्फ उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को बदनाम किया बल्कि सैनिकों द्वारा देश की रक्षा में बलिदान हुए सैनिकों का भी अपमान किया है। इस ट्वीट में उन्होंने वीर सावरकर और प्रधानमंत्री के लिए लिखा, “एक ने अंग्रेजों के सामने सर झुका दिया था और दूसरे ने चाइना के सामने…” इस विवादित ट्वीट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

अमित मिश्रा आम आदमी पार्टी में 2008 से आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। और यह उनका कोई पहला विवादित ट्वीट नहीं है। आए दिन वे इस तरह कई विवादित टिप्पणियाँ अपने एकाउंट पर पोस्ट करते रहते हैं।

गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ पूरा देश सैनिकों के बलिदान को पर गम और गुस्से में है, वहीं AAP के पदाधिकारी द्वारा इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरक़त से उन्होंने सिर्फ़ घटिया राजनीति ही नहीं की बल्कि देश के सम्मान को भी ठेस पहुँचाया है।

‘घायल जवानों के लिए रक्तदान करना पार्टी विरोधी’ – भारत में चीन के एजेंडे को बढ़ाने वाली कम्युनिस्ट पार्टियाँ

दुनिया भर में कम्युनिस्ट अथवा वामपंथी एक ऐसी प्रजाति है, जो लोकतान्त्रिक देशों में लोकतंत्र ख़त्म होने की बात करते हैं लेकिन जहाँ उन्हें सत्ता मिल जाती है वहाँ वो लोकतंत्र का गला घोंट देते हैं। भारत-चीन तनाव के बीच भारतीय वामपंथियों का भी चेहरा बेनकाब हुआ है, जिन्होंने चीन की निंदा में अभी तक एक शब्द भी नहीं कहा। इन कम्युनिस्टों ने उलटा अमेरिका और भाजपा को इस विवाद के लिए दोषी ठहरा दिया।

भारतीय कम्युनिस्टों की एक ख़ास बात यह है कि ये अपने धर्म और मातृभूमि के नहीं होते। ये चीन, क्यूबा और उत्तर कोरिया को अपना देश मानते हैं, जहाँ लोकतंत्र नाम की कोई चीज है ही नहीं। ये अपने देश की सेना का सम्मान नहीं करते। ये कम्युनिस्ट समस्याओं के समय अपनी सरकार के साथ खड़े नहीं होते। कुछ ऐसा ही इन्होने इस बार भी किया है। सीपीआई व अन्य कम्युनिस्ट पार्टियों के रुख को देख कर तो ऐसा ही लगता है।

उदाहरण के लिए आइए देखते हैं कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के बांग्ला मुखपत्र ने क्या लिखा है। ‘गणशक्ति’ ने अपने पहले ही पन्ने पर भारतीय सेना के बलिदान का मखौल उड़ाते हुए उन्हें ही दोषी ठहराया है। इसके लिए किसी भारतीय नहीं बल्कि चीनी प्रवक्ता का बयान छापा गया है। वही चीन, जिसने सरहद पर हमारे 20 सैनिकों की जान ले ली। चीनी प्रवक्ता के हवाले से दावा किया गया है कि भारतीय सेना ने न सिर्फ़ सीमा सम्बन्धी नियमों का उल्लंघन किया बल्कि गलवान घाटी में भी स्थिति से छेड़छाड़ किया।

यानी, देश की सीमा पर हमारे लिए सुरक्षा करते हुए चीनी सैनिकों की धोखेबाजी भरे हमले में जान गँवाने वाले हमारे ही सैनिकों पर सवाल उठाया जा रहा है और वो भी उनके बयान को आधार बना कर, जिनकी सेना ने ये घिनौना कृत्य किया है। ऐसा काम वामपंथी ही कर सकते हैं। हालाँकि, सीपीआई का कहना है कि वो हमेशा से भारत और चीन, दोनों ही का पक्ष रखता रहा है। लेकिन अभी तक ऐसा दिख तो नहीं रहा है।

इसी ‘गणशक्ति’ में चीनी प्रवक्ता के उस बयान को भी पेश किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ है। हालाँकि, केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि 43 चीनी सैनिकों की मौत हुई है। लेकिन, वामपंथी दलों के लिए आधिकारिक वर्जन चीन वाला है, भारत का नहीं। घुसपैठ की चीनियों ने, धोखा देकर हमला किया चीनियों ने लेकिन वामपंथी उन्हीं चीनियों के महिमामंडन में लगे हुए हैं।

सीपीआई लाख सफाई दे कि उसने दोनों पक्षों को दिखाया है, वो पत्रकारिता के नियमों का पालन कर रहा है या फिर वो चीन का एजेंट नहीं है लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि वो प्रो-इंडिया तो नहीं ही हैं। उसे भारत का पक्ष दिखाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जहाँ बात सेना और देश की सुरक्षा की आती है, वहाँ संवेदनशीलता से काम लिया जाता है। ये ठीक उसी तरह है, जैसे कश्मीर का कोई इस्लामी आतंकी संगठन हमेशा पाकिस्तान के लिए काम करता है।

यहाँ सीपीएम व अन्य कम्युनिस्ट पार्टियों के इस व्यवहार को समझने के लिए 1962 के युद्ध की चर्चा भी ज़रूरी है। उस समय जब युद्ध छिड़ा था और चेयरमैन माओ ने भारत की पीठ में छुरी घोंपते हुए हमला कर दिया था, तब वामपंथियों ने केंद्र सरकार का समर्थन नहीं किया था। नेहरू सरकार की गलतियों को नज़रअंदाज़ कर लगभग सभी पार्टियाँ उस युद्ध में सरकार के साथ खड़ी थीं लेकिन वामपंथी चीन के समर्थन में थे।

इस दौरान नीचे संलग्न किए गए इस पोस्टर को देखिए, जो वामपंथियों द्वारा 70 के दशक में डिजाइन किया हुआ बताया जाता है। हालाँकि, इसका सीपीआई से आधिकारिक लिंक क्या है ये तो सामने नहीं आया है लेकिन बांग्ला में यही लिखा हुआ है कि चेयरमैन माओ हमारे चेयरमैन हैं। कइयों ने सीताराम येचुरी और प्रकाश करात से इस सम्बन्ध में सवाल पूछे लेकिन वामपंथी नेताओं ने कोई जवाब नहीं दिया।

आप सोचिए, 1962 में चीन भारत को इतना बड़ा घाव देता है और उसके कुछ ही सालों बाद हमारे ही देश के वामपंथी कहते हैं कि भारत पर हमला करने वाले माओ उनके भी चेयरमैन हैं। कम्युनिस्टों ने 16 जून को पूरे भारत में देशव्यापी बंद का आह्वान किया। जगह-जगह प्रदर्शन किए गए। कहा गया कि मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरोध में ये प्रदर्शन हो रहे हैं। क्या भारत-चीन तनाव के बीच इस तरह की हरकत उन्हें चीन की प्रॉक्सी नहीं बनाती?

हालिया भारत-चीन विवाद को लेकर सीपीएम के बयान को ही देख लीजिए, इसने न तो चीन की आलोचना की है और न ही भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाने वाला एक भी शब्द कहा। उसने उलटा भारत सरकार से ही सवाल दागा कि वो बताए कि सीमा पर क्या हुआ है? उसने दोनों देशों को मिल-बैठ कर मामला सुलझाने की सलाह तो दी लेकिन कहीं भी चीन की अप्रत्यक्ष आलोचना नहीं की। क्या ऐसी पार्टियों को भारत में चुनाव लड़ने का अधिकार होना चाहिए?

डोकलाम विवाद भी देश अभी तक भूला नहीं है। अगर आप याद कीजिए तो उस समय भी ये वामपंथी पार्टियाँ सरकार के साथ खड़ी नहीं हुई थी। उनका रवैया तब भी देशविरोधी ही था। उसने दावा किया था कि सीमा विवाद के विषय में भूटान 1984 से ही चीन के साथ सीधे बातचीत करता रहा है, इसीलिए अच्छा यही होगा कि भारत अब भूटान को ही बातचीत करने दे और ख़ुद पीछे हट जाए। क्या ये वामपंथी चाहते थे कि भारत पर चीन थोड़ा-थोड़ा कर के कब्जा करते जाए?

साथ ही वामपंथी पार्टियाँ दलाई लामा को भारत द्वारा शरण देने से भी नाराजगी जताती रहती है। सीपीएम ने तब ये भी आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने दलाई लामा को एक केंद्रीय मंत्री के साथ अरुणाचल का दौरा करा कर स्थिति बिगाड़ी है और चीन को गुस्सा दिलाया है। दलाई लामा से जिस तरह से चीन चिढ़ता है, ठीक उसी तरह वामपंथी भी चिढ़ते हैं। लेकिन क्या भारत चीन के आगे झुक कर दलाई लामा को प्रताड़ित करे?

1962 के युद्ध में तो सीपीआई ने देशद्रोह का खुलेआम प्रदर्शन करते हुए यहाँ तक कहा था कि घायल जवानों को रक्तदान करना पार्टी विरोधी गतिविधियों में गिना जाएगा। वीएस अच्युतानंदम तब पार्टी की पोलित ब्यूरो के सदस्य थे लेकिन उन्हें सिर्फ़ इसीलिए हटा दिया गया था क्योंकि उन्होंने जवानों के लिए रक्तदान करने की योजना बनाई थी। अच्युतानंदम ने भी पार्टी की इमेज बदलने किए लिए ही ऐसी अपील की थी, जो दिखावा ही थी।

राहुल गाँधी पर टिप्पणी के बाद गायब हुआ घायल सैनिक का परिवार, घर पर पहुँचे थे सरकारी अधिकारी: BJP ने गहलोत सरकार को घेरा

भारत-चीन तनाव के बीच अलवर जिले के सिपाही सुरेंद्र सिंह भी घायल हो गए थे। उनके पिता बलवंत सिंह ने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को राजनीति न करने की सलाह दी थी। अब पता चला है कि नौगाँवा का ये पूरा परिवार भूमिगत हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया है कि अलवर ज़िले के सिपाही सुरेंद्र सिंह के पिता ने राहुल गाँधी को देशभक्ति की सलाह क्या दी, राजस्थान के सत्ताशीन कॉन्ग्रेस प्रशासन ने सैनिक के घर पहुँच कर उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

राठौड़ ने कॉन्ग्रेस पार्टी और अशोक गहलोत की सरकार से पूछा कि क्या अब आप सैनिक के वृद्ध पिता को डरा धमकाकर राजनीति करेंगे? राहुल गाँधी पर बयान देने के बाद परिवार अचानक से कहाँ भूमिगत हो गया है, इस सम्बन्ध में कुछ पता नहीं चल सका है। परिवार के अलवर स्थित मकान पर टाला लटका हुआ है। बलवंत सिंह के वीडियो को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर के राहुल गाँधी पर निशाना साधा था।

‘दैनिक भास्कर’ की ख़बर के अनुसार, बयान देने के बाद एसडीएम, पुलिस और प्रशासन घायल सैनिक के घर पहुँचा था। वहाँ पर घायल सैनिक के माता-पिता और भाई में से कोई नहीं मिला। न सिर्फ़ घर पर ताला लटका हुआ था बल्कि परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिला। उक्त सैनिक की पत्नी अलवर शहर के दिवाकरी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद से उनका घर भी बंद है।

सुरेंद्र के हवाले से ही गलवान घाटी में हुए भारत-चीन संघर्ष की कहानी सामने आई थी। इसके बाद रामगढ़ और अलवर के पुलिस अधिकारियों का बलवंत सिंह के घर पर जमावड़ा लग गया था। पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता कि सैनिक का परिवार कहाँ गया है। एसडीएम ने बताया कि वो एक दिन पहले ही परिवार से मिली थीं लेकिन अब उन्हें परिवार का कोई सदस्य मिल ही नहीं रहा।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने आरोप लगाया है कि राजस्थान का पुलिस-प्रशासन कॉन्ग्रेस सरकार के इशारे पर सैनिक के परिवार को परेशान कर रहा है। उनका आरोप है कि राहुल गाँधी पर दिए उनके बयान को वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सैनिक के परिवार को डराने-धमकाने वाला कृत्य बर्दाश्त नहीं करेगी।

दैनिक भास्कर के अलवर संस्करण में प्रकाशित खबर

भाजपा ने पुलिस-प्रशासन का रवैया न बदलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 जवान बलिदान हो गए थे। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी सरकार को घेरने की कोशिश में अनर्गल सवाल उठा रहे हैं। राहुल ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को गलवान घाटी में घायल हुए जवान के पिता बलवंत सिंह का वीडियो ट्वीट कर सरकार को घेरा था। 

इसके बाद घायल जवान सुरेंद्र के पिता बलवंत ने वीडियो जारी कर कहा था, “ये भारतीय सेना मजबूत सेना है। चीन को हरा सकती है। और भी देशों को हरा सकती है। राहुल गाँधी, आप नेतागिरी मत करना। ये राजनीति अच्छी नहीं है। मेरा छोरा पहले भी फौज में लड़ा। अब फिर लड़ेगा शेर की तरह। भगवान करे ठीक हो जाए तो फिर लड़ेगा देश के लिए।” ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। 

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने गलवान घाटी की हिंसक झड़प में घायल हुए एक जवान के पिता के बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया था, “यह देखकर दुख होता है कि भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रधानमंत्री को बचाने के लिए झूठ बोलने पर उतर आए हैं। अपने झूठ से हमारे शहीदों का अपमान मत करिए।” इसी के जवाब में घायल जवान के पिता का यह वीडियो सामने आया है।

‘लेह का आधा हिस्सा चीन को…’ कॉन्ग्रेसी नेता जाकिर हुसैन के जवाब में लोकल जनता ने कहा – ‘हम करेंगे देश की रक्षा’

लद्दाख में चीन के साथ झड़प में 20 सैनिकों के बलिदानी के बाद देशभर में गम और गुस्सा है। वहीं सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए लद्दाख के आम नागरिकों ने सीमा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी पहल की है। लद्दाख की जनता और लोकल क्षेत्र के नेताओं ने चीनी घुसपैठियों से सीमाओं की रक्षा करने के लिए खुद को काबिल बताया है। उन्होंने भारत सरकार से एक बड़ी माँग की है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ एक तरफ भारतीय सैनिक चीन से हुई झड़प के बाद चौकन्ने हैं, वहीं लद्दाख की आम जनता ने भारतीय सीमा को सुरक्षित करने के लिए मुख्य भूमिका निभाने की बात कही है। नागरिकों ने कहा कि वे सेना के साथ मिल कर लद्दाख के लिए एक स्पेशल फ़ोर्स की तरह काम कर सकते हैं। तर्क देते हुए वहाँ के लोगों ने कहा कि उन्हें लद्दाख के हर एक कोने के बारे में पता है। चाहे वो पहाड़ हो, खेत-खलिहान हो, आस-पास के कस्बे हों या फिर लद्दाख का पारंपरिक चारागाहों की भूमि।

वहीं लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने भी इस मुद्दे को लेकर आग्रह किया कि सरकार को लद्दाख में रहने वाले लोगों को सीमा सुरक्षा के लिए तैनात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वक़्त सीमा पर चल रहे गतिरोध के बीच हमें अपनी सोच बदल कर भारत के लिए खड़े होने की जरूरत है।

दूसरी ओर स्थानीय नेताओं ने भी कहा कि वहाँ के लोग एलएसी के बारे में सब जानते हैं। इसलिए सरकार को स्काउट्स और बॉर्डर पुलिस के रूप में उन्हें रिक्रूट करना चाहिए। कारगिल के युद्ध से ही यहाँ लोग हर तरह से अपनी सीमा को सुरक्षित करने के लिए अपने देश का हमेशा साथ देते हैं।

गौरतलब है कि जहाँ एक ओर आम जनता अपने देश के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना चाहती है, वहीं लद्दाख के कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन भारत के खिलाफ और सैनिकों पर आपत्तिजनक एवं विवादित टिप्पणियाँ करते नजर आए हैं। हाल ही में उनकी एक ऑडियो वायरल हुई, जिसमें वे अपने दोस्त से भारतीय सैनिकों को नीचा दिखाते हुए चीनी फौजियों का महिमामंडन कर रहे थे।

जाकिर अपने दोस्त को बता रहे थे कि चीन के सैनिक लद्दाख में 135 किलोमीटर तक घुस गए और भारतीय सैनिकों को मार-मार कर खदेड़ दिया। इस कॉन्ग्रेसी नेता ने इससे भी आगे बढ़ कर कहा कि पेगांग लेक को चीन यदि अपने कब्जे में ले लेता है तो भारत के पास बचता क्या है। और तो और उसने यह भी कह दिया कि चीन आने वाले दिनों में लद्दाख के कई टुकड़े करेगा।

जाकिर हुसैन ने यह भी दावा करते हुए कहा कि भारत भले ही झड़प में मरने वालों की संख्या केवल 20 बता रहा है। लेकिन उसे लगता है यहाँ 200-250 सैनिक मर चुके हैं। जब जाकिर का दोस्त चीनी फौजियों के बारे में पूछता है, तो जाकिर बताता है कि उनके सैनिक सिर्फ़ जख्मी हुए हैं, मरे नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के साथ झड़प के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने भी इससे पहले भारतीय सेना का अपमान किया था और अपने पार्टी नेता राहुल गाँधी की तरह झूठ फैलाया था। दलवई ने कहा था कि मोदी सरकार ने बिना हथियारों के सेना को सीमा पर भेजा। इसके कारण भारतीय सैनिक LAC पर झड़प के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।

मीडिया से बात करते हुए भी दलवई ने कहा था कि गलवान घाटी में भारत-चीन सेना के बीच हुई झड़प में केवल भारतीय सैनिक हताहत हुए हैं और चीन का कोई फौजी नहीं मरा।

श्वसन तंत्र पर हमला करता है कोरोना, इससे बचने के लिए प्राणायाम जरूरी: योग दिवस 2020 पर PM मोदी

आज रविवार (जून 21, 2020) को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को डिजिटली संबोधित किया। इस दौरान सरकार की तरफ से किसी समूहिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया। पीएम मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए भी योग करने को सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोरोना हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हमला करता है, इसीलिए हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए हमें नियमित रूप से प्राणायाम करना चाहिए।

छठे इंटरनेशनल योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये दिन एकजुटता का दिन है। ये विश्व बंधुत्व के संदेश का दिन है। उन्होंने कहा कि जो हमें जोड़े, साथ लाए, वही तो योग है। जो दूरियों को खत्म करे, वही तो योग है। कोरोना के इस संकट के दौरान दुनिया भर के लोगों का उन्होंने My Life- My Yoga वीडियो ब्लॉगिंग कॉम्पिटिशन की बात करते हुए कहा कि इसमें हिस्सा लेना दिखाता है कि योग के प्रति उत्साह कितना बढ़ रहा है।

पीएम ने कहा कि बच्चे, बड़े, युवा, परिवार के बुजुर्ग, सभी जब एक साथ योग के माध्यम से जुड़ते हैं, तो पूरे घर में एक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए, इस बार का योग दिवस, भावनात्मक योग का भी दिन है, हमारी फैमिली बॉन्डिंग को भी बढ़ाने का दिन है। बता दें कि इस बार कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं हुआ, इसलिए घर में ही योग करने की सलाह दी गई है।

वीडियो में PM मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस खासतौर पर हमारे श्वसन तंत्र यानी कि रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हमला करता है। उन्होंने बताया कि हमारे श्वसन तंत्र को मजबूत करने में जिससे सबसे ज्यादा मदद मिलती है, वो है प्राणायाम। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा:

आप प्राणायाम को अपने प्रतिदिन के अभ्यास में जरूर शामिल कीजिए और अनुलोम-विलोम के साथ ही दूसरे प्राणायाम तकनीकों को भी सीखिए। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि एक आदर्श व्यक्ति वो है, जो नितांत निर्जन में भी क्रियाशील रहता है, और अत्यधिक गतिशीलता में भी सम्पूर्ण शांति का अनुभव करता है। किसी भी व्यक्ति के लिए ये एक बहुत बड़ी क्षमता होती है। योग का अर्थ ही है- ‘समत्वम् योग उच्यते’ अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान भगवद्गीता में कही गई ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ का जिक्र किया, जिसका अर्थ होता है कि कर्म की कुशलता ही योग है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि एक सजग नागरिक के तौर में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे और हम प्रयास करेंगे कि घर में परिवार के साथ योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ। पीएम ने निम्नलिखित श्लोक के माध्यम से अपनी बात रखी:

युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।
युक्त स्वप्ना-व-बोधस्य, योगो भवति दु:खहा।।

इसका अर्थ है कि सही खान-पान, सही ढंग से खेल-कूद, सोने-जागने की सही आदतें, और अपने काम, अपने कर्तव्यों को सही ढंग से करना ही योग है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी योग दिवस के अवसर पर योग के महत्व को रेखांकित किया। देश भर में कई जगहों पर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए योग करते दिखे। दुनिया भर के कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने भी योग दिवस की शुभकामनाएँ दी।

भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण पर हैदराबाद में दर्ज हुई FIR: काजल हिंदुस्तानी पर अश्लील टिप्पणी के मामले में गिरफ्तारी की माँग

अपने ट्विटर अकाउंट से गुजराती महिला काजल हिंदुस्तानी पर अश्लील टिप्पणी करके भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर उर्फ रावण फँस गए हैं। रावण के खिलाफ शनिवार (20 जून, 2020) को हैदराबाद में टीम अग्निवीर की प्रेरणा थिरुवैपति और उनके गुरू संजीव संस्कृति की ओर से एक एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसे लेकर काजल हिंदुस्तानी ने अग्निवीर टीम का आभार व्यक्त किया है।

रावण के खिलाफ हैदराबाद पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने के बाद प्रेरणा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें प्रेरणा ने बताया कि उन्होंने अपने गुरू संजीव संस्कृति के साथ हैदराबाद साइबर क्राइम विभाग में चन्द्रशेखर उर्फ रावण के खिलाफ में एफआईआर दर्ज कराई है।

उन्होंने बताया कि एसीपी रावण के वायरल ट्वीट को पढ़कर चौंक गए थे, क्योंकि जिस ट्विटर एकाउंट से काजल हिंदुस्तानी सहित कई अन्य महिलाओं पर अपमानजनक और अश्लील कमेंट किए गए थे। वह भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर उर्फ रावण का आधिकारिक ट्विटर हैंडल है, जो कि दलितों के स्वयंभू नेता हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने साइबर पुलिस से रावण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।

चंद्रशेखर रावण के ऊपर दर्ज FIR की कॉपी

इसके बाद काजल हिंदुस्तानी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि हम दिल से टीम अग्निवीर के प्रेरणा थिरुवैपति और उनके गुरू संजीव संस्कृति के सदैव आभारी रहेंगे कि उन्होंने भीम आर्मी चीफ द्वारा की गई अश्लील बातों का संज्ञान लेते हुए आज चंद्रशेखर रावण के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है।

हैदराबाद पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक अग्निवीर टीम ने शिकायत की कॉपी के साथ काजल हिंदुस्तानी को लेकर किए गए सभी अश्लील ट्वीट और महिलाओं के ऊपर की कई अभद्र टिप्पणियों की कॉपी को संलग्न किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि रावण के अश्लील ट्वीट ने पूरे समाज को शर्मशार किया है, जबकि वह अपने आप को दलितों का नेता कहता है। शिकायत में रावण के ट्विटर अकाउंट को भी सस्पेंड करने की माँग की गई है।

आपको बता दें कि भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ रावण के कुछ पुराने ट्वीट सामने आए थे। इनमें से हरेक में एक बात कॉमन है कि वह महिलाओं को भद्दी गालियॉं दे रहा है। चंद्रशेखर रावण द्वारा किए गए ये सभी ट्वीट वर्ष 2018 के हैं।

रावण ने वीडियो ब्लॉगर काजल हिंदुस्तानी के खिलाफ बेहद ही आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए लिखा था – “तू सेक्स कर के मजा ले, चु#$यापन मत कर रं%&।”

इसके बाद ऑपइंडिया से बात करते हुए काजल हिंदुस्तानी ने बताया था कि जिग्नेश मेवाणी और रावण जैसे लोगों की हरकतों को देखकर तो ऐसा लगता है कि ये लोग 24 घंटे पोर्न देखते होंगे। इसलिए हर एक महिला को ये गंदी नजर से देखते हैं। मेरे लिए ‘बिस्तर गर्म’ करने जैसे शब्दों को पढ़कर लगता है कि ये लोग कितने कुंठित हैं। इनके अंदर भरी गंदगी को कोई भी व्यक्ति साफ नहीं कर सकता।

इस मामले से सम्बंधित वीडियो नीचे देखें:

केजरीवाल की असमर्थता के बाद, LG ने वापस लिया फैसला: दिल्ली में अब होम क़्वारन्टाइन रह सकेंगे कोरोना पॉजिटिव

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कोरोना पॉजिटिव मरीजों को होम क़्वारन्टाइन करने पर रोक लगाने वाले अपने ही फैसले को वापस ले लिया है। इससे उन हजारों मरीजों को राहत मिलेगी जो अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं। साथ ही दिल्ली सरकार ने हालात को संभालने के लिए छुट्टी पर गए सभी स्वास्थ्यकर्मियों को वापस बुलाने के लिए अस्पतालों को पत्र लिखा है।

दरअसल शुक्रवार (19 जून, 2020) को ही दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कोरोना वायरस के पॉजिटिव मरीजों को होम क़्वारन्टाइन करने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही उपराज्यपाल ने दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों को पहले पाँच दिन अनिवार्य संस्थागत क़्वारन्टाइन करने का आदेश दिया था।

इस फैसले का विरोध करते हुए दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल से कहा है कि होम आइसोलेशन खत्म करने पर समस्याएँ होंगी। उन्होंने कहा था कि सरकारी अस्पतालों और अन्य सरकारी इंतजामों में अभी सिर्फ 6000 बेड उपलब्ध हैं, जबकि दिल्ली में अभी होम आइसोलेशन में 10 हजार लोग रह रहे हैं। अब सवाल है कि इन्हें कहाँ रखा जाए।

दूसरी ओर शनिवार (20 जून, 2020) को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों को एक पत्र लिखा है, जिसमें सरकार ने छुट्टी पर चल रहे सभी स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाने की बात कही है। इसी के साथ आप सरकार ने कहा है कि अति आवश्यक काम होने की स्थिति में ही स्वास्थ्यकर्मियों को छुट्टी दी जानी चाहिए।

सरकार से पत्र जारी होने के बाद ही दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया है। इसे लेकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव की ओर से एक आदेश भी जारी किया गया है।

आपको बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 53116 हो चुकी है। इसके अलावा दिल्ली में कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 2035 हो गई है।