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राहुल गाँधी पर टिप्पणी के बाद गायब हुआ घायल सैनिक का परिवार, घर पर पहुँचे थे सरकारी अधिकारी: BJP ने गहलोत सरकार को घेरा

भारत-चीन तनाव के बीच अलवर जिले के सिपाही सुरेंद्र सिंह भी घायल हो गए थे। उनके पिता बलवंत सिंह ने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को राजनीति न करने की सलाह दी थी। अब पता चला है कि नौगाँवा का ये पूरा परिवार भूमिगत हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया है कि अलवर ज़िले के सिपाही सुरेंद्र सिंह के पिता ने राहुल गाँधी को देशभक्ति की सलाह क्या दी, राजस्थान के सत्ताशीन कॉन्ग्रेस प्रशासन ने सैनिक के घर पहुँच कर उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

राठौड़ ने कॉन्ग्रेस पार्टी और अशोक गहलोत की सरकार से पूछा कि क्या अब आप सैनिक के वृद्ध पिता को डरा धमकाकर राजनीति करेंगे? राहुल गाँधी पर बयान देने के बाद परिवार अचानक से कहाँ भूमिगत हो गया है, इस सम्बन्ध में कुछ पता नहीं चल सका है। परिवार के अलवर स्थित मकान पर टाला लटका हुआ है। बलवंत सिंह के वीडियो को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर के राहुल गाँधी पर निशाना साधा था।

‘दैनिक भास्कर’ की ख़बर के अनुसार, बयान देने के बाद एसडीएम, पुलिस और प्रशासन घायल सैनिक के घर पहुँचा था। वहाँ पर घायल सैनिक के माता-पिता और भाई में से कोई नहीं मिला। न सिर्फ़ घर पर ताला लटका हुआ था बल्कि परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिला। उक्त सैनिक की पत्नी अलवर शहर के दिवाकरी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद से उनका घर भी बंद है।

सुरेंद्र के हवाले से ही गलवान घाटी में हुए भारत-चीन संघर्ष की कहानी सामने आई थी। इसके बाद रामगढ़ और अलवर के पुलिस अधिकारियों का बलवंत सिंह के घर पर जमावड़ा लग गया था। पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता कि सैनिक का परिवार कहाँ गया है। एसडीएम ने बताया कि वो एक दिन पहले ही परिवार से मिली थीं लेकिन अब उन्हें परिवार का कोई सदस्य मिल ही नहीं रहा।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने आरोप लगाया है कि राजस्थान का पुलिस-प्रशासन कॉन्ग्रेस सरकार के इशारे पर सैनिक के परिवार को परेशान कर रहा है। उनका आरोप है कि राहुल गाँधी पर दिए उनके बयान को वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सैनिक के परिवार को डराने-धमकाने वाला कृत्य बर्दाश्त नहीं करेगी।

दैनिक भास्कर के अलवर संस्करण में प्रकाशित खबर

भाजपा ने पुलिस-प्रशासन का रवैया न बदलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 जवान बलिदान हो गए थे। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी सरकार को घेरने की कोशिश में अनर्गल सवाल उठा रहे हैं। राहुल ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को गलवान घाटी में घायल हुए जवान के पिता बलवंत सिंह का वीडियो ट्वीट कर सरकार को घेरा था। 

इसके बाद घायल जवान सुरेंद्र के पिता बलवंत ने वीडियो जारी कर कहा था, “ये भारतीय सेना मजबूत सेना है। चीन को हरा सकती है। और भी देशों को हरा सकती है। राहुल गाँधी, आप नेतागिरी मत करना। ये राजनीति अच्छी नहीं है। मेरा छोरा पहले भी फौज में लड़ा। अब फिर लड़ेगा शेर की तरह। भगवान करे ठीक हो जाए तो फिर लड़ेगा देश के लिए।” ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। 

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने गलवान घाटी की हिंसक झड़प में घायल हुए एक जवान के पिता के बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया था, “यह देखकर दुख होता है कि भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रधानमंत्री को बचाने के लिए झूठ बोलने पर उतर आए हैं। अपने झूठ से हमारे शहीदों का अपमान मत करिए।” इसी के जवाब में घायल जवान के पिता का यह वीडियो सामने आया है।

‘लेह का आधा हिस्सा चीन को…’ कॉन्ग्रेसी नेता जाकिर हुसैन के जवाब में लोकल जनता ने कहा – ‘हम करेंगे देश की रक्षा’

लद्दाख में चीन के साथ झड़प में 20 सैनिकों के बलिदानी के बाद देशभर में गम और गुस्सा है। वहीं सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए लद्दाख के आम नागरिकों ने सीमा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी पहल की है। लद्दाख की जनता और लोकल क्षेत्र के नेताओं ने चीनी घुसपैठियों से सीमाओं की रक्षा करने के लिए खुद को काबिल बताया है। उन्होंने भारत सरकार से एक बड़ी माँग की है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ एक तरफ भारतीय सैनिक चीन से हुई झड़प के बाद चौकन्ने हैं, वहीं लद्दाख की आम जनता ने भारतीय सीमा को सुरक्षित करने के लिए मुख्य भूमिका निभाने की बात कही है। नागरिकों ने कहा कि वे सेना के साथ मिल कर लद्दाख के लिए एक स्पेशल फ़ोर्स की तरह काम कर सकते हैं। तर्क देते हुए वहाँ के लोगों ने कहा कि उन्हें लद्दाख के हर एक कोने के बारे में पता है। चाहे वो पहाड़ हो, खेत-खलिहान हो, आस-पास के कस्बे हों या फिर लद्दाख का पारंपरिक चारागाहों की भूमि।

वहीं लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने भी इस मुद्दे को लेकर आग्रह किया कि सरकार को लद्दाख में रहने वाले लोगों को सीमा सुरक्षा के लिए तैनात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वक़्त सीमा पर चल रहे गतिरोध के बीच हमें अपनी सोच बदल कर भारत के लिए खड़े होने की जरूरत है।

दूसरी ओर स्थानीय नेताओं ने भी कहा कि वहाँ के लोग एलएसी के बारे में सब जानते हैं। इसलिए सरकार को स्काउट्स और बॉर्डर पुलिस के रूप में उन्हें रिक्रूट करना चाहिए। कारगिल के युद्ध से ही यहाँ लोग हर तरह से अपनी सीमा को सुरक्षित करने के लिए अपने देश का हमेशा साथ देते हैं।

गौरतलब है कि जहाँ एक ओर आम जनता अपने देश के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना चाहती है, वहीं लद्दाख के कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन भारत के खिलाफ और सैनिकों पर आपत्तिजनक एवं विवादित टिप्पणियाँ करते नजर आए हैं। हाल ही में उनकी एक ऑडियो वायरल हुई, जिसमें वे अपने दोस्त से भारतीय सैनिकों को नीचा दिखाते हुए चीनी फौजियों का महिमामंडन कर रहे थे।

जाकिर अपने दोस्त को बता रहे थे कि चीन के सैनिक लद्दाख में 135 किलोमीटर तक घुस गए और भारतीय सैनिकों को मार-मार कर खदेड़ दिया। इस कॉन्ग्रेसी नेता ने इससे भी आगे बढ़ कर कहा कि पेगांग लेक को चीन यदि अपने कब्जे में ले लेता है तो भारत के पास बचता क्या है। और तो और उसने यह भी कह दिया कि चीन आने वाले दिनों में लद्दाख के कई टुकड़े करेगा।

जाकिर हुसैन ने यह भी दावा करते हुए कहा कि भारत भले ही झड़प में मरने वालों की संख्या केवल 20 बता रहा है। लेकिन उसे लगता है यहाँ 200-250 सैनिक मर चुके हैं। जब जाकिर का दोस्त चीनी फौजियों के बारे में पूछता है, तो जाकिर बताता है कि उनके सैनिक सिर्फ़ जख्मी हुए हैं, मरे नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के साथ झड़प के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने भी इससे पहले भारतीय सेना का अपमान किया था और अपने पार्टी नेता राहुल गाँधी की तरह झूठ फैलाया था। दलवई ने कहा था कि मोदी सरकार ने बिना हथियारों के सेना को सीमा पर भेजा। इसके कारण भारतीय सैनिक LAC पर झड़प के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।

मीडिया से बात करते हुए भी दलवई ने कहा था कि गलवान घाटी में भारत-चीन सेना के बीच हुई झड़प में केवल भारतीय सैनिक हताहत हुए हैं और चीन का कोई फौजी नहीं मरा।

श्वसन तंत्र पर हमला करता है कोरोना, इससे बचने के लिए प्राणायाम जरूरी: योग दिवस 2020 पर PM मोदी

आज रविवार (जून 21, 2020) को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को डिजिटली संबोधित किया। इस दौरान सरकार की तरफ से किसी समूहिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया। पीएम मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए भी योग करने को सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोरोना हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हमला करता है, इसीलिए हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए हमें नियमित रूप से प्राणायाम करना चाहिए।

छठे इंटरनेशनल योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये दिन एकजुटता का दिन है। ये विश्व बंधुत्व के संदेश का दिन है। उन्होंने कहा कि जो हमें जोड़े, साथ लाए, वही तो योग है। जो दूरियों को खत्म करे, वही तो योग है। कोरोना के इस संकट के दौरान दुनिया भर के लोगों का उन्होंने My Life- My Yoga वीडियो ब्लॉगिंग कॉम्पिटिशन की बात करते हुए कहा कि इसमें हिस्सा लेना दिखाता है कि योग के प्रति उत्साह कितना बढ़ रहा है।

पीएम ने कहा कि बच्चे, बड़े, युवा, परिवार के बुजुर्ग, सभी जब एक साथ योग के माध्यम से जुड़ते हैं, तो पूरे घर में एक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए, इस बार का योग दिवस, भावनात्मक योग का भी दिन है, हमारी फैमिली बॉन्डिंग को भी बढ़ाने का दिन है। बता दें कि इस बार कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं हुआ, इसलिए घर में ही योग करने की सलाह दी गई है।

वीडियो में PM मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस खासतौर पर हमारे श्वसन तंत्र यानी कि रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हमला करता है। उन्होंने बताया कि हमारे श्वसन तंत्र को मजबूत करने में जिससे सबसे ज्यादा मदद मिलती है, वो है प्राणायाम। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा:

आप प्राणायाम को अपने प्रतिदिन के अभ्यास में जरूर शामिल कीजिए और अनुलोम-विलोम के साथ ही दूसरे प्राणायाम तकनीकों को भी सीखिए। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि एक आदर्श व्यक्ति वो है, जो नितांत निर्जन में भी क्रियाशील रहता है, और अत्यधिक गतिशीलता में भी सम्पूर्ण शांति का अनुभव करता है। किसी भी व्यक्ति के लिए ये एक बहुत बड़ी क्षमता होती है। योग का अर्थ ही है- ‘समत्वम् योग उच्यते’ अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान भगवद्गीता में कही गई ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ का जिक्र किया, जिसका अर्थ होता है कि कर्म की कुशलता ही योग है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि एक सजग नागरिक के तौर में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे और हम प्रयास करेंगे कि घर में परिवार के साथ योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ। पीएम ने निम्नलिखित श्लोक के माध्यम से अपनी बात रखी:

युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।
युक्त स्वप्ना-व-बोधस्य, योगो भवति दु:खहा।।

इसका अर्थ है कि सही खान-पान, सही ढंग से खेल-कूद, सोने-जागने की सही आदतें, और अपने काम, अपने कर्तव्यों को सही ढंग से करना ही योग है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी योग दिवस के अवसर पर योग के महत्व को रेखांकित किया। देश भर में कई जगहों पर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए योग करते दिखे। दुनिया भर के कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने भी योग दिवस की शुभकामनाएँ दी।

भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण पर हैदराबाद में दर्ज हुई FIR: काजल हिंदुस्तानी पर अश्लील टिप्पणी के मामले में गिरफ्तारी की माँग

अपने ट्विटर अकाउंट से गुजराती महिला काजल हिंदुस्तानी पर अश्लील टिप्पणी करके भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर उर्फ रावण फँस गए हैं। रावण के खिलाफ शनिवार (20 जून, 2020) को हैदराबाद में टीम अग्निवीर की प्रेरणा थिरुवैपति और उनके गुरू संजीव संस्कृति की ओर से एक एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसे लेकर काजल हिंदुस्तानी ने अग्निवीर टीम का आभार व्यक्त किया है।

रावण के खिलाफ हैदराबाद पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने के बाद प्रेरणा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें प्रेरणा ने बताया कि उन्होंने अपने गुरू संजीव संस्कृति के साथ हैदराबाद साइबर क्राइम विभाग में चन्द्रशेखर उर्फ रावण के खिलाफ में एफआईआर दर्ज कराई है।

उन्होंने बताया कि एसीपी रावण के वायरल ट्वीट को पढ़कर चौंक गए थे, क्योंकि जिस ट्विटर एकाउंट से काजल हिंदुस्तानी सहित कई अन्य महिलाओं पर अपमानजनक और अश्लील कमेंट किए गए थे। वह भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर उर्फ रावण का आधिकारिक ट्विटर हैंडल है, जो कि दलितों के स्वयंभू नेता हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने साइबर पुलिस से रावण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।

चंद्रशेखर रावण के ऊपर दर्ज FIR की कॉपी

इसके बाद काजल हिंदुस्तानी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि हम दिल से टीम अग्निवीर के प्रेरणा थिरुवैपति और उनके गुरू संजीव संस्कृति के सदैव आभारी रहेंगे कि उन्होंने भीम आर्मी चीफ द्वारा की गई अश्लील बातों का संज्ञान लेते हुए आज चंद्रशेखर रावण के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है।

हैदराबाद पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक अग्निवीर टीम ने शिकायत की कॉपी के साथ काजल हिंदुस्तानी को लेकर किए गए सभी अश्लील ट्वीट और महिलाओं के ऊपर की कई अभद्र टिप्पणियों की कॉपी को संलग्न किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि रावण के अश्लील ट्वीट ने पूरे समाज को शर्मशार किया है, जबकि वह अपने आप को दलितों का नेता कहता है। शिकायत में रावण के ट्विटर अकाउंट को भी सस्पेंड करने की माँग की गई है।

आपको बता दें कि भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ रावण के कुछ पुराने ट्वीट सामने आए थे। इनमें से हरेक में एक बात कॉमन है कि वह महिलाओं को भद्दी गालियॉं दे रहा है। चंद्रशेखर रावण द्वारा किए गए ये सभी ट्वीट वर्ष 2018 के हैं।

रावण ने वीडियो ब्लॉगर काजल हिंदुस्तानी के खिलाफ बेहद ही आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए लिखा था – “तू सेक्स कर के मजा ले, चु#$यापन मत कर रं%&।”

इसके बाद ऑपइंडिया से बात करते हुए काजल हिंदुस्तानी ने बताया था कि जिग्नेश मेवाणी और रावण जैसे लोगों की हरकतों को देखकर तो ऐसा लगता है कि ये लोग 24 घंटे पोर्न देखते होंगे। इसलिए हर एक महिला को ये गंदी नजर से देखते हैं। मेरे लिए ‘बिस्तर गर्म’ करने जैसे शब्दों को पढ़कर लगता है कि ये लोग कितने कुंठित हैं। इनके अंदर भरी गंदगी को कोई भी व्यक्ति साफ नहीं कर सकता।

इस मामले से सम्बंधित वीडियो नीचे देखें:

केजरीवाल की असमर्थता के बाद, LG ने वापस लिया फैसला: दिल्ली में अब होम क़्वारन्टाइन रह सकेंगे कोरोना पॉजिटिव

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कोरोना पॉजिटिव मरीजों को होम क़्वारन्टाइन करने पर रोक लगाने वाले अपने ही फैसले को वापस ले लिया है। इससे उन हजारों मरीजों को राहत मिलेगी जो अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं। साथ ही दिल्ली सरकार ने हालात को संभालने के लिए छुट्टी पर गए सभी स्वास्थ्यकर्मियों को वापस बुलाने के लिए अस्पतालों को पत्र लिखा है।

दरअसल शुक्रवार (19 जून, 2020) को ही दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कोरोना वायरस के पॉजिटिव मरीजों को होम क़्वारन्टाइन करने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही उपराज्यपाल ने दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों को पहले पाँच दिन अनिवार्य संस्थागत क़्वारन्टाइन करने का आदेश दिया था।

इस फैसले का विरोध करते हुए दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल से कहा है कि होम आइसोलेशन खत्म करने पर समस्याएँ होंगी। उन्होंने कहा था कि सरकारी अस्पतालों और अन्य सरकारी इंतजामों में अभी सिर्फ 6000 बेड उपलब्ध हैं, जबकि दिल्ली में अभी होम आइसोलेशन में 10 हजार लोग रह रहे हैं। अब सवाल है कि इन्हें कहाँ रखा जाए।

दूसरी ओर शनिवार (20 जून, 2020) को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों को एक पत्र लिखा है, जिसमें सरकार ने छुट्टी पर चल रहे सभी स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाने की बात कही है। इसी के साथ आप सरकार ने कहा है कि अति आवश्यक काम होने की स्थिति में ही स्वास्थ्यकर्मियों को छुट्टी दी जानी चाहिए।

सरकार से पत्र जारी होने के बाद ही दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया है। इसे लेकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव की ओर से एक आदेश भी जारी किया गया है।

आपको बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 53116 हो चुकी है। इसके अलावा दिल्ली में कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 2035 हो गई है।

चीन में ‘ग्रेट फ़ायरवॉल’ के जरिए PM मोदी की वेबसाइट ब्लॉक्ड, राहुल गाँधी की वेबसाइट पर कोई रोक नहीं

चीन में जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट को ‘द ग्रेट फायरवॉल’ के जरिए ब्लॉक कर दिया गया है वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की वेबसाइट पर कोई रोक नहीं है। लगभग चीन के सभी प्रांतों में ऐसा ही हुआ प्रतीत होता है। बता दें कि चीन में उन सभी वेबसाइटों पर रोक है, जहाँ चीन के विरोध में कंटेंट डाले जाने की सम्भावना रहती है या फिर जिसके कंटेंट्स को वहाँ की सरकार फ़िल्टर नहीं कर सकती।

चीन में किसी भी इंटरनेट यूजर को फ़िल्टर किया हुआ कंटेंट ही मिलता है, ताकि कम्युनिस्ट पार्टी के नैरेटिव के विरुद्ध कुछ भी कहीं भी पोस्ट न किया जा सके। वहाँ इंटरनेट पर जिस तरह की सेंसरशिप लागू है, उस तरह की शायद ही किसी देश में हो। उन सारी तकनीकों और ब्लॉक करने वाली व्यवस्थाओं को ही मिला कर ‘द ग्रेट फायरवॉल’ कहा जाता है। यानी आप वहाँ की सरकार के विरुद्ध कुछ भी नहीं लिख सकते।

कई ऐसे टूल ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं, जो ये बता देते हैं कि कोई वेबसाइट चीन में ब्लॉक्ड है या नहीं। उसे ‘द ग्रेट फायरवॉल’ द्वारा अनुमति प्रदान की गई है या नहीं। हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की वेबसाइटों को लेकर ये टेस्ट किया। हमने पाया कि जहाँ राहुल गाँधी की वेबसाइट पर कोई रोक नहीं है, नरेंद्र मोदी की वेबसाइट को चीन में ब्लॉक कर के रखा गया है।

चीन के विभिन्न प्रांतों में ब्लॉक्ड है पीएम मोदी की वेबसाइट

जहाँ नरेंद्र मोदी की वेबसाइट (NarendraModi.In) हमें ब्लॉक मिला और बताया गया कि सर्वर तक पहुँचने में आप असफल रहे हैं और मेनलैंड चीन में ये वेबसाइट नहीं खुलेगी, वहीं राहुल गाँधी की वेबसाइट (RahulGandhi.In) को लेकर हमने पाया कि इस पर कोई रोक नहीं है। ये जानने वाली बात है कि दोनों ही वेबसाइटों का डोमेन .In ही है। हमने दूसरे टूल्स से भी ये टेस्ट किया तो परिणाम समान ही थे।

राहुल गाँधी की वेबसाइट पर चीन में कोई रोक नहीं

ज्ञात हो कि चीन की सरकार साइटों को ब्लॉक करने के लिए जिस प्रक्रिया को अपनाती है, उसे ‘डीएनएस पोइज़निंग’ भी कहते हैं। हमने ViewDNS.Info पर भी इसी टेस्ट को दोहराया, जहाँ हमें यही परिणाम मिला। हालाँकि, भारत-चीन के बीच जहाँ सीमा पर तनाव चल रहा है, उस वक़्त पीएम मोदी की वेबसाइट और राहुल गाँधी की वेबसाइट के बीच भेदभाव क्यों है, इस विषय में कुछ पता नहीं चल पाया है।

7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। शायद आज वही वजह है कि कॉन्ग्रेस चीन की नापाक हरकतों पर भी चुप्पी साधे हुए है। यूपीए के अपने पहले कार्यकाल के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने उच्च स्तरीय सूचनाओं और उनके बीच सहयोग करने के लिए बीजिंग में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 

हिंसा के लिए चीन जिम्मेदार, LAC की स्थिति के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: भारत ने चीन के आरोपों को नकारा

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के उस दावों को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें भारतीय सेना पर अनर्गल आरोप लगाए गए थे। चीन ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को बयान जारी कर भारत पर आरोप लगाए थे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि गलवान घाटी को लेकर स्थिति ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है और चीन द्वारा इसके साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारत ने कहा है कि न तो चीन का दावा समर्थन के लायक है और न ही ये इतिहास के अनुरूप है, इसीलिए भारत इसका विरोध करता है। विदेश मंत्रालय ने खुलासा किया कि मई के शुरुआत से चीनी सेना लगातार व्यवधान पैदा कर रही है और इलाक़े में तनाव भड़काने में लगी हुई है। साथ ही ये भी स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत ने उस क्षेत्र में जितने भी निर्माण-कार्य किए हैं, वो सभी LAC के भारतीय सीमा के अंतर्गत हुए हैं।

विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि मई के ही मध्य में चीनी सेना ने वेस्टर्न सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास किया, जिसका उसे जवाब दिया गया। बताया गया है कि 6 जून को दोनों पक्षों के बीच बैठक कर के तनाव कम करने के लिए समझौता भी कर लिया गया था लेकिन चीनी बाज नहीं आए और उन्होंने अवैध रूप से निर्माण कार्य जारी रखा, इस पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई और हिंसा व क्षति का कारण भी वही बना।

हालाँकि, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष को फोन कर के 15 जून को ही बता दिया था कि हालिया तनाव के लिए चीन जिम्मेदार है और उसे सीमा पर अपनी गतिविधियों की समीक्षा करनी चाहिए। दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति भी जताई गई थी कि इस मामले को जिम्मेदारी के साथ सुलझाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन को चेताया है और कहा कि भारत अपनी जमीन की रक्षा करने में सक्षम है।

पीएमओ ने भी इस मुद्दे पर कहा था कि जिन्होंने भारतीय सरजमीं में घुसने की कोशिश की, उन्हें भारत माता के वीर सपूतों ने करारा जवाब दिया। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि हमारे जवान हमारी सीमाओं की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पीएमओ ने कहा है कि भारतीय क्षेत्र की क्या परिभाषा है, ये आधिकारिक नक़्शे से तय होता है। पिछले 60 साल में किस तरह से देश की 43,000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन के कब्जे में चली गई, इस बारे में भी सभी दलों को बताया गया।

J&K: कुलगाम में सुरक्षाबलों-आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर, कई और के छिपे होने की खबर

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना ने एक आतंकी को ढेर कर दिया। इसके बाद से आसपास के क्षेत्र में सुरक्षाबलों का आतंकियों के खिलाफ सर्च अभियान जारी है। वहीं सेना को इलाके में दो से तीन और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है।

जानकारी के मुताबिक कुलगाम के लखड़ीपोरा में सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसकी जानकारी मिलते ही सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर उनके ऊपर फायरिंग शुरू कर दी।

सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करने से पहले आतंकियों से समर्पण करने की अपील की, लेकिन इसके बाद भी आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग जारी रखी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालकर एक आतंकी को ढेर कर दिया। इलाके में कई और आतंकियों के छिपे होने की आशंका के चलते सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है।

आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (19 जून, 2020) को कश्मीर के अवंतीपोरा और शोपियाँ जिले में सुरक्षा बलों ने मस्जिद में छुपे 2 आतंकियों के साथ-साथ कुल 8 आतंकियों को ढेर कर दिया था, जिसमें सेना के जवानों ने शोपियाँ जिले में पाँच और पांपोर जिले में तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था। ये सभी आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हुए थे।

दरअसल दो आतंकी अपने आप को बचाने के लिए मिज गाँव में स्थित जामा मस्जिद के अंदर छुप गए थे। धर्म स्थल का सम्मान करते हुए सुरक्षाबलों ने आतंकियों से सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद मस्जिद को कोई नुकसान न पहुँचे इस बात का ध्यान रखते हुए सुरक्षाबलों ने फायरिंग या आईईडी का इस्तेमाल नहीं किया।

बल्कि आँसू गैस के गोलों के जरिए शुक्रवार की सुबह स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के कमांडो मस्जिद के अंदर घुस गए और दोनों आतंकियों को मार गिराया और उनकी लाश को कब्जे में ले लिया था।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने 13 जून को दो आंतवादियों को मार गिराया था। मारे गए दोनों आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन के थे। उनके पास से सेना ने गोला-बारूद, 2 पिस्तौल और 3 ग्रेनेड भी बरामद किए थे।

एक साल बाद भी खुला घूम रहा है शृंखला यादव का हत्यारा: दिनदहाड़े की थी निर्मम हत्या, माँ को आज भी न्याय की उम्मीद

छत्तीसगढ़ की श्रृंखला यादव की निर्मम हत्या को एक साल हो चुका है। शृंखला की उम्र मात्र 17 साल थी, जब कई दिनों से उसका पीछा कर रहे उन्हीं के इलाके में रहने वाले इशांत ठाकुर नामक युवक ने खेती में इस्तेमाल किए जाने वाली कुदाल से शृंखला यादव पर हमला कर दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी थी। जून 15, 2019 को रिसाली निवासी शृंखला यादव का अस्पताल में निधन हो गया था।

मृतक की माँ ममता यादव ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि जब उनकी बेटी के हत्यारे इशांत ठाकुर से दिनदहाड़े की गई इस हत्या का कारण पूछा गया तो उसने सीधा सा जवाब जवाब दिया – “क्योंकि वो पट नहीं रही थी।”

शृंखला यादव की माँ का कहना है कि आरोपित पक्ष ने पूरी सामर्थ्य लगाकर इशांत को जमानत पर रिहा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के हत्यारे को यह अच्छी तरह से पता था कि वह नाबालिग है और वह न्यायिक प्रक्रिया के इस कमजोर पक्ष का फायदा उठाकर आसानी से बाहर भी हो जाएगा, और यही बात ध्यान में रखते हुए उसने इतना जघन्य अपराध करने की योजना भी बनाई थी।

शृंखला के परिजन आज भी न्याय की गुहार लगा रहे हैं जबकि नाबालिग हत्यारा अब बालिग हो चुका है। उनकी बेटी का हत्यारा आज भी खुलेआम घूम रहा है जबकि शृंखला के माँ-बाप अपनी व्यथा के साथ अकेले छोड़ दिए गए हैं।

जिस दिन यह हत्या की गई, उस दिन शृंखला यादव की हत्या का आरोपित इशांत ठाकुर की उम्र तब 17 साल 11 महीने और 19 दिन थी, यानी वह शृंखला यादव को क्रूरता से मारने के कुछ ही दिन बाद वह बालिग़ होने वाला था। इशांत ठाकुर आज जमानत पर बाहर घूम रहा है।

नतीजा यह हुआ कि मृतक शृंखला यादव की माँ आज तक भी न्याय व्यवस्था में विश्वास कर रही है, और उन्हें यकीन है कि उनकी बेटी के हत्यारे को जेल की सलाखों में भेजा जाएगा।

दिनदहाड़े की थी शृंखला यादव की हत्या

सत्रह वर्षीय शृंखला डॉक्टर बनना चाहती थी। जून 13, 2019 की दोपहर 3 बजे जब वो स्कूटी से सिविक सेंटर कोचिंग जा रही थी तभी पहले से उसका पीछा कर रहे आरोपित इशांत ठाकुर ने घर से करीब एक किलोमीटर दूर छत्रपति शिवाजी नगर गाँधीपुरम के पास उसका रास्ता रोका और शृंखला के सिर पर कुदाली (खेत में मिट्टी खोदने वाले हथियार) से हमला कर दिया।

इस हमले से शृंखला का सर फट गया और उसका एक हिस्सा बाहर आ गया। इसके बाद लहूलुहान शृंखला को करीब 85 फीट घसीटते हुए एक मकान के पीछे छोड़कर फरार हो गया। इस हमले से घायल शृंखला यादव 2 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझती रही और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

बेटी की मौत को एक वर्ष पूरा होने पर ऑपइंडिया से बातचीत में शृंखला की माँ ने बताया कि उनकी बेटी की हत्या करने वाला इतना शातिर और परिपक्व था कि उनकी बेटी की हत्या करने के बाद जब शृंखला का शव घर पर आया था और लोग जानना चाह रहे थे कि क्या हुआ, तब उसके बारे में पूछताछ करने वालों में उसका हत्यारा इशांत ठाकुर भी शामिल था।

जून 13, 2019 को जिस दिन आरोपित इशांत ठाकुर को गिरफ्तार किया गया, तब उसकी उम्र 17 साल 11 महीना थी। 19 जून को उसका जन्मदिन था और वह 18 साल का हो गया। इसका फायदा उठाकर ही वह कुछ ही दिनों में जमानत पर रिहा हो गया और आज बाहर घूम रहा है।

अपनी बेटी के लिए न्याय की उम्मीद लगा रही ममता यादव का कहना है कि 5 नवम्बर को हत्यारोपित इशांत को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई थी। उन्होंने बताया कि बाल न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद दिवाली के ठीक एक दिन बाद कोर्ट खुलते ही पहले ही दिन सेशन कोर्ट में आरोपित पक्ष द्वारा एप्लीकेशन लगाईं गई। फौरन तकरीबन 300 पन्नों की फ़ाइल बाल न्यायालय से मँगाई गई और मजिस्ट्रेट ने एक ही दिन में उसे जमानत भी दी, और 6 नवम्बर को इशांत ठाकुर रिहा भी हो गया।

ममता यादव ने कहा कि बाल न्यायलय में जहाँ उनकी बात अच्छी तरह से सुनी गई, वहीं सेशन कोर्ट में उनकी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया और ना ही उनका पक्ष सुना गया। यहाँ तक कि आरोपित को भी वकीलों जैसा लुक देकर, अपने साथ बातचीत करते हुए छुपाकर कोर्ट लाया गया था।

ममता यादव ने कहा कि जब उन्होंने मजिस्ट्रेट से इस बारे में कहा तो उन्होंने परिजनों को फैसला पसंद न आने की सूरत में हाईकोर्ट जाने की सलाह भी दी। ममता यादव का कहना है कि दिल्ली में निर्भया के बलात्कार और हत्याकांड के बाद फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की गई थी लेकिन वो आज तक न्याय के लिए भटक रहे हैं।

न्याय के लिए जंग लड़ रही ममता यादव का कहना है कि न्याय प्रणाली के कारण जिस सत्रह साल की लड़की की हत्या की गई, उसके माँ-बाप का मनोबल टूटना स्वाभाविक है फिर भी वो लोग न्याय की उम्मीद में अपनी लड़ाई जारी रख रहे हैं।

शृंखला यादव का कहना है कि उनकी लड़ाई अब सिर्फ अपनी बेटी को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस माँ को हौंसला देने के लिए है जिनकी बेटियों को इस तरह से सरेआम क्रूरता से मार दिया जाता है।

शृंखला की माँ का कहना है कि जब उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए न्याय की माँग को आगे बढ़ाना चाहा तो आरोपित युवक अपने साथियों के जरिए उन्हें ऐसे संदेश दे रहा है कि ‘न्याय तो हो चुका है, अब आपको कौन सा न्याय चाहिए?’

ऑपइंडिया से बात करते हुए ममता यादव ने कहा कि इन्स्टाग्राम पर भेजे गए उन्हें इस सन्देश के पीछे उसी युवक का हाथ हो सकता है और ‘न्याय हो गया’ के रूप में उसका अर्थ शृंखला की हत्या से है।

वहीं, शृंखला के लिए न्याय माँग रहे उसके परिजनों का कहना है कि उसके हत्यारे इशांत ठाकुर को मिली जमानत के पीछे राजनीतिक कारण भी हैं। यदि छत्तीसगढ़ में कोई चुनाव आने वाला होता तो शायद उन्हें सुनने वाले कई लोग मिल जाते लेकिन क्योंकि ऐसी फिलहाल कोई सम्भावना नहीं है इस कारण किसी को उनकी परवाह भी नहीं है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य की घटनाएँ कभी मुख्यधारा की मीडिया में चर्चा में नहीं होती हैं, इसका फायदा यहाँ पर कुछ लोग मनमाने तरीके से उठा रहे हैं।

शृंखला यादव के जैसे देशभर में न जाने कितने ही ऐसे मामले हैं, जिनमें लोग आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं जबकि उनकी आवाज तक सुनने को कोई राजी नहीं है। मृतक शृंखला की माँ ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को कई ऐसे पत्र भी भेजे हैं, जिनमें उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के कारण ही न्याय ना मिल पाने का जिक्र किया है। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें कहीं से कोई जवाब और आश्वासन नहीं मिल पाया है।

बेटी की हत्या को एक साल होने पर ममता यादव ने अब सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखने का रास्ता अपनाया है। इन्स्टाग्राम से लेकर फेसबुक और ट्विटर पर वह वीडियो और लेखों के जरिए इसी उम्मीद में वास्तविकता को सबके सामने रखने का प्रयास कर रही हैं कि उनकी इस लड़ाई से और लोग भी जुड़ सकेंगे, और एक दिन उनकी बेटी के गुनहगार को जरूर सजा मिल सकेगी।

‘कॉन्ग्रेसी’ एक्टिविस्ट ने फर्जी तस्वीरें शेयर कर सेना को किया बदनाम: थाई सैनिक को बताया लद्दाख में घायल भारतीय जवान

लद्दाख के गलवान घाटी में चीन और भारत के बीच हुए खूनी हिंसक झड़प हुए झड़प पर एक्टिविस्ट डॉक्टर आनंद राय ने शनिवार (20 जून, 2020) को एक घायल सैनिक की फ़ोटो को पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह फ़ोटो एक घायल भारतीय सैनिक की थी जो की लद्दाख में चीनी सैनिकों की क्रूरता से बच गए थे।

ऊपर दिए गए इस ट्वीट में आप देख सकते हैं, कि डॉ राय ने दावा किया कि यह तस्वीर उन सैनिकों में से एक की है जिन पर चीनी सैनिकों द्वारा गलवान घाटी में हमला किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनके पूरे शरीर पर कीलों (Nail) से की गई चोटें हैं। वहीं प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों को हथियार उठाने से क्यों रोका गया?

हालाँकि, डॉ राय के द्वारा दावा की गई तस्वीर थाई सैनिकों की है, जो 2016 की है। यानी 4 साल पुरानी।

यह तस्वीर 2016 के एक ब्लॉग में देखी गई थी। जिसमें थाई सैनिकों के प्रशिक्षण के बारे में बात की गई थी। जहाँ एक प्रशिक्षण के दौरान थाई सैनिकों को लगी चोट की फोटो को उसमें दिखाया गया था। वहीं इस तस्वीर की एक रिवर्स खोज के दौरान यह पता चला कि ई-कॉमर्स वेबसाइट पर एक ऑनलाइन शॉपर ने भी इस तस्वीर को अपनी प्रोफाइल पिक्चर के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

जैसा कि देखा जा सकता है, एक मलेशियाई शॉपिंग वेबसाइट गूगल सर्च में लगातार इस तस्वीर को दिखाती है। वहीं इस साइट पर एक उपयोगकर्ता ने एक साल पहले 25 जून, 2019 को एक रिव्यु लिखा था।

डॉ. आनंद राय ने इससे पहले भी किए कई फर्जी ट्वीट्स

डॉ.राय ने अगस्त 2019 में बाबा रामदेव के सहयोगी को कांफीडेंशियल मेडिकल रिपोर्ट प्रकाशित कर गलत तरीके से फँसाने की थी। उन्होंने रामदेव के सहयोगी आचार्य बालगोविंद की झूठी रिपोर्ट को प्रकाशित किया था। जिसमें यह दावा था कि बाबा रामदेव के एसोसिएट और पतंजलि आयुर्वेद के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण मारिजुआना धूम्रपान करते हैं। डॉक्टर ने जानबूझकर एक अलग व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट का इस्तेमाल कर उसमें नाम बदल कर आचार्य बालकृष्ण को बदनाम करने की कोशिश की थी।

इससे पहले, उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बारे में एक अश्लील झूठ फैलाया था। जहाँ उन्होंने आरोप लगाया था कि वह किसी वीरेंद्र देव दीक्षित नाम के एक बाबा के आश्रम से ‘प्रसाद’ लेने गई थी। अपने इस झूठ को साबित करने के लिए उन्होंने स्मृति ईरानी के साथ उस बाबा की फ़ोटो भी फोटोशॉप करके लगा दिया था।

आपको बता दें उस बाबा को हाल ही में यूपी और दिल्ली पुलिस द्वारा 47 महिलाओं और छह नाबालिग लड़कियों को बचाने के लिए उनके द्वारा चलाए गए तीन केंद्रों पर छापा मारा था। उन पर इन लड़कियों को अमानवीय रूप से सीमित रखने का आरोप लगाया गया है, जो रिपोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न के भी थे।

गौरतलब है कि डॉ. आनंद राय कॉन्ग्रेस के टिकट पर 2018 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था। हालाँकि, टिकट नहीं मिलने के बाद भी वे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ एक करीबी रिश्ता बनाए रखते हैं, और उनका फेसबुक पेज इस तथ्य का प्रमाण है।