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मई की 30 घटनाएँ जब मजहबी भीड़ ने हिंदुओं को बनाया निशाना, मंदिरों पर भी हमला: बांग्लादेश छोड़ने के लिए धमकाया

पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर अत्याचार बहुत तेजी से हो रहा है। इसका खुलासा बांग्लादेश के द वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन चैप्टर के एक प्रेस नोट से हुआ है। इस नोट में केवल मई की उन घटनाओं का उल्लेख है जब इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं को निशाना बनाया।

इस सूची में मंदिर विध्वंस, धर्मांतरण, बलात्कार और हिंदू लड़कियों के अपहरण के अलावा 4 से ज्यादा ऐसे मामले हैं, जब बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या हुई। 12 मामले लूटपाट और जमीन हड़पने के हैं।

  1. 1 मई को बांग्लादेश के गोपालगंज के कोटलिपारा उपजिला में लखीरपारा गाँव में लगभग 50 स्थानीय कट्टरपंथियों ने अनंत विश्वास के घर पर हमला किया। एक छोटे से पेड़ की शाखा को तोड़ने के आरोप में। उनके परिवार के सदस्यों को देश न छोड़ने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और परिवार के लोगो को गंभीर रूप से घायल कर गए।
  1. 1 मई की रात ही उपजिला के चेयरमैन एमए मोईद फारूक के नेतृत्व में कुछ गुंडों ने बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिला के जुरी थाने के अंतर्गत आने वाले अमेट गाँव में श्री दीनबंधु सेन के मुर्गीपालन फार्म पर हमला किया।
  1. इसके बाद 1 मई को ही एक अन्य मामले में हिंदू लड़के रोनी सत्यार्थी को इस्लाम व पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक पोस्ट लिखने के झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच कई उपद्रवियों ने रोनी के घर में लूटपाट की और हमला किया।  साथ ही उसपर घर छोड़कर जाने का भी दबाव बनाया गया।
  1. चार मई को डॉ. काजल कुमार भौमिक पर घर लौटते हुए स्थानीय मार्केट कोमिला में आतंकियों ने हमला किया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और कोमिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया।
  1. 4 मई को ही स्वप्न चंद्र सरकार पर हमला हुआ और उनकी लाश सोमेश्वरी नदी में तैरती मिली। पुलिस व फायर सर्विस कर्मियों की मदद से शव को निकाला गया और फिर उसे परिजनों को सौंपा गया। जाँच में पता चला कि स्वप्न चंद्र की बॉडी मिलने से 33 घंटे पहले वो दुर्गापुर के नेट्रोकोना से गायब हुए थे।
  1. 4 मई को बांग्लादेश पुलिस ने इस्लाम का अपमान करने के आरोप में हबीगंज के बनियाचांग उपज़िला के सुबिदपुर गाँव के राजकुमार सरकार के बेटे संजय सरकार को गिरफ्तार किया।
  1. इसी तरह एक अन्य मामले में 4 मई को कुछ स्थानीयों ने दुलान राजभर के शव को एक पास की नदी में तैरते हुए पाया। इसके बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
  1. 5 मई को पुलिस ने ढाका के नवाबगंज उपजिला में मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में हिंदू युवक राकेश चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया।
  1. 5 मई को ही कुछ अज्ञात आतंकियों ने कार्तिक को मारने के लिए उसके घर पर पीछे के रास्ते से धारदार हथियारों से हमला किया। हालाँकि, घटना को अंजाम देने से पहले कार्तिक के घरवाले जाग गए और उन्होंने शोर मचा दिया। जिससे सभी आतंकी भाग गए।
  2. 5 मई को 15-20 को कुछ स्थानीय आतंकियों ने चितरंजन के घर पर कब्जा करके वहाँ नई इमारत खड़ी करने के लिए हमला किया। इस हमले में चितरंजन, उनकी दो बेटी पिंकी देवी और काली देवी बुरी तरह घायल हो गए। बाद में उन्हें सीता कुंदा सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।
  1. 5 मई को कालीदास के बेटे रविदास को कुछ स्थानीय बदमाशों ने मारा। बाद में रात के समय उसके घर को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा घर की महिलाओं को भी परेशान किया।
  1. 7 मई को स्थानीय लैंड माफिया मिंटू मियाँ और उसके गुंडों ने 10 हिंदू परिवारों पर नरैल जिले के कालिया उपजिले में हमला किया। इस घटना में पीड़ितों के घर तोड़े गए, पेड़ों को काटा गया और उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी गई।
  2. 8 मई को आतंकियों ने सुनील चंद्रा नाम के एक दिहाड़ी मजदूर को मार डाला। बाद में उसे बांस की झाड़ी में छोड़कर वहाँ से फरार हो गए। उसके शरीर पर घाव के काफी निशान मिले थे। 
  1. 9 मई को रुबेल मियाँ ने अपने साथियों के साथ ब्राह्मणबारिया दूर के नासिरनगर उपज़िला के नाथपारा गाँव में रंजीत देबनाथ के घर पर हमला किया। इस घटना में रंजीत और उनका परिवार बुरी तरह घायल हो ङए। बाद में उन्होंने घर में घुसकर लूटपाट की और सोने-चांदी के जेवहरात चुराए। साथ ही 2 लाख 10 हजार टका कैश ले गए।
  1. 9 मई को एक अन्य मामले में माटिन गंग्रा के ड्रग माफिया ने सुधीर कुमार के घर पर हमला किया और उनका घर व जायदाद  हड़पने की कोशिश की।
  1.  10 मई को सुनामगंज जिले में छतक नगर पालिका के टाटीकोना गाँव में फेसबुक पर टिप्पणी को लेकर आतंकवादियों ने हिंदू परिवारों पर निशाना साधा। साथ ही उनके घरों और मंदिरों पर भी हमला बोला। इस भीषण हमले में कम से कम 10 हिंदू घायल हो गए।
  1. 10 मई को ब्राह्मणबारिया जिले के नसीरनगर उपज़िला उप-पंजीयक कार्यालय के कुछ सदस्यों ने सोने के एक हिंदू व्यापारी मिहिर देव पर हमला किया और उनसे उनका सभी कीमती सामान लूट लिया।
  1. 12 मई को बंशारामपुर यूनियन के पूर्व सदस्य मोहम्मद उमर फारूक ने श्मशान से टैगोर दास नामक एक हिंदू के शव को बलपूर्वक कब्रिस्तान में ले जाकर दफन कर दिया। ऐसा उमर ने केवल हिंदू धर्म और हिंदू मान्यताओं को कथित तौर पर नीचा दिखाने और अपमानित करने के लिए किया।
  1. 13 मई को कुरीग्राम जिले के फूलबाड़ी तेनोडंगा संघ के कुरुशफेरुशा गाँव में कुछ स्थानीयों ने हिंदुओं की संपत्ति हड़पने के इरादे से उनपर हमला किया। कम से कम 10 हिंदू घायल हो गए। इसके बाद उनके घरों में तोड़फोड़ की गई।
  1. 13-14 मई को मौलवीबाजार जिले के उप जिले कमलगंज में एक लड़की संचिता शब्दाकार ने लगातार एक मजहबी युवक द्वारा अपहरण और यौन शोषण से तंग आकर सुसाइड कर ली। इस मामले में आरोपित की पहचान मधु मियाँ के रूप में हुई थी। जिसपर आरोप था कि उसने निकाह के लिए पीड़िता को धमकाया, उसका अपहरण किया और यौन शोषण किया। इनके सबसे अलावा मधु मियाँ ने लड़की के पिता को भी धमकाया।
  1.  14 मई को उपद्रवियों ने 14 मई (गुरुवार) को नयन मल्लिक के घर के खलिहान में आग लगा दी। इस घटना में मल्लिक की गाय और एक सांड की मौत हो गई, जबकि अन्य दो गाय 80 प्रतिशत तक जल गईं।
  1. 15 मई को भोला जिले में ईशनिंदा की अफवाह फैलाकर स्थानीय संघ के अध्यक्ष और उनके गुंडों ने लगभग 20 अल्पसंख्यक हिंदू पुरुषों को संघ परिषद कार्यालय में ले जाकर हमला किया। पुलिस चुप होकर केवल देखती रही।
  1. 16 मई को पटुआखली जिले के कालापारा के पखीमारा गाँव में एक बदमाश सुल्तान और उसके गुंडों ने एक अल्पसंख्यक हिंदू परिवार की जमीन हड़पने के लिए उनपर हमला कर दिया। इसमें 3 हिंदू महिलाएँ गंभीर रूप से घायल हो गई।
  1. 17 मई को कुछ अज्ञात बदमाशों ने दीनाम अपसिला के इन्सानगंज जिले के उझांदल गाँव के बौल रणेश चक्रवर्ती टैगोर (55) के घर में आग लगा दी। पुलिस अभी तक अपराधियों की पहचान नहीं कर पाई है।
  1. 18 मई को पुलिस ने ब्राह्मणबारिया जिले के नसीरनगर थाने के तिलपारा से एक हिंदू किसान मोहन लाल दास (48 वर्ष) का शव बरामद किया। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, बांग्लादेश चैप्टर की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हिंदू किसान का शव रसूलपुर के एक जूट के खेत में पाया गया था।
  1. 19 मई को बागोर जिले के मोरेलगंज के अंब्रिया गाँव में समीर हलधर (55) नाम के हिंदू पुजारी और उनकी पत्नी पर स्थानीय चेयरमैन शाहजहाँ अली खान और उनके गुंडे ने उनके आवासीय घर और जमीन पर कब्जा करने के लिए हमला किया।
  1. 25 मई को पटुआखाली जिले के एक हिंदू छत्र लीग कार्यकर्ता तपस दास की बर्लिस शेर-ए-बांग्ला मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान राजनीतिक बदला लेने के लिए हत्या कर दी गई थी।
  1. 28 मई को सुमा विष्णु नाम की हिंदू लड़की की पुरखों की जमीन हड़पने के लिए लोकल लैंड माफिया मोहम्मद अब्दुस सलाम ने उसपर हमला किया। इस दौरान लड़की के रोकने पर सलाम ने उसके सर पर लोहे की रॉड पर हमला किया।
  1. 28 मई को बोगरा जिले के शेरपुर पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले शहर घोषपारा में आतंकवादियों ने बिपुल महंत के एक हिंदू व्यापारी पर हमला किया। बदमाशों ने उनके घर में तोड़फोड़ की और घर में रखे गहने और अन्य कीमती सामान लूट लिया। हमले में उनके परिवार के सदस्य घायल हो गए।
  1. 29 मई: सतखीरा जिले के कालीगंज के फतेहपुर गाँव में झूठे आरोप में मोहम्मद अब्दुल जलील शफीकुल इस्लाम, मोहम्मद मामून और नकी खातून ने श्रीधाम विश्वास और सरल विश्वास के घर पर हमला किया और उन्हें देश छोड़ने को मजबूर किया। 

उल्लेखनीय है कि इस तरह अत्याचार बांग्लादेश में बेहद आम हो गए हैं। पिछली रिपोर्ट में हमने बताया भी था कि कैसे वहाँ इस्लामिक भीड़ ने मई महीने में कम से कम 10 मंदिरों को निशाना बनाया और हिंदुओं पर अत्याचार किए। यहाँ बता दें पाकिस्तान की तरह यहाँ पर हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता है।  

हुसैन दलवई, नीरज भारती, कलैगनार TV, सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे: गलवान में सैनिकों के बलिदान पर बिगड़े बोल

हुसैन दलवई कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। नीरज भारती का फेसबुक प्रोफाइल बताता है कि वे हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस के विधायक थे। कलैगनार टीवी का स्वामित्व उस डीएमके के पास है जो तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस की सहयोगी है। गलवान में बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम पर अनर्गल बयानबाजी के मामले में ये सब एक ही मोर्चे पर खड़े हैं।

हुसैन दलवई का कहना है कि चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा है। भारतीय सेना को अपमानित करते हुए कहा है कि उन्हें वहाँ लाठी लेकर क्यों भेजा गया, क्या वहाँ आरएसएस की कोई शाखा थी? महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता दलवई ने कहा कि भारत-चीन के बीच हुई झड़प में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा, सिर्फ हमारे जवान मारे गए हैं।

उन्होंने कहा, “हमने जवानों को लाठियाँ देकर क्यों बॉर्डर पर भेजा, क्या वहाँ RSS की शाखा थी? ऐसा है तो सैनिकों को क्यों आरएसएस के लोगों को ही बॉर्डर पर भेजो। वे सीमा पर पहरा देंगे।”

ये वही हुसैन दलवई हैं जिनसे मार्च में कोरोना वायरस को लेकर पत्रकारों ने सवाल किया था तो उन्होंने ‘करो ना प्यार है करो ना प्यार है’ गाना शुरू कर दिया था।

डीएमके के टीवी चैनल ने चीन के हमले को बताया जायज

राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) के आधिकारिक ‘कलैगनार टीवी’ (Kalaignar TV) पर प्रसारित एक शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वरवणई सेंथिल (Varavanai Senthil) नाम के होस्ट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पर गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए चीनी आक्रामण का बचाव करते देखा जा सकता है।

वीडियो में टीवी एंकर सेंथिल को चीन का समर्थन करते हुए करते हुए सुना जा सकता है कि भारतीयों के खिलाफ पीएलए सैनिकों द्वारा किया गया हमला मोदी सरकार की कुछ नीतियों की प्रतिक्रिया थी, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करना।

हर प्रकार की ‘कॉन्सपिरेसी थ्योरी’ को पीछे छोड़ते हुए डीएमके के इस टीवी चैनल के एंकर का कहना है, “मोदी ने इजरायल के साथ लद्दाख और हिमाचल प्रदेश को यहूदी बस्तियों के रूप में बनाने के लिए एक अनौपचारिक समझौता किया है, इसे रोकने के लिए चीन ने कार्रवाई की है। चीन को यह काम सिर्फ इसलिए करना पड़ा क्योंकि मोदी ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा रद्द कर दिया और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया।”

‘चीन ने कुछ नहीं किया होगा… पुलवामा की तरह ही..’

विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले हिमाचल प्रदेश के पूर्व कॉन्ग्रेसी सरकार में संसदीय सचिव रहे नीरज भारती ने तो सारी हदें पार करते हुए अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल पर बिहार रेजिमेंट के जवानों को साजिशाना तरीके से ‘मरवाने’ तक की बात कहते हुए लिखा है कि चीन ने कुछ किया ही नहीं होगा।

नीरज भारती ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है – “मुझे पूरा यकीन है कि बिहार में चुनावों को देखते हुए बिहार रेजिमेंट चाइना बॉर्डर पर लगाई गई और जान-बूझकर बिहार रेजिमेंट के जवानों को किसी शातिर तरीके से मरवाया गया है, ताकि बिहार चुनावों में राष्ट्रवादी माहौल बनाया जा सके। क्योंकि चाइना बॉर्डर पर कभी खून-खराबा होता ही नहीं है और इस बार भी चाइना ने कुछ नहीं किया होगा, बल्कि जैसे पुलवामा में पूरी सख्ती होने के बावजूद एक कार जवानों के काफिले में घुस गई थी और बहुत से जवान मारे गए थे, वैसे ही किसी चाल के तहत इस बार भी बिहार रेजिमेंट के और साथ में कुछ पंजाब रेजिमेंट के जवानों को मरवाया गया है… पर अक्ल के अंधे अंधभक्तों को ये बात समझ नहीं आएगी।”

नीरज भारती और विवादों का इतिहास पुराना है। ये वही नीरज भारती है जिनके खिलाफ गत अप्रैल माह में हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ पुलिस थाने और पंचरुखी पुलिस स्टेशन में हिन्दुओं के खिलाफ बेहूदा टिप्पणी करने पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने को लेकर FIR दर्ज हुई थी।

2018 में नीरज भारती तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने भाजपा नेता स्मृति ईरानी को लेकर ‘बॉडी शेमिंग’ बेहूदा टिप्पणी की थी।

फेसबुक पर विवादित पोस्ट के जरिए लोकप्रियता तलाशने वाले नीरज भारती ने जन्माष्टमी पर भी श्रीकृष्ण भगवान की एक फोटो फेसबुक पर शेयर की थी, जिसमें वह पेड़ पर बैठे हैं और नीचे नग्न अवस्था में गोपियाँ थीं।

कोरोना वायरस और चीन के साथ हुई ताजा झड़प ने नीरज भारती को एकबार फिर से सुर्ख़ियों में आने में मदद की है। नीरज भारती का फेसबुक एकाउंट ऐसे ही तमाम बेसिर-पैर के आरोपों से भरा पड़ा है।

इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर देव कुमार ने भी चीन के साथ झड़प की तुलना बिहार चुनाव से की थी। चीन के साथ हुई झड़प को केंद्र सरकार का काम बताते हुए कहा था कि सरकार चीन के साथ बिहार चुनावों की वजह से लड़ रही है। उन्होंने यह भी दवा किया था कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पुलवामा का आतंकी हमला करवाया गया था।

सोनू निगम ने लगाया सलमान खान पर आरोप: म्यूजिक इंडस्ट्री में एकाधिकार चलाते माफियाओं का किया खुलासा

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री कई तरह की हलचल है। आए दिन बॉलीवुड के अलग-अलग सेलेब्रिटीज़ नेपोटिज्म और गुटबाजी को लेकर खुल कर अपनी बात रख रहें हैं। नए खुलासे कर रहे हैं। वहीं अब इसी कड़ी में गुरुवार (18 जून, 2020) को दिग्गज सिंगर सोनू निगम ने अपना एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया हैं।

अपनी वीडियो में उन्होंने बॉलिवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री में म्यूजिक माफिया के खेमेबाजी का खुलासा किया हैं। साथ ही प्रॉफेशनल सिंगर्स को परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया है। इस वीडियो की शुरुआत उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के दुखद और असामयिक मौत पर प्रकाश डालते हुए की है।

वीडियो की शुरुआत में ही सिंगर सोनू निगम ने इस बात को स्पष्ट किया कि वो अपनी इस वीडियो के जरिए म्यूजिक प्रोडक्शन कंपनियों से रिक्वेस्ट करना चाहते हैं। अपने व्लॉग में सोनू निगम ने अपने फैंस से कहा, “क्योंकि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है। आप एक अभिनेता की मौत के बारे में सुन रहें है। कल को आप ये किसी गायक के बारे में ऐसा सुन सकते हैं, किसी संगीतकार के बारे में या किसी गीतकार के रूप में भी सुन सकते हैं क्योंकि एक्टिंग इंडस्ट्री की तुलना में म्यूजिक इंडस्ट्री में काफी बड़े माफिया हैं।”

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You might soon hear about Suicides in the Music Industry.

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वे कहते हैं “मैं बहुत लकी हूँ कि कम उम्र में यहाँ आया था और इन सबके चंगुल से निकल गया लेकिन प्रोडक्शन कंपनियों के रुख, युवाओं और टैलेंटेड सिंगर्स की मुश्किलों को देखकर मुझे दुख होता हैं। निर्माता, निर्देशक, संगीतकार किसी कलाकार के साथ काम करना चाहेंगे लेकिन म्यूजिक कंपनी कहेगी ये हमारा आर्टिस्ट नहीं है।”

सोनू निगम रिक्वेस्ट करते है, “मैं समझ सकता हूँ कि आप लोग (म्यूजिक कंपनी) बहुत बड़े लोग हो और आपके पास फ़िल्म और रेडियो इंडस्ट्री का पूरा कंट्रोल हैं, लेकिन प्लीज ऐसा मत करिए।” म्यूजिक इंडस्ट्री पर केवल दो कंपनियों का कब्जा है। उनके हाथों में ये ताकत है कि इसे गाने में इसे लो और इसे मत लो। बिजनेस करना ठीक है, लेकिन इस तरह रूल करना ठीक नहीं है।

ऐसे माफियाओं पर आरोप लगाते हुए सोनू निगम कहते है, “कभी-कभी देखता हूँ मैं कि नए संगीतकार, नए गीतकार, नए गायक खून के आँसू रोते हैं। अगर उन्हें कुछ हो गया कल को, तो आपके ऊपर ही प्रश्नचिह्न उठेगा। लेकिन ऐसा मत कीजिए, दुआ-बद्दुआ बहुत बड़ी चीज़ होती है, उनको टॉर्चर करना बंद कर दीजिए।”

बिना किसी एक्टर का नाम लिए, सोनू निगम सलमान खान की तरफ इशारा करते हुए अपने बारे में कहते हैं कि उन्हें और अरिजीत सिंह को कई बार उनके खुद के गानों को गाने के लिए रोका गया हैं। सोनू ने पूछा, “ये क्या है? आप अपनी पावर का इस तरह से इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? मेरे कितने गाने मैंने गा रखे हैं जो डंप हो चुके हैं। ये बहुत शर्मिंदगी पैदा करता है। मैं किसी से काम नहीं माँगता। पर वो मुझे बुला कर मुझसे गाना गवा कर फिर उसे डंप कर देते हैं। क्या ये कोई मजाक चल रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि मैं 1989 से म्ज़ूजिक इंडस्ट्री में हूँ। मेरे साथ ऐसा कर सकते हो तो छोटे बच्चों के साथ में क्या-क्या नहीं कर रहे होओगे आप लोग।

सोनू निगम ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि, “आप लोग एक ही गाने को 9-9 लोगों से गवाते हो। यह सही है?” सोनू निगम ने म्यूजिक प्रोडक्शन कंपनियों से आग्रह किया कि ये इंडस्ट्री में जो नए बच्चे हैं, आपकी सहायता चाहते हैं। इंसानियत के नाते थोड़ा सा दयालु बनिए।

उन्होंने दुखी होकर बोला कि, “एक गाने को 10 सिंगर से दस बार गाना गवाया जाता है, लेकिन उन सभी को बाद में डंप कर दिया जाता है। और फिर आप चाहते हो आपके लिए 11वां व्यक्ति गाना गाए। क्या इस तरह से गायकों, गीतकारों और संगीतकारों के साथ व्यवहार करना गलत नहीं है?”

उन्होंने आगे बताया कि किस तरह टैलेंटेड सिंगर अवसरों की तलाश में रह जाते हैं। अगर वें इनमें से किसी भी कंपनी के साथ काम नहीं करना चाहते हैं। इनके द्वारा गायकों को अपने जूते के नीचे रखा जाता हैं। सिंगर्स को हमेशा इन संघर्षों से जूझना पड़ता हैं।”

सोनू निगम ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि लोग इस वीडियो को देखने के बाद गुस्सा नहीं होंगे। मैं स्पष्ट कह रहा हूँ कि गायक, संगीत निर्देशक, और गीतकार जिन्होंने इन चीजों को झेला हैं, वे सभी मेरी बातों से से सहमत होंगे। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर भी ख़ुश नहीं हैं। उन्हें उनकी मर्ज़ी का म्यूज़िक बनाने नहीं दिया जा रहा।”

सोनू निगम ने जोर देते हुए कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री सिर्फ दो लोगो के हाथों में नहीं होनी चाहिए। अगर म्यूजिक कम्पनियाँ ही सब कुछ डिसाइड करती हैं तो हुनर की जगह बिल्कुल कम हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। सुशांत की आत्महत्या से अभी तक हर कोई हैरान, स्तब्ध है। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) का मुद्दा चर्चा में आ गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर और एक्टर्स के विरोध में आ गए हैं।

बातों से से सहमत होंगे। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर भी ख़ुश नहीं हैं। उन्हें उनकी मर्ज़ी का म्यूज़िक बनाने नहीं दिया जा रहा।”

सोनू निगम ने जोर देते हुए कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री सिर्फ दो लोगो के हाथों में नहीं होनी चाहिए। अगर म्यूजिक कंपनिया ही सब कुछ डिसाइड करती हैं तो हुनर की जगह बिल्कुल कम हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है। वहीं एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) का मुद्दा चर्चा में गया हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर और एक्टर्स के विरोध में आ गए हैं।

शरजील इमाम को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- राज्यों का जवाब जाने बिना नहीं दे सकते ऑर्डर

देशद्रोह के आरोपित व JNU के छात्र शरजील इमाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए आज (जून 19, 2020) सुप्रीम कोर्ट ने उसके ख़िलाफ विभिन्न अदालतों में मुकदमा चलाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि इमाम की याचिका पर सभी पाँच राज्यों के जवाब देखे बगैर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने इस संबंध में मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश से 2 सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने को कहा है। दिल्ली और यूपी हलफनामा दायर कर चुकी है। अब इस मामले में तीन हफ्ते बाद सुनवाई होगी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा, “हम अन्य राज्यों के जवाब देखे बगैर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकते।”

असम के वकील ने कहा कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और वक्त चाहिए। इस पर पीठ ने कहा, “हम समय देंगे”। इसके साथ ही पीठ ने असम, मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ संलग्न किया जाए और एक ही एजेंसी जाँच करे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

शरजील इमाम ने पिछले साल सीएए विरोधी प्रोटेस्ट के दौरान भड़काऊ बयान देकर असम को भारत से अलग करने की बात की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शरजील ने कई दिनों तक पुलिस से बचने का प्रयास किया। मगर बाद में उसकी गिरफ्तारी बिहार के जहानाबाद से हुई थी। पूछताछ में पता चला था कि शरजील भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता था। अपने इस काम के लिए उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे।

इससे पहले 26 मई को शरजील की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की थी। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह की बेंच ने असम, यूपी, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश को नोटिस जारी किया था। इन राज्यों में शरजील के खिलाफ FIR दर्ज है।

डीएस बिंद्रा के ‘लंगर’ से क्विंट की मोहब्बतें: कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या की चार्जशीट में नाम, बचाव में उतरा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों को लेकर मीडिया का एक धड़ा शुरुआत से ही इन कोशिशों में जुटा हुआ है कि किसी तरह इसे मुस्लिम विरोधी दंगा साबित किया जाए। इसी क्रम में मीडिया गिरोह न केवल मुस्लिम समुदाय के अपराधों को छिपाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि दंगों को उकसाने वाले लोगों को निर्दोष साबित करने की भी कोशिश कर रहा है

ताजा कारनामा द क्विंट ने किया है। द क्विंट ने अपने लेख के जरिए डीएस बिंद्रा नाम के उस आरोपित को बचाने का प्रयास किया है, जिस पर बकायदा चार्जशीट में आरोप लगा है कि उसने उन दंगों को भड़काने का काम किया, जिसमें कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान गई थी।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की चार्जशीट पर अपनी हालिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में हमने आपको बताया था कि हलफनामे में क्या आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में लिखा था कि षड्यंत्रकारी ये बात पहले से जानते थे कि दंगे हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों को हथियार से लैस रहने को कहा था।

चार्जशीट में कहा गया, “23 फरवरी को संयोजकों, षड्यंत्रकारियों, दंगाइयों की चांद बाग में एक बैठक हुई। इस बैठक में उन्हें लोहे की रॉड, डंडे, पेट्रोल बम आदि के साथ तैयार रहने को कहा गया। अगले दिन 24 तारीख को 1 बजे, प्लान के मुताबिक दंगे शुरू हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया। कई पुलिस वाले उस हमले में घायल हुए। कॉन्स्टेबल रतनलाल इसमें मारे गए।”

बता दें दिल्ली के हालातों को देखते हुए घटना से पहले बीट अधिकारियों को नियमित रूप से इलाके में तैनात किया गया था, ताकि कानून-व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सके। रतनलाल की हत्या के बाद, इन्हीं दो बीट अधिकारियों से पूछताछ हुई और उनके बयानों से तथ्यों का पता लगाया गया। उन्होंने खुलासा किया कि सलीम खान, सलीम मुन्ना, डीएस बिंद्रा, सुलेमान सिद्दीकी, अयूब, अतहर, शादाब, उपासना, रविशंद अन्य लोग आयोजक थे।

The Quint article shielding DS Bindra

लेकिन, ऑपइंडिया के रिपोर्ट करने के बाद, द क्विंट ने दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट पर न केवल रिपोर्ट की, बल्कि डीएस बिंद्रा को बेक़सूर साबित करने की कोशिश की।

क्विंट ने अपने आर्टिकल की हेडलाइन दी- “क्या लंगर लगाना जुर्म है?: डीएस बिंद्रा का नाम दंगों से जोड़ा जा रहा है।” अपने इस लेख में द क्विंट ने केवल उन्हीं लोगों की बात पेश की है जिन्होंने डीएस बिंद्रा की भूमिका केवल लंगर बाँटने या फिर प्रोटेस्ट आयोजित करने तक बताई। लेकिन यहाँ उन बिंदुओं को बिलकुल दरकिनार कर दिया गया जिसके कारण डीएस बिंद्रा का नाम चार्जशीट में है।

उदहारण के लिए लेख में नज्म उल हसन का बयान जोड़ा गया। उसने बताया कि डीएस बिंद्रा ने स्थानीय लोगों से सीएए के ख़िलाफ प्रदर्शन का अनुरोध किया था और कहा, “मैं लंगर और मेडिकल कैंप लगाऊँगा। पूरा सिख समुदाय आपके साथ है। अगर आप लोग आगे नहीं आओगे तो आप लोगों की किस्मत भी वैसी ही हो जाएगी जैसे 1984 में सिखों की हुई थी।”

The Quint article shielding DS Bindra

दिलचस्प बात ये है कि इस लेख में द क्विंट ने ऑपइंडिया का नाम भी शामिल किया और कहा कि हमने अपनी रिपोर्ट में केवल डीएस बिंद्रा पर लगे आरोपों के बारे में बात की है। साथ ही यह बताया है कि बिंद्रा AIMIM का सदस्य है, जबकि बिंद्रा के अनुसार तो उनका कनेक्शन किसी राजनैतिक पार्टी से है ही नहीं।

अब आपको बता दें कि ऑपइंडिया ने जिस चार्जशीट के संबंध में रिपोर्ट की थी वह 1100 पन्नों की है और इसका एक हिस्सा ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किया गया था। शायद ये बात तो द क्विंट के पत्रकार भी जानते ही होंगे कि किसी भी लंबी चार्जशीट के बारे में एक बार में रिपोर्ट करना संभव नहीं है। हाँ, ये बात और है कि अगर वह हिस्सों में बँटी है, तो उसे आसानी से समझा जा सकता है।

क्विंट ने डीएस बिंद्रा की टिप्पणी को आपने आर्टिकल में जोड़ा। इसमें बिंद्रा ने आरोप लगाया था कि ऑपइंडिया ने उनसे बात करने की कोशिश नहीं की। जबकि आरोपों पर सफाई देना उनका अधिकार है। यहाँ बता दें कि हमारी रिपोर्ट दिल्ली क्राइम ब्रांच की एफआईआर पर थी। अगर, बिंद्रा अपने आप को डिफेंड करना चाहते ही हैं तो उन्हें पुलिस के सामने या फिर कोर्ट के सामने खुद के बचाव में बोलना चाहिए। चार्जशीट पर रिपोर्ट करते हुए हमें क्या आवश्यकता कि हम आरोपित से उसका पक्ष जानें। हमने केवल वह बातें लिखीं थी, जो चार्जशीट में कही गई।

यहाँ बता दें कि द क्विंट की ऐसी हरकत ज्यादा हैरान करने वाली नहीं है। लेकिन इन प्रयासों में यह गौर करने वाली बात जरूर है कि पूरे वामपंथी मीडिया ने क्यों चार्जशीट पर रिपोर्ट करते हुए इस बात का जिक्र तक नहीं किया कि इसमें डीएस बिंद्रा का नाम भी शामिल है।

याद दिला दें, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय से डीएस बिंद्रा की तारीफों के पुलिंदे मीडिया में बाँधे जा रहे थे। मगर, चार्जशीट से संबंधित सभी जानकारी होने के बाद भी इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम ने अपने पाठकों के सामने सत्य बताने की कोशिश नहीं की। इसका मतलब साफ है कि वह केवल दंगाइयों को, षड्यंत्रकारियों को बचाने का प्रयास कर रहे।

शाहरुख ने बीच बाजार नैना कौर को 10 बार चाकू मारा, 5 दिन बाद होनी थी शादी

गाजियाबाद के तुलसी निकेतन में शेर खान (Sheru Khan) उर्फ शाहरुख ने बीच बाजार 19 वर्षीय नैना कौर की चाकुओं से गोदकर की हत्या कर दी। वह नैना की शादी कहीं और तय होने से नाराज था और कई बार उनके घर आकर धमकी भी दे गया था।

बुधवार (जून 17, 2020) को ग़ाज़ियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र में नैना कौर जब अपने घर लौट रही थी, तभी उन्हें करीब 10 बार चाकू मारने के बाद शाहरुख उर्फ़ शेर खान (Sheru Khan) अपने दोनों दोस्तों के साथ चाकू लहराता हुआ पैदल ही दिल्ली-वजीराबाद रोड की तरफ भाग गया। उसे दिल्ली के एक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने बृहस्पतिवार (जून 18, 2020) सुबह दम तोड़ दिया।

पुलिस ने कहा कि मृतक नैना कौर, अपने माता-पिता बलदेव सिंह (62) और नीलम कौर (58) के साथ तुलसी निकेतन के विवेक विहार कॉलोनी में रहती थी। उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। पिछले साल राजधानी के एक स्कूल से इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नैना दिल्ली में नर्सिंग का कोर्स कर रही थी। नैना की शादी आने वाले 22 जून को इंदौर में होने वाली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक नैना कौर के पिता बलदेव सिंह ने कहा, “मैं केवल 50 मीटर दूर ही गया था, जब तीन लोग बाइक पर आए। उनमें से एक ने अपने चेहरे को नकाब में ढक रखा था, उसने नैना के हाथ खींच लिए और उसे खींच लिया।”

नैना के पिता का कहना है कि नैना पर अचानक हुए इस हमले को समझते ही उसकी माँ ने इसका विरोध किया तो आरोपित ने उन्हें धक्का देकर नीचे गिर दिया।

बलदेव सिंह ने कहा, “उन लोगों में से एक ने मुझे अपनी पत्नी और बेटी तक पहुँचने नहीं दिया। जब नैना ने अपनी माँ को सड़क पर पड़ा देखा, तो वह उठ गई और उसने आरोपित को कई थप्पड़ मारे। अचानक, उसने चाकू से नैना पर हमला कर दिया। पहले गर्दन, पेट और फिर शरीर के अन्य हिस्सों पर। इसके बाद वह बाइक पर दो अन्य लोगों के साथ भाग गया।”

पुलिस के अनुसार, हाथापाई के दौरान नैना की माँ ने इस हत्या के मुख्य आरोपित का नकाब फाड़ दिया और उसकी पहचान दिल्ली के सुंदर नगरी निवासी शेर खान उर्फ शाहरुख (22) के रूप में की। नैना के परिवार वालों का कहना है कि वह नैना को करीब दो वर्ष से जानता था।

दोनों दिल्ली के दुर्गापुरी में एक साथ कंप्यूटर की पढ़ाई कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी की हत्या का आरोपित शेर खान अक्सर उनकी बेटी को परेशान करता था और उससे शादी करना चाहता था। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह पूर्व भी वह युवक उनके घर आकर नैना को धमका चुका था।

मृतक नैना कौर के पिता ने कहा कि बाजार में उस समय मौजूद लोग यह सब देखते रहे और कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। आरोपित शेर खान टिकटॉक पर वीडियो भी बनाता है, जहाँ उसने अपने कई सारे वीडियो भी बनाकर पोस्ट किए हैं।

पुलिस का कहना है कि शेर खान का पकड़ा जाना अभी बाकी है, जबकि उसके दो साथियों, आसिफ (22) और आमिर चौधरी (20) को गिरफ्तार कर लिया गया था। आमिर भी सुंदर नगरी में रहता है जबकि आसिफ साहिबाबाद का रहने वाला है।

मृतक नैना कौर के पिता बलदेव की एक शिकायत के आधार पर इन तीनों लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मृतक नैना कौर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्टआनी अभी बाकी है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार नैना को जिस जगह चाकू से गोदा गया वह तुलसी निकेतन पुलिस चौकी से महज दो सौ मीटर दूर है। शाहरुख पर पुलिस ने 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। उसे पकड़ने के लिए दो टीमें लगाई गई है।

‘स्क्रॉल’ पत्रकार सुप्र‌िया शर्मा के खिलाफ वाराणसी में FIR, ‘भुखमरी’ को लेकर प्रकाशित की थी फ़ेक न्यूज़

फ़ेक न्यूज़ प्रकाशित करने के लिए वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘स्‍क्रॉल’ की संपादक ( Executive editor) सुप्र‌िया शर्मा के ‌खिलाफ उत्तर प्रदेश में FIR दर्ज कराई गई है। सुप्रिया के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC / ST act) के तहत FIR दर्ज की गई है। वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट स्क्रॉल की संपादक सुप्रिया शर्मा ने कोरोना वायरस के दौरान जारी लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक गाँव की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

सुप्रिया शर्मा के खिलाफ यह एफ़आईआर वाराणसी के रामनगर पुलिस स्टेशन में 13 जून को दर्ज की गई है। एफ़आईआर के मुताबिक़, पुलिस ने सुप्रिया के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 501 (मानहानिकारक मामलों का प्रकाशन) और 269 (बिमारी से संक्रमण फैलने की आशंका में बरती गई लापरवाही) के तहत भी मुक़दमा दर्ज किया है।

रामनगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने वाली माला देवी ने आरोप लगाया है कि पत्रकार सुप्र‌िया शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में उनके बयान को गलत तरीके से प्र‌‌काशित किया है और झूठे दावे किए हैं।

स्क्रॉल की संपादक द्वारा PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोरोना वायरस को लेकर जारी लॉकडाउन के प्रभावों पर आधार‌ित एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई, जिसका शीर्षक था- “प्रधानमंत्री के गोद ल‌िए गाँव में लॉकडाउन के दौरान भूखे रह रहे लोग”

‘स्क्रॉल’ की संपादक सुप्रिया शर्मा ने डोमरी गाँव, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है, में एक इंटरव्यू के दौरान वहाँ की रहने वाली माला के बारे में बताया था कि वह घरों में काम करती हैं और लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन की किल्लत हो रही है और उनके पास राशन कार्ड भी नहीं है।

जबकि माला देवी द्वारा दायर की गई FIR में उन्होंने कहा है कि वह किसी के घर में काम नहीं करती हैं, और ‘स्क्रॉल’ की पत्रकार ने उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है।

शिकायतकर्ता माला देवी ने FIR में कहा है कि वह वाराणसी की नगरपालिका में ठेके पर सफाई कर्मी हैं, और उन्होंने लॉकडाउन के दौरान किसी भी संकट का सामना नहीं किया और उनके पास पर्याप्त भोजन भी उपलब्‍ध था।

माला ने कहा, “सुप्रिया शर्मा ने मुझसे लॉकडाउन के बारे में पूछा, मैंने उन्हें बताया कि न तो मुझे और न ही मेरे परिवार में किसी को कोई समस्या है।”

एफ़आईआर में माला देवी ने कहा है कि उन्हें और उनके बच्चों को भूखा बताकर सुप्रिया शर्मा ने उनकी गरीबी और जाति का मजाक उड़ाया है। साथ ही, उन्होंने समाज में उनकी भावनाओं और प्रतिष्ठा को भी चोट पहुँचाई है।

हालाँकि, इस FIR के बारे में ‘स्क्रॉल’ ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि यह FIR सिर्फ उन पर लॉकडाउन की खबरों को प्रकाशित करने की कीमत है और वह अभी भी इस रिपोर्ट के समर्थन में हैं।

J&K: पांपोर की मस्जिद में छिपे आतंकियों को सेना ने किया ढेर, 24 घंटे में जैश और हिजबुल के 8 आतंकी मारे गए

सुरक्षा बलों ने मस्जिद में छुपे 2 आतंकियों के साथ-साथ कुल 8 आतंकियों को ढेर कर दिया हैं। इन सभी का एनकाउंटर कश्मीर के अवंतीपोरा और शोपियाँ जिले में शुक्रवार (19 जून, 2020) को किया गया। जिसमें जवानों ने शोपियाँ में पाँच और पांपोर में तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। ये सभी आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से थे।

गौरतलब है कि कश्मीरी में कई दिनों से सुरक्षा बलों के द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा हैं। उसी कड़ी में पुलिस को आतंकियों के छिपे होने के इनपुट मिलने के बाद, आर्मी की 44 आरआर और सीआरपीएफ ने द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जिसके बाद आतंकियों ने सुरक्षा बलों को देखते ही उनपर फायरिंग शुरू कर दी थी। इस पर जवानों ने उनका मुँहतोड़ जवाब देते हुए एक आंतकी को मार गिराया था।

वहीं दो आतंकियों ने अपने आप को बचाने के लिए मिज गाँव में स्थित जामा मस्जिद के अंदर छुप गए। धर्म स्थल का सम्मान करते हुए सुरक्षाबलों ने आतंकियों से सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद मस्जिद को कोई नुकसान न पहुँचे इस बात का ध्यान रखते हुए सुरक्षाबलों ने फायरिंग या आईईडी का इस्तेमाल नहीं किया। बल्कि आँसू गैस के गोलों के जरिए शुक्रवार की सुबह स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के कमांडो मस्जिद के अंदर घुस गए हैं और दोनों आतंकियों को मार गिराया। और उनकी लाश को कब्जे में ले लिया।

मीडिया के पुलिस सूत्रों के अनुसार गुरुवार को हुई मुठभेड़ में भी एक आतंकी मारा गया था। जिसके बाद भी ऑपरेशन जारी था। सुरक्षाबलों का मानना है कि इस जगह पर कुछ और आतंकी छिपे हो सकते हैं। पूरे इलाके को घेर लिया गया है और सर्च ऑपरेशन अभी भी चलाया जा रहा है। शोपियाँ में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का एक्शन जारी है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने आतंकियों के मारे जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन में सुरक्षा कर्मियों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुँची हैं। बाकी छुपे आतंकियों की तलाश की जा रही है। शोपियाँ के मुनंद में एक आतंकवादी मारा गया इसके साथ और आतंकवादियों के मारे जाने की उम्मीद है। इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए अवंतीपोरा और शोपियाँ में इंटरनेट सेवा फिलहाल बंद रखी गई है। इस माह के दौरान शोपियाँ में यह पाँचवीं मुठभेड़ है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने 13 जून को दो आंतवादियों को मार गिराया था। मारे गए दोनों आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन के थे। उनके पास से गोला-बारूद, 2 पिस्तौल और 3 ग्रेनेड भी बरामद हुए थे। कश्मीर जोन के पुलिस ने यह बताया था कि कुलगाम के निपोरा में आतंकवादी छिपे हुए हैं। इसके बाद भारतीय सेना के जवानों ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की मदद से इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान आतंकवादियों की ओर से गोली चलाई गई तो जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की।

वहीं बुधवार (जून 10, 2020) को कश्मीर के शोपियाँ में सुरक्षाबलों ने 5 आतंकियों को मार गिराया था। पुलिस ने बताया था कि मारे गए आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।

इससे पहले 8 जून को शोपियाँ के पिंजूरा इलाके में हुई मुठभेड़ में 4 आतंकी मारे गए थे। उससे एक दिन पहले रेबेन इलाके में 5 आतंकियों को सुरक्षाबल ने ढेर किया था। कुल मिलाकर 24 घंटों में सुरक्षाबलों ने 9 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था।

गौरतलब है कि सुरक्षाबलों के लिए शोपियाँ और पंपोर मुठभेड़ बड़ी कामयाबी है। पिछले दो हफ्ते के अंदर सुरक्षाबलों ने करीब दो दर्जन आतंकियों को ढेर कर दिया है। अगर पूरे साल की बात की जाए तो अब तक 100 से अधिक आतंकी मारे गए हैं। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू के समय में भी सुरक्षाबलों का आतंकियों पर कड़ा प्रहार जारी है।

हमारी सरकार में इतनी क्षमता है कि आँखें निकालकर हाथ में दे दे: चीन पर PM मोदी की सर्वदलीय बैठक में शिवसेना

लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों और चीनी फौजियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद सीमा पर तनाव का माहौल है। ऐसे में शुक्रवार (जून 19, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक की। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।

भारत-चीन मुद्दे पर हुई इस बैठक में सबसे पहले LAC पर वीरगति को प्राप्त होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी दलों के नेताओं को लद्दाख में सेना की तैनाती और अन्य जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि सेना मुस्तैदी के साथ गलवान में खड़ी है।

किस विपक्षी नेता ने क्या कहा?

ममता बनर्जी: इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पारदर्शिता की माँग की। उन्होंने कहा कि सीमा के हालात के बार में सरकार विपक्ष को समय-समय पर जानकारी दे। देश की अखंडता के लिए हम सरकार के साथ हैं। ममत बनर्जी ने सर्वदलीय बैठक को एकता के प्रदर्शन के लिहाज से अच्छा संदेश बताया और कहा कि यह दर्शाता है कि अपने जवानों के लिए हम सब एक हैं। टीएमसी सरकार के साथ खड़ी है।

NCP प्रमुख शरद पवार: एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा, सैनिकों ने हथियार उठाए या नहीं इसका फैसला अंतरराष्ट्रीय समझौतों से होता है। हमें ऐसे संवेदनशील मामलों का सम्मान करने की जरूरत है।

उद्धव ठाकरे, शिवसेना: सर्वदलीय बैठक में शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी अपना मत रखा। उन्होंने कहा, “भारत शांति चाहता है। लेकिन इसका अभिप्राय ये बिलकुल नहीं है कि भारत कमजोर हैं। भारत मजबूत है, न कि मजबूर। हमारी सरकार में इतनी क्षमता है कि आँखें निकालकर हाथ में दे दे।”

उद्धव ठाकरे ने कहा, “हम सब एक हैं। ये हमारी भावना है। हम आपके साथ हैं प्रधानमंत्री। हम अपनी सेना और उनके परिवारों के साथ हैं।”

डीएमके नेता एमके स्टालिन: डीएमके नेता ने भी एकता के साथ खड़े होने का आश्वासन पीएम को दिया। उन्होंने कहा, “जब बात राष्ट्रवाद की हो, हम सब एक हैं।” स्टालिन ने इस बीच चीन पर दिए पीएम के बयान की तारीफ भी की।

कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा कि ये ऑल पार्टी मीटिंग पहले हो जानी चाहिए थी। आज इस अंतिम स्थिति में हम अंधकार में हैं। कॉन्ग्रेस के कुछ अलग से सवाल है। कॉन्ग्रेस ने पूछा, “चीनी सैनिकों ने किस तारीख को घुसपैठ की? सरकार ने अपराधों के बारे में कब पता लगाया? क्या सरकार को सैटेलाइट तस्वीरें नहीं मिली? क्या इंटेलीजेंस ने असामान्य गतिविधि के बारे में रिपोर्ट नहीं की थी।”

समाजवादी पार्टी नेता राम गोपाल यादव: सपा नेता ने कहा, “राष्ट्र एक है। पाकिस्तान और चीन की नीयत ठीक नहीं है। भारत, चीन का डंपिंग ग्राउंड नहीं हैं। चीनी सामानों पर 300% शुल्क लगाएँ।”

जेडीयू नेता नीतीश कुमार: बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा भारतीय बाजारों में चीन के सामानों की बाढ़ बड़ी समस्या है। उनकी प्लास्टिक भारी है। यह पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं और जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं। इनसे जुड़ा इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी अधिक होता है। चीनी उत्पाद लंबे समय तक नहीं चलते हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम एक हों और केंद्र का समर्थन करें।

नीतीश कुमार ने कहा, “भारत चीन मामले पर पार्टियों को एकता का अभाव नहीं दिखाना चाहिए। जिसका दूसरे राष्ट्र को इंतजार हो। भारत पर चीन रुख ज्ञात हैं। भारत चीन को सम्मान देना चाहता था। लेकिन चीन ने 1962 में क्या किया। उन्होंने कहा कि देश में चीन के ख़िलाफ़ गुस्सा है। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं होने चाहिए। हम एक साथ हैं।”

बीजेडी के पिनाकी मिश्रा: भारत-चीन सीमा मुद्दों पर पीएम के साथ सभी पार्टी की बैठक में बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि हम पूरी तरह से और बिना शर्त सरकार के साथ खड़े हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सोनिया गाँधी, मायावती, ममता बनर्जी समेत 20 दलों के नेता शामिल हुए। AAP, AIMIM और RJD ने बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किए जाने की बात कही है। AIMIM ने इसपर अपनी नाराजगी जाहिर की और आरजेडी के कुछ नेताओं ने संसद में गाँधी स्टैच्यू के सामने अपना प्रदर्शन किया। इसके अलावा चिट्ठी लिखकर भी अपनी नाराजगी दिखाई।

इस बैठक में शामिल होने वाले नेताओं में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना नेता, महाराष्ट्र मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, मायावती, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी प्रमुख हैं। बैठक से पहले विपक्षी पार्टी ने केंद्र सरकार से सीमा मामले पर हालातों को स्पष्ट बताने की माँग की थी। साथ ही यह सवाल भी पूछा था कि सरकार इस मामले को कैसे हैंडल कर रही है।

यहाँ बता दें कि चीन के साथ भारतीय सैनिकों की झड़प में भारत के 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। चीन के भी 43 सैनिक इस झड़प में मारे जाने की खबर थी। ये सब उस समय हुआ जब सोमवार की रात वहाँ  डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया जारी थी।

नेपाली सेना की वर्दी में पिथौरागढ़ सीमा पर दिखा चीनी दल, संदिग्ध दल को देखकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

भारत चीन के हिंसक झड़प के बाद गर्बाधार से चीन सीमा लिपुलेख तक सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम तेज कर दिया है। नेपाल ने दार्चुला-टिंकर सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्माण कार्य में नेपाल के नहीं बल्कि 30 चीनी इंजिनियर लगे हुए हैं। जिन्हें नेपाल ने नेपाली सैनिकों की वर्दी में सैनिक हेलीकॉप्टर के जरिए वहाँ पहुँचाया है और उसी से निर्माण कार्य में लगने वाले समान को भी मुहैया कराया जा रहा हैं।

भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों के संबंधों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया हैं। वहीं चीन के बहकावे में आने के बाद भारत-नेपाल संबंधों में भी पिछले महीने से कड़वाहट आ गई हैं। भारत के लिम्पियाधुरा-लिपुलेख-कालापानी क्षेत्र को नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखना कहीं न कहीं दो पड़ोसी देशों के आपसी संबंधों को खराब कर रहा हैं।

वहीं भारत ने जबसे पिथोरागढ़ से लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया है तबसे नेपाल और चीन दोनों परेशान हैं और उसके बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम शुरू कर दिया था। पहाड़ काट कर लगभग 134 किमी लंबी सड़क को तैयार किया जाना है।

खबरों के अनुसार दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए नेपाल निर्माण निगम के विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण करने को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए थे। वहीं चीन ने अपनी चाल चलते हुए इसपर एक बड़ा दाव खेला हैं।

दरअसल, बिगड़ते हालातों के देखते हुए अब वन बेल्ट व रोड परियोजना को लेकर चीनी कंपनी के विशेषज्ञों ने उत्तराखंड की पिथौरागढ़ सीमा से सटे क्षेत्र में नेपाली सेना का ड्रेस पहनकर यहाँ निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

कोरोना महामारी की वजह से चीन नेपाल में भैरहवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पोखरा एयरपोर्ट और काठमांडू के पशुपति इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार के साथ ही चार जल विद्युत परियोजनाओं पर चल रहा काम बंद हो गया था। जिसके बाद चीनी विशेषज्ञों ने अपने लोगों को भारत से लगते सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए लगा दिया।

बता दें गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने विरोध दर्ज कराकर दार्चुला-टिंकर सड़क मार्ग पर काम शुरू कर दिया था। इस निर्माण कार्य के चलते भारतीय क्षेत्र में अक्सर पालपा, लामारी, बूंदी और गब्र्यांग के स्थानीय लोगों का आना जाना लगा रहता है। वहाँ रहने वाले स्थानीय लोगों को सैनिकों के हावभाव- बोलचाल, उनके शारीरिक बनावट चीनी नागरिकों जैसी लगीं। जिसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी दल की उपस्थिति को गंभीरता से लिया हैं और वहाँ अतिरिक्त सेना बलों की तैनाती कर दी हैं।

नेपालियों को भारत के सामने खड़ा कर चीन उनकी आड़ में भारत से जुड़े सारे मुद्दों में दखल दे रहा हैं। जहाँ एक तरफ रेलवे लाइन का काम शुरू करवा दिया वहीं दूसरी और भारत से सटे प्रमुख मधेशी क्षेत्रों में सर्वे भी करा रहा हैं। जिसमें उसने भारतीय धारचूला-तवाघाट-गर्बाधार-लिपुलेख सड़क के समानान्तर नेपाल ने सदरमुकाम दार्चुला-सुनेसरा-घाटीबगड़- छांगरु-टिंकर चीन सीमा भज्यांग तक सड़क निर्माण की योजना तैयार किया है।

आपको बता दे इससे पहले भारत के बूंदी गाँव के बुदियालों की जमीन पर नेपाली सेना चार किमी तक बंद पैदल मार्ग खोलने में जुटी थी। भारत के बूंदी गाँव के सामने काली नदी पार नेपाल में पड़ता है। नक्शे में भारत के कालापानी क्षेत्र को अपना बताने वाले और सड़क और हुए तकरार के बाद नेपाल ने वहाँ पर नजर रखने के लिए छांगरू में सशस्त्र बल की तैनाती शुरू कर दी है। जिसके चलते अब सशस्त्र बल के साथ ही नेपाली सेना द्वारा पूरे क्षेत्र पर नजर रखा जाएगा।

गौरतलब है कि नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा ने खुद बुधवार को विवादित कालापानी क्षेत्र का दौरा किया था। मई में भारत के साथ सीमा विवाद के बाद पश्चिम प्रदेश क्षेत्र में उनकी यह पहली यात्रा थी। भारत द्वारा 8 मई को दार्चुला-लिपुलेख लिंक सड़क का उद्घाटन करने के बाद नेपाल ने पिछले महीने नेपाल सशस्त्र पुलिस बल द्वारा यहाँ पर एक चौकी स्थापित की है।

नेपाल सुरक्षा बलों ने की थी भारतीय नागरिक पर फायरिंग

उल्लेखनीय हैं कि नक्शे को लेकर हुए विवाद के कुछ दिन बाद ही बिहार के सीतामढ़ी जिले से सटे नेपाल सीमा पर नेपाली सुरक्षा बलों ने 15 राउंड फायरिंग की। जिसमें गाँव में खेत में काम कर रहे कुछ मजदूरों को गोली लगी थी। इसमें नागेश्वर राय के 25 वर्षीय पुत्र डिकेश कुमार की मौत हो गई थी। वहीं तीन लोग ज़ख्मी हो गए थे।

नक्शे पर विवाद

बता दें कि हाल ही में नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। नेपाल सरकार द्वारा लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने नए राजनीतिक नक़्शे में दिखाने पर भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के किसी क्षेत्र पर इस तरह के दावे को भारत द्वारा नहीं स्वीकार किया जाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि नेपाल सरकार ने जो आधिकारिक नक़्शा जारी किया है उसमें भारतीय क्षेत्र को नेपाल में दिखाया गया है, ये एकतरफ़ा हरकत ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। इसका भारत विरोध करता है।