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गोकशी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं, फास्ट ट्रैक में सुने जाएँगे इससे जुड़े मामले: मनोहर लाल खट्टर

हरियाणा में गोकशी की बढ़ रही घटनाओं के बीच सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नूह जिले में गोकशी किसी भी हालत में नहीं होने दी जाएगी। गोकशी के मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा, ताकि आरोपितों के जल्द से जल्द सजा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने यह बातें मंगलवार (जून 16, 2020) को नूह लघु सचिवालय सभागार में पत्रकारवार्ता में कही। इस दौरैन उन्होंने कई घंटों तक दोनों समुदाय के लोगों के साथ विस्तारपूर्वक बातचीत की और अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद कहा कि गोकशी की वजह से दोनों समाज में दूरियाँ बढ़ती हैं। मनमुटाव होता है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नूह जिले के एक गाँव में 2500 से अधिक गाय की खाल हाल ही में मिली हैं। हरियाणा में सख्त कानून होने के बावजूद भी कुछ लोग गोकशी में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कानून अगर और ज्यादा कड़ा बनाना पड़ा तो बनाएँगे। लेकिन गोकशी को पूरी तरह से रोका जाएगा।

इसकेे अलावा धर्म परिवर्तन मामलों पर भी सीएम मनोहर लाल खट्टर गंभीर नजर आए। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन जैसी घटनाओं को रोकने के लिए धर्म स्वतंत्र विधेयक नियम लेकर आएँगे, ताकि धर्म परिवर्तन की सूरत में मजबूती व सख्ती से कार्रवाई हो सके। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम मनोहर लाल ने कहा कि श्मशान घाट की जमीनों को लेकर जो विवाद होता है उसको निपटाने के लिए बोर्ड बनाया जाएगा। जहाँ हिंदू समाज के लोग अल्पसंख्यक दर्जे में हैं, वहाँ पर इसके तहत कार्रवाई होगी।

सीएम मनोहर लाल ने कहा पुलिस तंत्र को नूह जिले में मजबूत किया जाएगा। अवैध खनन तथा कई राज्यों से सटी सीमाओं पर स्मगलिंग को रोकना पुलिस की प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि नूह विकसित जिला होने जा रहा है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस तंत्र को मजबूत करना है। आईआरबी की बटालियन शीघ्र ही उचित स्थान पर स्थापित की जाएगी।

इसके अलावा गुरुग्राम जिले में आईआरबी की महिला बटालियन स्थापना होगी। उन्होंने दिल्ली–मुम्बई एक्सप्रेस-वे के साथ उद्योग धंधे स्थापित करने की बात भी कही। सीएम मनोहर लाल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि आईएमटी मानेसर में भी कई बड़े उद्योग धंधे लगेंगे।

गौरतलब है कि नूह के जमालगढ़ गाँव में छापेमारी के दौरान पुलिस ने लोगों के घरों व गोदाम से 2572 गाय की खाल व एक टाटा 407 जब्त किया था। गोवंशों को रखने वालों के खिलाफ पुन्हाना पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में शामिल सभी तस्करों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

‘पाताल लोक’ में सिखों के अपमान पर मुश्किल में फँसी अनुष्का शर्मा: हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस

बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा काफी समय से अपने खास अभिनय से पहचानी जाती रही है, लेकिन इन दिनों वो अपनी डिजिटल डेब्यू को लेकर सुर्खियों में हैं। एक्ट्रेस ने अभिनय के साथ साथ बतौर प्रोड्यूसर के तौर पर काम करना शुरू किया है।

वो इन दिनों अमेजन प्राइम पर सीरिज ‘पाताल लोक’ को रिलीज करते ही चर्चे में आ गई थीं। लेकिन अब इस फिल्म को लेकर अनुष्का शर्मा काफी मुश्किलों में फँसी हुई हैं। अपनी फिल्म में उन्होंने एक जातिसूचक शब्द का उपयोग किया है इसलिए उनकी सीरीज पर सिख समुदाय ने घोर विरोध किया है।

प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा की अमेजन वेब सीरीज के तीसरे एपिसोड को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा को नोटिस भेजा गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दो जुलाई को तय की है।

दरअसल, इस सीरीज में सिख समुदाय की छवि को खराब करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की गई है, जिस पर कोर्ट ने एक्ट्रेस को नोटिस भेजकर जवाब माँगा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस वेब सीरीज में जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल हुआ है, जिससे पूरे सिख समुदाय का अपमान हुआ है।

मामले पर वकील गुरदपिंदर सिंह ढिल्लों ने याचिका दायर कर कहा है कि वेब सीरीज में जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से सिखों की छवि को खराब करने की कोशिश की गई है। वकील ढिल्लों के मुताबिक शो के तीसरे एपिसोड से सिखों की छवि को ठेस पहुँची है।

पाताल लोक पर के प्रोड्यूसर आरोप लगाया गया है कि इसके तीसरे एपिसोड में सिखों को बदनाम करते हुए दिखाया गया है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह सिख समुदाय दलित और पिछड़ी जातियों का उत्पीड़न करते थे। इसके अलावा इसमें सिखों द्वारा महिला का यौन उत्पीड़न और बलात्कार करते हुए भी दिखाया गया है।

बता दें कि इससे पहले भी पाताल लोक पर नेपाली और नॉर्थ ईस्ट के लोगों की भावनाएँ आहत किए जाने का आरोप लगा था। इसके बाद बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने भी इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। विधायक ने कहा कि एक अपराधी किस्म के किरदार के साथ उनकी तस्वीर को मॉर्फ्ड करके लगाया गया है और गुर्जर जाति के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। विधायक ने प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा के खिलाफ रासुका लगाए जाने की माँग भी की थी।

योग शिक्षिका राफिया को कट्टरपंथियों से मिल रही धमकी, सुरक्षा माँगने पर गेट से ही भगा दिया

झारखंड की राजधानी राँची के डोरंडा की रहने वाली राफिया नाज आज योग के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है। योग को धर्म से परे मानने वाली राफिया को आज योग के कारण ही निशाना भी बनाया जा रहा है। उनकी जान को अभी भी खतरा है, मगर प्रशासन की लापरवाही तो देखिए, इस मामले पर संज्ञान लेना तो दूर उनकी चिट्ठी तक नहीं रिसीव की गई।

राफिया नाज ने हमें इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार (जून 16, 2020) को इस संबंध में मुख्यमंत्री और उनके प्रधान सचिन को चिट्ठी देने गई तो उन्हें प्रोजेक्ट भवन के बाहर से ही भगा दिया गया। बकौल राफिया, “मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके प्रधान सचिव को चिट्ठी देकर ये मामला उनके संज्ञान में लाना चाहती थी, मगर मुझे गेट के बाहर से ही भगा दिया गया। जबकि मैंने साफ-साफ कहा कि मैं एक योगा टीचर हूँ। मेरी जान को खतरा है। मैं यहाँ पर सिर्फ चिट्ठी देने आई हूँ। उन्होंने कहा कि यहाँ पर कोई चिट्ठी रिसीव नहीं होती, जबकि मैंने पहले भी यहाँ पर चिट्ठी दी है। उन्होंने बिना मेरी कोई बात सुने भगा दिया। जब यहाँ पर आने के बाद ऐसा व्यवहार किया जाता है, तो फिर ये तो मेल वगैरह क्या खाक चेक करेंगे?”

ये कहते-कहते राफिया की आँखें नम हो जाती है। वो कहती हैं कि इतना करने के बाद भी जब सामने से ऐसी प्रतिक्रिया आती है तो बहुत दुख होता है। ये बातें उन्होंने फेसबुक लाइव करके भी कहा कि वो डेढ़ घंटे से गेट के बाहर खड़ी थी, लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली झारखंड सरकार के राज में उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदार झारखंड सरकार होगी।

राफिया नाज इसको लेकर मुख्यमंत्री, SSP, DIG सबसे गुहार लगा चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र पर भी मेल किया। SSP, DIG सभी को सूचित किया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। ट्विटर पर भी उनकी समस्या पर ये प्रतिक्रिया देकर प्रशासन निश्चिंत हो जाती है कि कार्रवाई की जाएगी। राफिया कहती है कि वो तो ये देखकर खुश हो जाती थी, मगर फिर बाद में उनके पास हताश होने के सिवा कोई और विकल्प नहीं बचता है। राफिया ने मंगलवार को SSP और DIG को लिखित में पत्र देकर अपनी समस्याओं से अवगत करवाया और तत्काल सुरक्षा देने की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने अपने साथ घटी घटनाओं की कॉपी भी उपलब्ध करवाई।

राफिया नाज द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखा गया पत्र
राफिया नाज द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखा गया पत्र

दरअसल, लॉकडाउन में राहत मिलने के बाद अब राफिया को अनाथ बच्चों को योगा सिखाने के लिए जाना है और सितंबर 2019 में पुलिस का तरफ से उन्हें कहा गया था कि जब भी वो घर से बाहर निकले वो उन्हें सूचित करें, ताकि टाईगर मोबाइल और पीसीआर के जरिए उन्हें सुरक्षा मुहैया कराया जा सके। अब जब राफिया अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगा रही है तो कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। राफिया कहती हैं, “तो क्या थाने की तरफ से भेजा गया वो पत्र महज एक औपरचारिकता थी?”

डोरंडा थाना द्वारा सितंबर 2019 में भेजा गया पत्र

राफिया ने कहा, “मैं धमकियों से नहीं डरती, ये तो मैं 3-4 सालों से झेलती आ रही हूँ, मगर अपनी जान तो सभी को प्यारा होता है। खुद से ज्यादा लोगों को अपने परिवार की चिंता होती है। मेरे भी मम्मी, पापा, भाई, बहन हैं, उन्हें भी तो वो लोग नुकसान पहुँचा सकते हैंं। आज जब मैं चीख-चीख कर कह रही हूँ कि मेरी जान को खतरा है तो कोई नहीं सुन रहा, कल को यदि मुझे कुछ हो जाता है, तो फिर ये प्रशासन जागकर क्या करेगी? क्या फायदा ऐसे जागने से? मैं तो लौट कर नहीं आऊँगी न? ये लोग मुझे मरवाकर ही छोड़ेंगे। जब मैं मरुँगी तो सबका नाम लिखकर जाऊँगी।”

जब राफिया सुरक्षा की गुहार लगाते-लगाते हर तरफ से थक गई तो उन्होंने झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास के सामने अपनी समस्या रखी, क्योंकि रघुवर दास ने ही अपने कार्यकाल के दौरान 2017 में राफिया की सुरक्षा का संज्ञान लिया था और उन्हें 24 घंटे सुरक्षा मुहैया करवाया गया था। उनके घर के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सीआरपीएफ के जवान तैनात रहते थे। मगर पता नहीं, मार्च 2020 के अंतिम सप्ताह में उसे हटा लिया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राफिया को सुरक्षा मुहैया करवाने का आश्वासन दिया है। ऑपइंडिया ने भी इस बाबत रघुवर दास से बात की। उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जल्द ही इस पर कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा राफिया ने बताया कि जिस अनाथालय के बच्चों को योग सिखाती थी। उस अनाथालय को खाली करवा दिया गया। जिसके बाद बच्चे को जंगल की तरफ चले गए। वो सवाल उठाती हैं, “क्या इस स्थिति में बच्चे नक्सली नहीं बन जाएँगे?” वो आगे कहती हैं, “मुझे उन बच्चों को वापस लाना है। उनका भविष्य बनाना है। आज जब पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। सभी से इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कही जा रही है। बड़े लोग तो महँगी-महँगी चीजें खाकर इम्युनिटी बढ़ा रहे हैं, लेकिन ये बच्चे कैसे करेंगे? इनके लिए तो योग ही एक सहारा है और योग में तो सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा पालन होता है।”

उल्लेखनीय है कि झारखंड में ‘Yoga beyond religion’ अभियान का अहम हिस्सा बन चुकीं राफिया आज न केवल स्कूली बच्चों और विभिन्न संस्थानों में जाकर लोगों को नि:शुल्क योग का प्रशिक्षण देती हैं, बल्कि योग का एक स्कूल भी चलाती हैं। इसमें वो गरीब और अनाथ बच्चों को मुफ्त में योग सिखाती हैं और अब तक कई लोगों को उन्होंने योग सिखाकर योग शिक्षक के रुप में नौकरी भी उपलब्ध करवाई है।

राफिया को योग के कारण अपने ही समाज की कट्टरपंथियों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। उन्हें न केवल फोन और सोशल मीडिया पर गंदी और भद्दी गालियाँ दी जाती है, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जाती है। कई बार तो उन पर जानलेवा हमला भी किया गया। राफिया को हाल में ही एक बार फिर से धमकी मिली है। फोन पर भद्दी-भद्दी गालियाँ दी गईं। सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के ऊपर अश्लील टिप्पणियाँ की गई।

राफिया द्वारा दर्ज करवाई गई ऑनलाइ FIR की कॉपी
राफिया द्वारा दर्ज करवाई गई ऑनलाइन FIR की कॉपी

राफिया कहती है कि लॉकडाउन होने की वजह से उन्होंने ऑनलाइन FIR भी करवाया। मगर इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। आरोपित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसमें आरोपित का नाम नजीब राजा बताया गया है, जिसने उन्हें फेसबुक पर गंदी गालियाँ दीं।

नजीब राजा द्वारा किए गए कमेंट्स के कुछ स्क्रीनशॉट्स

और तो और उनसे कहा गया कि अगर उन्हें फोन करके गंदी गालियाँ दी जा रही है, तो फोन यूज मत करो, नंबर बदल लो। जब सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणियाँ की जाती है तो उनसे सोशल मीडिया इस्तेमाल न करके की सलाह दी जाती है। घर पर पत्थरबाजी होती है, तो कहा जाता है कि घर बदल लो। राफिया का कहना है कि ये तो कोई समाधान नहीं है। इससे तो अपराधियों के हौसले और भी बुलंद होंगे। वो कहती हैं कि लॉकडाउन के दौरान भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, मगर वो देश की भलाई की खातिर चुप रही, क्योंकि देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। अपनी सुरक्षा की माँग कर रही योगा शिक्षिका राफिया आज प्रशासन की इस निष्क्रियता से काफी आहत हैं।

कितना खोखला है अवसाद से घिरे व्यक्ति को कहना- प्लीज रीच आउट टू मी

सुशांत सिंह की मृत्यु ने सभी को झकझोरा हो अथवा चिंतित किया हो, ऐसा लगता नहीं है। आम आदमी तो इस हादसे से जरूर चिंतित है, लेकिन बनावटी और खोखला बॉलीवुड भी दुखी हो सकता है, ऐसा लगता तो नहीं है। किसी की मौत पर टीवी के सामने शृंगार करती मौकापरस्त हसीना इसका सिर्फ एक छोटा सा उदाहरण है। हाँ, मानव स्वभाव पर बहस की एक बार फिर से शुरुआत जरूर हो गई है।

भारतीय समाज की इकाई से शुरू करते हैं। दूसरों के जज्बातों और विचारों का सम्मान करना हमें ‘बचपन’ से सिखाया ही नहीं जाता है। ना ही इस पर चर्चा की जाती है और न इसे व्यावहारिक शिक्षा में शामिल करना ही जरूरी समझा जाता है। भारतीय समाज में ऐसे कितने अभिभावक होंगे जो अपने बच्चों को दूसरों के विचारों का सम्मान करना सिखाते होंगे? अंग्रेजी शिक्षा के रटंतू सिलेबस के बीच शो-ऑफ़ करना बच्चे जरुर सीख जाते हैं।

ऐसे हजारों-लाखों उदहारण हैं जहाँ माँ-बाप अपने बच्चों को उन हमउम्र बच्चों से दूर रहने को कहते हैं, जिन्हें अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही या जो ‘फ़्लूएंट’ फ़ेक एक्सेंट में अंग्रेजी नहीं बोल पाते। जिन बच्चों का तिरस्कार किया जाता है, जिनके रूप-रंग और दशा पर सामूहिक हँसी और अट्टहास किया जाता है, उनमें हीन भावना घर करने लग जाती है। हमारे बचपन को सिखाया ही नहीं जाता कि दूसरों के विचारों या परिस्थितियों को समझना भी बेहद जरूरी है।

हमारे भारतीय समाज के डे और बोर्डिंग स्कूल या कॉलेज वैचारिक दमन का जीता-जागता प्रमाण हैं। स्कूल में सीनियर विद्यार्थियों का नए छात्रों को प्रताड़ित करना आम है। बोर्डिंग स्कूल का उदाहरण लेते हैं। ऐसे समय में, जब एक नया विद्यार्थी घर से दूर एक नए, अनजान माहौल में जीने का साहस जुटा रहा होता है, तब सीनियर विद्यार्थियों द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जाना, गाली-गलौज करना, हाथापाई करना, उनका सामान छीनना और जबरन अपने काम करवाना आम बात है।

डे और बोर्डिंग स्कूल चाहे कैसे भी दावे करें लेकिन स्कूलों में प्रताड़ना की वजह से छात्रों द्वारा आत्महत्या की कोशिशें यदा-कदा समाचारों में आती ही रहती हैं। हम और आप इस प्रताड़ना से गुजर रहे छात्र की मानसिक स्थिति को समझ ही नहीं सकते।

बेहतर होगा कि स्कूलों में व्यवस्था हो कि विद्यार्थियों के लिए ऐसे विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएँ जो उन्हें अन्य व्यक्तियों की परिस्थितियों और उनके विचारों का सम्मान करना सिखाएँ। अध्यापक, अभिभावक और वार्डन अधिक व्यावहारिक बनें ताकि बच्चे अपनी हर बात बिना हिचकिचाए उनके समक्ष रख सकें। फिर इनकी जिम्मेदारी है कि गंभीरता से, शान्तिपूर्वक छात्रों की समस्याओं का समाधान भी करें।

कॉलेज में रैगिंग के पक्ष में दिए जाने वाले तर्क सबसे अधिक हास्यास्पद होते हैं। मसलन, ‘रैगिंग से नए छात्रों के अंदर की हिचकिचाहट कम होती है, रैगिंग से सीनियर और जूनियर के बीच तालमेल बेहतर होता है, रैगिंग के बाद सीनियर्स अपने जूनियर्स की अधिक मदद करते हैं’ और भी न जाने क्या-क्या। अरे भई! आपको मदद करनी है तो नए विद्यार्थियों को उनका कोर्स समझने में मदद करिए न! स्कूल से, अलग-अलग बैकग्राऊंड से, सामाजिक, आर्थिक ताने-बाने से निकलकर आए, भाषाओं के अल्प ज्ञान से जूझते नए छात्रों के बाल कुतरवा कर आप क्या साबित करना चाहते हैं?

जबरन लड़कों की बेल्ट उतरवा कर और लड़कियों से दो चुटिया बनवाकर कॉलेज में आप कौन से फन्ने खाँ बन जाते हैं? इन नए बच्चों से ‘चार आना, आठ आना’ करवाकर और कॉलेज से हॉस्टल तक लाइन बनवाकर आप उनका मानसिक शोषण ही कर रहे हैं।

सीनियर के शोषण, पढ़ाई का प्रेशर और फ़ाइनल ईयर आते-आते नौकरी और GATE/GPAT/CAT/MAT क्लियर करने के दबाव में कॉलेज के हॉस्टल में रात-रात को दूसरों से छुपकर रोते हुए लड़के भी होते हैं साहब। ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ या ‘लड़के कभी रोते नहीं’ जैसे फालतू बॉलीवुडिया डायलॉग बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाने का ही काम करते हैं।

सरकारी और कॉर्पोरेट दफ्तर की कहानी एक ही है। यहाँ कितने ही मुस्कुराते चेहरे या स्मार्ट पर्सनैलिटी दिखाई देती हों, अंदर से सब एक-दूसरे की तरक्की से जलते ही हैं। ‘स्मार्ट वर्क, स्मार्ट कल्चर, ऑन द टॉप अक्रॉस द ग्लोब’ जैसे जुमले सिर्फ ई-मेल पर ही ठीक लगते हैं।

हकीकत यह है कि लोग चाहते हैं कि आप गलती करें, आपको एप्रिसिएशन न मिले, आपके काम को रिकग्निशन न मिले। यदि मीटिंग में आपके काम की तारीफ होती है तो अंदर तारीफ़ करने वाले, ताली बजाने वाले सब होंगे लेकिन बाहर आते ही दस में से आठ लोग यह कहते पाए जाते हैं कि ‘ये तो बॉस का चाटुकार है’। आपको अवार्ड देने वाला बॉस ही चाय-सुट्टे पर अपने साथियों से कहता पाया जाएगा कि ‘अरे यार इसको देना नहीं था लेकिन क्या करें? सबको खुश रखना पड़ता है।’

सारांश यह कि हमारे समाज में कब यह सिखाया जाता है कि हम दूसरों की तरक्की से सचमुच खुश होना सीखें? हमारे समाज में इंटरव्यू के लिए सीवी पढ़कर नहीं बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर तस्वीरें देखने के बाद बुलाया जाता है।

आप खुद से पूछिए कि आपके मेहनती सहकर्मी की तरक्की से आप कितने खुश होते हैं भला? ऐसे हजारों उदाहरण हैं – जहाँ दफ्तरों में बॉस अपने जूनियर्स पर चिल्लाते हैं, बदतमीजी करते हैं, मानसिक शोषण करते हैं, काम को कम-ज्यादा करने की हेराफेरी करते हुए दमन करते हैं।

इन सबके बीच सबसे बकवास और निहायती खोखला फ्रेज है- ‘प्लीज रीच आउट टू मी इन केस ऑफ़ एनी प्रॉब्लम, इस्यू, कंसर्न। आई एम ऑलवेज देयर फॉर यू’। पढ़ने सुनने में ये बहुत बढ़िया लग सकता है। लेकिन हकीकत में यह काम करता है क्या? जब आप ऐसा लिख रहे होते हैं तब आपका ईगो अपना काम कर रहा होता है। जब आप ऐसा लिख रहे होते हैं, आप जान रहे होते हैं कि किन लोगों को आपकी जरुरत है।

जब आप ऐसा लिखकर मेल भेज देते हैं, उसके बाद आप अपने कितने सहकर्मियों से या जूनियर्स से बात करते हैं? उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं? उनकी चिंताएँ सुनते हैं? हमारे कल्चर में लोग सिर्फ बोलना चाहते हैं, बस सुनना कोई नहीं चाहता।

ऑफिस में बॉस से डाँट खाकर आई लड़की या लड़के के पास बैठकर कोई सांत्वना नहीं देना चाहता क्योंकि आपको डर है कि बॉस आपको भी अपना दुश्मन न समझ ले। कहीं बॉस आपका भी अप्रेजल न रोक दे। फिर आप मेल करते हैं- ‘प्लीज रीच आउट टू मी फॉर….’

सांत्वना, अपनापन, प्रेम सब कहीं खो जाते हैं। मानसिक विकार हावी होने लगता है। अपने आस-पास नजर घुमाइए। ऐसे दर्जनों उदाहरण आपको मिल जाएँगे।

बॉलीवुड ने फिर से साबित किया है कि इसकी नींव खाली है और दीवारें खोखली हैं। यहाँ ट्विटर पर प्रेम जताया जाता है, किसी की मौत पर पर्दे के पीछे मेक-अप चल रहा होता है। ऋषि कपूर, इरफ़ान, सुशांत सब भुला दिए जाते हैं।

काम बनता हो तो गधा भी बाप कहलाता है, मतलब न हो तो कला सड़कों पर दम तोड़ती जाती है। सोशल मीडिया पर बनावटी हैशटैग चलाए जाते हैं कि ‘काश! तुम मुझसे एक बार बात कर लेते’। लेकिन हे आर्टिफिशियल मनुष्य! तुम खुद क्यों नहीं बात कर सके उनसे, जब तुम कर सकते थे? तब तुम्हारा ईगो, तुम्हें रोकता था कि कहीं तुम उसकी मदद करने जाओ और वो तुमसे आगे न निकल जाए। कहीं वो तुमसे अधिक सफल न हो जाए। …आओ अब मेकअप कर लें। टीवी पर आने का वक़्त हो चला है।

नोट: ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि हमारे आस-पास अच्छे लोग, स्कूल-कॉलेज या सकारात्मक वातावरण नहीं है या कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा। लेकिन सुशांत के साथ हुई दुखद घटना हमारे समाज की कमजोरियों को भी उजागर करती है। जरुरत है कि हम इनसे सबक सीखें, आत्मचिंतन करें और अपनी आने वाली पीढ़ी को लोगों का, उनके विचारों को सुनने और समझने का महत्त्व समझाएँ। ताकि फिर किसी होनहार सुशांत के परिवार को ऐसी अप्रिय घटना का सामना न करना पड़े।

शिवसेना ने कॉन्ग्रेस को कहा ‘पुरानी खटिया’- महाविकास अघाड़ी में पड़ चुकी है दरार, ‘सामना’ के लेख से खुलासा

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस) के 6 महीने पहले बने गठबंधन में दरार पड़ने लगी है। चर्चा है कि बड़े फैसलों से कॉन्ग्रेस को दूर रखने से पार्टी के कई बड़े नेता मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से नाराज चल रहे हैं।

इस बात को मंगलवार (जून 16, 2020) को एक बार फिर बल मिला, जब शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कॉन्ग्रेस के दो नेता- अशोक चव्हाण और बालासाहेब थोराट पर निशाना साधा गया। शिवसेना ने कॉन्ग्रेस की तुलना पुरानी खटिया से की है, जो रह-रह कर कुरकुर की आवाज करती है। सामना ने संपादकीय का शीर्षक दिया है ‘खटिया क्यों चरमरा रही है?’ 

लेख में अशोक चव्हाण और बालासाहेब थोराट का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि दोनों मंत्री मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात कहने वाले हैं। मुख्यमंत्री उनकी बात सुनेंगे और फैसला लेंगे। लेकिन कॉन्ग्रेस कहना क्या चाहती है? राजनीति की पुरानी खटिया कुरकुर की आवाज क्यों कर रही है? 

सामना के संपादकीय में कहा गया, “राज्य के मामले में मुख्यमंत्री का फैसला ही आखिरी होता है, ऐसा तय होने के बाद कोई और सवाल नहीं रह जाता। शरद पवार ने खुद इसका पालन किया है। समय-समय पर मुख्यमंत्री से मिलते रहते हैं और सुझाव देते हैं। उनका अनुभव शानदार है।”

कॉन्ग्रेस के बारे में शिवसेना ने लिखा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी भी अच्छा काम कर रही है, लेकिन समय-समय पर पुरानी खटिया रह-रह कर कुरकुर की आवाज करती है। खटिया पुरानी है लेकिन इसकी एक ऐतिहासिक विरासत है। इस पुरानी खाट पर करवट बदलने वाले लोग भी बहुत हैं। इसलिए यह कुरकुर महसूस होने लगी है। मुख्यमंत्री ठाकरे को आघाड़ी सरकार में ऐसी कुरकुराहट को सहन करने की तैयारी रखनी चाहिए। 

सामना के लेख में विधानसभा में कॉन्ग्रेस के संख्याबल को याद दिलाकर उनकी महाविकास आघाड़ी में हैसियत क्या है, यह याद दिलाया गया है। कॉन्ग्रेस के पास सबसे कम यानी 44 विधायक हैं। इसके अलावा लेख में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस को मंत्री पद मिले क्योंकि शिवसेना ने त्याग किया।

लेख के अंत में इस बात को लेकर भी चेताया गया है कि सीएम ठाकरे कुर्सी के लालची नहीं हैं, जो वो कोई भी शर्त मान लें। संपादकीय में लिखा गया है कि इस खेल में पत्तों का पिसना कभी नहीं थमता। इसलिए सरकार को खतरा पैदा होगा और राजभवन के दरवाजे किसी के लिए अल-सुबह फिर से खुल जाएँगे, इस भ्रम में कोई न रहे। चाहे कॉन्ग्रेस हो या राकांपा, राजनीति में मँझे लोगों की पार्टी है। उन्हें इस बात का अनुभव है कि कब और कितना कुरकुराना है, कब करवट को बदलना है।

उद्धव ठाकरे को सत्ता को लोभ नहीं। राजनीति अंततः सत्ता के लिए ही है और किसी को सत्ता नहीं चाहिए ऐसा नहीं है, लेकिन उद्धव ठाकरे ऐसे नेता नहीं हैं, जो सत्ता के लिए कुछ भी करेंगे।

शिवसेना के इस हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने महाविकास आघाड़ी को घेरा है। बीजेपी ने सामना के संपादकीय का हवाला देते हुए कहा कि इन्हें (सरकार) महाराष्ट्र में कोरोना की वजह से जान गँवाते लोगों की फिक्र नहीं है बल्कि केवल कुर्सी की चिंता है।

बीजेपी के प्रवक्ता राम कदम ने मंगलवार को कहा, “ये लोग (महाविकास आघाड़ी) पुरानी खाट की आवाज पर बात कर रहे हैं, लेकिन दुख की बात है कि इन्हें महाराष्ट्र के अस्पतालों में बेड की कमी के चलते कोरोना मरीजों की मौत की कोई चिंता नहीं है। महाविकास आघाड़ी सिर्फ खाट और कुर्सी के बारे में सोचने में मशगूल है। यह भी सोचने वाली बात है कि इतनी बेइज्जती के बाद क्या कॉन्ग्रेस और एनसीपी में कोई आत्मसम्मान बचा है? महाराष्ट्र चीन बन गया है (कोरोना के मामले में) और ये लोग आपस में ही लड़ने पर आमादा हैं।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों अशोक चव्हाण और बालासाहेब थोराट ने कहा था कि महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों में कुछ मुद्दे हैं, जिसे वो मुख्यमंत्री के साथ मिलकर सुलझाना चाहते हैं।

अफसर समेत कई चीनी सैनिकों की मौत: चीन क्यों छुपा रहा मारे गए सैनिकों की संख्या, क्यों लगा दिया है पूरा मीडिया तंत्र

भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी के पास हिंसक झड़प में दोनों तरफ से सेना के अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आई हैं। लेकिन चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स द्वारा लगातार संदिग्ध और अस्पष्ट बयानों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि चीन अपनी सैनिकों की मौत की खबर को बाहर नहीं आने देना चाहता है।

दरअसल, भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान के बलिदान की खबरों के कुछ देर बाद ही भारतीय सेना द्वारा जारी एक अपडेट में बताया गया है कि इस झड़प में दोनों देशों की सेना के अधिकारियों को हानि पहुँची है।

वहीं, चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्टर ने जहाँ पहले इस बात की पुष्टि करते हुए लिखा कि कल चीन-भारत सीमा पर 5 पीएलए सैनिक मारे गए और 11 घायल हो गए।

चीनी सैनिकों के हताहत होने की खबर सामने आने के कुछ देर बाद ही चाइनीज मुख पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के आधिकारिक एकाउंट से ट्वीट में लिखा गया – “आधिकारिक ग्लोबल टाइम्स एकाउंट ने कभी भी चीनी सैनिकों को हुई क्षति के बारे में सटीक सूचना नहीं दी है। ग्लोबल टाइम्स इस समय संख्या की पुष्टि नहीं करता है।”

कुछ देर बाद ही ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा – “मुझे जो पता है, उसके आधार पर, गालवन घाटी में हुए संघर्ष में चीनी सेना के लोग भी हताहत हुए। मैं भारतीय पक्ष को बताना चाहता हूँ, अभिमानी होने की आवश्यकता नहीं है, चीन के संयम को गलत मत समझो। चीन भारत के साथ कोई टकराव नहीं करना चाहता है, लेकिन हम इससे डरते नहीं हैं।”

इसी बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने अपील की है कि भारत इस मामले के बाद कोई एकतरफा कदम नहीं उठाए और वो इस पर बातचीत करने को तैयार हैं।

अक्साई चीन सीमा पर बीती देर रात हुई झड़प में दो भारतीय जवानों के बलिदान होने के बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस झड़प में गोली-बारूद का इस्तेमाल नहीं हुआ और दोनों ओर की सीमाओं से पत्थरबाजी की गईं। भारतीय सेना ने अपने बयान को अपडेट करते हुए कहा कि इस झड़प में चीन के भी कुछ सैनिक हताहत हुए हैं।

इन सभी खबरों के बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाँच चीनी सैनिकों के भी मरने की खबरें सामने आईं। हालाँकि, चीनी प्रोपेगेंडा तंत्र पूरे जोर से इसे झुठलाने और भारत को ही आक्रांता बताने पर तुला हुआ है। चीन का कहना है कि भारतीय सैनिक उनकी सीमा में घुसकर उनके सैनिकों को निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत हमेशा एक शांतिप्रिय राष्ट्र रहा है, जबकि चीन ने अपनी धौंस दिखाने की कोशिश कई बार की हैं, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी उसे आलोचना का सामना करना पड़ा है।

अक्साई चीन स्थित गलवान घाटी में पिछले एक महीने में चीनी सैन्य गतिविधियों के कारण विवाद बढ़ा है, यह विवाद भारत द्वारा बनाए जा रहे एक सड़क को लेकर है। भारत गलवान घाटी के डुरबुक से लेकर दारूल बेग ओल्ड तक सड़क का निर्माण करा रही है। चीन का कहना है कि यह क्षेत्र उसके हिस्से की है। जबकि दारूल बेग ओल्ड भारत के अक्साई चीन के इलाके से लगा है, जिस पर चीन ने कब्जा कर लिया है।

गलवन क्षेत्र इस पूरे इलाके में सबसे ऊँचाई पर बसा है। यहाँ से भारतीय सेना के जवान और रसद आदि की सप्‍लाई करते हैं। इसके उत्‍तर में ही दौलत बेग ऑल्‍डी सेक्‍टर है, जो भारतीय सीमा के अंदर का क्षेत्र है, यहाँ पर पहले भी चीन की तरफ से घुसपैठ की कोशिश हो चुकी हैं।

कंगना रनौत के बाद रवीना टंडन का फूटा बॉलीवुड ‘नेक्सस’ पर गुस्सा, दुनिया को बताया इंडस्ट्री का काला सच

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से पूरा देश सदमे में है। सुशांत की इस मौत ने बॉलीवुड को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए है। कई बॉलीवुड स्टार्स भी इंडस्ट्री की अंदरुनी ‘गंदगी’ को लेकर ट्वीट कर रहे हैं। एक्टर सुशांत सिंह ने रविवार (जून 14, 2020) को मुंबई के बांद्रा में अपने में आत्महत्या कर ली। जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक के बाद एक बॉलीवुड के राज खुल रहे हैं।

एक्ट्रेस कंगना रनौत, निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप समेत कई स्टार्स ट्वीट कर बॉलीवुड इंडस्ट्री पर जमकर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। इसी बीच अब एक्ट्रेस रवीना टंडन ने भी सोशल मीडिया पर बॉलीवुड से जुड़े कई खुलासे किए है।

रवीना टंडन ने सोशल मीडिया पर लगातार कई ट्वीट किए। रवीना टंडन ने ट्वीट करते हुए लिखा, “ऐसा कई बार होता है कि फिल्मों से आपको अचानक निकाल दिया जाएगा और हीरो अपनी किसी गर्लफ्रेंड को ले लेता है। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो ऐसा भी करते है कि आपके बारे में फेक न्यूज फैलाते है। ताकि आपकी इमेज खराब हो और उससे आपका करियर खत्म हो सके। इसी वजह से इस इंडस्ट्री में बहुत स्ट्रगल करना पड़ता है कुछ लोग इसे झेल लेते है तो कुछ लोग नहीं।”

अपने दूसरे ट्वीट में रवीना टंडन ने लिखा कि, “जब आप इनके खिलाफ बोलते है तो आपको झूठा कहा जाता है। कई लोग तो आपको पागल तक कह देते है। इस इंडस्ट्री ने मुझे बहुत कुछ दिया है। जिसकी मैं आभारी हूँ लेकिन यही बॉलीवुड की सच्चाई है।”

आगे रवीना टंडन ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है फिर चाहे वो इंडस्ट्री में पैदा हुआ ‘इनसाइडर’ हो या फिर बाहर से आया कोई नया चेहरा ‘आउटसाइडर।’ यहाँ पर दबाने वाले बहुत लोग हैं। मुझे भी दबाने की कोशिश हुई है लेकिन मैंने उतनी तेजी से फाइट की। गंदी राजनीति हर जगह है।”

अपने आखिरी ट्वीट में एक्ट्रेस ने लिखा, “मैं अपनी इस इंडस्ट्री से प्यार करती हूँ लेकिन ये भी सच है कि यहाँ बहुत ज्यादा प्रेशर है। यहाँ अच्छे लोग भी हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो गंदी पॉलिटिक्स करते हैं। दुनिया ऐसी ही है।”

गौरतलब है कि इससे पहले कंगना रनौत ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बॉलीवुड को खरी-खोटी सुनाई थी। कंगना ने कहा था कि बॉलीवुड के लिए सुशांत ने इतनी अच्छी फिल्में कीं। मगर उन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने काय पो छे से डेब्यू किया। उन्हें डेब्यू तक का अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने 6-7 साल के अंतराल में केदारनाथ, धोनी और छिछोरे जैसी अच्छी फिल्में बनाईं। मगर, फिर भी उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं मिला। कोई सराहना नहीं मिली। वहीं, गली बॉय जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड मिल जाते हैं।

वहीं सलमान ख़ान की फिल्म ‘दबंग’ के निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप ने सरकार से माँग की है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की विस्तृत जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि सुशांत भले ही चले गए लेकिन उनकी लड़ाई अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने कई बड़ी समस्याओं को सामने ला दिया है, जिससे आज बॉलीवुड में कई लोग जूझ रहे हैं। 

भारत-चीन के बीच बिना गोली-बारूद के हुई खूनी झड़प, रक्षा मंत्री ने की CDS और विदेश मंत्री के साथ बैठक

भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी के पास हिंसक झड़प में दोनों तरफ से सेना के अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इसमें भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान के बलिदान की खबरों के कुछ देर बाद ही भारतीय सेना द्वारा जारी एक अपडेट में बताया गया है कि इस झड़प में दोनों देशों की सेना के अधिकारियों को हानि पहुँची है।

कुछ सूत्रों से खबर आ रही है कि एक चीनी अफसर समेत चार के मरने की सूचना है। एशिया न्यूज़ की ताजा जानकारी के अनुसार चीन के 4 सैनिकों, जिनमें चीनी सेना का एक अधिकारी भी शामिल हैं, की मौत हुई है। हालाँकि अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

इसी बीच चीन की ओर से जारी एक अधिकारिक बयान में आरोप लगाया है कि भारत के सैनिकों के द्वारा उनकी सीमा में घुसपैठ की कोशिशें की गईं और चीनी सैनिकों पर हमला किया गया। बता दें कि गलवान घाटी, जहाँ यह झड़प हुई है वह अक्साई चीन का बाहरी इलाका है।

बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान किसी तरह की कोई गोली नहीं चली है, यानी हाथापाई और पत्थरबाजी हुईं, जिनमें सैनिकों को क्षति पहुँची है। सेना ने भी किसी प्रकार की फायरिंग से इनकार किया है।

भारतीय सेना की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है- “गलवान घाटी में सोमवार की रात को डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया के दौरान भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस दौरान भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान शहीद हो गए हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इस वक्त इस मामले को शांत करने के लिए बड़ी बैठक कर रहे हैं।”

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों और विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ बैठक की, जिसमें पूर्वी लद्दाख के हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की गई।

मारा गया हिजबुल आतंकी उमर: सरपंच अजय पंडिता की मौत का सुरक्षाबलों ने लिया बदला

जम्मू-कश्मीर में आतंकी उमर को मारकर सुरक्षाबलों ने सरपंच अजय पंडिता की मौत का बदला ले लिया। इस बात का खुलासा आईजी विजय कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि इस आतंकी ने ही सरपंच अजय की हत्या को अंजाम दिया था। इसकी पुष्टि एक प्रत्यक्षदर्शी ने की है। हालाँकि, फॉरेंसिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है।

कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने कहा कि पिछले हफ्ते हिजबुल के 2 आतंकियों को मार गिराया गया था, जिसमें उमर भी शामिल था। उमर ने ही सरपंच अजय पंडिता की हत्या की थी। आईजी विजय कुमार ने कहा, “हम हर सरपंचों को सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते हैं, लेकिन जिसको भी खतरा है, वह हमारे पास आए।”

उन्होंने बताया कि भारतीय सुरक्षाबलों की मुस्तैदी की वजह से ही आज आतंकियों में डर बैठने लगा है। अब तक 94 आतंकियों को मारा जा चुका है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि उत्तर कश्मीर से आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए।

आतंकवाद का दामन थामने वालों की संख्या में भारी गिरावट की पुष्टि करते हुए आईजी ने कहा कि हम हमेशा नए भर्ती हुए आतंकवादियों को एनकाउंटर से पहले आत्मसमर्पण करने के लिए कह रहे हैं। आईजी ने कहा कि ऐसे भटके हुए युवाओं के माता-पिता से अनुरोध कर रहे हैं कि वे अपने बच्चों से सामान्य जीवन में लौटने के लिए अपील करें।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों 8 जून को कश्मीर घाटी में अनंतनाग के लरकीपोरा इलाके में सरपंच अजय पंडिता की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना को अंजाम देते ही आतंकी मौके से फरार हो गए थे। लेकिन भारतीय सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि आतंकी इसी इलाके में ही छिपे हुए हैं। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने हालिया मुठभेड़ में उमर को मार गिराया।

अजय पंडिता की हत्या का मामला सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने इस आतंकी हमले को मुख्यत: कॉन्ग्रेस पर हमला बताया था। जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर बॉलीवुड अभिनेता तक ने उनकी विचारों पर सवाल उठाए थे। वहीं, अजय पंडिता की बेटी ने इस बयान को लेकर कहा था कि उनके पिता की मौत पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है।

22 वर्षीय सद्दाम ने अपने गाँव की ही 7 साल की बच्ची के साथ किया दुष्कर्म का प्रयास, गिरफ्तारी के बाद तनाव

उत्तर प्रदेश के इलिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने 7 साल की बच्ची के साथ रेप का प्रयास करने के आरोप में सद्दाम नाम के युवक को गिरफ्तार किया। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण गाँव में तनाव की स्थिति बन गई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से वहाँ पुलिस बल की तैनाती की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (जून 13,2020) की सुबह 8 बजे गाँव के ही 22 वर्षीय सद्दाम ने 7 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। लेकिन, बच्ची की चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर कई ग्रामीण वहाँ वारदात की जगह पर पहुँच गए, तभी सद्दाम वहाँ से भागने लगा।

इस बीच बच्ची के घरवालों ने ग्रामीणों की मदद से उसे दौड़ाकर पकड़ा और खूब पीटा। बाद में मौके पर पहुँची पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ़ आईपीसी की धारा 363, 376, 511, 153ए तथा 5/6 पास्को एक्ट के तहत मुकदमा लिखकर आरोपित सद्दाम को मेडिकल के लिए भेजा।

मगर, यहाँ मामला शांत नहीं हुआ। दरअसल, न्यूज 18 की खबर के अनुसार, जब उसे मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया, तब वह वहाँ से मौक़ा देखकर फरार हो गया। सद्दाम के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया और तमाम अधिकारी मौके पर पहुँच गए।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सद्दाम के खिलाफ़ पुलिस कस्टडी से भागने का मामला भी दर्ज किया गया है। इसके अलावा दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके ख़िलाफ़ भी उपयुक्त धाराओं में मामला दर्ज हुआ है।

ऑपइंडिया ने जब इस संबंध में इलिया थाने में बात की, तो पुलिस अधिकारी ने बताया, “13 तारीख को सद्दाम फरार हुआ था। इसके बाद पुलिस ने उसे अगले दिन 14 तारीख को उसे ग्राम भोरसर से गिरफ्तार किया। अब उसे जेल भेजा जा चुका है। गाँव में माहौल को देखते हुए पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई है। शांति व्यवस्था का पूरा प्रयास किया जा रहा है।”

उल्लेखनीय है कि इस घटना से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। पुलिस ने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिसबल की तैनाती की है। इसके अलावा इस मामले पर विभाग के उच्चाधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।