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सांसद साक्षी महाराज को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले मोहम्मद गफ्फार को ATS ने बिजनौर से दबोचा

उत्तर प्रदेश के उन्नाव से भाजपा सांसद सच्चिदानंद हरि साक्षी उर्फ साक्षी महाराज को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित युवक की पहचान मोहम्मद गफ्फार के रुप में हुई है। प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने गफ्फार नामक इस युवक को बिजनौर से पकड़ा। गफ्फार मूलरूप से बिजनौर के मंडावली इलाके का निवासी है।

ATS की पूछताछ के दौरान आरोपित गफ्फार ने कबूल किया कि कुवैत में रहने के दौरान उसने कॉल करके धमकी दी थी। गफ्फार ने यह भी कबूल किया है कि उसने कुवैत से भारतीय जनता पार्टी के कई अन्य नेताओं को फोन कर धमकी दी थी। उसने बताया कि कुवैत में किसी ने उसे कॉल करने और भाजपा नेताओं को धमकी देने के लिए कहा था।

एटीएस सूत्रों ने पुष्टि की है कि साक्षी महाराज के अलावा उसने कई अन्य भाजपा नेताओं को भी फोन किया था। मगर अभियुक्त के कुवैत में होने के कारण उसको ट्रैक करना एक मुश्किल काम था। हाल ही में उन्हें सूचना मिली कि वह भारत लौट आया है और बिजनौर में है। जिसके बाद वहाँ पर टीमें भेजी गई और उसे दबोच लिया गया। यूपी पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह अकेले इस काम को अंजाम दे रहा था या फिर भाजपा नेताओं को धमकी देने वाले इस वारदात के पीछे कोई रैकेट है।

गफ्फार के इस कृत्य को आईपीसी एवं आईटी एक्ट की धारा के तहत दंडनीय अपराध मानते हुए एटीएस ने अपने लखनऊ थाने में मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा आईपीसी की धारा 504 व 507 तथा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत दर्ज किया गया है।

एटीएस ने गफ्फार के कब्जे से पासपोर्ट के अलावा एक मोबाइल, एक आधार कार्ड और कुवैत की एक सिविल आईडी बरामद किया है। गफ्फार को न्यायालय में पेश करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि बीते दिनों साक्षी महाराज को मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी मिली थी। सांसद के निजी सचिव अशोक कटियार ने पुलिस को इस मामले की तहरीर दी थी। जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जाँच पड़ताल शुरू कर दी थी।

2013 में भी इन्‍हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। साथ ही 2015 में किसी बात पर टिप्‍पणी को लेकर जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा इन्‍हें बम से उड़ाने की भी धमकी दी जा चुकी है। इस संबंध में इन्‍होंने कहा था एक बार स्‍पष्‍ट कहा था कि इस राज्‍य में मैं असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। बुधवार (जून 17, 2020) को आरोपित को पकड़ने में सफलता मिली।

‘ताइवान न्यूज़’ पर ‘ड्रैगन’ को मारते हुए भगवान राम का पोस्टर बना है चर्चा का विषय

‘ताइवान न्यूज‘ (Taiwan News) की वेबसाईट पर एक पोस्टर नजर आया है, जो कि सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ताइवान न्यूज़ पर प्रकाशित इस पोस्टर में भगवान राम ड्रैगन को मारते हुए नजर आ रहे हैं। ज्ञात हो कि भगवान राम बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं।

अपनी विस्तार और वर्चस्ववादी नीतियों के लिए कुख्यात चीन को दुनिया ड्रैगन का भी नाम देती है। चीन अपनी ‘नाइन डैश पॉलिसी’ और कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण अपने आसपास के तमाम क्षेत्र पर बलपूर्वक और कुटिलता से नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास सदियों से करता आया है। चीन की इसी नीति से इसका एक और पड़ोसी मुल्क भी परेशान है जिसका नाम है ताइवान!

ताइवान न्यूज़ (Taiwan News) पर प्रकाशित पोस्टर, जिसमें भगवान राम ड्रैगन को मारते नजर आ रहे हैं –

इस पोस्टर में भारतीय सभ्यता, आस्था और संस्कृति के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले भगवान राम चीनी ड्रैगन को तीर से मारते हुए नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर का शीर्षक है – ‘फोटो ऑफ़ द डे: भारत के राम चीन के ड्रैगन को ठिकाने लगाते हुए।’ (Photo of the Day: India’s Rama takes on China’s dragon)

हालाँकि, ताइवान न्यूज़ ने भी इस पोस्टर को किसी अन्य स्रोत से लेकर प्रकाशित किया है। ताइवान न्यूज़ के अनुसार, यह पोस्टर हांगकांग सोशल मीडिया साइट LIHKG पर पोस्ट किया गया था।

इस चित्र में भगवान राम एक धनुष से चीनी ड्रैगन को लक्ष्य बनाते हुए उसे मारते नजर आ रहे हैं। इसमें संदेश लिखा गया है, जिसमें भगवान राम ड्रैगन का संहार करने की मुद्रा में हैं और लिखा गया है – ‘हम जीतते हैं” और “हम मार डालते हैं।”

सोशल मीडिया पर यह पोस्टर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर विवाद में चीन भारत ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी संघर्षरत है। इसका एक उदाहरण यह है कि जब चीन के सैनिक भारतीय सीमा में घुसकर भारतीय सैनिकों से झड़प कर रहे थे उसी समय ताइवान ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक चीनी फाइटर प्लेन को करारा जवाब देते हुए वापस खदेड़ दिया था। ताइवान ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर चीनी विमानों ने तीन बार हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। चीन और ताइवान के बीच भी विवाद बढ़ने के आसार हैं।

चीन और ताइवान में गर्मागर्मी का कारण

वर्ष 1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने शियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद शियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है। लेकिन चीन इस द्वीप को अपना अभिन्न अंग मानता आया है।

गलवान घाटी में वीरगति को प्राप्त हुए 20 जवानों के नामों की सूची जारी, सबसे ज्यादा बिहार रेजिमेंट के

भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख सीमा पर हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए। जबकि चीन के 43 सैनिक गंभीर रूप से हताहत बताए जा रहे हैं। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच भारतीय सेना की ओर से चीन के हमले में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की लिस्ट जारी कर दी गई है।

लद्दाख सीमा पर चीन के साथ भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प में शहादत देने वाले कर्नल संतोष बाबू के साथ 19 और जवान शहीद हुए हैं। इसमें नायब सूबेदार सतनाम सिंह और मनदीप सिंह के साथ बिहार की दो अलग-अलग रेजिमेंट के 13, पंजाब रेजिमेंट के तीन, 81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कंपनी रेजिमेंट का एक, 81 फील्ड रेजिमेंट का एक और 3 मीडियम रेजिमेंट के 2 जवान शामिल हैं।

16 बिहार रेजिमेंट: 12 शहीद, इन राज्यों से थे 

  • सिपाही कुंदन कुमार – सहरसा, बिहार
  • सिपाही अमन कुमार – समस्तीपुर, बिहार
  • दीपक कुमार – रीवा, मध्यप्रदेश
  • सिपाही चंदन कुमार – भोजपुर, बिहार
  • सिपाही गणेश कुंजाम – सिंहभूम, पश्चिम बंगाल
  • सिपाही गणेश राम – कांकेर, छत्तीसगढ़
  • सिपाही केके ओझा – साहिबगंज, झारखंड
  • सिपाही राजेश ओरांव – बीरभूम, पश्चिम बंगाल
  • सिपाही सीके प्रधान – कंधमाल, ओडिशा
  • नायब सूबेदार नंदूराम – मयूरभंज, ओडिशा
  • हवलदार सुनील कुमार- पटना, बिहार
  • कर्नल बी. संतोष बाबू – हैदराबाद, तेलंगाना

12 बिहार रेजिमेंट: 1 शहीद

  • सिपाही जयकिशोर सिंह – वैशाली, बिहार

3 पंजाब रेजिमेंट: 3 शहीद

  • सिपाही गुरतेज सिंह – मनसा, पंजाब
  • सिपाही अंकुश – हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश
  • सिपाही गुरविंदर सिंह – संगरूर, पंजाब

3 मीडियम रेजिमेंट: 2 शहीद

  • नायब सूबेदार सतनाम सिंह – गुरदासपुर, पंजाब
  • नायब सूबेदार मनदीप सिंह – पटियाला, पंजाब

81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कंपनी: 1 शहीद

  • हवलदार बिपुल रॉय  – मेरठ, उत्तरप्रदेश

81 फील्ड रेजिमेंट: 1 शहीद

  • हवलदार के. पालानी – मदुरै, तमिलनाडु

बता दें कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दें। साथ ही भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी है। जिसके बाद भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि गलवान घाटी में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और सुनियोजित कार्रवाई थी, जो इसके बाद की अन्य घटनाओं के लिए जिम्मेदार था।

इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि सैनिकों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है और इसकी रक्षा करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। भारत शांति चाहता है, लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जवान चीनी सैनिकों को मारते-मारते वीरगति को प्राप्त हुए हैं।

गौरतलब है कि भारतीय सेना के मुताबिक, चीनी सेना के साथ ये झड़प 15-16 जून की रात हुई। भारतीय सैनिकों का दल कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू की अगुआई में चीनी कैंप में गया था। भारतीय दल कोई हथियार लेकर नहीं गया था। तभी चीनी सैनिकों ने हमला किया। बॉल्डर, पत्थर, कंटीले तारों और कील लगे डंडों से हुए हमले में कमांडिग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू और दो जवान मौके पर वीरगति को प्राप्त हो गए। मंगलवार (जून 16, 2020) रात को 20 जवानों के बलिदान की पुष्टि हुई।

AAP की MLA आतिशी कोरोना की चपेट में, घर में हुईं क्वारंटाइन, कहा- स्वास्थ्य विभाग के साथ कर रही थी काम

AAP पार्टी MLA आतिशी मार्लेना कोरोना वायरस की चपेट में आ गई है। बुधवार (जून 17, 2020 ) को उनकी कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। फिलहाल उन्होंने घर में ही खुद को सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया है।

आतिशी मार्लेना दिल्ली कालकाजी विधानसभा सीट से विधायक है। कोरोना वायरस रिपोर्ट के पॉजिटिव आने के बाद आतिशी ने बताया कि कुछ दिनों से उन्हें हल्की खाँसी और सर्दी शिकायत थी। आतिशी ने मंगलवार (जून 16, 2020) को COVID-19 जाँच करवाई थी, जिसकी रिपोर्ट आज आई है।

कोरोना वायरस परिक्षण के पॉजिटिव आने के बाद उन्होंने बताया कि वो कुछ दिनों से स्वास्थ्य विभाग के साथ मिल कर काम कर रहीं थीं। जहाँ 11 जून को एक अधिकारी के कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से ही उनमें COVID-19 के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के पॉजिटिव आने पर उन्होंने 11 जून से ही खुद को घर पर आइसोलेट कर लिया था।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर उनके जल्द स्वस्थ होने के कामना की है। केजरीवाल ने कहा – “कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आतिशी जी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। मुझे उम्मीद है वो जल्द से जल्द स्वस्थ हो कर एक बार फिर लोगों की सेवा में लग जाएँगी।”

केजरीवाल में भी नजर आए थे लक्षण

कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हल्के बुखार और गले में खराश की शिकायत के बाद खुद को घर में ही आइसोलेट कर लिया था। जिसके बाद उनका कोरोना वायरस टेस्ट कराया गया था। हालाँकि, केजरीवाल कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं पाए गए और उनकी जाँच रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

केंद्र ने बढ़ाया मदद के लिए हाथ

दिल्ली में कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा हैं। जिसके मद्देनजर हुए हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों के साथ राजधानी के बदतर होते हालात पर चर्चा की थी।

दिल्ली में बढ़ते मरीज और घटते बेड की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने रेलवे के 500 कोच जिसके अंदर 8000 बेड की सुविधा दी हैं। कंटेनमेंट जोन में कॉन्‍टैक्‍ट ट्रेसिंग, टेस्टिंग बढ़ाने, समाज सेवी संस्थाओं को मदद के लिए आगे आने व ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर व अन्य सभी उपकरणों की कमी को पूरा करने जैसी तमाम मदद करने का भरोसा दिया है।

45 हजार पहुँचने वाले हैं दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में अब तक संक्रमण के कुल 44,688 मालमे सामने आए हैं। इनमें 26,351 एक्टिव केस है। 16,500 लोग इस संक्रमण से ठीक हो कर घर जा चुके हैं। जबकि 1,837 लोगों ने इस महामारी की वजह से अपनी जान गँवा दी है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में दिल्ली तीसरे स्थान पर है।

सलमान, करन जौहर, यशराज के बॉयकॉट के लिए ऑनलाइन पिटीशन, 15 लाख से अधिक लोगों ने किया साइन

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर और एक्टर्स के विरोध में आ गए हैं। जयश्री शर्मा श्रीकांत नाम के एक फेसबुक यूजर ने भाई-भतीजावाद फैलाने वालों के बहिष्कार के लिए ऑनलाइन पिटीशन शुरू की है। 

जयश्री शर्मा ने यह पिटीशन 16 जून को शाम 6: 47 बजे Change.org पर शुरू की। उन्होंने इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा, प्लीज शेयर करें। हम फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव ला सकते हैं और बार-बार ऐसा कुछ होने से रोक सकते हैं। जयश्री ने 10 लाख साइन का लक्ष्य लेकर यह पिटीशन शुरू किया थै, लेकिन खबर लिखने तक इस पर 15 लाख से अधिक लोग साइन कर चुके थे।

जयश्री ने इस पिटीशन में बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर्स करन जौहर, यशराज फिल्म्स और सलमान खान के बहिष्कार की माँग करते हुए लिखा, “बॉलीवुड की नेपोटिज्म गैंग कैसे टैलेंट को मार रही है, जरूर पढ़ें। हम इस पिटीशन के जरिए नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और हॉटस्टार से अपील करते हैं कि वे ऊपर दिए गए मीडिया हाउस की फिल्मों को प्रमोट न करें। टाँग खिंचाई बंद करें और स्ट्रगलिंग एक्टर्स की मदद करें।”

उन्होंने लिखा कि सुशांत सिंह को लगभग ट्रोल किया गया, रैगिंग की गई और धमकाया गया। वह करण जौहर, आलिया, कपूर परिवार के बच्चों जैसे स्कूल ड्रॉपआउट के विपरीत एक बुद्धिमान, समझदार और अच्छा पढ़ा लिखा आदमी था। सुशांत सिंह एक सकारात्मक इंसान थे। ये बातें उनके इंस्टा पोस्ट से भी झलकता है।

करण जौहर ने सुशांत के साथ नेटफ्लिक्स पर Drive नामक बेकार सी फिल्म बनाई और उनका करियर खत्म कर दिया। उन्हें 2 साल से प्रताड़ित किया जा रहा था, क्योंकि उन्होंने यशराज फिल्म्स की कुछ फिल्मों के ऑफर को ठुकराकर शेखर कपूर की PAANI मूवी में काम करना चुना। ‘सोनचिड़ैया’ मूवी के दौरान उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने पोस्ट में कहा था कि वो उनकी फिल्म जरूर देखें, वरना उन्हें बॉलीवुड से निकाल दिया जाएगा, क्योंकि इंडस्ट्री में उका कोई गॉडफादर नहीं है।

जयश्री ने बताया कि फरवरी में केआरके ने ट्वीट किया था कि साजिद नाडियाडवाला, सलमान खान, बालाजी, करन जौहर, दिनेश विजान, भंसाली, टी-सीरीज सभी ने सुशांत सिंह राजपूत का बहिष्कार किया था। अब वो सिर्फ टीवी या शॉर्ट फिल्में ही कर सकते थे। जिस शख्स को पूरी दुनिया ही छोड़ दे तो उस इंसान के पास सुसाइड के अलावा कौन सा रास्ता रहेगा? कोई नहीं जानता कि एक गैंग इंसान का बहिष्कार भी कर सकती है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक वकील सुधीर कुमार ओझा ने सलमान खान व करण जौहर सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया है। इसमें कंगना रनौत और सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह समेत चार लोगों को गवाह बनाया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 109, 504 और 506 के तहत दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की है। मुकदमें के अन्य आरोपितों में बॉलीवुड की हस्तियाँ आदित्य चोपड़ा, शाजिद नाडियावाला, संजय लीला भंसाली, एकता कपूर, दिनेश विजया, टी-सीरीज के भूषण कुमार भी शामिल हैं।

एकता कपूर का इंस्टाग्राम पोस्ट

एकता इस बात से बेहद खफा हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए नाराजगी जताई है। एकता कपूर ने लिखा, “सुशी (सुशांत सिंह राजपूत) को कास्ट न करने को लेकर मेरे खिलाफ केस करने के लिए शुक्रिया। वह भी तब जबकि मैंने ही उन्हें लॉन्च किया था। मैं बता नहीं सकती कि ऐसी घुमावदार और पेचीदा थ्योरी को देखकर मैं कितनी दुखी हूँ। प्लीज सुशांत के दोस्तों और परिवारवालों को शांति से उनके जाने का दुख मनाने दो। सच जल्द ही बाहर आ जाएगा। इस पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं होता।”

मेवात: मुस्लिम युवकों के गिरोह ने दलित राहुल के सिर पर मारा फरसा, कहा- ‘यहाँ रहना है तो जूती के नीचे रहना होगा’

हरियाणा के मेवात जिले में दलितों पर अत्याचार की घटनाओं के क्रम में आज मामला- 24 वर्षीय राहुल का है। राहुल पर 21 अप्रैल 2020 को उसके गाँव उलेटा में मुस्लिम समुदाय के अनीश सहित कुछ लड़कों ने जानलेवा हमला बोला। जब उसका परिवार उसे बचाने गया, तो उन लोगों ने परिवार के सदस्यों पर भी हमला किया। इस पूरी घटना के दौरान राहुल के घर की महिलाओं पर भी मुसीबत टूट पड़ी और पुरुषों से भी मारपीट हुई।

स्थानीय सूत्रों की मदद से ऑपइंडिया ने जब मेवात के हालातों के मद्देनजर राहुल के चाचा जसवंत को संपर्क किया, तो उन्होंने अपने परिवार की आपबीती हमसे साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे एक मजदूर परिवार का उलेटा गाँव में बहुल आबादी के लोगों ने जीना मुहाल कर दिया है। कैसे उन्हें जातिसूचक शब्द बोलकर घृणित महसूस कराया जाता है। कैसे उनकी शिकायत पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं होती। कैसे उन्हें आए दिन घुट-घुटकर जीना पड़ता है।

जसवंत बताते हैं, “कुछ समय पहले हमारे भतीजे ने अनीश नाम के लड़के को 6000 रुपए में अपना मोबाइल बेचा था। उस समय अनीश ने राहुल को सिर्फ़ 4000 रुपए दिए। जिसके कारण राहुल ने उसे फोन का बिल नहीं दिया। राहुल चाहता था कि एक बार 2000 हजार रुपए मिल जाएँ, तो वह अनीश को बिल भी दे देगा। वरना पता नहीं पैसे मिले या न मिले।”

राहुल के चाचा के मुताबिक, 21 अप्रैल को जब राहुल अपने घर से बाहर निकला तो अनीश ने रास्ते में उसे रोका और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए बिल की माँग की। जब राहुल ने कहा कि वे उसे उसके 2000 रुपए लौटा दे, तो वह बिल भी तुरंत लाकर दे देगा। राहुल की ये बात कहते ही लड़ाई शुरू हो गई। थोड़ी देर बाद अनीश ने राहुल का कॉलर पकड़ा और मुस्लिम बहुल आबादी के लड़कों के साथ मिलकर उसपर हमला बोल दिया।

जसवंत कहते हैं कि इस दौरान गाँव के कुछ वरिष्ठों ने भी उनके लिए जातिसूचक शब्द बोले और उसे मारने-पीटने को बोला। मगर, जब चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर उसके घर के लोग मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वहाँ उनका घर का लड़का ही पीटा जा रहा था।

जसवंत कहते हैं, “हमारे घर के लोगों ने जब राहुल को बचाने का प्रयास किया। तो हमारे साथ भी मारपीट हुई और हमारे घर की महिलाओं को भी मारा गया। कुल 4 पुरुष और तीन महिलाओं के साथ मारपीट हुई। इसी बीच हमारे भाई की पत्नी को भी दो लोगों ने पकड़ा और उसे कमरे में अंदर ले जाने लगे। मगर, भला हो गाँव के कुछ लोगों का, जिन्होंने सही समय में आकर हम सबको उनसे बचाया। वरना उस दिन पता नहीं क्या हो जाता।”

राहुल

3 बच्चों के पिता जसवंत बताते हैं कि कम से कम 350 मुस्लिम घरों के बीच में 30-35 हिंदू परिवार वाले इस गाँव उलेटा में हिंदुओं का पिटना बहुत ज्यादा आम है। लोगों में बहुल आबादी का इतना खौफ है कि वे थाने जाने में भी हिचकते हैं। उनके मन में मानो बैठ गया है कि उनके पक्ष में कार्रवाई नहीं होगी। जसवंत अपनी आपबीती सुनाते हुए कहते हैं कि अगर आज हमें कहीं 12X12 का कमरा कोई रहने को दे दे, तो हम आज सपरिवार इस जगह को छोड़ने को तैयार हैं।

उलेटा का यह मजदूर अपनी मजबूरी सुनाते हुए कहता है कि गाँव का सरपंच तक उनसे उनका हाल नहीं लेता। इस बार तो ऐसा हुआ है कि कोई भी इस बारे में बात तक पूछने नहीं आया। बल्कि बदले में उन्हें गाँव के रसूखदार शख्स ने यह बोला कि यहाँ रहना है तो उनके जूती के नीचे रहना पड़ेगा।

जसवंत के अनुसार, उनकी स्थिति मेवात में बहुत ज्यादा खराब है, “आए दिन लड़ाई-झगड़ा हो जाता है। अब 21 अप्रैल वाली घटना में ही देखिए, बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने हमारा मामला उपयुक्त धाराओं के साथ एससी/एसटी एक्ट के तहत 23 अप्रैल को दर्ज किया। लेकिन 30 अप्रैल तक हमारे केस से एससी/एसटी एक्ट को हटा दिया गया। वहीं 5 आरोपितों को भी रियायत मिल गई। हमारी माँग बस यही है कि FIR में हरिजन एक्ट लगाया जाए।” वे कहते हैं कि उन्होंने मामले में एक्ट हटाने से असंतुष्ट होने के कारण दूसरे डीएसपी से कार्रवाई की माँग भी की थी। जिसके बाद उनके मामले की तफ्तीश पुन्हाना डीएसपी विवेक चौधरी को सौंपी गई।

धारा हटाने की वजह पूछने पर जसवंत ने बताया कि उनके परिवार के लोगों ने अपने मामले में सबूत के तौर पर एक वीडियो पेश की थी। लेकिन बाद में उसी वीडियो को देखते हुए उनके केस से sc/st एक्ट हटा दिया और कहा गया कि ये मामला झगड़े का है। इसमें कोई गलत शब्द (जातिसूचक) नहीं है। जबकि जसवंत कहते हैं कि उन लोगों ने पहले ही ये बात साफ कर दी थी कि वो वीडियो सिर्फ़ इसलिए बनाई थी, ताकि पता चल सके कि कितने लोगों ने हमला किया।

ऑपइंडिया ने SC/ST एक्ट हटाए जाने पर किया पुलिस को संपर्क

ऑपइंडिया ने जब आरोपों की पुष्टि के लिए नगीना थाने में संपर्क किया। तो, SHO रमेश चंद्रा ने बताया कि राहुल के केस की जाँच फिरोजपुर झिरका के डीएसपी वीरेंद्र कर रहे थे। मगर, अब यह जाँच पुन्हाना डीएसपी विवेक चौधरी के पास है।

इसके बाद हमने धारा हटाने की वजह जानने के लिए फिरोजपुर झिरका डीएसपी को संपर्क किया। मगर, जैसे ही हमने उनसे मामले के बारे में पूछा, तो दूसरी ओर से कॉल डिस्कनेक्ट हो गई। इसके बाद हमने उनसे फिर संपर्क करने का प्रयास किया। मगर, हमारी कॉल नहीं रिसीव की गई।

फिर, हमने डीएसपी पुन्हाना विवेक चौधरी को संपर्क किया। उन्होंने ऑपइंडिया को इस बातचीत में बताया कि राहुल के केस में दोबारा से SC/ST एक्ट लगा दी गई है। इसके अलावा वेलफेयर ऑफिसर को भी पत्र लिख दिया गया है। मामले में चार्जशीट भी फाइल हो गई है।

डीएसपी विवेक चौधरी के बयान और पीड़ित परिवार के बयानों में विरोधाभास पाते हुए हमने इस संबंध में जसवंत को फिर संपर्क किया। हमने उनसे पूछा कि क्या उन्हें एस/एसटी एक्ट दोबारा लगने के बारे में जानकारी नहीं है?

तो उन्होंने बताया, हम बहुत बार थाने गए। पूछताछ की। लेकिन हमें इस बारे में पता नहीं चला। हालाँकि, बाद में डीएसपी विवेक चौधरी से बात करके जसवंत ने स्वयं पुष्टि की अब मामले में SC/ST एक्ट जोड़ दी गई है। इसके बारे में स्वयं डीएसपी ने उन्हें बताया।

10-12 साल पहले भी हुआ था झगड़ा

43 वर्षीय जसवंत कहते हैं कि उन्होंने 1992 के बाद से अब तक अपने गाँव में ऐसे अत्याचार के कई मामले देखे हैं। इनमें करीब 20 बार तो उनका परिवार इन अत्याचारों का भुक्तभोगी रहा है। वे बताते हैं कि 10-12 साल पहले भी उनकी इसी परिवार से लड़ाई हुई थी।

तब खेत जाते समय उनके परिवार यानी दलित घर की लड़कियों के ऊपर गंदा पानी डाल दिया गया था। मगर, जब इस बदसलूकी का विरोध करते हुए उनसे पूछा गया कि ये क्या हरकत है, तो उन्होंने अपनी गलती नहीं मानी और बदले में बहस करने लगे।

इसके बाद मुस्लिम परिवार ने अपने यहाँ आई एक पाँच महीने गर्भवती महिला के गर्भ गिरने का इल्जाम जसवंत के परिवार पर लगा दिया और उनके परिवार खिलाफ़ भ्रूण हत्या का मामला दर्ज करवाने की पूरी कोशिश की। बहुत प्रयासों के बाद इन लोगों ने गाँव वालों की मिन्नतें कर करके, गवाह इकट्ठा कर करके उस केस से अपना पीछा छुड़ाया। इस मामले में उनके परिवार के 50 हजार रुपए खर्च हो गए थे। जसवंत कहते हैं कि इतने साल हो गए ये सब झेलते-झेलते, उन लोगों को इन सबका कोई उपाय नहीं दिखता, इसलिए वे अब अपने बच्चों को पढ़ाते-लिखाते हैं, ताकि आगे वे ये सब न झेलें।

मामले में राहुल ने करवाई थी FIR

बता दें, जसवंत ने ऑपइंडिया से बातचीत के बाद राहुल के साथ हुई मारपीट मामले में दर्ज एफआईआर को भी साझा किया। जिसमें केस से जुड़ी सभी बातों का उल्लेख है।

एफआईआर में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 21 अप्रैल 2020 को हुई इस घटना में तारिफ, वारिस, वाजिद, मोमिन अनीश, युसुफ, मुस्तुफा, आदिल, इस्लाम, अलीम, मजलिस, आरिफ, रुकसिना, ताहिरा, मिमकिना ने मिलकर उसपर व उसके परिवार पर जानलेवा हमला किया। साथ ही उनकी जाति को लेकर उनपर बार-बार टिप्पणी की। मगर, अन्य ग्रामीणों के आने से मामला काबू में आया। बाद में पास के अस्पताल में जाकर इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच कराई।

23 अप्रैल को शाम 7:05 पर दर्ज एफआईआर में एफआईआर में राहुल ने बताया है कि उसपर इस घटना में तारीफ ने फरसे से हमला किया और अलीम ने तो बीच में ये भी कहा, “इस साले चमार को जान से मार दे मैं अपने आप देख लूँगा।” इतना ही नहीं राहुल की शिकायत के अनुसार आरोपितों ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी तथा जाते-जाते कहा कि आज बच गए लेकिन समय आने पर वो उन्हें मार देंगे। अगर गाँव में रहना है तो जूती के नीचे दबके रहना होगा।

इसके अलावा इस एफआईआर में ये शिकायत भी है कि साल के 6 महीनों में आरोपित उनसे झगड़ा करते रहते हैं। बाद में दबाव बनाकर फैसला करवा लेते हैं। इसलिए, अब वे लोग बस इतना चाहते हैं कि आरोपितों पर पहली बात तो कार्रवाई हो और दूसरा उनके जान-माल की रक्षा की जाए। वरना इन सब घटनाओं के कारण उन्हें मजबूरन अपना गाँव छोड़ना होगा।

CM खट्टर के पास शिकायत लेकर पहुँचा था पीड़ित परिवार, नहीं हो पाई मुलाकात

गौरतलब है कि मेवात में हिंदुओं पर होते अत्याचारों के मद्देनजर मुख्यमंत्री खट्टर ने कल दो समूह के लोगों के साथ मिनी सचिवालय में एक बैठक की थी। जहाँ जसवंत भी अपने परिजनों के साथ अपनी शिकायत लेकर पहुँचे। लेकिन, उनके कहे मुताबिक, सीएम ने उन लोगों से मुलाकात नहीं की और अंदर बैठे लोगों से बात करके चले गए। इसके बाद जसवंत और उनके साथ के सभी लोग सुबह 9 बजे से सचिवालय के बाहर इंतजार करते-करते शाम को घर लौटे।

बता दें, मुख्यमंत्री खट्टर भले ही बाहर इंतजार में बैठे लोगों से नहीं मिल पाए। लेकिन शाम तक मीडिया में उनकी घोषणाओं की खबरें आ गईं। जिनसे हिंदूवादी संगठनों में काफी संतोष देखने को मिला। विश्व हिंदू परिषद ने इसे हिंदू समाज की विजय बताया। साथ ही उम्मीद की घोषणाओं पर जल्द अमल किया जाएगा।

विदेश मंत्री का चीन को स्पष्ट संदेश: गलवान घाटी में जो हुआ वो चीन द्वारा पूर्व नियोजित था, जिसने अन्य घटनाओं को अंजाम दिया

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दें। साथ ही भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी है। भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि गलवान घाटी में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और सुनियोजित कार्रवाई थी, जो इसके बाद की अन्य घटनाओं के लिए जिम्मेदार था।

चीन ने भरोसा दिलाया है कि जितनी जल्दी संभव होगा, वह तनाव कम करने और पीछे हटने की कोशिश करेगा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से यह भी कहा है कि वह उन लोगों को दंडित करें जिन्होंने यह विवाद शुरू किया।

चीनी विदेश मंत्री वांग ने जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मतभेदों को सुलझाने के लिए मौजूदा तंत्र के माध्यम से संचार और समन्वय मजबूत करना चाहिए।

बातचीत के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना का भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समय की माँग यह थी कि चीनी पक्ष अपनी गतिविधियों पर विचार करता और आवश्यक कदम उठाता।

चीनी विदेश मंत्रालय ने लद्दाख क्षेत्र में सीमा पर हुई इस हिंसक झड़प के बाद कहा है कि भारत और चीन, दोनों देश विवाद सुलझाने के लिए उचित तरीका अपनाने पर सहमत हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के बलिदानी सैनिकों को श्रद्दांजलि देते हुए कहा कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। PM मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लद्दाख में चल रहे विवाद पर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन करारा जवाब देने की क्षमता रखता है। पीएम मोदी ने इस विषय पर आगामी शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।

उल्लेखनीय है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 40 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है।

चीन और भारत के बीच तकरीबन पिछले एक माह से चले आ रहे सीमा विवाद को निपटाने के लिए कई स्तर की बैठकें हुईं। गत 6 जून को दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद चीन विवादित सीमा से पीछे हटने को तैयार हो गया। लेकिन चीन ने बाद में सेना नहीं हटाई। जब भारतीय पक्ष ने इसे लेकर शिकायत दर्ज की तो बड़ी संख्या में आए सैनिकों ने भारतीय जवानों पर लाठी, डंडों और रॉड से हमला कर दिया।

लोहे के डंडे, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पत्थर से लैस थे चीनी सैनिक: निहत्थे भारतीय सैनिकों पर हमले की थी पहले से तैयारी

चीन हमेशा धोखाधड़ी और पीठ पीछे वार करने को लेकर कुख्यात हैं। वहीं फिर अपनी दोगली साजिश रचते हुए सोमवार (15 जून, 2020) रात डंडे और नुकीली चीजों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस खूनी हमले से भारतीय सैनिक अनजान थे। जिसकी वजह से भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं। वहीं चीन के भी 40 से अधिक सैनिकों के मारे जाने की खबर है।

चीन ने अस्थाई टेंट हटाने से किया मना

रिपोर्ट्स के अनुसार पूर्वी लद्दाख इलाके में चीन की फौज ने आगे आकर अस्थाई कैंप लगा लिया था। जिसके बाद चुशूल में भारत चीन के बीच अधिकारी स्तर की बातचीत में यह तय किया गया था कि दोनो देशों की फौजें अप्रैल में जहाँ थीं वापस उसी पोजिशन पर लौट जाएँगी।

भारतीय सैनिकों को टेंट हटाने के निर्देश दिए गए। मगर उच्चाधिकारियों में हुए फैसले के बावजूद भ्रम में डूबे चीनी सैनिकों ने अपनी संख्या पर घमंड करते हुए पीछे हटने को राजी नहीं हुए। पेट्रोल प्वाइंट-14 पर चीन के सैनिकों से बात करने पहुँचे भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर संतोष बाबू और अन्य सैनिकों को चीनी सेना ने घेर लिया।

हमले के लिए पहले से तैयार थे चीनी सैनिक

चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सैनिकों ने भी इसका मुँहतोड़ जवाब दिया। चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाईप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। और उसी का इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। दोनों ओर से हो रही इस लड़ाई को लड़ते-लड़ते सैनिक पहाड़ की चोटी के नजदीक पहुँच गए। जिसकी वजह से भी चीनी जवानों और कई भारतीय जवान नीचे गिर गए।

चीन की ओर से जारी एक अधिकारिक बयान में आरोप लगाया है कि भारत के सैनिकों के द्वारा उनकी सीमा में घुसपैठ की कोशिशें की गईं और चीनी सैनिकों पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान किसी तरह की कोई गोली नहीं चली है, यानी हाथापाई और पत्थरबाजी हुईं, जिनमें सैनिकों को क्षति पहुँची है।

चीनी सैनिकों ने पहाड़ो से फेंके भारी भरकम पत्थर

वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया। हालाँकि, इस झड़प में कई भारतीय सैनिकों को तो संभलने तक का मौका नहीं मिला था।

55 भारतीय सैनिकों को कमजोर समझना पड़ा महँगा

इस झड़प में भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों की अकल को ठिकाने लगाने का काम किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2 दर्जन चीनी सैनिक मौत के मुँह में हैं। वहीं 110 चीनी सैनिकों को इलाज की बेहद जरूरत है। जिनको अस्पताल पहुँचाने के लिए चीनी सेना के हेलीकॉप्टर उस इलाके पर मंडरा रहे थे।

चीन की तरफ से सौंपे गए बलिदानियों के शव

भारतीय सैन्य अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार सुबह चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों के शव को भारत के हवाले किया। वहीं पेइचिंग ने अपने मारे गए सैनिकों की कोई भी संख्या अभी तक जारी नहीं कि हैं। लेकिन भारतीय सेना ने दावा किया है कि उन्होंने चीनी सेना की बातचीत सुनी है और चीन के 40 से अधिक सैनिकों के मारे जाने का अनुमान है।

भारत शांति चाहता है लेकिन संप्रभुता सर्वोच्च, उकसाने पर मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम: PM मोदी

लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी में भारतीय सेना की चीनी सेना के साथ हुई झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अ​मित शाह और 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी।

इसी अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि सैनिकों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है और इसकी रक्षा करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। भारत शांति चाहता है, लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जवान चीनी सैनिकों को मारते-मारते वीरगति को प्राप्त हुए हैं।

भारत-चीन सीमा पर तनाव की स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी 19 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। शुक्रवार को शाम 5 बजे बुलाई गई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के साथ सीमा पर जारी इस संघर्ष को लेकर आगे की परिस्थितियों पर चर्चा करेंगे। विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष इस ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा लेंगे।

इसी बीच कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा – “क्या हमारे सैनिक और अधिकारी अभी भी लापता हैं? हमारे कितने सैनिक या अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं? चीन ने किन क्षेत्रों पर कब्जा किया है? चीन हमारी जमीन पर किस तरह कब्जा कर लिया? इससे निपटने के लिए सरकार की क्या नीति है? कॉन्ग्रेस इस संकट में हमारी सेना, सैनिकों, उनके परिवारों और सरकार के साथ खड़ी है।”

उल्लेखनीय है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 40 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि भारतीय ऑफिसर और उनके दो जवानों पर चीनी सैनिकों ने पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला बोल दिया था। इसके बाद भारतीय सैनिक चौंक गए और इसका जवाब दिया गया। इसके बाद आधी रात तक हिंसक झड़प चलती रही। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है।

विषम परिस्थितियों में भी चीन के लिए भारत में बल्लेबाजी करने वाले कौन हैं?

एक ऐसा व्यक्ति जिसकी पूरी पहचान किसी का पुत्र होने में सिमटी हुई है। यह बेचारा अंडे का कवच तोड़ कर बाहर आना चाहता है पर मूर्खता के एम्नियोटिक तरल में तैरता यह प्राणी पचास साल की उम्र में भी बाहर आने को तैयार नहीं हुआ है। मानव शिशु यूँ तो गर्भावस्था के चौथे महीने से बाहर की आवाज, संगीत आदि के प्रति संवेदनशील हो जाता है, लेकिन कुछ विलक्षण लोग होते हैं जो जीवन के पचासवें साल में अपने गालों पर पड़ने वाले डिम्पल के आकार का दिमाग लिए, किसी अमीर घर में पैदा होने के कारण न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि लाखों मूर्खों द्वारा तारणहार कह कर पूजे भी जाते हैं।

जाहिर है कि मैं किसी राहुल गाँधी की बात नहीं कर रहा हूँ। वो तो भारतभूमि की वैसी प्रतिभाओं में से एक हैं जिन्हें समुचित वातावरण नहीं मिला है कि फल-फूल कर अपनी खुशबू बिखेर सकें। राहुल गाँधी तो, माफ कीजिएगा ‘जी’ लगाना भूल जाता हूँ, वैसे कान्ग्रेस वाले कभी भी जीभ लगाना नहीं भूलते। उनकी महिमा ही इतनी अपरंपार है। इसलिए श्रीयुत राहुल गाँधी जी पर टिप्पणी करना मेरी औकात से बाहर है, न ही मुझे 200 FIR करवाने हैं।

हालाँकि, जो बातें राहुल गाँधी ने पब्लिक में लिखी हैं, उनका विश्लेषण तो किया ही जा सकता है। एक बिलकुल ही अलग, वैज्ञानिक बात अगर कहूँ, जिसे गंजे और पंचरवाले की सॉल्टन्यूज टीम ने सत्यापित किया है, कई बार कुछ बातें जब आप पढ़ेंगे तो जैसे वायरस अपने लक्षण छोड़ता है, वैसे ही कुछ लोगों के ट्वीट या बयान सुन कर आप बहुत ही सहजता से जान जाएँगे कि ये कमाल चरस का है, गाँजे का है, स्मैक का है या फिर कुछ नया करने के चक्कर में एक ही चायपत्ती से बीस बार चाय बनाने के बाद उसे सुखा कर, उन्नत नस्ल के घोड़े की लीद में मिला कर पीने के बाद उपजा है।

जैसे कि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को ले लीजिए, वो जब भी कुछ बोलता या लिखता है तो आप समझ जाएँगे कि इसने अपनी बाँह पर पतले पाइप बाँधे होंगे, फिर नसों के फूलने के बाद एक इंजेक्शन लिया होगा, सर को हिलाया होगा और तब वो बात बोली या लिखी होगी। आप पूछ लीजिए, वो खुद बता देंगे।

लेकिन राहुल गाँधी जो लिखते हैं, भले ही वो राष्ट्रविरोधी बातें ही क्यों न हों, वो पूरे होश में लिखते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। एक तो कारण है कि दर्द होता है। जिसके शरीर के कोशिकीय आधार के दोनों भाग, सारे गुणसूत्र, उन दोनों भागों में से एक के स्वयं का एक भाग, फिर उस एक भाग का एक भाग, या तो प्रधानमंत्री थे या प्रधानमंत्री के भी बॉस थे, वह अगर प्रधानमंत्री बनना तो छोड़िए अपनी पार्टी के मुखिया होने तक को ठीक से नहीं निभा पाया, तो दर्द तो होगा ही।

आप ही बताइए कि कोट के ऊपर जनेऊ पहनने के बाद भी, तमाम तरह के परमुटेशन-कॉम्बिनेशन के बाद भी अपना गोत्र सही-सलामत बचा लेने वाले, शिवभक्त, रामभक्त राहुल गाँधी जी के हाथ से सत्ता चली गई तो बेचारे ऐसे नहीं बोलेंगे तो क्या करेंगे!

बहन दादी जैसे बाल रख रही है, नाक की लम्बाई तो सबने चुनावों के समय देखी ही। आजकल राहुल गाँधी भी वर्चुअल मीटिंग में सर पर बड़े ही शिद्दत से घुँघराले बालों के पेचोखम का मुजाहिरा करते हुए देश में अपने कंधे पर ढो कर, निजी तौर पर कम्प्यूटर लाने वाले पिता की तरह दिखने की कोशिश कर रहे हैं। वो भी तो जानते हैं कि कॉन्ग्रेस समर्थक तो बाल और नाक देख कर ही वोट देता है… वरना इनके विजन तो ऐसे-ऐसे रहे हैं कि सारे राजनीतिज्ञ सर पकड़ कर बैठ जाते हैं।

अगर कोई ढंग का मोटिवेशन न हो, जो कि जगजाहिर कारणों से राहुल गाँधी की विलक्षण प्रतिभा ही है (हें हें हें), तो कोई कैसे इस आदमी की बड़ाई कर सकता है! मतलब रघुराम राजन से ले कर, रवीश कुमार तक, जाहिर है कि टैलेंट की तो फोटो सूँघ कर ही उनकी कुशाग्र बुद्धि का पता लगाने वाले लोग हैं, तो वो अगर इनके पीछे हों तो कोई विशेष कारण तो होगा ही न!

अब हम सोनियानंदन, राजीवपुत्र, प्रियंकाबंधु, रॉबर्ट जी के साले राहुल गाँधी के कुछ चुनिंदा ट्वीटों पर चर्चा करेंगे जो उन्होंने देश की सेना, देश के नेतृत्व आदि को नीचा दिखाने के लिए हर उस समय पर किया जैसे समय में पूरी दुनिया के विपक्षी पार्टियों का व्यवहार अपने राष्ट्र के साथ होता है, मनोबल बढ़ाने वाला होता है।

राहुल गाँधी के ट्वीट की धूर्तता को आप देखेंगे तो कहेंगे, “न न न न न न… ये आदमी ऐसे ट्वीट सोच ही नहीं सकता… ये इसकी मानसिक क्षमता से परे है।” क्योंकि राहुल गाँधी बिना किसी सहायता के जब भी बोलते पाए जाते हैं तो यही प्रतीत होता है कि ये आदमी सुबह में बिल्ली की फोटो के साथ किसी को ‘गुड मॉर्निंग जीजू, मुझे न चाँद पर जमीन चाहिए, दिलाओगे न?’” टाइप की ही बातें कर सकता है, अंग्रेजी या हिन्दी के शब्द-संयोजन की बात तो छोड़िए, स्पेलिंग ही ठीक से लिख दे तो कालांतर में स्वयं को ये भारत रत्न दे देगा!

फिर भी, हम तो फेस वैल्यू पर ही लेंगे, वैसे भी कॉन्ग्रेस का पूरा इतिहास फेस वैल्यू पर ही टिका हुआ है। फेस वैल्यू पर लेने का मतलब कि राहुल गाँधी के ट्विटर पर है, तो उन्होंने ही लिखा होगा। ये बात अलग है कि इस बात को मानने के लिए स्वयं को तैयार करने में मुझे दिल पर एक खास प्रथम परिवार के मस्तिष्कों के सामूहिक भार का कंकड़ रखना पड़ा, जो कि मेरी साँस के झोंके में उड़ गया।

हाल के एक ट्वीट की चर्चा करें तो वह गलवान घाटी में हमारे बीस सैनिकों के बलिदान के बाद लिखा गया है, जहाँ राहुल गाँधी ने बड़ी ही सहजता से यह पूछा है कि मोदी चुप क्यों हैं, कहाँ छुपे हुए हैं, वहाँ क्या हुआ, देश को बताते क्यों नहीं? चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारे जवानों को मारने की? वो हमारी जमीन कैसे ले सकते हैं!”

इस एक ट्वीट में इतना खोखलापन और इतनी धूर्तता है कि फिर से आदमी सोचने लगता है, क्या राहुल गाँधी ये लिख सकता है? सतही तौर पर यह ट्वीट तो एक चिंतित व्यक्ति का दिखता है, लेकिन ऐसा है नहीं। इस ट्वीट के जरिए, राहुल गाँधी ने प्रश्न किए हैं ताकि इनके नाम में, और वश में हो तो तस्वीर या फोटो में, जी लगाने वाली जनता को वो दिखा सकें कि देखो इसने प्रश्न पूछा है।

लेकिन किस समय? क्या भारतीय सेना ने इस पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की? क्या उनके द्वारा दी गई जानकारी इतनी अविश्वसनीय है कि राहुल गाँधी को पीएम से जवाब चाहिए। साथ ही, राहुल गाँधी के ट्वीट में ‘चुप्पी’ का मतलब शाब्दिक चुप्पी से नहीं है, वो प्रधानमंत्री को यह पूछ कर यह दिखाना चाह रहे हैं कि उनकी सरकार होती तो बीजिंग में तिरंगा होता।

सरकार में न होने का यह फायदा है कि आप ‘न्याय योजना’ जैसे शिगूफे छोड़ सकते हैं, आप ख्वाबों में चीन पर हमले कर सकते हैं, आप अमेरिका को मुँहतोड़ जवाब दे सकते हैं, और पाकिस्तान को तो इतने बम मार सकते हैं कि अफगानिस्तान में भी भूकम्प आ जाए। राहुल गाँधी भी वही कर रहे हैं। सरकार के बाहर हो कर सरकार को क्या करना चाहिए यह बता रहे हैं जबकि बेचारे भूल गए (जो कि कुछ पदार्थों के सेवन का साइड इफ़ेक्ट में भी आता है) कसाब की गैंग ने तीन दिनों तक मुंबई में जो किया था, उसके बाद एयर स्ट्राइक को तैयार एयर फोर्स को मनमोहन-सोनिया ने कुछ भी करने से मना किया था।

राहुल गाँधी यह कह सकते हैं कि चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारी जमीन लेने की, क्योंकि मैंने पहले भी कहा है कि जहाँ मानव भ्रूण चौथे महीने से संवेदनशील हो जाता है, वहीं कुछ लोग पचास की उम्र तक माता के गर्भ के एम्नियोटिक तरल में ही कैद रहते हैं। चीन ने कितनी जमीन पर कॉन्ग्रेस के किस प्रधानमंत्री और यूपीए के किस प्रधानमंत्री के काल में कब्जा किया है, उसका ज्ञान राहुल गाँधी को नहीं है। एकदम ही अलग संदर्भ में, विषयांतर करते हुए, एक वैज्ञानिक बात बताना चाहूँगा कि कई मादक पदार्थों के सेवन से भूतकाल में हुई घटनाओं या सूचनाओं को ले कर स्मृतिदोष सामान्य माना गया है। कृपया मादक पदार्थों के सेवन, चाहे वो कितनी ही उच्च कोटि का क्यों न हो, नहीं करना चाहिए। जनहित में जारी।

राहुल गाँधी यह भी लिखते हैं कि वो सेना के साथ और सैनिकों के साथ खड़े हैं, और उन्हें सेना के आधिकारिक बयान पर भी भरोसा नहीं। उन्होंने भारतीय सेना द्वारा चीनियों के 43 जवान मार गिराने पर, भले ही मान लीजिए कि ये अपुष्ट खबर है, एक शब्द नहीं लिखा। ऐसे समय में तो व्यक्ति, अगर वो राष्ट्रभक्त हो, तो सूत्रों से मिलने वाली खबर को भी ऐसे लिखता है मानो वह सत्य हो। वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसे विश्वास होता है कि उसकी सेना, जो ऐसी-ऐसी जगहों पर तैनात है, वह हस्तमैथुन में मस्त चीनियों को पहाड़ी युद्ध में किसी भी दिन कायदे से मार गिराने में सक्षम है।

गलवान में जो हुआ, वो ऐसा नहीं है कि हमारे सैनिकों की लापरवाही या उनके कमतर होने के कारण हुआ। वहाँ वही हुआ जो चीन की प्रकृति है: बात किया कि वो पीछे हटेंगे, जगह खाली करेंगे, सहमति बन गई दोनों तरफ के अफसरों में। उसके बाद जब हमारे सैनिक, बिना किसी हथियार के (ताकि उन्हें ऐसा न लगे कि वो लड़ाई के इरादे से आए हैं, या शायद प्रोटोकॉल हो) आगे गए तो उन पर पत्थरबाजी हुई, बिना गोली चलाए उन्होंने क्रूरता से कँटीले तारों से लपेटे रॉड से हमारे जवानों और अफसर पर हमला किया।

फिर जो हुआ वो सामने है कि चीन को इतना नुकसान पहुँचा है कि वो संख्या तक बताने में हिचकिचा रहा है। भारत ने इसके बाद भी उन्हें अपनी लाशें उठाने के लिए हेलिकॉप्टर ले कर भीतर आने दिया। ऐसे में आप सोचिए कि आप एक नागरिक के तौर पर किस बयान पर विश्वास करना चाहेंगे: अपनी सेना के अफसरों के बयान पर या फिर चीन के ग्लोबल टाइम्स पर?

राहुल गाँधी का ट्वीट अपनी ही सेना को नीचा दिखाने को तत्पर है। उन्होंने सैनिकों के बलिदान को तो संज्ञान में लिया है क्योंकि ऐसा न करने पर पार्टियाँ चुनाव हारती रही हैं, लेकिन उन्होंने अपने जवानों की वीरता और शौर्य के प्रमाण पहले भी माँगे हैं, आज भी छद्म रूप से वही कर रहे हैं। यहाँ वो हर बार की ही तरह, सैनिकों के बलिदान पर उन्हें श्रद्धांजलि देते नजर आते हैं, पर सरकार को उसी बहाने ऐसे घेर रहे हैं जैसे हमारी सेना तो पीठ दिखा कर भाग आई।

और राहुल कोई अकेले तो हैं नहीं। एक पूरा गिरोह है जो पाकिस्तान के मामले में ‘अमन की आशा’ के गीत गाने लगता है क्योंकि वो जानते हैं कि सरकार पर दवाब बनाएँगे तो उसे सामूहिक सहमति समझ कर पाकिस्तान पर हमला ही न कर दे, लेकिन वही गिरोह चीन के मामले में हमेशा उकसाता हुआ दिखता है। चीन पर भारत हमला नहीं कर सकता, यही जमीनी हकीकत है। दूसरी बात, चीन से युद्ध एक ही फ्रंट पर नहीं होगा, भारत आर्थिक रूप से इस युद्ध को लड़ने में काफी पीछे चला जाएगा।

ये कमजोरी नहीं है, ये दुश्मन को आँकने जैसा है। जिस राहुल गाँधी की नैपी सूँघने वाले अपने कार्यकाल में तीन दिन तक एक टेरर अटैक को झेलते रहे और उसके बाद भी पाकिस्तान पर चूँ तक न कर सके, वो कह रहे हैं कि चीन पर भारत चुप क्यों है! जैसा कि पहले भी मैंने कहा, सरकार से बाहर होने पर नेता लोग प्याज़ तीन रुपए किलो करने से ले कर, हर सिंगल प्राणी को मनमुताबिक गर्लफ्रेंड या ब्वॉयफ्रेंड उपलब्ध कराने की बात सिर्फ कहते ही नहीं, पूरा गणित भी समझाते हैं कि किस राज्य में सप्लाय ज्यादा और डिमांड कम है।

राहुल गाँधी से हमें कोई आशा है नहीं। अब तक तो बेचारे की माताजी ने भी उम्मीद त्याग दी है लेकिन फिर भी वीडियो चैट के लिए बाल में जेल लगा कर पिता की छवि उतारने के लिए कंघी से ज्वार-भाटा स्टाइल के कर्ल्स तो ला ही देती हैं! क्या करेगी, माँ तो माँ होती है। अब कोई कैसा भी पैदा हो गया हो, बुद्धि भले ही धीमी हो, लेकिन माँ क्या अपने बुजुर्ग शिशु को त्याग देगी?

वैसे ही, राहुल गाँधी विशिष्ट जगह के बाल भले ही घुँघराले कर लें, लेकिन उसके नीचे का मस्तिष्क उनसे वही करवा रहा है जो गैंग चाहता है। यह वही गैंग है जो वर्तमान भारत सरकार को हर आयाम में असफल दिखाना चाहता है। ये गैंग लोगों की नजरों में भारतीय सेना की छवि खराब करना चाहता है, उनका मनोबल तोड़ना चाहता है, वरना ऐसे समयों में चिरपरिचित अश्लील हँसी के साथ ‘कहाँ गया 56 इंच’ पूछने की बेहूदगी एक अपरिमार्जित शुक्राणु की ही देन कर सकता है।