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Video: किराएदार ने समय पर नहीं दिया किराया तो मकान मालिक नूर अहमद ने की हवाई फायरिंग, गिरफ्तार

कर्नाटक के बेलगाम जिले में किराएदार द्वारा समय पर किराया ना चुका पाने पर एक मकान मालिक को इतना गुस्‍सा आ गया कि वो बंदूक से हवाई फायरिंग करने लगा। यह घटना बेलगाम के चिक्‍कोडी इलाके की बताई जा रही है। पुलिस ने फायरिंग करने वाले मकान मालिक नूर अहमद शापुरकर के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

फायरिंग करने वाले मकान मालिक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में सफेद कपड़े पहने व्यक्ति को फायरिंग करते हुए साफ देखा जा सकता है।

घटना शनिवार (जून 13, 2020) रात करीब 10 बजे की है। मकान मालिक नूर अहमद शापुरकर अपने हाथ में देसी डबल-बैरल बंदूक लेकर कम्पाउंड में प्रवेश किया और 2,500 रुपए की वसूली के लिए किराएदारों को धमकाने लगा।

किराएदार की पहचान रोहिणी दीक्षित के रूप में हुई है। लॉकडाउन की वजह से किराएदार किराया का भुगतान करने में असमर्थ थी। इसके बाद मकान मालिक ने उनसे कहा कि वो एडवांस देकर घर छोड़कर चले जाएँ। हालाँकि इसमें 2,500 रुपए कम थे, जिसके लिए मकान मालिक ने शनिवार रात परिवार को धमकी दी।

जानकारी के मुताबिक नूर अहमद के घर के परिसर में प्रवेश करने के तुरंत बाद, उनके और किराएदार के परिवार के सदस्यों के बीच विवाद शुरू हो गया। किराएदार के परिवार ने दावा किया कि वो एक महीने में घर छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद मकान मालिक ने बंदूक ऊपर की तरफ किया, ट्रिगर खींचा और कई हवाई फायरिंग किए। इससे छत का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में लागू लॉकडाउन का असर लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। इसके कारण उनकी नौकरियाँ चली गई हैं। इसी वजह से कई किराएदार समय पर किराया नहीं दे पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की घोषणा करते समय अपने संबोधन में ऐसे लोगों को मोहलत देने का अनुरोध किया था।

नवंबर में दिखेगा कोरोना का सबसे भीषण रूप: अब ICMR के हवाले से मीडिया ने किया डर का धंधा

कोरोना वायरस के नाम पर डर फैलाने का व्यापर जोरों पर है। सरकारी संस्था के उस अध्ययन निष्कर्षों को मीडिया फैला रहा है, जो कभी किया ही नहीं गया। कुछ ऐसा ही भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद (ICMR) के साथ किया गया है।

मीडिया में ICMR के अध्ययन के नाम से स्टोरी चलाई गई कि नवम्बर में कोरोना सबसे भीषण रूप ले लेगा। लेकिन, ICMR ने ही इस ख़बर को नकार दिया।

‘आजतक’ जैसे बड़े मीडिया संस्थानों ने भी चलाई ये ख़बर

दरअसल, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की ख़बर को कई अख़बारों और मीडिया संस्थानों ने फैलाया, जिसमें कहा गया कि कोरोना वायरस संक्रमण का पीक टाइम नवम्बर में आएगा। इस ख़बर में कहा गया कि नवम्बर में वेंटिलेटर्स और आईसीयू बेड्स की कमी से देश को जूझना पड़ सकता है, क्योंकि ICMR ने एक अध्ययन में पाया है कि 8 सप्ताह तक के लिए लॉकडाउन के कारण भारत में कोरोना का पीक टाइम कुछ महीने आगे बढ़ गया है।

‘द हिन्दू’ ने PTI के हवाले से चलाई फेक न्यूज़

ख़बर में आगे कहा गया कि कोरोना का पीक टाइम पहले 34 दिन बाद आने वाला था, लेकिन लॉकडाउन के बाद अब ये 76 दिन बाद आएगा। साथ ही आँकड़े पेश करते हुए बताया गया कि लॉकडाउन के कारण संक्रमितों की संख्या में 69% से लेकर 97% तक की कमी आई है, जिससे इंस्फ्रास्ट्रक्टर मजबूत करने में समय मिल गया है। जब ICMR ने ऐसी कोई स्टडी की ही नहीं तो PTI के पास ये सब आँकड़े कहाँ से आ गए, इस बारे में उसने कुछ स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

इन्हीं आँकड़ों की कालाबाजारी के कारण चीजें एकदम सही लगने लगती हैं। ICMR ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस ख़बर को ही भ्रामक करार दिया। संस्था ने कहा कि न तो ICMR ने ऐसा कोई अध्ययन किया है और न ही ये संस्था के आधिकारिक बयानों से जरा भी मेल खाता है। इसी ख़बर में दिए गए और आँकड़े देखिए, जिसे ICMR के हवाले से ऐसे पेश किया गया जैसे वो सच ही हों:

“देश में बड़ी संख्या में आइसोलेशन बेड्स की ज़रूरत पड़ेगी। अगले 5.4 महीनों के लिए बेड्स की कमी रहेगी। 4.6 महीनों के लिए आईसीयू बेड्स की कमी रहने वाली है। वहीं 3.9 महीनों के लिए वेंटिलेटर्स की कमी होगी। लेकिन, अगर लॉकडाउन नहीं किया जाता तो शायद इन सभी की 83% और ज्यादा कमी हो जाती। हालाँकि, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के कारण स्थिति सुधरी है। अगर हेल्थकेयर कवरेज को 80% बढ़ाया जाता है तो फिर स्थिति से निपटने में कामयाबी हासिल होगी।”

वहीं प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी इस ख़बर का फैक्ट-चेक किया। उसने भी ICMR के बयान की पुष्टि करते हुए कहा कि ये अध्ययन भ्रामक है और ICMR ने नहीं किया है। ‘द हिन्दू’ से लेकर ‘हफिंगटन पोस्ट’, ‘ट्रिब्यून इंडिया’, ‘लाइव मिंट’ और ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने इस ख़बर को चलाया। वहीं दूसरी तरफ ‘आजतक’, ‘इंडिया डॉट कॉम’ और ‘नवभारत टाइम्स’ में भी ये ख़बर दिखी। ये ख़बर झूठी है और पूरी तरह ग़लत है।

पंजाब: पड़ोसी की बेटी भगा ले गया कॉन्ग्रेस नेत्री पूनम कांगड़ा का बेटा, सुसाइड के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार

पंजाब कॉन्ग्रेस की नेता पूनम कांगड़ा को उनके पति दर्शन कांगड़ा तथा बेटे विकासदीप के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पूनम राज्य अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य भी हैं। इन्हें एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया हे। संगरूर (ग्रामीण) के डीएसपी सतपाल शर्मा के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने यह जानकारी दी है।

पूनम, उनके पति और तीन बेटों पर 4 जून को तब मामला दर्ज किया गया था जब 50 वर्षीय संजीव कुमार की पटियाला के सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता संजीव कुमार के पड़ोस में रहती हैं। कथित तौर पर पूनम का बेटा संजीव की बेटी को जबरन अपने साथ भगाकर ले गया। इससे आहत संजीव ने आत्महत्या कर ली थी।

इन सभी को रविवार (जून 14, 2020) की रात गिरफ्तार किया गया है। संजीव कुमार की पत्नी चंदा रानी के बयानों पर पुलिस ने एससी कमीशन की सदस्य पूनम कांगड़ा, पति दर्शन कांगड़ा, पुत्र विकासदीप, राजन, अनमोल के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया।

चंदा ने आरोप लगाया कि पूनम कांगड़ा, दर्शन कांगड़ा धमकी देते थे कि वह उनकी लड़की को अपने घर की बहू बनाकर ही रहेंगे। पाँच जून से लगातार फरार हुए पूरे परिवार में से पूनम कांगड़ा, दर्शन कांगड़ा, विकासदीप को संगरूर पुलिस व सीआइए स्टाफ ने संगरूर से चार किलोमीटर दूर लड्डा बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया।  

चंदा ने बताया कि जब उनके पति ने विकासदीप से अपनी बेटी की शादी के लिए मना कर दिया तो पूनम, दर्शन और उनके बेटों ने संजीव को धमकी दी। इसके बाद विकासदीप 2-3 जून की रात उनकी बेटी को लेकर फरार हो गया और उनके परिवार ने संजीव के परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया। इससे तंग आकर संजीव ने 4 जून को जहर खा लिया।

मृत संजीव कुमार के पुत्र बबलू ने आरोप लगाया, “आरोपित हमें यह कहते हुए धमकाते रहते थे कि वे सरकार का हिस्सा हैं और हमारा परिवार उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता। मेरे पिता लगातार अपमान का सामना कर रहे थे। उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया।”

पुलिस ने बताया कि तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अभी पूनम और दर्शन के दो पुत्र अनमोल व राजन पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

‘गली बॉय जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड… और सुशांत को कहना पड़ता है – मेरी फिल्में देखो, वरना इंडस्ट्री निकाल देगी’

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद अब हर जगह उनके द्वारा उठाए इस कदम पर चर्चाएँ हो रही हैं। इस दौरान हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाली कंगना रनौत ने भी अपना एक बयान जारी किया है। कंगना ने करीब दो मिनट का वीडियो जारी कर बॉलीवुड इंडस्ट्री से सवाल पूछा है कि सुशांत की मौत आत्महत्या थी या प्लान्ड मर्डर?

कंगना कहती हैं, “सुशांत सिंह की मौत ने हम सबको झकझोर के रख दिया है। लेकिन वे लोग, जो इस चीज में माहिर हैं कि कैसे समानांतर नैरेटिव चलाया जाए, वो ये कहने लगे हैं कि जिनका दिमाग कमजोर होता है, वे डिप्रेशन में आते हैं और सुसाइड कर लेते हैं।”

कंगना ऐसे लोगों को जवाब देते हुए पूछती हैं कि जिस शख्स ने इंजिनियरिंग की, जो रैंक होल्डर था, वो दिमागी तौर पर कमजोर कैसे हो सकता है?

सुशांत के पुराने कमेंट्स व पोस्टों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करवाते हुए कंगना कहती हैं कि सुशांत पिछले दिनों लोगों से कह रहे थे कि उनकी फिल्में देखें, उनका बॉलीवुड में कोई गॉड फादर नहीं है। अगर लोग उनकी फिल्में नहीं देखेंगे तो उन्हें इंडस्ट्री से निकाल दिया जाएगा।

कंगना रनौत उनके पुराने साक्षात्कारों पर बात करते हुए सवाल पूछती हैं कि सुशांत लगातार कहते थे, “मुझे नहीं मालूम कि मुझे इंडस्ट्री क्यों नहीं अपनाती? मुझे ऐसा लगता है कि मैं अकेला हूँ।” तो क्या ये सब बातें सुसाइड की बुनियाद नहीं थीं।

कंगना रनौत के अनुसार, बॉलीवुड के लिए सुशांत ने इतनी अच्छी फिल्में कीं। मगर उन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने काय पो छे से डेब्यू किया। उन्हें डेब्यू तक का अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने 6-7 साल के अंतराल में केदारनाथ, धोनी और छिछोरे जैसी अच्छी फिल्में बनाईं। मगर, फिर भी उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं मिला। कोई सराहना नहीं मिली। वहीं, गली बॉय जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड मिल जाते हैं।

कंगना अपने वीडियो में आपबीती भी सुनाती हैं। वे बोलती हैं कि जो फिल्में वह खुद डायरेक्ट करती हैं, वे सुपरहिट भी होती हैं, तो उन्हें फ्लॉप कर दिया जाता है।

वे पूछती हैं, “मुझ पर 6 केस क्यों डाले गए? क्यों मुझे जेल में डालने की कोशिश हुई?” मिर्च मसाले लगाकार आर्टिकल लिखने वाले पत्रकारों को आड़े हाथों लेते हुए कंगना कहती हैं कि सुशांत के लिए जो लोग ये लिख रहे हैं कि वह साइकोटिक थे, न्यूरोटिक थे, एडिक्टेड थे… उन्हें संजय दत्त की एडिक्शन तो बहुत क्यूट लगती है।

कंगना बताती हैं कि सुशांत की सुसाइड के बाद उन्हें ऐसे मैसेज आ रहे हैं, “तुम्हारा बहुत मुश्किल समय है। तुम ऐसा-वैसा कोई कदम मत उठा लेना।”

कंगना अपनी नाराजगी बयान करते हुए पूछती हैं कि यह लोग उन्हें ऐसी बातें क्यों कहते हैं? क्या वह ये चीज दिमाग में डालना चाहते हैं कि वह सुसाइड कर लें। कंगना आगे सुशांत के संदर्भ में पूछती हैं कि यह सुसाइड थी या प्लान्ड मर्डर था?

सुशांत के कदम पर गुस्सा व्यक्त करते हुए कंगना बोलती हैं कि उनकी गलती बस इतनी थी कि वह ऐसे लोगों की बात मान गए। लोगों ने उनसे कहा कि तुम किसी लायक नहीं हो, तो वह इस बात को मान गए। उन्हें अपनी माँ की बात याद नहीं रही।

कंगना की मानें तो ऐसे लोग चाहते ही है कि वह स्वयं इतिहास लिखें और उसमें ये बताएँ कि सुशांत कमजोर दिमाग का था। वो लोग ये नहीं बताएँगे कि सच्चाई क्या थी। इसलिए हमें यह निर्णय लेना है कि कौन इतिहास को लिखेगा।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार (जून 14, 2020) को मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत उनके साथियों व प्रशंसकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट देखने को मिले, जिसमें बिना सच्चाई को जाने-समझे लोगों ने उन्हें कोसा।

कॉन्ग्रेस नेता के बेटे की शादी, सोशल डिस्टेंसिंग चूल्हे में… लोग पूछ रहे – नियम सिर्फ जनता के लिए?

कोरोना काल में जब भीड़-भाड़ से बचने की सलाह लगातार लोगों को दी जा रही है, ऐसे में शादी समारोह में शामिल होना खतरे को न्यौता देने जैसा है। समूचे देश में शादियों के समारोह को टाला जा रहा है। लेकिन, कर्नाटक में एक बार फिर से ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ पर वीवीआईपी शादी हुई है और नियम-कायदे-कानून को ताक पर रखा गया।

यह शादी थी कॉन्ग्रेस नेता परमेश्वर नाइक के बेटे की। इस विवाह समारोह का आयोजन दावणगेरे के हागीरबोमनहल्ली में किया गया था। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गई। न तो किसी के चेहरे पर मास्क था और न ही किसी प्रकार की सरकारी गाइडलाइन्स का पालन किया गया।

वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों की संख्या में लोग इस विवाह समारोह में शामिल हुए थे। जबकि सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक शादी समारोह में 50 लोगों के ही शामिल होने की अनुमति है।

देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस तरह की लापरवाही बड़े खतरे को निमंत्रण दे रही है। इस शादी में बड़े-बड़े कॉन्ग्रेसी नेता भी शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक कॉन्ग्रेस नेता परमेश्वर नाइक के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

इस कार्यक्रम में पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया के साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और कॉन्ग्रेस नेता प्रियांक खड़गे भी शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु के भी शामिल होने की खबर है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे की शादी हुई थी। इस दौरान भी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के कायदों का ख्याल नहीं रखा गया था।

मुकेश अंबानी के एंटीलिया को कब्जे में लेकर बना दो क्वारंटाइन सेंटर: BMC को CPI नेता प्रकाश रेड्डी ने लिखा खत

सीपीआई (CPI) ने बीएमसी (BMC) से मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया को अपने कब्जे में लेकर उसे क्वारंटाइन सेंटर में बदल देने को कहा है। इस संबंध में सीपीआई के मुंबई काउंसिल के सचिव प्रकाश रेड्डी ने बीएमसी को पत्र लिखा है।

बीएमसी को लिखे पत्र में रेड्डी ने कहा है कि मुकेश अंबानी के एंटीलिया टॉवर में 22 मंजिलें हैं। इसमें परिवार के केवल पाँच सदस्य रहते हैं। इनमें से प्रत्येक सदस्य के पास रहने के लिए एक मंजिल है। इसके बाद भी टॉवर में 17 मंजिलें शेष बचती हैं। शेष सभी मंजिलों को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर में कई भव्य बंगले और टॉवर हैं जिनका उपयोग बीएमसी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कर सकती है।

पत्र के माध्यम से प्रकाश रेड्डी ने बताया कि बीएमसी ने हाल ही में कोरोना वायरस मरीजों की सुविधा के लिए स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) द्वारा पुनर्विकसित किए गए शेंटी टाउन और झुग्गियों को अपने नियंत्रण में लिया था। इसकी राजनीतिक गलियारे में बहुत चर्चा रही।

रेड्डी ने दावा किया कि यह झुग्गीवासियों के साथ घोर अन्याय है। वे वर्षों से बदतर जिंदगी जी रहे थे। अब उनसे कोरोना मरीजों के लिए अपने पुनर्विकसित घरों को छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। रेड्डी ने कहा कि अगर बीएमसी पुनर्विकसित आवासों को इसी तरह से नियंत्रण में लेती रही तो वहाँ रहने वाले लोग अंबानी के घर में घुसने और उसमें मौजूद खाली जगह को अपने नियंत्रण में लेने के लिए दवाब बनाएँगे।

रेड्डी ने BMC से कोरोना वायरस मरीजों के लिए पुनर्विकसित की गई सेंटी टाउन को क्वारंटाइन सेंटर बनाने के निर्णय को वापस लेने की माँग की।

सीपीआई नेता ने बयान में आगे कहा कि यह सही नहीं है कि खाली पड़ी जमीन और बंद पड़ी फैक्ट्रियों और मिलों को बिल्डरों के हाथों में सौंप दें ताकि वे वहाँ पर मॉल और अपार्टमेंट का निर्माण कर सकें। इन स्थानों का इस्तेमाल सिर्फ अस्पतालों के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि शहर में अनगिनत गगनचुंबी इमारतें हैं, इनमें से कई इमारतें ऐसी हैं, जिन्हें अधिग्रहित नहीं किया गया है। ये सिर्फ निवेश के रूप में खरीदे गए हैं। सरकार को कोरोना वायरस मरीजों को रखने के लिए ऐसे अपार्टमेंटों को अपने नियंत्रण में लेने की योजना बनानी चाहिए।

आपको बता दें कि देश में महाराष्ट्र के अंदर कोरोना के मरीज सबसे अधिक हैं। यहाँ तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,950 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित मरीजों की संख्या 1,07958 तक पहुँच गई है। इनमें से 53,030 सक्रिय मामले हैं। वहीं अकेले मुंबई शहर में करीब 30,000 से अधिक कोरोना के सक्रिय मामले हैं।

भारतीय उच्चायोग के 2 कर्मचारियों का पाकिस्तान में अपहरण, ISI का हाथ: मीडिया रिपोर्ट

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज (जून 15, 2020) सुबह भारतीय उच्चायोग के 2 जूनियर अधिकारी लापता हो गए। अब इनकी तलाश की जा रही है। भारत ने अधिकारियों के लापता होने का मुद्दा पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया है। लेकिन, पाकिस्तान की ओर से इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है।

ताजा जानकारी के अनुसार (TimesNow के इंटरनल सिक्यॉरिटी एडिटर निकुंज गर्ग के अनुसार) दोनों ही जूनियर अधिकारियों का अपहरण ISI के द्वारा किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 2 ड्राइवर ड्यूटी पर बाहर गए थे, लेकिन वे अपने निश्चित स्थान तक नहीं पहुँचे हैं। ऐसे में पहले से ही आशंका जताई जा रही थी कि कहीं उनका अपहरण तो नहीं कर लिया गया है। दोनों ही ड्राइवरों की तलाश जारी है।

गौरतलब है इससे पहले भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के 2 वीजा सहायकों को हिरासत में लिया था। इन पर भारतीय सुरक्षा तैयारियों सहित आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं की जासूसी करने का आरोप था। पाकिस्तान के इन दोनों अफसरों को भारत ने पर्सोना-नॉन ग्रेटा घोषित किया था और वापस पाकिस्तान भेज दिया था।

इस घटना के बाद से ही इस्लामाबाद में काम कर रहे भारतीय राजनयिकों और दूसरे स्टाफ सदस्यों के लिए हालात मुश्किल और खतरनाक होने की आशंका पैदा हो गई थी। इस बीच भारत की कोशिश रही थी कि वहाँ काम कर रहे भारतीयों के लिए कोई परेशानी खड़ी न हो। 

यहाँ याद दिला दें कि इस घटना से पहले इस्लामाबाद में भारत के एक राजनयिक को डराने का मामला सामने आया था। खबर थी कि एक ISI एजेंट ने भारतीय राजनयिक का पीछा किया, उनकी जासूसी की। जिसके बाद भारत ने इसका कड़ा विरोध किया था और अपनी शिकायत दर्ज कराई।

सरकार ने पाकिस्तान को नोट लिखकर उसे चेतावनी दी कि उसका यह रवैया विएना कन्वेन्शन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशन्स, 1961 और बाइलेटरल 1992 कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है, जो दोनों देशों ने राजनयिकों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए साइन किए थे। भारत ने पाकिस्तान से कहा था कि भारतीय उच्चायोग और उसके स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें विएना कन्वेन्शन के मुताबिक काम जारी रखने की इजाजत दी जाए।

जतेक के बौउह नय ओतेक के लहठी: सैलरी से ज्यादा रघुराम राजन का सामान ढोने पर RBI ने किया था खर्च

रघुराम राजन अगस्त 2013 से लेकर सितम्बर 2016 तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर रहे थे। यूपीए काल में उन्हें आरबीआई (RBI) गवर्नर नियुक्त किया गया था। ताज़ा खुलासे के अनुसार, आरबीआई में उनके कार्यकाल के दौरान उनकी आवभगत पर जम कर रुपए खर्च किए गए। रघुराम राजन के घरेलू समानों को शिकागो से मुंबई और फिर वापस शिफ्ट करने के लिए आरबीआई ने 71 लाख रुपए फूँक डाले।

कार्यकाल के दौरान राजन की सैलरी 1.69 लाख प्रति महीने हुआ करती थी। इस हिसाब से उन्हें उनके 3 साल के कार्यकाल में 61.2 लाख रुपए बतौर वेतन भुगतान किया गया लेकिन इससे 9.8 लाख रुपए ज्यादा केवल उनका समान शिफ्ट करने में ख़र्च कर दिए गए, वो भी आरबीआई (RBI) के फंड से।

‘संडे गार्जियन लाइव‘ को आरटीआई के तहत मिले जवाब से पता चलता है कि 22,26,416 रुपए रघुराम राजन का समान अमेरिका के शिकागो से मुंबई लाने पर खर्च किए गए। फिर वापस मुंबई से शिकागो शिफ्ट करने के लिए 49,41,253 खर्च किए गए।

आरबीआई (RBI) के अनुसार, बैंक में इस बारे में कोई नियम-क़ानून या लिखित नीति नहीं है कि किसी कर्मचारी के समानों को शिफ्ट करने के लिए कितने खर्च किए जाएँगे या फिर उसे वापस शिफ्ट करने का किराया कौन देगा। इसी कारण आरबीआई की डिसीजन मेकिंग बॉडी के लोगों ने फ़ैसला लिया। आरबीआई ने बताया है कि ‘सभी परिस्थितियों को देखते हुए’ इस ‘ख़ास केस के लिए’ फ़ैसला लिया गया।

इतना ही नहीं, ‘संडे गार्जियन लाइव’ ने ये भी बताया है कि फेयरवेल के रूप में रघुराम राजन को 5 पेंटिंग्स भी गिफ्ट की गई। हालाँकि, आरबीआई का कहना है कि वर्तमान नियमों के अनुसार रिटायर हो रहे आरबीआई गवर्नर को 50,000 रुपए तक के गिफ्ट दिए जा सकते हैं। हालाँकि, उन पेंटिंग्स की पुष्ट कीमत कितनी थी, इस बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। आरबीआई ने आरटीआई के रिप्लाई में ये भी कहा है कि राजन ने 50,000 रुपए तक का गिफ्ट प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की माँग नहीं रखी थी।

उन्हें गिफ्ट किए गए सारे पेंटिंग्स पुराने थे। इनमें से 4 को गोविन्द डुंबरे ने पेण्ट किया था, वहीं बाकी 1 गोपाल आदिवेरकर ने पेण्ट किया था। ये सभी पेंटिंग्स गवर्नर बँगले में लगी हुई थी, जहाँ से राजन को ‘कॉर्पोरेट गिफ्ट’ के रूप में दिया गया। डुंबरे की पेंटिंग्स का आकार 15*15 था, जबकि आदिवेरकर की पेंटिंग 16*20 आकार की थी। आरबीआई के अनुसार, इन पेंटिंग्स की कीमत 10,000 प्रति पेंटिंग आँकी गई है।

हालाँकि, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डुंबरे की पेंटिंग्स 1 लाख और उससे भी ज्यादा रुपए में बेचीं जा रही है। जब रघुराम राजन गवर्नर बँगले में रहते थे, तब उनके बाथरूम में भी एसी फिट किया गया था। इस कार्य में 13,474 रुपए खर्च किए गए थे। ये सभी बातें आरबीआई द्वारा दी गई आरटीआई रिप्लाई से ही पता चला है। कॉन्ग्रेस की ‘न्याय योजना’ के वादे को भी रघुराम राजन के दिमाग की ही उपज बताया जाता है।

हाल ही में मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने कार्यकाल में सरकारी बैंकों की कथित बदहाली का बचाव करते हुए कहा था कि मनमोहन सिंह-रघुराम राजन काल में बैंकों की वित्तीय स्थिति का “सबसे बुरा दौर” था। बैंक अभी तक उसी से उबर नहीं पाए हैं। सीतारमण ने कहा था कि वह राजन के ही RBI प्रमुख रहने का समय था जब कर्ज महज़ भ्रष्ट नेताओं के फ़ोन कॉल से मिल जाया करते थे और भारत में पब्लिक सेक्टर बैंकों को आज तक उस दलदल से निकलने के लिए सरकार से पूँजी लेकर काम चलाना पड़ रहा है।

थाईलैंड में VHP ने की लोगों की सहायता: जरूरतमंद परिवारों को बाँटे राशन, 9 जिलों में मदद पहुँचाने की योजना

कोरोना वायरस का कहर थमता नजर नहीं आ रहा। आए दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। इसी बीच विश्व हिन्दू परिषद (VHP) विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों की सेवा में दिन-रात लगा हुआ है। विश्व हिन्दू परिषद लगातार जरूरतमंदों तक मदद पहुँचा रही है। ये मदद अपने देश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्था विदेशों में भी जरूररतमंदों की सहायता कर रही है।

थाईलैंड में VHP का मदद कैंप

इसी कड़ी में VHP ने थाईलैंड में कोरोना प्रभावित परिवारों को मदद पहुँचाया। VHP थाईलैंड ने शनिवार (जून 13, 2020) को बैंकॉक में चोर्म थोंग जिले के 300 परिवारों की सहायता की। VHP थाईलैंड ने 9 जिलों में लोगों की मदद की योजना बनाई है। मदद की इस योजना के तहत चोर्म थोंग सातवाँ जिला था, जहाँ राशन व अन्य जरूरी सामानों का वितरण किया गया।

थाईलैंड VHP द्वारा स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए मदद

इस दौरान संस्था के स्वयंसेवकों की तरफ से कोरोना वायरस महामारी की वजह से कठिनाइयों का सामना कर रहे परिवारों को 1500 किलोग्राम चावल, 300 बोतल सोया सॉस, 300 पैकेट शाकाहारी नूडल्स, 200 रुपए के भारतीय स्नैक्स और पानी उपलब्ध कराया गया।

VHP थाईलैंड लोगों की मदद करने के दौरान केंद्र सरकार द्वारा लागू सभी गाइडलाइन का पालन कर रही है और साथ ही स्थानीय प्रशासन से भी समन्व्य स्थापित करके सुचारू रूप से काम कर रही है।

थाईलैंड VHP मदद कैंप में लाइन लगे स्थानीय लोग

संस्था अभी तक सात जिलों में लोगों की मदद कर चुकी है और अगले दो हफ्तों में 2 और जिलों में जरूरतमंदों को सहायता पहुँचाने की योजना है। VHP ने 2 मई 2020 को बैंकॉक के सैथोर्न जिले में, 9 मई 2020 को क्लोग टोए जिले में, 16 मई 2020 को क्लोंग सैन जिले में, 23 मई 2020 को बैंकॉक वाई जिले में, 30 मई 2020 को यानवा जिले में, 6 जून 2020 को बंगरक जिले में और 13 जून 2020 को चोर्म थोंग जिले में राहत सामग्री वितरित किया।

भगवान गणेश के बैनर के सामने थाईलैंड के स्थानीय निवासी

इसके अलावा आने वाले हफ्तों में VHP थाईलैंड शेष दो जिलों में सहायता प्रदान करेगा। इस दौरान 20 जून 2020 को वत्थन जिले में और 27 जून 2020 को रतबराना जिले में राहत सामग्री वितरित की जाएगी।

सत्संग के नाम पर झारखंड में आदिवासियों का धर्मांतरण, गाँवों में चर्च के एजेंट हिंदू धर्म के खिलाफ उगल रहे जहर: विहिप का दावा

झारखंड में बीजेपी सरकार के रहते आदिवासियों का जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लाया गया था। लेकिन, राज्य में झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद गठबंधन के सत्तासीन होते ही धर्मांतरण ने जोर पकड़ लिया है। यह दावा विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने किया है।

विहिप के झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशव राजू और क्षेत्रीय मंत्री वीरेंद्र विमल ने रविवार को रॉंची में पत्रकारों से बात करते हुए इसका खुलासा किया। इनके मुताबिक सत्संग के नाम पर आदिवासियों का जबरन धर्मांतरण हो रहा है। चर्च के एजेंट गॉंवों में हिंदू धर्म के खिलाफ जहर उगल कर इन्हें भड़काते हैं। विहिप ने कहा है कि वह इन एजेंटों की सूची तैयार कर रहा है।

विहिप के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख और राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय ​शंकर तिवारी ने ट्वीट कर कहा है, “कोरोना संकट के समय जारी लॉकडाउन में जहॉं समाज का एक बड़ा वर्ग जरूरतमंदों की मदद में लगा रहा, वहीं ईसाई मिशनरियां धर्मांतरण के खेल में लगी थीं। इस दौरान गुमला, लोहरदगा, लातेहार, सिमडेगा, कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग जिलों में खूब धर्मांतरण कराया गया। यही है मिशनरियों का असली रूप।”

पत्रकारों से बात करते हुए विहिप के पदाधिकारियों ने कहा कि वे धर्मांतरण कराने वाले एजेंटों की सूची जल्द ही प्रशासन को सौंपेंगे। वीरेंद्र विमल ने कहा कि महागठबंधन की सरकार ने जबरन धर्मांतरण पर जान-बूझकर आँख मूॅंद रखा है। इसमें चर्चों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हुए उन्हेंने कहा, “लॉकडाउन के दौरान जबरन धर्मांतरण की कई रिपोर्ट हमें मिली है। हम हर मामले में साक्ष्य जुटा रहे हैं। धर्मांतरण ने इस सरकार (महागठबंधन) के सत्ता में आने (दिसंबर 2019 के अंत में) के बाद जोर पकड़ा है।”

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक झारखंड के गुमला, लोहरदगा, लातेहार, सिमडेगा, कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग आदि जिलों में बड़े पैमाने पर ईसाई मिशनरियाँ धर्मांतरण कराने में जुटी हुई हैं। विहिप के पदाधिकारियों की मानें तो झारखंड में जगह-जगह धर्मांतरण कराने के लिए चर्च के एजेंट, पास्टर और नन प्रमुख रूप से लगे हुए हैं।

पदाधिकारियों का कहना है कि लगातार सामने आती घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि 2017 में धर्मांतरण विरोधी कानून बनने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी प्रलोभन देकर कराए जा रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने में नाकाम हैं। झारखंड में लगातार बढ़ती धर्मांतरण की घटनाओं को देखते हुए विहिप ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है और कहा है कि यदि सरकार धर्मांतरण के खेल में लगे लोगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो VHP और जनजातीय समाज के लोग राज्य में बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

विहिप के झारखंड-बिहार के क्षेत्र संगठन मंत्री केशव राजू ने बताया कि कोडरमा के डोमचाच, चंदवारा, जयनगर व गिरिडीह के तीसरी व पीरटांड प्रखंड व लातेहार के गाँवों में चर्च के एजेंट सत्संग के नाम पर हिंदुओं को इकट्ठा करते हैं। इकट्ठा किए गए लोगों को हिंदू धर्म के प्रति भड़काया जाता है।

फिर प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण करवा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पैसे के लोभ में आकर कुछ हिंदू भी ईसाई मिशनरियों के साथ काम करते हैं और धर्मांतरण कराने में ईसाइयों का साथ देते हैं।

राजू ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान इस काम का कोई विरोध करने वाला नहीं था। इसी का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर लोगों का धर्मांतरण कराया गया। उन्होंने दावा किया है कि गिरिडीह में तीसरी प्रखंड के मनोज टुडू व सामेल मुर्मू व पीरटांड़ प्रखंड में पोल टुडू और बेंजामिन सोरेन धर्मांतरण के कार्य में लगे हुए हैं। कुछ इसी तरह लातेहार में विनोद उरांव स्वयं ईसाई बनने के बाद इस काम में आर्थिक सहयोग मिशनरियों को कर रहे हैं।

केशव राजू ने बताया कि अभी हम राज्य के सभी जिलों में धर्मांतरण के काम में लगे लोगों और प्रलोभन में आकर धर्म बदलने वाले लोगों का डाटा इकट्ठा कर रहे हैं। कार्य को पूरा होते ही इस सूची को प्रशासन को सौंपा जाएगा और प्रशासन पर इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए भी दबाव बनाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि झारखंड लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में कुल 14 पंचायतें हैं, जिनके अंतर्गत 106 गाँव आते हैं। ये सभी गाँव आज ईसाई बहुल्य हो चुके हैं। अब इसी गति से पलामू के रजहरा, नवाबाजार, चान्या, सुकबेरा, करमा, केराई आदि गाँवों में लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है।

वहीं धर्म जागरण की के सौम्या मिश्रा के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान झारखंड गुमला के करौंदी, करमटोली, वृंदा, जोराग, डीबडीह व लोहरदगा के घाघरा, ताबील, जिलिंगसिरा, अरगी, टोटांबी, नवडीहा आदि गाँवों में धर्मांतरण का खेल फिलहाल जारी है। इतना ही नहीं उन्होंने दावा किया कि धर्मांतरण के बाद यहाँ के लोगों ने चर्च जाना भी शुरू कर दिया है।