Home Blog Page 4757

फ्लैट में मौजूद थे दोस्त, नहीं मिली कोई सुसाइड नोट: सुशांत सिंह राजपूत के मामा ने कहा – न्यायिक जाँच हो

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का सस्पेंस गहराता जा रहा है। उनके मामा ने आरोप लगाया है कि ये आत्महत्या नहीं है क्योंकि सुशांत ऐसा कर ही नहीं सकते थे। मामा ने इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग उठाई है। उनके कमरे से किसी सुसाइड नोट का न मिलना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मामा का कहना है कि सुशांत ऐसा क़दम नहीं उठा सकता, इसीलिए मामले की न्यायिक जाँच हो

वहीं मुंबई पुलिस अभिनेता के पिछले 6 माह से डिप्रेशन में होने की बातें कह रही है। वो बांद्रा में स्थित अपने फ्लैट में अकेले रहा करते थे। परिवार का पटना में उनकी मौत की ख़बर सुन बुरा हाल है। पिता सदमे में बेहोश हो गए और कुछ बोलने या बताने की हालत में नहीं हैं। पटना में किसी भी परिजन या रिश्तेदार को इस बात या यकीन नहीं हो रहा कि सुशांत ने आत्महत्या कर ली। सबका रो-रो कर बुरा हाल है।

एक और खुलासा ये हुआ है कि सुशांत सिंह राजपूत के घर में शनिवार (जून 13, 2020) की रात उनके दोस्त लोग मौजूद थे। पुलिस फिलहाल पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है, जिसके बाद उन दोस्तों का पता लगा कर भी पूछताछ की जाएगी। ‘आजतक’ ने अपनी ख़बर में बताया है कि सुशांत के फ्लैट में उनके दोस्त लोग भी मौजूद थे। सुशांत सिंह के पास फिल्मों की कमी नहीं थी, ऐसे में उनका करियर भी ठीक ढर्रे पर चल रहा था।

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताते हुए लिखा, “सुशांत सिंह राजपूत एक उज्ज्वल युवा अभिनेता थे, जो जल्दी ही चले गए। उन्होंने टीवी और फिल्मों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मनोरंजन की दुनिया में उनकी सफलता ने कितनों को ही प्रेरित किया। उनकी कई यादगार फ़िल्में हैं, जो हमें उनकी याद दिलाएँगी। मैं उनके निधन से स्तब्ध हूँ। दुःख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ है। ॐ शांति।”

हाल ही में 8 जून को सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने मुंबई के मलाड स्थित इमारत में 14 मंजिल से कूद कर आत्महत्या की थी। बोरीवली के एक हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित किया गया था। उनकी सगाई हो चुकी थी। दिशा की आत्महत्या के लगभग एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत ने भी आत्महत्या कर ली। दिशा की आत्महत्या का भी कारण नहीं पता चला है।

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता शक्ति कपूर ने ‘एबीपी न्यूज़’ से कहा कि उनका दिल रो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुशांत के आत्महत्या करने की वजह धन या स्टारडम नहीं बल्कि कुछ और ही है। बॉलीवुड के अन्य अभिनेता और उन्हें जानने वाले लोग आत्महत्या वालों बात पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं। लोगों ने 2020 में दुनिया को अलविदा कह चुके सितारों को याद किया।

सुशांत सिंह राजपूत के घर से हाइपरटेंशन और डिप्रेशन की दवाओं के पेपर मिले हैं। हालाँकि, अभी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं आई है और उनके मृत शरीर को भाभा हॉस्पिटल में ले जाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह पता चल सकेगी। परिणीति चोपड़ा सहित उनकी कई सह-अभिनेत्रियों ने भी उनकी मौत पर दुःख जताया। एमएस धोनी की बयोपिक में सुशांत सिंह के साथ काम कर चुके सानंद शर्मा ने कहा कि सुशांत तब एक तरह से बेचैन रहा करते थे।

काशी-मथुरा पर हिंदुओं की याचिका न करें कबूल, इससे मुस्लिमों के मन में भय पैदा होगा: SC से जमीयत-उलेमा-ए-हिंद

अयोध्या विवाद के निपटारे के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा को लेकर भी याचिकाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। हिंदू पक्ष की याचिका के बाद अब मुस्लिम पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने वकील एजाज मकबूल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करके हिंदू पुजारियों की याचिका का विरोध किया है।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि हिंदू पुजारियों की याचिका पर नोटिस न जारी किया जाए। उनका कहना है कि मामले में नोटिस जारी करने से मुस्लिम समुदाय के लोगों के मन में अपने इबादत स्थलों के संबंध में भय पैदा होगा।

याचिका में अयोध्या विवाद का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि इसके परिणाम के बाद इस तरह की याचिका से मुस्लिमों के मन में भय पैदा होगा, जिससे देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना नष्ट होगा। साथ ही जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि उसे संबंधित मामले में पक्षकार बनाया जाए।

हिंदू पुजारियों के संगठन ‘विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ’ ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में धार्मिक स्थल (विशेष प्रोविजन) एक्ट, 1991 की धारा 4 को चुनौती दी है। इस एक्ट के अनुसार अयोध्या राम जन्मभूमि को छोड़कर अन्य पवित्र स्थलों का धार्मिक चरित्र वैसा ही बनाए रखने का प्रावधान है। इस एक्ट को रद्द कर काशी, मथुरा जैसे हिन्दू स्थल को पुनः प्राप्त करने के लिए हिंदू संगठन कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।

अधिनियम की धारा 4 (1) में कहा गया हैं कि, “यह घोषित किया जाता है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा।” जैसे किसी भी मस्जिद को मंदिर में नहीं बदला जा सकता है और वहीं मंदिर को भी मस्जिद या किसी और धर्म में नहीं बदला जा सकता है। हालाँकि अयोध्या विवाद को इससे अलग रखा गया था, क्योंकि उस पर कानूनी विवाद पहले से चल रहा था।

विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि यह कानून हिंदुओं के अधिकार का हनन करने वाला है। इसे रद्द कर देना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 25 लोगों को अपनी धार्मिक आस्था के पालन का अधिकार देता है। संसद इसमें बाधक बनने वाला कोई कानून पास नहीं कर सकती।

महासंघ के अनुसार संसद ने 1991 में एक कानून बनाकर सीधे-सीधे हिंदुओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया। काशी और मथुरा जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों पर मस्जिद बनी हुई है। लेकिन संसद ने कानून बनाकर हिंदुओं को विदेशी आक्रमणकारियों की इन निशानियों को चुनौती देने से रोक दिया है। कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह धार्मिक स्थल (विशेष प्रोविजन) एक्ट, 1991 की धारा 4 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दे।

याचिका में काशी विश्वनाथ एवं मथुरा मंदिर विवाद को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की माँग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस अधिनियम को कभी चुनौती नहीं दी गई और न ही किसी अदालत ने न्यायिक तरीके से इस पर विचार किया। अयोध्या विवाद में भी उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने इस पर टिप्पणी की थी।

अश्वगंधा का अश्वमेध: कोरोना की आयुर्वेदिक दवा बनाने के पतंजलि के दावे में कितना दम?

‘बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा’ कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लेकिन हम कहावतों पर कब ध्यान देते हैं? उन्हें एक कान से सुनते हैं और दूसरे में exhaust fan लगाकर आराम से सो जाते हैं। इसीलिए बगल के छोरे हो हाशिए पर रखकर विलायती छोरे ढूँढने में विशेष रूचि रखते हैं।

लगता है इस बार यही कहावत सच होने जा रही है कोरोना के इलाज के बारे में। हम यहाँ कोरोना की बूटी के इंतज़ार में ऐल्प्स और रॉकी पर्वत शृंखलाओं की ओर टकटकी बाँधे बैठे हैं और पता चला कि हनुमान जी कब के हिमालय से जड़ी-बूटी ले आए।

देखो जी, छोरा बगल में चुपचाप बैठा हो इसलिए किसी को दिख न रहा हो तो फिर भी बात समझ में आती है। लेकिन अगर छोरा ही ढिंढोरा पीट के ये बता रहा हो कि मैं यहाँ बैठा हूँ तो आप उसकी उपेक्षा नहीं कर सकते। पहले तो शहर के ढिंढोरे में उसकी आवाज विलीन हो गई थी, फिर जब पता चला कि शहर भर में कहीं कुछ नहीं मिलने वाला, तब जाकर शहर का ढिंढोरा थमा और और बगल से एक दूसरे शंखनाद की आवाज आई।

दरअसल Covid-19 की वैक्सीन बनाने की विश्वव्यापी जद्दोजहद के बीच भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के क्षेत्र से बड़ी खबर आ रही है। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरिद्वार में ‘पतंजलि अनुसंधान संस्थान’ का उद्घाटन किया। विश्व भर में योग और आयुर्वेद का लोहा मनवा चुके स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा स्थापित व संचालित पतंजलि का यह अनुसंधान संस्थान अत्याधुनिक विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं से युक्त है। यहाँ साक्ष्य आधारित चिकित्सा (Evidence Based Medicine) पर बल देते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक अनुसंधान किए जाते हैं।

इसी अनुसंधान संस्थान में Covid-19 के संक्रमण को निष्प्रभावी करने के लिए शोध किए गए और उन प्रयोगों के आधार पर कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा का निर्माण किया गया। इसके माध्यम से अनेक मरीजों की सफल चिकित्सा करने के बाद पतंजलि ने इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया, जो इस समय अपने अंतिम चरण में है।

पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण के अनुसार उनके द्वारा बनाई गई कोरोना की विशेष दवा का प्रयोग हर आयु वर्ग के और हर एक स्टेज के मरीजों पर किया जा चुका है, जिनमें से लगभग सभी रोगियों में 7-8 दिन में कोरोना नेगेटिव पाया गया और कुछ ही रोगियों को ठीक होने में 12-14 दिन लगे।

इन सब रोगियों का आँकड़ा पतंजलि के पास मौजूद है। किंतु चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे बड़ा साक्ष्य होता है क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल। इसलिए इसे पूरी तरह साक्ष्य आधारित दवाई बनाने के लिए इसका क्लीनिकल ट्रायल जरूरी था, जो चल रहा है और इसके नतीजे एक सप्ताह के अंदर-अंदर आने की संभावना है।

नतीजे उत्साहवर्धक हैं, किंतु नैदानिक परीक्षण की प्रक्रिया अपना समय लेती है। उसमें थोड़ा वक्त लगता है। लेकिन अगर NatWest Tri Series के फ़ाइनल मुकाबले में भारत को जीत के लिए तीन ओवर में सिर्फ तीन रन चाहिए होते और पाँच विकेट हाथ में होते तो लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट उतारकर लहराने के लिए सौरव गाँगुली मैच के ख़त्म होने का इंतजार कभी न करते। कुछ खुशियाँ बड़ी होती हैं। उन्हें आप योजनाबद्ध तरीके से व्यक्त नहीं करते, वो अपने आप हो जाती हैं।

शायद इसीलिए नैदानिक परीक्षण (clinical trial) के अंतिम परिणाम की औपचारिक घोषणा से पूर्व ही उत्साहवर्धक परिणामों को देखते हुए बाबा रामदेव ने कोरोना के इलाज में सौ प्रतिशत सफलता मिलने के प्रसन्नतादायक समाचार का ऐलान कर दिया है। आचार्य बालकृष्ण का भी यही दावा है कि जब वो कोरोना औषधि की बात करते हैं तो सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की बात नहीं करते, बल्कि कोरोना के पूर्ण इलाज की बात कहते हैं।

माना कि मैच ख़त्म होना अभी बाक़ी है लेकिन जीत पक्की है। कड़ी मेहनत और लगन से प्राप्त इस जीत के लिए कप्तान सहित पूरी टीम बधाई की पात्र है।

कोरोना की विश्वव्यापी महामारी में जहाँ लाखों लोग चिकित्सा के आभाव में अपनी जान गँवा चुके हैं और पूरा विश्व एक अभूतपूर्व आपदा से गुजर रहा है। ऐसे में यह अनुसंधान भारत के प्राचीन आयुर्वेद या पतंजलि की उपलब्धि को तो याद रखा ही जाएगा साथ ही मानव सभ्यता की साझा लड़ाई को जीतने में एक महत्तम ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

आइए इस बड़ी सफलता को थोड़ा करीब से समझें। हाल ही में पतंजलि अनुसंधान संस्थान की ओर से एक शोधपत्र तैयार किया गया- ‘पारंपरिक भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति द्वारा नोवल करोना वायरस (Covid-19) के संक्रमण को रोकने हेतु प्रभावी उपचार’। यह शोधपत्र एक अमेरिकी-जर्मन एकडेमिक पब्लिशिंग कंपनी Spring Nature की प्रसिद्ध शोध पत्रिका Virology Journal में प्रकाशनाधीन है, जिसकी मुद्रण पूर्व प्रति को Virology के सर्वर पर देखा जा सकता है

इस शोधपत्र के अनुसार अश्वगंधा, गिलोय, और तुलसी में उपस्थित प्राकृतिक पादप रसायनों को Covid-19 की संक्रामकता को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी पाया गया है। अश्वगंधा में पाया जाने वाला फायटोकेमिकल यानी पादप रसायन ‘विथेनॉन’ Covid-19 वायरस को शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकता है और उसकी संक्रामकता को अवरुद्ध करता है।

गिलोय में उपस्थित टीनोकॉर्डीसाइड भी अश्वगंधा जैसे ही आशाजनक परिणाम दिखाता है। जबकि तुलसी में पाया जाने वाला स्कूटैलारिन नामक प्राकृतिक फ्लैवॉन RDRP नाम के उस एंजाइम को अवरुद्ध करता है, जो शरीर में कोरोना विषाणु के बहुलीकरण और उसकी वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार है। इस तरह तुलसी शरीर में कोरोना के प्रसार को रोकने में विशेष रूप से कारगर है।

इसके अतिरिक्त पाँच हजार से भी अधिक वर्ष पूर्व महर्षि चरक द्वारा नस्य के रूप में निर्दिष्ट अणु तैल कफ की अधिकता को रोकने और ऊर्ध्वजत्रुगत (ENT) विकारों के उपचार के लिए प्रयुक्त होता है, जिसकी अनुशंसा इस कोविड उपचार में की गई है। इसकी उपयोगिता को देख कर आप भी समझ सकते हैं कि ये कोरोना के इलाज में कितना आवश्यक है।

इन सब के साथ एक और महत्वपूर्ण औषधि है श्वासारि रस, जो श्वसन तंत्र से सम्बंधित रोगों की चिकित्सा में विशेष रूप से प्रभावशाली है। यह फेफड़ों की स्वस्थ ऑक्सीकृत अवस्था को स्थिर रखने मे सहायक है और साथ ही फेफड़ों के शोथ को कम करने में उपयोगी है। इस तरह यह आयुर्वेदिक औषधि श्वास-प्रश्वास पर सीधा असर डालने वाले कोरोना के इलाज में बड़ी भूमिका निभाती है।

इन सब शोधों के आधार पर पतंजलि ने कोरोना के इलाज के लिए एक चिकित्सा व्यवस्था (Treatment Regime) को तैयार किया है। जिसके आशाजनक परिणामों पर शीघ्र ही नैदानिक परीक्षण की मुहर लगने की उम्मीद है। Covid-19 संक्रमणजन्य रोगों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति में प्रयुक्त होने वाली औषधियों का प्रयोग भी किया जा रहा है। अब कोरोना की चिकित्सा के लिए ICMR द्वारा निर्धारित एलोपैथिक चिकित्सा के अलावा आयुर्वेदिक औषधियों से चिकित्सा का रास्ता साफ़ हो जाएगा।

पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रस्तावित यह दवा रोगी को तो संक्रमण से मुक्त करती ही है, साथ ही स्वस्थ व्यक्ति की कोशिकाओं में भी संक्रमण को प्रवेश करने से रोकती है। यानी अनलॉक के बाद घर से बाहर लोगों के इंतजार में बैठे कोरोना के खिलाफ भी ये औषधि सुरक्षा कवच का काम करेगी। स्वस्थ व्यक्ति में संभावित संक्रमण को प्रवेश करने से रोकना इसका ऐसा पक्ष है जो बड़ी संख्या में लोगों को को आत्मरक्षा हेतु आत्मनिर्भर बनाएगा।

अन्त में नैदानिक परीक्षण (clinical trial) के परिणामों के लिए यही शुभकामना कि अश्वगंधा के कोरोना मुक्ति अश्वमेध का यह अश्व वैश्विक आरोग्य पटल पर आयुर्वेद की दिग्विजय की पताका फहराएगा और ऋषि संस्कृति के निष्काम मानवसेवा भाव के चक्रवर्तित्व को स्थापित करेगा।

महाराष्ट्र सरकार में दरार: पूर्व CM व अभी के मंत्री ने कहा- मुख्यमंत्री ठाकरे से मिलने की कोशिश करेंगे, मुद्दा उठाएँगे

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में दरार अब साफ दिख रही है। राहुल गाँधी और बालासाहेब थोराट के बाद अब कॉन्ग्रेस के एक और बड़े नेता ने इस पर मुहर लगाई है। राज्य के कैबिनेट मंत्री और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने माना है कि गठबंधन सरकार में अनबन है। अशोक चव्हाण ने गठबंधन सरकार में तकरार के लिए ब्यूरोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया है।

साथ ही चव्हाण ने कहा कि जल्द ही इस मुद्दे को शिवसेना सुप्रीमो और सीएम उद्धव ठाकरे के सामने उठाया जाएगा। चव्हाण ने कहा, “हाँ, महा विकास अघाड़ी के घटक दलों और ब्यूरोक्रेसी के बीच कुछ मुद्दे हैं। हम इस पर सीएम के साथ चर्चा करेंगे। हम सीएम ठाकरे से मिलने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनके सामने सभी मुद्दों को विस्तार से उठाएँगे। हम अगले दो दिन में मीटिंग की उम्मीद कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री बालासाहेब थोराट ने भी इसी तरह का बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों में कुछ मुद्दे हैं, जिनका समाधान बातचीत से निकल आएगा। लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस को सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिकार मिलना चाहिए।”

शनिवार (जून 13, 2020) को RPI के नेता रामदास आठवले ने महाराष्ट्र सरकार को समर्थन देने को लेकर कॉन्ग्रेस को एक बार फिर विचार करने की नसीहत दी थी। आठवले ने कहा था, “कॉन्ग्रेस वह पार्टी है जिसके समर्थन से यह सरकार चल रही है। अगर उसे गठबंधन में अहमियत नहीं मिल रही है तो उसे सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बने रहने के बारे में सोचना चाहिए।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में निर्णय लेने की भूमिका में नहीं है। उन्होंने कहा था कि सरकार चलाने और राज्य में सरकार का समर्थन करने के बीच अंतर है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में निर्णय लेने वाली भूमिका में माना जा सकता है, लेकिन महाराष्ट्र में नहीं।

प्रदेश कॉन्ग्रेस के एक नेता के मुताबिक मुख्यमंत्री NCP के अध्यक्ष, शरद पवार से कोविड-19 वैश्विक महामारी और चक्रवात ‘निसर्ग’ से प्रभावित लोगों को राहत देने समेत अन्य कई मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे ऐसी भावना पैदा हो रही है कि प्रदेश कॉन्ग्रेस को अलग-थलग कर दिया गया है।

वहीं कॉन्ग्रेस के एक अन्य मंत्री ने कहा, “कुछ मुद्दों को लेकर पार्टी के अंदर नाराजगी है, जिस पर हम मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करना चाहते हैं और उन्हें सुलझाना चाहते हैं।” पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि जब पिछले साल नवंबर में तीन दलों की सरकार बनी थी और मंत्री परिषद ने शपथ ली थी, उस वक्त यह फैसला हुआ था कि सत्ता एवं जिम्मेदारियों में बराबर साझेदारी होगी।

गौरतलब है कि गठबंधन की तीन सहयोगियों में से एक कॉन्ग्रेस निर्णय लेने की प्रक्रिया और अहम बैठकों में खुद को शामिल कराने का प्रयास कर रही है। प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इस हफ्ते की शुरुआत में मुलाकात कर यह चर्चा की थी कि पार्टी नेताओं एवं मंत्रियों को गठबंधन सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी मिलिंद नारवेकर भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व के विचारों को जानने के लिए इस बैठक में मुख्यमंत्री के दूत के रूप में उपस्थित थे।

सुशांत सिंह राजपूत ने की आत्महत्या: मृत माँ को लिखा था ‘खत’, आखिरी फिल्म में आत्महत्या न करने का दिया था संदेश

इस साल दुनिया को अलविदा कह के जाने वाले सिने हस्तियों की सूची में सुशांत सिंह राजपूत का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। उनकी लाश उनकी ही फ्लैट में पंखे से लटकी हुई मिली। घर के नौकर ने पुलिस को ये जानकारी दी। धारावाहिकों में काम करने के बाद सिने जगत में क़दम रखने वाले सुशांत का अकादमिक करियर भी अच्छा रहा था। उन्होंने AIEEE में काफ़ी अच्छा रैंक हासिल किया था।

सुशांत सिंह राजपूत ने सबसे पहले ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाम के धारावाहिक में काम किया था पर वो एकता कपूर के धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ से लोकप्रिय बने। तत्पश्चात उन्होंने फिल्मों का सफर शुरू किया था। सुशांत फिल्म ‘काय पो छे’ में मुख्य अभिनेता के रूप में दिखे थे। उस फिल्म में उनके अभिनय की तारीफ भी हुई थी। हाल ही में उन्होंने ‘सोनचिड़िया’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में काम किया था, जिसे समीक्षकों ने सराहा था।

गौर करने वाली बात ये है कि हाल ही में उनकी पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने मुंबई के मलाड स्थित इमारत में 14 मंजिल से कूद कर आत्महत्या की थी। बोरीवली के एक हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित किया गया था। उनकी सगाई हो चुकी थी। दिशा की आत्महत्या के लगभग एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत ने भी आत्महत्या कर ली। दिशा की आत्महत्या का भी कारण नहीं पता चला है।

वहीं सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का कारण डिप्रेशन बताया जा रहा है। ज्यादा दिन नहीं हुए जब अप्रैल 2020 में अभिनेता इरफान खान और वरिष्ठ अभिनेता ऋषि कपूर जैसे बड़े कलाकारों का निधन हुआ था। वहीं हाल ही में गायक और संगीत निर्देशक वाजिद खान का 42 साल की उम्र में कोरोना संक्रमण से निधन हो गया था। गौरतलब है कि ‘आजतक’ की खबर के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत ने 10 दिन पहले अपनी माँ को पत्र लिखा था।

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से उन्होंने हाल ही में अपनी भावनाएँ व्यक्त की थी, जिसमें भी उनकी निराशा साफ दिख रही है। बता दें कि सुशांत की माँ की साल 2002 में मौत हो चुकी है। तब सुशांत मात्र 16 साल के थे। अपनी माँ को याद करते हुए अपने आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट में माँ को लिखे खत में लिखा था कि आँसुओं से अतीत भाप बन कर उड़ रहा है और सपनों एवं जीवन के बीच बातचीत चल रही है। बांद्रा में सुशांत अपने घर में अकेले रहते थे।

हालाँकि, उनकी एक बहन उनके साथ वहाँ अक्सर होती थी लेकिन अभी ये पता नहीं चल पाया है कि वो कब वहाँ से गई। कहा जा रहा कि पटना में पिता को उनकी बहन ने ही फोन पर सूचना दी। और तब से उनके पिता सदमें में हैं। वो अपने पड़ोसियों से भी बात नहीं कर रहे। सुशांत के परिवार में उनके अलावा उनकी चार बहनें थी जिनमें से एक की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं पुलिस ने मुंबई में सुशांत के पड़ोसियों का भी बयान दर्ज कर रही है। कुछ लोगों का कहना है कि वो पिछले 6 महीनों से डिप्रेशन में थे।

अक्षय कुमार और वीरेंद्र सहवाग जैसे कई हस्तियों ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर दुःख जताया। अक्षय ने कहा कि हाल ही में उन्होंने सुशांत की फिल्म ‘छिछोरे’ देखी थी और उन्होंने इसके प्रोड्यूसर साजिद खान को बताया था कि वो इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे और उन्हें ये खासी पसंद आई। गौर करने वाली बात ये है कि ‘छिछोरे’ में आत्महत्या न करने को लेकर ही महत्वपूर्ण सन्देश दिया गया था।

पिंटू बन रियाज ने हिंदू नाबालिग को फँसाया: बलात्कार, दरगाह में पिटाई, जबरन निकाह और धर्मांतरण की कोशिश

लव जिहाद की कई घटनाएँ मीडिया में खबरें नहीं बनने के कारण दब जाती हैं। या फिर उन्हें साधारण हेडलाइन के साथ परोस कर मीडिया सारे डिटेल्स छिपा लेता है। राजस्थान के राजसमंद से ऐसी ही एक घटना सामने आई है।

पुलिस ने बलात्कार, अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने के आरोप में रियाज और उसके दो साथियों सुलेमान मोहम्मद और उसके अनवर को गिरफ्तार किया है। घटना देवगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले लसानी गाँव की है।

पीड़िता के साथ पहले तो बलात्कार किया गया। फिर धमकाया गया कि अगर उसने मुँह खोला तो वीडियो क्लिप्स वायरल कर दिए जाएँगे। इसके बाद रियाज़ और उसके साथी पीड़िता पर निकाह और इस्लाम कबूल करने का दबाब बना रहे थे।

पीड़िता के साथ जब शारीरिक सम्बन्ध बनाए गए तब वह नाबालिग थी, इसलिए पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। 19 साल की पीड़िता ने पीड़िता द्वारा पुलिस को दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, एक दिन रियाज़ नामक व्यक्ति उसके घर आया और उसने पानी माँगा। उस समय उसने ये नहीं बताया कि वो समुदाय विशेष का है। उसने अपना नाम पिंटू बताया।

बाद में उसने धीरे-धीरे लड़की को फाँसना शुरू किया और फिर उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किया। कुछ दिनों बाद ये राज़ खुला कि रियाज़ ने अपने मजहब की पहचान छिपाई थी और छद्म हिन्दू नाम रख कर उसे फँसाया था। लड़की ने तत्काल उससे रिश्ते तोड़ लिए, लेकिन आरोपित रियाज़ उसे निकाह के लिए बार-बार बोलता रहा। बाद में उसने लड़की के साथ बलात्कार किया और निकाह न करने पर वीडियो क्लिप्स वायरल करने की धमकी दी।

जून 1 को जब लड़की काम से अपने घर लौट रही थी तो रियाज़ अपने दो दोस्तों सुलेमान और अनवर के साथ आया और पीड़िता को खारी नदी के पास स्थित एक दरगाह में लेकर गया। वहाँ उसके साथ इस्लामी धर्मान्तरण करने के लिए जोर-जबरदस्ती की गई और साथ ही निकाह के लिए धमकाया गया। जब पीड़िता ने इनकार किया तो तीनों ने मिल कर उसकी बुरी तरह पिटाई की और फिर पूरे परिवार को तबाह कर घर जला डालने की धमकी दी। पूरे परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी गई।

पुलिस ने बताया कि दरगाह में जब ये सब किया जा रहा था तो लड़की जोर-जोर से रोने लगी। हंगामे की आवाज़ सुन कर पास के ही एक मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों ने दौड़ कर पीड़िता को बचाया। इसके बाद वो वहाँ से भाग निकली। जब इस ख़बर की भनक लोगों को लगी तो नदी किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए, जिसके बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई। पुलिस ने वहाँ पहुँच कर स्थिति संभाली।

हाल ही में मेरठ से लव जिहाद में एक लड़की की बेरहमी से हत्या की ख़बर आई थी। इस मामले में आरोपित शाकिब ने खुद को अमन बताकर लड़की को फॅंसाया था।

कुछ​ दिन इंतजार करें, पीओके खुद कहेगा हम भारत के साथ रहना चाहते हैं: अजय पंडिता को नमन कर बोले राजनाथ

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (जून 14, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘जम्मू जन संवाद रैली’ को संबोधित किया। रक्षा मंत्री ने रैली की शुरुआत जम्मू-कश्मीर में वीरगति को प्राप्त हुए सुरक्षाकर्मी और पुलिस के जवानों को नमन करते हुए की। उन्होंने हिंदू सरपंच अजय पंडिता को भी नमन किया।

रक्षा मंत्री ने कहा, “कश्मीर में सरपंच अजय पंडिता की कायरतापूर्ण निर्मम हत्या की गई है, मैं उनकी स्मृति को नमन करता हूँ। इसके साथ ही मैं पंडित प्रेमनाथ डोगरा और 1947 में कश्मीर में तिरंगा फहराने वाले मोहम्मद मकबूल शेरवानी को भी नमन करता हूँ।”

इस दौरान राजनाथ सिंह ने भारत-चीन सीमा विवाद, कोरोना संकट, अर्थव्यवस्था समेत कई मुद्दों पर बात की। राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना काल में मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत की प्रशंसा की है।

भारत-चीन सीमा विवाद पर राजनाथ सिंह ने कहा कि जो भी विवाद पैदा हुआ है, उस पर इस समय सैन्य लेवल पर बात जारी है। चीन ने भी इच्छा व्यक्त की है कि बातचीत के द्वारा इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। हमारी कोशिश भी यही है कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के द्वारा इसका समाधान निकाला जाए। राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं विपक्ष को बताना चाहता हूँ कि हमारी सरकार किसी को भी इस मामले में अँधेरे में नहीं रखेगी।”

राजनाथ सिंह ने कहा, “दुनिया के कई मजबूत देश कोरोना महामारी के कारण लड़खड़ा गए हैं। भारत में प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट को चुनौती के रूप में स्वीकार किया और कई बड़े और अहम फैसले लिए। भारत ने कोरोना संकट के दौरान अपने स्वास्थ्य सुरक्षा के ढाँचे को भी अधिक मजबूत किया है।”

आर्टिकल 370 का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले कश्मीर में ‘कश्मीर की आजादी’ की माँग को लेकर प्रदर्शन होते थे। पाकिस्तान और आईएसआईएस के झंडे दिखाई देते थे, लेकिन अब सिर्फ तिरंगा दिखाई देता है।

पीओके के बारे में राजनाथ सिंह ने कहा, “कुछ दिन इंतजार कीजिए, पीओके से ही माँग होगी कि हम भारत के साथ रहना चाहते हैं, पाकिस्तान के कब्जे में नहीं। मैं आपको बताना चाहूँगा कि जिस दिन यह होगा, हमारी संसद का भी संकल्प पूरा हो जाएगा। मौसम बदल चुका है और हमारे चैनल्स मुजफ्फराबाद-गिलगिट का तापमान, दर्जा हरारत बता रहे हैं। ये दर्जा हरारत बताने के कारण अब इस्लामाबाद में भी कुछ हरारत महसूस होने लगी है। इसलिए वे कुछ ज्यादा शरारत करने पर आमादा हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाना 1952 से ही भाजपा के घोषणा-पत्र में शामिल रहा है। राजनीतिक पार्टियाँ कहती थीं कि ये मुद्दे भाजपा सिर्फ राजनीति करने के लिए उठाती है। उन्होंने कहा, “हमने सरकार में आने 100 दिन के अंदर इसे हटा दिया। यह साबित कर दिया कि भाजपा जो कहती है वो करती है। हम भारत की राजनीति में भरोसा टूटने नहीं देंगे। किसी ने कहा है-मोदी दर्द की रात गई, गम का खजाना भी गया, मोदी तेरे हिम्मत से दाग पुराना भी गया। अनुच्छेद 370 बहुत पुराना दाग था, जो अब खत्म हो गया है।’’

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार ने 50 बड़े काम किए हैं। यहाँ पर आईआईटी और एम्स जैसे संस्थान खोलने की योजना है। उन्होंने कहा, “2014 से 2019 तक 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक हमारी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए दिए। इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र सरकार से पैसे मिलते थे। हालाँकि, यहाँ भ्रष्टाचार का बोलबाला था। केंद्र की ओर से भेजे गए पैसे कहाँ जाता था, पता नहीं चलता था। कई ऐसे अलगाववादी नेता थे, जो भारत सरकार के पैसे से मजे में रहते थे। कभी-कभी वे पाकिस्तान की वकालत करने में भी नहीं चूकते थे। अब उनकी कमर टूट गई है। कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकी मारे जा रहे हैं।”

रक्षा मंत्री ने कहा, “1984 में जब हमें मात्र 2 सीटें प्राप्त हुई थी, तो राजनीतिक विश्लेषकों ने ये कहना शुरू कर दिया था कि भाजपा समाप्त हो जाएगी। लेकिन उस समय के हमारे नेता आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और संकल्प लिया। जिसका परिणाम आज आप देख रहे हैं कि 2 से लेकर दोबारा सरकार बनाने तक की यात्रा हमने की है। भाजपा ने जो कहा अवसर मिलते ही उस काम को पूरा किया। भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो कहती है, वह करती है।”

उन्होंने आगे कहा, “6 वर्षों में हमारी सरकार ने बहुत सारे बुनियादी काम किए हैं। लगभग 18500 गाँव के लोग आजादी के 70 साल बाद भी बिना बिजली के रहते थे। हमने कुछ ही महीनों में सभी घरों तक बिजली पहुँचाई। कोई सोच नहीं सकता था कि देश के सभी नागरिकों का बैंक खाता बनेगा, लेकिन हमारी सरकार ने इसे मुमकिन किया। हमारा संकल्प है कि 2022 आते-आते हम किसानों की आमदनी दुगनी कर देंगे। एक देश में एक बाजार होना चाहिए। किसान कहीं भी अपना सामान बेच सकते हैं।”

इस्लामी आतंकियों का नरसंहार: 10 साल में 60000 को मार डाला, ताजा हमलों में 60 मरे, बोको हराम ने नाइजीरिया को खून से साना

पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजीरिया में इस्लामिक आतंकियों का नरसंहार जारी है। शनिवार (13 जून 2020) को बोर्नो राज्य में दो अलग-अलग स्थानों पर हमले में 20 सैनिकों सहित 40 की मौत हो गई। बीते 10 साल में 60 हजार से ज्यादा लोग इस्लामी आतंकवाद की भेंट चढ़ चुके हैं।

इंटरनेशल कमिटी ऑन नाइजीरिया (Icon) के रिसर्च के हवाले से द इंटरनेशनल सोसायटी फॉर सिविल लिबर्टीज और रूल ऑफ लॉ ने बताया है कि 2010 के बाद से आतंकवाद की वजह से नाइजीरिया में साठ हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं। 43 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या तो अकेले बोको हराम ने की है।

आतंकियों का ताजा हमला बोर्नो के मोनगुनो और नागनजई जिलों में हुआ है। द हिंदू के मुताबिक आतंकियों ने इलाके के सरकारी क्षेत्र को अपना निशाना बनाया। दो आपदा सहायता कार्यकर्ता और तीन स्थानीय नागरिकों ने रायटर को बताया कि शनिवार सुबह करीब 11 बजे आतंकवादी रॉकेट लॉन्चर सहित भारी हथियारों के साथ इलाके में आए।

उन्होंने 20 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान आतंकियों ने एक पुलिस स्टेशन और उस एरिया के संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमैनेटेरियन हब को आग के हवाले कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि आतंकी इसके बाद भी इलाके में करीब तीन घंटे तक खुले में घूमते रहे। आतंकियों की गोलीबारी में सैकड़ों आम नागरिक घायल हो गए।

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने बताया कि आतंकियों ने स्थानीय भाषा ‘होसा’ में लिखे पर्चे वितरित किए। इसमें वहाँ के निवासियों को मिलिट्री, पश्चिमी श्वेत ईसाई और अन्य नास्तिकों के साथ काम न करने की चेतावनी दी गई है।

एक अन्य आतंकियों ने नागनजई में अंजाम दिया। आतंकी मोटरसाइकिल और ट्रकों पर सवार होकर पहुँचे थे। हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए। पिछले दिनों इसी इलाके के गुबियो में आतंकवादियों ने हमला कर 69 लोगों को मार डाला था।

एक्शन में अमित शाह: दिल्ली में 6 दिन में 3-गुणा होंगे कोरोना टेस्ट, 8000 बेड के साथ मिलेंगे 500 रेलवे कोच

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को कंट्रोल में लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों के साथ हालात पर चर्चा करने के लिए रविवार (14 जून, 2020) की सुबह बैठक की।

11 बजे से गृह मंत्रालय में शुरू हुई इस बैठक में दिल्ली की मौजूदा स्थिति को लेकर करीब 1 घंटे 20 मिनट चर्चा की गई। बैठक में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सुविधाएँ, बढ़ते मरीजों के लिए बेड, कोरोना को निपटाने के लिए एहतियात कदम उठने को लेकर बात की गई।

बैठक की समाप्ति के बाद अमित शाह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली की जनता की सुरक्षा व इस संक्रमण को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में लिए गए अहम फैसले

  1. दिल्ली में बढ़ते मरीज और घटते बेड की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत 500 रेलवे कोच दिल्ली को देने का निर्णय लिया है।
  2. आइसोलेशन वार्ड में बदले गए रेलवे के 500 कोच के अंदर 8000 बेड होंगे। इसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए सभी सुविधाओं मौजूद होंगी।
  3. दिल्ली के कंटेनमेंट जोन में कॉन्‍टैक्‍ट ट्रेसिंग अच्छे से करने के लिए घर-घर जाकर हर व्यक्ति का व्यापक स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा। साथ ही इसकी रिपोर्ट 1 हफ्ते के अंदर ही आ जाएगी। जिससे संक्रमित व्यक्ति का पता जल्द लगने की वजह से संक्रमण को रोका जा सकेगा।
  4. हर व्यक्ति के स्वास्थ्य को मद्देनजर रखते हुए बेहतर मॉनिटरिंग के लिए सबके मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करवाया जाएगा।
  5. संक्रमण को रोकने के लिए अगले दो दिन में कोरोना की टेस्टिंग को बढ़ाकर दो गुना किया जाएगा और 6 दिन बाद टेस्टिंग को बढ़ाकर तीन गुना कर दिया जाएगा।
  6. केंद्र ने कोरोना के बढ़ते मामलों और हालात पर नजर रखने के लिए 5 वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली सरकार में तैनाती की भी बात कही है।
  7. सरकार ने स्काउट गाइड, एनसीसी, एनएसएस व अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं को इस महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं में वॉलंटियर के नाते जोड़ने का निर्णय लिया है।
  8. केंद्र सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के 60% कम में रेट में कोविड-19 के बेड को सरकार को देने के लिए तय किया है।
  9. कोरोना काल में मरीजों के इलाज से संबंधित आवश्यक संसाधन जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर व अन्य सभी उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार को पूर्णतः आश्वस्त किया है।
  10. कोविड-19 से मरने वालों के शवों की दुर्गति को देखते हुए अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा अवधि को कम से कम करने के लिए सरकार ने अंतिम संस्कार के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने का निर्णय भी लिया है।
  11. केंद्र व दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग, सभी सम्बंधित विभाग व एक्सपर्ट्स को आज किए गए सभी निर्णयों को अच्छे से अमल किया जाए, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
  12. दिल्ली के छोटे अस्पतालों तक कोरोना संबंधित सही जानकारी व दिशा-निर्देश देने के लिए केंद्र सरकार ने AIIMS में टेलीफोन हेल्पलाइन नंबर जारी कर वरिष्ठ डॉक्टरों की एक कमिटी बनाने का निर्णय लिया। इसका हेल्पलाइन नंबर कल जारी हो जाएगा।

गौरतलब है कि इस वक़्त दिल्ली में कोरोना वायरस की वजह से स्थिति काफी भयावह बनी हुई है। बढ़ते संक्रमितों और मौत के आँकड़ो, अस्पताल की बदतर स्थिति ने दिल्ली सरकार की हालत को खस्ता कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में अब तक संक्रमण के कुल 38,958 मालमे सामने आए हैं। इनमें 22742 एक्टिव केस है। 14945 लोग इस संक्रमण से ठीक हो कर घर जा चुके हैं। जबकि 1,271 लोगों ने इस महामारी की वजह से अपनी जान गँवा दी है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में दिल्ली तीसरे स्थान पर है।

रामचंद्र गुहा का अंधत्व: गुजरात में धन+संस्कृति का कॉम्बिनेशन, बंगाल के पास ‘ममता’ और यही इनकी संस्कृति

इतिहास ‘मरोड़’कार रामचंद्र गुहा का खुद का इतिहास सर्वविदित है। उन्होंने ट्वीट किया, “गुजरात के पास केवल पैसा है, संस्कृति नहीं, जबकि बंगाल के पास संस्कृति है!” यह कुछ अंग्रेजों की राय है और इसे लगभग आठ दशक पहले दिया गया था। इस मत का आज भी कोई महत्व नहीं है, कल भी नहीं था।

यह स्वाभाविक है कि अंग्रेजों को बंगाल-कलकत्ता का कल्चर समृद्ध लगे, क्योंकि कलकत्ता स्वयं उनके रंग में रंग चुका था। कोट-पैंट, कॉफी शॉप, सिगार, व्हिस्की और संपूर्ण अंग्रेजी कल्चर उस समय कलकत्ता का अभिन्न अंग था। गुजरात इस हद तक कभी नहीं रंगा, क्योंकि गुजरात की अपनी समृद्ध सुन्दर संस्कृति है।

भारत का नक्शा और संस्कृति

देश का नक्शा देखें तो गुजरात और बंगाल आमने-सामने की छोर पर हैं। संस्कृति और समृद्धि के मामले में भी ऐसा ही हैं। रामचंद्र गुहा झूठे हैं और उनके झूठ का सही जवाब गुजरात के मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी ने दिया है। मुझे कुछ कड़वे सच बोलने हैं। उनसे कहना है कि संस्कृति केवल साहित्य नहीं है, यह इससे कहीं अधिक है।

सुरती ऊंधियु भी एक गुजराती संस्कृति है और घी से भरपूर बाजरे का रोटला (रोटी) भी। खमण, खांडवी, गांठिया, ढोकला, मुठिया (गट्टे), पात्रा, खाखरा और थेपला भी हमारी संस्कृति हैं। हलवासन व पेड़े और सूतरफेनी हमारी संस्कृति हैं। तावो, वराड़ियुं, घूंटो और उम्बाड़ियुं, खट्टी कढ़ी, खट्टी-मीठी दाल, रजवाड़ी ढोकली, दाल-ढोकली और हांडवो भी गुजरात की संस्कृति है। गुहा को यह सब स्वादिष्ट लगे या न लगे, दुनिया को तो लगता है।

गरबा भी और गुजरात के अनेक अर्थ भी 

रास, पंचिया, मधुबंसी और सिक्स स्टेप चलती भी संस्कृति है और वड़ोदरा का डेढ़ ताली रास भी। दाहोद और छोटा उदेपुर और बनासकांठा, साबरकांठा के आदिवासी नृत्य भी गुजरात की संस्कृति हैं और पोरबंदर के मेहर समाज के रास भी।

किसी भी दो राज्यों की तुलना करने की बात नहीं है, लेकिन बंगाल में कुल जितने रंग नहीं बिखरे हैं, उतने रंग गुजरात के लोकमेलों में छलकते हैं। तरनेतर के मेले में लहराती एक छतरी के नीचे पूरा बंगाल समा सकता है। कच्छ के भूंगे भी हमारी संस्कृति हैं और गिर के नेसडा भी। गिर गाय और कांकरेज वंश भी गुजरात का कल्चर हैं, शेर, घोड़ी और कृष्णमृग भी।

गुजरात का अपना एक अनूठा संगीत है, इसके अपने गीत हैं, इन गीतों की अपनी शैली है। गुजरात के पास अखो, नरसिंह मेहता, मेघाणी, मडिया, नर्मद, बक्षी और रमेश पारेख हैं। गुजरात में मोरारीबापू और रमेश ओझा हैं। यह भी गुजरात की संस्कृति है। गुजरात में इतने सारे रंग हैं – जितने एडोब फोटोशॉप में भी नहीं, एशियन पेंट्स के ब्रोशर की तो बात ही रहने दें।

पटोला भी गुजरात की संस्कृति है और बांधणी भी। कच्छ की कढ़ाई, राजकोट का मोतीवर्क और काठियावाड़ की चनिया चोली भी गुजरात का कल्चर है। दीवार पर लटके हुए पहिए, सितारे से सजे रंग-बिरंगे परिधान और कच्छी शॉल भी हमारी संस्कृति है।

गुजरात में उत्तरायण, पतंगें सुरति और मांजा

गुजरात में छह दर्जन मेले हैं और विश्व का सबसे लंबा, सबसे बड़ा नृत्य उत्सव नवरात्रि है। अम्बाजी भी गुजरात की संस्कृति है, रानी की वाव, सोमनाथ, सूर्यमंदिर और द्वारका का जगत मंदिर भी। गुजरात भर में फैले दो दर्जन अभ्यारण्यों के बीच बसे आदिवासी भी। गुजरात के पास महात्मा गाँधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल और मुंशी भी हैं।

संस्कृति क्या है?

संस्कृति क्या है? केवल साहित्य? नहीं। बेशक, बंगाल के पास उत्कृष्ट साहित्यकारों एवं रचनाकारों की एक सेना है। लेकिन, क्या गुजरात के लिए उसी स्तर के रचनाकारों की संख्या होना आवश्यक है? नहीं, बिलकुल आवश्यक नहीं है। साहित्य संस्कृति का एक हिस्सा है, न कि समग्र संस्कृति। गुजरात पर यह आरोप भी लगाया गया कि वहाँ पैसा है! इसे आरोप माना जाए या प्रशंसा?

आज गुजरात देश की जीडीपी में 20% का योगदान देता है। देश की अर्थव्यवस्था की धुरी गुजरात है। फार्मा, खनिज, ऑटो पार्ट्स, डायमंड, कृषि, ऑटोमोबाइल, केमिकल के क्षेत्र में गुजरात का डंका बजता है। यह भी गुजरात की संस्कृति है।

आपको पैसे से इतनी घृणा क्यों है? आपने टैगोर, बंदोपाध्याय और चट्टोपाध्याय को जन्म दिया, इसके लिए आपको सादर नमन। लेकिन हमारे धीरजलाल अंबानी को भी इक्कीस तोपों की सलामी दी जानी चाहिए। हाँ! करसनभाई पटेल, धीरूभाई अंबानी, गौतम अदाणी, पंकज पटेल भी गुजरात की संस्कृति का हिस्सा हैं।

वांसदा नेशनल पार्क के बीच में रहने वाले आदिवासी भी गुजरात की संस्कृति हैं, मालधारी भी, जो गिर के नेस में साँस लेते हैं और मूलभूत सुविधाओं से भरपूर अहमदाबाद, सूरत में रहने वाले गुजराती भी यहाँ की संस्कृति हैं। गुजरात की संस्कृति भी देश में सबसे अच्छा राजमार्ग, सबसे अच्छी कनेक्टिविटी और विश्व में सबसे बड़े नहर नेटवर्क के साथ सरदार सरोवर जल योजना है। साथ ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी।

रामचंद्र गुहा को एक बार ‘गुजरात दर्शन’ के टूर पर भेजने की आवश्यकता है। लौटने के बाद वे ऐसा ट्वीट कभी नहीं करेंगे। 

और हाँ! बंगाल के पास ‘ममता दीदी’ हैं, यही इसकी संस्कृति है, गुजरात के पास नरेंद्र दामोदरदास मोदी हैं, यह भी गुजरात की संस्कृति है। गुजरात को अपनी पहचान पर गर्व है। इसने कभी भी प्रांतवाद को नहीं अपनाया, नक्सलवाद यहाँ बिलकुल नहीं है और इसने दुनिया भर की विनाशकारी वाम विचारधारा को भी आँगन तक में टिकने नहीं दिया है। यह भी गुजराती संस्कृति है।

लेखक: किन्नर आचार्य