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जामिया फिर बदरंग: दीवारों पर ‘फ्री सफूरा’, ‘फ्री शरजील’ के नारे, हाल ही में कराई गई थी सफेदी

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों को शुक्रवार (12, जून 2020) को शरारती तत्वों ने बदरंग कर दिया। दीवारों पर जगह-जगह ‘फ्री सफूरा’, ‘फ्री शरजील’ का नारा लिख दिया। हाल ही में इन दीवारों की सफेदी कराई गई थी।

आपको बता दें कि जामिया की छात्रा सफूरा जरगर कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की कार्यकर्ता रही है। उसे दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप है।

सफूरा ज़रगर ने दिल्ली दंगों के दौरान जाफराबाद मेट्रो के पास मेन रोड को जाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस का कहना है कि उसने महिलाओं और बच्चों को भड़का कर हिंसा करवाया था। सफूरा ज़रगर एक वीडियो में “दिल्ली तेरे खून से, इंकलाब आएगा” नारा लगाती भी देखी गई थी।

जामिया मिलिया इस्लामिया में हो रहे सीएए प्रदर्शनों में कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। वहाँ गेस्ट स्पीकर्स की व्यवस्था करने में सफूरा ज़रगर का अहम किरदार था। शशि थरूर से लेकर सलमान खुर्शीद तक जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं ने जामिया में हो रहे प्रदर्शनों में शिरकत की थी।

सफूरा ज़रगर इस वक़्त गर्भवती है और कई बार जमानत के लिए अर्जी लगा चुकी है। मगर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसकी जमानत याचिका हर बार ख़ारिज कर दी। उसके खिलाफ़ गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वहीं शरजील इमाम को भी भड़काऊ भाषण के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 14 दिसंबर को शरजील ने सीएए के विरोध में भीड़ को भड़काते हुए उत्तर भारत के सभी शहरों को तब तक के लिए बंद करने का आह्वान किया था और कहा था कि जब तक सरकार सीएए/एनआरसी को वापस नहीं ले लेती।

उसके भाषण के बाद न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में जमकर हिंसा हुई थी। जहाँ दर्जनों लोग घायल हुए थे। दूसरी ओर जेएनयू के छात्रों को सम्बोधित करते हुए समुदाय विशेष को निर्देशित करते हुए शरजील इमाम ने कहा था, “लोगों को पूरी दिल्ली में चक्का-जाम करना चाहिए। देश के जिस भी शहर में मुस्लिम हैं, वहाँ चक्का-जाम किया जाना चाहिए। मुस्लिमों को देश के 500 शहरों में चक्का-जाम किया जाना चाहिए।”

उसने लोगों को भड़काते हुए कहा था कि क्या मुस्लिमों की इतनी आबादी और हैसियत भी नहीं कि वो पूरे देश में चक्का-जाम कर सकें? हिंदुस्तान का अधिकतर मुस्लिम अपने शहर को बंद कर सकता है। उसने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि जो तुम्हें अपने घर से निकाले, उसे अपने घर से निकाल दो।

इससे पहले भी फरवरी में इमाम के समर्थकों ने जामिया की दीवारों पर लिख कर उसकी रिहाई की माँग की थी।

हनी-ट्रैपिंग मॉडल पर काम करती थी तानिया परवीन, अधिकारियों-नेताओं से सूचना निकाल भेजती थी पाकिस्तान

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को 22 वर्षीय तानिया परवीन की कस्टडी मिली है। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे मार्च में पश्चिम बंगाल के बादुरिया से लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

तानिया परवीन अब 10 दिनों के लिए एनआईए के हिरासत में है। यहाँ उससे आतंकवाद विरोधी एजेंसी की टीम कोलकाता ऑफिस में आगे की पूछताछ करेगी। तानिया कई सारे सिम कार्ड और व्हाट्सएप्प जैसे सोशल मीडिया एप्प के जरिए पाकिस्तानियों के संपर्क में थी।

ऐसा माना जा रहा है कि उससे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी काफी जानकारी मिल सकती है। तानिया परवीन को 20 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जाता है कि तानिया 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर भारत आई थी।

तानिया ने कोलकाता के कॉलेज से एमए की पढ़ाई की है। वह सोशल मीडिया के जरिए आतंकी संगठनों से जुड़ी थी और लश्कर के लिए युवाओं की भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी। कई बड़े अधिकारियों व नेताओं तक उसकी पहुँच होने की बात कही जाती है। वह पाकिस्तान के लोगों से भी अक्सर बात करती थी।

तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले थे। उसके व्हाट्सप्प ग्रुप के जरिए आतंकी ट्रेनिंग और उनके साहित्य से जुड़ी कई चीजें बरामद की गई है। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला है कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी।

वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण भी दे चुकी है।

गिरफ़्तारी से पहले वो बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों को एकजुट कर बड़े हमले की साजिश रचने में लगी हुई थी। उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपए का लेन-देन हो रहा था, इसके बाद से ही परवीन की गतिविधियों पर संदेह होने लगा था।

उल्लेखनीय है कि तानिया का मुख्य लक्ष्य इस्लामिक राज्य की स्थापना करना था। इसके लिए उसे खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरणा मिली थी। वो उसी तर्ज पर काम करते हुए एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहती थी। पाकिस्तान से उसके आकाओं ने उसे कई भड़काऊ पुस्तकें भेजी थीं, जिसे पढ़ कर उसकी सोच और भी कट्टरवादी हो गई थी।

तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। वो आतंकी संगठन के लिए मोटी रकम भी जुटा रही थी।

3 साल से लश्कर से जुड़ी तानिया को ‘जिहाद’ का प्रशिक्षण इन्हीं किताबों के जरिए मिला। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले के बाद उसकी फोटो शेयर कर के तानिया ने आतंकियों की प्रशंसा भी की थी। तानिया अक्सर मदरसों का दौरा करती थी और वहाँ भड़काऊ भाषण देकर लश्कर के लिए लोग जुटाती थी।

शराब पीना, चोरी व छेड़खानी… कृष्ण, उनके वंशज और बलराम पर मुरारी बापू के बोल: कोटा में FIR दर्ज

भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम को लेकर कथावाचक मुरारी बापू द्वारा की गई अनर्गल टिप्पणी से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस मामले में अब कोटा के रंगबाड़ी निवासी महावीर यादव ने महावीर नगर थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

एफआईआर दर्ज कराने वाले महावीर यादव राजस्थान युवा यादव महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उनका आरोप है कि मुरारी बापू ने ऐसी बातें करके हिंदुओ की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

कथित बयान की वीडियो देखते हुए महावीर नगर पुलिस स्टेशन में इस मामले में मुरारी बापू के खिलाफ धारा 295, 298, 153ए, 511, 66, 67 के तहत केस दर्ज किया गया है।

आख़िर क्या था मामला

दरअसल कुछ समय पहले मिर्जापुर स्थित आदि शक्ति पीठ में कथावाचक मुरारी बापू ने अपनी रामकथा के दौरान भगवान कृष्ण के बारे में अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसका एक चैनल के माध्यम से प्रसारण भी किया गया था। यह वीडियो अभी हाल में सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के बीच वायरल हो रहा है।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह मुरारी बापू ने भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कहा कि वो धर्म की स्थापना करने में पूरी तरह फेल हो गए थे। बलराम के बारे में उन्होंने कहा कि वो चौबीस घंटे मदिरा के नशे में रहते थे। मुरारी बापू सिर्फ इतने पर नहीं रुके। उन्होंने कृष्ण के पुत्र और पौत्रों पर भी शराब के नशे में मार्गों पर छेड़छाड़ करने की अभद्र टिप्पणी भी की। ऐसे घिनौने आरोप लगा कर मुरारी बापू ने हिंदू धर्म और भगवान कृष्ण को पूजने वालों की भावनाओं को आहत किया।

आपत्तिजनक बयान पर एफआईआर की माँग

मुरारी बापू द्वारा भगवान श्री कृष्ण और उनके परिवार पर अभद्र टिप्पणी करने से आक्रोषित अलग-अलग जगह से लोग वीडियो की सत्यता की जाँच कर मुरारी बापू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इंदौर में भारतीय यादव महासभा युवा ईकाई के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन यादव ने डीजीपी को लिखित शिकायत कर मुरारी बापू द्वारा गलत और आपत्तिजनक टिप्पणी पर सख़्त कार्रवाई की माँग की है।

जयपुर कालवाड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराने वाले सौरभ राघवेंद्र आचार्य महाराज खुद को रघुनाथ धाम रामानुज आश्रम का पीठाधीश्वर बताते हैं। परिवादी सौरभ राघवेंद्र आचार्य सोमवार को प्रेस वार्ता के जरिए भी अपनी बात मीडिया के सामने रखेंगे।

वहीं टप्पा तहसील शिवपुर में जिला यादव महासभा होशंगाबाद के जिला ग्रामीण अध्यक्ष राजेश यादव द्वारा, मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर इलाके के निवासी जवाहरलाल राय, राष्ट्रीय यादव सेना हरदा, जैसे कई अन्य लोगों ने मुरारी बापू की विवादित टिप्पणी पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए एफआईआर दर्ज करवाई है।

मुरारी बापू पहले भी कर चुके है कई विवादित टिप्पणियाँ

इससे पहले भी मुरारी बापू अपने अली मौला के कारण सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहे थे। मुरारी बापू ने व्‍यास पीठ में कहा था, “त्रिपुंडधारियों और बाबाओं को उमर खैय्याम और रूमी पढ़ना चाहिए, तब पता लगेगा बंदगी क्या है!” इसके बाद उन्हें संत समाज का गुस्‍सा झेलना पड़ा था। विवाद में आने के बाद उन्होंने स्वयं का बचाव करते हुए, दूसरे धर्माचार्यों पर ताने मारने और उन्हें अज्ञानी कहने लगे थे।

अटलांटा में अश्वेत की लाश गिरी: गोली मारने वाला पुलिसकर्मी फायर, ‘गोरे’ पुलिस चीफ का इस्तीफा

अमेरिकी प्रान्त जॉर्जिया की राजधानी अटलांटा में पुलिस शूटआउट के दौरान एक अश्वेत व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद वहाँ के पुलिस चीफ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। घटना एक फ़ास्ट फ़ूड रेस्तरां के पास हुई थी। शनिवार (जून 13, 2020) को अटलांटा की मेयर केइशा लांस बॉटम्स ने पुलिस प्रमुख के इस्तीफे की जानकारी दी। घटना में कुछ लोग घायल भी हुए थे।

अटलांटा पुलिस के प्रवक्ता जॉन सैफी ने रविवार को बताया कि जिस पुलिस अधिकारी ने गोली चलाई थी, उसे फायर कर दिया गया है। शहर में कई लोग एक और अश्वेत व्यक्ति की मौत होने के बाद रोष में हैं और आशंका जताई जा रही है कि ये आंदोलन अभी और भी हिंसक रूप ले लेगा। कहा जा रहा है कि शनिवार की रात प्रदर्शनकारियों ने एक रेस्तरां को आग के हवाले कर दिया था।

इसके बाद उन्हें तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस और फ़्लैश ग्रेनेड का प्रयोग किया गया था। मारे गए 27 वर्षीय अश्वेत व्यक्ति रिशर्ड ब्रुक्स जाँच के दौरान नशे में पाया गया था। उसने एक बन्दूक लेकर भागने की चेष्टा की थी। सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि उसने भागते हुए उस पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई थी, जिसकी गोली से वह मारा गया। लेकिन, इसे शूटिंग के लिए जस्टिफिकेशन नहीं माना गया।

बॉटम्स ने कहा कि आप क्या कर सकते हैं और आपने क्या किया, इसके बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। मेयर ने आगे कहा कि वो ऐसा नहीं सोचती हैं कि इतने बड़े स्तर पर बलप्रयोग करने की आवश्यकता थी। सार्जेंट सैफी ने उस पुलिस अधिकारी की पहचान की, जिसने गोली चलाई थी। उक्त अधिकारी गैरेट रॉल्फ ने अक्टूबर 2013 में पुलिस सर्विस ज्वाइन की थी। पुलिस के ख़िलाफ़ हिंसा की बढ़ती वारदातों के बीच पुलिस ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है।

अमेरिकी मीडिया का कहना है कि इससे पहले पुलिस हूटिंग के बाद इस तरह की घटनाएँ नहीं होती थीं और न ही ऐसी प्रतिक्रियाएँ आती थीं। पुलिस द्वारा डैमेज कंट्रोल की प्रक्रिया को प्रदर्शनकारियों का डर भी बताया जा रहा है, जो ख़ासे उग्र हैं। कहा जा रहा है कि इससे बचने के लिए पुलिस प्रमुख का इस्तीफा ले लिया गया और साथ ही गोली चलाने वाले अधिकारी को फायर कर दिया गया।

पुलिस प्रमुख एरिका शेल्डस भी श्वेत अधिकारी ही हैं, जिन्हें हाल में में हुई पुलिसिया उठापटक का नया शिकार बताया जा रहा है। अमेरिका में दंगों के बीच कई पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए हैं। पोर्टलैंड के पुलिस प्रमुख ने तो यहाँ तक कह दिया था कि वो अपने बदले किसी अश्वेत अधिकारी को बैठाना चाहते हैं। अटलांटा में एक पुलिस एनकाउंटर का वीडियो वायरल हुआ, पुलिस पर छात्रों को प्रताड़ित करने के आरोप लगे और उनपर अश्वेतों के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया गया।

अजय पंडिता की हत्या के विरोध में दुनिया भर के 100 शहरों में प्रदर्शन: कपिल मिश्रा का आह्वान

जम्मू कश्मीर में सरपंच अजय पंडिता की आतंकियों द्वारा की गई हत्या के बाद दुनिया भर में इसके ख़िलाफ़ विरोध शुरू हो गया है। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आतंकियों के खिलाफ एकजुटता दिखाने और आवाज़ उठाने की अपील की है, जिसके तहत लोगों को अपने घर या पड़ोस से ही सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखते हुए विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई है। प्लाकार्ड और बैनर के जरिए लोग अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

प्लाकार्ड और पोस्टरों पर लोग स्लोगन्स या अपने मन की बात लिख कर अजय पंडिता की हत्या के विरोध में आतंकियों के खिलाफ आवाज़ उठाएँगे। साथ ही फोटो और वीडियो के जरिए रोष प्रकट करेंगे। फिर इसे सोशल मीडिया पर ‘हिन्दू यूनाइटेड अगेंस्ट टेरर’ हैशटैग के साथ पोस्ट किया जाएगा। साथ में लोगों से अपने शहर और क्षेत्र का नाम मेंशन करने को कहा गया है। अब तक कई देशों से लोगों ने इस प्रोटेस्ट में भाग लिया है।

रविवार (जून 14, 2020) को दुनिया भर के कई हिस्सों से लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसे कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक विरोध प्रदर्शन नाम दिया गया है। लोगों ने कहा है कि ये आतंक के खिलाफ हिन्दू एकता का परिचायक होगा। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने वीडियो सन्देश में कहा है कि इस अभियान का मकसद जम्मू कश्मीर व भारत के अन्य हिस्सों में हिन्दुओं की लगातार हो रही हत्या की वारदातों को दुनिया के सामने ले जाना है।

दुनिया भर के क़रीब 100 शहरों से इस वैश्विक अभियान में भागीदारी की तैयारी की गई है। ऑस्ट्रेलिया स्थित पर्थ, सिडनी और ब्रिस्बेन में भी विरोध प्रदर्शन होंगे। इसके बाद इंडोनेशिया, सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड से लोग अपना रोष प्रकट करेंगे। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका है। कपिल मिश्रा ने बताया कि दोपहर होते-होते भारत, अफ्रीका, ब्रिटेन, यूरोप और रात होते-होते अमेरिका, कनाडा सहित सारी दुनिया में यह कैंपेन चलेगा।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में कश्मीरी पंडित अजय पंडिता की हत्या के खिलाफ पूरी दुनिया में ये प्रोटेस्ट किया जा रहा हैं। भारत के 50 से भी अधिक शहरों में इस कैम्पेन को चलाया जा रहा है। ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहा है। साथ ही ‘जेके नाउ’ भी इससे जुड़ा हुआ है। भारत के कई संगठनों और दुनिया भर के कई प्रवासी भारतीय संगठनों ने इस अभियान में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित की है।

आतंक के खिलाफ हिन्दू एकता का सन्देश देने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई हिंदूवादी संगठनों ने भी अपील की थी। कपिल मिश्रा दुनिया के कोने-कोने से आई तस्वीरों को अपने ट्विटर टाइमलाइन पर रीट्वीट कर रहे हैं, ताकि लोगों को पता चलता रहे कि कहाँ-कहाँ से अजय पंडिता की हत्या के खिलाफ आवाज़ उठ रही है। उन्होंने दुनिया के कई शहरों से तस्वीरें शेयर की, जिनमें महिलाओं और बुजुर्गों को भी देखा जा सकता है।

कपिल मिश्रा ने कहा है कि हिन्दुओं की आवाज़ एक साथ पूरी दुनिया में गूँजनी चाहिए। हालाँकि उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों के कोरोना दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं करने की सलाह भी दी है। लोगों को अपने-अपने घरों और मोहल्लों से वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को कहा गया है। साथ ही लोगों से अपने परिचितों को भी ‘हिन्दू यूनाइटेड अगेंस्ट टेरर’ के पक्ष में आवाज़ उठाने की अपील की गई है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों ने सोमवार (जून 8, 2020) को कॉन्ग्रेस के हिंदू सरपंच अजय पंडिता (भारती) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अजय पंडिता की हत्या उस वक्त की गई, जब वो बागान में गए हुए थे। उनके परिवार में माँ-पिता के अलावा पत्नी और दो बेटियाँ हैं। आतंकियों ने पीछे से उन पर वार कर मौत की नींद सुला दी। पूरे कश्मीरी पंडित समुदाय और हिन्दुओं में इसके बाद गुस्सा व्याप्त हो गया।

ख़बर आई थी कि अब तक करीब 50 पंच-सरपंच घाटी छोड़कर जम्मू आ चुके हैं। यह दावा ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने किया था। अनिल शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया था कि अजय पंडिता की मौत के बाद उन्हें कई सरपंचों के कॉल आ रहे हैं। उनमें काफी डर है। अनिल ने कहा था कि अब तक उनके 19 साथी इस बर्बरता का शिकार हो चुके हैं।

बारूद और खून की गंध से अपना मनोरंजन करने वाला हत्यारा: चे ग्वेरा, जिसने नेहरू को गिफ्ट किया था सिगार

ला कबाना जेल, क्यूबा। 14 साल का एक बच्चा कराहते हुए लाया जा रहा था। सैनिकों ने उसे पकड़ के जेल में ठूँस दिया। उसकी ग़लती? उसने क्यूबा के सैनिकों द्वारा फायरिंग में मारे गए अपने पिता को बचाने की कोशिश की थी। थोड़ी देर बाद वहाँ एक व्यक्ति आता है। उसके सामने लड़के को लाया गया। उसने उसे घुटनों पर झुकने का आदेश दिया। इसके बाद उसकी गर्दन पर बंदूक है और लड़के की लाश वहाँ लुढ़क गई। इसी व्यक्ति का नाम था- चे ग्वेरा। क्यूबा का चे ग्वेरा।

अर्जेंटीना में जन्मे वामपंथी चे ग्वेरा को आज भी मार्क्सवादी एक नायक की तरह पेश करते हैं। उसे क्रांति का अग्रदूत कहने से लेकर भारतीय क्रांतिकारियों तक से उसकी तुलना करने तक, वामपंथी उसकी तारीफ में कसीदें पढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते। चे ग्वेरा को क्यूबा में हुई क्रांति का सबसे बड़ा चेहरा बताया जाता है। कहा जाता है कि क्यूबा में अमेरिका के कठपुलती शासक को हटाने के लिए उसने फिदेल कास्त्रो के साथ मिल कर संघर्ष किया था।

ग्वेरा को अधिकतर लोगों ने मिलिट्री यूनिफॉर्म में देखा है और वो लम्बे बूट पहना करता था। जून 1959 में वो भारत यात्रा पर आया था। इस दौरान उसकी मुलाक़ात भारत के तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू से हुई, जिन्हें उसने फिदेल कास्त्रो की तरफ से सिगार का डब्बा उपहार स्वरूप दिया था। अपनी भारत यात्रा के दौरान जब किसी ने उसे कम्युनिस्ट कहा तो उसने कहा कि वो सोशलिस्ट हैं। उसने योग पर चर्चा किया, शीर्षासन भी किया।

ये तो था चे ग्वेरा का परिचय और उसके भारत यात्रा की बात। वही भारत यात्रा, जिसके क्रम में वो कोलकाता भी गया था और रास्ते में उसने कई गायों के फोटो खींचे थे। लेकिन, क्या वो सच में उतना बड़ा क्रन्तिकारी, महानायक या फिर ग़रीबों का मसीहा था- जिस तरह से वामपंथी उसे पेश करते आए हैं? इसका सीधा जवाब है- नहीं। उसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। दूसरे देशों के ग़रीबों को दिवास्वप्न दिखाने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया।

उसे एक तरह से कास्त्रो का एक्सेकशनेर-इन-चीफ कहा जाता है, जो लोगों को मारने में विश्वास रखता था। संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में भी उसने स्वीकार किया था कि हाँ, वो सज़ा-ए-मौत देता है और क्रांति के दुश्मनों के लिए ये ज़रूरी भी है। उस समय जब वह अमेरिका गया था तो लोग उसके विरोध में खड़े थे। एक महिला तो चाकू लेकर ‘हत्यारा’ चिल्लाते हुए उसकी तरफ़ दौड़ी भी थी, जिसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था।

दरअसल, ग्वेरा के मास्क के पीछे एक हत्यारा ही छिपा था। बोलिवियन जंगल में उसकी मौत होने के 4 दशक बाद ठीक से उसके कारनामों की परत खुली। वो विरोधियों को ‘देशद्रोही’ कहता था, उन्हें ‘कीड़ा’ कहा करता था, फिदेल कास्त्रो को सत्ता देने में और फिर उसे गतिमान रखने में उसके कितनी हत्याएँ की, इसकी कोई गिनती नहीं है। ‘The Hidden Face of Che’ के लेखक जैकबो मशोबर कहते हैं कि उसे एक ऐसा नायक बना दिया गया, जिसे कोई छू भी नहीं सकता और उसके बचाव के लिए पूरी फ़ौज आज भी तैयार रहती है।

2004 में उस पर बनी फिल्म ‘द मोटरसाइकिल डायरीज’ में उसके पीछे के जीवन का महिमामंडन किया गया था, जब वह मेडिकल स्टूडेंट था। इसके बाद उसके चाहने वालों की संख्या और बढ़ गई। टीशर्ट से लेकर बिकनी तक पर उसकी तस्वीरें उकेर कर उसे एक आइकॉन की तरह पेश किया गया। ग्वेरा अपनी डायरी लिखने के लिए जाना जाता था लेकिन उसने अपनी हत्याओं पर शायद ही कहीं ईमानदारी से कुछ लिखा हो।

एक किसान और मिलिट्री नेता एउटैमिओ ग्वेरा को उसने कैसे मारा, ये उसने लिख रखा है। उसकी भाषा देखिए, जो किसी ऐसे साइको की लगती है, जिसे हत्या से प्यार था। वो लिखता है, “मैंने अपने पॉइंट 32 कैलिबर बन्दूक से उसके दिमाग के दाहिने हिस्से पर गोली मारी, जो सीधे उसके दिमाग के बाएँ हिस्से से बाहर निकली। वो कुछ देर कराहता रहा, फिर उसकी मौत हो गई।” ऐसे-ऐसे कितने ही ‘देशद्रोहियों’ को उसने ‘न्याय’ दिया है। यही तरीका था उसका।

कोर्ट, सुनवाई, जाँच- ये सब क्या होता है? एक अन्य किसान अरिस्टीडीओ के बारे में तो वो लिखता है कि उसे मारने से पहले उसने थोड़ी देर जाँच-पड़ताल की और फिर उसकी हत्या कर दी। बकौल ग्वेरा, देशद्रोह तो दूर की बात, गद्दारी का संदेह या आरोप भी बर्दाश्त के लायक नहीं है। क्यूबन सेन्ट्रल बैंक का चेयरमैन ग्वेरा सिगार के शौक के लिए जाना जाता था और बैंक के नोटों पर अपना हस्ताक्षर करता था।

वह जेल में एक बार में कई क़ैदियों को मार डाला करता था या मरवा देता था। उसकी ही टीम का एक सैनिक कहता है कि ग्वेरा अपने हाथ में सिगार लेकर एक दीवार के ऊपर चढ़ जाया करता था, फिर वहीं से सज़ा-ए-मौत की प्रकिया को मजे लेते हुए देखा करता था। एक समय तो उसने कास्त्रो काल के 6 महीने के भीतर 180 कैदियों को मौत के घाट उतार दिया था। एक वकील ने बताया था कि ग्वेरा सुनवाई की बातों को नकारते हुए कहता था कि चीजों को लम्बा मत खींचों क्योंकि हम ‘हत्यारों और अपराधियों’ को सुन रहे हैं, ये क्रांति है।

तभी तो अमेरिका द्वारा ट्रेंड किए गए बोलिवियन सेना के जवानों ने जब उसे खदेड़ा था तो उसने गोली न चलाने की गुहार लगाते हुए कहा था कि वो चे ग्वेरा है और उसे मारने की बजाए ज़िंदा पकड़ने में फायदा है। ज़िंदगी भर हत्या का साम्राज्य चलाने वाले ग्वेरा के पैर में गोली क्या लगी, वो जीवन की गुहार लगाने लगा। अमेरिका तो उसे ज़िंदा ही चाहता था लेकिन बोलिविया को लगता था कि सुनवाई होगी तो उसे और सहानुभूति मिलेगी।

मिट्टी से लथपथ ग्वेरा को वहीं मार गिराया गया। जब वामपंथी आज उसका महिमामंडन करते हैं तो उसके द्वारा अपने ही देश के लोगों के बहाए गए ख़ून के बारे में बात क्यों नहीं करते? ग्वेरा कहता था कि पकड़े गए दुश्मन को हमेशा महसूस होना चाहिए कि उसकी औकात एक जानवर से ज्यादा कुछ नहीं है और उसे मार डाला जाना चाहिए, बिना देर किए। ला कबाना जेल में तो जेलर, जज और जूरी- सब वही था।

सही आँकड़े तो इतिहास के पन्नों में दब से गए लेकिन अकेले उस जेल में उसने 500 को मौत के घाट उतारा था। वो कहता था कि बन्दूक की बारूद और ख़ून की गंध से उसके नाक में चंचल सी मच जाती है। स्पष्ट है, हत्या उसके लिए मनोरंजन था, मज़बूरी नहीं। क्या पत्रकार, क्या व्यापारी और क्या किसान, जो उससे सहमत नहीं होते वो सभी मारे जाते। और हाँ, वो उतना बड़ा गुरिल्ला वॉरियर भी नहीं था क्योंकि क्यूबा के बाद हर जगह उसके दाँव फेल ही हुए।

कोरोना की आड़ में विस्तार कर रहे इस्लामी आतंकी संगठन, लॉकडाउन का फायदा उठा कर रची जा रही साजिश

मजहबी कट्टरता पर नज़र रखने वाले संगठनों ने आशंका जताई है कि बोको हराम जैसे आतंकी संगठन कोरोना वायरस आपदा की आड़ में अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। साथ ही 2014 में सीरिया और इराक में कत्लेआम मचाने वाला दाएश भी कोरोना की आड़ में अपने संगठन का विस्तार कर रहा है। वहाँ भी नॉन-मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। इन हमलों को नरसंहार की श्रेणी में रखा जा सकता है।

फिलहाल देश-दुनिया लॉकडाउन से उबरने की कोशिश में लगी है और लोग चहारदीवारी के भीतर बंद रह कर उकता गए हैं। धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य बनाने के लिए सभी प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसी आपदा की स्थिति में भी आतंकी संगठनों को चैन नहीं है और वो अपना विस्तार करने में लगातार लगे हुए हैं। बोको हराम और दाएश जैसे आतंकी संगठनों ने कोरोना को अपने लिए एक मौका के रूप में देखा है।

बोको हराम के सबसे बड़े सरगना अबूबकर शेकाउ ने हाल ही में बयान दिया था कि कोविड-19 या कोरोना वायरस संक्रमण आपदा शैतानों द्वारा लाई गई है और इस वायरस की काट के लिए एक ही एंटी-वायरस है और वो है इस्लाम। कई लोग कह रहे हैं कि कोरोना आपदा के बीच दुनिया के सभी देशों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में ढील नहीं देनी चाहिए, नहीं तो ‘न्यू ऑर्डर वर्ल्ड’ में इससे निपटने के लिए कोई रणनीति नहीं होगी।

आतंकी संगठन बोको हराम ख़ुद को एक जिहादी संगठन बताता है। इसके बारे में पहली बार 2003 में चर्चा हुई थी। उसके द्वारा किए गए अपराधों में कुछ भी बाकी नहीं रहा है और इसके धीरे-धीरे अपना ख़ासा प्रसार किया है। कहने को तो ये नॉर्थ-ईस्ट नाइजीरिया में आधारित है लेकिन इसने आसपास के सभी पड़ोसी देशों को अपने आतंक से हलकान कर रखा है। एक बात जानने लायक है कि इसके आतंकी हमलों के पीछे इनका मकसद क्या होता है।

जैसे, जो भी पश्चिमी विचारधारा का समर्थन करते पाए जाते हैं या फिर बोको हराम की आलोचना करते हैं, इसके आतंकी उन लोगों के दरवाजे पर दस्तक देने में देर नहीं करते। ये ज्यादातर ईसाइयों को निशाना बनाता है। बताया जाता है कि इसके पीछे उन्हें काफिर मानने वाली सोच है क्योंकि ईसाई अल्लाह को नहीं मानते। महिलाओं और बच्चों पर हमला करना इसका ट्रेंड रहा है। महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण, उनसे जबरन मजदूरी करवाना और उनका बलात्कार करना इसके लिए आम बात है।

‘इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP)’ भी इससे सम्बद्ध आतंकी संगठन ही है। ये बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, नाइजर और नाइजीरिया में आतंकी हमले करता है। ज्यादातर हमले नॉन-मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर होते हैं। मजहबी अत्याचार पर नज़र रखने वाले संगठन ‘ओपन डोर्स’ ने बताया है कि बोको हराम अपने संगठन विस्तार के लिए बेचैन है। इसने मार्च 2020 में चाड में हमला बोल कर 98 सैनिकों को मार डाला।

अफ्रीका के सब-सहारा क्षेत्रों में ये अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। वहीं अगर दाएश की बात करें तो उसके अपराधों में हजारों लोगों को मार डालना, महिलाओं और लड़कियों को यौन दासता के लिए मजबूर करना और लड़कों को जबरदस्ती अपने संगठन में भर्ती करना शामिल है। 6 साल पहले किए गए अपराधों के कई पीड़ित अभी तक मिसिंग हैं। अल्पसंख्यक समुदायों की जनसंख्या वहाँ आधी रह गई है। जो बचे हैं, वो डर के जी रहे हैं।

हालाँकि, दाएश के ख़िलाफ़ सफलता जरूर मिली है लेकिन अमेरिका का कहना है कि युद्ध अभी ख़त्म नहीं हुआ है। हाल ही में उसने इराक में कुछ सैनिकों को मार डाला था। विशेषज्ञों का कहना है कि दाएश भी इराक के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। इसने अपने आतंकियों को पश्चिमी देशों और उनके लोगों पर हमले करने को कहा है। पश्चिम की कमजोरियों का फायदा उठाया जा रहा है क्योंकि वो फ़िलहाल कोरोना से निपटने में व्यस्त हैं।

अगर भारत की बात करें तो यहाँ भी जम्मू कश्मीर में आतंकियों की गतिविधि बढ़ गई है। हाल ही में घाटी में सरपंच अजय भारती पंडिता की हत्या कर दी गई। सुरक्षा बलों ने 2 सप्ताह में 22 आतंकियों को मार गिराया है, जिनमें से 6 बड़े सरगना थे। इससे पता चलता है कि यहाँ भी वो कोरोना की आड़ में सक्रियता बढ़ा रहे हैं लेकिन सेना पहले से सख्त थी।

पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ FIR: छुट्टी के दिन सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट, फेक न्यूज फैलाने का है आरोप

यौन शोषण आरोपित पत्रकार विनोद दुआ ने सुप्रीम कोर्ट में अपने ख़िलाफ़ हुई एफआईआर (FIR) को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। अब जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता में एक पीठ इस पर सुनवाई करेगी। सुनवाई के लिए रविवार (जून 14, 2020) का दिन मुक़र्रर किया गया है। विनोद दुआ के ख़िलाफ़ कई एफआईआर (FIR) हैं, जिन्हें रद्द करने के लिए उन्होंने गुहार लगाई थी।

विनोद दुआ ने अपनी याचिका में शिमला में हुए एफआईआर (FIR) को मुख्य मुद्दा बनाया है। शनिवार को 10.47 बजे उन्होंने याचिका दायर की, जिसे उसी दिन दोपहर 2.48 बजे सुनवाई हेतु रजिस्टर कर लिया गया। इसके अगले ही दिन सुनवाई की तारीख़ दे दी गई। सुनवाई करने वाली पीठ में मोहन एम शान्तनागौडर और जस्टिस विनीत सरन भी शामिल होंगे। विनोद दुआ पर आरोप है कि उन्होंने फेक न्यूज़ फैलाया।

साथ ही उन पर अपने यूट्यूब शो ‘द विनोद दुआ शो’ में शांति भंग करने और सांप्रदायिक तनाव को न्योता देने जैसे बयान देने का आरोप है। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत लिबर्टी के लिए याचिका में गुहार लगाई है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर की गई एक एफआईआर (FIR) पर रोक लगा दी थी और जाँच रोक दी थी। दुआ ने दावा किया था कि हिमाचल पुलिस ने उनके घर आकर कुमारसैन पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाने को कहा था।

विनोद दुआ के खिलाफ हुई एफआईआर (FIR) की एडिटर्स गिल्ड ने भी निंदा की थी। एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष शेखर गुप्ता हैं, जिन पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। पत्रकार सुधीर चौधरी ने एडिटर्स गिल्ड को इसके बाद मजाक करार दिया था। गिल्ड ने पश्चिम बंगाल में पत्रकारों के उत्पीड़न पर चुप्पी साध रखी थी। अर्नब गोस्वामी मामले में भी एडिटर्स गिल्ड ने कुछ नहीं कहा था। अर्नब ने इससे इस्तीफे का ऐलान भी किया था।

जहाँ तक ‘मी टू’ के आरोपित रह चुके विनोद दुआ की बात है, उन्होंने सोमवार (जून 1, 2020) को अपने डेली शो में भारतीयों को उसी तरह से हिंसा और दंगा करने के लिए उकसाया था, जैसा कि फिलहाल अमेरिका में हो रहा है। विनोद दुआ ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को ‘मानवाधिकार के धर्मयोद्धा’ की संज्ञा दी थी। उनका कहना था कि अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ अपने आक्रोश को प्रदर्शित करने में विफल रहे।

भाजपा प्रवक्ता नवीन कुमार ने अपनी शिकायत में ‘द विनोद दुआ शो’ के माध्यम से फर्जी खबर फैलाने, अनर्गल बातों व फालतू के तर्कों को वीडियो के माध्यम से लाकर समाज में जहर फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि दुआ ने प्रधानमंत्री को ‘कागजी शेर’ बताया था। उन्होंने एफआईआर को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था। उन पर भारत की छवि को ख़राब करने का भी आरोप है।

BJP नेता अपूर्वा सिंह पर अश्लील टिप्पणी: तीसरा आरोपित गिरफ्तार, मो. आसिम पहले से पुलिस के शिकंजे में

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भाजपा नेता अपूर्वा सिंह को धमकी देने के मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया है। बिहार से पकड़े गए इन दोनों पर आरोप है कि इन्होने दिल्ली भाजपा आईटी सेल की सह-संयोजक अपूर्वा सिंह की तस्वीरों को आपत्तिजनक रूप में सर्कुलेट किया था। इससे पहले भी इस मामले में 2 की गिरफ़्तारी की जा चुकी है। पुलिस ने बताया कि ताज़ा गिरफ़्तारी को लेकर जाँच चल रही है।

इससे पहले भाजपा युवा नेता अपूर्वा सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक टिप्पणी को डिलीट करने के साथ ही मोहम्मद आसिम नाम के एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने सोमवार (मई 18, 2020) को दी थी। साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने बताया था कि अपूर्वा सिंह की शिकायत पर ट्विटर से सभी आपत्तिजनक पोस्ट और फेसबुक से 26 पोस्ट को डिलीट कर दिया गया था।

बता दें कि भाजपा नेता अपूर्वा सिंह की एडिट की हुई अश्लील फोटोज भी शेयर किए गए थे। उन्हें निशाना बनाने वाले अधिकतर ट्विटर हैंडल्स मुस्लिमों के थे। बीजेपी आईटी सेल की सह-संयोजक युवा नेता अपूर्वा सिंह ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और इस्लामवादी समर्थकों ने उन्हें प्रताड़ित करने के लिए सोशल मीडिया पर उनकी मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरें भी पोस्ट की गई हैं।

भाजपा नेता अपूर्वा सिंह ने ट्विटर पर कहा था कि विपक्षी दलों के समर्थक, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लोग किसी और की पोर्नोग्राफिक अश्लील फोटोज़ को उनकी तस्वीर के साथ लगा कर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। अपूर्वा सिंह ने अपनी शिकायत पर कार्यवाही न करने के लिए पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी निराशा व्यक्त की थी, जो उन्होंने दो महीने पहले दर्ज कराई थी।

नेपाल की संसद में नया विवादित ‘राजनीतिक नक्शा’ बहुमत से पास, भारत ने दी सख्त प्रतिक्रिया

नेपाल की संसद ने देश के विवादित राजनीतिक नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस दौरान सदन में 275 में से मौजूद रहे सभी 258 सांसदों ने विधेयक को अपना समर्थन दिया है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि भारत से चल रहे सीमा विवाद पर बातचीत की गुंजाइश को लगभग विराम लग गया है। हालाँकि, भारत ने इस पर अपना सख्त जवाब दिया है।

शनिवार (13 जून, 2020) को नेपाल की संसद में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को लेकर हुई वोटिंग के दौरान विपक्षी नेपाली काँन्ग्रेस और जनता समाजवादी पार्टी- नेपाल ने भी विधेयक के पक्ष में मतदान किया।

निचले सदन से पारित होने के बाद अब विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहाँ उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा।

वहीं नेपाल के इस कदम पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस मामले में अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। इस तरह का कृत्रिम विस्तार ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कदम सीमा मुद्दे पर आपसी बातचीत और समझ के खिलाफ भी है।

दरअसल, विवादित नक्शे के खिलाफ शुक्रवार से ही नेपाल की राजधानी काठमांडू में लोग सड़कों पर उतर आए थे और इस राजनीतिक नक्शे के खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया था।

यह विरोध प्रदर्शन सैकड़ों लोगों की संख्या की मौजूदगी में ऐसे समय में किए जा रहे थे कि जब पूरा विश्व कोरोना महामारी के संकट से जूझते हुए इससे बचाव करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहा है।

इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनकारियों से अपील की थी कि वो किसी भी प्रकार के सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा ना लें। इससे गलत संदेश जाएगा। सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन कर एकजुटता दिखाई है। इसलिए आम लोगों को भी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार का साथ देते हुए नक्शा पास होने की खुशी में प्रदर्शन करना चाहिए।

दरअसल, नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। इसके बाद 22 मई को संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था।

इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भारत की संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, “हम नेपाल सरकार से अपील करते हैं कि वो ऐसे बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचें। साथ ही भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।”

ये इलाके भारत की सीमा में आते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग यह आशंका भी व्यक्त करते नजर आ रहे हैं कि हो सकता है नेपाल यह सब चीन के इशारे पर कर रहा हो।

गौरतलब है कि 8 मई को भारत ने उत्तराखंड राज्य के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया था, जिसे लेकर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद ही नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था।