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जिस मंदिर पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने चलवाया था बुलडोजर, अब हिंदूवादी संगठन करवा रहे उसका फिर से निर्माण

तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों की शिकायत पर बीते दिनों तेनकासी नगर में एक मंदिर पर प्रशासन ने बुलडोजर चलावाया था। अब ताजा अपडेट के अनुसार तमिलनाडु के एक हिंदूवादी संगठन- ‘इंदू मक्काल काटची’ के प्रयासों से स्थानीय निकाय ने सरकारी रुपए से मंदिर को दोबारा बनाने का निर्णय लिया है।

इस खबर की जानकारी इंदू मक्काल काटची ने अपने आधिकारिक अकाउंट से दी। उन्होंने लिखा, “हमारे हस्तक्षेप से, स्थानीय निकाय ने निर्णय लिया है कि वह सरकारी खर्च पर मंदिर को दोबारा बनवाएँगे। आपका सबका आवाज उठाने के लिए धन्यवाद।”

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों की शिकायत पर तेनस्कासी नगर (Tenkasi town) के सम्मेनकुलम गाँव (Sammenkulam village) स्थित कट्टुप्पासथी मदसामी (Kattuppasathy Madasamy) मंदिर तोड़े जाने की खबर आई थी।

स्थानीयों ने बताया था कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) और अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों ने मंदिर के नवीनीकरण के काम पर आपत्ति जताते हुए दावा किया था कि इससे मुस्लिम महिलाओं की निजता का हनन होगा। 

इसके बाद इन समूहों की शिकायत पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया और बिना हिंदुओं के प्रदर्शन पर गौर करते हुए मंदिर पर बुलडोजर चलवा दिया था।

मामला तूल पड़ने के बाद हिंदू महासभा के नेता बालसुब्रमण्यम ने पहले से भी विशाल मंदिर बनाने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया था और कई अन्य हिंदू संस्थान भी उनकी मदद में आगे आए थे।

इस मंदिर को तोड़े जाने से आहत नादर समुदाय के लोगों ने प्रशासन पर आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने यह हरकत मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए की है। इस घटना के बाद यह भी आरोप लगे कि तमिलनाडु के सीएम ने मुस्लिम वोट बैंक के लिए यह सब किया, क्योंकि चुनाव आने वाले हैं।

‘जय खालिस्तान, जय पाकिस्तान’ वाले आ रहे भड़काऊ कॉल्स: अकाल तख़्त ने दिलाई कॉन्ग्रेस के नरसंहार की याद

अकाल तख़्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि दुनिया भर में सिख युवकों को राजनैतिक, आर्थिक और धार्मिक रूप से एकदम चौकस रहने की ज़रूरत है। एक प्रेस स्टेटमेंट में उन्होंने याद दिलाया कि आज़ादी के बाद कुछ वरिष्ठ सिख नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा सिखों के साथ किए गए धोखे के कारण ‘हालेमी राज’ के सिद्धांत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि ये सिखों के संघर्ष और उनके साथ हुई हिंसा से ज्यादा सरकारी अत्याचार का प्रदर्शन था।

उन्होंने कहा कि पंजाब ने काफ़ी दिनों तक दर्द सहे हैं, जहाँ आतंकवाद के नाम पर सिखों का नरसंहार किया गया। उन्होंने पूछा कि आख़िर कौन बूढ़ा पिता चाहेगा कि उसका बेटा पुलिस एनकाउंटर में मारा जाए? उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह कई सिखों को मार कर उनके मृत शरीर की पहचान न होने की बात कही गई और दफ़न कर दिया गया। ज्ञानी ने कहा कि सिखों के लिए ‘हालेमी राज’ उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।

उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में सिख नेताओं ने समय-समय पर बयान दिया है और ‘गुरबाणी’ से चीजें उद्धृत की हैं। उन्होंने कहा कि कई सिख नेताओं ने उनके बयान को लेकर गैर-ज़रूरी बयान दिया है लेकिन उन नेताओं ने कभी न कभी अलग सिख प्रदेश का समर्थन किया है। ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर उन्होंने कहा था कि सिख खालिस्तान की माँग करते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहींं है। अगर केंद्र सरकार सिखों को खालिस्तान देती है, तो सिख इनकार नहीं करेंगे। इस पर बयान पर पंजाब में जम कर हंगामा हुआ था।

वहीं अब उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सिख गुरुद्वारों पर हमला करना और उनके द्वारा सिखों का नरसंहार करना ही ‘हलीम राज’ की माँग का मुख्य काऱण बना। उन्होंने कहा कि कई नॉन-सिख नेताओं ने भी इस नीति का विरोध किया है लेकिन सिखों के घाव को भरने के लिए अभी तक केंद्र सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया है। उन्होंने गुरमत को उद्धृत करते हुए अपनी माँग को सही ठहराया और इसे संविधान के अनुरूप भी बताया। उन्होंने कहा:

“मैं सिखों से गंभीरता से अपील करता हूँ कि वो एक ऐसा राजनीतिक संगठन बनाएँ जो पंजाब को सरकारी अत्याचार, साजिश और बल प्रयोग से बचाए। सिखों को उनसे सावधान रहना चाहिए, जो उन्हें भड़का कर हिंसा करवाना चाहते हैं और ख़ुद किसी राजनीतिक पद भोगने की लालसा लिए बैठे हैं। ये साबित हो चुका है कि तब की सरकार ने सिखों के ख़िलाफ़ घृणा का माहौल बनाने के लिए नरसंहार करवाया था। सोशल मीडिया से सिखों को हिंसा और आतंकवाद की तरफ भड़काने की कोशिश हो रही है।”

उधर पाकिस्तान भी सिखों को भड़काने के लिए चालें चल रहा है। खालिस्तान के लिए चलाई जा रही मुहिम रेफरेंडम-2020 को लेकर पाकिस्तान इंटरनेट कॉल के जरिए सिखों को भड़का रहा है और साथ ही ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी चला रहा है, जो भारत को बाँटने की एक साजिश है। पंजाब में फिर से माहौल ख़राब करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

फोन पर पाकिस्तानी कॉलर की तरफ से लोगों को भड़काते हुए उन्हें एक रेकॉर्डेड आवाज़ सुनाई जाती है। इसमें पंजाबी में कहा जाता है, “खालिस्तान जिंदाबाद। सिखी नूँ मनन वालयो खालिस्तान बनान लई जुलाई 4 तारीख तो शुरू होन वाली रेफरेंडम-2020 मुहिम च हिस्सा लवो ताकि खालिस्तान बनाया जा सके। जय खालिस्तान-जय पाकिस्तान।” इसमें एक साथ कई नंबरों पर कॉल की जाती है। हालाँकि, पंजाब पुलिस ने कहा है कि वो माहौल ख़राब नहीं होने देंगे।

इससे पहले ‘जिन्ने मेरा दिल लुटिया गाने’ से नेम और फेम कमाने वाले भारतीय-कनाडाई पंजाबी गायक जसविंदर सिंह (Jazzy B) ने अपने नए गाने में खालिस्तान का समर्थन किया था। अपने नए गाने “Putt Sardara De”  के जरिए उसने ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन भी किया था। इस गाने में उसने सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की माँग का भी समर्थन किया है। गाने को लिखने वाले का नमा अमित बोवा है।

‘मुझे कोरोना हुआ तो पूरे परिवार को हो जाएगा’ – डर और घबराहट में IRS ऑफिसर ने एसिड पी कर की आत्महत्या

दिल्ली के द्वारका इलाके में एक IRS अधिकारी की आत्महत्या का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि 56 वर्षीय अधिकारी के भीतर कोरोना का डर बैठ गया था। उन्हें आशंका थी कि अगर उन्हें कोरोना हुआ तो पूरे परिवार को हो जाएगा। इसी सोच में उन्होंने कार का एसिड पी लिया।

IRS अधिकारी की पहचान शिवराज सिंह के रूप में हुई। वह DOMS आरके पुरम में एडिशनल CIT के पद पर तैनात थे। वो द्वारका के समती कुंज अपार्टमेंट में रहते थे और 2006 बैच के थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि रविवार को दोपहर में द्वारका के एक अस्पताल से उन्हें जानकारी मिली कि एक शख्स ने सुसाइड कर लिया है और अस्पताल में उसका शव रखा हुआ है।

पुलिस अस्पताल पहुँची तो पता चला कि मृतक 56 साल के शिवराज थे, जो आयकर विभाग में एडीशनल कमिश्नर थे और फिलहाल उनकी पोस्टिंग आरके पुरम इलाके में आयकर विभाग के दफ्तर में थी।

जाँच में पता चला कि वे द्वारका सेक्टर 6 इलाके में अपनी कार के अंदर बेहोशी की हालत में पाए गए, फिर उन्हें अस्पताल लाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कार से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ।

इस नोट में कोरोना के शक के बारे में बात कही गई। सुसाइड नोट में यह भी लिखा गया है कि उन्हें लगता है उनकी वजह से उनके परिवार को कोरोना का संक्रमण हो गया है। इसके अलावा अपने पत्र में अधिकारी ने अपने बच्चों को परेशान न करने की बात लिखी।

यहाँ बता दें कि शिवराज ने एक हफ्ते पहले अपना कोरोना चेकअप कराया था, उन्हें चिंता थी कि उन्हें कोरोना न हो जाए। लेकिन उनका टेस्ट नेगेटिव आया था। अब पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि क्या इसके बाद उन्होंने फिर कोई कोरोना टेस्ट करवाया था।

फिलहाल द्वारका दक्षिण थाना पुलिस ने उनके शव को लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि उनकी मौत की असली वजह क्या है।

पड़ताल में ये बात भी मालूम चली है कि शिवराज की कई दिनों से तबीयत खराब थी और वह शनिवार को अपनी गाड़ी लेकर बाहर निकले थे। पर, जब देर शाम वह घर नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू हुई। बाद में उनकी गाड़ी घर से थोड़ी दूरी पर मिली। जिसमें वह पीछे की सीट पर पड़े थे।

‘दारू इतनी फैला दो कि सब पीएँ और पड़े रहें’ – दिग्विजय ने शेयर किया CM चौहान का एडिटेड वीडियो, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल में शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो शेयर कर के उनके मुँह में जबरदस्ती वो शब्द डालने की कोशिश की, जो उन्होंने कहा ही नहीं है। बकौल दिग्विजय, शिवराज ने कहा था कि दारू इतनी फैला दो कि सब पीएँ और पड़े रहें। भाजपा का कहना है कि ये वीडियो एडिटेड है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में उपचुनाव होने वाले हैं, इसीलिए राजनीतिक माहौल काफ़ी गर्म है। 24 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में शिवराज सरकार का भविष्य भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस तरह की राजनीति होना नई बात नहीं है। भाजपा नेताओं ने रविवार (जून 14, 2020) की रात भोपाल पुलिस क्राइम ब्रांच के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। बताया गया कि ये वीडियो उसी दिन दोपहर 2:50 में डाला गया।

दिग्विजय सिंह के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर डाले गए वीडियो और मीम्स के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने जनवरी 12, 2020 को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वीडियो डाल कर दारू फैलाने की बात की थी। जबकि भाजपा का कहना है कि ये वीडियो 2 मिनट 19 सेकंड का है, जिसके साथ छेड़छाड़ कर के इसे 9 सेकंड का बना दिया गया और दिग्विजय सिंह ने इसे ट्विटर हैंडल पर डाल कर जनता को गुमराह किया।

एडिशनल एसपी क्राइम ब्रांच निश्चल झारिया ने जानकारी दी कि रविवार की रात को पूर्व मंत्री व विधायक विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विधायक कृष्णा गौर, रामेश्वर शर्मा सहित अन्य नेताओं ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। वीडियो की कॉपी को भी सबूत के रूप में पेन ड्राइव में डाल कर पुलिस को सौंप दिया गया है। शिकायत में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ की आबकारी नीति में गाँव-गाँव में शराब की दुकानें फैलाने की योजना बनाई जा रही थी।

इसी पर किसी पत्रकार ने जनवरी में शिवराज सिंह चौहान से सवाल पूछे थे। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने जो कहा, उसे काट-छाँट कर पेश करते हुए वीडियो को अपलोड कर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने समाज हित की चर्चा करते हुए कॉन्ग्रेस सरकार की आबकारी नीति का कड़ा विरोध किया था। एएसपी झारिया ने कहा कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मामला संज्ञान में लेकर जाँच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

वहीं भोपाल DIG इरशाद वली ने बताया कि सीएम शिवराज सिंह चौहान के पुराने वीडियो को एडिट कर छवि खराब करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को शेयर करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दिग्विजय के साथ-साथ इस वीडियो को रीट्वीट करने वाले 11 लोगों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है। 

‘दिग्गी राजा’ पर झूठ फैलाने का आरोप, शिकायत दर्ज

राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि झूठ, फरेब व चरित्र हनन की राजनीति करना कॉन्ग्रेस की आदत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान का शराब माफियाओं के खिलाफ दिया गया बयान जिस तरह से तोड़ मरोड़ कर वायरल किया गया है, वह उसी की एक कड़ी है। मिश्रा ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि जल्दी ही दोषियों पर विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाए। 

‘मेवात में धर्मांतरण करवाने वाले RSS के एजेंट होंगे, दीन नहीं देता जबरन धर्म परिवर्तन की इजाजत’

हरियाणा के मेवात में दलितों के साथ अत्याचार का मामला सामने आने के बाद अब इस विषय की चहुँओर चर्चा है। सोशल मीडिया से लेकर कई मीडिया चैनलों पर इस मुद्दे पर डिबेट जारी है। हर जगह साक्ष्यों के साथ सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर हरियाणा जैसी पावन भूमि पर पाकिस्तान वाली स्थितियों को पैदा करने के लिए कौन जिम्मेदार है?

बावजूद इन सभी बातों के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रिया अब भी हैरान करने वाली है, जो यह मानने को ही तैयार नहीं है कि समुदाय विशेष इस मामले में कहीं भी जिम्मेदार है।

बीते दिनों मेवात मामले के मद्देनजर न्यूज स्टेट पर दीपक चौरसिया ने एक डिबेट करवाई- “मेवात: वो जगह जहाँ जाकर पाकिस्तान वाली फीलिंग आती है!” इस डिबेट में विभिन्न क्षेत्रों के लोग आए। सबने अपनी अपनी बात रखी। मगर, इसी दौरान इस्लामिक स्कॉलर इलियास शरीफुद्दीन और राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर पैनलिस्ट बने पत्रकार माजिद हैदरी ने मेवात पर ऐसी बातें बोलीं, जिन्हें सुनने के बाद साफ हो गया कि उन्हीं जैसी मानसिकता वाले लोगों के कारण मेवात के कट्टरपंथियों को शह मिली है और उन्हीं जैसों की आड़ में कट्टरपंथ अपने चरम पर पहुँचा है।

सबसे पहले तो इस्लामिक स्कॉलर शरीफुद्दीन की बात पर गौर करिए। शरीफुद्दीन, मेवात में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को कोई गुनाह नहीं मानते हैं। बल्कि उनका तो कहना है कि वहाँ दलित हिंदू बच्चियाँ इस्लाम की उन्नति, शांति, एकता देखकर इस धर्म को स्वीकार कर रही हैं।

वहीं, दूसरे बुद्धिजीवी व राजनीतिक विश्लेषक माजिद हैदरी कहते हैं कि जबरन धर्म परिवर्तन कराने की इजाजत उनका दीन नहीं देता। अगर कोई ऐसा कर रहा है तो इसका मतलब है कि वह समुदाय का नहीं बल्कि वह संघ का एजेंट होगा। 

माजिद हैदरी मेवात क्षेत्र में धर्मांतरण के मामले पर उठती आवाजों की मंशा पर भी सवाल करते हैं और प्रियंका चोपड़ा का उदाहरण देकर पूछते हैं कि जब वह किसी फिरंगी ईसाई से शादी करती हैं, तब किसी के पेट में दर्द नहीं होता। लेकिन मेवात पर सब सवाल उठा देते हैं।

गौरतलब हो कि यह दोनों इस्लामी बुद्धिजीवी इस प्रकार की टिप्पणी उस शो में करते हैं, जिसमें इस्लामिक बर्रबरता का शिकार हुई मीना की कहानी खुद उसका पति सुनाता है और बच्चे बताते हैं कि आखिर कैसे उनकी माँ का पहले अपहरण हुआ, गैंगरेप हुआ, फिर धर्मपरिवर्तन न करने पर किस तरह उनकी नसें काट-काटकर हत्या कर दी गई।

सोचने वाली बात है कि उलेमाओं के रूप में समुदाय विशेष कैसे लोगों को अपने प्रतिनिधि के तौर पर चुन रहा है। जिनके समक्ष आज सारी स्थिति शीशे की तरह साफ होने के बाद भी वह हकीकत को नहीं देखना चाहते और इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि मेवात में दलितों पर अत्याचार हो रहा है या बहुल आबादी के कारण मेवात के कई गाँव हिंदूविहीन हो रहे हैं।

यदि वाकई शरीफुद्दीन जैसों का तर्क सही है कि इस्लाम की उन्नति देखकर वहाँ की दलित लड़कियाँ इस्लाम मजहब अपना रही हैं तो सवाल उठता कि आखिर मीना जैसी महिलाओं के साथ क्या हुआ? आखिर क्यों साल 2019 में मेवात की जमीन पर लव जिहाद का मुद्दा चर्चाओं में आया? 

क्यों आकिल खान और राशिद खान ने एक लड़की को जादू टोने के बलबूते उसका धर्मांतरण करवाया था? क्यों वहाँ दलितों में बहन-बेटियों के अपहरण के मामले बढ़ते देख आक्रोश उमड़ा था? क्यों उन सबने इस घटना से खफा होकर हाइवे पर प्रदर्शन किया था?

बात सिर्फ बेटियों के साथ होते अपराध तक सीमित नहीं है। यह मामला दलितों के अस्तित्व को लेकर है, जिस पर मजहबी नेता या तथाकथित दलित नेता हमेशा अपनी राजनीति खेलते हैं। पर बात जब इनके लिए आवाज उठाने की आती है, तो सब मौन हो जाते हैं।

माजिद हैदरी वो शख्स हैं, जिन्होंने साल 2018 में कश्मीर में होती पत्थरबाजी के लिए भी RSS को वजह बता दिया था। वह एक बार फिर साल 2020 में मेवात में फैले कट्टरपंथ के बचाव में कहते हैं कि मेवात में होती घटना के लिए संघ के लोग जिम्मेदार हैं। लेकिन संघ के लोगों को 500 में से 103 गाँवों को हिन्दुविहीन कर देने से मिलेगा क्या? वह क्यों चाहेंगे कि ऐसी स्थिति पैदा हो, जिससे 84 गाँवों में सिर्फ 4-5 हिन्दू परिवार रह जाएँ?

सोचिए क्या वाकई ये बात कोई जिम्मेदार आदमी कह सकता है। वो भी तब जब उसे विश्लेषक की उपाधि मिल गई हो और उसके सामने ऐसे कई उदहारण हों, जो साबित करे कि मेवात की बहुल आबादी ने अल्पसंख्यकों पर अनेकों प्रकार से दबाव बनाया, उनकी दुर्गति की।

साल 2017 का एक मामला है। जब हरियाणा के मेवात मॉडल स्कूल पर आरोप लगे था कि यहाँ पर हिंदू छात्रों को धर्म परिवर्तन और नमाज पढ़ने के लिए दबाव बनाया जाता है और ऐसा करने से इंकार करने पर उन्हें मारा-पीटा तक जाता है।

2018 का एक केस है, जब मेवात के नगीना खंड गाँव मोहालका से दलित परिवार पर जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले का कारण ही ये निकल कर आया था गाँव में रहने वाले किशन के परिवार पर इस्लाम नाम का युवक लंबे समय से धर्म परिवर्तन का दबाव डाल रहा था। लेकिन जब किशन के परिवार ने इससे इंकार किया तो इस्लाम, तौफीक, मोसिम, अतरु, असमीना ने उसके परिवार पर लाठी डंडों व सरिया से जानलेवा हमला कर दिया और जातिसूचक शब्दों से संबोधित कर उन्हें अपमानित भी किया।

इसके बाद, साल 2018 में ही एक नाबालिग से साथ दुष्कर्म की चौंकाने वाली घटना सामने आई थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नूँह के भंडका में घटी इस घटना में पुलिस ने 14 वर्षीय लड़की के घर में घुसकर उसके साथ रेप करने के आरोप में असलम को गिरफ्तार किया था। जबकि बाकी दोनों उस समय तक पकड़ में नहीं आए थे। 

मेवात में हुई इन धर्मांतरण, रेप, मारपीत जैसी घटनाओं के चुनिंदा उदाहरणों को पढ़िए, समझिए और बताइए, कहाँ आपको धर्मांतरण में हिंदुओं की मर्जी दिखी? कहाँ मारपीट में आपसी भाईचारा लगा? और कहा संघ नेताओं के नाम आए?

क्या जिन जगहों पर आपसी प्रेम होता है, वहाँ एक समुदाय का नाम धीरे धीरे मलीन होता जाता है? क्या उस जगह अल्पसंख्यक रोते-बिलखते दिखते हैं? क्या वहाँ की महिलाएँ असुरक्षित होती हैं? क्या वहाँ दलित बच्चों पर फब्तियाँ कसी जाती हैं? क्या स्कूलों में धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है? नहीं, ये सब अत्याचार आपसी प्रेम वाली जगहों पर नहीं होते, बल्कि उन जगहों पर देखने को मिलते हैं, जहाँ हिंदू अल्पसंख्यक हों, जैसे पाकिस्तान।

आज कई हिन्दू संगठनों का दावा है कि मेवात में हिंदुओं की हालत पाकिस्तान से बदतर है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कुछ मामले ही उठाए हैं, अभी बहुत प्रकाश में आना बाकी है। अनेकों खबरें हैं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आखिर क्यों मेवात को दलितों का कब्रिस्तान बताया गया। कई रोते बिलखते चेहरे वीडियो में कैद हैं, जो दिखाते हैं कि मीडिया में उठा मेवात का यह मुद्दा निराधार नहीं है।

मगर फिर भी देश में इस्लामोफोबिया का रोना रोने वाले यदि समुदाय विशेष के पढ़े लिखे लोग, यह मान चुके हैं कि मेवात में हो रही घटनाएँ सामान्य हैं और गंगा जमुना तहजीब को बढ़ावा दे रही है। तो विचार करिए कि वहाँ की अल्पसंख्यक आबादी की पीड़ाओं का अब कोई अंत कैसे होगा? मेवात का भूगोल बदलकर कट्टरपंथियों ने न केवल हिंदुओं की जमीनों को, धार्मिक स्थलों को, पहचान को अपनी मुट्ठी में किया है, बल्कि राजनीति व प्रशासन को भी कथित तौर पर अपनी कठपुतली बना लिया है।

यूपी: 20 साल पहले स्वास्थ्य विभाग में फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले 64 बर्खास्त, 18 साल से चल रही जाँच खत्म

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने 64 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इन्होंने करीब 20 साल पहले फर्जीवाड़े से नौकरी पाई थी। 18 साल से मामले की जॉंच चल रही थ्ज्ञी। मिर्जापुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ओपी तिवारी ने यह जानकारी दी।

सीएमओ ओपी तिवारी ने शनिवार (13 जून, 2020) को बताया कि 1996 से 1998 के बीच ग्रेड-4 के पदों पर 64 लोगों को धोखाधड़ी से नियुक्त किया गया था। वे तभी से अपना वेतन ले रहे थे और इनमे से कुछ को पदोन्नत भी किया गया था, जो कि कुछ वर्तमान में क्लर्क के रूप में स्वास्थ्य विभाग के अंदर कार्य कर रहे थे।

18 वर्षों से जाँच चल रही थी कि नौकरी पाने के लिए किन फर्जी तरीकों का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में बीते बुधवार (10 जून, 2020) को सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा वाराणसी ने इस मामले में रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने सभी 64 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था।

सीएमओ ने अपने बयान में कहा कि पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपित कर्मचारियों ने नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सभी जिलों के सीएमओ को पत्र भेजकर जानकारी दे दी गई, जहाँ कर्मचारी विभाग में तैनात थे।

सीएमओ के मुताबिक यह मामला 2002 में सरकार के संज्ञान में तब आया कि जब एक ऑडिट टीम ने उनकी सर्विस बुक माँगी थी, लेकिन वे सर्विस बुक देने में नाकाम रहे। इसके बाद टीम को शक हुआ और सरकार को जाँच शुरू करने के लिए एक पत्र लिखा और इसी के साथ 18 साल की लंबी जाँच के बाद विभाग ने गलत तरीके से नौकरी पाने वालों का खुलासा कर दिया।

‘खुदकुशी हराम, वह काफिर था’: सुशांत सिंह की मौत पर शोक जता कट्टरपंथियों के निशाने पर आए पाकिस्तानी सितारे

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार (जून 14, 2020) को मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली। उनकी मौत किसी सदमे से कम नहीं है। सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है। बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट जगत तक इस खबर से स्तब्ध है।

सभी ने सुशांत की मौत पर संवेदनाएँ व्यक्त कीं। इसी कड़ी में पाकिस्तानी शख्सियतों ने भी शोक व्यक्त किया। हालाँकि इसके लिए वे अपने ही देशवासियों के निशाने पर आ गए। एक ‘काफिर’ की मौत पर शोक जताने के लिए उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया।

पाकिस्तानी क्रिकेटर शान मसूद ने सुशांत की आत्महत्या पर दुख व्यक्त करते हुए ट्विटर पर उनकी आत्मा की शांति के लिए कामना की। इसकी वजह से उन्हें गालियाँ दी गई कि उन्होंने एक ‘काफिर’ की आत्महत्या पर दुख जताया।

उनसे कहा गया कि वे उन दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना न करें, जो दूसरे धर्म के हैं।

एक हिंदू की मौत पर शोक जताने के लिए उन पर ‘liberal’ होने का भी आरोप लगाया गया।

इसी तरह, पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान पर राजपूत की आत्महत्या पर शोक व्यक्त करने के लिए हमला किया गया। बता दें कि माहिरा ने बॉलीवुड फिल्मों में भी अभिनय किया है।

बुशरा सिद्दीकी नाम का एक शख्स, जिसके नाम के आगे पाकिस्तान झंडा लगा था, ने नफरत भरा ट्वीट किया।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने बताया कि आत्महत्या ‘हराम’ है और ‘काफिर’ को तो किसी भी हालत में स्वर्ग नहीं मिल सकता। उसने लिखा, “खुदकुशी करने वालों की मौत हराम है और फिर काफिर के लिए तो जन्नत है ही नहीं।”

एक शख्स ने माहिरा को सुझाव दिया कि मानवता दिखाना अच्छा है, लेकिन ‘काफिरों’ के लिए मजहब को मत भूलना। उसने लिखा, “न जाने क्यों हम लोग ‘काफिर’ की शांति के लिए कामना करते हैं, जबकि कुरान कहता है कि जो लोग उसके दीन को स्वीकार किए बिना मर जाते हैं वे नरक में जाएँगे? मानवता दिखाना अच्छा है लेकिन कम से कम अपने मजहब के बारे में मूर्ख मत बनो।”

इसी तरह, पाकिस्तानी अभिनेता हुमायूँ सईद पर भी ‘काफिर’ की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए हमला किया गया।

गौरतलब है कि इस साल दुनिया को अलविदा कह के जाने वाले सिने हस्तियों की सूची में सुशांत सिंह राजपूत का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। उनकी लाश उनकी ही फ्लैट में पंखे से लटकी हुई मिली। घर के नौकर ने पुलिस को ये जानकारी दी। 

सुशांत सिंह राजपूत ने सबसे पहले ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाम के धारावाहिक में काम किया था पर वो एकता कपूर के धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ से लोकप्रिय बने। इसके बाद उन्होंने फिल्मों का सफर शुरू किया था। सुशांत फिल्म ‘काय पो छे’ में मुख्य अभिनेता के रूप में दिखे थे। उस फिल्म में उनके अभिनय की तारीफ भी हुई थी। उन्होंने क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की बॉयोपिक, ‘सोनचिड़ैया’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में काम किया था।

वीर सिंह निकला हनीफ खान: बंधक बनाकर दो महीने तक किया रेप, जबरन इस्लाम कबूल करवाया

राजस्थान से एक चौंकाने वाला मामला हाल ही में सामने आया है। हनीफ खान नाम के एक युवक ने हिंदू बनकर विवाहिता से फेसबुक पर दोस्ती की। फिर उसे झॉंसे में लेकर बाड़मेर ले गया। वहॉं उसका जबरन धर्मांतरण कराया गया। साथ ही दो महीने तक बंधक बनाकर दुष्कर्म किया।

पीड़िता राजस्थान के ही उदयपुर जिले की रहने वाली है। एनबीटी की खबर के मुताबिक पीड़ित महिला उदयपुर जिले के सलूम्बर उपखंड में गींगला क्षेत्र की रहने वाली है। उसने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए आरोपित हनीफ खान से उसकी जान-पहचान हुई। इस दौरान उसने अपना नाम वीर सिंह बताया था।

फेसबुक पर दोस्ती के कुछ दिनों बाद दोनों की फोन पर बात होने लगी। आरोपित युवक शादी का झॉंसा देकर उसे बाड़मेर स्थित अपने गाँव भटाला लेकर चला गया। वहॉं उसे प्रताड़ित करने लगा। पीड़िता को आरोपित युवक के परिजनों के पहनावे और बोल-चाल से उनके धर्म पर शक हुआ।

शक होने पर युवती ने आरोपित युवक से पूछा तो उसने स्वीकार किया कि वह वीर सिंह नहीं, बल्कि हनीफ खान है। इसके बाद आरोपित और उसके परिजनों ने महिला को डराया-धमकाया और उसकी बेटी को जान से मारने की धमकी देकर उसका जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया।

आरोपित ने महिला को 2 महीने तक घर में ही बंधक बनाकर रखा और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इतना ही नहीं युवक के परिजनों ने भी महिला के साथ संबंध बनाने की कोशिश की। लॉकडाउन में ढील मिलते ही पीड़ित महिला आरोपितों के चुंगल से अपनी बेटी के साथ भाग निकली और उदयपुर पहुँची गई। घर पहुँची पीड़िता ने परिजनों को आपबीती सुनाई।

इसके बाद परिजनों ने आरोपित युवक और उसके परिजनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के बाद सोमवार (8 जून, 2020) को उदयपुर की अदालत में पीड़िता के धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए हैं।

आपको बता दें कि पीड़ित महिला पहले से शादीशुदा थी और अपने पति से अलग अपने मायके में रहती थी। उसकी तीन साल की एक बेटी भी है। पति अहमदाबाद में हलवाई का कार्य करता है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक पुलिस अधीक्षक कैलाश बिश्नोई ने बताया कि गींगला थाने में युवक और उसके परिजनों के खिलाफ धारा 366, 376, 376 ए / 511 और 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच थाना अधिकारी रमेशचंद्र को सौंपी गई है। युवती के मोबाइल नंबर के आधार पर युवक को ट्रेस किया जा रहा है। जल्द ही एक टीम बाड़मेर भेजी जाएगी।

ऐसा ही एक मामला राजस्थान के राजसमंद जिले से भी सामने आया है। पुलिस ने बलात्कार, अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने के आरोप में रियाज और उसके दो साथियों सुलेमान मोहम्मद और उसके अनवर को गिरफ्तार किया है। घटना देवगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले लसानी गाँव की है। रियाज ने पिंटू बनकर पीड़िता के साथ मेलजोल बढ़ाया था।

सार्वजनिक माफी ही ममता बनर्जी का प्रायश्चित: शवों को घसीटे जाने पर बोले बंगाल के गवर्नर, Video फर्जी बताने पर भी फटकारा

हाल ही में पश्चिम बंगाल से एक वीडियो सामने आया था जिसमें कोलकाता नगर निगम के वाहन में रखने के दौरान शव घसीटे जा रहे थे। इसको लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रविवार (जून 14, 2020) को एक बार फिर से ममता सरकार से सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने के लिए कहा है।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों के शवों को लोहे के हूक से खींचने को लेकर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह बर्बरता मानवता को लंबे समय तक शर्मसार करती रहेगी। धनखड़ ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ‘‘मानव शरीर को हूक से खींचने वाला यह भयावह अकल्पनीय डर हमें लंबे समय तक परेशान करेगा। ममता बनर्जी द्वारा प्रायश्चित के रूप में सार्वजनिक माफी अपेक्षित है। यह बर्बरता मानवता पर अमिट दाग है। शवों का अंतिम संस्कार तय पंरपरा के अनुसार होना चाहिए। यह एक गंभीर और आध्यात्मिक कार्य है।’’

बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक श्मशान घाट पर कुछ शवों को जलाने के दौरान इलाके में बदबू फैल गई थी। इस पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और विरोध के साथ हंगामा करने लगी। इसके बाद नगर निगम के कर्मचारियों ने अधजली लाशें घसीटते हुए गाड़ी में भरी। इस अमानीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।

हालाँकि प्रशासन ने इससे इनकार किया है। सोशल मीडिया पर आए वाडियो में देखा जा सकता है कि कर्मचारी कोलकाता में गारिया शवदाह गृह में रखे शवों को हुक से घसीटते हुए बाहर खड़ी गाड़ी में फेंक रहे हैं। अधिकारियों ने इस वीडियो को फर्जी बताया है।

धनखड़ ने वीडियो को फर्जी बताने को ‘अक्षम्य अपराध’ करार दिया। उन्होंने कहा कि वीडियो को फर्जी बताना अपमान है। ममता बनर्जी को इस बात का अंदाजा नहीं है कि इस अपराध को लेकर लोगों के अंदर कितना आक्रोश है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिक्रिया देने से पहले ये सोच लें कि अगर उन 14 में से एक आपके परिवार का हिस्सा होता तो।

धनखड़ ने उम्मीद जताई है कि उन्होंने गृह सचिव, पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता नगर निगम के प्रशासकों से जो विवरण माँगा है, उसे जल्द से जल्द और प्रामाणिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को बेहद भावुक और संवेदनशील बताते हुए कहा कि चेयरपर्सन फिरहाद हकीम जल्द ही उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी देंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने इससे पहले शनिवार (जून 13, 2020) को अपने एक ट्वीट में लिखा था, “ममता बनर्जी और उनके प्रशासन की ओर से गवर्नर से निपटने के लिये चाकुओं को धार दी जा रही है। सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने हमारे राज्य को मानव शरीरों को निर्दयी तरीके से घसीटे जाने के बर्बर घटनाक्रम पर माफी माँगने की बजाए एक जैसे ट्वीट करना शुरू कर दिया है।”

एक अन्य ट्वीट में गवर्नर धनखड़ ने सीएम ममता बनर्जी को संबोधित करते हुए लिखा था, “राज्य के लोगों की सेवा करने का मेरा संकल्प है, मुझे इस तरह की स्ट्रीट स्मार्ट हरकतों से डिगाया नहीं जा सकता है। मैं पश्चिम बंगाल की खोई हुई महिमा को हासिल करने की दिशा में काम करूँगा और राष्ट्र के शिखर पर इसकी जगह बनाने के लिए काम करूँगा। पूरी ऊर्जा के साथ मैं कानून के शासन के लिए धर्मयुद्ध करूँगा।”

‘मैं जिंदा क्यों बचा, मर ही जाता’: कोरोना से बचे बुजुर्ग को हॉस्पिटल ने थमाया ₹8.35 करोड़ का बिल

70 साल के एक बुजुर्ग को कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में 62 दिन दाखिल रहना पड़ा। इसके बाद हॉस्पिटल ने उन्हें 1.1 मिलियन डॉलर (करीब8.35 करोड़ रुपए) का बिल थमा दिया।

कोरोना को मात देने वाले इस बुजुर्ग के होश 181 पन्नों का बिल देखते ही उड़ गए। बिल देख उन्होंने कहा- मैं क्यों जिंदा बच गया, इससे अच्छा तो मर जाता।

द सिएटल टाइम्स के मुताबिक मामला अमेरिका के सिएटल शहर का है। माइकल फ्लोर नाम के 70 वर्षीय मरीज को सिएटल शहर के स्वीडिश मेडिकल सेंटर में 4 मार्च को कोरोना संक्रमित होने के कारण भर्ती कराया गया था। इसके बाद अस्पताल ने जब 62 दिनों बाद उन्हें छुट्टी दी तो उन्हें 181 पन्नों का बिल थमा दिया गया, जिसमें बताया गया कि हर दिन आईसीयू के लिए 7.39 लाख चार्ज किए गए।

इसके अलावा मरीज को 42 दिन स्टेराइल रूम में रखने के लिए 3.10 कोराड़ रुपए, 29 दिन तक वेटिंलेटर पर रखने के लिए 62.28 लाख रूपए और दो दिन जान खतरे में आने के बाद हुए ट्रीटमेंट के लिए करीब 76 लाख रुपए चार्ज किए गए।

4 मार्च को अस्पताल में भर्ती करने के बाद बुजुर्ग की तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि एक बार तो अस्पताल की नर्स ने उनके परिवार को मिलने के लिए बुलाने की सोची। लेकिन इसके बाद बालत में सुधार हुआ और 62 दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसे स्वास्थ्यकर्मियों ने चमत्कार ही माना है, क्योंकि अमेरिका में कोरोना से मरने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है।

सिएटल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हालाँकि फ्लोर बुजुर्गों के लिए बनाए गए सरकार के कार्यक्रम के तहत इंश्योरेंस कवर में आते हैं। इसलिए उन्हें इलाज का खर्चा अपनी जेब से नहीं देना पड़ेगा, लेकिन बिल को देख फ्लोर कहते हैं कि वे टेक्सपेयर्स का इतना पैसा खर्च होने की बात सुनकर बेहद दुखी हैं और खुद को अपराधबोध से ग्रस्त महसूस कर रहे हैं।

आपको बता दें कि अमेरिका ने कोरोना संकट के समय में अमेरिकी अस्पतालों को 10 करोड़ डॉलर की मदद मुहैया कराने का ऐलान किया है। वहीं अमेरिका में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अभी तक अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 117,533, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 2,142,453 हो गई है। साथ ही पूरे विश्व में कोरोना से मरने वालों की संख्या 432,898, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 7,897,281 हो गई है।