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‘द वायर’ और CAA विरोधियों का संदिग्ध गठजोड़: भारत के आंतरिक मुद्दों में क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं अमेरिकी नागरिक वरदराजन

संसद के दोनों सदनों में सीएए का बिल पास होने के साथ ही पूरे भारत में योजनाबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन हुए, जो बाद में दंगों में बदल गए। पूरे देश में हिंसा का एक माहौल बना दिया गया। इसे लेकर सरकार के खिलाफ बड़े स्तर का प्रपंच रचा गया। भारत-विरोधी और हिन्दू-विरोधी भावनाएँ भड़काई गई, कभी नारों तो कभी पोस्टरों के जरिए। विदेशी विश्वविद्यालयों में भी विरोध प्रदर्शन कराए गए, ताकि भारत पर डिप्लोमेटिक दबाव बनाया जा सके। सीएए विरोध में ‘द वायर’ के एक गठजोड़ का मामला सामने आया है, जिस पर हम आगे बात करेंगे।

एक अभियान ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट हिंदुत्व (SAH)’ भी विदेशों में लांच किया गया, ताकि भारत में दंगे भड़काए जा सकें। इसका नाम बदल कर अब ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट हिंदुत्व आइडियोलॉजी (SAHI)’ कर दिया गया है। उन्हें संदिग्ध फंड मिलते हैं और साथ ही डेमोक्रैट पार्टी के साथ उनका सम्बन्ध है। इसने एक डेटाबेस तक तैयार कर रखा है, जिसके द्वारा पश्चिम बंगाल के लोगों को सीएए के खिलाफ भड़काया जाता है।

इनके पास कई ऐसी सूचनाओं के स्रोतों की सूची है, जो संदिग्ध हैं। साथ ही एक ऐसे क़ानून के विरोध के लिए प्रपंच रचा जा रहा है, जिसे भारत की संसद के दोनों सदनों ने क़ानूनी तरीके से पास किया है। विश्व भर के विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन के लिए उकसाया जा रहा है। उनके डेटाबेस में एक भारतीय पत्रकार का भी नाम है, जो इन प्रदर्शनों को जम कर प्रमोट कर रहा है, जो भारत सरकार के खिलाफ है।

ये हैं ‘द वायर’ के संस्थापक-संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, जो भारतीय नागरिक भी नहीं हैं लेकिन हिंदुत्व के खिलाफ प्रोपेगंडा चलाने में और फेक न्यूज़ फैलाने में इनका कोई सानी नहीं है। इसमें एक संगठन ‘आजाद इंडिया कलेक्टिव’ का नाम है, जो सीएए विरोधी संगठनों में से एक है। एआईसी ने ही SAHI के द्वारा सीएए विरोधी डेटाबेस मेन्टेन किया हुआ है। इसमें प्रदर्शन से जुड़े लेख और याचिकाओं को लिस्ट किया गया है।

यहीं से हमें उनका इंस्टाग्राम अकाउंट मिला, जहाँ लोगों को विरोध प्रदर्शन के लिए भड़काया जा रहा था। यहाँ पता चला कि उन्होंने ‘होली अगेंस्ट हिंदुत्व’ का भी अभियान चलाया था। एआईसी हर उस विदेशी संगठन के साथ साझेदारी बनाने में लगा हुआ था, जो भारत पर दबाव बना कर सीएए को वापस लेने को कहें। भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए ये सारे कुचक्र रचे जा रहे थे। इसे जैनाब फिरदौसी और स्पर्श अग्रवाल नामक दो लोगों द्वारा स्थापित किया गया था।

‘आज़ाद इंडिया कलेक्टिव’का इंस्टाग्राम पेज

शिकागो के साप्ताहिक अख़बार ‘हाईड पार्क हेराल्ड’ के अनुसार, एआईसी के लिए किए गए उनके कार्यों को अमेरिकी कॉन्ग्रेस की लाइब्रेरी में भारत से जुड़े आर्काइव्स में रखा जाएगा। उन्होंने अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वामपंथी बर्नी सैंडर्स का समर्थन किया था। हालाँकि, सैंडर्स को जो बिडेन से मात मिली और बिडेन डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार बने, इससे ये तो पता चलता ही है कि इस संगठन का फार-लेफ्ट ग्रुप से सम्बन्ध काफ़ी अच्छे हैं।

जैनाब और स्पर्श का हमें एक यूट्यूब इंटरव्यू मिला, जो उन्होंने ‘द मेश’ नामक चैनल को दिया था। इंटरव्यू में दोनों ने स्वीकार किया कि वो दोनों तो बस एआईसी का चेहरा हैं लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं जो इस अभियान में बढ़-चढ़ कर मदद कर रहे हैं। उन्होंने कबूल किया कि वो भारत में सीएए के विरोध में हुए कई आन्दोलनों का हिस्सा रह चुके हैं। इंटरव्यू में ये भी खुलासा हुआ कि उन्होंने सीएए विरोध को लेकर ‘द वायर’ के साथ गठजोड़ किया था।

होली अगेंस्ट हिंदुत्व का अभियान चलाते हुए प्रपंची

उन दोनों ने बताया कि वो लोग इस बिल को लोकसभा में टेबल किए जाने से लेकर वर्तमान समय तक हुए प्रदर्शनों के बारे में पूरी टाइमलाइन तैयार करना चाह रहे थे। उन्होंने कई अन्य भारतीय संगठनों के साथ गठजोड़ की बात स्वीकार की और कहा कि उनके पास वेबसाइट पर लगाने के लिए कई ‘प्रबुद्ध’ लोग विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें भेजते थे। आप सोचिए, ‘द वायर’ जैसा मीडिया संस्थान एक संगठन के साथ गठजोड़ करता है और वो भी लोकतान्त्रिक रूप से पारित क़ानून के विरोध के लिए।

यूट्यूब पर जैनाब और स्पर्श का इंटरव्यू

हमें तो ये भी नहीं पता कि अमेरिकी नागरिक वरदराजन ख़ुद ये सब कर रहे हैं या अमेरिका में बैठा राजनीतिक आकाओं से उन्हें इंस्ट्रक्शंस मिल रहे हैं। भारत के लिए विदेशी हस्तक्षेप चिंता का विषय है और वो भी आंतरिक मुद्दों में। नार्थ-ईस्ट को भारत से अलग करने की धमकी देने वाला और महात्मा गाँधी को फासिस्ट बताने वाला शरजील इमाम ‘द वायर’ में लेख लिखता था। दिल्ली दंगों को लेकर भी इसने फेक न्यूज़ फैलाई थी।

नए नक्शे के खिलाफ काठमांडू की सड़कों पर उतरे लोग, नेपाल सरकार के खिलाफ जमकर किया विरोध प्रदर्शन

राजधानी काठमांडू सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में नेपाल के नए मैप के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं। कोरोना संक्रमण से निपटने में नाकामी, गरीबों की मदद करने में सरकार की असफलता और भ्रष्टाचार को लेकर नेपाल की जनता लॉकडाउन तोड़कर भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर निकल रही है।

नेपाल की ओर से जारी किए गए नए नक्शे को लेकर विवाद थमता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। एक तरफ तो नए नक्शे को लेकर भारत और नेपाल के संबंधों में तल्खी बनी हुई है, दूसरी ओर अब नेपाल में भी लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में किया जा रहा है कि जब कोरोना का संकट पूरे विश्व में जारी है।

शनिवार (13 जून, 2020) को नेपाल की राजधानी काठमांडू में बड़ी संख्या में लोग नक्शे के खिलाफ जगह-जगह सड़कों पर उतर आए और सुबह से ही सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

वहीं आज नेपाली संसद में नए नक्‍शे के प्रस्‍ताव पर वोटिंग हुई। इससे पहले भी शुक्रवार (12 जून, 2020) को भी कई प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने मीडिया के माध्यम से लोगों से प्रदर्शन रोकने की अपील की थी। साथ ही निवेदन के साथ विदेश मंत्री ने लोगों से कहा था कि वो किसी भी प्रकार के सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा ना लें। इससे गलत संदेश जाएगा।

प्रदीप ग्यावली ने कहा कि हम अपनी जमीन को वापस नक्शे में शामिल कर एक मिसाल कायम करने जा रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों ने भी इसका समर्थन कर एकजुटता दिखाई है। इसलिए आम लोगों को भी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार का साथ देते हुए नक्शा पास होने की खुशी में प्रदर्शन करना चाहिए।

दरअसल, नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। इसके बाद 22 मई को संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था।

इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भारत की संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, “हम नेपाल सरकार से अपील करते हैं कि वो ऐसे बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचें। साथ ही भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।”

ये इलाके भारत की सीमा में आते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग यह आशंका भी व्यक्त करते नजर आ रहे हैं कि हो सकता है नेपाल यह सब चीन के इशारे पर कर रहा हो।

गौरतलब है कि 8 मई को भारत ने उत्तराखंड राज्य के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया था, जिसे लेकर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद ही नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था।

कोरोना के 77% नए मामले महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु से, दिल्ली की मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से 10 गुना ज्यादा: अध्ययन

वुहान से फैले कोरोना वायरस महामारी ने मार्च महीने से भारत में अपना पाँव पसारना शुरू कर दिया था। दिन पर दिन कोरोना वायरस की वजह से महानगरों की स्थिति काफी नाजुक होती जा रही हैं। वहीं भारत में फैले कोरोना वायरस ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 3 लाख का आँकड़ा पार कर लिया है।

शनिवार (13 जून, 2020) को 11,458 संक्रमितों का मामला सामने आया हैं। ये एक दिन के अंदर सामने आई अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। जबकि मौतों के आँकड़ो में भी 386 की बढ़ोतरी के साथ अब कुल मरने वालों का संख्या 8,884 हो गया है।

दुनियाभर में फैले इस महामारी के आँकड़ो में भारत अब चौथे स्थान पर पहुँच गया है। जहाँ कोरोना संक्रमितों का आँकड़ा अन्य देशों के मुकाबले दुगुना या तिगुना ज्यादा है। विशेषज्ञों का दावा है कि भारत कोरोना संक्रमितों के मामले में पहले स्थान पर पहुँचने में अभी समय है। वर्तमान में कुल 3,08,993 मामले भारत में रजिस्टर्ड हैं। जिनमें 1,54,000 से अधिक लगभग 50 प्रतिशत मामले इस संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं।

प्रोफेसर शमिका रवि द्वारा ट्विटर पर पब्लिश किए गए अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग 77 प्रतिशत नए कोरोनोवायरस मामलों को महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली कोविड-19 हॉटस्पॉट नगरों में देखा जा सकता है। उन्होंने दावा किया है कि देश में कोरोनोवायरस मामले 3.1 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ बढ़ रहे हैं, जो 23 दिनों की अवधि में मामलों को दोगुना होने का संकेत देता है।

रवि ने यह बताने के लिए अपने अध्ययन के ग्राफ़ को साझा किया। जो यह दिखाता है कि कोरोनोवायरस के मामले देश भर में फैल गए हैं, लेकिन महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे हॉटस्पॉट संक्रमण के प्रमुख इलाके बने हुए हैं। उनके ट्वीट्स में संलग्न ग्राफ़ में, देखा जा सकता है कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली को छोड़कर देश भर के बाकी राज्यों में की तुलना में यहाँ मामले कितने हैं।

दूसरी ओर महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु के कोरोनावायरस हॉटस्पॉट में संक्रमण का बढ़ता प्रकोप यह भी दर्शाता है कि इन राज्यों में कोरोनोवायरस के मामलें जल्द ही चरम सीमा को पर कर जाएँगे।

भारत के कुल मृत्यु दर का 10 गुना ज्यादा दिल्ली की मृत्यु दर

वहीं दिल्ली में बढ़ते कोरोनोवायरस के मामलों के बारे में सबसे अधिक जानकारी देने वाले आँकड़े, संक्रमण के रोगियों की मृत्यु दर से पता चलता है कि दिल्ली में मृत्यु दर पूरे भारत के मृत्यु दर का 10 गुना है। जिसको देखते हुए प्रोफेसर शामिका रवि ने आगाह किया है कि दिल्ली में लगातार मृत्यु दर अभी भी बढ़ता जा रहा है।

ग्राफ के अनुसार प्रति मिलियन संक्रमण के मामले तुलना में प्रति मिलियन टेस्ट पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और गुजरात ऐसे बाहरी राज्य बने हुए हैं, जिन्हें अपनी परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है, जो कि उनके मौजूदा बढ़ते मामलों को देखते हुए अति आवश्यक है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रिमतों के आँकड़े चरम सीमा तक पहुँचने के कितने दूर है

भारत में अधिकांश राज्य अपने संक्रमण के चरम सीमा की ओर बढ़ रहे हैं, कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने यह संकेत दिए हैं कि उनके यहाँ संक्रमण के मामले अभी भी बहुत कम है। 3 जून से 7 जून और 8 जून से 12 जून के बीच की अवधि में कोरोनोवायरस के मामलों की वृद्धि की तुलना करते हुए, एक समय में नए मामलों की दर में गिरावट से पता चलता है कि कुछ राज्य जल्द ही संक्रमण के चरम सीमा तक पहुँच जाएँगे।

हालाँकि, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए संक्रमण के नए मामलों को संख्या में काफी बढ़ोतरी की है।

जम्मू और कश्मीर और कर्नाटक दो ऐसे राज्य है। जिन्होंने 3 जून से 7 जून और 8 जून से 12 जून के बीच की अवधि में बढ़ते संक्रमण दर को कम किया है। जिसका अर्थ है कि इन राज्यों में कोरोनोवायरस का प्रकोप अपनी चरम सीमा पर पहुँचने के काफी दूर हो चुका है।

‘अंकल जी, सड़ा हुआ सेब भी..’: महुआ मोइत्रा ने राज्यपाल धनखड़ पर की व्यक्तिगत टिप्पणी, कहा- वो BJP के तीर चला रहे

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को बुरा-भला कहा है। उन्होंने राज्यपाल से बहस की। शनिवार (जून 12, 2020) को महुआ ने राज्यपाल पर ‘सड़ा हुआ सेब’ वाला कमेंट किया, जिसके बाद दोनों के बीच शब्दों का वाकयुद्ध शुरू हो गया। इस दौरान महुआ ने सीमाएँ लाँघी। राज्यपाल ने कहा कि महुआ अपनी पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी की चहेती बनने के लिए ये सब कर रही हैं।

ये सब शुरू हुआ एक वायरल वीडियो को लेकर। उस वीडियो में कुछ लाशों को दिखाया गया था। कोलकाता पुलिस ने लिखा कि ये कोरोना संक्रमित मरीजों की लाशें नहीं थीं। उसने बताया कि ये ऐसी लाशें थीं, जिनका कोई रिश्तेदारों या परिवार ने क्लेम नहीं किया और उन्हें ही हॉस्पिटल से ले जाया जा रहा था। कोलकाता पुलिस ने उन्हें कोविड-19 के मरीजों की लाशें बताने वाले के ख़िलाफ़ क़ानूनी एक्शन की बात भी कही।

इस घटना को लेकर राज्यपाल ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे शर्मनाक करार दिया था। महुआ ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ममता बनर्जी सरकार पर ‘भाजपा के तीर’ चला रहे हैं और वो भी ऐसे समय में जब राज्य कोरोना वायरस, प्रवासी श्रमिक समस्या और अम्फान तूफ़ान का एक साथ सामना कर रहा है। महुआ मोइत्रा ने इसके बाद कहा कि सड़ा हुआ सेब कभी पेड़ से दूर नहीं गिरता है। कइयों ने इसे अपमानजनक टिप्पणी बताया।

इसके बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने महुआ को याद दिलाया कि उन्होंने कभी अपने ही राज्य सरकार की पंचायती योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर ऊँगली उठाई थी। उन्होंने लिखा कि पंचायती विभाग पर निशाना साधने वाली महुआ अब उन पर हमले कर के ममता बनर्जी का विश्वास जीतना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ये लाचारी वाली स्थिति है, जिसमें महुआ जैसे कई योग्य नेता फँसे हुए हैं।

इसके बाद महुआ ने राज्यपाल को ‘अंकल जी’ कहते हुए 3 बिंदु गिनाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस आधार पर अपने नेताओं को प्रमोट करती है कि किसके हाथ कितने ख़ून से रंगे हुए हैं। साथ ही उन्होंने राज्यपाल पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि आपका वकालत वाला करियर अच्छा नहीं रहा है, इसीलिए कम से कम राजभवन की प्रतिष्ठा तो बचा कर रखिए। अंत में उन्होंने कहा कि आप राजस्थान के अगले चुनाव में लड़ सकते हैं, इसके लिए फिट रहिए।

बता दें कि कुछ दिनों पहले सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि कई पंचायतें 60% का बजट भी खर्च करने में अक्षम रही है। इसके बाद राज्य के पंचायत मंत्री और उनकी ही पार्टी के नेता सुब्रत मुखर्जी ने मोइत्रा के आरोपों को नकार दिया था। इसी की याद दिलाते हुए राज्यपाल ने बंगाल के ‘कट मनी’ की बात की, जो तृणमूल वाले घूस लेते हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल में कोरोना के कारण स्थिति पहले ही बदतर है।

जुलाई 2019 में ZEE मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता और सांसद महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दायर किया था। मीडिया हाउस ने खुद को कथित तौर पर ‘चोर’ और ‘पेड न्यूज़’ कहने पर यह कदम उठाया था। आरोप था कि मोइत्रा ने ज़ी न्यूज़ के मालिक को चोर और चैनल से जुड़े लोगों को ‘अशिक्षित’ और ‘बुड़बक’ (बेवकूफ़) कहा था।

‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ दंगाइयों ने गुजराती रेस्टॉरेंट किया तबाह, भारतीयों को कहा गन्दगी: महिला ने प्रोटेस्ट के समर्थकों से पूछे सवाल

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद वहाँ ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ नाम का प्रोटेस्ट शुरू हुआ, जिसके कारण वहाँ भीषण दंगे हुए। इन दंगों की आग यूरोप में भी कई देशों तक पहुँची। ब्रिटेन में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। अब यूके में रह रही एक भारतीय महिला ने भारत के उन लोगों पर निशाना साधा है, जो ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने लंदन में भारतीय रेस्टॉरेंट को निशाना बनाया, हमला किया।

मूल रूप से गुजरात की दीक्षा ने बताया कि गुजराती समुदाय यूके में एक अल्पसंख्यक समुदाय है, यहाँ तक कि इसकी जनसंख्या वहाँ रह रहे ब्लैक लोगों से भी कम है। उन्होंने जानकारी दी कि इन सबके बावजूद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ के प्रदर्शनकारियों ने लंदन के वेम्ब्ले के ईलिंग रोड में स्थित मीरा नाम की एक भारतीय महिला के रेस्टॉरेंट पर हमला बोल दिया। दीक्षा ने कहा, “भारतीयो! तुम ब्लैक लाइव्स मैटर्स को प्रमोट करते रहो।

इस दौरान उन्होंने क्षतिग्रस्त रेस्टॉरेंट की तस्वीरें भी शेयर कीं, जिसमें चीजें इधर-उधर अस्त-व्यवस्त सी बिखरी दिख रही हैं। रेस्टॉरेंट में ऐसी तबाही मचाई गई कि सारे फर्नीचर तोड़ डाले गए और चीजों के साथ उठापटक की गई। तस्वीरों से पता चलता है कि बर्तनों को भी उठा कर इधर-उधर फेंका गया। अंदर किचन तक में जाकर दंगाइयों ने उत्पाद मचाया। चूल्हे तक को नहीं बक्शा गया। दीक्षा ने इन तस्वीरों को शेयर किया।

साथ ही उन्होंने एक अन्य तस्वीर शेयर की, जिसमें दंगाइयों ने भारत के लोगों को गाली दी है। उक्त रेस्टॉरेंट की दीवार पर दंगाइयों ने लिखा- “Fucking Indian Scum”, अर्थात भारतीयों को नीच और गन्दगी बताया गया। इसके बाद दीक्षा ने ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ का विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को दोहरे रवैये वाला रेसिस्ट बताया। उन्होंने कहा कि दूसरे अल्पसंख्यकों को लूटना उनके सही चरित्र को दर्शाता है।

दीक्षा ने रेस्टॉरेंट्स में किए गए हमले के बाद की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि ये लोग प्रदर्शनकारी नहीं हैं बल्कि लुटेरे हैं, तबाही मचाने वाले हैं। लंदन में प्रदर्शन हिंसक हो चुका है, जिसके बाद मेट्रोपोलिटन पुलिस कमांडर बस जावीद ने चेताया है कि इस बार पिछले सप्ताह की तरह हिंसा नहीं होनी चाहिए। यहाँ प्रोटेस्ट के साथ-साथ ‘काउंटर प्रोटेस्ट’ भी चल रहा है। ब्रिटेन में अब तक 200 प्रदर्शन हो चुके हैं और 130 को गिरफ़्तार किया गया है।

हाल ही में कंगना रनौत ने भी उन सेलेब्रिटीज को सवालों के घेरे में लिया था, जो पालघर में साधुओं की हत्या पर तो चुप थे लेकिन ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ पर खुल कर बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी बोला था कि कैसे एक तरफ ये लोग ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ जैसे आंदोलनों के समर्थन में खड़े होते हैं, वहीं दूसरी ओर यही लोग काले को गोरा बनाने वाली क्रीम का समर्थन भी करते हैं। कंगना ने पूछा था कि क्यों मशहूर हस्तियाँ, राजनेता अपने आस-पास हुए घिनोंने अपराधों की निंदा नहीं करते है?

सनातन डेका की हत्या के बाद अरमान अली ने रितुपर्णा का गला ‘हलाल’ किया, असम में डरे हुए हिन्दुओं ने किया प्रदर्शन

कुछ समय पहले ही असम के सब्जी विक्रेता सनातन डेका की मजहबी युवकों द्वारा हत्या के बाद दिन-दहाड़े रितुपर्णा पेगु की निर्मम हत्या से असम के लोगों में आक्रोश और भय देखा जा रहा है। रितुपर्णा पेगु (Rituparna Pegu) बारिश से बचने के लिए जिस दुकान में कुछ देर के लिए रुका था, वहाँ वो तीन साल तक काम कर चुका था। लेकिन शायद वहाँ से नौकरी छोड़ देने के कारण अरमान होम फर्निशिंग का मालिक अरमान और उसका परिवार उससे इतना नाराज था कि उन्होंने उसे दुकान में ना बैठने को कहा।

नूनमाटी इलाके में ही रहने वाले एक व्यक्ति ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि जब 26 वर्षीय रितुपर्णा पेगु ने कॉमर्स मार्केट इलाके में बारिश रुकने तक अरमान की दुकान पर ठहरने की बात कही तो अरमान और उसका परिवार उसके साथ गाली-गलौच करता हुआ उसे दुकान के अंदर खींच ले गया, जहाँ अरमान के बेटे ने उससे मारपीट शुरू कर दी।

देखते ही देखते पूरा परिवार रितुपर्णा पेगु पर झपट पड़ा और वो उसे धक्के मारकर दुकान से बाहर ले गए। इससे पहले की वो सम्भल पाता, अरमान अली के बेटे ने रितुपर्णा की पीठ पर चाकू से हमला कर दिया और वो वहीं पर गिर गया। ऑपइंडिया से बातचीत में व्यक्ति ने बताया कि इसके बाद अरमान अली ने रितुपर्णा पेगु का गला ‘हलाल’ शैली में काट दिया।

उन्होंने बताया कि हंगामे के समय वहाँ मौजूद लोगों ने पुलिस को कॉल लगाई लेकिन पुलिस वहाँ से कुछ ही दूरी पर मौजूद होने के बावजूद भी अपनी सहूलियत के अनुसार फ़ौरन ना पहुँचते हुए पुलिस कुछ देर से आई, तब तक रितुपर्णा पेगु की मौत हो चुकी थी।

लोगों का कहना है कि नूनमाटी पुलिस का पिछला रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है और वो अक्सर अपराध के मामलों को दबा दिया करते हैं। पिछले कुछ अपराध की घटनाओं का जिक्र करते हुए युवक ने ऑपइंडिया को बताया कि ऐसे भी मामले सामने आए जब नूनमाटी पुलिस ने सबूतों को खुद भी गायब कर दिया और इसके बारे में स्थानीय लोग कभी भी कुछ नहीं कर पाए। लोगों के विरोध प्रदर्शन के बीच असम के मुख्यमंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने आज शनिवार को रितुपर्णा पेगु की हत्या की सीआईडी (CID) जाँ​च का आदेश दिया है।

वहीं, युवक ने बताया कि एक ओर जहाँ स्थानीय लोग रितुपर्णा पेगु की मौत पर एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं अखिल असम छात्र संघ (AASU) इस घटना में बिहार के लोगों को पीड़ित बताने का काम करने का भी प्रयास कर रहा है। युवक ने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण इस इलाके में बिहार के लोग काफी समय पहले से ही यहाँ बड़ी जनसंख्या में रहते हैं।

हालाँकि, जिस कॉमर्स मार्केट में रितुपर्णा की हत्या की गई उस 50-60 मीटर के इलाके में समुदाय विशेष के लोगों की ही दुकाने मौजूद हैं और वो महज पाँच-छ सालों से यहाँ पर बिजनेस कर रहे हैं, बावजूद इसके, उनका इस इलाके में काफी दबदबा है।

‘हम भी इन्हीं बाजारों में जाते हैं, वे हमें उसी तरह मारेंगे’

रितुपर्णा की हत्या के बाद पुलिस स्टेशन में लोगों ने इकट्ठा होकर आरोपितों पर तुरंत कार्रवाई और कठोर सजा की माँग की है। पुलिस स्टेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है- “हम इन्हीं सड़कों पर घूमते हैं, हम इन्हीं बाजारों में जाते हैं, वे हमें भी उसी तरह मारेंगे।”

रितुपर्णा की हत्या से आक्रोशित प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों ने लगाए ‘जय श्री राम’ और ‘जोई ऐ एक्सोम’ के नारे

इन प्रदर्शनकारियों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने ‘जय श्री राम’ और ‘जोई ऐ एक्सोम’ (Joi Aai Axom) के नारे भी लगाए। सार्वजनिक और निजी संपत्ति को किसी भी संभावित दंगों या क्षति को रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मी मौके पर मौजूद थे।

इन प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में क्रूरतापूर्वक मारे गए सनातन डेका और रितुपर्णा पेगु की हत्या पर चिंता जताई, उनका कहना है कि ये दोनों कट्टरपंथियों द्वारा मारे गए हैं जो कि चिंता का विषय है।

ज्ञात हो कि 22 मई को सनातन डेका अपने घर के पीछे उगाई सब्जियों को साइकिल पर रखकर बेचने निकले थे। रास्ते में उनकी साइकिल दो युवकों की स्कूटी से टकराई और स्कूटी पर खरोंच आ गई। स्कूटी चालकों को वह मामूली सी खरोंच देखकर इतना गुस्सा आया कि पहले उन्होंने सनातन को खुद पीटा और फिर अपने तीन अन्य साथियों को बुलवाकर उसे इतना मारा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

रितुपर्णा पेगु की इस हत्या से गुस्साए कुछ प्रदर्शनकारियों ने नोनमाटी पुलिस स्टेशन से आरोपितों के निवास तक रास्ते पर पैदल मार्च किया, जहाँ उन्होंने कुछ वाहनों को भी रोका और एक बस का शीशा भी तोड़ दिया।

अपने सात महीने के बच्चे के साथ मृतक रितुपर्णा की विधवा पत्नी ने भी शनिवार को अपने पति के लिए न्याय और उनके हत्यारों के लिए सजा की माँग करते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी शेयर गए हैं, जिनमें अपने पति के शव को अस्पताल ले जाते वक्त मृतक की पत्नी को बच्चे के साथ मदद के लिए गुहार लगाते हुए देखी जा रही हैं।

मृतक रितुपर्णा की पत्नी और साथ माह का बच्चा (चित्र साभार – guwahatiplus)

असम में समुदाय विशेष द्वारा किडनेपिंग के भी अपराध

शनिवार (जून 13, 2020) को ही एक अन्य घटना सामने आई है, जिसमें महिबुल इस्लाम ने एक युवती का अपहरण कर लिया। महिबुल इस्लाम ने बारपेटा में सरथेबरी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कावामीरी रिजर्व नंबर 6 में सुदेव सरकार की 13 वर्षीय बच्ची का उसके घर से अपहरण कर लिया।

आरोपित महिबुल इस्लाम का घर बरपेटा जिले के शालमारा के भालुकी में है। महिबुल इस्लाम ने हवली के अब्दुल जलील की मदद से इस किशोरी का अपहरण किया है। महिबुल इस्लाम और अब्दुल जलील के खिलाफ सरथेबारी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस किशोरी की तलाश कर रही है।

असम में समुदाय विशेष के अपराधों की बढ़ रही घटनाओं से लोग आक्रोशित होने के साथ-साथ डरे हुए भी हैं। ऐसी ही घटनाएँ पाकिस्तान में भी आए दिन सामने आती रहती हैं, जहाँ समुदाय विशेष वाले अल्पसंख्यक हिन्दुओं की बेटियों को उनके घर से अगवा कर उनका बलात्कार और जबरन इस्लाम में धर्मांतरण तो करवाते ही हैं, साथ ही उन्हें दूसरे मजहब में निकाह करने पर भी मजबूर करते हैं।

देखें इस मामले से जुड़ा वीडियो:

मुस्लिम दंगाई भीड़ की प्रतिक्रिया में 25 फरवरी को बना था व्हाट्सएप ग्रुप, दिल्ली दंगे में एक और चार्जशीट दाखिल

उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान एक व्हाट्सएप ग्रुप की भूमिका सामने आई है। मामले में चार्जशीट दायर किया गया है। इसे 25 फरवरी की दोपहर से 26 फरवरी की मध्यरात्रि के बीच बनाया गया था।

उल्लेखनीय है कि 23 फरवरी को दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे शुरू हुए थे। इस दौरान इस्लामवादी मुस्लिम भीड़ काफी उग्र हो गई थी। बता दें कि ऐसी ही एक दंगाई भीड़ ने आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी थी। उनका शव 26 तारीख की दोपहर को चाँद बाग के नाले से मिला था।

जानकारी के मुताबिक यह व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य दंगों के दौरान हुई 9 हत्याओं के जिम्मेदार हैं। इस ग्रुप में लोकेश सोलंकी समेत और भी लोग शामिल थे। शुरुआत में ग्रुप में 125 सदस्य थे। बाद में इसमें से 47 सदस्यों ने ग्रुप को छोड़ दिया। ग्रुप के एडमिन का नाम ऋतिक बताया जा रहा है। ग्रुप के सदस्यों ने एक जगह पर डेरा डाला और फिर वहाँ से गुजरने वाले सभी राहगीरों का पहचान पत्र चेक करके उनकी हत्या कर देते थे। पुलिस ने बताया कि 9 लोगों की हत्या एक ही जगह पर की गई।

इस ग्रुप के सदस्यों द्वारा मारे गए लोगों में अमीन, हमजा, और दो भाई- हाशिम अली और आमिर अली शामिल थे। 12 आरोपितों में से 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में चार्जशीट दायर कर दी गई है। इससे पहले ये बात सामने आई थी कि पुलिस ने पाया कि 25 एवं 26 फरवरी की रात एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें 125 सदस्य थे।

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया कि ग्रुप के दो एक्टिव सदस्यों से पूछताछ के दौरान उनका मोबाइल फोन स्कैन किया गया और तभी इस व्हाट्सएप ग्रुप के 23 फरवरी के बनाए जाने की बात सामने आई।

बयान में कहा गया कि कुछ ग्रुप के कुछ सदस्य केवल मैसेज भेज और प्राप्त कर रहे थे, जबकि कुछ लोग सक्रिय रुप से दंगे में शामिल थे। बयान में आगे कहा गया है कि दोनों मृतक सगे भाई थे, जिनकी 26 फरवरी को रात 9 से 10 बजे के बीच हत्या कर दी गई थी। सभी आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनके कई जमानत आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने दंगों को लेकर कई चार्जशीट दाखिल किया है। पुलिस ने चार्जशीट में आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था। वो खालिद सैफी से भी सम्पर्क में था। चार्जशीट में कहा गया है कि अंकित शर्मा की हत्या में भी ताहिर हुसैन का हाथ है। 

वहीं हेड कॉन्सटेबल रतनलाल की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करते हुए खुलासा किया कि 2 दिन पहले 22 फ़रवरी को ही 50 लोगों के एक समूह ने बैठक की थी, जहाँ हिंसा की पूरी साज़िश रची गई। दंगाइयों ने अपने घर के बच्चों व बुजुर्गों को पहले ही घर के भीतर रहने को बोल दिया था और ख़ुद हथियार लेकर निकले।

‘मथुरा और काशी को पुनः प्राप्त करने में बाधा बन रहा है धार्मिक स्थल एक्ट 1991’: सुप्रीम कोर्ट पहुँचा पुरोहित महासंघ

हिंदू पुजारियों के संगठन ‘विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ’ ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की धारा 4 धार्मिक स्थल (विशेष प्रोविजन) एक्ट, 1991 को चुनौती दी है। इसमें अयोध्या में राम जन्मभूमि को छोड़कर अन्य पवित्र स्थलों का धार्मिक चरित्र वैसा ही बनाए रखने का प्रावधान है। इस ‘धार्मिक स्थल एक्ट’ को रद्द कर अयोध्या काशी जैसे हिन्दू स्थल को पुनः प्राप्त करने की ओर क़दम बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह कानून काशी और मथुरा जैसी विवादित धार्मिक संरचनाओं को फिर से प्राप्त करने के मार्ग में एक बाधा बना हुआ है।

अधिनियम की धारा 4 (1) में, “यह घोषित किया जाता है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा।” जैसे किसी भी मस्जिद को मंदिर में नहीं बदला जा सकता है और वहीं मंदिर को भी मस्जिद या किसी और धर्म में नहीं बदला जा सकता हैं।

हिंदू संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) ने अधिनियम के विवादास्पद सेक्शन को अल्ट्रा वायर्स, अर्थात् कानूनी शक्ति या अधिकार से परे और असंवैधानिक घोषित करने की माँग की है। राममंदिर को छोड़ कर यह कदम कई विवादित धार्मिक स्थलों को दोबारा से प्राप्त करने के लिए कानूनी रास्ते को खोल सकता है।

याचिका में कहा गया हैं कि इस एक्ट की वजह से धार्मिक संपत्तियों पर दूसरे धर्म के लोगों के अतिक्रमण को लेकर हिंदुओं का अधिकार सीमित हैं। हिंदू संगठन ने तर्क दिया कि अधिनियम के उक्त प्रावधानों ने पीड़ित पक्षों को सिविल सूट के माध्यम या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार से अपनी शिकायतें रखने की बात कही गई है।

याचिका में कहा गया है कि विवादास्पद अधिनियम ने 15 अगस्त, 1947 से पहले हिंदू धार्मिक संरचनाओं के धार्मिक चरित्र की पुनः स्थापना को रोक दिया था, जो अन्य धर्मों के अनुयायियों द्वारा अतिक्रमण कर कब्जा किया गया था। हिंदू बॉडी ने तर्क दिया कि संसद ने असंवैधानिक तरीके से इस प्रावधान को लागू किया। जिसके चलते अदालती कार्यवाही के माध्यम से विवादों का समाधान नहीं हुआ।

इस याचिका में दावा किया गया है कि संसद ने लोगों को अदालत पहुँचने से रोकने का काम कर के क़ानून बनाने के अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है। जबकि ये हमारे संविधान के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है। हिंदू संगठन ने आगे कहा कि अनुच्छेद 32 (अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपाय) और अनुच्छेद 226 (निर्देशों को जारी करने के लिए उच्च न्यायालयों को अधिकार देता है) पीड़ित नागरिकों को अपील के लिए कोर्ट जाने का अधिकार है और संसद इस शक्ति को छीन नहीं सकता।

पूजा अधिनियम की धारा 4 की वजह से खत्म सभी कार्यवाही की बहाली का माँग करते हुए, हिंदू बॉडी ने कहा कि भक्तों को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म के अधिकार की पूर्ण गारंटी है। उन्होंने दोहराया कि “संसद हिंदू भक्तों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उनके धार्मिक स्थलों को वापस पाने के लिए रोक नहीं सकती है और न ही कोई भी कानून बना सकती है जो भक्तों के निहित धार्मिक अधिकार को उनसे छीने या उनके धर्म को अपमानित करता हो और न ही पूर्वव्यापी प्रभाव से कोई कानून बना सकती है।”

ब्लड डिसऑर्डर से पीड़ित चंद्रशेखर आजाद ने किया रक्तदान, उसके डॉक्टर ने भी छिपाई बीमारी: AIIMS के पत्र में खुलासा

हाल ही में एक्टिविस्ट प्रेरणा थिरुवाईपट्टी ने स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स दिल्ली को पत्र लिख कर ‘भीम आर्मी’ के मुखिया चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ द्वारा हाल ही में किए गए रक्तदान की जाँच कराने को कहा था। प्रेरणा ‘ऑल इंडिया दलित यूथ एसोसिएशन’ की सदस्य हैं। उन्होंने दावा किया था कि आजाद ख़ून की एक ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं, जिससे उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए था। अब एम्स ने प्रेरणा को लिखित में बताया है कि चंद्रशेखर आजाद ने रक्तदान के समय बीमारी होने की कोई बात नहीं बताई थी

यहाँ तक कि चंद्रशेखर आजाद के डॉक्टर हरजीत भट्टी ने भी इस बारे में एम्स प्रशासन को कुछ नहीं बताया। एम्स दिल्ली ने बताया है कि चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण और डॉक्टर हरजीत सिंह भट्टी जैसे लोगों ने रक्तदान अभियान में स्वेच्छा से आकर ब्लड डोनेट किया। आजाद ने जानकारी दी कि उन्होंने पिछली बार 6 महीने पहले रक्तदान किया था और वो ऐसी किसी भी बीमारी से पीड़ित नहीं है, जिससे उनका ख़ून लेने वाले को कोई नुकसान पहुँचे।

एम्स ने इस पत्र में बताया है कि जब सोशल मीडिया पर इसे लेकर हंगामा हुआ कि चंद्रशेखर आजाद पॉलिसाइथीमिया से पीड़ित है। उनका ओपीडी कार्ड भी सोशल मीडिया पर हाइलाइट किया गया। इसके बाद एम्स ने उनके ख़ून को डिस्कार्ड कर दिया, अर्थात किसी अन्य व्यक्ति को वो ख़ून नहीं चढ़ाया जाएगा। अब लोग जवाब माँग रहे हैं कि चंद्रशेखर आजाद ने 6 महीने पहले कहाँ और किसे ब्लड डोनेट किया था?

प्रेरणा ने पिछले महीने ही एम्स और स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिख कर इस बीमारी के बारे में आगाह किया था। उन्होंने सोशल मीडिया में चंद्रशेखर का रक्तदान करते हुए फोटोज देख कर ये पत्र लिखा था। प्रेरणा द्वारा जाँच की माँग के बाद डॉक्टर प्रशांत शर्मा ने इस ओर ध्यान दिलाया था कि ऐसी बीमारी से पीड़ित लोगों को रक्तदान नहीं करना चाहिए। उन्होंने ट्विटर पर बताया कि ऐसा कर के आजाद ने दूसरे की ज़िंदगी दाँव पर लगा दी है।

उन्होने आजाद के ब्लड डिसऑर्डर की बात करते हुए कहा था कि उनका रक्तदान पब्लिसिटी स्टंट से ज्यादा कुछ भी नहीं था। उन्होंने आजाद का डॉक्टर होने के नाते डॉक्टर भट्टी को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। जबकि अदालत में जमानत के लिए डॉक्टर भट्टी ने ही इस बीमारी के बारे में बताया था। न तो रक्तदान के समय डिक्लेरेशन में ये डाला गया और न ही भट्टी ने आजाद को रक्तदान करने से रोका।

डॉक्टर भट्टी वही डॉक्टर हैं, जिन्हें न्यूज़लॉन्ड्री और बरखा दत्त जैसों ने लोगों को गुमराह करने के लिए एम्स का प्रतिनिधि बना कर पेश कर दिया था। वो एम्स में कार्यरत नहीं हैं लेकिन एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के हेड रहे हैं। जेएनयू हिंसा के समय उन्होंने बयान दिया था कि एबीवीपी के छात्रों के घाव दिखावटी हैं जबकि वामपंथी छात्रों को सही में चोट लगी है और वो घायल हुए हैं।

डॉ हरजीत सिंह भट्टी कॉन्ग्रेस पार्टी के अखिल भारतीय चिकित्सा सेल के राष्ट्रीय संयोजक हैं। पिछले साल फरवरी में उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी में इस पद पर नियुक्त किया गया था। भट्टी सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी ही नहीं बल्कि भीम आर्मी के भी काफी नजदीकी हैं। वह न केवल आजाद के डॉक्टर हैं, बल्कि वो उनके समर्थक भी हैं, क्योंकि उन्हें हैशटैग #AzaadiForAzad के साथ ट्वीट पोस्ट करते हुए देखा गया है।

हमलोग घर के अंदर थे, चारों तरफ से आग लगा दिया, रुपए-जेवर सब लूट ले गए: जौनपुर की दलित पीड़िता

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के भदेठी गॉंव में 9 जून को मुस्लिमों ने दलित बस्ती पर हमला कर उनके घरों को फूॅंक दिया था। इस घटना का मास्टरमाइंड सपा नेता जावेद सिद्दीकी बताया जाता है जो गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़ित दलितों की जुबानी इस घटना का खौफनाक ब्यौरा भी सामने आ रहा है।

इसी कड़ी में मीडिया से बात करती दलित पीड़ता पूजा का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। पूजा बताती है, “हम लोग घर के अंदर थे। जब मार होने लगी तो हम लोग और अंदर चले गए। जब अंदर चले गए तो सब लोग दरवाजा तोड़ने लगे। ईंट-पत्थर से मारने लगे। बाहर गोली चलने लगी। गोली चलने लगी तो हम लोग डर से बाहर नहीं निकले। डर से जब नहीं निकले तो वे लोग (मुस्लिमों की भीड़) चारों तरफ से आग लगा दिए।”

पूजा ने बताया, “हम लोग अंदर पड़े थे। जब वे लोग आग लगाकर चले गए तब हम लोग किसी रास्ते से निकलकर अपना जान बचाकर दूसरे गॉंव चले गए। रात भर हमलोग दूसरे गॉंव में थे।”

उसने बताया, “हमलोग बहुत डर गए थे क्योंकि उनलोगों की संख्या हजार-पॉंच सौ की थी। इससे हम लोग बहुत ज्यादा डर गए। पहले लाठी-डंडा से मार रहे थे। जब उससे डर गए तो ईंट-पत्थर चलाने लगे। उसके बाद गोली चलने लगी। किसी की गाड़ी लूट लिए। दुकानें थी, पैसे कौड़ी, गहने भी ले लिए। जिसके पास जेवर था ले लिए। सारे सामान ले गए।”

आपको बता दें कि सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को गाँव के ही शहबाज नामक लड़के का दलित बस्ती के बच्चों से बकरियाँ चराने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में दिन में कहासुनी हो गई थी। रात में मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से लैस दलित बस्ती में हमला बोल दिया था।

इस दौरान आरोपितों ने हवाई फायरिंग, वाहनों में तोड़फोड़ और कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। घटना में एक भैंस और तीन बकरियाँ जल कर राख हो गईं। वहीं एक सिलेंडर में लगी आग के बाद हुए विस्फोट से भारी नुकसान हुआ था।

इस मामले में पुलिस ने 57 लोगों को नामजद और 100 लोगों को अज्ञात करते हुए विभिन्न धाराओ में मुकदमा दर्ज किया था। साथ ही पुलिस ने 35 लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद सीएम योगी ने मामले का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

बकौल पूजा इस समय उन लोगों के खाने-पीने का सारा इंतजाम सरकार कर रही है। सरकारी मदद पर उसने संतुष्टि भी जताई है।