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पिंटू बन रियाज ने हिंदू नाबालिग को फँसाया: बलात्कार, दरगाह में पिटाई, जबरन निकाह और धर्मांतरण की कोशिश

लव जिहाद की कई घटनाएँ मीडिया में खबरें नहीं बनने के कारण दब जाती हैं। या फिर उन्हें साधारण हेडलाइन के साथ परोस कर मीडिया सारे डिटेल्स छिपा लेता है। राजस्थान के राजसमंद से ऐसी ही एक घटना सामने आई है।

पुलिस ने बलात्कार, अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने के आरोप में रियाज और उसके दो साथियों सुलेमान मोहम्मद और उसके अनवर को गिरफ्तार किया है। घटना देवगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले लसानी गाँव की है।

पीड़िता के साथ पहले तो बलात्कार किया गया। फिर धमकाया गया कि अगर उसने मुँह खोला तो वीडियो क्लिप्स वायरल कर दिए जाएँगे। इसके बाद रियाज़ और उसके साथी पीड़िता पर निकाह और इस्लाम कबूल करने का दबाब बना रहे थे।

पीड़िता के साथ जब शारीरिक सम्बन्ध बनाए गए तब वह नाबालिग थी, इसलिए पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। 19 साल की पीड़िता ने पीड़िता द्वारा पुलिस को दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, एक दिन रियाज़ नामक व्यक्ति उसके घर आया और उसने पानी माँगा। उस समय उसने ये नहीं बताया कि वो समुदाय विशेष का है। उसने अपना नाम पिंटू बताया।

बाद में उसने धीरे-धीरे लड़की को फाँसना शुरू किया और फिर उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किया। कुछ दिनों बाद ये राज़ खुला कि रियाज़ ने अपने मजहब की पहचान छिपाई थी और छद्म हिन्दू नाम रख कर उसे फँसाया था। लड़की ने तत्काल उससे रिश्ते तोड़ लिए, लेकिन आरोपित रियाज़ उसे निकाह के लिए बार-बार बोलता रहा। बाद में उसने लड़की के साथ बलात्कार किया और निकाह न करने पर वीडियो क्लिप्स वायरल करने की धमकी दी।

जून 1 को जब लड़की काम से अपने घर लौट रही थी तो रियाज़ अपने दो दोस्तों सुलेमान और अनवर के साथ आया और पीड़िता को खारी नदी के पास स्थित एक दरगाह में लेकर गया। वहाँ उसके साथ इस्लामी धर्मान्तरण करने के लिए जोर-जबरदस्ती की गई और साथ ही निकाह के लिए धमकाया गया। जब पीड़िता ने इनकार किया तो तीनों ने मिल कर उसकी बुरी तरह पिटाई की और फिर पूरे परिवार को तबाह कर घर जला डालने की धमकी दी। पूरे परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी गई।

पुलिस ने बताया कि दरगाह में जब ये सब किया जा रहा था तो लड़की जोर-जोर से रोने लगी। हंगामे की आवाज़ सुन कर पास के ही एक मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों ने दौड़ कर पीड़िता को बचाया। इसके बाद वो वहाँ से भाग निकली। जब इस ख़बर की भनक लोगों को लगी तो नदी किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए, जिसके बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई। पुलिस ने वहाँ पहुँच कर स्थिति संभाली।

हाल ही में मेरठ से लव जिहाद में एक लड़की की बेरहमी से हत्या की ख़बर आई थी। इस मामले में आरोपित शाकिब ने खुद को अमन बताकर लड़की को फॅंसाया था।

कुछ​ दिन इंतजार करें, पीओके खुद कहेगा हम भारत के साथ रहना चाहते हैं: अजय पंडिता को नमन कर बोले राजनाथ

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (जून 14, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘जम्मू जन संवाद रैली’ को संबोधित किया। रक्षा मंत्री ने रैली की शुरुआत जम्मू-कश्मीर में वीरगति को प्राप्त हुए सुरक्षाकर्मी और पुलिस के जवानों को नमन करते हुए की। उन्होंने हिंदू सरपंच अजय पंडिता को भी नमन किया।

रक्षा मंत्री ने कहा, “कश्मीर में सरपंच अजय पंडिता की कायरतापूर्ण निर्मम हत्या की गई है, मैं उनकी स्मृति को नमन करता हूँ। इसके साथ ही मैं पंडित प्रेमनाथ डोगरा और 1947 में कश्मीर में तिरंगा फहराने वाले मोहम्मद मकबूल शेरवानी को भी नमन करता हूँ।”

इस दौरान राजनाथ सिंह ने भारत-चीन सीमा विवाद, कोरोना संकट, अर्थव्यवस्था समेत कई मुद्दों पर बात की। राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना काल में मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत की प्रशंसा की है।

भारत-चीन सीमा विवाद पर राजनाथ सिंह ने कहा कि जो भी विवाद पैदा हुआ है, उस पर इस समय सैन्य लेवल पर बात जारी है। चीन ने भी इच्छा व्यक्त की है कि बातचीत के द्वारा इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। हमारी कोशिश भी यही है कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के द्वारा इसका समाधान निकाला जाए। राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं विपक्ष को बताना चाहता हूँ कि हमारी सरकार किसी को भी इस मामले में अँधेरे में नहीं रखेगी।”

राजनाथ सिंह ने कहा, “दुनिया के कई मजबूत देश कोरोना महामारी के कारण लड़खड़ा गए हैं। भारत में प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट को चुनौती के रूप में स्वीकार किया और कई बड़े और अहम फैसले लिए। भारत ने कोरोना संकट के दौरान अपने स्वास्थ्य सुरक्षा के ढाँचे को भी अधिक मजबूत किया है।”

आर्टिकल 370 का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले कश्मीर में ‘कश्मीर की आजादी’ की माँग को लेकर प्रदर्शन होते थे। पाकिस्तान और आईएसआईएस के झंडे दिखाई देते थे, लेकिन अब सिर्फ तिरंगा दिखाई देता है।

पीओके के बारे में राजनाथ सिंह ने कहा, “कुछ दिन इंतजार कीजिए, पीओके से ही माँग होगी कि हम भारत के साथ रहना चाहते हैं, पाकिस्तान के कब्जे में नहीं। मैं आपको बताना चाहूँगा कि जिस दिन यह होगा, हमारी संसद का भी संकल्प पूरा हो जाएगा। मौसम बदल चुका है और हमारे चैनल्स मुजफ्फराबाद-गिलगिट का तापमान, दर्जा हरारत बता रहे हैं। ये दर्जा हरारत बताने के कारण अब इस्लामाबाद में भी कुछ हरारत महसूस होने लगी है। इसलिए वे कुछ ज्यादा शरारत करने पर आमादा हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाना 1952 से ही भाजपा के घोषणा-पत्र में शामिल रहा है। राजनीतिक पार्टियाँ कहती थीं कि ये मुद्दे भाजपा सिर्फ राजनीति करने के लिए उठाती है। उन्होंने कहा, “हमने सरकार में आने 100 दिन के अंदर इसे हटा दिया। यह साबित कर दिया कि भाजपा जो कहती है वो करती है। हम भारत की राजनीति में भरोसा टूटने नहीं देंगे। किसी ने कहा है-मोदी दर्द की रात गई, गम का खजाना भी गया, मोदी तेरे हिम्मत से दाग पुराना भी गया। अनुच्छेद 370 बहुत पुराना दाग था, जो अब खत्म हो गया है।’’

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार ने 50 बड़े काम किए हैं। यहाँ पर आईआईटी और एम्स जैसे संस्थान खोलने की योजना है। उन्होंने कहा, “2014 से 2019 तक 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक हमारी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए दिए। इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र सरकार से पैसे मिलते थे। हालाँकि, यहाँ भ्रष्टाचार का बोलबाला था। केंद्र की ओर से भेजे गए पैसे कहाँ जाता था, पता नहीं चलता था। कई ऐसे अलगाववादी नेता थे, जो भारत सरकार के पैसे से मजे में रहते थे। कभी-कभी वे पाकिस्तान की वकालत करने में भी नहीं चूकते थे। अब उनकी कमर टूट गई है। कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकी मारे जा रहे हैं।”

रक्षा मंत्री ने कहा, “1984 में जब हमें मात्र 2 सीटें प्राप्त हुई थी, तो राजनीतिक विश्लेषकों ने ये कहना शुरू कर दिया था कि भाजपा समाप्त हो जाएगी। लेकिन उस समय के हमारे नेता आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और संकल्प लिया। जिसका परिणाम आज आप देख रहे हैं कि 2 से लेकर दोबारा सरकार बनाने तक की यात्रा हमने की है। भाजपा ने जो कहा अवसर मिलते ही उस काम को पूरा किया। भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो कहती है, वह करती है।”

उन्होंने आगे कहा, “6 वर्षों में हमारी सरकार ने बहुत सारे बुनियादी काम किए हैं। लगभग 18500 गाँव के लोग आजादी के 70 साल बाद भी बिना बिजली के रहते थे। हमने कुछ ही महीनों में सभी घरों तक बिजली पहुँचाई। कोई सोच नहीं सकता था कि देश के सभी नागरिकों का बैंक खाता बनेगा, लेकिन हमारी सरकार ने इसे मुमकिन किया। हमारा संकल्प है कि 2022 आते-आते हम किसानों की आमदनी दुगनी कर देंगे। एक देश में एक बाजार होना चाहिए। किसान कहीं भी अपना सामान बेच सकते हैं।”

इस्लामी आतंकियों का नरसंहार: 10 साल में 60000 को मार डाला, ताजा हमलों में 60 मरे, बोको हराम ने नाइजीरिया को खून से साना

पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजीरिया में इस्लामिक आतंकियों का नरसंहार जारी है। शनिवार (13 जून 2020) को बोर्नो राज्य में दो अलग-अलग स्थानों पर हमले में 20 सैनिकों सहित 40 की मौत हो गई। बीते 10 साल में 60 हजार से ज्यादा लोग इस्लामी आतंकवाद की भेंट चढ़ चुके हैं।

इंटरनेशल कमिटी ऑन नाइजीरिया (Icon) के रिसर्च के हवाले से द इंटरनेशनल सोसायटी फॉर सिविल लिबर्टीज और रूल ऑफ लॉ ने बताया है कि 2010 के बाद से आतंकवाद की वजह से नाइजीरिया में साठ हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं। 43 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या तो अकेले बोको हराम ने की है।

आतंकियों का ताजा हमला बोर्नो के मोनगुनो और नागनजई जिलों में हुआ है। द हिंदू के मुताबिक आतंकियों ने इलाके के सरकारी क्षेत्र को अपना निशाना बनाया। दो आपदा सहायता कार्यकर्ता और तीन स्थानीय नागरिकों ने रायटर को बताया कि शनिवार सुबह करीब 11 बजे आतंकवादी रॉकेट लॉन्चर सहित भारी हथियारों के साथ इलाके में आए।

उन्होंने 20 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान आतंकियों ने एक पुलिस स्टेशन और उस एरिया के संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमैनेटेरियन हब को आग के हवाले कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि आतंकी इसके बाद भी इलाके में करीब तीन घंटे तक खुले में घूमते रहे। आतंकियों की गोलीबारी में सैकड़ों आम नागरिक घायल हो गए।

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने बताया कि आतंकियों ने स्थानीय भाषा ‘होसा’ में लिखे पर्चे वितरित किए। इसमें वहाँ के निवासियों को मिलिट्री, पश्चिमी श्वेत ईसाई और अन्य नास्तिकों के साथ काम न करने की चेतावनी दी गई है।

एक अन्य आतंकियों ने नागनजई में अंजाम दिया। आतंकी मोटरसाइकिल और ट्रकों पर सवार होकर पहुँचे थे। हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए। पिछले दिनों इसी इलाके के गुबियो में आतंकवादियों ने हमला कर 69 लोगों को मार डाला था।

एक्शन में अमित शाह: दिल्ली में 6 दिन में 3-गुणा होंगे कोरोना टेस्ट, 8000 बेड के साथ मिलेंगे 500 रेलवे कोच

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को कंट्रोल में लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों के साथ हालात पर चर्चा करने के लिए रविवार (14 जून, 2020) की सुबह बैठक की।

11 बजे से गृह मंत्रालय में शुरू हुई इस बैठक में दिल्ली की मौजूदा स्थिति को लेकर करीब 1 घंटे 20 मिनट चर्चा की गई। बैठक में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सुविधाएँ, बढ़ते मरीजों के लिए बेड, कोरोना को निपटाने के लिए एहतियात कदम उठने को लेकर बात की गई।

बैठक की समाप्ति के बाद अमित शाह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली की जनता की सुरक्षा व इस संक्रमण को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में लिए गए अहम फैसले

  1. दिल्ली में बढ़ते मरीज और घटते बेड की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत 500 रेलवे कोच दिल्ली को देने का निर्णय लिया है।
  2. आइसोलेशन वार्ड में बदले गए रेलवे के 500 कोच के अंदर 8000 बेड होंगे। इसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए सभी सुविधाओं मौजूद होंगी।
  3. दिल्ली के कंटेनमेंट जोन में कॉन्‍टैक्‍ट ट्रेसिंग अच्छे से करने के लिए घर-घर जाकर हर व्यक्ति का व्यापक स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा। साथ ही इसकी रिपोर्ट 1 हफ्ते के अंदर ही आ जाएगी। जिससे संक्रमित व्यक्ति का पता जल्द लगने की वजह से संक्रमण को रोका जा सकेगा।
  4. हर व्यक्ति के स्वास्थ्य को मद्देनजर रखते हुए बेहतर मॉनिटरिंग के लिए सबके मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करवाया जाएगा।
  5. संक्रमण को रोकने के लिए अगले दो दिन में कोरोना की टेस्टिंग को बढ़ाकर दो गुना किया जाएगा और 6 दिन बाद टेस्टिंग को बढ़ाकर तीन गुना कर दिया जाएगा।
  6. केंद्र ने कोरोना के बढ़ते मामलों और हालात पर नजर रखने के लिए 5 वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली सरकार में तैनाती की भी बात कही है।
  7. सरकार ने स्काउट गाइड, एनसीसी, एनएसएस व अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं को इस महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं में वॉलंटियर के नाते जोड़ने का निर्णय लिया है।
  8. केंद्र सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के 60% कम में रेट में कोविड-19 के बेड को सरकार को देने के लिए तय किया है।
  9. कोरोना काल में मरीजों के इलाज से संबंधित आवश्यक संसाधन जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर व अन्य सभी उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार को पूर्णतः आश्वस्त किया है।
  10. कोविड-19 से मरने वालों के शवों की दुर्गति को देखते हुए अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा अवधि को कम से कम करने के लिए सरकार ने अंतिम संस्कार के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने का निर्णय भी लिया है।
  11. केंद्र व दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग, सभी सम्बंधित विभाग व एक्सपर्ट्स को आज किए गए सभी निर्णयों को अच्छे से अमल किया जाए, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
  12. दिल्ली के छोटे अस्पतालों तक कोरोना संबंधित सही जानकारी व दिशा-निर्देश देने के लिए केंद्र सरकार ने AIIMS में टेलीफोन हेल्पलाइन नंबर जारी कर वरिष्ठ डॉक्टरों की एक कमिटी बनाने का निर्णय लिया। इसका हेल्पलाइन नंबर कल जारी हो जाएगा।

गौरतलब है कि इस वक़्त दिल्ली में कोरोना वायरस की वजह से स्थिति काफी भयावह बनी हुई है। बढ़ते संक्रमितों और मौत के आँकड़ो, अस्पताल की बदतर स्थिति ने दिल्ली सरकार की हालत को खस्ता कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में अब तक संक्रमण के कुल 38,958 मालमे सामने आए हैं। इनमें 22742 एक्टिव केस है। 14945 लोग इस संक्रमण से ठीक हो कर घर जा चुके हैं। जबकि 1,271 लोगों ने इस महामारी की वजह से अपनी जान गँवा दी है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में दिल्ली तीसरे स्थान पर है।

रामचंद्र गुहा का अंधत्व: गुजरात में धन+संस्कृति का कॉम्बिनेशन, बंगाल के पास ‘ममता’ और यही इनकी संस्कृति

इतिहास ‘मरोड़’कार रामचंद्र गुहा का खुद का इतिहास सर्वविदित है। उन्होंने ट्वीट किया, “गुजरात के पास केवल पैसा है, संस्कृति नहीं, जबकि बंगाल के पास संस्कृति है!” यह कुछ अंग्रेजों की राय है और इसे लगभग आठ दशक पहले दिया गया था। इस मत का आज भी कोई महत्व नहीं है, कल भी नहीं था।

यह स्वाभाविक है कि अंग्रेजों को बंगाल-कलकत्ता का कल्चर समृद्ध लगे, क्योंकि कलकत्ता स्वयं उनके रंग में रंग चुका था। कोट-पैंट, कॉफी शॉप, सिगार, व्हिस्की और संपूर्ण अंग्रेजी कल्चर उस समय कलकत्ता का अभिन्न अंग था। गुजरात इस हद तक कभी नहीं रंगा, क्योंकि गुजरात की अपनी समृद्ध सुन्दर संस्कृति है।

भारत का नक्शा और संस्कृति

देश का नक्शा देखें तो गुजरात और बंगाल आमने-सामने की छोर पर हैं। संस्कृति और समृद्धि के मामले में भी ऐसा ही हैं। रामचंद्र गुहा झूठे हैं और उनके झूठ का सही जवाब गुजरात के मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी ने दिया है। मुझे कुछ कड़वे सच बोलने हैं। उनसे कहना है कि संस्कृति केवल साहित्य नहीं है, यह इससे कहीं अधिक है।

सुरती ऊंधियु भी एक गुजराती संस्कृति है और घी से भरपूर बाजरे का रोटला (रोटी) भी। खमण, खांडवी, गांठिया, ढोकला, मुठिया (गट्टे), पात्रा, खाखरा और थेपला भी हमारी संस्कृति हैं। हलवासन व पेड़े और सूतरफेनी हमारी संस्कृति हैं। तावो, वराड़ियुं, घूंटो और उम्बाड़ियुं, खट्टी कढ़ी, खट्टी-मीठी दाल, रजवाड़ी ढोकली, दाल-ढोकली और हांडवो भी गुजरात की संस्कृति है। गुहा को यह सब स्वादिष्ट लगे या न लगे, दुनिया को तो लगता है।

गरबा भी और गुजरात के अनेक अर्थ भी 

रास, पंचिया, मधुबंसी और सिक्स स्टेप चलती भी संस्कृति है और वड़ोदरा का डेढ़ ताली रास भी। दाहोद और छोटा उदेपुर और बनासकांठा, साबरकांठा के आदिवासी नृत्य भी गुजरात की संस्कृति हैं और पोरबंदर के मेहर समाज के रास भी।

किसी भी दो राज्यों की तुलना करने की बात नहीं है, लेकिन बंगाल में कुल जितने रंग नहीं बिखरे हैं, उतने रंग गुजरात के लोकमेलों में छलकते हैं। तरनेतर के मेले में लहराती एक छतरी के नीचे पूरा बंगाल समा सकता है। कच्छ के भूंगे भी हमारी संस्कृति हैं और गिर के नेसडा भी। गिर गाय और कांकरेज वंश भी गुजरात का कल्चर हैं, शेर, घोड़ी और कृष्णमृग भी।

गुजरात का अपना एक अनूठा संगीत है, इसके अपने गीत हैं, इन गीतों की अपनी शैली है। गुजरात के पास अखो, नरसिंह मेहता, मेघाणी, मडिया, नर्मद, बक्षी और रमेश पारेख हैं। गुजरात में मोरारीबापू और रमेश ओझा हैं। यह भी गुजरात की संस्कृति है। गुजरात में इतने सारे रंग हैं – जितने एडोब फोटोशॉप में भी नहीं, एशियन पेंट्स के ब्रोशर की तो बात ही रहने दें।

पटोला भी गुजरात की संस्कृति है और बांधणी भी। कच्छ की कढ़ाई, राजकोट का मोतीवर्क और काठियावाड़ की चनिया चोली भी गुजरात का कल्चर है। दीवार पर लटके हुए पहिए, सितारे से सजे रंग-बिरंगे परिधान और कच्छी शॉल भी हमारी संस्कृति है।

गुजरात में उत्तरायण, पतंगें सुरति और मांजा

गुजरात में छह दर्जन मेले हैं और विश्व का सबसे लंबा, सबसे बड़ा नृत्य उत्सव नवरात्रि है। अम्बाजी भी गुजरात की संस्कृति है, रानी की वाव, सोमनाथ, सूर्यमंदिर और द्वारका का जगत मंदिर भी। गुजरात भर में फैले दो दर्जन अभ्यारण्यों के बीच बसे आदिवासी भी। गुजरात के पास महात्मा गाँधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल और मुंशी भी हैं।

संस्कृति क्या है?

संस्कृति क्या है? केवल साहित्य? नहीं। बेशक, बंगाल के पास उत्कृष्ट साहित्यकारों एवं रचनाकारों की एक सेना है। लेकिन, क्या गुजरात के लिए उसी स्तर के रचनाकारों की संख्या होना आवश्यक है? नहीं, बिलकुल आवश्यक नहीं है। साहित्य संस्कृति का एक हिस्सा है, न कि समग्र संस्कृति। गुजरात पर यह आरोप भी लगाया गया कि वहाँ पैसा है! इसे आरोप माना जाए या प्रशंसा?

आज गुजरात देश की जीडीपी में 20% का योगदान देता है। देश की अर्थव्यवस्था की धुरी गुजरात है। फार्मा, खनिज, ऑटो पार्ट्स, डायमंड, कृषि, ऑटोमोबाइल, केमिकल के क्षेत्र में गुजरात का डंका बजता है। यह भी गुजरात की संस्कृति है।

आपको पैसे से इतनी घृणा क्यों है? आपने टैगोर, बंदोपाध्याय और चट्टोपाध्याय को जन्म दिया, इसके लिए आपको सादर नमन। लेकिन हमारे धीरजलाल अंबानी को भी इक्कीस तोपों की सलामी दी जानी चाहिए। हाँ! करसनभाई पटेल, धीरूभाई अंबानी, गौतम अदाणी, पंकज पटेल भी गुजरात की संस्कृति का हिस्सा हैं।

वांसदा नेशनल पार्क के बीच में रहने वाले आदिवासी भी गुजरात की संस्कृति हैं, मालधारी भी, जो गिर के नेस में साँस लेते हैं और मूलभूत सुविधाओं से भरपूर अहमदाबाद, सूरत में रहने वाले गुजराती भी यहाँ की संस्कृति हैं। गुजरात की संस्कृति भी देश में सबसे अच्छा राजमार्ग, सबसे अच्छी कनेक्टिविटी और विश्व में सबसे बड़े नहर नेटवर्क के साथ सरदार सरोवर जल योजना है। साथ ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी।

रामचंद्र गुहा को एक बार ‘गुजरात दर्शन’ के टूर पर भेजने की आवश्यकता है। लौटने के बाद वे ऐसा ट्वीट कभी नहीं करेंगे। 

और हाँ! बंगाल के पास ‘ममता दीदी’ हैं, यही इसकी संस्कृति है, गुजरात के पास नरेंद्र दामोदरदास मोदी हैं, यह भी गुजरात की संस्कृति है। गुजरात को अपनी पहचान पर गर्व है। इसने कभी भी प्रांतवाद को नहीं अपनाया, नक्सलवाद यहाँ बिलकुल नहीं है और इसने दुनिया भर की विनाशकारी वाम विचारधारा को भी आँगन तक में टिकने नहीं दिया है। यह भी गुजराती संस्कृति है।

लेखक: किन्नर आचार्य

जामिया फिर बदरंग: दीवारों पर ‘फ्री सफूरा’, ‘फ्री शरजील’ के नारे, हाल ही में कराई गई थी सफेदी

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों को शुक्रवार (12, जून 2020) को शरारती तत्वों ने बदरंग कर दिया। दीवारों पर जगह-जगह ‘फ्री सफूरा’, ‘फ्री शरजील’ का नारा लिख दिया। हाल ही में इन दीवारों की सफेदी कराई गई थी।

आपको बता दें कि जामिया की छात्रा सफूरा जरगर कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की कार्यकर्ता रही है। उसे दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप है।

सफूरा ज़रगर ने दिल्ली दंगों के दौरान जाफराबाद मेट्रो के पास मेन रोड को जाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस का कहना है कि उसने महिलाओं और बच्चों को भड़का कर हिंसा करवाया था। सफूरा ज़रगर एक वीडियो में “दिल्ली तेरे खून से, इंकलाब आएगा” नारा लगाती भी देखी गई थी।

जामिया मिलिया इस्लामिया में हो रहे सीएए प्रदर्शनों में कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। वहाँ गेस्ट स्पीकर्स की व्यवस्था करने में सफूरा ज़रगर का अहम किरदार था। शशि थरूर से लेकर सलमान खुर्शीद तक जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं ने जामिया में हो रहे प्रदर्शनों में शिरकत की थी।

सफूरा ज़रगर इस वक़्त गर्भवती है और कई बार जमानत के लिए अर्जी लगा चुकी है। मगर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसकी जमानत याचिका हर बार ख़ारिज कर दी। उसके खिलाफ़ गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वहीं शरजील इमाम को भी भड़काऊ भाषण के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 14 दिसंबर को शरजील ने सीएए के विरोध में भीड़ को भड़काते हुए उत्तर भारत के सभी शहरों को तब तक के लिए बंद करने का आह्वान किया था और कहा था कि जब तक सरकार सीएए/एनआरसी को वापस नहीं ले लेती।

उसके भाषण के बाद न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में जमकर हिंसा हुई थी। जहाँ दर्जनों लोग घायल हुए थे। दूसरी ओर जेएनयू के छात्रों को सम्बोधित करते हुए समुदाय विशेष को निर्देशित करते हुए शरजील इमाम ने कहा था, “लोगों को पूरी दिल्ली में चक्का-जाम करना चाहिए। देश के जिस भी शहर में मुस्लिम हैं, वहाँ चक्का-जाम किया जाना चाहिए। मुस्लिमों को देश के 500 शहरों में चक्का-जाम किया जाना चाहिए।”

उसने लोगों को भड़काते हुए कहा था कि क्या मुस्लिमों की इतनी आबादी और हैसियत भी नहीं कि वो पूरे देश में चक्का-जाम कर सकें? हिंदुस्तान का अधिकतर मुस्लिम अपने शहर को बंद कर सकता है। उसने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि जो तुम्हें अपने घर से निकाले, उसे अपने घर से निकाल दो।

इससे पहले भी फरवरी में इमाम के समर्थकों ने जामिया की दीवारों पर लिख कर उसकी रिहाई की माँग की थी।

हनी-ट्रैपिंग मॉडल पर काम करती थी तानिया परवीन, अधिकारियों-नेताओं से सूचना निकाल भेजती थी पाकिस्तान

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को 22 वर्षीय तानिया परवीन की कस्टडी मिली है। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे मार्च में पश्चिम बंगाल के बादुरिया से लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

तानिया परवीन अब 10 दिनों के लिए एनआईए के हिरासत में है। यहाँ उससे आतंकवाद विरोधी एजेंसी की टीम कोलकाता ऑफिस में आगे की पूछताछ करेगी। तानिया कई सारे सिम कार्ड और व्हाट्सएप्प जैसे सोशल मीडिया एप्प के जरिए पाकिस्तानियों के संपर्क में थी।

ऐसा माना जा रहा है कि उससे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी काफी जानकारी मिल सकती है। तानिया परवीन को 20 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जाता है कि तानिया 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर भारत आई थी।

तानिया ने कोलकाता के कॉलेज से एमए की पढ़ाई की है। वह सोशल मीडिया के जरिए आतंकी संगठनों से जुड़ी थी और लश्कर के लिए युवाओं की भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी। कई बड़े अधिकारियों व नेताओं तक उसकी पहुँच होने की बात कही जाती है। वह पाकिस्तान के लोगों से भी अक्सर बात करती थी।

तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले थे। उसके व्हाट्सप्प ग्रुप के जरिए आतंकी ट्रेनिंग और उनके साहित्य से जुड़ी कई चीजें बरामद की गई है। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला है कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी।

वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण भी दे चुकी है।

गिरफ़्तारी से पहले वो बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों को एकजुट कर बड़े हमले की साजिश रचने में लगी हुई थी। उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपए का लेन-देन हो रहा था, इसके बाद से ही परवीन की गतिविधियों पर संदेह होने लगा था।

उल्लेखनीय है कि तानिया का मुख्य लक्ष्य इस्लामिक राज्य की स्थापना करना था। इसके लिए उसे खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरणा मिली थी। वो उसी तर्ज पर काम करते हुए एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहती थी। पाकिस्तान से उसके आकाओं ने उसे कई भड़काऊ पुस्तकें भेजी थीं, जिसे पढ़ कर उसकी सोच और भी कट्टरवादी हो गई थी।

तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। वो आतंकी संगठन के लिए मोटी रकम भी जुटा रही थी।

3 साल से लश्कर से जुड़ी तानिया को ‘जिहाद’ का प्रशिक्षण इन्हीं किताबों के जरिए मिला। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले के बाद उसकी फोटो शेयर कर के तानिया ने आतंकियों की प्रशंसा भी की थी। तानिया अक्सर मदरसों का दौरा करती थी और वहाँ भड़काऊ भाषण देकर लश्कर के लिए लोग जुटाती थी।

शराब पीना, चोरी व छेड़खानी… कृष्ण, उनके वंशज और बलराम पर मुरारी बापू के बोल: कोटा में FIR दर्ज

भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम को लेकर कथावाचक मुरारी बापू द्वारा की गई अनर्गल टिप्पणी से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस मामले में अब कोटा के रंगबाड़ी निवासी महावीर यादव ने महावीर नगर थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

एफआईआर दर्ज कराने वाले महावीर यादव राजस्थान युवा यादव महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उनका आरोप है कि मुरारी बापू ने ऐसी बातें करके हिंदुओ की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

कथित बयान की वीडियो देखते हुए महावीर नगर पुलिस स्टेशन में इस मामले में मुरारी बापू के खिलाफ धारा 295, 298, 153ए, 511, 66, 67 के तहत केस दर्ज किया गया है।

आख़िर क्या था मामला

दरअसल कुछ समय पहले मिर्जापुर स्थित आदि शक्ति पीठ में कथावाचक मुरारी बापू ने अपनी रामकथा के दौरान भगवान कृष्ण के बारे में अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसका एक चैनल के माध्यम से प्रसारण भी किया गया था। यह वीडियो अभी हाल में सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के बीच वायरल हो रहा है।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह मुरारी बापू ने भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कहा कि वो धर्म की स्थापना करने में पूरी तरह फेल हो गए थे। बलराम के बारे में उन्होंने कहा कि वो चौबीस घंटे मदिरा के नशे में रहते थे। मुरारी बापू सिर्फ इतने पर नहीं रुके। उन्होंने कृष्ण के पुत्र और पौत्रों पर भी शराब के नशे में मार्गों पर छेड़छाड़ करने की अभद्र टिप्पणी भी की। ऐसे घिनौने आरोप लगा कर मुरारी बापू ने हिंदू धर्म और भगवान कृष्ण को पूजने वालों की भावनाओं को आहत किया।

आपत्तिजनक बयान पर एफआईआर की माँग

मुरारी बापू द्वारा भगवान श्री कृष्ण और उनके परिवार पर अभद्र टिप्पणी करने से आक्रोषित अलग-अलग जगह से लोग वीडियो की सत्यता की जाँच कर मुरारी बापू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इंदौर में भारतीय यादव महासभा युवा ईकाई के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन यादव ने डीजीपी को लिखित शिकायत कर मुरारी बापू द्वारा गलत और आपत्तिजनक टिप्पणी पर सख़्त कार्रवाई की माँग की है।

जयपुर कालवाड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराने वाले सौरभ राघवेंद्र आचार्य महाराज खुद को रघुनाथ धाम रामानुज आश्रम का पीठाधीश्वर बताते हैं। परिवादी सौरभ राघवेंद्र आचार्य सोमवार को प्रेस वार्ता के जरिए भी अपनी बात मीडिया के सामने रखेंगे।

वहीं टप्पा तहसील शिवपुर में जिला यादव महासभा होशंगाबाद के जिला ग्रामीण अध्यक्ष राजेश यादव द्वारा, मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर इलाके के निवासी जवाहरलाल राय, राष्ट्रीय यादव सेना हरदा, जैसे कई अन्य लोगों ने मुरारी बापू की विवादित टिप्पणी पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए एफआईआर दर्ज करवाई है।

मुरारी बापू पहले भी कर चुके है कई विवादित टिप्पणियाँ

इससे पहले भी मुरारी बापू अपने अली मौला के कारण सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहे थे। मुरारी बापू ने व्‍यास पीठ में कहा था, “त्रिपुंडधारियों और बाबाओं को उमर खैय्याम और रूमी पढ़ना चाहिए, तब पता लगेगा बंदगी क्या है!” इसके बाद उन्हें संत समाज का गुस्‍सा झेलना पड़ा था। विवाद में आने के बाद उन्होंने स्वयं का बचाव करते हुए, दूसरे धर्माचार्यों पर ताने मारने और उन्हें अज्ञानी कहने लगे थे।

अटलांटा में अश्वेत की लाश गिरी: गोली मारने वाला पुलिसकर्मी फायर, ‘गोरे’ पुलिस चीफ का इस्तीफा

अमेरिकी प्रान्त जॉर्जिया की राजधानी अटलांटा में पुलिस शूटआउट के दौरान एक अश्वेत व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद वहाँ के पुलिस चीफ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। घटना एक फ़ास्ट फ़ूड रेस्तरां के पास हुई थी। शनिवार (जून 13, 2020) को अटलांटा की मेयर केइशा लांस बॉटम्स ने पुलिस प्रमुख के इस्तीफे की जानकारी दी। घटना में कुछ लोग घायल भी हुए थे।

अटलांटा पुलिस के प्रवक्ता जॉन सैफी ने रविवार को बताया कि जिस पुलिस अधिकारी ने गोली चलाई थी, उसे फायर कर दिया गया है। शहर में कई लोग एक और अश्वेत व्यक्ति की मौत होने के बाद रोष में हैं और आशंका जताई जा रही है कि ये आंदोलन अभी और भी हिंसक रूप ले लेगा। कहा जा रहा है कि शनिवार की रात प्रदर्शनकारियों ने एक रेस्तरां को आग के हवाले कर दिया था।

इसके बाद उन्हें तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस और फ़्लैश ग्रेनेड का प्रयोग किया गया था। मारे गए 27 वर्षीय अश्वेत व्यक्ति रिशर्ड ब्रुक्स जाँच के दौरान नशे में पाया गया था। उसने एक बन्दूक लेकर भागने की चेष्टा की थी। सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि उसने भागते हुए उस पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई थी, जिसकी गोली से वह मारा गया। लेकिन, इसे शूटिंग के लिए जस्टिफिकेशन नहीं माना गया।

बॉटम्स ने कहा कि आप क्या कर सकते हैं और आपने क्या किया, इसके बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। मेयर ने आगे कहा कि वो ऐसा नहीं सोचती हैं कि इतने बड़े स्तर पर बलप्रयोग करने की आवश्यकता थी। सार्जेंट सैफी ने उस पुलिस अधिकारी की पहचान की, जिसने गोली चलाई थी। उक्त अधिकारी गैरेट रॉल्फ ने अक्टूबर 2013 में पुलिस सर्विस ज्वाइन की थी। पुलिस के ख़िलाफ़ हिंसा की बढ़ती वारदातों के बीच पुलिस ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है।

अमेरिकी मीडिया का कहना है कि इससे पहले पुलिस हूटिंग के बाद इस तरह की घटनाएँ नहीं होती थीं और न ही ऐसी प्रतिक्रियाएँ आती थीं। पुलिस द्वारा डैमेज कंट्रोल की प्रक्रिया को प्रदर्शनकारियों का डर भी बताया जा रहा है, जो ख़ासे उग्र हैं। कहा जा रहा है कि इससे बचने के लिए पुलिस प्रमुख का इस्तीफा ले लिया गया और साथ ही गोली चलाने वाले अधिकारी को फायर कर दिया गया।

पुलिस प्रमुख एरिका शेल्डस भी श्वेत अधिकारी ही हैं, जिन्हें हाल में में हुई पुलिसिया उठापटक का नया शिकार बताया जा रहा है। अमेरिका में दंगों के बीच कई पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए हैं। पोर्टलैंड के पुलिस प्रमुख ने तो यहाँ तक कह दिया था कि वो अपने बदले किसी अश्वेत अधिकारी को बैठाना चाहते हैं। अटलांटा में एक पुलिस एनकाउंटर का वीडियो वायरल हुआ, पुलिस पर छात्रों को प्रताड़ित करने के आरोप लगे और उनपर अश्वेतों के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया गया।

अजय पंडिता की हत्या के विरोध में दुनिया भर के 100 शहरों में प्रदर्शन: कपिल मिश्रा का आह्वान

जम्मू कश्मीर में सरपंच अजय पंडिता की आतंकियों द्वारा की गई हत्या के बाद दुनिया भर में इसके ख़िलाफ़ विरोध शुरू हो गया है। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आतंकियों के खिलाफ एकजुटता दिखाने और आवाज़ उठाने की अपील की है, जिसके तहत लोगों को अपने घर या पड़ोस से ही सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखते हुए विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई है। प्लाकार्ड और बैनर के जरिए लोग अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

प्लाकार्ड और पोस्टरों पर लोग स्लोगन्स या अपने मन की बात लिख कर अजय पंडिता की हत्या के विरोध में आतंकियों के खिलाफ आवाज़ उठाएँगे। साथ ही फोटो और वीडियो के जरिए रोष प्रकट करेंगे। फिर इसे सोशल मीडिया पर ‘हिन्दू यूनाइटेड अगेंस्ट टेरर’ हैशटैग के साथ पोस्ट किया जाएगा। साथ में लोगों से अपने शहर और क्षेत्र का नाम मेंशन करने को कहा गया है। अब तक कई देशों से लोगों ने इस प्रोटेस्ट में भाग लिया है।

रविवार (जून 14, 2020) को दुनिया भर के कई हिस्सों से लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसे कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक विरोध प्रदर्शन नाम दिया गया है। लोगों ने कहा है कि ये आतंक के खिलाफ हिन्दू एकता का परिचायक होगा। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने वीडियो सन्देश में कहा है कि इस अभियान का मकसद जम्मू कश्मीर व भारत के अन्य हिस्सों में हिन्दुओं की लगातार हो रही हत्या की वारदातों को दुनिया के सामने ले जाना है।

दुनिया भर के क़रीब 100 शहरों से इस वैश्विक अभियान में भागीदारी की तैयारी की गई है। ऑस्ट्रेलिया स्थित पर्थ, सिडनी और ब्रिस्बेन में भी विरोध प्रदर्शन होंगे। इसके बाद इंडोनेशिया, सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड से लोग अपना रोष प्रकट करेंगे। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका है। कपिल मिश्रा ने बताया कि दोपहर होते-होते भारत, अफ्रीका, ब्रिटेन, यूरोप और रात होते-होते अमेरिका, कनाडा सहित सारी दुनिया में यह कैंपेन चलेगा।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में कश्मीरी पंडित अजय पंडिता की हत्या के खिलाफ पूरी दुनिया में ये प्रोटेस्ट किया जा रहा हैं। भारत के 50 से भी अधिक शहरों में इस कैम्पेन को चलाया जा रहा है। ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहा है। साथ ही ‘जेके नाउ’ भी इससे जुड़ा हुआ है। भारत के कई संगठनों और दुनिया भर के कई प्रवासी भारतीय संगठनों ने इस अभियान में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित की है।

आतंक के खिलाफ हिन्दू एकता का सन्देश देने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई हिंदूवादी संगठनों ने भी अपील की थी। कपिल मिश्रा दुनिया के कोने-कोने से आई तस्वीरों को अपने ट्विटर टाइमलाइन पर रीट्वीट कर रहे हैं, ताकि लोगों को पता चलता रहे कि कहाँ-कहाँ से अजय पंडिता की हत्या के खिलाफ आवाज़ उठ रही है। उन्होंने दुनिया के कई शहरों से तस्वीरें शेयर की, जिनमें महिलाओं और बुजुर्गों को भी देखा जा सकता है।

कपिल मिश्रा ने कहा है कि हिन्दुओं की आवाज़ एक साथ पूरी दुनिया में गूँजनी चाहिए। हालाँकि उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों के कोरोना दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं करने की सलाह भी दी है। लोगों को अपने-अपने घरों और मोहल्लों से वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को कहा गया है। साथ ही लोगों से अपने परिचितों को भी ‘हिन्दू यूनाइटेड अगेंस्ट टेरर’ के पक्ष में आवाज़ उठाने की अपील की गई है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों ने सोमवार (जून 8, 2020) को कॉन्ग्रेस के हिंदू सरपंच अजय पंडिता (भारती) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अजय पंडिता की हत्या उस वक्त की गई, जब वो बागान में गए हुए थे। उनके परिवार में माँ-पिता के अलावा पत्नी और दो बेटियाँ हैं। आतंकियों ने पीछे से उन पर वार कर मौत की नींद सुला दी। पूरे कश्मीरी पंडित समुदाय और हिन्दुओं में इसके बाद गुस्सा व्याप्त हो गया।

ख़बर आई थी कि अब तक करीब 50 पंच-सरपंच घाटी छोड़कर जम्मू आ चुके हैं। यह दावा ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने किया था। अनिल शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया था कि अजय पंडिता की मौत के बाद उन्हें कई सरपंचों के कॉल आ रहे हैं। उनमें काफी डर है। अनिल ने कहा था कि अब तक उनके 19 साथी इस बर्बरता का शिकार हो चुके हैं।