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सनातन डेका की हत्या के बाद अरमान अली ने रितुपर्णा का गला ‘हलाल’ किया, असम में डरे हुए हिन्दुओं ने किया प्रदर्शन

कुछ समय पहले ही असम के सब्जी विक्रेता सनातन डेका की मजहबी युवकों द्वारा हत्या के बाद दिन-दहाड़े रितुपर्णा पेगु की निर्मम हत्या से असम के लोगों में आक्रोश और भय देखा जा रहा है। रितुपर्णा पेगु (Rituparna Pegu) बारिश से बचने के लिए जिस दुकान में कुछ देर के लिए रुका था, वहाँ वो तीन साल तक काम कर चुका था। लेकिन शायद वहाँ से नौकरी छोड़ देने के कारण अरमान होम फर्निशिंग का मालिक अरमान और उसका परिवार उससे इतना नाराज था कि उन्होंने उसे दुकान में ना बैठने को कहा।

नूनमाटी इलाके में ही रहने वाले एक व्यक्ति ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि जब 26 वर्षीय रितुपर्णा पेगु ने कॉमर्स मार्केट इलाके में बारिश रुकने तक अरमान की दुकान पर ठहरने की बात कही तो अरमान और उसका परिवार उसके साथ गाली-गलौच करता हुआ उसे दुकान के अंदर खींच ले गया, जहाँ अरमान के बेटे ने उससे मारपीट शुरू कर दी।

देखते ही देखते पूरा परिवार रितुपर्णा पेगु पर झपट पड़ा और वो उसे धक्के मारकर दुकान से बाहर ले गए। इससे पहले की वो सम्भल पाता, अरमान अली के बेटे ने रितुपर्णा की पीठ पर चाकू से हमला कर दिया और वो वहीं पर गिर गया। ऑपइंडिया से बातचीत में व्यक्ति ने बताया कि इसके बाद अरमान अली ने रितुपर्णा पेगु का गला ‘हलाल’ शैली में काट दिया।

उन्होंने बताया कि हंगामे के समय वहाँ मौजूद लोगों ने पुलिस को कॉल लगाई लेकिन पुलिस वहाँ से कुछ ही दूरी पर मौजूद होने के बावजूद भी अपनी सहूलियत के अनुसार फ़ौरन ना पहुँचते हुए पुलिस कुछ देर से आई, तब तक रितुपर्णा पेगु की मौत हो चुकी थी।

लोगों का कहना है कि नूनमाटी पुलिस का पिछला रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है और वो अक्सर अपराध के मामलों को दबा दिया करते हैं। पिछले कुछ अपराध की घटनाओं का जिक्र करते हुए युवक ने ऑपइंडिया को बताया कि ऐसे भी मामले सामने आए जब नूनमाटी पुलिस ने सबूतों को खुद भी गायब कर दिया और इसके बारे में स्थानीय लोग कभी भी कुछ नहीं कर पाए। लोगों के विरोध प्रदर्शन के बीच असम के मुख्यमंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने आज शनिवार को रितुपर्णा पेगु की हत्या की सीआईडी (CID) जाँ​च का आदेश दिया है।

वहीं, युवक ने बताया कि एक ओर जहाँ स्थानीय लोग रितुपर्णा पेगु की मौत पर एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं अखिल असम छात्र संघ (AASU) इस घटना में बिहार के लोगों को पीड़ित बताने का काम करने का भी प्रयास कर रहा है। युवक ने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण इस इलाके में बिहार के लोग काफी समय पहले से ही यहाँ बड़ी जनसंख्या में रहते हैं।

हालाँकि, जिस कॉमर्स मार्केट में रितुपर्णा की हत्या की गई उस 50-60 मीटर के इलाके में समुदाय विशेष के लोगों की ही दुकाने मौजूद हैं और वो महज पाँच-छ सालों से यहाँ पर बिजनेस कर रहे हैं, बावजूद इसके, उनका इस इलाके में काफी दबदबा है।

‘हम भी इन्हीं बाजारों में जाते हैं, वे हमें उसी तरह मारेंगे’

रितुपर्णा की हत्या के बाद पुलिस स्टेशन में लोगों ने इकट्ठा होकर आरोपितों पर तुरंत कार्रवाई और कठोर सजा की माँग की है। पुलिस स्टेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है- “हम इन्हीं सड़कों पर घूमते हैं, हम इन्हीं बाजारों में जाते हैं, वे हमें भी उसी तरह मारेंगे।”

रितुपर्णा की हत्या से आक्रोशित प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों ने लगाए ‘जय श्री राम’ और ‘जोई ऐ एक्सोम’ के नारे

इन प्रदर्शनकारियों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने ‘जय श्री राम’ और ‘जोई ऐ एक्सोम’ (Joi Aai Axom) के नारे भी लगाए। सार्वजनिक और निजी संपत्ति को किसी भी संभावित दंगों या क्षति को रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मी मौके पर मौजूद थे।

इन प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में क्रूरतापूर्वक मारे गए सनातन डेका और रितुपर्णा पेगु की हत्या पर चिंता जताई, उनका कहना है कि ये दोनों कट्टरपंथियों द्वारा मारे गए हैं जो कि चिंता का विषय है।

ज्ञात हो कि 22 मई को सनातन डेका अपने घर के पीछे उगाई सब्जियों को साइकिल पर रखकर बेचने निकले थे। रास्ते में उनकी साइकिल दो युवकों की स्कूटी से टकराई और स्कूटी पर खरोंच आ गई। स्कूटी चालकों को वह मामूली सी खरोंच देखकर इतना गुस्सा आया कि पहले उन्होंने सनातन को खुद पीटा और फिर अपने तीन अन्य साथियों को बुलवाकर उसे इतना मारा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

रितुपर्णा पेगु की इस हत्या से गुस्साए कुछ प्रदर्शनकारियों ने नोनमाटी पुलिस स्टेशन से आरोपितों के निवास तक रास्ते पर पैदल मार्च किया, जहाँ उन्होंने कुछ वाहनों को भी रोका और एक बस का शीशा भी तोड़ दिया।

अपने सात महीने के बच्चे के साथ मृतक रितुपर्णा की विधवा पत्नी ने भी शनिवार को अपने पति के लिए न्याय और उनके हत्यारों के लिए सजा की माँग करते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी शेयर गए हैं, जिनमें अपने पति के शव को अस्पताल ले जाते वक्त मृतक की पत्नी को बच्चे के साथ मदद के लिए गुहार लगाते हुए देखी जा रही हैं।

मृतक रितुपर्णा की पत्नी और साथ माह का बच्चा (चित्र साभार – guwahatiplus)

असम में समुदाय विशेष द्वारा किडनेपिंग के भी अपराध

शनिवार (जून 13, 2020) को ही एक अन्य घटना सामने आई है, जिसमें महिबुल इस्लाम ने एक युवती का अपहरण कर लिया। महिबुल इस्लाम ने बारपेटा में सरथेबरी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कावामीरी रिजर्व नंबर 6 में सुदेव सरकार की 13 वर्षीय बच्ची का उसके घर से अपहरण कर लिया।

आरोपित महिबुल इस्लाम का घर बरपेटा जिले के शालमारा के भालुकी में है। महिबुल इस्लाम ने हवली के अब्दुल जलील की मदद से इस किशोरी का अपहरण किया है। महिबुल इस्लाम और अब्दुल जलील के खिलाफ सरथेबारी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस किशोरी की तलाश कर रही है।

असम में समुदाय विशेष के अपराधों की बढ़ रही घटनाओं से लोग आक्रोशित होने के साथ-साथ डरे हुए भी हैं। ऐसी ही घटनाएँ पाकिस्तान में भी आए दिन सामने आती रहती हैं, जहाँ समुदाय विशेष वाले अल्पसंख्यक हिन्दुओं की बेटियों को उनके घर से अगवा कर उनका बलात्कार और जबरन इस्लाम में धर्मांतरण तो करवाते ही हैं, साथ ही उन्हें दूसरे मजहब में निकाह करने पर भी मजबूर करते हैं।

देखें इस मामले से जुड़ा वीडियो:

मुस्लिम दंगाई भीड़ की प्रतिक्रिया में 25 फरवरी को बना था व्हाट्सएप ग्रुप, दिल्ली दंगे में एक और चार्जशीट दाखिल

उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान एक व्हाट्सएप ग्रुप की भूमिका सामने आई है। मामले में चार्जशीट दायर किया गया है। इसे 25 फरवरी की दोपहर से 26 फरवरी की मध्यरात्रि के बीच बनाया गया था।

उल्लेखनीय है कि 23 फरवरी को दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे शुरू हुए थे। इस दौरान इस्लामवादी मुस्लिम भीड़ काफी उग्र हो गई थी। बता दें कि ऐसी ही एक दंगाई भीड़ ने आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी थी। उनका शव 26 तारीख की दोपहर को चाँद बाग के नाले से मिला था।

जानकारी के मुताबिक यह व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य दंगों के दौरान हुई 9 हत्याओं के जिम्मेदार हैं। इस ग्रुप में लोकेश सोलंकी समेत और भी लोग शामिल थे। शुरुआत में ग्रुप में 125 सदस्य थे। बाद में इसमें से 47 सदस्यों ने ग्रुप को छोड़ दिया। ग्रुप के एडमिन का नाम ऋतिक बताया जा रहा है। ग्रुप के सदस्यों ने एक जगह पर डेरा डाला और फिर वहाँ से गुजरने वाले सभी राहगीरों का पहचान पत्र चेक करके उनकी हत्या कर देते थे। पुलिस ने बताया कि 9 लोगों की हत्या एक ही जगह पर की गई।

इस ग्रुप के सदस्यों द्वारा मारे गए लोगों में अमीन, हमजा, और दो भाई- हाशिम अली और आमिर अली शामिल थे। 12 आरोपितों में से 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में चार्जशीट दायर कर दी गई है। इससे पहले ये बात सामने आई थी कि पुलिस ने पाया कि 25 एवं 26 फरवरी की रात एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें 125 सदस्य थे।

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया कि ग्रुप के दो एक्टिव सदस्यों से पूछताछ के दौरान उनका मोबाइल फोन स्कैन किया गया और तभी इस व्हाट्सएप ग्रुप के 23 फरवरी के बनाए जाने की बात सामने आई।

बयान में कहा गया कि कुछ ग्रुप के कुछ सदस्य केवल मैसेज भेज और प्राप्त कर रहे थे, जबकि कुछ लोग सक्रिय रुप से दंगे में शामिल थे। बयान में आगे कहा गया है कि दोनों मृतक सगे भाई थे, जिनकी 26 फरवरी को रात 9 से 10 बजे के बीच हत्या कर दी गई थी। सभी आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनके कई जमानत आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने दंगों को लेकर कई चार्जशीट दाखिल किया है। पुलिस ने चार्जशीट में आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था। वो खालिद सैफी से भी सम्पर्क में था। चार्जशीट में कहा गया है कि अंकित शर्मा की हत्या में भी ताहिर हुसैन का हाथ है। 

वहीं हेड कॉन्सटेबल रतनलाल की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करते हुए खुलासा किया कि 2 दिन पहले 22 फ़रवरी को ही 50 लोगों के एक समूह ने बैठक की थी, जहाँ हिंसा की पूरी साज़िश रची गई। दंगाइयों ने अपने घर के बच्चों व बुजुर्गों को पहले ही घर के भीतर रहने को बोल दिया था और ख़ुद हथियार लेकर निकले।

‘मथुरा और काशी को पुनः प्राप्त करने में बाधा बन रहा है धार्मिक स्थल एक्ट 1991’: सुप्रीम कोर्ट पहुँचा पुरोहित महासंघ

हिंदू पुजारियों के संगठन ‘विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ’ ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की धारा 4 धार्मिक स्थल (विशेष प्रोविजन) एक्ट, 1991 को चुनौती दी है। इसमें अयोध्या में राम जन्मभूमि को छोड़कर अन्य पवित्र स्थलों का धार्मिक चरित्र वैसा ही बनाए रखने का प्रावधान है। इस ‘धार्मिक स्थल एक्ट’ को रद्द कर अयोध्या काशी जैसे हिन्दू स्थल को पुनः प्राप्त करने की ओर क़दम बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह कानून काशी और मथुरा जैसी विवादित धार्मिक संरचनाओं को फिर से प्राप्त करने के मार्ग में एक बाधा बना हुआ है।

अधिनियम की धारा 4 (1) में, “यह घोषित किया जाता है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा।” जैसे किसी भी मस्जिद को मंदिर में नहीं बदला जा सकता है और वहीं मंदिर को भी मस्जिद या किसी और धर्म में नहीं बदला जा सकता हैं।

हिंदू संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) ने अधिनियम के विवादास्पद सेक्शन को अल्ट्रा वायर्स, अर्थात् कानूनी शक्ति या अधिकार से परे और असंवैधानिक घोषित करने की माँग की है। राममंदिर को छोड़ कर यह कदम कई विवादित धार्मिक स्थलों को दोबारा से प्राप्त करने के लिए कानूनी रास्ते को खोल सकता है।

याचिका में कहा गया हैं कि इस एक्ट की वजह से धार्मिक संपत्तियों पर दूसरे धर्म के लोगों के अतिक्रमण को लेकर हिंदुओं का अधिकार सीमित हैं। हिंदू संगठन ने तर्क दिया कि अधिनियम के उक्त प्रावधानों ने पीड़ित पक्षों को सिविल सूट के माध्यम या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार से अपनी शिकायतें रखने की बात कही गई है।

याचिका में कहा गया है कि विवादास्पद अधिनियम ने 15 अगस्त, 1947 से पहले हिंदू धार्मिक संरचनाओं के धार्मिक चरित्र की पुनः स्थापना को रोक दिया था, जो अन्य धर्मों के अनुयायियों द्वारा अतिक्रमण कर कब्जा किया गया था। हिंदू बॉडी ने तर्क दिया कि संसद ने असंवैधानिक तरीके से इस प्रावधान को लागू किया। जिसके चलते अदालती कार्यवाही के माध्यम से विवादों का समाधान नहीं हुआ।

इस याचिका में दावा किया गया है कि संसद ने लोगों को अदालत पहुँचने से रोकने का काम कर के क़ानून बनाने के अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है। जबकि ये हमारे संविधान के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है। हिंदू संगठन ने आगे कहा कि अनुच्छेद 32 (अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपाय) और अनुच्छेद 226 (निर्देशों को जारी करने के लिए उच्च न्यायालयों को अधिकार देता है) पीड़ित नागरिकों को अपील के लिए कोर्ट जाने का अधिकार है और संसद इस शक्ति को छीन नहीं सकता।

पूजा अधिनियम की धारा 4 की वजह से खत्म सभी कार्यवाही की बहाली का माँग करते हुए, हिंदू बॉडी ने कहा कि भक्तों को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म के अधिकार की पूर्ण गारंटी है। उन्होंने दोहराया कि “संसद हिंदू भक्तों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उनके धार्मिक स्थलों को वापस पाने के लिए रोक नहीं सकती है और न ही कोई भी कानून बना सकती है जो भक्तों के निहित धार्मिक अधिकार को उनसे छीने या उनके धर्म को अपमानित करता हो और न ही पूर्वव्यापी प्रभाव से कोई कानून बना सकती है।”

ब्लड डिसऑर्डर से पीड़ित चंद्रशेखर आजाद ने किया रक्तदान, उसके डॉक्टर ने भी छिपाई बीमारी: AIIMS के पत्र में खुलासा

हाल ही में एक्टिविस्ट प्रेरणा थिरुवाईपट्टी ने स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स दिल्ली को पत्र लिख कर ‘भीम आर्मी’ के मुखिया चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ द्वारा हाल ही में किए गए रक्तदान की जाँच कराने को कहा था। प्रेरणा ‘ऑल इंडिया दलित यूथ एसोसिएशन’ की सदस्य हैं। उन्होंने दावा किया था कि आजाद ख़ून की एक ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं, जिससे उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए था। अब एम्स ने प्रेरणा को लिखित में बताया है कि चंद्रशेखर आजाद ने रक्तदान के समय बीमारी होने की कोई बात नहीं बताई थी।

यहाँ तक कि चंद्रशेखर आजाद के डॉक्टर हरजीत भट्टी ने भी इस बारे में एम्स प्रशासन को कुछ नहीं बताया। एम्स दिल्ली ने बताया है कि चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण और डॉक्टर हरजीत सिंह भट्टी जैसे लोगों ने रक्तदान अभियान में स्वेच्छा से आकर ब्लड डोनेट किया। आजाद ने जानकारी दी कि उन्होंने पिछली बार 6 महीने पहले रक्तदान किया था और वो ऐसी किसी भी बीमारी से पीड़ित नहीं है, जिससे उनका ख़ून लेने वाले को कोई नुकसान पहुँचे।

एम्स ने इस पत्र में बताया है कि जब सोशल मीडिया पर इसे लेकर हंगामा हुआ कि चंद्रशेखर आजाद पॉलिसाइथीमिया से पीड़ित है। उनका ओपीडी कार्ड भी सोशल मीडिया पर हाइलाइट किया गया। इसके बाद एम्स ने उनके ख़ून को डिस्कार्ड कर दिया, अर्थात किसी अन्य व्यक्ति को वो ख़ून नहीं चढ़ाया जाएगा। अब लोग जवाब माँग रहे हैं कि चंद्रशेखर आजाद ने 6 महीने पहले कहाँ और किसे ब्लड डोनेट किया था?

प्रेरणा ने पिछले महीने ही एम्स और स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिख कर इस बीमारी के बारे में आगाह किया था। उन्होंने सोशल मीडिया में चंद्रशेखर का रक्तदान करते हुए फोटोज देख कर ये पत्र लिखा था। प्रेरणा द्वारा जाँच की माँग के बाद डॉक्टर प्रशांत शर्मा ने इस ओर ध्यान दिलाया था कि ऐसी बीमारी से पीड़ित लोगों को रक्तदान नहीं करना चाहिए। उन्होंने ट्विटर पर बताया कि ऐसा कर के आजाद ने दूसरे की ज़िंदगी दाँव पर लगा दी है।

उन्होने आजाद के ब्लड डिसऑर्डर की बात करते हुए कहा था कि उनका रक्तदान पब्लिसिटी स्टंट से ज्यादा कुछ भी नहीं था। उन्होंने आजाद का डॉक्टर होने के नाते डॉक्टर भट्टी को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। जबकि अदालत में जमानत के लिए डॉक्टर भट्टी ने ही इस बीमारी के बारे में बताया था। न तो रक्तदान के समय डिक्लेरेशन में ये डाला गया और न ही भट्टी ने आजाद को रक्तदान करने से रोका।

डॉक्टर भट्टी वही डॉक्टर हैं, जिन्हें न्यूज़लॉन्ड्री और बरखा दत्त जैसों ने लोगों को गुमराह करने के लिए एम्स का प्रतिनिधि बना कर पेश कर दिया था। वो एम्स में कार्यरत नहीं हैं लेकिन एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के हेड रहे हैं। जेएनयू हिंसा के समय उन्होंने बयान दिया था कि एबीवीपी के छात्रों के घाव दिखावटी हैं जबकि वामपंथी छात्रों को सही में चोट लगी है और वो घायल हुए हैं।

डॉ हरजीत सिंह भट्टी कॉन्ग्रेस पार्टी के अखिल भारतीय चिकित्सा सेल के राष्ट्रीय संयोजक हैं। पिछले साल फरवरी में उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी में इस पद पर नियुक्त किया गया था। भट्टी सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी ही नहीं बल्कि भीम आर्मी के भी काफी नजदीकी हैं। वह न केवल आजाद के डॉक्टर हैं, बल्कि वो उनके समर्थक भी हैं, क्योंकि उन्हें हैशटैग #AzaadiForAzad के साथ ट्वीट पोस्ट करते हुए देखा गया है।

हमलोग घर के अंदर थे, चारों तरफ से आग लगा दिया, रुपए-जेवर सब लूट ले गए: जौनपुर की दलित पीड़िता

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के भदेठी गॉंव में 9 जून को मुस्लिमों ने दलित बस्ती पर हमला कर उनके घरों को फूॅंक दिया था। इस घटना का मास्टरमाइंड सपा नेता जावेद सिद्दीकी बताया जाता है जो गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़ित दलितों की जुबानी इस घटना का खौफनाक ब्यौरा भी सामने आ रहा है।

इसी कड़ी में मीडिया से बात करती दलित पीड़ता पूजा का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। पूजा बताती है, “हम लोग घर के अंदर थे। जब मार होने लगी तो हम लोग और अंदर चले गए। जब अंदर चले गए तो सब लोग दरवाजा तोड़ने लगे। ईंट-पत्थर से मारने लगे। बाहर गोली चलने लगी। गोली चलने लगी तो हम लोग डर से बाहर नहीं निकले। डर से जब नहीं निकले तो वे लोग (मुस्लिमों की भीड़) चारों तरफ से आग लगा दिए।”

पूजा ने बताया, “हम लोग अंदर पड़े थे। जब वे लोग आग लगाकर चले गए तब हम लोग किसी रास्ते से निकलकर अपना जान बचाकर दूसरे गॉंव चले गए। रात भर हमलोग दूसरे गॉंव में थे।”

उसने बताया, “हमलोग बहुत डर गए थे क्योंकि उनलोगों की संख्या हजार-पॉंच सौ की थी। इससे हम लोग बहुत ज्यादा डर गए। पहले लाठी-डंडा से मार रहे थे। जब उससे डर गए तो ईंट-पत्थर चलाने लगे। उसके बाद गोली चलने लगी। किसी की गाड़ी लूट लिए। दुकानें थी, पैसे कौड़ी, गहने भी ले लिए। जिसके पास जेवर था ले लिए। सारे सामान ले गए।”

आपको बता दें कि सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को गाँव के ही शहबाज नामक लड़के का दलित बस्ती के बच्चों से बकरियाँ चराने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में दिन में कहासुनी हो गई थी। रात में मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से लैस दलित बस्ती में हमला बोल दिया था।

इस दौरान आरोपितों ने हवाई फायरिंग, वाहनों में तोड़फोड़ और कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। घटना में एक भैंस और तीन बकरियाँ जल कर राख हो गईं। वहीं एक सिलेंडर में लगी आग के बाद हुए विस्फोट से भारी नुकसान हुआ था।

इस मामले में पुलिस ने 57 लोगों को नामजद और 100 लोगों को अज्ञात करते हुए विभिन्न धाराओ में मुकदमा दर्ज किया था। साथ ही पुलिस ने 35 लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद सीएम योगी ने मामले का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

बकौल पूजा इस समय उन लोगों के खाने-पीने का सारा इंतजाम सरकार कर रही है। सरकारी मदद पर उसने संतुष्टि भी जताई है।

घाटी में रह रहे हिंदुओं को ट्रेनिंग के साथ हथियार देने की जरूरत: जम्मू कश्मीर के पूर्व DGP का बड़ा बयान

दक्षिण कश्मीर के जिला अनंतनाग में कश्मीरी पंडित सरपंच अजय पंडिता (भारती) की हत्या के बाद पूर्व डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) डॉ शीश पाल वैद ने कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक हो चुके हिंदुओं को हथियार मुहैया कराने के साथ ही ट्रेनिंग देने का समर्थन किया है। ताकि आतंकी हमलों से वो खुद की रक्षा कर सकें।

उन्होंने इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जम्मू संभाग के चिनाब घाटी में हिंदुओं को पहले हथियार दिए गए थे। नब्बे के दशक में इससे हिंदुओं के पलायन को रोकने में बहुत सहायता हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विलेज डिफेंस कमेटी फॉर्मूला को योजना बनाकर लागू किया जाए तो किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है।

यही नहीं उन्होंने इंडिया टुडे से बात करते हुए आतंकियों का सामना करने के लिए मुस्लिम समुदाय के कमजोर वर्ग को भी हथियार देने की पैरवी की है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि घाटी में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और आतंकियों के निशाने पर रहता है। इसीलिए आतंकी हमलों से बचाव के लिए उन्हें भी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

वैद ने कहा कि कश्मीरी घाटी में अल्पसंख्यक हिंदुओं व आतंकियों के निशाने पर रहने वाले मुस्लिम समाज के सदस्यों को हथियार उपलब्ध करवाने का कोई भी नुकसान नहीं है।

आगे उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर पर ग्रामीण सुरक्षा समितियों का भी घाटी में गठन किया जाना चाहिए। हालाँकि, इसे उन्होंने जल्दबाजी में न उठाकर पूरी योजना के साथ काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में ग्रामीण सुरक्षा समितियाँ बनाना बेशक मुश्किल काम है परंतु असंभव भी नहीं है। उन्होंने वर्ष 1995 में खुद के एसएसपी ऊधमपुर के पद पर रहते हुए जिले के बाघनकोट क्षेत्र में पहली ग्रामीण सुरक्षा समिति बनाने का भी जिक्र किया। अब ये गाँव रियासी जिले में आता है।

पूर्व पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गाँव में सुरक्षा समिति बनाना आसान नहीं था लेकिन योजनाबद्ध तरीके से कोई भी चीज की जा सकती है। उन्होंने बताया, “कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के सामूहिक पलायन के बाद, आतंकवादियों ने जम्मू संभाग के चिनाब घाटी क्षेत्र में अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। चिनाब घाटी में आतंकवादियों द्वारा अल्पसंख्यक हिंदुओं का नरसंहार किया गया। लेकिन जल्द ही ग्रामीण सुरक्षा समितियों का गठन किया गया और लोगों को हथियारों की ट्रेनिंग दी गई। कई इलाकों में तो मुस्लिम भी इन समितियों के सदस्य हैं, क्योंकि उन्हें भी आतंकी हमलों का सामना करना पड़ा। सरकार का यह प्रयास रंग लाया और इससे नब्बे के दशक में हिंदुओं के पलायन को रोकने में मदद मिली थी।”

कश्मीरी हिंदू सरपंच अजय पंडिता की निर्मम हत्या के बाद विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने माँग की है कि सरकार को घाटी में हिंदुओं को हथियार देना चाहिए क्योंकि वे आतंकवादियों के सॉफ्ट टारगेट हैं। अजय अनंतनाग जिले के लरकीपोरा इलाके में आने वाला लुकबावन पंचायत हल्का के सरपंच थे। 40 वर्षीय पंचायत सदस्य की हत्या पर इलाके में रोष व्याप्त है। 8 जून को अजय की हत्या की गई। पंडिता की हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों के समूह ने घाटी में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की माँग उठाई है। 

मलाला यूसुफजई की वेबसाइट पर भारत का गलत नक्शा: जम्मू कश्मीर और अरुणाचल को दिखाया विवादित इलाका

मूल रूप से पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई फ़िलहाल ब्रिटेन और कनाडा में रहती हैं। कनाडा ने उन्हें मानद नागरिकता भी दी हुई है। मलाला अक्सर विभिन्न मुद्दों पर अपना भारत विरोधी रवैया प्रदर्शित करती रहती हैं। अब उनकी वेबसाइट पर भारत का नक्शा ग़लत दिखाए जाने का मामला उठाया जाना चाहिए। जम्मू कश्मीर को मलाला भारत का अंग नहीं मानती, साथ ही अरुणाचल प्रदेश को भी विवादित मानती है।

अगर आप मलाला यूसुफजई की वेबसाइट पर जाएँगे तो पाएँगे कि इसके भारत वाले हिस्से में देश का जो नक्शा बना हुआ है, वो कहीं से भी भारत सरकार द्वारा मान्य नक़्शे के अनुरूप नहीं है। और न ही ये संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रदर्शित किए जाने वाले नक़्शे पर आधारित है। मलाला की वेबसाइट पर लद्दाख को छोड़ कर लगभग पूरे जम्मू कश्मीर को ही बाकी भारत से अलग रंग में दिखाया गया है और उसे विवादित माना गया है।

जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। इनमें से कुछ हिस्सा उसने चीन को दे रखा है। वहीं लद्दाख का हिस्सा अक्साई चीन है, जिस पर चीन ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। मलाला की वेबसाइट पर इन इलाक़ों को तो भारत का न बता कर विवादित बताया ही गया है, साथ ही जम्मू कश्मीर के जिस हिस्से पर अवैध कब्ज़ा नहीं है और भारत द्वारा प्रशासित है, उसे भी विवादित की कैटेगरी में डाला गया है।

साथ ही अरुणाचल प्रदेश को भी बिना कारण विवादित दिखा दिया गया है। चीन ने 1951 में तिब्बत पर अवैध कब्जा किया था। सरदार पटेल द्वारा आगाह किए जाने के बावजूद जवाहर लाल नेहरू ने तिब्बत समस्या पर ध्यान नहीं दिया था। तभी से चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा मानता आ रहा है। कुछ ऐसा ही कर के मलाला ने भी एक तरह से चीन के अजेंडे को आगे बढ़ाया है। भारत-चीन तनाव के बीच इस नक़्शे को लेकर सवाल उठना निश्चित है।

मलाला यूसुफजई की वेबसाइट पर भारत का ग़लत नक्शा

अपनी वेबसाइट पर जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को शेष भारत से भिन्न दिखाने वाली मलाला यूसुफजई जम्मू कश्मीर मुद्दे पर भारतीय सेना को भी भला-बुरा कह चुकी हैं। इससे पहले मलाला युसुफ़ज़ई ने किसी काल्पनिक कश्मीरी लड़की से संवाद कर उसके हवाले से कह दिया था कि जम्मू-कश्मीर में सेना की पदचाप सुनाई देने से डर का माहौल है, यह चर्चा का विषय है। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेना की वजह से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे।

सितम्बर 2019 में मलाला मलाला यूसुफजई ने एक के बाद एक 7 ट्वीट्स कर के लिखा था कि उन्होंने पिछले कुछ दिनों में ऐसे लोगों से बात की हैं, जो कश्मीर में रह रहे हैं या फिर वहाँ कार्यरत हैं। इनमें छात्र, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील शामिल हैं। मलाला ने लिखा कि वह कश्मीर की लड़कियों से सीधे बातचीत करना चाहती थीं। उन्होंने ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ का हवाला देकर लिखा था कि लोगों से बात करने में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। मलाला ने आरोप लगाया कि कश्मीर को दुनिया से अलग-थलग कर दिया गया है और उनकी आवाज़ बाहर नहीं जाने दी जा रही।

आज दुग्गल साहब कोरोना विशेषज्ञ बने हैं: योगेन्द्र यादव के अनुसार देश में 15 करोड़ संक्रमित हो चुके होंगे

सीएए और एनआरसी पर सरकार को लगातार कोसने वाले योगेंद्र यादव अब कोरोना विशेषज्ञ बन गए हैं। उन्हें सरकारी डेटा में तो खामियाँ नज़र आ ही रही हैं, साथ ही वो उलटे-सीधे गुणा-भाग कर के कोरोना वायरस संक्रमण के आँकड़ों को लेकर भी लोगों को डरा रहे हैं। उन्होंने ‘इंडियन कॉउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)’ के डेटा को लेकर अजीबोगरीब दावे किए। ट्वीट थ्रेड से लेकर अख़बारों में लेख तक, उन्होंने हर जगह अफवाह फैलाई।

आईसीएमआर के सर्वे को लेकर योगेंद्र यादव ने दावा किया कि इसमें 0.73% जनसंख्या के कोरोना पॉजिटिव होने की बात कही गई है। साथ ही उन्होने अनुमान लगाया कि अगर सर्वे में 133 करोड़ जनसंख्या को दायरे में लिया गया है तो भारत की कुल 15 करोड़ लोग कोरोना की चपेट में हैं। ‘दैनिक भास्कर’ में लेख लिख कर भी उन्होंने अपनी इस बात को दोहराई। आइए बताते हैं कि यादव 15 करोड़ के आँकड़े तक कैसे पहुँचे।

उन्होंने 133 करोड़ में से 0.73% कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या का अंदाज़ा लगाने के लिए इसे गुना कर के 97 लाख का आँकड़ा निकाला। इसके बाद उन्होंने हॉटस्पॉट सिटीज में 15-30% लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की बात एक ख़बर के हवाले से कही। इसके बाद उन्होंने 5 करोड़ की जनसंख्या में से 75 लाख के कोरोना पॉजिटिव होने की बात कही। इस तरह से उन्होंने अनुमान लगाया कि 30 अप्रैल तक 1.72 करोड़ लोग संक्रमित थे।

इसके बाद बड़ी चालाकी करते हुए उन्होंने 30 अप्रैल और अभी के डेटा की तुलना कर के पाया कि अब तक संक्रमितों की संख्या 8.55 गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने अपने आँकड़े को भी 8.55 गुना कर दिया, जिससे वो 15 करोड़ के आँकड़े तक पहुँचे। ये एक हास्यास्पद गणित का खेल था क्योंकि ख़ुद आईसीएमआर के सर्वे का सैंपल साइज काफ़ी छोटा था, जिससे सवा अरब से ज्यादा की जनसंख्या के बारे में अनुमान लगाया ही नहीं जा सकता।

सबसे पहली बात तो ये कि ये सैम्पल रैंडम लोगों के बीच से इकठ्ठा नहीं किया गया। जिन्हें कोरोना होने की सम्भावना थी या लक्षण थे या फिर जो कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए थे, उनका सैम्पल लिया गया था। इसमें पूरी तरह से स्वस्थ जनसंख्या को घुसेड़ कर योगेंद्र यादव ने पूरे गणित को इधर से उधर कर दिया। मान लीजिए कि अगर इलाक़े में 10 कुएँ हैं और सबकी गहराई का औसत योगेंद्र यादव की ऊँचाई से कम है तो क्या वो उस कुएँ में कूद जाएँगे जिसकी गहराई उनसे काफ़ी ज्यादा है। तब वो औसत देखेंगे या फिर उस ख़ास कुएँ की गहराई?

यही खेल उन्होंने जनता के सामने भी किया है। उन्होंने यहाँ चुनावी गणित लगा दिया। उन्होंने पोटेंशियल कोरोना संक्रमितों के आँकड़े को स्वस्थ लोगों के आँकड़े में घालमेल कर दिया। यहाँ एक बार गौर करने लायक है कि योगेंद्र यादव के आँकड़ों के हिसाब से अब तक लाखों लोगों की मौत हो जानी चाहिए थी, जो नहीं हुई है। उन्होंने डेथ रेट में यह गणित नहीं लगाया क्योंकि इससे उनकी पोल खुलने का डर था।

मोदी सरकार को घेरने के लिए फर्जी डेटा का खेल खेलने वाले योगेंद्र यादव महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से सवाल नहीं पूछ रहे जबकि अकेले मुंबई में कोरोना के मरीजों की संख्या 1 लाख के पार चली गई है। पश्चिम बंगाल में स्थिति सबसे ज्यादा गड़बड़ है और वहाँ गई केंद्र सरकार की टीम ने ही आँकड़ों में हेराफेरी की बात कही थी। दिल्ली में स्थिति दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। योगेंद्र यादव इन तीनों ही राज्यों से सवाल क्यों नहीं पूछ रहे? देखिए, मृत्यु दर को लेकर उन्होंने कैसे ‘दैनिक भास्कर’ में लिखे लेख में सरकार को क्रेडिट देने से इनकार कर दिया। लेख का अंश:

“हमारे देश में कोरोना इतना जानलेवा नहीं है जितना दुनिया के बाकी देशों में। अब सरकारी और दरबारी विशेषज्ञ इसी आँकड़ें की आड़ ले रहे हैं। सच यह है कि इसमें सरकार का कोई कमाल नहीं है। या तो हमारे यहाँ आई कोरोना की प्रजाति कम घातक है, या हमारी गर्मी, बीसीजी के टीके या लक्कड़-पत्थर हज़म प्रतिरोध शक्ति के चलते बचाव हो रहा है।“

यहाँ उन्होंने बड़ी चालाकी से दिल्ली, चेन्नई और अहमदाबाद का नाम तो लिया लेकिन कोलकाता और मुंबई का नाम नहीं लिया। योगेंद्र यादव अपने काल्पनिक संक्रमितों के आँकड़े को लेकर तो सरकार को दोष देना ही चाहते हैं लेकिन मृत्य दर कम होने को लेकर कहते हैं कि ये सरकार का कमाल थोड़े है। इस दोहरे रवैये को उनके गड़बड़ गणित से भी ऊपर रखा जा सकता है। यानी भारत में कोरोना के कारण ज्यादा जाने नहीं गई हैं तो ये उनके हिसाब से ‘कोरोना की महानता’ है।

अगर आपको अभी भी लग रहा योगेंद्र यादव का गणित सही है तो आपको जानना ज़रूरी है कि गुमराह कैसे किया जाता है। भारत में अब तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या 3.09 लाख है। मृतकों की संख्या 8895 है। यानी, कुल संक्रमितों में से 2.89% की मौत हुई है। अगर योगेंद्र यादव के आँकड़ों की बात करें तो कुल 44 लाख मौत का आँकड़ा बैठता है इसी प्रतिशत के हिसाब से। क्या ये संभव है। सोचिए।

मैनपुरी में सोशल डिस्टेंसिंग को ठेंगा दिखा जुटे नमाजी, अलीगढ़ में नमाज पढ़ने को लेकर मारपीट, 16 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी और अलीगढ़ की एक मस्जिद में नियमों का उल्लंघन करते हुए कुछ लोग शुक्रवार (12 जून 2020) को नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हुए। दोनों मामले में यूपी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से 16 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक मैनपुरी के नगला कंवर स्थित एक मस्जिद में जुटे नमाजियों ने न तो मास्क लगा रखा था और न ही किसी कपड़े से मुॅंह ढक रखा था। वे सोशल डिस्टेंस के नियमों का भी पालन नहीं कर रहे थे।

इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके से 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। चौकी इंचार्ज सिविल लाइन अमित सिंह ने सभी के खिलाफ लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने और ग्राम नगला मुले में कोरोना प्रभाव के चलते लागू नियमों को तोड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए नमाजियों की पहचान इस्माइल इमरान, जहीर अहमद, मोहम्मद इस्माइल अंसारी, राशिद, मोहम्मद ओसामा अंसारी, नौशाद, मोहम्मद सादिक, बिलाल, एहतशाम, शमशुद्दीन, मोहम्मद हाफिज के रूप में की गई है।

वहीं अलीगढ़ जिले के अधौन गाँव स्थित मस्जिद में भी कुछ लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हो गए। इस दौरान कुछ लोगों ने इसका विरोध किया तो नमाजियों ने उनके ऊपर पथराव कर दिया।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक जमशेर पुत्र कासिम अली ने बताया कि उसके घर के पास एक पुरानी मस्जिद है, जिसमें गाँव के लोग पाबंदी के बाद भी जबरन नमाज पढ़ने के लिए आते हैं। कई बार इन लोगों से कहा गया कि अपने घरों में नमाज अदा करें पर यह लोग नहीं माने।

जमशेर के मुताबिक शुक्रवार को भी यह लोग एकजुट होकर मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने आए थे। मना करने पहले तो उसके साथ मारपीट की और फिर गली में पथराव करना शुरू कर दिया। सूचना पर पनैठी पुलिस मौके पर पहुँची और मारपीट करने के आरोप में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

पनैठी पुलिस चौकी के चौकी इंचार्ज सुमित गोस्वामी ने बताया कि जमशेर और गुलजार के परिवारों के बीच दुकान से सामान लेने के रुपयों को लेकर मारपीट हुई है। पुलिस ने मारपीट करने वाले दोनों पक्ष के चार लोग गुलजार, जमशेर,आरिफ नफासम अली के खिलाफ कार्रवाई की है।

कट्टरपंथियों ने पीटा, घर पर पत्थर फेंके; हिंदू परिवार ने लगाया ‘मकान बिकाऊ है’ का बोर्ड: अमेठी SP ने दिए कार्रवाई के आदेश

उत्तर प्रदेश के अमेठी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पर समुदाय विशेष के लोगों से जान का खतरा होने की वजह से एक हिन्दू परिवार पलायन को मजबूर है। पीड़ित परिवार ने अपने घर के बाहर ‘यह मकान बिकाऊ है’ का बोर्ड लगा दिया है। साथ ही उसने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए मकान बेच कर कहीं और जाने की बात कही है।

जानकारी के मुताबिक अनिल द्विवेदी के बड़े बेटे उत्कर्ष द्विवेदी के साथ कट्टरपंथियों ने मारपीट की और फिर घर पर पत्थरबाजी की। इसके बाद घर में घुस कर भी मारपीट की।

दरअसल 27 मई 2020 की शाम उत्कर्ष द्विवेदी ने अमजद को बाग में बकरियों को आम की नीची डाली से पत्तियाँ खिलाने से रोका तो गाली-गलौज करते हुए घर से और लोगों को बुला लिया। इसके बाद शाहरुख, अमजद, अफजल, कटाले, शब्बीर आदि ने उत्कर्ष को मारपीट कर लहूलुहान कर दिया। जब बीच-बचाव करने के लिए उत्कर्ष की बहन शीतांशु आई तो उसे भी मारा पीटा गया। साथ ही पूरे घर को जान से मारने की धमकी देते हुए भद्दी-भद्दी गालियाँ दी।

उत्कर्ष के छोटे भाई उत्सव द्विवेदी ने फेसबुक के माध्यम से जानकारी दी कि शाम के विवाद के बाद अनिल द्विवेदी को अमेठी कोतवाली में बैठा लिया गया था। घर पर सिर्फ वो और उसकी बहन थी। घर के बाकी लोग भी थाने में ही थे। उत्सव ने बताया कि रात के लगभग 8 बजे अली हुसैन, माने, ननकऊ, रज्जाक, अफजल, शाहरुख, हाजिरन पत्नी जाकिर हुसैन आदि को लाठी- डंडों के साथ घर की तरफ आते देख बहन ने गेट बंद करके ताला लगा लिया। दबंगों ने घर पर पत्थर बरसाते हुए भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं और पूरे घर वालों को जान से मारने की धमकी दी।

उत्सव द्विवेदी का फेसबुक पोस्ट

मामले का संज्ञान लेते हुए CO Amethi पीयूष कांत राय, कोतवाल श्याम सुंदर ने घर पहुँचकर उनकी समस्यायों को ध्यानपूर्वक सुना और त्वरित कर्रवाई का आश्वासन दिया है। उत्सव ने इसकी जानकारी फेसबुक के जरिए दी है। इसके लिए उत्सव ने अमेठी पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग का शुक्रिया अदा किया है।

अमेठी पुलिस का ट्वीट

एसपी ख्याति गर्ग ने कहा है कि घटना पुरानी है। पुलिस ने कार्रवाई भी की है। सीओ को मौके पर जाकर पूरे मामले की फिर से गहनता से जाँच करने का आदेश दिया गया है। जाँच में जो भी दोषी मिलेंगे। उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी के मेरठ और अलीगढ़ आदि जगहों से भी इस तरह की खबरें सामने आ चुकी है। अलीगढ़ में सीएए के विरोध में हुए हिंसा के बाद सदर क्षेत्र के बाबरी मंडी में कुछ लोगों ने अपने घर के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए। हालॉंकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिलाए जाने के बाद पोस्टर हटा लिए गए। दंगाइयों ने लोगों के घरों में भी घुसने की कोशिश की थी। बाबरी मंडी चौकी में पुलिसकर्मियों को भी घेर लिया था। इसके बाद यहॉं रहने वाली सावित्री, सुधा, द्वारिका प्रसाद, नेहा गुप्ता समेत कई लोगों ने अपने घरों के बाहर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए।

इसी तरह की खबर बीते साल मेरठ के प्रह्लाद नगर से भी आई थी। दहशत की वजह से बहुसंख्यक समुदाय के लोगों ने अपने घर और दुकान के बाहर बिकाऊ होने का बोर्ड लगा दिया था।