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जिस महिला अधिकारी से सपा MLA अबू आजमी ने की बदसलूकी, उसका उद्धव सरकार ने कर दिया ट्रांसफर

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस अधिकारी शालिनी शर्मा का ट्रांसफर कर दिया है। मुंबई के नागपाड़ा पुलिस स्टेशन की इंस्पेक्टर शालिनी शर्मा के साथ सपा विधायक अबू आजमी के बदसलूकी का वीडियो सामने आया था।

महिला पुलिस अधिकारी को अपमानित करने के बाद आजमी ने उनका ट्रांसफर करने की मॉंग की थी। इसके बाद दबाव में शालिनी शर्मा का ट्रांसफर मुंबई के चेंबुर पुलिस स्टेशन में कर दिया गया है।

हालाँकि महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शालिनी शर्मा ने खुद ट्रांसफर की माँग की थी। उनकी माँग स्वीकार करते हुए ट्रांसफर किया गया है। लेकिन उनका ट्रांसफर आजमी द्वारा धमकाए जाने का वीडियो सामने आने के एक दिन बाद हुआ है।

शर्मा के तबादले को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सौमैया ने उद्धव सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि विधायक अबू आजमी ने एक महिला को गाली दी। सोशल डिस्टेंसिग की धज्जियाँ उड़ाई। भीड़ को भड़काया। इस दौरान किसी ने मास्क तक नहीं पहना था। बावजूद इसके उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए सरकार ने महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी।

बता दें समाजवादी पार्टी की महाराष्ट्र राज्य शाखा के अध्यक्ष अबू आज़मी सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ नागपाड़ा पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए थे। आजमी ने शर्मा के सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था, “ये औरत कहती है कि आप पुलिस पे इल्जाम लगाते हो, मैं बात नहीं करूँगी। तेरे बाप के बाप के बाप को बात करनी पड़ेगी।”

आज़मी ने शर्मा को उनकी शिकायत गृहमंत्री से भी करने के धमकी दी थी। आज़मी ने महिला अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि पुलिस ने उनकी शिकायत सुनने से इनकार कर दिया था और उन्हें स्टेशन से जाने के लिए भी कहा था।

आज़मी कहा, “मैं एक जनप्रतिनिधि हूँ, मैं कोई आम आदमी नहीं हूँ। मुझे जनता ने चुना है और हम सरकार के सामने अपने सवाल उठाएँगे। प्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर पूरी दुनिया भारत की आलोचना कर रही है।”

पुलिस अधिकारी से तीखी बहस करने के बाद सोशल डिस्टेंसिग की धज्जियाँ उड़ाते हुए आज़मी ने सैकड़ों समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन के सामने इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगे थे।

पालघर: साधुओं की लिंचिंग के बाद अब पुजारियों पर हमला, मंदिर में तोड़फोड़ और लूटपाट

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की लिंचिंग के कुछ हफ्ते बाद ही वहाँ के बालिवली में स्थित एक मंदिर के पुजारियों पर हमले की एक नई घटना सामने आई है। खबर है कि वहाँ 3 अज्ञात लोगों ने मंदिर के पुजारियों पर आक्रमण करके मंदिर में तोड़फोड़ और लूटपाट की, जिन्हें पुलिस ने अब गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना गुरुवार (मई 28, 2020) को देर रात 12:30 बजे घटी, जब हथियार से लैस तीन लोग वसई तालुका में बालिवली के जागृत महादेव मंदिर व आश्रम में घुसे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने मंदिर के मुख्य पुजारी संकरानन्द सरस्वती (Sankaranand Saraswati) और उनके सहायक पर हमला बोला। बाद में मंदिर की दानपेटी तोड़कर करीब 6,800 रुपए की चीजें लेकर फरार हो गए।

पुलिस का कहना है कि, हमले के समय दोनों पुजारी हमलावरों की चंगुल से खुद को छुड़ाने में कामयाब रहे। मगर, उनको थोड़ी चोटे आई हैं। पुलिस ने बताया कि हमले के बाद मुख्य पुजारी ने खुद को आश्रम के कमरे में बंद कर लिया था। जबकि उनका सहायक परिसर से ही भाग गया था।

बता दें, इस मामले में तीनों अज्ञातों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 394 के तहत व अन्य उपयुक्त प्रावधानों के तहत मामला दर्ज हुआ था। जिसके बाद पुलिस ने इस संबंध में अब इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से एक आरोपित को पुलिस ने कल गिरफ्तार कर लिया था। जबकि बाकी 2 की गिरफ्तारी आज हुई। अभी तक प्राप्त सूचना के मुताबिक, ये तीनों अज्ञात स्थानीय हैं, जो हथियारों से लैस होकर मंदिर में लूट के इरादे से आए थे।

गौरतलब है कि इस घटना से कुछ दिनों पहले पालघर में जूना अखाड़ा के दो साधुओं और उनके एक ड्राइवर की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। उस दौरान 400 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने हिंदू संतों पर आक्रमण किया था। मगर, पुलिस ने भीड़ पर फौरन उपयुक्त कार्रवाई करने की जगह ये स्पष्टीकरण दिया था कि भीड़ ने साधुओं को चोर समझकर मारा।

हालाँकि, बाद में एक वीडियो सामने आई, जिससे मालूम चला कि भीड़ ने पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाकर ही हिंदू संतों को बेरहमी से मारा और पुलिस केवल मूक बनकर तमाशा देखती रही। घटना के तूल पकड़ने के बाद ये भी खुलासा हुआ था कि साधुओं की हत्या के पीछे कुछ राजनैतिक एंगल भी थे।

इसके अलावा, याद दिला दें अभी कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के नांदेड़ में दो अन्य साधुओं का शव भी बरामद हुआ था। इनकी पहचान बालब्रहम्चारी शिवचार्या महाराज गुरू और भगवान शिंदे के रूप में हुई थी।

AMU का फरहान जुबैरी गिरफ्तार, CAA विरोधी हिंसा में था शामिल: पथराव, जानलेवा हमले सहित कई मामलों में वांछित

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र और पूर्व कैबिनेट सदस्य फरहान जुबैरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। AMU में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के नाम पर हुए बवाल में वह शामिल था। उस पर कुल 11 मुकदमे दर्ज हैं। एसपी सिटी की गाड़ी पर पथराव, पुलिस पर हमले सहित सात मुकदमों में वह वांछित चल रहा था।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक जुबैरी को अलीगढ़ पुलिस ने गुरुवार दोपहर को कठपुला के पास से गिरफ्तार किया। वह एएमयू के ही साथी छात्र के साथ कार में सवार होकर शहर से बाहर जा रहा था। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद जुबैरी के साथी को पुलिस ने छोड़ दिया। देर शाम जुबैरी को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर उसे जेल भेज दिया।

एसपी सिटी अभिषेक ने बताया कि थाना सिविल लाइन के कई मुकदमों में वांछित अभियुक्त फरहान जुबैरी को कठपुला पुल से गिरफ्तार किया गया। जुबैरी बदायूँ जिले के इस्लामनगर का रहने वाला है। फिलहाल वह अलीगढ़ शहर की जकरिया मार्केट में रहता है। वह एएमयू कला संकाय से डीएसडब्ल्यू का छात्र है।

एसपी सिटी के मुताबिक पिछले वर्ष 15 दिसंबर को सीएए-एनआरसी के विरोध में एएमयू छात्रों द्वारा पुलिस पर किए गए पथराव, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने, सरकारी कार्य में बाधा डालने व एसपी सिटी की गाड़ी पर पथराव सहित अन्य कई मुकदमों में वह वांछित था।

जुबैरी पर सीएए-एनआरसी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले भाषण देने का भी आरोप है। वह बीजेपी विधायक दलवीर सिंह के पौत्र अजय और निशित पर हमले सहित कुल 11 मुकदमों में आरोपी भी है।

आपको बता दें कि पिछले वर्ष लागू किए गए सीएए को लेकर एएमयू में छात्रों ने अपनी माँगो को लेकर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन किया था। 15 दिसंबर की रात को जामिया यूनिवर्सिटी में हुए बवाल और लाठीचार्ज के बाद फैली एक अफवाह से एएमयू में सीएए के विरोध के नाम पर हिंसा भड़क उठी थी।

इस दौरान एएमयू छात्रों द्वारा पुलिस के ऊपर हमला और एसपी सिटी की गाड़ी में तोड़फोड़ जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया था। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने करीब 1100 छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

स्विट्ज़रलैंड के स्कूल में भारतीय मूल की छात्रा के साथ हिन्दू सांस्कृतिक पहचान के कारण नस्लीय भेदभाव

स्विट्जरलैंड में दुनिया के सबसे महँगे स्कूलों में से एक- ली रोजी (Le Rosey) में भारतीय मूल के अभिभावकों द्वारा नस्लीय भेदभाव और हिन्दूफ़ोबिया का मुकदमा दर्ज किया है। ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए पीड़ित के पैरेंट्स ने बताया कि कि उनकी बेटी स्कूल में अपनी भारतीय संस्कृति और हिन्दू पहचान के कारण निशाना बनाई जा रही है, जिस कारण वह मानसिक तनाव से गुजर रही।

ऑपइंडिया से बातचीत में भारतीय मूल के उद्योगपति राधिका ओसवाल (Radhika Oswal) और पंकज ओसवाल (Pankaj Oswal) ने बताया कि स्कूल ने उनकी बेटी के साथ नस्लीय भेदभाव कर उसके मानसिक उत्पीड़न में शामिल आरोपितों को बचाने का भी काम कर रहा है।

पीड़िता के अभिभावकों ने कहा कि उनकी बेटी स्विट्जरलैंड में स्थित ली रोजी स्कूल में पढ़ती है जहाँ बड़े और नामी घरानों के बच्चों ने उसकी भारतीय पृष्ठभूमि जैसे- सांस्कृतिक पहचान, शाकाहारी होना आदि को लेकर उसका मजाक बनाया गया और भावनात्मक शोषण किया गया है।

इस घटना के बारे में बात करते हुए पीड़ित छात्रा की माँ राधिका ओसवाल ने कहा –

“हम संस्थान में अपनी बच्ची के साथ हुए व्यवहार से हताश और चकित हैं। संकाय सदस्य भी अपने ही आचार संहिता के पालन में बुरी तरह से असफल हुए हैं। जाहिर तौर पर ‘आदर’ और ‘शारीरिक समग्रता’ के जिस मूल्य की संस्थान बात कर रहा है तथा जिन छात्रों की ‘धार्मिक, दार्शनिक और राजनैतिक प्रतिबद्धता’ से संबंधित बातें संस्थान करता है वह महज मार्केटिंग व्हाइटवॉश के अलावा कुछ भी नहीं है!”

अपने बच्चे के खिलाफ लगातार बढ़ते दुर्व्यवहार के मामलों के बाद अभिभावकों ने स्कूल को अपनी चिंताओं से अवगत करवाया और अपने बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने कि बात कही। लेकिन स्कूल के सीनियर प्रबंधन ने इन आरोपों को ना तो स्वीकार किया और न ही कोई कदम उठाने की मंशा जताई।

इस दौरान छात्रों की बदमाशियाँ बढ़ती गयी और उनकी बेटी के साथ साइबर दुर्व्यवहार भी शुरू हो गया। छात्रा का विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुपों पर अन्य छात्रों की मौजूदगी में मज़ाक उड़ाया जाने लगा। यही नहीं छात्रा के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई करने या किसी उचित निष्कर्ष तक पहुँचने की कोशिश करने के बजाए ‘ली रोजी’ स्कूल ने अगले अकादमिक सत्र में बिना किसी स्पष्टीकरण के उसका पुनः नामांकन तक खारिज कर दिया।

पीड़ित छात्रा के माता-पिता का कहना है कि अन्य भारतीय छात्रों के साथ भी दुर्व्यवहार के स्पष्ट मामले हैं, जिन्हें उनके बैकग्राउंड, संस्कृति और शाकाहारी होने के कारण परेशान किया जाता है।

राधिका ओसवाल ने आगे कहा –

“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अन्य भारतीय छात्रों को एक संकाय सदस्य द्वारा जातिगत ताना मारा जा रहा है। बच्चों के सामने अपमानजनक और नस्लीय टिप्पणियाँ की जाती हैं, जैसे कि – भारत एशिया का कूड़ेदान है और भारतीय माता-पिता स्वीपर की तरह दिखते हैं। यह और अधिक दुखद है कि ऐसे व्यवहार के बावजूद कई भारतीय माता-पिता इस स्कूल में अपने बच्चों की शिक्षा जारी रखते हैं। यह चौंकाने वाला है कि बच्चों के शाकाहारी होने तथा उनकी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं को लेकर उन्हें ताने दिए जाते हैं, उनका मजाक उड़ाया जाता है। लेकिन इससे भी दुखद ये है कि माता-पिता कोई कार्रवाई नहीं करते।”

राधिका ओसवाल ने कहा कि ‘ली रोजी’ स्कूल की आचार संहिता से संबंधित अन्य मुद्दों पर भी स्कूल बहुत अधिक चिंतित नहीं है। जैसे कि स्कूल का पाँचवा ‘मेजर रूल’ यह है कि ‘सप्ताह के किसी भी दिन परिसर के अंदर या बाहर मादक पेय पदार्थ रखना या सेवन करना’ एक ‘प्रमुख अपराध’ है। तथा आचार संहिता में धूम्रपान और ‘बिना अनुमति के एक भवन से बाहर जाना’ बड़े अपराधों में शामिल है। इसके विपरीत स्कूल में मादक पेय और धूम्रपान का सेवन कथित रूप से प्रचलित है। उदंड छात्रों को अक्सर कक्षा के दौरान ‘ली रोजी’ के आसपास क्लबों और बार में देखा जा सकता है, जहाँ वे महँगे पेय पर खूब खर्च करते हैं।

पीड़ित छात्रा के अभिभावकों ने बताया कि उनकी चिंताओं को दूर करने के विपरीत, ली रोजी और उसकी फैकल्टी मुख्य रूप से उनकी बेटी के चरित्र मूल्यांकन में व्यस्त रहे। उसके ग्रेड को कम कर दिया गया, वह अपनी कक्षा में बेहतर ग्रेड प्राप्त करने वाली छात्राओं में से एक थी। इस तरह उन्होंने उन छात्रों का ही समर्थन किया, जिन्होंने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। यहाँ तक कि अगले अकादमिक वर्ष में उसके पुनः नामांकन को रद्द कर दिया और उसे अत्यधिक मानसिक यातना देते हुए उसे चुप कराने की कोशिश की।

उल्लेखनीय है कि ‘ली रोजी’ को दुनिया के सबसे महँगे स्कूलों में से एक माना जाता है। स्विटरजरलैंड की राजधानी जिनेवा से लगभग 26 किलोमीटर दूर बसे इस स्कूल के पास अपनी विशाल संपत्ति है। इसके पास अपने जहाज और रिजॉर्ट हैं, जहाँ हर साल जनवरी में स्कूल के बच्चे जाते हैं और अगले 3 महीनों तक फन एक्टिविटीज करते हैं।

ली रोजी स्विटजरलैंड का एक नामी बोर्डिंग स्कूल है। जहाँ पर सिर्फ एक साल की फीस लगभग 100,000 डॉलर (लगभग 75 लाख रुपए) है, और यह भी मात्र ट्यूशन फीस है, जिसमें अन्य खर्चे शामिल नहीं हैं।

सर रोजर मूर, डायना रॉस और एलिजाबेथ टेलर सभी ने अपने बच्चों को इसी ले रोजी स्कूल भेजा था और इसके पूर्व विद्यार्थियों में जॉन लेनन के बेटे सीन और विंस्टन स्पेंसर चर्चिल भी शामिल थे।

पीड़ित छात्रा के अभिभावकों का कहना है कि वह इस मुद्दे पर न्याय माँग रही हैं ताकि भविष्य में भी इस प्रकार की किसी गतिविधि को ना दोहराया जाए और भारतीयों के खिलाफ होने वाले नस्लीय भेदभाव के मामलों में गिरावट आए। उन्होंने कहा कि यह पैसे की नहीं, बल्कि सिद्धांतों की लड़ाई है। साथ ही, किसी भी वित्तीय निर्णय से प्राप्त धन को चैरिटेबल कार्यों के लिए दान करने का वादा किया है।

गौरतलब है कि पीड़ित छात्रा के पिता पंकज ओसवाल (Pankaj Oswal) मशहूर उद्योगपति ओसवाल घराने से हैं। इनकी पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में बर्रप होल्डिंग्स लि. कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी लिक्विड अमोनिया बनाने वाली कंपनी थी। लुधियाना में जन्में पंकज ओसवाल के दादा लाला विद्यासागर ओसवाल ने ‘ओसवाल समूह’ की स्थापना की थी।

नोट – ऑपइंडिया इस सम्बन्ध में ‘ली रोजी’ स्कूल से उनका बयान माँगा है, फिलहाल यह रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कोई भी आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

असलम ने किया रेप, अखबार ने उसे ‘तांत्रिक’ लिखा, भगवा कपड़ों वाला चित्र लगाया

भाषा के जरिए मीडिया में अक्सर समुदाय विशेष के अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश करता रहता है। कई ऐसे मामले हैं जब आरोपित ‘मुस्लिमों’ की न केवल पहचान छिपाई गई, बल्कि इस चक्कर में हिंदुओं को बदनाम करने के लिए कई युक्तियाँ प्रयोग में लाई गईं।

अभी कुछ समय पहले का एक मामला देखिए। इसकी कवरेज की फोटो अब वायरल होनी शुरू हुई है। पिछले साल, बिलासपुर में एक महिला अपने पति के दूर जाने व पारिवारिक समस्याओं के चलते परेशान थी। उसे कहीं से एक मुस्लिम आलिम असलम फैजी के बारे में सूचना मिली। वह उसके पास मदद के लिए पहुँच गई। आलिम ने महिला की समस्या को दूर करने के बहाने पहले उसे डरा-धमकाकर शारीरिक संबंध बनाया। फिर, उसे आश्वासन दिया कि अब उसकी समस्या हल हो जाएगी। 

कुछ दिन बाद जब महिला के पास न उसका पति लौटा और न ही उसकी परेशानियाँ समाप्त हुईं, तो उसे एहसास हुआ कि असलम फैजी ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया है। इसके बाद महिला ने फौरन पुलिस में जाकर असलम फैजी की शिकायत की। पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

नई दुनिया में प्रकाशित संबंधित खबर

पुलिस की पड़ताल में भी ये मालूम चला कि मूलत: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी निवासी असलम फैजी उर्फ सुहैल रजा एक मस्जिद का मौलवी था। वह पेंड्रा में किराए पर रहता था और यहाँ पर लोगों को जादू-टोने से ठीक करने का दावा करता था।

जाँच में ये भी पता चला कि असलम के पास न केवल आसपास से लोग आते थे, बल्कि दूसरे जिले के लोग भी उसके पास अपनी समस्या लेकर आते थे। ऐसे मे जब 34 वर्षीय महिला को इसकी सूचना मिली, तो वो भी असलम के पास पहुँची। जहाँ असलम ने पहले महिला की परेशानी को सुना और फिर उसे झाड़-फूँक के नाम पर कमरे में ले गया गया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

बिछड़े पति से मिलाने का झांसा देकर तांत्रिक ने किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार
साभार: हरिभूमि

अब चूँकि पूरा मामला समुदाय विशेष के अपराध से संबंधित था, तो जरूरी है कि खबर को कवर करते समय दोनों बातों का ख्याल रखा जाए। मगर, नई दुनिया समेत कई मीडिया पोर्ट्ल्स ने इस खबर को प्रकाशित किया और हेडलाइन में मुस्लिम आलिम की जगह ‘तांत्रिक’ शब्द का प्रयोग किया। साथ ही जादू-टोना करने वाले मौलवी की जगह एक पुजारी का स्केच लगा दिया।

अब ऐसा नहीं है कि शब्दकोष में जादू-टोना करने वालों के लिए कोई अन्य शब्द नहीं है या फिर इंटरनेट पर जादू-टोना करते मौलवियों की प्रतीकात्मक तस्वीर नहीं है। लेकिन, फिर भी पाठकों को बरगलाने के लिए किया गया इस तरह का प्रयास दर्शाता है कि अब मीडिया की हर विधा में इस बात को सामान्य मान लिया गया है कि मुस्लिमों के अपराध को छिपाने के लिए हिंदुओं की संस्कृति, सभ्यता से जुड़े चिह्नों व शब्दों को प्रयोग में लाना आवश्यक है।

बता दें, पिछले साल का ये वाकया मीडिया के इतिहास में घटिया प्रयास की पहली-दूसरी घटना नहीं है। इससे पहले और इसके बाद कई बार कई मीडिया संस्थानों ने हिंदू भावनाओं की कद्र किए बिना मुस्लिम आलिम के लिए ‘तांत्रिक’ शब्द का इस्तेमाल किया और जादू-टोना करने वालों को मंत्रों की झाड़-फूँक करने वाला बताकर दर्शाया। साथ ही मुस्लिमों द्वारा किए गए अपराध को ‘हिन्दू स्पिन’ दे दिया ।

पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में घटी घटना के बाद सामने आया था। जहाँ मुस्लिम आलिम द्वारा काले जादू का उपयोग करके किए गए इलाज में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। मगर मीडिया गिरोह ने इस अपराध को हिन्दू द्वारा किए गए अपराध के रूप में फैलाया था।

मुस्लिम आलिम के गिरफ्तार होने पर मीडिया हाउस ने इसे हिन्दू स्पिन देने के लिए मुस्लिम आलिम की जगह ‘तांत्रिक’ लिखा। NDTV, India Today, The Tribune और कई अन्य  मीडिया हाउसों ने PTI द्वारा प्रकाशित की गई उस खबर को आगे फैलाया। इसमें लिखा गया था कि तांत्रिक द्वारा पारंपरिक तरीके से इलाज के दौरान पश्चिम बंगाल में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई।

इसी प्रकार एक तलाक का मामला भी कुछ दिन पहले सामने आया। इस मामले में हलाला का हवाला देकर निकाई अब्बा ने एक मुस्लिम महिला का बलात्कार किया। मगर NDTV जैसे न्यूज़ चैनल ने तथाकथित सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की कोशिश में मुस्लिम अपराधी के लिए ‘तांत्रिक’, ‘बाबा’, जैसे शब्दों का प्रयोग किया।

यहाँ, बता दें तांत्रिक से मतलब तंत्र विद्या अभ्यास करने से जुड़ा है। ये मुख्य रूप से हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ है। मगर, मीडिया द्वारा की गई ऐसी रिपोर्ट्स से ये संदेश जाता है कि अपराध हिन्दू व्यक्ति द्वारा किया गया था, जबकि ये अपराध मुस्लिम आलिम द्वारा किए गए होते हैं।

पुलवामा में मिली विस्फोटकों से लदी कार C ग्रेड आतंकी हिदायतुल्ला की, BSF जवान की बाइक का लगा रखा था नंबर प्लेट

सुरक्षा बलों ने करीब 40 किलो विस्फोटक से लदी कार जब्त कर पुलवामा में बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस कार के मालिक की पहचान हिदायतुल्ला मलिक के तौर पर की है।

वह हिज्बुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ है। शोपियॉं के शरदपोरा गॉंव का रहने वाला मलिक सालभर से आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उसे इस साल की शुरुआत में सी श्रेणी के आतंकियों में सूचीबद्ध किया गया था। उस पर तीन लाख रुपए का इनाम है।

हिदायतुल्ला मलिक की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। इस कार का इस्तेमाल कर आतंकी पुलवामा में बीते साल की तरह ही जवानों को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला करने की फ़िराक में थे। आतंकियों ने कार पर जो फर्जी नंबर प्लेट लगा रखा था, वह कठुआ जिले के निवासी और श्रीनगर में तैनात बीएसएफ के एक जवान की मोटरसाइकिल का है।

शुरुआती जाँच में इस हमले का रावलपिंडी कनेक्शन का भी खुलासा हुआ है। हमले में जीशान पाशा नाम के एक हिज्बुल कमांडर का नाम भी सामने आया है। यह माना जा रहा है कि इस पूरी साजिश का खाका उसी ने खींचा था।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि इस बात के सबूत भी मिले हैं कि कश्मीर में किसी बड़े आतंकी हमले की साजिश के लिए हिज्बुल चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने हाल ही में एक बड़ी बैठक की थी। मुजफ्फराबाद (पीओके) की इस बैठक में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के कई बड़े कमांडरों ने हिस्सा लिया था।

इससे पहले भारतीय सेना ने इस साजिश में शामिल आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों की पहचान को उजागर किया था। सेना की शुरुआती जाँच में आदिल का नाम सामने आया है, जो जैश और हिज्ब दोनों के लिए काम करता है।

बताया जा रहा है कि कार वही चला रहा था। उसके साथ कार में पाकिस्तानी आतंकी फौजी भाई था। वह भी जैश के लिए काम करता है। इतना ही नहीं आईईडी तैयार करने वाले आतंकी के बारे में भी सुरक्षाबल पता लगा चुके हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह आईईडी पाकिस्तानी आतंकी वलीद ने तैयार की थी। ए-श्रेणी का आतंकवादी वलीद उर्फ मूसा उर्फ इदलीस घाटी में वर्ष 2015 से सक्रिय है। दरअसल यह कार रमजान माह के 17वें दिन यानी जंग-ए-बद्र पर आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया गया था।

परंतु सुरक्षाबलों की चौकसी की वजह से वे उस दिन हमले को अंजाम नहीं दे पाए थे। सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस, सेना और सीआरपीएफ को पिछले कई दिनों से संभावित फिदायीन हमले के बारे में इनपुट मिल रहे थे।

गौरतलब है कि पुलवामा में 27-28 मई 2020 को एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया था। सुरक्षाबलों ने पुलवामा के पास एक सैंट्रो गाड़ी की पहचान की थी। इसमें IED (इंप्रोवाइज्ड एक्स्प्लोसिव डिवाइस) प्लांट की गई थी। सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने कार को घेर लिया, लेकिन इसी बीच कार के भीतर से गोलीबारी शुरू हो गई।

गोलीबारी के बीच इस दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भाग निकले थे। कार की तलाशी ली गई तो उसमें IED का पता चला। सैंट्रो को पुलवामा के रजपुरा रोड के पास शादीपुरा में पकड़ा गया था। बम डिस्पोजल स्क्वायड ने समय रहते ही इसे डिफ्यूज कर दिया था।

मोदी से वार्ता को लेकर ट्रम्प ने बोला झूठ, विदेश मंत्रालय ने कहा- 4 अप्रैल के बाद नहीं हुई कोई बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए गलतबयानी या असहज बयान देकर दूसरे देशों व उनके राष्ट्राध्यक्षों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर देना कोई नई बात नहीं है। शुक्रवार (29 मई 2020) को ट्रम्प ने वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि उनकी मोदी से बात हुई है और मोदी चीन को लेकर बहुत अच्छे मूड में नहीं है।

भारत व चीन के LAC पर पसरे मौजूदा सीमा तनाव को देखते हुए ट्रम्प के इस बयान का खासा महत्व है। लेकिन जैसे ही मीडिया में यह खबर आई भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हाल ही में कोई बात नहीं हुई है। ऐसे में यह सवाल उठ खड़ा होना लाजमी है कि क्या ट्रंप जान बूझ कर भारत व चीन के बीच गलतफहमी को बढ़ाने के उद्देश्य से यह बयान दिया है।

विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन दावों को भी खारिज़ कर दिया है, जिसमें ट्रम्प ने कहा था कि भारत-चीन के मसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी और वह दोनों देशों के बीच बड़े टकराव को लेकर अच्छे मूड में नहीं हैं।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 4 अप्रैल के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। दोनों के बीच अंतिम बातचीत हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के विषय पर हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने आगे स्पष्ट किया कि भारत इस विवाद को हल करने के लिए स्थापित तंत्र और राजनयिक संपर्कों के माध्यम से सीधे तौर पर चीन से बातचीत कर रहा है।

बता दें व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में गुरुवार (28 मई) को रिपोर्टरों से भारत और चीन के बीच गतिरोध को लेकर बात करते हुए ट्रम्प ने कहा था, ”मैं आपके प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूँ। वह एक बहुत ही सज्जन हैं। भारत और चीन के बीच बड़े टकराव की स्थिति है। दोनों देशों के पास तकरीबन 1.4 अरब आबादी हैं। दोनों की पास काफी मजबूत सेना हैं। भारत खुश नहीं है और शायद चीन भी खुश नहीं है। मैंने पीएम मोदी से बात की थी और चीन के साथ जो कुछ भी चल रहा है उसे लेकर उनका मूड ठीक नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा था कि अमेरिका दोनों के बीच उबलते सीमा विवाद में मध्यस्थता करने या फैसला करने के लिए तैयार है, इच्छुक है और योग्य भी है।’

ट्रम्प ने पहले भी बोला था झूठ

इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर के मुद्दे पर भी ऐसी ही भ्रामक बात कही थी। तब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से चर्चा के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए पीएम मोदी ने उनसे अपील की है। तब भारत ने तत्काल इसका खंडन किया था कि पीएम मोदी ने ऐसी कोई बात नहीं कही है और भारत कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की दखल कतई नहीं चाहता है।

क्या है पूरा मामला

इस महीने की शुरुआत से ही लद्दाख में चीनी सैनिक और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं, चीन की ओर से लगातार सैनिकों की संख्या बढ़ाने और बेस बनाने की खबरें आ रही हैं। जिसको लेकर सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 22मई,2020 को लद्दाख का दौरा किया था।

बता दें चीन ने पैंगोंग त्सो के पास अत्यधिक सैनिक बल को तैनात किया था और लद्दाख में गलवान नदी पर अस्थाई टेंट भी स्थापित किया था। यह भी माना जा रहा है कि चीनी सैनिकों ने पैंगोंग त्सो झील के किनारे भी स्थिति संभाली हुई है और क्षेत्र में भारतीय बलों को डराने के लिए मोटरबोट के साथ आक्रामक गश्त भी कर रहे हैं।

ऐसे में भारत भी पूरी तरह से मुस्तैद है और शीर्ष स्तर पर इसको लेकर मंथन चल रहा है। पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पिछले कुछ दिनों से चीन की तरफ से सैन्य गतिविधियों के बढ़ने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच 2017 में उपजे डोकलाम विवाद जैसी स्थिति फिर से दोनों देशों के बीच उत्पन्न हुई है।

दिल्ली में अस्पताल और श्मशान में शव रखने की जगह नहीं, हाइकोर्ट ने भेजा केजरीवाल सरकार, तीनों निगमों को नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने लोकनायक अस्पताल में शवों की बदत्तर स्थिति का जायजा लेने के बाद दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने शवों को लेकर मानवाधिकारों के उल्लंघन पर आपत्ति जताई गई है। साथ ही इस मामले पर वकीलों के साथ दिल्ली सरकार और तीनों एमसीडी को शुक्रवार (29,मई2020) को अदालत में पेश होने को कहा है।

देश में लगातार कोरोना के आँकड़े बढ़ते चले जा रहे है। ऐसे में दिल्ली की दशा भी आए दिन और खराब होती चली जा रही है। दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोगों के मौत के मामलों में वृद्धि लोकनायक अस्पताल के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बता दें इस वक्त दिल्ली में लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल कोविड-19 का सबसे बड़ा अस्पताल है।

हाल ही में मीडिया में लोकनायक अस्पताल की मॉर्चरी में रखे शवों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी। जिसमें अस्पताल स्थित कोविड-19 मॉर्चरी में 108 शव रखे हुए हैं। मॉर्चरी में 80 शवों वाले रेक के भरने के बाद 28 कोरोना संक्रिमत शवों को ज़मीन पर एक के ऊपर रखा गया था।

दरअसल, लोकनायक अस्पताल में इस वक्त सिर्फ कोविड 19 के मरीजों का ही इलाज चल रहा है। जिसके चलते अस्पताल का शवगृह सिर्फ़ उन शवों से भरा है जिनकी मौत कोरोना से हुई है या वो कोरोना के संदिग्ध थे। सभी शवों को अलग-अलग पीपीई किटों में पैक किया गया हैं। दिल्ली के 16 कोविड 19 अस्पतालों में भर्ती 2242 में से 602 मरीज लोकनायक में भर्ती हैं।

अस्पताल अधिकारी ने शवगृह की हालत बताते हुए कहा कि, अभी तक पाँच दिन पहले जिनकी मौत हुई थी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। जिसकी वजह से मॉर्चरी में हर दिन संख्या बढ़ती चली जा रही है। पिछले हफ्ते जमीन पर 28 की जगह 34 शव रखें हुए थे।

आगे कहा कि 26 मई को आठ शवों को निगमबोध घाट के सीएनजी श्मशान घाट से लौटा दिया गया क्योंकि सीएनजी श्मशान घाट और ज्यादा शवों का शवदाह करने की स्थिति में नहीं था। वहाँ की छह भट्टियों में से केवल दो ही काम कर रही थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार मंगलवार निगमबोध घाट पर इलेक्ट्रिक शवदाह भट्ठी की सिर्फ दो ही सीएनजी शवदाह भट्टियाँ काम कर रही थी, जिसकी वज़ह से वो ज्यादा भार नहीं ले सकते इसलिए बचे हुए शवों को उन्होंने वापस अस्पताल भेज दिया था। इस श्मशान घाट पर अब तक 244 कोविड संक्रमित या संदिग्ध संक्रमितों का दाह संस्कार कर चुका है।

कोर्ट ने इस भयावह स्थिति को लेकर सरकार और नगर निगम से जवाब माँगा है। कोर्ट ने नोटिस के जरिए शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी तय करने और इससे निपटने के लिए आधिकारिक तौर पर पूरा भी माँगा है।

जानकारी के लिए बता दें कोरोना के सभी हिंदू मरीजों या संदिग्धों का इलेक्ट्रिक भट्ठी में दाह संस्कार होता है। जिसके लिए इन्हें निगमबोध घाट या पंजाबी बाग ले जाया जाता है। वहीं दूसरे समुदाय और ईसाइयों के शवों का अंतिम संस्कार आयकर कार्यालय के इलाके में बने चार कब्रिस्तान मंगोलपुरी, मदनपुर खादर और शास्त्री पार्क में किया जाता है।

‘अल्लाह के बंदे ने मेरा एकाउंट हैक किया’: पॉर्न वीडियो लाइक करने वाले स्क्रीनशॉट पर वकार यूनुस की सफ़ाई

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके वक़ार यूनुस ट्विटर पर एक अश्लील वीडियो लाइक करने के बाद चर्चा में आ गए हैं। हालाँकि, वक़ार यूनुस ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह उन्होंने नहीं बल्कि किसी ‘अल्लाह के बन्दे ने’ किया है।

वक़ार यूनुस के ट्विटर एकाउंट के लाइक सेक्शन में आज सुबह तक भी दिख रहे एक पॉर्न वीडियो को लेकर ट्विटर पर बहस जारी है, कुछ लोग उन्हें ऐसा ना करने की सलाह दे रहे हैं तो कुछ लोग इसे महज एक मानवीय भूल बता रहे हैं।

बृहस्पतिवार रात से ही लोग वक़ार यूनुस के ट्विटर हैंडल से उस पॉर्न वीडियो को लाइक किए जाने के दुर्भाग्यपूर्ण स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे थे। इसके बाद वक़ार यूनुस ने खुद ट्विटर पर एक वीडियो शेयर कर के इस बारे में अपनी बात सामने रखी है और कहा कि उनका एकाउंट हैक कर लिया गया था। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया छोड़ने का भी ऐलान किया है।

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान वक़ार यूनुस के एकाउंट से लिया गया वह दुर्भाग्यपूर्ण अश्लील स्क्रीनशॉट जो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है –

वक़ार ने ट्विटर पर वीडियो में अपनी सफ़ाई रखते हुए कहा – “मुझे बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आज सुबह जब मैं उठा तो किसी अल्लाह के बंदे ने मेरा ट्विटर हैक करके निहायती बेहूदा वीडियो को मेरे अकाउंट से लाइक किया।”

वक़ार यूनुस ने कहा – “ये बड़ी शर्मनाक बात है। बड़े अफसोस की बात है। बड़ी तकलीफ़देह बात है, मेरे लिए भी और मेरे परिवार के लिए भी। मैं समझता था कि ट्विटर या सोशल मीडिया लोगों से बात करने का एक तरीका है। अपने जानने पहचानने वालों से बात करने का तरीका है। दुर्भाग्य से इस इंसान ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। यह पहले भी हो चुका है। मेरा ख्याल है कि ये इंसान तो बाज़ नहीं आएगा। इसलिए मैंने तय किया है कि आज के बाद मैं सोशल मीडिया पर नहीं आऊँगा।”

वक़ार ने अपने परिवार की ख़ातिर सोशल मीडिया छोड़ने की बात रखते हुए कहा – “मुझे मेरा परिवार ज़्यादा अजीज़ है। मेरे घरवाले मुझे ज़्यादा प्यारे हैं। तो आज के बाद आप मुझे सोशल मीडिया पर नहीं देखेंगे। अगर किसी को इस बात से तकलीफ हुई, है तो मैं माफ़ी माँगता हूँ।”

गौरतलब है कि वक़ार यूनुस पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके हैं। उन्होंने और भारतीय खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने वर्ष 1989 में कराची के नेशनल स्टेडियम में एक ही दिन अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी।

कोरोना से संक्रमित था इब्राहिम फिर भी चलाता रहा क्लिनिक, जाँच न कराने पर अड़ा अब हुआ केस दर्ज

राजस्थान के झालावाड़ स्थित झालरापाटन में कई दिनों से निजी क्लीनिक चला रहा इब्राहिम अब खुद कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है, जिसके बाद उसे पुलिस द्वारा संक्रमण फैलाने व लॉकडाउन के एक्ट का उल्लंघन करने के आरोप में केस दर्ज कर दबोच लिया गया है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार यह घटना जयपुर स्थित झालावाड़ की है। अपना क्लिनिक चला रहे इब्राहिम (पुत्र शेख बोहरा) के खुद कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद वह पिछले कुछ दिनों से लोगों का इलाज करता रहा। यही नहीं, वह संक्रमित होने के बाद भी कोरोना की जाँच कराने को तैयार नहीं था और जब वो अड़ा रहा तो पुलिस को आखिरकार उसे दबोचना पड़ा।

इसके बाद इब्राहिम पर कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने व कानून का उल्लंघन करने का केस भी दर्ज करवाया गया है। इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कोरोना से संक्रमित होने की बात छुपाते हुए समाज के लिए ख़तरा बने रहे और मेडिकल जाँच से भी इनकार किया। लेकिन लॉकडाउन के चतुर्थ चरण में भी इस तरह के मामले सामने आना आश्चर्यजनक है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में अब तक कोरोना वायरस के कुल 8067 मामले सामने आ चुके हैं। कल रात 8:30 बजे तक राजस्थान में 251 नए मामले रिपोर्ट किए गए।

वहीं देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या अब बढ़कर 1,65,799 हो गई है, जिनमें से 89,987 मामले वर्तमान में सक्रिय हैं, जबकि 71,105 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक 4706 लोगों की मौत हो चुकी है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे में देशभर में तकरीबन 7,500 नए मरीज सामने आए हैं, जबकि 175 लोगों की मौत दर्ज की गई है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार भारत कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या में दुनिया का 9वाँ बड़ा देश बन गया है। संक्रमित मरीजों की संख्या के मामले में अमेरिका, रूस, ब्राजील, स्पेन, ब्रिटेन, तुर्की, इटली, फ्रांस और जर्मनी ही अब भारत से आगे हैं।