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चीन से सीमा विवाद पर ‘अच्छे मूड’ में नहीं हैं पीएम मोदी, ट्रम्प ने बातचीत में की मदद की पेशकश

भारत-चीन सीमा विवाद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता के अपने ऑफर को दोहराते हुए कहा है कि भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी का ‘मूड ठीक नहीं’ है। हालाँकि, भारत ने ट्रम्प के मध्यस्थता के ऑफर को ठुकरा दिया है।

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में गुरुवार (28 मई,2020) को रिपोर्टरों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ”मैं आपके प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूँ। वह एक बहुत ही सज्जन हैं। भारत और चीन के बीच बड़े टकराव की स्थिति है। दोनों देशों के पास तकरीबन 1.4 अरब आबादी हैं। दोनों की पास काफी मजबूत सेना हैं। भारत खुश नहीं है और शायद चीन भी खुश नहीं है। मैंने पीएम मोदी से बात की थी और चीन के साथ जो कुछ भी चल रहा है उसे लेकर उनका मूड ठीक नहीं है।”

वहीं अपने ट्वीट से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने अपनी पेशकश दोहराई। उन्होंने कहा, “अगर मदद के लिए कहा जाता है, तो मैं ऐसा (मध्यस्थता) करूँगा। अगर उन्हें लगता है कि इससे मदद मिलेगी, तो मैं ऐसा करूँगा।”

बता दें कि भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर ट्रंप ने पहले ही ट्वीट करते हुए बताया था, “अमेरिका दोनों के बीच उबलते सीमा विवाद में मध्यस्थता करने या फैसला करने के लिए तैयार है, इच्छुक है और योग्य भी है।”

चल रहे विवाद को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में बयान दिया, “हम इसे शांति से सुलझाने के लिए चीनी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं।” मीडिया से बातचीत के दौरान उनसे भारत-चीन के बीच मध्यस्थता के ट्रंप के ऑफर पर कई सवाल किए गए। उन्होंने भारत द्वारा ट्रम्प के मध्यस्थता के ऑफर को ठुकराने की बात भी कही।

अपनी बात को जारी रखते हुए प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने आगे कहा कि भारतीय सैनिक मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन के साथ हुए द्विपक्षीय समझौतों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का कठोरता से पालन कर रहे हैं। हमारे सैनिकों ने सीमा प्रबंधन के प्रति बहुत जिम्मेदार रुख अपनाया है। भारत, चीन ने बातचीत के माध्यम से सीमा मुद्दों को हल करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तरों पर तंत्र स्थापित किए हैं।

लेकिन अभी तक चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से ट्रंप के ट्वीट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आपको बता दें कि इस महीने की शुरुआत से ही लद्दाख में चीनी सैनिक और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं, चीन की ओर से लगातार सैनिकों की संख्या बढ़ाने और बेस बनाने की खबरें आ रही हैं। जिसको लेकर सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 22मई,2020 को लद्दाख का दौरा किया था।

साथ ही सेना प्रमुख ने भारतीय सेना की तैयारियों का निरीक्षण भी किया था। ऐसे में भारत भी पूरी तरह से मुस्तैद है और शीर्ष स्तर पर इसको लेकर मंथन चल रहा है। पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पिछले कुछ दिनों से चीन की तरफ से सैन्य गतिविधियों के बढ़ने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच 2017 में उपजे डोकलाम विवाद जैसी स्थिति फिर से दोनों देशों के बीच उत्पन्न हुई है।

इस्कॉन-भक्तों को ‘हरामी पोर्न वाले’ कहने पर कॉमेडियन सुरलीन कौर, शेमारू के खिलाफ शिकायत दर्ज

इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस/ISKCON) ने अभिनेत्री और स्टैंड-अप कॉमेडियन सुरलीन कौर और मनोरंजन कंपनी शेमारू (Shemaroo) के खिलाफ संगठन और हिंदुओं के अपमान करने की शिकायत दर्ज कराई है। ISKCON ने सिमरन कौर द्वारा आयोजित एक स्टैंड-अप शो के खिलाफ मुंबई पुलिस को शिकायत भेजी है, जिसे शेमारू द्वारा विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफार्मों में प्रकाशित किया गया था।

इस्कॉन के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास द्वारा जारी की गई शिकायत में उन्होंने कहा है कि कंपनी द्वारा अलग-अलग सोशल मीडिया साइट्स, यूट्यूब चैनल, वेबसाइट www.shemaroome.com आदि पर प्रकाशित वीडियो इस्कॉन समाज के साथ-साथ हिंदू धर्म के अनुयायियों को भी अपमानित करता है। उन्होंने कहा कि कौर द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक है, और इसने सनातन धर्म, हिंदुओं और इस्कॉन के अनुयायियों को दुनिया भर में बहुत कष्ट दिया है।

मनोरंजन के नाम पर हिंदू धर्म के अपमान की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए, शिकायत में कहा गया है –

“भारत में यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जहाँ हिंदू धर्म/ सनातन धर्म और हमारे ऋषि-मुनियों, देवताओं आदि का लोगों द्वारा असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है दुरुपयोग किया जा रहा है। लोग सनातन धर्म के अनुयायियों के सहिष्णु स्वभाव का दुरुपयोग कर रहे हैं और उनकी गालियाँ और अभद्र भाषा की मात्रा दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।”

इस पत्र में लिखा गया है –

“यह सनातन धर्म और हमारे ऋषि मुनियों को बदनाम करने की ही एक साजिश है, ताकि युवाओं को आसानी से गुमराह किया जा सके। टिक-टोक आदि ऐप के माध्यम से विदेशी ताकतें हमारे चरित्र को नष्ट करना चाहती हैं, ताकि देश को आसानी से नियंत्रित और खंडित किया जा सके। इसे हम चीन के उदाहरण से सीख सकते हैं। जब प्राचीन चीनी समुदाय ने शांति से रहने का फैसला किया, तो उन्होंने चीन की महान दीवार बनाई, उन्होंने सोचा कि कोई भी इसकी ऊँचाई के कारण इसे लाँघ नहीं पाएगा।”

सुरलीन कौर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस्कॉन ने शिकायत दर्ज करने का फैसला किया। हालाँकि, यह वीडियो कुछ महीने पहले ही प्रकाशित किया गया था, लेकिन वीडियो को हाल ही में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किया गया, जिसके कारण यह हिंदू संगठन की नजरों में आया।

सुरलीन कौर ने इस वीडियो में यह भी कहा कि प्राचीन हिंदू संतों ने अपनी ख़ुफ़िया हरकतों को छिपाने के लिए संस्कृत के अपने छोटे से ज्ञान का उपयोग किया। कामसूत्र का उदाहरण देते हुए उसने कहा कि ऋषियों ने कामुक ग्रंथों को लिखने के लिए संस्कृत भाषा का उपयोग किया। साथ ही कौर ने खजुराहो की मूर्तियों का मज़ाक बनाते हुए कहा कि हिंदू अश्लीलता (पोर्न) पसंद करते हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=ZIlNaXXtQTg&feature=emb_title

शेमारू ने अब वो विडियो अपने चैनल से डिलीट कर दिया है, जिसमें तथाकथित कॉमेडियन सुरलीन कौर ग्रोवर यह कहती देखी गई कि ”बेशक हम सब इस्कॉन वाले हैं, पर अंदर से सब हरामी पोर्न वाले हैं।’

वीडियो के खिलाफ शिकायत में, इस्कॉन ने यह भी बताया है कि मानव चरित्र से समझौता करके सभ्यताओं को कैसे नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र की सभ्यता को नष्ट करने के लिए, उनके परिवार के ढाँचे को नष्ट करने, उनकी शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने और उनके रोल मॉडल को लज्जित करने जैसे 3 प्रमुख तरीके होते हैं।

उन्होंने लिखा, “परिवार को नष्ट करने के लिए; मातृत्व की भूमिका को कम करके, एक गृहिणी होने के नाते उसे शर्मिंदा करें। शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने के लिए आपको शिक्षक को कोई महत्व नहीं देना होता है, और समाज में उसका स्थान कम करना होता है ताकि छात्र उसका तिरस्कार करें। आदर्शों के पतन के लिए आपको उनके विद्वानों को कमतर साबित करना होता है, उन पर संदेह करना होता है, जब तक कि कोई उनकी बात सुनता या उन पर भरोसा करना बंद नहीं कर देता।”

बयान में कहा गया कि प्रसन्न युवा ही एक मजबूत राष्ट्र बना सकता है। इसमें कहा गया है –

“जब एक जागरूक माँ गायब हो जाती है, तो एक समर्पित शिक्षक गायब हो जाता है और आदर्शों और मूल्यों का पतन होता है, तो ऐसे में युवाओं के मूल्यों का निर्माण कौन करेगा? इस्कॉन की स्थापना इसलिए की गई ताकि हमारे युवा प्रसन्नता की ओर निर्देशित हों।”

इस्कॉन संगठन ने मुंबई पुलिस से सुरलीन कौर और शेमारू एंटरटेनमेंट के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। गौरतलब है कि आपत्ति जताने के बाद ‘शेमारू’ ने पहले ही विभिन्न प्लेटफार्मों से यह वीडियो हटा दिया है। लेकिन कई लोगों ने पहले ही इसे डाउनलोड कर लिया था, और बाद में विभिन्न सोशल मीडिया साइटों पर अपलोड कर दिया गया, जिसके कारण यह वायरल हुआ।

“धर्म, जाति, पंथ या संस्कृति, हम इस्कॉन समुदाय के सभी भाइयों और बहनों से माफी माँगते हैं, जिनकी भावनाओं को हमने अनजाने में नुकसान पहुँचाया हो। हम आश्वासन देते हैं कि ऐसे मामलों को सावधानीपूर्वक और अत्यधिक संवेदनशीलता से निपटाया जाएगा।”

कंपनी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने वीडियो हटा दिया है क्योंकि यह अपमानजनक पाया गया था, और इस्कॉन से माफी माँगी। शेमारू ने एक ट्वीट में लिखा –

राम मंदिर निर्माण से क्यों सुलगे लिबरल, श्रमिक ट्रेन में मौतों पर प्रपंच क्यों: हर सवाल का जवाब दे रहे अजीत भारती

एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी की रोकथाम के साथ इससे मुक्ति पाने के उपायों की खोज में लगा है। दूसरी तरफ कुछ लिब्रांडुओं का ग्रुप लाशों पर राजनीति और बीमारी की आड़ में फेक न्यूज फैलाने की अपनी जिम्मेदारियों से बाज नहीं आ रहा है। इस काम में राणा अयूब जैसे पत्रकारों से लेकर दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण जैसे मीडिया हाउसों का ग्रुप अग्रणी भूमिका निभाने में रात-दिन लगा हुआ है, जबकि रेलवे ने स्वयं कुछ आरोपो का बार-बार खंडन किया है।

ताजा उदाहरण की बात की जाए तो HT की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए राणा अयूब ने ट्वीट किया था, जिसमें में दावा किया था कि दिल्ली में रहने वाला बिहार का एक साढ़े चार साल का बच्चा, जो श्रमिक ट्रेन में सवार होकर पहुँचा था, उसने भूख के चलते रेलवे स्टेशन पर पहुँचने से पहले ही दम तोड़ दिया।

इसके जवाब में रेल मंत्रालय ने ट्विटर पर बताया है कि बच्चा पहले से ही एक बीमारी से पीड़ित था। वह बीमारी का इलाज कराने के बाद दिल्ली से अपने परिवार के साथ लौट रहा था। मंत्रालय के ट्वीट में यह भी कहा गया कि बच्चे की मौत ट्रेन से उतरने के 5 घंटे पहले हो चुकी थी। साथ ही मंत्रालय ने पत्रकार को झूठी खबर शेयर करने के लिए चेताया भी।

इससे पहले भी पत्रकार राणा अयूब ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाला, जिसमें एक महिला की मृत्यु पर जवाबदेह होने के लिए सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि उस महिला की मृत्यु इस कारण हुई, क्योंकि सरकार ने उसे ट्रेन में खाना और पानी उपलब्ध नहीं कराया था। साथ ही ट्रेन अपने समय से काफ़ी देरी से चल रही थी।

महिला ने गुजरात से ट्रेन ली थी। फिर वो ट्रेन लेट हुई, ट्रेन में किसी प्रकार का खाना नहीं दिया गया। मुजफ्फरपुर स्टेशन पर, वह भूख से मर गई। जहाँ उसका बच्चा अपनी मृत माँ को जगाने की कोशिश कर रहा था। हम रात को कैसे सो पाएँगे? यह कोई मौत नहीं है, यह एक कोल्ड ब्लडेड मर्डर है।

इस पर भी रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि महिला, जो अपनी बहन, पति और दो बच्चों के साथ यात्रा कर रही थी, एक लंबी बीमारी से पीड़ित थी और यात्रा के दौरान ट्रेन में ही उसकी मौत हो गई थी।

इतना ही नहीं बुधवार, 27 मई 2020 को जागरण ने यह दावा करते हुए समाचार प्रकाशित किया कि लापरवाही के कारण श्रमिक एक्सप्रेस में चार लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रमिक एक्सप्रेस पर सवार प्रवासी कामगार भोजन और पानी से वंचित रहे। जबकि सच्चाई कुछ और ही थी।

भारतीय रेलवे ने कहा कि आपात स्थिति के मामले में प्रत्येक यात्री को चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, सभी यात्रियों के लिए श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों में भोजन और पानी उपलब्ध कराया जाता है।

वहीं मंगलवार (26मई,2020) को भारतीय रेलवे ने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट को भी फर्जी बताया था, जिसमें दावा किया गया था कि श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों में भोजन और पानी की कमी से प्रवासी श्रमिकों की मौत हो रही है। भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे द्वारा की जा रही लापरवाही के कारण लिए यात्रियों की मौत का आरोप लगाया था।

एक नजर दूसरे वीडियो पर…

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत के साथ ही कुछ लिब्रांडुओं के जलन होने लगी है। वह जमीन पर तो नहीं, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर जरूर देखी जा रही है। देखा जाए तो पिछले दशकों में एक गिरोह जब हम यह कहते थे कि ‘रामलला हम आएँगे और मंदिर वहीं बनाएँगे’ तो वह भी इसी अंदाज में कहते थे कि मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे।

खैर, अब तो तारीख सभी को पता चल ही गया होगा, क्योंकि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। आश्चर्य की बात यह कि कभी-कभी बीच में मंदिर बनाने के स्थान पर अस्पताल बनाने वालों का भी एक गिरोह सक्रिय हो जाता है। तो एक बात याद रहे कि मंदिर अपने स्थान पर है और अस्पताल अपने स्थान पर।

अब कुछ नहीं तो इस ग्रुप ने यह भी कहना शुरू कर दिया है कि ऐसी गंभीर महामारी में मंदिर बनाने की क्या जरूरत है। ये यहाँ भी नहीं रुकते। अगर ये मंदिर तीन महीने बाद बनाया जाता तो कहते कि अभी बीमारी से उभरे भी नहीं, अभी क्या जरूरत है।

6 महीने बाद बनाते तो कहते कि अभी इकॉनोमी ठीक नहीं, अभी क्या आवश्यकता है। कुल मिलाकर हम जो भी करेंगे इनको बोलना जरूर है, क्या करें कुछ काम ही नहीं…। वैसे भी जब मुँह से कचरा खाओगे तो कचरा ही निकलेगा।

इस बार NDTV ने आतंकी को बताया ‘ड्राइवर’, 40 किलो विस्फोटक के साथ कार लेकर आया था पुलवामा

आतंकियों के लिए ‘इंडियन इंजीनियर’, ‘टीचर’ जैसे शब्द इस्तेमाल करने के मामले में एनडीटीवी (NDTV) का रिकॉर्ड शानदार रहा है। इस बार उसने आतंकी के लिए ‘ड्राइवर’ शब्द का इस्तेमाल कर अपना ट्रैक रिकॉर्ड दुरुस्त रखा है। जिस आतंकी के लिए उसने ड्राइवर शब्द का इस्तेमाल किया है, वह करीब 40 किलो विस्फोटक लदे कार के साथ पुलवामा में हमले की फिराक में था।

पुलवामा में विस्फोटक से लदी कार के बारे में समय रहते सूचना मिलने से बड़ा हमला टल गया। जानकारी के मुताबिक, जब कार पुलवामा पहुँची तो उसे रोकने के लिए पुलिस व सुरक्षाबलों ने कुछ राउंड गोलियाँ चलाईं। इसके बाद आतंकवादी कार छोड़कर भाग गया।

इसी खबर को एनडीटीवी ने भी कवर किया है। आईडी लेकर कार में आने वाले आतंकवादी के लिए उसने ‘ड्राइवर’ शब्द का प्रयोग किया है। हालाँकि, अपनी रिपोर्ट के अंदर यह बात लिखी है कि ड्राइवर आतंकवादी माना जा रहा है। उसके संबंध न केवल हिजबुल मुजाहिद्दीन से हैं, बल्कि वह जैश के संपर्क में भी था।

जैश ने पिछले साल पुलवामा में सुरक्षा बलों पर बड़े हमले को अंजाम दिया था। इस बार भी आतंकी उसी तरह के हमले की फिराक में थे।

उल्लेखनीय है कि 27 और 28 मई की रात सुरक्षाबलों के हस्तक्षेप के बाद टले एक बड़े हमले और पिछले साल हुए पुलवामा हमले में कई समानताएँ और देखी गई। दरअसल, इस बार भी आतंकियों ने अपने मनसूबों को अंजाम देने के लिए वाहन जनित आईडी विस्फोटक अपने चुना था।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद द्वारा आतंकी हमलों में IED का इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने कहा कि इसमें थोड़ा संदेह है कि हिजबुल मुजाहिदीन और अन्य स्थानीय संगठन भी इसमें शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि एक वालिद नाम का पाकिस्तानी आतंकी भी इस मामले में जुड़ा हुआ माना जा रहा है। उसके अलावा कुछ अन्य व्यक्तियों के बारे में भी पुष्टि की गई है। लेकिन उनके नामों को साझा नहीं किया गया है, क्योंकि जाँच प्रारंभिक चरण में है।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने जानकारी देते हुए इस बात का भी खुलासा किया कि हमलों से संबंधी सूचनाएँ साल के इस समय में बहुत आती हैं, क्योंकि ये समय जंग-ए-बद्र का होता है। इसके कारण हर कोई रमजान में अलर्ट पर रहता है।

11मई को ऐसी ही आतंकी गतिविधि की एक सूचना आई थी। उन्होंने बताया कि रियाज नाइकू की मौत के बाद आतंकियों पर कुछ बड़ा करने का दबाव था। इसलिए हो सकता है कि ये घटना पाकिस्तान में हाल में हुई एक बैठक का नतीजा हो, जिसमें हिजबुल मुजाहिद्दीन के सैयद सलाउद्दीन, लश्कर और जैश के आतंकियों ने हिस्सा लिया था।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस घटना में ये भी बताया कि ये हमला भी 2019 की तरह नियोजित किया जा रहा था। जिसमें कई समानताएँ थीं। जैसे इस हमले के लिए भी सैंट्रो कार को चुना गया। पिछले हमले में भी सैंट्रो कार से ही हमला बोला गया था। पिछली बार भी कार का रंग सफेद था और इस बार भी कार का रंग सफेद था।

उन्होंने बताया कि साल 2019 में पूरे हमले को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया था। लेकिन इस बार कुछ स्थानीय लड़के भी शामिल थे, जिनके बारे में पुलिस को पहले से अंदाजा था। 2019 वाला हमला भी नेशनल हाइवे पर हुआ था और इस बार भी इस कार को हाइवे ले जाया जा रहा था।

डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक, कार को पुलवामा लिंक (कुशीपुरा से राजपुरा जाने वाली रोड) पर पकड़ा गया। उनका अनुमान है कि शायद आतंकी इस रोड का इस्तेमाल इसलिए इतना करते हैं क्योंकि इस सड़क पर सुरक्षाबल रात में पेट्रोलिंग नहीं करते। मगर, चूँकि इस मामले में पुलिस के पास पहले से सूचना थी, तो हर रोड को सेना ने घेर लिया। नतीजतन आतंकी अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो पाए।

गौरतलब है कि बीते साल पुलवामा में आतंकी हमले के बाद एनडीटीवी की एनडीटीवी की डिप्टी एडिटर निधि सेठी ने आतंकियों का महिमामंडन किया था। निधि ने पुलवामा में जवानों के वीरगति प्राप्त होने के बाद ‘हाउज द जोश’ की जगह ‘हाउज द जैश’ लिखकर कमेंट पोस्ट किया था। बाद में इस हरकत के लिए एनडीटीवी को उन्हें सस्पेंड करना पड़ा था। वहीं, एनडीटीवी का एक समय में नामी चेहरा रहीं बरखा दत्त भी बुरहान वानी के लिए स्कूल हेडमास्टर जैसे शब्दों का प्रयोग कर चुकी हैं।

…जब सावरकर ने लेनिन को लंदन में 3 दिन के लिए दी थी शरण

वीर सावरकर ने लेनिन को लंदन में 3 दिनों तक शरण दी थी। इसके बारे में शायद ही कभी बात की जाती है। कारण यह है कि आज के नव-कम्युनिस्ट यह स्वीकार नहीं करना चाहते कि राष्ट्रवादी सावरकर को लेनिन सहित कई प्रमुख वामपंथियों ने महान और वीर कहने का साहस किया था।

वीर सावरकर की आज 137वीं जयंती मनाई जा रही है। मई 28, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में उनका जन्म हुआ था। उनका व्यक्तित्व और जीवन दोनों ही साधारण नहीं कहे जा सकते।

सावरकर के जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र के गौरव के लिए समर्पित रहा है। वीर सावरकर का मानना था कि भारत को अंग्रेजी साम्राज्य से स्वतंत्रत कराने के लिए युवाओं को सशस्त्र क्रान्ति में बढ़-चढ़कर योगदान देना चाहिए। यह बात शायद ही बहुत लोग जानते होंगे कि वह एक महान क्रांतिकारी होने के साथ-साथ साहित्यकार, कवि, इतिहासकार और समाजसुधारक भी थे।

वर्ष 1906 में लोकमान्य तिलक ने श्यामजी कृष्ण वर्मा से सावरकर को छात्रवृत्ति देने की सिफ़ारिश की थी। फलस्वरुप सावरकर ‘शिवाजी छात्रवृत्ति’ प्राप्त कर जुलाई 03, 1906 को कानून की पढ़ाई करने इंग्लैंड पहुँचे। यहाँ सावरकर का निवास ‘इंडिया हाउस’ में था, जिसे श्यामजी कृष्ण वर्मा संचालन करते थे।

अगले तीन वर्षों तक इंडिया हाउस क्रांतिकारी कार्यों का केंद्र बना रहा। केवल भारत के क्रन्तिकारी ही नहीं अपितु मिस्र, तुर्की, आयरलैंड, रूस आदि के क्रांतिकारी भी इंडिया हाउस की सभाओं और बैठकों में शामिल होते थे। इन्हीं क्रांतिकारियों में एक थे रूसी कम्युनिस्ट क्रांतिकारी ‘व्लादिमीर लेनिन’ (Vladimir Lenin)!

वर्ष 1909 मार्च माह के मध्य में वीर सावरकर के कट्टर समर्थक व उनके मित्र गाए ऐ एल्ड्रेड (Guy.A. Aldred) जो खुद को खुलकर कम्युनिस्ट बताते थे, वह इंडिया हाउस में रूसी कम्युनिस्ट क्रन्तिकारी ‘लेनिन’ को लेकर आए थे।

सावरकर और लेनिन की बैठक हुई जिसमे मदनलाल ढींगरा भी शामिल थे। उनके बीच क्या वार्ता हुई, यह किसी नहीं पता। लेनिन-सावरकर के बीच और भी बैठकें हुई थी, परन्तु उनकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, सावरकर-लेनिन वार्ता का एक किस्सा हमें ‘श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी’ जी की पुस्तक ‘कम्युनिज्म अपनी ही कसौटी पर’ से जरूर मिलता है। इसमें ठेंगड़ी जी बताते हैं कि उनके कॉलेज के दिनों में वीर सावरकर अरवी के पास उनके गाँव गए थे।

वीर सावरकर पर प्रतिबन्ध हटने के बाद यह उनका पहला दौरा था। इस गाँव में एक हाईस्कूल था, वहाँ के 9वीं-10वीं के छात्रों ने कम्युनिस्ट मास्टरों के भड़काने पर वीर सावरकर के विरुद्ध प्रदर्शन आयोजित किया था। जब सावरकर को इसकी जानकारी मिली तो उन्होने उन बच्चों को ऐसे ही जाने न दिया। सभी बाल प्रदर्शनकारियों को बुलवाया गया। उन बच्चों को अपने सामने बिठाकर वीर सावरकर ने उनसे विरोध का कारण पूछा।

एक 9वीं का छात्र खड़ा हुआ और वीर सावरकर से प्रश्न किया, “आप हिन्दू-राष्ट्र की बात करते हो, तो हिन्दू-राष्ट्र की रूपरेखा क्या है? कैसे रचना होगी?”

वीर सावरकर ने अपने उत्तर में एक संस्मरण सुनाया। उन्होंने कहा कि जब वे लंदन में कानून की पढ़ाई कर रहे थे, उस समय आयरलैंड के ईमान डी वैलेरा (Eamon de Valera) और रूस के व्लादिमीर लेनिन दोनों लंदन में थे।

तब लेनिन के पीछे रूस के गुप्तचर लगे हुए थे। उनसे बचने के लिये वह फ़रार थे। यही वो समय था जब सावरकर ने लेनिन को ‘इंडिया हाऊस‘ में तीन दिन तक शरण दी थी। दिनभर सावरकर अपने काम में व्यस्त रहते, पर रात भोजन उनका लेनिन के साथ होता था। एक बार लेनिन इधर-उधर की बातें करते, तो सावरकर ने उनसे कहा –

“यह आपका ‘इज्म’ आदि क्या है मुझे इससे मतलब नहीं, पर यह बताइए की यदि रूस का शासन आप लोगों के हाथ में आता है तो आपके ‘इज्म’ के अनुसार रूस में समाजिक-आर्थिक रचना क्या होगी?”

इस प्रश्न पर लेनिन हँसे और कहा, “देखो मेरे पास इस तरह की कोई रूपरेखा नहीं है और हो भी नहीं सकती क्यूँकि जब तक हम शासन में नहीं आते और परिस्थितियाँ दिखाई नहीं देती तब तक हम सारा खाका कैसे तैयार करेंगे।”

इस प्रसंग को सुनाने के बाद वीर सावरकर उन बाल प्रदर्शनकारियों से बोले, “आपके नेता लेनिन हैं, वे कम्युनिस्ट समाज की रूपरेखा नहीं दे सके और आप मुझसे हिन्दू-राष्ट्र की रूपरेखा माँग रहे हैं? यदि आज लेनिन आपका ही प्रश्न मुझसे करते हैं तो मैं उन्हें उन्हीं का उत्तर याद दिलाता। तो बच्चों मै तुम्हारा उत्तर नहीं दे सकता, तुम जीते और मैं हारा।”

यह बात उल्लेखनीय है कि वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी हैं, जिनका मुकदमा अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ा गया था। लंदन में हुई उनकी गिरफ्तारी के बाद भारत ले जाते समय जहाज के सीवर होल से भागने की घटना का समाचार पूरे यूरोप में आग की तरह फ़ैला था।

सावरकर के समर्थन में यूरोप के कई दल सामने आए थे। कार्ल मार्क्स के पौत्र जीन लोंगयट (Jean Longuet) ने खुलकर सावरकर का समर्थन किया था। इटली का वाम-दल इटालियन रिपब्लिकन कॉन्ग्रेस (IPR) ने भी सावरकर के समर्थन में प्रदर्शन किया था।

वर्ष 1910 अगस्त, अंतरराष्ट्रीय सोशलिस्ट कॉन्ग्रेस (International Socialist Congress) में वीर सावरकर की रिहाई का प्रस्ताव पारित हुआ था। रूस के महान लेखक जिन्हें सोवियत साहित्य का पितामह भी कहा जाता है, ‘मैक्सिम गोर्की’ ने वीर सावरकर को अपने देश के क्रांतिकारी ‘निकोलाई चेर्नशेवेस्की’ के बराबर माना है।

भारत में भी कुछ गिने-चुने साहसी कम्युनिस्टों ने सावरकर को वीर और महान माना है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के संस्थापक मानवेंद्रनाथ राय (M N Roy) जो लेनिन-स्टालिन के साथ सोवियत रूस में कार्य कर चुके थे उन्होंने सावरकर को अपना ‘हीरो और प्रेरणास्त्रोत’ माना है।

एमपीटी आचार्य (M.P.T Acharya) ने तो वीर सावरकर के क्रांतिकारी व्यक्तित्व पर लेख भी लिखा था। यही नहीं, बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने ‘पार्टी डॉक्यूमेंट’ में ‘वीर सावरकर और तिलक को अंग्रेजी साम्राज्य का सबसे बड़ा शत्रु’ बताया।

हालाँकि, प्रखर राष्ट्रवादी वीर सावरकर के बहुआयामी चरित्र और क्रांतिकारी व्यक्तित्व को किसी कम्युनिस्ट के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। लेकिन आवश्यक यह है कि आज के नव-कॉमरेड यह बात जान लें। वो पढ़ेंगे, इस बात पर संदेह है।

(यह लेख हार्दिक सिंह नेगी द्वारा लिखा गया है, जो कि वर्तमान में JNU में अध्ययनरत हैं)

…जब कॉन्ग्रेस के बड़े नेता ने सेल्युलर जेल से वीर सावरकर का नाम हटाने का दिया आदेश और पड़े ‘जूते’

कुछ स्मृतियाँ ऐसी होती हैं जो आपके अंतर्मन को बार-बार जागृत करती रहती हैं। ऐसा ही एक अनुभव मेरा अंडमान निकोबार से जुड़ा है। यह एक सामान्य सी बात है कि जब कोई अंडमान के बारे में सोचता है, उसके मन में सेल्युलर जेल का विचार कौंध जाता है। मैंने बहुत बचपन में सेल्युलर जेल की कहानी पढ़ी थी, उस कहानी को पढ़कर सेल्युलर जेल मेरे अवचेतन में बैठ गया था।

ईश्वर की कृपा से मुझे अंडमान और निकोबार में एक वर्ष रहने का मौका मिला। इस दौरान मैं कई बार सेल्युलर जेल घूमा। जिन कमरों में क्रांन्तिकारी रहते थे, उन दीवारों को बार-बार छूता और कभी-कभी उसमें घंटों बैठकर दीवारों को कान लगा कर कुछ सुनने का प्रयास करता। मैं सोचता था कि काश कहीं से भारत माता की जय, इन्कलाब जिंदाबाद सुनने को मिल जाए।

मैं सेल्युलर जेल के छोटे-छोटे कैदखाने के दरवाजे (लोहे का छड़ वाला दरवाजा, जिसमें बाहर से लॉक लगाने की व्यवस्था थी) को बंद कर खिड़की की तरफ उछलता और अनुभव करता था कि जब दूसरे बैरक से चीखने की आवाज आती होगी तो आजादी के दीवाने ऐसे ही खिड़कियों और दरवाजों से किस कैदी को यातना मिल रही होगी, इसका अंदाज़ा लगाते होंगे।

मैं इन्कलाब जिंदाबाद, भारत माता की जय का जयगान करता था और सोचता था कि एक क्रन्तिकारी जब इन नारों को लगाता होगा तो उसकी आवाज कैसे गूँजती होगी। सेल्युलर जेल के एक कोने में सावरकर की कोठरी है। पहले सेल्युलर जेल में 7 विंग्स थे। 4 विंग्स को तोड़कर वहाँ जीबी पन्त मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बनाया गया है और बाकी 3 विंग्स अभी पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

सेल्युलर जेल का इस्तेमाल आजादी के बाद भी किया गया, जिन कमरों में पहले क्रांतिकारियों को कैद किया जाता था, वहाँ आजादी के बाद अपराधियों को रखा जाने लगा। हालाँकि जब अंडमान में नया जेल बना तो कैदियों को सेल्युलर जेल में रखना बंद कर दिया गया। सेल्युलर जेल में जितने भी लोग आते हैं, उनमें सावरकर की कोठरी देखने की होड़ मची रहती है।

लोग सावरकर की कोठरी के साथ सेल्फी लेते हैं, चप्पल खोल कर उस कोठरी में प्रवेश करते हैं। जेल में जैसे ही आप प्रवेश करेंगे, दाईं तरफ तीसरी मंजिल पर सबसे अंतिम वाला कमरा सावरकर का है। सावरकर के कमरे के ठीक बाहरी दीवार को छूता हुआ एक इमली का पेड़ है, जिसके बारे में स्थानीय बताते हैं कि यह बहुत पुराना है।

अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल में फाँसी पूर्व क्रिया स्थल

उसी ईमली के पेड़ की बगल से एक सड़क गई है और सड़क के उस पार समंदर है। समंदर में थोड़ी दूर के बाद रोस आइलैंड है। अंग्रेज यहीं रहते थे और यहीं से उनका पूरे अंडमान निकोबार पर नियंत्रण भी था। 1942-1945 में जब जापानी सैनिकों ने अंडमान पर कब्ज़ा किया था तो रोस आईलैंड और माउंट हेरियट के एक अंग्रेज अधिकारी के घर पर इतना बम गिराया था कि अंग्रेजों के लिए उसको रिपेयर कर पाना मुश्किल हो गया था।

आज भी जापानी बमों के दाग और जापानी बंकर अंडमान में आसानी से देखे जा सकते हैं। सेल्युलर जेल बनने से पहले क्रांतिकारियों को वाइपर आइलैंड पर रखा जाता था। वाइपर आइलैंड पोर्ट ब्लेयर के पास ही है। इसी जेल में पुरी के एक राजा का कैदखाने में ही देहांत हो गया था। अंग्रेजों ने बहुत जुल्म ढाए थे राष्ट्रवादियों पर। बंदियों के पैरों से लेकर गले तक को लोहे के जंजीरों में जकड़ कर रखा जाता था।

सेल्युलर जेल का वो आइकोनिक प्रताड़ना स्थल जहाँ राष्ट्रवादियों को लिटा कर कोड़ों से पीटा जाता था।

नारियल के छिलके को कूटने से लेकर, कोल्हू में जुतना होता था। प्रताड़ना के लिए तो अंग्रेजों ने पूरी व्यवस्था कर रखी थी। जेल के बीचोबीच एक लोहे का स्लैब बनाया गया था। इसमें तपती धुप में देशभक्तों को पेट के बल लिटा कर बेड़ियों से जकड़ा जाता था और फिर पीठ पर कोड़े बरसाए जाते थे। ना तो पीने का पानी और ना ही भर पेट भोजन… ऊपर से ऐसी प्रताड़ना, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है।

अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल में कोल्हू

सावरकर की कोठरी ठीक फाँसी घर के सामने थी। जब किसी को फाँसी दी जाती थी, तो उस समय क्रांन्तिकारियों के इन्कलाब के नारों से पूरा जेल थर्रा जाता था। इतने बड़े परिसर में जब फाँसी पर झूलने वाले क्रांन्तिकारी भारत माता की जय बोलते थे, उनके शपथ को दम देने के लिए, जज्बा देने के लिए कैदखाने में बंद सैकड़ों बंदी ‘भारत माता की जय’, ‘इन्कलाब जिंदाबाद’ के नारों से जेल की मोटी-मोटी दीवारों को हिला देते थे।

अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल में फाँसी घर

यह अनुगूँज इंतनी भयंकर होती थी कि जेल के बाहर के लोगों को अंदेशा हो जाता था कि आज किसी क्रांन्तिकारी को फाँसी हुई है। जेल के फाँसी घर में एक साथ तीन व्यक्तियों को फाँसी देने की व्यवस्था थी।

इस देश का दुर्भाग्य ही कहिए कि वर्ष 2004 में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर अंडमान निकोबार गए थे। सेल्युलर जेल में एक ज्योति पुंज पर स्वातंत्र्य वीर सावरकर का नाम देख कर वो इतना चिढ़ गए कि उन्होंने तत्काल उस नेम प्लेट को हटाने का निर्देश दे दिया था। इस घटना से पूरे अंडमान निकोबार में क्षोभ पसर गया था। इसका वहाँ के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भारी विरोध किया था, लेकिन फिर भी सावरकर का नाम वहाँ अंकित नहीं हो सका।

उस वक्त बालासाहेब ठाकरे जिन्दा थे और उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में शिव सैनिकों से सावरकर के अपमान का बदला लेने को कहा था। जगह-जगह मणिशंकर अय्यर के पुतले पर जूते मारे गए थे और उनके पुतले का दहन किया गया था।

वामपंथियों और कॉन्ग्रेसियों को सारा जीवन सावरकर से चिढ़ होती रही। सावरकर के संघर्षों को अपमानित करना इनका सर्वकालिक अजेंडा रहा है। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस व्यक्ति ने दशकों तक भारत की आजादी के लिए अमानवीय कष्ट सहे, जिन्होंने 1857 की क्रांति का इतिहास लिख कर भारतीय ज्ञान परम्परा को समृद्ध किया, उसे कॉन्ग्रेस ने अपने पूरे जीवन काल में अपमानित करने का कार्य किया।

कम्युनिस्ट और कॉन्ग्रेस के विचारकों का इसके पीछे का षडयंत्र यह था कि विनायक दामोदर सावरकर को एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारतीय मन से विस्मृत किया जाए, क्योंकि सावरकर ने सेकुलरिज्म पर ना लिखते हुए मोपला के वीभत्स दंगों का इतिहास लिखा था, क्योंकि सावरकर ने हिंदुत्व के दर्शन पर पुस्तकें लिखी थीं।

आप सोचिए अगर इनके छवि को धूमिल ना किया जाता, अगर सुभास चन्द्र बोस के इतिहास को चंद शब्दों में ना समेटा जाता, अगर भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद को आतंकी न कहा जाता तो इनके चेहते नेता कैसे स्थापित होते?

खैर 11 वर्षों तक सेल्युलर जेल का वह ज्योति पुंज, जिसे वाजपेयी की सरकार ने स्थापित किया था, उस पर एक बार पुनः सावरकर की वाणियाँ उदृत की गईं। आज वह अमर ज्योति सावरकर सहित ऐसे सैकड़ों राष्ट्रभक्तों की आत्मा की अहर्निश आवाज को बुलंद कर रहा है। सेल्युलर जेल हर शाम प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रमों का आयोजन करता है और… हर शाम सेल्युलर जेल की दीवारें जीवंत हो उठती हैं।

विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस: सीबीआई जॉंच को लेकर राज्यवर्धन राठौड़ ने गहलोत को लिखा खत, पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज

राजस्थान के पुलिस अधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग जोर पकड़ती जा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद राज्यवर्धन राठौड़ ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है।

फिलहाल मामले की जॉंच सीआईडी क्राइम ब्रांच के पास है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बुधवार को क्राइम ब्रांच की टीम दिनभर राजगढ़ थाने में रही। पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए। विश्नोई और अन्य लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट, ह्वाट्सएप चैट और कॉल डिटेल की भी जॉंच की जा रही है।

विश्नोई चुरू जिले के राजगढ़ थाने के ही प्रभारी थे। शनिवार (23 मई 2020) को वे अपने सरकारी क्वार्टर में फंदे से लटके मिले थे। इस मामले में सादुलपुर की कॉन्ग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन पर पुलिसकर्मियों की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने का आरोप है।

विश्नोई ने जो दो सुसाइड नोट छोड़े थे उसमें भी उन्होंने दबाव की बात कही थी। शुरुआत से ही इस मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग की जा रही है। राज्यवर्धन राठौड़ ने ट्वीट कर कहा है, “विष्णुदत्त विश्नोई जी जैसे ईमानदार पुलिस अधिकारी को आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर बाध्य करने वालों का खुलासा होना बेहद जरूरी है, जिससे पुलिसकर्मी निर्भीक हो कार्य कर सकें। मैं राजस्थान राज्य सरकार से इस मामले की त्वरित एवं निष्पक्ष जाँच हेतु इसे CBI को सौंपने की माँग करता हूँ।”

विष्णुदत्त विश्नोई की पत्नी और उनके दोनों बच्चों ने भी गहलोत को मामले की सीबीआई जॉंच को लेकर पत्र लिखा था। कई अन्य नेताओं ने जिसमें कुछ कॉन्ग्रेस के भी हैं पूर्व में यह मॉंग कर चुके हैं।

सीबीआई जॉंच की मॉंग को लेकर विश्नोई की पत्नी द्वारा लिखा गया पत्र

मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया था कि विष्णुदत्त विश्नोई के आत्महत्या करने की खबर पुलिस को शनिवार 9:30 बजे लग गई थी। कथित तौर पर उनका शव 12 घंटे तक फंदे से लटका रहा। रात के 9:15 के करीब शव को नीचे उतारा गया।

साभार: दैनिक भास्कर

इतना ही नहीं उनके आत्महत्या करने की खबर परिजनों को टीवी से लगी। सुबह के करीब 11:30 बजे। पुलिस का कहना है कि मामले की जॉंच सीआईडी (क्राइम ब्रांच) को सौंप दी गई थी। उनके इंतजार में शव को नीचे नहीं उतारा गया।

विष्णु के भाई संदीप ने जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें भी उन्होंने कहा है कि उन्हें और उनके माता-पिता को पुलिस अधिकारियों ने इस घटना की सूचना नहीं दी। उन्हें सुबह के 11:30 बजे टीवी से इसका पता चला। इसके बाद वे सभी लोग गॉंव से राजगढ़ पहुॅंचे। विष्णु चुरू जिले के राजगढ़ थाने के ही प्रभारी थे।

विश्नोई के भाई संदीप द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर

एफआईआर में संदीप ने कहा है कि उनके भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। जो दो सुसाइड नोट मिले हैं, उसमें भी विष्णुदत्त ने अत्यधिक दबाव होने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि थाने के रोजनामचे में इस दबाव के बारे में कई रपटें लिखी हैं।

पुलवामा में फिर बड़े हमले हमले की फिराक में थे आतंकी, 40 किग्रा विस्फोटक से लैस कार मिली

पुलवामा में आतंकी साजिश को नाकाम करने वाली भारतीय सेना ने घटना के चंद घंटों बाद ही इसमें शामिल आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों की पहचान को उजागर कर दिया है।

शुरुआती जाँच में एक आदिल का नाम सामने आया है, जो कि जैश और हिज्ब दोनों के लिए काम करता है। बताया जा रहा है कि यह कार वही चला रहा था। उसके साथ कार में पाकिस्तानी आतंकी फौजी भाई था। वह भी जैश के लिए काम करता है। आईईडी तैयार करने वाले आतंकी का भी सुरक्षाबलों ने पता लगा लिया है।

आइजीपी विजय कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि दक्षिण कश्मीर के जिला पुलवामा में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए ही हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद ने मिलकर यह आईईडी से लैस यह वाहन तैयार किया था। इस वाहन में लगी आईईडी का वजन कम से कम 40 से 45 किलोग्राम के करीब था।

सुरक्षाबलों की चौकसी और समय पर उठाए गए कदमों ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस, सेना और सीआरपीएफ को पिछले कई दिनों से संभावित फिदायीन हमले के बारे में इनपुट मिल रहे थे।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह आईईडी पाकिस्तानी आतंकी वलीद ने तैयार की थी। ए-श्रेणी का आतंकवादी वलीद उर्फ मूसा उर्फ इदलीस घाटी में वर्ष 2015 से सक्रिय है। दरअसल ये वाहन उसने रमजान माह के 17वें दिन यानी जंग-ए-बद्र पर आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया था। परंतु सुरक्षाबलों की चौकसी की वजह से वे उस दिन हमले को अंजाम नहीं दे पाए।

जिस वाहन में यह आईईडी मिली उस परजेके-08B 1426 नंबर की प्लेट लगी है, जो कि कठुआ का नंबर है। यह रजिस्टर नंबर Hero Glamour motorcycle का है। हीरानगर पुलिस ने मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है, जबकि उसके मालिक से पूछताछ भी की जा रही है।

जम्मू संभाग के जिला कठुआ का हीरानगर इलाका सीमांत क्षेत्र है और यहाँ के हीरानगर इलाके को घुसपैठ के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

आपको बता दें कि पुलवामा में 27-28 मई 2020 को एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया। सुरक्षाबलों ने पुलवामा के पास एक सैंट्रो गाड़ी की पहचान की। इसमें IED (इंप्रोवाइज्ड एक्स्प्लोसिव डिवाइस) प्लांट की गई थी। सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने कार को घेर लिया। लेकिन कार के भीतर से गोलीबारी शुरू हो गई। गोलीबारी के बीच इस दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भाग निकले। जब कार की तलाशी ली गई तो इसमें IED का पता चला।

सैंट्रो को पुलवामा के रजपुरा रोड के पास शादीपुरा में पकड़ा गया। बम डिस्पोजल स्क्वायड ने समय रहते ही इसे डिफ्यूज कर दिया। इस पूरे मामले की जाँच अब एनआईए करेगी।

साहिबगंज में नाबालिग से गैंगरेप: आरोपित शाहनवाज शेख ने ज्वाइन की सेना की ड्यूटी, इदगार और एकरामुल गिरफ्तार

झारखंड के साहिबगंज जिले में नाबालिग हिंदू से गैंगरेप के मामले में दो आरोपितों की गिरफ्तारी हो गई है। तीसरा अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। घटना सोमवार (मई 25, 2020) की है।

आम चुनने के लिए बगीचे में गई पीड़िता के साथ इदगार शेख, शाहनवाज शेख और एकरामुल शेख ने रेप किया था। मामला दो समुदाय से जुड़ा होने के कारण इलाके में तनाव पैदा हो गया था।

मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपित इदगार शेख को बुधवार (मई 27, 2020) को गिरफ्तार किया। एकरामुल को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। तीसरे आरोपित शाहनवाज को पकड़ने के लिए पुलिस का प्रयास जारी हैं।

साहिबगंज पुलिस ने ट्वीट कर बताया है, “नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए कुल 3 अभियुक्तों में से 2 की गिरफ्तारी कर ली है। शेष एक अभियुक्त के विरुद्ध माननीय न्यायालय से वारंट प्राप्त कर लिया गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग पुलिस टीमों द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है।”

गौरतलब है कि इस मामले के उजागर होने के बाद से ही तीसरे आरोपित शाहनवाज शेख के सेना में होने की खबरें मीडिया में सामने आई थी। इदगार की गिरफ़्तारी के बाद मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि शाहनवाज ने सिलिगुड़ी पहुँचकर अपनी यूनिट ज्वाइन कर ली है।

इस संबंध में ऑपइंडिया ने जब साहिबगंज के एसपी अनुरंजन से बात की तो उन्होंने शाहनवाज के भारतीय सेना से जुड़े होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वह भारतीय सेना की मेडिकल कोर टीम का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इलाके की स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है और शाहनवाज को पकड़ने का प्रयास लगातार जारी हैं।

हमने जब एसपी से शाहनवाज की गिरफ्तारी और वारंट को लेकर सवाल किया तब तक फोन पर संपर्क टूट गया। इसके बाद हमने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

यहाँ बता दें कि दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, शाहनवाज सिलिगुड़ी में पदस्थापित है। वह ईद की छुट्टियों में घर आया था और इस घटना के बाद वापस अपनी ड्यूटी पर लौट गया।

इस बीच घटना के बाद नाराज लोगों ने आरोपितों में से एक के पिता को घर से निकालकर उसकी पिटाई की। इसके बाद माहौल को देखते हुए वहाँ रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों की तैनाती करनी पड़ी।

पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि सोमवार शाम लगभग 4:00 बजे वह अपने घर के पीछे बगीचे में आम चुनने के लिए चली गई। वहीं एकरामुल ने उसे पकड़ लिया और शोर करने पर चाकू से गला काट देने की धमकी दी।

जान से मार देने की धमकी के बाद आरोपित उसे पकड़ कर बगल की ही एक झाड़ी में ले गए। पीड़ित युवती ने पुलिस को बताया कि आरोपित लड़के के साथ वहाँ उसी के समुदाय के और लड़के भी मौजूद थे। पीड़िता ने बताया कि जब एकरामुल शेख ने बलात्कार किया, तब बाकी 2 लड़कों ने उसे पकड़कर रखा था। उसके बाद बारी-बारी से उन लड़कों ने भी उसके साथ बलात्कार किया।

बच्ची के मुताबिक, एकरामुल (पिता इस्लाम शेख) के अलावा वहाँ अन्य 2 आरोपित – इदगार शेख (पिता स्व नईम खान) और शाहनवाज ( शेख पिता ताहिर मियाँ) मौजूद थे। सामूहिक दुष्कर्म के बाद तीनों युवक मोटरसाइकिल से फरार हो गए। इसके बाद पीड़िता ने घटना की सूचना अपने माता-पिता को दी।

बता दें, इस घटना के सामने आने के बाद सामूहिक दुष्कर्म की घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार (मई 26, 2020) की सुबह राजमहल मंगलहाट नेशनल हाइवे- 80, नौगच्छी के समीप जाम लगाकर कर विरोध-प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों ने बीच सड़क पर टायर जलाकर घटना में शामिल सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की थी।

प्रतापगढ़ की लाली ने तोड़ा दम: 8 साल की मासूम को साहिल, वसीम, इकलाख ने मारी थी गोली

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रानीगंज इलाके में गुंडों की फायरिंग की शिकार आठ साल की लाली पांडेय ने प्रयागराज के स्वरूपरानी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लाली ने 7 दिन तक मौत से संघर्ष किया। लेकिन रीढ़ की हड्डी से गोली नहीं निकल पाने के कारण बुधवार (27 मई 2020) को उसकी मौत हो गई।

लाली के मौत की जानकारी गाँव वालों को मिलते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए गाँव में पुलिसबल तैनात कर दिया गया। साथ ही फरार चल रहे तीसरे आरोपी को भी पुलिस ने बुधवार को तलाश कर जेल भेज दिया।

लाली की मौत की सूचना पर रानीगंज एसओ संजय पांडेय पुलिस टीम के साथ स्वरूपरानी अस्पताल प्रयागराज पहुँचे और पुलिस की मौजूदगी में परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया।

बता दें प्रेमचन्द्र पांडेय की 8 वर्ष की लाली घर के सामने लगे सबमर्सिबल पम्प पर नहाने गई थी। उसी समय गाँव के तीन गुंडे साहिल, एखलाक और वसीम पहुँचे और लाली से हटने को कहा। मासूम लाली ने उनकी बात नहीं मानी, जिससे तीनों आरोपित बौखला गए।

तभी साहिल ने पिस्टल से लाली पर फायर कर दी। लाली जमीन पर गिरकर तड़पने लगी। गोली की आवाज सुनकर उसके घरवाले दौड़कर पहुँचे और लाली को अस्पताल ले गए। लाली को गंभीर हालत में देखकर डॉक्टरों ने उसे प्रयागराज रेफर कर दिया।

मृतका के परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया था। साहिल और वसीम को पुलिस ने 21 मई को तमंचा और कारतूस के साथ गिरफ्तार लिया था। इकलाख को पुलिस ने बुधवार को हिरासत में लिया। इन सभी के खिलाफ 307 सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।