Home Blog Page 4827

टाइगर हनीफ को भारत न सौंपे जाने पर सामने आया पाक कनेक्शन, ब्रिटिश मंत्री साजिद जाविद ने लगाया अड़ंगा

ब्रिटिश सरकार ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी व गुजरात के सूरत शहर में 1993 में हुए दो बम विस्फोटों में वांछित टाइगर हनीफ के प्रत्यर्पण के लिए भारत का अनुरोध ठुकरा दिया है। ब्रिटेन के गृह विभाग ने इस बात की पुष्टि स्वयं की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन के गृह विभाग के सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया है कि पाकिस्तान मूल के ब्रिटिश मंत्री साजिद जाविद ने अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले इस प्रत्यर्पण के अनुरोध को खारिज किया था।

बता दें, जाविद के फैसले से पहले खुद लंदन हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया था कि जाँच एजेंसियों की ओर से प्रदान किए गए सबूतों के आधार पर टाइगर हनीफ को भारत में प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

तभी, भारत ने प्रत्यर्पण संबंधी कागजात मंजूरी के लिए ब्रिटेन के गृह विभाग को भेजे थे। लेकिन तत्कालीन गृहमंत्री साजिद जाविद ने उस समय टाइगर हनीफ के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी देने से इंकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी मूल के ब्रिटेन मंत्री के कारण दाऊद के एक करीबी को फिलहाल के लिए राहत मिल गई है। लेकिन दूसरा करीबी जबीर मोतीवाला अभी भी ड्रग संबंधी मामले में ब्रिटिश जेल में बंद है और प्रत्यर्पण के आरोपों का सामना कर रहा है।

खबरों के मुताबिक, टाइगर हनीफ का असली नाम हनीफ मोहम्मद उमरजी पटेल है। जिसकी गिरफ्तारी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने एक किराने की दुकान पर नजर आने के बाद व भारतीय एजेंसियों की सूचना के आधार पर की थी। उस समय स्कॉटलैंडयार्ड पुलिस ने इंटरपोल की ओर से जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे गिरफ्तार किया था।

यहाँ अदालती कार्यवाहियों के दौरान वह एक बात बोलता रहा कि भारत में प्रत्यर्पित किए जाने पर उसे यातना दी जाएगी। मगर, भारतीय जाँच एजेंसियों द्वारा पेश किए गए सबूतों पर यूके की निचली अदालत और बाद में लंदन अदालत ने टाइगर हनीफ के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।

उसके बाद ये मामला गृह विभाग के पास पहुँचा, जहाँ साजिद जाविद ने मामले को अंतिम चरण पर पहुँचने से पहले रोक लगा दी। साजिद जाविद के बारे में मौजूदा सूचना के अनुसार, वह एक बस ड्राइवर का बेटा है, जो कुछ समय पहले पाकिस्तान से ब्रिटेन आकर बस गए थे।

यहाँ बता दें कि टाइगर हनीफ को दाऊद इब्राहिम का करीबी बताया जाता है और ये भी कहा जाता है कि दाऊद की डी कंपनी के लिए वो काम कर चुका है। इसके अलावा ब्रिटेन में रहते हुए वो इकबाल मिर्ची के कॉन्टेक्ट में भी आया था।

रिपोर्ट्स बताती है कि टाइगर की प्रत्यर्पण के संबंध में उसके वकीलों ने गृह विभाग से अनुरोध किया था और कहा था कि अगर उसे भारत भेजा गया तो उसे बहुत परेशान किया जाएगा। इसलिए वे इस अर्जी को खारिज करें। जानकारी के अनुसार, 60 साल के टाइगर हनीफ के खिलाफ हथियारों और विस्फोटकों के इस्तेमाल से जुड़े अपराध, संगठित अपराध और आतंकवाद के आरोप हैं।

साथ ही उसके ख़िलाफ़ भारतीय एजेंसियों पर ऐसे सबूत भी हैं जिनसे साबित होता है कि 1993 में सूरत के बाजार में हुए बम धमाकों में उसका हाथ था।

राजस्थान: सहेली की मदद से नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म, पुलिस ने किया मामला दर्ज

राजस्थान के जालौर जिले से एक बेहद ही शर्मसार करने वाला सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपितों ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने के लिए पीड़िता के दो सहेलियों का भी इस्तेमाल किया।

9वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग पीड़िता की दोनों सहेलियों ने ही आरोपितों का साथ देकर उसे इस जाल में फँसा दिया। जिसके बाद वह लगातार रेप का शिकार बनती रही और उसके साथ गैंगरेप भी हुआ।

जानकारी के मुताबिक पीड़िता के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों के नाम संपतराम, नरेश कुमार मेघवाल और शिवा चौधरी है। इसके अलावा पीड़िता की दोनों सहेलियों को भी आरोपित बनाया गया है।

जालौर जिले के रानीवाड़ा थाना इलाके में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक तकरीबन एक महीने पहले मुख्य आरोपित संपतराम ने पीड़िता के सहेलियों के माध्यम से उसे मोबाइल दिया था।

इसके बाद संपतराम ने नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसके साथ संबंध बनाकर फोटो और वीडियो बना लिया। फिर उसने उसे इसे वायरल करने की धमकी देकर लगातार उसके साथ रेप किया और फिर एक दिन उसने अपने दो और साथियों नरेश कुमार मेघवाल और शिवा चौधरी के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराए गए रिपोर्ट आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। थानाधिकारी मिट्ठू लाल ने बताया कि पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जाँच की जा रही है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर सजा दी जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राजस्थान में 22 साल की एक युवती को एक महीने तक नशे की हालत में रखा गया और फिर अलग-अलग जगहों पर ले जाकर 5-6 लोगों ने गैंगरेप किया था। पीड़िता ने इस घिनौनी वारदात के लिए अपने मामा परवेज मुन्सर्फ को जिम्मेदार ठहराया था।

पीड़िता ने बताया था कि उसका मामा ही उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसका गैंंगरेप करवाता था। वहीं राजस्थान के भिलवाड़ा में 15 साली की एक बच्ची का 3 लोगों ने शराब के नशे में अपहरण करके गैंगरेप किया

कोविड-19 को रोकने के लिए ICMR ने बदली रणनीति, अब इन लोगों की होगी कोरोना टेस्टिंग

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सोमवार (18मई,20) को कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए अपनी परीक्षण रणनीति को संशोधित किया है। देश में कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए कोविड 19 टेस्टिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बात दें अब तक भारत में कोरोना वायरस के 96169 मामले सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही 3029 लोगों की मौत इस जानलेवा संक्रमण से हो चुकी है। महाराष्ट्र में इस वक़्त कोरोना के सबसे ज्यादा आँकड़ो में वृद्धि हो रही है।

कोरोना के सही आँकड़ो को पता करने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भारत में कोरोना वायरस के टेस्टिंग के लिए नई रणनीति तैयार की है।

काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की जाँच रणनीति-

  1. ICMR के मुताबिक अब उन सभी लोगों की कोविड 19 जाँच होगी, जिन्‍होंने पिछले 14 दिन में कोई अंतरराष्‍ट्रीय यात्रा की हो और उनमें कोविड-19 जैसे लक्षण हों।
  2. लैबोरेटरी में मरीज के कोविड 19 केस की पुष्टि होने पर उसके संपर्क में आए वे लोग जिनमें कोविड 19 के लक्षण होंगे।
  3. कोविड 19 के कंटनमेंट जोन में काम करने वाले सभी स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों या अन्‍य कर्मचारियों की जाँच (जिनमें कोविड 19 के लक्षण होंगे)।
  4. जिन लोगों एक्‍यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्‍शन के साथ ही बुखार, खाँसी के लक्षण मिलेंगे और उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती होने की जरूरत होगी।
  1. जो लोग संक्रिमत लोगों के संपर्क में 5 से 10 दिन के अंदर ज्यादा आए होंगे।
  2. हॉटस्पॉट और कंटेन्मेंट इलाके में रहने वाले लोग।
  3. हॉस्पिटल के उन सभी मरीजों का जिनमें कोविड 19 के लक्षण होंगे।
  4. घर आए सभी प्रवासी मजदूर और कर्मचारी जो 7 दिन से ज्यादा बीमार हो जिनमें कोविड-19 के लक्षण देखने को मिले।
  5. प्रेग्नेंसी को छोड़ किसी भी बीमारी के दौरान टेस्टिंग में देरी नहीं होनी चाहिए।

NDTV पत्रकार ने ‘प्रियंका गाँधी के 1000 बस’ के नाम पर शेयर की कुंभ मेले के बसों की तस्वीर

NDTV ने एक बार फिर अपनी पहचान के मुताबिक सरकार के खिलाफ अपना एजेंडा चलाते हुए एक फोटो से लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की है, जिसमें यूपी सरकार की ओर से कॉन्ग्रेस द्वारा भेजे जाने वाली बसों की खबर को उस फोटो के साथ शेयर किया गया, जिस फोटो को हम सभी ने पिछले वर्ष प्रयागराज में लगे कुंभ मेले में सबसे लंबी बस परेड का विश्व रिकॉर्ड बनने के दौरान देखा था।

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब NDTV ने सरकार विरोधी एजेंडा चलाने की कोशिश की हो, लेकिन इस बार खास बात यह है कि NDTV ने चाटुकारिता की सारी हदों को पार कर दिया। इस काम को बखूबी अंजाम देने के लिए रवीश कुमार को नहीं बल्कि NDTV के पत्रकार उमाशंकर सिंह को आगे आना पड़ा।

उमाशंकर सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल से एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, “बढ़िया खबर” यूपी सरकार ने कॉन्ग्रेस की तरफ़ से भेजी गई बसों को चलाने की इजाज़त दे दी है।”

उमाशंकर द्वारा लोगों को भ्रमित करने वाली शेयर की गई फोटो को देखते ही यूजर्स ने उमाशंकर को निशाने पर ले लिया। @VishwakarmaAjju नाम के यूजर ने लिखा, “ये बसें कुंभ मेले की है वाड्रा की बसें गंठोली में खड़ी है जिनके details अभी तक नहीं दे पाए हो तुम सब लोग”

@indiaunited01 नाम के यूजर ने उमाशंकर की पत्रकारिता पर सवाल खड़ा करते हुए लिखा, “चाटुकारिता की हद है।”

@Heera51059946 नाम के यूजर ने तो उमाशंकर को दरबारी पत्रकार तक कह डाला और लिखा, “जय हो दरबारी पत्रकार पुरानी फोटो डालकर हक अदा कर रहे हो”

इसके बाद खुद बदनाम होता देख उमाशंकर सिंह ने एक दूसरा ट्वीट किया और अपने ही पहले ट्वीट पर सफाई देते हुए लिखा, “ये एक सांकेतिक तस्वीर है। कॉन्ग्रेस ने 1000 बसें भेजी हैं। सड़क पर मज़दूरों के कुंभ को कम करने के लिए। इसलिए कुंभ से जुड़ी इस तस्वीर को शुभ चिन्ह के तौर पर लीजिए। गाली गलौज करने वाले तो किसी भी बात पर करते हैं। उनका लोड नहीं लेता। मज़दूरों के साथ जो खड़ा है, हम उनके साथ खड़े हैं।”

इसके बाद @kumarsanjeev60 नाम के यूजर ने लिखा, “आप तो प्रियंका गाँधी की चमचागिरी कर रहे थे, जब पकड़े गए तो फिर सफाई, अगर आपके खबर में दम है तो भूल सुधारते हुए कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रही बस की तस्वीर ही डाल दीजिए।”

@iambhaskarrai नाम के यूजर ने लिखा, “बहुत बड़के वाले पत्तलकार हो गए हैं सिंह साहब…पिछले कुछ दिनों से गलत-गलत फोटो डाल रहे हैं जब कोई सवाल करता है तब उसपे बड़ी ही चतुराई से पत्तलकारिता कर के निकल जाते हैं…अगर यह फोटो सांकेतिक और शुभ के लिए था तो उस ट्वीट में पर्याप्त जगह थी उसी में लिख देते अलग से ट्वीट क्यूँ।”

दरअसल जिस फोटो को NDTV के पत्रकार उमाशंकर सिंह ने पोस्ट किया था वह फोटो प्रयागराज में पिछले वर्ष लगे कुंभ मेले में 28 फरवरी, 2019 का है, जहाँ विश्व की सबसे लंबी बस परेड का वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाया गया। कुंभ मेले के आयोजन के बीच उत्तर प्रदेश परिवहन निगम और प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से कुंभ की 503 शटल बसों को शहर के एक 3.2 किमी लंबे रूट पर एक साथ संचालित कराया गया था। बसों के इस लंबे बेड़े को विश्व का सबसे बड़ी बस परेड बताते हुए इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया था।

अयोध्या: BJP सांसद प्रतिनिधि की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, हिस्ट्री-शीटर को भीड़ ने मौत के घाट उतारा

उत्तर प्रदेश के जिला अयोध्या के सांसद प्रतिनिधि और एक ग्राम प्रधान की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं गुस्साई भीड़ ने जवाबी फायरिंग में हिस्ट्रीशीटर नन्हा यादव पर गोली चला दी, जिसमें उसने भी दम तोड़ दिया। घटना को आपसी रंजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। मौके पर पहुँची पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या के सांसद लल्लू सिंह के प्रतिनिधि व हैरिंग्टनगंज ब्लाक के पलिया प्रताप शाह गाँव के ग्राम प्रधान जय प्रकाश सिंह पर सोमवार (18 मई, 2020) को गाँव के ही हिस्ट्रीशीटर नन्हा यादव ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से घायल हुए प्रधान जयप्रकाश सिंह ने को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।

इसी बीच जवाबी फायरिंग में घायल हुए गाँव पलिया प्रताप शाह के ही हिस्ट्रीशीटर नन्हा यादव की भी मौत हो गई। सांसद प्रतिनिधि की मौत की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। वहीं एक ही गाँव में दो लोगों की हत्या की सूचना पर एसएसपी आशीष तिवारी भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए।

पुलिस ने दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद जिला प्रशासन मामले की जाँच में जुट गया है। डॉक्टरों का कहना है कि जयप्रकाश की हालत नाजुक होने पर उन्हें लखनऊ रेफर करने की तैयारी चल ही रही थी कि इसी बीच उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं, घटना के पीछे आपसी विवाद को बड़ी वजह माना जा रहा है।

चश्मदीदों के मुताबिक, गाँव में एक पंचायत हो रही थी, जिसमें इसी बीच दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान हिस्ट्रीशीटर नन्हा यादव ने ग्राम प्रधान जय प्रकाश सिंह को गोली मारी थी, जिससे गुस्साए ग्रामीणों ने नन्हा यादव पर जवाबी हमला कर दिया, जिसमें नन्हा यादव भी मारा गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों के बीच लम्बे समय से दुश्मनी चली आ रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले 25 मई 2019 को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में राजनीतिक रंजिश के कारण स्मृति इरानी के करीबी सुरेन्द्र कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसे केंद्रीय मंत्री और स्मृति इरानी द्वारा अमेठी जाकर पार्थिव शरीर को कंधा दिया था। उस समय स्मृति इरानी ने सुरेन्द्र के बच्चों की पढाई-लिखाई और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने की भी बात कही थी।

इससे स्मृति इरानी ने यह सन्देश देने की कोशिश की थी कि अगर परिस्थितिवश किसी कार्यकर्ता के साथ कुछ ग़लत हो जाता है तो पीछे उनके परिवार को देखने के लिए वो खड़ा है, जिनके लिए उन्होंने बलिदान दिया।

श्रमिक ट्रेनें तैयार, कुछ राज्य नहीं दे रहे सहमति; UP ने मँगवाए 800, बंगाल ने बस 19: मंत्रालय सूत्र

रेलमंत्री पिछले कुछ दिनों से राज्य सरकारों से अन्य ट्रेनों को स्वीकृति देने की अपील कर रहे हैं ताकि फँसे हुए श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुँचाया जा सके। उन्होंने राजस्थान, झारखंड और बंगाल से खासतौर से अपील की है।

रेल मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि श्रमिक ट्रेन चलाने के लिए दो राज्यों के बीच सहमति आवश्यक है। उदाहरण के लिए श्रमिक ट्रेन को पश्चिम बंगाल से गुजरात और गुजरात से पश्चिम बंगाल जाने के लिए दोनों राज्यों की सहमति चाहिए होती है।

मगर बेहद अफसोस की बात है कि कुछ राज्य अपने प्रवासियों को ले जाने वाली श्रमिक ट्रेनों को स्वीकृति नहीं दे रही है, जिसकी वजह से कई प्रवासी मजदूर सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर हैं तो कई मजदूर माल से लदे ट्रक जैसे असुरक्षित वाहनों से अपने गृह राज्य जाने के लिए मजबूर हैं। इस सबके बीच सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियाँ उड़ रही हैं, जिसका पालन करना फिलहाल बेहद आवश्यक है।

रेल मंत्रालय के अनुसार अभी तक उत्तर प्रदेश ही एकमात्र राज्य है, जिसने सबसे अधिक ट्रेनों को अपने राज्य में आने की अनुमति दी है। उत्तर प्रदेश ने अब तक 800 श्रमिक ट्रेनों को राज्य में आने की स्वीकृति प्रदान की है।

वहीं दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल, जहाँ प्रवासियों की संख्या काफी अधिक है, ने अब तक मात्र 19 श्रमिक ट्रेनों को मंजूरी दी है।

ओडिशा ने भी चक्रवात की वजह से तटीय क्षेत्रों की ट्रेनों को स्थगित कर दिया है।

कई अन्य भी ऐसे राज्य हैं, जहाँ भारी मात्रा में प्रवासी रह रहे हैं, मगर इसके बावजूद उन्होंने अभी तक काफी कम ट्रेनों को अनुमति दी है। जैसे छत्तीसगढ़ ने सिर्फ 19 ट्रेनें, राजस्थान ने मात्र 33 ट्रेनें और झारखंड ने केवल 72 ट्रेनों को मंजूरी दी है।

गौरतलब है कि श्रमिक ट्रेन विशेष आग्रह पर शुरू की गई स्पेशल ट्रेन है। इन्हें प्रवासी मजदूरों को उनके घरों/ राज्यों तक भेजने के लिए स्टार्ट किया गया है। इन ट्रेनों को केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की माँग और मजदूरों के प्रदर्शन को देखकर चालू करवाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों की यही खासियत है कोरोना के समय में चालू की गई ये ट्रेनें सार्वजनिक रूप से सबको सेवा देने के लिए नहीं है। ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वे अपने राज्य में पंजीकृत मजदूरों को चिह्नित करें, उनकी स्क्रीनिंग कर उन्हें ट्रेन से गृहराज्य भेजें।

श्रमिक ट्रेन की शुरुआत की घोषणा के साथ ही विवाद शुरू हो गया और इस विवाद को शुरू किया कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने। सोनिया गाँधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार प्रवासियों को घर पहुँचाने के लिए पैसे ले रही है। कई मीडिया हाउस ने भी इस भी इस झूठी और गलत खबर को खूब भुनाया।

दरअसल, मजदूरों को घर भेजने के लिए खर्च होने वाले लागत का 85% केंद्र सरकार (रेलवे) द्वारा वहन किया जा रहा है और 15% राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। ये राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वो ये पैसे अपने सरकारी फंड से दे या फिर किसी NGO या किसी अन्य माध्यम से एकत्र कर करती है। केंद्र सरकार और रेलवे यात्रियों से सीधा शुल्क नहीं ले रही है और उस 15% का भुगतान राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य अपने स्वयं के प्रवासी श्रमिकों को स्वीकार करने से ज्यादा तवज्जो अपने राज्य के प्रवासियों को भेजने को दे रहे हैं।

व्यंग्य: यूट्यूब बनाम टिकटॉक पर बोले रवीश- ये डिजिटल साम्प्रदायिकता है, डर का माहौल है

नमस्कार, मैं रवीश कुमार। प्राइमटाइम में आपका स्वागत है। आजकल यूट्यूब बनाम टिकटॉक का मुद्दा गरमाया हुआ है। आपने सुना ही होगा। आप सोच रहे होंगे कि मुझ जैसे मँजे हुए वरिष्ठ पत्रकार को इस महत्वहीन मुद्दे में दिलचस्पी भला क्यों होने लगी। दिलचस्पी इसलिए क्योंकि मुद्दा महत्वहीन नहीं, महत्वपूर्ण है।

आप नहीं देख पा रहे क्योंकि इसके पीछे छिपी हुई साजिश को समझने के लिए मैग्सेसे पुरष्कृत पत्रकार जैसी सूझबूझ, परिपक्वता और पारखी नज़र चाहिए जो.. हे हे हे.. आपको पता है कि किसमें है। यूट्यूब बनाम टिकटॉक युवाओं के दो गुटों के बीच पनप रही प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की लड़ाई नहीं है। ये दरअसल एकक्षत्र राज कर रहे अभिजात हिन्दू बहुल यूट्यूब और उसे चुनौती दे रहे वंचित मजहब बहुल टिकटॉक के बीच का संघर्ष है।

आपको ज्ञात हो कि यूट्यूब पर ऊँची जात के हिंदुओं का आधिपत्य है। आशीष चंचलानी, कैरीमिनाती उर्फ अजय नागर, भुवन बाम, हमारा खासमखास ध्रुव राठी, गाली गलौच में पारंगत हिंदुस्तानी भाऊ, इत्यादि सब ऊँची जात के हिन्दू हैं और यूट्यूब पर इनकी तूती बोलती है। इनके रहते यूट्यूब पर कोई भी दलित या अल्पसंख्यक समाज का व्यक्ति पनप नहीं पाया।

समय का पहिया घूमता है और भारत में चाइनीज कम्पनी द्वारा निर्मित एक ऐप टिकटॉक आती है जिसे गरीबों का यूट्यूब भी कहा जाता है। टिकटॉक प्रतिभा होने के बावजूद संसाधन न होने की वजह से दरकिनार हुए गरीबों, अल्पसंख्यकों, वंचितों और पिछड़ों के लिए आशा की किरण बनकर आया।

अब प्रसिद्धि और पैसे पर सिर्फ ऊँची जात के हिंदुओं का आधिपत्य ख़त्म होने का वक्त आ गया था। टिकटॉक पर मिस्टर फैसु, रियाज़ अली, जन्नत ज़ुबैर, आमिर सिद्दकी जैसे वंचित अल्पसंख्यकों को पहचान मिली। पहुँच, पैसे और फॉलोवर्स की गिनती में ये लोग यूट्यूब के सम्पन्न अपर कास्ट हिन्दू पुरुषों से भी आगे निकल गए।

ऐसे में जलन होना स्वाभाविक ही है। यही कारण है कि कैरीमिनाती के छद्मनाम से प्रसिद्ध अजय नागर, जो कि एक ब्राह्मण हैं, एक अल्पसंख्यक आमिर सिद्दकी से भिड़ गए। आमिर उस शांतिप्रिय युवा का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसका बचपन 2002 के दंगों के साये में गुजरा। जिसकी जवानी फासीवादी ताकतों के शोषण में गुज़री।

इतना सहने के बावजूद सिद्दकी अजय नागर से सम्पन्न ब्राह्मण की तरफ यह कहकर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं कि हम यहाँ एक दूसरे के साथ के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, वहीं पितृसत्तात्मक ब्राह्मणवाद से लबरेज़ नागर उन्हें ये कहकर ठुकरा देते हैं कि वो उन्हें 200 रुपए के भाव में मिठाई की दुकान पर बेच देंगे।

हेकड़ी देख रहे हैं आप? क्या ऐसे बचेगी गंगा-जमुनी तहज़ीब? अजय नागर साफ साफ यह संदेश देना चाह रहे हैं कि अल्पसंख्यक में चाहे जितनी काबलियत और उपलब्धियाँ हो, वो सवर्ण हिंदुओं की नज़रों में कभी सम्मान नहीं पा सकता। बड़ी विडंबना है।

शायद आपको अब तक समझ आ ही गया होगा कि यूट्यूब बनाम टिकटॉक कोई वर्चस्व की लड़ाई नहीं है। ये एक किस्म का डिजिटल साम्प्रदायिकता है जो कि बहुत दुखद है। चलिए ज़्यादा नहीं कहेंगे क्योंकि फ़ासीवादियों की आलोचना सुनने की क्षमता बहुत कम होती है। पता चला कल हमारे ही नाम पर एफआईआर की घोषणा हो जाए।

डर का माहौल है। शुभरात्रि!

BJP नेता अपूर्वा सिंह पर अश्लील टिप्पणी करने वाला मोहम्मद आसिम गिरफ्तार, 26 सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट

भाजपा युवा नेता अपूर्वा सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक टिप्पणी को डिलीट करने के साथ ही मोहम्मद आसिम नाम के एक शख्स को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने सोमवार (मई 18, 2020) को दी।

साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने ट्वीट करते हुए कहा कि अपूर्वा सिंह की शिकायत पर ट्विटर से सभी आपत्तिजनक पोस्ट और फेसबुक से 26 पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। इसके अलावा इस तरह की घटिया टिप्पणी करने वाले एक शख्स मोहम्मद आसिम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि बीजेपी आईटी सेल की सह-संयोजक युवा नेता अपूर्वा सिंह ने रविवार (मई 17, 2020) को आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और इस्लामवादी समर्थकों द्वारा उन्हें प्रताड़ित करने के लिए सोशल मीडिया पर उनकी मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरें पोस्ट की गई हैं।

भाजपा नेता अपूर्वा सिंह ने ट्विटर पर कहा कि विपक्षी दलों के समर्थक, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लोग किसी और की पोर्नोग्राफिक अश्लील फोटोज़ उनके साथ लगा कर, उनकी व्यक्तिगत तस्वीर बता कर सोशल मीडिया में शेयर कर रहे हैं। साथ ही उनके चरित्र को कलंकित करने के लिए कई मनगढंत झूठे दावे भी कर रहे हैं।

अपूर्वा सिंह ने अपनी शिकायत पर कार्यवाही न करने के लिए पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी निराशा व्यक्त की थी, जो उन्होंने दो महीने पहले दर्ज कराई थी। 19 मार्च, 2020 को अपूर्वा सिंह ने सोशल मीडिया हैंडल पर कई अश्लील तस्वीरें सामने आने बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। ये शिकायत स्पेशल सेल, दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई गई थी।

अपूर्वा सिंह की पोस्ट वायरल होने के बाद, राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लिया था और दिल्ली पुलिस को खत लिखकर इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा था।

इस कार्रवाई के बाद अपूर्वा सिंह ट्विटर के जरिए दिल्ली पुलिस का शुक्रिया अदा किया और साथ ही उम्मीद जताई है कि सभी आपत्तिजनक पोस्ट हटा दिए जाएँगे। इसके अलावा बीजेपी नेता ने कहा कि उन्हें आशा है कि जल्द ही सभी आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले गिरफ्तार होंगे।

जिस सवाल से चीन चाह रहा था बचना, भारत सहित दुनिया के 62 देश अब हुए उसके सामने खड़े

भारत ने विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) के सामने पेश किए गए 62 देशों के गठबंधन मसौदा प्रस्ताव का समर्थन किया है, जो आज (18मई, 2020) से शुरू होने वाले दो दिवसीय बैठक के दौरान कोरोना को रोकने के लिए किए गए WHO के कामों और इसके लिए तय की गई समय-सीमा की भी जाँच करने की माँग की जाएगी।

इंडिया टुडे टीवी के रिपोर्ट के अनुसार ‘कोविड-19 की प्रतिक्रिया’ पर यूरोपीय संघ द्वारा प्रायोजित मसौदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से 73 वें विश्व स्वास्थ्य सभा में अपनाया जाएगा। यानी जिस सवाल से चीन बचने की कोशिश कर रहा था, उसे अब उसका सामना करना पड़ेगा।

मूल रूप से, यह प्रस्ताव यूरोपीय संघ द्वारा तैयार किया गया था, लेकिन बाद में इसे 62 अन्य देशों द्वारा को-स्पॉन्सर किया गया। जबकि पहले अमेरिका जैसे देशों ने कोरोनो वायरस प्रकोप और इसकी उत्पत्ति की स्वतंत्र जाँच की माँग की थी। यूरोपीय संघ के मसौदे में किसी के भी खिलाफ पूछताछ और जाँच का उल्लेख नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ के ड्राफ्ट रिज़ॉल्यूशन को अधिकांश देशों द्वारा स्वीकार किया गया है। प्रस्‍ताव की भाषा ऐसी है, जिसे ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ सहित सभी ने स्वीकार कर लिया है। यहाँ तक अमरीका या चीन ने भी इस पर आपत्ति नहीं जताई है।

मसौदा प्रस्ताव में चीन द्वारा कोरोनो वायरस प्रकोप की प्रतिक्रिया पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता की तलाश को फिलहाल छोड़ दिया गया है। हालाँकि, इसका उद्देश्य एक संगठन के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बारे में उठाए गए सवालों और महामारी की प्रतिक्रिया को संबोधित करना है।

भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सभी बहुपक्षीय बैठकों में इसका बड़ा लक्ष्य हासिल करने पर बल दिया है। इनमें प्रधानमंत्री ने डब्ल्यूएचओ को मजबूत बनाने और सुधारने की बात कही है।

उन्होंने कहा, “संकल्प का उद्देश्य एकता दिखाने के लिए है, जो कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दवाओं, निदान, टीकों और भविष्य के नवाचारों के लिए अधिक न्यायसंगत पहुँच को सुनिश्चित करता है। लेकिन, यह इस तथ्य पर भी केंद्रित है कि लोगों को झूठ या गलत सूचना से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।”

अंतिम मसौदा प्रस्ताव इन देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया गया है- अल्बानिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बेलारूस, भूटान, बोत्सवाना, ब्राजील, कनाडा, चिली, कोलंबिया, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, आइसलैंड, भारत, इंडोनेशिया, जापान, मैक्सिको, मोनाको, मोंटेनेग्रो, मोज़ाम्बिक , न्यूजीलैंड, उत्तर मैसेडोनिया, नॉर्वे, पैराग्वे, पेरू, कोरिया गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, रूसी संघ, सैन मैरिनो, सिएरा लियोन, दक्षिण अफ्रीका, यूरोपीय संघ और इसके सदस्य राज्य, तुर्की, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड और जाम्बिया।

1000 बस भेजने के लिए प्रियंका गाँधी ने लिखा था लेटर, योगी सरकार ने कहा- अविलंब भेजिए, चालक/परिचालक का विवरण भी दें

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रियंका गाँधी के प्रवासी मजदूरों को लिए एक हजार बसें चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यूपी के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने प्रियंका गाँधी को पत्र लिखकर बिना किसी देरी के एक हजार बसों और ड्राइवरों का विवरण माँगा है। 

इस संबंध में सरकार के अपर मुख्य सचिव ने प्रियंका गाँधी को चिट्ठी लिखते हुए सरकार की सहमति की जानकारी दी है। सोमवार (मई 18, 2020) को यूपी सरकार के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने प्रियंका गाँधी को चिट्ठी लिखकर बताया है कि सरकार ने प्रवासी मजदूरों के संबंध में उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

पत्र में आगे लिखा गया है कि प्रियंका अविलंब 1000 बसों की सूची और उनके चालक/परिचालक की डिटेल्स को सरकार को उपलब्ध कराएँ, जिससे कि इनका उपयोग प्रवासी मजदूरों के लिए हो सके।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय की तरफ से कॉन्ग्रेस और प्रियंका गाँधी पर निशाने साधते हुए 4 सवाल किए गए। ट्वीट कर कहा गया, “मजदूरों की मददगार बनने का स्वांग रच रही कॉन्ग्रेस से मजदूर भाइयों और बहनों के कुछ सवाल:”

योगी आदित्यनाथ की कार्यालय की तरफ से किया गया ट्वीट

सवाल 1- जब आपके पास 1000 बसें थीं, तो राजस्थान और महाराष्ट्र से ट्रकों में भरकर हमारे साथियों को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड व बंगाल क्यों भेज रहे हैं?

सवाल 2- औरैया में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना से पूरा देश आहत है। एक ट्रक पंजाब से और दूसरा राजस्थान से आ रहा था। क्या कॉन्ग्रेस और प्रियंका गाँधी जी इस दुर्घटना की जिम्मेदारी लेंगी? हमारे साथियों से माफी माँगेंगी?

सवाल 3- प्रियंका गाँधी जी कहती हैं कि उनके पास 1000 बसें हैं। यह और बात है कि अब तक इन बसों की सूची तक उपलब्ध नहीं कराई गई, न ही हमारे साथियों की। बसों और हमारे साथियों की सूची उपलब्ध करा दी जाए, जिससे उनके कार्य ट्विटर नहीं धरातल पर दिखें।

सवाल 4- देश भर में जितनी भी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चल रही है उनमें से आधी से ज्यादा ट्रेनें उत्तर प्रदेश ही आईं है। अगर प्रियंका वाड्रा जी को हमारी इतनी ही चिंता है तो वो हमारे बाकी साथियों को भी ट्रेनों से ही सुरक्षित भेजने का इंतजाम कॉन्ग्रेस शासित राज्यों से क्यों नहीं करा रहीं?”

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार श्रमिकों की मदद करने और उनके लिए किसी की सहायता लेने के लिए तैयार नहीं है। वह बसों की व्यवस्था करने की उनकी पेशकश को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

16 मई को प्रियंका गाँधी ने कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से योगी सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा था कि पलायन कर रहे मजदूरों के लिए सरकार की ओर से घर पहुँचाने की कोई खास व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में कॉन्ग्रेस पार्टी गाजीपुर बॉर्डर गाजियाबाद और नोएडा बॉर्डर से 500-500 बसों को चलाना चाहती है। इन बसों का पूरा खर्च कॉन्ग्रेस पार्टी वहन करेगी। ऐसे में कॉन्ग्रेस बसों के परिचालन के लिए सरकार की अनुमति चाहती है।

इस चिट्ठी के बाद से ही कॉन्ग्रेस पार्टी योगी सरकार पर यह आरोप लगा रही थी कि प्रवासी मजदूरों की तमाम परेशानियों के बावजूद यूपी की राज्य सरकार बसों के परिचालन की अनुमति नहीं दे रही है।