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‘ममता बनर्जी के वोट बैंक पर नहीं होता कोई नियम लागू’: बंगाल के अयूब नगर से आई Video में उड़ी 2 गज दूरी की धज्जियाँ

कोरोना वायरस के कारण इन दिनों हर जगह सख्ती है। लॉकडाउन नियम का पालन कराने के लिए पुलिस पर जगह-जगह हमले तक हो रहे हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाते हुए बंगाल से एक वीडियो सामने आई है। ये वीडियो भाजपा बंगाल ने अपने ट्विटर पर शेयर की है।

वीडियो में हम देख सकते हैं कि लोग बिना किसी दूरी का परहेज किए बाजार में एकत्रित हुए हैं और दुकानों से खरीदादरी कर रहे हैं। ट्वीट के मुताबिक वीडियो कोलकाता के मटियाबुर्ज के अयूब नगर इलाके की है। इस वीडियो को भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी रीट्वीट किया है।

भाजपा बंगाल के ट्वीट में इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा गया, “लॉकडाउन, कैसा लॉकडाउन? ये कोलकाता के मटियाबुर्ज का अयूब नगर है… बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को धन्यवाद कि यहाँ उनके ‘वोट बैंक’ के लिए कोई नियम लागू नहीं होता।”

यहाँ बता दें कि इस बात का मालूम अभी नहीं चल पाया है कि ये वीडियो कब शूट किया गया, लेकिन भाजपा बंगाल के ट्विटर अकॉउंट से इसे उस समय शेयर किया गया है जब ईद का त्यौहार नजदीक है और समुदाय विशेष के कुछ लोग अलग-अलग राज्यों में ईद की तैयारियों के लिए छूट की माँग कर रहे हैं। 

हाल की बात करें तो कॉन्ग्रेस नेता सीएम इब्राहिम ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ईद के दिन नमाज पढ़ने के लिए छूट माँगी थी। साथ ही सीएम को पत्र लिखते हुए कहा था कि वे पूरे समुदाय की ओर से ये सुझाव पेश कर रहे हैं कि उनके सभी सुरक्षा नियमों की देखरेख में अगर ये संभव हो सकता है तो वो अनुरोध करते हैं कि इस माँग पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद विचार किया जाए।

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के समय में जब राज्य पर लगातार कोरोना आँकड़ों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उस समय ये पहला मामला नहीं है जहाँ भारी संख्या में समुदाय विशेष की भीड़ कहीं पर नजर आई हो।

इससे पहले तेलीनिपाड़ा में भी समुदाय विशेष इकट्ठा हुए थे और रमजान के पाक कहे जाने वाले महीने में हिंदुओं के घरों पर सॉकेट बम, सिलेंडर व धारधार हथियारों से हमला किया गया था। भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने इस मामले में आरोप लगाया था कि समुदाय विशेष द्वारा ये हमला केवल इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने कोरोना महामारी से बचाव हेतु हिंदुओं ने इलाके में बैरिकेड्स लगा लिए थे।

Video डिलीट करके NDTV ने अपने कारनामे का ठीकरा फोड़ा स्ट्रिंगर के सिर, लोगों ने कहा- जीवन में कुछ अच्छा भी कर लो

NDTV ने कुछ दिनों पहले अपने ट्विटर अकॉउंट पर एक वीडियो पोस्ट की। वीडियो में देखा गया कि उनका कैमरामैन हरियाणा के कलानौर से यमुना नदी को पार करके उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जाते प्रवासियों की बढ़िया फुटेज के लिए उन्हें दोबारा ‘पीछे जाकर चलने’ को कहता सुनाई दिया

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने एनडीटीवी के पत्रकार की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाया। साथ ही क्लिप की प्रमाणिकता पर भी संदेह जताया। लेकिन, कुछ देर बाद एनडीटीवी के पत्रकार विशु सोम के शो के दौरान बिना किसी स्पष्टीकरण के इस वीडियो को शो में भी चला दिया गया।

यहाँ सबसे बेहूदी बात ये देखने को मिली कि शो में सिर्फ़ उस हिस्से को चलाया गया जब प्रवासी व्यक्ति पीछे से आता दिखा। जबकि वीडियो शूट करने वाले की आवाज को शो में काट दिया गया।

एनडीटीवी की इस हरकत को देखकर लोग और भड़क गए। जिसके बाद एनडीटीवी को आड़े हाथों लेकर उनकी खूब आलोचना की।

बाद में एनडीटीवी ने बड़ी सफाई से इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से डिलीट कर दिया। साथ ही स्पष्टीकरण के नाम पर अपने किए का सारा ठीकरा स्ट्रिंगर के माथे फोड़ दिया।

लेकिन, मीडिया जगत में खुद को लीक से हटकर दिखाई जाने वाली खबरों का दाता बनने वाले एनडीटीवी को इसपर भी सोशल मीडिया यूजर्स ने नहीं बख्शा।

यूजर्स ने एनडीटीवी के बैन करने की माँग की। उसे फेक न्यूज की फैक्ट्री कहा। टीआरपी का लालची बताया। साथ ही एक यूजर ने लिखा, पहले एनडीटीवी ने एक वीडियो पोस्ट की। जिसमें प्रवासी को पोज देने के लिए कहा गया और जब लोगों ने इसपर सवाल खड़े किए। तो इन्होंने कह दिया कि स्ट्रिंगर ने वीडियो शूट की थी?

दरअसल, यहाँ यूजर्स का एनडीटीवी से सवाल है कि जब स्ट्रिंगर ने ऐसी वीडियो बनाई तो उन्होंने इसे खरीदकर बाद में पोस्ट क्यों किया? यूजर्स एनडीटीवी से कहते हैं कि जीवन में कुछ अच्छा भी कर लो, ये सब ज्यादा दिन नहीं चलने वाला।

विराट कोहली ने की RSS संगठन ‘सेवा भारती’ के कार्यों की तारीफ: लॉकडाउन में लगातार कर रहे लाखों ज़रूरतमंदों की सेवा

कोरोना वायरस का कहर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। आए दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। वायरस से रोकथाम के लिए देश भर में 31 मई तक के लिए लॉकडाउन लागू है।

ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी संगठन ‘सेवा भारती’ लगातार जरूरतमंदों तक मदद पहुँचा रही है। अब भारतीय कप्तान विराट कोहली ने सेवा भारती के कदमों की सराहना की है।

इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो कोरोना वायरस महामारी के बीच दिल्ली और देश भर में संकट में फँसे लोगों की मदद करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संगठन ‘सेवा भारती’ के प्रयासों की तारीफ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने 0.42 एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, “हैलो दोस्तों, आपका दिन शुभ हो। आपको हैलो के लिए ये मेरा छोटा सा संदेश है। मुझे आशा हैै कि आप लोग स्वस्थ होंगे। मैं दिल्ली सेवा भारती को बधाई देना चाहता हूँ, जिसने पूरे साल अद्भुत काम किया।”

विराट कोहली आगे कहते हैं, “अब उन्होंने दिल्ली के स्कूलों में अपनी सेवाएँ देने का निर्णय लिया है। जहाँ जाकर वो अपनी सेवा ड्राइव चलाएँगे और दूसरों की मदद करेंगे। तो इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि आप इसे दिल से और पवित्र उद्देश्य से करें और आप जो सबसे बेहतर कर सकते हैं, वो है दूसरों की मदद, दूसरों की सेवा। मैं आपकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की कामना करता हूँ। आपके शुभ कार्यों को देखते हुए ईश्वर आप पर कृपा बनाए रखें।”

गौरतलब है कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काफ़ी काम कर रहा है और लगातार जनसेवा में लगा हुआ है। संघ के संगठन ‘सेवा भारती’ ने पूरी दिल्ली में ग़रीबों को खाना खिलाने से लेकर बेसहारा लोगों को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराने के लिए दिन-रात एक किया हुआ है। 

दिल्ली में 5000 संघ कार्यकर्ता लगातार लोगों के बीच भोजन बाँटने में लगे हुए हैं। अगर वैसी स्थिति आती है तो रोजाना डेढ़ लाख भोजन के पैकेट वितरित किए जाएँगे। फ़िलहाल 75 हज़ार भोजन के पैकेट रोज बाँटे जा रहे हैं।

पूरी दिल्ली में 45 किचेन काम कर रहे हैं। समाजसेवा में डॉक्टरों और सरकार की सलाहों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सोशल डिस्टन्सिंग का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वो एक स्थानीय बुजुर्ग की पूरी जिम्मेदारी उठाए और उनकी दवाओं से लेकर भोजन तक का इंतजाम किया जा रहा है। 

इसके साथ ही दिल्ली की गायों का भी ध्यान रखा जा रहा है। गौशालाओं का ख्याल रखा जा रहा है। आवारा पशुओं और पक्षियों, जैसे गायों और कुत्तों के खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया जा रहा है।

पिछले दिनों पश्चिम दिल्ली के हस्तसाल नगर में जोमी चर्च (Zomi Church) से जुड़े 50 परिवारों के लगभग ढाई सौ सदस्य राशन और खाद्य सामग्री से परेशान थे। इस चर्च में ज्यादातर लोग नार्थ-ईस्ट के लोग, खासकर मिजोरम के निवासी हैं और कई वर्षों से दिल्ली में रह रहे हैं। जानकारी मिलने पर सेवा भारती संगठन के कार्यकर्ता इस चर्च के जरूरतमंद लोगों के पास पहुँचे और उन्होंने राशन तथा अन्य चीजें उपलब्ध करवाईं।

संघ ने 6 मई 2020 को बताया कि वह देश भर के 67,336 स्थानों पर एक साथ राहत-कार्य चला रहा है। आरएसएस के 3,42,319 कार्यकर्ता इस काम में लगे हुए हैं।

संघ न सिर्फ़ लोगों के खाने-पीने का प्रबंध कर रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रहा है। संघ ने अब तक 50,48,088 परिवारों को राशन किट मुहैया कराया है। इतनी बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुँचना ये बताता है कि आरएसएस देश के दूर-दराज इलाक़ों में भी कमान थामे हुए है। 6 मई तक कुल 3,17,12,767 भोजन पैकेट्स वितरित किए गए थे।

महाराष्ट्र: कोरोना महामारी से जूझ रहे डॉक्टरों के वेतन में उद्धव सरकार ने की कटौती, डॉक्टर बोले- अब काम पर पड़ेगा असर

महाराष्ट्र सरकार ने देश में जारी लॉकडाउन के बीच कोरोना महामारी से जूझ रहे डॉक्टरों के वेतन में कटौती कर दी है। बताया जा रहा है कि राज्य की उद्धव सरकार ने लगातार गिरती अर्थव्यवस्था के बाद यह फैसला लिया है। हालाँकि महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले पर डॉक्टरों ने असंतोष व्यक्त किया है, साथ ही कहा है कि इससे उनके काम पर असर पड़ेगा।

‘मुंबई मिरर’ की खबर के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के तहत कुछ विभागों में 50 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। इसके कारण मुंबई महा नगरपालिका की ओर से चलाए जाने वाले अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर महाराष्ट्र के सरकारी मेडिकल अफ़सरों की एसोसिएशन की उत्तरी इकाई के अध्यक्ष जरमान सिंह पदवी ने कहा, “मैं 20 साल से स्वास्थ्य विभाग में पूरी मेहनत के साथ काम कर रहा हूँ। मार्च के महीने में मेरी सैलरी 50 फ़ीसदी कटी और अभी तक अप्रैल की सैलरी तक नहीं मिली है।”

पदवी ने आगे कहा, “एक ओर हमें कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ लड़ने पर फ़्रंटलाइन योद्धा कहा जाता है और दूसरी ओर हमारी सैलरी में कटौती की जाती है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि डॉक्टरों के पास फिलहाल इतना समय नहीं है कि वे विभाग या सरकार के साथ इस मुद्दे पर संघर्ष कर सकें।”

इस बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) मनोज सौनिक ने कहा कि सभी विभागों के सभी कर्मचारियों की सैलरी में मार्च से ही कटौती की जा रही है। वहीं महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स के अध्यक्ष राहुल वाघ ने कहा कि मुंबई शहर में डॉक्टर्स की सैलरी में 30 से 40 फ़ीसदी की कटौती की गई है।

ठाणे जिले में काम करने वाले एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा, “मैं हर महीने 15 हज़ार रुपए किराया देता हूँ। दूसरी ओर सब्जियाँ और जरूरत की दूसरी चीजें बहुत महँगी हो चुकी हैं। मुझे अपने बूढ़े माता-पिता की भी देखभाल करनी होती है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा सैलरी में कटौती करने से डॉक्टर्स का मनोबल गिरा है।”

MARD के सियोन यूनिट के अध्यक्ष डॉ. अविनाश साकुरे ने कहा, “प्रत्येक डॉक्टर को स्टाइपेंड के तौर पर 55,000 रुपए मिलते हैं और बीएमसी ने इसमें भी टैक्स और कुछ अन्य चीजों के लिए कटौती कर दी है।”

रायगढ़ में काम करने वाले एक दूसरे डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर ‘मुंबई मिरर’ को बताया, “मुझे अपना ख़र्चा चलाने के लिए बचत में से कटौती करनी पड़ रही है। सरकार द्वारा डॉक्टरों सैलरी कम करने से हमारे काम पर असर पड़ रहा है और महामारी के ऐसे समय में हड़ताल करना भी ठीक नहीं रहेगा।”

बता दें कि ऐसे समय में, जब राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या सबसे अधिक तेजी से बढ़ रही है कोरोना योद्धा के रूप में काम कर रहे डॉक्टरों की सैलरी में कटौती करने से डॉक्टरों के मनोबल में गिरावट आना स्वाभाविक है। इसलिए राज्य सरकार के लिए यह फैसला चिंता का कारण होना चाहिए।

गौरतलब है कि देश में सबसे अधिक कोरोना के मरीज महाराष्ट्र राज्य में ही हैं। वहीं मुंबई में यह महामारी तेजी से फैल रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 1198, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 33053 हो गई है।

राहत की बात यह कि अब तक राज्य में 7688 मरीज अस्पतालों से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। अगर बात करें मुंबई शहर की अकेले मुंबई में 20 हज़ार से अधिक कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं।

अभिव्यक्ति के दमन के लिए कानून का दुरुपयोग गलत: भाजपा अध्यक्ष ने पीड़ित पक्षों को दिया समर्थन का भरोसा

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विभिन्न राज्यों में भाजपा विरोधी पार्टियों द्वारा BJP कार्यकर्ताओं, नेताओं और पदाधिकारों के साथ-साथ स्वतंत्र आवाज़ों को जिस तरह दबाया जा रहा है, उसकी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में विपक्षी पार्टियों की राज्य सरकारें सत्ता की मशीनरी का दुरूपयोग कर न सिर्फ़ भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रही हैं बल्कि सोशल मीडिया पर भी उन्हें ग़लत तरीके से दबाया जा रहा है, अभिव्यक्ति की आज़ादी छीनी जा रही है।

नड्डा ने कहा कि विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित जिन राज्यों की सरकारें कोविड-19 से लड़ने में विफल रही हैं, उसे लेकर आलोचना के उठ रहे स्वर को ग़लत तरीके से दबाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक लोकतंत्र में इस तरह की हरकतों के लिए कोई जगह नहीं है, ये अस्वीकार्य है। जेपी नड्डा ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आलोचना और चर्चा के लिए किसी को हमेशा तैयार रहना चाहिए, ये लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। नड्डा ने कहा:

“सत्ता की मशीनरी का दुरूपयोग कर के आलोचकों की आवाज़ों को दबाना अशोभनीय है, अनुपयुक्त है। विपक्षी पार्टियाँ जहाँ विफल हो रही हैं, वहाँ उन पर उठ रहे सवालों का उन्हें जवाब देना चाहिए। मैं भाजपा के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों को भरोसा दिलाता हूँ कि हम आपके साथ खड़े हैं। जिन्हें अपनी अनैतिक राजनीति के खुलासे का डर है, वो डरे हुए हैं और तभी ऐसा रास्ता अपना रहे हैं।”

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हो रहे हमले पर चिंता जताई

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया कि वो उन सभी लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए खड़े हैं, जिन्हें प्रातड़ित किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोकतांत्रिक सिस्टम में इस तानाशाही रवैये का पार्टी कड़ा प्रतिकार करेगी। बता दें कि सिख दंगों के लिए राजीव गाँधी पर सवाल खड़े करने के लिए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा पर भी छत्तीसगढ़ सहित अन्य कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में एफआईआर दर्ज किए गए थे।

हाल ही में पालघर मॉब लिंचिंग पर सवाल उठाने के लिए ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकार अर्नब गोस्वामी से मुंबई पुलिस ने 12 घंटों तक पूछताछ की थी। उनकी गाड़ी पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमले भी किए थे। सुधीर चौधरी को तो यूएई और पाकिस्तान तक से धमकियाँ आईं। केरल में उनके खिलाफ एफआईआर हुआ क्योंकि उन्होंने जिहाद पर रिपोर्टिंग की थी। एक ‘सटायर’ वाले न्यूज़ के लिए ‘द स्किन डॉक्टर’ के ख़िलाफ़ हैदराबाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

शेफाली वैद्य को भी सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाने के लिए धमकियाँ दी गईं। ‘पोकर शाह’ नामक ट्विटर हैंडल के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रीती शर्मा मेनन जैसों ने उनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार अभियान चलाया। पश्चिम बंगाल में तो सरकार की आलोचना करने वाले मीडियाकर्मियों को प्रताड़ित किया जाना आम बात हो चुका है। हाल ही में ऐसे कई मामले आए हैं, जहाँ गैर-वामपंथी आवाज़ों को दबाने के लिए सत्ता का दुरूपयोग किया गया।

अरुण गोविल को श्रीराम की वेशभूषा में अपने स्टूडियो में परेड कराना चाहता था BBC, रामानंद सागर ने ठुकराया

भारत के खिलाफ दुर्भावना रखने वाला बीबीसी (BBC) रामानंद सागर के ‘रामायण’ के अधिकार ख़रीद कर भगवान राम का मजाक बनाना चाहता था। ये खुलासा ख़ुद रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने किया है, जो रामायण के निर्माण में अपने पिता के साथ शामिल थे। उनका मानना है कि उनके पिता एक ऋषि की तरह थे, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में रामायण को फिर से लिखा। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान रामायण के प्रसारण की अद्भुत सफलता पर भी ख़ुशी जताई।

दरअसल, ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने रामायण की सफलता से जल-भुन कर राख होते हुए कहा था कि कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन में बंधक रखे गए दर्शक वर्ग के कारण ये विश्व का सबसे ज्यादा टीआरपी वाला शो बना। प्रेम सागर ने ‘स्वराज्य मैग’ को इंटरव्यू देते हुए कहा कि अगर ऐसी ही बात थी तो सिर्फ़ रामायण ही क्यों? सभी चैनलों के दर्शक लॉकडाउन में थे। उन्होंने कहा कि डीडी नेशनल तो वैसे भी बाकियों से पिछड़ा ही हुआ था।

प्रेम सागर ने हर्षा भट को इंटरव्यू देते हुए कहा कि रामायण का कोई प्रतियोगी नहीं है और नंबर-1 है, बाकि शो से काफी आगे है। साथ ही उन्होंने विदेशी मीडिया को भी पक्षपाती करार दिया। इस सम्बन्ध में उन्होंने एक वाकया सुनाया। 90 के दशक के दौरान ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के 2 पत्रकार उनका इंटरव्यू लेने आए थे जो सामने में बड़ी मीठी-मीठी बातें कर रहे थे लेकिन वापस जाकर उन्होंने नीचा दिखाने के लिए कुछ भी लिख डाला।

इसी क्रम में उन्होंने बीबीसी (BBC) वाले वाकये को याद किया। बीबीसी (BBC) पूरे एशिया में रामायण के प्रसारण के लिए राइट्स ख़रीदना चाहता था। प्रेम सागर ने बताया कि वो अपने पिता रामानंद सागर, अरुण गोविल और अरविन्द त्रिवेदी के साथ बीबीसी (BBC) के लिवरपूल स्थित स्टूडियो में गए। उसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होना था। बता दें कि रामानंद सागर के रामायण में अरुण ने भगवान श्रीराम का और अरविन्द त्रिवेदी ने लंकापति रावण का किरदार निभाया था।

बकौल प्रेम सागर, बीबीसी (BBC) चाहता था कि रामायण में मुख्य किरदार निभाने वाले अरुण गोविल भगवान श्रीराम की वेशभूषा में उसके पूरे स्टूडियो का चक्कर लगाएँ, ताकि वो इस दृश्य को कैमरे द्वारा शूट कर सके। प्रेम सागर ने कहा, “मुझे और मेरे पिता को उसी समय समझ आ गया कि ये एक बड़ी साज़िश है। इसके तहत उन्होंने भगवान राम की पवित्र और दिव्य छवि को बदनाम करने की योजना बनाई थी। वही भगवान राम, जिन्हें भारत के कण-कण में पूजा जाता है।” रामानंद सागर ने ऐसा करने से अस्वीकार कर दिया।

इसके बाद बर्मिंघम में स्थित बीबीसी (BBC) के दफ्तर से यहाँ के अधिकारियों की काफी देर तक बातचीत हुई और उन्होंने इस कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने से मना कर दिया क्योंकि रामानंद सागर ने उनकी शर्त नहीं मानी। प्रेम सागर ने बताया कि उनके पिता रामानंद सागर एक सच्चे रामभक्त थे। बचपन में उनका नाम ‘राम आनंद’ था। प्रेम सागर ने कहा कि रामायण काल से परे है, इससे मिलने वाली सीख और सिद्धांत हमेशा प्रभावी रहेंगे।

TikTok वाले फैजल सिद्दीकी पर FIR, एसिड अटैक को कर रहा था प्रमोट: वीडियो वाली आलिया पर भी शिकायत दर्ज

टिकटॉक पर एसिड अटैक का महिमा मंडन करता वीडियो सामने आने के बाद क्रिएटर फैजल सिद्दकी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हो गई है।

पेशे से वकील अभिषेक राजपूत ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी। उन्होंने लिखा, “लड़कियों पर एसिड अटैक को प्रमोट करने के आरोप में मैंने नवाब टीम के सदस्य और आमीर सिद्दकी के भाई फैजल सिद्दकी के ख़िलाफ़ एफआईआर दायर कर दी है।”

बता दें कि वकील अभिषेक राजपूत ने अपने ट्वीट के साथ एफआईआर नंबर की फोटो भी शेयर की है। लोग फैजल के साथ वीडियो में नजर आने वाली लड़की आलिया हामिदी पर भी एफआईआर की माँग करने लगे और कुछ देर में अभिषेक राजपूत ने आलिया पर भी शिकायत दर्ज कर दी।

लोगों ने कहा कि इस तरह का कंटेंट क्रिएट करने में जितना फैजल जिम्मेदार है, उतना ही ये लड़की भी है, जिसने वीडियो बनाने में फैजल का साथ दिया।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले, फैजल की वीडियो सामने आने के बाद अतुल आहूजा ने इसे शेयर करते हुए लोगों का ध्यान इस पर आकर्षित करवाया था।

उन्होंने लिखा था कि एसिड अटैक झेलने का अर्थ क्या है, ये शायद ही कोई समझ सकता हो। उन्होंने लिखा कि इससे डरावना शायद ही कुछ हो।

इस वीडियो को ट्वीट करते हुए अतुल ने कहा कि टिक-टॉक (TikTok) पर किसी को इस तरह से एसिड अटैक को मजाक बना देने का अर्थ है कि एसिड अटैक झेलने वाली महिलाओं को रोज होने वाली पीड़ा का मखौल उड़ाना।

ये वीडियो टिक-टॉक (TikTok) पर फैज़ल सिद्दीकी ने डाला है। फैज़ल के फॉलोवरों की संख्या 1.34 करोड़ है। इस वीडियो में फैज़ल कहता है- “उसने तुम्हें छोड़ दिया, जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा था?” इसके बाद लड़की के चेहरे पर एक लिक्विड फेंका जाता है और उसका चेहरा पूरा जल जाता है।

कुछ लोगों ने इस वीडियो में एक्ट करने वाली युवती के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की माँग की थी और कहा था कि एक महिला होने के नाते उसे तो कम से कम एसिड अटैक पीड़ितों की व्यथा के बारे में सोचना चाहिए था लेकिन फिर भी वो इस क्रूर अपराध के महिमामंडन में हाथ बँटा रही है।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को टैग कर के कार्रवाई की माँग की थी। शर्मा ने भी कहा था कि वो टिक-टॉक (TikTok) और पुलिस, दोनों के समक्ष इससे लेकर जाएँगी।

फैजल सिद्दकी ने किया था ‘छपाक’ का समर्थन

यहाँ याद दिला दें कि ये फैजल सिद्दकी उन्हीं लोगों में से एक है, जिसने दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ का समर्थन किया था, जिसमें एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की व्यथा दिखाने का दावा किया गया था। दीपिका फिल्म के प्रमोशन के लिए जेएनयू गई थीं, इसीलिए फैज़ल ने ऐसा किया था।

दीपिका ने भी एसिड अटैक को लेकर लोगों को वीडियो बनाने की सलाह दी थी, जिसके बाद उनकी आलोचना हुई थी। उनके टिक-टॉक चैलेन्ज को लोगों ने एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के दर्द का मजाक बताया था।

हादसों को रोकने का प्रयास: यूपी में प्रवासियों को ले जाने वाले वाहन काफिले में चलेंगे, सख्त नियमों के पालन के निर्देश

उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। अब फँसे हुए प्रवासियों को ले जाने वाले वाहन और माल ढोने वाले वाहन रात में एक साथ काफिले में चलेंगे

दरअसल, यह फैसला राज्य के औरैया सड़क हादसे में 24 प्रवासी मजदूरों की मौत के बाद उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। रविवार (मई 17, 2020) को प्रयागराज क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने यह निर्णय लिया।

जानकारी के मुताबिक काफिले में जाने का फैसला इसलिए किया गया है ताकि वाहनों की गति नियंत्रित रहे। इससे दुर्घटना होने का खतरा कम होगा और यात्रा सुरक्षित रहेगी।

इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि सिर्फ खाली वाहनों में ही प्रवासी श्रमिक जाएँगे और ये सुनिश्चित करना पुलिस का काम होगा। काफिले में एक साथ 10 से 12 वाहनों को जाने की अनुमति दी गई है। काफिले में चलने वाले सभी वाहनों को गति की सीमाओं का सख्ती से पालन करना होगा।

माल वाहक के ड्राइवरों को 40 किमी / घंटे की गति से ड्राइव करने के लिए कहा गया है। साथ ही उन्हें दो वाहनों के बीच उचित दूरी बनाए रखने के लिए भी कहा गया है।

इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि प्रवासी को न तो पैदल जाने की अनुमति होगी और न ही साइकिल या फिर अन्य किसी दुपहिया वाहन से घर जाने की अनुमति होगी। उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी ने यह कदम प्रवासियों की सुरक्षा को देखते हुए उठाया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के औरैया में शनिवार (मई 16, 2020) तड़के हुए एक भीषण सड़क हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो गई। हादसे के शिकार मजदूर लॉकडाउन के बीच एक ट्रक पर सवार होकर घर लौट रहे थे। औरैया के पास उनकी ट्रक की टक्कर एक अन्य ट्रक से हो गई।

दर्दनाक सड़क हादसे के बाद योगी सरकार ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए फतेहपुर सीकरी (आगरा) और कोसी कलान (मथुरा) के SHO को निलंबित कर दिया। 

साथ ही सीएम योगी ने हादसे में जान गँवाने वाले मजदूरों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की मुआवजा राशि देने का भी ऐलान किया।

औरैया में हुए दर्दनाक हादसे के संबंध में कानपुर पुलिस ने रविवार (मार्च 17, 2020) को एक नया खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि हादसे में बचे प्रवासी मजदूरों ने पूछताछ में बताया कि राजस्थान पुलिस ने ही उन्हें जबरन चूने से लदे ट्रक में बैठाया था, जो यूपी के ओरैया जिले में दुर्घटना का शिकार हो गया। 

सुपर साइक्लोन में तब्दील हो जाएगा अम्फान चक्रवात: PM मोदी ने बुलाई बैठक, तूफ़ान, भारी बारिश की आशंका

गृह मंत्रालय ने अम्फान तूफ़ान (Amphan Cyclone) को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा है कि अभी इसके और आक्रामक होने की आशंका है। ये अब एक ‘सुपर साइक्लोन’ में बदल जाएगा। सोमवार (मई 18, 2020) की शाम से इसके और खतरनाक होने की आशंका है, जिसके बाद ये और ज्यादा तबाही मचा सकता है। बांग्लादेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाक़ों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि साउथ बे ऑफ बंगाल के ऊपर अम्फान की गति तीव्र हो गई है और ये एक खतरनाक चक्रवात में तब्दील हो रहा है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाक़ों के लिए तो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। एनडीआरएफ के डीजी एसएम प्रधान ने बताया कि 20 टीमें ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तैनात कर दी गई हैं। इसके अलावा 17 टीम को स्टैंडबाई पर रखा गया है। ओडिशा इससे पहले भी फोनी तूफान से सफलतापूर्वक निपट चुका है

‘The India Meteorological Department (IMD)’ ने सिक्किम असम और मेघालय में मई 21 तक भारी बारिश की चेतावनी भी दी है। NDRF ने कहा है कि वो स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और कोविड-19 संक्रमण आपदा को देखते हुए अम्फान चक्रवात (Amphan Cyclone) से निपटना एक दोहरी चुनौती बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक कर ख़ुद स्थिति की समीक्षा करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4 बजे बैठक में अम्फान चक्रवात (Amphan Cyclone) से निपटने की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। आईएमडी के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि ये चक्रवात ओडिशा के उत्तरी हिस्से को ज्यादा प्रभावित करेगा। जगतसिंहपुर, केंद्रपारा, भद्रक और बालासोर में भारी बारिश होगी क्योंकि ये सभी तटीय इलाक़े वाले जिले हैं। ये चक्रवात फिलहाल 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गतिशील है। ओडिशा ने अपने 12 जिलों के प्रशासन को पूरी तरह तैयार रहने को कहा है।

हल्दिया बंदरगाह पर माल की लोडिंग और अनलोडिंग को बंद कर दिया गया है। पूर्वी मिदनापुर जिला प्रशासन का कहना है कि इससे निपटने के सारे उपाय कर लिए गए हैं। तटरक्षक अधिकारियों का कहना है कि एक भी व्यक्ति की जान न जाए, इसीलिए मत्स्य विभाग से समन्वय बना कर काम किया जा रहा है। तमिलनाडु का पम्बन पोर्ट भी खतरे की जद में आ गया है। अंडमान-निकोबार में भी बारिश की सम्भावना है।

ओडिशा में भारी बारिश के साथ अब तेज़ गति से हवाएँ भी चलेंगी। इस चक्रवात का केंद्र फिलहाल ओडिशा के पारादीप से 790 किलोमीटर दक्षिण, पश्चिम बंगाल के दीघा से 940 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और बांग्लादेश के खेपुपारा से 1060 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। आशंका जताई गई है कि मई 20 तक ये बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की सीमा को पार कर जाएगा। तब ये 185 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफ़ान पैदा करने की ताक़त रखता है।

20 मई को ही ये तूफ़ान (Amphan Cyclone) हतिया/दीघा से होकर गुजरेगा। तब इस तूफान के दायरे में ज्यादातर पश्चिम बंगाल के हुगली, साउथ और नॉर्थ 24 परगना, ईस्ट और वेस्ट मिदनापुर और कोलकाता जिले रहेंगे। सरकार ने मछुआरों को भी चेताया है कि वो अगले 3 दिनों तक बंगाल की खाड़ी या पश्चिम बंगाल-ओडिशा के तटवर्ती इलाक़ों में न जाएँ। जो मछुआरे समुद्र में हैं, उन्हें भी तत्काल लौटने के लिए कह दिया गया है।

तूफानी अम्फान चक्रवात (Amphan Cyclone) अपने साथ धूल-मिट्टी लेकर नहीं आएगा। ये तटीय क्षेत्रों से आने वाले तूफानों में से एक है, जो अपने साथ नमी लेकर आता है। इसमें इतनी ज्यादा नमी है कि ये जहाँ भी जाएगा, वहाँ तेज हवा के साथ भारी बारिश होनी तय है। साथ ही वायु की गति भी अत्यधिक हो जाती है। तमिलनाडु में भी भारी बारिश हुई है, जहाँ रामेश्वरम में कई मछुआरों की नावें क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं केरल में भी भारी बारिश हुई।

5 साल में गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग, किडनैपिंग झेल चुकी महिला ने खोली POK की पोल: स्याह हकीकत बताती Video आई सामने

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) की सच्चाई का खुलासा करते हुए एक महिला की वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में महिला खुद को POK के भीमभर इलाके का बताती है। साथ ही दावा करती है कि उसने वहाँ गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग और किडनैपिंग जैसी चीजें झेली हैं।

महिला को वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि वो साल 2015 से इंसाफ के लिए गुहार लगा रही है। लेकिन उसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।

गैंगरेप पीड़िता बताती है कि उसका बलात्कार करने वालों में- हारून राशीद, आमूल राशीद, जमील शफी, वकार अशरफ, सलम हारून और तीन अज्ञात शामिल हैं। जिन्होंने अपना अपराध भी स्वीकार लिया है। मगर, फिर भी इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

महिला कहती है कि जब वह इंसाफ माँगने पुलिस के पास गई, तो उसके मामले को पुलिस ने पंचायत के हवाले कर दिया। पंचायत में उसका केस 19 दिन तक चला और यहाँ सभी दोषियों ने अपना अपराध स्वीकारा। मगर, यहाँ उनको सजा देने के बजाय पंचायत ने बंदूक की नोक पर उससे ही समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए।

जब महिला दूसरी बार पुलिस के पास गई, तो उसे पता चला कि मामले में पहले से ही 2 FIR हो गई है। एक महिला के नाम से और दूसरी अपराधियों की ओर से। किंतु यहाँ भी उसे बाद में पता चला कि उसकी ओर से दायर एफआईआर खारिज कर दी गई है। वहीं, मामले को कमजोर करने वाली दूसरी एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

महिला बताती है कि उसने इंसाफ के लिए मीडिया का भी सहारा लिया और एक दिन थाने में मीडिया लेकर पहुँची। पर, वहाँ उसने देखा पुलिस ने उन्हें लॉकररूम में बंद नहीं किया हुआ था, बल्कि वे तो सब इंस्पेक्टर के रूम में सो रहे थे।

महिला अपने साथ हो रही नाइंसाफी के लिए सबसे बड़ा दोषी POK के वरिष्ठ मंत्री तारिक फारूख को बताती है और कहती हैं कि तारीक ऐसे अपराधियों का पक्ष लेता है जिन्होंने बीते समय में सरकारी इमारतों पर हमला किया है, लड़कियों-लड़कों से रेप किया है, उन्हें जिंदा जलाया है, गरीबों की जायदाद हड़पी है, शहरियों का कत्ल किया है।

यहाँ बता दें कि ये वीडियो कब की है? इस बात की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। मगर, इस समय इसे टीम भारत के ट्विटर अकॉउंट से शेयर किया गया है और आरएसएस समेत कई अन्य सोशल मीडिया अकॉउंट पर भी इसे शेयर किया जा रहा है।

पिछले महीने इसी मामले के संबंध में एएनआई ने एक स्टोरी की थी और तब भी उस रिपोर्ट में इस महिला के हालातों को उजागर किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि महिला को कई सालों से डराया धमकाया जा रहा है और वो लगातार अपने लिए इंसाफ माँग रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला कहती है, “मेरा भीमभर घाटी में सामूहिक दुष्कर्म हुआ और उन्होंने मेरी वीडियो बनाई। बाद में मेरे परिवार को ब्लैकमेल किया जाने लगा। उन्होंने हमसे 10 लाख रुपए माँगे, जब हमने देने से मना कर दिया, तो उन्होंने मेरे बेटे का अपहरण कर लिया और हमसे 15 लाख रुपए माँगने लगे।”

महिला के अनुसार, उसका केस पिछले साढे 4 साल से मीरपुर कोर्ट में पेंडिंग पड़ा है, लेकिन उसे इंसाफ मिलने की कोई किरण नजर नहीं आ रही।

पीड़िता कहती है कि इतने वर्षों में पुलिस उसकी रिकॉर्डिंग को भी जब्त करने में असफल रही है। साथ ही वे फिरौती के पैसे और वो कार, बंदूक आदि कुछ भी नहीं ढूँढ पाई जिसके बूते उसके बेटे का अपहरण हुआ।

पीड़िता की मानें तो वो पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश को अभी तक 42 पत्र लिख चुकी है। जिसकी बाबत उन्होंने उसे पूछताछ के लिए बुलाया भी। मगर जब महिला ने न्याय की माँग की। तो उन्होंने उससे कहा कि मुख्य न्यायधीश ने कहा है कि तुम शादीशुदा महिला हो। ऐसे में अगर रेप होता है, तो ये कोई बड़ी बात नहीं है।

यहाँ बता दें कि साल 2017 में महिला ने इस संबंध में मुजफ्फराबाद में संयुक्त राष्ट्र के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन भी किया था। किंतु उस समय पुलिस ने पीड़िता समेच उसके बच्चों को मारा था।

महिला ने बातचीत में कहा, “मेरा अधिकार है कि मैं प्रदर्शन करूँ और कोई मुझसे मेरा अधिकार नहीं छीन सकता। मेरे पति और मेरे परिजनों को पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। कई एफआईआर भी उनके ख़िलाफ़ दर्ज हो चुकी है।”

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों पीओके के बाग शहर से सैयद समीर बुखारी सेक्स रैकेट का धंधा चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय एक राजैनतिक कार्यकर्ता व लेखक अमजद अयूब ने पीओके के हालातों का खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि POK में जो जिहादी कमांडर अपने प्रशिक्षण या मिशन से वापस आते हैं, उनकी संतुष्टि के लिए भी महिलाओं की तस्करी की जाती है।