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हर क्लास के लिए अलग-अलग TV चैनल, महामारी से लड़ने को तैयार होगा हर अस्पताल: निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़े आर्थिक सुधर की घोषणा करते हुए आज लगातार पाँचवीं प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आपदा को अवसर में बदलने की ज़रूरत पर बल दिया था। वित्त मंत्री ने बताया कि इस आर्थिक पैकेज में लैंड, लेबर, लॉ और लिक्विडिटी पर बल दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का जिक्र किया।

मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में सरकार इस चुनौतीपूर्ण समय में योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज में किसान से लेकर मजदूरों और महिलाओं से लेकर उद्यमियों और युवाओं का भी ध्यान रखा गया है। स्वास्थ्य योजनाओं पर ख़ास ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे देश की राज्य सरकारों के माध्यम से 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में चावल, गेहूँ और दाल देने के लिए योजना बनाई गई।

साथ ही 6.81 करोड़ मुफ्त रसोई गैस के सिलिंडर की व्यवस्था की गई। बताया गया कि 8.19 करोड़ किसानों के खतों में पीएम किसान योजना के तहत रुपए ट्रांसफर किए गए। यानी कुल 16,394 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। प्रधानमंत्री जन-धन के खातों में कुल 10,000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए गाड़ियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मजदूरों को घर भेजने तक हुए ख़र्चों में से 85% रेल किराया केंद्र सरकार ने दिया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अब तक कोई कमी नहीं रखी है और संकट की घड़ी में किसी को कोई मुश्किल न आए, इसके लिए क़दम उठाया। 2.2 करोड़ निर्माण मजदूरों के खातों में भी रुपए भेजे गए। स्वास्थ्य क्षेत्र में अब तक 15,000 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। अब तक 4000 करोड़ रुपए राज्यों को दे दिया जा चुका है। टेस्टिंग लैब्स और किट्स के लिए भी फंड जारी किए गए। कोविड-19 वारियर्स के स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था की गई।

वित्त मंत्री ने बताया कि यूपीआई भीम की तरह आरोग्य सेतु काफ़ी सफल रहा है और कोरोना से लड़ने में इसका अहम रोल है। साथ ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों पर होने वाले हमलों को लेकर सख्त क़ानून बनाया गया। उन्होंने जानकारी दी कि आज भारत में रोज 3 लाख पीपीई किट्स तैयार की जा रही है। आज जिन 7 क्षेत्रों में सुधार की घोषणा की गई, वो हैं- मनरेगा, स्वास्थ्य, व्यापार, कम्पनीज एक्ट को डीक्रिमिनलाइज करना, इज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेंटर एंटरप्राइजेज, राज्य सरकारों से सम्बंधित संसाधन।

वित्त मंत्रालय की 5वीं प्रेस कॉन्फ्रेंस

आत्मनिर्भर भारत‘ में शिक्षा के क्षेत्र में भी ‘स्वयंप्रभा’ चैनल और दीक्षा ऐप के माध्यम से व्यवस्था की जा रही है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने जानकारी दी कि प्रवासी मजदूरों को अनाज देने और उनकी यात्रा के लिए सरकार ने ख़र्च किए, अब उनके लिए 40,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान सरकार ने किया है। घर लौटने वाले मजदूरों को काम की कमी न हो, इसीलिए ये व्यवस्था की गई है। उन्हें मनरेगा के तहत काम दिया जाएगा।

घोषणा की गई कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर एक आधारभूत ढाँचा तैयार किया जाएगी, जो महामारी की स्थिति में भी लोगों की मदद करे। साथ ही सभी जिला स्तर के अस्पतालों में संक्रमित रोगों का इलाज हो, ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि आगे किसी महामारी से लड़ने की व्यवस्था हो। निरमा सीतारमण ने शोध को वृद्धि देने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यवस्था करने की बात कही।

पीएम ई-विद्या के तहत ‘वन नेशन, वन नेशनल प्लेटफॉर्म’ की व्यवस्था की गई है। वर्ग एक से 12वीं तक हर कक्षा के लिए अलग टीवी चैनल का संचालन किया जाएगा। टॉप-100 यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन क्लास आयोजित करने के लिए ऑटोमेटिक अनुमति दी जाएगी। विकलांग छात्रों के लिए भी शिक्षा प्लेटफॉर्म की व्यवस्था करने की बात कही गई है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि ये सब टेक्नोलॉजी ड्रिवेन शिक्षा प्रोग्राम के तहत किया जा रहा है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ में माध्यम और लघु परियोजनाओं पर भी जोर दिया जाएगा। उन्हें दिवालिया होने से बचाया जाएगा। इन सबके अलावा ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नई कॉर्पोरेट पॉलिसी की भी कुछ ही दिनों में रूपरेखा तैयार की जाएगी।

दिल्ली में 5.2 एकड़ जमीन पर रोहिंग्या ने किया कब्जा, अमानतुल्लाह खान पर संरक्षण का आरोप, बनवाए फर्जी आधार: रिपोर्ट

देश में एनआरसी का विरोध किया जाता है। लेकिन, इधर रोहिंग्या लगातार पाँव पसारते जा रहे हैं। अब दिल्ली में एक बड़े इलाक़े पर उनका कब्जा है। मदनपुर खादर में इन रोहिंग्याओं ने 5.2 एकड़ जमीन को अवैध रूप से कब्जा रखा है। आरोप है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहे अमानतुल्लाह ख़ान ने अपने लैटर हेड के जरिए इन सभी का आधार कार्ड बनवाया और इन्हें यहाँ बसाया।

‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित तोषी शर्मा की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ये रोहिंग्या मुस्लमान दिल्ली की उस जमीन अवैध रूप से कब्जा कर बस गए हैं और साथ ही सारी सरकारी सुविधाओं का भी फायदा उठा रहे हैं। ओखला के विधायक और आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह ख़ान इस वक़्त उन सबके सबसे बड़े मददगार हैं, जिन्होंने रोहिंग्याओं को राशन-पानी से लेकर अन्य मदद मुहैया कराने के लिए दिन-रात एक की हुई है।

ख़बर के अनुसार, रोहिंग्या यहाँ कोई भी काम वैध तरीके से नहीं करते। यहाँ तक कि लाइट भी चोरी की यूज की जाती है, जिससे विद्युत् विभाग को चपत लगती है। पीने का पानी के लिए अवैध बोरिंग की व्यवस्था की गई है। स्थिति ये है कि जहाँ अवैध रूप से रह रहे ये रोहिंग्या मजे में हैं, आसपास के क्षेत्रों में झुग्गियों में रह रहे मजदूर राशन-पानी को तरस रहे हैं और उनकी कोई सुनने वाला भी नहीं है।

दैनिक भास्कर के नई दिल्ली संस्करण में प्रकाशित ख़बर

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये बातें कही थी कि रोहिंग्या भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उन्हें बाहर किया जाना चाहिए। आए दिन कई आपराधिक वारदातों में भी इनकी संलिप्तता सामने आती रहती है। यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस-प्रशासन के कुछ लोगों के साथ भी रोहिंग्याओं की मिलीभगत है। ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट की मानें तो कालिंदी कुञ्ज थाना रोहिंग्याओं के स्मैक, गाँजा और अन्य मादक पदार्थों के अवैध व्यापार पर अंकुश नहीं लगा रहा है।

‘रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन’ का कहना है कि उसने कई बार यहाँ के अवैध बस्ती को हटाने के लिए गुहार लगाई है। 5.2 एकड़ की इस जमीन का खसरा नंबर 612 है और इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ बताई जाती है। आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा यहाँ राशन-पानी वितरित करना और रोहिन्याओं की मदद करने के पीछे ये निहितार्थ भी निकाला जा सकता है कि इन्हें दिल्ली की सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। अधिकतर रोहिंग्या बांग्लादेशी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सारी बसावट आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान की देन है। ये सारे रोहिंग्या पहले कंचन कुञ्ज में एक जमीन पर रह रहे थे। स्थानीय लोगों की मानें तो 300 रोहिंग्याओं को योजनाबद्ध तरीके से अमानतुल्लाह ख़ान ने एक साजिश के तहत यहाँ बसाया। इससे पहले कपिल मिश्रा भी दिल्ली सरकार के मुखिया अरविन्द केजरीवाल को रोहिंग्या प्रेमी बता चुके हैं।

79% कोरोना संक्रमण के कारण देश के 30 नगर निगम बने चुनौती, लॉकडाउन- 4.0 में यहाँ लागू होगा अधिकतम प्रतिबन्ध

केंद्र ने 12 राज्यों में फैले कोरोना वायरस को लेकर 30 नगरपालिका क्षेत्रों के अधिकारियों के साथ बैठक की है। ताकि पुराने शहरों, मलिन बस्तियों, प्रवासी मजदूर शिविरों और अन्य उच्च क्षेत्रों में उच्च सतर्कता और बारीकी से निगरानी की जा सके। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत के कोरोनोवायरस (कोविद -19) बढ़ोतरी में इनका योगदान करीब 79 प्रतिशत है।

ये सभी 30 नगर निगम महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात और ओडिशा में हैं।

जिनमें सबसे ज्यादा प्रभावित नगरपालिका क्षेत्र बृहन्मुंबई या ग्रेटर मुंबई, ग्रेटर चेन्नई, अहमदाबाद, ठाणे, दिल्ली, इंदौर, पुणे, कोलकाता, जयपुर, नासिक, जोधपुर, आगरा, तिरुवल्लुर, औरंगाबाद, कुड्डलोर, ग्रेटर हैदराबाद, सूरत, चेंगलपट्टू, अरियालुर, हावड़ा, कुरनूल, भोपाल, अमृतसर, विल्लुपुरम, वडोदरा, उदयपुर, पालघर, बेरहामपुर, सोलापुर और मेरठ हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन सभी क्षेत्रों में चौथे लॉकडाउन के तहत अधिकतम प्रतिबंध किया जाएगा और इसमें किसी प्रकार की भी छूट नहीं दी जाएगी।

शनिवार (16मई, 20) को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन, स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेष अधिकारी राजेश भूषण व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नगर निगम आयुक्तों, जिलों के मजिस्ट्रेटों और अन्य अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक के दौरान ठीक होने के प्रतिशत में सुधार के लिए मरीज की समय पर पहचान और इन्फ्लूएंजा (ILI) / गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) जैसी गंभीर संक्रमण पर खासतौर से निगरानी रखने पर जोर दिया गया हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान कोरोना वायरस के मामलों में काबू पाने लिए अधिकारियों और नगर निगमों के कर्मचारियों द्वारा किए गए उपायों की समीक्षा की गई और उन्हें शहरी बस्तियों में बीमारी के प्रबंधन के बारे में नए दिशानिर्देशों के बारे में बताया गया।

इसी दौरान उच्च जोखिम वाले कारक, पुष्टि दर, मृत्यु दर, आँकड़ो के दोगुना होने की दर, प्रति 10 लाख पर जाँच आदि मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए जिलों में कोविड-19 संक्रमण की वर्तमान स्थिति पर एक प्रस्तुति भी दी गई।

नगरपालिका के अधिकारियों को रोकथाम और बफर जोन की मैपिंग करते समय विचार किए जाने वाले कारकों के बारे में जानकारी दी गई। कन्टेनमेंट ज़ोन जैसे नियंत्रण क्षेत्र में अनिवार्य गतिविधियाँ, घर के मामलों की निगरानी, संपर्क टेस्टिंग, परीक्षण प्रोटोकॉल, क्लीनिकल मैनजमेंट के एक्टिव मामलें, बफर जोन में निगरानी गतिविधियाँ जैसे SARI / ILI मामलों की निगरानी, ​​सोशल डिस्टेंसिग को सुनिश्चित करना और हाथ की स्वच्छता को बढ़ावा देना आदि।

बयान में कहा गया कि नगर निगमों, आवासीय कॉलोनी / मुहल्लों / नगरपालिका वार्डों या पुलिस-स्टेशन क्षेत्र / नगरपालिका क्षेत्रों / कस्बों आदि को कन्टेनमेंट जोन के रूप में निर्देशित किया जा सकता है।

साथ ही अधिकारियों को सलाह दी गई कि इस क्षेत्र को जिला प्रशासन या स्थानीय शहरी निकाय द्वारा स्थानीय स्तर से तकनीकी जानकारी के साथ उचित रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। कन्टेनमेंट ज़ोन के साथ-साथ आसपास के बफर ज़ोन को भी सही तरीके से रेखांकित किया जाना चाहिए जिससे कोरोनावायरस के ट्रांसमिशन की चेन को तोड़ा जा सके।

मामलों के दोगुना होने की उच्च दर, उच्च मृत्यु दर और कन्टेनमेंट ज़ोन में मामलों की पुष्टि की उच्च दर जैसे सूचकांकों के संदर्भ में अधिकारियों को इनके संभावित मूल कारणों के बारे में जानकारी देने के साथ ही अनुशंसित संभावित कार्यवाही के बारे में भी बताया गया।

इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि विशेष रूप से घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में आगे की चुनौतियों पर विचार किया जाना चाहिए, जैसे कि खराब सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सीमित स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचा, सामाजिक गड़बड़ी की कमी, महिलाओं की समस्याएँ, आदि।

स्वास्थ्य सचिव ने कहा, कोरोनोवायरस रोग के मामलों के नियंत्रण और प्रबंधन के साथ-साथ शहरी इलाकों में सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने का मुद्दे जैसे कि महिलाओं की डिलीवरी, गर्भ से संबंधित इलाज, किशोर के स्वास्थ्य, कैंसर के उपचार, टीवी का जाँच, ​​टीकाकरण, आगामी मानसून के मद्देनजर मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के उपाय, आदि को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

साथ ही अधिकारियों से अनुरोध किया गया था कि वे कम्युनिटी नेताओं और लोकल ओपिनियन नेताओं के साथ मिलें, जो स्थानीय जाँच टीमों के साथ स्थानीय समुदायों से सहयोग, समाधान खोजने, विश्वास बनाने और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर सकारात्मक प्रभाव के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

हर दिन 3, जुमे के दिन 20 गोहत्या: बेतिया में गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला

भारत में गोमाँस व्यापार के क्षेत्र में अधिकतर दूसरे समुदाय का ही बोलबाला रहा है, इसीलिए इससे सम्बंधित किसी भी मुद्दे का राजनीतिकरण ज़रूर किया जाता है। जब भी गोहत्या वाले अवैध बूचड़खानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाती है, वामपंथी मीडिया इसे लेकर हो-हल्ला मचाने लगता है और इस क़दम को समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ बताता है।

2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य में सारे अवैध बूचड़खाने बंद किए जाएँगे। योगी सरकार के इस क़दम का ख़ूब विरोध हुआ। समुदाय विशेष के एक नेता ने तो इसे मजहब वालों के ख़िलाफ़ अत्याधिक अत्याचार कह कर सम्बोधित किया। हालाँकि, अब तक कोई और राज्य इस तरह का फ़ैसला नहीं ले सका है।

समुदाय विशेष के लोगों ने भी योगी सरकार के उस फ़ैसले का स्वागत किया था लेकिन वामपंथी मीडिया ने ये सब दिखाने से इनकार कर दिया। ये जानने लायक बात है कि जहाँ भी ये बूचड़खाने होते हैं, आसपास रहने वाले लोग इससे नफरत करते हैं।

ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, यहाँ तक कि समुदाय विशेष के लोगों ने भी कहा है कि इससे पर्यावरण और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अब एक नया मामला आया है, जिससे आपको पता चलेगा कैसे इन बूचड़खानों का विरोध करने वाले समुदाय विशेष के लोगों को न तो मीडिया और न ही प्रशासन से कोई मदद मिल पाती है। बिहार स्थित पश्चिम चम्पारण के बेतिया में समुदाय विशेष के लोगों ने अपने इलाक़े के एक बूचड़खाने के विरुद्ध पुलिस से शिकायत की है लेकिन उनके कानों में जू तक न रेंगी।

‘स्वराज्य मैग’ में प्रकाशित स्वाति गोयल शर्मा की एक ख़बर के अनुसार, बेतिया की एक आवासीय कॉलोनी के लोग पिछले 5 वर्षों से अपने एरिया में चल रहे गोहत्या और गोमाँस के अवैध व्यापार के बारे में पुलिस को लिख रहे हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मोहम्मद अफ़रोज़ ख़ान को तो उन अवैध व्यापारियों ने मारा-पीटा भी। अफरोज ने बताया है कि गोहत्या करने वाले कसाइयों ने उनकी हत्या का प्रयास किया। फ़िलहाल उनका इलाज चल रहा है।

मई 14, 2020 को रात 10 बजे हुए इस हमले को लेकर अफरोज ने पुलिस को भी लिखित शिकायत दी है। अफरोज के भाई अख़लाक़ ने बताया कि वो अभी कमजोर हैं, हॉस्पिटल में हैं और बात करने में सक्षम नहीं हैं। अफरोज का सिटी-स्कैन भी हुआ है।

अफरोज ने पुलिस को बताया है कि जब उनका गोहत्या करने वाले समूह से आमना-सामना हुआ तो, पप्पू नामक आरोपित ने सोहैल उर्फ़ ‘टमाटर’ को चाकू देकर कहा- ‘इसे मार डालो।‘ इसके बाद सोहैल ने अफरोज के सिर पर वार किया।

अफ़रोज़ ने हमलावरों पर लगाया हत्या के प्रयास का आरोप (फोटो साभार: स्वराज्य मैग)

जब अफरोज की पत्नी हाजरा खातून अपने पति को बचाने आईं तो आरोपितों ने उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश की और उनके साथ अश्लील हरकतें की। उनकी सोने की चेन और कान की रिंग भी लूट ली गई। जैसे ही कुछ पड़ोसी वहाँ जमा हुए, हमलावर भाग खड़े हुए।

यहाँ गायों की हत्या और गोमाँस के अवैध व्यापार को लेकर कई बार सांप्रदायिक तनाव भी भड़क चुका है। इस घटना के बाद उस एरिया के 23 लोगों ने पश्चिम चम्पारण पुलिस को एक आवेदन दिया है। इस पत्र का विषय है- “गोहत्या और गोमाँस के अवैध व्यापार के सम्बन्ध में, जिसके कारण यहाँ सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है।

इस पर हस्ताक्षर करने वाले लोग वार्ड 12-13 में स्थित कालीबाग मोहल्ले के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने बताया है कि एक संदिग्ध समूह इलाके में गोहत्या करता है और गायों के ख़ून, माँस और अन्य चीजों को नालियों में फेंक देता है। हड्डियों को भी यूँ ही फेंक दिया जाता है।

मोहल्ले वालों को इससे ख़ासी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। मोहल्ले में गैस सिलिंडर देने वाले वेंडर नहीं आते। यहाँ तक कि अख़बार वाले, रिक्शा वाले, बिजली मिस्त्री या कोई सरकारी कर्मचारी तक यहाँ नहीं आते।

लोगों ने बताया है कि इस कारण उनके घर की बहू-बेटियों को स्कूल या हॉस्पिटल जाने में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया गया है कि यहाँ हिन्दू समाज के भी लोग हैं, जो परेशान हैं। पत्र में लोगों ने लिखा है:

“इस सम्बन्ध में समाज के बुद्धिजीवियों ने कई बार पंचायती की लेकिन ये लोग उसे भी मानने को तैयार नहीं हैं। वो लोग कहते हैं कि उन लोगों की साँठगाँठ प्रशासन से है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। जब हम गोहत्या का विरोध करते हैं तो वो सब हथियार लेकर इकट्ठे हो जाते हैं और शराब पीकर हमें गन्दी-गन्दी गालियाँ देते हैं। वो कहते हैं कि जो बोलेगा, उसे वो जान से मार देंगे। हमारे मोहल्ले का सुख-चैन गायब हो गया है। इस मामले में जाँच के बाद उन लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए।”

कालीबाग आवासीय कॉलोनी के लोगों ने पुलिस को दिया आवेदन (फोटो साभार: स्वराज्य मैग)

मोहल्ले वालों के पास कई तस्वीरें भी हैं, जिनमें गोहत्या के बाद गोमाँस, हड्डियाँ और ख़ून इधर-उधर फेंकी हुई दिख रही हैं। एक तस्वीर में तो तुरंत हत्या की गई गाय दिख रही है।

अख़लाक़ का कहना है कि वहाँ के लोग एक साफ़-सुथरा वातावरण चाहते हैं लेकिन पुलिस आती भी है तो ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने बताया कि रोज कम से कम 3 गायों को मार डाला जाता है। जुमे के दिन तो ये आँकड़ा 20 भी हो जाता है।

अख़लाक़ ने बताया कि सैकड़ों की संख्या में लोग गोमाँस खरीदने के लिए जमा होते हैं। रोज इसी तरह लॉकडाउन को भी धता बताया जाता है। एक गाय को मारने (गोहत्या) से उनके पास 7000 रुपए तक आते हैं। इससे आप सोच सकते हैं, उनके पास कितने पैसे हैं।

बकौल अख़लाक़, एक गाय को मारने (गोहत्या) के बाद लगभग तीन बाल्टी भर कर ख़ून निकलता है, जिसे वो सड़कों पर और नालियों में फेंक देते हैं। गोहत्या से परेशान उसी मोहल्ले के अख्तर का कहना है कि वो लोग नरक में रह रहे हैं, उनकी बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुँचाई जाए।

अब मोहल्ले के लोग एसपी से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में कुछ ख़ास नहीं बताया। कालीबाग पुलिस ने कहा कि दोनों पक्ष के लोगों को चोटें आई हैं लेकिन कोई डिटेल्स नहीं दिया।

अख़लाक़ का कहना है कि आरोपितों को बचाने के लिए पुलिस तरह-तरह के बहाने बना रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस कहती है कि उन पर एक्शन लेने से वो पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप मढ़ देंगे।

ये गोहत्या की वो घटना है, जिसमें समुदाय विशेष के लोग ही पीड़ित हैं लेकिन फिर भी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है। इससे पता चलता है कि बिहार में गोहत्या पर प्रतिबन्ध एक मजाक बन कर रह गया है। इसी समुदाय के प्रभावशाली लोग, पुलिस-प्रशासन और मीडिया तक इनके ख़िलाफ़ हैं। बजरंग दल के सह-संयोजक शुभम भरद्वाज ने भरोसा दिलाया है कि संगठन इस मामले को उठाएगा। अब देखना ये है कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

‘पूरा परिवार इस्लाम अपना लो तो किडनैप बेटे को छोड़ दूँगा, वरना…’ – जमातियों की पाक में हिंदू माँ को धमकी

एक वायरल वीडियो के अनुसार, तबलीगी जमात के एक व्यक्ति ने एक हिन्दू लड़के का अपहरण किया है। ये घटना पाकिस्तान की है। साथ ही इलाक़े के भीलों के घरों में भी तोड़फोड़ मचाई गई। उन्हें अपने ही घरों से निकाल बाहर किया गया और उनकी अधिकतर संपत्ति अवैध रूप से जब्त कर ली गई। लड़के की माँ का रो-रो कर बुरा हाल है और वो अपने बेटे की वापसी के लिए गुहार लगा रही है। माँ का कहना है कि वो इस्लाम अपनाने से अच्छा मरना पसंद करेंगी।

बता दें कि पाकिस्तान के सिंध में तबलीगी जमात के अपहरणकर्ता उक्त लड़के को छोड़ने के लिए रुपए-पैसे की माँग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अपहृत लड़के का परिवार इस्लाम अपना लेता है तो उसे छोड़ दिया जाएगा। लेकिन, परिवार इसके लिए तैयार नहीं है। ये पाकिस्तान में जबरन धर्मान्तरण की एक बानगी भर है। क्षेत्र की महिलाओं ने मजहबी धर्मान्तरण के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया।

वायरल वीडियो में पाकिस्तान की हिन्दू महिला को जमीन पर गिर कर रोते हुए देखा जा सकता है, जहाँ वो अपने बेटे की रिहाई के लिए गुहार लगा रही हैं। महिला के आसपास हिन्दू समाज के अन्य लोग खड़े हैं, जो हाथों में पोस्टर लेकर वहाँ के मजहब विशेष वालों द्वारा किए जा रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एक अन्य वायरल वीडियो में वही महिला कहती दिख रही है कि वो मृत्यु को अंगीकार करेंगी लेकिन कभी इस्लाम नहीं अपनाएगी।

वैसे ये पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान में इस तरह का मामला आया हो। सिंध के नवाबशाह में एक हिन्दू जोड़े को जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था। ये शुक्रवार (मई 15, 2020) की ही घटना है। स्थानीय इमाम हाकिम कादरी ने इस जबरन मजहबी धर्मान्तरण को अंजाम दिया था। जमात अल्हे सुन्नत के कई अन्य सदस्य भी उस समय वहाँ पर मौजूद थे। जबरन धर्मान्तरण के बाद पति-पत्नी को रुपए भी दिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने 335 पन्नों की 2018 में मानवाधिकार की स्थिति रिपोर्ट में कहा था कि 2018 में सिर्फ सिंध प्रांत में ही हिन्दू एवं ईसाई लड़कियों से संबंधित अनुमानित 1000 मामले सामने आए। जिन शहरों में बार-बार ऐसे मामले हुए हैं, उनमें उमरकोट, थरपारकर, मीरपुरखास, बदीन, कराची, टंडो अल्लाहयार, कश्मोर और घोटकी शामिल हैं।

हिन्दुओं को आतंकवादी बताने वाला NSUI नेता शौकत गिरफ्तार, J&K पुलिस ने दर्ज किया मामला

कॉन्ग्रेस पार्टी के छात्र संघ NSUI के शौकत अली शाहीन (Shokit Ali Shaheen) ने भारत को इस्लामिक राज्य बनाने की बात कही थी। अब उसे जम्मू कश्मीर की पूँछ पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। उस पर रविवार (मई 17, 2020) को आईपीसी की धारा-295 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना), धारा 505 (2) (विभिन्न समुदायों के बीच घृणा फैलाना) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्वर्णकोट थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

पूँछ पुलिस ने बताया कि NSUI के शौकत अली को गिरफ़्तार किए जाने के बाद उसे जमानत भी दे दी गई है। इसके बाद कोई भी उसके लिखे भड़काऊ पोस्ट को शेयर करता है तो उसके खिलाफ भी लीगल एक्शन लिया जाएगा। शौकत ने हिन्दू धर्म को ‘आतंकियों का मजहब’ कहा था। उसने लिखा था कि क़ुरान ही विज्ञान का मार्गदर्शक है और दुनिया में 57 इस्लामी मुल्क हैं, जो बताते हैं कि इस्लाम पूरे विश्व में चमक रहा है।

NSUI महासचिव शौकत अली शाहीन द्वारा फेसबुक पर की गई हिंदू-घृणा और मजहबी वर्चस्व से लिप्त टिप्पणियाँ कुछ इस प्रकार हैं –

  1. ‘हिंदू इस पृथ्वी पर एक आतंकवादी धर्म है’,
  2. ’57 इस्लामिक देश हैं और इस्लाम पूरी दुनिया में चमक रहा है…’
  3. ‘कुरान विज्ञान का मार्गदर्शक है…’
  4. ‘निरक्षर, गंदे, भद्दे हिंदू ही हमारे भारत में धार्मिक प्रदूषण फैला रहे हैं…’
  5. ‘इंशाअल्लाह, मेरा इंडिया इस्लामिक राज्य हो जाएगा।’
  6. ‘गाय का गोबर और गोमूत्र पीने वाली कौम’

हालाँकि, हिन्दू विरोधी टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उसने अपना पेज निष्क्रिय कर दिया। शायद, हिंदू समुदाय के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के बाद FIR की संभावना के कारण, शौकत ने तुरंत अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट या अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

यह महज एक संयोग नहीं है कि शाहीन कथित तौर पर कॉन्ग्रेस पार्टी के छात्र संघ से जुड़ा हुआ है। कॉन्ग्रेस के नेता, लंबे समय से हिंदुओं के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देते आए हैं और ऐसे बयानों को अपनी विचारधारा का आधार साबित करने का प्रयास किया है।

लगभग हर दूसरे दिन ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें कॉन्ग्रेस नेता या उनके सोशल मीडिया प्रभारी गो-मूत्र पर चुटकुले और तंज कसते नजर आते हैं।

हाल ही में, जब दुनिया कोरोना वायरस के खतरे से जूझ रही थी, महिला कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया समन्वयक, लावण्या बल्लाल ने एक ट्वीट में कटाक्ष करते हुए कहा था कि बाहर के लोग कोरोना वायरस का ‘इलाज’ बेच रहे हैं जबकि ‘भारत के पास गो-मूत्र’ है।

कोरोना जाँच के लिए टोका तो बुजुर्ग कला जाटव सहित दो को मार डाला: कपूरे खाँ समेत 5 गिरफ्तार, 9 पर FIR

मध्य प्रदेश के भिंड में कोरोना जाँच के लिए टोकना एक परिवार को भारी पड़ गया। इसमें एक बुजुर्ग महिला सहित दो की जान चली गई। मामले में पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें से पुलिस कपूरे खाँ समेत पाँच की गिरफ्तारी कर चुकी है। इलाके में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक भिंड के सिटी कोतवाली इलाके के प्रेमनगर में रहने वाले कपूरे खाँ के घर पर दिल्ली से उसका दामाद आया हुआ था। शुक्रवार(15 मई, 2020) की रात को दामाद घर के बाहर बैठा हुआ था। तभी पड़ोस में रहने वाली कला जाटव नाम की महिला ने दामाद के बाहर बैठने पर आपत्ति जताते हुए कपूरे खाँ से दामाद की स्क्रीनिंग करवाने की बात कही।

टोकने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद होने लगा। इसी बीच कपूरे खाँ के परिजनों में छतों से कला जाटव के परिवार पर पथराव शुरू कर दिया। इसी बीच पथराव में बुजुर्ग महिला कला जाटव की मौके पर ही मौत हो गई और हमले में परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दूसरी तरफ कपूरे खाँ के परिवार का भी एक व्यक्ति घायल हो गया।

दो समुदायों के बीच हुए झगड़े की सूचना पर सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुँच गई और सभी घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इससे पहले ही कपूरे खाँ का पूरा परिवार फरार हो गया।

वहीं हमले में गंभीर रूप से घायल मृतक महिला के भाई विष्णु जाटव को ग्वालियर रेफर किया गया, जहाँ विष्णू ने शनिवार (16 मई, 2020) सुबह को दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी मिलते ही इलाके में तनाव पैदा हो गया। पुलिस ने अभी तक कपूरे खाँ समेत पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस वारदात के बाद पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है।

सिटी कोतवाली के टीआई उदयभान सिंह का कहना है, ‘हमें जानकारी मिली थी कि एक पक्ष का दिल्ली से दामाद आया हुआ था, जो कि घर के बाहर बैठा हुआ था, तभी दूसरी पार्टी ने कहा कि जाँच कराकर आओ। इस बात पर दामाद ने जबाब दिया कि मैंने जाँच करा ली है, दिल्ली में भी कराई थी और यहाँ भी कराई है।

फिर दूसरे पक्ष ने विरोध करते हुए कहा कि दोबारा कराकर आओ और इसी बात पर विवाद हो गया। इस मामले में पुलिस ने कपूरे खाँ परिवार के 9 लोगों पर हत्या का मामला दर्ज किया है। साथ ही पुलिस अब सभी आरोपितों की तलाश में जुट गई है। जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बलिदानी जवान की 82 वर्षीय पत्नी ने अपने जीवन भर की बचत से पीएम केयर्स में दिए ₹2 लाख, CDS रावत ने की प्रशंसा

कोरोना संकट के बीच उत्तराखंड की एक बलिदानी जवान की पत्नी ने PM केयर्स फंड में अपने जीवन की जमा पूँजी का 2 लाख रुपए दान कर मिशाल पेश की है। इस पर CDS विपिन रावत ने शहीद की पत्नी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरणों से हमें सीख लेनी चाहिए।

जानकारी के मुताबिक देश में जारी कोरोना संकट से चिंतित उत्तराखंड के अगस्त्यमुनि विकास खंड में रहने वाली 82 वर्षीय बुजुर्ग दर्शनी देवी रौथाण ने गाँव में ही स्थानीय अधिकारियों को दो लाख रुपए का चेक सौंपा।

बुजुर्ग महिला के इस कदम की प्रशंसा करते हुए, सीडीएस जनरल रावत ने कहा कि यह वह सेना है, जो अतीत की थी और यही वह सेना होगी जिस पर हमें भविष्य में गर्व होगा, जिस बदलाव के साथ हम इसे हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

सीडीएस ने कहा कि हमें श्रीमती दर्शनी देवी पर गर्व है। हममें से बहुत से लोगों ने उनके द्वारा पेश किए गए इस उदाहरण का पालन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भले ही हम योगदान नहीं दे सकते हैं लेकिन, हमें कम से कम अपने करों का भुगतान तो करना ही चाहिए और न ही करों से बचने का साधन ढूँढना चाहिए।

वहीं केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने भी दर्शनी देवी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों को प्रणाम करते हैं। उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड वीरों के साथ साथ दानवीरों की भी पुण्य भूमि है। जब जब देश पर कोई संकट आया है, उत्तराखंड के लोगों ने हमेशा पहली पंक्ति में खड़े होकर त्याग-बलिदान दिया है।’

उन्होंने बताया कि मुझे पता चला कि परोपकारी हृदय की हमारी यह बुजुर्ग माता पहले भी अपने क्षेत्र में कई प्रकार के सामाजिक कार्यों का आयोजन करती रही हैं। मैं इनकी त्याग-तपस्या और दानशीलता को नमन करता हूँ और इनके चरणों में वंदन करता हूँ।

दरअसल 82 वर्षीय दर्शनी देवी के पति सेना में हवलदार थे, जो कि वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में शहीद हो गए थे, अब उन्होंने ही अपनी बचत से 2 लाख रुपये PM केयर्स फंड में दान कर दिए हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आज ग्यारह लाख रुपए का एक चेक कोरोना महामारी की रोकथाम हेतु महामंत्री श्री चम्पतराय व अन्य ट्रष्टियों द्वारा पीएम केयर्स फण्ड के नाम ज़िलाधिकारी अयोध्या को भेंट किया था।

इस पर विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा था कि भगवान श्रीराम ने अपने मन्दिर से पहले देशवासियों के कुशलक्षेम हेतु पीएम केयर्स फण्ड में दान देकर बहुत बड़ी कृपा की है। अब इस फण्ड में कभी कोई कमी नहीं आएगी।

चीन विरोधी कंटेंट हटाए जाएँ, दलाई लामा का भी समर्थन नहीं चलेगा: TikTok का भारतीय कर्मचारियों को फरमान

सोशल मीडिया पर लोग टिक-टॉक ऐप को प्रो-चाइनीज बताते हुए इसे अनइनस्टॉल करने के लिए अभियान चला रहे हैं। कई लोगों का ये भी मानना है कि टिक-टॉक पर जिहादी गतिविधियों से हिन्दूफ़ोबिया को बढ़ावा देने वाले वीडियोज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। अब एक ईमेल लीक हुआ है, जिसे कथित तौर पर टिक-टॉक ने भारत में कार्यरत अपने सभी कर्मचारियों को भेजा है।

इसमें कहा गया है कि ऐसे किसी भी कंटेंट को टिक-टॉक पर जगह नहीं दी जाए, जो चीनी सरकार के विरुद्ध हो। इसके तहत बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा और तिब्बत के समर्थन से सम्बंधित सभी कंटेंट को भी एप्लीकेशन से हटाने का निर्देश दिया गया है। इससे साफ़ है कि कम्पनी चीनी हितों को देखते हुए काम कर रही है और भारत के मामले में कोरोना को लेकर जिहादी मानसिकता का प्रदर्शन करने वालों के वीडियोज को और बढ़ावा दिया गया।

टिक-टोक को भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए भी ख़तरा बताया जा रहा है। हालाँकि, फेसबुक और गूगल जैसी कम्पनियों ने भी समय-समय पर भारत में लोगों की प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ किया है। ये कम्पनियाँ अमेरिका में बेस्ड हैं। तबरेज अंसारी नामक चोर की झारखण्ड में मौत के बाद उसके नाम पर हिंसा को भड़काने के लिए टिक-टॉक को भी जरिया बनाया गया। इस एप्लीकेशन का संचालन बाइटडांस नामक कम्पनी करती है।

इसे दुनिया के बड़े स्टार्टअप्स में से एक माना गया था। इस ऐप पर रजिस्टर करते समय यूजर अन्य सोशल मीडिया साइट्स की जानकारी भी इसे देता है, जहाँ से ये सारे डेटा कलेक्ट कर लेता है। यूजर के आईपी एड्रेस से लेकर अन्य तकनीकी सूचनाएँ भी टिक-टॉक आसानी से ले लेता है। आपके मोबाइल डिवाइस की सूचनाएँ, टाइम जोन, ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर स्क्रीन रिजोल्यूशन तक की जानकारी उसके पास रहती है।

अगर आप टिक-टॉक पर अपने परिचितों को खोजने के लिए अपनी सम्पर्क सूची का उपयोग करते हैं तो ये आपके कांटेक्ट लिस्ट में घुस कर सभी लोगों के नाम एवं नम्बर का एक्सेस पा लेता है। इसी तरह फेसबुक के भी सभी मित्रों के बारे में ये पल भर में ही जानकारी जुटा सकता है। इससे पता चलता है कि लोगों द्वारा भेजे जाने वाले प्राइवेट मैसेज भी सुरक्षित नहीं हैं

टिक-टॉक पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेरिका में आइफोंस में सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले साइट्स में 30% हिस्सा टिक-टॉक का था। ये अक्टूबर 2018 का आँकड़ा है। ये फेसबुक, यूट्यूब और इन्स्टाग्राम से भी ज्यादा है। गूगल की रैंकिंग में ये अमेज़न और नेटफ्लिक्स से भी ऊपर आया था।

तेलिनीपाड़ा दंगा: दो BJP सांसदों के खिलाफ FIR, ममता ने कहा- किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा

पश्चिम बंगाल में दो भाजपा सांसदों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सांसद अर्जुन सिंह और लॉकेट चटर्जी के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज किया गया। इनके खिलाफ हिंसा भड़काने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। चंदननगर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए दावा किया है कि इन दोनों ने हुगली के तेलिनीपाड़ा में हिंसा भड़काई। बता दें कि उस इलाके में हिन्दुओं के घरों को जलाया गया था और भीषण दंगे हुए थे।

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि भाजपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग राज्य में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का काम कर रहा है। तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ने कहा था कि उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने की बात करते हुए कहा कि किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।

ममता ने कहा कि उनकी पुलिस ये नहीं देखेगी कि कौन सा आरोपित किस समुदाय से ताल्लुक रखता है। हालाँकि, बंगाल सरकार पर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं और हालिया दंगों में भी पुलिस पर उलटा पीड़ित हिन्दुओं को ही प्रताड़ित करने के आरोप लगे थे। भाजपा नेताओं ने भी राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर हस्तक्षेप करने की माँग की है। भाजपा ने तृणमूल पर गुनहगारों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

अब तक इस मामले में 56 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। चंदननगर के कई पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर कैम्प कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया गया और कर्फ्यू लगा दिया गया। अभी भी वहाँ काफी पाबंदियाँ हैं। शीतला माता का मंदिर जलाए जाने की भी ख़बर आई थी। मई 2019 में भी अर्जुन सिंह और लॉकेट चटर्जी पर ताबड़तोड़ 5 एफआईआर किए गए थे।

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया था कि अचानक से रात में आई पुलिस कुछ हिन्दुओं को उठा कर ले गई और उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। उक्त व्यक्ति ने बताया कि उसके भी एक मित्र को इसी तरह रात में ही पुलिस उठा कर ले गई। यहाँ तक कि पुलिस को खदेड़ने वाले कट्टरपंथियों की जगह भी हिन्दुओं को ही निशाना बनाया जाता है।