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हिंदू होकर खाना खिलाने की सजा: ‘मानव तस्करी के लिए बच्चों को देता है दवा’ – बांग्लादेशी कट्टरपंथियों से घिरा संगठन

कोरोनो वायरस महामारी के दौरान जरूरतमंदों को खिलाने, अल्प-पोषित बच्चों को शिक्षा प्रदान करने और समाज में अधिकारहीन लोगों तक हर संभव मदद पहुँचाने के बावजूद विद्यानंद (विद्यानंदो या बिद्यानंदो – स्थानीय बोली के अनुसार – Bidyanondo Foundation) फाउंडेशन नामक बांग्लादेशी एनजीओ सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों के हमले की चपेट में आ गया है। इस फाउंडेशन का हिंदू नाम और उसके मालिक के हिन्दू होने की वजह से ही उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

विद्यानंद फाउंडेशन के संस्थापक किशोर कुमार दास के खिलाफ हमले और दुष्प्रचार इतना तीव्र हो गया कि उन्हें फाउंडेशन के अध्यक्ष से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह घोषणा 5 मई को आधिकारिक रूप से फेसबुक पेज के माध्यम से आई थी।

हालाँकि, विद्यानंद फाउंडेशन की कार्यकारी समिति ने किशोर के इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया। साथ ही किशोर को अपना निर्णय वापस लेने का आग्रह भी किया।

ढाका ट्रिब्यून से एनजीओ के चेयरपर्सन ने कहा, “धार्मिक जुड़ाव के कारण सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ व्यक्तिगत हमलों के बाद मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया। लेकिन बाद में मुझे महसूस हुआ कि यह फाउंडेशन के अभियान और गतिविधियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।”

बांग्लादेशी सूत्रों ने दैनिक ढाका ट्रिब्यून से कहा कि पिछले दो वर्षों से फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर इसके नाम और संस्थापक के धार्मिक जुड़ावों के लिए लगातार हमलों का सामना करना पड़ा है।

हिंदूपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ”भूख और सामाजिक वर्जनाओं के खिलाफ लड़ाई के कारण विद्यानंद फाउंडेशन के काम की बांग्लादेश में व्यापक रूप से प्रशंसा हो रही है। यह फाउंडेशन “एक टके आहार” (Food at Tk 1 – मतलब बांग्लादेशी करेंसी, जिसे टका कहा जाता है, उसके 1 टके में खाना) नामक एक परियोजना के माध्यम से अयोग्य लोगों को खाना खिला रहा है।

किशोर एक ऐसी दुनिया के सपने देखते हैं, जहाँ कोई भी बच्चा पीड़ित नहीं हो और कोई भी खाली पेट ना सोए। कोरोना वायरस महामारी के बाद, फाउंडेशन और भी अधिक सक्रिय हो गया है और जरूरतमंदों के लिए भोजन की आपूर्ति शुरू कर दी है।

इसके अलाव ढाका के सार्वजनिक वाहनों और अन्य क्षेत्रों में कीटाणुनाशक का छिड़काव भी यह संस्था कर रही है। कुत्तों को खाना खिलाने से लेकर फाउंडेशन द्वारा कई अन्य गतिविधियाँ की जा रही हैं। इसके लिए उन्हें समाज के हर तबके में प्रशंसा मिल रही है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किशोर कुमार दास को फाउंडेशन के “गैर-मुस्लिम” नाम के कारण कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

एनजीओ और चेयरपर्सन पर लगाए गए आरोप

● एनजीओ द्वारा दिए जा रहे भोजन में दवा मिलाया जा रहा ताकि बच्चें तुरंत सो जाएँ और बाद में उनका मानव तस्करी किया जाए। यह आरोप पूरी तरह गलत साबित हुआ।

● पिछले साल यह आरोप लगाया गया था कि एनजीओ द्वारा आयोजित इफ्तार में समुदाय विशेष के भोले-भाले लोगों को हिंदुओं में बदलने के लिए गोमूत्र/गोबर के साथ मिला कर दिया गया था।

● सोशल मीडिया पर यह आरोप लगाया गया था कि विद्यानंद फाउंडेशन भारत द्वारा वित्त पोषित एक हिंदू मिशनरी (इस्कॉन) संगठन है।

● यह भी आरोप लगाया गया है कि विद्यानंद फाउंडेशन दान के नाम पर धन इकट्ठा करता है और भारत में तस्करी करता है।

हिन्दूपोस्ट में ‘विद्यानंद फाउंडेशन को खुद का बचाव नहीं करनी चाहिए’ शीर्षक वाला एक लेख प्रकाशित हुआ। यह लेख एक बांग्लादेशी तनीम अहमद ने लिखा है। तनीम ओमनीस्पेस के संस्थापक और सीईओ हैं। इस लेख में विद्यानंद फाउंडेशन और इसके संस्थापक पर लगाए सारे आरोपों को खारिज किया गया है।

लेखक ने यह महसूस किया कि सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणियाँ एक संगठन की प्रामाणिकता और सच्ची नीयत पर सवाल उठाते हैं। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि इसका नाम बंगाली है और इसके संस्थापक हिंदू हैं। ये सभी बातें बांग्लादेशियों के बीच बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता की ओर इशारा करती है।

लेखक ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश तेजी से केवल “मुस्लिमों” का देश बन रहा है, जहाँ अन्य धर्मों के लोग दूसरे दर्जे के नागरिक बन जाएँगे, जबकि अन्य नास्तिक और शायद अहमदिया जैसे लोग पीछे धकेल दिए जाएँगे।

बांग्लादेशी NGO विद्यानंद (विद्यानंदो या बिद्यानंदो – स्थानीय बोली के अनुसार – Bidyanondo Foundation) फाउंडेशन

विद्यानंद फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2013 में किशोर कुमार दास ने की थी। भुखमरी और सामाजिक वर्जनाओं के खिलाफ लड़ाई, दलित बच्चों की बेहतरी के लिए अथक परिश्रम… आदि के लिए इस एनजीओ की बांग्लादेश में व्यापक रूप से प्रशंसा की गई। यह कार्य एक परियोजना के माध्यम से किया गया, जिसका नाम है: “एक टके आहार” (Food at Tk 1 – मतलब बांग्लादेशी करेंसी, जिसे टका कहा जाता है, उसके 1 टके में खाना)।

‘बालाकोट खौफ’ में जी रहा पाकिस्तान: सर्जिकल स्ट्राइक के डर से फाइटर प्लेन से कर रहा बॉर्डर की निगरानी

हंदवाड़ा में आतंकी मुठभेड़ के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान में डर का माहौल बना हुआ है। यह डर इस कदर है कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर अचानक से लड़ाकू विमानों की गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं। भारतीय सीमा के नजदीक नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तान के एफ-16, जेएफ-17 और मिराज-III उड़ान भर रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, घटना के समय पाकिस्तान पहले से ही एक हवाई अभ्यास कर रहा था, जिसके बारे में भारत को भी जानकारी थी। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया, “कर्नल की वीरगति के तुरंत बाद पाकिस्तानी वायु सेना ने अपने गश्ती विमानों में एफ-16 और जेएफ-17 सहित अन्य लड़ाकू विमानों को शामिल किया।

पाकिस्तान की इन हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना पूरी तरह से सतर्क है और बॉर्डर पर पाकिस्तान की वायुसेना की एक-एक गतिविधि पर सर्विलांस टीम द्वारा नजर रखी जा रही है।

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्विटर पर यह दावा किया था कि भारत मौजूदा तनाव का इस्तेमाल कर (सीमा पार से आतंकवादियों की) घुसपैठ के बहाने उनके देश के खिलाफ अभियान छेड़ सकता है। इमरान खान ने ट्वीट में लिखा, “मैं पाकिस्तान को निशाना बनाने वाले झूठे फ्लैग ऑपरेशन के बहाने भारत के प्रयासों के बारे में दुनिया को आगाह कर रहा हूँ।”

आपको बता दें कि पाकिस्तान के डर की वजह, बीते सालों में उरी और पुलमावा अटैक जैसे आतंकी हमलों के बाद भारत द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई है। पुलमावा अटैक के बाद भारतीय एयरफोर्स ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप को निशाना बनाया था। उरी हमले के बाद आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी।

बिहार के मजदूरों की मदद के नाम पर पप्पू यादव ने दिल्ली में जुटाई सैकड़ों की भीड़, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियॉं

पूर्व सांसद पप्पू यादव ने दिल्ली में मजदूरों की सहायता के नाम पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी। ”जन अधिकार पार्टी’ के अध्यक्ष ने सैकड़ों मजदूरों को जमाकर नीतीश कुमार की बिहार सरकार पर हमला बोला और कहा कि वे उन सबको घर पहुँचाने की व्यवस्था करेंगे। इस दौरान पप्पू यादव कोरोना के खतरे को भूल गए और एक बड़ी भीड़ जुटा कर गरीबों की जान संकट में डाल दिया।

पप्पू यादव ने कहा कि बिहार के एक-एक मजदूरों को घर ले जाया जाएगा। अगर सरकार के पास रेलवे का किराया नहीं है तो वो किराया देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने मजदूरों को संबोधित करते हुए दावा किया कि एक ट्रेन महज 6.5 लाख रुपए में आता है और सरकार को कम से कम बस एक ट्रेन तो देना ही चाहिए क्योंकि ‘साहब’ उससे महँगा तो सूट ही पहनते हैं।

पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि यहाँ दिल्ली में मजदूर बेचैन हो रहे हैं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चैन से सो रहे हैं। मालवीय नगर में मजदूरों की भीड़ को संबोधित करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि वो स्थानीय पुलिस के आग्रह पर यहाँ आए हैं। पप्पू यादव की इस सभा में रैली जैसा माहौल था और अधिकतर लोग बिना मास्क के ही आए हुए थे। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।

उन्होंने कहा कि जहाँ भी बिहारी फँसे हुए हैं, वहाँ से उन्हें वापस लाने के लिए वे प्रयासरत हैं। इससे पहले उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर अपहरण का मुकदमा दर्ज करने की माँग की थी और आरोप लगाया था कि उन्होंने बिहार के मजदूरों का अपहरण किया है। ख़ुद की सभा में कोरोना के खतरे को बढ़ावा देते हुए पप्पू यादव ये भूल गए कि सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का निर्देश दिया हुआ है और अभी पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है। ख़ासकर दिल्ली के तो सभी 7 जिले रेड जोन में आते हैं।

कोसी बेल्ट से निकल कर बिहार का सर्वमान्य नेता बनने की जद्दोजहद के बीच पप्पू यादव ‘सामाजिक नेता’ की छवि बनाने में लगे हैं। इस क्रम में लालू और नीतीश दोनों पर ही आए दिन हमलावर रहते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि RJD ने बिहार में मुस्लिम उम्मीदवारों को हराने के लिए भाजपा से समझौता कर लिया है। पटना बाढ़ के दौरान वो एक मंत्री के घर कचरा फेंकने जा रहे थे, तब उनका चालान काटा गया था।

कर्नाटक: प्रेम विवाह के बाद लिंगायत बनी मुस्लिम युवती, शिवाबसवा स्वामीजी से ली दीक्षा

कर्नाटक के हुक्केरी में एक मुस्लिम युवती लिंगायत बन गई है। उसने विरक्ता मठ के शिवाबसवा स्वामीजी की मौजूदगी में सभी रीति-रिवाजों के साथ दीक्षा ली।

एक लिंगायत युवक से प्रेम विवाह करने के बाद युवती ने आगे का जीवन इसी संप्रदाय के अनुसार जीने की इच्छा व्यक्त की थी।

जानकारी के मुताबिक मुस्लिम युवती का एक लिंगायत युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। कुछ सप्ताह पहले दोनों ने सहमति के साथ शादी कर ली। शादी का बेलगाम जिले में रजिस्ट्रेशन कराया गया है। दोनों के परिजनों ने भी इस शादी पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। शादी के बाद युवती ने लिंगायत संप्रदाय में शामिल होने की इच्छा जताई।

गुरुवार (7 मई, 2020) को युवक अपनी पत्नी को लेकर विरक्ता मठ के स्वामीजी शिवाबसवा के पास पहुँच गया और अपनी पत्नी की इच्छा से अगवत कराया। स्वामीजी ने युवती को कुछ औपचारिकताओं के साथ दीक्षा दी।

स्वामीजी ने युवती को दीक्षा देने के बाद इष्टलिंग, एक चौका और एक केसरिया शॉल भेंट की गई। इस दौरान युवती सहित दो अन्य लोग मौजूद रहे।

द हिंदू की खबर के मुताबिक विरक्ता मठ के शिवाबसवा स्वामीजी ने बताया कि 24 वर्षीय युवक मेरे पास आया, जो लिंगायत परिवार से था। एक मुस्लिम लड़की से प्यार होने के बाद उसने लड़की से शादी कर ली।

आपको बता दें कि लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। कर्नाटक की आबादी का 18 फीसदी हिस्सा लिंगायत हैं। पास के राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी-खासी आबादी है। लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं।

इससे पहले (20 फरवरी, 2020) को एक लिंगायत मठ ने मुस्लिम युवक के लिए अपनी सभी परंपराओं को तोड़ने का फैसला किया था। इसके तहत मठ ने 33 साल के दीवान शरीफ रहमानसाब मुल्ला को मुख्य पुरोहित बनाने का फैसला किया था। शरीफ ने बीते साल नवंबर में दीक्षा ली थी। यह मठ कर्नाटक के गडग ​जिले में स्थित है।

पंजाब: शराब ठेकों की नीलामी पर बॅंटे कॉन्ग्रेसी मंत्री, मीटिंग में हंगामा, बैठक छोड़ निकल गए वित्त मंत्री

पंजाब में शराब ठेकों को नीलामी और आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) पर चर्चा करने के लिए शनिवार (मई 9, 2020) को बुलाई गई प्री-कैबिनेट की मीटिंग में मंत्रियों और अफसरों के बीच जमकर विवाद और हंगामा हुआ।

हंगामे से नाराज होकर वित्तमंत्री मनप्रीत बादल और तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी मीटिंग का बहिष्कार कर चले गए। इस कारण कैबिनेट की बैठक नहीं हो सकी और आबकारी नीति पर फैसला नहीं हो सका।

कॉन्ग्रेस नेता विवाद पर बँट गए हैं। लुधियाना से कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्‍य सचिव का पक्ष लिया है और मंत्रियों से इस्‍तीफा देने तक को कह दिया। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस के वरिष्‍ठ विधायक अमरिंदर सिंह वडिंग ने मुख्‍य सचिव पर निशाना साधा है। मंत्रियों ने आगे मुख्‍य सचिव के साथ बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।

इस हंगामे के बाद कई मंत्री नाराज हैं। उन्होंने साफ कह दिया है कि वे अगली बैठक चीफ सेक्रेटरी के साथ नहीं करेंगे। मंत्रियों ने कहा है कि वे अब सिर्फ मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के साथ ही चर्चा करेंगे। अगली बैठक सोमवार (मई 11, 2020) को प्रस्तावित है।

दरअसल, पंजाब के कर एवं आबकारी विभाग ने लॉकडाउन के बाद नए सिरे से खोलने के लिए ठेकों को नीलाम करने की पॉलिसी तैयार की थी। इसमें तीन विकल्प दिए गए थे। चरनजीत सिंह चन्नी ने कुछ सुझाव दिए, जिसे मुख्य सचिव ने खारिज कर दिया। मंत्री इस बात से नाराज थे कि जब विभाग ने फैसला ही कर लिया है तो मंत्रियों को बताने की जरूरत क्या है?

मंत्रियों के ऐतराज पर चीफ सेक्रेटरी करण अवतार सिंह भी गुस्से में ही बोले तो मनप्रीत बादल यह कहते हुए मीटिंग छोड़कर चले गए कि ऐसी मीटिंग का क्या फायदा है? उनके पीछे-पीछे तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी भी चले गए।

रवनीत सिंह बिट्टू ने चीफ सेक्रेटरी का पक्ष लेते हुए ट्वीट किया, “मंत्रियों का चीफ सेक्रेटरी के साथ बहस कर प्री कैबिनेट की बैठक छोड़ कर जाना इस तरह है जैसे कोई जज एडवोकेट से बहस कर कोर्ट रूम से चला जाए। अगर उनकी नजर में नौकरशाही अक्षम है तो उन्हेें अधिकारियों की जगह लेनी चाहिए थी और बाहर नहीं जाना चाहिए था।”

बिट्टू ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “कोरोना जैसी महामारी के दौरान मंत्रियों और नौकरशाहों के बीच समन्वय मजबूत होना चाहिए, लेकिन प्री-कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक से बाहर जाने वाले मंत्रियों को अपने व्यवहार के लिए इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि कई अन्य लोग दबाव में काम करने के लिए सक्षम हैं और उनकी जगह लेने के लिए तैयार हैं।”

वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मुख्‍य सचिव करण अवतार सिंह को आड़े हाथ लिया है। मुख्‍य सचिव पर निशाना साधते हुए वडिंग ने कहा कि उनका व्यवहार उचित नहीं है। उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए।

गौरतलब है कि पहले भी कई बार पंजाब सरकार के मंत्रियों और अफसरों के बीच वैचारिक मतभेद के कारण बैठकों में हंगामा हो चुका है। लेकिन इस बार वित्तमंत्री की नाराजगी पहले से कुछ ज्यादा थी। मंत्री की नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दो बजे बुलाई गई कैबिनेट की मीटिंग स्थगित करनी पड़ी।

कोरोना वायरस के कारण जब देश में लॉकडाउन लगा तो पंजाब पहला राज्य था, जिसने शराब की बिक्री में छूट की माँग की थी। अब इसी शराब को बेचने के लिए लेकर सरकार नई नीति बनाना चाह रही है। पंजाब शराब की बिक्री से सालाना 6,500 करोड़ रुपए का राजस्व कमाता है।

12 मई तक जमा करें मोबाइल-लैपटॉप: जफरुल इस्लाम को दिल्ली पुलिस का नोटिस, अरब का दिखाया था धौंस

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम को 12 मई तक मोबाइल और वह लैपटॉप जमा कराना होगा जिससे उन्होंने विवादित पोस्ट सोशल मीडिया में की थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी किया है।

इसी दिन दिल्ली हाई कोर्ट में इस्लाम की याचिका पर सुनवाई होनी है। देशद्रोह मामले में अग्रिम जमानत के लिए उन्होंने याचिका दायर कर रखी है।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदुओं को अरब का धौंस दिखाने के बाद से इस्लाम विवादों में हैं। शुक्रवार को कई मुस्लिम संगठनों और मौलवियों ने उनके समर्थन में बयान जारी किया था। देशद्रोह के मामले में दर्ज FIR रद्द करने की मॉंग करते हुए कहा था कि उन्हें उत्पीड़ितों के पक्ष में बोलने के लिए ‘दंडित’ किया जा रहा है।

30 अप्रैल को जफरुल इस्लाम को देशद्रोह (आईपीसी धारा 124 ए) और धार्मिक हिंसा (आईपीसी धारा 153 ए) को बढ़ावा देने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया था।

उम्र का हवाला देते हुए इस्लाम पुलिस जॉंच में शामिल होने से असमर्थता जता चुके हैं। 06 मई 2020 को पुलिस को पत्र लिख कर उन्होंने कहा था कि वे पुलिस स्टेशन नहीं आ सकते। पुलिस चाहे तो उनके घर पर उनसे पूछताछ कर सकती है।

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुस्लिम एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं। 

माफ़ी माँगने से इनकार

जफरुल इस्लाम ने पोस्ट पर कहा था कि, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं। 1 मई 2020 को अपने बयान में मैंने कहा था कि मैं अभी भी अपने विचार के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा हूँ और मेरे द्वारा किए गए टिप्पणियों में कुछ भी गलत नहीं कहा गया है।”

मालदीव से केरल लौटी गर्भवती महिला ने भारतीय नौसेना से कहा- Thank You

मालदीव में फँसे भारतीयों को लेकर नौसेना का जहाज जलाश्व रविवार (अप्रैल 10, 2020) को सुबह माले से कोच्चि बंदरगाह पहुँचा। इसके साथ ही कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के दौरान विदेशी सरजमीं से भारतीयों को निकालने का भारतीय नौसेना का पहला बड़ा अभियान पूरा हो गया।

बता दें कि नौसेना ने विदेश में फँसे लोगों को लाने के लिए समुद्र सेतु नाम से अभियान चलाया है। इस जहाज से 19 गर्भवती महिलाओं समेत 698 भारतीय यात्रियों को स्वदेश लाया गया। जहाज पर दवाओं के साथ अन्य चिकित्सा सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे।

जहाज में सवार एक गर्भवती महिला ने इसके लिए भारतीय नौसेना का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विमान में खाना, दवाई, सैनिटाइजर, मेडिकल सुविधाएँ जैसी हर की सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आप मालदीव में हैं और किसी तरह की मुश्किल में हैं या प्रेगनेंट हैं, तो वो शिप में वापस आ सकती हैं। यहाँ पर उनका काफी अच्छे से ख्याल रखा जाता है। महिला ने इसके लिए खास तौर पर भारतीय नौसेना को धन्यवाद दिया।

ऑपरेशन के पहले चरण के तहत नौसेना के दो बड़े युद्धपोत माले पहुँचे थे। उनमें से आईएनएस जलाश्व 698 भारतीयों को लेकर शुक्रवार (मई 8, 2020) को केरल के कोच्चि के लिए रवाना हुआ था। भारतीय नौसेना ने आईएनएस जलाश्व और आईएनएस मगर की मदद से मालदीव में रह रहे करीब 1800 से 2000 लोगों को स्वदेश वापस लाने की योजना बनाई है।

इसके लिए नौसेना के जहाजों को चार बार चक्कर लगाने होंगे। इसमें दो चक्कर कोच्चि के लिए और दो चक्कर तूतीकोरिन के लिए होंगे। स्वदेश वापसी में जबसे ज्यादा प्राथमिकता जरूरतमंद लोगों को ही दी जा रही है। इनमें बच्चे, बूढ़े, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएँ शामिल हैं।

नौसेना के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी फैलने के कारण भारत सरकार विदेशों में फँसे भारतीयों को वापस लाना चाहती है। इसके लिए सरकार ने नौसेना को जरूरी इंतजाम करने का निर्देश दिए थे।

विदेश से लाए गए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के लिए सभी बंदोबस्त कर लिए गए हैं। इनमें केरल के 440 लोग और बाकी देश के अन्य हिस्सों के लोग हैं। आईएनएस जलाश्व से आए लोगों में दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के नागरिक भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार विदेश से लौटने वालों को एक सप्ताह के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। इसके बाद एक सप्ताह उन्हें अपने घर में आइसोलेशन में रहना होगा। किसी में कोरोना के लक्षण मिलने पर उसे फौरन कोरोना का इलाज करने वाले अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।

सिक्किम: नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई

सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई। दोनों तरफ के सैनिकों को मामूली चोटें आने और मामला सुलझा लिए जाने की खबरें आ रही है।

भारतीय सेना के सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया ​है कि सीमा विवाद के कारण छोटे-मोटे विवाद अक्सर होते रहते हैं। प्रोटोकॉल के मुताबिक दोनों सेना ऐसे मसलों को सुलझा लेती है। हालॉंकि सूत्रों के अनुसार अरसे बाद इस तरह के हालात पैदा हुए थे।

रिपोर्टों के अनुसार, चीनी सेनाओं द्वारा आक्रामक टकराव नाकु ला सेक्टर के पास हुआ। यह समुद्र तल से करीब 5000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के अनुसार 4 भारतीय सैनिकों और 7 चीनी सैनिकों को टकराव के दौरान मामूली चोटें आईं। झड़प में लगभग 150 सैनिक शामिल थे। हालांकि, स्थानीय स्तर पर वरिष्ठकर्मियों के बीच बातचीत के बाद मामला निपट गया।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे हाल ही में ईस्टर्न सेक्टर के दौरे पर गए थे। उनके इस दौरे के कुछ ही दिनों बाद भारत और चीन की सेनाएँ सीमा पर आमने-सामने आ गईं। सेना प्रमुख ने सुकना, बिन्नागुरी, पनागर सहित ईस्टर भारत में विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया था और वहाँ पर तैनात सैनिकों के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत कर सीमाओं की स्थिति का जायजा लिया था।

गौरतलब है कि इससे भारत-चीन के बीच 2017 में सिक्किम में सैन्य टकराव देखने को मिला था। उस समय शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भी कई दिनों तक यहॉं कैंपिंग करनी पड़ी थी। उस समय चीनी सैनिकों को सड़क निर्माण से रोके जाने के बाद टकराव हुआ था।

‘नो मुस्लिम स्टाफ’: चेन्नई में जैन बेकरी के मालिक गिरफ्तार, समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करने का आरोप

जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी के मालिक प्रशांत को चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन्होंने विज्ञापन में ‘नो मुस्लिम स्टाफ’ लिखवाया ​था। इससे एक धार्मिक समुदाय की भावनाओं को आहत करने का उन पर आरोप है।

चेन्नई के टी नगर से 27 वर्षीय प्रशांत को ‘धार्मिक भेदभाव’ वाले विज्ञापन छपवाने को लेकर शुक्रवार को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने व्हाट्सएप पर सर्कुलेट किए गए विज्ञापन से समुदाय विशेष को खुलेआम ‘बदनाम’ किया।

दरअसल, बेकरी मालिक ने अपने प्रोडक्ट को लेकर एक विज्ञापन छपवाया था। विज्ञापन में अन्य जानकारियों के साथ लिखा था “Made by Jains on orders, no Muslim staffs”। यानी ऑर्डर पर सामान जैनी तैयार करते हैं, यहॉं कोई मुस्लिम काम नहीं करता। व्हाट्सएप पर इस विज्ञापन के वायरल होने के बाद पुलिस ने बेकरी के मालिक प्रशांत को गिरफ्तार किया

‘धार्मिक भेदभाव’ वाले विज्ञापन छपवाने को लेकर अब बेकरी मालिक के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 153, 153A, 505 और 295A के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी तरह का एक मामला झारखंड के जमशेदपुर से सामने आया था। पुलिस ने कुछ ऐसे फल दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिन्होंने ‘विश्व हिंदू परिषद द्वारा अनुमोदित फल दुकान’ के बैनर लगाए थे।

जमशेदपुर पुलिस का कहना था कि दुकानदारों पर ‘हिंदू’ शब्द लिखने के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, क्योंकि यह सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की एक कोशिश है। इसी तरह बिहार के नालंदा में भी सब्जियों की दुकान पर भगवा झंडा लगाने को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

हैरानी की बात है कि मुस्लिम लोग अपनी दुकान पर खुलेआम ‘मुस्लिम होटल’, ‘हलाल मीट शॉप’ लिख सकते हैं, तो फिर हिंदू क्यों नहीं? इतना ही नहीं, इनकी सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक यह भी है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, गैर-मुस्लिम, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ मुस्लिम ही कर सकता है।

जब हलाल के काम में गैर मुस्लिमों को रोजगार नहीं मिल सकता है, वो खुले तौर पर लिखते हैं कि इसे कोई गैर मुस्लिम तैयार नहीं करता, तो फिर अगर जैन बेकरी वालों ने लिख दिया कि यहाँ पर सिर्फ जैन लोग ही ऑर्डर तैयार करते हैं, तो फिर इसमें गलत क्या है?

पाकिस्तान के एटम बम को बचाने के लिए जावेद मियाँदाद माँग रहे भीख, दोनों हाथ उठा के – Video Viral

पाकिस्तान के एक पूर्व क्रिकेटर हैं। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के रिश्तेदार भी हैं वो। नाम है जावेद मियाँदाद। अभी नया-नया काम सीखा है – भीख माँगने का।

जी नहीं, यह मैं उनका मजाक उड़ाने के लिए नहीं कह रहा। उन्होंने खुद वीडियो बनाकर भीख माँगी है, दोनों हाथ उठाकर। भीख माँगने का उनका स्टाइल शानदार है। इसके लिए वो एक नया बैंक अकाउंट खोलने जा रहे हैं।

जावेद मियाँदाद नाम का यह आदमी दिल का साफ है। भीख तो माँग रहा है लेकिन अपने कंगाल देश पाकिस्तान के लिए। पाकिस्तान का कर्ज चुकाने के लिए। मियाँदाद ने भीख माँगने वाला वीडियो ट्विटर पर अपलोड किया है। इस वीडियो में बड़े विस्तार से वो अपना प्लान बता रहे हैं।

वीडियो में जावेद मियाँदाद ने बड़ा दिल दिखाया है। हर पाकिस्तानी से अपील की है। फिर चाहे वो विदेश में रहते हों या भ्रष्ट हों और पाकिस्तान को लूटते आए हों। मियाँदाद ने सबसे अपील की है। उन्होंने यह भी बता दिया है कि वो फलाने बैंक (नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान) में खाता खोलेंगे।

इसके बाद जावेद मियाँदाद ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनका खाता ‘इंटरनेशलन बैंक अकाउंट’ होगा। और यह उनका पर्सनल अकाउंट होगा। उनके सिवा कोई दूसरा इस अकाउंट में नहीं घुस पाएगा। क्यों? क्योंकि इस खाते में जमा सभी पैसे से वो अपने कंगाल देश पाकिस्तान का कर्ज अदा करेंगे।

मियाँदाद लालची नहीं हैं। व्यवहार में लचीले भी हैं। पैसा माँगने में भी ऑप्शन देते हैं – एक बार में दे सके तो ठीक, वरना हर महीने भी भेजते रहो। तब तक भेजते रहो, जब तक पाकिस्तान का कर्ज न चुक जाए। मियाँदाद तकनीक के भी विद्वान हैं। ट्विटर पर वीडियो अपलोड करने के साथ हैशटैग के रूप में #LoanFreePakistan का इस्तेमाल किया।

वीडियो का सबसे मार्मिक हिस्सा तब आता है, जब जावेद मियाँदाद कर्ज चुकाने के पीछे की वजह बताते हैं। उनका कहना है कि अब अगर पाकिस्तान कर्ज लेना चाहेगा तो IMF उनसे परमाणु बम ‘छीन’ लेगा, जो पाकिस्तान के लिए बेशकीमती है।

मियाँदाद ने अंत में कहा कि वह ‘भीख’ माँग रहे हैं ताकि पाकिस्तान के माथे पर से कर्ज उतार सकें। मियाँदाद के इस भीख माँगते मार्मिक वीडियो से कुछ याद आया? गूगल में अगर आप भिखारी टाइप करेंगे तो वो आपको पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की फोटो दिखाता है। गूगल की ऐसी किसी भी नीति का ऑपइंडिया समर्थन नहीं करता है।