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दीपक चौरसिया को मिल रही धमकी और गाली, दर्ज कराई FIR: पालघर साधु लिंचिंग पर आवाज उठाने की ‘सजा’

‘न्यूज़ नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया को पालघर पर सच्चाई सामने लाने के कारण लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पत्रकारिता में आए 30 साल हो गए लेकिन उन्हें अब तक कभी ऐसी धमकियाँ नहीं मिली हैं। पत्रकार दीपक चौरसिया ने बताया कि उन्होंने इन धमकियों को लेकर एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई है।

दीपक चौरसिया ने आशंका जताई है कि पालघर मुद्दे पर आवाज़ उठाने के लिए उनके विरुद्ध ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने उन धमकियों के स्क्रीन शॉट्स भी शेयर किए। ट्विटर पर ये सब शेयर करते हुए दीपक ने लिखा कि वो न तो इन सबसे डरने वाले हैं और न ही रुकने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जब तक उनके भीतर साँस है, तब तक वो इन मुद्दों पर आवाज़ उठाते रहेंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर थाने में FIR दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें फोन पर लगातर धमकियाँ मिल रही हैं और इनमें से अधिकतर नम्बर महाराष्ट्र के हैं।

चौरसिया ने कहा कि पालघर की वीभत्स घटना पर उन्होंने कई शो किए हैं, इसीलिए उन्हें परेशान किया जा रहा है। व्हाट्सएप्प पर उन्हें अभद्र और आपत्तिजनक भाषा में धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘न्यूज़ नेशन’ चैनल लगातार सच्चाई सामने ला रहा है, इसीलिए उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने बताया कि उन्हें पत्रकारिता का धर्म निभाने और समाज के लिए उनके दायित्वों की पूर्ति करने से दूर करने के लिए ये सब किया जा रहा है।

दीपक चौरसिया ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि जब से उन्होंने ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ ट्वीट किया है, तब से उन्हें मिलने वाली धमकियों की संख्या बढ़ गई है।

बता दें कि पालघर साधुओं की हत्या के बाद पुलिस ने कई घंटों तक शवों की सुध नहीं ली थी। शव उस रात करीब 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़े रहे। ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस बात का खुलासा पालघर मामले में चश्मदीद फॉरेस्ट गार्ड का हवाला देकर किया था।

उन्होंने दावा किया था, “पालघर संतों की क्रूर और निर्मम हत्या के बाद उनकी देह 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़ी रही। दरअसल पुलिस वाले हत्या के बाद भाग खड़े हुए थे। रात भर ड्राइवर और दो संतों की हत्या के बाद भी पुलिस ने सुध नहीं ली।”

लाउडस्पीकर बजता देख कट्टरपंथियों ने मंदिर पर किया हमला: रुड़की से शमशेर, अरशद सहित 5 गिरफ्तार

रविदास मंदिर में लाउडस्पीकर बज रहा था। लोग भजन-कीर्तन सुन रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के लोगों ने धावा बोल दिया। उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी। हिन्दुओं पर हमला कर के दो को जख्मी कर दिया। उत्तराखंड के रुड़की में हुई ये घटना शुक्रवार (मई 8, 2020) सुबह की है।

रुड़की के मंदिर में लाउडस्पीकर ज्यादा जोर से भी नहीं बज रहा था। फिर भी समुदाय विशेष के लोग वहाँ पहुँच गए और उन्होंने इसका विरोध किया। फिर वो बहस करने लगे। इसके बाद हिन्दू समाज ने भी उनका विरोध किया। विवाद इतना बढ़ गया कि मजहब विशेष के कई और लोग भी वहाँ पर इकट्ठे हो गए और उन्होंने मारपीट शुरू कर दी।

हिन्दू समाज के लोगों को भी जब इस बात का पता चला तो उन्होंने वहाँ जुटान शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों की ओर से लगातार पत्थरबाजी हो रही थी। हमला के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की भी जम कर धज्जियाँ उड़ी। शोर और हंगामे को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस को वहाँ शांति बहाल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मंदिर परिसर में कट्टरपन्थियों की पत्थरबाजी के कारण भारी मात्रा में पत्थर जमा हो गए। पुलिस को किसी तरह लाठीचार्ज कर के मामले को संभालना पड़ा। इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी।

इस पथराव में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें हायर सेंटर रेफेर किया गया है। दोनों घायलों के नाम सोनू और जितेंद्र हैं। गाँव में पुलिस बल की तैनाती के कारण स्थिति सामान्य बनी हुई है।

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करने के बाद अबुजर, मुशीर, शमशेर, अरशद और आकिल को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुल 20 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया था, जिनकी धर-पकड़ शुक्रवार की रात से ही शुरू कर दी गई थी

आरोप है कि कट्टरपंथियों ने मंदिर का ताला भी तोड़ दिया था। गाँव में पहले से भी सांप्रदायिक तनाव का माहौल बनता रहा है। इस घटना के दो दिन पहले क्रिकेट खेलने को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट हो गई थी। गाँव के प्रबुद्ध जनों ने उस समय मामला शांत करा दिया था। इसके बाद दूसरे पक्ष ने लाउडस्पीकर को नया विवाद का जरिया बनाया। पुलिस ने लोगों को लॉकडाउन का उल्लंघन न करने की चेतावनी दी है।

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों पर हमले होने आम बात हैं लेकिन हाल के दिनों में भारत के विभिन्न हिस्सों में पर्व-त्योहारों के दौरान मंदिरों पर हमले की ख़बरें बढ़ गई हैं।

रेल पटरी पर इंटरव्यू ले रहे NDTV पत्रकार को रोका तो रवीश ने कहा- पुलिस पत्रकारिता सिखा रही

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में शुक्रवार (मई 8, 2020) को दिल दहला देने वाली घटना हुई। पटरी पर सो रहे 16 मजदूर एक ट्रेन के नीचे आ गए और उनकी मृत्यु हो गई। सभी टीवी चैनलों की तरह NDTV ने भी इस ख़बर को दिखाया और इसे सरकार की विफलता बताते हुए जनता के सामने पेश किया। रवीश कुमार ने अपने शो ‘देस की बात’ में इस घटना को कवर किया।

16 मौतों के बाद घटनास्थल पर पुलिस तैनात है और मीडिया का आना-जाना लगा हुआ है। ऐसे में पुलिस को वहाँ जुट रही भीड़ को मैनेज करना पड़ रहा है और उन्हें बार-बार पटरी से हटाना पड़ रहा है। इस दौरान पटरी पर से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे एक पत्रकार को भी पुलिस ने वहाँ से जाने को कहा। पुलिस ने आरोप लगाया कि मीडिया जनता से सच्चाई छिपा रही है। इससे बौखलाए NDTV के रवीश कुमार ने कहा कि अब तो पुलिस भी पत्रकारों को पत्रकारिता सिखा रही है।

दरअसल, वो रिपोर्टर पटरी के पास जाकर कुछ मजदूरों से बात कर रहे थे, तब महाराष्ट्र पुलिस ने वहाँ पहुँच कर उन्हें जाने को कहा। तब रिपोर्टर ने आनकानी करते हुए पुलिस से कहा कि वो उनकी बात समझ रहे हैं लेकिन पटरी पर चल रहे मजदूरों की भी तो हकीकत दिखानी पड़ेगी। जब पुलिस ने कहा कि वो ग़लत जगह पर इंटरव्यू ले रहे हैं तो पत्रकार ने कहा कि लोग ही ग़लत जगह पर चल रहे हैं

पुलिस ने उच्चाधिकारियों के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें लोगों को पटरी पर से हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस को कहा गया था कि पटरी पर चल रहे लोगों को वापस घर भेजा जाए। पत्रकार पुलिस से पूछ रहे था कि क्या इन लोगों को खाना-पीना मिल रहा है। हालाँकि, पुलिसकर्मियों ने कहा कि उन्हें इस सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं है। पुलिस ने पत्रकार को अपना कैमरा बंद कर के वहाँ से जाने की सलाह दी।

जब पत्रकार ने बताया कि वो लाइव शो कर रहे हैं तो पुलिस ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा खंभा होने के बावजूद लोगों को बरगला रहा है। आप सच्चाई नहीं दिखा रहे हो। इसी बात से गुस्साए रवीश कुमार ने कहा कि अभी इसी जगह से 4000 लोग गए हैं और अभी ही ये पुलिस वाला कह रहा है कि ये इंटरव्यू लेने के लिए गलत जगह है।

कॉन्ग्रेस ने ही खड़ी की CM उद्धव के लिए मुश्किल: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में उतारे 2 प्रत्याशी

महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव होने हैं। उद्धव ठाकरे के भविष्य के लिए और उनके मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उनका विधानमंडल में चुना जाना बेहद ज़रूरी है। पहले कहा जा रहा था कि शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे विधानसभा का चुनाव लड़ कर जनता द्वारा चुने जाने के बाद विधायक बनना चाहते हैं लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। अब जब विधान परिषद का चुनाव होना है तो उनके ही गठबंधन साथी कॉन्ग्रेस उनके लिए मुश्किल खड़ी कर रही है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव कोरोना वायरस संक्रमण आपदा की वजह से होना संभव नहीं है, इसीलिए उद्धव को पहले राज्यपाल द्वारा नामित करने के लिए सिफारिश की गई। जब राज्यपाल अड़ गए तो चुनाव आयोग से विधान परिषद के चुनाव की घोषणा करने की अपील की गई। इसके लिए कॉन्ग्रेस और शिवसेना, दोनों ने ही दो-दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

भारतीय जनता पार्टी ने विधान परिषद चुनाव के लिए प्रवीण ददके, गोपीचंद पडलकर, अजित गोपछड़े और रणजीत सिंह पाटिल को बतौर प्रत्याशी मैदान में उतारा है। एनसीपी ने अब तक अपना पत्ता साफ़ नहीं किया है लेकिन अगर वो भी अपने प्रत्याशी उतारती है तो 9 विधान परिषद सीटों के लिए कुल 10 उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकेंगे। इससे उद्धव का निर्विरोध चुने जाने का सपना टूट सकता है।

नियमानुसार, अगर कोई व्यक्ति विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है और उसे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है तो उसे अगले 6 महीने के भीतर विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना पड़ेगा। चूँकि, एमएलसी का चुनाव गुप्त-मतदान के जरिए होता है, इसलिए ऐसे चुनावों में क्रॉस-वोटिंग होते आए हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस या एनसीपी में से किसी एक को मात्र एक सीट पर लड़ना पड़ेगा, तब क्रॉस-वोटिंग का ख़तरा कम होगा।

महाराष्ट्र के कुल 288 सदस्यीय विधानसभा में उद्धव के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन महाविकास अघाडी को 170 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिनमें शिवसेना के 56 विधायक, एनसीपी के 54 विधायक, कांग्रेस के 44 विधायक और अन्य 16 विधायक शामिल हैं। भाजपा 105 सीटों के साथ सदन की सबसे बड़ी पार्टी है। विधान परिषद में चुने जाने के लिए प्रथम वरीयता के आधार पर 29 सीटों की आवश्यकता है।

सत्ताधारी गठबंधन 5 सीटें आराम से जीत सकती है, वहीं विपक्ष में बैठी भाजपा भी 3 सीटों पर सेफ है। भाजपा की चौथी और शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस गठबंधन की छठी सीट के लिए काफ़ी जोड़-तोड़ हो सकती है। विधान परिषद में जाने के लिए बेचैन मुख्यमंत्री उद्धव ने इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी फोन पर बातचीत की थी।

श्रम कानून 2-3 साल तक स्थगित करने की माँग: सरकार ने सुनी उद्योग जगत की बात, कोरोना के बीच अर्थव्यवस्था पर बढ़ा ध्यान

कोरोना महामारी ने उद्योग धंधों पर काफ़ी बुरा असर डाला है। लॉकडाउन में काम बंद होने की की ज्यादातर मजदूर कैसे भी करके अपने घरों की तरफ निकल लिए हैं। मज़दूरों की कमी और लिक्विडिटी की समस्या उद्योग जगत के लिए बड़ी बाधा बन गई है। ऐसे में अब उद्योग जगत ने सरकार के सामने अपनी माँगो को एक लंबी फेहरिस्त सौंपी है। हालाँकि अगर सरकार इन माँगो में से अगर कुछ पर भी अमल करती है तो मज़दूरों को बड़ा झटका लग सकता है।

केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्री सन्तोष गंगवार के साथ हुई एक बैठक में उद्योग जगत से जुड़े नियोक्ता समूहों की ओर से कई माँगे रखी गईं। ये बैठक में लॉकडाउन की समस्या और उसके बाद अर्थव्यवस्था को उबारने की चुनौती के मद्देनज़र बुलाई गई थी। जहाँ मुख्य रूप से काम की सीमा 12 घंटे करने और 2-3 साल तक श्रम कानून को स्थगित करने की माँग की है।

उद्योग जगत ने सरकार से औद्योगिक विवाद क़ानून यानि Industrial Disputes Act में रियायत दिए जाने की भी बात कही हैं। उनका सुझाव है कि क़ानून में ढील बरतते हुए लॉकडाउन की अवधि को कामबंदी के तौर पर माना जाए। ऐसा करने से मज़दूरों और कर्मचारियों के प्रति उद्योग जगत की देनदारियों पर फ़र्क़ पड़ेगा। साथ ही नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों ही तरफ़ से सामाजिक सुरक्षा से जुड़े खर्चे में कटौती की भी सलाह दी गई है।

उद्योग जगत की परेशानियों और माँग को देखते हुए श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि वो उद्योग जगत और नियोक्ता समूहों की बात पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे, ताकि इस संकट से निकल कर आर्थिक विकास की गति बढ़ाई जा सके।

बैठक में शामिल उद्योग जगत की सबसे बड़ी संस्था फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स और लघु उद्योग भारती समेत 12 संगठनों ने मुख्य रूप से उद्योग जगह की इन माँगों को सरकार के सामने रखा हैं:-

  • जिस प्रकार अब तक मजदूरों के काम के 8 घण्टे होते थे, उन्हें अब बढ़ा कर 12 घण्टे कर दिए जाएँ।
  • श्रम क़ानूनों को अगले 2 – 3 सालों तक स्थगित कर दिया जाए।
  • लॉक डाउन की वजह उद्योग जगत को हुए घाटे से उभरने के लिए एक राहत पैकेज का ऐलान किया जाए।
  • कर्मचारियों को दिया जाने वाला वेतन भी कंपनियों के सीएसआर यानी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत लाया जाना चाहिए। ताकि कंपनियों को टैक्स पर छूट के रूप में इसका फायदा मिले।
  • बिजली सस्ते दर पर मुहैया कराया जाएँ।
  • फैले संक्रमण के चलते रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन की जगह उद्योग जगत को कंटेन्मेंट और नॉन कंटेन्मेंट ज़ोन बनाए जाएँ।
  • उद्योग जगत के अनुसार नॉन कंटेन्मेंट इलाकों में सभी आर्थिक गतिविधियाँ शुरू की जानी चाहिए।

आपको बता दें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही श्रम क़ानूनों में ढ़ील देने की दिशा में काम करते हुए छूट दे दी है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तो इसके लिए एक अध्यादेश को भी मंज़ूरी दे दी है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बृहस्पतिवार (मई 07, 2020) को ही अगले 3 साल के लिए कारोबारों को लगभग सभी लेबर लॉ के दायरे से बाहर रखने के लिए ‘उत्तर प्रदेश टेंपररी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020’ अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।

योगी सरकार ने कुल 38 श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया गया है और केवल 4 कानून लागू होंगे जो कि भुगतान अधिनियम, 1936 के भुगतान की धारा 5, वर्कमैन मुआवजा अधिनियम, 1932, बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 और भवन और अन्य निर्माण श्रमिक अधिनियम, 1996 हैं।

वहीं मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार ने कॉटेज इंडस्ट्री यानी कुटीर उद्योग और छोटे कारोबारों को रोजगार, रजिस्ट्रेशन और जाँच से जुड़े विभिन्न जटिल लेबर नियमों से छुटकारा देने की पहल की है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने कंपनियों और ऑफिस में काम के घंटे बढ़ाने की छूट जैसे अहम ​फैसले भी लिए हैं।

शिवराज सरकार ने कॉटेज इंडस्ट्री यानी कुटीर उद्योग और छोटे कारोबारों को रोजगार, रजिस्ट्रेशन और जाँच से जुड़े विभिन्न जटिल लेबर नियमों से छुटकारा देने की पहल की है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने कंपनियों और ऑफिस में काम के घंटे बढ़ाने की छूट जैसे अहम ​फैसले भी लिए हैं।

POK को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए योजना तैयार: जनरल वीके सिंह का बड़ा खुलासा

पिछले दिनों गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान को दो टूक जवाब देने के बाद भारत ने इसे पाक के कब्जे से मुक्त कराने को लेकर योजना बना ली है। इस बात का खुलासा जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह ने एक कार्यक्रम में कही। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मैं ये नहीं बताऊँगा कि हम ये सब कब करने वाले हैं।

‘इंडिया टुडे’ ग्रुप द्वारा 9 मई को आयोजित किए गए ई-एजेंडा आज तक कार्यक्रम में गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान द्वारा चुनाव कराए जाने की बात पर जनरल वीके सिंह ने चर्चा करते हुए कहा, पाकिस्तान की इमरान सरकार से अपना देश तो संभल नहीं रहा। वहाँ सेना लोगों के लिए तय कर रही है कि क्या करना है। ऐसे हालात में वहाँ रहने वाले लोग कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कि दुनिया उनके साथ खड़ी हो जाए।

पूर्व आर्मी चीफ और केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह ने आगे कहा, “पूरा कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है, इसके अंदर पीओके भी आता है, भले ही वह फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में हो, लेकिन वह एक दिन हमारे पास खुद आएगा। इसके लिए हमारी योजना तैयार है। उचित समय आने पर हमारी सेना कार्रवाई कर देगी।”

वीके सिंह ने कहा कि भारत पूरे विश्व को साथ लेकर चल रहा है, यही कारण है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विश्व भर में एक अलग पहचान बनी है। उम्मीद है कि हमें इसका पूरा लाभ मिलेगा और जो हम चाहते हैं वो अंत में जरूर हमको हासिल होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुझे नहीं लगता कि ऐसे समय में पाकिस्तान के साथ विश्व का कोई भी देश खड़ा होगा और भारत के खिलाफ जाएगा।

आपको बता दें कि बीते सोमवार(मई 4, 2020) को भारत ने पाकिस्तान के सामने ये साफ़ कर दिया था कि पूरा जम्मू कश्मीर और लद्दाख (POK सहित) देश का अभिन्न अंग है और इसका विलय भारत में पूरे वैध तरीके से हुआ है, जिसे कभी पलटा नहीं जा सकता। भारत ने कहा था कि वो पाकिस्तान के उन सभी क़दमों का कड़ा विरोध करता है, जिनके तहत वो अपने कब्जे वाले भारतीय प्रदेशों की स्थिति में बदलाव लाने के लिए उठा रहा है।

इतना ही नहीं, भारत ने पाकिस्तान को तुरंत अपने अवैध कब्जे वाले प्रदेशों को खाली करने को भी कहा था। इसके बाद भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसले के मुताबिक, मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली संस्था भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान सूची में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को भी शामिल कर लिया है।

दरअसल, उल्लेखनीय है कि हाल ही में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने को मँजूरी दी थी। इसके लिए पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 2018 के एक कानून में संशोधन और वहाँ चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

AAP विधायक प्रकाश जारवाल सहयोगी सहित गिरफ्तार: डॉक्टर ने सुसाइड नोट में प्रताड़ना का लगाया था आरोप

डॉक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में फरार चल रहे आम आदमी पार्टी के देवली विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रकाश जारवाल को दिल्‍ली पुलिस ने शनिवार की शाम को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले दिल्ली की एक कोर्ट ने विधायक के खिलाफ में गैर जमानती वारंट जारी किया था।

डीसीपी साउथ अतुल कुमार ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के देवली से विधायक प्रकाश जारवाल और कपिल नागर को दिल्ली पुलिस ने साकेत से गिरफ्तार किया है। दरअसल इन दोनों पर एक डॉक्‍टर को आत्‍महत्‍या के लिए उकसाने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद से दिल्ली पुलिस दोनों से मामले की पूछताछ कर रही है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक एसीपी सुधांशु धामा, विजय चंदेल व नेब सराय के एसएचओ नरेश सोलंकी सहित करीब 15 पुलिसकर्मियों की एक टीम ने शुक्रवार(8 मई, 2020) दोपहर विधायक के तिगड़ी स्थित आवास पर छापेमारी की गई थी। वहीं गोविंदपुरी, रोहिणी के इलाकों में भी दबिश दी गई। इस दौरान विधायक के घर पर मिले सहायकों और अन्य लोगों से भी मामले की पूछताछ की गई थी।

दूसरी ओर विधायक ने अग्रिम जमानत के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट में अग्रिम जमानत की यह याचिका दायर की थी। इस मामले पर कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा।

डॉक्टर का सुसाइड नोट

आपको बता दे कि पिछले महीने 18 अप्रैल को दिल्ली के नेब सराय इलाके में 52 वर्षीय डॉक्टर राजेन्द्र सिंह ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पास से एक 2 पेज का सुसाइड नोट मिला था जिसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए इलाके के विधायक प्रकाश जरवाल और उनके सहयोगी कपिल को जिम्मेदार ठहराया था।

इसके अतिरिक्त पुलिस ने एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें लिखा था, “मेरा इस इलाके में एक क्लीनिक है और मेरे कुछ वाटर टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में किराए से चलते थे, लेकिन एमएलए प्रकाश जरवाल और उसका सहयोगी कपिल नागर मुझसे हर टैंकर के हिसाब से पैसे माँगने लगे। कुछ पैसे दिए भी गए लेकिन बाद में मेरे सभी टैंकर प्रकाश जरवाल ने दिल्ली जल बोर्ड से हटवा दिया।”

सुसाइड नोट में लिखा था, “टैंकरों को दिल्ली जल बोर्ड से हटवाने के बाद जब उन्हें ओखला के दिल्ली जल बोर्ड के लगवाया गया तो टैंकरों को वहाँ से भी प्रकाश जरवाल द्वारा हटवा दिया गया।” नोट के अनुसार प्रकाश जरवाल और उसके सहयोगी से उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल रही थी और धमकियों के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया था।

इसके बाद दिल्ला पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर आप विधायक प्रकाश जारवाल, कपिल नगर और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था।

‘अदाएँ कोठे वाली’: ABP न्यूज एंकर रूबिका लियाकत पर अभद्र टिप्पणी करने वाले AMU छात्र मो आरिफ के खिलाफ शिकायत दर्ज

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर निखिल माहेश्वरी पर महिला को अपमानित करने का आरोप लगाकर थाने में मुकदमा दर्ज कराने वाले एएमयू के छात्र मो. आरिफ खान खुद एक महिला पत्रकार को अपमानित करने का आरोपित है। एएमयू के पूर्व छात्र विक्रांत जौहरी ने महिला पत्रकार रुबिका लियाकत को लेकर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में आरिफ खान के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। इसके बाद पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

एएमयू के पूर्व छात्र विक्रांत जौहरी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि एक महिला के सम्मान की दुहाई देकर हिंदू छात्रों को निशाना बनाने वाले छात्र मोहम्मद आरिफ खान खुद एक महिला विरोधी मानसिकता रखते हैं। इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने एक अल्पसंख्य समुदाय से आने वाली महिला पत्रकार रुबिका लियाकत को अपमानित करने वाली पोस्ट को अपने सोशल मीडिया एकाउंट से शेयर किया था।

विक्रांत जौहरी ने कहा कि इस मामले को अब हमने पुलिस प्रशासन के सामने रखा है साथ ही सिविल लाइन थाने में लिखित में शिकायत देकर छात्र आरिफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है, जिससे कि ऐसी मानसिकता वाले छात्रों को सबक सिखाया जा सके।

आपको बता दें कि 12 अप्रैल सोशल मीडिया पर आए एक पोस्टर में एबीपी न्यूज एंकर रुबिका लियाकत की तुलना एक जानवर से की गई थी, साथ ही रुबिका को कई न्यूज एंकरों के साथ वाली फोटो डालकर उनकी अदाओं को कोठे वाली महिलाओं के जैसा बताया गया था। इस पोस्ट को आरोपित छात्र मोहम्मद आरिफ खान ने अपने फेसबुक पोस्ट से शेयर किया था।

वहीं सोशल मीडिया पर आते ही इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि आरिफ ने आनन-फानन में पोस्ट को डिलीट कर दिया। आपको बता दें कि मोहम्मद आरिफ के द्वारा इस तरह का कृत्य किया जाना कोई पहली बार की घटना नहीं है। इससे पहले भी तथाकथित छात्र नेता आरिफ खान ने सीएए, एनआरसी के विरोध में एएमयू कैंपस में हुए धरना प्रदर्शन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था और हिंदुत्व की कब्र, योगी-मोदी की कब्र खोदने का नारा देने वाले ग्रुप में आरिफ के भी शामिल होने का आरोप है।

इतना ही नहीं एएमयू में हुए जिन्ना विवाद की भी आरिफ खान ने अगुआई की थी। इससे पहले आरिफ के खिलाफ भड़काऊ भाषण और 12 फरवरी को हिंदू छात्रों पर हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इस मामले में एसआईटी की जाँच टीम ने भी आरिफ को दोषी पाया था।

गौरतलब है कि रिसर्च स्कॉलर निखिल माहेश्वरी द्वारा 4 मई को सफूरा जरगर को लेकर सोशल मीडिया पर एक व्यंगात्मक पोस्ट की गई थी। इसके बाद आरिफ ने महिलाओं के सम्मान की दुहाई देते हुए निखिल के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पता चला कि आरिफ ने भी 12 अप्रैल को रुबिका को अपमानित करने वाली एक पोस्ट को शेयर किया था। इसके बाद यह बात सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गई।

गौरतलब है कि अरब देशों की तरह अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में हिंदू छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। कुछ हिंदू छात्रों के सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इतना ही नहीं ऐसे छात्रों को अंदरखाने एएमयू से निष्कासित कराने की योजना बनाई जा रही है। अब जिला प्रशासन ने पूर्व छात्र निशित शर्मा की शिकायत पर इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।

हिजबुल मुजाहिद्दीन सरगना सैयद सलाउद्दीन ने रियाज नाइकू की मौत पर बहाए आँसू, कहा- दुश्मन का पलड़ा भारी

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में आंतकवादियों के ऊपर की गई भारतीय सेना की कार्रवाई ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन की कमर को तोड़ कर रख दिया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कमांडर रियाज नायकू की मौत पर आयोजित एक शोकसभा में हिजबुल प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन ने कहा, “इस समय दुश्मन (भारत) का पड़ला भारी है।”

सोशल मीडिया पर आई एक वीडियो में देखा जा सकते है कि हिजबुल मुजाहिद्दीन प्रमुख सैयद सलाउद्दीन रियाज की मौत पर पाकिस्तान में आयोजित शोकसभा में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहा है। इस दौरान मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग जमीन पर बैठे देखे जा सकते हैं, शोकसभा में सैयद सलाउद्दीन कह रहा है-

“मुझे बहुत दिली सदमा हुआ है, लेकिन दोस्तों-बुजुर्गों ये शहादत का सिलसिला पहले दिन से ही चला आ रहा है। सिर्फ 1 जनवरी 2020 से अब तक बहुत से मुजाहिद्दीन अपनी शहादत दे चुके हैं। ये सभी पढ़े-लिखे हैं। मुजाहिद्दीन ने भी हालिया, हंदवाड़ा और राजवाड़ की कार्रवाई में दुश्मन का कमर तोड़ दिया है। लेकिन जरूरी यह है कि इस वक्त दुश्मन (भारत) का पलड़ा भारी है।” बताया जा रहा है कि इस वीडियो को अमेरिकी विदेश विभाग ने जारी किया है।

इस वीडियो को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा है, “हिज़बुल मुजाहिद्दीन का सरग़ना आतंकवादी सैयद सलाउद्दीन का विडीओ सामने आया है, अब वो मान गया है की दुश्मन (भारत) का पलड़ा भारी है! जय हिंद की सेना।”

आपको बता दें कि आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का गठन 1990 के आसपास हुआ था। इसका गठन मास्टर एहसान डार ने किया था। इस आतंकी संगठन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में भय का वातावरण बनाकर कश्मीर को भारत से अलग करके पाकिस्तान में उसका विलय करना है। भारत में कई आतंकी घटनाओं के पीछे हिजबुल मुजाहिद्दीन का ही हाथ रहा है।

जम्‍मू-कश्‍मीर में अप्रैल 2014 में हुए बम धमाकों में 17 लोगों की जान चली गई थी, ये हमला हिजबुल मुजाहिद्दीन ने ही कराया था। इस संगठन का प्रमुख इस समय सैयद सलाउद्दीन है, जो कि मूल रूप से जम्‍मू-कश्‍मीर के बड़गाम का रहने वाला है। अमेरिका ने सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित कर रखा है। सलाहुद्दीन कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए आतंकियों को ट्रेनिंग देता है।

गौरतलब है कि हंदवाड़ा में 6 मई को सेना ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के सबसे बड़े आतंकी रियाज नायकू को मार गिराया था। इस कार्रवाई को सेना, सीआरपीएफ और राष्ट्रीय राइफल्स ने मिलकर अंजाम दिया था। रियाज ने जुलाई 2016 में अनंतनाग में बुरहान वानी की मौत के बाद हिजबुल की कमान संभाली थी। 33 वर्षीय इस आंतकी पर 12 लाख रुपए का इनाम भी था।

इससे पहले 3 मई को हंदवाड़ा एनकाउंटर में पाकिस्तान के रहने वाले टॉप लश्कर आतंकी हैदर को भारतीय सेना ने मार गिराया था। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने कहा था कि वो पाकिस्तान के उन सभी क़दमों का कड़ा विरोध करता है, जिनके तहत वो अपने कब्जे वाले भारतीय प्रदेशों की स्थिति में बदलाव लाने के लिए उठा रहा है। भारत ने पाकिस्तान को तुरंत अपने अवैध कब्जे वाले प्रदेशों को खाली करने को कहा था।

छत्तीसगढ़: मदनवाड़ा में मुठभेड़ के बीच 4 नक्सलियों को ढेर कर वीरगति को प्राप्त हुए थाना प्रभारी

छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले में नक्सलियों और पुलिस के बीच घंटों चली मुठभेड़ में चार नक्सलियों को ढेर कर एक पुलिस जवान वीरगति को प्राप्त हो गया। पुलिस ने चारों नक्सलियों के शवों को बरामद कर उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। बरामद किए गए चार नक्सलियों के शवों में दो महिलाओं के शव शामिल हैं।

एसपी जितेंद्र शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार रात (8 मई, 2020) को पुलिस के जवान तलाशी अभियान के लिए निकले थे। इस बीच मदनवाड़ा क्षेत्र के परधौनी गाँव के जंगलों में घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी और इसी के साथ नक्सलियों के साथ पुलिस जवानों की मुठभेड़ शुरू हो गई। घंटों तक दोनों ओर से गोलीबारी होती रही।

घंटों चली मुठभेड़ में दो महिला सहित चार नक्सली मार गिराए गए, लेकिन इस बीच पुलिस मदनवाड़ा थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर श्यामकिशोर शर्मा वीरगति को प्राप्त हो गए। जानकारी के मुताबिक वीरगति को प्राप्त होने वाले पुलिसकर्मी मूल रूप से अंबिकापुर जिले के रहने वाले थे। अब उनके पार्थिव शरीर को राजनांदगाँव जिला मुख्यालय लाया जा रहा है, जहाँ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

वहीं पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा के मुताबिक सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से दो महिला नक्सलियों समेत चार नक्सलियों के शव, एक एके 47, एक एसएलआर और दो अन्य हथियार बरामद किए हैं। बता दें कि 12 जुलाई 2009 को भी इसी क्षेत्र में सुरक्षाबल के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई थी। इसमें एसपी समेत 29 जवान शहीद हो गए थे।

गौरतलब है कि झारखंड में गुमला सहित कई जिलों में आतंक का पर्याय बन चुके उग्रवादी संगठन पीएलएफआई (PLFI) के कमांडर बसंत गोप को एक ग्रामीण निर्भीक आदिवासी महिला विनीता उरांव ने टांगी से काटकर मार डाला था। यह घटना वृंदा नायक टोली में मंगलवार (मई 05, 2020) की रात को हुई।

यह घटना तब हुई जब बसंत गोप ने मंगलवार रात करीब 8:30 बजे वृंदा नायकटोली में भीम उरांव के घर पर अपने 6-7 साथियों के साथ हमला किया था। मारे गए नक्सलियों के सबजोनल कमांडर बसंत गोप के खिलाफ गुमला सहित विभिन्न जिलों के थानों में हत्या, लूट, अपरहण सहित दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।