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राजदीप जब राहुल गाँधी की चाटुकारिता में ज़्यादा ही बह गए तो दूसरे पत्रकार ने खोल दी पोल

राहुल गाँधी ने भारत में कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान मीडिया से बातचीत की एक सिरीज़ शुरू की है, जो कॉन्ग्रेस पार्टी और उनके मीडिया सहानुभूतिदाताओं द्वारा लोगों के बीच छवि बनाने का एक और प्रयास है। अब तक, राहुल गाँधी ने मीडिया से दो बार बातचीत की है। जहाँ उन्होंने कोरोनोवायरस महामारी पर अपने विचार व्यक्त किए और यहाँ तक ​​कि कुछ पत्रकारों ने सवाल भी किए। राहुल गाँधी द्वारा दूसरी प्रेस बातचीत के बाद, राजदीप सरदेसाई ने कॉन्ग्रेस के उत्तराधिकारी की अनस्क्रिप्टेड मीडिया इंटरैक्शन के लिए उनकी सराहना की।

राजदीप ने दावा किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र का हिस्सा है और इसी के चलते राहुल गाँधी ने सभी पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों को लिया और यह भी कहा कि अन्य राजनेताओं को भी ज़ूम (zoom video calling app) के इस दौर में हर तरह के सवाल जवाब के लिए तैयार होना चाहिए।

हालाँकि, राजदीप सरदेसाई और उनके झूठ को जल्द ही एक पत्रकार ने उजागर कर दिया, जो उनके ही इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। जबकि राजदीप ने यह दावा करने की बहुत कोशिश की कि राहुल गाँधी के साथ बातचीत फ्री-व्हीलिंग और अनस्क्रिप्टेड थी, शीला भट्ट ने कहा कि वास्तव में, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पूरी तरह नजर रखी थी। सवाल पहले सबमिट करा लिए गए थे।

शीला भट्ट ने कहा, कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बातचीत तो अच्छी रही मगर इसे ‘फ्री व्हीलिंग’ नहीं कहा जा सकता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों द्वारा पहले ही पूछे जाने वाले प्रश्न कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला को सौंप दिए गए थे। साथ ही, वही पत्रकार सवाल पूछ सकते थे जिन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा चिन्हित किया गया था।

आश्चर्य होता है, कि राजदीप सरदेसाई यह दावा कैसे कर सकते हैं कि राहुल गाँधी द्वारा की गई प्रेस वार्ता ‘अनस्क्रिप्टेड’ थी। जब उन्हें भी स्पष्ट रूप से पता था कि न केवल पत्रकारों अपने खेमे के पत्रकार चुने गए, बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी को पहले ही सवाल सौंप दिए गए थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गाँधी ने बोला झूठ

शुक्रवार (8मई,2020) को वायनाड के कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने दावा किया कि कोरोनोवायरस प्रभावित क्षेत्रों के लाल (उच्च संख्या में मामले), नारंगी और हरे (कोई मामले नहीं) का सीमांकन राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये ज़ोन राज्य स्तर पर DM और CM के आधार पर बनने चाहिए। साथ ही कहा कि ज़ोन पर केंद्र सरकार एकतरफा निर्णय ले रहीं है।

भारत में 4 मई से 2 सप्ताह के लिए और लॉकडाउन को बढ़ाया गया था, विशिष्ट क्षेत्रों के अनुसार महत्वपूर्ण छूट दी गई थी। प्रेस नोट में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने इस अवधि में विभिन्न गतिविधियों को विनियमित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनके अनुसार देश के विभिन्न जिलों को रेड (हॉटस्पॉट), ग्रीन और ऑरेंज ज़ोन के आधार पर छूट दिए गए हैं।

MHA के पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ज़ोन जिलों के फीडबैक के अनुसार तय किए गए हैं। यह भी कहा गया कि वर्गीकरण के बारे में राज्य के अधिकारियों के साथ क्षेत्रों की साप्ताहिक समीक्षा भी की जाएगी।

आपको बता दें, वे जोन जिसमें एक भी संक्रिमत केस अभी तक नहीं आए है या फिर पिछले 21 दिनों से अगर किसी एरिया में संक्रमित व्यक्ति की पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें ही ग्रीन जोन में रखा गया हैं। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रेड, ग्रीन और ऑरेंज ज़ोन के वर्गीकरण की हर हफ्ते समीक्षा की जाएगी। इसमें यह भी कहा गया है कि राज्यों को उनके मौजूदा हालातों को देखते हुए लाल और नारंगी क्षेत्र में जोड़ा जा सकता हैं।

इसके अलावा पीएम, गृह मंत्रालय और राज्यों के सीएम के बीच कई बैठकों के बाद लॉकडाउन और उसके बाद के कदम उठाए गए हैं। इसलिए राहुल गाँधी का यह दावा झूठा है कि सरकार के फैसले एकतरफा हैं।

पंजाब: खेत में गिरा मिग फाइटर प्लेन का पायलट, सिखों ने पगड़ी खोल धूप से बचाया

शुक्रवार (मई 8, 2020) को पंजाब के होशियारपुर के पास नवाँशहर में भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-29 क्रैश हो गया है। इस दौरान खेत में गिरे पायलट को धूप से बचाने के लिए सिखों ने अपनी पगड़ी तक खोल दी।

विमान के क्रैश होने से पहले ही पायलट पैराशूट से कूद गए और एक खेत में जा गिरे। इसके कुछ ही मिनटों बाद क्रैश विमान पायलट से 200 मीटर दूर एक दूसरे खेत में जाकर गिरा।

खेतों में काम करते लोगों ने जब इसे देखा तो दौड़कर पायलट की तरफ गए और उनकी तुरंत मदद की। धूप में तड़पते पायलट को देखकर वहाँ मौजूद सिखों ने अपनी पगड़ी खोल दी और उसे पकड़कर पायलट के चारों तरफ खड़े हो गए, ताकि उन्हें धूप ना लगे। यही नहीं, वो पगड़ी से हवा भी करते रहे।

वे लोग तब तक पायलट की देखभाल करते रहे, जब तक कि वायुसेना की रेस्क्यू टीम नहीं आ गई। रेस्क्यू टीम के आते ही सिखों की भी जान में जान आ गई। पायलट की जान अब सुरक्षित है। सभी देशवासी सिखों के इस कर्तव्य के लिए तारीफ कर रहे हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंटर सिंह के साथ ही इंडियन एयर फोर्स ने भी इसके लिए स्थानीय लोगों का शुक्रिया अदा किया।

जानकारी के मुताबकि विमान में तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह हादसा हुआ। मामले की जाँच करने के आदेश दे दिए गए हैं।

AIMIM कार्यकर्ता शकील खान महीनों से कर रहा था पीछा, गैंगरेप की धमकी देता था: हैदराबाद की नाबालिग दलित पीड़िता

हैदराबाद की नाबालिग दलित रेप पीड़िता ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपित AIMIM कार्यकर्ता शकील खान महीनों से उसका पीछा कर रहा था और उसे गैंगरेप की धमकी देता था।

मामला सामने आने के बाद हैदराबाद की चदरघाट पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में जेल में है। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी है। शकील मलकपेट से पार्टी विधायक अहमद बिन अब्दुल्ला बलाला का करीबी बताया जाता है।

स्वराज्य की खबर के मुताबिक पीड़ित नाबालिग दलित लड़की ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि शकील आए दिन उसका रास्ता रोकता था। शकील की यह हरकत महीनों से जारी थी। लड़की के मुताबिक शकील विवाहित होने के बाद भी उससे यौन संबंध बनाने की माँग कर रहा था। इतना ही नहीं वह लगातार अपने दोस्तों से सामूहिक दुष्कर्म कराने की भी धमकी देता था।

पीड़िता के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, “शकील मुझे कई बार सामूहिक दुष्कर्म की धमकी दे चुका है। उसने ज़बरदस्ती अपना फोन नंबर भी मुझे दिया था। वह कहता था यदि मैं उसे फोन नहीं करूँगी तो वह अपने मित्रों को मेरा बलात्कार करने को कहेगा।”

पीड़िता ने यह भी बताया कि उसने अपने परिवार को यह बात कभी नहीं बताई, क्योंकि उसके दादा-दादी वृद्ध व बीमार हैं। वह उनको परेशान नहीं करना चाहती थी। पीड़ित लड़की के माता-पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था। वह अपने दादा-दादी के साथ कमल नगर में रहती है। लड़की घरों में काम करती है, जबकि उसका भाई ऑटो रिक्शा चलाता है।

यहाँ रहने वाले कई हिंदू परिवारों की तरह वे भी मडिगा जाति के हैं जो कि एक अनुसूचित जाति है। अधिकांश परिवार गरीब हैं। आरोपित का मकान पीड़िता की बस्ती से आधा किलोमीटर दूर है। लड़की के भाई के मुताबिक शकील की दो पत्नियाँ और बच्चे भी हैं।

गौरतलब है कि हैदराबाद के चदरघाट (Chaderghat) पुलिस ने एआईएमआईएम ( AIMIM) कार्यकर्ता शकील खान (Shakeel Khan) को नाबालिग दलित लड़की से बलात्कार के आरोप में 6 मई को गिरफ्तार कर लिया था। शकील के खिलाफ IPC की धारा 376 (बलात्कार), POCSO अधिनियम और SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

राजस्थान के टोंक में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म, निसार, सलमान, जाकिर सहित चार गिरफ्तार

लॉकडाउन के बावजूद बलात्कार जैसे जघन्य अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। 5 मई 2020 को राजस्थान के टोंक में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। मामले में पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से एक नाबालिग है।

राजस्थान के टोंक में हुए इस गैंगरेप में गिरफ्तार आरोपितों के नाम निसार खान उर्फ नसरिया, सलमान ऊर्फ खोबड़ा और जाकिर ऊर्फ राजरड़ा हैं, जबकि चौथा आरोपित नाबालिग है।

मामला टोंक के पचेवर थाना क्षेत्र का है। जहाँ पाँच मई की रात कार सवार दो युवकों ने नाबालिग का अपहरण कर लिया। इसके बाद उसे जंगल में ले गए, जहाँ उसके दो साथी भी आ गए। इसके बाद आरोपितों ने उसके साथ सारी हदें पार दी। आरोपितों ने रात भर उसके साथ बारी-बारी से रेप किया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की।

वारदात के बाद अगली सुबह यानी 6 मई 2020 को आरोपित उसे गाँव के बाहर छोड़ कर फरार हो गए। इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक (एसपी) आदर्श सिद्धू ने शुक्रवार (मई 8, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दी। बताया जा रहा है कि चारों आरोपित भागने की फिराक में थे, मगर इससे पहले ही वो पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।

पीड़िता के भाई की ओर से बुधवार (मई 6, 2020) को दर्ज शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366,376 डी और पॉक्सो (POCSO) के तहत मामला दर्ज कर तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में शामिल एक अन्य नाबालिग आरोपित को हिरासत में लिया गया है।

इधर पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि जाँच अधिकारी (IO) ने उसका बयान लेते समय पीड़िता को डराने-धमकाने की कोशिश की, और साथ ही पीड़िता का मेडिकल चेकअप करने वाली महिला डॉक्टर ने उस पर अश्लील टिप्पणी की, उसके साथ अभद्रता की।

इस बात का खुलासा होने पर शुक्रवार को सांसद व विधायक के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने जाँच अधिकारी को बदलने और डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही करने एवं पीड़िता को उचित मुआवजा दिलाने की माँग की। इसके साथ ही उन्होंने गिरफ्तार आरोपितों के लिए फाँसी की सजा की भी माँग की।

मौलाना साद के वीडियो से जमाती ने की थी छेड़छाड़: मरकज के पाप धोने के लिए मीडिया ने छेड़ा शिगूफा

मौलाना साद को बचाने की मुहिम शुरू हो गई है। मीडिया ने ‘उच्चस्तरीय सूत्रों’ के हवाले से उसके वीडियो से छेड़छाड़ का शिगूफा छेड़ा है। छेड़छाड़ करने वाला तबलीगी जमात का ही सदस्य था।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस को ऐसा लगता है कि मौलाना साद के वायरल वीडियो छेड़छाड़ किया गया है। इस वीडियो में वह जमातियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने को कह रहा है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ का कहना है कि मौलाना साद ने जो स्पीच दी थी, उसके वीडियो के साथ तबलीगी जमात के ही किसी सदस्य ने छेड़खानी की है। मीडिया संस्थान ने उच्चस्तरीय स्रोत के हवाले से ऐसा दावा किया है। कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज़ के एक सदस्य के पास से एक लैपटॉप जब्त किया है, जिसमें से 350 ऑडियो क्लिप्स मिले हैं

ये सभी ऑडियो क्लिप्स तीन तरह के हैं। कुछ ऑरिजनल वीडियो हैं। कुछ उनका बदला हुआ रूप है जो जमातियों को भेजा जाता है। कुछ ऐसे हैं जिन्हें यूट्यूब पर अपलोड किया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर की मानें तो ऐसा कोई ऑडियो क्लिप नहीं मिला है, जिसमें मौलाना साद जमातियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने और इस्लाम में इस पर पाबंदी होने की बात कही है।

ख़बर की मानें तो दिल्ली पुलिस को लगता है कि कम से कम 20 ऑडियो क्लिप्स को साथ में मिला कर एक नया क्लिप तैयार किया गया, जो वायरल हुआ। इन सारे क्लिप्स को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। अगर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की लॉजिक के हिसाब से सोचें तो यूट्यब पर डाले गए मौलाना साद के सारे क्लिप्स एडिटेड और डॉक्टर्ड हैं। हालाँकि, ये कोई बहुत बड़ी तकनीक नहीं है।

अगर वीडियो एडिटेड था तो मौलाना ने पुलिस को बताया?

किसी भी ऑडियो या वीडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ कर उसे दूसरे रूप में पेश किया जा सकता है। लेकिन, मीडिया के इस ‘मौलाना साद को बचाओ’ मुहिम से ये नहीं साबित हो जाता कि मौलाना साद वायरल वीडियो में जो भी कह रहा है, वो सब कुछ एडिटेड है। हर वीडियो या ऑडियो को अपलोड करने से पहले एडिट किया जाता है और 350 ऑडियो क्लिप्स का मिलना यही बताता है कि मरकज़ में भी ये सामान्य प्रक्रिया थी।

मौलाना साद का ऑडियो क्लिप किसी अन्य यूट्यब चैनल पर नहीं बल्कि मरकज़ के आधिकारिक यूट्यब चैनल से रिलीज किया गया था। अब ये कैसे हो सकता है कि मौलाना साद के अंतर्गत काम करने वाला व्यक्ति ही उनके सारे वीडियो को उनके ही चैनल पर छेड़छाड़ कर अपलोड करे? असल में ये सब इसीलिए किया जा रहा है ताकि साद को निर्दोष साबित किया जा सके। ये दिखाया जा सके कि ऐसा उन्होंने नहीं कहा है।

मरकज़ के आधिकारिक चैनल पर अपलोड किया गया वो वीडियो अभी भी वहाँ मौजूद है। अगर उसमें कुछ ऐसी गड़बड़ी होती तो क्या मौलाना साद उसे देखने के बाद हटाने को नहीं कहता? मीडिया ये दिखाना चाहती है कि साद ने ऐसा कुछ नहीं कहा, उसके पीछे कुछ लोग पड़े हुए हैं जो उसे बदनाम करना चाहते हैं। कॉन्ग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला और तथाकथित पत्रकार तुफैल अहमद ने भी इस ख़बर को शेयर किया है।

तहसीन ने तो जमातियों के हरकतों की निंदा करने वालों से सार्वजनिक माफ़ी तक माँगने की अपील कर दी। यहाँ सवाल तो ये भी उठता है कि जब मौलाना साद ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था तो फिर वो भगा-भागा क्यों फिर रहा है? वो जाँच में सरकारी एजेंसियों का सहयोग क्यों नहीं कर रहा? मौलाना साद के विरुद्ध दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 (हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया था।

अगर मौलाना साद सही है तो भाग क्यों रहा है?

पुलिस की चेतावनी के बावजूद मरकज़ में महजबी कार्यक्रम होते रहे, भीड़ जुटती रही और एक समय तो क़रीब 2500 लोग इमारत में मौजूद थे। इनमें से कई ने विभिन्न राज्यों की यात्रा की, जहाँ मुस्लिम इलाक़ों में इन्हें खोजने गई पुलिस और जाँच हेतु गए पुलिसकर्मियों पर हमले हुए। मौलाना साद को सीपीसी के सेक्शन 91 के तहत कई बार नोटिस दी जा चुकी है। मौलाना साद से पुलिस ने कुछ आवश्यक दस्तावेज भी माँगे हैं।

मौलाना साद के बारे में पहले कहा गया था कि उसने कोरोना वायरस के आलोक में ख़ुद को क्वारंटाइन कर लिया है। अब ये बात सामने आई है कि वो जमातियों का समर्थन जुटा रहा है और अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए लोगों से सम्पर्क करने में लगा हुआ है। उसके किसी सघन मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में छिपे होने की आशंका है, ताकि वो गिरफ़्तारी से बच जाए। वो दिल्ली के आसपास ही किसी जमाती के घर में छिप कर बैठा है।

मौलाना साद एक बड़े वर्ग में प्रभाव रखने वाला मौलवी है, फिर भी वो शुरू से भाग क्यों रहा है? इसी से पता चलता है कि वो वीडियो फेक नहीं थे। उनके साथ छेड़छाड़ नहीं की गई थी। मौलाना साद अगर सही होता तो क्या वो पुलिस को उस जमाती के बारे में सूचना नहीं देता, जिसने कथित रूप से उसके वीडियो के साथ एडिटिंग की। इससे पता चलता है कि कोरोना जैसी महामारी फ़ैलाने वाले जमातियों के दाग धोने के लिए ये सब किया जा रहा है।

जब से जमातियों की हरकतों के बारे में सच्चाई सामने आई, तभी से लिबरल और सेक्युलर बुद्धिजीवियों का एक बड़ा वर्ग उसे बचाने में लगा हुआ है। कोई किसी मंदिर में भीड़ होने की कोई पुरानी तस्वीरें खोज कर लाता है तो कोई शराब ख़रीदने के लिए लगी लंबी लाइन की जमातियों से तुलना करता है। जबकि असलियत ये है कि भारत में जमातियों के कारण ही कोरोना के मामले बढ़े हैं। उन्होंने ही पूरे देश में ये महामारी फैलाई।

गूगल मैप ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में कुछ परिवर्तन किए हैं, जिससे चीन-पाकिस्तान को हो सकती है समस्या

IMD और DD न्यूज़ द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का हिस्सा घोषित करने के बाद अब गूगल भी इस जंग में उतर गया है। गूगल मैप (Google Map) ने पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) के साथ ही अक्साई चीन को स्पष्ट रूप से भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में मिला दिया है।

साथ ही, गूगल ने अपने नक्‍शे से लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) भी गायब कर दिए हैं। जम्मू और कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर सहित) का पूरा राज्य बिना LoC के उल्लेख के मानचित्र पर एक ही यूनिट के रूप में दिखाई दे रहा है।

पाकिस्तान सरकार द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने के फैसले के बाद भारत सरकार ने फ़ौरन आक्रामक रुख अपनाते हुए कुछ सख्त निर्देश दिए थे।

तभी से एक के बाद एक ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं, जो यह अप्रत्यक्ष संदेश देती नजर आ रही हैं कि केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही कुछ बड़ा कारनामा कर सकती है।

हालाँकि, गूगल मैप से भारत की सीमाओं को स्पष्ट करने पर अभी तक न ही गूगल और ना ही कोई आधिकारिक बयान आया है। लेकिन सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय बन गया है। ज्ञात हो कि इससे पहले गूगल मैप पर इन सीमाओं को बिन्दुओं द्वारा खिंची गई महीन रेखाओं से दर्शाया जाता था।

नई तस्वीरों में कश्‍मीर के तहत आने वाले उन तमाम हिस्‍सों को भारतीय सीमा में दिखाया जा रहा है, जिस पर पाकिस्‍तान ने कब्‍जा कर लिया था। इसमें पीओके समेत वह उत्तरी क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन्‍हें पाकिस्‍तान ने गिलगित-बाल्टिस्‍तान का नाम दिया है।

गूगल मैप के नए चित्र मीरपुर, मुजफ्फराबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के भीतर दर्शा रहा है।

लोग इसका अर्थ यह भी लगा रहे हैं कि यह 73 साल के लम्बे इन्तजार का अंत अब निकट है क्योंकि पाकिस्तानी कब्जे वाले सभी भारतीय क्षेत्र नए गूगल मानचित्रों के अनुसार भारतीय क्षेत्र में आ चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्‍तान ने वर्ष 1947 में आजादी के बाद हुए बँटवारे के फ़ौरन बाद उसी वर्ष अक्‍टूबर माह में भारत पर पहला हमला किया था। इस दौरान उसने आतंकवादियों की मदद से जम्‍मू कश्‍मीर के कई इलाकों पर अवैध कब्‍जा कर लिया था, जिन्‍हें इसके बाद से ही पाकिस्‍तान अधिकृत कश्मीर (POK) के नाम से जाना गया।

वहीं, गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र पाकिस्तान द्वारा कबायली विद्रोहियों के षड्यंत्र से कर्नल मिर्जा हसन खान द्वारा नवंबर 02, 1947 को गिलगित-बाल्टिस्तान को ‘आजाद’ घोषित किया गया था, जबकि महाराजा हरि सिंह ने इस इलाके को भारत में मिला लिया था।

वर्ष 2009 में पाकिस्‍तान की सरकार ने इसी ‘नॉर्दन एरियाज’ का नाम बदलकर गिलगित-बाल्टिस्‍तान कर दिया था।

अक्साई चीन भी गायब

गूगल मैप से भारत से लगी पाकिस्‍तान की सीमा ही नहीं बल्कि चीन से सटी एलएसी भी भारत की सीमाएँ दिखाई गई हैं। इसमें अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख क्षेत्र आते हैं। मौसम विभाग के बाद दूरदर्शन न्यूज़ ने बताया गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का हिस्सा

पिछले कुछ समय से भारत ने कुछ ऐसे काम किए हैं जिन्होंने पाकिस्तान समर्थकों को सरदर्द देने का काम किया है। गत शुक्रवार को भारत के मौसम विभाग, इंडियन मीटीऑरलाजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को भारत का हिस्सा बताते हुए इन जगहों के मौसम का हाल बताया था।

इसके बाद भारत सरकार के दूरदर्शन न्यूज़ में भी अब रोजाना पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर और नॉर्दन एरियाज (गिलगित-बाल्टिस्तान) के मौसम का हाल बताया जाएगा।

बदल रहा है गूगल का मिजाज

कल ही ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट में बताया था कि किस प्रकार से गूगल में सहधर्मी (Co-religionist) शब्द के अर्थ में हिन्दू घृणा से भरे हुए उदाहरणों को जगह दी जाती थी।

इस रिपोर्ट के व्यापक स्तर पर समर्थन के बाद आज गूगल ने इस उदाहरण को अपनी डिक्शनरी से हटा दिया है।

जफरुल इस्लाम के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की माँग: 20 मजहबी संगठनों के मौलवियों ने जारी किया संयुक्त बयान

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने शुक्रवार (मई 8, 2020) दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। जिस पर 12 मई को सुनवाई होगी। इस बीच शुक्रवार को ही प्रमुख मजहबी संगठनों ने जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की माँग की है।

जफरुल खान के समर्थन में 20 मौलवियों और नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज किए गए FIR की निंदा करते हुए कहा कि खान को उत्पीड़ितों के लिए बोलने के लिए ‘दंडित’ किया जा रहा है।

बता दें कि जफरुल ने ‘काफिरों’ को चेताते हुए कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुस्लिम एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।  इस विवादित पोस्ट के बाद जफरुल इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए के तहत FIR दर्ज किया गया

दिल्ली पुलिस को ‘पक्षपाती’ बताते हुए देश के विभिन्न हिस्सों के मौलवियों और मजहबी नेताओं ने आरोप लगाया कि खान के खिलाफ केस दर्ज कर ये समुदाय विशेष को ‘निशाना’ बनाने का एक और तरीका है।

20 मजहबी हस्तियों द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, “जफरुल इस्लाम के ट्वीट से असहमति हो सकती है। उन्होंने इस बारे में स्पष्टीकरण भी जारी किया था। मगर रिपोर्टों के अनुसार, इसके बावजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के उनके आवास पर पहुँचे और उन्हें अपने साथ ले जाने के लिए अड़े थे। लॉकडाउन के दौरान एक अर्ध-न्यायिक संस्था के प्रमुख के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई, वो भी इफ्तार से ठीक पहले, इस ओर इशारा करता है कि पुलिस किस हद तक गिर सकती है।”

मजहबी नेताओं ने कहा कि इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के दौरान जान-माल के भारी नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करने में विफल होने के बाद, दिल्ली पुलिस विभिन्न तरीकों से समुदाय विशेष को निशाना बना रही है।

बयान में आगे कहा गया है, “उन नापाक गतिविधियों, जहरीले भाषणों और संगठित हमलों को नजरअंदाज किया जाता है, जिसे पूरी दुनिया जानती है और शोषितों के लिए आवाज उठाने वालों को दंड दिया जाता है, पुलिस के हाथों सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों को निशाना बनाया जाता है। यह पूरे देश के लिए बेहद खतरनाक है। हम माँग करते हैं कि सरकार को डॉ जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ दर्ज FIR तुरंत वापस लेनी चाहिए और दिल्ली पुलिस को निर्दोष नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका जाना चाहिए।”

इस बयान पर दस्तखत करने वालों में जमीयत उलेमा ए हिंद के अरशद मदनी, बरेली की मिल्ली इत्तेहाद काउंसिल के तौकीर रज़ा खान, जमात ए इस्लामी हिंद के सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के सैयद कासिम रसूल इलियास, स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के लबेद शफी, ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के डॉ मंजूर आलम और मुस्लिम मजलिस ए मुशावत के नावेद हामिद आदि के नाम शामिल हैं।

बता दें कि जफरुल इस्लाम खान के घर पहुँची स्पेशल सेल की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद टीम बिना जाँच किए वापस लौट आई। पुलिस ने जफरुल इस्लाम खान से मोबाइल और लैपटॉप जमा करने को कहा है।

खान ने 6 मार्च को साइबर सेल को पत्र लिखकर अपनी असमर्थता का जिक्र किया। बीमारी और बुढ़ापे का हवाला देते हुए जफरुल ने कहा कि वह पूछताछ में सहयोग करने लिए पुलिस स्टेशन नहीं जा सकते। जफरुल इस्लाम ने यह भी कहा है कि वह अपने घर पर दिन के समय पूछताछ के लिए उपलब्ध हैं।

केरल के गुरुवायुर मंदिर का ₹5 करोड़ CM रिलीफ फंड में ट्रांसफर, कोरोना के नाम पर तमिलनाडु में भी मंदिरों से वसूली

केरल के मशहूर गुरुवायुर मंदिर (Guruvayur) को दान में मिले 5 करोड़ रुपए CM रिलीफ फंड में ट्रांसफर कर दिया गया है। इससे पहले कोरोना के बहाने तमिलनाडु सरकार ने भी मंदिरों से रिलीफ फंड में 10 करोड़ रुपए जमा करने को कहा था।

गुरुवायुर मंदिर के देवास्वोम बोर्ड ने पैसा रिलीफ फंड में ट्रांसफर किया है। केरल भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्रन ने इसके लिए पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली राज्य की वामपंथी सरकार की आलोचना की है।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु सरकार से लेकर वामपंथियों की सरकारों की निगाह मंदिरों में हिन्दुओ द्वारा मंदिर के कल्याण के लिए दान किए गए धन पर बनी हुई है। केरल सरकार द्वारा बनाए गए बोर्ड ने पैसे को फिक्स्ड डिपाजिट में जमा कर दिया था और अब उसी में से ₹5 करोड़ रुपए रिलीफ फंड में ट्रान्सफर कर दिए हैं।

मंदिरों में जमा धन की एक तरह से यह कोरोना के नाम पर वसूली है। हिंदुओं के मंदिरों से एक ओर जहाँ मनमानी वसूली की जा रही है, वहीं दूसरी ओर तुष्टिकरण के नाम पर रमजान में खुलकर मुफ्त राशन बाँटी जा रही है।

केरल सरकार ने एक बार फिर मंदिरों की स्वायत्तता और उनकी स्वतन्त्रता पर सवालिया निशान लगा दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोगों में इस कारण आक्रोश देखा जा सकता है।

केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने हिंदू मंदिरों से रिलीफ फंड में पैसा ट्रांसफर करने के लिए राज्य सरकार पर हमला किया और कहा कि देवास्वोम बोर्ड का कदम गलत है। उन्होंने कहा कि यह पैसा उन मंदिरों में भेजा जाना चाहिए जो दीपक जलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने केरल सरकार से यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री का फंड अन्य धार्मिक संस्थानों से पैसा क्यों नहीं ले रहा है। मंगलवार (मई 05, 2020) को गुरुवायुर देवास्वोम ने मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹5 करोड़ का योगदान दिया था।

जिला कलेक्टर एस शनवास को कोष सौंपने पर, गुरुवायुर देवास्वोम के अध्यक्ष केबी मोहनदास ने कहा कि निधि में योगदान देवास्वोम की सामाजिक जिम्मेदारी (सोशल रिस्पांसिबिलिटी) का एक हिस्सा था।

उन्होंने कहा, “गुरुवायुर देवास्वोम ने बाढ़ के बाद CMDRF को एक कोष दान किया था और देवास्वोम आयुक्त की अनुमति प्राप्त करने के बाद यह दिया गया था।” देवास्वोम ने बैंकों से फिक्स्ड डिपॉज़िट (सावधि जमा) से प्राप्त ब्याज राशि का उपयोग किया है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान मंदिर की आय में भारी कमी आई है। गुरुवायुर देवास्वोम के अध्यक्ष केबी मोहनदास ने कहा कि स्टाफ के वेतन भुगतान के लिए देवस्वाम अपनी फिक्स्ड डिपॉज़िट प्राप्त से ब्याज राशि के माध्यम से ही वेतन का प्रबंधन करेंगे।

इस बीच, बीजेपी नेता बी गोपालकृष्णन ने यह कहकर आपत्ति जताई थी कि देवास्वोम द्वारा मंदिर की आय से CM राहत कोष में योगदान कानूनी नहीं था।

उन्होंने कहा, “गुरुवायुर देवास्वोम अधिनियम की धारा 27 के अनुसार, मुख्य देवता, श्रीकृष्ण, एक नाबालिग और सभी संपत्ति और आय के मालिक हैं। यह कानून में अच्छी तरह से लिखा गया है कि इस आय और संपत्तियों का उपयोग केवल मंदिर के उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके अलावा, 2018 की बाढ़ के बाद CMDRF में गुरुवायूर देवास्वोम के योगदान को चुनौती देने वाले उच्च न्यायालय में पहले से ही एक मामला मौजूद है।”

गौरतलब है कि तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR and CE) विभाग ने गत 22 अप्रैल को एक विवादास्पद आदेश जारी किया था, जिसमें हिंदू मंदिरों को राज्य के मुख्यमंत्री कोरोना वायरस रिलीफ फंड में ₹10 करोड़ हस्तांतरित करने के लिए कहा गया था।

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) सरकार ने 47 मंदिरों को सीएम राहत कोष के लिए ₹10 करोड़ की धनराशि देने का निर्देश दिया था।

तमिलनाडु सरकार हिंदुओं के मंदिरों से हंडी संग्रह, प्रसाद, विभिन्न दर्शन टिकट, विशेष कार्यक्रम शुल्क, आदि के माध्यम से प्रतिवर्ष 3000 करोड़ रुपए से अधिक वसूल करती है, जबकि केवल 4-6 करोड़ रुपए रखरखाव के लिए दिए जाते हैं। बाकी 2,995 करोड़ रुपए सरकार के पास रहते हैं।

AAP की प्रीति मेनन: गालीबाज, झूठी और हिंदू विरोधी ट्वीटों की सरताज

प्रीति शर्मा मेनन आम आदमी पार्टी (AAP) की नेशनल एक्जीक्यूटिव मेंबर है। ऐसा लगता है कि हिंदू विरोधी और मोदी सरकार को लेकर झूठे दावे करने वाले ट्वीट का उन्होंने ठेका ले रखा है।

औरंगाबाद में रेलवे ट्रैक पर सोए मजदूर मालगाड़ी की चपेट में आ गए थे। इस घटना के बाद प्रीति मेनन ने रेल मंत्री को निशाना बनाते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “प्रवासी अभी भी पैदल क्यों चल रहे? क्या पीयूष गोयल के पास उनके लिए ट्रेन चलाने के लिए नहीं है?”

अश्लील और भद्दे ट्वीट्स प्रीति शर्मा मेनन की पहचान बन चुके हैं। पहले भी वह प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ काफ़ी अनर्गल बातें लिख चुकी हैं। हिंदुओं का मजाक उड़ाने और जानबूझकर उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना उनकी आदत है।

प्रीति शर्मा मेनन ने यह भी दावा कर चुकी हैं कि भारत सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण और निवेश के लिए शहजादी लतीफा का ‘सौदा’ किया था। उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार अब महिलाओं का सौदा कर रही है।

एक अन्य ट्वीट में, प्रीति मेनन ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का मजाक उड़ाया और अपमानजनक रूप से हिंदू साधुओं की मंडली को ‘न्यू इंडिया’ के मुख्यमंत्रियों के रूप में संदर्भित किया। उनके इशारा योगी आदित्यनाथ की ओर था जो गोरखनाथ मठ के महंत के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं।

प्रीति मेनन ने खाकी हाफ पैंट का भी मजाक उड़ाया था, जिसे आरएसएस के कार्यकर्ता पहनते हैं।

प्रीति शर्मा मेनन ने ट्विटर पर कई बार प्रधानमंत्री मोदी और स्मृति ईरानी पर भी हमला किया है।

आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रीति शर्मा मेनन स्मृति ईरानी से काफ़ी नफ़रत करती है और वो चाह कर भी अपनी इस नफ़रत को छुपा नहीं पाती।

दिन प्रतिदिन प्राधानमंत्री के लिए भी उनकी नफ़रत और बढ़ती ही चली जा रही है।

इन सबके अलावा, प्रीति मेनन ने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी करने वाले लोगों का भी बचाव किया है।

जैसा कि उपरोक्त ट्वीट्स से देखा जा सकता है कि किस तरह प्रीति मेनन का भाजपा के साथ जुड़े नेताओं के खिलाफ मूर्खतापूर्ण, घिनौने और अशोभनीय टिप्पणी करने का इतिहास रहा है। वह सोशल मीडिया पर बेहद हिंदूफोबिक टिप्पणियॉं करने के लिए भी जानी जाती हैं। बावजूद इसके ‘हनुमान भक्त’ अरविंद केजरीवाल ने कभी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की और वह AAP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बनी हुई हैं।

बंगाल के मजदूरों को घर नहीं लौटने दे रही ममता सरकार, अमित शाह ने पत्र लिखकर जताई नाराजगी

ममता बनर्जी की सरकार लॉकडाउन में अन्य राज्यों में फॅंसे पश्चिम बंगाल के मजदूरों की घर वापसी में अड़ंगा डाल रही है। इस पर नाखुशी जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पत्र लिखा है।

प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य भेजने के लिए कई प्रदेशों से विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया है। लेकिन, बंगाल सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।

इसे लेकर शनिवार को शाह ने ममता बनर्जी को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा, “मुझे दुख है कि बंगाल सरकार से हमें राज्य के प्रवासी श्रमिकों को वापस भेजने में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।”

अमित शाह ने पत्र में लिखा, “केंद्र सरकार द्वारा अभी तक रेलगाड़ियों के माध्‍यम से दो लाख से ज्‍यादा प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्‍यों में पहुँचाया जा चुका है। बाकी राज्‍यों की तरह पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिक भी अपने गृह राज्‍य जाने के लिए व्‍या‍कुल हैं और उनके जाने की व्‍यवस्‍था भी केंद्र सरकार द्वारा की गई है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में केंद्र को बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही है।”

उन्होंने लिखा है कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों को दूसरे राज्‍यों से लेकर बंगाल पहुँचाने वाली श्रमिक रेलगाड़ियों को राज्‍य सरकार द्वारा अनुमति नहीं प्रदान की जा रही है। ऐसा करना पश्चिम बंगाल के श्रमिकों के साथ अन्‍याय है। यह पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों को कठिन परिस्थिति में धकेल सकता है। राज्य सरकार उन्हें आने की अनुमति दे।

बता दें कि इससे पहले राज्य में लॉकडाउन के उल्लंघन को लेकर भी गृह मंत्रालय की तरफ से पत्र लिखा गया था। राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को लिखे गए इस पत्र में लॉकडाउन का पालन नहीं होने पर सख्त आपत्ति जताई गई थी।

पश्चिम बंगाल में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हर दिन बड़ी संख्या में कोरोना के नए मामले सामने आने के साथ कंटेनमेंट जोन की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार तक पूरे बंगाल में कुल कंटेनमेंट जोन की संख्या 516 थी जो शुक्रवार को बढ़कर 561 हो गई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आँकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में अब तक कोरोना पीड़ितों की संख्या 1678 हो गई है, जिनमें 160 की मौत हुई है जबकि 364 लोग ठीक हो चुके हैं। राज्य में पिछले कुछ दिनों में कोरोना की जाँच की रफ्तार भी बढ़ी है। अब हर दिन 2500 से 3000 सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं। जिसके बाद बड़ी संख्या में नए मामलों का भी पता चल रहा है।