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पंजाब: शराब ठेकों की नीलामी पर बॅंटे कॉन्ग्रेसी मंत्री, मीटिंग में हंगामा, बैठक छोड़ निकल गए वित्त मंत्री

पंजाब में शराब ठेकों को नीलामी और आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) पर चर्चा करने के लिए शनिवार (मई 9, 2020) को बुलाई गई प्री-कैबिनेट की मीटिंग में मंत्रियों और अफसरों के बीच जमकर विवाद और हंगामा हुआ।

हंगामे से नाराज होकर वित्तमंत्री मनप्रीत बादल और तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी मीटिंग का बहिष्कार कर चले गए। इस कारण कैबिनेट की बैठक नहीं हो सकी और आबकारी नीति पर फैसला नहीं हो सका।

कॉन्ग्रेस नेता विवाद पर बँट गए हैं। लुधियाना से कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्‍य सचिव का पक्ष लिया है और मंत्रियों से इस्‍तीफा देने तक को कह दिया। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस के वरिष्‍ठ विधायक अमरिंदर सिंह वडिंग ने मुख्‍य सचिव पर निशाना साधा है। मंत्रियों ने आगे मुख्‍य सचिव के साथ बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।

इस हंगामे के बाद कई मंत्री नाराज हैं। उन्होंने साफ कह दिया है कि वे अगली बैठक चीफ सेक्रेटरी के साथ नहीं करेंगे। मंत्रियों ने कहा है कि वे अब सिर्फ मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के साथ ही चर्चा करेंगे। अगली बैठक सोमवार (मई 11, 2020) को प्रस्तावित है।

दरअसल, पंजाब के कर एवं आबकारी विभाग ने लॉकडाउन के बाद नए सिरे से खोलने के लिए ठेकों को नीलाम करने की पॉलिसी तैयार की थी। इसमें तीन विकल्प दिए गए थे। चरनजीत सिंह चन्नी ने कुछ सुझाव दिए, जिसे मुख्य सचिव ने खारिज कर दिया। मंत्री इस बात से नाराज थे कि जब विभाग ने फैसला ही कर लिया है तो मंत्रियों को बताने की जरूरत क्या है?

मंत्रियों के ऐतराज पर चीफ सेक्रेटरी करण अवतार सिंह भी गुस्से में ही बोले तो मनप्रीत बादल यह कहते हुए मीटिंग छोड़कर चले गए कि ऐसी मीटिंग का क्या फायदा है? उनके पीछे-पीछे तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी भी चले गए।

रवनीत सिंह बिट्टू ने चीफ सेक्रेटरी का पक्ष लेते हुए ट्वीट किया, “मंत्रियों का चीफ सेक्रेटरी के साथ बहस कर प्री कैबिनेट की बैठक छोड़ कर जाना इस तरह है जैसे कोई जज एडवोकेट से बहस कर कोर्ट रूम से चला जाए। अगर उनकी नजर में नौकरशाही अक्षम है तो उन्हेें अधिकारियों की जगह लेनी चाहिए थी और बाहर नहीं जाना चाहिए था।”

बिट्टू ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “कोरोना जैसी महामारी के दौरान मंत्रियों और नौकरशाहों के बीच समन्वय मजबूत होना चाहिए, लेकिन प्री-कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक से बाहर जाने वाले मंत्रियों को अपने व्यवहार के लिए इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि कई अन्य लोग दबाव में काम करने के लिए सक्षम हैं और उनकी जगह लेने के लिए तैयार हैं।”

वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मुख्‍य सचिव करण अवतार सिंह को आड़े हाथ लिया है। मुख्‍य सचिव पर निशाना साधते हुए वडिंग ने कहा कि उनका व्यवहार उचित नहीं है। उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए।

गौरतलब है कि पहले भी कई बार पंजाब सरकार के मंत्रियों और अफसरों के बीच वैचारिक मतभेद के कारण बैठकों में हंगामा हो चुका है। लेकिन इस बार वित्तमंत्री की नाराजगी पहले से कुछ ज्यादा थी। मंत्री की नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दो बजे बुलाई गई कैबिनेट की मीटिंग स्थगित करनी पड़ी।

कोरोना वायरस के कारण जब देश में लॉकडाउन लगा तो पंजाब पहला राज्य था, जिसने शराब की बिक्री में छूट की माँग की थी। अब इसी शराब को बेचने के लिए लेकर सरकार नई नीति बनाना चाह रही है। पंजाब शराब की बिक्री से सालाना 6,500 करोड़ रुपए का राजस्व कमाता है।

12 मई तक जमा करें मोबाइल-लैपटॉप: जफरुल इस्लाम को दिल्ली पुलिस का नोटिस, अरब का दिखाया था धौंस

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम को 12 मई तक मोबाइल और वह लैपटॉप जमा कराना होगा जिससे उन्होंने विवादित पोस्ट सोशल मीडिया में की थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी किया है।

इसी दिन दिल्ली हाई कोर्ट में इस्लाम की याचिका पर सुनवाई होनी है। देशद्रोह मामले में अग्रिम जमानत के लिए उन्होंने याचिका दायर कर रखी है।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदुओं को अरब का धौंस दिखाने के बाद से इस्लाम विवादों में हैं। शुक्रवार को कई मुस्लिम संगठनों और मौलवियों ने उनके समर्थन में बयान जारी किया था। देशद्रोह के मामले में दर्ज FIR रद्द करने की मॉंग करते हुए कहा था कि उन्हें उत्पीड़ितों के पक्ष में बोलने के लिए ‘दंडित’ किया जा रहा है।

30 अप्रैल को जफरुल इस्लाम को देशद्रोह (आईपीसी धारा 124 ए) और धार्मिक हिंसा (आईपीसी धारा 153 ए) को बढ़ावा देने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया था।

उम्र का हवाला देते हुए इस्लाम पुलिस जॉंच में शामिल होने से असमर्थता जता चुके हैं। 06 मई 2020 को पुलिस को पत्र लिख कर उन्होंने कहा था कि वे पुलिस स्टेशन नहीं आ सकते। पुलिस चाहे तो उनके घर पर उनसे पूछताछ कर सकती है।

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुस्लिम एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं। 

माफ़ी माँगने से इनकार

जफरुल इस्लाम ने पोस्ट पर कहा था कि, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं। 1 मई 2020 को अपने बयान में मैंने कहा था कि मैं अभी भी अपने विचार के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा हूँ और मेरे द्वारा किए गए टिप्पणियों में कुछ भी गलत नहीं कहा गया है।”

मालदीव से केरल लौटी गर्भवती महिला ने भारतीय नौसेना से कहा- Thank You

मालदीव में फँसे भारतीयों को लेकर नौसेना का जहाज जलाश्व रविवार (अप्रैल 10, 2020) को सुबह माले से कोच्चि बंदरगाह पहुँचा। इसके साथ ही कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के दौरान विदेशी सरजमीं से भारतीयों को निकालने का भारतीय नौसेना का पहला बड़ा अभियान पूरा हो गया।

बता दें कि नौसेना ने विदेश में फँसे लोगों को लाने के लिए समुद्र सेतु नाम से अभियान चलाया है। इस जहाज से 19 गर्भवती महिलाओं समेत 698 भारतीय यात्रियों को स्वदेश लाया गया। जहाज पर दवाओं के साथ अन्य चिकित्सा सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे।

जहाज में सवार एक गर्भवती महिला ने इसके लिए भारतीय नौसेना का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विमान में खाना, दवाई, सैनिटाइजर, मेडिकल सुविधाएँ जैसी हर की सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आप मालदीव में हैं और किसी तरह की मुश्किल में हैं या प्रेगनेंट हैं, तो वो शिप में वापस आ सकती हैं। यहाँ पर उनका काफी अच्छे से ख्याल रखा जाता है। महिला ने इसके लिए खास तौर पर भारतीय नौसेना को धन्यवाद दिया।

ऑपरेशन के पहले चरण के तहत नौसेना के दो बड़े युद्धपोत माले पहुँचे थे। उनमें से आईएनएस जलाश्व 698 भारतीयों को लेकर शुक्रवार (मई 8, 2020) को केरल के कोच्चि के लिए रवाना हुआ था। भारतीय नौसेना ने आईएनएस जलाश्व और आईएनएस मगर की मदद से मालदीव में रह रहे करीब 1800 से 2000 लोगों को स्वदेश वापस लाने की योजना बनाई है।

इसके लिए नौसेना के जहाजों को चार बार चक्कर लगाने होंगे। इसमें दो चक्कर कोच्चि के लिए और दो चक्कर तूतीकोरिन के लिए होंगे। स्वदेश वापसी में जबसे ज्यादा प्राथमिकता जरूरतमंद लोगों को ही दी जा रही है। इनमें बच्चे, बूढ़े, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएँ शामिल हैं।

नौसेना के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी फैलने के कारण भारत सरकार विदेशों में फँसे भारतीयों को वापस लाना चाहती है। इसके लिए सरकार ने नौसेना को जरूरी इंतजाम करने का निर्देश दिए थे।

विदेश से लाए गए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के लिए सभी बंदोबस्त कर लिए गए हैं। इनमें केरल के 440 लोग और बाकी देश के अन्य हिस्सों के लोग हैं। आईएनएस जलाश्व से आए लोगों में दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के नागरिक भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार विदेश से लौटने वालों को एक सप्ताह के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। इसके बाद एक सप्ताह उन्हें अपने घर में आइसोलेशन में रहना होगा। किसी में कोरोना के लक्षण मिलने पर उसे फौरन कोरोना का इलाज करने वाले अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।

सिक्किम: नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई

सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई। दोनों तरफ के सैनिकों को मामूली चोटें आने और मामला सुलझा लिए जाने की खबरें आ रही है।

भारतीय सेना के सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया ​है कि सीमा विवाद के कारण छोटे-मोटे विवाद अक्सर होते रहते हैं। प्रोटोकॉल के मुताबिक दोनों सेना ऐसे मसलों को सुलझा लेती है। हालॉंकि सूत्रों के अनुसार अरसे बाद इस तरह के हालात पैदा हुए थे।

रिपोर्टों के अनुसार, चीनी सेनाओं द्वारा आक्रामक टकराव नाकु ला सेक्टर के पास हुआ। यह समुद्र तल से करीब 5000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के अनुसार 4 भारतीय सैनिकों और 7 चीनी सैनिकों को टकराव के दौरान मामूली चोटें आईं। झड़प में लगभग 150 सैनिक शामिल थे। हालांकि, स्थानीय स्तर पर वरिष्ठकर्मियों के बीच बातचीत के बाद मामला निपट गया।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे हाल ही में ईस्टर्न सेक्टर के दौरे पर गए थे। उनके इस दौरे के कुछ ही दिनों बाद भारत और चीन की सेनाएँ सीमा पर आमने-सामने आ गईं। सेना प्रमुख ने सुकना, बिन्नागुरी, पनागर सहित ईस्टर भारत में विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया था और वहाँ पर तैनात सैनिकों के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत कर सीमाओं की स्थिति का जायजा लिया था।

गौरतलब है कि इससे भारत-चीन के बीच 2017 में सिक्किम में सैन्य टकराव देखने को मिला था। उस समय शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भी कई दिनों तक यहॉं कैंपिंग करनी पड़ी थी। उस समय चीनी सैनिकों को सड़क निर्माण से रोके जाने के बाद टकराव हुआ था।

‘नो मुस्लिम स्टाफ’: चेन्नई में जैन बेकरी के मालिक गिरफ्तार, समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करने का आरोप

जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी के मालिक प्रशांत को चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन्होंने विज्ञापन में ‘नो मुस्लिम स्टाफ’ लिखवाया ​था। इससे एक धार्मिक समुदाय की भावनाओं को आहत करने का उन पर आरोप है।

चेन्नई के टी नगर से 27 वर्षीय प्रशांत को ‘धार्मिक भेदभाव’ वाले विज्ञापन छपवाने को लेकर शुक्रवार को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने व्हाट्सएप पर सर्कुलेट किए गए विज्ञापन से समुदाय विशेष को खुलेआम ‘बदनाम’ किया।

दरअसल, बेकरी मालिक ने अपने प्रोडक्ट को लेकर एक विज्ञापन छपवाया था। विज्ञापन में अन्य जानकारियों के साथ लिखा था “Made by Jains on orders, no Muslim staffs”। यानी ऑर्डर पर सामान जैनी तैयार करते हैं, यहॉं कोई मुस्लिम काम नहीं करता। व्हाट्सएप पर इस विज्ञापन के वायरल होने के बाद पुलिस ने बेकरी के मालिक प्रशांत को गिरफ्तार किया।

‘धार्मिक भेदभाव’ वाले विज्ञापन छपवाने को लेकर अब बेकरी मालिक के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 153, 153A, 505 और 295A के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी तरह का एक मामला झारखंड के जमशेदपुर से सामने आया था। पुलिस ने कुछ ऐसे फल दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिन्होंने ‘विश्व हिंदू परिषद द्वारा अनुमोदित फल दुकान’ के बैनर लगाए थे।

जमशेदपुर पुलिस का कहना था कि दुकानदारों पर ‘हिंदू’ शब्द लिखने के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, क्योंकि यह सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की एक कोशिश है। इसी तरह बिहार के नालंदा में भी सब्जियों की दुकान पर भगवा झंडा लगाने को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

हैरानी की बात है कि मुस्लिम लोग अपनी दुकान पर खुलेआम ‘मुस्लिम होटल’, ‘हलाल मीट शॉप’ लिख सकते हैं, तो फिर हिंदू क्यों नहीं? इतना ही नहीं, इनकी सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक यह भी है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, गैर-मुस्लिम, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ मुस्लिम ही कर सकता है।

जब हलाल के काम में गैर मुस्लिमों को रोजगार नहीं मिल सकता है, वो खुले तौर पर लिखते हैं कि इसे कोई गैर मुस्लिम तैयार नहीं करता, तो फिर अगर जैन बेकरी वालों ने लिख दिया कि यहाँ पर सिर्फ जैन लोग ही ऑर्डर तैयार करते हैं, तो फिर इसमें गलत क्या है?

पाकिस्तान के एटम बम को बचाने के लिए जावेद मियाँदाद माँग रहे भीख, दोनों हाथ उठा के – Video Viral

पाकिस्तान के एक पूर्व क्रिकेटर हैं। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के रिश्तेदार भी हैं वो। नाम है जावेद मियाँदाद। अभी नया-नया काम सीखा है – भीख माँगने का।

जी नहीं, यह मैं उनका मजाक उड़ाने के लिए नहीं कह रहा। उन्होंने खुद वीडियो बनाकर भीख माँगी है, दोनों हाथ उठाकर। भीख माँगने का उनका स्टाइल शानदार है। इसके लिए वो एक नया बैंक अकाउंट खोलने जा रहे हैं।

जावेद मियाँदाद नाम का यह आदमी दिल का साफ है। भीख तो माँग रहा है लेकिन अपने कंगाल देश पाकिस्तान के लिए। पाकिस्तान का कर्ज चुकाने के लिए। मियाँदाद ने भीख माँगने वाला वीडियो ट्विटर पर अपलोड किया है। इस वीडियो में बड़े विस्तार से वो अपना प्लान बता रहे हैं।

वीडियो में जावेद मियाँदाद ने बड़ा दिल दिखाया है। हर पाकिस्तानी से अपील की है। फिर चाहे वो विदेश में रहते हों या भ्रष्ट हों और पाकिस्तान को लूटते आए हों। मियाँदाद ने सबसे अपील की है। उन्होंने यह भी बता दिया है कि वो फलाने बैंक (नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान) में खाता खोलेंगे।

इसके बाद जावेद मियाँदाद ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनका खाता ‘इंटरनेशलन बैंक अकाउंट’ होगा। और यह उनका पर्सनल अकाउंट होगा। उनके सिवा कोई दूसरा इस अकाउंट में नहीं घुस पाएगा। क्यों? क्योंकि इस खाते में जमा सभी पैसे से वो अपने कंगाल देश पाकिस्तान का कर्ज अदा करेंगे।

मियाँदाद लालची नहीं हैं। व्यवहार में लचीले भी हैं। पैसा माँगने में भी ऑप्शन देते हैं – एक बार में दे सके तो ठीक, वरना हर महीने भी भेजते रहो। तब तक भेजते रहो, जब तक पाकिस्तान का कर्ज न चुक जाए। मियाँदाद तकनीक के भी विद्वान हैं। ट्विटर पर वीडियो अपलोड करने के साथ हैशटैग के रूप में #LoanFreePakistan का इस्तेमाल किया।

वीडियो का सबसे मार्मिक हिस्सा तब आता है, जब जावेद मियाँदाद कर्ज चुकाने के पीछे की वजह बताते हैं। उनका कहना है कि अब अगर पाकिस्तान कर्ज लेना चाहेगा तो IMF उनसे परमाणु बम ‘छीन’ लेगा, जो पाकिस्तान के लिए बेशकीमती है।

मियाँदाद ने अंत में कहा कि वह ‘भीख’ माँग रहे हैं ताकि पाकिस्तान के माथे पर से कर्ज उतार सकें। मियाँदाद के इस भीख माँगते मार्मिक वीडियो से कुछ याद आया? गूगल में अगर आप भिखारी टाइप करेंगे तो वो आपको पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की फोटो दिखाता है। गूगल की ऐसी किसी भी नीति का ऑपइंडिया समर्थन नहीं करता है।

दीपक चौरसिया को मिल रही धमकी और गाली, दर्ज कराई FIR: पालघर साधु लिंचिंग पर आवाज उठाने की ‘सजा’

‘न्यूज़ नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया को पालघर पर सच्चाई सामने लाने के कारण लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पत्रकारिता में आए 30 साल हो गए लेकिन उन्हें अब तक कभी ऐसी धमकियाँ नहीं मिली हैं। पत्रकार दीपक चौरसिया ने बताया कि उन्होंने इन धमकियों को लेकर एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई है।

दीपक चौरसिया ने आशंका जताई है कि पालघर मुद्दे पर आवाज़ उठाने के लिए उनके विरुद्ध ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने उन धमकियों के स्क्रीन शॉट्स भी शेयर किए। ट्विटर पर ये सब शेयर करते हुए दीपक ने लिखा कि वो न तो इन सबसे डरने वाले हैं और न ही रुकने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जब तक उनके भीतर साँस है, तब तक वो इन मुद्दों पर आवाज़ उठाते रहेंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर थाने में FIR दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें फोन पर लगातर धमकियाँ मिल रही हैं और इनमें से अधिकतर नम्बर महाराष्ट्र के हैं।

चौरसिया ने कहा कि पालघर की वीभत्स घटना पर उन्होंने कई शो किए हैं, इसीलिए उन्हें परेशान किया जा रहा है। व्हाट्सएप्प पर उन्हें अभद्र और आपत्तिजनक भाषा में धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘न्यूज़ नेशन’ चैनल लगातार सच्चाई सामने ला रहा है, इसीलिए उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने बताया कि उन्हें पत्रकारिता का धर्म निभाने और समाज के लिए उनके दायित्वों की पूर्ति करने से दूर करने के लिए ये सब किया जा रहा है।

दीपक चौरसिया ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि जब से उन्होंने ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ ट्वीट किया है, तब से उन्हें मिलने वाली धमकियों की संख्या बढ़ गई है।

बता दें कि पालघर साधुओं की हत्या के बाद पुलिस ने कई घंटों तक शवों की सुध नहीं ली थी। शव उस रात करीब 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़े रहे। ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस बात का खुलासा पालघर मामले में चश्मदीद फॉरेस्ट गार्ड का हवाला देकर किया था।

उन्होंने दावा किया था, “पालघर संतों की क्रूर और निर्मम हत्या के बाद उनकी देह 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़ी रही। दरअसल पुलिस वाले हत्या के बाद भाग खड़े हुए थे। रात भर ड्राइवर और दो संतों की हत्या के बाद भी पुलिस ने सुध नहीं ली।”

लाउडस्पीकर बजता देख कट्टरपंथियों ने मंदिर पर किया हमला: रुड़की से शमशेर, अरशद सहित 5 गिरफ्तार

रविदास मंदिर में लाउडस्पीकर बज रहा था। लोग भजन-कीर्तन सुन रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के लोगों ने धावा बोल दिया। उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी। हिन्दुओं पर हमला कर के दो को जख्मी कर दिया। उत्तराखंड के रुड़की में हुई ये घटना शुक्रवार (मई 8, 2020) सुबह की है।

रुड़की के मंदिर में लाउडस्पीकर ज्यादा जोर से भी नहीं बज रहा था। फिर भी समुदाय विशेष के लोग वहाँ पहुँच गए और उन्होंने इसका विरोध किया। फिर वो बहस करने लगे। इसके बाद हिन्दू समाज ने भी उनका विरोध किया। विवाद इतना बढ़ गया कि मजहब विशेष के कई और लोग भी वहाँ पर इकट्ठे हो गए और उन्होंने मारपीट शुरू कर दी।

हिन्दू समाज के लोगों को भी जब इस बात का पता चला तो उन्होंने वहाँ जुटान शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों की ओर से लगातार पत्थरबाजी हो रही थी। हमला के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की भी जम कर धज्जियाँ उड़ी। शोर और हंगामे को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस को वहाँ शांति बहाल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मंदिर परिसर में कट्टरपन्थियों की पत्थरबाजी के कारण भारी मात्रा में पत्थर जमा हो गए। पुलिस को किसी तरह लाठीचार्ज कर के मामले को संभालना पड़ा। इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी।

इस पथराव में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें हायर सेंटर रेफेर किया गया है। दोनों घायलों के नाम सोनू और जितेंद्र हैं। गाँव में पुलिस बल की तैनाती के कारण स्थिति सामान्य बनी हुई है।

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करने के बाद अबुजर, मुशीर, शमशेर, अरशद और आकिल को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुल 20 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया था, जिनकी धर-पकड़ शुक्रवार की रात से ही शुरू कर दी गई थी।

आरोप है कि कट्टरपंथियों ने मंदिर का ताला भी तोड़ दिया था। गाँव में पहले से भी सांप्रदायिक तनाव का माहौल बनता रहा है। इस घटना के दो दिन पहले क्रिकेट खेलने को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट हो गई थी। गाँव के प्रबुद्ध जनों ने उस समय मामला शांत करा दिया था। इसके बाद दूसरे पक्ष ने लाउडस्पीकर को नया विवाद का जरिया बनाया। पुलिस ने लोगों को लॉकडाउन का उल्लंघन न करने की चेतावनी दी है।

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों पर हमले होने आम बात हैं लेकिन हाल के दिनों में भारत के विभिन्न हिस्सों में पर्व-त्योहारों के दौरान मंदिरों पर हमले की ख़बरें बढ़ गई हैं।

रेल पटरी पर इंटरव्यू ले रहे NDTV पत्रकार को रोका तो रवीश ने कहा- पुलिस पत्रकारिता सिखा रही

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में शुक्रवार (मई 8, 2020) को दिल दहला देने वाली घटना हुई। पटरी पर सो रहे 16 मजदूर एक ट्रेन के नीचे आ गए और उनकी मृत्यु हो गई। सभी टीवी चैनलों की तरह NDTV ने भी इस ख़बर को दिखाया और इसे सरकार की विफलता बताते हुए जनता के सामने पेश किया। रवीश कुमार ने अपने शो ‘देस की बात’ में इस घटना को कवर किया।

16 मौतों के बाद घटनास्थल पर पुलिस तैनात है और मीडिया का आना-जाना लगा हुआ है। ऐसे में पुलिस को वहाँ जुट रही भीड़ को मैनेज करना पड़ रहा है और उन्हें बार-बार पटरी से हटाना पड़ रहा है। इस दौरान पटरी पर से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे एक पत्रकार को भी पुलिस ने वहाँ से जाने को कहा। पुलिस ने आरोप लगाया कि मीडिया जनता से सच्चाई छिपा रही है। इससे बौखलाए NDTV के रवीश कुमार ने कहा कि अब तो पुलिस भी पत्रकारों को पत्रकारिता सिखा रही है।

दरअसल, वो रिपोर्टर पटरी के पास जाकर कुछ मजदूरों से बात कर रहे थे, तब महाराष्ट्र पुलिस ने वहाँ पहुँच कर उन्हें जाने को कहा। तब रिपोर्टर ने आनकानी करते हुए पुलिस से कहा कि वो उनकी बात समझ रहे हैं लेकिन पटरी पर चल रहे मजदूरों की भी तो हकीकत दिखानी पड़ेगी। जब पुलिस ने कहा कि वो ग़लत जगह पर इंटरव्यू ले रहे हैं तो पत्रकार ने कहा कि लोग ही ग़लत जगह पर चल रहे हैं।

पुलिस ने उच्चाधिकारियों के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें लोगों को पटरी पर से हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस को कहा गया था कि पटरी पर चल रहे लोगों को वापस घर भेजा जाए। पत्रकार पुलिस से पूछ रहे था कि क्या इन लोगों को खाना-पीना मिल रहा है। हालाँकि, पुलिसकर्मियों ने कहा कि उन्हें इस सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं है। पुलिस ने पत्रकार को अपना कैमरा बंद कर के वहाँ से जाने की सलाह दी।

जब पत्रकार ने बताया कि वो लाइव शो कर रहे हैं तो पुलिस ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा खंभा होने के बावजूद लोगों को बरगला रहा है। आप सच्चाई नहीं दिखा रहे हो। इसी बात से गुस्साए रवीश कुमार ने कहा कि अभी इसी जगह से 4000 लोग गए हैं और अभी ही ये पुलिस वाला कह रहा है कि ये इंटरव्यू लेने के लिए गलत जगह है।

कॉन्ग्रेस ने ही खड़ी की CM उद्धव के लिए मुश्किल: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में उतारे 2 प्रत्याशी

महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव होने हैं। उद्धव ठाकरे के भविष्य के लिए और उनके मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उनका विधानमंडल में चुना जाना बेहद ज़रूरी है। पहले कहा जा रहा था कि शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे विधानसभा का चुनाव लड़ कर जनता द्वारा चुने जाने के बाद विधायक बनना चाहते हैं लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। अब जब विधान परिषद का चुनाव होना है तो उनके ही गठबंधन साथी कॉन्ग्रेस उनके लिए मुश्किल खड़ी कर रही है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव कोरोना वायरस संक्रमण आपदा की वजह से होना संभव नहीं है, इसीलिए उद्धव को पहले राज्यपाल द्वारा नामित करने के लिए सिफारिश की गई। जब राज्यपाल अड़ गए तो चुनाव आयोग से विधान परिषद के चुनाव की घोषणा करने की अपील की गई। इसके लिए कॉन्ग्रेस और शिवसेना, दोनों ने ही दो-दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

भारतीय जनता पार्टी ने विधान परिषद चुनाव के लिए प्रवीण ददके, गोपीचंद पडलकर, अजित गोपछड़े और रणजीत सिंह पाटिल को बतौर प्रत्याशी मैदान में उतारा है। एनसीपी ने अब तक अपना पत्ता साफ़ नहीं किया है लेकिन अगर वो भी अपने प्रत्याशी उतारती है तो 9 विधान परिषद सीटों के लिए कुल 10 उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकेंगे। इससे उद्धव का निर्विरोध चुने जाने का सपना टूट सकता है।

नियमानुसार, अगर कोई व्यक्ति विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है और उसे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है तो उसे अगले 6 महीने के भीतर विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना पड़ेगा। चूँकि, एमएलसी का चुनाव गुप्त-मतदान के जरिए होता है, इसलिए ऐसे चुनावों में क्रॉस-वोटिंग होते आए हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस या एनसीपी में से किसी एक को मात्र एक सीट पर लड़ना पड़ेगा, तब क्रॉस-वोटिंग का ख़तरा कम होगा।

महाराष्ट्र के कुल 288 सदस्यीय विधानसभा में उद्धव के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन महाविकास अघाडी को 170 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिनमें शिवसेना के 56 विधायक, एनसीपी के 54 विधायक, कांग्रेस के 44 विधायक और अन्य 16 विधायक शामिल हैं। भाजपा 105 सीटों के साथ सदन की सबसे बड़ी पार्टी है। विधान परिषद में चुने जाने के लिए प्रथम वरीयता के आधार पर 29 सीटों की आवश्यकता है।

सत्ताधारी गठबंधन 5 सीटें आराम से जीत सकती है, वहीं विपक्ष में बैठी भाजपा भी 3 सीटों पर सेफ है। भाजपा की चौथी और शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस गठबंधन की छठी सीट के लिए काफ़ी जोड़-तोड़ हो सकती है। विधान परिषद में जाने के लिए बेचैन मुख्यमंत्री उद्धव ने इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी फोन पर बातचीत की थी।