Home Blog Page 4852

मेरे बच्चे की हत्या की गई है, हमने गाँव छोड़ दिया है: मृतक रोहित जायसवाल के पिता

अपडेट: बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।

बिहार के गोपालगंज जिले में रोहित जायसवाल नामक एक बच्चे की नदी से लाश मिली थी। रोहित के पिता राजेश का आरोप है कि उनके बेटे की हत्या की गई। इसकी शिकायत लेकर वे पुनिस के बाद गए तो थानाध्यक्ष ने कथित तौर पर उनसे अभद्र व्यवहार किया।

राजेश जायसवाल के अनुसार उन्होंने अपना गॉंव छोड़ दिया है। घटना बिहार के गोपालगंज स्थित कटेया के बेलाडीह (बेलहीडीह, पंचायत: बेलही खास) की है। राजेश जायसवाल पकौड़े बेच कर अपना गुजर-बसर करते था। उनका कहना है कि 28 मार्च 2020 को कुछ लड़के आए और उनके बच्चे को क्रिकेट खेलने के बहाने बुला कर ले गए।

बच्चे का गला दबा कर मार डाले जाने की बात कही जा रही है। इस हत्याकांड में 6 लोगों के शामिल होने के आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवार और आरोपितों के बीच पहले से कोई कहासुनी हुई थी क्या? राजेश का कहना है कि उनका कभी किसी से कोई विवाद नहीं हुआ है।

ऑपइंडिया ने गोपालगंज के एसपी से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि इस मामले में जाँच कर के कार्रवाई की जा चुकी है और एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। पीड़ित परिवार के आरोपों पर उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा कि एसडीपीओ ही इस बाबत कुछ कह पाएँगे, क्योंकि मामले की जाँच उन्हें ही सौंपी गई है। हथुआ एसडीपीओ ने व्यस्तता का हवाला देते हुए इस सम्बन्ध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

राजेश जब पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहली बार गए थे, तब थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी कथित तौर पर रिपोर्ट लिखने में आनाकानी कर रहे थे। राजेश का आरोप है कि पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी अपने मन मुताबिक बनवाई। बच्चे के मृत शरीर को 2-3 मिनट के लिए अंदर ले जाया गया और पोस्टमॉर्टम कर लिए जाने की बात कही गई।

बाद में राजेश अपनी पत्नी को लेकर थाना गए थे। जहाँ पर थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी ने उन्हें कथित तौर पर गन्दी-गन्दी गालियाँ दी। ये

कॉन्ग्रेस पार्टी को बड़ा झटका: ₹16.38 करोड़ की नेशनल हेराल्ड की 11 मंजिला इमारत को ED ने किया जब्त

नेशनल हेराल्‍ड मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉन्ग्रेस प्रमोटेड एसोसिएटेड जर्नल्‍स लिमिटेड (AJL) की 16.38 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है। ED की ओर से शनिवार (मई 9, 2020) को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस में यह ऐक्‍शन लिया गया है। ये इमारत मुंबई के बांद्रा में स्थित है।

बांद्रा स्थित यह प्लॉट उस समय सुर्खियों में आया था, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी पर नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं को अदालत में जाना पड़ा था। बता दें कि 1983 में यह संपत्ति बांद्रा में नेशनल हेराल्ड को रियायती दरों पर अखबार प्रकाशित करने के लिए प्रदान की गई थी। 

पत्रकार जे गोपीकृष्णन ने आरोप लगाया कि हरियाणा में पंचकुला में नेशनल हेराल्ड की इसी प्लॉट पर AJL ने सिंडिकेट बैंक की दिल्ली ब्रांच से मुंबई के बांद्रा में इस 11 मंजिला बिल्डिंग को बनाने के लिए लोन ले रखा है, जिसकी कीमत करीब 120 करोड़ रुपए है।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने 2019 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 64.93 करोड़ रुपए की गुरुग्राम की संपत्ति कुर्क की थी।

ईडी की जाँच के अनुसार, साल 1982 में कंपनी के अनुरोध पर नवजीवन अखबार शुरू करने के लिए पंचकुला के सेक्टर 6 में प्लॉट नंबर C-17, सेक्टर 6 को AJL को आवंटित किया गया था। जिसमें ये शर्त भी थी कि दस साल के अंदर इस जमीन पर बिल्डिंग बनकर अखबार निकालने का काम भी शुरू हो जाएगा, लेकिन तय समय में ना तो बिल्डिंग बनी और ना ही अखबार शुरू हुआ।

शर्तों के उल्लंघन के बाद ये जमीन 30.10.1992 को वापस HUDA यानी Housing Urban Development Authority जिसे अब HSVP Haryana Sehri Vikas Pradhikaran बना दिया गया है, के पास आ गई। AJL ने वापस इस जमीन को लेने की कोशिश की, लेकिन साल 1995 और 1996 में माँग को खारिज कर दिया गया।

इसी तरह, प्रवर्तन निदेशालय ने इससे पहले दिसंबर 2018 में एसोसिएटेड जर्नल्स एंड नेशनल हेराल्ड केस के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा आवंटित मोहाली में 30 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की थी।

मोतीलाल वोरा एजेएल के मैनेजिंग डायरेक्‍टर हैं। इस कंपनी पर गांधी परिवार का दखल है। एजेएल ही नेशनल हेराल्‍ड अखबार को चलाता है। इस अखबार को साल 1939 में जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया था। 1956 में AJL एक कंपनी बनी। साल 2008 में इसके सारे पब्लिकेशंस बंद कर दिए गए। तब कंपनी पर 90 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया। 

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई अव्यवसायिक कंपनी बनाई। इसमें सोनिया और राहुल गाँधी सहित मोती लाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। नई कंपनी में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकी के 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास थे।

साद के बचाव में झूठी खबर फैला रहा है ऑल्ट न्यूज़ का मोहम्मद ज़ुबैर और प्रशांत भूषण: दिल्ली पुलिस ने बताया आसमानी कल्पना

मौलाना साद के प्रति सहानुभूति रखने वाले भारत के लिबरल-गिरोह के लिए 2 बुरी खबरें एक साथ सामने आई हैं – पहली ये कि मौलाना साद का वीडियो क्लिप डॉक्टर्ड नहीं बल्कि असली है, और दूसरी ये कि मौलाना साद के बचाव करते हुए इस वाम-उदारवादी वर्ग ने साबित कर दिया है कि आखिर उसका मुख्य मकसद क्या है?

दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर इंडियन एक्सप्रेस की उस खबर को एकदम बेबुनियाद और काल्पनिक करार दिया है, जिसमें इंडियन एक्सप्रेस की किसी ‘गुप्त पुलिस’ ने उनके पास आकर कहा था कि मौलाना साद की वो वीडियो-ऑडियो क्लिप नकली है, जिसमें उसने जमातियों से कोरोना वायरस के संक्रमण से ना घबराते हुए सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) का पालन ना करने की बात कही थी।

इंडियन एक्सप्रेस की इस खबर को बिना जाँच किए ही फैक्ट चेकर समुदाय से लेकर वामपंथी प्रोपेगेंडा पत्रकारिता की रीढ़ दी वायर ने फौरन लपकते हुए इसे सनसनी बनाकर पेश किया।

‘दी वायर’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा –

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज के प्रमुख मौलाना साद कंधावली का एक ऑडियो क्लिप बीते दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर जमात के लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं करने को कह रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की शुरुआती जाँच में पता चला है कि शायद उस ऑडियो क्लिप से छेड़छाड़ की गई है और कई अन्य ऑडियो क्लिप को जोड़कर उसे तैयार किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने बताया झूठा है इंडियन एक्सप्रेस

दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस अफवाह के मूल स्रोत इंडियन एक्सप्रेस को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि इंडियन एक्सप्रेस द्वारा किया गया यह दावा न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि पूर्ण रूप से काल्पनिक दावों और बिना किसी शोध के किया गया है।

फैक्ट चेकर से लेकर प्रशांत भूषण तक फैला रहे इंडियन एक्सप्रेस का प्रोपेगेंडा

मौलाना साद के बचाव में किसी एक खबर की तलाश में बैठे स्वघोषित फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज़ वेबसाइट (AltNews) के संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने भी इंडियन एक्सप्रेस की इस झूठी खबर को खूब शेयर किया है। मतलब सध जाने के बाद हालाँकि ज़ुबैर ने ट्वीट डिलीट कर दी है लेकिन स्वघोषित फैक्टचेककर का बिना जाँच किए इस न्यूज़ को लपक लेने से मकसद पता ही चल गया। अब सोशल मीडिया पर भद्द पिटने के बाद सफाई देता फिर रहा है।

यहाँ तक कि दिल्ली पुलिस के स्पष्टीकरण कर बाद भी प्रशान्त भूषण इस झूठ को बार बार रीट्वीट कर रहे हैं। यही नहीं, प्रशांत भूषण चाहते हैं कि फ़ेक खबर चलाने वालों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

मौलाना साद की शान में रवीश कुमार के फैन भी मैदान में हैं –

पाकिस्तान: 14 साल की लड़की को अगवा कर जबरन इस्लाम कबूल करवाया, अपहरणकर्ता से ही निकाह

पाकिस्तान में 14 साल की एक लड़की को अगवा कर लिया गया। फिर जबरन धर्म परिवर्तन करवा अपहरणकर्ता के साथ ही उसका निकाह करवा दिया गया।

घटना पंजाब प्रांत के फैसलाबाद के मदीना टाउन की है। पीड़ित लड़की अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखती है। 26 अप्रैल को एक घर में काम करने जाते वक्त उसे अगवा किया गया।

फोर्ब्स ने इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न (ICC) के हवाले से बताया है, “मारिया शहबाज को मोहम्मद नकाश के नेतृत्व में एक समूह ने अगवा कर लिया। घटना के वक्त वह काम पर जा रही थी। चश्मदीद परवेज मसीह, युनूस मसीह और नईम मसीह ने बताया कि अपहरनकर्ताओं ने उसे जबरन कार में बिठाया।”

चश्मदीदों का कहना है कि वे मारिया की मदद नहीं कर पाए क्योंकि अपहरणकर्ता हथियारों से लैस थे। उन्होंने हवाई फायरिंग भी की। मारिया की मॉं निगत इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न से बातचीत में बेटी के बलात्कार, जबरन इस्लाम कबूल करवाने या उसकी हत्या किए जाने की आशंका जताई। अब खबर आ रही है कि निगत की आशंका निराधार नहीं थी। मारिया को जबरन इस्लाम कबूल करवा अगवा करने वाले से निकाह करवा दिया गया है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों को अगवा कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का यह पहला मामला नहीं है। पड़ोसी मुल्क से ऐसी खबरें लगातार ही सामने आती रहती है। वहाँ के हिन्दू, सिख और ईसाई लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जाता है।

4 सितंबर 2019 को लाहौर के पंजाब प्रांत में भी 15 साल की एक ईसाई लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया था। पीड़ित ईसाई लड़की जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहाँ की प्रिंसिपल सलीमा बीबी ने ही उसका धर्म परिवर्तन करवाया था। सलीमा बीबी ने शेखपुरा जिले के एक मदरसे में लेकर जाकर उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया।

बीते साल दिसंबर में कराची में 14 साल ही ईसाई नाबालिग लड़की हुमा यूनुस को भी अगवा किए जाने के बाद जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था। उसका निकाह भी अपहरणकर्ता अब्दुल जब्बार से करवा दिया गया था।

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों पर अपहरण और हमले के मामले आम हैं। द मूवमेंट फॉर सॉलिडरिटी एंड पीस पाकिस्तान की एक​ रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक समुदाय की 1,000 महिलाओं और लड़कियों को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और मुस्लिमों से उनका निकाह करवाया दिया जाता है। ज्यादातर पीड़िता 12 से 25 साल के बीच की होती हैं।

मैं एकदम ठीक हूँ और देर तक काम करता हूँ, व्यर्थ की अफवाह फैलाना छोड़ आप स्वयं भी अपना काम करें: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने स्वास्थ्य को लेकर चल रही अफवाहों को विराम देते हुए स्पष्ट किया है कि वो पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हैं और देर रात तक मंत्रालय का काम कर रहे हैं। शाह ने बताया कि देश का गृहमंत्री होने के नाते वो कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच देर रात तक ऑफिस में काम कर रहे हैं और उन्होंने इन अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया था उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर चल रही अफवाहों को मनगढंत करार दिया।

शाह ने कहा कि देश इस समय कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है और इधर लोग उनके स्वास्थ्य के बारे में अफवाहें फैला कर काल्पनिक आनंद का अनुभव ले रहे हैं। शाह ने बताया कि उन्होंने इसीलिए पहले कोई स्पष्टीकरण देना उचित नहीं समझा क्योंकि वो ऐसे लोगों के काल्पनिक आनंद में खलल नहीं डालना चाहते थे। शाह ने कहा:

मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओ और मेरे शुभचिंतकों ने विगत दो दिनों से काफी चिंता व्यक्त की और उनकी चिंता को मैं नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। इसलिए, मैं आज स्पष्ट करना चाहता हूँ, कि मैं पूर्ण रूप से स्वस्थ हूँ और मुझे कोई बीमारी नहीं है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ऐसा मानना है कि इस तरह की अफवाह स्वास्थ्य को और अधिक मज़बूत करती हैं। इसलिए मैं ऐसे सभी लोगों से आशा करता हूँ कि वो यह व्यर्थ की बातें छोड़ कर मुझे मेरा कार्य करने देंगे और स्वयं भी अपने काम करेंगे।”

केन्द्रय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने स्वास्थ्य को लेकर फ़ैल रही अफवाहों पर दिया जवाब

अमित शाह ने अपने शुभचिंतकों और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओ का उनका हालचाल पूछने और उनके स्वास्थ्य की चिंता करने के लिए उन सबका आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि अफवाहें फैलाने वाले लोगों के लिए उनके मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या दुर्भावना नहीं है। अमित शाह ने कहा कि कुछ लोग उनकी मृत्यु के लिए ट्वीट कर के दुआ भी माँग रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई रोग नहीं है।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगो के आरोपित शाहरुख पठान के वकील ने ‘कोरोना खतरा’ का हवाला दे माँगी जमानत, कोर्ट ने किया खारिज

दिल्ली दंगा मामले में पुलिस कॉन्स्टेबल पर पिस्टल तानने के आरोपित शाहरुख पठान की जमानत अर्जी को कड़कड़डूमा कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अभी आरोपित शाहरुख पठान को जमानत नहीं दी जा सकती है।

आरोपित शाहरुख पठान के मामले की पैरवी कर रहे वकील असगर खान ने जमानत याचिका में दावा किया है कि जेल में बड़ी संख्या में कैदी हैं और वहाँ कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने का जोखिम बहुत अधिक है।

अदालत की कार्यवाही के दौरान, दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक डीके भाटिया ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि ये पठान ही था, जिसने इलाके में भीड़ का नेतृत्व किया था। उन्होंने यह कहते हुए जमानत न देने का आग्रह किया कि फिलहाल जाँच जारी है।

जमानत याचिका को खारिज करते हुए, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार मल्होत्रा ने कहा, “विरोध करने का अधिकार लोकतंत्र में एक मौलिक अधिकार है, लेकिन शांतिपूर्ण विरोध और सरकारी नीतियों की खुली आलोचना का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने के लिए नहीं होता है।”

वकील असगर खान ने आरोपित के लिए जमानत की माँग करते हुए दलील दी कि इस संबंध में FIR दर्ज करने में दो दिन की देरी की गई।

असगर खान ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण जेल में रहना असुरक्षित है क्योंकि वहाँ भीड़ के कारण सामाजिक मेल जोल से दूरी का पालन करना संभव नहीं है। खान ने यह दावा करते हुए जमानत माँगी कि आरोपित के खिलाफ पहले से ही आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध में 23 और 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से ठीक पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा हुई थी। इस दौरान जाफराबाद-मौजपुर इलाके में लोगों को भड़काने और हलवदार पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख को यूपी के शामली से 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

हिंसा के दौरान शाहरुख ने जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। उसके पास से एक पिस्तौल तथा दो कारतूस जब्त किए गए थे। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए थे। 

शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे पनाह देने वाले 28 वर्षीय कलीम को भी शामली से पकड़ा। कलीम अतंरराष्ट्रीय स्तर का ड्रग तस्कर है। कलीम के अनुसार वो शाहरुख के साथ पिछले 2 साल से संपर्क में था। दोनों की मुलाकात दिल्ली के तिहाड़ में हुई थी। दोनों दिल्ली के तिहाड़ में बंद अपने अपने पिता से मिलने जाते थे। इसी बीच दोनों की बातचीत बढ़ी और दोनों एक-दूसरे के साथ संपर्क में रहने लगे।

दिल्ली में कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें, आँकड़े छिपा रहा केजरीवाल: कपिल मिश्रा का लेख

दिल्ली में कोरोना से सैकड़ों मौतें हो रही है। दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में रोज कोरोना से हो रही मौतों के रजिस्टर का डाटा बताता है कि स्थिति बहुत भयानक है। लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार कोरोना से हुई मौतों का जो डाटा सर्वजनिक कर रही है, वह अस्पतालों के डाटा से एकदम अलग है।

एक छोटा सा उदाहरण आपको हिलाकर रख देगा। दिल्ली सरकार के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) के रिकॉर्ड के मुताबिक अस्पताल में कोरोना से अब तक 47 मौतें हो चुकी है। एक-एक मौत का रिकॉर्ड अस्पताल के पास है। लेकिन दिल्ली सरकार ने मीडिया को दी अपनी ब्रीफिंग में लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में केवल 5 मौतों का आँकड़ा दिया है। जी हाँ, 47 मौतों को छिपाकर केवल 5 मौतों की जानकारी दी गई है।

4 मई को एक ही दिन में अकेले लोकनायक अस्पताल में 6 लोगों की कोरोना से मौत हुई। लेकिन दिल्ली सरकार के आँकड़ों के अनुसार 4 मई को पूरी दिल्ली में कोई मौत नहीं हुई।

इसी प्रकार राजीव गाँधी अस्पताल में 4 से 6 मई के बीच कोरोना से तीन मौतें हुई, लेकिन केजरीवाल सरकार ने एक भी मौत का आँकड़ा जारी नहीं किया। ऐसे ही आँकड़ा दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) का भी है। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक यहाँ कोरोना से अब तक 52 मौतें हो चुकी है। लेकिन केजरीवाल सरकार ने केवल 20 मौतों का आँकड़ा सार्वजनिक किया है।

यही स्थिति दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना से हो रही मौतों के आँकड़े में भी दिख रही है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल के रिकॉर्ड में कोरोना से अब तक 20 मौतें हो चुकी है। लेकिन केजरीवाल सरकार ने केवल 4 मौतों का आँकड़ा सार्वजनिक किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के सिर्फ 4 अस्पतालों RML, AIIMS, LNJP, लेडी हार्डिंग में अब तक ऑफिशियल 116 लोग कोरोना से मौत का शिकार हो चुके हैं। लेकिन केजरीवाल सरकार के मुताबिक पूरी दिल्ली में कोरोना से सिर्फ 66 मौतें हुई है। ऐसे ही नेशनल हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में 20 मौत कोरोना से हो चुकी है। लेकिन केजरीवाल सरकार की मीडिया ब्रीफ़िंग में मैक्स में केवल 4 मौत बताई गई।

इन्हीं पाँच अस्पतालों के ऑफिसियल डाटा के अनुसार कम से कम 136 मौत दिल्ली में कोरोना से हो चुकी, जबकि केजरीवाल सरकार के आँकड़ों के मुताबिक इन पाँच अस्पतालों में केवल 33 मौत हुई है। जी हाँ, 136 मौतों में केवल 33 मौतों का आँकड़ा सार्वजनिक किया गया है।

इन 136 मौतों के डाटा में राजीव गाँधी अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, जग प्रवेश, सफदरजंग, गंगाराम जैसे कम से कम 20 से ज्यादा अस्पतालों के आँकड़े शामिल नहीं हैं।

बात यहीं खत्म नहीं होती, दिल्ली के कब्रिस्तान खासतौर पर ITO के कब्रिस्तान का डाटा बता रहा है कि मौतों का आँकड़ा बहुत भयानक है। दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक ITO के कब्रिस्तान में कोरोना के कारण मरे 86 लोग अब तक दफनाए जा चुके हैं। ये सच तब सामने आया जब कब्रिस्तान की कमेटी ने लेटर लिख कर माँग की कि कब्रिस्तान की जमीन छोटी पड़ रही है और जमीन दी जाए।

कब्रिस्तान कमेटी के मुताबिक केवल शुक्रवार को ही एक दिन में छह लाशें कोरोना से मरे हुए लोगों की आई थी। इनमें से किसी मौत का आँकड़ा दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया है।

अस्पतालों और कब्रिस्तान के अलावा दिल्ली में कई जगह घरों में ही कोरोना से मौत की जानकारियाँ भी आ रही है। सोशल मीडिया पर दिख रहे एक वीडियो में दिल्ली के शालीमार बाग में एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई और कोई शव को उठाने भी नहीं आया।

दिल्ली में स्थिति बहुत भयानक है और केजरीवाल सरकार लगातार सच्चाई छिपा रही है। अस्पतालों और कब्रिस्तान के आँकड़े एक ही ओर इशारा कर रहे हैं कि दिल्ली में कोरोना से देश मे सबसे ज्यादा मौतें हो रही है।

दिल्ली में कोरोना से सैकड़ो मौतें हो रही है और दिल्ली की केजरीवाल सरकार दारू की दुकानें खोलने के लालच में असली डाटा छिपा रही है। दिल्ली को मौत के मुँह में धकेल दिया गया है।

चीन से भारत का रुख करेंगी कई कम्पनियाँ, रूस से हुए समझौते: देश में पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर

कोरोना वायरस आपदा के बीच भारत सरकार देश में जॉब और उद्योग के लिए भी मेहनत कर रही है। कई कंपनियों से बातचीत की जा रही है, चीन से बोरिया-बिस्तर समेटने वाली कंपनियों को यहाँ बुलाया जा रहा है और आईटी क्षेत्र का हब होने का फायदा उठाते हुए कई कंपनियों को लुभाया जा रहा है। अमेरिकी कम्पनी वॉलमार्ट ने निर्णय लिया है कि वो इस साल भारत में 2800 कर्मचारियों को भर्ती करेगी। इसके अलावा भी रोजगार के कई नए अवसरों का सृजन होगा।

भारत में नौकरियाँ पैदा करेगा वॉलमार्ट

वॉलमार्ट यहाँ ज्यादा से ज्यादा नौकरी के मौके देने के लिए आक्रामक हायरिंग शुरू करेगी। रिटेल के क्षेत्र में सबसे बड़ा ब्रांड मानी जाने वाली वॉलमार्ट के भारत में 28 बड़े स्टोर हैं। भारतीय इ-कॉमर्स कम्पनी फ्लिपकार्ट में सबसे ज्यादा शेयर वॉलमार्ट का ही है। वॉलमार्ट लैब्स के लिए कई सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हायर किए जाएँगे। वॉलमार्ट के बेंगलुरु दफ्तर में फ़िलहाल 3500 लोग कार्यरत हैं।

बेंगलुरु में टेक्निकल फील्ड से जुड़े 2000 लोगों की हायरिंग की जाएगी। वॉलमार्ट बेंगलुरु की टीम इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और साइंस प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। चेन्नई में भी कम्पनी का नया दफ्तर लॉन्च हुआ है, जहाँ 800 लोगों की हायरिंग की जानी है। वल्ल्वर के ग्लोबल डेटा को चेन्नई में ही प्रोसेस और रन किया जाएगा। इसीलिए, डेटा इंजीनियरिंग के लिए वहाँ वैकेंसी निकाली जा रही है।

चेन्नई में वॉलमार्ट का ऑफिस कैम्पस ढाई एकड़ में स्थित है। चेन्नई सेंटर को ‘ग्लोबल डेटा आर्गेनाईजेशन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। वॉलमार्ट 28 देशों में 11,698 स्टोर्स के जरिए 26 करोड़ ग्राहकों को सेवाएँ देता है।

भारत-रूस में होंगे कई समझौते

कच्चा तेल और कोयला व्यापार के लिए भारत ने रूस के साथ ही कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत अब रूस से क्रूड ऑइल इम्पोर्ट को बढ़ावा देगा, जिसके बाद दोनों देशों के बीच एनर्जी पार्टनरशिप में मजबूती आएगी। भारतीय स्टील इंडस्ट्री के लिए कोयला इम्पोर्ट करने के लिए भी रूस के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की योजना बनाई जा रही है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रूस के अपने समकक्ष से इस बाबत वीडियो कॉल पर चर्चा भी की है।

इस बैठक के दौरान फ़िलहाल चल रहे प्रोजेक्ट्स की भी समीक्षा की गई। भारत और रूस की एनर्जी कंपनियों के बीच परस्पर करार होंगे और वो एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। सितम्बर 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस गए थे, तभी दोनों देशों के बीच कोयला के इम्पोर्ट पर बातचीत हुई थी। रूसी आर्कटिक से कच्चे तेल लाने के लिए भारत एक नया समुद्री रास्ता अपनाने पर भी विचार कर रहा है।

इससे रूस से भारत एलएनजी लाने में भी कम समय लगेगा और ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। रूसी कम्पनियाँ भारत में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर, गैस बिजनेस और पेट्रोकेमिकल्स में निवेश करेगी। भारत हाइड्रोकार्बन्स के लिए बड़ा डिमांड सेंटर बना रहेगा।

चीनी कंपनियों का रुख भारत की ओर

अब आते हैं चीन पर, जहाँ से कम्पनियाँ अब बोरिया-बिस्तर समेट रही हैं और उनका रुख अब भारत की ओर है। असम सरकार जापानी, कोरियन और अमेरिकी कंपनियों को लुभाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। सरकार इस पर नज़र रख रही है कि उन्हें लुभाने के लिए इंडोनेशिया, वियतनाम, कम्बोडिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश क्या कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनसे बेहतर प्रयास करने में मदद मिलेगी।

चीन के शंघाई में स्थित टेस्ला के प्लांट ने वहाँ प्रोडक्शन रोक दिया है और इससे ग्लोबल स्तर पर भी कम्पनी की गाड़ियों की सप्लाई रुक गई है। कुछ चाइनीज वेबसाइटों का कहना है कि उत्पादन के लिए कच्चा माल न मिलने के कारण ऐसा किया गया है। अमेरिका से बाहर ये टेस्ला का एकमात्र प्लांट है। मॉडल-3 के लिए इसे कलपुर्जे नहीं मिल रहे हैं। शटडाउन के कारण कम्पनी का कैलिफोर्निया स्थित प्लांट भी कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है।

पत्रकारों को देश से निकाल रहा है चीन

कई देश चीन के साथ रिश्तों को तरजीह नहीं दे रहे हैं और वो नजदीकी घटाने में लग गए हैं, जो उसके लिए चिंता का विषय है। चीन में मानवाधिकार हनन और वहाँ कोरोना को लेकर की गई गड़बड़ियों के कारण सभी देश उससे हलकान हैं। वहाँ मीडिया पर अभी भी दबिश जारी है। विदेशी न्यूज़ रिपोर्टरों को निकाला जा रहा है। वहाँ 24 सालों से रह रहे वरिष्ठ पत्रकार क्रिस बकली को भी निकाल बाहर किया गया।

वे वुहान में ही रिपोर्टिंग कर रहे थे। दुनिया भर में कोरोना वायरस का केंद्र वुहान ही रहा है, जहाँ से ये महामारी शुरू हुई। फ़रवरी में उनका प्रेस कार्ड एक्सपॉयर हो गया था, जिसे चीन ने रिन्यू करने से इनकार कर दिया। पिछले 1 साल में 19 पत्रकारों को चीन बाहर निकाल चुका है। यहाँ तक कि अमेरिकी मीडिया संस्थानों में काम कर रहे चीनी नागरिकों को भी नौकरी छोड़ने को कहा गया। 18 लाख चीनी बेरोजगार हो चुके हैं।

अनुमानित आँकड़े कहते हैं कि कुछ ही दिनों में चीन में रोजगार, नौकरियों के लिए 90 लाख लोग आपस में प्रतियोगिता करेंगे। चीन में मार्च में 5.9% बेरोजगारी थी, जो अप्रैल में बढ़ कर 6.2% हो गई। हालाँकि, चीन में सरकारी डेटा भरोसेमंद नहीं होते हैं। वहाँ के जॉब मार्किट में कोविड-19 का भयानक असर पड़ा है, ऐसा कई विशेषज्ञों का मानना है। अनुमान लगाया गया है कि फ़िलहाल वहाँ 2.7 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। भारत की स्थिति ऐसे में काफी मजबूत है।

ये TikTok और YouTube वालों में भिड़ंत कैसी? क्या है ये पूरा मामला?

TikTok और YouTube आखिरकार आमने सामने हैं। दोनों ही वीडियो देखने और अपलोड करने के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं। इन दोनों में कौन ज्यादा बेहतर है इसका मुकाबला इनके दर्शक नहीं बल्कि इन पर वीडियो बनाने वाले लोग खुद कर रहे हैं। जिसने एक तरह के ‘साइबर-युद्ध’ के हालात बनाकर रख दिए हैं।

यह मामला शुरू हुआ एल्विश यादव के एक ऐसे वीडियो से, जिसमें उसने TikTok पर वीडियो बनाने वालों पर कुछ चुटुकुले बनाए गए थे। एल्विश यादव के इस वीडियो से TikTok के यूजर्स बहुत आहत हुए और बदले में अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।

तकरीबन एक हफ्ते पहले, YouTube वीडियो बनाने वाले एक युवक ने ‘रोस्ट वीडियो’ में कहा था कि TikTOk वाले कितनी रद्दी चीजें बनाते हैं। इसी के जवाब में एक TikTok बनाने वाले युवक ने एक ‘आईजीटीवी’ वीडियो बनाया (बाद में जिसे हटा दिया गया था)।

टिकटोक वीडियो बनाने वालों के हो रहे इस कथित अपमान पर मिस्टर फैजू ने भी एक वीडियो जारी किया, जो कि इस रिपोर्ट के आखिर में संलग्न है। आखिरकार एल्विश यादव द्वारा शुरू की गई इस जंग को कैरी मिनाटी (CarryMinati) ने अंत कर दिया। कैरी मिनाटी, यूट्यूब पर ‘रोस्टिंग’ वीडियो (Roast Video) बनाने के लिए मशहूर है।

लेकिन इस ‘वॉर’ ने अब धार्मिक और मजहबी रंग लेना भी शुरू कर दिया है। यूट्यूब पर टिकटोक बनाने वालों के मजाक बनाने के बाद कुछ मुस्लिम युवक ये कहते देखे जा रहे हैं कि वो रमजान के महीने तो कुछ नहीं कर सकते लेकिन रमजान के बाद हम दिखाएँगे।

वहीं ‘कैरी मिनाटी’ ने जवाब में कहा है कि तू क्या अंडरवर्ल्ड से है जो तेरे कहने से मैं डर जाऊँगा? Carry Minati का कहना है कि टिकटोक बनाने वाले उसे फ़ोन कर के धमकी दे रहे हैं। लेकिन लगता नहीं है कि वो इस बात की शिकायत कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में दर्शक सबसे ज्यादा आनंद लेते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि एल्विश यादव ने जो लड़ाई छेड़ी थी, उसे कैरी मिनाटी ने अपने रोस्ट वीडियो से समाप्त कर दिया है।

कैरी मिनाटी के 12 मिनट के इस वीडियो में, आपको पता चल जाएगा कि कोरोना वायरस के दौरान घरों में बंद लोग उसे क्यों पसंद कर रहे हैं और इसे देखकर TikTok बनाने वाले क्यों नापसंद कर रहे हैं। हालाँकि, इन सभी वीडियो में बेहद अश्लील भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है।

एल्विश यादव (Elvish yadav) का वीडियो, जिसके बाद यह यूट्यूब vs TikTok का सिलसिला शुरू हुआ –

मिस्टर फैजू की प्रतिक्रिया –

कैरी मिनाटी (CarryMinati) द्वारा बनाया गया वीडियो –

कोरोना आपदा से पैदा हुआ जड़ों की ओर लौटने का अवसर, विकास के वैकल्पिक मॉडल में ग्राम स्वराज पर हो फोकस

केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोक्ताओं के महॅंगाई भत्ते की वृद्धि पर जनवरी 2020 से जुलाई 2021 तक 18 महीने के लिए रोक लगा दी है। कल तक प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-ठेले वालों और सीमांत किसानों की भूख और बेकारी पर आँसू बहाने वाले करुण रस के फ़ेसबुकिया क्रांतिकारी सरकार के इस निर्णय से कुपित दुर्वासा बन बैठे हैं।

विडंबना यह है कि इस कोलाहल के सूत्रधारों में विषमता के आदि-विद्रोही और साम्यवाद के प्रवक्ता सर्वाधिक हैं। उन्हें सरकार का यह निर्णय सख्त नागवार लग रहा है, क्योंकि सरकार ने भूखे-दूखे भारतवासियों के लिए स्वास्थ्य और रोटी-रोजगार की चिंता करते हुए उनकी थाली से आधा कौर जो निकाल लिया है।

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन को 30 प्रतिशत कम कर दिया था। वहीं सांसदों की क्षेत्र विकास निधि को भी दो वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। इसी प्रकार केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उप्र और राजस्थान आदि अनेक राज्य सरकारों ने भी कर्मचारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों आदि में कटौती की है।

यह कोरोना संकट से निपटने के लिए साधन-संसाधन जुटाने की उनकी रणनीति का हिस्सा है। निश्चय ही, यह स्वागत योग्य पहल है, क्योंकि इस आपदा की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय संसाधनों का पुनर्नियोजन, पुनर्निवेशन और पुनर्वितरण अपरिहार्य है। इस राष्ट्र-यज्ञ में राजनेता, उद्योगपति, कर्मचारी, व्यापारी और किसान-मजदूर; सबको योगदान देने की आवश्यकता है। राष्ट्र-निर्माण व्यक्ति-विशेष का उत्तरदायित्व नहीं, अपितु सम्पूर्ण नागरिक समाज का सामूहिक और सहकारी कर्तव्य-बोध है।

कोरोना संकट की व्यापकता को देखते हुए देश में ‘वित्तीय आपातकाल’ लगाया जाना जरूरी है। इसी दिशा में आगे काम करते हुए सरकार को स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन और नया संसद भवन- सेंट्रल विस्टा बनाने जैसी महत्वाकांक्षी और खर्चीली परियोजनाओं को भी स्थगित कर देना चाहिए। उसे ऐसी तमाम बचतों से प्राप्त धन को ग्राम स्वराज की परियोजना को साकार करने में लगाना चाहिए।

गाँधी जी कहा करते थे कि ‘भारत गॉंवों में बसता है। भारत को जानना है तो गाँव को जानना पड़ेगा।’ स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी उनकी यह बात प्रासंगिक है। इसलिए भारत का इलाज करने के लिए लाइलाज होते गॉंवों के इलाज को प्राथमिकता देनी होगी।

अम्बानी-अडानी और टाटा-बिड़ला जैसे बड़े-बड़े उद्योगपतियों और सेवा-क्षेत्र के व्यापक विस्तार के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी प्रकृति में मूलत: कृषि अर्थव्यवस्था है। खेती-बाड़ी और उससे संबंधित कामों पर देश की दो तिहाई जनसंख्या की निर्भरता है। इसके बावजूद भारत में किसान, किसानी और गाँव सर्वाधिक उपेक्षित हैं।

किसानी के क्रमशः लाभरहित उद्यम बनते चले जाने की मजबूरी में मजदूरी और छोटे-मोटे काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने वाले ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यह पलायन विध्वंसक है। इसे रोकने के लिए व्यापक नीतिगत निर्णय लेने होंगे और गाँव को रहने-खाने लायक बनाने की दूरगामी रणनीति बनानी होगी।

गाँधी जी द्वारा प्रतिपादित ग्राम स्वराज के आधारभूत तत्व- समानता, स्वावलंबन, स्वदेशी, विकेंद्रीकरण और सर्वधर्मसमभाव आदि हैं। समकालीन समय में ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने से ज्यादा जरूरी काम गॉंवों को आत्मनिर्भर बनाना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास ही भारत का भविष्य है।

लॉकडाउन की क्रमिक समाप्ति के बाद इस दिशा में ठोस कदम उठाकर ही ‘अंत्योदय’ के साथ-साथ समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। ग्राम स्वराज की स्थापना से ही मानवता का कोढ़ बन चुकी गैर-बराबरी कम की जा सकती है।

इसी प्रकार रोटी-रोजी की तलाश में बेबस ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन रोका जा सकता है और उन्हें शहरी झुग्गी बस्तियों की अमानवीय जीवन-स्थितियों में जीने की मजबूरी से बचाया जा सकता है। इससे शहरी जीवन की स्लम, प्रदूषण, अपराध, ट्रैफिक जाम जैसी तमाम व्याधियों का उपचार भी संभव है।

भारत जैसे देश में गाँव की आत्मनिर्भरता ही मानवीय गरिमा की गारंटी है। भारत में एक ओर पहाड़ से ऊँचे सम्पन्नता के टीले हैं। वहीं दूसरी ओर अभाव के अतल गड्ढे हैं। भारतीय समाज व्यवस्था की इस उबड़-खाबड़ और ऊसर होती भूमि पर पाटा चलाकर समतल और उर्वर बनाने की आवश्यकता है।

संयोगवश, कोरोना जैसी आपदा ने वह अवसर उपलब्ध कराया है कि हम न सिर्फ़ इस असाध्य बीमारी को मिटाने के लिए प्रयत्नशील हों, बल्कि नई समाज-व्यवस्था के लिए भी कृत-संकल्प हों।

आर्थिक क्षेत्र में भारत को एक नया मॉडल अपनाने की आवश्यकता है। यह मॉडल अपनी प्रकृति में देशज और स्थानिक होगा। यह सत्य है कि कोरोना संकट ने भारत के सामने अपनी अर्थव्यवस्था के व्यापक विकास और अंतरराष्ट्रीय विस्तार का ऐतिहासिक अवसर उपलब्ध कराया है।

इस संकट के फलस्वरूप विश्व बिरादरी में चीन की साख में जबरदस्त गिरावट आयी है। अमेरिका से लेकर यूरोपीय और अफ़्रीकी देशों में भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। यह बढ़ी हुई विश्वसनीयता कोरोना संकट से निपटने में भारत द्वारा प्रदर्शित अभूतपूर्व क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समन्वय के लिए की गई उसकी पहल की परिणति है।

भारत ने अमेरिका और यूरोप को हिला देने वाले कोरोना के अश्वमेधी अश्व को थाम लिया है। साथ ही, उसने सर्वशक्तिमान अमेरिका से लेकर अपने उत्पाती पड़ोसी पाकिस्तान जैसे अनेक देशों को हाइड्रोक्लोरोक्वीन जैसी दवाइयाँ देकर अपनी क्षमता, समझदारी और संवेदनशीलता से विश्व बिरादरी को प्रभावित किया है। किन्तु इस समय भारत को भौतिक विकास की जगह वैकल्पिक सभ्यता के विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

भारतीय संस्कृति भौतिकतावादी कभी नहीं रही। वह वास्तव में मानव मूल्यवादी आध्यात्मिक संस्कृति है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहते थे कि ‘भूख लगना प्रकृति है, छीनकर खाना विकृति है, और मिल-बाँटकर खाना संस्कृति है।’ परंतु भौतिक संसाधनों की अनवरत छीना-झपटी ही समकालीन विश्व-मानव का दैनंदिन जीवन-व्यवहार है। इस विकृति और व्याधि के विकल्प की तलाश जरूरी है।

भारत को फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटते हुए विकास का एक वैकल्पिक मॉडल विश्व समाज के सामने रखना चाहिए। यह पहल विश्व नेता बनने की उसकी परियोजना को संभव करेगी। इस वैकल्पिक मॉडल में ग्लोबलाइजेशन के बरक्स लोकलाइजेशन पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

गाँधी जी की ग्राम स्वराज की अवधारणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव-दर्शन को कार्यान्वित करने का यह सर्वाधिक उपयुक्त समय है। 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस के अवसर पर किए गए अपने एक महत्वपूर्ण संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्राम स्वराज की स्थापना पर बल दिया है। उन्होंने आगामी समय में ‘मेक इन इंडिया’ को भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया है।

इस ध्येय वाक्य को और सटीक और सार्थक बनाने के लिए ‘मेक इन रूरल इंडिया’ करने की आवश्यकता है। गाँव को आत्मनिर्भर बनाकर ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने की शुरुआत हो सकती है। आज भारत के गाँव शहरी जीवनशैली और जीवन मूल्यों के कूड़ाघर बन गए हैं।

गाँव से आत्मनिर्भरता, सामुदायिकता और मानवीय मूल्यों का क्रमशः लोप हो गया है। ग्रामीण जीवन के इन आधारमूल्यों का अपहरण आधुनिक औद्योगिक सभ्यता ने किया है। आज गाँव ईर्ष्या-द्वेष और केस-क्लेश के अखाड़े हैं। वे विकृति, विद्रूप और व्यक्तिवाद के नवोदित महाद्वीप हैं। नशाखोरी और एकाकीपन वहाँ की नई जीवन-चर्या है। अब ग्राम्य-संस्कृति की पहचान रहे प्राचीनतम मूल्यों की घरवापसी का स्वर्णिम अवसर है।

भारत को विकास को परिभाषित करते समय अमेरिका और चीन जैसे देशों का मुँह ताकना बंद करना चाहिए। भारत में ग्राम आधारित कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करके और छोटे एवं मझोले उद्योग-धंधों को मजबूती प्रदान करके ही भुखमरी, बेरोजगारी और अपराध जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

इन उद्योगों की मजबूती ही चतुर्दिक खुशहाली का प्रवेशद्वार है। इसी से अंत्योदय भी संभव होगा। यह एक स्थापित सत्य है कि बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और कॉर्पोरेट आम भारतवासी के आर्थिक विकास और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकती हैं।

व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि की एकात्मता का बोध ही आध्यात्मिक उन्नति का सनातन मार्ग है। हाशिए पर ठिठके खड़े अंतिम जन की चिंता और कल्याण-साधना करके ही आधुनिक राज्य अपनी सार्थकता सिद्ध कर सकता है। संतुलित और सतत विकास, सीमित उत्पादन और संयमित उपभोग ही भविष्य का रास्ता है।

विश्व की सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था होने से कहीं श्रेयस्कर विश्व की सबसे सुखी सभ्यता होना है। न सिर्फ संसार की सबसे प्राचीन सभ्यता वैदिक संस्कृति ने बल्कि आधुनिक समय में बहुत छोटे से देश भूटान ने भी इस सत्य को प्रमाणित किया है कि भौतिक प्राप्तियों और मानवीय सुख की पारस्परिक निर्भरता सीमित ही है।

इस सत्य को जितनी जल्दी आत्मसात कर लिया जाएगा, उतना ही मनुष्यता के लिए शुभकर होगा। यह कदम प्राकृतिक संरक्षण की दिशा में भी एक निर्णायक और आवश्यक पहल होगी। यह सिर के बल खड़ी सभ्यता को पलटकर सीधा खड़ा करने की प्रभात बेला है।