बिहार के पटना सिटी में 20 अप्रैल को लॉकडाउन विवाद में सन्नी गुप्ता की हत्या कर दी गई। हमले का मुख्य आरोपित मोहम्मद चॉंद अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। सन्नी का परिवार दहशत में है और अब मुस्लिम बहुल इलाके से पुश्तैनी घर बेचकर निकलने का रास्ता खोज रहा है।
सन्नी की हत्या ऐसे वक्त में की गई जब उसका परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था। एक मई को सन्नी की बहन दीपिका की शादी तय थी। हालॉंकि लॉकडाउन के कारण इस पर संशय था। लेकिन परिवार में तैयारियॉं चल रही थी। सन्नी की हत्या के बाद शादी टाल दी गई है। यह जानकारी सन्नी के भाई दीपक गुप्ता ने दी।
पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। दीपक गुप्ता के मुताबिक भले ही परिवार की सुरक्षा के नाम पर घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात है, लेकिन जब तक मुख्य आरोपित चाँद मोहम्मद गिरफ्तार नहीं हो जाता हम खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।
इससे पहले दीपक ने ऑपइंडिया को बताया था कि चॉंद हथियारों का तस्कर है। उनका परिवार उसकी गुंडई का विरोध करते रहे हैं। इस कारण वे लोग उसके निशाने पर थे। दीपक के अनुसार घटना वाले दिन भी सन्नी के सिर में गोली चॉंद ने घर में घुसकर मारी थी।
हालॉंकि खाजेकलाँ थानाध्यक्ष सनोवर खां ने इन आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने बताया कि छह लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया था। इनमें से पॉंच को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। चॉंद मोहम्मद की तलाश जारी है। उन्होंने माना कि चॉंद का आपराधिक अतीत रहा है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामला गंभीर होने की बात कहकर उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि सन्नी गुप्ता टेंट का व्यवसाय करते थे। तीन साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। दो साल का बेटा अनुराग और 4 महीने की एक बेटी आराध्या है। असल में 20 अप्रैल को लॉकडाउन पालन कराने को लेकर स्थानीय युवकों का एनसीसी कैडेट के साथ विवाद हो गया था। कैडेट्स पर पथराव किया गया जिसका सन्नी ने विरोध किया था।
चाँद की गिरफ्तारी और अन्य माँगों को लेकर पूर्व पार्षद बलराम चौधरी और निगम पार्षद शोभा देवी उपवास पर भी बैठे थे। पूर्व पार्षद बलराम चौधरी ने बताया कि सरकार से पीड़ित परिवार की सुरक्षा के साथ मुआवजा की माँग की गई है। इसके लिए मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लॉकडाउन के दौरान एक नाबालिग से रेप का मामला सामने आया है। अस्पताल जा रही 17 साल की पीड़िता को दो आरोपितों ने कार में खींच लिया। करीब आठ किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। आरोपित के नाम शफीक खान और आबिद खान बताए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक 18 अप्रैल को पीड़िता जेपी अस्पताल के पास अपने दोस्त के साथ जा रही थी। इसी दौरान आरोपितों ने उसे जबरदस्ती कार में खींच लिया। आरोपित उसे शहर के भेल इलाके में एक सुनसान जगह पर ले गए। यहाँ शफीक ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद पीड़िता को मयूर पार्क के पास छोड़ कर फरार हो गए। नाबालिग लड़की ने कहा कि वह मदद के लिए चिल्लाती रही लेकिन लॉकडाउन की वजह से कोई आसपास नहीं था।
पीड़िता को अगवा करने की जगह से लेकर बलात्कार की जगह के बीच की दूरी करीब 8 किलोमीटर है। पीड़िता को अगवा कर कार जेपी अस्पताल और गोविंदपुरा के बीच बोर्ड ऑफिस स्क्वायर सहित कई पुलिस चौकियों से होकर गुजरी होगी। लेकिन अपराधियों को कहीं भी नहीं रोका गया।
लॉकडाउन के बीच भोपाल में रेप की दूसरी घटना
आरोपितों ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो वे उसे मार डालेंगे। पीड़िता इस घटना से काफी डर गई थी, इसलिए वो चुप हो गई। लेकिन फिर बाद में उसे उसकी एक दोस्त ने हिम्मत दी और पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी।
इसके बाद पीड़िता में शिकायत करने का साहस आया और उसने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन उन्होंने FIR दर्ज न करते हुए इसे हबीबगंज पुलिस थाने भेज दिया। हबीबगंज पुलिस ने पीड़ित लड़की का बयान लेकर आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपितों के नाम शफीक खान और आबिद खान बताया। आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हबीबगंज पुलिस थाना प्रभारी राकेश श्रीवास्तव ने बताया, “17 साल की लड़की का शनिवार (अप्रैल 18, 2020) रात को अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया गया। इस मामले में हमने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक 24 वर्षीय शफीक खान और दूसरा 22 वर्षीय आबिद खान है।”
लॉकडाउन के बीच भोपल में रेप की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 17 अप्रैल को एक दृष्टिहीन बैंक कर्मचारी से उसके घर में घुस रेप किया गया था।
गौरतलब कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक 4 साल की बच्ची के साथ रामपुर निवासी इरफान (पुत्र तय्यूब) ने दुष्कर्म किया था। वहीं दिल्ली में शाह कंवर अली नाम के युवक ने मैट्रिमोनियल साइट से युवती को फँसाकर मिलने के लिए बुलाया और फिर उसके साथ रेप किया।
पाकिस्तान में दो हिंदू नाबालिग लड़कियों को अगवा कर लिया गया है। घटना सिंध प्रांत की है। इलाके के प्रभावशाली नेता और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य पीर फैसल शाह जीलानी के भाई पर दोनों बहनों को अगवा करने का आरोप है।
पीड़ित परिवार के मुताबिक उन्हें पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही। अगवा करने वाले धमकियॉं दे रहे हैं। परिजनों ने एक वीडियो जारी कर दोनों बच्चियों का पता लगाने की माँग की है।
पड़ोसी मुल्क में कोरोना संकट के दिनों में भी अल्पसंख्यक पर जुल्म-ज्यादती का दौर जारी है। इससे पहले हिंदुओं और ईसाइयों को राशन नहीं दिए जाने का मामला सामने आया था।
सिंध छोड़कर जाना चाहता है पीड़ित परिवार
घटना के संबंध में पीड़ित परिवार के परिजनों ने एक वीडियो जारी किया है। परिजनों ने इस घटना के पीछे सांसद जिलानी के भाई का हाथ बताया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि शिकायत करने के बाद पुलिस से सहायता मिलना तो दूर उल्टे परिवार को धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब वे इस यातना को और बर्दाश्त नहीं कर सकते। वे सिंध छोड़कर जाना चाहते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस भी अपराधी का साथ दे रही है। उनका कहना है कि राजनेताओं के दबाव की वजह से पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। परिवार के एक सदस्य ने कहा, “पुलिस हमारे साथ सहयोग नहीं कर रही है। वे हमें अदालत में ले गए लेकिन पीड़ित को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया। पुलिस भी दोषियों का पक्ष ले रही है।”
हिंदुओं के धर्मांतरण और निकाह के लिए बदनाम है पाकिस्तान का सिंध
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें इस बात का डर है कि अगर पुलिस ने इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की तो दोनों अगवा बहनों का जबरन धर्मांतरण कर निकाह करवा दिया जाएगा। सिंध प्रांत में पहले भी ऐसी घटनाएँ होती रही हैं। वहाँ की विधानसभा में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए कानून बनाने की माँग भी उठ चुकी है।
कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी पाकिस्तान से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने को कहा है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी सांसदों के दबाव के कारण नेशनल असेंबली में इस बाबत कोई कड़ा कानूनी प्रावधान नहीं हो पा रहा है। सिंध प्रांत जबरन धर्मांतरण और निकाह के लिए बदनाम है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं और ईसाइयों के साथ उत्पीड़न की घटनाएँ कोई नई नहीं है। वहाँ समय-समय पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता रहा है और पुलिस में शिकायत के बावजूद ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की जाती। मूवमेंट फॉर सॉलिडेरिटी एंड पीस ने भी इस मुद्दे को उठाया है। संगठन का कहना है कि हर साल पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई परिवारों के एक लड़कियों को निशाना बनाया जाता है और जबरन उनकी शादी मुस्लिम युवकों से करा दी जाती है। सरकार की ओर से ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाते।
गौरतलब है कि 13 मार्च को बहावलपुर के मुनीर अहमद ने 15 वर्षीय नाबालिग हिन्दू लड़की को अगवा कर लिया। इसके बाद फैसलाबाद ले जाकर मुनीर ने उसके साथ बलात्कार किया। घटना के बाद मौलवियों ने उस बच्ची को जबरन इस्लाम कबूल कराकर उसकी शादी बलात्कारी मुनीर अहमद के साथ निकाह करवा दिया।
वहीं 15 जनवरी को सिंध प्रांत के जैकोबाबाद जिले से कक्षा 9 में पढ़ने वाली 15 वर्षीय महक को अली रजा ने अगवा कर लिया था। उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया और फिर एक मुस्लिम से निकाह करवा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने भी लड़की की कोई मदद नहीं की।
देश के अलग-अलग राज्यों से नमाज के लिए मस्जिदों में जुटने और पुलिस पर हमले की खबरें सामने आई है। यहॉं तक कि राजधानी दिल्ली के बाजार में रमजान शुरू होते ही भीड़ देखने को मिली है। यह सब तब हो रहा है जब कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देशभर में लॉकडाउन है।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर लॉकडाउन का उल्लंघन कर सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। बहराइच, शाहजहाँपुर में नमाजियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। फिरोजाबाद में घंटों मजहबी नारे लगाए। इसके बाद एम्बुलेंस को निशाना बनाते हुए तोड़फोड़ की गई।
बहराइच जिले के खैरीघाट थाना क्षेत्र के गाँव तेलियानपुरवा की मस्जिद के अंदर मौलवी की अगुवाई में सामूहिक रूप से जुमे की नमाज अदा की गई। इसकी जानकारी जब पुलिस को हुई तो वह तत्काल गाँव पहुँच गई। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मौलवी सहित नौ नमाजियों को गिरफ्तार कर लिया।
हाय रे जाहिलियत!
बहराइच के बौंडी थानाक्षेत्र के डिहवाकला गांव की मस्जिद में लॉकडाउन का उल्लंघन कर जुमे की नमाज पढ़ रहे 23 नमाजियों को पुलिस ने पकड़ा।
गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम के 1 सिपाही पर नमाजियों ने जानलेवा हमला भी कर दिया।
यूपी के ही फिरोजाबाद के कई इलाकों में शुक्रवार देर रात मजहबी नारेबाजी की गई। इससे इलाके में हड़कंप मच गया। लोग अपनी-अपनी छतों पर आ गए। इस दौरान दूसरे समुदाय से भी लोग नारेबाजी करने लगे। समुदाय विशेष के लोग धार्मिक नारेबाजी करते हुए सड़कों पर जमा हो गए और देखते ही देखते जाटवपुरी चौराहे पर एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर दी। एबुलेंस चालक आकाश यादव अपना जान बचाकर वहाँ से भागना पड़ा।
इसके बाद सूचना पर पहुँची पुलिस को हालात पर काबू पाने के लिए लाठियाँ फटकारनी पड़ीं। अमर उजाला की खबर के मुताबिक हाजीपुरा, बारहबीघा, लालपुर, तीसफुटा और रामगढ़ क्षेत्र में धार्मिक नारेबाजी की गई।
शुक्रवार रात को शाहजहांपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र की एक मस्जिद में लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए लोग इकट्ठा हो गए। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को नमाजियों के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद पुलिस को वहाँ से भीड़ खदेड़ने के लिए लाठियाँ फटकारनी पड़ी।
झारखंड के गोड्डा में भी पुलिस पर हमला किया गया। यहॉं के रहबड़िया गॉंव की मस्जिद में शुक्रवार को 40—50 लोग जुटे थे। पुलिस मौके पर पहुॅंची तो उस पर पथराव कर दिया गया। तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए और गश्ती वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। पॉंच लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
प्रभात खबर के गोड्डा संस्करण में प्रकाशित खबर
इसी तरह की खबर कश्मीर से भी सामने आई। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कासबयार द्रबगाम इलाके की एक मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस को हुई तो वह तत्काल मौके पर पहुँच गई और लोगों को समझाने की कोशिश की। इस पर नमाजियों ने पुलिस दल को वहाँ से भगाने के लिए उन पर पथराव करना शुरू कर दिया। इस पर काबू पाने के लिए पुलिस को अश्रु गैस के गोले दागने पड़े। इसके बाद इलाके में तनाव पैदा हो गया।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बहराइच के बोंडी थाना क्षेत्र के एक गाँव की मस्जिद में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे। इसके बाद सूचना पर जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा तो नमाजियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में 31 नमाजियों पर हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था साथ ही मौके से 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को रमजान की खरीदारी के लिए दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में मुस्लिमों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का जमकर मजाक बनता नजर आया। आशंका जताई जा रही है कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले वक्त में दिल्ली की स्थिति और बदतर हो जाएगी।
महाराष्ट्र के पालघर के बाद बाद अब पंजाब से संत पर हमले की खबर आई है। यहॉं होशियारपुर में स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप के ऊपर जानलेवा हमला हुआ। मास्क पहने हमलावरों ने धारदार हथियार से हमला किया।
शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) रात तकरीबन 10 बजे स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप होशियारपुर स्थित आश्रम में विश्राम कर रहे थे। 2 लोग दीवार फाँद आश्रम में घुसे और स्वामी जी पर हमला कर दिया। उस वक़्त स्वामी पुष्पेंद्र आश्रम में अकेले थे।
Two people attacked Swami Pushpendra ji in Punjab Tiday ..Swami ji is attacked with a deadly weapon. Why Sadhus are on target ? What are the intentions and who is behind such criminals ? Kindly look and work for the safety of Sadhus. @HMOIndia@AmitShah@capt_amarinderpic.twitter.com/9QCY2cq0Ng
बाद में स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप को अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने पुलिस को बताया कि उन अज्ञात हमलावरों ने उनके हाथ-पाँव बाँध दिए। फिर हमला कर उन्हें घायल कर दिया और आश्रम से 50 हजार रुपए एवं कुछ अन्य समान लेकर फरार हो गए। स्वामी पुष्पेंद्र ने बताया कि बदमाशों ने उनका गला भी दबाया।
स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप ने बताया कि उन्होंने हमलावरों से कहा कि पैसे लेकर चले जाओ, लेकिन मुझे मत मारो। इसके बावजूद हमलावरों ने उन पर बुरी तरह से हमला किया। गला दबाने के साथ ही हमलावरों ने उनके सिर पर भी किसी हथियार से वार किया, जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए।
This is horrifying. I don’t even have words left. Hindus, this is not just one more sadhu attacked. This is one more pillar of Hinduism brought down. He survived, but will you?
गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार (अप्रैल 16, 2020) को महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं सहित 3 लोगों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना का वीडियो 3 दिन बाद रविवार को वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों को सच्चाई पता चली थी। पालघर मॉब लिंचिंग का ये वीडियो दिल दहला देने वाला था। उस वीडियो को देख कर कोई भी काँप उठे। इस वीडियो में दिख रहे एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने जानकारी माँगी थी। जिसके बाद पता चला कि वो शरद पवार की पार्टी (NCP) का आदमी है।
अभी तक इस मॉब लिंचिंग के मामले में FIR दर्ज कर 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 101 लोगों को 30 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है, जबकि 9 नाबालिगों को जुवेनाइल सेंटर होम में भेज दिया गया है।
अखिल भारतीय संत समिति ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मॉब लिंचिंग की सीबीआई जाँच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पत्र में हत्या के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताई गई है।
पत्र में कहा गया कि पालघर में दो पूज्य संतों और उनके ड्राइवर की निर्मम हत्या का होना महाराष्ट्र के अंदर कानून व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करता है। इसलिए माननीय गृह मंत्री भारत सरकार से आग्रह है कि संत समिति द्वारा सुझाए बिंदुओं पर केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई द्वारा जाँच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करवाने की कृपा करें।
इसके साथ ही पत्र में कहा गया कि संपूर्ण मामले में महाराष्ट्र के मंत्री अनिल देशमुख की भूमिका संदिग्ध है। इसलिए विश्वास नहीं कर सकते क्योंकि घटना को एक ही समुदाय का मामला बताते हुए ट्वीट करना एकपक्षीय है। इसलिए मामले की सीबीआई जाँच करवाई जाए।
राजस्थान के बाँसवाड़ा में आए दिन गौ हत्या कि वारदातें सामने आ रही हैं। मामला पाटन थाना क्षेत्र का हैं, जहाँ कल (अप्रैल 23, 2020) रात कुछ लोगों ने नशे में गौ हत्या कर दी। अखिल भारत कृषि गौ सेवा संघ की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक पाटन थाना क्षेत्र में ईसाई धर्मांतरण गतिविधियाँ पहले से ही सक्रिय थी। गौ हत्या के पीछे भी कहीं न कहीं ईसाई मिशनरी के लोगों का ही हाथ है। आरोप यह भी लगाया है कि कुशलगढ़ विधायक अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है एवं मामले को दबाने के लिए राजनीतिक दबाव डाल रही है।
बीयर की बोतल और खून
राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट जसवंत सिंह राठौड़ एवं राजस्थान प्रदेश संगठन मंत्री भुवन मुकंद पंड्या ने इस घटना पर कड़ी निंदा करते हुए इस मामले मे सख्त कार्यवाही की माँग की है। पाटन पुलिस थाना प्रभारी द्वारा इस गौ हत्या में लिप्त एक अपराधी को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही पुलिस बाकी अपराधियों की तलाश कर रही है।
गौ हत्या के बाद जाँच के लिए पहुँची पुलिस
अखिल भारत कृषि गौ सेवा संघ के राजस्थान प्रदेश संगठन मंत्री भुवन मुकुंद ने ऑपइंडिया से बताया, “जहाँ पर गाय की निर्मम हत्या की गई। वह क्षेत्र बाँसवाड़ा जिले का सुदूर झाबुआ मध्य प्रदेश से लगा हुआ है। इस क्षेत्र में ईसाई मिशनरी का कार्य काफी बड़े पैमाने पर है। यहाँ ईसाई चर्च हर गाँव में बने हैं। भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर ईसाई बनाने अर्थात धर्मांतरण का कार्य अंग्रेजों के शासन काल से ही इस क्षेत्र में चला आ रहा है।”
मन को आहत कर देने वाला दृश्य
बहुत ज़्यादा संख्या में आदिवासी वनवासी लोग अपना धर्म परिवर्तन करके ईसाई बन चुके है। इस गौ हत्या में अपराधियों ने पहले वहाँ शराब आदि पी और फिर गाय की निर्मम हत्या कर उसका माँस निकालने के लिए उसका चमड़ा उधेड़ दिया। लेकिन फिर किसी ने इस घटना को देख पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। मगर बाकी लोग अँधेरे में भाग गए। गिरफ्तार हुए शख्स ने पुलिस को सभी के नाम बता दिए है। अब पुलिस पूरी घटना की जाँच मे जुट गई है। साथ ही बाकी अपराधियों की भी तलाश कर रही है।
यह घटना कोई पहली घटना नही है, जो बांसवाड़ा मे घटित हुई है। इससे पहले भी गौ हत्या को लेकर बाँसवाड़ा से कई मामले सामने आए है। जिसमे 6 फरवरी 2018 को कलिंजरा थाना क्षेत्र के गाँव लीलवानी में गाय को पालने के लिए खरीद कर उसे मार कर निवाला बनाने के मामला सामने आया था। जिसमे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।
वहीं दूसरी खबर 31 दिसंबर 2018 को आई थी। जहाँ बांसवाड़ा जिले के छोटी टिम्बी गाँव में देर रात पाँच लोग गौ हत्या कर रहे थे। जिस पर मुखबिर के द्वारा यह जानकारी पुलिस को दी गयी। फिर आनंदपुरी थाना पुलिस ने जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँच कर और पाँच में से एक आरोपित को गिरफ्तार किया। बाकि 4 आरोपित अँधेरे का फायदा उठा कर वहाँ से फरार हो गए।
पश्चिम बंगाल को ‘अपना इलाका’ साबित करने के लिए वहाँ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमेशा की तरह ही तानाशाही तरीका अपनाया है। बात चाहे COVID-19 वायरस के दौरान जारी देशव्यापी बंद में केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार की नीतियों पर अमल करने की हो या फिर हिन्दुओं के साथ होने वाले अत्याचारों पर चुप्पी साधने की हो, ममता बनर्जी ने हमेशा मुस्लिम तुष्टिकरण के जरिए सिर्फ अपनी व्यक्तिगत राजनीति को ही ध्येय बनाकर कार्य किया है।
ममता बनर्जी 2011 से लगातार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के पद पर बनी हुई हैं, लेकिन 2014 से उन्हें पश्चिम बंगाल पर शासन करने में खासा समस्याएँ हुई हैं। कभी वह अपने किसी अधिकारी के लिए धरने पर बैठ जाती हैं तो कभी आम जनता के ‘जय श्री राम’ कहने भर से नाराज होकर उन पर कार्रवाई कर बैठती हैं।
हर दूसरी बात पर संविधान बचाने के नारे देने वाली यह वही ममता बनर्जी हैं, जिन्होंने वर्ष 1975 में इंदिरा गाँधी के साथ खड़े होकर जय प्रकाश नारायण की गाड़ी का घेराव कर लिया था और गाड़ी के बोनट पर चढ़कर उनका कलकत्ता पहुँचने पर कॉन्ग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ ज़बरदस्त विरोध किया था।
वर्ष 2019 में बंगाल में इस तरह की हत्याएँ सर्वाधिक देखीं गईं, लेकिन ममता बनर्जी ने इसे कभी भी चिन्ता का विषय नहीं माना। ममता बनर्जी के तानाशाही रवैए के कुछ बड़े कांडों पर एक नजर:
1- बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्या
समय के साथ पश्चिम बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं और भाजपा नेताओं की हत्या बेहद आम बात होती जा रही हैं। TMC के गुंडों का यह आतंकी अभियान गत वर्ष आम चुनाव से पहले अपने चरम पर देखा गया। लेकिन ममता बनर्जी ने इस मामले पर एक भी शब्द बोलना कभी स्वीकार नहीं किया।
बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्या से लेकर भाजपा नेताओं तक को टीएमसी की गुंडागिर्दी का शिकार होना पड़ा है, ऐसे में जब भी केंद्र ने हस्तक्षेप की कोशिश की तो ममता बनर्जी ने उन पर फैसलों को थोपने का आरोप लगाकर पल्ला झाड़ा है। ऐसी ही कई अन्य हत्याएँ बंगाल में निरंतर होती रहीं जिन्हें मीडिया द्वारा राजनीतिक हत्या की संज्ञा देकर भुला दिया गया। अक्टूबर 2019 में बंगाल के नदिया जिले में 50 वर्षीय भाजपा नेता हरलाल देबनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
2- जय श्री राम बोलने वालों की हत्या और गिरफ्तारी
ममता बनर्जी ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वालों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन देखा है। उनकी यह बौखलाहट 2019 के आम चुनाव में भाजपा की भारी जीत के बाद सर्वाधिक देखी गई। मई 30, 2019 को ममता बनर्जी के काफिले के सामने ‘जय श्री राम’ का नारा देने वाले लोगों पर न केवल ममता बनर्जी भड़की थी, बल्कि गाड़ी रोक कर उन पर गाली-गलौज देने का आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार भी करवा दिया गया था।
इसके बाद एक अन्य घटना में अक्टूबर 2019 को एक भाजपा कार्यकर्ता को TMC के गुंडों ने सिर्फ इस कारण गोली मार दी क्योंकि वह केंद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करता रहा था और ‘जय श्रीराम’ भी कह रहा था। ये बात टीएमसी कार्यकर्ताओं को पसंद नहीं थी।
3- CBI-शारदा चिट फंड घोटाला और ममता बनर्जी का धरना
सीबीआई बनाम कोलकाता पुलिस ममता बनर्जी सरकार का सबसे नाटकीय घटनाक्रमों में से एक अध्याय है। सीबीआई के कई अधिकारी सारदा चिटफंड घोटाले से संबंधित पूछताछ के लिए राजीव कुमार के घर पहुँचे थे, लेकिन जब पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के पास सीबीआई पहुँची तो ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। इस पर बीजेपी ने सवाल भी उठाए कि आखिर राजीव कुमार के पास ऐसे कौन से राज हैं, जिन पर पर्दा डालने के लिए ममता बनर्जी सड़क पर उतर आई? लेकिन जवाब की जगह पर ममता बनर्जी ने धरने को जारी रखा।
ममता बनर्जी की भूली-बिसरी यादें
इसके बाद सीबीआई और कोलकाता पुलिस आमने-सामने हो गई और फिर बीच सड़क पर हाथापाई के बाद पुलिस ने सीबीआई अफसरों को कुछ देर के लिए हिरासत में भी ले लिया। इसके तुरंत बाद ममता बनर्जी ने राजीव कुमार के घर जाकर धरने का ऐलान कर दिया। ममता बनर्जी ने धरना स्थल पर ही अपनी कैबिनेट की बैठक की और वहाँ पुलिस वीरता पुरस्कार भी बाँटे और लगे हाथ केंद्र सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया।
4- आईपीएस ऑफिसर की आत्महत्या
पश्चिम बंगाल कैडर के एक सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी ने आत्महत्या कर ली थी, उन्होंने सुसाइड नोट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर उकसाए जाने का आरोप लगाया और आत्महत्या के लिए ममता बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया। आईपीएस अधिकारी गौरव ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उनके सुसाइड करने के पीछे पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ज़िम्मेदार हैं।
5- नागरिकता कानून (CAA) को लेकर बंगाल में TMC का आतंक
तृणमूल कॉन्ग्रेस के ब्लॉक प्रमुख ताहिरुद्दीन शेख का काफिला वहाँ पहुँचा और उसमें शामिल लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। इस गोलीबारी में 2 लोग मारे गए और 3 घायल हुए।
6- CAA विरोध में विज्ञापन
ममता बनर्जी ने टीवी चैनलों पर नागरिकता कानून और NRC नहीं लागू करने का विज्ञापन दिया था। ममता बनर्जी खुद यह कहते हुए दिखीं कि बंगाल के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्य में NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा।
7- नीति आयोग की बैठक से दीदी गायब
2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने ममता बनर्जी को खासा मानसिक कष्ट दिया। जून 2019 को ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक में शामिल होने से यह कहकर मना कर दिया कि नीति आयोग के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है और ऐसे में इन बैठकों में भाग लेने से कोई फायदा नहीं है। बताना आवश्यक है कि मोदी सरकार के पिछले कार्य काल में भी ममता ऐसे बैठकों से दूर रहती थी। इस बार वह चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं गई।
8- कोरोना महामारी के दौरान राज्यपाल से झड़प
ममता बनर्जी ने देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद भी सिर्फ केंद्र सरकार से टकराव और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ममता बनर्जी ने निरंतर नियमों की अवहेलना की और इसके लिए मुस्लिमों को उकसाया भी। सोशल डिस्टेंस के नाम पर मस्जिदों को खुला रखा जा रहा है और कुछ विशेष बाजारों, जहाँ पर मुस्लिम बहुलता है, उन्हें खुला रखा गया।
आखिरकार गृह मंत्रालय को पश्चिम बंगाल को पत्र लिखकर इस पर कार्रवाई करने की बात कहनी पड़ी। हालाँकि, उसके बावजूद भी कुछ ख़ास असर नजर नहीं आया। इसके बाद कोरोना वायरस से लड़ाई को भी ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से जंग में तब्दील कर दिया है और अब ममता बनर्जी एक तानाशाही तरीकों का शिकार बंगाल के राज्यपाल को बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी को लोकतंत्र और संविधान की कितनी परवाह है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी ने उस हर मौके पर राज्यपाल का विरोध किया है, जब उन्हें लगा कि वे सरकार के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। बात चाहे एम के नारायणन की हो, केशरीनाथ त्रिपाठी की, या अब जगदीप धनकर की। जब भी उन्हें लगा कि उनके ‘अधिकारों’ पर हमले हो रहे हैं, उन्होंने राज्यपालों को उनकी सीमाओं में रहने की नसीहत दी है।
ममता बनर्जी आजकल अपने इस कर्तव्य का निर्वाह कोरोना वायरस को जरिया बनाकर कर रही हैं। राज्यपाल ने उन्हें कोरोना वायरस की महामारी के दौरान मुस्लिम तुष्टिकरण को छोड़कर आवश्यक फैसले लेने की सलाह देने पर ममता बनर्जी ने राज्यपाल को सात पन्ने का एक पत्र लिखा। जिसमें बेहद बदसलूकी के साथ कहा गया है कि राज्यपाल धनखड़ भूल गए हैं कि वह (ममता) एक गौरवशाली भारतीय राज्य की निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं, जबकि वह नियुक्त किए गए हैं।
यह सब ममता बनर्जी के बंगाल से वो किस्से हैं, जो मीडिया के द्वारा किसी ना किसी रूप में सामने आते रहे हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इसके बाद भी वह निरंतर केंद्र सरकार पर ही लोकतंत्र की हत्या करने से जैसे जुमलों का प्रयोग करती आई हैं।
देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं शुक्रवार को स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय ने देश में कोरोना वायरस से निपटने और लॉकडाउन की स्थितियों के समाधान के लिए प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने लॉकडाउन को सही कदम बताते हुए कहा कि देश के 15 जिलों में 28 दिनों में कोराना वायरस का नया मामला नहीं आया है। वहीं देश के 80 जिले हैं जहाँ पिछले 14 दिनों से कोई मामला नहीं आया है।
संक्रमित मरीजों के मामलों पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में COVID-19 के 1684 पॉजिटिव केस सामने आए हैं, जो कि भारत में कुल 23,077 मामले की पुष्टि करता हैं। वहीं कल से आज तक 491 लोग ठीक हुए हैं, ठीक होने वालों की कुल संख्या 4748 हो गई है, अब हमारा रिकवरी रेट 20.57% है। उन्होंने कहा कि हम कोरोना वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन (सामुदायिक प्रसार) की जाँच करने के लिए जिला, राज्य स्तरों पर सामुदायिक निगरानी को लागू कर रहे हैं।
In last 24 hours, 1684 #COVID19 positive cases have been reported which takes our total confirmed case to 23,077. Our recovery rate is 20.57%: Lav Agarwal, Joint Secretary, Health Ministry pic.twitter.com/x3rS747KTn
आगे की जानकारी देते हुए गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि 20 अप्रैल से उन क्षेत्रों में कुछ गतिविधियों की अनुमति दी गई है, जो क्षेत्र कंटेंनमेंट या हॉट स्पॉट के दायरे मे नहीं है। लेकिन गलत व्याख्या की वजह से आशंका थी कि फैक्ट्री में कोविड केस मिलने पर फैक्ट्री के CEO को सजा हो सकती है या फैक्ट्री 3 महीने के लिए सील हो सकती है। इसलिए कल गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि 15 अप्रैल को जारी दिशानिर्देशों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत 6 इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीमों (IMCT) का गठन गृह मंत्रालय द्वारा किया गया था। मगर अब कोरोना वायरस की स्थिति को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 4 और IMCT का गठन किया है जो अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और चेन्नई भेजी जा रहीं हैं।
लॉकडाउन की वजह से संक्रमण दर हुआ कम
वहीं रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक डॉ. सुजीत सिंह ने कोरोना वायरस को लेकर एक राहत की खबर देते हुए कहा कि आज हमारा डबलिंग टाइम 9 दिन तक पहुँच गया है, ये दिखाता है कि जो महामारी तेज गति से फैल रही थी, लॉकडाउन कि वजह हम उसे काफी हद तक रोक लगा पाने मे सफल हैं। COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में निगरानी हमारा प्राथमिक हथियार है। लगभग 9.45 लाख लोग निगरानी प्रणाली पर हैं।
लॉकडाउन को सफल क़दम और आँकड़ो की जानकारी देते हुए नीति आयोग के सदस्य और अधिकार प्राप्त समूह 1 के अध्यक्ष डॉ. वीके पॉल ने कहा कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि लॉकडाउन COVID-19 की डबलिंग दर को धीमा करने और जान बचाने में प्रभावी रहा है। लॉकडाउन का निर्णय समय पर था क्योंकि भारत में लगभग 23,000 मामले आज 73,000 हो सकते थे।
अब टुटपूंजी चंपुओं की एक और लॉबी सक्रिय हो गई है। इसमें प्रतीक सिन्हा नाम का गंजा है जो फेक न्यूज के नाम पर खुद ही प्रोपेगेंडा खेलते रहता है। इसके पूरे गिरोह का यही काम है। सबके गुर्दे छीले जाएँगे…
कोरोना वायरस की महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के बीच रमजान का महीना एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। उत्तर प्रदेश के बहराइच की मस्जिदों और दिल्ली चाँदनी चौक के बाजारों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी।
नमाजियों ने पुलिस पर किया हमला
उत्तर प्रदेश स्थित बहराइच के बोंडी थाना क्षेत्र में इसकी सूचना पर जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा इस दौरान नमाजियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले में 31 नमाजियों पर हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और 23 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
नमाजियों ने पुलिस पर डंडों से हमला किया और पत्थरबाजी की, जिसमें 2 दरोगा और 6 पुलिसकर्मियों को काफी चोट आई हैं। कुछ हमलावर वहाँ से फरार भी हो गए।
पुलिस को शुक्रवार को जब दिहवाकला स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने की सूचना मिली तो नमाजियों ने सिपाहियों पर हमला बोल दिया। वहाँ पर किसी तरह से पुलिस ने उपद्रवियों पर काबू पाया और नमाज पढ़ रहे 23 लोगों को हिरासत में लिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार मौलाना सईद, गुल्लऊ, इरफान, सद्दाम, अनवर अली, मो. अतीक, मो. सईद, जाकिर, ताज मोहम्मद, हजरद्दीन, ताहिर, ननकऊ, लुकमान, नफीस, इसारत, जाकिर, बदलू, अलीयार, सद्दीक, सूफियान, लल्लन, जाबिर अली, अली मोहम्मद के खिलाफ लॉकडाउन उल्लंघन व जानलेवा हमले समेत कई अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
दिल्ली में भी रमजान के दौरान लॉकडाउन की धज्जियाँ
राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को रमजान की खरीदारी के लिए दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में मुस्लिमों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का जमकर मजाक बनता नजर आया। आशंका जताई जा रही है कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले वक्त में दिल्ली की स्थिति और बदतर हो जाएगी।
सरकार ने लोगों से घरों में नमाज पढ़ने और कहीं इफ्तार पार्टी आयोजित नहीं करने की अपील की थी। इस दौरान बाजार में मौजूद भीड़ में ना तो दुकानदार और ना ही ग्राहकों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया।