इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों जैसे पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI), जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (JCC) पिंजरा तोड़ और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी ‘स्टूडेंट एक्टिविस्ट्स’ की भूमिका के लिए जाँच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किए गए 9 लोगों के व्हाट्सएप चैट, भाषणों और कथित तौर पर पीएफआई और विदेशों से प्राप्त धन की जाँच कर रही है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, 9 आरोपितों ने स्थानीय नेताओं से महिलाओं और बच्चों को जुटाने के लिए और “विरोध प्रदर्शन की व्यवस्था” पर भी चर्चा की थी। एक सूत्र पुलिस अधिकारी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, “इन सभी को जोड़ने वाला एक सामान्य सूत्र है।”
सोमवार को एक ट्वीट में, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों से संबंधित मामलों की जाँच करते हुए अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता पर जोर दिया है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया है कि 9 लोगों की गिरफ्तारी सोच-विचार कर, तकनीकी और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर की गई थी। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया कि “निहित स्वार्थों” से प्रेरित दुर्भावनापूर्ण अभियान के बावजूद, निर्दोष पीड़ितों को न्याय मिलेगा।
— #DilKiPolice Delhi Police (@DelhiPolice) April 20, 2020
इससे पहले भी जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद पर दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी के दो अन्य नेताओं, मीरान हैदर और सफ़ुरा ज़रगर के खिलाफ एक ही अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए जाने के बाद दोनों अब न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने एफ.आई.आर में यह दावा किया गया है कि सांप्रदायिक हिंसा में खालिद और अन्य लोगों द्वारा एक “पूर्व नियोजित साजिश” थी।
इन सभी ‘एक्टिविस्ट्स’ पर देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा करने के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया है। एफ.आई.आर में कहा गया है कि उमर खालिद ने दो अलग-अलग स्थानों पर भड़काऊ भाषण दिया था और भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झूठा प्रचार प्रसार करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने और सड़कों को जाम करने के लिए नागरिकों से अपील की थी। एफ.आई.आर में यह भी दावा किया गया है कि इस साजिश में कई घरों में आग्नेयास्त्र (firearms), पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें और पत्थर जमा किए गए थे।
पालघर मॉब लिंचिंग को लेकर एक चौंकाने वाली बात ये पता चली है कि इस क्षेत्र में शराब माफियाओं का बोलबाला है। शराब का व्यापार धड़ल्ले से चलता है। सामाजिक सेवा में लगे लोग और साधु-संत इन चीजों का विरोध करते हैं। शराब माफिया ऐसे लोगों को दुश्मन समझते हैं।
पालघर में सक्रिय सामाजिक संस्थाओं ने बताया कि पिछले कई महीनों से ये क्षेत्र धर्मान्तरण और ईसाई मिशनरियों के दुष्प्रचार का गढ़ बन गया है। हिन्दू संगठन इसका विरोध करते हैं और इसलिए साधुओं से वे दुश्मनी पालते हैं।
पालघर मॉब लिंचिंग: प्रत्यक्षदर्शी ने बताई सच्चाई
महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या से कई अनसुलझे सवाल उठ खड़े हुए हैं। महाराष्ट्र पुलिस इस घटना में संलिप्त लोगों को गिरफ़्तार कर लेने की बात कही है। अब इस हत्याकांड के पीछे बड़ी साज़िश का पता चला है। धनुआ क्षेत्र के गढ़-चिंचले गाँव की सरपंच चित्र चौधरी ने इस घटना के बारे में बहुत कुछ बताया है। बता दें कि वो इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी भी हैं। 16 अप्रैल के दिन वो घटनास्थल पर सबसे पहले पहुँची थीं और अपनी आँखों से सब कुछ देखा था।
‘ज़ी न्यूज़’ ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सरपंच से बात की। उन्हें घटना वाले दिन शाम 8:30 में पता चला कि चेकपोस्ट पर एक गाड़ी को रोका गया है। वे 15 मिनट के भीतर वहाँ पहुँचीं तो पता चला कि गाड़ी के अंदर एक ड्राइवर और दो साधु हैं। उन तीनों ने सरपंच का अभिवादन भी किया। वे उन तीनों से बात कर रही थीं, तभी अचानक से एक बड़ी भीड़ वहाँ जमा हो गई। बदमाशों ने गाड़ी की टायरों को पंक्चर कर दिया और गाड़ी को धक्का मार पलट दिया।
चित्रा ने बताया कि उन्होंने लोगों को समझाने की भरसक कोशिश की। वे पुलिस के आने तक लोगों को रोकना चाहती थीं लेकिन भीड़ उन पर ही गुस्सा हो गई। सरपंच ने बताया कि वो कम से कम 3 घंटे तक उग्र भीड़ को रोकने की कोशिश करती रहीं। पुलिस घटनास्थल पर लगभग रात 11 बजे पहुँची। गाड़ी में से दो लोग किसी तरह पुलिस की गाड़ी में बैठने में सफल रहे। लेकिन, जैसे ही वृद्ध साधु पुलिस का हाथ पकड़ कर बाहर निकले, भीड़ अचानक से बेख़ौफ़ हो गई और उन पर हमला कर दिया।
पालघर हत्याकांड पर बड़ा खुलासा (साभार: ज़ी न्यूज़)
चित्रा ने बताया कि इस घटना में उन्हें भी चोटें आईं और वो किसी तरह भाग कर अपने घर पहुँचने में कामयाब रहीं। जब वे रात 12 बजे फिर से चेकपोस्ट के पास पहुँचीं तो उन्होंने देखा कि वहाँ दोनों साधुओं और ड्राइवर की लाशें पड़ी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शी के बयान के बाद ये सवाल तो खड़ा होता ही है कि अचानक से भीड़ को किसने भड़काया था कि वो साधुओं को मार डाले? सरपंच का कहना है कि उन तीनों की हत्या के पीछे कोई राजनीतिक साजिश है।
ईसाई मिशनरी और उन्हें मिलता राजनीतिक संरक्षण
उग्र भीड़ के साथ एनसीपी का काशीनाथ चौधरी भी खड़ा था। कहा जा रहा है कि यहाँ के ईसाई मिशनरियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और एनसीपी नेता का वहाँ होना इस बात की पुष्टि करता है। सीपीएम के नेता भी उस भीड़ में शामिल थे। वामपंथियों का हिन्दू-विरोधी चेहरा किसी से छिपा नहीं है। इससे पता चलता है कि कल्पवृक्ष गिरी महाराज और सुशील गिरी महाराज को राजनीतिक कारणों से मारा गया है। साधुओं की हत्या के लिए बच्चा-चोर की अफवाह तो बस असली साज़िश छुपाने का आवरण है।
पालघर के इस क्षेत्र में रावण की पूजा भी होती आई है। यहाँ इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब रावण का महिमामंडन किया गया और उसकी पूजा के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके कारण भी ट्राइबल समूहों और हिंदूवादी समूहों में झड़प की कई ख़बरें आई थीं। यहाँ से कई कोण निकलते हैं, जैसे- असुरों का महिमामंडन, ईसाई मिशनरियों का प्रभाव, उन्हें मिलता राजनीतिक संरक्षण और शराब माफियाओं का खेल। हिन्दू संगठनों ने भी कहा है कि इसके पीछे बड़ी साजिश है।
घटना को छिपाने की पुलिस ने की थी कोशिश
जैसा कि हमें पता है, इस घटना को लेकर तीन दिन बाद लोगों को पता चला, जब वीडियो वायरल हुआ। न सिर्फ़ मीडिया बल्कि पालघर पुलिस ने भी मामले को दबाने की भरसक कोशिश की। अगर ऐसा नहीं होता तो घटना के तीन दिन बाद वीडियो वायरल होने पर पुलिस और प्रशासन हरकत में नहीं आता। पालघर पुलिस ने मॉब लिंचिंग को दबाने के लिए बार-बार बयान भी बदले। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी तभी बयान दिया, जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और जनाक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा था।
पश्चिम बंगाल भाजपा ट्विटर अकाउंट से 3 मिनट का एक वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो में स्थानीय लोगों द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पर ऐतराज जताते हुए सुना जा सकता है, क्योंकि कथित तौर पर ये स्वास्थ्यकर्मी रात के अँधेरे में कोरोना संक्रमित मरीजों के शव को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहे थे।
पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने राज्य सरकार पर सरकारी दिशा-निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाकर रिहायशी इलाकों में कोरोना संक्रमण से जान गॅंवाने वालों के शव को ठिकाने लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा, “रात के अँधेरे में बेखौफ होकर शवों को ठिकाना क्यों लगाया जा रहा है? क्या मृतकों की कोई गरिमा नहीं होती है? सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर इन शवों को आवासीय क्षेत्रों में क्यों ले जाया जा रहा है? समझा जा सकता है कि इस समय बंगाल की स्थिति कितनी डरावनी है। क्या ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कुछ ‘ममता’ दिखाएँगी?”
Why dispose bodies unceremoniously in the dark of the night? Do the dead have any dignity? Why take infected bodies to residential areas in violation of norms? This is how scary the situation in Bengal is, right now. Will Mamata Banerjee show some ‘mamata’ for the people of WB? pic.twitter.com/tomyE12KPo
इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा, “इतनी अमानवीयता!!! कोरोना से हुई मौतों को छुपाने के लिए शवों को अँधेरे में ठिकाने लगाया जा रहा है। शवों का ये अपमान है और परंपरा के विपरीत भी है, रहवासी इलाके में शवों के अंतिम संस्कार से संक्रमण फैलने का भी खतरा है! समझा जा सकता है कि इस समय राज्य की स्थिति कितनी भयावह है।”
इतनी अमानवीयता !!!
कोरोना से हुई मौतों को छुपाने के लिए शवों को अंधेरे में ठिकाने लगाया जा रहा है। शवों का ये अपमान है और परंपरा के विपरीत भी है, रहवासी इलाके में शवों के अंतिम संस्कार से संक्रमण फैलने का भी खतरा है! समझा जा सकता है कि इस समय राज्य की स्थिति कितनी भयावह है। https://t.co/X6oWufQnyj
वीडियो की शुरुआत में एक स्वास्थ्यकर्मी कहता है, “हम कुछ भी लोड या अनलोड नहीं कर रहे हैं।” इसके बाद वीडियो में कुत्तों की भौंकने की आवाज के साथ ही बैकग्राउंड में स्थानीय लोगों द्वारा जताए जा रहे ऐतराज को सुना जा सकता है। स्थानीय लोग लगातार स्वास्थ्यकर्मियों पर चिल्ला रहे थे, क्योंकि उन्होंने रहस्यमय तरीके से एक रहवासी कॉलोनी में अपनी एंबुलेंस खड़ी की थी।
वीडियो बनाने वाले को स्वास्थ्यकर्मियों से कहते हुए सुना जा सकता है कि वो लाश लेकर लेकर आए हैं। इसके साथ ही एक स्थानीय को आक्रोश में बोलते हुए देखा जा सकता है कि लाश को वहाँ से ले जाए, वरना वो अस्पताल को जला देंगे। स्थानीय लोग लगातार उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जता रहे थे और PPE पहने स्वास्थ्यकर्मी सड़क के बीचों-बीच खड़े थे।
एक शख्स की दूर से आती आवाज को सुना जा सकता है, जिसमें वो पूछता है कि यहाँ क्या हो रहा है? वहीं एक अन्य शख्स बोलता है कि यहाँ से चले जाओ वरना हम तुम्हारी गाड़ी को जला देंगे। तभी एक और आवाज सुनाई देती है जो उसे गाड़ी के साथ वहाँ से चले जाने के लिए कहता है।
वीडियो में ठीक 3 मिनट पर, दो स्वास्थ्य कर्मचारियों को एंबुलेंस से काले रंग के एक भारी बैग को निकालते और फिर से वापस एंबुलेंस में लोड करते हुए देखा जा सकता है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात है कि शुरुआत में एक स्वास्थ्यकर्मी ने किसी भी चीज को लोड या अनलोड करने से इनकार किया था। वीडियो में इनकी बातों और कामों में विरोधाभास साफ दिख रहा है।
तभी एक आदमी बैग की तरफ इशारा करते हुए कहता है, “ये देखो बॉडी उठा रहा है।” एक स्वास्थ्यकर्मी को लोगों की तरफ देखकर हाथ हिलाते हुए यह बताने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है कि वे लोग कॉलोनी से जा रहे हैं। इसी बीच एक आदमी सवाल करता है कि उसे यहाँ आने के लिए किसने बोला था?
गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में आसनसोल के भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने कोरोना संक्रमितों के लिए किए गए इंतजाम की पोल-पट्टी खोलते हुए ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में दिखाया गया था कि किस तरह टोलीगंज के एमआर बंगूर अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड के नाम पर कोरोना संदिग्धों को बदइंतजामी के साथ रखा जा रहा है। उन्होंने इस वीडियो पर ममता बनर्जी का ध्यान आकर्षित करवाते हुए पूरे मामले पर इंक्वायरी करवाने की अपील की थी।
वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने इसमें एक डेड बॉडी की तरफ कैमरा किया हुआ था और करीब 45 सेकेंड तक उसे दिखाया कि कैसे वहाँ पड़े शव को कोई अटेंड करने नहीं आ रहा और उसके आस-पास लोग बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए घूम रहे थे। वीडियो में शख्स कहता है कि यहाँ ऐसे लोग हैं, जिनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी राज्य में तेजी से जाँच के लिए कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ टेस्ट का रिजल्ट भी कम से कम 4 से 5 दिनों के बाद आता है।
इस वीडियो में सबसे चिंताजनक बात ये देखने को मिली कि प्रशासन जिंदा लोगों के प्रति तो लापरवाही बरत ही रहा, मगर जो मर गए हैं उन्हें भी वहाँ से निकालने काम नहीं कर रहा। उनके शव कोरोना संदिग्धों के बीच में ही पड़े हुए हैं।
इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने राज्य के अस्पतालों में मोबाइल फोन ले जाने पर पांबदी लगाए जाने के फैसले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, मरीज या तीमारदार कोई भी अस्पताल के भीतर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। मुख्य सचिव ने बताया कि संक्रमित जगहों पर मोबाइल के इस्तेमाल से कोरोना वायरस फैलने का खतरा होता है। हालाँकि बाबुल सुप्रियो के वीडियो शेयर करने के बाद आए इस फैसले सवाल उठने लगे कि क्या राज्य की ममता बनर्जी सरकार कोरोना संक्रमण पर जमीनी हकीकत को दबाने की कोशिश कर रही है।
बिहार के पटना सिटी में 20 अप्रैल को लॉकडाउन विवाद में सन्नी गुप्ता की हत्या कर दी गई। हमले का मुख्य आरोपित मोहम्मद चॉंद अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। सन्नी का परिवार दहशत में है और अब मुस्लिम बहुल इलाके से पुश्तैनी घर बेचकर निकलने का रास्ता खोज रहा है।
सन्नी की हत्या ऐसे वक्त में की गई जब उसका परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था। एक मई को सन्नी की बहन दीपिका की शादी तय थी। हालॉंकि लॉकडाउन के कारण इस पर संशय था। लेकिन परिवार में तैयारियॉं चल रही थी। सन्नी की हत्या के बाद शादी टाल दी गई है। यह जानकारी सन्नी के भाई दीपक गुप्ता ने दी।
पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। दीपक गुप्ता के मुताबिक भले ही परिवार की सुरक्षा के नाम पर घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात है, लेकिन जब तक मुख्य आरोपित चाँद मोहम्मद गिरफ्तार नहीं हो जाता हम खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।
इससे पहले दीपक ने ऑपइंडिया को बताया था कि चॉंद हथियारों का तस्कर है। उनका परिवार उसकी गुंडई का विरोध करते रहे हैं। इस कारण वे लोग उसके निशाने पर थे। दीपक के अनुसार घटना वाले दिन भी सन्नी के सिर में गोली चॉंद ने घर में घुसकर मारी थी।
हालॉंकि खाजेकलाँ थानाध्यक्ष सनोवर खां ने इन आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने बताया कि छह लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया था। इनमें से पॉंच को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। चॉंद मोहम्मद की तलाश जारी है। उन्होंने माना कि चॉंद का आपराधिक अतीत रहा है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामला गंभीर होने की बात कहकर उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि सन्नी गुप्ता टेंट का व्यवसाय करते थे। तीन साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। दो साल का बेटा अनुराग और 4 महीने की एक बेटी आराध्या है। असल में 20 अप्रैल को लॉकडाउन पालन कराने को लेकर स्थानीय युवकों का एनसीसी कैडेट के साथ विवाद हो गया था। कैडेट्स पर पथराव किया गया जिसका सन्नी ने विरोध किया था।
चाँद की गिरफ्तारी और अन्य माँगों को लेकर पूर्व पार्षद बलराम चौधरी और निगम पार्षद शोभा देवी उपवास पर भी बैठे थे। पूर्व पार्षद बलराम चौधरी ने बताया कि सरकार से पीड़ित परिवार की सुरक्षा के साथ मुआवजा की माँग की गई है। इसके लिए मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लॉकडाउन के दौरान एक नाबालिग से रेप का मामला सामने आया है। अस्पताल जा रही 17 साल की पीड़िता को दो आरोपितों ने कार में खींच लिया। करीब आठ किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। आरोपित के नाम शफीक खान और आबिद खान बताए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक 18 अप्रैल को पीड़िता जेपी अस्पताल के पास अपने दोस्त के साथ जा रही थी। इसी दौरान आरोपितों ने उसे जबरदस्ती कार में खींच लिया। आरोपित उसे शहर के भेल इलाके में एक सुनसान जगह पर ले गए। यहाँ शफीक ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद पीड़िता को मयूर पार्क के पास छोड़ कर फरार हो गए। नाबालिग लड़की ने कहा कि वह मदद के लिए चिल्लाती रही लेकिन लॉकडाउन की वजह से कोई आसपास नहीं था।
पीड़िता को अगवा करने की जगह से लेकर बलात्कार की जगह के बीच की दूरी करीब 8 किलोमीटर है। पीड़िता को अगवा कर कार जेपी अस्पताल और गोविंदपुरा के बीच बोर्ड ऑफिस स्क्वायर सहित कई पुलिस चौकियों से होकर गुजरी होगी। लेकिन अपराधियों को कहीं भी नहीं रोका गया।
लॉकडाउन के बीच भोपाल में रेप की दूसरी घटना
आरोपितों ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो वे उसे मार डालेंगे। पीड़िता इस घटना से काफी डर गई थी, इसलिए वो चुप हो गई। लेकिन फिर बाद में उसे उसकी एक दोस्त ने हिम्मत दी और पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी।
इसके बाद पीड़िता में शिकायत करने का साहस आया और उसने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन उन्होंने FIR दर्ज न करते हुए इसे हबीबगंज पुलिस थाने भेज दिया। हबीबगंज पुलिस ने पीड़ित लड़की का बयान लेकर आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपितों के नाम शफीक खान और आबिद खान बताया। आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हबीबगंज पुलिस थाना प्रभारी राकेश श्रीवास्तव ने बताया, “17 साल की लड़की का शनिवार (अप्रैल 18, 2020) रात को अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया गया। इस मामले में हमने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक 24 वर्षीय शफीक खान और दूसरा 22 वर्षीय आबिद खान है।”
लॉकडाउन के बीच भोपल में रेप की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 17 अप्रैल को एक दृष्टिहीन बैंक कर्मचारी से उसके घर में घुस रेप किया गया था।
गौरतलब कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक 4 साल की बच्ची के साथ रामपुर निवासी इरफान (पुत्र तय्यूब) ने दुष्कर्म किया था। वहीं दिल्ली में शाह कंवर अली नाम के युवक ने मैट्रिमोनियल साइट से युवती को फँसाकर मिलने के लिए बुलाया और फिर उसके साथ रेप किया।
पाकिस्तान में दो हिंदू नाबालिग लड़कियों को अगवा कर लिया गया है। घटना सिंध प्रांत की है। इलाके के प्रभावशाली नेता और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य पीर फैसल शाह जीलानी के भाई पर दोनों बहनों को अगवा करने का आरोप है।
पीड़ित परिवार के मुताबिक उन्हें पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही। अगवा करने वाले धमकियॉं दे रहे हैं। परिजनों ने एक वीडियो जारी कर दोनों बच्चियों का पता लगाने की माँग की है।
पड़ोसी मुल्क में कोरोना संकट के दिनों में भी अल्पसंख्यक पर जुल्म-ज्यादती का दौर जारी है। इससे पहले हिंदुओं और ईसाइयों को राशन नहीं दिए जाने का मामला सामने आया था।
सिंध छोड़कर जाना चाहता है पीड़ित परिवार
घटना के संबंध में पीड़ित परिवार के परिजनों ने एक वीडियो जारी किया है। परिजनों ने इस घटना के पीछे सांसद जिलानी के भाई का हाथ बताया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि शिकायत करने के बाद पुलिस से सहायता मिलना तो दूर उल्टे परिवार को धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब वे इस यातना को और बर्दाश्त नहीं कर सकते। वे सिंध छोड़कर जाना चाहते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस भी अपराधी का साथ दे रही है। उनका कहना है कि राजनेताओं के दबाव की वजह से पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। परिवार के एक सदस्य ने कहा, “पुलिस हमारे साथ सहयोग नहीं कर रही है। वे हमें अदालत में ले गए लेकिन पीड़ित को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया। पुलिस भी दोषियों का पक्ष ले रही है।”
हिंदुओं के धर्मांतरण और निकाह के लिए बदनाम है पाकिस्तान का सिंध
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें इस बात का डर है कि अगर पुलिस ने इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की तो दोनों अगवा बहनों का जबरन धर्मांतरण कर निकाह करवा दिया जाएगा। सिंध प्रांत में पहले भी ऐसी घटनाएँ होती रही हैं। वहाँ की विधानसभा में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए कानून बनाने की माँग भी उठ चुकी है।
कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी पाकिस्तान से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने को कहा है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी सांसदों के दबाव के कारण नेशनल असेंबली में इस बाबत कोई कड़ा कानूनी प्रावधान नहीं हो पा रहा है। सिंध प्रांत जबरन धर्मांतरण और निकाह के लिए बदनाम है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं और ईसाइयों के साथ उत्पीड़न की घटनाएँ कोई नई नहीं है। वहाँ समय-समय पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता रहा है और पुलिस में शिकायत के बावजूद ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की जाती। मूवमेंट फॉर सॉलिडेरिटी एंड पीस ने भी इस मुद्दे को उठाया है। संगठन का कहना है कि हर साल पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई परिवारों के एक लड़कियों को निशाना बनाया जाता है और जबरन उनकी शादी मुस्लिम युवकों से करा दी जाती है। सरकार की ओर से ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाते।
गौरतलब है कि 13 मार्च को बहावलपुर के मुनीर अहमद ने 15 वर्षीय नाबालिग हिन्दू लड़की को अगवा कर लिया। इसके बाद फैसलाबाद ले जाकर मुनीर ने उसके साथ बलात्कार किया। घटना के बाद मौलवियों ने उस बच्ची को जबरन इस्लाम कबूल कराकर उसकी शादी बलात्कारी मुनीर अहमद के साथ निकाह करवा दिया।
वहीं 15 जनवरी को सिंध प्रांत के जैकोबाबाद जिले से कक्षा 9 में पढ़ने वाली 15 वर्षीय महक को अली रजा ने अगवा कर लिया था। उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया और फिर एक मुस्लिम से निकाह करवा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने भी लड़की की कोई मदद नहीं की।
देश के अलग-अलग राज्यों से नमाज के लिए मस्जिदों में जुटने और पुलिस पर हमले की खबरें सामने आई है। यहॉं तक कि राजधानी दिल्ली के बाजार में रमजान शुरू होते ही भीड़ देखने को मिली है। यह सब तब हो रहा है जब कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देशभर में लॉकडाउन है।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर लॉकडाउन का उल्लंघन कर सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। बहराइच, शाहजहाँपुर में नमाजियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। फिरोजाबाद में घंटों मजहबी नारे लगाए। इसके बाद एम्बुलेंस को निशाना बनाते हुए तोड़फोड़ की गई।
बहराइच जिले के खैरीघाट थाना क्षेत्र के गाँव तेलियानपुरवा की मस्जिद के अंदर मौलवी की अगुवाई में सामूहिक रूप से जुमे की नमाज अदा की गई। इसकी जानकारी जब पुलिस को हुई तो वह तत्काल गाँव पहुँच गई। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मौलवी सहित नौ नमाजियों को गिरफ्तार कर लिया।
हाय रे जाहिलियत!
बहराइच के बौंडी थानाक्षेत्र के डिहवाकला गांव की मस्जिद में लॉकडाउन का उल्लंघन कर जुमे की नमाज पढ़ रहे 23 नमाजियों को पुलिस ने पकड़ा।
गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम के 1 सिपाही पर नमाजियों ने जानलेवा हमला भी कर दिया।
यूपी के ही फिरोजाबाद के कई इलाकों में शुक्रवार देर रात मजहबी नारेबाजी की गई। इससे इलाके में हड़कंप मच गया। लोग अपनी-अपनी छतों पर आ गए। इस दौरान दूसरे समुदाय से भी लोग नारेबाजी करने लगे। समुदाय विशेष के लोग धार्मिक नारेबाजी करते हुए सड़कों पर जमा हो गए और देखते ही देखते जाटवपुरी चौराहे पर एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर दी। एबुलेंस चालक आकाश यादव अपना जान बचाकर वहाँ से भागना पड़ा।
इसके बाद सूचना पर पहुँची पुलिस को हालात पर काबू पाने के लिए लाठियाँ फटकारनी पड़ीं। अमर उजाला की खबर के मुताबिक हाजीपुरा, बारहबीघा, लालपुर, तीसफुटा और रामगढ़ क्षेत्र में धार्मिक नारेबाजी की गई।
शुक्रवार रात को शाहजहांपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र की एक मस्जिद में लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए लोग इकट्ठा हो गए। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को नमाजियों के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद पुलिस को वहाँ से भीड़ खदेड़ने के लिए लाठियाँ फटकारनी पड़ी।
झारखंड के गोड्डा में भी पुलिस पर हमला किया गया। यहॉं के रहबड़िया गॉंव की मस्जिद में शुक्रवार को 40—50 लोग जुटे थे। पुलिस मौके पर पहुॅंची तो उस पर पथराव कर दिया गया। तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए और गश्ती वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। पॉंच लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
प्रभात खबर के गोड्डा संस्करण में प्रकाशित खबर
इसी तरह की खबर कश्मीर से भी सामने आई। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कासबयार द्रबगाम इलाके की एक मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस को हुई तो वह तत्काल मौके पर पहुँच गई और लोगों को समझाने की कोशिश की। इस पर नमाजियों ने पुलिस दल को वहाँ से भगाने के लिए उन पर पथराव करना शुरू कर दिया। इस पर काबू पाने के लिए पुलिस को अश्रु गैस के गोले दागने पड़े। इसके बाद इलाके में तनाव पैदा हो गया।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बहराइच के बोंडी थाना क्षेत्र के एक गाँव की मस्जिद में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे। इसके बाद सूचना पर जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा तो नमाजियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में 31 नमाजियों पर हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था साथ ही मौके से 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को रमजान की खरीदारी के लिए दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में मुस्लिमों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का जमकर मजाक बनता नजर आया। आशंका जताई जा रही है कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले वक्त में दिल्ली की स्थिति और बदतर हो जाएगी।
महाराष्ट्र के पालघर के बाद बाद अब पंजाब से संत पर हमले की खबर आई है। यहॉं होशियारपुर में स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप के ऊपर जानलेवा हमला हुआ। मास्क पहने हमलावरों ने धारदार हथियार से हमला किया।
शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) रात तकरीबन 10 बजे स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप होशियारपुर स्थित आश्रम में विश्राम कर रहे थे। 2 लोग दीवार फाँद आश्रम में घुसे और स्वामी जी पर हमला कर दिया। उस वक़्त स्वामी पुष्पेंद्र आश्रम में अकेले थे।
Two people attacked Swami Pushpendra ji in Punjab Tiday ..Swami ji is attacked with a deadly weapon. Why Sadhus are on target ? What are the intentions and who is behind such criminals ? Kindly look and work for the safety of Sadhus. @HMOIndia@AmitShah@capt_amarinderpic.twitter.com/9QCY2cq0Ng
बाद में स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप को अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने पुलिस को बताया कि उन अज्ञात हमलावरों ने उनके हाथ-पाँव बाँध दिए। फिर हमला कर उन्हें घायल कर दिया और आश्रम से 50 हजार रुपए एवं कुछ अन्य समान लेकर फरार हो गए। स्वामी पुष्पेंद्र ने बताया कि बदमाशों ने उनका गला भी दबाया।
स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप ने बताया कि उन्होंने हमलावरों से कहा कि पैसे लेकर चले जाओ, लेकिन मुझे मत मारो। इसके बावजूद हमलावरों ने उन पर बुरी तरह से हमला किया। गला दबाने के साथ ही हमलावरों ने उनके सिर पर भी किसी हथियार से वार किया, जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए।
This is horrifying. I don’t even have words left. Hindus, this is not just one more sadhu attacked. This is one more pillar of Hinduism brought down. He survived, but will you?
गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार (अप्रैल 16, 2020) को महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं सहित 3 लोगों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना का वीडियो 3 दिन बाद रविवार को वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों को सच्चाई पता चली थी। पालघर मॉब लिंचिंग का ये वीडियो दिल दहला देने वाला था। उस वीडियो को देख कर कोई भी काँप उठे। इस वीडियो में दिख रहे एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने जानकारी माँगी थी। जिसके बाद पता चला कि वो शरद पवार की पार्टी (NCP) का आदमी है।
अभी तक इस मॉब लिंचिंग के मामले में FIR दर्ज कर 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 101 लोगों को 30 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है, जबकि 9 नाबालिगों को जुवेनाइल सेंटर होम में भेज दिया गया है।
अखिल भारतीय संत समिति ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मॉब लिंचिंग की सीबीआई जाँच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पत्र में हत्या के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताई गई है।
पत्र में कहा गया कि पालघर में दो पूज्य संतों और उनके ड्राइवर की निर्मम हत्या का होना महाराष्ट्र के अंदर कानून व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करता है। इसलिए माननीय गृह मंत्री भारत सरकार से आग्रह है कि संत समिति द्वारा सुझाए बिंदुओं पर केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई द्वारा जाँच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करवाने की कृपा करें।
इसके साथ ही पत्र में कहा गया कि संपूर्ण मामले में महाराष्ट्र के मंत्री अनिल देशमुख की भूमिका संदिग्ध है। इसलिए विश्वास नहीं कर सकते क्योंकि घटना को एक ही समुदाय का मामला बताते हुए ट्वीट करना एकपक्षीय है। इसलिए मामले की सीबीआई जाँच करवाई जाए।
राजस्थान के बाँसवाड़ा में आए दिन गौ हत्या कि वारदातें सामने आ रही हैं। मामला पाटन थाना क्षेत्र का हैं, जहाँ कल (अप्रैल 23, 2020) रात कुछ लोगों ने नशे में गौ हत्या कर दी। अखिल भारत कृषि गौ सेवा संघ की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक पाटन थाना क्षेत्र में ईसाई धर्मांतरण गतिविधियाँ पहले से ही सक्रिय थी। गौ हत्या के पीछे भी कहीं न कहीं ईसाई मिशनरी के लोगों का ही हाथ है। आरोप यह भी लगाया है कि कुशलगढ़ विधायक अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है एवं मामले को दबाने के लिए राजनीतिक दबाव डाल रही है।
बीयर की बोतल और खून
राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट जसवंत सिंह राठौड़ एवं राजस्थान प्रदेश संगठन मंत्री भुवन मुकंद पंड्या ने इस घटना पर कड़ी निंदा करते हुए इस मामले मे सख्त कार्यवाही की माँग की है। पाटन पुलिस थाना प्रभारी द्वारा इस गौ हत्या में लिप्त एक अपराधी को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही पुलिस बाकी अपराधियों की तलाश कर रही है।
गौ हत्या के बाद जाँच के लिए पहुँची पुलिस
अखिल भारत कृषि गौ सेवा संघ के राजस्थान प्रदेश संगठन मंत्री भुवन मुकुंद ने ऑपइंडिया से बताया, “जहाँ पर गाय की निर्मम हत्या की गई। वह क्षेत्र बाँसवाड़ा जिले का सुदूर झाबुआ मध्य प्रदेश से लगा हुआ है। इस क्षेत्र में ईसाई मिशनरी का कार्य काफी बड़े पैमाने पर है। यहाँ ईसाई चर्च हर गाँव में बने हैं। भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर ईसाई बनाने अर्थात धर्मांतरण का कार्य अंग्रेजों के शासन काल से ही इस क्षेत्र में चला आ रहा है।”
मन को आहत कर देने वाला दृश्य
बहुत ज़्यादा संख्या में आदिवासी वनवासी लोग अपना धर्म परिवर्तन करके ईसाई बन चुके है। इस गौ हत्या में अपराधियों ने पहले वहाँ शराब आदि पी और फिर गाय की निर्मम हत्या कर उसका माँस निकालने के लिए उसका चमड़ा उधेड़ दिया। लेकिन फिर किसी ने इस घटना को देख पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। मगर बाकी लोग अँधेरे में भाग गए। गिरफ्तार हुए शख्स ने पुलिस को सभी के नाम बता दिए है। अब पुलिस पूरी घटना की जाँच मे जुट गई है। साथ ही बाकी अपराधियों की भी तलाश कर रही है।
यह घटना कोई पहली घटना नही है, जो बांसवाड़ा मे घटित हुई है। इससे पहले भी गौ हत्या को लेकर बाँसवाड़ा से कई मामले सामने आए है। जिसमे 6 फरवरी 2018 को कलिंजरा थाना क्षेत्र के गाँव लीलवानी में गाय को पालने के लिए खरीद कर उसे मार कर निवाला बनाने के मामला सामने आया था। जिसमे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।
वहीं दूसरी खबर 31 दिसंबर 2018 को आई थी। जहाँ बांसवाड़ा जिले के छोटी टिम्बी गाँव में देर रात पाँच लोग गौ हत्या कर रहे थे। जिस पर मुखबिर के द्वारा यह जानकारी पुलिस को दी गयी। फिर आनंदपुरी थाना पुलिस ने जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँच कर और पाँच में से एक आरोपित को गिरफ्तार किया। बाकि 4 आरोपित अँधेरे का फायदा उठा कर वहाँ से फरार हो गए।
पश्चिम बंगाल को ‘अपना इलाका’ साबित करने के लिए वहाँ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमेशा की तरह ही तानाशाही तरीका अपनाया है। बात चाहे COVID-19 वायरस के दौरान जारी देशव्यापी बंद में केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार की नीतियों पर अमल करने की हो या फिर हिन्दुओं के साथ होने वाले अत्याचारों पर चुप्पी साधने की हो, ममता बनर्जी ने हमेशा मुस्लिम तुष्टिकरण के जरिए सिर्फ अपनी व्यक्तिगत राजनीति को ही ध्येय बनाकर कार्य किया है।
ममता बनर्जी 2011 से लगातार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के पद पर बनी हुई हैं, लेकिन 2014 से उन्हें पश्चिम बंगाल पर शासन करने में खासा समस्याएँ हुई हैं। कभी वह अपने किसी अधिकारी के लिए धरने पर बैठ जाती हैं तो कभी आम जनता के ‘जय श्री राम’ कहने भर से नाराज होकर उन पर कार्रवाई कर बैठती हैं।
हर दूसरी बात पर संविधान बचाने के नारे देने वाली यह वही ममता बनर्जी हैं, जिन्होंने वर्ष 1975 में इंदिरा गाँधी के साथ खड़े होकर जय प्रकाश नारायण की गाड़ी का घेराव कर लिया था और गाड़ी के बोनट पर चढ़कर उनका कलकत्ता पहुँचने पर कॉन्ग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ ज़बरदस्त विरोध किया था।
वर्ष 2019 में बंगाल में इस तरह की हत्याएँ सर्वाधिक देखीं गईं, लेकिन ममता बनर्जी ने इसे कभी भी चिन्ता का विषय नहीं माना। ममता बनर्जी के तानाशाही रवैए के कुछ बड़े कांडों पर एक नजर:
1- बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्या
समय के साथ पश्चिम बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं और भाजपा नेताओं की हत्या बेहद आम बात होती जा रही हैं। TMC के गुंडों का यह आतंकी अभियान गत वर्ष आम चुनाव से पहले अपने चरम पर देखा गया। लेकिन ममता बनर्जी ने इस मामले पर एक भी शब्द बोलना कभी स्वीकार नहीं किया।
बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्या से लेकर भाजपा नेताओं तक को टीएमसी की गुंडागिर्दी का शिकार होना पड़ा है, ऐसे में जब भी केंद्र ने हस्तक्षेप की कोशिश की तो ममता बनर्जी ने उन पर फैसलों को थोपने का आरोप लगाकर पल्ला झाड़ा है। ऐसी ही कई अन्य हत्याएँ बंगाल में निरंतर होती रहीं जिन्हें मीडिया द्वारा राजनीतिक हत्या की संज्ञा देकर भुला दिया गया। अक्टूबर 2019 में बंगाल के नदिया जिले में 50 वर्षीय भाजपा नेता हरलाल देबनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
2- जय श्री राम बोलने वालों की हत्या और गिरफ्तारी
ममता बनर्जी ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वालों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन देखा है। उनकी यह बौखलाहट 2019 के आम चुनाव में भाजपा की भारी जीत के बाद सर्वाधिक देखी गई। मई 30, 2019 को ममता बनर्जी के काफिले के सामने ‘जय श्री राम’ का नारा देने वाले लोगों पर न केवल ममता बनर्जी भड़की थी, बल्कि गाड़ी रोक कर उन पर गाली-गलौज देने का आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार भी करवा दिया गया था।
इसके बाद एक अन्य घटना में अक्टूबर 2019 को एक भाजपा कार्यकर्ता को TMC के गुंडों ने सिर्फ इस कारण गोली मार दी क्योंकि वह केंद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करता रहा था और ‘जय श्रीराम’ भी कह रहा था। ये बात टीएमसी कार्यकर्ताओं को पसंद नहीं थी।
3- CBI-शारदा चिट फंड घोटाला और ममता बनर्जी का धरना
सीबीआई बनाम कोलकाता पुलिस ममता बनर्जी सरकार का सबसे नाटकीय घटनाक्रमों में से एक अध्याय है। सीबीआई के कई अधिकारी सारदा चिटफंड घोटाले से संबंधित पूछताछ के लिए राजीव कुमार के घर पहुँचे थे, लेकिन जब पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के पास सीबीआई पहुँची तो ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। इस पर बीजेपी ने सवाल भी उठाए कि आखिर राजीव कुमार के पास ऐसे कौन से राज हैं, जिन पर पर्दा डालने के लिए ममता बनर्जी सड़क पर उतर आई? लेकिन जवाब की जगह पर ममता बनर्जी ने धरने को जारी रखा।
ममता बनर्जी की भूली-बिसरी यादें
इसके बाद सीबीआई और कोलकाता पुलिस आमने-सामने हो गई और फिर बीच सड़क पर हाथापाई के बाद पुलिस ने सीबीआई अफसरों को कुछ देर के लिए हिरासत में भी ले लिया। इसके तुरंत बाद ममता बनर्जी ने राजीव कुमार के घर जाकर धरने का ऐलान कर दिया। ममता बनर्जी ने धरना स्थल पर ही अपनी कैबिनेट की बैठक की और वहाँ पुलिस वीरता पुरस्कार भी बाँटे और लगे हाथ केंद्र सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया।
4- आईपीएस ऑफिसर की आत्महत्या
पश्चिम बंगाल कैडर के एक सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी ने आत्महत्या कर ली थी, उन्होंने सुसाइड नोट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर उकसाए जाने का आरोप लगाया और आत्महत्या के लिए ममता बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया। आईपीएस अधिकारी गौरव ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उनके सुसाइड करने के पीछे पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ज़िम्मेदार हैं।
5- नागरिकता कानून (CAA) को लेकर बंगाल में TMC का आतंक
तृणमूल कॉन्ग्रेस के ब्लॉक प्रमुख ताहिरुद्दीन शेख का काफिला वहाँ पहुँचा और उसमें शामिल लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। इस गोलीबारी में 2 लोग मारे गए और 3 घायल हुए।
6- CAA विरोध में विज्ञापन
ममता बनर्जी ने टीवी चैनलों पर नागरिकता कानून और NRC नहीं लागू करने का विज्ञापन दिया था। ममता बनर्जी खुद यह कहते हुए दिखीं कि बंगाल के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्य में NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा।
7- नीति आयोग की बैठक से दीदी गायब
2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने ममता बनर्जी को खासा मानसिक कष्ट दिया। जून 2019 को ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक में शामिल होने से यह कहकर मना कर दिया कि नीति आयोग के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है और ऐसे में इन बैठकों में भाग लेने से कोई फायदा नहीं है। बताना आवश्यक है कि मोदी सरकार के पिछले कार्य काल में भी ममता ऐसे बैठकों से दूर रहती थी। इस बार वह चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं गई।
8- कोरोना महामारी के दौरान राज्यपाल से झड़प
ममता बनर्जी ने देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद भी सिर्फ केंद्र सरकार से टकराव और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ममता बनर्जी ने निरंतर नियमों की अवहेलना की और इसके लिए मुस्लिमों को उकसाया भी। सोशल डिस्टेंस के नाम पर मस्जिदों को खुला रखा जा रहा है और कुछ विशेष बाजारों, जहाँ पर मुस्लिम बहुलता है, उन्हें खुला रखा गया।
आखिरकार गृह मंत्रालय को पश्चिम बंगाल को पत्र लिखकर इस पर कार्रवाई करने की बात कहनी पड़ी। हालाँकि, उसके बावजूद भी कुछ ख़ास असर नजर नहीं आया। इसके बाद कोरोना वायरस से लड़ाई को भी ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से जंग में तब्दील कर दिया है और अब ममता बनर्जी एक तानाशाही तरीकों का शिकार बंगाल के राज्यपाल को बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी को लोकतंत्र और संविधान की कितनी परवाह है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी ने उस हर मौके पर राज्यपाल का विरोध किया है, जब उन्हें लगा कि वे सरकार के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। बात चाहे एम के नारायणन की हो, केशरीनाथ त्रिपाठी की, या अब जगदीप धनकर की। जब भी उन्हें लगा कि उनके ‘अधिकारों’ पर हमले हो रहे हैं, उन्होंने राज्यपालों को उनकी सीमाओं में रहने की नसीहत दी है।
ममता बनर्जी आजकल अपने इस कर्तव्य का निर्वाह कोरोना वायरस को जरिया बनाकर कर रही हैं। राज्यपाल ने उन्हें कोरोना वायरस की महामारी के दौरान मुस्लिम तुष्टिकरण को छोड़कर आवश्यक फैसले लेने की सलाह देने पर ममता बनर्जी ने राज्यपाल को सात पन्ने का एक पत्र लिखा। जिसमें बेहद बदसलूकी के साथ कहा गया है कि राज्यपाल धनखड़ भूल गए हैं कि वह (ममता) एक गौरवशाली भारतीय राज्य की निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं, जबकि वह नियुक्त किए गए हैं।
यह सब ममता बनर्जी के बंगाल से वो किस्से हैं, जो मीडिया के द्वारा किसी ना किसी रूप में सामने आते रहे हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इसके बाद भी वह निरंतर केंद्र सरकार पर ही लोकतंत्र की हत्या करने से जैसे जुमलों का प्रयोग करती आई हैं।