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एक हिंसा के लिए उकसाती है, दूसरी समर्थन करती है: बहन रंगोली का समर्थन करने पर कंगना रनौत के खिलाफ शिकायत

बहन रंगोली चंदेल का समर्थन करने के कारण अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस से शिकायत वकील अली कासिफ खान देशमुख ने की है। बीते दिनों मुरादाबाद में डॉक्टरों पर हमले को लेकर रोष जताने के बाद ट्विटर ने रंगोली का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था। साथ ही उनके खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चलाया गया था।

मुंबई के रहने वाले अली कासिफ ने कहा है कि एक बहन हत्या और हिंसा के लिए उकसाती है। दूसरी उसका समर्थन करती है, जब इसके लिए दुनियाभर में उसकी आलोचना हो रही है और उसका अकॉउंट ट्विटर ने सस्पेंड कर दिया है।

शिकायत में कंगना और उनकी बहन रंगोली पर निजी फायदे के लिए स्टारडम, फैनबेस, पैसे, नाम, पावर का इस्तेमाल कर घृणा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है।

बता दें, पिछले दिनों मुरादाबाद की घटना पर आक्रोश व्यक्त करने के बाद कट्टरपंथियों ने रंगोली का ट्विटर अकॉउंट रिपोर्ट कर कर सस्पेंड करवा दिया था। उन्होंने अपने ट्वीट में उन लोगों पर गुस्सा उतारा था जिन्होंने डॉक्टरों की टीम पर हमला किया।

उन्होंने लिखा था, ““एक जमाती की कोरोना से मौत हो गई, जब पुलिस और डॉक्टर उसके परिवार को चेक करने गए तो उन्होंने उनपर (पुलिस और डॉक्टर) हमला किया और उन्हें मारा। धर्मनिरपेक्ष मीडिया और इन मुल्लाओं को एक पंक्ति में खड़ा कर गोली मार देनी चाहिए। इतिहास में वे हमें नाजी कह सकते हैं, किसे चिंता है, जिदंगी फेक इमेज से ज्यादा जरूरी है।

कंगना रनौत ने वीडियो में क्या कहा?

इसी ट्वीट के बाद रंगोली चंदेल का अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया था और उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेने की माँग हुई थी। मामला बढ़ने पर कंगना रनौत खुद अपनी बहन के सपोर्ट में एक वीडियो के माध्यम से सबके सामने आईं थीं।

उन्होंने वीडियो में कहा था, “मेरी बहन रंगोली ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि जो लोग डॉक्टर्स और पुलिस पर हमला कर रहे हैं उनको गोली से मार देना चाहिए। लेकिन, फराह खान अली जो सुजैन खान की बहन हैं, उन्होंने ये झूठा दावा किया कि रंगोली ने मुस्लिम लोगों के लिए यह कहा है। अगर ऐसा कहीं भी साबित होता है तो मैं और रंगोली खुद सामने से आकर माफी माँगेंगे।”

इसके बाद कंगना ने आगे कहा, “क्या वह ये कहना चाहते हैं कि हर मुस्लिम आतंकवादी है। हमारा तो यह मानना नहीं है कि हर मुस्लिम, डॉक्टर्स और पुलिस वालों पर हमला कर रहे हैं। हमने कभी ऐसा नहीं कहा। मैं केंद्र सरकार से अपील करना चाहूँगी कि ये जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं जो यहांँ का पैसा खाकर हमारी ही कश्ती में छेद कर रहे हैं, ऐसे प्लेटफॉर्म का दाना-पानी बंद कर देना चाहिए। हमें अपने खुद के प्लेटफॉर्म शुरू करने चाहिए।”

गौरतलब है कि इस वीडियो के आने के बाद सेकुलरों ने कंगना पर इल्जाम लगाया था कि उन्हें केंद्र सरकार और आरएसएस से बहुत पैसा मिलता है। इसके अलावा ये भी कहा कि वे हिंदुत्व अतिवाद और इस्लामोफोबिया का झंडा बुलंद करती हैं और चाहती हैं कि भाजपा उन्हें हिमाचल से टिकट दे।

खाड़ी देशों में रहने वाले हिंदुओं के ख़िलाफ़ AMU छात्र फैला रहे प्रोपेगेंडा, सोशल मीडिया बना हथियार

खाड़ी देशों में हिंदुओं को निशाना बनाने के अभियान के पीछे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कुछ पूर्व व वर्तमान छात्र-छात्राओं के नाम सामने आया है। आरोप है कि ये लोग खाड़ी देशों में रह रहे हिंदुओं के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया में पोस्ट कर अभियान चला रहे हैं।

इन छात्रों पर शिकायत दर्ज कराने के लिए AMU के ही एक पूर्व छात्र निशित शर्मा ने कुछ स्क्रीनशॉट्स प्रमाण के रूप में पेश किए हैं। शर्मा ने दावा किया है कि इन्हीं सबके कारण अरब देशों में गुजर-बसर कर रहे हिंदुओं का कोरोना महामारी के बीच बहिष्कार शुरू हुआ है। वहाँ हिंदुओं को न उचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है और न ही उनका कोरोना टेस्ट हो रहा है।

इन स्क्रीनशॉट्स से साफ मालूम होता है कि AMU के छात्र लगातार अनऑफिशियल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी फेसबुक पेज पर अरब देशों में रह रहे हिंदुओं के ख़िलाफ़ साजिश रच रहे थे। वे अपने पोस्टों में हिंदुओं के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने का काम कर रहे थे। ये लोग सोशल मीडिया पर ऐसे हिंदुओं को खोज रहे थे जो खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। जैसे निशित ने जो स्क्रीनशॉट सामने रखे हैं उनमें राजीव नाम के व्यक्ति के ख़िलाफ़ अनऑफिशियल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पेज से शिकायत करने की माँग की गई है।

इसके अलावा एक देवासुरम नाम का व्यक्ति जिसने पिछले दिनों एक पोस्ट किया कि वे मुस्लिमों से सामान नाम नहीं लेगा और न ही मुस्लिमों को कंपनी में हायर करेगा। उसे भी कुछ पूर्व छात्रों ने हाइलाइट किया है। 

इसके अतिरिक्त अली सोहराब नामक विवादित पत्रकार भी इस सूची में शामिल है। उसने दुबई में रह रही हिंदू धारा पटेल नाम की महिला की शिकायत की, क्योंकि, वे तबलीगी जमातियों और पाकिस्तानी आतंकी समूह के बारे में मुखर होकर लिख रही थी।

अली सोहराब ने दुबई पुलिस का ध्यान धारा की ओर आकर्षित कराते हुए बोला कि ये महिला सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैला रही है। इससे साम्प्रदायिकता फैल सकती है।

इतना ही नहीं, AMU के पूर्व छात्रों ने अरब देशों में रह रहे हिंदुओं के ख़िलाफ़ अपनी कुँठा व्यक्त करने के लिए अपनी टाइमलाइन पर उन्हें संघी करार दिया है और ये भी कह रखा है कि अरब में अभी सिर्फ़ चार लोग एक्टिव हुए हैं और संघी बाप सावरकर की तरह माफी वीडियो डाल रहे हैं। 

अब इन्हीं सब स्क्रीनशॉट्स आदि को प्रमाण के रूप में पेश करते हुए निशित शर्मा ने इन सबके ख़िलाफ़ उपयुक्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है, “अरब देशों में रह रहे हिंदू भारतीयों पर अत्याचार के पीछे एक संगठित वर्ग है। इसका संचालन पाकिस्तान एवं भारत के विभिन्न स्थानों से सोशल मीडिया के माध्यम से हो रहा है।”

उन्होंने लिखा, AMU के पूर्व एवं वर्तमान छात्र-छात्राएँ सोशल मीडिया पर निरंतर अरब देशों में रह रहे हिंदुओं के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं। ये वही अराजक तत्व हैं जो नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन में हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहे थे।

अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखे गए पत्र में दावा किया गया है कि ये सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करने, हिंदू धर्म के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर द्वेष फैलाने और हिंसा भड़काने की एक सुनियोजित साजिश है। इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े लोग भी लिप्त हैं।

बता दें, खाड़ी देशों में कार्य कर रहे भारतीय मूल के लोगों पर अत्याचार एवं धार्मिक कट्टरपंथी मढ़ना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान के आतंकी समूहों के प्रोपेगेंडा के कारण वहॉं ये सब कई बार हो चुका है। शिकायतकर्ता ने 2019 के एक वाकए का जिक्र किया है, जब केवल सीएए का समर्थन करने के कारण एक भारतीय डॉक्टर को मुस्लिम विरोधी करार देकर, अस्पताल से निकाल दिया गया था।

‘यह मकान बिकाऊ है’: पटना में लॉकडाउन विवाद में सन्नी गुप्ता की गोली मारकर हत्या, शवयात्रा पर पथराव

बिहार की राजधानी पटना में लॉकडाउन को लेकर हुए विवाद में सोमवार को सन्नी गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुख्य आरोपित चॉंद मोहम्मद अब भी फरार है। इधर, इस घटना से डरे-सहमे सन्नी के पिता ने अपने घर पर ‘यह मकान बिक्री का है’ की तख्ती टॉंग दी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस घटना से सन्नी गुप्ता का पूरा परिवार दहशत में है। डर के कारण वे अपना घर बेच कर कहीं और जाने को मजबूर हैं। गोपाल बैंड के मालिक और सन्नी गुप्ता के पिता गोपाल ने मकान पर तख्ती लगाते हुए उस पर लिखा है कि यह मकान बिक्री का है।

दैनिक जागरण ने गोपाल के हवाले से कहा है, “मैं 28 वर्षों से इस मकान में पूरे परिवार के साथ रह रहा हूँ। इस मकान के साथ कई सारी यादें जुड़ी हुई हैं। लेकिन जिस मोहल्ले में मेरा परिवार ही सुरक्षित नहीं है, वहाँ रहकर क्या करुँगा?”

गोपाल ने बताया कि पुलिस ने परिवार की सुरक्षा के नाम पर 4 लाठीधारी होमगार्ड को तैनात किया है। ऐसे में अगर परिवार पर हमला होता है तो ये लाठीधारी आखिर कैसे उनकी परिवार की सुरक्षा करेंगे।

दैनिक जागरण के पटना संस्करण में प्रकाशित खबर

इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। माहौल को देखते हुए बड़ी संख्या में जिला प्रशासन ने इलाके में पुलिस फोर्स को तैनात कर रखा है। मुख्य आरोपित मोहम्मद चाँद की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज वार्ड नंबर 60 की पार्षद शोभा देवी और पूर्व पार्षद बलराम चौधरी अपने समर्थकों के साथ उपवास पर बैठे हुए हैं। उपवास पर बैठे लोगों की माँग है कि प्रशासन तत्काल मुख्य आरोपित चाँद की गिरफ्तारी करे, पीड़ित परिवार को मुआवजा और सुरक्षा दे और मृतक की पत्नी को नौकरी दे।

सन्नी गुप्ता को बीते सोमवार को उस वक्त गोली मारी गई थी कि जब वह घर की बालकनी में बैठे थे। आरोप है कि सोमवार शाम को स्थानीय युवकों और एनसीसी कैडेट्स के बीच लॉकडाउन का पालन करने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद स्थानीय युवकों ने कैडेट्स पर पथराव करते हुए फायरिंग की। एक गोली बालकनी में बैठे सन्नी गुप्ता के सिर में जाकर लग गई। उसने देर रात अस्पताल में दम तोड़ दिया।

इसके बाद जब सन्नी की शवयात्रा निकाली गई तो उस पर भी कुछ लोगों ने पथराव किया था। इसके बाद से ही इलाके में तनाव बना हुआ है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने 100 से अधिक पुलिस फोर्स को इलाके में तैनात किया है। वहीं मृतक के भाई ने 6 नामजद सहित 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।

पुलिस ने पाँच नामजद हसनैन, शाहजहाँ, अबुल नासिर, अंजुम और जैनब हाशमी को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित मोहम्मद चाँद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

त्रिपुरा भी कोरोना फ्री: गोवा, मणिपुर के बाद संक्रमण मुक्त होने वाला देश का तीसरा राज्य

गोवा और मणिपुर के बाद अब त्रिपुरा कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो गया है। गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को राज्य के दूसरे और आखिरी मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने ट्वीट कर कहा, “माँ त्रिपुरसुंदरी जी के आशीर्वाद से तथा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दिखाए मार्ग से प्रेरित होकर, हमारा अपना त्रिपुरा आज कोरोना मुक्त हो गया है। आशा है कि जल्द ही पूरा भारत और फिर पूरा विश्व इस वैश्विक महामारी से मुक्त होगा।”

इसके बावजूद उन्होंने लोगों से सरकारी गाइडलाइन्स और सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करने की अपील की है। बता दें कि, त्रिपुरा में अब तक सिर्फ दो ही कोरोना मरीज़ मिले थे। दोनों अब संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रणी पंक्ति के योद्धाओं और जनता को राज्य को कोरोना मुक्त करने में योगदान के लिए आभार जताया।

त्रिपुरा के दूसरे कोरोना मरीज़ की रिपोर्ट भी नेगेटिव

सीएम देब ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “त्रिपुरा में कोरोना के दूसरे मरीज की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसके साथ ही हमारा राज्य कोरोना से मुक्त हो गया है। मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि वह सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए।”

बता दें कि त्रिपुरा में पहली कोरोना मरीज एक महिला थी जो गोमती जिले के उदयपुर शहर की रहने वाली थी। वह लॉकडाउन से ठीक पहले राज्य में वापस लौटी थी। 6 अप्रैल को उसकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ठीक होकर 16 अप्रैल को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

उन्हें बाद में गोमती जिले के क्वारांटाइन केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया था। वहीं दूसरा मरीज त्रिपुरा राज्य राइफल्स का एक जवान था जो 16 अप्रैल को उत्तरी त्रिपुरा के डामचेरा में पॉजिटिव पाया गया था। उसे जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को उसकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है।

ये दो राज्य भी हो चुके हैं कोरोना मुक्त

कोरोना मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य गोवा है। दूसरे नंबर पर मणिपुर है। त्रिपुरा तीसरा राज्य है जहाँ कोरोना के एक भी मरीज नहीं हैं। पिछले दिनों गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया था कि राज्य अब कोरोना से मुक्त हो गया है। उन्होंने इसे राज्य को लिए संतुष्टि और राहत की बात बताते हुए सभी डॉक्टरों, मेडिकल और पैरा मेडिकल कर्मचारियों का आभार जताया था। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने ट्वीट कर मणिपुर के कोरोना मुक्त होने की जानकारी दी थी

अर्नब गोस्वामी पर हमला करने वालों के पास थे ‘लॉकडाउन पास’, खाना बाँटने के नाम पर आए थे बाहर: Republic TV

रिपब्लिक न्यूज़ चैनल के संस्थापक अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) पर हमला करने वालों के पास स्पेशल लॉकडाउन पास थे। यह दावा रिपब्लिक भारत के ही स्तम्भकार अजित दत्ता (Ajit Datta) ने एक ट्वीट के जरिए किया है। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने इसी लॉकडाउन पास के नाम पर बाहर निकलकर अर्नब और उनकी पत्नी पर हमला किया।

रिपब्लिक भारत ने अपने समाचार पोर्टल पर भी इस तरह की सम्भवना व्यक्त की थी। इसमें लिखा गया है कि सूत्रों से पता चला है कि जिन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने रात में अर्नब गोस्वामी पर हमला किया था, उन्हें कोरोना वायरस के बीच भोजन वितरित करने के लिए ‘लॉकडाउन पास’ दिया गया था। बताया गया है कि ये हमलावर इसी लॉकडाउन पास के माध्यम से भोजन बाँटने के लिए बाहर आए थे।

अर्नब गोस्वामी पर कल देर रात हमला करने वाले यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों को लेकर चर्चाएँ इस समय सोशल मीडिया पर गर्म हैं। इन दोनों ने कल देर रात अर्नब और उनकी पत्नी पर हमला किया। यह हमला अर्नब के घर से बमुश्किल 500 मीटर की दूरी पर हुआ जब वो और रिपब्लिक टीवी के संपादक सम्यब्रत रे गोस्वामी अपनी टोयोटा कोरोला कार में घर वापस आ रहे थे।

बाद में पकड़े जाने पर हमलावरों ने खुद की पहचान यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों के रूप में बताई और कहा कि वे उन्हें सबक सिखाने आए थे। हालाँकि, आरोपितों द्वारा खुद इस बात को स्वीकारे जाने के बाद भी वहाँ के डीसीपी इस घटना पर एक्शन लेने से टालमटोल करते रहे और कहते रहे कि ये जाँच का विषय है कि ये दोनों कॉन्ग्रेस के सदस्य हैं भी या नहीं।

गौरतलब है कि कल रात अर्नब पर हमले के तुरंत बाद कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा ने यूथ कॉन्ग्रेस की वाहवाही में पोस्ट किया था। जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने पोस्ट को शेयर करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ही अर्नब के ख़िलाफ़ यूथ कॉन्ग्रेस को सड़क पर उतरने को उकसाया और अब उनकी जय-जयकार कर रही हैं। बता दें अलका लांबा ने देर रात ट्वीट करके ‘युवा कॉन्ग्रेस जिंदाबाद’ लिखा था।

आज कॉन्ग्रेस हमलावर है, कभी एक बाहुबली ने अर्नब गोस्वामी को कर लिया था ‘अगवा’

रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की कार पर बुधवार की रात मुंबई में कॉन्ग्रेस के गुंडों ने हमला किया था। पूरी पार्टी उनके पीछे पड़ी है। इसी तरह करीब ढाई दशक पहले उनके पीछे बिहार का एक बाहुबली नेता लग गया था। उस नेता का नाम पप्पू यादव है।

पॉंच बार सांसद रहे पप्पू यादव ने 1996 में अर्नब गोस्वामी को कथित तौर पर ‘अगवा’ कर लिया था। तब वे एक सामान्य पत्रकार हुआ करते थे। बकौल अर्नब वह उनका पहला इलेक्शन कवरेज था।

इस घटना के बारे में कुछ साल पहले अर्नब ने खुद एक कार्यक्रम के दौरान बताया था। उन्होंने कहा था कि इंटरव्यू समाप्त कर जब वे जाने लगे तो उन्हें पप्पू यादव के एक आदमी ने रोक लिया। उनसे कहा कि बिना पप्पू यादव की इजाजत के वे नहीं जा सकते।

अर्नब ने बताया कि उन्होंने जाने की इजाजत मॉंगी तो कहा गया कि वे नहीं जा सकते। उन्होंने अपने कैमरामैन की तरफ देखा और पूछा कि ये क्या हो रहा। उसने उन्हें बताया कि वे अगवा किए जा चुके हैं। यह सुन अर्नब को झटका लगा क्योंकि उन्होंने अगवा किए जाने की कई डरावनी कहानियों के बारे में सुन रखा था।

1996 की उस घटना के बारे में बताते अर्नब गोस्वामी

अर्नब के अनुसार वे करीब डेढ़ दिन तक पप्पू यादव के कब्जे में रहे थे। इस दौरान पप्पू जहॉं भी जाते उन्हें अपने साथ ले जाते। वे छोटी-छोटी सभाएँ करते। उन सभाओं के दौरान पप्पू खुद चारपाई पर बैठते और उन्हें सुनने वाले नीचे।

अगवा किए जाने की उस घटना के बारे में अर्नब गोस्वामी बताते हैं, “पप्पू यादव ने लोगों से कहा ये जो लड़का इधर मेरे साथ है, पता है ये कहाँ का है। आसपास बैठे सभी लोग कहते नहीं पता। पप्पू यादव कहते ये बीबीसी का है। मुझे झटका लगा, क्योंकि मैंने कभी बीबीसी में नौकरी नहीं की। मैं चुप रहा और सभी लोगों चुपचाप मुझे देख रहे थे।”

इसके बाद पप्पू यादव ने कहा, “आपको पता है कि बीबीसी ने क्या बोला है। बीबीसी ने बोला है कि पूर्णिया से इस बार पप्पू यादव जीतेगा।” बकौल अर्नब यह कहने के बाद पप्पू यादव उनकी ओर देखने लगते और वे समझ नहीं पाते थे कि कोई आपके सामने कैसे इस तरह झूठ बोल सकता है।

पप्पू यादव फिलहाल जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी कॉन्ग्रेस में हैं। पति-पत्नी दोनों को 2019 के लोकसभा चुनाव में हार झेलनी पड़ी थी। ताजा घटना के बाद कॉन्ग्रेस के सुर में सुर मिलाते हुए पप्पू यादव ने ट्वीट कर अर्नब पर हमला किया है।

असल में ताजा विवाद की शुरुआत टीवी शो के दौरान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को लेकर अर्नब के तीखे सवालों से हुई थी। पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सोनिया की चुप्पी को लेकर उन्होंने सवाल किए थे। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने उन पर एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही। फिर बुधवार की रात उनकी कार पर यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा हमले की खबर आई। हमले के वक्त वे अपनी पत्नी के साथ घर लौट रहे थे।

JNU नेता उमर खालिद व कई संगठनों से जुड़े उसके सहयोगियों ने मिलकर रची दिल्ली दंगों की साजिश, FIR में कई गंभीर आरोप

दिल्ली पुलिस दिल्ली में गत फरवरी माह में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों की साजिश रचने के आरोप में JNU छात्र उमर खालिद की भूमिका की जाँच में जुटी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, उमर खालिद के एक भड़काऊ भाषण की जाँच की जा रही है। इस मामले में पुलिस जल्द ही उससे पूछताछ कर सकती है। उमर खालिद के खिलाफ इस मामले में 6 मार्च को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पहले ही हिंसा की साजिश का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कर लिया था।

इस FIR के तहत स्पेशल सेल दिल्ली में भड़के हिन्दू-विरोधी दंगों में उमर खालिद की भूमिका की जाँच कर रही है। खालिद के साथ ही दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीडिया प्रभारी सफूरा जरगर पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

FIR में बताया गया है कि उत्तर-पूर्व दिल्ली में गत 23, 24 और 25 फरवरी को जो हिंसा हुई वह पूर्व नियोजित साजिश थी। इस हिंसा को फैलाने की साजिश जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और उसके सहयोगियों, जो अलग-अलग संगठन से जुड़े हैं, ने मिलकर रची थी। इस साजिश के तहत दो अलग-अलग जगहों पर उमर खालिद ने भड़काऊ भाषण दिए थे जिनकी जाँच की जा रही है।

पुलिस ने FIR में दावा किया है कि दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगे पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम थे, जो उमर खालिद व उसके दो अन्य सहयोगियों ने रची थी। उमर खालिद पर दर्ज FIR में लगे आरोपों के अनुसार, उमर खालिद और उसके सहयोगियों ने औरतों-बच्चों को सड़कों पर उतारकर हिंसा भड़काने की साजिश रची थी। इसके बाद यमुनापार के मौजपुर, कर्दमपुरी, जफराबाद, चाँदबाग, शिव विहार में और इसके आस-पास के इलाकों में दंगे हुए थे।

उल्लेखनीय है कि मीरान हैदर पीएचडी छात्र है और दिल्ली में राजद की युवा इकाई का अध्यक्ष है, वहीं जरगर जामिया मिल्लिया इस्लामिया से एमफिल कर रही हैं। इन पर हिंसा में हिस्सा लेने के लिए बाहर से अलग-अलग जगहों से भीड़ जुटाने का आरोप है। आरोप है कि इनके द्वारा ही 23 तारीख को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे औरतों-बच्चों को इकट्ठा किया गया ताकि तनाव बढ़े और हिंसा हो। छात्रों पर राष्ट्रद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने और दंगे करने का भी मामला है।

ज्ञात हो कि दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगे डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा की पहली शाम से ही भड़के थे। FIR में बताया गया है कि हथियार, पेट्रोल बम, तेजाब की बोतलें और पत्थर कई घरों में साजिश के तहत इकट्ठे किए गए थे।

गौरतलब है कि दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर बड़े स्तर पर हिन्दू-विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। यह सिलसिला शाहीन बाग़ से शुरू हुआ था जो गत दिसम्बर माह से ही अपनी गतिविधियों के कारण चर्चा का विषय बना रहा।

केजरीवाल सरकार ने दिया मेडिकल स्टाफ को अपनी समस्याओं को मीडिया में हाईलाईट ना करने का ऑर्डर: कपिल मिश्रा

दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के गुरु तेगबहादुर अस्पताल की ओर से कोरोना ड्यूटी में तैनात सभी मेडिकल स्टाफ को अपनी ड्यूटी में होने वाली असुविधाओं के बारे में मीडिया को बताने और सोशल मीडिया पर हाईलाईट करने से मना किया है। कपिल मिश्रा का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ऐसा आदेश सरकार के झूठ की पोल खुलने के डर से जारी किया है।

‘कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी अपनी प्रॉब्लम ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक में नहीं शेयर करेगा’

कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा है- “केजरीवाल सरकार का आर्डर- कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी अपनी प्रॉब्लम ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक में नहीं शेयर करेगा। मीडिया को बताने पर भी प्रतिबंध। खाना, मास्क, एकोमोडेशन – कुछ भी न मिले, चुप रहो। ये आर्डर इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर सरकार के सारे झूठ की पोल खुल रही हैं।”

गुरु तेगबहादुर अस्पताल की ओर से जारी आदेश की कॉपी, जिसे कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया है –

वहीं, कुछ लोगों ने कपिल मिश्रा के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है कि यह स्टाफ के मौलिक अधिकारों का हनन है।

इस ट्वीट के साथ कपिल मिश्रा ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी आदेश की कॉपी भी शेयर की है, जिसमें लिखा गया है कि ड्यूटी में आ रही किसी भी प्रकार की समस्या के लिए वह स्टाफ डिपार्टमेंट हेड के पास शिकायत भेज सकता है, लेकिन बिना उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाए सोशल मीडिया में समस्याओं को पब्लिक करना उचित नहीं है और मेडिकल स्टाफ को इससे बचना चाहिए।

अस्पताल की ओर से जारी इस आदेश की प्रति में यह भी पढ़ा जा सकता है कि अस्पताल के कर्मचारियों को देशसेवा का स्मरण करवाकर उन्हें समस्याओं को नजरअंदाज करने की राय दी गई है। हालाँकि, यह भी कहा गया है कि स्टाफ़ की वाज़िब समस्याओं पर अवश्य संज्ञान लिया जाएगा।

कपिल मिश्रा ने GTB अस्पताल द्वारा जारी किए गए इस आदेश को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि उनके ही आदेश पर इस प्रकार का आदेश दिया गया है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार को लेकर यह चर्चा निरंतर जारी है कि इन्होने कोरोना वायरस से निपटने में धरातल पर काम करने के बजाए सोशल मिडिया पर अपनी तारीफ में कैम्पेन करने पर ज्यादा ध्यान दिया है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों को होने वाली असुविधाओं पर बात करने पर पाबंदी लगाने का आदेश एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।

सोशल डिस्टेंस की अपील कर रहे होमगार्ड का गला दबाने वाला दिलदार अंसारी गिरफ्तार

झारखंड के गोड्डा जिला स्थित ललमठिया चौक पर लॉकडाउन का पालन करने का निर्देश दे रहे होमगार्ड के साथ झड़प करने वाले दिलदार अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अंसारी ने होमगार्ड के जवान के साथ उस समय हाथापाई की जब वो लोगों से कोरोना वायरस के दौरान घोषित लॉकडाउन के नियमों का पालन करने का निर्देश देते हुए उन्हें भीड़ ना करने की अपील कर रहे थे।

झड़प का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसके बाद कई लोगों ने इस पर कार्रवाई की माँग की। वीडियो में होमगार्ड के जवान के साथ दिलदार अंसारी को अभद्र व्यवहार और बदसलूकी करते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है।

लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का सुझाव देते समय ही कुछ आसामजिक तत्वों ने होमगार्ड के साथ हाथापाई शुरू कर दी और उनका गला दबाने तक की भी कोशिश की। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिलदार अंसारी ने झड़प के दौरान होमगार्ड की वर्दी उतरवाने की भी धमकी दी। होमगार्ड के साथ बदसूलकी करने वाला दिलदार अंसारी लालगुटवा ललमटिया थाना क्षेत्र का ही रहने वाला बताया जा रहा है।

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार जब लोगों ने इस बारे में ललमटिया थाना प्रभारी जावेद अहमद को बताया तो उन्होंने इस मामले की जानकारी होने से मना कर दिया। लोगों ने ट्विटर पर गोड्डा पुलिस से इस मामले पर संज्ञान लेने की भी अपील की। वायरल हुए इस वीडियो के संदर्भ में ललमटिया थाना में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद घटना के मुख्य अभियुक्त दिलदार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि यह पुलिस के साथ बदसलूकी का पहला मामला नहीं है, देशभर में निरंतर पुलिस और डॉक्टर्स के साथ बदसलूकी करने के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। खासकर मुस्लिम समुदाय ने जाँच करने गई डॉक्टर्स की टीम या फिर व्यवस्था बना रहे पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाया है।

लॉकडाउन के बीच कार्गो विमान से कोलकाता पहुॅंचे प्रशांत किशोर, घिरीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर कोरोना से जुड़े तथ्यों में हेरफेर करने और लॉकडाउन के कायदों का पालन नहीं करवाने के आरोप लग रहे हैं। अब ममता बनर्जी पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को चोरी-छिपे कार्गो विमान के जरिए कोलकाता लाने के आरोप लगे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लॉकडाउन के बीच प्रशांत किशोर कार्गो प्लेन से कोलकाता पहुँचे हैं। इसे लेकर विपक्षी पार्टियों ने प्रशांत किशोर के साथ ममता सरकार पर निशाना साधा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत किशोर कार्गो फ्लाइट से उसी वक़्त कोलकाता पहुँचे जब मोदी सरकार की ओर से राज्य में लॉकडाउन की स्थिति का जायजा लेने के लिए इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (IMCT) पहुँची। बताया जा रहा है कि टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का मैसेज मिलते ही प्रशांत किशोर दिल्ली से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए थे।

आधी रात को कोलकाता पहुँचे प्रशांत का अभिषेक ने अपने दफ्तर में स्वागत किया और फिर केन्द्र सरकार द्वारा पूछे जा रहे सवालों को लेकर चर्चा भी की। जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर को सोशल मीडिया, विपक्षी पार्टी और मीडिया चैनल्स के आरोपों पर जवाबी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी है।

इस बात की जानकारी मिलते ही विपक्षी पार्टियों ने ममता के साथ प्रशांत किशोर को भी घेरना शुरू कर दिया है। जेडीयू नेता अजय आलोक ने कहा कि प्रशांत किशोर को शर्म आनी चाहिए। लॉकडाउन का ऐसा उल्लंघन नहीं देखा गया। कार्गो प्लेन से जरूरी सामान जाते हैं, अब पीके कैसे कार्गो में चले गए।

अजय आलोक ने इस लेकर ट्विटर पर एक ट्वीट भी किया और कटाक्ष करते हुए कहा कि पीके अब ब्यूटीशियन भी बन गए है, जो कि शायद ममता बनर्जी का चेहरा चमकाने कोलकाता गए हैं।

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि प्रशांत किशोर लॉकडाउन में कार्गो फ्लाइट में छुपकर कोलकाता गए। बंगाल में लॉकडाउन की स्थिति सॅंभालने के लिए उन्हें बुलाया गया। निखिल आनंद ने बंगाल सरकार को फेल बताते हुए कहा कि ये समय विशेषज्ञ को बुलाने का है, झूठा इमेज मेकओवर करने वाले को नहीं।

देश में जारी लॉकडाउन के बीच पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन न होना, राशन वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगना, पर्याप्त जाँच न होना आदि बातों को लेकर इन दिनों ममता सरकार और केन्द्र के बीच ठनी हुई है। केन्द्र द्वारा पश्चिम बंगाल में भेजी गई टीम के साथ राज्य सरकार द्वारा सहयोग न करने पर यह विवाद और भी गहरा गया है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल में लगातार हो रहे लॉकडाउन के खुलेआम उल्लंघन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी। राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को लिखे गए इस पत्र में लॉकडाउन का पालन नहीं होने पर सख्त आपत्ति जताई गई थी। साथ ही कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में गैर जरूरी चीजों की दुकानें खोलने और मजहबी जमावड़े के लिए इजाजत दिए जाने की सूचना मिली है और राशन प्रशासन की बजाए नेता बॉंट रहे हैं।