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कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के फिर बिगड़े बोल, BJP के नेताओं को कहा- रावण की औलाद

संसदीय कार्यवाही के दौरान कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ये बोल कर नया विवाद खड़ा कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी के नेता ‘रावण की औलाद’ हैं। लोकसभा को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “वे एक ऐसे व्यक्ति के लिए इस तरह का शब्द कैसे बोल सकते हैं, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में काफी योगदान दिया, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और अहिंसा का संदेश फैलाया। महात्मा गाँधी के सत्याग्रह को ड्रामा कहने वाले रावण की औलाद हैं। वे भगवान राम के उपासक को गाली दे रहे हैं।”

दरअसल, अनंत हेगड़े ने पिछले दिनों बेंगलुरू के एक कार्यक्रम में कहा था कि आजादी की पूरी लड़ाई अंग्रेजों की सहमति एवं सहयोग से लड़ी गई थी और महात्मा गाँधी के नेतृत्व वाला स्वतंत्रता आंदोलन एक ‘नाटक’ था। अधीर रंजन चौधरी ने इसी की प्रतिक्रिया में ये बातें कही थी।

चौधरी के बयान पर बीजेपी ने आपत्ति जताया। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “हम भारतीय जनता पार्टी के लोग असली भक्त हैं। हम महात्मा गाँधी के असल फॉलोअर हैं। ये लोग सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी जैसे ‘नकली’ गाँधी के फॉलोअर हैं।”

हालाँकि, अनंत हेगड़े ने अपनी टिप्पणी के बारे में कहा, “1 फरवरी 2020 को दिए मेरे बयान की जिम्मेदारी लेता हूँ। मैंने किसी राजनीतिक पार्टी, महात्मा गाँधी या किसी और का कोई जिक्र नहीं किया था। मैंने सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम को वर्गीकृत करने की कोशिश की थी।”

आगे उन्होंने कहा, “मेरा भाषण सार्वजनिक है, अगर कोई सुनना चाहता है, तो यह ऑनलाइन और मेरी वेबसाइट पर उपलब्ध है। मैंने कभी महात्मा गाँधी और पंडित नेहरू के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा। मैं सिर्फ हमारे स्वतंत्रता संग्राम के बारे में चर्चा कर रहा था।”

अधीर रंजन चौधरी इससे पहले भी कई सारे विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के बशीरहाट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खुद को पाकिस्तानी बताया था। उन्होंने कहा था, “मुझे पाकिस्तानी कहकर बुलाया जाता है, आज मैं कहना चाहता हूँ कि हाँ, मैं पाकिस्तानी हूँ। आप जो करना चाहते हैं, वो कर सकते हैं। आज हमारे देश में कोई सही बात नहीं कह सकता है, क्योंकि अगर आप सच कहते हो तो आपको देशद्रोही कह दिया जाता है।”

उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने पर कहा था कि चूँकि इस मामले को संयुक्त राष्ट्र देख रही है, ऐसे में भारत इससे सम्बंधित विधेयक कैसे ला सकता है? उन्होंने इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताया था। इसी तरह 10 दिसंबर 2019 को उन्होंने लोकसभा में कहा था, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री, जो हर मुद्दे पर बोलते रहते हैं, इस मुद्दे (महिलाओं के साथ अपराध) पर शांत हैं। ‘मेक इन इंडिया’ से भारत धीरे-धीरे ‘रेप इन इंडिया’ की तरफ़ बढ़ रहा है।”

10 साल की बच्ची से पड़ोसी अकबर खान ने किया दुष्कर्म, बेहोश होने पर मृत समझ ईंट-पत्थरों से ढककर फरार

राजस्थान के चूरू जिले में 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर जिंदा दफनाने की कोशिश का मामला सामने आया है। यह मामला सोमवार (फरवरी 3, 2020) देर रात का है। मंगलवार (फरवरी 4, 2020) को आरोपित अकबर खान के खिलाफ FIR दर्ज कराया गया। जानकारी के मुताबिक दुष्कर्म के बाद अकबर ने हत्या के इरादे से बच्ची के सिर पर पत्थर मारा। इसके बाद बच्ची को मरा हुआ समझकर ईंट और पत्थरों से ढक कर चला गया।

पुलिस ने आरोपित अकबर को गिरफ्तार कर लिया है। अकबर बच्ची के पड़ोस में ही रहता था। बच्ची उसे अंकल कहकर बुलाती थी। सोमवार की रात बच्ची की माँ की तबीयत खराब हो गई थी। इसके कारण वो अपनी माँ के लिए दवा और कुछ अन्य घरेलू सामान लाने के लिए घर से थोड़ी दूर पर स्थित परचून की दुकान पर गई थी। जैसे ही बच्ची घर से निकली तो आरोपित हैवान ने बालिका का अपहरण कर लिया और सुनसान जगह पर बने एक खंडहरनुमा मकान में ले गया। 

जहाँ उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। उसे पहचानने की वजह से कहीं बच्ची परिजनों को बता न दे। इसलिए अकबर ने मारने की नियत से बच्ची के सिर पर पत्थर मारा। इससे वह बेहोश हो गई। बच्ची को मरा समझकर अकबर ने खंडहर में पड़े पत्थर, ईंट और बजरी से बच्ची का शरीर दबा दिया। ताकि किसी को नजर नहीं आए। इसके बाद वह भाग निकला।

दूसरी तरफ, जब काफी देर बाद बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने बच्ची को तलाश करना शुरू कर दिया। अनहोनी के डर से परिजन ने राजगढ़ थाना पुलिस को भी सूचना दी। इसके बाद परिजन, पड़ोसी और पुलिस उसकी तलाश में जुट गई। इसी दौरान घर से कुछ दूरी पर बने हुए खंडहरनुमा मकान में पहुँचे। यहाँ ईंटों और पत्थर से दबी बच्ची के कराहने की आवाज आई। तब पत्थर व ईंटें हटाकर परिजनों ने बच्ची को बाहर निकाला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। बच्ची द्वारा आरोपित की पहचान किए जाने के बाद इस मामले में पुलिस ने अकबर को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट में आरोपित का नाम अकरम बताया जा रहा है।

चुरू पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार होने तक उसे अस्पताल में ही रखा जाएगा। पुलिस ने बताया कि आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 363 और 307 के साथ ही पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कॉन्ग्रेस ने बजट 2020 पर झूठ बोलते हुए मोदी सरकार पर लगाया रेलवे फंड में कमी करने का आरोप: तथ्य यह रहे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए संघीय बजट गत शनिवार को प्रस्तुत किया। जिसमें देश के करदाताओं के लिए वैकल्पिक कर प्रावधानों समेत कई विशेष कदम उठाए गए। हालाँकि जैसा अपेक्षित ही था बजट को लेकर कई तरह के संदेहों को दूर करने की जरूरत थी और उस दिशा में सरकार प्रयत्नशील है। सरकार के इन प्रयासों के बीच कॉंग्रेस बजट को लेकर कई तरह के झूठ और भ्रम फैलाने में लग गई है।

कॉंग्रेस ने सोमवार को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा कि संघीय बजट में वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में रेलवे के लिए आवंटित राशि में 3,279 करोड़ रुपए की कमी की गई। जो कि 94,071 करोड़ रूपए की जगह 90,792 करोड़ रुपए हो गया है। कॉन्ग्रेस इन झूठे आँकड़ों तक कैसे पहुँची, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

कॉंग्रेस ने रेलवे के लिए आवंटन में हुई इस कथित कमी की क्रोनोलॉजी समझाते हुए दावा किया कि पहले बीजेपी सरकार रेलवे बजट में कमी करेगी… फिर रेलवे नुकसान में जाएगी..फिर वह इस बहाने रेलवे का निजीकरण कर अपने ‘दोस्तों’ को फायदा पहुँचाएगी।

जबकि वास्तविकता यह है कि रेलवे बजट पिछले वित्तीय वर्ष 2019-2020 के 67,837 करोड़ रूपए की तुलना में 3.19% बढ़ाकर 2020-21 में 70,000 करोड़ रुपए किया गया है।

जो आँकड़ें हैं ही नहीं, बजट में उन तक कॉन्ग्रेस कैसी पहुँची यह जादूगरी वही समझ सकती। ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस भविष्य में मोदी सरकार द्वारा किसी भी विनिवेश प्रस्तावों के खिलाफ माहौल तैयार करने में जुटी हुई है।

बजट में रेलवे के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान किये गए हैं, जिनमें 140 किमी लम्बी बेंगलुरु सबअर्बन ट्रेन के लिए 18600 करोड़ रूपए, कई और तेजस ट्रेनों की शुरुआत करना, तथा 4 स्टेशनों को पीपीपी मॉडल के आधार पर विकसित करने के साथ साथ रेलवे ट्रैक के साथ वाली रेलवे की जमीनों पर सौर ऊर्जा फैसिलिटीज की स्थापना भी शामिल है।

लेकिन कॉन्ग्रेस झूठ और भ्रम फैलाने की अपनी नीति पर कायम हुई जान पड़ती है। जिसने 2019 का पूरा आम चुनाव राफेल को लेकर खड़े किए झूठ पर लड़ा, वह अब रेलवे को लेकर झूठ बोलने में लगी हुई है जो राफेल विवाद, नागरिकता कानून (CAA) पर फैलाए गए भ्रम की ही अगली कड़ी जान पड़ती है।

पूरे देश में NRC लागू करने पर अभी कोई फैसला नहीं: गृह मंत्रालय ने दिया लोकसभा में लिखित जवाब

देश भर में जगह-जगह सीएए और NRC को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच गृह-मंत्रालय ने लोकसभा में इसे लेकर अपना एक लिखित जवाब दिया है, जिसमें गृह-मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने पूरे देश में NRC लागू करने पर अभी तक कोई फैसला नहीं किया है।

इससे पहले लोकसभा में सांसद चंदन सिंह और नागेश्वर राव ने एनआरसी को लेकर सवाल पूछा था कि क्या सरकार के पास पूरे देश में NRC लागू करने को लेकर कोई योजना है? और है तो इसे लेकर कट ऑफ की तारीखें क्या है और क्या इसे लागू करने के संबंध में अभी तक किसी भी राज्य की सरकारों से चर्चा की गई है। इन सवालों के लिखित जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पूरे देश में NRC लागू करने को लेकर सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बाद 31 जनवरी से शुरू हुए संसद सत्र में विपक्षी दल केन्द्र सरकार को सीएए और NRC के मुद्दे पर घेरे हुए हैं। इतना ही नहीं इसे लेकर संसद में विपक्षी दलों द्वारा लगातार नारेबाजी भी की जा रही है।

गौरतलब है कि संसद ने दिसंबर 2019 में CAA को लेकर कानून बनाया था। इसके बाद देश में इसे लेकर भ्रम फैलाया गया और धरना प्रदर्शन हुए। कई स्थानों पर इन प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा की गई, जिसमें प्रदर्नकारियों द्वारा सरकारी संपतियों को नुकसान पहुँचाया गया था। इन प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर 2019 को हुई एक रैली में NRC पर लोगों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया था।

मोदी ने कहा था, ‘मैं 130 करोड़ देशवासियों को बताना चाहता हूँ कि 2014 में पहली बार मेरी सरकार के सत्ता में आने के बाद से NRC पर कभी चर्चा नहीं हुई।’ उन्होंने कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेश की वजह से सिर्फ असम में किया गया। मोदी ने यह भी कहा था कि, नागरिकता कानून या NRC का भारतीय मुस्लिमों से कुछ लेना देना नहीं है।

नए साल में 2210 पाकिस्तानी हिंदू आए भारत, कहा- चाहे जान ले लो, मगर वापस जाने के लिए न कहो

भारत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर मचे बवाल के बीच सोमवार (फरवरी 3, 2020) को पाकिस्तान से करीब 200 हिंदू अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत आए। इनमें से अधिकतर का कहना है कि वो पाकिस्तान वापस नहीं जाना चाहते। ये लोग हरिद्वार जाने के लिए 25 दिन का वीजा लेकर यहाँ आए हैं। इनका कहना है कि पाकिस्तान में जीना मुश्किल है। इन लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की नागरिकता देने की अपील की है।

मीडिया रिपोर्टों के नौसर इस साल 1 से 31 जनवरी तक 2010 हिंदू अटारी-वाघा के रास्ते भारत आए। 1 और 2 फरवरी को कोई नहीं आया और फिर 3 फरवरी को 200 लोग आए। यानी कि इस साल कुल 2210 पाकिस्तानी हिंदू भारत आए हैं। कुछ ने वहाँ हो रही ज्यादतियों के बारे में बात करते हुए कहा कि ‘चाहे जान ले लो, मगर वापस जाने के लिए न कहो।’ 

पाकिस्तान से आए लोगों का कहना है, “वहाँ बच्चियों को सरेआम उठाकर ले जाने की धमकियाँ मिलती रहती हैं। अब हम वापस पाकिस्तान नहीं लौटना चाहते।” एक लड़की ने कहा है कि अब हम अपने देश में आ गए हैं। बता दें कि ये हिंदू परिवार अपना घरेलू सामान बोरों में भरकर लाए हैं और कह रहे हैं कि वो अपना आश्रय ढूँढ लेंगे। इससे स्पष्ट हो रहा है कि ये लोग वापस जाने की मंशा से तो नहीं आए हैं।

एक पाकिस्तानी हिंदू ने कहा कि नए नागरिकता कानून के लागू होने के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू भारतीय नागरिकता मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। एक महिला ने कहा, “हम पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं महसूस करते। हमारी लड़कियों को हमेशा डर लगा रहता है कि कोई कट्टरपंथी उनका अपहरण कर लेगा। पुलिस मूक दर्शक बनी देखती रहती है। हमारी लड़कियाँ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में आजादी से चल भी नहीं सकती हैं।” बिना अपना नाम बताए दो अन्य महिलाओं ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का अपहरण अब रोज की बात हो गई है। कट्टरपंथियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने की हिमाकत कोई नहीं कर सकता।

उनका कहना है कि अब तो हिंदू विवाहिताओं का भी अपहरण होने लगा है। जबरन धर्मांतरण करवा उनका निकाह करा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अब भारत ही एकमात्र सहारा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 से अब तक 60 महिलाओं को जबरन इस्लाम कबूल करवाकर मुस्लिम युवकों से निकाह करवाया गया है। इसमें कई विवाहिताएँ शामिल हैं। कई तो ऐसी भी रहीं जिनकी हत्या तक कर दी गई।

अकाली दल के नेता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन सभी को वाघा बॉर्डर पर रिसीव किया। सिरसा ने दावा किया कि ये वो लोग हैं जिन्हें पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। सिरसा का कहना है कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे और इन्हें भारतीय नागरिकता देने की अपील करेंगे।

सिरसा ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान में दलित हिंदू-सिख ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे हिंदू सिख परिवार भी ज़बरन धर्म परिवर्तन का अत्याचार झेल रहे हैं। पाक के एक ऐसे ही डॉक्टर परिवार को मैंने बॉर्डर पर रिसीव किया। उन्होंने अपनी जो आपबीती बताई उसे सुनकर हम सबके रोंगटे खड़े हो गए। इस परिवार को जल्द भारत की नागरिकता दिलवाने के सिलसिले में मैं गृह मंत्री अमित शाह से मिलूँगा।”

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बम बनाते हुए फूटने से TMC नेता मुस्ताक शेख ने गँवाए दोनों हाथ, बीजेपी की CAA-समर्थन रैली में फोड़ना था लक्ष्य

पश्चिम बंगाल में बीरभूम के लेबारा गाँव की एक दुखद घटना सामने आई है। बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के बूथ अध्यक्ष मुस्ताक शेख ने बम बनाते समय हुए विस्फोट में अपने दोनों हाथ गँवा दिए। इस बम की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बम विस्फोट की आवाज सुनकर गाँव के कई लोग भाग खड़े हुए। बताया जा रहा है कि मुस्ताक शेख इस बम को भाजपा द्वारा CAA के समर्थन में निकाली जा रही रैली में फोड़ने के लिए बना रहा था। TMC इस घटना को छुपाने का प्रयास कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, TMC नेता मुस्ताक शेख के साथ यह दुखद घटना तब घटित हुई जब बंगाल के लेबारा गाँव के पश्चिमी मैदान में नाले के किनारे बम बनाए और लगाए जा रहे थे। इसके बाद घटनास्थल पर जगह-जगह खून, पत्थर, सुतली और गोला बारूद बिखरे पड़े थे। हालाँकि, धमाके के बाद इस जगह को तुरंत ही पूरी सावधानी से जल्दी ही मिट्टी से ढक लिया जाता है। TMC द्वारा इस घटना को झूठ बताया जा रहा है। इस घटना पर जिले के तृणमूल के महासचिव और परुई निवासी मुस्ताक हुसैन ने इस घटना को झूठ बताया है।

एक स्थानीय निवासी और राज्य भाजपा अल्पसंख्यक सेल के सचिव, शेख समद ने कहा कि इस घटना के समय, सत्तारूढ़ बूथ के अध्यक्ष, और लेबारा गाँव के निवासी बापी उर्फ ​​मुस्ताक शेख बमबारी के लिए बम तैयार कर रहे थे। इसी बीच अनजाने में बम फट गया और बापी के दोनों हाथ उड़ गए। मुस्ताक शेख के अलावा शेष तीन को गंभीर हालात में वहाँ से ले जाया गया।

घटना के बाद, बापी शेख को शक्तिगढ़ के एक नर्सिंग होम में स्थानांतरित कर दिया गया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि बम मंगलवार (फरवरी 4, 2020) को बीजेपी की अभिनंदन यात्रा पर हमला करने के उद्देश्य से लगाया गया था।

ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक होता जा रहा है। नागरिकता कानून के विरोध में TMC के गुंडों द्वारा की जा रही रैलियों में गोलियाँ चलने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिनमें कुछ लोगों की जानें भी गईं हैं।

जिसने सोनिया गाँधी को सिखाई हिंदी उनके बेटे BJP में, कहा- मोदी के काम को देखकर लिया फैसला

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता जनार्दन द्विवेदी के बेटे समीर द्विवेदी भाजपा में शामिल हो गए हैं। समीर ने मंगलवार (फरवरी 4, 2020) को बीजेपी की सदस्यता ली। उन्होंने भाजपा में शामिल होने के साथ कहा, “‘मैं पहली बार किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बन रहा हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम को देखकर मैंने भाजपा में जाने का फैसला किया है।’

करीब डेढ़ दशक तक कॉन्ग्रेस के संगठन महासचिव रहे जनार्दन द्विवेदी की गिनती सोनिया गाँधी के करीबियों में होती रही है। कहा जाता है की राजनीति में प्रवेश के बाद उन्होंने ही सोनिया गाँधी को हिंदी सिखाई थी। शुरुआत में वही उनकी स्पीच लिखते थे। ऐसे में उनके बेटे का भाजपा में शामिल होना कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है

हालाँकि जर्नादन द्विवेदी ने बेटे के इस फैसले पर अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने कहा,“मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर समीर ने भाजपा ज्वाइन की है तो ये उनका खुद का फैसला है।”

गौरतलब है कि मार्च 2018 में द्विवेदी ने कॉन्ग्रेस महासचिव का पद छोड़ा था। इसके बाद से उनकी राजनीतिक सक्रियता कम हो गई है। लेकिन, अपने बयानों को कारण वो समय-समय पर सुर्खियों में रहते हैं। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद उन्होंने पार्टी के स्टैंड से इतर राय प्रकट की थी। द्विवेदी ने कहा था कि उनके राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया भी 370 के खिलाफ थे। पिछले दिनों वे एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच साझा करने के कारण चर्चा में थे।

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आम चुनावों में कॉन्ग्रेस की शिकस्त के बाद उन्होंने कहा था कि पार्टी भीतरी कारणों से हारी है। पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस संगठन में उन्होंने पूरा जीवन लगाया, उसकी स्थिति देख कर पीड़ा होती है। उन्होंने कहा कि हार के कारण पार्टी के भीतर हैं, न कि बाहर। पार्टी में कई ऐसी बातें हुईं, जिससे वो सहमत नहीं थे और उन्होंने इससे पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया था। राजनीति से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से पहले द्विवेदी पॉंच कॉन्ग्रेस अध्यक्षों इंदिरा गॉंधी, राजीव गॉंधी, नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी और सोनिया गॉंधी के साथ काम किया था।

Article 370 पर टूट रही कॉन्ग्रेस! 2 धुरंधर युवा नेता के साथ जनार्दन द्विवेदी भी मोदी सरकार के पक्ष में

Article 370: कॉन्ग्रेस में आंतरिक टकराव, अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी किया समर्थन

खुद की करनी से हारी पार्टी, 10% आरक्षण पर नहीं सुनी थी मेरी बात: कॉन्ग्रेस के पूर्व महासचिव

बोरिस जॉनसन की बड़ी फजीहत, चाय-दुकान पर उनकी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित: द वायर

गत लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि राहुल गाँधी के भ्रष्टाचारों के खिलाफ पूरे सबूत होने के बावजूद भी मीडिया उन पर बात नहीं करता है, लेकिन मोदी के लिए दुनिया के किसी कोने में भी अगर कोई गाली दे दे तो मीडिया फ़ौरन जाकर उसका बयान बड़े हेडलाइंस में चला देता है। ऐसा ही एक करनामा करते हुए ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस‘ देखा जा रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर है, जिसकी हेडलाइन है- “In embarrassment for Modi government, Seattle City Council passes resolution against CAA, NRC”
जिसका अर्थ है- “मोदी सरकार की बड़ी फजीहत, सिएटल सिटी काउंसिल ने CAA और NRC के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है”

इस खबर को पढ़ने पर पता चलता है कि यह खबर उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में बसे वाशिंगटन राज्य के किसी सीऐटल शहर की है, जो किसी तरह द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर्स के हाथ लगी। इसके बाद सब सिलसिलेवार तरीके से होता नजर आया जो तरीका मोदी सरकार के खिलाफ मीडिया गिरोह अक्सर आजमाते हुए नजर आता है।

दिलचस्प बात यह है कि ये सब वही वामपंथी मीडिया गिरोह की घातक टुकड़ियाँ हैं, जो कई बार अपने सरकार-हिन्दू और देशविरोधी प्रोपेगैंडा के कारोबार में संलिप्त पाए गए हैं।

मीडिया गिरोह की सबसे प्रमुख इकाई, यानी प्रोपेगैंडा वेबसाइट दी वायर, स्क्रॉल, दी क्विंट आदि ने भी इस खबर को प्रकाशित किया। हालाँकि, दी वायर ने इसे ‘मोदी सरकार की शर्मिंदगी’ बताने का उतावलापन नहीं दिखाया।
‘दी वायर’ की रिपोर्ट बताती है कि जावेद सिकंदर सिएटल में भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल के प्रवक्ता ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। अब अगर मोदी सरकार के विरोध में पारित किसी प्रस्ताव का स्वागत कोई जावेद, अब्दुल, लुकमान या गजनवी कर दे, तो भारत में मौजूद पत्रकारिता के समुदाय विशेष का स्खलित होना स्वाभाविक है ही।

मीडिया गिरोह की मानें तो अब अगर चीन की कोई नगर पालिका या ग्राम पंचायत भी भारत में फासिस्ट मोदी सरकार के दौरान चाउमीन में डाली जा रही शिमला मिर्च के खिलाफ प्रस्ताव जारी कर दे, तो मोदी सरकार की जड़ें हिलते देर नहीं लगेगी।

जैसा की भारतीय मीडिया में बैठे हुए कुछ कथित ‘सेक्युलर’ विचारकों ने नागरिकता कानून के खिलाफ शुरू से ही माहौल बनाया था, सिएटल में पारित इस प्रस्ताव में नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (CAA-NRC) को मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया है।

विरोधी राजनीतिक दलों के प्रवक्ता की तरह काम करने वाले NDTV में रवीश कुमार जैसे लोगों की पूरी बटालियन जब मुस्लिमों को उकसाने के लिए रोजाना अपने प्राइम टाइम और सोशल मीडिया एकाउंट्स से डिटेंशन कैम्प की तुलना जर्मनी के गैस चैंबर से करते हैं तो एक समय आता है जब असहिष्णुता जैसे शब्द स्थापित होने शुरू हो जाते हैं।

सिएटल में मोदी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने से मोदी सरकार की फजीहत होना इसी प्रकार है, जिस तरह से चाय की दुकान पर खड़े चार लोग चाय-बीड़ी-सिगरेट ख़त्म होने के इन्तजार में समय बिताने के लिए नेहरू के नाम के साथ गयासुद्दीन गाजी जैसी परिकल्पनाओं पर बहस करते हैं। या फिर भारतीय स्कूल-कॉलेज के बच्चे कैंटीन में बैठकर युगांडा की सरकार की ईंट से ईंट बजा देने का संकल्प कर लेते हैं।

भारतीय मीडिया गिरोह बखूबी जानता है कि इस प्रकार की हेडलाइंस से आज नहीं तो कल उनका सन्देश समाज के बीच चर्चा का मुद्दा बनेगा और वाशिंगटन या सिएटल को ठीक से बोल पाने में अक्षम लोग भी इस बात से प्रभावित होते नजर आएँगे कि कहीं कोई मोदी सरकार के विरोध में प्रस्ताव पारित कर रहा है।

हालाँकि, सिएटल में मौजूद भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल के प्रवक्ता जावेद सिकंदर असम को भारत से काट देने जैसी बातें कहने वाले राजद्रोह का आरोपित शरजील इमाम के बयान का भी स्वागत करते हैं या नहीं, यह बात ना ही स्क्रॉल ने बताई है, ना दी वायर ने और ना ही दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने। हो सकता है कि मीडिया गिरोह की इन घातक टुकड़ियों ने यह जानने में रूचि भी न दिखाई हो कि जावेद सिकंदर के विचार शाहीन बाग़ की भेंट चढ़े बच्चे के बारे में क्या हैं।

भारतीय मीडिया के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 के आम चुनावों से पहले ही अपनी राय स्पष्ट कर दी थी। एक इंटरव्यू के दौरान ऑपइंडिया की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हर घोटाले में नामदार परिवार (कॉन्ग्रेस की ओर इशारा करते हुए) का नाम सबसे ऊपर है। ऑनलाइन मैगज़ीन पर उनके खिलाफ सभी सबूत मौजूद हैं, लेकिन कोई भी मीडिया वाला उन पर बात करने को राजी नहीं होता है।

दरअसल, ऑपइंडिया ने गाँधी परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए संदिग्ध भूमि सौदों का ख़ुलासा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान की पोल खोलने के लिए दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस और दी वायर की सिएटल में पारित हुए एक प्रस्ताव को मोदी सरकार की फजीहत बता देना इसी बात की पुष्टि करता है।

केजरीवाल के सूजे गाल: लोगों ने जोड़ा अमानतुल्लाह कनेक्शन, कहा- अमानती गुंडे ने इसका भी फेसियल कर दिया

सीएम केजरीवाल ने सोमवार (फरवरी 3, 2020) को समाचार चैनल न्यूज 18 हिंदी के कार्यक्रम ‘एजेंडा दिल्ली’ में हिस्सा लिया। इस दौरान उनका चेहरा सूजा हुआ दिख रहा था। इसको लेकर जब एंकर ने पूछा कि आपके चेहरे पर कुछ हुआ है क्या ? जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा कि चुनाव के समय अत्यधिक धूल-मिट्टी के कारण उन्हें इंफेक्शन हो गया है। 1-2 दिन में ठीक हो जाएगा।

इस वीडियो के 0:10 से 0:22 के बीच आप इस बात को सुन सकते हैं

सुधांशु नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “केजरीवाल को बाहर निकलते ही इनफेक्शन हो जाता है।” इसके बाद ट्विटर यूजर्स ने इसे आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान से जोड़ना शुरू कर दिया। एक ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, किसने धोया फिर आपकी धूल मिट्टी को? अमानतुल्लाह ??

दूसरे ने लिखा कि लगता है कि थप्पड़ खाया है इसने खान का।

एक यूजर ने लिखा, “देख लो दिल्ली वालों जो CM वोट के लिए मुग़लो से पिटता रहा हो, वह तुम्हें क्या सुरक्षित रखेगा!!!”

सुनीता दास नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “अमानती गुंडे ने इसका भी फेसियल कर दिया।”

बता दें कि केजरीवाल के बिगड़े चेहरे को अमानतुल्लाह से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि हाल ही में एक ट्विटर यूजर ने दावा किया था कि अमानतुल्लाह खान ने केजरीवाल को पीट दिया। ट्वीट में कहा गया था कि केजरीवाल इस बात से नाराज चल रहे थे कि करोड़ों रुपए फूँकने के बाद भी आम आदमी पार्टी को शाहीन बाग प्रदर्शन का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ‘पोकर शाह’ नामक ट्विटर अकाउंट के अनुसार, दिल्ली के सीएम इस बात से नाराज़ थे कि उन्हें शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फ़ायदा क्यों नहीं हो रहा है?

अटकलों का बाजार गर्म करते हुए यूजर ने लिखा कि रविवार (फरवरी 2, 2020) की रात आक्रोशित केजरीवाल ने अमानतुल्लाह से इस बारे में पूछा और नाराज़गी जताई। इस ट्वीट की मानें तो अमानतुल्लाह इसके बाद मारपीट पर उतर आए और उन्होंने केजरीवाल के साथ जोर-जबरदस्ती की। ‘पोकर शाह’ ने कहा कि प्रार्थना कीजिए कि ये ख़बर सत्य नहीं हो। अब केजरीवाल के सूजे हुए चेहरे को देखकर सोशल मीडिया में फिर से अटकलों का दौर गरम है।

शाहीन बाग़ पर पूछे सवाल तो अमानतुल्लाह ने अँधेरे में CM केजरीवाल को पीटा: अटकलों का बाजार गर्म

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LGBTQ रैली में शरजील के समर्थन में लगे नारे: उर्वशी सहित 50 के ख़िलाफ देशद्रोह के मामले में मुकदमा दर्ज

मुंबई के आज़ाद मैदान में समलैंगिक समुदाय द्वारा निकाली गई रैली के दौरान देशद्रोही नारे लगाने वालों के ख़िलाफ मुंबई पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उर्वशी चूड़ावाला सहित 50 के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल इस मार्च में लोगों ने सीएए विरोध के नाम पर शरजील के समर्थन में नारे लगाते हुए कश्मीर की आज़ादी की माँग के पोस्टर लहराए थे।

मुंबई पुलिस ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आज़ाद मैदान स्टेशन पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी चूड़ावाला सहित अन्य के खिलाफ देशद्रोह के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई करते हुए आरोपितों की तलाश में जुट गई है। जल्द ही पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार करेगी। दरअसल इन सभी पर शरजील के समर्थन में नारे लगाने के आरोप हैं।

बीते शनिवार को एलजीबीटी समुदाय द्वारा अपने अधिकारों की माँग के लिए हर वर्ष की तरह मुंबई में एक रैली निकाली। यह रैली पहले हर वर्ष की तरह मुंबई के क्रांति मैदान में होनी थी, लेकिन पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे मुंबई के आज़ाद मैदान में आयोजित किया गया थी। इस बार सीएए, एनआरसी के विरोध के नाम पर की गई इस रैली में न सिर्फ़ शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए बल्कि कई बैनर-पोस्टरों में कश्मीर की ‘आज़ादी’ की माँग की गई थी।

बता दें कि हमसफर संस्था द्वारा आयोजित इस मार्च में शामिल लोगों ने शरजील इमाम के समर्थन में नारे और कश्मीर को आज़ाद करने की माँग की थी। मामला प्रकाश में आने के बाद बीजेपी नेता किरीट सौमेया ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की थी। वहीं वायरल वीडियो की जाँच के बाद ही पुलिस ने उर्वशी चूड़ावाला सहित 50 लोगों के ख़िलाफ़ में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। गौरतलब है कि शरजील इमाम द्वारा सीएए विरोध के नाम पर दिए गए बयानों के बाद दिल्ली पुलिस ने शरजील को पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया था। शरजील ने पुलिस पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं।