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कश्मीर मसले पर रूस ने खुलकर दिया भारत का साथ, कहा- हमारे विचार बिलकुल भारत जैसे हैं

कश्मीर मसले पर अब रूस भी खुलकर भारत के साथ आ गया है। रूस ने अपने हालिया बयान में कहा है कि वह इस मामले में भारत के साथ है।

इस संबंध में रूसी राजनयिक निकोले कुदाशेव ने आर्टिकल 370 पर भारत के फैसले को ‘संप्रभु’ निर्णय करार दिया। साथ ही इसे भारत का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा, “भारत-पाकिस्तान के बीच शिमला और लाहौर समझौते के तहत इस तरह के मुद्दों को हल किया जा सकता है। हमारे विचार बिल्कुल भारत के जैसे ही हैं।”

इसके अलावा भारत में रूसी दूतावास के उप प्रमुख रोमन बाबूसकिन ने भी कहा कि जब तक दोनों देश मध्यस्थता के लिए नहीं कहते तब तक रूस की भारत-पाकिस्तान विवाद में कोई भूमिका नहीं है।

उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बंद दरवाजे की बैठक के दौरान उन्होंने दोहराया था कि कश्मीर भारत का एक आंतरिक मुद्दा है।

गौरतलब है कि कश्मीर को भारत का हिस्सा होते देख पाकिस्तान की बौखलाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है। वे लगातार इस मुद्दे का अंतराष्ट्रीयकरण करने पर लगा हुआ है, लेकिन हर ओर से फजीहत की जगह उसे कुछ हासिल नहीं हो रहा। हालाँकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार को इस मामले में दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की भी थी, लेकिन जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी ने सार्वजिनक रूप से उनके आगे स्पष्ट कर दिया कि ये एक द्विपक्षीय मामला है और वह किसी भी देश को इसके लिए कष्ट देना नहीं चाहते।

तुम एकदम कन्फ्यूज़्ड हो, नेहरू की तरह सेकुलरिज्म का प्रतीक बनो: पाक मंत्री की राहुल गाँधी को सलाह

पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने राहुल गाँधी को कन्फ्यूज्ड बताया है। पाकिस्तानी मंत्री ने यह बयान पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के उस ट्वीट की प्रतिक्रिया में दिया जिसमें उन्होंने भारत का आंतरिक मसला बताया था। राहुल गाँधी ने पाकिस्तान या किसी भी अन्य देश द्वारा जम्मू कश्मीर में दखल दिए जाने को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने लिखा था कि वे मोदी सरकार से कई मतभेद रखते हैं लेकिन जम्मू कश्मीर को लेकर उनकी राय स्पष्ट है।

फवाद चौधरी ने राहुल गाँधी की इस ट्वीट के जवाब में लिखा कि उनकी राजनीति कन्फ्यूजन वाली है। फवाद ने राहुल गाँधी को ‘वास्तविकता के क़रीब रुख अखितयार करने’ की सलाह दी। पाकिस्तान के मंत्री ने राहुल गाँधी को जवाहरलाल नेहरू जैसा बनने की सलाह दी। फवाद ने लिखा कि नेहरू भारतीय सेकुलरिज्म और लिबरल सोच के प्रतीक थे। इसके बाद उन्होंने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की इस शायरी का ज़िक्र किया:

ये दाग़ दाग़ उजाला, ये शबगज़ीदा सहर
वो इन्तज़ार था जिस का, ये वो सहर तो नहीं

बता दें कि पाकिस्तान ने यूएन को पत्र लिख कर जम्मू कश्मीर पर अपना रोना रोया है। इस पत्र में पाकिस्तान ने राहुल गाँधी के बयानों का जिक्र करते हुए संयुक्त राष्ट्र को यह बताना चाहा कि भारत ‘कश्मीर में अत्याचार’ कर रहा है। पाकिस्तान ने राहुल गाँधी के उस बयान को अपना सहारा बनाया जिसमें उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर में लोग मर रहे हैं। इसके अलावा राहुल ने यह भी कहा था कि राज्य में चीजें ठीक नहीं चल रही हैं। पाकिस्तान ने उनके इस बयान को भी लपकते हुए यूएन को भेजे पत्र में शामिल कर दिया।

फजीहत होने के बाद राहुल गाँधी ने ट्विटर पर पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थक बताते हुए लिखा कि जम्मू कश्मीर में हो रही हिंसा के लिए पाकिस्तान ही ज़िम्मेदार है। लोगों ने उन्हें जवाब दिया कि अब तो डैमेज हो चुका है और वह कुछ भी लिख कर उसे बदल नहीं सकते। राहुल ने अपनी ट्वीट्स में लिखा कि दुनिया पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रमुख समर्थक के रूप में पहचानती है।

युद्ध हुआ तो पाकिस्तान की हार तय, भारत से अच्छे सम्बन्ध रखो इमरान खान: दलाई लामा

तिब्बत के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने पाकिस्तान को नसीहत दी है। उन्होंने जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बारे में पूछे जाने पर इसे जटिल सवाल बताया। दलाई लामा मानते हैं कि भारत का विभाजन ही ग़लत था और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भी इस क़दम के ख़िलाफ़ थे। दलाई लामा ने कहा कि विभाजन अकारण हुआ। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कम विकसित है। दलाई लामा ने इमरान ख़ान को दो टूक नसीहत देते हुए कहा कि अगर युद्ध हुआ तो पाकिस्तान की हार तय है।

उन्होंने इमरान को यह भी नसीहत दी कि वे भारत के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध रखें। दलाई लामा ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि वे आधुनिक शिक्षा को प्राचीन भारतीय ज्ञान से जोड़ना चाहते हैं। उन्होंने भारत के सुरक्षा बलों की तारीफ करते हुए कहा कि वे हर प्रकार के खतरों में उनके साथ खड़े रहते हैं। दलाई लामा ने बताया कि कई चीनी अधिकारी उनसे वापस आने का आग्रह करते हैं।

उन्होंने बताया कि जब वे चीन में थे तब चीनी पुलिस उनकी सुरक्षा कम और निगरानी ज्यादा करती थी। उन्होंने भारत और चीन के बीच दोस्ताना संबंधों पर बल दिया। दलाई लामा ने कहा कि भारतीय अधिकारी हमेशा उन्हें आश्वस्त करते हैं कि वे हमेशा भारतीय मेहमान रहेंगे और उन्हें कभी भी भारत छोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

‘कश्मीर हमारा है, हमें पाकिस्तान से वापस लेना चाहिए POK, अगर अब पाक से बात होगी तो सिर्फ़ उसी पर’

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाद POK को वापस लेने पर उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू ने हुँकार भरी है। उन्होंने कहा है कि अब पाकिस्तान से अगर बात होगी तो सिर्फ़ पीओके पर।

उन्होंने विशाखापत्तनम में नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया और कहा कि हम शांतिप्रिय राष्ट्र हैं, हम युद्ध नहीं चाहते।

उपराष्ट्रपति ने इस दौरान कहा कि पाकिस्तान से अब केवल पीओके पर बात होगी। इसके अलावा पाकिस्तान से किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी। उन्होंने कहा, “हम किसी पर हमला नहीं करते, लेकिन जो हम पर हमला करेगा, हम उसे मुँहतोड़ जवाब देंगे, हम युद्धोन्मादी नहीं हैं। ना हम किसी के मामले में दखल देते हैं और ना चाहते हैं हमारे आंतरिक मामले में दखल हो।

गौरतलब है कि इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी हरियाणा में 18 अगस्त को पाकिस्तान को उसकी हरकतों पर चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था भारत के खिलाफ पाकिस्तान आतंकवाद फैलाना बंद कर दे, नहीं तो हम किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा सदन में अमित शाह भी बयान दे चुके हैं कि POK कश्मीर का हिस्सा है, उसे पाने के लिए जान दे देंगे।

दलाई लामा का बड़ा खुलासा: चीन से सख्ती से निपटने पर विचार कर रहे थे पूर्व PM लाल बहादुर शास्त्री

तिब्बत के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को लेकर बड़ा खुलासा किया है। चीन हमेशा से भारत को समय-समय पर परेशान करता रहा है। 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारत को हार मिली थी। दलाई लामा ने चीन और भारत के प्रधानमंत्रियों को लेकर अपनी बात रखी।

दलाई लामा ने ये बातें दैनिक भास्कर को दिए गए इंटरव्यू में कही। लाल बहादुर शास्त्री के बारे में दलाई लामा ने बताया कि जब वह उनसे मिले तब तत्कालिन पीएम शास्त्री चीन से सख्ती से निपटने पर विचार कर रहे थे। अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में दिलचस्प वाकया सुनाते हुए दलाई लामा ने कहा कि जब वे उनसे बातचीत कर रहे थे तब वाजपेयी को झपकी आई थी। लेकिन दलाई लामा ने जैसे ही पाकिस्तान का नाम लिया, वाजपेयी नींद से उठ कर चौकन्ने हो गए और ध्यान से बातें सुनने लगे।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित दलाई लामा का इंटरव्यू (साभार सहित)

दलाई लामा ने बताया कि चीन भी अब समझ गया है कि उसकी पुरानी नीति सफल नहीं होगी। इसीलिए वह जिस तिब्बती परंपरा को अपना बताता था, उसे अब नालंदा का मानने लगा है। दलाई लामा ने ख़ुद को भारत का बेटा बताते हुए कहा कि वे दिमागी रूप से कई आधुनिक भारतीयों से भी ज्यादा भारतीय हैं। उन्होंने खुलासा किया कि कई चीन के नागरिक भी भारत को महानतम लोकतंत्र बताते हैं।

SC ने 370 पर माँगा केंद्र से जवाब, अक्टूबर में संवैधानिक बेंच सभी याचिकाओं पर करेगी सुनवाई

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए निष्प्रभावी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर 7 दिनों के भीतर जवाब माँगा।

इस दौरान नोटिस जारी करने के अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपते हुए बताया कि अब अक्टूबर के पहले हफ्ते में इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर सुनवाई होगी। जिसकी अगुआई सीजेआई रंजन गोगोई करेंगे।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में 14 याचिकाएँ दायर हुई हैं। जिसमें एडवोकेट एमएल शर्मा, पूर्व आईएस अधिकारी शाह फैसल, जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद और राधा कुमार की याचिका भी शामिल है।

इस सुनवाई के दौरान सबसे पहले कोर्ट ने जामिया में लॉ पढ़ रहे छात्र मोहम्मद अलीम सैयद को उसके माता-पिता से मिलने की इजाजत दी। साथ ही कोर्ट ने सरकार से अलीम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा।

इसके बाद कोर्ट ने लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी की विधायक भाई से मिलने की माँग पर उन्हें भी श्रीनगर जाने की इजाजत दी। लेकिन सीजेआई ने येचुरी से स्पष्ट कहा कि वह वहाँ उन्हें पार्टी नेता यूसुफ तारिगामी से केवल बतौर दोस्त मिलने की इजाजत देंगे, न कि राजनैतिक उद्देश्य से।

बता दें कि बुधवार को कोर्ट में हुई सुनवाई में सीजेआई ने कहा भारत के नागरिक के तौर पर हर इंसान को देश के किसी भी हिस्से में घूमने-फिरने की आज़ादी है। वहीं, कुछ दिन पहले भी सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि कश्मीर में हालात ठीक करने के लिए कोर्ट सरकार को कुछ और वक्त देना चाहती है

महादलितों की मॉब लिंचिंग: TOI की भ्रामक हेडलाइन के पीछे छिपा मीडिया कुचक्र का घिनौना सच

अगर आप ख़बरें पढ़ते हैं और न्यूज़ देखते हैं तो आपको पता होगा कि देश में जबरदस्ती यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि असहिष्णुता का माहौल है। गिरोह विशेष की परिभाषा पर ध्यान दें तो ‘असहिष्णुता अर्थात हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों के लिए बनाया हुआ असुरक्षित माहौल‘। उनकी परिभाषा में थोड़ा और गहरे पैठें तो ‘असहिष्णुता अर्थात ब्राह्मणों द्वारा दलितों पर अत्याचार‘। अगर दोषी ब्राह्मण नहीं है तो उसे ‘ब्राह्मणवादी’ तो लिखा ही जा सकता है। और हाँ, असहिष्णुता अर्थात ‘राष्ट्रवादी भीड़ द्वारा किसी दलित या मुस्लिम की हत्या‘। ख़बरों को परोसने के एंगल पर गौर करें।

जब ‘द क्विंट’, ‘द वायर’ और ‘द स्क्रॉल’ जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल अगर ऐसा करते हैं तो चलता है क्योंकि उनका जन्म ही सिर्फ़ इसीलिए हुआ है। अपनी पत्रकारिता से भाजपा के लिए निगेटिव माहौल तैयार करना इनका उद्देश्य है और इसके लिए जहाँ तक हो सके नीचे गिरना इनका परम लक्ष्य। लेकिन, जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ जैसा प्रमुख मीडिया संस्थान ऐसा करता है तो यह काफ़ी दुःखद है क्योंकि देश के सबसे बड़े मीडिया नेटवर्क्स में से एक होने के नाते उनकी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है, जिसे वे अपने जूतों में गोबर लगा कर रौंद रहे हैं। आइए जानते हैं कि हुआ क्या?

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ख़बर परोसी कि बिहार के नवादा में दो महादलितों की लिंचिंग कर दी गई। हम हों या आप, ये ख़बर पढ़ कर यही सोचेंगे कि देश में सच में असहिष्णुता का माहौल है क्योंकि महादलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। मामला बिहार का होने के कारण पहली नज़र में किसी को भी लगेगा कि ऐसा ‘दबंगों’ ने किया है। यहाँ फिर से गिरोह विशेष की परिभाषा पर ध्यान दें तो ‘दबंग अर्थात कथित ऊँची जाति के लोग‘। जब वार्ड सदस्य खुर्शीद दुष्कर्म में असफल रहने पर किसी ग़रीब माँ-बेटी का सिर मुँड़वा कर सड़क पर घुमाता है तो इसे ‘दबगों के अत्याचार‘ वाला छौंक दिया जाता है।

क्यों? क्योंकि पहली नज़र में ऐसा लगे कि बिहार की कथित ऊँची जाति के लोगों ने ऐसा किया है। अब वैशाली से लगभग सवा सौ किलोमीटर दूर नवादा में आते हैं। ऊपर जो हमनें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की ख़बर ‘महादलितों की लिंचिंग’ का जिक्र किया, वह नवादा की ही है। आपने हैडलाइन देख ली, जिसे मात्र 4 शब्दों में समेट दिया गया था। इसमें अतिरिक्त जानकारी दी जा सकती थी क्योंकि 4 शब्दों की हैडलाइन देने का एक ही मकसद था कि ऐसा जानबूझ कर किया गया ताकि ‘महादलित’ और ‘लिंचिंग’- इन दो शब्दों को हाईलाइट किया जा सके। अब आगे बढ़ने से पहले आपको इस घटना के बारे में समझा देते हैं।

नवादा के कौआकोल थाना अंतर्गत स्थित तराउन गाँव में एक 55 वर्षीय महादलित महिला चिंता देवी की हत्या कर दी गई। लोगों का मानना था कि वह डायन है और ‘काला जादू’ करती है, इसीलिए 2 लोगों की ‘भीड़’ ने उसे घर से खींच कर मार डाला। अब आप ही बताइए, 2 लोगों की ‘भीड़’ कैसी होती है? मृत महिला के पति सुखदेव माँझी ने कहा कि लोगों की नज़रों के सामने उनकी पत्नी को मार डाला और वह उसे बख्श देने के लिए दो लोगो की ‘भीड़’ से मिन्नतें करते रहे। ये लोग मुसहर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिन्हें बिहार में महादलित का दर्जा मिला हुआ है। बिहार के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यहाँ के सारे दलित महादलित हैं।

ऐसा सिर्फ़ बिहार की राजनीति में ही हो सकता है। पासवान जाति को महादलित का दर्जा देने के बाद बिहार में कोई दलित बचा ही नहीं। वापस ख़बर पर आएँ तो भीड़ की गुस्सा का कारण यह था कि रविवार (अगस्त 25, 2019) की शाम एक 11 वर्षीय बच्चे की तबियत ख़राब हो गई थी और मंगलवार को उसकी मृत्यु हो गई। मृतक के पति के अनुसार, उसी लड़के के परिवार ने महिला को लोहे के रॉड से पीटा और मार डाला। अब सवाल उठता है कि दोषी कौन लोग थे? ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने 4 शब्दों में हेडिंग चला कर क्या साबित करना चाहा और क्या छिपाना चाहा?

उपर्युक्त सवालों का जवाब दोषियों के नाम व जाति में छिपा है। अगर वे हैडलाइन में मरने वालों की तरह मारने वालों के भी पहचान उजागर कर देते तो इस ‘हत्या’ को फैंसी ‘लिंचिंग’ में बदलने का स्कोप ख़त्म हो जाता। इसीलिए कहाँ मरने वालों की पहचान उजागर करनी है और कहाँ मारने वालों की, यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसकी पहचान उजागर करने से ‘असहिष्णुता’ वाले नैरेटिव को हवा दी जा सके। आपको बता दें कि नवादा में महादलित महिला की हत्या में जो लोग दोषी हैं, वो उसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं जिस समुदाय की मृतक हैं। अर्थात, सभी आरोपित महादलित हैं।

मृतक महिला का नाम चिंता देवी है। मृतक के पति का नाम सुखदेव माँझी है। गिरफ़्तार आरोपितों में से एक का नाम कैलाश माँझी है तो दूसरे का नाम सोनी माँझी है। अर्थात, मृतक भी महादलित और हत्यारोपित भी महादलित। एक ज़िम्मेदार मीडिया संस्थान या तो दोनों की ही जातीय पहचान बताएगा या फिर किसी की भी नहीं। लेकिन, प्रोपेगंडा फैलाने का उद्देश्य रखने वाला ‘महादलित मारे गए‘ हेडलाइन में ही बता देगा। नहीं, ‘मारे गए‘ या फिर ‘हत्या‘ जैसे शब्द अब ‘फैंसी’ नहीं रहे, इसीलिए ‘लिंचिंग‘ का प्रयोग किया जाएगा ताकि ऐसा लगे कि किसी अन्य समुदाय (कथित ऊँची जाति) के लोगों ने महादलितों की ‘मॉब लिंचिंग‘ कर दी।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को भी पता है कि सोशल मीडिया पर गिरोह विशेष के कई ऐसे लोग दाँत पिजाए बैठे हैं, जो ख़बर को खोल कर पढ़ने की हिमाकत नहीं करते और उनमें से किसी ने पढ़ भी लिया तो वे भी ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की तरह आरोपितों की पहचान छिपा कर हूबहू पेश कर देंगे। सोशल मीडिया में इसपर प्रतिक्रियाएँ आएँगी। लोग गुस्सा होंगे। लोगों को लगेगा कि महादलित इस देश में सुरक्षित नहीं हैं। लोगों को इस बात का एहसास दिलाने की कोशिश की जाएगी कि देश में सचमुच असहिष्णुता का माहौल बन पड़ा है। आख़िर ख़बर तो सच्ची है, हैडलाइन भी झूठा नहीं है- लोग विश्वास तो करेंगे ही।

अगर भीख माँग कर पेट पालने वाली ग़रीब माँ-बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने वाला और उनका सिर मुँड़वा कर जबरन सड़क पर घुमाने वाला मुस्लिम है तो उसे ‘दबंग‘ लिखा जाएगा। अगर शिवरात्रि के दौरान काँवरियों पर हमले करने वाला मुस्लिम है तो उसे ‘दो समुदायों के बीच विवाद‘ बताया जाएगा। अगर महादलित ही महादलित को मार डालते हैं तो इसे ‘लिंचिंग‘ बताया जाएगा। मीडिया का यही रुख है कि आज कोई भी असली समस्या पर बात करने से हिचकिचाता है। नवादा वाले मामले में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने जो किया, उससे भी असली समस्या छिप गई। उस पर कोई बात क्यों करेगा जब उसे हाईलाइट ही नहीं किया गया?

ये समस्या है ‘डायन-जोगन’ वाली। ये समस्या है तांत्रिकों और फकीरों द्वारा ‘झाड़-फूँक’ वाली। बिहार के कई परिवारों में ऐसा होता है कि आस-पड़ोस के ही किसी व्यक्ति को ‘काला जादू’ करने वाला मान लिया जाता है और परिवार में कोई भी अनहोनी होने पर उसे ज़िम्मेदार ठहरा दिया जाता है। अगर अत्यधिक ग़रीब व अशिक्षित परिवारों की बात करें तो कभी-कभार ख़ुद के ही परिवार में किसी व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगा दिए जाते हैं।

मान लीजिए एक परिवार में दो भाई हैं। दोनों की पत्नियाँ हैं लेकिन इनमें से एक को बेटा हुआ लेकिन एक की तीन बेटियाँ हैं। तो बेटे वाली माँ को ऐसा लग सकता है कि बेटियों वाली माँ उससे जलती है और उसके बेटे का बुरा कर सकती है। (यह देखते हुए कि कई परिवारों में अब भी बेटे देने वाली माँ को ‘भाग्यशाली’ और बेटी देने वाली माँ को ‘बदकिस्मत’ माना जाता है। यह सच्चाई है। ऐसा नहीं होता तो मोदी सरकार को ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान न चलाना पड़ता।)

ध्यान दीजिए, यह समस्या सचमुच होती है। ऐसे में, बेटियों वाली माँ द्वारा किए गए सामान्य पूजा-पाठ भी बेटे वाली माँ को अखर सकता है। यह बिहार के ग़रीब या यूँ कह लें कि अशिक्षित परिवारों में एक बड़ी समस्या है। अब आप जरा बताइए, इस समस्या में जाति कहाँ है? इसमें जाति श्रेणी कहाँ है? एक सामाजिक समस्या को जातीय समस्या बना दिया गया और इसे फैंसी ‘मॉब लिंचिंग‘ से जोड़ दिया गया। इसमें महादलित, कथित ऊँची जाति, या फिर अनुसूचित जाति-जनजाति, यह सब कहाँ हैं? क्या किसी औरत पर डायन होने का आरोप लगाने वाली दूसरी औरत ने उसकी जाति देख कर ऐसा किया? नहीं।

अब दूसरी घटना पर आते हैं। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के उसी लेख में एक और घटना का जिक्र है, जिससे यह लेख और भी ‘फैंसी’ हो जाता है और इससे 2 महादलितों की ‘मॉब लिंचिंग’ की ख़बर एक साथ परोसने में आसानी होती है। लालपुर मुसहरीटोला में एक व्यक्ति को मार डाला गया। हेडलाइन से ही मृतक की पहचान हो जाती है कि वह महादलित था। मृतक का नाम राजेंद्र माँझी है। ‘मुसहरीटोला’ का अर्थ हुआ कि गाँव में बसी ऐसी बस्ती, जिसमें मुसहर रहते हैं। ध्यान दीजिए, ऐसा सिर्फ़ महादलितों के मामले में ही नहीं होता। लोग ब्राह्मणों की टोली को ‘बाभनटोली’ भी कहते हैं।

एक जाति के लोग एक जगह बसे और उस जगह को लोग उसी जाति की पहचान वाले नाम से जानने लगे, भले ही उस टोले में और भी जाति के लोग रहते हों। अब वापस ख़बर पर आते हैं। मृतक राजेंद्र माँझी के अवैध संबंधों के कारण उसकी हत्या कर दी गई। राजेंद्र माँझी का कैलाश माँझी की पत्नी के साथ अवैध सम्बन्ध था। इस मामले में 2 आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तार आरोपित हैं- मसाफिर माँझी और संजय माँझी। अर्थात इस मामले में भी मृतक और सभी आरोपित समान जाति से ताल्लुक रखते हैं। इस केस में भी मरने वाला महादलित और मारने वाला भी महादलित।

हमने ‘काला जादू’ के कारण महादलितों द्वारा महादलित महिला की हत्या वाली ख़बर देखी और ‘अवैध संबंधों’ के कारण महादलितों द्वारा ही महादलित व्यक्ति की हत्या वाली ख़बर भी देखी। जैसा कि हम जानते हैं, अगर पीड़ित दलित समुदाय से होता है तो एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। लेकिन, इन दोनों ही मामलों में एससी-एससी एक्ट नहीं लगेगा, ख़ुद पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है। ऐसा इसीलिए नहीं होगा क्योंकि मृतक और सभी आरोपित समान महादलित जाति से हैं। लेकिन, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ जैसे मीडिया संस्थान इसमें अलग-अलग ‘एक्ट’ लगा कर एक बनी-बनाई फेक नैरेटिव को जरा हवा तो दे ही सकते हैं।

इसीलिए कृपया कभी भी सिर्फ़ भ्रामक हेडलाइंस पर न जाएँ। अगर ख़बरों को भ्रामक तरीके से पेश किया जाता है तो ऐसे मीडिया संस्थानों को मौके पर ही लताड़ना शुरू कर दें। जागरूक जनता को ऐसी किसी ख़बर को देखते ही उस मीडिया संस्थान के दोहरे रवैये पर सवाल खड़ा करना चाहिए। ऐसा इसीलिए, क्योंकि ऐसी ही छोटी-छोटी ख़बरों पर कोई टुच्चा पत्रकार किसी अंतरराष्ट्रीय पोर्टल पर भी लिख देता है कि भारत अब ऐसा हो गया है, वैसा हो गया है। देश-दुनिया में माहौल बिगाड़ने की साज़िश की शुरुआती हिस्सा होती हैं ऐसी ख़बरें।

गायत्री प्रजापति मामले की मुख्य गवाह का वीडियो वायरल, रेप पीड़िता पर पैसे लेकर बयान बदलने का लगाया आरोप

समाजवादी पार्टी में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति पर लगे रेप के मामले में एक नया मोड़ आया है। दरअसल,  रेप मामले की मुख्य गवाह ने रेप पीड़िता पर आरोप लगाया है कि उसने सपा नेता से करोड़ों रुपए लेकर अपना बयान बदला।

चश्मदीद के बयान का ये वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लड़की गायत्री प्रजापति और रेप पीड़िता से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की माँग कर रही है।

वायरल वीडियो में चश्मदीद ने रेप पीड़िता पर इल्जाम लगाया है कि उसने गायत्री प्रजापति से करोड़ों रुपए और करोड़ों की संपत्ति लेने के बाद अपना बयान बदल दिया है। साथ ही लड़की ने ये भी कहा कि फर्जी तरीके से बीमार होकर गायत्री प्रजापति अस्पताल से उसे मारने की साजिश रच रहा है।

गवाह के मुताबिक उसे लगातार जान से मारने की कोशिश की जा रही हैं। लखनऊ की एक गाड़ी हमेशा उसके पीछे लगी रहती है, जिस कारण वह घर से बाहर भी नहीं निकल पाती। लड़की के मुताबिक भले ही रेप पीड़िता ने पैसे और संपत्ति लेकर अपना बयान बदल दिया है लेकिन उसने गायत्री प्रजापति को बेल दिए जाने के ख़िलाफ़ कोर्ट में कुछ दस्तावेज पेश किए हैं।

उल्लेखनीय है कि चित्रकूट की एक महिला ने गायत्री प्रजापति पर कुछ समय पहले रेप के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी। जिसके बाद से वह मार्च 2017 से जेल में बंद थे। लेकिन पिछले महीने रेप का आरोप लगाने वाली महिला गायत्री प्रजापति को पिता के समान बताते हुए अपने बयान से पलट गई। जिसके बाद ही गवाह ने अपने बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर डाली। बता दें कि गायत्री प्रजापति फिलहाल स्वास्थ्य खराब होने की वजह से वह केजीएमयू में भर्ती हैं।

लताड़े जाने के बाद राहुल गाँधी ने J&K पर मारा यू-टर्न, गदगद थरूर ने कहा- ‘बहुत सही मालिक’

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। पाकिस्तान ने उनके बयानों का सहारा लेकर यूएन में अपनी बात साबित करने की कोशिश की है। पाकिस्तान ने राहुल गाँधी के बयान ‘कश्मीर में लोग मर रहे हैं’ को सहारा बनाया और यूएन को कहा कि भारत के प्रमुख नेता भी मानते हैं कि मोदी सरकार जम्मू कश्मीर में ‘गड़बड़ियाँ और अत्याचार’ कर रही है। पाकिस्तान ने यूएन को भेजे पत्र में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल के उस बयान का भी सहारा लिया जिसमें उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर में चीजें ग़लत दिशा में जा रही हैं।

अब राहुल गाँधी ने ट्वीट कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। राहुल गाँधी ने जम्मू कश्मीर में हिंसा के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार बता कर ट्विटर पर सुर्खियाँ बटोरी। उन्होंने जम्मू कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा बताते हुए किसी भी अन्य देश द्वारा हस्तक्षेप की बात को नकारते हुए कहा कि दुनिया भर में पाकिस्तान को आतंक के प्रमुख समर्थक के रूप में जाना जाता है।

लेकिन, तब तक लोगों ने राहुल को लताड़ लगानी शुरू कर दी थी। जब पाकिस्तान द्वारा राहुल गाँधी के बयानों के सहारे यूएन में अपनी बात साबित करने की कोशिश वाली ख़बर आई तो लोगों ने राहुल को जम कर लताड़ा।

तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने राहुल गाँधी के बयान का समर्थन करते हुए गदगद होकर लिखा- ‘बहुत सही मालिक, पाकिस्तान को हमारे रुख से लाभ उठाने की ज़रूरत नहीं है।

हालाँकि, इस दौरान थरूर यह लिखना नहीं भूले कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ‘अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके’ से हटाया गया था। लोगों ने थरूर से पूछा कि अब तो राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी नहीं रहे, तो फिर वे ‘मालिक’ कैसे हुए? लोगों ने कहा कि अब जो डैमेज होना था वह हो चुका, अब इन बयानों का कोई फ़ायदा नहीं।

प्रेम-जाल में फँसाया,धर्म परिवर्तन कराया, लिव-इन में रहकर घर बिकवाया, बच्चा होने पर हो गया फरार

गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र से धर्म परिवर्तन का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक व्यक्ति पर तलाकशुदा महिला ने आरोप लगाया है कि उसने पहले महिला को अपने प्रेम के जाल में फँसाया। उसके साथ लिव इन में रहा और जब बच्चा हुआ तो उसे छोड़कर फरार हो गया।

नवभारत टाइम्ल में प्रकाशित खबर

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कविनगर थाना क्षेत्र की निवासी महिला ने बताया कि साल 2013 में उसका उसके पति से तलाक हो गया था। जिसके बाद 2014 में उसका संपर्क सिहानी गेट थाना क्षेत्र में रहने वाले युवक से हुआ।

इसके बाद महिला के मुताबिक मुस्लिम युवक ने उसे प्रेम जाल में फँसाकर पहले धर्म परिवर्तन कराया और फिर उसके साथ लिव-इन में रहने लगा। लेकिन जब महिला को बेटा हुआ तो वह उसकी जिम्मेदारी लेने की बजाए भाग खड़ा हुआ। 2017 में वह महिला को छोड़कर फरार हो गयाl उसके बाद से महिला दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।

महिला ने अपनी शिकायत में युवक पर आरोप लगाया कि युवक ने उसका घर भी बिकवा दिया था और उससे घर के रुपए भी ले लिए थे। अब उसके पास कुछ नहीं हैं। उसका बेटा 3 साल का हो चुका है, लेकिन लड़के के घरवाले उसे रखने को तैयार नहीं हैं।

पीड़िता ने कहा कि उसके साथ धोखा किया गया है। इसलिए अब उसे इंसाफ़ चाहिए। वो चाहती है कि उसके बेटे को पिता का नाम मिले। जिसके लिए उसने कोर्ट में अर्जी दाखिल की है और अपने लिए न्याय की गुहार लगाई है।