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मुफ़्ती-अब्दुल्ला दोनों को लिया गया हिरासत में, महबूबा को ले जाया गया VIP गेस्ट हाउस हरि निवास

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की मुखिया महबूबा मुफ़्ती को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ ही कश्मीर की दूसरी बड़ी मुख्यधारा की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी हिरासत में ले लिए गए हैं। दोनों नेताओं की गिरफ़्तारी जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश बनने और अनुच्छेद 35 A के हटाए जाने के बाद की गई है।

पहले ही घर में नज़रबंद चल रहीं महबूबा मुफ़्ती को उनके घर से VIP गेस्ट हाउस हरि निवास ले जाया गया है। महबूबा मुफ़्ती ने 370/35A के न केवल पक्ष में बयान दिए थे, बल्कि उन्होंने देश-विरोधी और लोगों को भड़काने वालीं कई बातें ट्वीट भी कीं। मसलन उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को न केवल अमान्य करार दिया था, बल्कि भारत को कश्मीर में ‘कब्जा की हुई ताकत’ (occupation force) भी बताया था। उन्होंने कश्मीर को ‘मुस्लिमों का राज्य’ भी बताया था।

गौरतलब है कि आज राज्यसभा ने जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र-शासित प्रदेश बनाने और लद्दाख को उससे अलग एक केंद्र-शासित प्रदेश बनाने का बिल पास कराया है। इस बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल को जम्मू-कश्मीर में खूनखराबे के एक लम्बे दौर का अंत करने वाला बताया था।

उनकी गिरफ़्तारी से जुड़ा आदेश भी मीडिया को जारी किया गया है। पत्र में लिखा है कि उनके शब्दों व हरकतों, और राज्य पर उसके पड़ने वाले संभावित असर की आशंका को देखते हुए उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया जा रहा है।

इससे पहले रविवार रात को महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया था। उनके अलावा घाटी में अभी भी कई अलगाववादी नेता नजरबंद हैं। नजरबंद नेताओं में सज्जाद लोन समेत कई अलागवादी नेता और राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। घाटी में पूरी तरह से मोबाइल, लैंडलाइन, ब्रॉडबैंड समेत सभी इंटरनेट सेवा शनिवार रात से ही बंद कर दिए गए थे। वहीं, घाटी में सभी अधिकारियों को सैटेलाइट फोन दिए गए हैं, ताकि आपस में बातचीत होती रहे।

370 का ‘पावर’ ख़त्म: लिबरल ‘महाभारत’ देख लिए तो अब Twitter पर पाकिस्तानियों की हालत देखिए…

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के प्रावधान को आज खत्म कर दिया गया। मोदी सरकार के इस फैसले ने जहाँ विपक्ष को बेचैन किया वहीं पाकिस्तान में भी उथल-पुथल मच गई। राजनेताओं से लेकर पाकिस्तान के कलाकार और आम जनता भी इस विषय पर अपना मत रख रहे हैं। इस खबर को पाकिस्तानी मीडिया अपनी हेडलाइनों में ब्रेकिंग बनाकर चला रहा है और जानकारी के मुताबिक वे इस फैसले को गैर-कानूनी और अवैध तक बता रहे हैं।

फैसला आने के बाद पाकिस्तान मीडिया की कवरेज:

डॉन की हेडलाइन– “भारत ने संसद में भारी विरोध के बीच कश्मीर का ख़ास दर्जा ख़त्म करने के लिए प्रस्ताव पेश किया।”

The Dawn का स्क्रीनशॉट औऱ उसमें कश्मीर मुद्दा

द नेशन की हेडलाइन– “भारत सरकार ने अपने संविधान से अनुच्छेद 370 ख़त्म करने का ऐलान किया”
पाकिस्तान टुडे– “अमित शाह के ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर में तनाव फैल गया है।”
द न्यूज़– “पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारत के ‘अवैध’ कदम की निंदा करता है”

गौरतलब है इस प्रकार की मीडिया हेडलाइनों के साथ सोशल मीडिया पर अब भी कुछ पाकिस्तानी ‘कश्मीर हमारा है’ का नारा लगा रहे हैं तो वहीं कुछ ऐसे भी है जो इसके लिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री से गुहार लगा रहे हैं।

पाकिस्तानी राजनेता,पत्रकार और कलाकारों के कश्मीर मामले पर रिएक्शन

इस मामले पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने #KashmirBleeds के साथ ट्वीट किया है, वे लिखते हैं, “भारतीय कश्मीर में लोगों पर लगातार अत्याचार हो रहा है। अतिवादी भारतीय सरकार के इरादे साफ़ हैं। कश्मीर में भारत की आक्रामकता के मद्देनज़र राष्ट्रपति को संसद का संयुक्त सत्र तुरंत बुलाना चाहिए।”

वहीं बॉलीवुड से अपनी पहचान बनाने वाली पाकिस्तानी अदाकारा माहिरा खान इस मामले पर लिखती हैं, “क्या हमने पूरी तरह उन चीज़ों को भुला दिया है जिनके बारे में हम बात नहीं करना चाहते हैं? लेकिन ये सिर्फ़ रेत पर खिंची लकीरें नहीं है, ये मासूम लोगों के मारे जाने का सवाल है। जन्नत (कश्मीर) जल रही है और हम ख़ामोशी से रो रहे हैं। “

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मिर भी इस फैसले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र को टैग करते हुए बताते हैं कि भारत सरकार ने अपने संविधान से अनुच्छेद 370 हटाने की कोशिश करके एक जंग छेड़ दी है।

पाकिस्तानी मीडिया न्यूज़ स्रोतों की मानें तो भारत में लिए गए इस बड़े फैसले के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाने पर विचार कर सकता है। ‘द न्यूज’ अखबार के मुताबिक उनके मुल्क ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा सक्रिय पक्ष रखा है, इसलिए वे इसपर खामोशी नहीं बरत सकते।

पाकिस्तानी आवाम के ट्विटर पर रिएक्शन

इस समय पाकिस्तान की आवाम भी सोशल मीडिया पर जमकर अपना गुस्सा और भड़ास निकाल रही है। आमरा मेहदी नाम की पाकिस्तानी महिला ट्विटर पर लिखती हैं, “जिन्ना साहब माफी, पाकिस्तान के हमारे कथित प्रतिनिधि एक-दूसरे से लड़ाई करने और अपनी संपत्ति बढ़ाने में ही व्यस्त रह गए। आपका कश्मीर चला गया।”

जबकि नवीद नाम के दूसरे यूजर की मानें तो अब कश्मीर में हर शख्स अत्याचारी भारत के ख़िालफ़ उठ खड़ा होगा। यह कश्मीर की आजादी की शुरुआत भर है।

वकास अहमद कहते हैं कि मुस्लिम दुनिया को पंथ से ऊपर उठते हुए एक होना चाहिए और भारत पर कश्मीर में नरसंहार करने से रोकने के लिए दबाव बनाना चाहिए।

एक यूजर ने तो संयुक्त राष्ट्र पर सवाल उठाते हुए कहा, “मुस्लिम देशों के मंच ओआईसी और यूएन(संयुक्त राष्ट्र) जिस उद्देश्य से अस्तित्व में आए, वे कभी पूरे नहीं हुए।” इस यूजर के मुताबिर संयुक्त राष्ट्र अपना वादा नहीं निभा पाया। कश्मीर मुद्दे के न सुलझने के पीछे इस यूजर ने यूएन की नाकामी बताया और कहा अब उसे यूएन से कोई उम्मीद नहीं है।

कैप्टन मिर्जा नाम के यूजर ने तो सोशल मीडिया पर गुहार लगाई है कि उन्हें अब भारतीय प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और एक यूजर ने तो इमरान खान को टैग करते हुए ‘कुछ’ करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अभी पता चलेगा कि इमरान खान रियल हैं या नहीं।

वहीं, उर्वा लिखती हैं, संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में ही क्यों है? कश्मीर विवादित मुद्दा रहा है और हाल ही में ट्रंप ने भी इसके बारे में बात की थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और ओआईसी को क्या हो गया है?

एक यूजर लिखते हैं कि अगर यूएन पाकिस्तान की समस्या नहीं सुलझा सकता तो पाकिस्तान को यूएन छोड़ देना चाहिए।

बता दें ऊपर लगाए गए सभी ट्वीट और 370 अनुच्छेद हटने के बाद आए रिएक्शन इस बात का सबूत है कि जिस अनुच्छेद के अस्त्तिव में होने से कश्मीर का विकास रुका हुआ था, उसके समर्थक भारत से लेकर पाकिस्तान में बैठे हुए थे। अब चूँकि केंद्र सरकार ने इस समस्या का निवारण कर दिया है तो उन सभी लोगों का दर्द छलक रहा है जो कश्मीर को पत्थरबाजों का कश्मीर बने रहने देना चाहते थे, जो चाहते थे कि कश्मीरी पंडितो को कभी न्याय न मिले। जिनका उद्देश्य था कि कश्मीर के नाम पर और भी लड़ाईयाँ सालों साल तक चलती रहें।

‘दिल पर पत्थर रख कर समर्थन कर रहे हो ना बौने’ – कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर कसा तंज!

कश्मीर पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले को देश भर में समर्थन मिल रहा है। हालाँकि, कुछ लोग इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं, मगर ज्यादातर लोग इस फैसले का समर्थन करते ही नजर आ रहे है। इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत मोदी सरकार के कई विरोधी भी शामिल है। अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार के फैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा कि जम्मू-कश्मीर पर सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का वो पूरी तरह से समर्थन करते हैं और उम्मीद करते हैं कि ये फैसला राज्य में शांति और विकास लाएगा।

सीएम के इस ट्वीट को यूजर ने आड़े हाथों लिया। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना ट्वीट किया, “दिल पर चट्टान रख कर ट्वीट कर रहे हो ना बौने? हमने जब सेना के समर्थन में वीडियो बनाया तब तो अपने घर पर पालित अमानती कुत्तों से हमको घेर कर मारने की कह रहे थे,अब क्या हुआ? चादर फटी तो प्रसाद लूटने आ गए सबूत माँगने वाले? इतिहास का कूड़ेदान हर दग़ाबाज़ देशद्रोही की प्रतीक्षा में है।”

कुमार विश्वास के ट्वीट पर एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केजरीवाल दिल्ली को पूर्णराज्य बनाने की माँग कर रहे थे और मोदी जी ने एक और केंद्र शासित प्रदेश खड़ा कर दिया।

इसके साथ ही उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा, “अपनी यूनियन टैरिटरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के असंभव ख्वाब देखने वाले आत्ममुग्ध बौने को भी एक पूर्ण राज्य के यूनियन टैरिटरी में बदलने के प्रस्ताव का समर्थन करना पड़ रहा है, इसी को ‘खुदाई-जूता’ कहते हैं जो लगता भी है और रोने भी नहीं देता। चलो जलेबी खाओ।”



TV में निष्पक्षता के नाम पर होता है छल: यह न तो मीडियम है, न ही यहाँ काम करने वाले मीडियाकर्मी

किस्सा कुछ यूँ है कि एक राजा किसी देश पर बरसों से राज कर रहे थे। सालों में उन्होंने आस पास के कई इलाके भी जीत लिए थे और अपना वर्चस्व संधियों के जरिये भी बढ़ाया था। राजा वृद्ध हो चले थे तो जाहिर है उनके युवराज-राजकुमारी भी युवा हो चुके थे। युवराज के लिए समस्या वही अकबर-सलीम वाली थी। जैसे पचास साल राज करने वाला अकबर कब गद्दी छोड़ेगा, कब सलीम खुद राजा बन पाएगा- ये इंतज़ार सलीम से बर्दाश्त नहीं हुआ, वैसा ही युवराज का भी हाल था। वो भी सलीम की तरह राजा को मारकर राजा बनना चाहता था।

उधर बीतती उम्र में परेशान तो राजकुमारी भी हो रही थी। जैसे राजकुमार मन-ही-मन राजा की हत्या करके गद्दी हथियाने की सोच रहा था, वैसे ही उस रात राजकुमारी भी महावत के साथ भाग निकलने की योजना बना रही थी।

राजा साहब के लिए उधर एक दूसरी, अकबर वाली समस्या भी थी। वो बड़े राजा थे, तो जाहिर है बेटी का वैवाहिक सम्बन्ध भी बराबरी वालों में ही करना चाहते थे। इस वजह से राजकुमारी के लिए कोई उचित वर नहीं मिल रहा था।

एक आयोजन करके राजा साहब ने आस-पास के कई राजाओं-सामंतों और अपने गुरु को बुलवा लिया था। वो सोचते थे कई लोगों की सलाह से शायद वो राज्य से संन्यास लेने, सेवानिवृत्त होने के बारे में कुछ फैसला कर पाएँ। आयोजन था तो नाच-रंग का भी प्रबंध था, और राज्य की विख्यात नर्तकी को भी बुलाया गया था। सभा जमी थी तो पूरी रात ही नाच-गाने में बीत चली थी। इतने में सुबह होने से कुछ ही पहले नर्तकी ने देखा कि उसका तबालची ऊँघ रहा है। उसे जगाने के लिए नर्तकी ने इशारों में कहा,

“बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गई बिताय।
एक पलक के कारने, क्यों कलंक लग जाय।“

इतना सुनना था कि वहीं बैठे राजा के गुरु अपने आसन से उछल कर खड़े हुए और अपना इकलौता कम्बल तबलची को दान कर दिया। उसके बाद वो फौरन वन की ओर चल पड़े। उन्होंने सोचा जीवन पूरा तो साधना में बिताया, अंत समय में कहाँ मैं नर्तकी की महफ़िल में आ बैठा हूँ? उनके रवाना होते होते युवराज हाथ जोड़े खड़ा हो गया। उसे लगा आज मिले या कल, राज्य तो मेरा ही है, कहाँ जरा सी बेचैनी में मैं पिता की हत्या का कलंक सर पर लेने जा रहा था। राजकुमारी भी जरा-से लोभ में गलती करने का इरादा बदल कर उठी, उसने भी महावत के साथ भागने का इरादा बदला।

राजा ने सोचा बुढ़ापे में भी सिंहासन का लोभ छोड़ने के लिए मुझे इतने लोगों की सलाह चाहिए? पूरे जीवन तो मैं अपनी मर्जी से फैसले लेता रहा, आज तो धब्बा लगता। उसने भी मुकुट उतार कर युवराज के सर पर रख दिया। अपने गुरु के पीछे पीछे वो भी वन की ओर चला।

इतने तक की कहानी सुनाते आपको कई कथावाचक मिल जाएँगे। इसे थोड़ा बढ़ा चढ़ा कर अलग अलग रूप में सुनाया जाता है। भावविभोर होती हिन्दू जनता इसे सुनकर आह-वाह करती अश्रुधारा से पंडाल को सिक्त भी कर देती है। हमारे लिय ये कहानी यहाँ ख़त्म नहीं यहाँ शुरू होती है। ये संवाद यानी कम्युनिकेशन का सिद्धांत है। आप जो भी संवाद करते हैं उसका एक टारगेट ऑडिएंस (target audience) होता है। नर्तकी का टारगेट ऑडिएंस उसका तबालची था। बाकी लोगों के लिए ये संदेश था ही नहीं। उन्होंने जो अर्थ लिया वो सही मतलब नहीं था।

इसका ये मतलब तो कतई नहीं कि बाकी लोगों के लिए नर्तकी की बात का कोई मतलब नहीं निकला। सबने अपने अपने हिसाब से अर्थ तो निकाला ही। आपकी बात का भी ऐसा ही होता है। सुनने-पढ़ने वाले व्यक्ति की मनोस्थिति पर भी आपकी बात का निकाला गया अर्थ निर्भर करता है। वो क्या सोच रहा है, किस हाल में है, गुस्से में है, खुश है, इस पर भी आपके कहे का अर्थ निर्भर करेगा। मनोस्थिति का ठीक ना होना, संवाद में एक किस्म का नॉइज़ (noise) यानी शोर कहलाता है। मन का शांत होना सही अर्थ निकालने के लिए जरूरी है।

ये भी गौर कीजिए कि जिस तबालची को दोहा सुनाया गया था, उस पर क्या असर हुआ ये आपको कहानी से पता नहीं चला है। संवाद में हमेशा दो पक्ष होते हैं- सन्देश भेजने वाले के साथ सन्देश पाने वाले की भी बात होनी थी। कथा इस बारे में कुछ नहीं कहती। ये बिलकुल वैसा है जैसे टीवी, जो आप तक सन्देश तो पहुँचाता है, लेकिन उस सन्देश को आपने कैसे लिया इस बारे में सन्देश भेजने वाले चैनल को कुछ नहीं बताता। यानी टीवी एक कम्युनिकेशन का माध्यम- मीडिया नहीं है, ना ही उसके चैनल में काम करने वाले मीडियाकर्मी हुए।

तो कहा जा सकता है कि तबालची को सन्देश भेज रही नर्तकी अगर अपने दोहे का प्रभाव देखकर खुद को ईश्वरीय सन्देश प्रसारित करने वाला “नबी” घोषित करने लगे तो वो छल होगा। बिलकुल वैसे ही जैसे ब्रॉडकास्ट के माध्यम को कम्युनिकेशन का माध्यम बताने वाले जब खुद को मीडियाकर्मी बताकर “निष्पक्षता” का गुण “ओढ़ते” हैं तब छल होता है। बाकी शोर-शराबा तो सुनाई दे ही रहा है- कोई न कोई छल करने की कोशिश की जा रही है, ये भी समझ लीजिए।

370 का ‘पावर’ ख़त्म: मोदी सरकार के फ़ैसले के बाद देश में 28 राज्य और 9 केन्द्र शासित प्रदेश

जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में मोदी सरकार के आज के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद भारत के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज राज्यसभा में स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 (1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के लिए विधेयक 2019 पेश किया। गृहमंत्री ने लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यहाँ चंडीगढ़ की तरह विधानसभा नहीं होगी।

गृहमंत्री ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिवीज़न विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहाँ दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी। बता दें कि इस गृहमंत्री के इस विधेयक को राष्ट्रपति से मंज़ूरी मिल चुकी है। इसके साथ ही देश में एक राज्य (जम्मू-कश्मीर) घट गया और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो गई है।

कुल केन्द्र शासित प्रदेश:

  1. दिल्ली
  2. अंडमान और निकोबार
  3. चंडीगढ़
  4. दादरा और नगर हवेली
  5. दमन एवं दीव
  6. लक्षद्वीप
  7. पुडुचेरी
  8. जम्मू-कश्मीर
  9. लद्दाख

सरकार की घोषणा के बाद केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नाम जुड़ गया है। वहीं, अब कुल राज्यों की संख्या 28 हो गई है।

राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल 125-61 से पास, भविष्य में मिलेगा पूर्ण राज्य का दर्जा

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा में पास हो गया है। जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बाँटने वाले इस बिल पर सदन में बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े तो वहीं इसके विपक्ष में 61 वोट पड़े। जबकि एक सदस्य गैर हाजिर रहा। इससे पहले राज्यसभा से जम्मू कश्मीर आरक्षण दूसरा संशोधन बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस संशोधन बिल के पास हो जाने के बाद अमित शाह की ओर से लाए गए संकल्प पर सदन का मत लिया गया।
इस बिल में जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग करने और दोनों को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने के प्रावधान शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस के पी चिदंबरम ने अमित शाह से पूछा कि आप कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश क्यों बना रहे हैं?
अमित शाह ने कहा कि कश्मीर हमेशा केंद्र शासित प्रदेश नहीं रहेगा, सामान्य स्थिति के बाद उसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। हम कश्मीर को देश का सबसे विकसित राज्य बनाएँगे। कश्मीर को सामान्य बनाने के लिए सरकार की सहायता करें और सब मिलकर काम करें। अमित शाह ने कहा कि हमारे साथ नहीं रहने वाले दलों ने भी आज इस बिल पर हमारा साथ दिया है। सदन को एकमत से इस बिल और संकल्प का समर्थन करना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने संबंधी प्रस्ताव को लेकर राज्यसभा में जवाब दिया। अमित शाह ने राज्यसभा में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि मुझे भरोसा है कि आर्टिकल 370 हटने के बाद घाटी में खून खराबा पूरी तरह से बंद हो जाएगा।

J&K में परिसीमन फिर से: अभी तक घाटी को मिलता था विशेष लाभ, अब होगा प्रतिनिधि लोकतंत्र

गृह मंत्री अमित शाह के अनुच्छेद 370 हटाने और लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाने की घोषणा के साथ घाटी और जम्मू के राजनीतिक भविष्य पर अटकलें शुरू हो गईं हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जहाँ लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेश के तौर पर चंडीगढ़-मॉडल के अनुरूप ढलेगा, वहीं दिल्ली और पुडुचेरी जैसी व्यवस्था जम्मू-कश्मीर में चलेगी, जहाँ सीमित शक्तियों वाली विधानसभाएँ अस्तित्व में हैं।

इस विधानसभा के लिए अलग से परिसीमन निर्वाचन आयोग द्वारा किए जाने की भी बात मीडिया में चल रही है। 21 नवंबर, 2018 को भंग की गई अंतिम विधानसभा में 111 सदस्य थे, जबकि आगामी विधानसभा, जिसमें लद्दाख शामिल नहीं होगा, में 107 सदस्यों के होने की संभावना है। पिछली विधानसभाओं में इनमें से 24 सीटें POK (पाकिस्तान के कब्ज़े का कश्मीर) की होतीं थीं, जिन्हें फ़िलहाल खाली छोड़ दिया जाता है, और बहुमत के गणित में नहीं गिना जाता।

अभी तक की विधानसभाओं में कम जनसंख्या के बावजूद कश्मीर घाटी के अधिक विधायक होते थे। परिसीमन में इसी विसंगति को दूर कर जनसांख्यिकीय संतुलन बैठाया जाएगा, ताकि हर विधायक कमोबेश एक ही संख्या के लोगों का प्रतिनिधित्व करे और प्रतिनिधि लोकतंत्र (representative democracy) की आत्मा के अनुरूप जनसंख्या विधानसभा में प्रतिबिम्बित हो।

‘कश्मीरी लड़की शादी कर अन्य राज्यों में जाएगी, देखते-देखते J&K सही मायने में पूरे भारत में घुल-मिल जाएगा’

राज्यसभा में फ़िलहाल (5 अगस्त, शाम को) गृह मंत्री अमित शाह का भाषण चल रहा है, और वह अनुच्छेद 370 के विषय में सदन को सम्बोधित कर रहे हैं। इस दौरान गृह मंत्री ने कई महत्वपूर्ण बातें कीं, जिनमें 370/35A के विकास में बाधक होने की बात कहने से लेकर उनके खात्मे को एक रक्तपात भरे युग का अंत बताया। गृह मंत्री बड़ी सूक्ष्मता से 370/35A के कारण खुद कश्मीरियों को हो रहे एक-एक नुकसान को गिना रहे हैं।

अमित शाह ने गुलाम नबी आज़ाद के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “गुलाम नबी आज़ाद जी आपने पूछा था इंटरस्टेट शादियाँ शुरू हो गई हैं। यदि कश्मीर की लड़की ओडिशा में शादी करती है तो क्या उसके बच्चे को जम्मू-कश्मीर में अधिकार मिलेगा? ऐसा कोई कानून नहीं है। अब समाधान हो गया है। आप खुश हैं इन शादियों से, होने दीजिए इंटरस्टेट मैरिज, कश्मीर की लड़की ओडिशा या अन्य राज्यों में जाएगी, देखते-देखते जम्मू-कश्मीर सही मायने में पूरे भारत में घुल-मिल जाएगा।”

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यटन है, लेकिन 370/35A के चलते पर्यटन भी नहीं पनप पाया।

बिल लाने के तरीके पर कॉन्ग्रेस के सवाल उठाने को लेकर शाह ने उन्हें भी आड़े हाथों लिया, और इंदिरा गाँधी के आपातकाल लगाने के तरीके की याद दिलाई।

370 हटाने के बाद हर राज्य को अलर्ट: सांप्रदायिक दंगों के खिलाफ रहें सतर्क, पुलिस से कराएँ मॉक ड्रिल

जम्मू कश्मीर पर नरेंद्र मोदी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने सोमवार (अगस्त 5, 2019) को सभी राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसमें सांप्रदायिक दंगों के खिलाफ सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साथ ही हिंसा को रोकने के लिए पुलिस से मॉक ड्रिल चलाने का निर्देश भी जारी किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अर्धसैनिक बलों की करीब एक हजार कंपनियाँ घाटी में तैनात हैं। यानी राज्य में अर्धसैनिक बलों के करीब एक लाख जवान सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए हैं। घाटी में इससे पहले इतने सुरक्षाबलों की तैनाती पुलवामा हमले के बाद और बालाकोट एयरस्ट्राइक से पहले की गई थी। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में धारा 144 लगा दी है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ स्थगित कर दी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर को हाई अलर्ट पर रखने के मद्देनजर राज्य के सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। जिसमें PDP अध्यक्ष और पूर्व सीएम मेहबूबा मुफ्ती और NCP के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का नाम भी शामिल है। सरकार का कहना है कि ऐसा माना जा रहा है कि आतंकी किसी घटना को अंजाम दे सकते हैं, इसलिए सरकार सुरक्षा की दृष्टि से ये सब कदम उठा रही है।

सावन के आखिरी सोमवार को शिवभक्त मंदिर जाते हैं, न दें बकरीद पर कुर्बानी: कलीम हैदर नकवी

सावन का अंतिम सोमवार 12 अगस्त को है और उसी दिन बकरीद भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के शिया नेता और यूनाइटेड शिया मूवमेंट के महासचिव कलीम हैदर नकवी ने समुदाय वालों से 12 अगस्त को ईद-अल-अजहा के मौके पर कुर्बानी न देने की अपील की है। संगठन के इस पहल को शिया जामा मस्जिद के इमाम जुमा मौलाना शम्सुल हसन खाँ ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है।

कलीम हैदर नकवी ने तमाम शिया समुदाय से अपील करते हुए कहा है कि सावन के सोमवार के आखिरी दिन बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिर जाते हैं। ऐसे में लोग 12 अगस्त को जानवरों की कुर्बानी न दें और इस दिन केवल नमाज पढ़ें।

इस पर संगठन शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जब्बाद और मौलाना यासूब अब्बास से भी बातचीत कर अपील जारी करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। प्रवक्ता समर अब्बास जैदी ने बताया कि शिया मूवमेंट की ओर से अपील में कहा गया कि ईद-उल-अजहा की नमाज सोमवार को ही सभी मस्जिदों में अपने निर्धारित समय पर होगी। शिया समुदाय से मंगलवार को कुर्बानी करने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि, इससे पहले बकरीद पर कुर्बानी को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना केआर फिरंगी महली ने सभी से अपील करते हुए कहा था कि सड़कों पर जानवरों की कुर्बानी न दी जाए। उनका कहना था कि कुर्बानी घर या मदरसे को अंदर दी जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल उन्हीं पशुओं की दी जानी चाहिए, जो कि सरकार द्वारा प्रतिबंधित न हो।