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घाघरा-चोली पहनते हैं, गाँजा फूँकते हैं बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ‘तेजू’: पत्नी ऐश्वर्या राय

लालू के बेटे तेज प्रताप यादव कभी नीतीश-लालू की सरकार में बिहार का स्वास्थ्य महकमा संभाला करते थे। आज वे हमेशा गाँजे के नशे में चूर रहते हैं। यह दावा किया है उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय ने फैमिली कोर्ट में, जहाँ वे तेज प्रताप द्वारा तलाक के मुकदमे में उन पर (ऐश्वर्या पर) लगाए गए आरोपों का जवाब दे रहीं थीं। 17 पन्नों के अपने दाखिल जवाब में ऐश्वर्या ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और तेज प्रताप यादव की माँ राबड़ी देवी पर भी चुप रहने का दबाव डालने के आरोप लगाए हैं।

कभी कृष्ण बनते हैं, तो कभी राधा

ऐश्वर्या ने आरोप लगाया कि नशे में चूर होने के बाद तेज प्रताप यादव अक्सर पौराणिक कथाओं में वर्णित देवी-देवताओं द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों जैसे कपड़े धारण कर लेते हैं। कभी कृष्ण, तो कभी राधा तक वे बन जाते हैं। साथ ही मेकअप और विग भी लगा लेते हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा राय की पौत्री और आरजेडी विधायक चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय ने सास राबड़ी पर भी चुप कराने का आरोप लगाया। उनके अनुसार जब उन्होंने राबड़ी देवी और तेज प्रताप की बहन से इस बारे में बात की तो उन लोगों ने आश्वासन दिया कि तेज प्रताप दोबारा ऐसा नहीं करेंगे। इसके अलावा उन लोगों ने ऐश्वर्या से यह सब खुद तक सीमित रखने को कहा।

‘गलत संगत में कर रहा है ‘

बकौल ऐश्वर्या राय, राबड़ी ने उनसे कहा, “यह गलत संगत में ऐसा कर रहा है, तुम इसे गलत संगत से दूर करो।” और जब उन्होंने (ऐश्वर्या ने) तेज प्रताप से इस बाबत बात करने की कोशिश की तो वे भड़क उठे। उन्होंने कथित तौर पर ऐश्वर्या से कहा, “तुम अपनी औकात में रहो, और हमको सिखाओ मत, नहीं तो सब अंग्रेजी पढ़ाई निकाल देंगे।” ऐश्वर्या ने अपने लिए पुलिस सुरक्षा और अपने मायके वालों का उत्पीड़न रोके जाने की अपील अदालत में की है।

‘POK पर भी निकालेंगे हल बेटे!’ – Article 370 पर बौखलाए अफरीदी को गौतम का गंभीर जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पर लिए गए फैसले के बाद पाकिस्तान के कई नामी चेहरों ने ट्विटर पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इसमें अब पाकिस्तानी क्रिकेट के पूर्व ख़िलाड़ी शाहिद अफरीदी भी शामिल हो गए हैं।

शाहिद अफरीदी ने कल रात डोनल्ड ट्रंप को टैग करते हुए कश्मीर मामले पर अपनी बौखलाहट निकाली। लेकिन भारत के पूर्व आक्रामक बल्लेबाज गौतम गंभीर और फिलहाल भाजपा के सांसद ने उन्हें जवाब देने में देर नहीं लगाई।

शाहिद अफरीदी ने 5 अगस्त को रात 8:41 पर अपने ट्विटर पर लिखा, “कश्मीरियों को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर उनके अधिकार दिए जाने चाहिए। आजादी का अधिकार हम सभी को है। संयुक्त राष्ट्र की रचना क्यों की गई है और यह क्यों सो रहा है? कश्मीर में लगातार जो मानवता विरोधी अनुत्तेजित आक्रामकता और अपराध हो रहे हैं। उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। डॉनल्ड ट्रंप (अमेरिका के राष्ट्रपति) को इस मामले में जरूरी रूप से मध्यस्थ की भूमिका अदा करनी चाहिए।”

इस पर गौतम गंभीर ने 6 अगस्त की सुबह-सुबह 6:35 पर अफरीदी के ट्वीट पर चुटकी लेते हुए लिखा, “दोस्तों शाहिद अफरीदी बिल्कुल ठीक हैं। वहाँ पर अनुत्तेजित आक्रामकता है, वहाँ मानवता के खिलाफ अपराध हो रहे हैं। वह यह मामला सामने लाए, इसलिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए। बस वह इसमें एक बात लिखना भूल गए कि यह यह सब ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ में हो रहा है।” उन्होंने आगे लिखा, “चिंता मत करो, हम इसका भी हल निकालेंगे बेटे!!!!”

गौरतलब है कि शाहिद अफरीदी और गौतम गंभीर के बीच होने वाली ये नोंक-झोंक नई नहीं है। इससे पहले शाहिद अफरीदी गौतम गंभीर के चुनाव जीतने पर भी विवादित बयान दे चुके हैं। जिसका जवाब उस समय भी गंभीर ने व्यंग्य करके ही दिया था। उस दौरान शाहिद ने कहा था कि गौतम में अक्ल ही नहीं है फिर भी लोगों ने उन्हें वोट दे डाला है। जिस पर उस समय भी गौतम ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा था, “शाहिद अफरीदी तुम बहुत मजाकिया हो। वैसे हम अभी भी पाकिस्तान के लोगों को इलाज कराने के लिए भारत का वीजा दे रहे हैं। मैं तुम्हें खुद मनोचिकित्सक के पास ले जाऊँगा।”

देश जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से कहकर राहुल गाँधी ने ट्विटर पर कई लोगों को किया ब्लॉक

भाजपा सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने पर पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गाँधी ने फैसले का विरोध करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को एकतरफा फैसले के चलते टुकड़ों में बाँटा गया है, यह संविधान का उल्लंघन है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ेगा। 

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “जम्मू-कश्मीर को 2 हिस्सों में बाँटकर, जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में डालकर और संविधान का उल्लंघन करके देश को एकजुट नहीं रखा जा सकता। देश उसकी जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से। सरकार द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंंभीर खतरा साबित हो सकता है।”

राहुल गाँधी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पार्टी के दिग्गज नेता सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। बता दें कि, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी और मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के साथ ही रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि सरकार ने एक ‘ऐतिहासिक गलती’ सुधारी है। द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है। स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे। उन्होंने कहा, “मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है।”

राहुल गाँधी ने लोगों का महत्त्व तो बतलाया लेकिन इसी मुद्दे पर उनसे सवाल करने वाले कइयों को ट्विटर पर दनादन ब्लॉक भी मार दिया। आप नीचे उनमे से कुछ का ट्वीट भी देख सकते हैं।

राहुल गाँधी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पार्टी के दिग्गज नेता सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। बता दें कि, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी और मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के साथ ही रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि सरकार ने एक ‘ऐतिहासिक गलती’ सुधारी है। द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है। स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे। उन्होंने कहा, “मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है।”

मिलिंद देवड़ा ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 को उदार बनाम रूढ़िवादी बहस में तब्दील कर दिया गया। पार्टियों को अपनी विचारधारा से अलग हटकर इस पर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभुता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए बेहतर क्या है?”

इसके अलावा, अदिति सिंह ने कहा कि वो पूरी तरह से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के पक्ष में हैं। इससे जम्मू-कश्मीर को देश के मुख्यधारा में जुड़ने के लिए मदद मिलेगी। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। एक विधायक के तौर पर वो इस फैसले का स्वागत करती हैं।

लोकसभा में अपने ही नेता से खफ़ा हो गईं सोनिया गाँधी, पलट कर माँगा स्पष्टीकरण: देखें Video

लोकसभा में कॉन्ग्रेस सांसद दल के मुखिया अधीर रंजन चौधरी ने ऐसी बयानबाजी कर डाली, जिससे सत्ताधारी भाजपा के साथ-साथ उनके अपने संप्रग की अध्यक्षा सोनिया गाँधी भी नाराज़ हो गईं। उन्होंने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली। अधीर रंजन चौधरी के अनुसार चूँकि कश्मीर मामला 1948 से संयुक्त राष्ट्र (UN) में लंबित है, तो भला यह आंतरिक मसला कैसे हो गया, और सरकार इस पर कोई बिल कैसे ला सकती है।

उनके इस बयान पर भड़के गृह मंत्री और भाजपा सुप्रीमो अमित शाह ने तो उन्हें खरी-खोटी सुनाई ही, खुद सोनिया गाँधी भौंचक्की नज़र आईं। इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने सोनिया गाँधी के रिएक्शन का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया। इसमें सोनिया गाँधी अधीर रंजन चौधरी की बातों से न केवल हैरान नज़र आतीं हैं, बल्कि पीछे पलट अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं से स्पष्टीकरण माँगती भी दिखतीं हैं।

उनके इस बयान पर गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा, “आप ये स्पष्ट कर दें कि ये कॉन्ग्रेस का स्टैंड है कि संयुक्त राष्ट्र कश्मीर को मॉनिटर कर सकता है।” इस पर निचले सदन में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। शाह ने सदन में यह भी साफ़ किया कि वह जब भी “कश्मीर” बोलेंगे, तो उनका तात्पर्य पाकिस्तान और चीन के कब्ज़े वाले गुलाम कश्मीर से भी होगा।

TMC नेता ने कोडेड शब्दों में किया BJP के कश्मीर फैसले का समर्थन, दीदी से डरते हैं क्या?

मनुष्य नश्वर है, आज है, कल नहीं, मगर देश तो हमेशा रहेगा इसलिए फैसला देश हित में होना चाहिए।

अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद और चीफ व्हिप सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने एक ट्वीट में जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 370 में हुए बदलाव का स्वागत किया।

सुखेंदु शेखर रॉय ने इस ट्वीट में अप्रत्यक्ष रुप से इस फैसले का स्वागत करते हुए लिखा कि दशकों पहले की गई गलती को अब सुधारा जा रहा है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को काफी जबर्दस्त बताया और कहा कि परिवर्तन संसार का नियम है। साथ ही उन्होंने कहा कि मनुष्य तो नश्वर है, यानी कि आज है, कल नहीं। मगर, देश तो हमेशा रहेगा। इसलिए कोई भी फैसला देश हित को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लोगों को बार-बार कल का राग नहीं अलापना चाहिए, बल्कि जो हो रहा है, उसे हो जाने देना चाहिए।

बता दें कि, टीएमसी ने सोमवार (अगस्त 5, 2019) को संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने की पेशकश का विरोध किया था। कॉन्ग्रेस ने भी दशकों पहले जवाहरलाल नेहरू द्वारा किए गए गलती को सुधारने के कदम का विरोध किया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस में कई लोग पार्टी के स्टैंड के खिलाफ गए थे और अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार के कदम का स्वागत किया था।

जब इस ट्वीट को लेकर एक यूजर ने उनसे पूछा कि वो इसके जरिए क्या बताना चाहते हैं, तो उन्होंने इसका जवाब एक स्माइल वाले इमोजी के साथ दिया और कहा कि लोग अपने तरीके से इसका निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र हैं। वो इसके बारे में और ज्यादा व्याख्या नहीं करेंगे।

बता दें कि, कई राजनेताओं ने केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि ये भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और उसके लोगों के कल्याण के हित में लिया गया फैसला है। हालाँकि, इनमें से सभी नेता अपनी पार्टी के रुख का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। वहीं, बसपा और बीजेडी आदि पार्टियाँ खुलकर भाजपा के समर्थन में आई।

एक देश, एक स्कूली शिक्षा: मेडिकल-इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं में सबको दिलाएगा बराबरी का मौका

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार (जुलाई 5, 2019) को पूरे देश में एक स्कूली शिक्षा की माँग लोकसभा में उठाई। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ग्रामीण प्रतिभाओं को भी बराबर का मौक़ा मिलेगा।

सदन में भाजपा सांसद ने अपने मत पर तर्क दिया कि प्रदेश बोर्डों में अलग-अलग पाठ्यक्रम होने के कारण मेडिकल और इंजीनियरिंग के दाखिले की परीक्षाओं में ग्रामीण इलाकों के बच्चे स्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि पूरे देश में एक बोर्ड होना चाहिए ताकि सभी बच्चे एक तरह की पढ़ाई करें और सबको बराबर का मौका मिले।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि लोकसभा में कल (अगस्त 5, 2019) निशिकांत दुबे समेत 74 सदस्यों ने अपनी बात रखी। जहाँ निशिकांत ने शिक्षा का मुद्दा उठाया, वहीं शून्यकाल के दौरान बीजू जनता दल के नेता माहताब ने 2021 की जनगणना में OBC समुदाय के लोगों की अलग से जनगणना का सुझाव दिया, जबकि भाजपा के जगदम्बिका पाल ने आंगनवाड़ी कर्मियों के विषय को उठाया और माँग की कि इन कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी होने का दर्जा दिया जाए।

इस दौरान भाजपा के राजकुमार चाहर ने अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मस्थान पर उनकी बड़ी मूर्ति स्थापित करने की माँग की। वहीं भाजपा के रवि किशन ने लड़कियों को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण देने की व्यवस्था बनाने की माँग को उठाया।

शून्यकाल के दौरान भाजपा के अन्य नेताओं ने भी अपने अच्छे सुझावों को सामने रखा। भाजपा के ही सुशील कुमार सिंह ने इस दौरान किडनी संबंधी डायलिसिस योजना का जिक्र किया और बिहार के औरंगाबाद के जिला सदर अस्पताल में ऐसा केंद्र खोलने की माँग की। साथ ही भाजपा के रमेश बिधुड़ी ने दिल्ली में झुग्गी बस्ती के लोगों को बुनियादी सुविधा सुनिश्चित किए जाने की माँग को उठाया।

इसके अलावा भाजपा के अनुराग शर्मा, वाईएसआर कॉन्ग्रेस के रामकृष्ण राजू, शिवसेना के विनायक राउत और कई अन्य सदस्यों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों के मुद्दे उठाए।

‘जम्मू-कश्मीर की तरह हमारे लिए बनाओ ग्रेटर कराची: पाकिस्तान में मुहाजिरों ने उठाई हक की आवाज’

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 की ‘पावर’ को खत्म करके मोदी सरकार ने जो ऐतिहासिक कार्य कर दिखाया है, उससे पाकिस्तान में उथल-पुथल मच गई है। पाकिस्तान लगातार भारत के इस फैसले पर अपनी टिप्पणी कर रहा है। जिसपर मोहाजिर के वरिष्ठ नेता नदीम नुसरत की ओर से पाकिस्तान को दो टूक जवाब आया है। नदीम की मानें तो “पाकिस्तान को कश्मीरियों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं, क्योंकि उसने खुद अपने नागरिकों को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा।”

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका में स्थित प्रवासी मोहाजिरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह वॉयस ऑफ कराची के अध्यक्ष नदीम नुसरत ने पाकिस्तान की टिप्पणियों पर बयान दिया है कि पाकिस्‍तान को तब तक कश्‍मीरियों के हक के लिए बोलने का कोई अधिकार नहीं है, जब तक कि वह खुद अपने यहाँ मुहाजिर, बलूच, पश्‍तून और हजारा समुदाय के लोगों को उनके अधिकार नहीं दे देता।

उल्लेखनीय है कि इस समय भारत में इतना बड़ा फैसला आने के बाद पाकिस्तान में भी स्वायत्त क्षेत्र की माँग उठने लगी है। अमेरिका-आधारित समूह ‘वॉयस ऑफ कराची’ ने सोमवार को प्रवासी मुहाजिरों का प्रतिनिधित्व करते हुए पाकिस्तान की सरजमीं पर एक स्वायत्त ग्रेटर कराची के निर्माण का आह्वान किया है।

इसी के मद्देनजर नदीम नुसरत ने पाकिस्तान के आलाकमानों से सवाल किया है कि पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करता है, लेकिन क्‍या वह यही अधिकार अपने यहाँ के उन अल्‍पसंख्‍यकों को देने के लिए तैयार है, जो सांस्कृतिक व जातीय भिन्‍नता के कारण हाशिए पर हैं?

मोहाजिर प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले नदीम पाकिस्तान सरकार के कई मंत्री व शीर्ष अधिकारी विदेशों में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और अस्थिरता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा पाकिस्तान के पुनर्गठन की माँग में अपने प्रयासों को तेज करने के लिए वैश्विक अभियान शुरू किया जाएगा। उनकी मानें तो उनका संगठन ग्रेटर कराची के प्रस्तावित नक्शे को पहले ही प्रकाशित कर चुका है और जल्द ही पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पूर्व अपने प्रस्ताव का मुख्य लेख जारी करेगा।

हमने तो सिर्फ एक किताब फाड़ा, संविधान तो BJP ने फाड़ दिया: कुर्ता फाड़ने वाले सांसद

महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सांसद नज़ीर अहमद लवे ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ हुई बातचीत में संविधान की प्रति फाड़ने पर कहा कि उन्होंने तो सिर्फ एक किताब फाड़ा है। यानी कि उनके अनुसार देश के संविधान की प्रति उनके लिए महज एक किताब है। उनका कहना है कि संविधान उन्होंने नहीं, बल्कि भाजपा ने फाड़ा है।

इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी हरकत को सही ठहराते हुए कहते हैं कि ये तो सोचने वाली बात है कि जब सदन और संसद के प्रति सजग रहने वाले उनके जैसे सांसद सरकार की कार्रवाई को देखते हुए इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि सरकार क्या कर रही है, तो फिर कश्मीर के आम नागरिक की क्या प्रतिक्रिया होगी? 

जब उनसे पूछा गया कि अब जम्मू कश्मीर की कानून व्यवस्था को सीधे तौर पर केंद्र नियंत्रित करेगा, तो इसका वहाँ के लोगों पर क्या असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि सब कुछ कानून के हिसाब से होगा, लेकिन मुश्किलें बढ़ सकती है, क्योंकि वहाँ पर जनता के पास उनके द्वारा चुनी गई सरकार नहीं होगी। इसके साथ ही परिसीमन के बारे में बात करते हुए नज़ीर अहमद ने कहा कि अभी तो नहीं, लेकिन सरकार जल्द ही इसे भी कर सकती है और इससे लोग और भी अलग हो जाएँगे।

साथ ही नज़ीर अहमद ने सरकार के इस फैसले को चुनौती देने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को इसके विरोध में संगठित होना चाहिए और सभी राजनीतिक नेताओं को एकजुट होकर चर्चा करनी चाहिए। फिर सभी को एक साथ कोर्ट जाना चाहिए। उनका कहना है कि कश्मीर का बचाव करना होगा अन्यथा कश्मीर के हालात बदतर हो जाएँगे।

गौरतलब है कि, पीडीपी सांसद नज़ीर अहमद लवे और एमएम फ़ैयाज़ ने सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव का विरोध करते हुए संसद परिसर में संविधान फाड़ दिया था। उनकी इस हरक़त से नाराज़ सभापति एम वेंकैया नायडू ने दोनों को संसद से बाहर जाने को कहा। इसके बाद भी दोनों सांसदो ने अपना हंगामा जारी रखा और अपने कपड़े फाड़ दिए।

ममता की पुलिस ने Article 370 पर जश्न मनाते 5 BJP कार्यकर्ताओं को किया गिरफ्तार

सोमवार (अगस्त 5, 2019) को भाजपा सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के संबंध में अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव पर जहाँ पूरा देश जश्न मना रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने जश्न मना रहे लोगोंं को हिरासत में लिया है। ममता की पुलिस ने सिलीगुड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष कंचन देबनाथ और महामंत्री समेत 5 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।

BJYM के जिला उपाध्यक्ष अनिकेत दास ने इस पर आपत्ति जताई और न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया है। ये पूरी तरह से असंवैधानिक है। देश में हर जगह लोग 370 के पावर खत्म होने पर जश्न मना रहे हैं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार जश्न नहीं मनाने दे रही। उन्होंने कहा कि वो तिरंगे के साथ जश्न मना रहे थे। उन्होंने किसी राजनीतिक दल का झंडा भी नहीं लिया था। इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया। वो इसके विरोध में थाने का घेराव करेंगे।

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मुहर लगाने के बाद अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। हालाँकि, जम्मू कश्मीर की अपनी विधायिका होगी, लेकिन लद्दाख में विधायिका नहीं होगी। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा और दोहरी नागरिकता भी खत्म हो गई है। राज्यसभा से पारित होने के बाद इस बिल को मंगलवार (अगस्त 6, 2019) को लोकसभा में पेश किया गया।

Video: ‘हिन्दुस्तान तो फासिस्ट है, ये हमारे लिए लानत है’ – JNU में फिर शुरू हुआ ‘आजादी गैंग’ का खेल

अनुच्छेद-370 के ‘पॉवर’ के खत्म होने और उसके साथ 35-A खत्म होते ही देश भर में जश्न का माहौल है। लोग इसे ‘एक देश एक संंविधान’ बता रहे हैं, तो वहीं कुछ विपक्षी दलों द्वारा इसका विरोध भी किया जा रहा है। इसी बीच एक बार फिर से जेनयू से देश विरोधी नारों और ‘आजादी की गूँज’ सुनाई पड़ रही है। सोमवार (अगस्त 5, 2019) को राज्यसभा से विधेयक पारित होने के बाद आधी रात के अंधेरे में एक युवक काफी लोगों को इकट्ठा करके देश विरोधी बयान देता है और वहाँ मौजूद लोग भी उसका साथ देते हैं। आजादी-आजादी के नारे लगाते हैं।

ऊपर के वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक युवक वहाँ उपस्थित लोगों से कहता है, “आप लोग डरिए मत, ये हम कह रहे हैं, इससे आपका कोई लेना-देना नहीं है। मैं यहाँ उपस्थित तमाम लोगों से कहना चाहता हूँ कि अगर आपके मकान पर मैं जाकर कब्जा कर लूँ, तो ये जुल्म होगा और ये जुल्म कश्मीरी बर्दाश्त नहीं करेगा। जब उसका कल्चर नहीं रहेगा, उसका तहजीब नहीं रहेगा, तो वो खुद को दुनिया के सामने क्या बताएगा? उसका क्या अस्तित्व रहेगा? वो दुनिया को क्या बतलाएगा कि मैं कौन हूँ? हिन्दुस्तान तो फासिस्ट है… ये हमारे लिए एक लानत है और मैं इस लानत को स्वीकार नहीं करूँगा।”

आगे उसने हिन्दुस्तान के तमाम बादशाऊर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिनकी खोपड़ी में दिमाग है, वो अपने इलाके के तमाम लीडर को कहें कि वो कश्मीर के साथ खड़े हो जाएँ। अगर वो खड़ा नहीं होगा कश्मीर को खो देगा और उसे खोना सबके लिए शर्मनाक होगा। इसके साथ ही वो बार-बार ‘370 वापस लाओ’ के नारे लगाता है और कहता है कि उसे ‘आजादी चाहिए- इस पार भी और उस पार भी।’

गौरतलब है कि इससे पहले भी जेएनयू ऐसे ही कारणों के कारण 3 साल पहले भी सुर्खियों को हिस्सा बना था। जब 9 फरवरी 2016 को वहाँ जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत अन्य छात्र नेताओं ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फाँसी पर लटकाए जाने के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने आरोप लगाया था कि यहाँ ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ और आतंकी ‘अफजल तेरे कातिल जिंदा हैं’, जैसे नारे लगे। जिसके बाद इस मामले पर बाकायदा कार्रवाई हुई। अभी फिलहाल इस मामले में दिल्ली की एक कोर्ट में सुनवाई चल रही है।