कट्टरपंथी इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक के पीस टीवी पर ब्रिटेन में प्रतिबंध लगा दिया गया है। कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों को अपराध के लिए उकसाने, घृणा को बढ़ावा देने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के कारण पीस टीवी पर यह कार्रवाई की गई है।
मीडिया रेगुलेटर ऑफकॉम के मुताबिक पीस टीवी ने अपने चार कार्यक्रमों में ब्रॉडकास्टिंग कानूनों का उल्लंघन किया है। इनमें से एक कार्यक्रम ‘वैली ऑफ होमोसेक्सुअल्स’ में समलैंगिकों को पशुओं से भी बदतर बताते हुए कहा गया कि वे सूअर से भी नापाक हैं। एचआईवी का हवाला देते हुए एलजीबीटी समुदाय के लोगों को बीमारियों का वाहक बताया गया।
कार्यक्रम के प्रस्तोता कासिम खान ने कहा, “मर्द टीवी पर हमारे बच्चों के सामने मर्द से शादी करता है। एक-दूसरे का चुंबन लेता है। हाथ में हाथ डाले सड़कों पर चलता है। ऐसा लगता है कि समाज पागल हो गया है।”
मीडिया रिपोर्टों मुताबिक मार्च 2018 में प्रसारित इस कार्यक्रम में कहा गया था कि समलैंगिकता अस्वभाविक प्रेम है और लोग ऐसा शैतान के प्रभाव में करते हैं।
पीस टीवी ने अपने कार्यक्रमों में जादूगरों की हत्या और लड़कियों की कम उम्र में शादी की पैरोकारी भी की थी।
साम्प्रदायिक तनाव की बढ़ती खबरों के बीच ताजा मामला हरियाणा से पानीपत का है। पानीपत के हथवाला गाँव में 18 जुलाई को शाबिर नामक युवक और एक हिंदू लड़की रात को गायब हो गई। लड़की के पिता ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने आरोपित शाबिर के खिलाफ शिकायत तो दर्ज कर ली, लेकिन 5 दिन बीत जाने के बाद भी जब आरोपित को पुलिस पकड़ नहीं पाई तो मंगलवार (जुलाई 23, 2019) को गाँव का माहौल बिगड़ गया। लड़की के परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए, जिससे गाँव में साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया।
लड़की के परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया और ग्रामीणों ने भी पुलिस पर आरोपित के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और स्थिति बेकाबू हो गई। कुछ आक्रोशित लोगों ने गाँव की मस्जिद में नमाज रुकवा दिया, कुछ ने आरोपित शाबिर के घर पर हमला भी बोला।
घर से गायब हुए लड़का-लड़की तो गांव में पैदा हुआ सांप्रदायिक विवाद, तनाव के बीच भारी पुलिस बल तैनात https://t.co/qrjR4S2HnT
तनावग्रस्त मौके पर पहुँची पुलिस को लोगों की बेकाबू भीड़ को शांत कराने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। गाँव की स्थिति काफी बिगड़ रही थी, लोग लगातार लापता लड़की की बरामदगी और शाबिर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे। स्थानीय लोगों के दबाव के बाद पुलिस ने आरोपित युवक शाबिर के परिजनों एवं उनके कुनबे के कुछ अन्य सदस्यों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। साथ ही पुलिस ने ग्रामीणों को इस मामले में ठोस कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।
जानकारी के मुताबिक, लापता लड़की बीएड द्वितीय वर्ष की छात्रा है। 18 जुलाई की रात वो अपनी दादी के साथ सो रही थी और रात में ही वो लापता हो गई। बताया जा रहा है कि शाबिर उसे बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया है। इसके बाद परिजन और ग्रामीण लगातार पुलिस पर कार्रवाई करने का दबाव बना रहे थे और दो दिन पहले से ही गाँव के अड्डे पर इकट्ठा होने का मैसेज सोशल साइट्स पर फैलाया जा रहा था।
जब पुलिस 5 दिनों में शाबिर को नहीं पकड़ पाई तो लोगों ने वहाँ पर इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। खबर के अनुसार तकरीबन 20 साल पहले भी इसी गाँव में इसी तरह की घटना हुई थी। जिसमें एक समुदाय का युवक दूसरे समुदाय की युवती को लेकर फरार हो गया था और उस युवती का आज तक पता नहीं चल पाया है। मगर ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में वो चुप नहीं बैठेंगे।
गौरतलब है कि पानीपत में 2 जनवरी को भी ऐसी ही एक घटना घटित हुई थी, जब बिलाल नामक युवक नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा को बहल-फुसला कर भगाकर ले गया था। हालाँकि, इस मामले में पुलिस ने आरोपित बिलाल को गिरफ्तार कर लिया था और छात्रा को परिजनों के हवाले कर दिया था।
संपादकीय नोट:ऑपइंडिया मस्जिद में नमाज रुकवाने या आरोपित व उसके परिवार (फिर चाहे वो किसी भी धर्म/जाति/लिंग का क्यों न हो) पर हमले की निंदा करता है। ऐसा करने से माहौल बिगड़ता है, साम्प्रदायिक तनाव पैदा होता है। देश में कानून-व्यवस्था है और किसी भी घटना की जाँच कानूनी दायरे में रहकर ही होनी चाहिए।
मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पिछले साल विधान सभा चुनाव से पहले किए गए वादों को लेकर लगातार यू-टर्न ले रही है। कॉन्ग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने घोषणापत्र में प्रदेश के युवाओं को 4000 हजार रुपए तक का बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था। मगर मंगलवार (जुलाई 23, 2019) को कमलनाथ सरकार इस वादे से मुकर गई। मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा कि राज्य में बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की कोई योजना नहीं है। मुख्यमंत्री ने ये जानकारी कॉन्ग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल के प्रश्र के लिखित जवाब में दी। जब मुन्नालाल गोयल ने कमलनाथ से बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने या उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने की नीति के बारे में पूछा तो उन्होंने इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में युवा स्वाभिमान योजना, मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री कौशल्या योजना एवं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना तथा आईटीआई एवं पॉलीटेक्निक के माध्यम से कौशल संवर्धन का कार्य किया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त हो सके। इसके अतिरिक्त जॉब फेयर योजना के तहत रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है, जहाँ उन्हें निजी क्षेत्र द्वारा रोजगार के लिए चयनित किया जाता है।
बता दें कि इससे पहले नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भी बेरोजगारी भत्ता को लेकर कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि सरकार ने झूठे वादे करके युवाओं के साथ धोखा किया है। सरकार को मावा बाटी, जलेबी और चिरौंजी बर्फी की ब्रांडिंग करने की जगह युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है।
कुमारास्वामी सरकार के विश्वास मत हारने के बाद राज्य भाजपा की नज़रें सरकार बनाने पर गड़ गईं हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ पूर्व मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा साल भर के भीतर दूसरी बार सरकार बनाने का दावे पेश करने के लिए तैयार हैं। इसके पहले वर्तमान विधानसभा के चुनावों के बाद भी वह मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहुमत साबित करने के लिए महज़ 24 घंटे दिए जाने के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। भाजपा ने इसे ‘कर्म का खेल’ बताकर बाहर जाती यूपीए सरकार पर तंज भी कसा है।
कई दिनों से चले आ रहे सियासी ड्रामे के पटाक्षेप में हुई यूपीए की इस हार ने एनडीए के लिए रास्ता खोल दिया है। राज्य सरकार गठबंधन के 16 विधायकों के बागी हो बाद से ही डाँवाडोल चल रही थी। इसके पहले कुमारास्वामी लगातार विश्वास मत को टालते चले गए। यहाँ तक आजिज़ आकर उनकी पार्टी के ही विधानसभा अध्यक्ष को भी सत्ता पक्ष को टोकना पड़ गया था।
‘यहाँ सात जनम में भी नहीं गिरेगी कॉन्ग्रेस की सरकार’
कर्नाटक के पड़ोसी मध्य प्रदेश में सरकार को किसी भी तरह की आग तो नहीं लगी है, लेकिन कहावत के अनुसार धुआँ तो दिखने लगा है। एक तरफ भाजपा नेता कॉन्ग्रेस सरकार के ‘खुद से पलट जाने’ का दावा कर रहे हैं, दूसरी ओर सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस का दावा है कि प्रदेश में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के लिए भाजपा को सात जन्म लेने पड़ जाएँगे।
Madhya Pradesh Minister & Congress leader Jitu Patwari: BJP has done everything to cause problems to us but this is Kamal Nath’s government not Kumaraswamy’s, they will have to take seven births to do horse trading in this government. pic.twitter.com/GvXV414kKJ
Shivraj Singh Chouhan, BJP: We’ll not cause the fall of govt here (Madhya Pradesh). Congress leaders themselves have been responsible for fall of their govts. There is an internal conflict in Congress, & support of BSP-SP, if something happens to that then we can’t do anything. pic.twitter.com/1w25KOw2RK
पाकिस्तान के जाने माने गायक और अभिनेता मोहसिन अब्बास और उनकी पत्नी फातिमा सोहल के मामले में एक नया मोड़ आया है। दोनों में आरोप-प्रत्यारोप का खेल और गंभीर होता जा रहा है। अभिनेता मोहसिन पर उनकी पत्नी फातिमा ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था और इसके बारे में फातिमा ने फेसबुक पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर आपबीती बताई थी। साथ ही, उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें उनके चेहरे और हाथ पर चोट के निशान नजर आ रहे हैं।
इसके बाद मोहसिन ने कुरान पर हाथ रखकर 50 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी पर ही कई गंभीर आरोप लगाए। मामला यहीं नहीं रुका, अब उनकी पत्नी ने भी कुरान पर हाथ रखकर पति पर और संगीन आरोप लगाए हैं।
‘मुझे जिस्मानी दर्द देता था’
फातिमा ने अपने अभिनेता पति मोहसिन अब्बास पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कुरान हाथ में उठाकर आरोपों को और मजबूती से दोहराया। फातिमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुरान पर हाथ रखकर अपनी आपबीती सुनाई। फातिमा ने पति पर आरोप लगाते हुए कहा कि मोहसिन का अपनी गर्लफ्रेंड से नाजायज संबंध हैं। उन्होंने विवाह के बाद भी संबंध बरकरार रखा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, फातिमा ने कहा- “जिस नाज़िश जहाँगीर को वो अपनी ‘केवल फ्रेंड’ बता रहा है, वो उनकी गर्लफ्रेंड है। उसके साथ मोहसिन का अफेयर है। इतना ही नहीं अपनी गर्लफ्रेंड को सुनाने के लिए वो मुझे हमेशा उससे फोन पर बात करते हुए गंदी-गंदी गालियाँ देता था। कई बार फोन लगाने के बाद वो मुझे जिस्मानी दर्द देता था साथ ही जहनी तौर पर भी दर्द देता था।”
‘कुरान पर हाथ रखकर कह रही हूँ, उसने मुझे बहुत मारा है’
पाकिस्तानी गायक-हीरो ने पत्नी के मारपीट के आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि अगर उन्होंने मारपीट की है तो फातिमा को मेडिकल कराना चाहिए। इस पर फातिमा ने कुरान पर हाथ रखकर कहा कि जब अभी वो मीडिया में कई लोगों के सामने मोहसिन से मिलीं तब उन्हें पहली बार डर नहीं लगा, लेकिन वो अब मोहसिन के हिंसक रूप से डरने लगी हैं।
‘मेरे तो पति में कमी है तो कोई दूसरा क्या करेगा?’
हालाँकि, मोहसिन ने पत्नी के मारपीट के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि फातिमा को मैंने मारा है तो उसे मेडिकल कराना चाहिए। इस पर फातिमा ने कहा कि वो अब मोहसिन के हिंसक रूप से डरने लगी हैं।फातिमा ने कहा कि अपना घर बचाने के लिए वह मोहसिन की गर्लफ्रेंड नाज़िश से मिलने गई थी। उन्होंने जहाँगीर से गुजारिश की कि वे उनके घर में परेशानी का सबब ना बनें, फातिमा ने कहा- “लेकिन मेरे तो पति में कमी है तो कोई दूसरा क्या करेगा?”
फातिमा ने कहा कि उन्होंने परेशान होकर यह कदम उठाया है। अब उन्होंने अपने पति की बहुत सारी हिंसा बर्दाश्त कर ली है और अब वे अपने बच्चे को इन सब से बाहर लेकर जाना चाहती हैं।
‘मैं जब अस्पताल में कराह रही थी, तब मेरा पति अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सो रहा था’
फातिमा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “सामाजिक दबाव कहें या फिर मेरा अपना आत्मविश्वास, मुझे नहीं पता, लेकिन अपने बच्चे के लिए मैंने इस शादी को चलाना चाहा। 20 मई 2019 को एक प्यारा सा बेटा हुआ, कुछ दिक्कतों की वजह से मेरी सर्जरी हुई। जब मैं लाहौर ऑपरेशन थियेटर में थी, मेरे पति अपनी गर्लफ्रेंड नाज़िश जहाँगीर, जो कि एक मॉडल और एक्टर हैं, उसके साथ कराची में सो रहे थे।”
मोहसिन और फातिमा की एक पुरानी तस्वीर
अपना दर्द लिखते हुए फातिमा ने कहा, “ये सब करने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं अपने बच्चे को कैसे बचाऊँगी, लेकिन मैं जानती हूँ कि अल्लाह मेरे साथ हैं। मैं काफी गालियाँ सुन ली हैं, काफी पीटी जा चुकी हूँ। मैं काफी तलाक की धमकियाँ सुन ली हैं। अब ये सब कुछ बहुत हो गया, मैं सारे सबूत भी यहाँ डाल रही हूँ।” फातिमा ने आखिर में लिखा, “मोहसिन, अब तुमसे मैं कोर्ट में मिलूँगी। सच बोलता है।”
मुझे नहीं पता कि जदयू नेता पवन वर्मा अपना धर्म कहाँ से सीख-पढ़ कर आए हैं, लेकिन जिस राम की बात वह आज के अपने टाइम्स ऑफ़ इंडिया वाले ब्लॉग में कर रहे हैं, वह कम-से-कम वो वाले राम तो नहीं हैं जिनके लिए हम “जय श्री राम” और ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम’ का इस्तेमाल करते हैं, और जिन्हें रामायण में “नर व्याघ्र” और “नर शार्दूल“, यानि ‘मनुष्यों में बाघ’, कहा गया है। जिन श्री राम को ‘benevolent’ शब्द की आड़ में आप अपने घर के ‘रामू काका’ जैसा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, वह श्री राम हमारे धर्म के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर कहे गए हैं- धनुर्धर माने धनुष धारण करके युद्ध करने वाला, आक्रामक, धर्मरक्षा के लिए हिंसा करने से भी न हिचकिचाने वाला। अपनी राजनीति साधने के लिए श्री राम के चरित्र के साथ आपने खिलवाड़ ही किया है।
धर्मोचित ‘आक्रामकता’ राम और रामभक्तों का गुण है
पवन वर्मा कहते हैं कि ‘जय श्री राम’ के नारे में “आजकल” आक्रामकता आ गई है। तो सबसे पहले तो पवन वर्मा जी के लिए यह जान लेना जरूरी है कि यह आक्रामकता आजकल की नहीं, हज़ारों वर्षों से है- बीच में कहीं गुम हो गई थी जो वापस आई है। आक्रामक हो जय श्री राम का घोष करते हुए ही राम के सबसे बड़े भक्त और रुद्र के अंश हनुमान ने लंका को जला दिया था। राम जन्मभूमि पर मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाए जाने के बाद से ही जो भी आंदोलन या संघर्ष राम भक्तों ने मस्जिद हटा कर दोबारा मंदिर बनाने के लिए किए, वह सब भी आक्रामक रूप से ही ‘जय श्री राम’ बोलते हुए हुए हैं।
दो लाख तीन घंटे में मारे
मुझे नहीं पता पवन वर्मा ने कौन सी रामायण पढ़ रखी है, जहाँ राम को मंद-मंद दिखाया गया है। लेकिन जिस रामायण के विषय में मैं जनता हूँ, उसके अरण्यकाण्ड के 37वें सर्ग में तीसरे श्लोक में लिखा है, “रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः।” मेरी संस्कृत सटीक शब्दार्थ बताने लायक अच्छी तो नहीं है, लेकिन इसका भावार्थ है- राम धर्म का विग्रह हैं, सत्यशील हैं, साधु हैं और पराक्रमी हैं। पराक्रमी, पवन वर्मा जी।
मेरी जानकारी के अनुसार यदि रामायण का युद्ध कांड देखा जाए तो उसमें भी श्री राम के आक्रमण का ही वर्णन है। उसमें बताया गया है कि श्री राम गान्धर्वास्त्र का प्रयोग करते हैं, और महज़ तीन घंटे में 10,000 रथों का नाश करने के साथ 18,000 हाथियों, 14,000 घोड़ों और घुड़सवारों और 2,00,000 पैदल राक्षसों का वध महज़ तीन घंटे में कर देते हैं। पवन वर्मा के लिए इतनी आक्रामकता काफी है?
राम दयालु थे लेकिन मूर्ख नहीं
इसमें कोई शक नहीं कि राम का एक पक्ष दया और उदारता का भी था। बिलकुल था। इसीलिए मारीच को एक बार जीवित छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें मारीच में धर्म के कुछ बीज दिखे थे। बाद में मारीच ने सीता के हरण में हिस्सा लेने में अनिच्छा भी जताई। लेकिन जब अंत में उसने अपना राक्षसी, अधर्मी पक्ष ही हावी होने दिया तो राम ने उसे मारने में कोई संकोच नहीं किया।
पवन वर्मा इस चित्र को पहचानते हैं? इसमें राम अपने अस्त्र से समुद्र को सुखा देने के लिए उद्दत हैं, क्योंकि उनके लाख मनुहार करने के उपरांत भी समुद्र रास्ता नहीं दे रहा है।
राजा रवि वर्मा का बनाया हुआ राम-वरुण संवाद का चित्र
राम की क्षमा, उनका शील उनके लिए हैं, जो धर्म के साथ हैं। उनकी शरण में हैं। राम की दया करुणा विभीषण के लिए होती है, हनुमान और लक्ष्मण के लिए होती है। अपने शत्रुओं के लिए, अधर्मियों के प्रति उनका ‘angry god’ के रूप में चित्रण एकदम सटीक है, बिलकुल सही है।
राम-राज्य में आपका क्या होगा?
पवन वर्मा राम की बात करते हुए अपने ब्लॉग में “यहाँ तक कि गाँधी जी…” के सर्टिफिकेट का ज़िक्र करते हैं। पहली बात तो पवन वर्मा को यह पता होनी चाहिए कि मोहनदास करमचंद गाँधी बाकी जो कुछ थे या नहीं थे, कम-से-कम हिन्दुओं के लिए किसी भी तरह का मापदण्ड नहीं ही थे। अतः अगर वो रामराज्य की तारीफ़ की बजाय बुराई में भी दो-चार बातें बोल भी देते तो हिन्दुओं को कोई फर्क न पड़ता।
दूसरी बात कि जिस राम-राज्य का ज्ञान पवन वर्मा बाँच रहे हैं, उन्होंने कभी सोचा है कि उस राम-राज्य में उनकी सरकार, उनकी पार्टी का क्या हाल होता? आज लालू के जंगलराज से उनके राज में बिहार के लोगों के लिए फर्क करना मुश्किल है- राम की ससुराल मिथिला में बाढ़ तब भी वैसी ही थी, अब भी वही है; चमकी बुखार जस-का-तस है; पटना के महात्मा गाँधी सेतु पुल पर लालू-राज में भी नियम था कि सुबह-सुबह जो पुल नहीं पार कर लिया, वह पूरा दिन जाम में फँसा रहेगा, आज भी वही हाल है। राम अगर राजा होते, पवन वर्मा जी, तो आपकी पार्टी और सरकार या तो सूली पर होते या जेल में।
पढ़े-लिखे ‘रामभक्तों’ का रंग देख लिया है
पवन वर्मा ‘आक्रामक’ रामभक्तों को अनपढ़ कह रहे हैं। इससे ज्यादा ‘elitism’ हो नहीं सकता कि इंसान मान ले कि उसकी तरह ‘मि-मि’ मिमियाने वाला शैम्पेन लिबरल ही पढ़ा-लिखा हो सकता है; बाकी प्रचंड, आवेशपूर्ण और भावुक तो जाहिल और अनपढ़ ही होते हैं। लेकिन अगर ऐसा है भी, पवन वर्मा जी, तो भी ठीक है। आपके जैसे ‘पढ़े-लिखे’ का हाल देखकर तो हम रामभक्त अनपढ़ ही भले।
तथाकथित ‘अनपढ़’ लोगों ने ही राम की ‘धर्म विग्रह’ और ‘मनुष्यों में बाघ‘ की छवि को ज़िंदा रखा है। आपके जैसे पढ़े-लिखों ने तो राम को पहले अवतार से ‘कैलेंडर-आर्ट’ में तब्दील किया, और फिर टीवी पर डालडा की तरह नीरस और अशक्त टीवी किरदार के रूप में विकृत छवि का जमकर प्रचार-प्रसार किया, ताकि हिन्दुओं से एकतरफ़ा हथियार डलवाने वाली गाँधी-छाप अहिंसा को हिन्दुओं में स्वीकृति दिलाई जा सके। तो पवन वर्मा जी, टीवी कम देखिए और ज़रा कभी असली धर्म-शास्त्र पढ़ लिया करिए। राम टीवी से नहीं, शास्त्रों और योगाभ्यास से समझने की चीज़ हैं… आपको अहिंसक, गैर-आक्रामक जय श्री राम।
उत्तराखंड के लोग आपसी शिष्टाचार और मिलनसार प्रवृत्ति के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस बार मामला राष्ट्रीय स्तर पर उछल पड़ा है। कारण बने हैं देश के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’। दरअसल उत्तराखंड के हरिद्वार संसदीय क्षेत्र से सांसद निशंक उनसे मिलने वाले लोगों से इतने परेशान हो गए कि उन्हें निजी चौकीदार रखना पड़ गया।
देहरादून से दिल्ली की दूरी मात्र चार-पाँच घंटों में तय हो जाती है। ऐसे में रमेश पोखरियाल को अपने समर्थकों से ‘मिलने आने’ की बात उन पर भारी पड़ रही है। देहरादून से नजदीक होने के कारण उनसे रोजाना सौ-डेढ़ सौ लोग मिलने पहुँच जाते हैं। मिलनसार स्वभाव हाेने के कारण वह किसी को मना भी नहीं कर पाते हैं, लेकिन इससे उनके काम में व्यवधान पड़ने लगा है। मिलने आने वालों के कारन होने वाले इसी व्यवधान से बचने के लिए उन्हाेंने शास्त्री भवन में अपने ऑफिस के बाहर प्राइवेट गार्ड तैनात कर दिया।
यह गार्ड अंदर जाने वाले लोगों का पूरा परिचय और जानकारी लेता है, इसके बाद मंत्री से मिलने का पास होने पर ही अंदर जाने देता है। जिस व्यक्ति के पास अन्य अधिकारी के नाम का पास होता है, उसे बाहर ही रोक देता है। इस तरह से यह निजी गार्ड जुगाड़ लगाकर मंत्री से मिलने की कोशिश करने वालों को भी बाहर ही रोक देता है।
भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर मंत्री किसी प्रशंसक को मजाक में ही सुबह बोलते हैं कि आप दिल्ली आ जाइए चाय पीने, तो लोग शाम तक सच में दिल्ली उनके कार्यालय पहुँच जाते हैं। कई प्रशंसक तो मंत्री से मिलने के लिए पास बनवाने के लिए यह संदेशा भिजवाते हैं कि उन्होंने बचपन में मंत्री के साथ पढ़ाई की है और उनके मित्र हैं, इसलिए मिलना चाहते हैं। कई लोग इसी बहाने जुगाड़ लगाकर पास बनवाने की जुगत में भी रहते हैं।
हालाँकि, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल के ओएसडी अजय बिष्ट ने बताया कि कई लोग शास्त्री भवन के किसी और ब्लॉक या अधिकारी का पास बनवा लेते हैं और मंत्री से मिलने आ जाते हैं, जिससे काम प्रभावित होता है। सुरक्षा काे ध्यान में रखते हुए निजी गार्ड तैनात किया गया है। शास्त्री भवन की सुरक्षा सीआईएसएफ के पास है। यहाँ विशेष आईडी के साथ ही लोगों काे प्रवेश दिया जाता है।
आखिरकार विश्वास मत में हार के बाद जदएस-कॉन्ग्रेस की कुमारास्वामी सरकार गिर गई है। कई दिनों से चले आ रहे सियासी ड्रामे के पटाक्षेप में हुई यूपीए की इस हार ने एनडीए के लिए रास्ता खोल दिया है। राज्य सरकार गठबंधन के 16 विधायकों के बागी हो बाद से ही डाँवाडोल चल रही थी।
BS Yeddyurappa & other Karnataka BJP MLAs show victory sign in the Assembly, after HD Kumaraswamy led Congress-JD(S) coalition government loses trust vote. pic.twitter.com/hmkGHL151z
105 वोट विश्वास मत के विरुद्ध पड़ने के बाद जहाँ भाजपा ने इसे जनादेश की जीत बताया है, वहीं महबूबा मुफ़्ती ने इसे देश के लोकतंत्र में एक काला दिन करार दिया है। सिद्दारमैया, जो कॉन्ग्रेस की पिछली सरकार के मुख्यमंत्री थे, ने सफ़ाई दी कि चूँकि भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, इसलिए उनकी पार्टी के जदएस के साथ गठबंधन को जनादेश की भावना के खिलाफ नहीं कहा जा सकता।
It’s the victory of people of Karnataka.
It’s the end of an era of corrupt & unholy alliance.
We promise a stable & able governance to the people of Karnataka.
Together we will make Karnataka prosperous again ✌?
.@BJP4Karnataka had got 104 in the assembly elections & governor had given them permission to form the govt but they failed to prove the majority. So our alliance is not against the mandate.
After all the paid for lavish trips to influence Karnataka lawmakers in Mumbai, what can one make of the HD Kumaraswamy led Cong-JD(S) govt collapse? It’s a black day for democracy when a country that prides in being the worlds largest democracy watches an elected govt crumble.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के कई बड़े नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है। इसमें कुछ नेताओं की सुरक्षा में कटौती कर दी गई है। जिन नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है उनमें आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव, बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा, बीजेपी नेता संगीत सोम और राजीव प्रताप रूडी शामिल हैं। अब इनकी सुरक्षा व्यवस्था में CRPF के जवान शामिल नहीं होंगे।
Security cover provided to the following people has been revised by Ministry of Home Affairs: Lalu Prasad Yadav, UP Minister Suresh Rana, BJP MP RP Rudy have been removed from Central list (CRPF protectees). LJP MP Chirag Paswan’s CRPF cover withdrawn&security downgraded to ‘Y.’ pic.twitter.com/JfX5DZ7u5O
ख़बर के अनुसार, केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश राणा, एलपीजे सासंद चिराग पासवान, पूर्व सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है। गृह मंत्रालय द्वारा बडे़ नेताओं की सुरक्षा में की गई कटौती में सियासत तेज़ होने की संभावना है। विपक्ष के जिन नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई हैं उनके विरोध में आने की संभावना है।
बीजेपी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी की भी सुरक्षा घटाई गई है। उनकी सुरक्षा में अब CRPF के जवान नहीं शामिल होंगे और वहीं, चिराग पासवान को अब Y श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी।
गृह मंत्रालय ने इसके अलावा सेंट्रल लिस्ट से कुछ जाने-माने लोगों के नाम भी हटा लिए हैं। इनमें अखबार ‘पंजाब केसरी’ के संपादक एके मिन्हा और ‘आनंद बाजार पत्रिका’ के संपादक अवीक सरकार शामिल हैं। मिन्हा को दिल्ली के सिवा पूरे देश में CRPF कवर मिला हुआ था, जिसे हटाकर उन्हें Z श्रेणी की सुरक्षा दी जाएगी।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में 3 दिनों के अंदर ही ‘जय श्री राम’ के नारे की एक और झूठी घटना सामने आई है। ताजा मामले में, कथित पीड़ित शेख आमेर ने कथित तौर पर एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी बताते हुए कहा कि 4 युवकों ने उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए कहा और उसके मना करने पर उसकी पिटाई की धमकी थी। साथ ही उन लोगों ने उसे वहाँ से जल्दी जाने के लिए कहा। शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद ही आमेर ने अपना बयान से पलट गया। उसने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि उसने अपने समुदाय के सदस्यों के बीच अपना कद बढ़ाने और उससे झगड़ा करने वाले लोगों को सबक सिखाने के लिए मनगढ़ंत कहानी के आधर पर पुलिस से शिकायत की। जिसके बाद मुस्लिम सुमदाय के लोगों ने जमकर हंगामा किया।
तस्वीर साभार: लोकमत
दरअसल, कटकट गेट निवासी शेख आमेर अपने दोस्त आमेर के साथ जोमैटो कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करता है और दोनों 21 जुलाई की रात तकरीबन साढ़े 10 बजे मोटरसाइकिल से आजाद चौक से बजरंग चौक की तरफ जा रहे थे कि तभी वहाँ के एक निजी दवाखाने के सामने से एक कार अचानक से मुड़ गई। इसी बात को लेकर आमेर और उसके दोस्त की कार में बैठे लोगों से मामूली सा विवाद हो गया। जिसके बाद आमेर ने उन लोगों को सबक सिखाने का सोचा और कुछ ही दिन पहले शहर के हुडको कॉर्नर पर घटा घटना को याद करते हुए उसने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में शिकायत कर दी।
सकल में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट
आमेर की शिकायत पर पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, वो इंजीनियरिंग के छात्र हैं। पुलिस ने उनकी कार को भी जब्त कर लिया है और उन पर धारा 153A, धारा 295A और धारा 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, गिरफ्तार किए गए सभी चार लोगों ने ये स्वीकार किया था कि उनका आमेर और उसके दोस्त के साथ मोड़ पर झगड़ा हुआ था, मगर उन्होंने इस बात से इनकार किया था कि उनलोगों ने उन दोनों से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि, औरंगाबाद के मदीना होटल में काम करने वाले इमरान इस्माइल ने शुक्रवार (जुलाई 19, 2019) को 10 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उसने कहा था कि गुरुवार की देर रात जब वो घर जा रहा था तो रास्ते में कुछ लोगों ने उसे रोका और ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर उन लोगों ने इमरान की पिटाई की और जबरदस्ती तीन बार ‘जय श्री राम’ बुलवाया।
हालाँकि, जब पुलिस ने इसकी जाँच की तो पता चला कि घटना को अनावश्यक रूप से सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा था। पुलिस ने सबूतों का हवाला देते हुए कहा था कि इस्माइल के साथ हाथापाई निजी दुश्मनी की वजह से हुई थी और इमरान को बचाने वाले चश्मदीद (गणेश) ने भी यही बात कही थी। गणेश ने भी कहा था कि इमरान के सााथ मारपीट आपसी दुश्मनी की वजह से हुई थी, न कि जय श्री राम न बोलने की वजह से। इससे पहले कम से कम 8 ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ समुदाय विशेष के लोगों ने झूठ बोल कर पुलिस से शिकायत की कि उन्हें जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ कहने को मजबूर किया गया।