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मोदी जी, एक हिन्दू को आपकी बजाय ट्रम्प से मदद की गुहार क्यों करनी पड़ रही है?

तीन बातें

एक. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा ‘एक्ट ईस्ट’ यानी पूर्वी एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में हिंदुस्तान की सक्रियता बढ़ाना है। माना जाता है कि इसके ज़रिए वह नेहरू-काल की गिनी-चुनी ढंग की विरासतों में से एक हिंदुस्तान की ‘सॉफ़्ट पावर’ का न केवल इसके लिए उपजाऊ भूमि पर विस्तार कर रहे हैं, बल्कि इसे एक परिकल्पना से हकीकत में परिवर्तित करने की दिशा में भी यह उनकी प्रयोगशाला है- जहाँ वह चीन के अत्यधिक दबदबे को सीधे-सीधे हस्तक्षेप करने में अनिच्छुक अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की पर्दे के पीछे की मदद से ‘न्यूट्रलाइज’ या संतुलित करते हुए हिंदुस्तान की कथित कूटनीतिक ताकत को कूटनीति की असली ज़मीन पर परखते हैं।

दो. भाजपा के 2014 के घोषणापत्र में एक कथन था, जिसका मजमून यह था कि दुनिया भर के मजहबी/पंथिक आधार पर सताए गए, प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए हिंदुस्तान को उनका ‘प्राकृतिक घर‘ (या शरणस्थल) भाजपा ने माना था। इस घोषणापत्र को बनाने में मोदी की सीधी स्वीकृति से इनकार नहीं किया जा सकता- 2014 में वह न केवल भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, बल्कि चुनाव प्रचार समिति के मुखिया भी। यानी घोषणापत्र में इतनी महत्वपूर्ण बात बिना उनकी सहमति के नहीं लिखी जा सकती थी। इसके अलावा भाजपा के बनाए हुए नागरिकता कानून मसौदे में भी तीन पड़ोसी देशों के 6 मज़हबी अल्पसंख्यकों, जिनमें हिन्दू भी शामिल हैं, को अपने देश में मज़हबी उत्पीड़न का शिकार होने पर नागरिकता देने की बात कही गई है

तीन. मशहूर टीवी सीरीज़ ‘गेम ऑफ़ थ्रोन्स’ का किरदार लॉर्ड वैरिस, जिसे सीरीज़ का हम ‘कौटिल्य’ कह सकते हैं, राजनीतिक शक्ति की प्रकृति के बारे में टिप्पणी करता है, “शक्ति वहाँ होती है, जहाँ लोगों में उसके होने की अवधारणा होती है।” बहुत सपाट शब्दों में, राजनीति में जो लोगों की नज़रों में ताकतवर होता है, असली ताकतवर वही होता है। जिससे लोग मदद माँगें, जिससे लोगों को मदद की आस हो, और जो जितनी मदद करता हुआ दिखे, उसकी ताकत उतनी बढ़ी नज़र आती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण संघ ही है। आज भी मज़हबी उत्पीड़न का शिकार हिन्दू अपने इलाके की पुलिस या नेता की बजाय पहले संघ के अनुषांगिक संगठनों जैसे बजरंग दल, विहिप आदि की राह लेता है। खुद संघ अपनी ‘गुडविल’ बनाने के लिए चेन्नै से लेकर बिहार तक प्राकृतिक आपदाओं में लोगों का सहायक बनता है- यह लगातार हमलावर राज्य मशीनरी के बावजूद उसके बचे रहने के सबसे बड़े कारणों में से एक है।

अब अगर ऊपर कही गई तीनों बातों को एक साथ जोड़ा जाए तो स्वभाविक प्रश्न है कि हिन्दू होने के लिए सताए जाने पर बांग्लादेश की प्रिया साहा ने बगल में हिंदुस्तान की बजाय आधी दुनिया पार बैठे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मदद की गुहार क्यों लगाई? साथ ही यह भी सोचने की ज़रूरत है कि इस परिस्थिति, कि हिंदुस्तान से हिन्दुओं को बचाने की अपील नहीं हो रही है, का हिंदुस्तान की ताकत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

‘हिन्दू होमलैंड’ बनने का मौका

अमेरिका की धौंस का दुनिया के सुनते रहने का इकलौता कारण केवल उसकी धनाढ्यता और तकनीकी श्रेष्ठता ही नहीं है। बेशक इन घटकों का प्रभाव नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन दुनिया द्वारा धौंस चुप होकर सहते रहने का कारण अमेरिका का नैतिक श्रेष्ठता का वह दावा है, जो इस पर आधारित है कि अमेरिका दुनिया में किसी भी स्थान पर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खड़े लोगों के लिए लड़ने को तैयार रहता है, और अगर उस जगह पर उनकी लड़ाई में सहायता नहीं कर सकता तो उन्हें मानवीय आधार पर शरण देने के लिए तो बेशक उद्यत रहता है। यही नीति कई अन्य पश्चिमी देशों की भी है।

हिंदुस्तान में अभी समाज लोकतान्त्रिक और राजनीतिक तौर पर इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि हम अपने नागरिकों को ही जो मर्ज़ी आए, जिसे मर्ज़ी आए, जब मर्ज़ी आए बोलने की आज़ादी दे दें- हिंसा से बचने के लिए कुछ तार्किक प्रतिबंध निकट भविष्य में नहीं हटने वाले। ऐसे में हम फ्री स्पीच या लोकतंत्र के लिए तो खड़े नहीं हो सकते। लेकिन हिन्दू अधिकार, हिन्दू ’cause’ न केवल हमारी नैसर्गिक ज़िम्मेदारी है एक देश, एक समाज के तौर पर, बल्कि करीब 500 साल अपने धर्म पर हमले झेलने और उसके बाद 700 साल से ज़्यादा अपने धर्म से घृणा करने वालों के शासन तले प्रताड़ित होने के चलते इस मुद्दे पर खड़े होने, स्टैंड लेने का हमारे पास अधिकार भी है और मौका भी।

हम ‘हिन्दू होमलैंड’ इज़राइल की तर्ज पर बना सकते हैं, जहाँ हर नागरिक के अधिकार उसकी आस्था को ध्यान में रखे बिना समान होंगे। लेकिन दुनिया भर में प्रताड़ित हिन्दुओं के विषय में यह ध्यान में रखते हुए कि उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं जो उन्हें धार्मिक, नागरिक और राजनीतिक रूप से शरण दे सके, उनके लिए हिंदुस्तान ‘होमलैंड’ का प्रस्ताव दे सकता है। यह कूटनीतिक तौर पर अमेरिका जैसी ‘आदर्श’ स्थिति में तो हमें नहीं पहुँचाएगा, लेकिन किसी भी आदर्श या मूल्य के लिए ठोस स्टैंड न लेने, ठोस कदम न उठाने के ठप्पे से कम-से-कम किसी न किसी मुद्दे या व्यक्ति के लिए स्टैंड लेने वाले तो हम बन ही जाएँगे।

हम अब तक ऐसे हुए क्यों नहीं हैं?

इसके जवाब के लिए संघ और भाजपा को शायद बाकायदा एक ‘आत्मचिंतन शिविर’ लगाने की ज़रूरत है। आज किसी भी स्तर पर भाजपा यह दावा नहीं कर सकती कि उसके पास बहुमत का अभाव है, इसलिए वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती। लोकसभा में अगर वह इस आशय का कानून या संविधान-संशोधन लाए तो पास होने से कोई नहीं रोक सकता, राज्य सभा में वह बहुमत के मुहाने पर खड़ी ही है, राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति उसी की विचारधारा में पगे हुए पूर्व स्वयंसेवक हैं, तीन राज्यों में हुई विधानसभा हार के बावजूद अभी भी अधिकाँश राज्यों में उसकी सरकारें हैं।

नौकरशाही में भ्रष्ट, निकम्मे और अक्षम लोगों की छुट्टी, विशेषज्ञों की बड़े अफसर के तौर पर सीधी नियुक्ति (‘लैटरल एंट्री’) की अपनी नीति, और लाखों लंबित नियुक्तियों के चलते सरकार हिन्दुओं के प्रति दुराग्रह न रखने वाले नौकरशाहों को लाने के लिए कई रूप से स्वतंत्र है। जनता भी मार्क्सवादी-सांस्कृतिक मार्क्सवादी वामपंथ के चरम से ऊबकर ‘राइट विंग’ के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखे हुए है। अगर सच में हिन्दुओं के लिए कुछ करना है, तो इससे स्वर्णिम अवसर शायद नहीं होगा।

सवाल ‘सेक्युलरिज़्म’ का

हिंदुस्तान का सेक्युलरिज़्म ‘पंथनिरपेक्षता’ न होकर मज़हबी अल्पसंख्यकवाद है, यह खुद भाजपा का स्टैंड रहा है। यहाँ तक कि संविधान-सभा के अध्यक्ष डॉ. अंबेडकर ने भी संविधान में सेक्युलर शब्द डाले जाने का विरोध किया था। वैसे भी ‘हिन्दू होमलैंड’ के आधार पर गैर-नागरिकों को नागरिक बनाने या न बनाने की नीति गैर-नागरिकों के प्रति है, और सेक्युलरिज़्म शब्द यह बताता है कि हिंदुस्तान अपने खुद के नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करेगा, कौन सी नीति अपनाएगा। अतः दोनों में तकनीकी रूप से विरोधाभास नहीं है।

अगर भाजपा विशुद्ध ‘राइट विंग’ की बजाय एक कल्याणकारी राज्य (वेलफेयर स्टेट) को अपना आदर्श मानती है, तो भी प्रताड़ित हिन्दुओं को प्रश्रय देने वाले राज्य के तौर पर हिंदुस्तान को दिशा देना उसके भी विरोध में नहीं है। आज ईसाईयों और समुदाय विशेष को मिला कर दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी मज़हब के तौर पर ऐसी विचारधारा का पालन करती है, जिसमें मूर्तिपूजा से बड़ा कोई अपराध शायद है नहीं। दोनों के ही हाथों दुनिया भर में मूर्तिपूजा करने वाले सम्प्रदायों और व्यक्तियों पर अत्याचारों की कहानी भी किसी से छिपी नहीं है- जो आज भी उनके मज़हबी प्रभाव वाले क्षेत्रों में पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में हिन्दू शरणार्थियों को शरण दे हिंदुस्तान वैश्विक मूर्तिपूजक/गैर-इस्लामी, गैर-ईसाई सम्प्रदायों के मानवाधिकार के पक्ष में भी एक सशक्त संदेश देगा। और एक सशक्त मानवाधिकार की पैरोकार आवाज़ के रूप में भारत की ‘सॉफ़्ट पावर’ में इज़ाफ़ा तो खुद-ब-खुद होगा ही।

छापे मारकर मुस्लिमों की छवि धूमिल कर रही NIA: तौहीद जमात

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन तमिलनाडु तौहीद जमात (TNTJ) ने रविवार (जुलाई 21, 2019) को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी एजेंसी पर समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया। इस्लामिक संगठन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर मुस्लिमों के घरों में छापेमारी करके उनकी छवि को धूमिल कर रही है।

तौहीद जमात के तिरुचि इकाई के अध्यक्ष गुलाम दस्तगीर ने तिरुचि में आयोजित एक चिकित्सा शिविर के मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा कि एनआईए ने अपनी छापेमारी के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं, वहादत-ए-इस्लामी के सदस्य एस अब्दुल्ला का कहना है कि आतंक विरोधी ऑपरेशन के नाम पर उनके सदस्यों के घरों और कार्यालयों में लगातार छापेमारी हो रही है।

श्री लंका में ईस्टर के मौके पर नेशनल तौहीद जमात के द्वारा किए गए भयंकर बम बिस्फोट के बाद तमिलनाडु जमात तौहीद का नाम काफी चर्चा में आ गया था। इस विस्फोट से उनका भी नाम जुड़ रहा था। हालाँकि, तमिलनाडु तौहीद जमात के जनरल सेक्रेटरी ई मोहम्मद ने इस घटना सेे किसी तरह के लिंक होने से मना किया था। उन्होंने कहा था कि यह एक गैरराजनीतिक इस्लामी संगठन है, जिसका नेशनल तैहीद जमात से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि, तमिलनाडु तौहीद जमात और श्रीलंका नेशनल तौहीद जमात को एक दूसरे का सहयोगी माना जाता है। इसका नाम आतंकी घटनाओं से जुड़ता रहा है।

गौरतलब है कि, जाँच एजेंसी ने पिछले दिनों राज्य में अंसारुल्लाह आतंकी मामले में कई छापे मारे हैं। नागापट्टिनम से दो आतंकी संदिग्धों को गिरफ्तार करने और आतंकी आरोपों के आधार पर संयुक्त अरब अमीरात से 14 और निर्वासित लोगों को हिरासत में लेने के बाद एक सप्ताह से भी कम समय में छापे पड़े।

देसी गायों के वध पर SC ने जताई गंभीर चिंता: केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस

अब देश भर में देसी गायों की नस्ल को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी पहल हुई है। देसी नस्ल की गाय आदि के वध पर प्रतिबंध लगाने की माँग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा है कि इस दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही मथला चंद्रपति राव द्वारा दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों को गैरकानूनी तरीके से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने और उच्चतम न्यायालय के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट दायर करने के लिए भी निर्देश देने की माँग की है।

याचिकाकर्ता ने देश भर में देसी नस्लों के गायों और दुधारू पशुओं के नस्लों को बचाने के लिए कोर्ट से एक व्यवस्था देने की अपील की है। राष्ट्रीय दुधारू पशु आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व जस्टिस गुमान लाल लोढ़ा द्वारा भारत सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा है कि इस रिपोर्ट में दुधारू गायों और बछड़ों के वध पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। याचिकाकर्ता ने देसी गाय की नस्लों के संवर्धन के लिए, उन्हें बचाने के लिए और इस दिशा में शोध कार्य को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है।

फिलहाल इस मामले पर चार हफ्ते बाद सुनवाई होगी और तभी पता चलेगा कि केंद्र और राज्य सरकार ने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं, क्योंकि जिस तरह से विदेशों में भी शोध हुआ है, उसमें बताया गया है कि देसी गायों की नस्ल के अंदर, उनके गोबर और मूत्र में अद्भुत गुण मौजूद हैं। ये गुण इतने लाभदायक हैं कि अगर इनका संवर्धन किया जाए तो नई पीढ़ी के लिए, विज्ञान के लिए और स्वास्थ्य के लिए बहुत सारे संभावनाओं के दरवाजे खुलेंगे, लेकिन इसमें शोध की आवश्यकता है।

चंद्रयान-2: ‘नेहरू ने चाँद की खोज की… या चाँद ने खुद नेहरू को खोजा’

चंद्रयान को सफलपूर्वक लॉन्च हुए अभी कुछ देर ही हुए हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने भारतीय वैज्ञानिकों की इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपनी पार्टी के दिग्गज नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और मनमोहन सिंह को दे दिया।

कॉन्ग्रेस ने चंद्रयान 2 लॉन्च होते ही ट्वीट किया कि जवाहर लाल नेहरू को याद करने का सही समय है। कॉन्ग्रेस ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए 1962 में पहली बार INCOSPAR के जरिए फंड जुटाने की पहल की थी। यही बाद में इसरो बना। कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में कहा कि चंद्रयान मिशन को साल 2008 में यूपीए कार्यकाल के दौरान डॉक्टर मनमोहन सिंह ने मंजूरी दी थी।

जबकि चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग का क्रेडिट कॉन्ग्रेस द्वारा लेने के बीच हकीकत ये है कि चंद्रयान-2 मिशन अगर किन्हीं वजहों से इतना लेट हुआ तो उसका मुख्य कारण भी कॉन्ग्रेस ही है। इस बात का दावा खुद इसरो चीफ़ जी माधवन नायर ने अपनी बातचीत के दौरान किया था। जब उन्होंने कहा था कि चंद्रयान-2 बहुत समय पहले लॉन्च हो चुका होता, लेकिन यूपीए सरकार के राजनैतिक निर्णयों के कारण ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया। दरअसल, साल 2014 में लोकसभा चुनाव के कारण चंद्रयान के लॉन्च को स्थगित कर दिया गया था, क्योंकि यूपीए सरकार ऐसा चाहती थी। अब रही बात INCOSPAR की, तो उसकी सफलता का अधिकतर क्रेडिट भारतीय स्पेस प्रोग्राम के पिता विक्रम साराभाई को जाता है।

कॉन्ग्रेस के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय यूजर्स उनका जमकर मजाक उड़ा रहे हैं। पुराने समय की तस्वीरे पोस्ट की जा रही है और याद दिलाया जा रहा है कि गाँधी परिवार के राज में मिसाइल का सामान किस तरह साइकिल पर जाता था जबकि नेहरू परिवार एरोप्लेन में सफर करता था।

बाहुबली रॉकेट की छुच्छी में खुद नेहरू ने लगाई आग: Chandrayaan-2 की सफल उड़ान का Exclusive रहस्य

भारत ने आज 22 जुलाई, 2019 को दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV-MK3 से चंद्रयान-2 लॉन्च हो गया। यह एक बड़ी घटना थी। क्योंकि हमारा देश दुनिया का चौथा ऐसा देश बनने जा रहा है, जिसके पास चाँद पर उतरने की तकनीकी क्षमता होगी। लेकिन आज के ही दिन इससे भी बड़ी एक घटना हुई 2:47 पर। मतलब प्रक्षेपण के 4 मिनट के अंदर। देश की सबसे पुरानी पार्टी को नेहरू याद आ गए। नेहरू जो कभी प्रधानमंत्री थे, नेहरू जिन्होंने खुद को भारत रत्न दिया था। क्यों याद आए, क्योंकि जब इसरो के वैज्ञानिक थक-हार चुके थे, रॉकेट उड़ने को तैयार ही नहीं था, तब नेहरू ने ही झुककर सबसे ताकतवर ‘बाहुबली’ रॉकेट GSLV-MK3 की छुच्छी में आग लगाई।

इस अद्भुत घटना के बाद सॉल्ट न्यूज़ द्वारा ट्विटर पर जनमत संग्रह आयोजित करने के बाद जो निष्कर्ष निकला है उसके अनुसार कम लोग ये बात जानते हैं कि आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ही माउंटबेटेन के साथ मिलकर आग का आविष्कार किया था। आज भले ही मोदी जी इसका क्रेडिट ले जाएँ लेकिन सच्चाई हमेशा नेहरू जी के साथ रहा है और हर घटना के 4 मिनट के भीतर वो जग जाहिर हो जाता है।

कुछ लोग यह भी कहेंगे कि मोदी तो नेहरू के समय में थे भी नहीं, लेकिन आज के लोग यह जानते हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है।’ ख़ैर, मजाक अपनी जगह है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मोदी जिस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए चँदा मामा की सैर का श्रेय लेते हुए लहरिया लूटने की सोच रहे हैं, वो तकनीक भी नेहरू जी द्वारा स्थापित (फ़िलहाल गुप्त) राजीव गाँधी टेलीपोर्टेशन अनुसन्धान संस्थान की ही देन है। कॉन्ग्रेस ने इस बात पर भी अपना रोष व्यक्त किया है।

गोदी मीडिया आपको ये बात कभी नहीं बताएगी, लेकिन सत्य यह है कि जवाहरलाल नेहरू के बाद रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी की दादी इंदिरा गाँधी भी इस रॉकेट को लॉन्च करने का प्रयास करने जा रही थी। सॉल्ट न्यूज़ के सूत्रों ने बताया कि इंदिरा गाँधी ने इसलिए भी यह कार्य अपने कार्यकाल में रह जाने दिया, ताकि जब कभी भविष्य के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार राहुल गाँधी मुद्दों की कमी से जूझें, तो वो झट से DRDO और ISRO के अस्तित्व का श्रेय भी गाँधी परिवार को देकर जनता को खुश कर सकें। वरना आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी जी इतनी भी व्यस्त नहीं थीं कि वो एक रॉकेट की बत्ती में आग लगाने का समय न निकाल पातीं।

कॉन्ग्रेस का यह ‘क्रेडिट काल’ कोई आज का नहीं है। कॉन्ग्रेस का यह पंच लाइन है: मैं तुम पर किए अहसान भूल जाऊँ, यह हो नहीं सकता; तुम मेरे ऋण से उबर जाओ, यह मैं होने नहीं दूँगा। तभी 27 मार्च को भी ASAT के सफल मिशन पर हम हिंदुस्तानियों को कॉन्ग्रेस का कर्जा याद दिलाया गया था। तब जो ऐतिहासिक हुआ था, उसके पल-पल की खबर नीचे पढ़िए और कॉन्ग्रेस के सामने शीष झुकाइए। वैसे ट्विटर पर कुछ शरारती लोग देश की सबसे पुरानी पार्टी को गाली दे रहे हैं, लेकिन हम उसे यहाँ नहीं छाप सकते – पत्रकारिता की साख का सवाल है 🙂 आप देखना-पढ़ना चाहते हैं तो ऊपर के ट्वीट को खोलिए और उसके नीचे आई प्रतिक्रियाओं को देख कर मजे लीजिए- आपकी मर्जी!

आइए जानते हैं कि जनमत संग्रह किसे दे रहा है ASAT का ‘क्रेडिट’

Krishna‏ (@Atheist_Krishna) नाम के एक मनचले ट्विटर यूज़र ने कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता के संदेह को दूर करते हुए एक गलत तस्वीर को ट्विटर पर जारी किया जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू को कारगो पैंट पहने हुए किसी मिसाइल को आग लगाते हुए दिखाया गया है। लेकिन उनकी इस झूठी तस्वीर को गाँधी परिवार के जमीन घोटालों का पर्दाफाश करने वाले OpIndia न्यूज़ पोर्टल के CEO राहुल रौशन ने तुरंत पकड़ लिया और इसे वहीं पर फोटोशॉप्ड तस्वीर बता दिया ताकि यह झूठी खबर व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी पर वायरल होकर, लोगों की गुप्त जानकारी वायरल करने वाले रैंडम फैक्ट चेकर्स का काम ना बढ़ा दे। इस ट्वीट पर सॉल्ट न्यूज़ वालों ने लेबर मिनिस्ट्री को पत्र लिखकर उनके रोज़गार पर लात मारने की शिकायत की है।

Atheist_Krishna इस चेतावनी के बाद भी नहीं रुके और उन्होंने एक दूसरी फोटोशॉप्ड तस्वीर ट्विटर पर वायरल कर डाली, जिसमें उन्होंने गठबंधन की भीख माँग रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को उनकी समस्त सेना के साथ अंतरिक्ष भेजते हुए दर्शाया है। इसमें कुछ लोगों की तस्वीरें देखकर लगता है कि वो भारतीय मीडिया गिरोह के कुछ लम्पट पत्रकार हैं। हालाँकि, ये तस्वीर भी फोटोशॉप्ड ही है।

एक अन्य ट्विटर यूज़र @rishibagree ने ISRO की एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए बताया है कि जब ISRO वैज्ञानिक रॉकेट के पार्ट्स को साइकिल पर ढोया करते थे उस वक़्त नेहरू-गाँधी परिवार चार्टेड प्लेन में जन्मदिन मनाया करता था।

जर्नलिस्ट अशोक श्रीवास्तव ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “नेहरूजी का देहांत 1964 में हुआ। भक्त मंडली 55 साल बाद #MissionShakti का श्रेय उन्हें दे रही है। आज की उपलब्धियों का श्रेय नेहरूजी को, तो #कश्मीर में सेना और निर्दोष लोगों के मारे जाने, चीन के विस्तारवाद और सुरक्षा परिषद में मसूद के बच निकलने के ज़िम्मेदार नेहरू जी क्यों नहीं ?”

मैंने कितनी बार उनसे बोलने के लिए मना किया है, उनके साथ अन्याय हो रहा: बॉलीवुड अभिनेता एजाज खान की बेग़म

अभिनेता एजाज खान की पुलिस हिरासत को 14 दिनों तक बढ़ाए जाने के बाद, उनकी पत्नी एंड्रिया उनके समर्थन में सामने आई हैं। एंड्रिया का कहना है कि उनके पति ने कुछ भी गलत नहीं किया। उन्हें जानबूझकर फँसाया जा रहा है। उन्होंने अपने शौहर के लिए न्याय की भी माँग की है।

एजाज की पत्नी एंड्रिया ने कहा कि वो अपने शौहर के लिए न्याय चाहती है। एंड्रिया का कहना है कि उनके पति भारत में होने वाली सभी आपराधिक गतिविधियों के लिए आवाज उठाते हैं और वो सिर्फ अपने मजहब के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदुओं और ईसाइयों के लिए भी आवाज उठा रहे हैं। वो कहती हैं कि उनके पति इस लड़ाई में अकेले हैं और उनके साथ जो किया जा रहा है, वो अन्याय है। लोग ये सोचते ही नहीं हैं कि उनका (एजाज) का भी एक परिवार है। एंड्रिया कहती है, “मैंने कितनी बार उनसे बोलने से मना किया है। उनका परिवार उनके खिलाफ हो गया फिर भी वह पूरे भारत के लिए आवाज उठा रहे हैं। इसलिए भारत में मेरे भाइयों और बहनों, मुझे अपने शौहर के लिए न्याय चाहिए। उन्हें फँसाया जा रहा है।”

गौरतलब है कि, एजाज खान को मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने बुधवार (जुलाई 17, 2019) को सोशल मीडिया ऐप TikTok पर भड़काऊ वीडियो पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया था। पहले वीडियो में एजाज ने हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की बात की थी। उसने तबरेज़ अंसारी की मौत के बदले में हिंसा भड़काने का आह्वान किया था।

वहीं एजाज ने दूसरा वीडियो TikTok ‘सेलिब्रिटी’ के साथ बनाया था। इस वीडियो में वो मुंबई पुलिस का मजाक उड़ाते नजर आए थे। इसमें उनके साथ Team07 का एक सदस्य भी नज़र आया था। डायलॉग में जब पुलिस अफसर का किरदार कुछ अपराधियों को पुलिस की गाड़ी में बैठने को कहता है, तो अपराधियों में से एक पुलिस वाले पर धौंस जमाता है। हालाँकि, एजाज के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया।

एजाज खान के विवादस्पद वीडियो का यह पहला मामला नहीं है। वो सोशल मीडिया पर भड़काऊ और विवादास्पद पोस्ट्स के लिए कुख्यात हैं। इससे पहले भी एजाज ने पायल रोहतगी को एक वीडियो में धमकी दी थी कि एक दिन पूरी दुनिया इस्लाम कबूल कर लेगी। इसके अलावा उन्होंने एक दूसरे वीडियो में 40 करोड़ वैध-अवैध कट्टरपंथियों के सड़क पर उतर कर समूचे देश को बंद कर देने की बात भी कही थी।

वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हुई याचिका, सुनवाई कल

‘वंदे मातरम’ गीत को लेकर समय-समय पर हमने सड़क से लेकर संसद तक में विवाद होते देखे हैं। लेकिन ऐसे में इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है, जिसमें वंदे मातरम को राष्ट्रगान का दर्जा देने की माँग की गई है। साथ ही स्कूलों में इस गान को प्रतिदिन गाए जाने को अनिवार्य बनाने की भी माँग की गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट में दर्ज हुई इस याचिका पर अदालत के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश सी हरिशंकर की बेंच कल मंगलवार को सुनवाई करेगी। इस याचिका को दर्ज कराने वाले शख्स का नाम अश्विनी उपध्याय है। अश्विनी भाजपा के नेता और पेश से वकील हैं।

भाजपा नेता अश्विनी उपध्याय के मुताबिक देश की आजादी में वंदे मातरम का अहम योगदान रहा है। आजादी के दौरान हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों ने वंदे मातरम गीत को गाते हुए आंदोलन में हिस्सा लिया था, लेकिन दुर्भाग्वश जन गण मन को देश में पूरा सम्मान मिला, लेकिन वंदे मातरम को भुला दिया गया।

भाजपा नेता का कहना है कि देश में जन-गण-मन की तरह वंदे मातरम को लेकर कोई नियम नहीं बनाए गए। इसलिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डालकर माँग की है कि इस गीत को राष्ट्रगान घोषित किया जाए। साथ ही इसे गाने के लिए नियम बनाए जाएँ। इसके अलावा देश के सभी बच्चों में देश भक्ति की भावना पैदा करने के लिए प्रतिदिन विद्यालयों में इसे गाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

सोनभद्र हत्याकाण्ड से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, देखे यहाँ

सोनभद्र हत्याकाण्ड से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे हैं। 1 मिनट से कुछ सेकंड तक की लम्बाई के इन वीडियो में घटना के दौरान हुई हिंसा देखी और सुनी दोनों जा सकती है। हालाँकि, इन वीडियो को बनाने वाले की पहचान अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो में गोलियों की आवाज़ें और एक दूसरे पर लाठियाँ लेकर पिल पड़ते गुट साफ देखे जा सकते हैं।

जमीन विवाद में 10 से ज्यादा लोगों की हुई हत्या

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बुधवार, जुलाई 17, 2019 को जमीन को लेकर हुए विवाद में 3 महिलाओं समेत 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी। घोरावल इलाके के उम्भा गाँव में हुई इस घटना में 17 लोग घायल भी हुए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे के अनुसार मामले की जाँच में यह भी निकल कर आया कि इस घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी, जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी। 1955 में कॉन्ग्रेस की सरकार ने सोनभद्र में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के नाम पर जनजाति के लोगों की भूमि को एक पब्लिक ट्रस्ट के नाम कर दिया। वर्ष 1989 में उस ट्रस्ट से जुड़े लोगों के नाम पर वह जमीन कर दी गई। वर्ष 2017 में वह जमीन कुछ लोगों को बेची गई। उन्होंने पूरे मामले से जुड़े नेताओं को दण्ड भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा था।

विपक्षी नेताओं को रोका गया मिलने से

इस बीच घटना के बाद जिले में लागू धारा 144 के चलते विपक्ष के कई बड़े नेताओं को पीड़ितों से मिलने से भी रोक दिया गया। कॉन्ग्रेस महासचिव और लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल प्रभारी रहीं प्रियंका गाँधी रोके जाने पर चुनार गेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गईं। शनिवार को सोनभद्र जाने की कोशिश कर रहे तृणमूल सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने वाराणसी एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। इससे नाराज सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सुनील मंडल, अबीर रंजन बिस्वास और उमा सरेन ने भी हवाई अड्डे पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

‘मेरे छोटे भाई के साथ हलाला कर लो’ – तीन तलाक देने के बाद दोबारा निकाह करने के लिए रखी शर्त

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक शख्स अपनी पत्नी को तीन तलाक देने के बाद दोबारा उसके साथ रहना चाहता है, जिसके लिए वह अपनी पत्नी पर हलाला का दबाव बना रहा है। खबरों के मुताबिक इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच पंचायत में झड़प भी हुई, जिसका बीच-बचाव बिरादरी वालों ने कराया। युवती के परिजनों ने इस घटना की सूचना लिसाड़ी गेट थाने में दी है। उन्होंने लड़के के घरवालों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करवाने की माँग की है।

जानकारी के अनुसार अब्दुल्लापुर निवासी युवती का निकाह 2 साल पहले समर गार्डन के युवक से हुआ था। लेकिन पिछले एक साल से वह अपनी पत्नी को तंग कर रहा था। 2 महीने पहले युवक ने उससे मारपीट की और घर से निकाल दिया। हालाँकि उस दौरान दोनों पक्षों ने समझौता करवाया। लेकिन 7 जुलाई को युवक ने महिला को तीन तलाक दे दिया।

लड़की के परिजनों को इसकी सूचना मिली तो वे आकर उसे अपने साथ ले गए। साथ ही इस घटना की सूचना लिसाड़ी गेट थाने में दी। अब कल यानी रविवार (जुलाई 21, 2019) को युवक अपने ससुराल पहुँचा और महिला से शादी करने की बात कही। जब तक युवती और उसके घरवाले कुछ कह पाते, युवक ने अपने छोटे भाई के साथ अपनी पत्नी के हलाला कराने की शर्त रख दी।

व्यक्ति की बात सुनते ही घरवालों को गुस्सा आ गया और दोनों पक्षों में जमकर हंगामा हुआ। बात पंचायत तक पहुँची, जहाँ दोनों पक्षों में धक्कामुक्की भी हुई। बाद में युवती के परिजनों ने लिसाड़ी गेट थाने में युवक समेत परिवार के 7 लोगों के ख़िलाफ़ तहरीर दी। हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक सीओ दिनेश शुक्ला ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है और मामले की जाँच जारी है।

कनाडाई पायलट को लूटने के आरोपित मेहराज, आसिफ और फरमान को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर कनाडा के एक पायलट को बंधक बनाकर लूटने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त (एयरपोर्ट) संजय भाटिया ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मेहराज सलमानी, आसिफ और फरमान को 20 जुलाई को गिरफ्त में लिया गया। उन्होंने बताया कि तीनों आरोपित उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये घटना 12 और 13 जुलाई की रात की है, जब कनाडाई पायलट मोहम्मद मेंहदी घनज़ानफानी आधी रात को कोलकाता से आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल -1 पर पहुँचे थे। वो यहाँ पर अपनी कंपनी के कैब का इंतजार कर रहे थे। यहाँ से उन्हें होटल जाने के लिए कंपनी की तरफ से कैब उपलब्ध कराई गई थी, जो कि कंपनी के पार्किंग एरिया में खड़ी थी। पहली बार टर्मिनल-1 पर आने की वजह से पायलट को पार्किंग एरिया के रास्ते की जानकारी नहीं थी। वो पार्किंग का रास्ता खोजते हुए मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-2 पर पहुँच गए। वहाँ पर उन्हें एक शख्स मिला। जिसने खुद को टैक्सी ड्राइवर बताया और कहा कि वह भी पार्किंग की ओर जा रहा है। वह उन्हें ₹100 में वहाँ छोड़ देगा। उस शख्स की बातों में आकर वो टैक्सी में बैठ गए।

उस टैक्सी में ड्राइवर के अलावा दो और लोग पहले से ही बैठे थे। पायलट के बैठते ही उनलोगों ने टैक्सी के गेट लॉक कर दिए। इसके बाद उन्होंने उनसे अपनी कीमती चीजें देने के लिए कहा। उनके पास से देशी- विदेशी मुद्रा, एटीएम कार्ड के अलावा उनका कनेडियन वीजा कार्ड भी ले लिया। इसके बाद वह टैक्सी को दिल्ली की सड़कों पर दौड़ाते रहे और एटीएम से 10 बार में ₹1 लाख निकाले। कनाडाई वीजा कार्ड से ₹20 हजार निकाल लिए। बदमाशों ने उनका पर्स भी छीन लिया, जिसमें ₹12 हजार थे। जिसके बाद महिपालपुर फ्लाइओवर के पास टैक्सी से धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया और वहाँ से फरार हो गए।

पुलिस ने बताया कि जब टैक्सी चालक के बारे में पता लगाने की कोशिश की गई तो पता चला कि उसने अपनी टैक्सी के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद टेक्निकल सर्विलेंस के आधार पर तीनों आरोपितों को गिरफ्त में लिया गया। संजय भाटिया ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि तीनों आरोपितों ने दिल्ली कैंट इलाके में कई और डकैतियाँ की हैं और एक डकैती गाजियाबाद के विजयनगर में भी की थी।