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20 दिन में 5 गोल्ड, स्टार एथलीट हिमा दास का स्वर्णिम सफर जारी

भारतीय स्टार एथलीट हिमा दास का स्वर्णिम अभियान जारी है। उन्होंने शनिवार (जुलाई 20, 2019) को एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हिमा ने चेक रिपब्लिक में चल रहे एक इंटरनेशनल इवेंट में 400 मीटर रेस की स्पर्धा में पहला पायदान हासिल किया। इस दौड़ को जीतने के लिए उन्होंने 52.09 सेकंड का समय लिया। महीने भर के भीतर यह हिमा का 5वाँ गोल्ड है। हिमा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर फोटो शेयर कर इसकी जानकारी दी है।

इस स्पर्धा में दूसरे स्थान पर भी भारत की वीके विस्मया रहीं जो हिमा से 53 सेकंड पीछे रहीं। विस्मया ने 52.48 सेकंड में रेस को पूरा किया। वहीं, तीसरे स्थान पर सरिता बेन गायकवाड़ रहीं। जिन्होंने इस रेस को पूरा करने में 53.28 सेकंड का समय लिया। 

बता दें कि, हिमा ने 2 जुलाई को पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर का रेस 23.65 सेकंड में जीतकर पहला गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 7 जुलाई को पोलैंड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस को 23.97 सेकंड में पूरा कर दूसरा गोल्ड अपने नाम किया था। फिर 13 जुलाई को चेक रिपब्लिक में हुई क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स में महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.43 सेकंड में पूरा कर तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही 17 जुलाई को चेक रिपब्लिक में चल रहे टबोर एथलेटिक्स मीट में एक और गोल्ड मेडल अपने नाम कर देश का नाम रौशन किया।


प्रियंका चोपड़ा का अस्थमा सिगरेट से नहीं, केवल दिवाली से उभरता है?

प्रियंका चोपड़ा हर समय लाइमलाइट में रहने का हुनर जानती हैं- जो उनके पेशे में लाज़मी भी है। लेकिन दिक्कत यह है कि उनके पेशे के कई अन्य लोगों की तरह ही सुर्खियाँ बटोरने के लिए अक्सर उनकी बलि का बकरा भी हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति और हिन्दू त्यौहार ही होते हैं। हिन्दुओं के त्यौहार दीपावली पर दमे से उनका दम निकलने लगता है, इतना ज्यादा कि वह चाहतीं हैं कि उनके एक के लिए पूरा शहर (बल्कि उससे भी अच्छा हो कि पूरा देश) दिवाली पर पटाखे चलाना छोड़ दे। लेकिन खुद की ‘सेक्युलर’ शादी में फूटे पटाखों और सिगरेट पीते वक़्त यह दमा उन्हें परेशां नहीं करता।

दमा, जानवर, प्रदूषण या हिन्दूफ़ोबिया?

पिछले साल दिवाली के पहले प्रियंका चोपड़ा का वीडियो आया था- जिसमें वह जानवरों, प्रदूषण, और अपने दमे का हवाला देकर लोगों से दिवाली नहीं मनाने की अपील की थी।

लेकिन इस ‘मार्मिक’ अपील के एक महीने के भीतर उनकी शादी में पटाखों का इस्तेमाल जमकर हुआ। उस समय भी प्रियंका इसे लेकर लोगों के निशाने पर आईं। लेकिन उन्होंने न फैंस से माफ़ी माँगी और न ही इसपर सफाई देना की जरूरत समझी।

सिगरेट भी ‘औरों’ के दमे के लिए हानिकारक?

हाल में प्रियंका की कुछ तस्वीरें वायरल हुईं हैं, जिनमें वह सिगरेट पीती नज़र आ रहीं हैं

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह कैसा अस्थमा है, जो न ‘सेक्युलर’ शादी के पटाखों से होता है, न सिगरेट से होता है- केवल दीवाली के पटाखों से ही इसकी दुश्मनी होती है?

प्रियंका चोपड़ा फ़िलहाल किस ब्राण्ड की एम्बेसडर हैं, पता नहीं (कोई कह रहा है कि असम की हैं, पर मुझे विश्वास नहीं- अगर सच में होतीं तो शायद असम के लिए कुछ करतीं सुनाई पड़तीं), लेकिन ‘ठग लाइफ़’ की बड़ी सही ब्रांड एम्बेसडर होतीं- खुद लोगों को कुछ करने से मना करने के बाद चार बार दौड़कर उसे करने से ज़्यादा ‘ठग लाइफ़’ क्या होगी?

इससे पहले कि आप उनकी ‘माई चॉइस’ का राग अलापें…

प्रियंका चोपड़ा अपनी निजी ज़िंदगी में जो कुछ करें, वह उनका पूरा अधिकार है- उस पर सवाल उठाना गलत होगा। चाहे उन्हें दमा हो या न हो, चाहे वे दमे के लिए अनुलोम-विलोम करें, या दिन में पाँच पैकेट सिगरेट फूँकें, यह उनकी ‘माई चॉइस’ है। लेकिन जब आप अपनी निजी ज़िंदगी को, अपनी बीमारी को खुद न केवल बाजार में, सार्वजनिक जीवन में ले आते हैं, बल्कि उसे सहारा बना कर दूसरे की ज़िंदगी में हस्तक्षेप करने लगते हैं, या किसी और के हस्तक्षेप के पक्ष में खड़े होकर माहौल बनाने लगते हैं, जैसा प्रियंका ने लोगों के दिवाली पर पटाखे चलाने के अधिकार पर रोक के पक्ष में अपने दमे का हवाला दे माहौल बनाते हुए किया, तो आपकी ज़िंदगी का वह पहलू निजी नहीं रह जाता। फिर उस पर बात होगी, बहस होगी, और आपका दोहरापन सौ बार उजागर होगा- चाहे आप ऐसा करने वाले को जितना भी ट्रोल-ट्रोल बुलाएँ।

प्रियंका चोपड़ा एक अभिनेत्री हैं, और इसलिए दोहरी ज़िंदगी, सच और झूठ के बीच झूलना उनके ‘प्रोफेशनल हज़ार्ड’ यानी पेशे से उपजी बीमारियाँ माने जा सकते हैं। लेकिन निजी ज़िंदगी में भी दोहरापन, वह भी केवल हिन्दुओं के त्यौहारों के प्रति, उनके पेशे की बीमारी नहीं, बल्कि सीधा-सपाट हिन्दूफ़ोबिया ही माना जाएगा।

Pak PM इमरान ख़ान की अमेरिका में फजीहत, एयरपोर्ट पर नहीं पहुँचे अधिकारी

आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की उस समय फजीहत हो गई जब एयरपोर्ट पर उनकी आगवानी के लिए अमेरिकी प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुॅंचा। इसको लेकर सोशल मीडिया में उनका खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। अपने कैबिनेट सहयोगी और अधिकारियों के साथ उन्हें मेट्रो में बैठकर होटल जाना पड़ा।

पाक पीएम इमरन ख़ान शनिवार (20 जुलाई 2019) शाम को तीन दिवसीय आधाकारिक यात्रा पर अमेरिका पहुँचे। सोमवार (22 जुलाई 2019) को उनकी मुलाक़ात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में होनी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई के लिए इमरान ख़ान पर दबाव बना सकते हैं।

क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान ख़ान देश के मुखिया होने के बावजूद किसी चार्टड विमान से नहीं, बल्कि कतर एयरवेज की फ्लाइट से अमेरिका पहुँचे थे। इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान का आर्थिक संकट है। ख़बर के अनुसार, अपनी इस अमेरिकी यात्रा के दौरान ख़ान IMF के कार्यवाहक प्रमुख डेविड लिप्टन और विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास से भी मुलाक़ात करेंगे। इसके अलावा पाक पीएम रविवार (21 जुलाई 2019) को वाशिंगटन डीसी में कैपिटल वन एरिना में एक सभा को संबोधित करेंगे।

मंगलवार को वह यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस थिंक-टैंक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। बता दें कि इससे पहले, अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री के तौर पर नवाज़ शरीफ़ ने अमेरिका की आधिकारिक यात्रा की थी।

ख़बर तो यह भी है कि इमरान ख़ान का यह अमेरिकी दौरा बलोच, सिंधी और मोहाजिर समेत पाकिस्तान के कई धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय को रास नहीं आ रहा है। इसके विरोध में वे प्रदर्शन भी कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार पर हमेशा से बलोच और सिंधी समाज के ख़िलाफ़ अत्याचार के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में इंग्लैंड में आयोजित विश्व कप मुक़ाबलों के दौरान भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ स्टेडियम में नारेबाज़ी के साथ-साथ पोस्टर और बैनर लहराए गए थे। इन बैनरों में बलोच का समर्थन किया गया था।

इरफान और घोसे ने बहनोई का गला रेता, कटा सिर लेकर पहुँचे पुलिस स्टेशन

तेलंगाना में शनिवार (जुलाई 20, 2019) को एक स्तब्ध करने वाली घटना घटी। दो भाइयों ने बहस होने पर अपने जीजा सद्दाम की गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों मृतक का कटा हुआ सिर लेकर नामपल्ली पुलिस थाने पहुँचे और आत्मसमर्पण कर दिया। घटना तेलंगाना के नालगोंडा जिले के नामपल्ली की है। आरोपितों ने घटना को सड़क पर भरी दोपहर में अंजाम दिया। आरोपितों के हाथ में मृतक का कटा हुआ सिर देखकर पुलिस भी हैरत में पड़ गई।

पुलिस ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जाँच में पता चला है कि इरफान और घोसे ने सद्दाम की हत्या उस महिला की मौत का बदला लेने के लिए की है जिसे वो अपनी बहन मानते थे। कथित तौर पर आरोपितों की बहन रजिया को सद्दाम कुछ साल पहले हैदराबाद ले गया था। बाद में वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली थी।

नालगोंडा जिले के एएसपी पद्मनाभ रेड्डी ने बताया कि रजिया का सद्दाम के साथ निकाह नहीं हुआ था। कथित तौर पर उसके सद्दाम के साथ संबंध थे। वह उसे हैदराबाद ले गया और वहाँ सरूरनगर के एक घर में रजिया को काम दिलाया। 2017 में रजिया ने सद्दाम के निकाह न करने पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। रजिया की मौत के बाद सद्दाम ने बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने का वादा किया था। लेकिन जब उसने इससे इनकार कर दिया तो आरोपितों ने उसे मौत के घाट उतार दिया।

सद्दाम के इनकार से घोसे और इरफान गुस्से में आ गए। घोसे ने पास में नारियल बेच रहे एक ठेले से चाकू उठा लिया। सद्दाम फिर भी नहीं डरा तो उसने उसकी गर्दन पर ताबड़तोड़ हमले किए। बाद में इरफान ने घुसे के हाथ से चाकू ले लिया और फिर उसने भी सद्दाम पर हमला किया। दोनों तब तक हमला करते रहे, जब तक सद्दाम का सिर धड़ से अलग नहीं हो गया।

तबरेज के नाम पर और कितनी हिंसा! शेखर और बंसल पर चाकू से हमला

चोरी के आरोप में भीड़ की हिंसा का शिकार बने तबरेज अंसारी के नाम पर समूचे देश में हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश हो रही। कहीं तबरेज को शहीद का दर्जा देने की माँग हो रही तो कहीं उसके नाम पर उपद्रव। ISIS के झंडे तक लहराए गए। 

अब तबरेज का वीडियो दिखाकर दो हिन्दुओं को धार्मिक नारे लगाने के लिए मजबूर करने और उनकी पिटाई का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर में छपी ख़बर के अनुसार, रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू फल मंडी के पीछे शेखर राम और बसंत राम को चार स्थानीय लोगों ने पकड़ा और उन्हें धार्मिक नारे लगाने को मजबूर किया। धार्मिक नारे न लगाने पर उन दोनों को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। एक की गर्दन पर चाकू मारा तो दूसरे के हाथ को लहुलूहान कर दिया।

गंभीर रूप से घायल शेखर और बसंत ने अरमोड़ा थाने में एक पर नामज़द और तीन अज्ञात के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे अपने जानवर को ढूँढ़ने हरमू फल मंडी के पीछे गए थे। वहाँ चार लोगों ने उन्हें अचानक पकड़ लिया और उनसे उनका समुदाय पूछा। इसके बाद चारों ने मोबाइल पर उन्हें तबरेज का वीडियो दिखाया और धार्मिक नारे लगाने को बाध्य किया।

शेखर राम और बसंत राम ने धार्मिक नारे लगाने से मना किया तो चारों उन्हें चोर बताने लगे। यह कहते हुए कि दोनों फल मंडी में चोरी करने आए हैं उनके ऊपर चाकू से हमला कर दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

अंजुमन इस्लामिया, रांची के अध्यक्ष इबरार अहमद ने कहा है की इस मामले की गहराई से जाँच होनी चाहिए जिससे दोषियों को कड़ी सज़ा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं में घृणा और अहिंसा बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए सिविल सोसाइटी को आगे आना चाहिए।

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में कोर्ट ने अभिनेता एजाज़ ख़ान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। मुंबई पुलिस की साइबर विंग ने एजाज़ को 17 जुलाई को गिरफ़्तार किया था। दरअसल, ख़ान ने 9 जुलाई 2019 को सोशल मीडिया पर तबरेज से जुड़े दो वीडियो शेयर कर उसकी मौत का बदला लेने की बात कही थी।

जिस हत्याकाण्ड का आज शोक मना रहीं ममता, उसी के ज़िम्मेदार को भेजा राज्य सभा!

21 जुलाई, 1993 को पश्चिम बंगाल पुलिस ने यूथ कॉन्ग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं को गोली मारी थी। उनकी याद में आज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘शहीद दिवस’ मना रही है। इस शोक समारोह में तृणमूल के राज्य सभा सांसद मनीष गुप्ता भी शामिल हैं। उन्हें इस हत्याकाण्ड में जाँच कमीशन ने न केवल कठघरे में खड़े समूह का हिस्सा माना, बल्कि उनके बयानों में भी विरोधाभास पाया था। गुप्ता ममता की पिछली सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

पूरा मामला

1991 के विधान सभा चुनावों में लेफ्ट फ्रंट को एक बार फिर भारी बहुमत से जीत मिली। लेकिन, विपक्ष के अनुसार यह चुनावी धाँधली का परिणाम था। यूथ कॉन्ग्रेस की राज्य इकाई, जिसकी मुखिया उस समय खुद ममता बनर्जी थीं, सड़कों पर उतर कर विरोध-प्रदर्शन कर रही थी। उनकी माँग थी कि चुनाव में फ़ोटो वाले पहचान-पत्र इस्तेमाल हों। कार्यकर्ता जब दर्शन करते हुए लेफ़्ट की सरकार के शक्ति-केंद्र ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की ओर बढ़े, तो एक किलोमीटर पहले ही मेट्रो सिनेमा, मेयो रोड के निकट उनपर हमला हो गया। पुलिस फायरिंग में 13 लोग मारे गए। राइटर्स बिल्डिंग को दूसरी ओर से घेरने के लिए एक दूसरे दल का नेतृत्व कर बीटीएम सारणी रोड की तरफ़ से बढ़ रहीं ममता बनर्जी भी पुलिस के हमले में चोटिल हुईं, और लेफ़्ट के खिलाफ संघर्ष का चेहरा बन गईं।

2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने ओडिशा उच्च न्ययायालय के रिटायर्ड जज सुशांत चटर्जी की एक-सदस्यीय कमीशन बना कर मामले की जाँच सौंपी। इसी से हत्याकाण्ड के समय राज्य के गृह सचिव रहे मनीष गुप्ता की कलई खुलनी शुरू हो गई। हालाँकि चटर्जी कमीशन की जाँच में किसी एक नौकरशाह या नेता के सर फायरिंग का ठीकरा फोड़ने की बजाय पुलिस और प्रशासन की विफलता को जिम्मेदार ठहराया गया था। लेकिन बलि का बकरा न बनाने के बावजूद चटर्जी कमीशन ने मनीष गुप्ता के बयानों में विरोधाभास तो पकड़ा ही था

‘मैंने तो केवल साइन किया’

तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के पीएमओ को जवाब देते हुए मनीष गुप्ता ने ममता बनर्जी के आरोपों को उस समय तथ्यहीन बताया था। ममता बनर्जी का आरोप था कि यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला अकारण था और उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन चटर्जी कमीशन को बयान देते हुए गुप्ता अपनी पिछले बातों से पीछे हट गए और उन्होंने कहा कि गृह सचिव के तौर पर वह तो महज़ सरकार के दावे के हस्ताक्षरकर्ता थे।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि ममता बनर्जी इस मुद्दे पर नैतिक आधार पर कहाँ खड़ी हैं? जिस पार्टी के परचम तले उन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था, उसे वह न केवल छोड़ चुकीं हैं, बल्कि प्रदेश में उसे धूल में मिलाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। जो इंसान न केवल गोलियाँ चलते समय चलाने वाले महकमे का मुखिया अफ़सर था, बल्कि उस घटना के बाद भी पद पर रहते हुए ममता बनर्जी को एक तरह से झूठा कहने वाला भी था, उसे उन्होंने पहले मंत्री पद दिया और बाद में ‘सम्मानितों के सदन’ राज्य सभा में भी पहुँचाया। ऐसे में ममता बनर्जी के ट्वीट्स में खोखलेपन के अलावा कुछ देखा जा सकता है क्या?

बिहार: न पीने को पानी-न खाना, ग्रामीणों ने कहा-मरेंगे तो साथ-साथ

बाढ़ से बेहाल बिहार के दरभंगा जिले के धधिया गॉंव के लोगों के पास न तो पीने का पानी है और न खाना। मवेशियों को चारा तक मयस्सर नहीं है। संकट की इस घड़ी में भी गॉंव वाले एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं और उनकी जिद्द है कि इस संकट से लड़ेंगे भी साथ-साथ और यदि मरने की नौबत आई तो वो भी साथ-साथ।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक बाढ़ के पानी में गॉंव के डूबने के बाद यहॉं के निवासी अपने मवेशियों के साथ एक ही जगह पर रह रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “यदि मौत आई तो हम साथ-साथ मरेंगे। हमने अपने मवेशियों को साड़ी से बनाए एक शेड के नीचे रखा है। यहॉं हालात बेहद खराब हैं और हम सरकारी मदद मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों का घर बाढ़ लील चुका है। हमारे पास न खाना है और न मवेशियों के लिए चारा।”

रिपोर्ट में ग्रामीणों के हवाले से बताया है कि अब तक उन्हें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है। बाढ़ से कम से कम नुकसान हो इसके लिए उन्होंने अपने स्तर से पूरा प्रयास किया, लेकिन गॉंव के चारों तरफ पानी का स्तर बढ़ने से उनके सारे प्रयास बेकार साबित हुए।

एक ग्रामीण ने बताया, “यह बेहद निराशाजनक है कि कोई सरकारी अधिकारी हमारी मदद को नहीं आया। हमारे पास पीने का पानी तक नहीं हैं। हम सब यहॉं एक-दूसरे की मदद करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हमारा राशन, घरेलू सामान, फर्नीचर वगैरह सब पानी में डूब चुके हैं।”

ग्रामीणों के लिए सु​रक्षित जगहों तक पहुॅंचना भी संभव नहीं है, क्योंकि बाढ़ के कारण यातायात सेवाएँ बुरी तरह बाधित हैं। एक अन्य ग्रामीण ने बताया, “यातायात ठप है। इस तरह के हालात में लोग सुरक्षित जगहों तक पहुॅंच सके इसकी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।”

बाढ़ से बिहार में अब तक करीब सौ लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के 12 जिलों के करीब 26 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के खाते में भेजने के लिए 6000 करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।

₹128 करोड़ का बिजली बिल, जबकि घर में है केवल पंखा और बल्ब

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा एक गरीब बुजुर्ग को भरना पड़ रहा है। हापुड़ के चमरी गाँव निवासी शमीम को बिजली विभाग ने 1,28,45,95,444 रुपए का बिजली बिल भेजा है। शमीम ने 2 किलो वाट का घरेलू कनेक्शन ले रखा है।

ब‍िल आने के बाद से शमीम बिजली विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई भी उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं। ब‍िल न भरने पर शमीम के घर का कनेक्शन भी काट दिया गया है। शमीम ने बताया कि कोई भी अधिकारी उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहा। वो कहाँ से इतना पैसा जमा करा पाएँगे। उन्होंने बताया कि शिकायत करने पर अधिकारियों ने कहा कि जब तक वे बिल जमा नहीं करेंगे, उन्हें कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।

शमीम का कहना है कि वे घर में सिर्फ पंखा और लाइट का उपयोग करते हैं? उन्होंने कहा कि उनके घर का बिल मुश्किल से 700 से 800 तक आता है।

वहीं, इस मामले को बिजली विभाग के अधिकारी कोई बड़ी बात नहीं मान रहे हैं। असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल इंजीनियर राम शरन ने कहा, “यह तकनीकी खामी है। यदि वे हमें बिल लाकर देते हैं तो हम सिस्टम की तकनीकी खराबी को सुधारने के बाद उन्हें सही बिल जारी कर देंगे। यह कोई बड़ी बात नहीं है, तकनीकी समस्याएँ होती रहती हैं।”

मध्य प्रदेश: कॉन्ग्रेस राज में थम नहीं रहा मॉब लिंचिंग का सिलसिला, अब भोपाल में युवक को जमकर पीटा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भले मॉब लिंचिंग रोकने के लिए नया कानून लाने की बात कही हो। लेकिन, उनके राज में हिंसा पर उतारू भीड़ को इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा। ताजा घटना में राजधानी भोपाल में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी।

इससे पहले नीमच जिले में एक बुजुर्ग की हत्या भीड़ ने मोर चोरी के शक में कर दी थी। रायसेन में भी इसी तरह की घटना हुई थी। उससे पहले देवास जिले के कन्नौद में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक महिला की पिटाई की थी।

इन घटनाओं को लेकर राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन ने शनिवार (जुलाई 20, 2019) को कहा था कि सरकार मॉब लिंचिंग रोकने के लिए कृत संकल्पित है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं,राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि कमलनाथ राज्य में तबादला उद्योग चल रहा है। इससे कानून-व्यवस्था चौपट हो गई है और अपराध बढ़ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र के बाणगंगा में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक युवक की जमकर पिटाई की। पुलिस के पहुॅंचने पर भी भीड़ का गुस्सा कम नहीं हुआ। हॉलांकि किसी तरह पुलिस युवक को भीड़ से बचाने में कामयाब रही। पूछताछ में पता चला कि भीड़ के हत्थे चढ़ा विशाल गिरी वाहन चोर है। टीटी नगर के थाना प्रभारी संजीव कुमार ने वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है।

वहीं, नीमच में बुजुर्ग की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात को कुकडेश्वर थाना क्षेत्र के लसूरिया आतरी गांव में भीड़ ने मोर की चोरी करने के शक में तीन लोगों को पकड़ा और उनकी पिटाई कर दी। भीड़ की पिटाई से हीरा लाल (58) की मौत अस्पताल ले जाने के दौरान हो गई।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार बकरा चोरी के मामले में नीमच जिले में ही पिछले दिनों भीड़ ने तीन लोगों को मारा था और उनकी मोटर साइकिल जला दी थी। उस मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।

बांग्लादेश: दर्द बयां करने की सजा, हिन्दू महिला पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा

अल्पसंख्यक हिन्दुओं की दुर्दशा बयां करने वाली महिला पर बांग्लादेश में देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा। इस हिन्दू महिला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा था कि उसके देश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह महिला हैं, बांग्लादेश हिन्दू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (एचबीसीयूसी) की आयोजन सचिव प्रिया साहा।

बांग्लादेश के सड़क परिवहन मंत्री एवं सत्तारूढ़ अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर ने महिला को झूठी बताते हुए उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाए जाने की जानकारी दी। साहा ने 19 जनवरी को ह्वाइट हाउस में आयोजित एक बैठक में भाग लिया था।

इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ही साहा बांग्लादेश की बहुसंख्यक आबादी के निशाने पर हैं। वीडियो में वह खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताती दिख रही हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति से कहती हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के 3.7 करोड़ लोग बांग्लादेश से लापता हो गए हैं। उन्होंने इन्हें गैर कानूनी तरीके से जेल में कैद रखने या हत्या किए जाने का शक जताया।

साहा उन पॉंच बांग्लादेशियों और दो रोहिंग्या शरणार्थियों में से एक थीं जिन्हें ढाका के अमेरिकी दूतावास ने व्हाइट हाउस भेजा था। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कादर ने कहा, “महिला झूठी है और जान- बूझकर देशद्रोही टिप्पणी की है। उनका बयान पूरी तरह गलत हैं। इससे कोई भी सहमत नहीं होगा। उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाएगा। इस संबंध में कार्रवाई चल रही है। हमें निश्चित रूप से उनके खिलाफ कदम उठाना चाहिए और हम इस प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं,क्योंकि एक बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद उन्होंने झूठी, जान-बूझकर, देशद्रोही टिप्पणी की।”