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हलाल मांस इस एक वजह से भी हो जाता है ‘हराम’, जानिए क्या है मजहब का ‘कानून’

इन दिनों सोशल मीडिया पर मांसाहारी और शाकाहारी भोजन को लेकर एक विवाद छिड़ा हुआ है। हाल ही में, ऑनलाइन फूड कंपनी ज़ोमैटो (Zomato) का एक विवाद सोशल मीडिया पर सामने आया, जब एक हिन्दू ग्राहक ने ऑडर लेने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि डिलीवरी ब्वॉय दूसरे समुदाय से था। इसके पीछे कारण था कि हिन्दू ग्राहक श्रावण के महीने में ग़ैर-हिन्दू के हाथ से ऑर्डर स्वीकार नहीं करना चाहता था।

एक हिन्दू ग्राहक होने के नाते इस मुद्दे को न सिर्फ़ तूल दिया गया बल्कि ज़ोमैटो ने खाने की डिलीवरी के साथ-साथ ज्ञान देना भी शुरू कर दिया, जिसमें बताया गया कि खाने का कोई मज़हब नहीं होता बल्कि खाना अपने आप में मज़हब होता है।

इसी कड़ी में आइए नज़र डालते हैं हलाल से जुड़ी कुछ अन्य बातों पर, जिनसे पता चलता है कि समुदाय विशेष अपने नियम के तहत गै़र-मुस्लिम के हाथ का मांस हराम तक मानते हैं।

हलाल केवल एक मुस्लिम व्यक्ति ही कर सकता है। इसका मतलब साफ़ है कि हलाल फर्म में गैर-मुस्लिमों को रोज़गार से वंचित रखा जाता है। इसके अलावा कुछ और भी शर्तें हैं, जिन्हें अवश्य पूरा किया जाना चाहिए। जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यह हलाल पूरी तरह से एक इस्लामी प्रथा है। भारत में हलाल के एक प्रमाणीकरण और प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर दिशानिर्देश उपलब्ध हैं जो यह स्पष्ट करता है कि पशु वध प्रक्रिया (हलाल) के किसी भी हिस्से में गैर-मुस्लिम कर्मचारियों को रोज़गार नहीं दिया जा सकता है।

पूरे दस्तावेज़ में इस्लामी पशु वध के दिशानिर्देशों को सूचीबद्ध किया गया है, इसमें शामिल कर्मचारियों के धर्म का उल्लेख करने के लिए ध्यान रखा गया है। यह स्पष्ट करता है कि केवल समुदाय विशेष के कर्मचारियों को ही हलाल के हर चरण में भाग लेने की अनुमति है। यहाँ तक ​​कि मांस का लेबल लगाने का काम भी मजहब के ही लोग कर सकते हैं।

Source: Halal India

यूरोपीय संघ के हलाल प्रमाणन विभाग ने यह और भी स्पष्ट कर दिया है कि हलाल फ़र्म में रोज़गार के अवसर विशेष रूप से इस्लाम के अनुयायियों के लिए उपलब्ध होंगे। इसमें कहा गया है, ”पशु वध एक वयस्क मुस्लिम द्वारा किया जाना चाहिए। एक ग़ैर-मुस्लिम द्वारा मारा गया जानवर हलाल नहीं कहलाएगा।” इसमें आगे कहा गया है, “जानवर का वध करते समय अल्लाह का नाम (उल्लेखित) लिया जाना चाहिए: बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर यानी (अल्लाह के नाम पर; अल्लाह सबसे महान है)। यदि पशु का वध करते समय किसी दूसरे का नाम (अर्थात जिसके लिए पशु की बलि दी जा रही हो) अल्लाह का नाम नहीं लिया जाता है, तो वो मांस हराम यानी, ‘ग़ैर-क़ानूनी’ हो जाता है।

Department of Halal Certification EU

इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि जब कोई व्यक्ति माँग करता है कि उसे केवल हलाल मांस परोसा जाए, तो वो शख़्स न केवल आहार वरीयता का प्रयोग कर रहा है, बल्कि वो यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि उस जानवर का वध करने की प्रक्रिया से लेकर उसके लेबल लगाने तक में समुदाय विशेष का हाथ है या नहीं?

इसके अलावा, समुदाय विशेष को अपने धर्म ग्रंथों द्वारा ग़ैर-हलाल भोजन का सेवन करने से रोका गया है। इस प्रकार, जब एक मुस्लिम विशेष रूप से हलाल मांस की माँग करता है, तो ऐसे में वह साफ़ तौर पर ऐसी सेवा की माँग कर रहा होता है, जो केवल मजहब के लोगों द्वारा दी जा सकती हो। बेहद साफ़ है कि एक समुदाय विशेष का शख्स अपनी धार्मिक पहचान के कारण एक ग़ैर-मुस्लिम से सेवा लेने से इनकार करता है।

हलाल प्रमाणन विभाग भी पशु वध (Slaughtering) के इस्लामी तरीके के बारे में दिशानिर्देश देता है। इसमें कहा गया है कि जानवर का क़त्ल तेज़ चाकू का इस्तेमाल कर सिर्फ़ एक झटके में किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि विंडपाइप (गला), फूड-ट्रैक्ट (ग्रासनली) और दो गले की नसों को एक ही झटके में काट देना चाहिए। ध्यान रखा जाना चाहिए कि सिर अलग न होने पाए और रीढ़ की हड्डी को भी न काटें। नियम तो यह भी कहते हैं कि एक मशीन द्वारा वध किया गया मांस हलाल की श्रेणी में नहीं आता, जानवर का क़त्ल एक समुदाय विशेष के व्यक्ति द्वारा ही होना चाहिए।

यह एक संपूर्ण उद्योग है जहाँ कुछ क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर गैर-मुस्लिमों के लिए पूरी तरह से बंद और प्रतिबंधित हैं। यह न केवल हिंदू धर्म के लोगों, बल्कि ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म और अन्य लोगों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया है।

बहुत से लोग यह कहेंगे कि शाकाहारी भोजन की तरह ही हलाल भोजन की माँग करना अपनी-अपनी पसंद की बात है। लेकिन यह पूरी तरह से ग़लत है। जबकि लोग अपनी पसंद से शाकाहारी बन जाते हैं, समुदाय विशेष के लोगों के पास इस संदर्भ में कोई विकल्प नहीं है। इस्लामी नियम उन्हें हराम या ग़ैर-हलाल भोजन का सेवन करने से मना करता है, उन्हें केवल हलाल भोजन का सेवन ही करना होता है।

हलाल के नियम क़ुरान से हदीस और सुन्नत में निहित हैं और इस्लाम के अनुयायियों को इन नियमों का पालन करना पड़ता है। जैसे अधिकांश हिंदुओं के लिए गोमांस नहीं खाना केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं है। एक समुदाय विशेष का व्यक्ति जो सूअर का मांस खाने से इनकार करता है या किसी ग़ैर-मुस्लिम द्वारा मारे गए जानवर का मांस, मात्र पसंद का मामला नहीं है, दोनों ही मामलों में मांस का सेवन करने से धर्म उन्हें रोकता है।

रेप पीड़िता के चाचा को तत्काल रायबरेली से तिहाड़ जेल लाया जाए: उन्नाव मामले पर SC का आदेश

उन्नाव रेप केस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (जुलाई 2, 2019) को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा के लिहाज से तत्काल पीड़िता के चाचा को रायबरेली की जेल से दिल्ली की जेल में स्थानांतरित किया जाए। जबकि इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पीड़िता के ट्रांसफर पर कोई आदेश नहीं दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पीड़िता का इलाज अभी लखनऊ में ही होने दिया जाए। अगर आगे जरूरत पड़ेगी तो पीड़िता की तरफ़ से रजिस्ट्री आकर ट्रांसफर के लिए कहा जा सकता है। बता दें कि पीड़िता की माँ ने भी सर्वोच्च न्यायालय से अपनी बेटी का उपचार लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में ही जारी रहने देने की गुहार लगाई थी, जिसके मद्देनजर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

कोर्ट ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया से पीड़िता की पहचान छिपाने के लिए कहा है। कोर्ट का आदेश है कि उन्नाव केस में रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया इस बात का ध्यान रखे कि पीड़िता की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर न हो। इस मामले के मद्देनजर अगली सुनवाई सोमवार (अगस्त 5, 2019) को होगी।

शुक्रवार को हुई इस सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायलय को ये जानकारी दी कि उन्होंने 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा रेप पीड़िता को सौंप दिया है। मुआवजे की इस रकम का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को एक दिन पहले ही दिए थे। साथ ही सरकार ने ये भी कहा है कि उन्हें पीड़िता के चाचा को रायबरेली से तिहाड़ भेजने को लेकर कोई आपत्ति नहीं है।

‘दानवी ताकतों’ से निबटने के लिए ‘जय श्री राम’ बोलने की ज्यादा जरूरत: DGP जैकब थॉमस

केरल के थ्रिसुर में रामकथा कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुँचे डीजीपी (निलंबित) जैकब थॉमस ने गुरुवार (अगस्त 1, 2019) को लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यही वो समय है, जब हमें उससे भी अधिक तीव्रता से जय श्री राम का जप करना है, जितनी तीव्रता से हम अभी तक करते आए हैं।

उनके मुताबिक इन दिनों दानवी ताकतें बहुत ज्यादा हो गई हैं, इसलिए हमें जय श्री राम का नारा लगाने की और ज्यादा जरूरत है। उन्होंने इस मौके पर बातचीत के दौरान राम भगवान को सच्चाई, नैतिकता और न्याय का प्रतीक बताया।

उन्होंने केरल के अट्टापदी इलाके में एक आदिवासी युवक मधु और पलक्कड़ जिले में राजनीति से जुड़े एक कार्यकर्ता की मौत का हवाला देते हुए कहा,”आज उन मूल्यों को अपनाने और बढ़ाने की जरूरत है, जिनका प्रतिनिधित्व राम किया करते थे।”

निलंबित डीजीपी ने इस इस दौरान लोगों को जय श्री राम बोलने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उन्होंने कहा, “हम एक ऐसा देश नहीं बन सकते, जहाँ जय श्री राम का नारा लगाने पर पाबंदी हो। यह वो समय है, जब हमें जय श्री राम का नारा लगाने की और ज्यादा जरूरत है।” इस दौरान थॉमस ने अपनी बात को ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ खत्म किया।

गौरतलब है कि साल 2017 में जैकब थॉमस द्वारा ओखी चक्रवात पर सवाल उठाए जाने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। उन पर भ्रष्टाचार में शामिल होने के भी आरोप लगाए गए थे। जबकि अपने सस्पेंशन पर थॉमस का कहना था कि ये ऑल इंडिया सर्विस रूल्स के नियमों के ख़िलाफ़ है। उन्होंने इसके खिलाफ याचिका भी दाखिल की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कैट की बेंच ने 29 जुलाई 2019 को केरल सरकार को निर्देश दिए कि जैकब थॉमस को डीजीपी के बराबर रैंक पर नियुक्ति दी जाए।



J&K: आतंकियों द्वारा सेना की गाड़ी पर IED से हमला: मुठभेड़ में 2 जवान घायल, 1 वीरगति को प्राप्त

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले में लगातार दूसरे दिन सुरक्षाबल और आतंकवादियों के बीच मुठभे़ड़ जारी है। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबल का एक जवान वीरगति को प्राप्त हो चुका है, जबकि 2 के घायल होने की खबर आ रही है।

जानाकारी के मुताबिक सेना की 34RR, SOG और CRPF की संयुक्त टीम शोपियाँ के पंडुशन इलाके को घेरकर तलाशी अभियान चला रही है। इसमें अभी तक 2-3 आतंकियों को घेरा जा चुका है।

इसके अलावा दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ में भी 55 राष्ट्रीय राइफल (आरआर) की एक गाड़ी को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने की खबर है।

खबरों के मुताबिक आतंकियों ने सेना की एक गाड़ी पर एक शक्तिशाली आईईडी (IED) से हमला किया है। लेकिन राहत की बात ये है कि घटना में सुरक्षाबल का कोई जवान घायल या हताहत नहीं हुआ, हालाँकि इस हमले से गाड़ी को थोड़ी क्षति पहुँची है।

बता दें कि एक ओर जहाँ शोपियाँ की मुठभेड़ में गुरुवार को सुरक्षाबलों द्वारा एक आतंकी को मार गिराया जा चुका है, वहीं बांदोपोरा जिले के गुरेज़ सेक्टर में LoC के पास घुसपैठ कर रहे 3 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया है।

इसके अलावा कुछ दिनों पहले सुरक्षाबल ने पुलवामा अटैक मे शामिल रहे जैश कमांडर फयास पंजू और उसके साथी शानू शौकत को एंकाउंटर के दौरान मार गिराया था। जिसके बाद सेना ने अपने ट्वीट से ‘लीडरलेस जैश’ का दावा करते हुए जानकारी साझा की थी।

कलावा पहन ख़ालिद ने 14 साल की हिन्दू लड़की को प्रेम में फँसाया: ‘4 बार रेप किया, वीडियो भी बनाया’

उत्तर प्रदेश के बरेली में 14 साल की दलित हिन्दू लड़की को मुस्लिम युवक द्वारा प्रेमजाल में फँसाने, बलात्कार करने और उसका अश्लील वीडियो बनाकर नाबालिग को ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। इस संदर्भ में पीड़िता ने ख़ालिद नाम के शख़्स के ख़िलाफ़ बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र में मामला दर्ज करवाया है। एसपी सिटी अभिनंदन सिंह के मुताबिक़ ख़ालिद के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा-376, 363, 323, पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है और इसकी जाँच शुरू कर दी गई है। फ़िलहाल, आरोपित फ़रार है। 

एसपी सिटी अभिनंदन सिंह

पीड़िता ने बताया कि वो ब्यूटी पार्लर में नौकरी करती है और रोज ऑटो से आती-जाती है। इस दौरान उसकी मुलाक़ात ऑटो चालक से हुई, जिसने उसे अपना नाम अमन बताया। पीड़िता के मुताबिक, अमन ने ख़ुद को हिन्दू बताया और वो उसके साथ कई बार मंदिर भी गया। ख़ुद को हिन्दू बताने के लिए उसने अपने हाथ में कलावा बाँधा हुआ था और कड़ा भी पहन रखा था। ख़ालिद ने नाबालिग को अपने प्रेमजाल में फँसाकर उससे दोस्ती बढ़ाई। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया और उसका अश्लील वीडियो भी बनाया।

पीड़िता ने बताया कि एक दिन अचानक पता चला कि वो हिन्दू नहीं है बल्कि मुस्लिम है और उसका नाम अमन नहीं बल्कि ख़ालिद है। इसके बाद पीड़िता ने उससे मिलना-जुलना बंद कर दिया। ऐसा होने पर ख़ालिद ने उसे डराया-धमकाया और पीटा भी। साथ ही अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी भी दी।

पीड़िता की माँ का कहना है कि उसकी बेटी को ख़ालिद ने ख़ुद को हिन्दू बताकर फँसा लिया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। दुष्कर्म का अश्लील वीडियो बनाने की बात भी उन्होंने कही। पीड़िता की माँ आरोपित के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई चाहती हैं, जिससे उसे कड़ी सज़ा मिल सके।

ख़बर के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि 4 अगस्त को आरोपित की शादी होने वाली है, इसलिए वो चाहती है कि ख़ालिद को जल्द पकड़कर उसे सज़ा दी जाए जिससे वो और किसी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद न कर सके।

घटना की सूचना जब हिन्दू संगठन को मिली तो वो ही पीड़िता को बारादरी थाने लेकर गए। वहाँ पहले तो FIR लिखने में हिन्दू संगठन के नेताओं और पुलिस में कहासुनी हो गई, लेकिन बाद में FIR दर्ज की गई। हिन्दू संगठन के नेताओं का कहना है कि मुस्लिम लड़के हाथों में कलावा बाँधे कॉलेज के आसपास घूमते हैं और हिन्दू लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फँसाकर लव जिहाद करते हैं। बरेली में ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इसलिए पुलिस को इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए और दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में BJP कार्यालय में तोड़फोड़ और बमबाजी: छठी क्लास के दो छात्र हुए घायल, दहशत में लोग

पश्चिम बंगाल में बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। गुरुवार (अगस्त 1, 2019) को एक बार फिर राजनैतिक संघर्ष देखने को मिला और इसका शिकार छठी कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्र हुए, जो कि फिलहाल कूचबिहार सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती हैं। कूचबिहार-1 ब्लॉक के चांदामारी इलाके में स्थित भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर तोड़फोड़ और बमबाजी की गई। इस दौरान ट्यूशन पढ़कर घर लौट रहे दो छात्र इसकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।

दरअसल, सूबे के चांदामारी ब्लॉक स्थित पार्टी कार्यालय को लेकर सत्ताधारी टीएमसी और भाजपा के बीच काफी समय से टकराव की स्थिति है। गुरुवार को हुए इस हमले के लिए बीजेपी ने टीएमसी के ऊपर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गुरुवार की सुबह टीएमसी के कुछ लोग बाजार में पहुँचे और पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ और बमबाजी की। इस घटना से लोगों में दहशत फैल गई। काफी देर के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया।

चांदामारी के स्थानीय भाजपा नेता परेशचंद्र राय का कहना है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुंडा वाहिनी ने अचानक से बाजार में आकर पार्टी ऑफिस तोड़ दिया। पुलिस को खबर देने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इलाके को अशांत करके रखा है। कूचबिहार जिला की भाजपा अध्यक्ष मालती राभा ने भी टीएमसी पर इलाके में आतंक फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस की तरफ से जल्द ही इन पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो मजबूरन उनकी पार्टी को बड़े आंदोलन पर उतरना होगा।

वहीं, उत्तर बंगाल विकास मंत्री और टीएमसी नेता रवीन्द्रनाथ घोष का कहना है कि उनकी पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उनकी पार्टी पर गलत आरोप लगाया गया है। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर लोकसभा चुनाव के बाद से ही इलाके में शांति भंग करने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है और इस सियासी हिंसा की अब तक कई भाजपा कार्यकर्ता भेंट चढ़ चुके हैं। बीते दिनों भाजपा कार्यकर्ता काशीनाथ घोष का शव हुगली के गोघाट के नहर से बरामद किया गया था। भाजपा ने सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर उनकी हत्या का आरोप लगाया था।

नूरबानो ने कहा- ताश मत खेलो, पति मोहम्मद सुंदरलाल ने कहा- तलाक, तलाक तलाक… और फिर मिली लाश

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले से तीन तलाक और हत्या का एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक यहाँ रायगंज ब्लॉक की गौरी ग्राम पंचायत में 28 वर्षीय नूर बानो को उसके पति मोहम्मद सुंदरलाल ने बुधवार (जुलाई 31, 2019) को तीन तलाक बोला और गुरुवार (अगस्त 1, 2019) की सुबह महिला की लाश झाड़ियों में पड़ी मिली।

नूरबानो की मौत के बाद उसके घरवालों ने मोहम्मद सुंदरलाल पर आरोप लगाया है कि उसने ताश खेलने का विरोध करने पर पहले नूर बानो को तीन तलाक दिया और बाद में फाँसी लगाकर उसे मार डाला। महिला के घरवालों का कहना है कि इस पूरी घटना को अंजाम देने में महिला के सास-ससुर ने भी उसके पति का पूरा सहयोग किया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। महिला की लाश घर से कुछ दूरी झाड़ियों में पाई गई है। घटना से इलाके में सनसनी है। महिला के ससुरालवाले और उसका पति फिलहाल फरार चल रहे हैं, पुलिस उनकी छानबीन में लगी है।

मीडिया खबरों की मानें तो इटाहार थाने के डामडोलिया गाँव की रहने वाली नूरबानो का निकाह 4 साल पहले रायगंज के गौरी ग्राम पंचायत के दक्षिण बिष्णुपुर गाँव निवासी मोहम्मद सुंदरलाल से हुआ था।

मो. सुंदरलाल की जुए खेलने की आदत को लेकर हमेशा पति-पत्नी में झगड़ा होता रहता था। जिसके चलते वह नूरबानो से मारपीट भी करता था। जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे नूरबानो को हर दिन तरह-तरह की प्रताड़नाओं से गुजरना पड़ता था।

जानकारी के अनुसार मो. सुंदरलाल एक बार उसे पहले ही तीन तलाक दे चुका था, जिसकी जानकारी नूर ने अपने माता-पिता को भी दी थी। उसने कई बार अपने घर पर फोन करके घरवालों बताया था कि उसका पति और ससुराल वाले उसे मारने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में गुरुवार की सुबह जब बानो के रिश्तेदार उसके घर पहुँचे तो वहाँ कोई नहीं था। ढूँढने पर नूर की लाश झाड़ियों में मिली। पड़ोसियों ने बताया कि उनके पति और उनके बीच रोजाना लड़ाई होती थी। इस दौरान उन्हें पिटाई की आवाज़ें भी आती थीं। पड़ोसी बताते हैं कि उन्हें पता लगा था कि पति ने नूर को तीन तलाक दे दिया है।

28000 अतिरिक्त जवानों की J&K में तैनाती, आर्मी-IAF हाई ऑपरेशनल अलर्ट मोड में: स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी

जम्मू-कश्मीर घाटी में सुरक्षाबल के 28000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जा रही है। जानकारी के मुताबिक इन सुरक्षाबलों को शहर के अतिसंवेदनशील इलाकों तथा घाटी की अन्य जगहों पर तैनात किया जा रहा है। इनमें अधिकतर सीआरपीएफ कर्मी हैं।

शहर के सभी प्रवेश और बाहर निकलने के रास्तों को केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों को सौंप दिए जाने की खबर सामने आ रही है। कहा जा रहा है स्थानीय पुलिस की महज प्रतीकात्मक उपस्थिति है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गुरुवार (अगस्त 1, 2019) को हुई इस तैनाती का कोई कारण नहीं बताया गया है जबकि कुछ का कहना है कि सुरक्षाबलों की ये तैनाती सरकार के निर्णय पर आने वाले ‘संभावित विरोध’ के ख़िलाफ़ की गई है। फोर्स को यहाँ हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इस दौरान कुछ छिटपुट धर्मस्थलों से सुरक्षा हटा ली गई है, क्योंकि खूफिया जानकारी मिली है कि विदेशी आतंकवादी वहाँ पुलिस कर्मियों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।

राज्य में शिक्षण संस्थानों में पहले ही गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया गया था लेकिन बृहस्पतिवार को बताया गया कि स्कूल-कॉलेज 10 दिन तक और बंद रहेंगे। इस दौरान अमरनाथ के कुछ लंगरों को भी बंद करवा दिया गया है।

10,000 सुरक्षाबलों की तैनाती के बाद बृहस्पतिवार को सेना की 280 कंपनियों की खबर सुनकर स्थानीय कुछ भी अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं। मीडिया खबरों की मुताबिक वहाँ स्थानीय बहुत घबराए हुए हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर जरूरी सामान खरीदना शुरू कर दिया है।

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर में 10,000 अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला लिया था, क्योंकि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को जवानों पर बड़े हमले की साजिश रचे जाने का इनपुट मिले थे। जिसके मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी ग्रिड के अधिकारियों के साथ बैठक कर घाटी में सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा भी लिया था। इसी इनपुट के आधार पर सरकार ने एहतियातन अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला किया है और खुद डोवाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

कश्मीर के मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय वायु सेना और आर्मी को हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर रखा गया है। CRPF और पारा-मिलिटरी की तुरंत तैनाती के लिए वायुसेना के C-17 हेवी लिफ्ट प्लेन को भी ऑपरेशनल मोड में रखने का आदेश है।

आज ही के दिन की थी आइंस्टीन ने एक पत्र लिखकर ऐसी गलती, जिसका उन्हें मौत तक अफ़सोस रहा

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम को न जानता हो। लेकिन एक बात, जिससे हर कोई शायद ही परिचित हो, वो ये है कि आइंस्टीन ने भी अपने जीवन में कुछ गलतियाँ की थीं। हालाँकि, गलतियाँ करना इस बात का प्रमाण हैं कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी एक ‘मानव’ ही थे। क्या आप जानते हैं कि जर्मन मूल के आइंस्टीन ने जर्मनी के ही खिलाफ अमेरिका को आगाह किया था? लेकिन ऐसा करने के पीछे उनके पास पर्याप्त तर्क और कारण थे।

अल्बर्ट आइंस्टीन (जर्मन उच्चारण आइनश्टाइन) का जन्म, मार्च 14, 1879 को तत्कालीन जर्मन साम्राज्य के उल्म शहर में रहने वाले एक यहूदी परिवार में हुआ था। जर्मनी के अलावा वे उसके पड़ोसी देशों, स्विट्ज़रलैंड और ऑस्ट्रिया में भी वहाँ के नागरिक बन कर रहे। वर्ष 1914 से 1932 तक बर्लिन में रहने के दौरान हिटलर की यहूदियों के प्रति घृणा को समय रहते भाँप कर आइंस्टीन अमेरिका चले गए थे।

इस बीच जर्मनी ने आइंस्टीन की लिखी तमाम पुस्तकों की होली जलाई और ‘जर्मन राष्ट्र के शत्रुओं’ की सूची बनाते हुए आइंस्टीन को मारने वाले के नाम पर इनाम भी रखा। तमाम शोध और बौद्धिक रचनाओं के बीच अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम को जिस एक चीज़ ने अमर बना दिया, वह था उनका सापेक्षता का सिद्धांत यानी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी (The theory of relativity)।

यूँ तो आइंस्टीन के अपने पुत्र हांस अल्बर्ट और बहन माया, को ईश्वर-धर्म से संबंधित लिखे गए पत्र भी खूब चर्चा का विषय रहते हैं। लेकिन, इन सबके साथ ही अल्बर्ट आइंस्टीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन रूज़वेल्ट के नाम भी एक खत लिखा था।

दरअसल, दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने से कुछ ही दिन पहले, अगस्त 1939 में, आइंस्टीन ने अमेरिका में रह रहे हंगेरियाई परमाणु वैज्ञानिक लेओ ज़िलार्द के कहने में आ कर एक पत्र पर दस्तखत कर दिए थे। यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन रूज़वेल्ट के नाम लिखा गया था। इसमें रूज़वेल्ट से कहा गया था कि नाज़ी जर्मनी एक बहुत ही विनाशकारी ‘नए प्रकार का बम’ बना रहा है या संभवतः बना चुका है। इसमें उन्होंने रूजवेल्ट को परमाणु बम विकसित करने की सलाह दी थी और साथ ही उन्होंने रूजवेल्ट को आगाह किया था कि शायद जर्मनी न्यूक्लियर बम विकसित कर रहा है। 2 अगस्त, 1939 को लिखी गई यह चिट्ठी प्रेजिडेंट रूजवेल्ट को 11 अक्टूबर को मिली थी।

अमेरिकी गुप्तचर सूचनाएँ भी कुछ इसी प्रकार की थीं, इसलिए अमेरिकी परमाणु बम बनाने की ‘मैनहटन परियोजना’ को हरी झंडी दिखा दी गई। अमेरिका के पहले दोनों बम 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर पर गिरे।

रूजवेल्ट को लिखे गए इस पत्र के 6 साल बाद 6 और 9 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था। इतिहास और आइंस्टीन दोनों को यह अफ़सोस हमेशा रहा कि इस महान त्रासदी की नींव पर कुछ Best Brains के भी हस्ताक्षर थे।

इस पत्र को अमेरिका में नाभिकीय हथियारों की दौड़ की शुरुआत का महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। यह पत्र लियो स्ज़िलार्ड ने आइंस्टीन की तरफ़ से लिखा था। वैज्ञानिक लियो स्ज़िलार्ड ने नाभिकीय श्रंखला अभिक्रिया की खोज की थी। हालाँकि आइंस्टीन ने इस पत्र के सभी परिणामों की पूरी ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी। आइंस्टीन ने इस पत्र को अपने जीवन की सबसे बड़ी ग़लती माना था।

इस घटना से आइंस्टीन को काफ़ी आघात पहुँचा। इस घटना के बारे में उन्होंने अपने एक मित्र को पत्र में लिखा था। अपने एक पुराने मित्र लाइनस पॉलिंग को 16 नवंबर 1954 को लिखे अपने एक पत्र में खेद प्रकट करते हुए आइंस्टीन ने लिखा, “मैं अपने जीवन में तब एक बड़ी ग़लती कर बैठा, जब मैंने राष्ट्रपति रूज़वेल्ट को परमाणु बम बनाने की सलाह देने वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर दिए। हालाँकि, इसके पीछे यह औचित्य भी था कि जर्मन एक न एक दिन उसे बनाते।”

पढ़िए, आइंस्टीन द्वारा लिखा गया वो पत्र–

(यह अनुवाद jankipul.com से लिया गया है)

अल्बर्ट आइन्स्टीन
ओल्ड ग्रोव रोड
नासाऊ प्वाइन्ट
पेकोनिक,
लोन्ग आइस-लैन्ड
२ अगस्त, १९३९

सेवा में,

फ़्रेंकलिन डी. रूज़्वेल्ट
राष्ट्रपति, संयुक्त राज्य अमेरिका,
ह्वाइट हाउस
वाशिन्गटन, डी.सी.

श्रीमान,
ए. फ़र्मी और एल. स्ज़िलार्ड के द्वारा किया गया कुछ नवीनतमकार्य, जो कि मुझे पान्डुलिपि के रूप में प्रेषित किया गया है, मुझे आशान्वित करता है, कि यूरेनियम तत्व, निकट भविष्य में ऊर्ज़ा के नवीनतम और महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में परिवर्तित किया जा सकेगा। इस बीच उभरकर सामने आई परिस्थितियों के कुछ पहलू, आँखें खुली रखने और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया की पुकार करते प्रतीत होते हैं। अत: मुझे विश्वास है, कि निम्नलिखित तथ्यों और सिफ़ारिशों की ओर आपका ध्यान खींचना मेरा कर्तव्य है।
पिछ्ले चार महीनों में, फ़्राँस के जुलियट और अमेरिका के फ़र्मी और स्ज़िलार्ड के शोध कार्य के ज़रिए यह सम्भव हो चुका है कि यूरेनियम के अत्यधिक द्रव्यमान में नाभिकीय अभिक्रिया स्थापित करना सम्भव है। जिसके द्वारा अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और रेडियम जैसे तत्व उत्पन्न हो सकेंगे। प्रतीत होता है, कि ऐसा निकट भविष्य मे संभव हो सकेगा।
यह नया तथ्य (परमाणु) बमों के निर्माण का रास्ता तैयार करेगा और ये कल्पनीय है (यद्यपि बहुत कम निश्चित) कि अत्यधिक, अप्रत्याशित क्षमता वाले नई तरह के बमों का निर्माण भी किया जा सकेगा। नाव के द्वारा ले जाकर, किसी बन्दरगाह पर यदि इस तरह के केवल एक बम का विस्फ़ोट किया जाए, तो यह बन्दरगाह और उसके आस-पास की कुछ बस्तियों को बहुत अच्छी तरह से ध्वस्त कर सकता है। हाँलाकि, ये बम हवाई यातायात के लिए काफ़ी भारी सिद्ध होंगे।
संयुक्त राष्ट्र के पास युरेनियम के अयस्क अत्यधिक घटिया और काफ़ी कम मात्रा में हैं। कनाडा और पूर्व चेकोस्लोवाकिया में (यूरेनियम के) कुछ अच्छे अयस्क हैं, जबकि युरेनियम का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बेल्ज़ियन कॉन्गो है।
परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए आप ऐसी आशा कर सकते हैं कि प्रशासन और अमेरिका में काम कर रहे भौतिकविदों के समूह में आपसी रिश्ते स्थाई रहेंगे। इस स्थिति को प्राप्त करने का, आपके लिए एक सम्भव रास्ता यह हो सकता है, कि इस कार्य से सम्बन्धित एक व्यक्ति को, यह कार्य सौंप दें, जिस पर आपको भरोसा हो और जो कार्यालयी क्षमता से परे अपनी सेवाएँ दे सके। उसके कार्यों में कुछ कार्य यह भी हो सकते हैं :-
(क) सरकारी विभागों से सम्बन्ध रखकर तात्कलिक प्रगति के बारे में उन्हें अवगत रखना, सरकारी क्रियाकलापों के लिए सिफ़ारिश करना; विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र का युरेनियम अयस्क की पूर्ति की सुरक्षा की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना।
(ख) विश्वविद्यालयी प्रयोगशालाओं में सीमित बज़ट के साथ हो रहे प्रायोगिक कार्य (अनुसन्धान) की गति को तेज़ करना। यदि इस तरह के फ़न्ड की आवश्यकता है तो आपके और उसके व्यक्तिगत सम्बन्धों के द्वारा, जो लोग इस समस्या के लिए सहयोग के इच्छुक हैं, उनसे फ़न्ड उपलब्ध कराना और इसके साथ ही उन औद्योगिक प्रयोगशालाओं की सहकारिता को भी प्राप्त करना, जिनके पास आवश्यक उपकरण उपलब्ध है॑।
मैं समझता हूँ कि जर्मनी, वास्तव में चेकोस्लोवाकिया की खदानों से यूरेनियम की बिक्री बन्द कर चुका है, जिन पर कि उसने पहले कब्ज़ा किया था। उसके (जर्मनी) इस ज़रूरी कदम को इस तरह समझा जाना चाहिए, कि जर्मनी के प्रति (उप) राष्ट्र सचिव का पुत्र वॉन वीज़सेकर (प्रसिद्ध और अत्यन्त प्रतिभाशाली नाभिकीय भौतिकविद) कैसर-विल्हेम इन्स्टीट्यूट, बर्लिन से सम्बन्धित है। जहाँ युरेनियम पर अमेरिका में किया गया कुछ (शोध) कार्य पुनः दोहराया जा रहा है।

आपका आत्मीय
(अल्बर्ट आइन्स्टीन)

इस पत्र के जवाब में अक्टूबर 19, 1939 के दिन रूजवेल्ट ने कहा, “इसके मद्देनजर हमें तुरंत कुछ करना चाहिए।”

परमाणु हमले की घटना ने आइंस्टीन को गहरा आघात पहुँचाया था

अल्बर्ट आइंस्टीन को जब जापान पर एटम बम से हमले की जानकारी मिली, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। ये ऐसी हकीकत थी वो जिसे मानने को तैयार ही नहीं थे। वो अपार दुख और क्षोभ से भर उठे। उन्हें गहरा धक्का लगा और वो बुदबुदाए- “भयानक… बहुत ही भयानक!” आइंस्टीन इतने आहत थे कि उन्होंने वर्ष भर इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की। बाद में आइंस्टीन ने कहा, “अगर मैं जानता कि जर्मन एटम-बम कभी नहीं बना सकेंगे, तो मैं इस मुद्दे पर अपनी संस्तुति देना तो दूर, अपनी ऊँगली भी नहीं हिलाता।”

‘द वॉर इज वन, बट पीस इज नॉट।’ इस व्याख्यान में आइंस्टीन ने कहा-

“इस नए हथियार को विकसित करने में हमने मदद की, क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि इंसानियत के दुश्मन इसे हमसे पहले हासिल कर लें। कल्पना से परे तबाही और बर्बादी मचाना और शेष विश्व को अपना गुलाम बनाना ही हमेशा से नाजियों की मानसिकता रही है। हमने ये नया हथियार अमेरिकी और ब्रिटिश जनता के हाथों में, उन्हें संपूर्ण मानवजाति का प्रतिनिधि और शांति तथा स्वाधीनता का संरक्षक मानते हुए सौंपा है। लेकिन शांति तथा स्वाधीनता की वो गारंटी, जिसका वादा अटलांटिक चार्टर के देशों से किया गया था, हमें अब तक देखने को नहीं मिली है। जंग जरूर जीत ली गई है… लेकिन शांति नहीं… दुनिया को भय से मुक्ति दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन असलियत में जब से जंग खत्म हुई है, डर कई गुना और बढ़ गया है। दुनिया से वादा किया गया था कि रोजमर्रा की चीजों की तमाम किल्लतें-तमाम दिक्कतें सब खत्म हो जाएँगी। लेकिन दुनिया का ज्यादातर हिस्सा भुखमरी का शिकार है, जबकि दूसरे जरूरत से ज्यादा चीजों का लुत्फ उठा रहे हैं।”

अपने जीवन के अंतिम दिनों में आइंस्टीन ने 10 अन्य बहुत प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के साथ मिल कर, अप्रैल 11, 1955 को, ‘रसेल-आइंस्टीन मेनीफ़ेस्टो’ कहलाने वाले एक आह्वान पर हस्ताक्षर किए। इस पत्र में मानवजाति को निरस्त्रीकरण के प्रति संवेदनशील बनाने का आग्रह किया गया था। इसके 2 दिन बाद ही, जब वे इजराइल के स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में एक भाषण लिख रहे थे, उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और 18 अप्रैल को 76 वर्ष की अवस्था में वे दुनिया से चल बसे।

बंधक बना नाबालिग से रेप, मीट खाने को किया मजबूर, भांजे के साथ सद्दाम गिरफ्तार

शादी का झांसा देकर नाबालिग को अगवा करने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी सद्दाम को पुलिस ने हरियाणा के पानीपत से गिरफ्तार किया। सद्दाम ने लड़की को करीब 12 दिनों तक बंधक बनाकर रखा और हवस का शिकार बनाया। इतना ही नहीं पीड़िता को सद्दाम की बहन ने मीट खाने के लिए मजबूर किया। मंगलवार की सुबह पुलिस ने अंबाला कैंट से पीड़िता को बरामद किया था।

पीड़िता के घर पहुॅंच महिला आयोग की सदस्य नम्रता गौड़ ने मामले के बाबत जानकारी ली। पीड़िता दसवीं कक्षा की छात्रा है। उसने बताया कि उसके माता-पिता के काम पर जाने के बाद सद्दाम उसके घर आता था। करीब 15 दिन पहले सद्दाम ने उसे मोबाइल फोन दिया। लेकिन, उसकी मॉं ने यह देख लिया मोबाइल छीनकर फेंक दिया। 19 जुलाई को सद्दाम बहला-फुसलाकर उसे अंबाला के एक होटल में ले गया और जबर्दस्ती की।

तीन दिन तक होटल में रखने के बाद सद्दाम उसे अपनी बहन के घर ले गया। यहॉं सद्दाम की बहन ने उसे मीट खाने के लिए मजबूर किया। साथ ही धमकी दी कि यदि उसने सद्दाम को फॅंसाया तो तो वह उनके परिजनों को नहीं छोड़ेगी।

वकील मनोज शर्मा ने बताया कि सद्दाम आजाद नगर में सैलून चलाता है। उनके मुताबिक लड़की के परिजनों ने पुलिस से शिकायत की थी। लेकिन, पुलिस ने अपहरण की बजाए गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। साथ ही शिकायत में लड़की की उम्र 19 साल दर्ज कर दी। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस महानिदेशक, आईजी, एसपी और महिला आयोग की अध्यक्ष से की।

इसके बाद महिला आयोग से नम्रता गौड़ थाने पहुॅंची और लापरवाही के लिए पुलिस को फटकार लगाई। गौड़ ने कहा कि यदि पुलिस पहले ही दिन हरकत में आती तो लड़की को सद्दाम के हवस का शिकार नहीं बनती।

पुलिस ने इस मामले में सद्दाम के भांजे फरमान और राहिल खान को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता के माँ-बाप को अपनी बेटी के सद्दाम के साथ संबंध की पहले से खबर थी। पुलिस का दावा है कि वह जल्द ही कुछ और खुलासे करेगी। पुलिस का यह भी कहना है कि पीड़िता के पिता ने ही उसकी उम्र 19 साल बताई थी। वह नाबालिग है यह बात उसने 28 जुलाई को बताई।