उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार सिंह की अदालत ने नाबालिग को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म के मामले में साजिद को 20 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 42 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। साजिद उर्फ़ संटू हरियाणा के मेवात जिले का कुख्यात अपराधी है।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक 5 फरवरी 2015 को अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में 15 वर्षीय बच्ची को उसकी पड़ोस की एक महिला शौच के बहाने अपने साथ लेकर गई। रास्ते से उसे अगवा कर लिया गया।
बच्ची की खोजबीन करने पर उसके पिता को पता चला कि पड़ोस में रहने वाली महिला समीना, नजराना, मूसा, इकबाल, शमी और साबिर की मदद से साजिद उर्फ़ संटू ने उसे अगवा कर लिया है।
इसके बाद लड़की के परिजन पंचायत के पास गए। लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। बाद में मामला थाने पहुँचा। एसएसपी के निर्देश पर 30 मई को मुकदमा दर्ज हुआ। 28 अगस्त 2016 को बच्ची को बरामद कर साजिद को गिरफ्तार किया गया। किशोरी ने उस पर दुष्कर्म के आरोप लगाए थे जो जाँच में सही पाए गए।
मॉब लिंचिंग का शिकार हुए तबरेज अंसारी को लेकर टिक-टॉक पर विवादित वीडियो अपलोड करने को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद जमानत पर चल रहे सीरियल एब्यूजर और अभिनेता एजाज खान ने फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो में एजाज भारतीय जनता पार्टी के तारीफों के पुल बाँधते नज़र आ रहे हैं। बता दें कि एजाज खान को भड़काऊ वीडियो अपलोड करके साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
एजाज खान, जो कि हमेशा ये कहते नज़र आते थे कि भाजपा सरकार के शासनकाल में उनके मजहब के लोगों के ऊपर लगातार हमले हो रहे हैं, इस वीडियो में एकदम से पलटते हुए दिखाई दे रहे हैं और अपने सम्प्रदाय के ऊपर हुए अन्याय के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने न केवल भाजपा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा की है। इस वीडियो को देखकर ऐसा लगता है कि 4 दिन तक मुंबई पुलिस की हिरासत में रहने के बाद उनका हृदय-परिवर्तन हो गया है।
इस वीडियो में एजाज ने सालों से जेल में बंद निर्दोष समुदाय विशेष के लोगों को रिहा करने के लिए भाजपा सरकार की सराहना की है। उन्होंने कहा कि पिछली कॉन्ग्रेस सरकारों के शासनकाल में बिना किसी सबूत के समुदाय विशेष को 17-18 साल तक के लिए जेल में डाल दिया गया था, जो कि भाजपा के शासनकाल में छूट कर आ रहे हैं। इस दौरान एजाज ने जयपुर, कश्मीर, अहमदाबाद और राजस्थान जेल से छूटने वाले लोगों के बारे में बात करते हुए कहा कि इनका न्याय कॉन्ग्रेस से माँगना चाहिए, न कि भाजपा की सरकार से। उन्होंने कहा कि जो चीज सही और सच है, उसे मानना चाहिए और उसका समर्थन करना चाहिए।
बीजेपी की सरकार से इसका न्याय माँगना दोगलापन होगा। इन्होंने इन्हें छोड़ा है, अगर ये चाहते तो इन्हें और दिन तक अंदर रख सकते थे, मगर पीएम मोदी ने और अमित शाह ने इन्हें छोड़ा है। जिन्होंने इन्हें अंदर किया था, उनसे न्याय माँगनी चाहिए। दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने 1996 के समलेटी बमकांड मामले में आरोपित लतीफ अहमद बाजा, अली भट्ट, मिर्जा निसार, अब्दुल गोनी और रईस बेग को बेगुनाह मानते हुए 23 जुलाई को बरी कर दिया। ये लोग 23 साल जेल में गुजारने के बाद बेगुनाह साबित हुए हैं।
इनके रिहा होने के बाद से ही लगातार पीएम मोदी और अमित शाह को निशाने पर लिया जा रहा है, कि इनके शासनकाल में बिना कोई गुनाह, बिना कोई सबूत के इन्हें जेल में रखा गया था। एजाज खान इसी बात को लेकर वायरल बातों पर ध्यान न देकर खुद का दिमाग लगाने के लिए कहते हैं। वो कहते हैं कि आज से 20 साल पहले कॉन्ग्रेस की सरकार थी, न कि भाजपा की। इसलिए न्याय भी कॉन्ग्रेस से ही माँगना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालाँकि, वो भाजपा के जय श्री राम के नारे और ट्रिपल तलाक के खिलाफ हैं, मगर इन निर्दोष लोगों की रिहाई का श्रेय भाजपा को दिया जाना चाहिए।
इस वीडियो के अलावा, एजाज ने एक और वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने मुस्लिम राजनेताओं के साथ असंतोष व्यक्त किया था जो उनकी गिरफ्तारी के समय उनके बचाव में नहीं आए थे। एजाज ने कहा कि उन्होंने अपने दम पर अपनी लड़ाई लड़ी और सभी बाधाओं को पार किया। खान ने कहा, “मेरा संदेश असदुद्दीन ओवैसी, आजम खान, वारिस पठान, हाशमी जी और ऐसे सभी राजनेताओं के लिए है। मुझे 3 झूठे मामलों में फँसाया जा रहा था, लेकिन आपने मेरे बचाव में अपनी आवाज नहीं उठाई। आपने (असदुद्दीन ओवैसी) संसद में कन्हैया कुमार का बचाव किया, आपने संसद में कई लोगों के लिए अपनी आवाज़ उठाई लेकिन आपने कभी भी एजाज खान के लिए आवाज़ नहीं उठाई।”
ओवैसी और पठान जैसे मुस्लिम राजनीतिज्ञों द्वारा उनका साथ नहीं दिए जाने पर विलाप करते हुए एजाज ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मेरी छवि किस तरह से आपको बताई जा रही है। मैं आपकी (ओवैसी) ताकत बन सकता था। आप मेरी मदद कर सकते थे। लेकिन आपने नहीं किया। हालाँकि, अल्लाह मेरे साथ था, लोग मेरे साथ थे, जिन्होंने देखा कि मेरे साथ अन्याय हो रहा है। मैं अपने मुस्लिम भाइयों को बताना चाहूँगा कि अगर संसद में हमारा प्रतिनिधित्व करने वाले ये लोग मेरे बचाव में नहीं आए, तो क्या वे कल आपके बचाव में आएँगे?”
एजाज ने आगे कहा कि उन्होंने वही किया जो ये नेता संसद में नियमित रूप से किया करते हैं। खान का कहना है कि उन्होंने उन मुद्दों के बारे में बात की, जो असदुद्दीन ओवैसी, अकबरुद्दीन ओवैसी, हाशमी और अन्य मुस्लिम नेताओं ने उठाए, फिर भी उन्हें (एजाज खान को) पुलिस द्वारा परेशान किया गया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें जमानत के लिए 1 लाख रुपए जमा करना था। इसके अलावा, हर दिन उन्हें पुलिस स्टेशन जाकर रिपोर्ट करनी होगी।
गौरतलब है कि, सांप्रदायिक और विवादस्पद वीडियो बनाने के मामले में मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभिनेता एजाज खान को गिरफ्तार किया था। अभिनेता एजाज ख़ान ने टिक-टॉक ऐप पर भड़काऊ वीडियो बना कर पोस्ट किया था। इसमें हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की बात की गई थी और एक वीडियो में पुलिस का मज़ाक उड़ाया था। पुलिस ने एजाज को 14 दिन की न्यायिक रिमांड में भेजा था। हालाँकि, 1 लाख रुपए के मुचलके पर उनको 22 जुलाई को जमानत दे दिया गया।
केन्द्र सरकार ने घाटी में अर्ध सैनिक बलों की 100 और कंपनियॉं यानी 10,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती का फैसला किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद यह फैसला किया गया है। जवानों की अतिरिक्त तैनाती के साथ अनुच्छेद 35ए को खत्म किए जाने की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुदृढ़ करने के लिए की गई है। सीआरपीएफ़ की 50, सीमा सुरक्षा बल की 30 और बीएसएफ तथा आईटीबीपी की 10-10 कंपनियॉं तैनात होंगी। यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन है। इससे पहले देशभर से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को 24 फरवरी को कश्मीर भेजा गया था। उस समय लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था का हवाला देते हुए तैनाती की गई थी। अमरनाथ यात्रा के लिए भी राज्य में करीब 40 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।
कश्मीरी नेता बेचैन
अतिरिक्त जवानों की तैनाती के केन्द्र सरकार के फैसले ने कश्मीरी नेताओं को बेचैन कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसका विरोध करते हुए ट्वीट किया है कि केन्द्र घाटी में डर का माहौल पैदा कर रहा है।
Former J&K CM,M Mufti tweets,’Centre’s decision to deploy addnl 10,000 troops in Valley has created fear psychosis in ppl.There’s no dearth of security forces in Kashmir.J&K is a political problem which won’t be solved by military means.GOI needs to rethink&overhaul its policy’ pic.twitter.com/n2u3uerJt7
उन्होंने कहा है, “घाटी में अतिरिक्त 10 हजार जवान तैनात करने का केन्द्र का फैसला लोगों के मन में भय पैदा कर रहा है। कश्मीर में सुरक्षा बलों की कोई कमी नहीं है। जम्मू-कश्मीर की समस्या राजनीतिक है जिसे सैन्य संसाधनों से नहीं सुलझाया जा सकता है। भारत सरकार को दोबारा सोचने और अपनी नीति बदलने की जरूरत है।”
आईएएस से नेता बने शाह फ़ैसल ने कहा है कि अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती से घाटी में बेचैनी बढ़ गई है। कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों किया गया है। कुछ बड़ा होने की अफवाहों को इस फैसले से हवा मिली है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ‘डर का माहौल’ बनाने का आरोप लगाया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद असगर ने कहा है कि एक तरफ़ केंद्र और राज्यपाल कश्मीर के हालात सुधरने की बात कर रहे हैं और दूसरी ओर अतिरिक्त सैनिक घाटी में भेजे जा रहे हैं।
केरल में 80 साल की चिन्नमा को दफनाने के लिए उसकी बेटी को ऑर्थोडॉक्स समूह की तरफ से भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल किए जाने का मामला सामने आया है। चिन्नमा जैकबाइट समूह से जुड़ी हुईं थी। उनकी इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उन्हें उसी कब्रिस्तान में दफनाया जाए जहॉं उनके पति दफन हैं।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह कब्रिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ऑर्थोडॉक्स समूह के नियंत्रण में है। चर्चों के प्रशासन और संचालन को लेकर दो गुटों में विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में फैसला सुनाते हुए कहा था कि 1934 के मलांकारा गिरजाघर के दिशा-निर्देशों के अनुसार 1,100 पेरिश और उनके गिरजाघरों को ऑर्थोडॉक्स गुट द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। पेरिश एक छोटा प्रशासनिक जिला होता है जिसका अपना चर्च और पादरी होता है। फैसले पर पूरी तरह अमल नहीं होने को लेकर इसी साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार पर नाराजगी भी जताई थी।
मीडिया रिपोर्टों में चिन्नमा की बेटी मिनी के हवाले से बताया गया है कि मॉं की मौत के बाद ऑर्थोडॉक्स समूह में शामिल होने के लिए उस पर दबाव डाला गया। ऐसा करने पर ही सेंट थॉमस ऑर्थोडॉक्स चर्च ने जैकबाइट समूह से जुड़ी उसकी मॉं को पारिवारिक क्रिप्ट में दफनाने की अनुमति देने की बात कही।
मिनी के अनुसार, “मेरी माँ ने मुझसे कहा था कि उन्हें किसी और कब्रिस्तान में नहीं दफ़नाया जाना चाहिए। वह फैमिली क्रिप्ट में दफ़न होना चाहती थीं, लेकिन अब इस पर यह ऑर्थोडॉक्स गुट का नियंत्रण है। जब मैंने उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि यदि मैं उनके समूह में शामिल हो जाऊँ तो वे मेरी माँ को दफ़न करने के लिए तैयार हैं।”
हालाँकि सेंट थॉमस चर्च के विक्टर फादर जोसेफ मलयिल ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि अंतिम संस्कार मानवता की बात है। लेकिन, जेकोबाइट पक्ष के एक सूत्र ने दावा किया है कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जब ऑर्थोडॉक्स समूह ने दूसरे गट के ईसाइयों को दफ़न करने से मना कर दिया।
ईसाई समुदाय के भीतर गुटबाजी बहुत अधिक है। दावों के उलट भारत में चर्चों को जाति के आधार पर भेदभाव के लिए जाना जाता है।
भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कहे जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है। अपनी मौत से एक महीने पहले उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं संगठन (DRDO) के मौजूदा प्रमुख सतीश रेड्डी को दोबारा उपयोग में लाई जाने वाली मिसाइल प्रणाली पर काम करने की सलाह दी थी। उस समय रेड्डी रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे।
रेड्डी ने बताया कि कलाम के निधन से महीने भर पहले उन्होंने उनसे उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान कलाम ने उन्हें दोबारा उपयोग में लाई जाने वाली मिसाइलों पर काम का सुझाव दिया था। एक ऐसी मिसाइल जो पेलोड ले जा सके, फिर वापस आ जाए और दूसरा पेलोड ले जाए। उन्होने रेड्डी से कहा कि इस तरह की प्रणाली पर काम करिए।
DRDO प्रमुख ने बताया कि पहली बार एक युवा वैज्ञानिक के तौर पर वे 1986 में कलाम से मिले थे। 2012 में डीआरडीओ के तत्कालीन प्रमुख वीके सारस्वत ने दूरदर्शन को दिए साक्षात्कार में कहा था कि भारत दोबारा उपयोग में लाई जा सकने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की योजना बना रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘फिर से उपयोग में लाए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी प्रदर्शक’ (आरएलवी-टीडी) का सफल परीक्षण कर चुका है।
‘अग्नि’ मिसाइल देने वाले पूर्व राष्ट्रपति कलाम का IIM शिलॉन्ग में लेक्चर देते वक़्त दिल का दौरा पड़ने से 27 जुलाई 2015 को 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। 1981 में उन्हें पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी प्रवर्तन निदेशालय की कस्टडी से फरार हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक अगस्ता वेस्टलैंड मामले में पूछताछ के मद्देनजर ईडी ने उन्हें समन भेजकर बुलवाया था। जिसके बाद वह शनिवार (जुलाई 27, 2019) को ईडी के दफ्तर तो पहुँचे, लेकिन जब अधिकारियों ने उनसे इंतजार करने को कहा तो वह वहाँ से बिना कुछ बताए चले गए। बताया जा रहा है कि पुरी वीवीआईपी चॉपर घोटाले में गिरफ्तारी के डर से फरार हुए हैं।
Enforcement Directorate (ED) Official to ANI: ED had summoned Ratul Puri (in file pic) today, in connection with AgustaWestland case. Puri arrived at ED office and was asked to wait by an official. But Ratul Puri did not wait and left ED office. pic.twitter.com/Sao6mIxtlN
गौरतलब है इससे पहले भी अप्रैल महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने वीवीआईपी घोटाले में रतुल पुरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। उनपर आरोप है कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में उनकी कंपनी से दुबई रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके अलावा इस मामले में हाल में सरकारी गवाह बने बिचौलिए और दुबई के कारोबारी राजीव सक्सेना द्वारा दर्ज बयान में पुरी का नाम आया था। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय के विशेष लोक अभियोजक डीपी सिंह और एन के मट्टा ने दिल्ली की विशेष अदालत को बताया था कि एजेंसी ‘आरजी’ नाम के व्यक्ति की पहचान करना चाहती है।
दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक रतुल पुरी इस मामले में ईडी के अधिकारियों को पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। जिसके कारण ईडी उन्हें गिरफ्तार करना चाहती थी। रतुल को अपनी गिरफ्तारी की भनक लग चुकी थी, इसलिए वह अधिकारियों को चकमा देकर फरार हुए। दफ्तर से निकलने के बाद रतुल दिल्ली की विशेष अदालत पहुँचे, जहाँ उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। इस याचिका की सुनवाई आज अदालत में होगी।
AgustaWestland case: Ratul Puri had approached a Delhi Court & filed an anticipatory bail plea. Court to hear the matter today.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोइन कुरैशी केस में हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने दी। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सतीश को मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के प्रावधानों के तहत शुक्रवार (जुलाई 26) की देर रात गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि सना से कुछ घंटों तक पूछताछ की गई और जाँच में सहयोग ना करने पर उसे हिरासत में ले लिया गया। जल्द ही उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।
Enforcement Directorate has arrested Satish Babu Sana in connection with Moin Qureshi case. pic.twitter.com/CPbgW3wHG6
बता दें कि, सतीश बाबू सना ने सीबीआई (CBI) के पूर्व विशेष निदेशक रहे राकेश अस्थाना पर 5 करोड़ रुपए की रिश्वत माँगने का आरोप लगाया था। इसके बाद तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने अस्थाना एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई को दिए अपने बयान में बाबू ने कहा था कि उसने मोइन कुरैशी से जुड़ी जाँच में किसी तरह की कार्रवाई ना करने के लिए अस्थाना को 2 करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी। यह धन राशि दिसंबर 2017 से लेकर 10 महीने की अवधि में दी गई।
सतीश ने जब अस्थाना पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था तब अस्थाना के नेतृत्व में सीबीआई का विशेष जाँच दल (SIT) उससे पूछताछ कर रहा था। सना की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सीबीआई ने अस्थाना और एजेंसी के कुछ अधिकारियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में अस्थाना ने तत्कालीन सीबीआई निदेशक वर्मा पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था और सतीश को बचाने और एसआईटी को उसके खिलाफ कार्रवाई ना करने देने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई।
गौरतलब है कि, ईडी ने सीबीआई अधिकारियों के साथ कथित भ्रष्टाचार के आरोप में मोइन कुरैशी के खिलाफ साल 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। सना मोइन कुरैशी का काफी करीबी माना जाता है। बता दें कि मोईन कुरैशी ने 1993 में रामपुर में एक बूचड़खाने से अपने कारोबार की शुरुआत की थी और 10 साल के भीतर ही वह देश का बड़ा मीट निर्यातक बन गया। सना अब तक मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय का गवाह था, जो कि अब आरोपित बन गया है।
कुरैशी 2014 में सुर्खियों में आया था। उसका सबसे पहले नाम तब सामने आया जब यह पता चला कि वो 15 महीने में कम से कम 70 बार तत्कालीन सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के घर पर हाजिरी लगाई थी। इसके बाद आरोपित के साथ बैठक करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा को कड़ी फटकार भी लगाई थी।
एक ओर तीन तलाक को लेकर पूरी देश में बहस चल रही है। वहीं दूसरी ओर आए दिन तीन तलाक के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। मीडिया खबरों के अनुसार शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को छत्तीसगढ़ में राज्य महिला आयोग की सुनवाई में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया के सामने तीन तलाक का ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसमें पीड़िता ने अपनी आप बीती सुनाई।
पीड़िता ने बताया फोन पर तलाक देने के बाद उसके शौहर ने दूसरी शादी कर ली है और उसे दोबारा घर में रखने के लिए उसका ससुर उससे हलाला की बात कह रहा है। उसके मुताबिक अपनी बात साबित करने के लिए वह आयोग के सामने प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकती है, लेकिन जो वो कह रही है वह सत्य है। पुलिस ने इस संबंध में आरोपितों के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना का मामला भी दर्ज किया है।
पीड़िता द्वारा पूरा मामला सुनने के बाद बाद राज्य महिला आयोग ने पीड़िता को दोषियों के ख़िलाफ़ न्यायालय जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मुँह से तीन बार तलाक कह देने से तलाक नहीं हो सकता। इसका फैसला न्यायालय करेगा।
गौरतलब है पत्रिका की खबर के अनुसार राज्य महिला आयोग की सुनवाई में 25 प्रकरण रखे गए थे। जिसमें 19 प्रकरणों में दोनों पक्षों के लोग सामने थें। इन मामलों में 8 प्रकरणों को निराकृत बताकर बंद कर दिया गया और बाकी प्रकरणों से संबंधित विभाग से जानकारी आने के बाद सुनवाई होगी। इसके अलावा 2 मामलों में एसपी से कहकर तत्काल एफआईआर करने के लिए पत्र लिखा गया है।
जयपुर में भट्टा बस्ती की रहने वाली सात साल की मासूम का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म के मामले में सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ़ जीवाणु पर अन्य अपराध सहित पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय कर दिए। यह आरोप महानगर की पॉक्सो मामलों की विशेष कोर्ट ने तय किए। इस मामले में पॉक्सो कोर्ट-1 के जज एके अग्रवाल ने शुक्रवार (26 जुलाई 2019) को जीवाणु को आरोप सुनाए, लेकिन उसने सभी आरोपों का खंडन करते हुए पूरे मामले में ट्रायल चाहा है।
इस पर कोर्ट ने अभियोजन के अधिवक्ता एमएस किशनावात को 3 अगस्त को केस से संबंधित साक्ष्य पेश करने के लिए कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के अपराध, चोरी, हत्या व दुष्कर्म जैसे अपराध करने का आदी है। जानकारी के अनुसार, सिंकदर उर्फ़ जीवाणु पर पॉक्सो कोर्ट ने आईपीसी की धारा-323, 341, 363, 376, 376 एबी और पॉक्सो की धारा 3,4,5,6 में आरोप तय किए हैं।
इस मामले में शास्त्री नगर थाना पुलिस ने 24 जुलाई 2019 को चार्जशीट दाख़िल की थी। जीवाणु इससे पहले भी बलात्कार के मामले में सज़ा काट चुका है। उस पर बलात्कार के कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।
ग़ौरतलब है कि भट्टा बस्ती में मासूम बच्ची के साथ हुई इस घटना से पूरे इलाक़े में भारी तनाव था। इतना ही नहीं, जब पहली बार जीवाणु को कोर्ट में लाया गया था तो उस दौरान वकीलों अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए उसे पीट दिया था।
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच शनिवार सुबह मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष पाकिस्तानी कमांडर मुन्ना लाहौरी सहित दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दूसरा आतंकवादी लाहौरी का स्थानीय साथी जिन्नत था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक 19 वर्षीय लाहौरी जैश के लिए लोगों की भर्ती करता था। वह आईईडी बनाने में भी माहिर था और बेहद खतरनाक मंसूबों के साथ भारत आया था।
Jammu & Kashmir Police on Operation Bunbazaar (Shopian): Top most Jaish commander of South Kashmir Munna Lahori/Bihari from Pakistan killed along with his local associate after a night long operation. pic.twitter.com/9nzE4SoK7n
पीटीआई के अनुसार लाहौरी 30 मार्च को बनिहाल में सेना के काफिले को निशाना बना कर किए गए कार धमाके और पुलवामा के अरिहाल में 17 जून को सेना के वाहन पर किए धमाके में शामिल था, जिसमें दो सैनिकों की जान चली गई थी और नौ अन्य घायल हुए थे।
This terrorist from Pakistan was known for IED making and responsible for series of civilian killings in the local area. JeM had used him for recruitment also in the belt. https://t.co/pRycbNIGks
पुलिस ने बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले के बोनबाजार क्षेत्र में आतंकवादियों के मौजूद होने की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र का घेराव कर के तलाश अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं जिसका बलों ने माकूल जवाब दिया। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए गए हैं।