हैदराबाद में रहने वाली अभिनेत्री और टीवी एंकर श्वेता रेड्डी ने बिग बॉस टीवी सीरियल के तेलुगु संस्करण के आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हैदराबाद के बंजारा हिल्स की पुलिस के पास दर्ज शिकायत में रेड्डी ने आरोप लगाया है कि शो के अंतिम सेलेक्शन के लिए उनसे सेक्सुअल फेवर माँगे गए थे। गौरतलब है कि श्वेता रेड्डी को बिग बॉस के तेलुगु संस्करण के तीसरे सीज़न के लिए नॉमिनेट किया गया है।
पुलिस ने की शिकायत की पुष्टि
ANI से बात करते हुए बंजारा हिल्स डिवीज़न के एसीपी केएस राव ने इसकी पुष्टि की कि पुलिस ने रियलिटी शो की टीम के चार सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। चारों व्यक्तियों की पहचान अभिषेक, रविकांत, रघु और श्याम के रूप में हुई है। उन पर आईपीसी की धारा 354 (महिला के साथ उसका शीलभंग करने के इरादे से आपराधिक जबरदस्ती) का मामला दर्ज किया गया है। उनके अनुसार 13 जुलाई की दोपहर को उन्हें शिकायत मिली कि रेड्डी को मार्च में फ़ोन कर बताया गया था उनके बिग बॉस तेलुगु में चयन के बारे में। उन्हें यह भी बताया गया कि 21 जुलाई से तीसरे सीजन की शुरुआत होनी है। उन्होंने बताया कि स्वाति रेड्डी ने वह प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया और चारों आरोपितों से मिलीं। उनके कथनानुसार चारों ने उनके साथ बदसलूकी की और अंतिम सेलेक्शन के लिए अपने बॉस को satisfy करने के लिए कहा।
‘उन्होंने बॉडी-शेमिंग भी की’
रेड्डी ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने उनकी बॉडी-शेमिंग भी की। उनके अनुसार आयोजकों ने उन्हें कोई करार नहीं दिया और पूछा कि वह (रेड्डी) उनके बॉस को कैसे satisfy करेंगी। सुपरस्टार अक्किकेनि नागार्जुन को होस्ट के तौर पर लेकर बिग बॉस तेलुगु का तीसरा सीज़न 21 जुलाई से शुरू होना है।
उद्योगपति अदि गोदरेज ने ‘भारत में बढ़ रहे हेट क्राइम’ को लेकर चिंता जताई है। गोदरेज ने कहा कि बढ़ती असहिष्णुता और मोरल पुलिसिंग के कारण भारत के आर्थिक विकास को गंभीर क्षति पहुँचा सकता है। हालाँकि, गोदरेज ने साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को उनके ‘न्यू इंडिया’ रोडमैप के लिए बधाई दी। मोदी सरकार ने भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लक्ष्य रखा है। अदि गोदरेज ने कहा कि अभी देश में कुछ अच्छा नहीं चल रहा है और सामाजिक स्तर पर कुछ ऐसी चीजें हो रही हैं जो विकास को नुक़सान पहुँचा सकती हैं।
So you are falling into the trap of the fake @ndtv narrative! Pl look at data before you comment! @ARanganathan72 has given out data, @ndtv runs a one sided narrative @swati_gs has exposed fake narrative! Pl do not jump to conclusions without looking at all data https://t.co/ecohBOsA4D
सेंट जेवियर्स कॉलेज की 150वें स्थापना दिवस पर सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा:
“अभी का दृश्य पूरी तरह उज्ज्वल नहीं दिख रहा है। हमें देश में बढ़ रही ग़रीबी को ध्यान में रखना चाहिए, जो हमें हमारी वास्तविक क्षमता को पहचाने की राह में बाधा है। सामजिक अस्थिरता, हेट क्राइम्स, बढ़ती असहिष्णुता, महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार और जाति-धर्म से सम्बंधित हिंसा हमारे देश में अनियंत्रित हो चले हैं। सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए अगर इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया तो आर्थिक विकास पर बुरा असर पड़ेगा।”
अदि गोदरेज के इस बयान पर दिग्गज आईटी कम्पनी इनफ़ोसिस के पूर्व निदेशक टीवी मोहनदास पाई ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि एनडीटीवी के प्रोपेगंडा में फँसने से लोगों को बचना चाहिए। जब बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने गोदरेज के बयान को ट्वीट किया, तब मोहनदास पाई ने कहा कि फेक नैरेटिव गढ़ने से पहले आदि गोदरेज को कम से कम आँकड़े देख लेने चाहिए।
@kiranshaw we grew at 6% in Q4, yes it is down, but world is growing at 3.5%. We should grow at 8% the reason is specific, not any crime that happens @ARanganathan72@TheJaggi Why are we creating this unnecessary negativism?is this what business leaders should do? Abuse India? https://t.co/Zdo8dW59Mk
मोहनदास पाई ने ट्विटर पर लिखा, “बिजनेस लीडर्स के साथ यही समस्या है। वे लुटियंस फेक मीडिया के झाँसे में आ जाते हैं और एकाध घटना के आधार पर राय बनाने लगते हैं। हम आख़िर इतनी नेगेटिविटी क्यों पैदा कर रहे हैं? क्या बिजनेस लीडर्स को यही करना चाहिए? भारत को गाली देनी चाहिए?” मोहनदास पाई की ट्वीट को सोशल मीडिया पर लोगों ने सराहा और अदि गोदरेज को आड़े हाथों लिया।
दो दर्जन से भी अधिक मामलों में फँसे समाजवादी पार्टी (सपा) नेता और सांसद आजम खान अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ समय में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन उनकी मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती। अब सपा नेता के पैतृक शहर रामपुर का जिला प्रशासन राज्य सरकार के ऐंटी-भू माफिया पोर्टल पर आजम खान को भूमि माफिया के रूप में सूचीबद्ध करने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश में 2017 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया की पहचान करने और जमीन कब्जा करने से संबंधित लोगों की शिकायत दर्ज कराने के लिए इस पोर्टल की शुरुआत की थी।
पुलिस के मुताबिक, नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद आजम खान के खिलाफ 30 से भी ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकतर मामले सरकारी जमीन और गरीबों की जमीन हथियाने से संबंधित हैं। रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा ने बताया कि जमीन हथियाने के कई मामलों को ध्यान में रखते हुए आजम खान का नाम ऐंटी-भू माफिया पोर्टल में सूचीबद्ध करने पर विचार किया गया है।
उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा ने बताया, “जिलाधिकारी और मैं जिले के विभिन्न थानों में आजम खान और उनके सहयोगियों द्वारा जमीन हथियाने को लेकर दर्ज रिपोर्ट (एफआईआर/ मामले) पर समीक्षा करेंगे। उसके बाद ही उनके नाम को सरकारी भू-माफिया पोर्टल पर सूचीबद्ध करने की सिफारिश की जाएगी।” वहीं, जब अजय पाल शर्मा से यह पूछा गया कि क्या आजम खां को गिरफ्तार किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा कि यह किसी भी समय हो सकता है। जाँच जारी है।
According to the Revenue Officer, the forged documents to fraudulently occupy the riverbed, are now strong evidence against Azam Khan.https://t.co/IQfZTB4NFL
इससे पहले शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को रामपुर के अजीम नगर पुलिस थाने में राजस्व विभाग द्वारा आजम खान और उनके सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर के अनुसार, आजम खान और उनके सहयोगी अलेहसन खान नाम के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर 26 किसानों से जमीन हड़प ली और इस जमीन का उपयोग आजम खान ने अपनी करोड़ों की मेगा परियोजना- मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में किया। राजस्व विभाग की एफआईआर के बाद रामपुर के 26 किसान, जिन्हें कथित रूप से जाली भूमि बिक्री डीड पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था, अब अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराएँगे। क्योंकि इसमें जमीन के अलग-अलग हिस्से और अलग-अलग मालिक शामिल हैं।
इसके साथ ही राजस्व विभाग की शिकायत में यह भी कहा गया है कि गरीब किसानों की जमीन हड़पने में आजम खान ने अपने पद (उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, 2012-2017 के रूप में) का भी दुरुपयोग किया। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 5 हजार हेक्टेयर की विशाल भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।
इस जमीन के बारे में राजस्व अधिकारी ने कहा कि यह भूमि नदी किनारे की है, इसका अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। राजस्व अधिकारी ने बताया कि आजम खान ने जाली राजस्व रेकॉर्ड बनाकर कई सौ करोड़ की इस जमीन को जौहर अली विश्वविद्यालय के रूप में अवैध रूप से कब्जा कर लिया। अधिकारी के अनुसार, नदी के किनारों पर कब्जा करने के लिए व धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से बनाए गए यही जाली दस्तावेज अब आजम खान के खिलाफ मजबूत सबूत के तौर पर उपलब्ध हैं।
पुलिस का कहना है कि आजम खान या उनके सहयोगियों द्वारा जमीन हड़पने के अन्य मामलों से संबंधित कई शिकायतें रामपुर पुलिस अधीक्षक को मिली हैं। वहीं, आजम खान के समर्थकों का कहना है कि उनके नेता को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो जिले में विपक्ष की एकमात्र आवाज हैं और सांसद के तौर पर मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते रहते हैं। सपा के एक पदाधिकारी ने लखनऊ में कहा कि आजम खान के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है, क्योंकि उन्होंने (आजम खान) अपने निजी इस्तेमाल के लिए किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया है।
हिमाचल प्रदेश के सोलन में एक बिल्डिंग के गिर जाने के बाद उसमें फँसे 35 लोगों के दब जाने की बात सामने आई है। कई ख़बरों में लोगों के मरने की भी सूचना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सोलन के कुमारहट्टी में एक तीन मंजिला होटल ढह गया, जिससे वहाँ खाना खा रहे सेना के 30 जवान भी उसमें फँस गए। अभी तक 18 लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया है। हालाँकि, अभी तक इमारत के गिरने की वजह सामने नहीं आई है। बचाए गए लोगों में से 10 सेना के जवान हैं।
#BREAKING | Tragic news from Himachal Pradesh’s Solan where 35 people, including army soldiers, are reportedly trapped following a dhaba building collapse. Rescue operations are on.https://t.co/tCxIMtOjPG
सेना के जवानों के अलावा कई होटलकर्मी और अन्य लोगों के भी अंदर फँसे होने की आशंका है। बचाव कार्य चल रहा है। वहाँ ज़ोर की बारिश भी हो रही थी। पंचकूला से एनडीआरएफ की टीम भी पहुँच रही है। इस घटना के बारे में और जानकारी मिलते ही इस ख़बर को अपडेट किया जाएगा।
मध्य प्रदेश से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ इंदौर में एक महिला व उसके बॉयफ्रेंड को गिरफ़्तार किया गया। इन्होंने ऐसा कारनामा किया था, जिसे सुन कर आप भी दंग रह जाएँगे। आरोपित महिला पुलिस अधिकारी की वेशभूषा में लूटपाट को अंजाम दिया करती थी और उसका प्रेमी इन सब में उसकी मदद करता था। एक और जानने लायक बात यह है कि आरोपित महिला का प्रेमी पहले से ही शादीशुदा है।
सबसे हास्यास्पद बात यह है कि आरोपित प्रेमी की पत्नी पुलिस अधिकारी है और उसी की वर्दी चुरा कर वह अपनी प्रेमिका को दिया करता था। उसकी पत्नी मध्य प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर है। पत्नी की वर्दी के सहारे दोनों आरोपित प्रेमी युगल लूटपाट की साज़िश को अंजाम देते थे। पुलिस ने आरोपित महिला के पास से फेक पुलिस आई कार्ड भी ज़ब्त किया है।
भारत के चंद्रयान-2 मिशन के लिए काउंट डाउन शुरू हो गया है। इसकी लॉन्चिंग सोमवार (जुलाई 15, 2019) को 2.51 AM पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से होगी। यह यान 6 या 7 सितंबर के आसपास चाँद की सतह पर उतरेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इसरो ने यह मिशन बड़े शक्तिशाली देशों से भी सस्ते में पूरा किया है। जहाँ इजराइल ने अपने चन्द्रमा मिशन में 1400 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे, चीन को इसी प्रकार के मिशन में 1200 करोड़ रुपए ख़र्च आए थे। जबकि, भारत के चंद्रयान-2 में कुल 978 करोड़ रुपए का ख़र्च आया है।
बता दें कि GSLV Mk III भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है और इसे पूरी तरह से भारत में निर्मित और डिज़ाइन किया गया है। लॉन्च के समय चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क से संपर्क साधने में सफल होगा। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं। चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था। ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब चाँद की सतह पर भारत का लैंडर उतरेगा।
The Earth and the Moon have a lot more in common than most of us realise. And studying these commonalities will help us understand our own planet better. We hope to do this with #Chandrayaan2! #ISRO#GSLVMkIIIpic.twitter.com/vhXjultFbl
भारत एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। भारत चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना यान उतारने वाला पहला राष्ट्र बन जाएगा। यह यान 16 दिनों तक यह पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए चाँद की तरफ बढ़ेगा। इस दौरान चंद्रयान की अधिकतम गति 10 किलोमीटर प्रति सेकंड होगी। चंद्रयान-2 कुल 27 दिनों तक चाँद की कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा।
अभी तक दुनिया के पाँच देश ही ऐसे हैं, जिन्होंने चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने में सफलता पाई है। ये देश हैं – अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन और जापान। इसके बाद भारत यह कारनामा करने वाला छठा देश होगा। हालाँकि, रोवर उतारने के मामले में भारत विश्व का चौथा देश होगा।
मुस्लिम युवकों के एक समूह द्वारा एक व्यक्ति को बेरहमी से पीटे जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जिस ट्विटर यूजर ने ये वीडियो शेयर किया है उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक दलित व्यक्ति को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पीटा।
वीडियो वायरल होने के बाद अमेठी पुलिस ने शनिवार (जुलाई 13, 2019) को एक बाइट जारी की। जिसमें तिलोई नाम के क्षेत्राधिकारी ने इस घटना की पुष्टि की।
अमेठी पुलिस द्वारा जारी किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि जब तिलोई से वायरल हो रहे वीडियो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस घटना की पुष्टि की और कहा कि यह घटना उत्तर प्रदेश के जायस जिले में 21 जून, 2019 को हुई थी। इसमें दो समुदायों के बीच मारपीट हुई थी। जिसमें दूसरे समुदाय के लोगों ने शशांक पदम घूसर को बेरहमी से पीटा। शशांक के साथ-साथ उसके भाई और पत्नी को भी चोटें आई थी। उन्होंने कहा कि शशांक की पत्नी की शिकायत के आधार पर आरोपितों के खिलाफ उसी दिन अपराध संख्या 136/19 के अंतर्गत आईपीसी की धारा-323, 354, 504, 506 और एससी/ एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
साथ ही तिलोई ने बताया कि इस संबंध में दो आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है और बाकी लोगों के खिलाफ उच्च न्यायालय का अरेस्टिंग स्टे ऑर्डर है। उन्होंने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। जाँच में जो कुछ भी सामने निकलकर आएगा, उसके आधार पर उचित कार्रवाई करते हुए अपराधियों को दंड दिया जाएगा। ऐसा कहा जा रहा है कि दूसरे समुदाय के लोग शशांक की बहन के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे, जिसका विरोध करने पर उन लोगों ने शशांक पर हमला बोल दिया और बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी।
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा दलितों के खिलाफ अत्याचार और भेदभाव की कई घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। हाल ही में राज्य के मुरादाबाद में दलित समुदाय को मुस्लिम समुदाय के नाईयों द्वारा भेदभाव का सामना करना पड़ा था। मुस्लिम नाईयों ने दलितों के बाल काटने से मना कर दिया था।
वहीं, पिछले महीने,एक मुस्लिम भीड़ मेरठ के घसौली गाँव में मस्जिद के पास वाली मंदिर में दलितों द्वारा लाउडस्पीकर लगाकर भजन बजाने की वजह से मंदिर में घुसकर दलितों के एक समूह की पिटाई कर दी। भीड़ ने दलितों पर लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला किया। इसके बाद उन लोगों ने पथराव भी किया। इस दौरान आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हुए। इस वजह से इलाक़े में सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ गया।
डेटा- यह एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल आजकल सच को समझाने के लिए कम और लोगों को बरगलाने में ज्यादा हो रहा है। आँकड़ों से खेल कर कल को यह भी साबित किया जा सकता है कि जलियाँवाला बाग़ में अंग्रेजों ने नरसंहार नहीं किया था बल्कि दीपावली के पटाखे फोड़े थे। आँकड़ों का प्रयोग कर के एक बार फिर से बरगलाने की कोशिश की गई है। डेलीओ में राणा सफ़वी द्वारा लिखे गए एक लेख में मुग़लों को महान साबित करने की कोशिश की गई है और इसके लिए कुछेक आँकड़ों के इस्तेमाल किए गए हैं। यहाँ हम उन आँकड़ों की पोल तो खोलेंगे ही, साथ ही यह भी बताएँगे कि इस खोखले नैरेटिव के पीछे कैसी साज़िश है? इस बहती जमुनी में स्वरा भाष्कर ने भी हाथ धोए और कहा कि मुग़लों ने भारत को धनवान बनाया।
सबसे पहले लेख की बात करते हैं। राणा सफ़वी ‘भारतीय मुग़ल’ पुस्तक के लेखक हरबंस मुखिया के हवाले से लिखती हैं कि मुग़लों को आक्रांता नहीं कहा जा सकता। उन्होंने लोगों के ‘इतिहास ज्ञान’ पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हर आक्रमण को भारत में ब्रिटिश की तरह ही समझा गया। उन्होंने दावा किया है कि मुग़ल भले ही आक्रांता बन कर आए लेकिन वे यहाँ भारतियों की तरह रहे। साथ ही मुग़ल राजाओं द्वारा राजपूत स्त्रियों से सम्बन्ध बनाने और शादी करने को भी मुग़लों की ‘भारतीयता’ से जोड़ा गया है। मुग़लों ने राजपूतों को सेना में ऊँचे पद दिए।
The problem, when semi-literate byproducts of affirmative action like Rana Safvi, start writing about history is, they expose themselves to be the frauds we know them to be. Mughals made us “rich” ??? https://t.co/OmDyB7WfpZpic.twitter.com/QRb6nqPMOc
इसके अलावा सबसे अजीब बात यह है कि 1857 के विद्रोह को भी मुग़लों की ही देन बताने की कोशिश की गई है। यहाँ लोगों के इतिहास ज्ञान पर सवाल खड़ा करने वाली राणा सफ़वी को ख़ुद इतिहास सीखने की ज़रूरत है। शायद राणा सफ़वी ने अकबर और जोधा की शादी को लेकर ऐसा लिखा है। मुग़ल राजाओं में किसी भारतीय से शादी करने वाला अकबर पहला बादशाह था और उसका बेटा जहाँगीर जोधा की कोख से ही पैदा हुआ। लेकिन, जोधा-अकबर के तथाकथित रोमांस को लेकर धारणा बनाते समय यह बात हमेशा छिपा दी जाती है कि यह पूरी तरह से एक राजनीतिक शादी थी।
जोधा के पिता आमेर के राजा भारमल अकबर के साले शरीफुद्दीन मिर्जा से परेशान थे। इसके बाद आमेर ने एक संधि के तहत अपने राज्य को मुग़लों को समर्पित कर दिया और अकबर-जोधा की शादी भी इसी का परिणाम थी। जोधा को शादी के बाद मरियम-उज़-ज़मानी नाम से जाना गया। यहाँ राणा सफ़वी इसी तरह की राजनीतिक शादियों को मुग़लों की तथाकथित भारतीयता से जोड़ रही हैं। अकबर ने और भी कई शादियाँ की, और इसके बाद भी मुग़ल राजाओं और राजपूत स्त्रियों की शादियाँ हुई लेकिन वे सभी राजनीतिक कारणों से हुईं। यह मुग़लों की और राजपूतों दोनों की ही मज़बूरी थी। मुग़ल लगातार शक्तिशाली होते जा रहे थे और कई राज्य उनसे सीधे उलझना नहीं चाहते थे। इसी तरह मुग़ल भी लड़ाइयों से बचते हुए अपनी सीमाएँ बढ़ाते जा रहे थे।
अब आते हैं 1857 के विद्रोह पर। चूँकि उस समय तक मुग़ल राज्य शक्तिहीन हो चुका था और बहादुर शाह जफ़र की कुछ ख़ास ताक़त बची नहीं थी। मराठों ने मुग़लों को पस्त कर रखा था और अंग्रेजों ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी। हाँ, दिल्ली में अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर की सेना ज़रूर अंग्रेजों से लोहा ले रही थी लेकिन जब 14 सितम्बर को अंग्रेज लाल किले पर पहुँचे, तब तक भयभीत बादशाह अपने पुरखे हुमायूँ के मक़बरे में जाकर छिप चुका था। झाँसी से लेकर आरा और ग्वालियर तक विद्रोह हुए और बहादुर शाह कहीं भी दृश्य में नहीं था। राणा सफ़वी ने यह भी गलत लिखा है कि 1857 की लड़ाई में बहादुर शाह ज़फर को ‘हिंदुस्तान का बादशाह’ मान कर पहला स्वतंत्रता संग्राम लड़ा गया था- यह केवल गंगा-जमुना दोआब के क्षत्रपों का निर्णय था, जबकि आज़ादी की वह लड़ाई चटगाँव के कम्पनी सिपाहियों और आरा में कुँअर सिंह से लेकर काठियावाड़ तक धधक रही थी, और यह लोग अपनी आज़ादी के लिए लड़ रहे थे, मुगलों की गुलामी करने के लिए नहीं।
बहादुर शाह ज़फर को जब अपनी गद्दी जाने का डर सताने लगा, तब जाकर वो सक्रिय भी हुआ- वरना तो सालों तक तो उसने कभी दरबार तक लगाने की भी कोशिश नहीं की थी। इसके बाद लेखिका लिखती हैं कि 16वीं से लेकर 18वीं शताब्दी तक मुग़ल विश्व सबसे अमीर साम्राज्य था। क्या यह समृद्धि मुग़ल अफ़ग़ानिस्तान और अरब से लेकर आए थे? क्या मुग़लों ने अरब से धन लाया, जिससे भारत समृद्ध हुआ? उनके पूर्वज तो उलटा भारत को लूट कर गए थे- बल्कि मुग़ल तो हमेशा से अपने आप को लुटेरे, हत्यारे और बलात्कारी तैमूर का वंशज कहलाने में फख्र महसूस करते थे, ऐसा उनके समय के दस्तावेजों से भी पता चलता है। शासन भले ही मुग़लों का था लेकिन समृद्धि हिंदुस्तान में पहले से ही थी, जो इस्लामी शासनकाल में समय के साथ कम ही होती गई।
राणा सफ़वी एक फ्रेंच पर्यटक के हवाले से लिखती हैं कि विश्व के कोने-कोने से सोना-चाँदी भारत में आते थे। क्या यह नया था? दक्षिण भारत और रोम के बीच व्यापक व्यापार को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत इस मामले में हज़ारों वर्ष पूर्व से ही अग्रणी था। रोम से व्यापारी भारतीय मसालों व सुन्दर जानवरों के लिए आते थे और बदले में सोने के सिक्के देते थे- और ऐसा मैं नहीं कह रहा, चाचा नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ में लिखा है। ऐसे कई रोमन सिक्के आज भी मौजूद हैं, जिसमें रोम के सम्राट अगस्टस के चित्र हैं। अतः भारत में दुनिया के कोने-कोने से सोने-चाँदी का आना कोई नई बात नहीं थी। बल्कि, रोमन साम्राज्य के समय हिंदुस्तान इतना सोना खींच रहा था कि भारत से व्यापार जारी रखने के लिए उन्हें अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करना पड़ गया।
आगे भारत की जीडीपी की बात की गई है लेकिन उससे पहले एक और झूठा नैरेटिव यह गढ़ने का प्रयास किया गया है कि हिन्दू अमीर होते थे और सारे धन उन्हीं के पास था। यह एक तर्क के रूप में बेहद बेतुका है। यह ऐसा ही है जैसे कोई यह तर्क दे कि रोम में सारा धन रोमन लोगों के पास था। यह ऐसा ही है जैसे कोई इतिहासकार यह सवाल करे कि मंगोलिया में सारी संपत्ति मंगोलों के पास ही क्यों थी? हिन्दू और इससे निकले बौद्ध, जैन व सिख सम्प्रदाय के लोग भारत के मूल निवासी हैं- ऐसे में आज से 500 वर्ष पहले की बात करते हुए यह पूछना बेमानी ही है कि भारत की संपत्ति इन लोगों के अधिकार में क्यों थी। अब आते हैं जीडीपी वाली बात पर। लेखिका ने ‘अंगस मैडिसन’ के हवाले से दर्शाया है कि भारत की जीडीपी सन 1600 से लेकर 1870 तक बढ़ती रही। इसके लिए एक तालिका पेश की गई है। लेकिन, इसमें एक लोच है।
इस तालिका में दिखया गया है कि सन 1600 में भारत की जीडीपी $74,250 मिलियन थी, जो सन 1700 में $90,450 मिलियन हो गई और अंततः 1870 में $134,882 मिलियन हो गई। अगर इन आँकड़ों की बात करें तो पहली नज़र में भारत की जीडीपी बढ़ती दिख रही है। लेकिन, क्या आपको पता है कि ब्रिटिश राज आने के बाद 1913 में भारत की जीडीपी इसी आँकड़े के हिसाब से $204,221 मिलियन डॉलर हो गई थी? राणा सफ़वी से बस एक सवाल, इसका क्रेडिट किसे दिया जाएग- मुग़लों को या फिर ब्रिटिश को? जहाँ सन 1600 में भारत की जीडीपी विश्व का 22.4% थी, सन 1820 में यह घट कर 16.1% हो गई।
इससे साफ़ पता चलता है कि भारत जिस तरह पहले विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा था, मुग़लों के समय अगर कुछ काल को छोड़ दिया जाए तो उस प्रतिस्पर्धा में भारत लगातार पिछड़ते चला गया। हाँ, शेरशाह सूरी द्वारा अपनाए गए कुछ वित्तीय नियम-क़ानून को जारी रख कर मुग़लों ने अर्थव्यवस्था में सुधार ज़रूर किए लेकिन बाद में मंदिरों के विध्वंस, सामूहिक हत्याकांड, बलात्कार और व्यापक लूटपाट की वजह से भारत समृद्धि और अमीरी के मामले में पीछे छूट गया। नीचे दिए गए इस ग्राफ को देखिए, जो ‘अंगस मैडिसन’ के आँकड़ों पर ही आधारित है। इसमें आप साफ़-साफ़ देख सकते हैं कैसे जब यूरोप और अमेरिका अपना दबदबा बढ़ा रहा था, भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक रेस में लगातार पिछड़ती जा रही थी। मुगलों के ‘मेहरबानी काल’ में ही चीन ने हमें पछाड़ा, और उससे पहले मुग़लों के मज़हबी बिरादरों दिल्ली सल्तनत के आक्रमण और शासन काल में भी कभी दुनिया की चोटी पर रही हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत आप देख सकते हैं।
सन 1600 से लेकर 1870 तक विश्व में भारत की जीडीपी का दबदबा गिरता चला गया (केसरिया रंग की लकीर)
भारत की अर्थव्यवस्था का विश्व में इतना दबदबा था कि यह विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी और मौर्य एवं गुप्त काल से यह दबदबा बरकरार रहा। आख़िर क्या कारण है कि ‘अच्छे इस्लामिक आक्रांता’ और ‘बुरे इस्लामिक आक्रांता’ कौन थे, इस पर बहस कर इसकी कोशिश की जा रही है कि हिंदुस्तानी मुग़लों के शुक्रगुज़ार बनें? अगर हमारे घर में कोई घुस आए और हमारी संपत्ति पर ऐश करते हुए हमें घर का नौकर बना दे, क्या इसे हमारी समृद्धि के रूप में गिना जाएगा? क्या मेरे घर में घुस आने वाले डाकू की हम पूजा करें क्योंकि उसने मेरे धन को लूट कर अपने घर ले जाने की बजाए मेरे घर में बैठ कर ही अय्याशी की? नहीं, मुग़ल और ब्रिटिश को अलग कर के नहीं देखा जा सकता। केवल उनके द्वारा की गई हिंसा का स्तरों को मापा जा सकता है, उसकी तुलना की जा सकती है।
इस लेख की सबसे अजीब बात यह है कि दारा शिकोह द्वारा लिखी गई पुस्तक का तो जिक्र मुग़लों की महानता दिखाने के लिए किया गया है लेकिन ख़ुद शिकोह का क्या हुआ, इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। ज़ंजीर में बँधे शिकोह को मैले हाथी पर बिठा कर दिल्ली की सैकड़ों पर घुमाया गया था। पर्यटक ‘निक्कोलाओ मनुक्की’ लिखते हैं कि जब औरंगजेब के आदेश पर दारा शिकोह का कटा हुआ सिर उसके सम्मुख लाया गया तो उसने उस पर तलवार से तीन वार किया और उस सिर को कुचल डाला। इसके बाद सैनिकों को आदेश दिया गया कि जेल में बंद शिकोह (और औरंगज़ेब) के बूढ़े बाप शाहजहाँ को यह सिर तब पेश किया जाए, जब वह भोजन करने बैठे। मुग़लों के भारत में धर्मनिरपेक्षता की सज़ा यही थी।
Emperor Aurangzeb receiving Dara Shikoh’s head. Date unknown.. The mughal throne was never about the eldest/first born son. The mughal throne was always about the Son who had the Military might.. #MughalHistorypic.twitter.com/ZIRnqYJwoI
आज एक बार फिर से यह याद दिलाना ज़रूरी है कि भारत में मुग़लों द्वारा किए गए जिन कार्यों को अच्छा गिनाने की कोशिश की जा रही है, वह सब राजनीतिक रूप से ख़ुद को मजबूत करने के लिए किए गए थे। मुग़ल ख़ुद यहीं के होकर रह गए क्योंकि उन्हें यहाँ अय्याशी और राज करना था। उन्होंने दिल्ली-आगरा की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहाँ राजधानी स्थापित की और बाकी के इस्लामिक आक्रांताओं की तरह ही मंदिरों को ध्वस्त किया, बलात्कार किए, जबरन मतांतरण को बढ़ावा दिया, हिन्दुओं पर जज़िया लगाया गया और इस्लाम कबूल न करने पर नृशंस यातनाएँ दी गईं। भारत की अर्थव्यवस्था के सच से अधिक झूठ में पगे हुए आँकड़े पेश कर देने से मारकाट मचा कर सत्ता हथियाने वाले मुग़ल महान नहीं हो जाएँगे। हमारे घर में आकर, हमें ही मार कर, हमारी संपत्ति पर अय्याशी करने वाले को महान कैसे कह दें?
लखनऊ में एक मुस्लिम महिला मरीज की मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा अस्पताल में तोड़फोड़ किए जाने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि सायरा बानो के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके परिजन करीब 100 लोगों के साथ लखनऊ के केजीएमयू की लारी कार्डियोलॉजी में घुस आए और जमकर उपद्रव किया। इसके बाद डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर दिया।
डॉक्टरों का दावा, महिला ‘ब्रेनडेड’ हालत में लाई गई
डॉक्टरों का दावा है कि सायरा बानो को जब रात में अस्पताल लाया गया तो वह ‘ब्रेनडेड’ हालत में थीं- यानी उनका दिमाग पहले से ही मृत था। इसके बावजूद परिजनों की तसल्ली के लिए पेसमेकर भी लगाया गया। लेकिन फिर भी तीमारदार संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टरों-कर्मचारियों के लाख समझाने पर भी वेनहीं माने।
देखते-ही-देखते वो अपने साथ एक भीड़ ले आए, जिसकी संख्या विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में 50 से लेकर 100 तक बताई जा रही है। भीड़ ने अस्पताल में तोड़फोड़ और मारपीट शुरू कर दी, जिसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों में अफ़रा-तफ़री मच गई। अधिकांश डॉक्टरों ने क्लोक रूम में छिप कर जान बचाई, वहीं दो डॉक्टरों को बाथरूम में शरण लेनी पड़ी। तीमारदारों को शांत करने के लिए 3 थानों की पुलिस लगानी पड़ी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में तो दावा किया गया है कि भीड़ का आवेश इतना उग्र था कि पुलिस भी लाचार खड़ी देखती ही रही। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुलिस के सामने भी तीमारदारों का दुर्व्यवहार जारी रहा।
डॉक्टरों ने काम रोका
हिंसा से बिफरे रेजिडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएँ ठप कर दीं। गंभीर हृदय रोगियों को ट्रॉमा सेंटर ले जाने को कह दिया गया। ओपीडी सेवाएँ देर से शुरू हुईं, और इमरजेंसी सेवाएँ शाम तक बाधित रहीं। शाम को जब कार्डियोलॉजी के बाहर पीएसी तैनात कर दी गई और प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस चौकी लगाने का आश्वासन दिया, तब जाकर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएँ शुरू कीं।
महाराष्ट्र में नागपुर और पांडुरना के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 47 पर शहर से लगभग 50 किमी दूर चतरपुर में एक उभरती मॉडल का शव पाया गया। उसके सिर और चेहरे को बुरी तरह से कुचला गया था। मृतका की पहचान 20 वर्षीया ख़ुशी परिहार के रूप में हुई है। ख़ुशी परिहार ने शहर में कई फैशन शो में भाग लिया था।
इस संबंध में केलवद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जाँच शुरू की। शुरुआती जाँच में ख़ुशी के बॉयफ्रेंड अशरफ़ शेख़ का नाम सामने आया, जो गिट्टीखदान के कथित ड्रग्स का धंधा करने वाले का बेटा है। पुलिस के अनुसार हत्या के बाद सबूत को नष्ट करने का भरपूर प्रयास किया गया लेकिन अशरफ़ गिरफ़्तारी से बच नहीं पाया।
Khushi(20) was brutally murdered by asharaf shaikh(28)[now arrested]; son of afsar Shaikh(known as afsar anda & is famous fr supplying ganja).
they were in live in relation frm last few months.
घटनास्थल पर मृतका की पोशाक को देखकर पुलिस ने अंदाज़ा लगाया कि उसका संबंध शहरी क्षेत्र से है। जल्द ही पुलिस ने आसपास के थानों में गुमशुदगी की जाँच शुरू कर दी। मृतका के शरीर पर तीन टैटू थे। पहला टैटू- ‘ख़ुशी’ नाम से उसकी पीठ पर था, दूसरा टैटू- उसके सीने पर मुकुट के साथ ‘क्वीन’ था। तीसरा टैटू- उसके एक हाथ में – ‘आशु’ नाम से देखा गया।
मृतका की पहचान करने में इन तीनों टैटुओं ने पुलिस की काफ़ी मदद की। एक मुखबिर ने पुलिस को बताया कि यह शव शायद एक उभरती मॉडल खुशी परिहार का है। इसके बाद पुलिस ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी सर्च किया और टैटू से उसकी पहचान का पता लगाया।
जब पुलिस ने ख़ुशी की तस्वीरों में अशरफ़ को देखा तो उसकी तलाश शुरू कर दी। फिर अशरफ़ को जल्द ही केलवद पुलिस ने ढूँढ़ निकाला।
मोबाइल लोकेशन से खेल खत्म!
अशरफ़ से पूछताछ के दौरान पुलिस को यह अनुमान हो गया था कि वो उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, ख़ुशी शुक्रवार (12 जुलाई) की रात 9 बजे उससे मिली थी। जब पुलिस ने उसके मोबाइल की लोकेशन चेक की, तो पता चला कि वो दोनों शुक्रवार को देर रात तक एकसाथ थे।
उभरती मॉडल ख़ुशी परिहार की बेरहमी से की गई हत्या (तस्वीर सौजन्य: नागपुर टुडे)
पुलिस की सख्ती के बाद अशरफ़ ने क़बूल किया कि वो और ख़ुशी कलामना के एक ढाबे में गए थे जहाँ उन्होंने शराब पी थी और खाना खाया था। वहाँ से वे पांढुर्ना की ओर चले गए जहाँ ख़ुशी की अन्य लोगों से दोस्ती को लेकर उनमें आपस में झगड़ा हो गया। इसी झगड़े के बाद उसने खुशी की हत्या कर दी।
अशरफ़ ने पुलिस को बताया कि आने वाले 10 दिनों में उनकी शादी होने वाली थी। अशरफ़ ने हाल ही में किराए पर गिट्टीखदान में एक फ्लैट भी लिया था, जहाँ ख़ुशी रहती थी। उसने उसे एक मोबाइल और एक कार भी दी थी। इस मामले में पुलिस अन्य एंगल से भी जाँच कर रही है।