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भक्ति की शक्ति: RaGa के इस्तीफे के विरोध में पार्टी कार्यकर्ता ने की आत्‍महत्‍या की कोशिश

राहुल गाँधी के इस्‍तीफे से नाराज एक कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ने कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर फाँसी लगाकर आत्‍महत्‍या करने की कोशिश है। इससे वहाँ पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भावुक कार्यकर्ता ने आत्महत्या करने के लिए खुद को वहाँ एक पेड़ से लटका लिया। हालाँकि, मौके पर मौजूद लोगों ने समय रहते उसे नीचे उतार लिया। कार्यकर्ता बार-बार राहुल गाँधी से इस्‍तीफा वापस लेने की माँग कर रहा था। उसका कहना था, “राहुल गाँधी इस्‍तीफा वापस लें, नहीं तो मैं फाँसी लगाकर जान दे दूँगा।”

देश के कई हिस्सों से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के राहुल गाँधी के इस्तीफे के खिलाफ प्रदर्शन करने की खबरें सामने आ रही हैं। हाल में बिहार के कुछ कार्यकर्ताओं ने अपने खून से राहुल गाँधी को खत लिखकर आग्रह किया था कि वे इस्तीफा वापस ले लें।

लोकसभा में मिली करारी हार के बाद से ही राहुल गाँधी लगातार इस्तीफे की पेशकश कर रहे हैं। पार्टी की तरफ से राहुल गाँधी को मनाने के लिए कई स्तर पर कोशिशें जारी हैं। उन्हें कॉन्ग्रेस के आम कार्यकर्ता से लेकर वयोवृद्ध कॉन्ग्रेसी नेता तक समझाने की कोशिश कर रहे हैं। इन नेताओं में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत तक का नाम भी शामिल है। दोनों नेता बारी-बारी से हाल में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात कर चुके हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी बीते दिनों इनके खिलाफ नाम न लेते हुए गुस्सा जाहिर कर चुके हैं।

मजहबी नारे चिल्लाती, मंदिर तोड़ती भीड़ को मजहब बताने में शर्म क्यों आती है?

‘एक समुदाय के लोग’ मंदिर में घुस गए और तोड़फोड़ मचाई। वाह! कितना क्यूट वाक्य है। अंग्रेजी वाले और भी क्यूट लाइन्स लिखते हैं, ‘पीपल फ्रॉम अ कम्यूनिटी’। समस्या क्या है? जब भीड़ की एक निश्चित पहचान है, और तुम्हें पता है कि ये भीड़ एक खास कम्यूनिटी या समुदाय विशेष की है, तो फिर उसके नामकरण में समस्या क्यों?

कब तक मीडिया ऐसी बेहूदगी करता रहेगा? जब आरोपित मजहबी नाम वाला हो, जब भीड़ इस्लामी हो, तो ‘अ कम्यूनिटी’ या ‘समुदाय विशेष’ क्यों लिखा जाता है? आखिर ऐसा क्या विशेष है इस समुदाय में? एक विचित्र तर्क यह भी आता है अगर मीडिया ‘उसका मजहब लिखेगी तो साम्प्रदायिक तनाव बढ़ जाएगा।’ क्या बेहूदी दलील है!

मतलब, हिन्दू नाम वाले के हाथों चोर को मारा जाए तो उसमें ‘नो जय श्री राम’ (#NoJaiSriRam)आ जाते हैं, कठुआ में आठ हिन्दू नाम वाले अपराधी संलिप्त हों तो पूरा सनातन धर्म ही सवालों के दायरे में आ जाता है, त्रिशूल पर कंडोम लगा कर वायरल किया जाता है, और जो हिन्दू नहीं हैं वो भी ‘आई एम अ हिन्दू, आई एम अशेम्ड’ की तख्ती गले में टाँगे नाचने लगते हैं।

लेकिन, एक इस्लामी भीड़ मथुरा के भरत यादव की जान ले ले, मँगरू को तीन मजहबी चाकुओं से गोद दें, सरे राह प्रेम करने के लिए हिन्दू लड़के को कट्टरपंथी काट दे, दिल्ली में मंदिर पर ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाती एक भीड़ चढ़ाई कर दे, मौलवी मस्जिद के भीतर किसी बच्ची का रेप करे, बंगाल में लगभग हर जिले में दो समुदायों के दंगे हों, तो वहाँ मजहब के नाप का लोप हो जाता है। कहा जाता है कि शांति भंग हो जाएगी!

लेकिन शांति ही तो भंग वैसे भी हो रही है। एक फेसबुक पोस्ट समाने आया जिसमें हिन्दुओं पर लगातार होते रहे आक्रमणों को सीधे शब्दों में जताया गया है:

1000 साल पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
700 साल पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
30 साल पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
6 महीने पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
आज हमारे मंदिर को तोड़ा गया
फिर भी, हम ही बर्बर बहुसंख्यक हैं।

ये पोस्ट उन लाखों लोगों के मन की सामूहिक अभिव्यक्ति है जो यह कह रहे हैं कि हिन्दुओं की सहिष्णुता का फ़ायदा उठाते-उठाते भारत के कुछ लोगों का गिरोह पीड़ित को ही आक्रांता बताने पर तुला हुआ है। जिस तरह के नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं, उसके अनुसार आने वाले दिनों में, हो सकता है कि नई थ्योरी के अनुसार, बताया जाएगा कि गोरी, गजनवी, खिलजी, बाबर आदि तो किसी दूसरे देश में चिल कर रहे थे, उसे एक हिन्दू राजा ने अपने घोड़े से बाँध कर घसीटा था, और उसी अपमान का बदला लेने के लिए उसने भारत के तमाम मंदिरों को तोड़ा, गाँवों को उजाड़ा, नालंदा को आग लगा दिया, यहाँ की बहू-बेटियों का बलात्कार किया।

क्योंकि यही हो ही रहा है। एक आतंकी जब सेना द्वारा घेर कर मारा जाता है तो बताया जाता है कि वो तो बचपन से पढ़ने में तेज था, गालिब की शायरी सुनाता था, लेकिन एक दिन सेना के एक अधिकारी ने उसे कान पकड़ कर उठक-बैठक करने को कहा और वो आतंकवादी बन गया। धन्य हैं ऐसे माँ-बाप जो अपने बच्चों के आतंकी बनने को इस तरह के कुतर्क से जस्टिफाय करते हैं, और धन्य है हमारा पाक अकुपाइड पत्रकार गिरोह जो हर आतंकी के बाप के पजामे के नाड़े की लम्बाई निकाल लेता है और कहता है वो नाड़ा तो किसी हिन्दू टेलर ने सिला था।

यही वो दोगलापन है जिसके कारण मेनस्ट्रीम मीडिया के एक हिस्से को लगातार गालियाँ पड़ती हैं और वो निर्लज्ज होकर अपने मालिक के ‘बदनामी में भी तो नाम है’ वाले ध्येय वाक्य से चलते रहेंगे। आखिर एक आतंकी विचारधारा को, एक ऐसी भीड़ को जिसके लिए ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए मंदिर पर हमला बोलना सामान्य-सी बात है, उसको किस लिहाज से डिफेंड किया जा रहा है?

हर मजहबी आतंकी नहीं है, हर मजहबी मंदिर नहीं तोड़ रहा, लेकिन जो तोड़ रहे हैं वो कौन हैं? वो ‘तीन शब्दों वाला’ विशेष नारा किस मजहब का है? जिस आसानी से दो किशोरों के द्वारा बनाया विडियो, जिसमें एक लड़का दूसरे को ‘जय श्री राम’ बोलने कहता है, सारे हिन्दुओं के सर मढ़ दिया जाता है, वही सहजता, एक भीड़ के ‘मजहबी नारे’ चिल्लाने के बाद भी क्यों नहीं दिखाई जाती?

ये आतंकी भीड़ अपने आप को क्या समझती है? ये भीड़ और इस मजहब के वो लोग जो बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर बुक्का फाड़ कर अभी भी अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक खेलते रहते हैं, वो क्या भूल जाते हैं कि पीपल का एक पेड़ भी सनातन आस्था का प्रतीक है? वो क्या नहीं जानते कि मंदिर चाहे दो सौ फीट ऊँची हो, या दस फीट, वो सनातन आस्था का ही प्रतीक है, न कि उसकी ऊँचाई से आस्था कम या ज़्यादा हो जाती है?

फिर ये दोगले विचारक, ये बर्बाद लिबरपंथी, ये माओवंशी लेनिन की नाजायज कामपंथी वामभक्त औलादें किस हिसाब से हिन्दुओं के आरोपित होने पर, गले में तख्तियाँ लपेटे, अपने स्थान विशेष में छुपाई मोमबत्तियाँ फटाक से निकाल कर हैशटैग-हैशटैग करने लगते हैं, लेकिन हिन्दुओं की लिंचिंग पर वो जलती हुई मोमबत्तियाँ वापस अपने स्थान विशेष में रख लेते हैं? क्या जलन नहीं होती इन्हें? इतना दोगलापन क्या एक साथ हो जाने पर इनके दिमाग पर असर नहीं करती?

ये और कुछ नहीं है, ये समाज को गृहयुद्ध की ओर ढकेलने का कुत्सित प्रयास है। समुदाय के लोगों को बताते रहो कि तुम्हारे मजहब का एक चोर या कोई आतंकी भी मरे तो वो हिन्दुओं द्वारा तुम्हारे भीतर डर फैलाने का प्रयास है, जबकि तुम्हारे कट्टरपंथी भाई किसी की जान ले लें, तो वो बात इतनी सामान्य है कि उस पर चर्चा भी मत करो।

ये तो नहीं चलेगा। हमारे मंदिरों के ऊपर पत्थरबाजी, और उसके सामने खड़े हो कर ‘अल्लाहु अकबर’ की बात तो नहीं होगी। तबरेज चोर हो या पाँच वक्त का नमाजी, उसकी हत्या सही नहीं है, लेकिन उसको रोहित वेमुला बनाने वाले लोग जान लें, कि हत्या तो मंगरू की भी सही नहीं है, हत्या तो मथुरा के लस्सी विक्रेता की भी सही नहीं है।

इस आतंकी भीड़ को हिम्मत इन्हीं दोगले विचारकों से मिलती है क्योंकि वो जानते हैं कि उनका हर कुकर्म ट्विटर, फेसबुक या टीवी चैनल के स्टूडियो में बैठे किसी लिबरपंथी के द्वारा ‘समुदाय विशेष’ और ‘अभी इलाके में तनाव है’ के बीच भुला दिया जाएगा। इस भीड़ का एक चेहरा है, बिलकुल है, क्योंकि इस भीड़ का नारा वही है जो आईसिस का नारा है। इसके हाथों में वही पत्थर है जो कश्मीर के आतंकियों के बचाव में उतरे लोगों के हाथों में होता है। ये उतने ही बेखौफ हैं जितने बेखौफ वो आत्महंता आतंकी होते हैं जो देह पर बम बाँध कर बहत्तर हसीनों के योनि और स्तनों से लिपटने की ख्वाहिश पाले अपने परखच्चे उड़ा लेते हैं।

जब किसी विडियो में ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाने पर ये ज्ञानी लोग हमें बताते हैं कि ये एक धार्मिक नारे का वेपेनाइजेशन है, यानी नारे को हथियार बनाया जा रहा है, तो इन ज्ञानियों के यह भी तो बताना चाहिए कि मंदिर में घुसते, पत्थरबाजी करते, मूर्तियाँ तोड़ते उतरी भीड़ का नारा ‘अल्लाहु अकबर’ वेपेनाइज हुआ है या नहीं। ये नहीं बता पाएँगे क्योंकि इनके स्थान विशेष में दर्द होने लगता है।

अगर हमारे समय के लिबरल और छद्मबुद्धिजीवी इस तरह से सेलेक्टिव होते रहेंगे, वो लगातार एक लाइन पकड़ कर चलते रहेंगे, सारे हिन्दुओं के सर पर कुछ अपराधियों का अपराध बाँटेंगे लेकिन मजहबी भीड़ को फ्री पास दे देंगे, तो इनकी साख तो जाएगी ही, उसके साथ ही ‘सामाजिक सद्भाव’ नाम के शब्दांश कम से कम हिन्दू और दूसरे खास मजहब के संदर्भ में तो इस्तेमाल होने लायक नहीं रहेंगे।

दुर्भाग्य से तथाकथित गंगा-जमुनी तहजीब का वही हाल है जो वास्तव में इन दोनों नदियों का है। गंगा बह रही है, और यमुना वालों ने इतना कचरा जमा कर लिया है कि वो नाला बन कर सूखने के कगार पर है। यमुना में जो बह रहा है, वो भी काले रंग का अपशिष्ट पदार्थ है जो समाज का हिस्सा हो नहीं सकता। अपने दम पर गंगा इसे जिंदा नहीं कर सकती। जब तक समुदाय विशेष और उसके आतंक को डिफेंड करने वाले चिरकुट और लम्पट लोग अपनी आदत से बाज नहीं आएँगे, गंगा-जमुनी तहजीब आतंकियों के दुष्कृत्यों को ढकने का एक जरिया मात्र बन कर रह जाएगा।

‘मंगलसूत्र-सिंदूर वाली’ नुसरत जहां को ISKCON से न्यौता, रथयात्रा में होंगी विशेष अतिथि

तृणमूल सांसद और बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां इस बृहस्पतिवार (जुलाई 04, 2019) को कोलकाता में रथयात्रा के मौके पर विशेष अतिथि होंगी। निखिल जैन से शादी करने के बाद सिंदूर-मंगलसूत्र सहित ‘हिन्दू’ पहनावे में संसद पहुँचने वालीं नुसरत को पिछले कुछ दिनों में कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार होना पड़ा है। जहाँ देवबंद से पढ़े मौलाना असद कासिम ने सीधे-सीधे कह दिया कि शरीयत इस्लाम के बाहर शौहर ढूँढने की इजाज़त नहीं देती, वहीं सोशल मीडिया पर भी कई कट्टरपंथियों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया था। तब पलटवार करते हुए नुसरत जहां ने खुद को ‘नए समावेशी हिंदुस्तान’ का प्रतिनिधि बताया था।

ISKCON ने कहा शुक्रिया, नुसरत की रथयात्रा में शामिल होने की अपील

रथयात्रा की आयोजक गौड़िया वैष्णव संस्था ISKCON ने नुसरत जहां का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वह अन्य लोगों को आगे का मार्ग दिखला रहीं हैं। ISKCON के प्रवक्ता राधारमण दास ने इस आशय से ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने नुसरत का एक वीडियो भी अपलोड किया।

सोमवार (जुलाई 01, 2019) को रिलीज़ किए एक वीडियो में TMC सांसद नुसरत जहां रथयात्रा के आयोजन के लिए ISKCON को बधाई देने के साथ शहर के नागरिकों से उनके साथ इसमें शामिल होने की अपील करतीं हैं। ISKCON इसका आयोजन 1971 से करता आ रहा है। इस वर्ष मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी होंगी, जो इसका उद्घाटन करेंगी।

सामाजिक संदेश भी होगा

इस साल इस रथयात्रा का प्रयास भक्तों का ध्यान परिवारों से दूर वृद्धाश्रमों में जीवन काटने को मजबूर बूढ़े लोगों के प्रति युवाओं के कर्त्तव्य के प्रति आकर्षित करना भी होगा। कोलकाता में आयोजित होने वाली इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ (श्री कृष्ण), उनके बड़े भाई भगवान बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा के रथ को लाखों लोग खींचेंगे। अल्बर्ट रोड स्थित ISKCON मंदिर के पीछे हंगरफोर्ड स्ट्रीट से शुरू यह यात्रा शहर के सभी महत्वपूर्ण मार्गों से होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुँचेगी। यहाँ भगवान जगन्नाथ के दर्शन 11 जुलाई तक किए जा सकेंगे। 12 जुलाई को उत्तरायण शुरू होने के बाद रथ मंदिर में लौट आएँगे।

मंदिर में तोड़फोड़: AAP MLA इमरान हुसैन ने दिया मॉब का साथ, किसी को नहीं रोका – चश्मदीद का दावा

दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित हौजकाजी के एक मंदिर में पत्थर बरसाने और तोड़ फोड़ करने वाली इस्लामी भीड़ को आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन का समर्थन होने की बात सामने आई है। इस घटना के दौरान मूर्तियों को विखंडित कर दिया गया था और अल्लाहु अकबर के नारे भी लगाए थे। चश्मदीदों के मुताबिक विधायक हुसैन भी इस सांप्रदायिक भीड़ के समर्थन में मौके पर पहुॅंचे थे। फिलहाल इलाके में हालात सामान्य है, लेकिन पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुप्पी हैरान करने वाली है। टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार राज शेखर झा के अनुसार, इस मामले में 3 बदमाशों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनमें से एक कथित तौर पर नाबालिग है। राज शेखर ने बताया कि समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों के समर्थन और बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा होने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था।

खबर के मुताबिक, चांदनी चौक इलाके में लाल कुआँ में 30 जून को दोपहर 12 बजे के करीब इस्लामी भीड़ ने दुर्गा माता मंदिर पर धावा बोलकर मूर्तियों को विखंडित कर दिया। इस भीड़ में तकरीबन 300 से 400 लोग शामिल थे। जब स्थानीय हिंदुओं ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, तो इस्लामी भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया।

इस मामले में एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इसके मुताबिक, यह अकस्मात घटी घटना नहीं थी। जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि सुनियोजित तरीके से घटना अंजाम दी गई। बड़ी संख्या में दूसरे मजहब को इकट्ठा करने के लिए एक समुदाय विशेष के शख्स की मौत की झूठी खबर पहले व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए फैलाई गई। इससे जाहिर है कि इस क्षेत्र में हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की योजना पहले से ही बनाई जा रही थी।

इस बीच, ‘जन की बात’ के सीईओ प्रदीप भंडारी ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें एक चश्मदीद ने बताया कि समुदाय विशेष के नशे में धुत कुछ युवक उनके घर के नीचे इकट्ठा हो गए थे और जब आस-पास के लोगों ने उन्हें मंदिर के अंदर जाने से रोकने की कोशिश की तो उन्होंने करीब 400 लोगों को हमला करने के लिए बुला लिया। चश्मदीद का कहना है कि इस दौरान आप विधायक इमरान हुसैन भी वहाँ आए और उन्होंने इस्लामी भीड़ का समर्थन किया।

प्रदीप भंडारी ने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें मंदिर के पुजारी कह रहे हैं कि अगर दरवाजे बंद नहीं किए जाते तो वो लोग अंदर घुसकर सबकी हत्या कर देते। वो लोग लगातार पत्थर फेंक रहे थे और गालियाँ भी दे रहे थे।

पुलिस ने इस्लामी युवकों द्वारा मंदिर पर हमले की पुष्टि की है। केंद्रीय मंत्री और चांदनी चौक से भाजपा सांसद डॉ हर्षवर्धन ने मंगलवार (जुलाई 2, 2019) सुबह घटनास्थल का दौरा किया और शांति की अपील करते हुए घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस घटना को अंजाम देने वालों को माफ नहीं किया जा सकता। हर्षवर्धन का कहना है कि उन्हें बताया गया है कि पुलिस पहले से ही इस मामले में कार्रवाई कर रही है। दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और सजा दी जाएगी।

कोयला घोटाला: नवीन जिंदल सहित 5 के खिलाफ धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय करने का आदेश

दिल्ली की विशेष अदालत ने सोमवार (जुलाई 1, 2019) को कोयला खंड घोटाला मामले में उद्योगपति और कॉन्ग्रेस नेता नवीन जिंदल और उनकी कंपनी के ही चार पूर्व सहित वर्तमान अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का आदेश दे दिया है।

मध्य प्रदेश में अर्टन नॉर्थ कोयला खदान के आवंटन से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने जिंदल और चार अन्य के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है।

इस मामले में जिंदल के अलावा स्टील एंड पावर लिमिटेड के पूर्व निदेशक सुशील मारू, पूर्व उपप्रबंध निदेशक आनंद गोयल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रांत गुजराल और कंपनी की ओर से हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत अधिकारी डी एन अबरोल के खिलाफ आरोप तय किया जाना है। अदालत ने मामले में आरोपितों के ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से आरोप तय करने की तारीख़ 25 जुलाई तय की है।

जानकारी के लिए बता दें कि झारखंड अमरकोंडा मुर्गा कोयला खंड आवंटन मामले में कथित अनियमितताओं से संबंधित अन्य मामलों में पूर्व कोयला राज्य मंत्री दसारी नायारण राव और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ नवीन जिंदल को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार जनवरी 2007 में आरोपितों ने मध्य प्रदेश में कोल ब्लॉक का अधिकार पाने के लिए स्क्रीनिंग कमिटी के समक्ष गलत तथ्य दिए थे और गलत तरीके से लाभ पाने के कारण कोयला मंत्रालय को धोखे में रखा था, जिसके कारण कोल आवंटन मामले इन आरोपितों के नाम की सिफ़ारिश की गई है।

2 पत्नियों के हत्यारे जमशेद को पुलिस ने किया गिरफ्तार, घटना के बाद से था फरार

कुछ दिन पहले दिल्ली में हुए दो मुस्लिम महिलाओं के मर्डर के बाद से ही फरार चल रहे आरोपित जमशेद आलम को आज (जुलाई 2, 2019) पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जमशेद ने बताया है कि उसकी दोनों पत्नियाँ इस्मत परवीन और जबना आपस में लड़ने के साथ-साथ उससे भी लड़ती थीं, जिस कारण वह काफ़ी परेशान हो गया था। इसलिए उसने पहले अपनी पहली पत्नी इस्मत का गला घोंटा और बाद में जबना को मारा।

घटना को अंजाम देने के बाद जमशेद घर बंद करके अपने बेटे के साथ बिहार चला गया था, लेकिन हफ्ते भर बाद जब जमशेद अपने किसी साथी से मिलने दिल्ली वापस आया तो पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

जमशेद आलम, जैतपुर के सौरभ विहार इलाके की गली नं-7 में अपनी 2 पत्नियों के साथ पिछले दो-तीन महीने से किराए के घर में रहता था। घर में 2 पत्नियों के अलावा जमशेद के साथ उसका 10 साल का बेटा भी रहता था।

घर से शव बरामद होने के बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने जमशेद को उसके घर में आखिरी बार 26 जून को देखा था। जबकि घटना का पता 27 जून की सुबह चला था। पुलिस तब से ही जमशेद की तलाश में जुटी हुई थी, लेकिन उन्हें कामयाबी एक हफ्ते बाद मिली।

चांदनी चौक दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले गिरफ्तार: 3 आरोपितों में 1 नाबालिग भी शामिल

दिल्ली के हौज काजी इलाके में दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ करने के मामले में पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपितों में से एक नाबालिग है, जबकि बाकी दोनों आरोपित बालिग बताए जा रहे हैं। घटना की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में यह तीनों मंदिर में तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं।

गौरतलब है, सोमवार (जुलाई 1, 2019) को पार्किंग विवाद को लेकर हुए झगड़े के बाद घटना ने सांप्रदायिक रूप ले लिया था। इस दौरान पहले पूरे इलाके में अफवाह फैलाई गई कि एक समुदाय विशेष के लड़के की मॉब लिंचिग हुई है और जबरदस्ती जय श्रीराम बुलवाया गया है। बाद में ‘संप्रदाय विशेष‘ की भीड़ इलाके में जमा हुई और उसने पहले मंदिर में फिर थाने में हंगामा किया।

मंदिर में हुई तोड़-फोड़ के बाद पूरे दिन इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन खबरों के मुताबिक शाम के समय लोग सुलह करने आमने-सामने आए और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम ने अपील की कि मंदिर को जो नुकसान हुआ, उसे मजहब विशेष वाले ठीक कराएँ।

इस घटना के बाद से मंदिर में हुई तोड़फोड़ की वीडियो बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिनमें समुदाय विशेष के लोग हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। 

दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा मे इस घटना पर आवाज़ उठाई और मंदिर में तोड़फोड़ की 2 वीडियो ट्वीट कर लिखा, “ये पाकिस्तान नहीं बल्कि दिल्ली के चावड़ी बाजार का हिन्दू मंदिर हैं। यह घटना कल की है, जब धर्म विशेष की भीड़ ने मंदिर में घुसकर वहाँ की मूर्तियों को तोड़ा है। यह काम बदमाशों या गुंडों ने नहीं बल्कि सैकड़ो स्थानीय लोगों की भीड़ ने किया है। उन्होंने अपने धर्म के नारे लगाते हुए मंदिर तोड़ा डाला।

इस घटना के मद्देनजर 2 जुलाई की सुबह केंद्रीय मंत्री व चाँदनी चौक से सांसद हर्षवर्धन भी घटनास्थल पर पहुँचे।

उन्होंने यहाँ पहुँचकर इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताते हुए कहा, “यह घटना माफ़ी लायक नहीं है, मुझे बताया गया है पुलिस पहले से इस मामले पर कार्रवाई कर रही है, और गुनहगारों को जल्द अरेस्ट किया जाएगा। मैं लोगों से सौहार्द बनाए रखने की अपील करता हूँ।

पैंट की चेन खोल कैब ड्राइवर फ़ारूक़ ने की अश्लील हरकत, 21 साल की लड़की ने शेयर किया Video

मुंबई में एक कैब ड्राइवर द्वारा महिला ग्राहक (पैसेंजर) के साथ अजीबोग़रीब व्यवहार करने की बात सामने आई है। 21 साल की युवती ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो डाला, जिसमें कैब ड्राइवर अश्लील हरकतें करता हुआ नज़र आ रहा है। पीड़ित युवती ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी देते हुए अपने पोस्ट में लिखा:

“ये शर्म की बात है। मैंने घंटों इस बारे में सोचा कि इस वीडियो को आप लोगों के साथ शेयर करना चाहिए या नहीं, लेकिन मैं अब इसे शेयर कर रही हूँ। इससे पहले कि आप जज करें कि मैंने कौन से कपड़े पहन रखे थे, मैं आपको बता दूँ कि मैंने नार्मल जीन्स-टॉप ही पहन रखा था। हम लोग सिद्धिविनायक मंदिर जा रहे थे। मैंने दादर से जाते समय इस टैक्सी को हायर किया, जो कि मेरे लिए सबसे बुरा निर्णय साबित हुआ। मेरे साथ मेरी माँ और बहन भी थीं। जैसे ही मैं उसकी टैक्सी में घुसी, ड्राइवर ने अपने पेंट की चेन खोल कर अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दी। उसने मुझे ग़लत निगाहों से घूरना शुरू कर दिया।”

“सुबह के 9.30 हो रहे थे। जहाँ भी ड्राइवर सिग्नल या अन्य कारणों से गाड़ी रोकता, वहाँ-वहाँ उसने अजीबोगरीब अश्लील हरकतें कर के मुझे असहज महसूस कराया। मुंबई में रहते हुए मैंने हमेशा ख़ुद को सुरक्षित महसूस किया है और मैं कभी भी ऐसी घटनाओं के चक्कर में नहीं पड़ी। अब मैं सोच रही हूँ कि अगर ऐसे लोग मेरे जैसी स्थानीय महिला को इस तरह असहज कर सकते हैं और मेरे साथ ऐसी हरकतें कर सकते हैं तो मैं सोच सकती हूँ कि बाहर से यहाँ आने वाले महिलाओं के साथ क्या गुज़रती होगी। दोष शहर का नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों का है।”

“मुझे कैब ड्राइवर की हरकतों के कारण यात्रा के बीच में ही टैक्सी रुकवा कर उतरना पड़ा। वह ड्राइवर मुझे उतरने देने के लिए भी तैयार नहीं था। जब मैंने ज़ोर से डाँटा, तब उसने गाड़ी रोकी और उतरने दिया। मैंने जब उससे पूछा कि आसपास मुंबई पुलिस से कैसे मिल सकती हूँ, तब उसने मुझसे माफ़ी माँगनी शुरू कर दी और बार-बार सॉरी बोलने लगा। उसने अपनी ग़रीबी का हवाला दिया। माफ़ कीजिए, लेकिन ग़रीबी आपको किसी के यौन शोषण का अधिकार नहीं देती। सोचिए अगर शाम या रात का समय होता तो मेरी क्या हालत होती? मैंने FIR दर्ज करा दिया है।”

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SHAME !!!! It took me hours to think if I should share this or not, but I am sharing it now, . (Before you judge me based on what I was wearing I was wearing normal jeans and top) We were on our way from Siddhivinayak temple, We took this local taxi( worst decision ever) taking my mom & sister to Nariman Point on my way from Dadar, This driver as soon as I got into this local taxi, opens his zip ,was staring at me objectifying& was stimulating his genitals ( I wish I could record that) every time he took halt on signals ,Making me feel so uncomfortable, it was morning 9:30 am, Being in Mumbai I always felt safe and have never come across any such situation before, It’s called safe city, But if people like this can make someone like me who is local resident of this city go through this, I wonder what women coming from other city could have gone through, it’s not the city to be blamed but such people , Yes I got down abruptly in middle and no he wasn’t letting us get down until I forced voice, I said this where I could see Mumbai police around, later he started saying sorry, stating he was poor but excuse me, being poor doesn’t give you right to sexually harass someone, What if it would have been late evening , me alone in this same situation, I always heard about all this untill today I experienced this shit . Update – FIR is filled and I didn’t share this to feel victimised but to make all the women out there feel powerful and raise their voice when &where needed. Also up till he is not arrested I would suggest you guys to not board this taxi MH01 BT7115. #Shame #speakup #raiseyourvoice Update 2 – Person was arrested Objective behind – To create pressure among the officials to take up that action .!

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पुलिस ने एफआईआर और गाड़ी नंबर के आधार पर टैक्सी ड्राइवर को गिरफ़्तार कर लिया है। उसकी पहचान मोहम्मद फ़ारूक़ के रूप में हुई है। मोहम्मद फ़ारूक़ को छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल होने के बाद तीन अन्य महिलाएँ भी सामने आई हैं, जिनके साथ अलग-अलग मौकों पर फ़ारूक़ ने अभद्रता की थी। युवती ने सबूत के तौर पर पुलिस को 14 मिनट की एक वीडियो क्लिप भी सौंपी है। युवती ने अन्य महिलाओं व लड़कियों को ऐसे मौकों पर सतर्क रहने की सलाह दी।

‘किसी का भी बेटा हो, ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं, पार्टी से निकाल देना चाहिए’ – विजयवर्गीय मामले पर PM सख्त

भाजपा की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने इंदौर की घटना पर जबरदस्त नाराजगी जताई है। कैलाश विजयवर्गीय के ‘बल्लामार’ बेटे आकाश विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह की चीजें हरगिज बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दिन-रात इसलिए मेहनत नहीं कर रहे कि ऐसी हरकत की जाए। पीएम ने कहा कि किसी का बेटा होने का ये मतलब नहीं कि मनमानी की छूट होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि जेल से छूटने के बाद आकाश के स्वागत में जो लोग गए थे, उनको बाहर किया जाए, पूरी यूनिट भंग की जाए। पीएम मोदी ने बिना नाम लिए ही इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा, “किसी का भी बेटा हो, उसकी ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने स्वागत किया है, उन्हें पार्टी में रहने का हक नहीं है। सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए।”

बिहार के सारण से भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजीव प्रताप रूडी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री बहुत नाराज थे। उन्होंने कहा कि बदसलूकी करने, पार्टी को बदनाम करने या सार्वजनिक रूप से अहंकार दिखाने का हक किसी के पास नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में यह बात कही। साथ ही कहा कि ऐसी हरकतें स्वीकार नहीं है।”

यह मामला 26 जून का है। इसमें इंदौर नगर निगम के अधिकारी धीरेंद्र अपनी टीम के साथ एक जर्जर मकान को गिराने के लिए पहुँचे थे। स्थानीय लोगों ने जब इसकी सूचना अपने विधायक आकाश विजयवर्गीय को दी तो आकाश अपने समर्थकों को लेकर वहाँ पहुँचे और विवाद के बाद आकाश ने निगम अधिकारी की बल्ले से पिटाई कर दी। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। 

इस घटना के बाद पुलिस ने आकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शनिवार (जून 29, 2019) को उनको जमानत मिली और रविवार (जून 30, 2019) को वो जेल से बाहर आए। जेल से बाहर आने पर उनके कई समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया और हवा में फायरिंग भी की थी।

सार्वजनिक सड़क पर अपनी गाड़ी में होने पर भी वह सार्वजनिक स्थल ही माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (जुलाई 1, 2019) को अपने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि बिहार एक्साइज एक्ट 2016 के तहत, सार्वजनिक सड़क पर चलने वाला निजी वाहन भी ‘सार्वजनिक स्थान’ ही माना जाएगा। दरअसल, यह एक्ट राज्य में शराब के उपभोग पर प्रतिबंध लगाता है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के वाहन में शराब पीने वाले या नशे की अवस्था में पाए जाने वाले व्यक्ति को बिहार में अपराधी माना जाएगा।

दरअसल, बिहार में पूर्ण शराबबंदी है और अपीलकर्ता सतविंदर पर बिहार में एक निजी वाहन के अंदर शराब के नशे में पाए जाने का आरोप लगा था। सतविंदर जून 25, 2016 को कुछ लोगों के साथ पटना से झारखंड के गिरडीह जा रहे थे। वाहन जैसे ही बिहार के नवादा जिले में पहुँचा तो एक पुलिस चौकी पर उनका वाहन चेकिंग के लिए रोका गया। वाहन चेकिंग के दौरान इसमें से शराब या फिर कोई नशीली चीज तो बरामद नहीं हुई, लेकिन ब्रीद एनलाइजर टेस्ट में पाया गया कि वे नशे में थे।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने बिहार के एक्साइज ऐक्ट के प्रावधान को चुनौती दी थी लेकिन पटना हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज कर दी थी। जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह शराब नहीं पी रहा था और गिरफ्तारी के समय उसके वाहन से शराब की बोतल नहीं मिली। इसके साथ ही सतविंदर का कहना था कि वो निजी वाहन में सफर कर थे, इसलिए इस मुकदमे को रद्द कर देना चाहिए।

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने सतविंदर की दलील पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ये बात सही है कि निजी वाहन में बिना अनुमति के कोई प्रवेश नहीं किया जा सकता। इसकी अनुमति वाहन का मालिक ही दे सकता है। लेकिन, यदि वाहन सार्वजनिक स्थल पर खड़ा है तो पब्लिक के पास प्राइवेट वाहन को अप्रोच करने का अवसर होता है।