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कट्टरपंथियों ने दिल्ली में दुर्गा मंदिर तोड़ा: भाईचारा व एकता का उपदेश के पीछे छिपाई गई सच्चाई

दिल्ली के चाँदनी चौक क्षेत्र में स्थित दुर्गा मंदिर में दूसरे समुदाय द्वारा की गई तोड़-फोड़ के बाद मीडिया अचानक से उपदेशक की भूमिका में आ गया है। यह नहीं पूछा जा रहा है कि इस मामले में कितने आरोपितों की गिरफ़्तारी की गई और पुलिस ने क्या एक्शन लिया? मीडिया के लिए फतेहपुरी मस्जिद के मुफ़्ती द्वारा इस घटना की निंदा करना ज्यादा मायने रखता है। मीडिया इस घटना को लेकर असदुद्दीन ओवैसी के बयान दिखाने में व्यस्त है। मंदिर में किन लोगों ने तोड़-फोड़ मचाई, प्रतिमाएँ विखंडित की और भड़काऊ नारेबाजी की- यह स्पष्ट है। लेकिन फिर भी मीडिया आज सांप्रदायिक सौहार्द की बातें चला रहा है। भाईचारे की बात करना अच्छी बात है लेकिन दो अलग-अलग मौक़ों पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा।

आगे बढ़ने से पहले एक बार पूरे घटनाक्रम पर एक नज़र डाल लेते हैं। कई ताज़ा डेवलपमेंट्स हुए हैं और आपको शुरू से अंत तक इसे समझना ज़रूरी है। दरअसल, इतना सबकुछ होने के बाद भी स्थानीय हिन्दुओं ने शांति बनाए रखी और भावनाएँ आहत होने के बावजूद अपनी तरफ से किसी भी प्रकार के विवाद को जन्म नहीं दिया, यह अच्छी बात है। चावड़ी बाज़ार के हौज काजी में स्थित मंदिर में रविवार (जून 30, 2019) की रात दूसरे समुदाय के कुछ लोग घुस आए और उन्होंने तोड़-फोड़ मचाई। उन्होंने भगवान शिव, भगवान गणेश व अन्य देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित कर दिया।

घटना का वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें देखा जा सकता है कि मंदिर में प्रतिमाओं के आगे लगे गिलास तक को नहीं बख़्शा गया और उसे भी तोड़ डाला गया। इसके बाद दूसरे समुदाय के लोगों ने भड़काऊ एवं उत्तेजक नारे लगाए। उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्ला कर जता दिया कि ये महज एक छोटा सा विवाद नहीं है बल्कि एक मज़हबी उन्माद से ग्रस्त होकर सुनियोजित तरीके से किया गया कार्य है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, पार्किंग को लेकर हुए झगड़े ने बड़ा रूप ले लिया और फलस्वरूप ये घटना घटी। इसके बाद सोशल मीडिया पर गिरोह विशेष के जाने-पहचाने चेहरे सक्रिय हो गए और देखिए उन्होंने क्या किया?

जैसे ही पार्किंग वाली बात सामने आई, गिरोह विशेष ने दलील देनी शुरू कर दी कि यह तो अब सांप्रदायिक घटना नहीं है, जैसा कि बताया जा रहा है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई कि पार्किंग को लेकर हुए झगड़े को सांप्रदायिक है और मज़हबी उन्माद में हुई घटना बताया जा रहा है।

दरअसल, रविवार को आस मोहम्मद ने एक दुकान के बाहर अपनी स्कूटी पार्क करनी चाही, इसके बाद ईमारत के मालिक संजीव गुप्ता ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद मोहम्मद वहाँ से चला गया लेकिन कुछ ही देर बाद वह लौट भी आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मोहम्मद के साथ उसके समाज के और भी कई लोग थे, जिन्होंने संभवतः शराब पी रखी थी। उन्होंने गुप्ता की पिटाई की। यहाँ तक ये आपसी विवाद का मामला था जिसमें मोहम्मद द्वारा अपने ईमारत के सामने स्कूटी खड़ी की जाने पर गुप्ता ने आपत्ति जताई और बदले में मोहम्मद ने ‘अपने लोगों’ के साथ मिल कर गुप्ता को मारा-पीटा।

लेकिन, इसके बाद जो भी हुआ, वह मज़हबी उन्माद में किया गया वही कार्य था, जो पाकिस्तान जैसे देशों में होता रहा है। इसके बाद वही किया गया, जो कश्मीर घाटी के अलगावादी और आतंक समर्थक करते हैं। शायद इस विवाद का मंदिर से कुछ लेना-देना नहीं था लेकिन जिस समय मंदिर पर आक्रमण किया गया और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डाली गई, उसी क्षण इस घटना ने मज़हबी विवाद का रूप ले लिया। और हाँ, जिस तरह ‘अल्लाहु अकबर’ कह कर आत्मघाती हमले करने वाले आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता, यही नारे लगा कर मंदिर को तोड़ने वाले लोगों का भी कोई धर्म नहीं था।

यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया। यह कोई अचानक से हुई घटना नहीं थी। व्हाट्सप्प ग्रुप में कई भड़काऊ और उत्तेजक मैसेज शेयर किए गए। इसे कई लोगों तक पहुँचाया गया। समुदाय विशेष के एक व्यक्ति को मार डाले जाने की अफवाह फैलाई गई ताकि समुदाय के भीतर एक प्रकार का गुस्सा पैदा हो। यह सब जान कर लगता है कि किसी बड़ी सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी वारदात की तैयारी चल रही थी। आज मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय सांसद डॉक्टर हर्षवर्धन ने मौके का जायजा लिया और ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा:

“आज सुबह चाँदनी चौक के लाल कुँआ स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर के दर्शन किए। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से हुई तोड़फोड़ से मन व्यथित हुआ है। मैंने स्थानीय लोगों से बात कर मामले की पूरी जानकारी ली और उन्हें आश्वस्त किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दौरे पर मेरे साथ रहे डीसीपी व अन्य पुलिसकर्मियों को मैंने मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले असामाजिक तत्त्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि दोषियों को चंद घंटों में पकड़ लिया जाएगा। सभी से धैर्य व शांति बनाये रखने की अपील करता हूँ। क्षेत्र में कोई अन्य अप्रिय घटना न घटे इसके लिए किए गए सुरक्षा बंदोबस्त की भी समीक्षा की। संसद में व्यस्तता के कारण कल क्षेत्र का दौरा नहीं कर सका लेकिन पल-पल की जानकारी लेता रहा।”

डॉक्टर हर्षवर्धन ने प्राचीन दुर्गा मंदिर में दर्शन के बाद स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों से मुलाकात कर हौज काज़ी थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विश्वास जताया कि पुलिस अपेक्षित कार्रवाई करने में कोताही नहीं बरतेगी। लेकिन, अगर हम समुदाय विशेष के संगठनों व लोगों द्वारा किए जा रहे हालिया प्रदर्शनों को गौर से देखें तो पता चलता है कि कश्मीर की पत्थरबाज़ी का ट्रेंड इसके सिर चढ़ कर बोल रहा है। अलीगढ और मेरठ में तबरेज अंसारी की हत्या के विरुद्ध प्रदर्शन के नाम पर पुलिस से झड़प की गई और पत्थरबाज़ी की गई। जब ईद के दिन दिल्ली में मस्जिद के पास कार गुज़र गई, तब पत्थरबाज़ी की गई।

क्या किसी ने भी पीड़ित संजीव गुप्ता की पत्नी का दर्द जानना चाहा? जिस तरह से मारे गए आतंकियों के परिजनों के घर कैमरा दौड़ता है, क्या गिरोह विशेष ने पीड़ित की पत्नी के बयानों को हाइलाइट किया? नहीं। अभी भी डरी-सहमी बबिता गुप्ता इसी तनाव में डूबी हैं कि उनका परिवार इस ज़हर घुले माहौल में कैसे रह पाएगा? उनके घर में शराब की बोतलें और पत्थर पड़े हुए थे। दुर्गा मंदिर गली में बचे 30 हिन्दू परिवारों के भविष्य की चिंता क्या किसी पत्रकार को है? स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तो वहाँ इलाक़े में नाममात्र हिन्दू परिवार बचे हैं और ऊपर से उनके पूजा स्थलों को भी नहीं छोड़ा जा रहा।

मंदिर में आग लगाए जाने की बात भी सामने आई है। मंदिर के पर्दों को जला डाला गया। गली के लोग अभी भी दहशत के साये में हैं लेकिन नहीं, सांप्रदायिक विवाद है ही नहीं। ये तो पार्किंग का मामला है। मंगलवार के ‘नवभारत टाइम्स’ समाचारपत्र पर ग़ौर फरमाइए- “पुरानी दिल्ली में तनाव, पर मज़हब ने सिखाया आपस में बैर न रखना“, यह ख़बर कम और ख़बर को दबाने की कोशिश ज्यादा लगती है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि मस्जिदों में अगर कोई चींटी भी चीनी खाने आ जाए तो इसे अल्पसंख्यक हितों पर हमले के रूप में प्रचारित किया जाता है। मुख्यधारा की तरह गिरोह विशेष के अन्य मीडिया संस्थानों ने भी इसे पार्किंग को लेकर हुआ तनाव बताया।

मुख्यधारा की मीडिया ने भी घटना से ज्यादा घटना को छिपाने में विश्वास जताया

गिरोह विशेष की हमेशा कोशिश यह क्यों रहती है कि किसी सामान्य घटना को भी मजहब विशेष के ख़िलाफ़ वीभत्स अपराध के रूप में पेश किया जाए और एक समाज द्वारा इस्लामी नारे लगाते हुए हिन्दू पूजा स्थलों को तोड़ डाला जाए, फिर भी उसे छिपाया जाए? सवाल दिल्ली पुलिस से भी है कि जब घटना का वीडियो पूरी तरह वायरल हो चुका था और आरोपितों की पहचान मुश्किल नहीं थी, तब भी तुरंत कोई गिरफ़्तारी क्यों नहीं की गई?

एक और सुलगता हुआ सवाल है जो सोशल मीडिया से जुड़ा है। जब एक चोर को भीड़ ने मार डाला और उसका फायदा उठाते हुए कुछेक शरारती तत्वों ने उससे जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाना चाहा तो ट्विटर पर ‘No To Jai Shri Ram’ ट्रेंड कराया गया और इसे गिरोह विशेष का ख़ासा समर्थन मिला। जरा सोचिए, अगर ‘अल्लाहु अकबर’ बोल कर निर्दोष नागरिकों को मार डालने वाले आतंकियों के ख़िलाफ़ अगर ‘No To Allahu Akbar’ ट्रेंड करने लगे तो क्या यही लोग इसे अल्पसंख्यकों की आस्था पर हमले के रूप में नहीं देखेंगे? तब यह कहा जाएगा कि मज़हब विशेष की आस्था को निशाना बना कर ‘डर का माहौल’ पैदा किया जा रहा है। बहुसंख्यक हिंदुओं के इस देश में उनके भगवान राम को नकारने वाला ट्रेंड चलाए जाते हैं, वो भी 2-4 शरारती तत्वों की हरकतों के आधार पर।

आरोपितों की पहचान छिपाई जाती है, घटना की असली वजह छिपाई जाती है, पीड़ितों की पहचान छिपाई जाती है- यह सब एक ख़ास मामले में ही क्यों होता है जब आरोपित खास मजहब के हों और पीड़ित हिन्दू हों? मज़हबी एकता और भाईचारे का सन्देश तब क्यों नहीं दिया जाता जब भीड़ द्वारा किसी चोर की हत्या कर दी जाती है मुस्लमान निकलता है तो उसे लेकर हंगामा किया जाता है? क्या पुलिस भी खास आरोपितों के मामले में अतिरिक्त एहतियात बरतती है और त्वरित कार्रवाई से हिचकती है? वहीं अगर मामले इसके उलट हो या फिर ऐसा प्रतीत हो कि मामला इसके उलट है तो तुरंत एक पब्लिक परसेप्शन बनाया जाता है और त्वरित कार्रवाई होती है। यह सब कब तक चलेगा?

इस्लाम नहीं कबूलने पर बंधक बना शादीशुदा हिंदू महिला से 2 साल तक रेप: मुज्जफर पटेल, गुलशन शेख गिरफ्तार

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में इस्लाम नहीं कबूल करने पर एक शादीशुदा हिंदू महिला को बंधक बनाने और दो साल तक बलात्कार करने की घटना सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुज्जफर लतीफ पटेल और गुलशन शेख ने पीड़िता को जिंदा जलाने तथा उसके पिता की हत्या करने की धमकी देकर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़िता के मुताबिक मुज्जफर लतीफ पटेल ने एक सड़क से गुजरते वक्त उसे जबरन रोका और उसे तथा उसके पिता को हत्या की धमकी दी। इसके बाद उसे जबरन गुलशन शेख के घर ले गया और बंधक बनाकर रख लिया।

https://youtu.be/D-of6Dt4Vxk

पीड़िता के मुताबिक इसके बाद आरोपी उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव देने लगा। दोनों आरोपी धमकी देकर बीते दो साल से उसके साथ बलात्कार कर रहे थे। जब उसने इस्लाम कबूलने की बात नहीं मानी तो गुलशन शेख ने उस पर लतीफ के साथ शादी करने का दबाव बनाया। इससे इनकार करने पर आरोपितों ने केरोसिन छिड़ककर उसे जलाने तथा उसके पिता की हत्या करने की धमकी दी।

किसी तरह पीड़िता उनके चंगुल से भागने में कामयाब रही और सीधे राहुर पुलिस स्टेशन पहुँची। राहुर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

श्रीरामपुर के पुलिस अधीक्षक राहुल मदाने ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सब-इंस्पेक्टर सतीश सिरसाथ मामले की जाँच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं और मामले की पड़ताल जारी है।

‘कॉन्ग्रेस विधायकों के इस्तीफे में PM मोदी और अमित शाह सीधे तौर पर शामिल’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को लगे झटके के बाद सियासी घमासान तेज होता जा रहा है और बयानबाजी का दौर चरम पर है। इस बीच वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक आनंद सिंह और रमेश जरकीहोली के विधानसभा से इस्तीफा देने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का हाथ बताया है।

सिद्धारमैया ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “इसमें अमित शाह और प्रधानमंत्री सीधे तौर पर शामिल हैं। वो ताकत और पैसे का प्रलोभन दे रहे हैं। वो इस सरकार को गिराना चाहते हैं, लेकिन वो इसमें सफल नहीं होंगे। कर्नाटक सरकार को कोई खतरा नहीं है। दोनों विधायक भाजपा में शामिल नहीं होंगे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (जुलाई 1, 2019) को कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के दो विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई। पहले बेल्लारी जिले के विजयनगर से कॉन्ग्रेस सांसद आनंद सिंह ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद एक और कॉग्रेस विधायक रमेश जरकिहोली ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को अपना त्यागपत्र सौंपा। उनके इस्तीफे ने एक बार फिर उन अटकलों को बल देने का काम किया कि पार्टी के अंदर बगावत शुरू हो गई है।

दोनों विधायकों के इस्तीफा देने के बाद कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने बंगलुरु में अपने आवास पर बैठक बुलाई। वहीं, कर्नाटक बीजेपी के नेता व राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्‍पा ने मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को कॉन्ग्रेस के दोनों विधायकों के इस्तीफे पर बात करते हुए कहा कि भाजपा का इस इस्तीफे से कोई लेना देना नहीं है । उन्होंने कहा, “मैं पहले भी कहा चुका हूँ कि 20 से अधिक विधायक गठबंधन सरकार से असंतुष्ट हैं।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार को कमजोर करने अथवा गिराने का कोई प्रयास नहीं करेगी, लेकिन यदि सरकार स्वयं गिरती है तो इसमें वो कोई मदद नहीं कर सकते।

शराब पीने से रोकना महिला को पड़ा महंगा, पति ने लात-घूँसों से मारा, फिर कहा ‘तलाक, तलाक, तलाक!’

उत्तरप्रदेश में तीन तलाक का एक और मामला सामना आया है। यहाँ प्रदेश के सीतापुर इलाके में शराब पीने से मना करने पर बौखलाए पति ने अपनी पत्नी को तीन तलाक देकर, उसकी पिटाई की और फिर उसे घर से निकाल दिया।

मीडिया खबरों के अनुसार यह मामला सीतापुर कोतवाली लहरपुर क्षेत्र के लोखरिया पुर गाँव का है। जहाँ एक मुस्लिम महिला ने जब अपने पति को शराब पीने से रोका, तो उसे बदले में तीन तलाक कह दिया गया और साथ ही उसकी लात-घूसों व लाठी-डंडों से पिटाई भी हुई। इसके बाद उसे बेघर कर दिया गया।

अब पीड़ित महिला अपने 2 बच्चों के साथ दर-दर भटकने के लिए मजबूर हो रखी है। उसने कोतवाली लहरपुर में शिकायत दर्ज करके न्याय की गुहार लगाई है।

हालाँकि पुलिस द्वारा मामले को दर्ज कर लिया गया है, लेकिन महिला का कहना है कि वह थाने से तभी जाएगी जब उसके पति की गिरफ्तारी होगी।

अमर उजाला की खबर के अनुसार महिला ने बताया है कि उसका पति रोज रात को नशे में बुरी तरह धुत होकर घर पहुँचता था और उसे प्रताड़ित करता था। शराब पीने की आदत से उनके घर में कलह होती थी। शुक्रवार (जून 28, 2019) की रात भी वह नशे में ही घर पहुँचा था, ऐसे में जब उसकी पत्नी ने उसे नशा करने से मना किया तो बौखलाए पति ने उसे तलाक दे दिया और मार-पिटाई करके घर से भगा दिया।

मनचले युवक बुलवाने गए थे ‘जय श्री राम’, ‘ताऊ’ ने सुना दी रामायण की पूरी चौपाई

जय श्री राम का नारा सुनकर जबसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी असहज महसूस होनी शुरू हुई हैं, कुछ मनचले युवकों ने इसका बहाना बना लिया है। लेकिन ये शरारत उस वक़्त महँगी पड़ गई जब एक बुजुर्ग ने जय श्री राम तो नहीं कहा लेकिन पूरी चौपाई ही युवकों को सुनाकर ‘ट्रोल’ कर दिया। ये सुनकर युवक वहाँ से चुपचाप खिसक लिए।

सोमवार (जुलाई 01, 2019) को झारखंड के जामताड़ा से एक ऐसा मामला सामने आया है। आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ युवकों ने एक बुजुर्ग फल विक्रेता से जबरन जय श्री राम का नारा लगाने के लिए दबाव डाला। लेकिन दबाव डालने वाले उस समय हैरान रह गए जब उसने रामायण की चौपाई ही सुना दी। इसके बाद जबरन जय श्री राम का नारा लगवाने वाले युवकों के होश उड़ गए।

फल विक्रेता का ठेला हटवाना चाहते थे युवक

बुजुर्ग का नाम मोहनलाल है। रिपोर्ट्स के अनुसार युवकों ने मोहनलाल को दूसरे समुदाय का समझकर उनसे नारे लगाने को कहा। बुजुर्ग का कहना है कि युवकों ने कार से उतरकर पहले ठेले को हटाने के लिए कहा इसके बाद ‘जय श्री राम’ बोलने को कहा।

युवकों की इस फरमाइश पर मोहनलाल ने उन युवकों को रामायण की चौपाई सुना दी। बुजुर्ग ने कहा- “बैर न कर काहू सन कोई, राम प्रताप विषमता खोई।” चौपाई सुनते ही युवकों के होश उड़ गए और इसके बाद जब वहाँ भीड़ जुटने लगी, तो युवक वहाँ से भाग खड़े हुए। देखा जाए तो ‘जय श्री राम’ बुलवाने वालों के लिए फल विक्रेता मोहनलाल एक अच्छा सबक हैं।

इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँच गई और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने बताया कि कार सवार युवकों की तलाश की जा रही है।

भक्ति की शक्ति: RaGa के इस्तीफे के विरोध में पार्टी कार्यकर्ता ने की आत्‍महत्‍या की कोशिश

राहुल गाँधी के इस्‍तीफे से नाराज एक कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ने कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर फाँसी लगाकर आत्‍महत्‍या करने की कोशिश है। इससे वहाँ पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भावुक कार्यकर्ता ने आत्महत्या करने के लिए खुद को वहाँ एक पेड़ से लटका लिया। हालाँकि, मौके पर मौजूद लोगों ने समय रहते उसे नीचे उतार लिया। कार्यकर्ता बार-बार राहुल गाँधी से इस्‍तीफा वापस लेने की माँग कर रहा था। उसका कहना था, “राहुल गाँधी इस्‍तीफा वापस लें, नहीं तो मैं फाँसी लगाकर जान दे दूँगा।”

देश के कई हिस्सों से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के राहुल गाँधी के इस्तीफे के खिलाफ प्रदर्शन करने की खबरें सामने आ रही हैं। हाल में बिहार के कुछ कार्यकर्ताओं ने अपने खून से राहुल गाँधी को खत लिखकर आग्रह किया था कि वे इस्तीफा वापस ले लें।

लोकसभा में मिली करारी हार के बाद से ही राहुल गाँधी लगातार इस्तीफे की पेशकश कर रहे हैं। पार्टी की तरफ से राहुल गाँधी को मनाने के लिए कई स्तर पर कोशिशें जारी हैं। उन्हें कॉन्ग्रेस के आम कार्यकर्ता से लेकर वयोवृद्ध कॉन्ग्रेसी नेता तक समझाने की कोशिश कर रहे हैं। इन नेताओं में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत तक का नाम भी शामिल है। दोनों नेता बारी-बारी से हाल में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात कर चुके हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी बीते दिनों इनके खिलाफ नाम न लेते हुए गुस्सा जाहिर कर चुके हैं।

मजहबी नारे चिल्लाती, मंदिर तोड़ती भीड़ को मजहब बताने में शर्म क्यों आती है?

‘एक समुदाय के लोग’ मंदिर में घुस गए और तोड़फोड़ मचाई। वाह! कितना क्यूट वाक्य है। अंग्रेजी वाले और भी क्यूट लाइन्स लिखते हैं, ‘पीपल फ्रॉम अ कम्यूनिटी’। समस्या क्या है? जब भीड़ की एक निश्चित पहचान है, और तुम्हें पता है कि ये भीड़ एक खास कम्यूनिटी या समुदाय विशेष की है, तो फिर उसके नामकरण में समस्या क्यों?

कब तक मीडिया ऐसी बेहूदगी करता रहेगा? जब आरोपित मजहबी नाम वाला हो, जब भीड़ इस्लामी हो, तो ‘अ कम्यूनिटी’ या ‘समुदाय विशेष’ क्यों लिखा जाता है? आखिर ऐसा क्या विशेष है इस समुदाय में? एक विचित्र तर्क यह भी आता है अगर मीडिया ‘उसका मजहब लिखेगी तो साम्प्रदायिक तनाव बढ़ जाएगा।’ क्या बेहूदी दलील है!

मतलब, हिन्दू नाम वाले के हाथों चोर को मारा जाए तो उसमें ‘नो जय श्री राम’ (#NoJaiSriRam)आ जाते हैं, कठुआ में आठ हिन्दू नाम वाले अपराधी संलिप्त हों तो पूरा सनातन धर्म ही सवालों के दायरे में आ जाता है, त्रिशूल पर कंडोम लगा कर वायरल किया जाता है, और जो हिन्दू नहीं हैं वो भी ‘आई एम अ हिन्दू, आई एम अशेम्ड’ की तख्ती गले में टाँगे नाचने लगते हैं।

लेकिन, एक इस्लामी भीड़ मथुरा के भरत यादव की जान ले ले, मँगरू को तीन मजहबी चाकुओं से गोद दें, सरे राह प्रेम करने के लिए हिन्दू लड़के को कट्टरपंथी काट दे, दिल्ली में मंदिर पर ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाती एक भीड़ चढ़ाई कर दे, मौलवी मस्जिद के भीतर किसी बच्ची का रेप करे, बंगाल में लगभग हर जिले में दो समुदायों के दंगे हों, तो वहाँ मजहब के नाप का लोप हो जाता है। कहा जाता है कि शांति भंग हो जाएगी!

लेकिन शांति ही तो भंग वैसे भी हो रही है। एक फेसबुक पोस्ट समाने आया जिसमें हिन्दुओं पर लगातार होते रहे आक्रमणों को सीधे शब्दों में जताया गया है:

1000 साल पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
700 साल पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
30 साल पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
6 महीने पहले हमारे मंदिरों को तोड़ा गया
आज हमारे मंदिर को तोड़ा गया
फिर भी, हम ही बर्बर बहुसंख्यक हैं।

ये पोस्ट उन लाखों लोगों के मन की सामूहिक अभिव्यक्ति है जो यह कह रहे हैं कि हिन्दुओं की सहिष्णुता का फ़ायदा उठाते-उठाते भारत के कुछ लोगों का गिरोह पीड़ित को ही आक्रांता बताने पर तुला हुआ है। जिस तरह के नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं, उसके अनुसार आने वाले दिनों में, हो सकता है कि नई थ्योरी के अनुसार, बताया जाएगा कि गोरी, गजनवी, खिलजी, बाबर आदि तो किसी दूसरे देश में चिल कर रहे थे, उसे एक हिन्दू राजा ने अपने घोड़े से बाँध कर घसीटा था, और उसी अपमान का बदला लेने के लिए उसने भारत के तमाम मंदिरों को तोड़ा, गाँवों को उजाड़ा, नालंदा को आग लगा दिया, यहाँ की बहू-बेटियों का बलात्कार किया।

क्योंकि यही हो ही रहा है। एक आतंकी जब सेना द्वारा घेर कर मारा जाता है तो बताया जाता है कि वो तो बचपन से पढ़ने में तेज था, गालिब की शायरी सुनाता था, लेकिन एक दिन सेना के एक अधिकारी ने उसे कान पकड़ कर उठक-बैठक करने को कहा और वो आतंकवादी बन गया। धन्य हैं ऐसे माँ-बाप जो अपने बच्चों के आतंकी बनने को इस तरह के कुतर्क से जस्टिफाय करते हैं, और धन्य है हमारा पाक अकुपाइड पत्रकार गिरोह जो हर आतंकी के बाप के पजामे के नाड़े की लम्बाई निकाल लेता है और कहता है वो नाड़ा तो किसी हिन्दू टेलर ने सिला था।

यही वो दोगलापन है जिसके कारण मेनस्ट्रीम मीडिया के एक हिस्से को लगातार गालियाँ पड़ती हैं और वो निर्लज्ज होकर अपने मालिक के ‘बदनामी में भी तो नाम है’ वाले ध्येय वाक्य से चलते रहेंगे। आखिर एक आतंकी विचारधारा को, एक ऐसी भीड़ को जिसके लिए ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए मंदिर पर हमला बोलना सामान्य-सी बात है, उसको किस लिहाज से डिफेंड किया जा रहा है?

हर मजहबी आतंकी नहीं है, हर मजहबी मंदिर नहीं तोड़ रहा, लेकिन जो तोड़ रहे हैं वो कौन हैं? वो ‘तीन शब्दों वाला’ विशेष नारा किस मजहब का है? जिस आसानी से दो किशोरों के द्वारा बनाया विडियो, जिसमें एक लड़का दूसरे को ‘जय श्री राम’ बोलने कहता है, सारे हिन्दुओं के सर मढ़ दिया जाता है, वही सहजता, एक भीड़ के ‘मजहबी नारे’ चिल्लाने के बाद भी क्यों नहीं दिखाई जाती?

ये आतंकी भीड़ अपने आप को क्या समझती है? ये भीड़ और इस मजहब के वो लोग जो बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर बुक्का फाड़ कर अभी भी अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक खेलते रहते हैं, वो क्या भूल जाते हैं कि पीपल का एक पेड़ भी सनातन आस्था का प्रतीक है? वो क्या नहीं जानते कि मंदिर चाहे दो सौ फीट ऊँची हो, या दस फीट, वो सनातन आस्था का ही प्रतीक है, न कि उसकी ऊँचाई से आस्था कम या ज़्यादा हो जाती है?

फिर ये दोगले विचारक, ये बर्बाद लिबरपंथी, ये माओवंशी लेनिन की नाजायज कामपंथी वामभक्त औलादें किस हिसाब से हिन्दुओं के आरोपित होने पर, गले में तख्तियाँ लपेटे, अपने स्थान विशेष में छुपाई मोमबत्तियाँ फटाक से निकाल कर हैशटैग-हैशटैग करने लगते हैं, लेकिन हिन्दुओं की लिंचिंग पर वो जलती हुई मोमबत्तियाँ वापस अपने स्थान विशेष में रख लेते हैं? क्या जलन नहीं होती इन्हें? इतना दोगलापन क्या एक साथ हो जाने पर इनके दिमाग पर असर नहीं करती?

ये और कुछ नहीं है, ये समाज को गृहयुद्ध की ओर ढकेलने का कुत्सित प्रयास है। समुदाय के लोगों को बताते रहो कि तुम्हारे मजहब का एक चोर या कोई आतंकी भी मरे तो वो हिन्दुओं द्वारा तुम्हारे भीतर डर फैलाने का प्रयास है, जबकि तुम्हारे कट्टरपंथी भाई किसी की जान ले लें, तो वो बात इतनी सामान्य है कि उस पर चर्चा भी मत करो।

ये तो नहीं चलेगा। हमारे मंदिरों के ऊपर पत्थरबाजी, और उसके सामने खड़े हो कर ‘अल्लाहु अकबर’ की बात तो नहीं होगी। तबरेज चोर हो या पाँच वक्त का नमाजी, उसकी हत्या सही नहीं है, लेकिन उसको रोहित वेमुला बनाने वाले लोग जान लें, कि हत्या तो मंगरू की भी सही नहीं है, हत्या तो मथुरा के लस्सी विक्रेता की भी सही नहीं है।

इस आतंकी भीड़ को हिम्मत इन्हीं दोगले विचारकों से मिलती है क्योंकि वो जानते हैं कि उनका हर कुकर्म ट्विटर, फेसबुक या टीवी चैनल के स्टूडियो में बैठे किसी लिबरपंथी के द्वारा ‘समुदाय विशेष’ और ‘अभी इलाके में तनाव है’ के बीच भुला दिया जाएगा। इस भीड़ का एक चेहरा है, बिलकुल है, क्योंकि इस भीड़ का नारा वही है जो आईसिस का नारा है। इसके हाथों में वही पत्थर है जो कश्मीर के आतंकियों के बचाव में उतरे लोगों के हाथों में होता है। ये उतने ही बेखौफ हैं जितने बेखौफ वो आत्महंता आतंकी होते हैं जो देह पर बम बाँध कर बहत्तर हसीनों के योनि और स्तनों से लिपटने की ख्वाहिश पाले अपने परखच्चे उड़ा लेते हैं।

जब किसी विडियो में ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाने पर ये ज्ञानी लोग हमें बताते हैं कि ये एक धार्मिक नारे का वेपेनाइजेशन है, यानी नारे को हथियार बनाया जा रहा है, तो इन ज्ञानियों के यह भी तो बताना चाहिए कि मंदिर में घुसते, पत्थरबाजी करते, मूर्तियाँ तोड़ते उतरी भीड़ का नारा ‘अल्लाहु अकबर’ वेपेनाइज हुआ है या नहीं। ये नहीं बता पाएँगे क्योंकि इनके स्थान विशेष में दर्द होने लगता है।

अगर हमारे समय के लिबरल और छद्मबुद्धिजीवी इस तरह से सेलेक्टिव होते रहेंगे, वो लगातार एक लाइन पकड़ कर चलते रहेंगे, सारे हिन्दुओं के सर पर कुछ अपराधियों का अपराध बाँटेंगे लेकिन मजहबी भीड़ को फ्री पास दे देंगे, तो इनकी साख तो जाएगी ही, उसके साथ ही ‘सामाजिक सद्भाव’ नाम के शब्दांश कम से कम हिन्दू और दूसरे खास मजहब के संदर्भ में तो इस्तेमाल होने लायक नहीं रहेंगे।

दुर्भाग्य से तथाकथित गंगा-जमुनी तहजीब का वही हाल है जो वास्तव में इन दोनों नदियों का है। गंगा बह रही है, और यमुना वालों ने इतना कचरा जमा कर लिया है कि वो नाला बन कर सूखने के कगार पर है। यमुना में जो बह रहा है, वो भी काले रंग का अपशिष्ट पदार्थ है जो समाज का हिस्सा हो नहीं सकता। अपने दम पर गंगा इसे जिंदा नहीं कर सकती। जब तक समुदाय विशेष और उसके आतंक को डिफेंड करने वाले चिरकुट और लम्पट लोग अपनी आदत से बाज नहीं आएँगे, गंगा-जमुनी तहजीब आतंकियों के दुष्कृत्यों को ढकने का एक जरिया मात्र बन कर रह जाएगा।

‘मंगलसूत्र-सिंदूर वाली’ नुसरत जहां को ISKCON से न्यौता, रथयात्रा में होंगी विशेष अतिथि

तृणमूल सांसद और बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां इस बृहस्पतिवार (जुलाई 04, 2019) को कोलकाता में रथयात्रा के मौके पर विशेष अतिथि होंगी। निखिल जैन से शादी करने के बाद सिंदूर-मंगलसूत्र सहित ‘हिन्दू’ पहनावे में संसद पहुँचने वालीं नुसरत को पिछले कुछ दिनों में कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार होना पड़ा है। जहाँ देवबंद से पढ़े मौलाना असद कासिम ने सीधे-सीधे कह दिया कि शरीयत इस्लाम के बाहर शौहर ढूँढने की इजाज़त नहीं देती, वहीं सोशल मीडिया पर भी कई कट्टरपंथियों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया था। तब पलटवार करते हुए नुसरत जहां ने खुद को ‘नए समावेशी हिंदुस्तान’ का प्रतिनिधि बताया था।

ISKCON ने कहा शुक्रिया, नुसरत की रथयात्रा में शामिल होने की अपील

रथयात्रा की आयोजक गौड़िया वैष्णव संस्था ISKCON ने नुसरत जहां का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वह अन्य लोगों को आगे का मार्ग दिखला रहीं हैं। ISKCON के प्रवक्ता राधारमण दास ने इस आशय से ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने नुसरत का एक वीडियो भी अपलोड किया।

सोमवार (जुलाई 01, 2019) को रिलीज़ किए एक वीडियो में TMC सांसद नुसरत जहां रथयात्रा के आयोजन के लिए ISKCON को बधाई देने के साथ शहर के नागरिकों से उनके साथ इसमें शामिल होने की अपील करतीं हैं। ISKCON इसका आयोजन 1971 से करता आ रहा है। इस वर्ष मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी होंगी, जो इसका उद्घाटन करेंगी।

सामाजिक संदेश भी होगा

इस साल इस रथयात्रा का प्रयास भक्तों का ध्यान परिवारों से दूर वृद्धाश्रमों में जीवन काटने को मजबूर बूढ़े लोगों के प्रति युवाओं के कर्त्तव्य के प्रति आकर्षित करना भी होगा। कोलकाता में आयोजित होने वाली इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ (श्री कृष्ण), उनके बड़े भाई भगवान बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा के रथ को लाखों लोग खींचेंगे। अल्बर्ट रोड स्थित ISKCON मंदिर के पीछे हंगरफोर्ड स्ट्रीट से शुरू यह यात्रा शहर के सभी महत्वपूर्ण मार्गों से होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुँचेगी। यहाँ भगवान जगन्नाथ के दर्शन 11 जुलाई तक किए जा सकेंगे। 12 जुलाई को उत्तरायण शुरू होने के बाद रथ मंदिर में लौट आएँगे।

मंदिर में तोड़फोड़: AAP MLA इमरान हुसैन ने दिया मॉब का साथ, किसी को नहीं रोका – चश्मदीद का दावा

दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित हौजकाजी के एक मंदिर में पत्थर बरसाने और तोड़ फोड़ करने वाली इस्लामी भीड़ को आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन का समर्थन होने की बात सामने आई है। इस घटना के दौरान मूर्तियों को विखंडित कर दिया गया था और अल्लाहु अकबर के नारे भी लगाए थे। चश्मदीदों के मुताबिक विधायक हुसैन भी इस सांप्रदायिक भीड़ के समर्थन में मौके पर पहुॅंचे थे। फिलहाल इलाके में हालात सामान्य है, लेकिन पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुप्पी हैरान करने वाली है। टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार राज शेखर झा के अनुसार, इस मामले में 3 बदमाशों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनमें से एक कथित तौर पर नाबालिग है। राज शेखर ने बताया कि समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों के समर्थन और बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा होने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था।

खबर के मुताबिक, चांदनी चौक इलाके में लाल कुआँ में 30 जून को दोपहर 12 बजे के करीब इस्लामी भीड़ ने दुर्गा माता मंदिर पर धावा बोलकर मूर्तियों को विखंडित कर दिया। इस भीड़ में तकरीबन 300 से 400 लोग शामिल थे। जब स्थानीय हिंदुओं ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, तो इस्लामी भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया।

इस मामले में एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इसके मुताबिक, यह अकस्मात घटी घटना नहीं थी। जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि सुनियोजित तरीके से घटना अंजाम दी गई। बड़ी संख्या में दूसरे मजहब को इकट्ठा करने के लिए एक समुदाय विशेष के शख्स की मौत की झूठी खबर पहले व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए फैलाई गई। इससे जाहिर है कि इस क्षेत्र में हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की योजना पहले से ही बनाई जा रही थी।

इस बीच, ‘जन की बात’ के सीईओ प्रदीप भंडारी ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें एक चश्मदीद ने बताया कि समुदाय विशेष के नशे में धुत कुछ युवक उनके घर के नीचे इकट्ठा हो गए थे और जब आस-पास के लोगों ने उन्हें मंदिर के अंदर जाने से रोकने की कोशिश की तो उन्होंने करीब 400 लोगों को हमला करने के लिए बुला लिया। चश्मदीद का कहना है कि इस दौरान आप विधायक इमरान हुसैन भी वहाँ आए और उन्होंने इस्लामी भीड़ का समर्थन किया।

प्रदीप भंडारी ने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें मंदिर के पुजारी कह रहे हैं कि अगर दरवाजे बंद नहीं किए जाते तो वो लोग अंदर घुसकर सबकी हत्या कर देते। वो लोग लगातार पत्थर फेंक रहे थे और गालियाँ भी दे रहे थे।

पुलिस ने इस्लामी युवकों द्वारा मंदिर पर हमले की पुष्टि की है। केंद्रीय मंत्री और चांदनी चौक से भाजपा सांसद डॉ हर्षवर्धन ने मंगलवार (जुलाई 2, 2019) सुबह घटनास्थल का दौरा किया और शांति की अपील करते हुए घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस घटना को अंजाम देने वालों को माफ नहीं किया जा सकता। हर्षवर्धन का कहना है कि उन्हें बताया गया है कि पुलिस पहले से ही इस मामले में कार्रवाई कर रही है। दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और सजा दी जाएगी।

कोयला घोटाला: नवीन जिंदल सहित 5 के खिलाफ धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय करने का आदेश

दिल्ली की विशेष अदालत ने सोमवार (जुलाई 1, 2019) को कोयला खंड घोटाला मामले में उद्योगपति और कॉन्ग्रेस नेता नवीन जिंदल और उनकी कंपनी के ही चार पूर्व सहित वर्तमान अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का आदेश दे दिया है।

मध्य प्रदेश में अर्टन नॉर्थ कोयला खदान के आवंटन से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने जिंदल और चार अन्य के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है।

इस मामले में जिंदल के अलावा स्टील एंड पावर लिमिटेड के पूर्व निदेशक सुशील मारू, पूर्व उपप्रबंध निदेशक आनंद गोयल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रांत गुजराल और कंपनी की ओर से हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत अधिकारी डी एन अबरोल के खिलाफ आरोप तय किया जाना है। अदालत ने मामले में आरोपितों के ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से आरोप तय करने की तारीख़ 25 जुलाई तय की है।

जानकारी के लिए बता दें कि झारखंड अमरकोंडा मुर्गा कोयला खंड आवंटन मामले में कथित अनियमितताओं से संबंधित अन्य मामलों में पूर्व कोयला राज्य मंत्री दसारी नायारण राव और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ नवीन जिंदल को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार जनवरी 2007 में आरोपितों ने मध्य प्रदेश में कोल ब्लॉक का अधिकार पाने के लिए स्क्रीनिंग कमिटी के समक्ष गलत तथ्य दिए थे और गलत तरीके से लाभ पाने के कारण कोयला मंत्रालय को धोखे में रखा था, जिसके कारण कोल आवंटन मामले इन आरोपितों के नाम की सिफ़ारिश की गई है।