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2 पत्नियों के हत्यारे जमशेद को पुलिस ने किया गिरफ्तार, घटना के बाद से था फरार

कुछ दिन पहले दिल्ली में हुए दो मुस्लिम महिलाओं के मर्डर के बाद से ही फरार चल रहे आरोपित जमशेद आलम को आज (जुलाई 2, 2019) पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जमशेद ने बताया है कि उसकी दोनों पत्नियाँ इस्मत परवीन और जबना आपस में लड़ने के साथ-साथ उससे भी लड़ती थीं, जिस कारण वह काफ़ी परेशान हो गया था। इसलिए उसने पहले अपनी पहली पत्नी इस्मत का गला घोंटा और बाद में जबना को मारा।

घटना को अंजाम देने के बाद जमशेद घर बंद करके अपने बेटे के साथ बिहार चला गया था, लेकिन हफ्ते भर बाद जब जमशेद अपने किसी साथी से मिलने दिल्ली वापस आया तो पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

जमशेद आलम, जैतपुर के सौरभ विहार इलाके की गली नं-7 में अपनी 2 पत्नियों के साथ पिछले दो-तीन महीने से किराए के घर में रहता था। घर में 2 पत्नियों के अलावा जमशेद के साथ उसका 10 साल का बेटा भी रहता था।

घर से शव बरामद होने के बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने जमशेद को उसके घर में आखिरी बार 26 जून को देखा था। जबकि घटना का पता 27 जून की सुबह चला था। पुलिस तब से ही जमशेद की तलाश में जुटी हुई थी, लेकिन उन्हें कामयाबी एक हफ्ते बाद मिली।

चांदनी चौक दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले गिरफ्तार: 3 आरोपितों में 1 नाबालिग भी शामिल

दिल्ली के हौज काजी इलाके में दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ करने के मामले में पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपितों में से एक नाबालिग है, जबकि बाकी दोनों आरोपित बालिग बताए जा रहे हैं। घटना की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में यह तीनों मंदिर में तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं।

गौरतलब है, सोमवार (जुलाई 1, 2019) को पार्किंग विवाद को लेकर हुए झगड़े के बाद घटना ने सांप्रदायिक रूप ले लिया था। इस दौरान पहले पूरे इलाके में अफवाह फैलाई गई कि एक समुदाय विशेष के लड़के की मॉब लिंचिग हुई है और जबरदस्ती जय श्रीराम बुलवाया गया है। बाद में ‘संप्रदाय विशेष‘ की भीड़ इलाके में जमा हुई और उसने पहले मंदिर में फिर थाने में हंगामा किया।

मंदिर में हुई तोड़-फोड़ के बाद पूरे दिन इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन खबरों के मुताबिक शाम के समय लोग सुलह करने आमने-सामने आए और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम ने अपील की कि मंदिर को जो नुकसान हुआ, उसे मजहब विशेष वाले ठीक कराएँ।

इस घटना के बाद से मंदिर में हुई तोड़फोड़ की वीडियो बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिनमें समुदाय विशेष के लोग हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। 

दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा मे इस घटना पर आवाज़ उठाई और मंदिर में तोड़फोड़ की 2 वीडियो ट्वीट कर लिखा, “ये पाकिस्तान नहीं बल्कि दिल्ली के चावड़ी बाजार का हिन्दू मंदिर हैं। यह घटना कल की है, जब धर्म विशेष की भीड़ ने मंदिर में घुसकर वहाँ की मूर्तियों को तोड़ा है। यह काम बदमाशों या गुंडों ने नहीं बल्कि सैकड़ो स्थानीय लोगों की भीड़ ने किया है। उन्होंने अपने धर्म के नारे लगाते हुए मंदिर तोड़ा डाला। “

इस घटना के मद्देनजर 2 जुलाई की सुबह केंद्रीय मंत्री व चाँदनी चौक से सांसद हर्षवर्धन भी घटनास्थल पर पहुँचे।

उन्होंने यहाँ पहुँचकर इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताते हुए कहा, “यह घटना माफ़ी लायक नहीं है, मुझे बताया गया है पुलिस पहले से इस मामले पर कार्रवाई कर रही है, और गुनहगारों को जल्द अरेस्ट किया जाएगा। मैं लोगों से सौहार्द बनाए रखने की अपील करता हूँ।”

पैंट की चेन खोल कैब ड्राइवर फ़ारूक़ ने की अश्लील हरकत, 21 साल की लड़की ने शेयर किया Video

मुंबई में एक कैब ड्राइवर द्वारा महिला ग्राहक (पैसेंजर) के साथ अजीबोग़रीब व्यवहार करने की बात सामने आई है। 21 साल की युवती ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो डाला, जिसमें कैब ड्राइवर अश्लील हरकतें करता हुआ नज़र आ रहा है। पीड़ित युवती ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी देते हुए अपने पोस्ट में लिखा:

“ये शर्म की बात है। मैंने घंटों इस बारे में सोचा कि इस वीडियो को आप लोगों के साथ शेयर करना चाहिए या नहीं, लेकिन मैं अब इसे शेयर कर रही हूँ। इससे पहले कि आप जज करें कि मैंने कौन से कपड़े पहन रखे थे, मैं आपको बता दूँ कि मैंने नार्मल जीन्स-टॉप ही पहन रखा था। हम लोग सिद्धिविनायक मंदिर जा रहे थे। मैंने दादर से जाते समय इस टैक्सी को हायर किया, जो कि मेरे लिए सबसे बुरा निर्णय साबित हुआ। मेरे साथ मेरी माँ और बहन भी थीं। जैसे ही मैं उसकी टैक्सी में घुसी, ड्राइवर ने अपने पेंट की चेन खोल कर अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दी। उसने मुझे ग़लत निगाहों से घूरना शुरू कर दिया।”

“सुबह के 9.30 हो रहे थे। जहाँ भी ड्राइवर सिग्नल या अन्य कारणों से गाड़ी रोकता, वहाँ-वहाँ उसने अजीबोगरीब अश्लील हरकतें कर के मुझे असहज महसूस कराया। मुंबई में रहते हुए मैंने हमेशा ख़ुद को सुरक्षित महसूस किया है और मैं कभी भी ऐसी घटनाओं के चक्कर में नहीं पड़ी। अब मैं सोच रही हूँ कि अगर ऐसे लोग मेरे जैसी स्थानीय महिला को इस तरह असहज कर सकते हैं और मेरे साथ ऐसी हरकतें कर सकते हैं तो मैं सोच सकती हूँ कि बाहर से यहाँ आने वाले महिलाओं के साथ क्या गुज़रती होगी। दोष शहर का नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों का है।”

“मुझे कैब ड्राइवर की हरकतों के कारण यात्रा के बीच में ही टैक्सी रुकवा कर उतरना पड़ा। वह ड्राइवर मुझे उतरने देने के लिए भी तैयार नहीं था। जब मैंने ज़ोर से डाँटा, तब उसने गाड़ी रोकी और उतरने दिया। मैंने जब उससे पूछा कि आसपास मुंबई पुलिस से कैसे मिल सकती हूँ, तब उसने मुझसे माफ़ी माँगनी शुरू कर दी और बार-बार सॉरी बोलने लगा। उसने अपनी ग़रीबी का हवाला दिया। माफ़ कीजिए, लेकिन ग़रीबी आपको किसी के यौन शोषण का अधिकार नहीं देती। सोचिए अगर शाम या रात का समय होता तो मेरी क्या हालत होती? मैंने FIR दर्ज करा दिया है।”

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SHAME !!!! It took me hours to think if I should share this or not, but I am sharing it now, . (Before you judge me based on what I was wearing I was wearing normal jeans and top) We were on our way from Siddhivinayak temple, We took this local taxi( worst decision ever) taking my mom & sister to Nariman Point on my way from Dadar, This driver as soon as I got into this local taxi, opens his zip ,was staring at me objectifying& was stimulating his genitals ( I wish I could record that) every time he took halt on signals ,Making me feel so uncomfortable, it was morning 9:30 am, Being in Mumbai I always felt safe and have never come across any such situation before, It’s called safe city, But if people like this can make someone like me who is local resident of this city go through this, I wonder what women coming from other city could have gone through, it’s not the city to be blamed but such people , Yes I got down abruptly in middle and no he wasn’t letting us get down until I forced voice, I said this where I could see Mumbai police around, later he started saying sorry, stating he was poor but excuse me, being poor doesn’t give you right to sexually harass someone, What if it would have been late evening , me alone in this same situation, I always heard about all this untill today I experienced this shit . Update – FIR is filled and I didn’t share this to feel victimised but to make all the women out there feel powerful and raise their voice when &where needed. Also up till he is not arrested I would suggest you guys to not board this taxi MH01 BT7115. #Shame #speakup #raiseyourvoice Update 2 – Person was arrested Objective behind – To create pressure among the officials to take up that action .!

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पुलिस ने एफआईआर और गाड़ी नंबर के आधार पर टैक्सी ड्राइवर को गिरफ़्तार कर लिया है। उसकी पहचान मोहम्मद फ़ारूक़ के रूप में हुई है। मोहम्मद फ़ारूक़ को छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल होने के बाद तीन अन्य महिलाएँ भी सामने आई हैं, जिनके साथ अलग-अलग मौकों पर फ़ारूक़ ने अभद्रता की थी। युवती ने सबूत के तौर पर पुलिस को 14 मिनट की एक वीडियो क्लिप भी सौंपी है। युवती ने अन्य महिलाओं व लड़कियों को ऐसे मौकों पर सतर्क रहने की सलाह दी।

‘किसी का भी बेटा हो, ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं, पार्टी से निकाल देना चाहिए’ – विजयवर्गीय मामले पर PM सख्त

भाजपा की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने इंदौर की घटना पर जबरदस्त नाराजगी जताई है। कैलाश विजयवर्गीय के ‘बल्लामार’ बेटे आकाश विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह की चीजें हरगिज बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दिन-रात इसलिए मेहनत नहीं कर रहे कि ऐसी हरकत की जाए। पीएम ने कहा कि किसी का बेटा होने का ये मतलब नहीं कि मनमानी की छूट होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि जेल से छूटने के बाद आकाश के स्वागत में जो लोग गए थे, उनको बाहर किया जाए, पूरी यूनिट भंग की जाए। पीएम मोदी ने बिना नाम लिए ही इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा, “किसी का भी बेटा हो, उसकी ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने स्वागत किया है, उन्हें पार्टी में रहने का हक नहीं है। सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए।”

बिहार के सारण से भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजीव प्रताप रूडी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री बहुत नाराज थे। उन्होंने कहा कि बदसलूकी करने, पार्टी को बदनाम करने या सार्वजनिक रूप से अहंकार दिखाने का हक किसी के पास नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में यह बात कही। साथ ही कहा कि ऐसी हरकतें स्वीकार नहीं है।”

यह मामला 26 जून का है। इसमें इंदौर नगर निगम के अधिकारी धीरेंद्र अपनी टीम के साथ एक जर्जर मकान को गिराने के लिए पहुँचे थे। स्थानीय लोगों ने जब इसकी सूचना अपने विधायक आकाश विजयवर्गीय को दी तो आकाश अपने समर्थकों को लेकर वहाँ पहुँचे और विवाद के बाद आकाश ने निगम अधिकारी की बल्ले से पिटाई कर दी। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। 

इस घटना के बाद पुलिस ने आकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शनिवार (जून 29, 2019) को उनको जमानत मिली और रविवार (जून 30, 2019) को वो जेल से बाहर आए। जेल से बाहर आने पर उनके कई समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया और हवा में फायरिंग भी की थी।

सार्वजनिक सड़क पर अपनी गाड़ी में होने पर भी वह सार्वजनिक स्थल ही माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (जुलाई 1, 2019) को अपने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि बिहार एक्साइज एक्ट 2016 के तहत, सार्वजनिक सड़क पर चलने वाला निजी वाहन भी ‘सार्वजनिक स्थान’ ही माना जाएगा। दरअसल, यह एक्ट राज्य में शराब के उपभोग पर प्रतिबंध लगाता है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के वाहन में शराब पीने वाले या नशे की अवस्था में पाए जाने वाले व्यक्ति को बिहार में अपराधी माना जाएगा।

दरअसल, बिहार में पूर्ण शराबबंदी है और अपीलकर्ता सतविंदर पर बिहार में एक निजी वाहन के अंदर शराब के नशे में पाए जाने का आरोप लगा था। सतविंदर जून 25, 2016 को कुछ लोगों के साथ पटना से झारखंड के गिरडीह जा रहे थे। वाहन जैसे ही बिहार के नवादा जिले में पहुँचा तो एक पुलिस चौकी पर उनका वाहन चेकिंग के लिए रोका गया। वाहन चेकिंग के दौरान इसमें से शराब या फिर कोई नशीली चीज तो बरामद नहीं हुई, लेकिन ब्रीद एनलाइजर टेस्ट में पाया गया कि वे नशे में थे।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने बिहार के एक्साइज ऐक्ट के प्रावधान को चुनौती दी थी लेकिन पटना हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज कर दी थी। जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह शराब नहीं पी रहा था और गिरफ्तारी के समय उसके वाहन से शराब की बोतल नहीं मिली। इसके साथ ही सतविंदर का कहना था कि वो निजी वाहन में सफर कर थे, इसलिए इस मुकदमे को रद्द कर देना चाहिए।

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने सतविंदर की दलील पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ये बात सही है कि निजी वाहन में बिना अनुमति के कोई प्रवेश नहीं किया जा सकता। इसकी अनुमति वाहन का मालिक ही दे सकता है। लेकिन, यदि वाहन सार्वजनिक स्थल पर खड़ा है तो पब्लिक के पास प्राइवेट वाहन को अप्रोच करने का अवसर होता है।

फिर से खुलेंगी 1984 सिख नरसंहार से जुड़ी फाइल्स, कई नेताओं की परेशानी बढ़ी: गृह मंत्रालय का अहम फैसला

1984 सिख विरोधी दंगों की फाइलें फिर से खुलने वाली हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले को लेकर चल रही जाँच का दायरा बढ़ाते हुए यह अहम निर्णय लिया है। मंत्रालय ने स्पेशल जाँच टीम (SIT) को ऐसे सभी मामलों की फाइल्स फिर से खोलने की अनुमति दे दी है, जिनमें आरोपितों को या तो क्लीन चिट दे दी गई थी या फिर जाँच पूरी हो चुकी थी। अर्थात, अब सिख नरसंहार से जुड़े इन सभी मामलों की नए सिरे से जाँच होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि एसआईटी उस सभी मामलों की सूची बना रही है, जिसमें फिर से ट्रायल शुरू किया जाएगा अथवा जाँच फिर से शुरू की जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारी ने ‘द हिन्दू’ से कहा कि एसआईटी ने क़ानूनी सलाह लेने के बाद सिख नरसंहार से जुड़े उन मामलों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जिनमें आरोपितों को बरी कर दिया गया या फिर दोषमुक्त कर दिया गया। इन सभी मामलों में नए सिरे से जाँच शुरू की जाएगी। वर्ष 2015 में भाजपा के सत्ता संभालने के एक वर्ष बाद ही केंद्र सरकार ने एक एसआईटी का गठन किया था जो मुख्य रूप से दिल्ली क्षेत्र में सिखों के ख़िलाफ़ 1984 में हुई हिंसा के मामले में जाँच कर रही है।

3 सदस्यीय एसआईटी को इन दंगों से जुड़े वैसे गंभीर आपराधिक मामलों की जाँच का जिम्मा सौंपा गया था, जिनके लिए दिल्ली में मामले दर्ज किए गए थे। इसमें कई बंद मामलों को भी फिर से खोलने की बात कही गई थी। सबूत होने की स्थिति में फिर से नई चार्जशीट फाइल करने को भी कहा गया था। एसआईटी की जाँच के बाद नवंबर 2016 में एक आरोपित को फाँसी की सज़ा सुनाई गई। दिल्ली की एक अदालत ने महिपालपुर में 2 सिख युवकों की निर्मम हत्या के मामले में ये सज़ा सुनाई। इसी मामले में एक अन्य आरोपित को उम्रक़ैद की सज़ा दी गई। इस मामले को 1994 में ‘सबूत न होने’ के कारण बंद कर दिया गया था।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रतिनिधियों की बातें सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जाँच का दायरा बढ़ा दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि 1984 सिख विरोधी दंगे के वीभत्स रूप को देखते हुए इससे जुड़े सभी ऐसे गंभीर मामलों में जाँच फिर से शुरू की जाएगी, जिसे बंद कर लिया गया था, या फिर जाँच पूरी कर ली गई थी। इस मामले में गठित एसआईटी का कार्यकाल इसी वर्ष जुलाई की अंतिम तारीख को ख़त्म होने वाला है। विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मंत्रालय के इस निर्णय के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए परेशानियाँ खड़ी हो सकती हैं।

सिरसा ने दावा किया कि कमलनाथ का नाम सामने आने के बावजूद पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एक एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि ये एफआईआर कमलनाथ के घर से ही दर्ज की गई थी। ये मामला भी फिर से खोला जाएगा। दिसंबर, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक रिटायर्ड जज के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था, जो सिख नरसंहार से जुड़े 186 मामलों की जाँच कर रही है। कमिटी ने इस मामले में लोगों से भी सूचनाएँ एकत्रित की थी।

‘पतली गर्लफ्रेंड’ के मिलते ही पत्नी के मोटापे से हुआ परेशान, बोला- तलाक, तलाक, तलाक!

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सोमवार (जुलाई 1, 2019) को ट्रिपल तलाक का एक नया मामला सामने आया। यहाँ फरधान थाना क्षेत्र की रहने वाली शाहीन नाम की मुस्लिम महिला ने पसगवां थाना क्षेत्र में रहने वाले अपने पति पर आरोप लगाया कि उसने शाहीन को मोटी होने के कारण तलाक दे दिया।

पुलिस को दर्ज कराई शिकायत में शाहीन ने कहा है कि उनके पति ने उन्हें मोटी और अपने लायक न बताकर तलाक दिया। जिसके बाद ससुराल वालों ने भी उन्हें घर से निकाल दिया।

जानकारी के अनुसार शाहीन की 5 साल की एक बेटी है और वह जब भी अपनी बच्ची को लेकर ससुराल जाती है तो वहाँ उसके पति के घरवाले उसके साथ मारपीट करते हैं और तीन तलाक का हवाला देकर घर से निकाल देते हैं।

शाहीन का आरोप है कि उनके पति का किसी और दुबली औरत के साथ संबंध हैं इसलिए उन्हें मोटी कहकर तलाक दे दिया गया।

आज तक की खबर के अनुसार पीड़ित महिला ने बताया है, “मेरा पति मुझसे कहता है कि तुम बहुत मोटी हो और मुझे अच्छी नहीं लगती, मुझे पत्नी के तौर पर कोई दूसरी लड़की चाहिए इसलिए हम तलाक दे रहे हैं।” हालाँकि, शाहीन का कहना है कि वह इस तरह के तलाक को नहीं मानती हैं इसलिए अपने पति के खिलाफ थाने में केस दर्ज करवाने आई है।

बता दें कि इस मामले में लखीमपुर खीरी की एसपी पूनम के अनुसार महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस को भी जाँच के आदेश दे दिए गए हैं, जाँच के बाद आगे कार्रवाई होगी।

‘अगर अनुच्छेद 370 अस्थायी है तो भारत में जम्मू कश्मीर का विलय भी अस्थायी है’

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्ति की है। अमित शाह ने विपक्षी नेताओं को अनुच्छेद 370 ठीक से पढ़ने की नसीहत देते हुए इसे एक अस्थायी व्यवस्था बताया था। शाह ने कहा था कि इस अनुच्छेद की बात तो ख़ूब की जाती है लेकिन इसके लिए प्रयोग किया गया ‘अस्थायी’ शब्द को जानबूझ कर हाइलाइट नहीं किया जाता। अमित शाह ने जम्मू कश्मीर पर बात करते हुए कहा था:

“मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की नीति पर काम कर रही है। लेकिन, वहाँ जिसके भी मन में भारत-विरोध है, उसके अंदर डर पैदा होना चाहिए। शंका के बीज कॉन्ग्रेस ने रोपे हैं। जो भी जनादेश आया हमने माना। भाजपा के राज में कोई धाँधली नहीं है। राज्‍य में विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत तक होंगे। राज्‍य में चुनाव का समय चुनाव आयोग तय करेगा। हमारे समय में चुनाव आयोग आजाद है। हम टुकड़े-टुकड़े गैंग का हिस्‍सा नहीं हैं। हम जम्‍मू कश्‍मीर की आम जनता के ख़िलाफ़ नहीं हैं।”

अमित शाह के इस बयान पर पलटवार करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारूक़ ने कहा कि अगर अनुच्छेद 370 अस्थायी है तो जम्मू कश्मीर का भारत में विलय भी अस्थायी है। अब्दुल्ला ने कहा कि महाराजा ने जो विलय का निर्णय लिया, वह भी अस्थायी है। अब्दुल्ला ने दावा किया कि उस समय जनमत संग्रह की बात कही गई थी। जनमत संग्रह के जरिए जम्मू कश्मीर के लोगों को यह निर्णय लेना था कि वे पाकिस्तान की तरफ जाएँगे या फिर भारत के। पूर्व केंद्रीय मंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने पूछा कि अगर जनमत-संग्रह हुआ ही नहीं तो अनुच्छेद 370 हटाने की बात कैसे की जा सकती है?

बता दें कि भाजपा ने चुनाव के वक़्त भी अनुच्छेद 370 और 35A को मुद्दा बनाया था। पार्टी ने सत्ता में आते ही इसे हटाने का वादा किया था। हाल ही में भाजपा नेता राम माधव ने भी कहा कि मोदी सरकार इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस पर कश्मीर को मिले विशेषाधिकार का इस्तेमाल अपनी सहूलियत के लिए करने का आरोप लगाया। उन्होंने कश्मीर मामले में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर उन्होंने सरदार पटेल को जिम्मेदारी दी होती तो आज कश्मीर समस्या नहीं होती।

बता दें कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार प्रदान करता है। इसमें वर्णित प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में क़ानून बनाने का अधिकार तो है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रपति राज्य के संविधान को बरख़ास्त नहीं कर सकते। इस अनुच्छेद की वजह से कश्मीर में आरटीआई भी लागू नहीं है। इसके अलावा शहरी भूमि क़ानून भी वहाँ लागू नहीं होता। जम्मू कश्मीर का अपना अलग ध्वज है और वहाँ के निवासियों के पास दोहरी नागरिकता होती है। यहाँ विधानसभा का कार्यकाल भी 6 वर्षों का होता है।

भगवा ध्वज लहराना और नारे लगाना कोई अपराध नहीं: दलित उत्पीड़न पर हाईकोर्ट का अहम निर्णय

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक निर्णय देते हुए कहा है कि भगवा ध्वज फहराना दलित उत्पीड़न के अंतर्गत अपराध नहीं है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए एक मामले में आरोपित को जमानत देते हुए अदालत ने यह अहम फ़ैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि इस क़ानून के तहत ऐसा करना कोई अपराध नहीं है। जस्टिस आईए महंती और जस्टिस एएम बदर की खंडपीठ ने शशिकांत महाजन नामक व्यक्ति को जमानत देते हुए ये बातें कहीं, जिसके ख़िलाफ़ पुलिस में भगवा ध्वज लहराने को लेकर मामला दर्ज किया गया था।

पिछले साल इसी मामले में विशेष अदालत ने महाजन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज़ कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। जुलाई 2018 में हाईकोर्ट ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की। महाजन का पहले से ही मानना था कि उपर्युक्त क़ानून के तहत उनके द्वारा किया गया कार्य किसी भी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। उनके ख़िलाफ़ महज भगवा ध्वज लहराने और नारे लगाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

महाजन और कई अन्य लोगों के ख़िलाफ़ ठाणे के कल्याण में मामला दर्ज किया गया था। ये सभी भीमा-कोरेगाँव हिंसा के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। भीमा-कोरेगाँव में 2 जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। भीमा कोरेगाँव की पृष्ठभूमि यह है कि यहाँ दो सदी पहले पेशवा और अंग्रेजों के बीच एक युद्ध हुआ था, जिसके बाद मराठा साम्राज्य का विजय रथ रुक गया था। पेशवा की तरफ से बाजीराव द्वितीय ने मराठा सेना का नेतृत्व किया था। राष्ट्रवाद बनाम साम्राज्यवाद की इस लड़ाई को कई लोग जातीय चश्मे से देखते हैं और इसी की बरसी मनाते समय 2018 में हिंसा भड़क गई थी।

भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में वामपंथियों व नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले कई कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया था। महाजन भी इस हिंसा के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालाँकि, पुलिस ने अदालत में दलील दी कि इस अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। महाजन ने ‘जय भवानी’, ‘जय महादेव’ और ‘जय शिवराय’ जैसे नारे लगाए थे।

मस्जिद से निकली भीड़ ने किया बवाल व पत्थरबाज़ी, बंद कराई दुकानें: 600 लोगों पर मुक़दमा

मेरठ के बाद अब आगरा से बवाल की ख़बरें आई हैं। मेरठ की तरह आगरा में हुआ बवाल भी तबरेज अंसारी की भीड़ द्वारा हत्या के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ। आगरा के मंटोला में तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग के विरुद्ध जबरन दुकानें बंद कराई जाने लगी। हंगामेबाज़ों में अधिकतर ‘समुदाय विशेष’ के लोग शामिल थे। जबरन दुकानें बंद कराने के अलावा दुकानों में लूटपाट भी की गई। दुकानों में बोतलें फेंकी गईं। इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से पथराव हुआ। यह सब सोमवार (जुलाई 1, 2019) को तब शुरू हुआ, जब सैकड़ों की संख्या में समुदाय विशेष के लोग शहर की जामा मस्जिद के पास इकट्ठे हो गए।

उनकी योजना थी कि जामा मस्जिद से समाहरणालय तक पैदल मार्च निकाला जाए और फिर वहाँ पहुँच कर वरीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाए। लेकिन, वरिष्ठ अधिकारियों ने जामा मस्जिद पहुँच कर ही भीड़ से ज्ञापन ले लिया और उन्हें पैदल मार्च न करने की सलाह दी। इससे मुस्लिम समाज के युवा भड़क गए और प्रदर्शन करने पर उतारू हो गए। पुलिस के लाख रोकने के बावजूद वे पैदल मार्च की शक्ल में आगे बढ़ निकले। जब पुलिस ने बैरियर लगाया तो वे दूसरे रास्तों से कलेक्ट्रेट पहुँचने की कोशिश करने लगे। वो रास्ते में उपद्रव करते और बाजार बंद कराते चल रहे थे।

जब दुकानदारों ने दुकान बंद करने से मना किया तो उनसे लूटपाट की गई। एक मिठाई की दुकान में भी उपद्रवियों ने लूटपाट की। ख़ुद एसएसपी ने मौके पर पहुँच कर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने कहा है कि बिना अनुमति जुलूस निकालने, अफवाह फैलाने और पत्थरबाज़ी करने सम्बन्धी कई मामले दर्ज किए गए हैं। सोमवार को शाम 6 बजे तक पुलिस ने एहतियातन इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी। व्यापारियों द्वारा थाने में मुक़दमे दर्ज कराए गए हैं, जिसके आधार पर पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया है। 38 नामजद सहित 600 लोगों पर मुक़दमा दर्ज किया गया है।

बलवा करने, अफवाह फैलाने, पत्थरबाज़ी करने, लूटपाट करने और बिना अनुमति सभा करने सम्बन्धी कई मामलों में पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं। पुलिस का ख़ुफ़िया तंत्र भी इस मामले में फेल हो गया क्योंकि आगरा में तबरेज अंसारी की हत्या के विरुद्ध कई दिनों से गुस्सा सुलग रहा था और इंटरनेट पर भड़काऊ चीजें पोस्ट कर के लोगों को उकसाया जा रहा था। जामा मस्जिद पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी कम लगाई गई थी, जिसे उपद्रवियों के हंगामे के बाद बढ़ाया गया। पुलिस अगर पहले से सतर्क रहती तो मस्जिद के पास लोगों की भीड़ जुटने से रोका जा सकता था।

मंटोला में बवाल की ख़बरों के बाद आसपास के क्षेत्र के व्यापारी भी डर गए और उन्होंने अपनी-अपनी दुकानें बंद कर लीं। पुलिस के समझाने के बाद उन्होंने दुकानें खोलीं। पुलिस को मिश्रित आबादी वाले इलाक़ों में लगातार भ्रमणशील रहने के निर्देश दिए गए हैं। 6 मुक़दमों में एक मुक़दमा मोहम्मद ज़ाहिद ने भी दर्ज कराया है। जूता फैक्ट्री चलाने वाले ज़ाहिद ने आरोप लगाया है कि उसके समाज के लोगों ने जबरन फक्ट्री बंद कराने की कोशिश की और धमकियाँ दीं। मंटोला में पिछले एक दशक में लगभग 24 बवाल हो चुके हैं। इरफ़ान सलीम, शिराज कुरैशी, महमूद ख़ान, राहत अली, नदीम नूर, जुहैर ख़ान, हाजी बिलाल और तालिब शहजाद सहित कई लोगों पर मुक़दमे दर्ज किए गए।